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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 1015

सुमन 2

शालिनी इस इंतज़ार मे थी कि जयसिंघ की किसी भी तरह नेहा के सामने ले जाए ताकि या तो पता चले कि आग कितनी लगी है

शालिनी को लगा कि नेहा के मा बनते जयसिंघ नेहा को मिलने जाएगा

पर ऐसा नही हुआ , जयसिंघ नेहा से मिलने नही गया

पर नेहा और कोमल की फोटो देख कर जयसिंघ के आँख के आँसू बता रहे थे कि जयसिंघ का दिल पत्थर का नही है

जयसिंघ को सही तरीके से हॅंडल किया जाए तो सब ठीक हो सकता है

बस ऐसा कुछ हो जाए कि जयसिंघ और नेहा आमने सामने आ जाए

ये कैसा होगा ये शालिनी ने सोच लिया

शालिनी हर महीने पिताजी को खत लिख कर जयसिंघ और शहर3 के बारे में बता देती थी

पिताजी को हर महीने अवी की फोटो भेज देती जिस से पिताजी को अच्छा लगता

माजी को भी अपनी बहू पर नाज़ था

शालिनी की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम थी

ऐसे एक दिन शालिनी ने खत मे वो लिखा जिसे सुनकर माजी खुश हो गयी

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नेहा नीता के शादी के बाद तो जैसे घर सुना सुना हो गया था

नेहा थी तब तक घर मे मस्ती मज़ाक चलता था

माजी को भी नेहा की मस्तिया अच्छी लगती थी

नेहा का परेशान करना सबको अच्छा लगता था

नेहा नीता के ससुराल जाते ही पिताजी और माजी अकेले पड़ गये

पूजा भी अपने ससुराल वापस चली गयी

नेहा नीता के जाने के बाद पिताजी कुछ दिन तक स्वेता सिस्टल के साथ अपना दिल लगाए हुए थे

पर पूजा के जाते ही पिताजी और माजी अकेले पड़ गये

तीनो बेटियो की शादी हो गयी , बहू भी शहर3 चली गयी ऐसे मे पिताजी की हस्ती खेलती ज़िंदगी जैसे थम सी गयी थी

घर मे बस पिताजी माजी और छोटू रह गये

अगर अवी रहता तो पिताजी की लाइफ इतनी बेरंग नही होती

पर पिताजी और माजी खुश थे अपनी बेटियो के बारे में सुनकर

नीता ने जिस तरह खुद की संभाला और समझदार बन गयी ये देख कर पिताजी को यकीन नही हो रहा था कि ये हमारी नीता है

नीता की शादी कैसे हुई

कोई तय्यार नही था इसके लिए

ना नीता को सास ससुराल थे ना कोई ननद देवर था

नीता और जतिन ने एक दूसरे का साथ देते हुए अपने घर को संभाल लिया

पिताजी को तो अपनी बेटियो पे नाज़ था

नीता ने अपने दम पे अपनी छोटी सी दुनिया नेहा के साथ सुरू की

नेहा के घर मे तो सास ससुर थे फिर भी उस घटना के बाद नेहा ने भी एक पॉज़िटिव शुरुआत की

सब कुछ पीछे छोड़ कर नयी शुरुआत की

नीता का सपना भी पूरा हुआ ,

शादी के बाद नेहा और नीता का घर एक दूसरे को लग कर था

नीता तो यही चाहती थी

माजी को अपनी बेटियो की क़ाबलियत देख कर सुकून मिला

हर तरफ से अच्छी खबर मिल रही थी

पूजा नेहा नीता तीनो एक ही शहर2 मे थे जिस से तीनो एक दूसरे के साथ थी

पर यहाँ पीछे रह गया था छोटू

छोटू की वजह से माँ का दिल तो लगा रहता था पर पिताजी के पास ना उनकी बेटियाँ थी ना पोते पोती थी ,

ऐसे मे पिताजी अपना दिल लगाने के लिए हवेली जाने लगे

ठाकुरजी के साथ थोड़ी बहुत मस्ती करते थे

नेहा की डेलिवरी गाँव मे करने की जगह सुरेश ने शहर2 मे की ,

पर नेहा को मदद मिले इस लिए माजी नीता जी घर जाकर 2महीने रही जब तक नेहा माँ नही बनी

ऐसा करने से नेहा को मदद मिल गयी

पर पिताजी माजी के बिना कैसे रहते

पर रहना तो पड़ेगा ना , अब बच्चो की शादी हो गयी

पिताजी माजी को जाने नही दे रहे थे

पर माजी ने खुद की कसम दी

माजी का दिल भी नही कर रहा था पिताजी से दूर जाने का

पर बच्चो के लिए ये सब तो करना पड़ता है

माजी के जाते घर मे दो खुले सांड़ घूमने लगे

एक पिताजी और दूसरा छोटू

पिताजी तो खेतो और हवेली मे जाते

जिस से छोटू को पूरी आज़ादी मिल गयी

छोटू तो घर मे जैसा चाहे वैसा रहता

छोटू तो कुछ लड़कियो को घर मे लाने लगा

माजी होती तो वो छोटू को ऐसा नही करने देती

ये सब इस लिए हो रहा था कि घर मे एक औरत नही थी

घर मे एक औरत का होना कितना ज़रूरी था ये माजी भूल गयी थी

पर शालिनी को ये बात पता थी

घर मे जब तक एक औरत नही होंगी तब तक वो घर नही बल्कि तबेला बन कर रह जाता है

ये सब माजी को पता था पर इनको कभी पूजा के पास जाना पड़ा तो कभी नेहा के यो कभी नीता के पास रहना

माजी को तो लगा कि पिताजी घर को संभाल लेंगे

शालिनी ने इस बात पे भी नज़र लगाकर रखी

वो थी ही ऐसी बहू कि सबका ध्यान रलती थी

नेहा को बेटी होते पिताजी तो सीधे नेहा के पास आ गये

और नेहा की बेटी को प्यार करने लगे

पिताजी के खुशी का कोई ठिकाना नही था

उनकी प्यारी बेटी को कोमल बेटी हुई थी

पिताजी की खुशी डबल शालिनी ने की

एक हाथ मे कोमल और दूसरे हाथ मे अवी

पिताजी को यही तो चाहिए था

माजी की आँख तो जयसिंघ को ढूँढ रही थी पर वो कही दिखाई नही दिया

शालिनी ने सबको विश्वास दिलाया कि वो सब ठीक कर देगी

पिताजी को तो उनका पोता पोती मिल गयी

ये खुशी के पल जल्दी ख़तम हो गये

शालिनी शहर3 वापस चली गयी और पिताजी को माजी के साथ गाँव आना पड़ा

पर उसके बाद नीता के बच्चे को देखने आई तब भी पिता जी ने शालिनी को 1 महीने के लिए रो क लिया

उसके बाद छोटू की शादी के बाद नीता ने राजेस और लीना को जानम दिया नेहा ने कविता की जनम दिया और उसके बाद पूजा ने एक बेटे

को जनम दिया

शालिनी ऐसे बहाने ढूँढती रहती कि उसको सबसे मिलने जाने को मिले

पिताजी तो हर महीने की शुरुआत मे शालिनी के खत का इंतज़ार करते

माजी को भी इसी का इंतज़ार था

और इस बार जो खत आया उस से पिताजी और खास करके माजी खुश हो गयी

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माजी- बहू का खत आया कि नही

पिताजी-जा रहा हूँ पोस्ट घर ,

माजी- जल्दी जाइए ना , अवी कितना बड़ा हो गया होगा

पिताजी- तुमसे ज़्यादा मुझे जल्दी है अपने पोते की फोटो देखने की

माजी- हमारी बहू कितनी समझदार है , हमे खुश रखने के लिए हर महीने अवी की फोटो भेजती है और साथ मे वहाँ क्या हुआ वो भी बताती है

पिताजी- वो तुम्हारी बहू होंगी मेरी तो बेटी है

माजी- मेरी भी बेटी है शालिनी

पिताजी- अच्छा, शालिनी को मैं ने ढूँढ निकाला था

माजी- मैं ने भी मदद की थी , मुझे जयसिंघ से झूठ बोलने को कहा था आपने

पिताजी- पर उस झूठ से आज सब खुश है

माजी- बस जयसिंघ बात को समझ पाता तो

पिताजी- जयसिंघ को जाने दो , देखा नही शालिनी बहू ने नेहा और नीता की लाइफ बना दी

माजी- अपने पति के खिलाफ जाकर ऐसा कदम उठाना , बहादुरी का काम है , मुझसे तो नही होता

पिताजी- शालिनी ने ये साबित कर दिया नेहा की शादी मे की नेहा उसकी ननद नही बहन है

मसजी- आजकल की बहू तो सास ससुर की घर से निकाल देती है , पर हमारी बहू तो देवी है

पिताजी- हाँ , नेहा के लिए जो शालिनी ने किया वो मैं कभी नही भूल सकता

माजी- अब क्या यही बाते करेंगे आप

पिताजी- हमेशा बात तुम सुरू करती हो

मसजी- जब भी शालिनी का नाम आता है तो वो बाते अपने आप याद आती है

पिताजी- शालिनी मे कुछ बात है , देखा नही नेहा के माँ बनते ही वो आ गयी पर जयसिंघ नही आया ,,

माजी- कैसे सब संभालती होंगी शालिनी

पिताजी- पता नही जयसिंघ कैसा रखता होगा मेरी बेटी को

मसजी- बहू ने कहा था कि कोमल की फोटो देखते ही जयसिंघ की आँख मे आँसू आए थे

पिताजी- हाँ , और जयसिंघ ज़्यादा गुस्सा होता वो फोटो फेक देता पर उसने ऐसा नही किया

माजी- जयसिंघ बुरा नही है ,

पिताजी- शालिनी उसके साथ है फिर तुम क्यूँ डर रही हो

माजी- शालिनी जयसिंघ के साथ उसी लिए तो चैन से साँस ले पा रही हूँ

पिताजी- अब मैं जाऊं या कुछ बताना बाकी है

माजी- जाइए , और बहू का खत लेकर आना

पिताजी- खत नही आया होगा तो

माजी- तो आपको बाहर सोना पड़ेगा

पिताजी- फिर तो खत लाना ही होगा

और पिताजी शालिनी का खत लाने चले गये

शालिनी ने पिछले खत मे कहा था कि वो इस बार कुछ ऐसा लिख कर भेजेगी कि माजी खुश हो जाएगी

माजी को तो बस अब उस खत का इंतज़ार था

बहू किस खुश खबरी की बात कर रही थी
 
फ्लॅशबॅक 1016

सुमन 3

माजी को शालिनी के खत का इंतज़ार था

माजी उत्तेजित हो गयी कि शालिनी किस खुश खबरी के बारे में बात कर रही थी

पिताजी पोस्ट ऑफीस से खत लेकर आ गये

पिताजी से पहले माजी ने खत छिन कर पढ़ना स्टार्ट किया

पिताजी- ये क्या कर रही हो

माजी- मुझे पढ़ना है , बहू ने मेरे लिए खत भेजा है

पिताजी - तो पढ़ कर सूनाओ ऐसे अकेली मत पढ़ो

पर माजी ने खुद खत पढ़ लिया , खुश हो गयी

पिताजी- क्या लिखा है इतनी खुश क्यूँ हो

माजी- बहू को हमारी हर खुशी का पता है

पिताजी- क्या लिखा है बहू ने

माजी- बहू ने लिखा है कि घर बिना घर की लक्ष्मी का अच्छा नही लगता

पिताजी- सॉफ सॉफ कहो

माजी- मैं तो अपनी बेटियो के घर जाती हूँ तो घर पे कोई तो चाहिए ना

पिताजी- मैं हूँ ना ,घर पे

माजी- देख लिए , मेरे ना रहते घर का क्या हाल किया था .

पिता जी -तो

माजी- शालिनी कह रही है कि छोटू बिगड़ने से पहले

पिताजी- छोटू के बिगड़ने से पहले

माजी- आप भी ना , शालिनी बहू ने कहा कि जल्द से जल्द छोटू की शादी कर देनी चाहिए ताकि , माजी के नेहा के पास जाते ही घर पे कोई

रह सके घर का ध्यान रकनेवको , छोटू का ध्यान रखने को , आपका ध्यान रखने को

पिताजी - ये तो शालिनी बहू ने अच्छा सोचा है

माजी- और मुझे भी यही लग रहा था कि छोटू की शादी कर देनी चाहिए कब से आपको कह रही थी की छोटू की शादी करवा दो

पिताजी- तुम यही चाहती हो , बहू यही चाहती है तो देर किस बात की है, मुझे भी लगता है कि छोटू की शादी होंगी तो वो अपनी ज़िमेदारी समझ लेगा , और काम करने लग जाएगा

माजी- आप को तो मेरे बेटे की परवा ही नही है

पिताजी- क्या मतलब

माजी- जैसे जयसिंघ के लिए शालिनी को ढूँढ निकाला वैसे छोटू के लिए अच्छी जीवन साथी ढूँढना होंगी

पिताजी- ढूँढने की क्या ज़रूरत है

माजी- क्या मतलब

पिताजी- तुम्हें बताया था ना कि एक लड़की को मैं ने छोटू के लिए देख रखा है

माजी- कौन है कैसी है वो

पिताजी- मेरे पुराने दोस्त की बेटी सुमन ,

माजी-कैसी है वो

पिताजी- शालिनी जैसी तो नही है , पर सुलझी हुई है , शांत , जैसी तुम्हें चाहिए

माजी- क्या वो छोटू के लिए ठीक रहेगी

पिताजी- छोटू के लिए सुमन ही अच्छी रहेगी , मैं ने तो शालिनी के वक्त ही छोटू के लिए सुमन के बारे में सोच लिया था

माजी- तो हम जल्दी बात करते है सुमन के माता पिता से

पिताजी- पहले छोटू से पूछ लेते है

माजी- छोटू मेरी हर बात मानता है

पिताजी- फिर भी छोटू से बात करेंगे , जैसी जयसिंघ से की थी ,

माजी- छोटू से मैं बात करूँगी

पिताजी- और मैं सुमन के पिताजी को खत भेज देता हूँ कि हम आ रहे है

शालिनी के खत से माजी खुश थी

और पिताजी को भी इस से खुशी मिल जाएगी

छोटू भी सुधर जाएगा

और घर को एक बहू मिल जाएगी .

घर मे बहू आएगी तो शालिनी को भी थोड़ी बहुत मदद मिल जाएगी

शालिनी को तो माजी दिल से सुक्रिया कह रही थी

छोटू इस बात से अंजान अपने दोस्तो के साथ गाँव मे घूम रहा था

छोटू जब दोपेहर मे खाना खाने घर आया तो माँ ने बात छेड़ दी

छोटू- माँ खाना बहुत टेस्टी बना है

माजी- आराम से खा , इतनी जल्दी क्या है

छोटू- मुझे अपने दोस्त के पास जाना है

माजी- अभी तो उनसे मिलके आया है

छोटू- भूक लगी इस लिए आया था , मेरे दोस्त की माँ तो कह रही थी यही खाना खा ले , पर मुझे तो तेरे हाथ का खाना पसंद है

माजी- कब तक मेरे हाथ का खाना खाएगा

छोटू- ऐसे क्यूँ बोल रही हो माँ

माजी- देख ना , नेहा नीता थी तो मुझे थोड़ी मदद मिल जाती थी पर उनके जाने से सारे काम मुझे अकेली को करने पड़ते है , थक जाती हूँ मैं

छोटू- मुझे बता दो क्या करना है , मैं मदद कर दूँगा

माजी- तू औरतों के काम करेगा

छोटू- तो क्या हुआ , मेरी माँ को आराम तो मिलेगा ना

माजी- कितना ख़याल रखता है तू मेरा

छोटू- माँ , सच मे तुम थक जाती हो

माजी- हाँ , कपड़े धोने घर का काम करना खाना बनाना , बर्तन धोना , ये सब अब मेरे अकेले से नही होगा

छोटू- तो क्यूँ ना पूजा दीदी को कुछ दिनो के लिए यहा बुला लिया जाए

माजी- वो तो कुछ दिन के लिए आएगी

छोटू- फिर नेहा को बुलाएँगे उसके बाद नीता को

माजी- वो क्या अपना घर छोड़ कर आएगी

छोटू- ये भी तो उनका घर है

माजी- हाँ पर अब उनका घर वहाँ है

छोटू- तो मैं क्या करूँ तुम ही बताओ

माजी- मैं जो कहूँगी करेगा

छोटू- तुम्हें आराम मिले इसके लिए तो कुछ भी करूँगा

माजी- तो तू शादी कर ले , घर मे बहू आ जाएगी तो मुझे आराम मिलेगा

छोटू- शादी , मुझे अभी नही करनी शादी

माजी- क्यू नही करनी तुझे शादी

छोटू- अभी तो मेरे खेलने के दिन है

माजी- तो क्या हुआ , शादी के बाद भी अपने दोस्तो के साथ खेल लिया कर

छोटू- मैं तो अभी छोटा हूँ शादी के लिए

माजी- मत कर शादी , कर लूँगी मैं सारे काम , जब बीमार पड़ जाउन्गी तब रोते रहना

छोटू- माँ कोई दूसरा रास्ता नही है

माजी- नही , तेरी शादी हो जाएगी तो घर मे बहू आ जाएगी,

छोटू- अगर तुम्हारी बहू ने तुम्हें परेशान किया तो , जैसे सब करती है

माजी- ऐसे किसी से थोड़ी करवाउंगी तेरी शादी , जैसे तुम्हारी भाभी को ढूँढ निकाला था तेरे भैया के लिए वैसे तेरे लिए भी प्यारी दुल्हन ढूँढ निकालूंगी

छोटू- भाभी जैसी चाहिए मुझे

माजी- शालिनी जैसी ही ढूँढ निकाली है तेरे लिए

छोटू- क्या मतलब ढूँढ निकाली है

माजी- तेरे पिताजी को एक लड़की पसंद है , उसी को देखने जाएँगे

छोटू- मतलब आपने पहले सब फाइनल किया था

माजी- नही रे , तेरे बिना , तुझे पूछे बिना कैसे तेरी शादी का सोच सकते है

छोटू- तो ये सब क्या है , आपने तो लड़की भी ढूँढ ली है

माजी- तुझे पता है ना , तेरी भाभी के वक्त इतने परेशान हो गये थे पिताजी , इस लिए तेरे लिए पहले से एक लड़की देख ली है तेरे पिताजी ने

छोटू- तो आपने लड़की देख ली

माजी- नही , सिर्फ़ तेरे पिताजी ने देखी है ,

छोटू- पर ये अचानक शादी के बारे में कैसे बात सोची

माजी- तेरी शालिनी भाभी ने कहा कि उनको तेरी शादी मे नाचना है

छोटू- भाभी ने कहा , फिर तो मेरी एक शरत है

माजी- क्या

छोटू- भाभी मेरी शादी मे आएगी और 1 महीना यही रुकेगी

माजी- सिर्फ़ भाभी चाहिए

छोटू- भैया और अवी भी आने चाहिए

पिताजी बाहर से अंदर आ गये

पुटजी- छोटू ये तूने अच्छी बात कही

माजी- मैं समझी नही ,आप क्या बोल रहे है

पिटाज़ू- छोटू ने क्या कहा और शालिनी भी यही कह रही थी

माजी- कि उसकी शादी मे भैया भाभी भी आने चाहिए

छोटू- वो नही आएँगे तो मैं शादी नहीं करूँगा

पिताजी- तुम सोचो , छोटू के ऐसा कहने पे जयसिंघ को गाँव मे आना ही होगा

माजी- आपने सही सोचा , नेहा के शादी के सस्मय जो हुआ उसके बाद जयसिंघ यहाँ आएगा नही , पर छोटू कहेगा तो जयसिंघ को आना ही हो गा

पिताजी- और बहू जयसिंघ को मना लेगी यहाँ आने के लिए , बहू ने एक तीर से दो शिकार करने का सोचा है

माजी- देखा आप मेरे बेटे को क्या क्या बोलते थे , आज छोटू ने कितना अच्छा आइडिया दिया जयसिंघ को गाँव लाने का

पिताजी- अब छोटू बड़ा हो रहा है , देखना मेरे बाद छोटू इस घर को संभालेगा , है ना छोटू

छ्होटी- जी पिताजी

माजी- बेटा किसका है

छोटू- आपका

पिताजी- तो तू शादी करने को तय्यार है ना

छोटू- हाँ

पिताजी-तो मैं लड़की वालो को हाँ कर दूं

छोटू- माँ कह रही थी पहले हम देखेंगे

पिताजी- ठीक है , तो हम अगले हफ्ते चले जाएँगे ,

माजी- आपने सबको बता दिया

पिताजी- अभी नही , पहले छोटू को हाँ करने दो

माजी- उसके बाद

पिताजी- उसके बाद छोटू को शहर3 भेजेंगे

छोटू- वहाँ मैं क्यूँ जाउ

पिताजी- अपनी शादी की पहला न्यौता अपने भैया को देना , और ये कहना कि वो नही आएँगे तो तू घोड़ी नही चढ़ेगा

माजी- छोटू तू जाएँगा ना अपने भैया भाभी के पास

छोटू- हाँ , उनको वही बोलूँगा जो पिताजी ने कहा है

पिताजी- छोटू तू अगर जयसिंघ को गाँव मे लाया तो तेरी मा बहुत खुश होंगी

छोटू- हाँ , पता है मुझे

माजी- छोटू जा शादी के सपने देखना सुरू कर

छोटू- माँ अब तो मुझे छोटू मत कहो मेरी शादी हो रही है

माजी- तुझे छोटू कहती हूँ तो अच्छा लगता है , और मैं तुझे प्यार से कहती हूँ

पिताजी- छोटू सही कह रहा है ,अब इसको छोटू बोलना बंद कर दो

माजी- अब तो खुश है ना

छोटू- बहुत खुश , पर शादी के बाद आपको ही मुझे खाना खिलाना होगा

माजी- तू अभी ऐसा बोल रहा है , शादी के बाद तो बीवी के पल्लू के नीचे छुपा रहेगा

छ्होयू- माँ तुम भी ना

पिताजी- तुम बाते करो मैं ठाकुर को बोलके आता हूँ

और पिताजी को छोटू और शालिनी का आइडिया अच्छा लगा

छोटू कहेगा तो जयसिंघ ज़रूर आएगा गाँव मे

बस छोटू ने वही करना चाहिए जो वो कहेंगे

बहू ने भी यही सोचा होगा

और बहू को पता है छोटू के कहने के बाद क्या करना होगा
 
फ्लॅशबॅक 1017

सुमन 4

छोटू शादी करने को तय्यार हो गया

छोटू की शादी होंगी तो सारी ज़िम्मेदारी जैसे पूरी हो जाएगी

सबके घर बस जाएँगे

माजी को छोटू के शादी के सबसे ज़्यादा टेन्षन थी

माजी छोटू की शादी करके अपने यकीन को झूठा साबित करना चाहती थी

छोटू की लाइफ सेट हो जाएगी तो माजी गंगा नहा लेगी

माजी का प्यारा बेटा है ,,

छोटू तो शादी करने की बात से खुश हो गया

उसके दोस्त की शादी हो चुकी थी

बस वो अकेला बाकी था जो कुवारा था

छोटू की शादी होंगी तो उसको भी अपने सपने पूरे करने का मोका मिलेगा

बस छोटू दुआ कर रहा था कि उसे शालिनी भाभी जैसी बीवी मिल जाए

अगर ऐसा हुआ तो छोटू अपनी मस्ती बंद कर देगा

छोटू की शादी होंगी तो वो भी खेतो मे काम करना सुरू करेगा

पिताजी को तो छोटू की शादी से बहुत उम्मीद थी

उनको लग रहा था कि शालिनी ने कुछ सोचा होगा

छोटू ने अगेर जयसिब्घ को शादी मे आने की बात कही तो उसको आना ही पड़ेगा

पिताजी इस बात से खुश थे

और पिताजी को पता था कि छोटू को कैसे बीवी चाहिए

इस लिए छोटू से गाँव की भोली भाली काउ जैसी लड़की पिताजी ने छोटू के लिए ढूँढ ली

सुमन छोटू के लिए पर्फेक्ट रहेगी

पिताजी इस मामले मे अच्छे थे उनको पता था कि कौन किसके लिए अच्छी रह सकती है

छोटू के हाँ कहते पिताजी माजी ठाकुर और छोटू सुमन के घर देखने के लिए चले गये

सुमन को देखते माजी ने पसंद कर लिया

छोटू की तो बोलती बंद हो गयी ,,

सुमन को देखते छोटू को लग रह था कि कब शादी होती है और वो सुमन को प्यार करेगा

छोटू तो अभी से रंगीन सपने देखने लग गया

छोटू को पहली नज़र मे सुमन से प्यार हो गया था

माजी छोटू की हालत देखते खुश हो रही थी ,, छोटू को सुमन पसंद है तो सब ठीक हो जाएगा

प्यार हो तो क्या क्या नही होता

छोटू के हाँ करते ही शादी 2 महीने बाद करने का डिसाइड हुआ

छोटू इतने दिन कैसे दूर रहता

पर माजी ने छोटू को कहा कि सुमन अब उसकी है बस थोड़ा इंतजार करो

पर छोटू को तो प्यार हो गया था सुमन से

छोटू तो बस सुमन से मिलने का इंतज़ार करता रहता

जब भी पिताजी सुमन के गाँव जाते तो छोटू भी जाता क्यूँ कि उसको सुमन को देखना था

सुमन की एक झलक के लिए छोटू कुछ भी कर सकता था

सुमन को भी छोटू से प्यार हो गया था

पिताजी की पसंद अच्छी थी , माजी को सुमन मे शालिनी जैसे गुण दिख रहे थे ,

शादी का सब कुछ फिक्स होते ही पिताजी ने पूजा नेहा नीता को शादी की खूसखबरी सुना दी

छोटू की शादी ,, ये बात दिमाग़ मे आते ही सबको कुछ ज़्यादा ही खुशी होने लगी , क्यूँ कि उनको छोटू की शादी मे मस्ती करने को मिलेगा

पिताजी ने सबको बता दिया पर जयसिंघ और शालिनी को अब तक बताया नही

छोटू तो अपनी शादी के सपने देखने लगा

पिताजी और माजी ने छोटू को सपनो से बाहर निकाला और इन्विटेशन लेकर शहर3 जाने को कहा

माजी- आप भी जाइए ना

पिताजी- नही , छोटू को अकेले जाना होगा

माजी- छोटू अकेला कैसे जाएगा , वो कभी अकेला कही गया है क्या, और आप्टो सीधे शहर3 भेज रहे है

पिताजी- छोटू अपने किसी दोस्त को लेकर जाना

छोटू- जी पिताजी

पिताजी- मैं ने जो कहा वो याद है ना

छोटू- हाँ , एक भी वर्ड ज़्यादा नही बोलूँगा और ना कम

पिताजी- सबाश

माजी- अगर आप नही गये तो जयसिंघ क्या सोचेगा

पिताजी- छोटू अपने भाभी को अकेले मे कहना कि पिताजी पूजा नेहा नीता की शादी का न्यूता लेकर नही आए तो अब कैसे आते

छोटू- जी ,, जो बाते भैया को बोलना है वो मैं ने अलग लिख कर रखी है , और भाभी की बात अलग लिखी है

पिताजी- और थोड़ा रोना भी , ताकि जयसिंघ गाँव मे आ जाए

छोटू- पिताजी अगर भैया नही आए तो मैं सच मे शादी नही करूँगा

माजी- रहने दे , रोज तो पूछता है की सुमन के गाँव जौ मिलेने को

छोटू- वो तो मैं ऐस्र ही

माजी- तुझे सुमन से प्यार हुआ है ना

छोटू- हाँ

माजी- ऐसे प्यार करते रहना सुमन से

पिताजी- मैं कल की टिकेट निकलवा देता हूँ

छोटू- जी

और पिताजी ने छोटू के शहर3 जाने का इंतज़ाम कर दिया

छोटू अपने एक दोस्त के साथ शहर3 जाएगा

माजी ने छोटू को बहुत सी बाते बताई कि कैसे रहना है शहर3 मे

और ये भी कहा कि अपने भैया के जैसे शहर3 की रंगीन दुनिया मे खुद को खोने मत देना

छोटू ने सारी बाते अपने दिमाग़ मे फिट की और जयसिंघ के घर जाने लगा

छोटू अकेला ऐसा था जो जयसिंघ के घर आ रहा था

छोटू अपने दोस्त के साथ शहर3 आया

शाहर 3 की बड़ी बड़ी बुल्ड़ींग , सड़को पे चल रही कार देख कर छोटू तो एक पल के लिए खो सा गया

पर छोटू को अपने माँ की बात याद थी ,

जयसिंघ जैसे अपने पिताजी की बात भूल गया और साथ मे खुद को भी भूल गया वैसा छोटू नही करेगा

छोटू लोगो से पूछते पूछते जयसिंघ के घर ही सामने आ गया

छोटू का दोस्त तो जयसिंघ का घर देख कर छोटू के सामने तारीफे करने लगा

छोटू भी ठाकुरजी जैसी हवेली जैसा भैया का घर देख कर सोचने लगा कि भैया तो राजा बन गया शहर3 आके

छोटू ने गाँव की आदत की तरह डोर खटखटाया

जयसिंघ- शालिनी देखो कौन बेवकूफ़ आया है जो बेल बजाने की जगह डोर खटखटा रहा है

शालिनी- आप नाश्ता कीजिए मैं देखती हूँ

और शालिनी ने डोर खोल दिया

शाकिनी ने जैसे डोर खोला तो उसको अपनी आँख पे विश्वास नही हो रहा था

सामने छोटू खड़ा था

शालिनी ने खुद को चींटी काट ली

छोटू ने जैसे अपने भाभी को देखा तो उनके पैर छु कर आशीर्वाद लिया

जयसिंघ- शालिनी कौन है

शाकिनी ने कोई जवाब नही दिया

जयसिंघ- शालिनी

शालिनी- आप खुद देख लीजिए

और जयसिंघ ने पलट कर देखा तो उसका भी शालिनी जैसा हाल हुआ

छोटू यहाँ

जयसिंघ को तो ये सपने जैसा लग रहा था

जयसिंघ को खुशी हुई छोटू के आने की पर अचानक डर भी लग गया कि पिताजी को कुछ हुआ तो नही है जिस से छोटू यहाँ आया है

जयसिंघ उठ कर छोटू के पास आ गया

जतसिंघ- छोटू , शालिनी ये सच है

छोटू- भैया,आपको क्या सपना लग रहा है

जयसिंघ को तो यकीन नही आ रहा था कि उसके घर से कोई तो उसके घर आया है

जयसिंघ खुद की भावनाओं को रोक नही पाया और छोटू के गले लग गया

शालिनी को तो भाई का प्यार देख कर अच्छा लगा

शालिनी को कई दिनो बाद जयसिंघ के चेहरे पे खुशी दिखाई दी थी

जयसिंघ- छोटू तू अकेला आया है

.छोटू- नही , मेरे साथ मेरा दोस्त आया है , माँ मुझे अकेली कैसे आने देती

जयसिंघ- माँ ने भेजा है तुझे

छोटू-पिताजी ने भेजा है और मेरा भी एक काम था

शालिनी- छोटू को अंदर तो आने दीजिए क्या सारी बाते यही करेंगे

जयसिंघ छोटू को अंदर ले आया

नोट-पिछले अपडेट मे एक मिस्टेक हुई

नेहा की शादी

कोमल का जनम

फिर छोटू की शादी (सुमन से)

लीना राजेश का जनम

कविता का जनम

ये टाइमलाइन थी

पर मिस्टेक से जो अपडेट निकाल दिए थे उनको पोस्ट कर दिया

सोचा था जब पोस्ट करूँगा तो ये बात एडिट कर दूँगा लेकिन इतने दिनो बाद याद ही नही रहा जिस से जिस अपडेट को पोस्ट नही करना था वो कर दिया

ये गड़बड़ इस लिए हुई कि पहले छोटू की शादी के बारे में लिखा ही नही था उसका फ्लॅशबॅक अलग रखा था जिस से एक लाइन मे ख़तम

कर दिया की कविता राजेश का जनम हो गया और शालिनी मिलने आती

उस बात की अड्जस्ट कर लेना

कविता लीना राजेश का जनम होना है अभी
 
फ्लश बॅक 1018

सुमन 5

जयसिंघ छोटू और उसके दोस्त को लेकर अंदर आ गया

छोटू का दोस्त चुप छाप था वो बस घर को देख कर अपना मूह बंद कर के उनकी बाते सुन रहा था

जयसिंघ- शालिनी छोटू आया है , आज कुछ स्पेशल बनाना

शालिनी- अभी बनाती हूँ

जयसिंघ- छोटू खड़े क्यूँ हो बैठो

.च्चितू-भैया आपका घर तो महल जैसा है ,

जयसिंघ- ऐसा महल किस काम का जहाँ मा और पिताजी ना हो

छोटू- पर कुछ भी कहो भैया , मुझे आपका घर बहुत पसंद आया

जयसिंघ- तूने ये बोल कर मेरे सर से एक बोझ कम कर दिया है

छोटू- भैया ये घर तो फ़िल्मो जैसा है ,

जयसिंघ- घर को छोड़ ये बता तुझे यहाँ आने मे कोई तकलीफ़ तो नही हुई ना

छोटू- थोड़ी हुई थी पर पहली बार शहर3 आया था तो इतनी तकलीफ़ होती है

जयसिंघ- मुझे बताया क्यूँ नही मैं बस स्टॉप पर लेने आता

छोटू?- सब कुछ अचानक तय हो गया

शालिनी- अवी वो देखो कौन आया है

अवी- कौन है

चाची- भैया ये अवी है ना ,

शालिनी- हाँ

छोटू- अवी इधर आओ

अवी शालिनी के पीछे छुप गया ,बहुत दिनो बाद जो मिल रहा था

छोटू- ये तो डर गया

शालिनी- पहले मिले थे तो ये छोटा था जिस से याद नही होगा , धीरे धीरे पहचान हो जाएगी

छोटू- हाँ , अब तो मैं यहाँ कुछ दिन रुक कर ही जाउन्गा ,

जयसिंघ- कुछ दिन क्यूँ , जितने दिन चाहो उतने दिन रहना

छोटू- पहले आ जाता तो मैं तो कुछ सालो तक यहाँ रुकता , भाभी और अवी के पास

शालिनी- अवी डरो मत , ये तुम्हारे चाचा है

छोटू- भाभी अवी से दोस्ती हो जाएगी तब वो अपने आओ आ जाएगा , वैसे भाभी कुछ खाने को मिलता तो , ट्रवेलिंग करके भूक लगी है

जयसिंघ- शालिनी

शालिनी- नाश्ता हो गया है अभी लाती हूँ

छोटू- भाभी माँ ने सफ़र के लिए खाना पॅक करके दिया था जो खाया भी नही उसको भी गरम कर दीजिएगा

छोटू ने जैसे माँ के हाथ का बना हुआ खाने का डब्बा बाहर निकाला जयसिंघ ने छीन लिया

शालिनी- ये क्या कर रहे हो आप

जयसिंघ- माँ ने बनाया है ना

छोटू- हाँ

जयसिंघ ने किसी की बात नही सुनी और माँ के हाथ का खाना खाने लगा

इतने दिनो बाद माँ के हाथ का खाना खाते जयसिंघ की आँख से आसू आने लगे

जयसिंघ को माँ की याद आने लगी

किस तरह माँ अपने हाथो से खाना खिलाती थी वो जयसिंघ को याद आया

शालिनी जयसिंघ को देखती रह गयी

छोटू ने जानबूझ कर खाना नही खाया था क्यूँ कि इस डब्बे पे जयसिंघ का नाम लिखा था

शालिनी ने छोटू को नाश्ता दिया

छोटू भी अपनी भाभी के हाथ का नाश्ता मज़े से खाने लगा

अवी भी अपने चाचा के पास आकर बैठ गया

छोटू- अवी ये तुम्हारे लिए , दादाजी ने गिफ्ट भेजा है

शालिनी ने गिफ्ट ले लिया ,

अवी को दादाजी वाले कपड़े पहना दिए

अवी तो इस सिंपल कपड़े मे भी खुश था

जयसिंघ- शालिनी छोटू के लिए उसके लिए जो कमरा बनाया था वो खोल देना

छोटू- मेरे लिए

शालिनी- सबके लिए कमरा बनाया था , पर कोई आया ही नही , चलो अच्छा हुआ तुम तो आ गये , चलो तुम्हे अपना कमरा दिखाती हूँ

शालिनी ने छोटू को उसका कमरा दिखाया

छोटू अपना कमरा देख कर गाँव के कमरे से कंपेर करने लगा

यहाँ का कमरा तो कितना अच्छा था सब कुछ था कमरे मे

छोटू खुश हुआ

फिर शालिनी छोटू को लेकर जयसिंघ के पास आ गयी ..

छोटू-भैया क्या कर रहे हो

जयसिंघ- कंपनी मे फोन कर रहा हूँ कि मैं कुछ दिन नही आउन्गा

छोटू- ये क्या भैया , मुझे अपनी कंपनी नही दिखाओगे

.जयसुंघ-ज़रूर दिखाउन्गा , लेकिन कल , आज तो बहुत सारी बाते करनी है पिताजी माँ और गाँव के बारे में

छोटू- मैं आपको सब बता दूँगा

जयसिंघ- गाँव मे सब कैसे है

छोटू- कैसे होंगे , घर तो सुना सुना हो गया है , नेहा और नीता के बिना घर खाने को दौड़ता है

जयसिंघ ने नेहा का नाम सुनते ही बात घुमा दी

जयसिंघ- तू क्या कर रहा है

छोटू- पिताजी को खेती के कामो मे मदद कर रहा हूँ

जयसिंघ-पिताजी को तो अब आराम होगा

छोटू-पिताजी को आराम नही सब अपने पास चाहिए

जयसिंघ- एक दिन तो सबको घर से बाहर जाना ही था

छोटू- पर पिताजी को इस सब से क्या करना है

जयसिंघ- पिताजी मेरे बारे में बात करते है

छोटू- ऐसा दिन ही नही निकलता जब पिताजी ने आपको याद ना किया हो

जयसिंघ- मुझे गाली दे रहे होंगे

छोटू- आपको ऐसा लगता है

शस्लिनी- पिताजी को आप समझ ही नही पाए है

जयसिंघ- माँ कैसी है

छोटू- उनको तो बस आपको देखना है एक बार

जयसिंघ- तो तू अपने साथ क्यूँ नही लाया ,, कुछ दिन यहाँ रुक जाती

शालिनी- माजी कैसे आ सकती है पिताजी आएँगे तो माजी आएगी

जयसिंघ- माँ को कहना मैं उसे मिलने ....... तू ने अच्छी बॉडी बना ली है

छोटू- हाँ , माँ के हाथ का खाना खा कर मोटा हो गया था तो कसरत सुरू कर दी

शालिनी- छोटू अब तो मैं तुझे मोटू बना कर भेजूँगी

छोटू- फिर तो माँ खुश होंगी कि भाभी ने मेरी अच्छी खातिरदारी की है

जयसिंघ- ये तेरा दोस्त है ना

छोटू- हाँ

शालिनी- आप कुछ भूल रहे है

जयसिंघ- क्या

शालिनी- आपने तो पूछा ही नही छोटू को यहाँ आने की वजह

जयसिंघ- खुशी के मारे भूल ही गया

शालिनी- छोटू कैसे आना हुआ

छोटू-मैं तो आपसे मिलने आया था और भैया को खुशख़बरी सुनाने

जयसिंघ- कैसी खुशख़बरी

छोटू- मैं शादी कर रहा हूँ , और आपको पहला इन्विटेशन देने आया हूँ , आपको गाँव ले जाने आया हूँ
 
फ्लॅशबॅक 1019

सुमन 6

छोटू की बात सुनते ही जयसिंघ को शॉक लगा

जयसिंघ- क्या कहा तूने

छोटू- मैं शादी कर रहा हूँ

शालिनी- सच , तू शादी कर रहा है

जयसिंघ- पर अचानक कैसे

छोटू- भैया मैं बड़ा हो गया हूँ

जयसिंघ- छोटू बड़ा हो गया है

शालिनी- छोटू तो अब घोड़ी चढ़ेगा

छोटू- हाँ

जयसिंघ- लड़की देखी कि नही

छोटू- लड़की भी देखी है और शादी की डेट भी फिक्स की है

जयसिंघ- मुझे बताया नही

छोटू- बताने तो आया हूँ

जयसिंघ- मेरा मतलब था कि एक खत तो लिख देता

छोटू- खत की जगह मैं खुद आया हूँ , पहला इन्विटेशन आपको देने

शालिनु- अब आप अपना मूड ऑफ मत कीजिए , छोटू आपको पहला इन्विशन देने आया है इस से बड़ी बात क्या है

जयसिंघ- कौन है वो लड़की , नाम क्या है , किस गाँव की है

छोटू- मुझे तो भाभी जैसी लड़की चाहिए थी , पर भाभी तो आपकी है तो मैं ने उनकी जैसी एक ढूँढ ली

शालिनी- मेरी जैसी, क्या नाम है

छोटू- आपका और उसका नाम "स " से सुरू होता है , सुमन नाम है उसका , फूल की तरह सुंदर है

शालिनी- मुझसे भी सुंदर

छोटू- आप से कम सुंदर

शालिनी- मेरा प्यारा देवर ,

जयसिंघ- सुमन को कैसे ढूँढ निकाला तूने

छोटू-पिताजी के दोस्त की लड़की है , पिताजी ने पसंद की और मुझे तो देखते ही पसन्द आ गयी

शालिनी- तुम्हारे भैया को भी मैं पहली बार मे पसंद आई थी

जयसिंघ- तुझे पसंद है ना या फिर पिताजी के कहने से शादी कर रहा है

छोटू- मैं ने खुद कहा कि मेरी शादी होंगी तो सुमन से नही तो किसी से शादी नही करूँगा

शालिनी- आपके भाई को प्यार हो गया है

जयसिंघ- ये तो अच्छी बात है

छोटू- और पिताजी ने कहा कि पूजा नेहा और नीता से पहले आपको ये खुशख़बरी सुना दूं , और शादी का पहला इनिविटेशन दूं

जयसिंघ- झूठ मत बोल

छोटू- आप मेरे दोस्त से पूछ लीजिए

जयसिंघ- ऐसा था तो पिताजी क्यूँ नही आए ,

छोटू- वो तो पूजा नेहा और नीता के शादी के समय भी यहाँ नही आए थे , और आपकी शादी के समय भी आपको गाँव बुलाया था

शालिनी- सही तो कह रहा है छोटू

जयसिंघ-ठीक है , माँ ने मेरे लिए कुछ भेजा है

छोटू-हाँ, 2 डिब्बे भर के लड्डू भेजे है माँ ने खुद बनाए है

जयसिंघ ने लड्डू लिए

जयसिंघ- शालिनी एक भी लड्डू गायब हुआ तो मुझसे बुरा कोई नही होगा

शालिनी- मैं अवी को दे रही थी

शालिनी- अवी लड्डू लो , और चाचा को थक्न्स बोलो

अवी- थॅंकू

जयसिंघ- और बता ना गाँव मे क्या चल रहा है

छोटू- पहले शादी की बात तो पूरी करते है

जयसिंघ- तूने इन्विटेशन दिया, हो गयी शादी की बात

छोटू- इन्विटेशन तो पोस्ट से भी भेज सकता था , मैं खुद क्यूँ आया हूँ

शालिनी- क्यूँ आए हो

छोटू- ये बताने को कि मुझे घोड़ी पे भैया बिठाएँगे ,

जयसिंघ- क्या कहा

छोटू- आप नही आएँगे तो मैं शादी नही करूँगा

जयसिंघ- कुछ भी मत बोल

छोटू- मुझे मेरी शादी मे सब चाहिए , और वो भी हँसते हुए

शालिनी- मैं तो शादी के पहले आ जाउन्गी

जयसिंघ- मैं देखता हूँ

छोटू- मैं शादी करूँगा तो समुन से और आप नही होंगे तो शादी ही नही करूँगा

जयसिंघ- ठीक है मैं तेरी शादी मे आ जाउन्गा , किस गाँव मे होंगी शादी

छोटू- मुझे पता था कि आप यही कहेंगे , आपको मेरी शादी के 2 हफ्ते पहले आना होगा और शादी के बाद भी रुकना होगा

जयसिंघ- मैं कोई वादा नही करूँगा

छोटू- ठीक है फिर मेरी मैयत पे आ जाना

जयसिंघ- क्या बक रहा है , दुबारा ऐसी बात की तो थप्पड़ मारूँगा

शाकिनी- सही तो कह रहा है , बिना बड़े भाई के छोटू शादी कैसे करेगा , लोग क्या कहेंगे कि बड़ा भाई शहर3 जाते ही छोटे भाई को भूल गया

जयसिंघ- तुम्हें पता है ना मैं ऐसा क्यूँ कह रहा हूँ

शालिनी- मुझे कुछ नही सुनना है , आप कहते थे कि यहाँ कोई नही आता है , आज छोटू आया है तो आप उसको ऐसे रुला कर भेजेंगे ,क्या इस लिए आप सबको यहा बुलाते थे

जयसिंघ- ठीक है , पर मुझे कोई परेशान नही करेगा किसी बात से

शालिनी- छोटू तेरे भैया को मैं लेकर आउन्गि

छोटू- भाभी आप बहुत अच्छी है

जयसिंघ- अब ज़्यादा खुश मत हो , जा फ्रेश हो जा , फिर मैं तुझे शहर3दिखाने ले जाउन्गा

छोटू- भैया पहले आपका घर तो देखेने दो , ये देखते देखते पूरा दिन निकल जाएगा

जयसिंघ- तुझे पसंद आया

छोटू- हाँ

जयसिंघ- तो तू यहाँ हमेशा के लिए रहने का मत सोचना

छोटू- क्यूँ?

जयसिंघ- तू यहाँ आ जाएगा तो पिताजी और माँ अकेली पड़ जाएगी वहाँ पर

छोटू- फिर आप क्यूँ यहाँ रहते हो

जयसिंघ- मैं तो सबको यहाँ लाना चाहता था , मैं सबके साथ यहाँ रहना चाहता था , मुझे अकेले रहना पसंद नही है यहाँ पर

छोटू- पर कुछ भी हो भैया , आपकी मेहनत का घर देख कर मैं खुश हूँ , भाभी को रानी बना कर रखा है आपने

शालिनी- तू तो अच्छी अच्छी बाते करने लगा है

जयसिंघ- छोटू अब बड़ा हो गया है

छोटू- भैया , मैं भी आपके जैसा घर बनाउन्गा

जयसिंघ- ऐसा घर बनाना चाहता है तू

छोटू- हाँ , पर गाँव मे बनाउन्गा ऐसा घर

जयसिंघ- सच मे बनाना चाहता है

छोटू- हाँ , आप मेरी मदद करोगे

जयसिंघ- रुक एक मिनिट

और जयसिंघ ने अलमारी से एक फाइल निकाली

जयसिंघ- ये फाइल रख , जब भी तुझे ऐसा घर बनाना हो तो इस फाइल को पढ़ना ,

छोटू- क्या है इसमे

शालिनी- इस फाइल मे एक मॅप है , तेरे भैया गाँव वाले घर को महल बनाना चाहते थे , उसी का मॅप है इसमे ( गाँव मे कंपनी खुलती तो गाँव के घर को महल बनाने का सोचा था )

छोटू- फिर बनाया क्यूँ नही

जयसिंघ- तू बाते बहुत करता है , जा फ्रेश हो जा फिर बात करेंगे

जयसिंघ बनाना तो चाहता था गाँव वाले घर को महल पर ये हो नही सका , नेहा की शादी मे सब कुछ बिखर गया

लेकिन छोटू की बातों से जयसिंघ को अच्छा लगा

जयसिंघ काफ़ी दिनो बाद आज खुश था

शालिनी ये देख कर रिलॅक्स हो गयी

शालिनी ने जैसा कहा था वैसा पिताजी ने किया

छोटू को शहर3 भेज कर तो और भी अच्छा किया

.अब जयसिंघ को शालिनी गाँव लेकर जाएगी

छोटू भी कुछ दिन रहने आया था ये जयसिंघ को अच्छा लगा

छोटू जितनी घर की तारीफ करता ये सुन कर जयसिंघ को लगता कि काश ये पिताजी ने कहा होता

आज छोटू शहर आया है तो कल पिताजी भी आ जाएँगे

जयसिंघ तो छोटू के आने से बहुत खुश था

जयसिंघ ने इस खुशी मे छोटू को पूरा शहर3 दिखाया

अपनी कंपनी दिखाई

जब छोटू को पता चला कि ये कंपनी उसके भैया की है तो वो शॉक्ड हो गया ,

इतनी बड़ी कंपनी भैया की है .

शालिनी जयसिंघ और छोटू की साथ देख कर प्लान बनाने लगी की और क्या करना चाहिए

शालिनी ने जयसिंघ को आइडिया दिया कि छोटू की शादी के कपड़े यहाँ से लेते है

जयसिंघ को आइडिया पसंद आया

छोटू की शादी मे जो जो लगेगा वो सब जयसिंघ ने छोटू को खरीद कर दिया

शहर3 से दूल्हा बना कर भेजना चाहते था जयसिंघ

छोटू अपने भैया भाई के साथ रह कर खुद को नयी दुनिया मे महसूस कर रहा था

अवी के साथ खेलने से तो छोटू को दिन का पता ही नही चल रहा था

3 4 दिन कैसे 1 हफ्ते ने बदल गये ये छोटू को भी पता नही चला

दिन भर भैया भाभी के साथ शहर3 मे घूमना

रात मे भैया भाभी के साथ देर रात तक बाते करना

छोटू को यहाँ सब ऑटोमॅटिक दिख रहा था

छोटू को तो यहाँ की आदत लग रही थी

चैन की ज़िंदगी मे छोटू खुश था

पर छोटू को माँ की बात याद आ गयी

छोटू ने अपने सर से शहर3 का भूत निकाल दिया

और भैया भाई का आशीर्वाद लेकर गाँव आ गया

जयसिंघ को छोटू का जाना अच्छा नही लगा

पर छोटू ने जयसिंघ को वादा किया कि वो शहर3 मे ज़रूर आएगा

छोटू ने शालिनी भाभी को वादा किया कि सुमन के साथ वो उनसे मिलने ज़रूर आएगा

शालिनी चाहती थी कि छोटू यहाँ नही वो गाँव आ जाए हमेशा के लिए

जयसिंघ और शालिनी ने कुछ गिफ्ट के साथ छोटू को अलविदा किया पिताजी और माँ के लिए नये ड्रेस थे

छोटू जिस वजह से शहर3 गया था वो पूरा हो गया

जयसिंघ और शालिनी गाँव जाने की तय्यारी करने लगे
 
फ्लश बॅक 1020

सुमन 7

छोटू की शादी सुमन के साथ तय हो गयी

छोटू ने सोचा नही था कि उसे सुमन से प्यार हो जाएगा , छोटू तो अब सुमन से ही शादी करने की ज़िद्द करने लगा

छोटू को भी प्यार हुआ मतलब उनकी शादी सुदा ज़िंदगी अच्छी चलेगी इसका यकीन हो गया सबको

छोटू की शादी , ये सुनते ही सब मे एक अजीब ही जोश आ गया

हमारा छोटू शादी करेगा , ये बात दिमाग़ मे आते ही सब को जल्दी से जल्दी गाँव आना था

पिताजी खुद अपने दामाद को इन्विटेशन देने गये

पूजा तो उसी वक्त पिताजी के साथ गाँव आ गयी स्वेता सीतल को लेकर , नेहा नीता भी तय्यार हो गयी ,

पर दामाद जी को इतनी लंबी छुट्टी नही मिल सकती थी जिस से सिर्फ़ पूजा नेहा और नीता शादी के 2 हफ्ते पहले गाँव आ गयी

अपनी बेटियो के आने से पिताजी खुश थे और घर मे फिर से नेहा का नाम और उसकी मस्ती सुनाई देने लगी

छोटू तो अपनी शादी से नये नये सपने देखने लगा

पूजा नेहा नीता छोटू की खिचाई लेने लगी

माँ ये देख कर नेहा को रोकने की जगह उनके साथ छोटू को प्यार करने लगी

पिताजी को इंतज़ार था शालिनी और जयसिंघ के आने का

सबको शालिनी का इंतज़ार था , साथ मे अवी का , अब तो अवी बड़ा हो गया था

नेहा तो थोड़ी डर रही थी कैसे अपने भाई का सामना करेगी

पर नीता ने उसको हिम्मत दी और भाभी से बात करने को कहा

दूसरी तरफ शालिनी सारी तय्यारी करके जयसिंघ के आने का इंतज़ार कर रही थी

जयसिंघ कंपनी का काम कुमार को संजा कर शालिनी के साथ गाँव के लिए निकल पड़ा

शालिनी ने बस से जाने का डिसाइड किया , जयसिंघ ने कार ले ली थी , पर गाँव मे कार ले जाने से ऐसा भी हो सकता था कि जयसिंघ कार से शहर3 भी आ जाए किसी दिन , या फिर कार से सुबह जाए और शाम मे वापस आ जाए , अगर जयसिंघ के पास कार नही रही तो जयसिंघ को घर मे ही रुकना होगा ,

शालिनी यही चाहती थी कि जयसिंघ सबके सामने ज़्यादा से ज़्यादा रहे ताकि उनसे दूर रहने का दर्द जयसिंघ को होता रहे , क्या पता

जयसिंघ पिघल जाए

जयसिंघ तो बस छोटू और उसकी शादी के बारे में सोच रहा था , ये सोचा ही नही कि नेहा भी जाएगी वहाँ पर ,

शालिनी ने जयसिंघ को नेहा के बारे में सोचने ही नही दिया , पूरे ट्रेवलिंग मे छोटू की शादी मे ये करेंगे ये कर्रेंगे ये बोल रही थी , जिस से

जयसिंघ का दिमाग़ शालिनी की बातों के बारे में सोच रहा था

बहुत चालाक थी शालिनी

और ये लो गाँव आ गया

गाँव मे पैर रखते जयसिंघ को नेहा की शादी का दिन याद आ गया

जयसिंघ के दिमाग़ मे नेहा का ख़याल आते ही जयसिंघ पीछे हटने लगा , वो कैसे इस घर मे जाएगा , कैसे सबका सामना करेगा ,

लोग क्या कहेंगे जयसिंघ को

जयसिंघ वापस बस मे बैठ कर शहर जाना चाह रहा था कि बस चली गयी

शालिनी- बस चली गयी , अरे पैर आगे चलने के लिए दिए गये है ना कि डर की वजह से पीछे हटने के लिए

जयसिंघ - शालिनी तुम्हें पता है ना कि मेरे पैर पीछे क्यूँ जा रहे है

शालिनी- हाँ , उस दिन मैं आपके साथ थी और आज भी आपके साथ हूँ , उस दिन मैं आपको गाँव से बाहर लेकर गयी थी आज गाँव मे लेकर

आई हूँ , उस दिन आपने जो कहा वो मैं ने किया आज मैं जो कहूँगी वो आपको करना होगा ,

जयसिंघ- मैं नही कर पाउन्गा पिताजी का सामना

शालिनी- पिताजी खा नही जाएँगे , और पिताजी ने ही छोटू को शहर3 भेजा था इन्विटेशन लेकर , मतलब वो चाहते थे कि आप वहाँ आए , फिर पिताजी से किस बात का डर है आपको

जयसिंघ- तुम मेरे साथ रहना ,

शालिनी- मैं तो आपके साथ हूँ , कुछ कदम आप चलो कुछ कदम मैं चलूंगी ,और हमारी मज़िल हमे मिल जाएगी

जयसिंघ- नेहा के बारे में मुझे कोई बात नही करनी है और ना तुम करोगी

शालिनी- पर अभी तो आप नेहा के बारे में बात कर रहे हो

जयसिंघ- मेरी स्मार्ट बीवी , चले

और शालिनी जयसिंघ का डर कम करके घर लेकर आ गयी

शालिनी अवी और जयसुंघ को डोर के पास खड़ा देख कर सब खुश हो गये ,, उनकी आँख बता रही थी की उनको देखने के लिए उनको कितना इंतज़ार करना पड़ा है

अवी तो शालिनी के पीछे छुपा हुआ था ,

पिताजी ने अवी को अपने पास बुलाया

शालिनी- अवी डरो मत वो तुम्हारे दादाजी है ,

अवी हिचकते हुए पिताजी के पास गया

पिताजी अवी का ही इंतज़ार कर रहे थे ,

अवी को गोद मे उठा कर चूमना सुरू कर दिया , अवी को उपर उठा कर गोल घूम कर अपनी खुशी जाहिर करने लगे

माजी ने तो अपने बेटे को गले लगाया , जयसिंघ को अपनी माँ के गले लग कर सुकून मिला जिसके लिए वो टीन साल से तड़फ़ रहा था

शालिनी जयसिंघ की खुशी को फील कर रही थी

शालिनी के आते ही नेहा नीता पूजा अपने कमरे से बाहर आ गयी ,

नेहा तो भाग कर शालिनी के गले लग गयी

नीता और पूजा कहाँ पीछे रहती ,

ये सीन देखने लायक था , एक दादा अपने पोते को प्यार कर रहा था , एक माँ अपने बेटे को प्यार कर रही थी , ननंद भाभी से शिकायत कर रही थी इतने दीनो बाद उनकी याद आई

ये सब छोटू की वजह से हो पाया है ,

सब छोटू को दिल से शुक्रिया कह रहे थे .

जयसिंघ बस अपनी माँ से प्यार से मिला बाकी सब से थोड़ा हिचक रहा था मिलने से

नेहा की तरफ तो देखा भी नही जयसिंघ ने

नीता को जयसिंघ ने शादी सुदा ज़िंदगी खुशी खुशी बीते इसकी दुआ दी

नेहा जयसिंघ के कुछ कहने का इंतज़ार कर रही थी

पर उसका नंबर आते ही जयसिंघ अपना समान लेकर अपने कमरे मे गया

नेहा उदास हो गयी

पर शालिनी ने उसके कंधे पे हाथ रखा

नेहा- भाभी ,

नेहा की आँखो मे आसू थे

शालिनी- तू रो रही है नेहा , जाने दे मैं वापस जाती हूँ

नेहा- भाभी , भैया ने मेरी तरफ देखा भी नही

शालिनी- नेहा ये तो होना ही था ,

नेहा- मेरी क्या ग़लती है

.शालिनी-जो सच्चाई के साथ चलते है उनके साथ यही होता है

नीहा- क्या मतलब
 
शालिनी-मैं ने तुम्हें कहा था कि मेरे नीता पूजा और तुम्हारे भैया के बीच मे से किसी एक को सेलेक्ट करो ,

तुमने हम सबको को सेलेक्ट किया , और सुरेश से शादी की ,

ऐसे मे जयसिंघ की बेरूख़ी का सामना तो तुम्हें करना होगा ,

तुम्हारे भैया को तुम पर गुस्सा तो आएगा , तुमने जो किया है उनके साथ

नेहा- आपने ही तो कहा था कि कुमार से शादी मत करो

शालिनी- हाँ , पर ये भी कहा था कि उस से क्या होगा ,मुझे खुशी है कि तुमने कुनार से शादी नही की है , तू ये देख की तेरे साथ कौन कौन खड़ा है

नेहा- मुझे भैया की बेरूख़ी अच्छी नही लग रही है

शालिनी- ये तो चार दिन की चाँदनी जैसा है ,,

नेहा- क्या मतलब

शालिनी- देख तेरी शादी मे इतना कुछ हो गया , उसके बाद कोई सोच भी नही सकता था कि तुम्हारे भैया इस गाँव मे वापस आएँगे , मैं ले आई ना

नेहा- तो

शालिनी- वैसे तेरे भैया की नाराज़गी भी एक दिन ख़तम कर दूँगी

नेहा- कब आएगा वो दिन ,

शालिनी- जल्दी आएगा ,मुझ पे विश्वास रख

नेहा- आप पे तो खुद से ज़्यादा विश्वास है

शालिनी- तो देख मैं कैसे तेरे भैया को तुझे माफी मन्गवाऊ

नेहा- भैया माफी क्यूँ माँगेंगे , भैया तो कोमल को देखने भी नही आए

शालिनी- एक मिनिट टुक , छोटू इधर आ

छोटू- भाभी आपने बुलाया

शालिनी- तू शहर3 मे हमारे घर आया था ना

छोटू- हाँ

शालिनी- क्या क्या देखा वहाँ पर वो नेहा को बता

छोटू- भैया की कंपनी , शहर3 , भैया का घर

शालिनी- मेरे प्यारे देवर जी , नेहा को ये बताओ कि हमारे घर मे किसी की फोटो देखी तूने

छोटू- नेहा सुरेश जीजू और कोमल की

नेहा- मेरी फोटो

छोटू- बहुत बड़ी थी ,

शालिनी- छोटू अब जा

नेहा- मेरी फोटो ,, मैं कुछ समझी नही

शालिनी- मैं ने वो फोटो लगाई ताकि तुनारे भैया कोमल को देख सके तुम्हें याद कर सके ,

नेहा- आपने लगाई पर क्यूँ

शालिनी- मैं देखना चाहती थी कि तुम्हारे भैया के दिल मे तुम्हारे लिए कितना गुस्सा है , फोटो देखते ही फेक देंगे ऐसा मुझे लगा , पर ऐसा नही

हुआ , तुम्हारे भैया ने फोटो नही फेकि , और रोज मेरे किचेन मे जाते उस फोटो को देखते रहते है

नेहा- सच

शालिनी- हाँ , तुम्हारे भैया बस थोड़े नाराज़ है , कितने दिन रहेंगे , एक दिन तो उनका गुससा कम हो जाएगा

नेहा- आप जल्दी गुस्सा कम कर दीजिए

शालिनी- उसी के लिए तो छोटू की शादी मे लाई हूँ तुम्हारे भैया को , तुम्हें क्या लगता है छोटू की शादी का आइडिया किसका था

नेहा- आपका

शालिनी- हाँ , अब समझी

नेहा- भाभी आप बहुत अच्छी है

शालिनी- पर तू मेरा ख़याल नही रखती

नेहा- अभी टी लेकर आती हूँ

शालिनी- टी नही , ये बता मेरी बेटी कहाँ है , कोमल कहाँ है

नेहा- आपको ही याद कर रही है , चलिए

और शालिनी ने सबको समझा दिया कि वो क्यूँ आई है

पिताजी तो बस अवी मे खुश थे

पिताजी अवी को अपने कंधो पे बिठा कर गाँव दिखाने ले गये

.अवी को अपने दादाजी के कंधो पे बैठ कर मज़ा कर रहा था

माजी अपने बेटे को नाश्ता दे रही थी

शालिनी कोमल को प्यार कर रही थी

शालिनी- नेहा , तुझसे ना जलन होती है कभी कभी

नेहा- मुझसे जलन , वो क्यूँ

शालिनी- कितनी प्यारी बेटी को जनम जो दिया है , काश अवी की जगह कोमल मुझे होती , मैं तो कोमल को खुद से दूर ही नही करती एक पल के लिए भी

नेहा- कोमल भी तो आपकी बेटी है

शालिनी- देख मैं तुझे आज बता रही हूँ कि कोमल को मैं ने ज़िंदगी भर अपने पास रखने का सोचा है ,

नेहा- मैं समझी नही आप कह क्या रही है

शालिनी- कोमल बड़ी होंगी तब बता दूँगी , तब तक मेरे लिए तुझे कोमल का अपनी जान से ज़्यादा ख़याल रखना होगा

नेहा- ये भी कोई बताने की बात है , कोमल मेरी बेटी है उसका ख़याल तो मैं रखूँगी है , पर अब आपने कहा तो और ज़्यादा ख़याल रखूँगी , वैसे आपने सोचा क्या है

शालिनी- बता दूँगी , इतनी जल्दी क्या है ,

नेहा- जी

शालिनी-वैसे ये बता सुरेश तेरा ख़याल तो रखता है ना

नेहा- उनका बस चले तो ड्यूटी पे ना जाए

शालिनी- तू खुश है ना उनके साथ

नेहा- ट्रिपल खुश हूँ , एक तो वो मुझे मिले है , दूसरा ये कि नीता मेरे साथ है , तीसरा कि पूजा दीदी भी उसी शहर2 मे रहती है , ऐसा लगता

है जैसे अपने गाँव वाले घर मे ही हूँ

शालिनी- ऐसे ही खुश रहना

नेहा- जी

शालिनी- वैसे एक बात तुझसे कब से कहना चाहती थी

नेहा- क्या

शालिनी- रमेश और जतिन से सुरेश हॅंडसम है , तेरी और सुरेश की जोड़ी पर्फेक्ट लगती है , तू इतनी प्यारी और सुरेश इतना हॅंडसम

नेहा- भाबी मैं आपको एक बात बताती हूँ , सुरेश ने कहा था कि कॉलेज मे उनके पीछे लड़कियो की लाइन लगती थी ,, एक लड़की ने तो स्यूयिसाइड करने की कॉसिश की थी सुरेश के लिए

शालिनी- क्या बात कर रही है

नेहा- उन्होने ने मुझे सब कुछ बताया , उनके लिए तो लड़कियो की लाइन लगी हुई थी पर उनको अपने प्यार की तलाश थी ,, जो मुझपे

आकर रुक गयी ,

शालिनी- तो सुरेश को उसके सपनो की रानी मिल गयी

नेहा- हाँ , वो बहुत अच्छे है , मेरा बहुत ख़याल रखते है ,, जब हम बाहर घूमने जाते है तो लड़किया तो उनको देखती रहती है पर सुरेश उनकी तरफ देखते भी नही है

शालिनी- अच्छा है ना वो सिर्फ़ तुम्हारा बन कर रहना चाहता है

नेहा- ये सब आपकी वजह हुआ है , आप उस दिन मेरी हिम्मत नही बढ़ाती तो सुरेश मुझे कभी नही मिलता

शालिनी- तो अब संभाल के रखना सुरेश को , अपने पल्लू से छुपा कर रखना

नेहा- मुझे उनपे पूरा भरोशा है , वो मेरे सिवा किसी की तरफ नही देखेंगे ,

शालिनी- अब क्या सारी बात आज ही करेगी , मैं तो यहाँ बहुत दिनो के लिए आई हूँ , सुमन को अपनी बहन बना कर जाउन्गी मैं यहा से

नेहा- सुमन को अपनी जैसा बना देना

शालिनी- बना दूँगी , अब मुझे फ्रेश होने जाने दे , ये क्या अच्छा लगता है माँ वहाँ नाश्ता बन रही है और घर की बहू ब्ते कर रही है

नेहा- आपको तो कोई काम करने देगा भी नही ,

शालिनी- तू तो बाते ख़तम करने की जगह नही बात सुरू कर रही है ,मैं जा रही हूँ

और शालिनी ने नेहा से इतनी सारी बाते की जिस से जयसिंघ की नाराज़गी के बारे में नेहा भूल गयी
 
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