चॅप्टर 939सी
अवी-फिर क्या हुआ
पूनम-मैं अपनी सहेली के यहाँ जाकर पढ़ाई करने लगी
अवी-और ज्योति बुआ
पूनम-मेरी माँ घर पे अंकल को बुला के पैसे कमाने लगी
अवी-आगे क्या हुआ
पूनम-एक दिन मैं हमेशा की तरह अपनी सहेली के यहाँ गयी थी पढ़ाई करने , माँ ने सन्नी के स्कूल जाते ही मुझे पढ़ाई करने को भेज दिया
अवी-जल्दी क्यूँ भेज दिया
पूनम-क्यूँ कि मेरी माँ मेहता अंकल के साथ सेक्स करने वाली थी ,मेहता अंकल हमारे कॉलोनी मे रिच आदमी थे ,वो पानी की तरह पैसा उड़ाते थे , मेरी माँ को एक बार मे 2 लाख कमाने का रास्ता दिखाया ,,, मेहता अंकल ने माँ को एक दिन के 2 लाख ऑफर किए , 2 लाख का नाम सुनते माँ के आँख पैसो से बंद होगी
अवी-एक चुदाई के 2 लाख
पूनम-मेहता अंकल बहुत शौकीन टाइप के इंसान थे, वो माँ के साथ वाइल्ड सेक्स करना चाहते थे, और अपने 2 दोस्तो के साथ मिलके ग्रूप सेक्स करना चाहते थे , माँ को कोई फरक नही पड़ रहा था कि ग्रूप वाइल्ड सेक्स करने से,उनको 2 लाख दिख रहे थे ,
अवी-फिर क्या हुआ
पूनम-पापा ड्यूटी पे, सन्नी स्कूल मे और मैं सहेली के घर गयी थी, और माँ मेहता अंकल और उनके दोस्त के साथ बेड रूम मे वाइल्ड सेक्स करने मे बिज़ी हो गयी
अवी-वाइल्ड ग्रूप सेक्स
पूनम-हाँ , इसके लिए कोई तैयार नही होता पर माँ ने 2 लाख देखते ही हाँ कर दिया, माँ को मेहता अंकल ने बेड से रस्सी से बाढ़ दिया और माँ को पेन करके सेक्स करने लगे ,
अवी-फिर क्या हुआ
पूनम-उस दिन स्कूल से सन्नी को जल्दी छुट्टी मिल गयी ,और वो घर आ गया , इस बात से माँ को पता नही था वो मस्ती मे डूबी हुई थी, सन्नी ने घर आके गेट पे नौक किया तो डोर नही खुला , माँ पे सेक्स का नशा हावी हो चुका था
अवी-तो सन्नी ने क्या किया
पूनम-सन्नी ने ज़्यादा डोर नौक नही किया और पीछे का डोर चेक किया तो वो भी बंद था ,सन्नी को लगा कि माँ बाहर गयी होगी तो वो बाजू वाली आंटी के घर चला गया , आंटी के घर खेलते हुए वो छत पे चला गया , छत पे जाते ही सन्नी को हमारे छत को डोर खुला दिखा तो आंटी की छत से हमारे छत पे चला गया
अवी-ज्योति बुआ अपनी मस्ती मे थी
पूनम-हाँ , सन्नी छत से होता हुआ घर मे आया तो उसे माँ के कमरे से चीखने की आवाज़ सुनाई दी , सन्नी ने माँ के बेडरूम के पास जा कर आवाज़ सुनी तो वो माँ की चीखने की आवाज़ थी , सन्नी ने की खोल से अंदर देखा तो माँ को रस्सी से बाधा हुआ था और मेहता अंकल छड़ी से माँ के गंद पे मार रहे थे , माँ चिल्ला रही थी, मेहता अंकल हंस रहे थे , चुदाई ख़तरनाक हो चुकी थी , फिर भी मेहता अंकल मज़ा ले रहे थे मेरी माँ के चूतड़ लाल करके
अवी-ये देख तो सन्नी डर गया होगा
पूनम-सन्नी तो बहुत डर गया , उसे लगा मेहता अंकल माँ को मार डालेंगे , उसे कुछ समझ नही आ रहा था ऐसे मे उसे मेरी याद आ गयी ,वो भागते हुए घर से निकल गया मुझे बताने के लिए कि माँ को मेहता अंकल मार रहे है
अवी-उसे शोर मचाना चाहिए था
पूनम-ऐसी हालत मे छोटे बच्चों को क्या समझ मे आएगा , वो तो रोते हुए मुझे बुलाने की भाग रहा था
अवी-और
पूनम दीदी -उसपे डर,रोना इतना हावी हो गया कि उसे रोड पे चल रही कार दिखाई नही दी , वो जल्द से जल्द मेरे पास आना चाहता था ,पर उसकी चीख मेरे पास पहुँच गयी , एक कार ने सन्नी को उड़ा दिया , कार से टक्कर हुई सन्नी की पर सन्नी का डर , उसकी ऐसी हालत मे ये आक्सिडेंट चोट पहुँचाने के लिए काफ़ी था
अवी-सन्नी के साथ ये सब हुआ , सन्नी तो अपनी माँ को बचाने के लिए आपकी मदद माँगने आ रहा था
पूनम-हाँ पर मैं उसकी मदद नही कर पाई , मुझ तक उसकी चीख पहुँच गयी , शोर सराबा सुन कर कॉलोनी वाले जमा हुए तो मैं भी वहाँ गयी , सन्नी को खून मे लथपथ देख कर मैं बेहोश हो गयी
कॉलोनी वाले सन्नी को हॉस्पिटल ले गये , सन्नी का ऑपरेशन स्टार्ट हो गया , माँ को सन्नी के आक्सिडेंट के बारे मे पता चला तो वो गाउन पहन कर हॉस्पिटल मे आ गयी , मेहता अंकल भी माँ के साथ हॉस्पिटल आ गये
अवी-मेहता अंकल क्यूँ आए
पूनम-ऐसी हालत मे मदद हर कोई करता है, मेहता अंकल ने भी की, सन्नी का ओप्रेशन स्टार्ट हुआ , सन्नी को अद्रुनि चोट ज़्यादा लगी थी, उसकी इच्छा शक्ति कम पड़ रही थी, ऑपरेशन नाकामयाब हुआ और सन्नी हमे छोड़ कर चला गया , अपनी माँ को बचाते हुए हमे छोड़ कर चला गया
इतना बोल कर कमरे मे शांति छाई रही
मैं ने पूनम दीदी को हिम्मत दी
फिर पूनम दीदी खुद बोलना शुरू किया
पूनम-तुम ही बताओ , मेरी माँ की वजह से सन्नी नही रहा
अवी-मैं क्या कहूँ , ये सुनकर मैं तो शॉक्ड हो गया
पूनम-मैं तो सदमे मे चली गयी , सन्नी के साथ हमारी हसी कहीं गायब हो गयी , पापा को यकीन नही हो रहा था कि सन्नी हमे छोड़ कर चला गया , माँ भी गुम्सुम सी हो गयी , सब कुछ अंधेरे मे चला गया
पापा रात भर जागते रहे, उनको नींद नही आ रही थी, माँ रोती रहती थी ,मैं दोनो को संभालने की कोशिस कर रही थी,मेरे बाय्फ्रेंड ने मेरी बहुत मदद की( उस वक्त तक वो मेरा बाय्फ्रेंड नही था पर उसको मैं पसंद थी तो उसने मेरी बहुत मदद की उसके बाद ही हमारा प्यार शुरू हुआ) , मुझे हिम्मत देते हुए माँ और पापा को संभालने को कहा
पापा ने तो ड्यूटी पे जाना भी बंद कर दिया जिस से उनको नोटीस आने लगे कि जॉब जाय्न करो , ऐसे मे मैं ने पापा से बात की , पापा को नीद ना आने से वो जॉब पे जाने की हालत मे नही थी, फिर फाइनल.नोटीस आ गया , अगर पापा ने हिम्मत छोड़ दी तो हमारा क्या होगा , तो मैं ने उनके ऑफीस मे बात की उनको रिक्वेस्ट की , मेरे पापा का रेकॉर्ड क्लियर होने से उन्हो ने मेरी बात मान ली पर उनकी हालत देखते हुए उनको दूसरी जगह सिफ्ट करने का सोचा ,, उस वक्त सिर्फ़ नाइट शिफ्ट मे एक जगह खाली थी वहाँ ड्यूटी लगा दी , और पापा का डैमोशन करवा कर नाइट शिफ्ट मे लगा दिया ,
पापा ना किसी से मिलते और ना किसी से ज़्यादा बात करते, रात मे ड्यूटी करते और दिन भर सोते रहते
अवी-मैं ने देखा था , हमसे ज़्यादा बात नही की थी जब हम वहाँ आए थे
पूनम-मैं ने कई बार पापा से बात की पर वो एक फीकी स्माइल करके बात टाल देते ,इसी लिए वो मेले मे भी नही आए थे
अवी-और ज्योति बुआ उनका क्या हुआ
पूनम-माँ भी घर मे क़ैद रहने लगी , वो सब छोड़ दिया माँ ने ,
अवी-ज्योति बुआ को लगा होगा कि उनकी वजह से सन्नी का आक्सिडेंट हुआ
पूनम-मेरे सिवा किसी को नही पता कि सन्नी का आक्सिडेंट कैसे हुआ , वो तो सन्नी के जाने के गम से सब भूल गयी
अवी-पर आपको कैसे पता चला
पूनम-डॉक्टर मिले थे मुझे कुछ दिनो बाद , डॉक्टर ने कहा कि सन्नी ऑपरेशन से पहले कुछ बोलने की कोशिस कर रहा था
अवी-क्या कहा था सन्नी ने
पूनम-डॉक्टर ने कहा कि साफ सुनाई नही दिया पर "माँ" " मेहता" "मार" ये कुछ वर्ड सुनाई दिए , मैं डॉक्टर की बताई हुई बातों को मिलाने का कोशिस करने लगी
उसमे मेरे बाय्फ्रेंड ने मेरी मदद की , उसने कहा कि मैं मेहता अंकल के पास जाउ और उनको कहूँ की सन्नी के आक्सिडेंट के दिन आपने क्या किया वो मुझे पता है
मेरे बाय्फ्रेंड की बात सही थी , मैं सीधे मेहता अंकल के घर चली गयी ,मेहता अंकल भी उस दिन से थोड़े अपसेट हो गये थे
मुझे अपने यहाँ देख कर मेहता अंकल चौंक गये
मैं ने सीधे बात की , मेरी बात सुनते ही मेहता अंकल ज़मीन पर बैठ गये , वो रो रहे थे
मैं ने उनको कहा कि अब रोने से क्या फ़ायदा
मेहता-बेटी मुझे ऐसा ही लग रहा था कि सन्नी के आक्सिडेंट की वजह हम है , लोगो ने जो बताया कि सन्नी रोते हुए भाग रहा था तभी मैं समझ गया था कि वो हमे देख कर रो रहा था
पूनम-वो मेरी तरफ आ रहा था
मेहता- सन्नी को लगा कि मैं तुम्हारी माँ को मार रहा हूँ इसी लिए वो तुमसे मदद माँगने आ रहा था , ताकि तुम सन्नी की मदद कर सको
मेरी माँ को मेहता अंकल क्यूँ मार रहे थे ऐसा सन्नी ने समझा
पूनम-सन्नी ने क्या देखा था
मेहता - तुम्हारी माँ पैसो के लिए सेक्स करती है ,उस दिन मैं तुम्हारी माँ के साथ था ,सेक्स मे मज़ा आए इस लिए मैं तुम्हारी को थप्पड़ मार रहा था और सन्नी को लगा कि मैं तुम्हारी माँ को मार डालूँगा
मेहता अंकल की बात सुनते मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गयी
मुझे तो यकीन नही हो रहा था कि मेरी माँ ऐसा काम कर सकती है
अवी-आपको यकीन कैसे आया मेहता अंकल की बातों पे
पूनम-मेहता अंकल ने माँ के साथ खिचे हुए कुछ फोटो दिखाए और जलाने को कहा
फोटो देखते ही मैं तो मेहरा अंकल को थप्पड़ मार रही थी पर उनको तो सन्नी के आक्सिडेंट से पहले चोट लग गयी थी,उनको बहुत पछतावा हो रहा था
उनको रोता हुआ देख कर मैं ने थप्पड़ नही मारा , पर माँ को मैं छोड़ूँगी नही उनकी वजह से सन्नी हमे छोड़ कर चला गया
मैं मेहता अंकल के पास से माँ से बात करने जाने वाली थी मेहता अंकल ने रोक लिया
अवी-क्यूँ रोका
पूनम-मुझे बताने के लिए कि मुझे क्या करना चाहिए
मेहता- बेटी तुम अपनी माँ से इस बारे मे बात मत करना
पूनम-उनको मेरे इस सवाल का जवाब देना होगा कि वो ऐसा क्यूँ कर रही थी
मेहता - बेटी ग़लती मेरी भी है , पर तुमसे बड़ा होने के नाते बता रहा हूँ कि , सन्नी के जाने से तुम्हारे पापा और माँ टूट चुके है ऐसे मे तुमने सन्नी के आक्सिडेंट का सच बताया तो वो बिखर जाएँगे , वो जीते जी मर जाएँगे
पूनम-मरने दो, मेरो माँ की वजह से मेरा भाई मुझे छोड़ कर चला गया
मेहता- तुम सच बता डोगी तो क्या होगा, तुम्हारे पापा जो थोड़ा बहुत सम्भल चुके है उनको कितना बड़ा झटका लगेगा, तुम्हारी माँ खुद को गुनहगार समझ कर कुछ कर बैठेगी , तुम्हें अपने घर को संभालना होगा , समझदारी से फ़ैसला लेना ,
पूनम-आप भी गुनहगार हो आपकी बात क्यूँ सुनू
मेहता- बेटी , किसी अपने बड़े को बताना वो भी यही कहेगा जो मैं ने तुम्हें बताया है , सन्नी के जाने का दुख मुझे है , और मैं यहाँ से जा रहा हूँ , हमेशा के लिए, मैं तुम्हारा सामना नही कर पाउन्गा , हो सके तो मुझे माफ़ करना
मेहता अंकल की बातों ने मुझे सोचने पे मज़बूर किया
मैं ने मेहता अंकल की बात अपने बाय्फ्रेंड को बताई तो उसने भी मेहता अंकल की बात को सपोर्ट किया
मैं ने घर जाकर देखा तो माँ बदल चुकी थी
सिंपल से कपड़े पहनने लगी , घर से बाहर कदम नही रखती ,
घंटो सन्नी के कमरे मे बैठी रहती थी
ऐसे मे मैं उनको सच बता देती तो वो स्यूयिसाइड कर लेती
अपनी फॅमिली के बारे मे सोच कर मैं चुप रही
और उस राज़ को अपने अंदर दफ़न कर दिया
अवी-ज्योति बुआ ने रंडीपना बंद किया
पूनम-हाँ , अपनी सहेलियो से मिलना भी बंद किया
अवी-तो ज्योति बुआ बदल गयी
पूनम-हाँ, और मामा ने माँ को हिम्मत दी ,मामी ने राज को स्वेता के साथ कुछ दिनो के लिए हमारे यहाँ भेज दिया ताकि राज को देख कर सन्नी की याद ना आए
अवी-पूजा बुआ बहुत अच्छी है
पूनम-हाँ , मेरी हिम्मत बढ़ाने मे मामी ने मेरी बहुत मदद की, मुझे घर संभालने के टिप्स दिए , और काफ़ी दिनो तक मेरे साथ रही
अवी-तो राज और स्वेता दीदी आपके यहाँ कुछ दीनो के लिए रहने आ गये
पूनम-हाँ, राज तो छुट्टियाँ ख़तम होते ही वापस गया पर स्वेता यहीं रुक गयी मेरे साथ, और यही पढ़ाई करने लगी जिस से मुझे सुख दुख शेर करने के लिए सहेली मिल गयी
अवी-स्वेता दीदी ज़िम्मेदारिया अच्छे से उठा लेती है
पूनम-हाँ स्वेता ने मेरी बहुत मदद की , फिर सीतल भी यहाँ आ गयी जिस से माँ को अच्छा लगने लगा , और इतने लोगो के होने से मुझे लगा कि माँ अब वापस वही ग़लती रिपीट नही करेंगी
अवी-फिर ऐसा क्या हुआ की ज्योति बुआ फिर से रंडी बन गयी
पूनम-ये सब फिर से तब शुरू हुआ जब तुम हमारे यहाँ आए थे चाची की डेलिवरी के लिए
अवी-हमारी वजह से हुआ
पूनम-कुछ हद तक ,पर माँ की ग़लती है
अवी-कैसे ज्योति बुआ वापस रंडी बनी
पूनम-तुम्हारे आने से 1 महीने पहले जब मैं कॉलेज से घर आई तो माँ को उनकी वही पुरानी सहेली के साथ देखा जिस ने माँ को रंडी बनने का आइडिया दिया
उनको देखते ही मुझे तो गुस्सा आया
मैं ने अपने मोबाइल पे रिकोडिंग स्टार्ट करके मोबाइल माँ के पास टेबल पे रख दिया
उनकी बात ख़तम होते ही मैं ने रेकॉर्डिंग सुनी तो माँ को उनकी सहेली वापस रंडी बनने को कह रही थी
पर माँ ने मना किया
माँ के मना करने से मैं खुश हो गयी
पर उनकी सहेली के बातें माँ के दिमाग़ मे घूम रही थी,
ये ग़रीबी , इस तरह सिंपल रहना , उस बात पे वो सोचने लगी
मैं ने कुछ दिन माँ पे नज़र रखी पर मुझे सब ठीक लगा
इसी बीच मैं ने उनकी सहेली की रेकॉर्डिंग उनके हज़्बेंड को दी , ताकि वो मेरी माँ से दूर रहे
पर उसके हज़्बेंड को तो पैसे मिल रहे थे इससे कुछ प्राब्लम नही थी
पर अच्छी बात ये थी कि माँ सुधार गयी थी
जिस से मैं अपने कॉलेज मे बिज़ी हो गयी