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फ्लॅशबॅक 1015
सुमन 2
शालिनी इस इंतज़ार मे थी कि जयसिंघ की किसी भी तरह नेहा के सामने ले जाए ताकि या तो पता चले कि आग कितनी लगी है
शालिनी को लगा कि नेहा के मा बनते जयसिंघ नेहा को मिलने जाएगा
पर ऐसा नही हुआ , जयसिंघ नेहा से मिलने नही गया
पर नेहा और कोमल की फोटो देख कर जयसिंघ के आँख के आँसू बता रहे थे कि जयसिंघ का दिल पत्थर का नही है
जयसिंघ को सही तरीके से हॅंडल किया जाए तो सब ठीक हो सकता है
बस ऐसा कुछ हो जाए कि जयसिंघ और नेहा आमने सामने आ जाए
ये कैसा होगा ये शालिनी ने सोच लिया
शालिनी हर महीने पिताजी को खत लिख कर जयसिंघ और शहर3 के बारे में बता देती थी
पिताजी को हर महीने अवी की फोटो भेज देती जिस से पिताजी को अच्छा लगता
माजी को भी अपनी बहू पर नाज़ था
शालिनी की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम थी
ऐसे एक दिन शालिनी ने खत मे वो लिखा जिसे सुनकर माजी खुश हो गयी
----------->>>>>>>
नेहा नीता के शादी के बाद तो जैसे घर सुना सुना हो गया था
नेहा थी तब तक घर मे मस्ती मज़ाक चलता था
माजी को भी नेहा की मस्तिया अच्छी लगती थी
नेहा का परेशान करना सबको अच्छा लगता था
नेहा नीता के ससुराल जाते ही पिताजी और माजी अकेले पड़ गये
पूजा भी अपने ससुराल वापस चली गयी
नेहा नीता के जाने के बाद पिताजी कुछ दिन तक स्वेता सिस्टल के साथ अपना दिल लगाए हुए थे
पर पूजा के जाते ही पिताजी और माजी अकेले पड़ गये
तीनो बेटियो की शादी हो गयी , बहू भी शहर3 चली गयी ऐसे मे पिताजी की हस्ती खेलती ज़िंदगी जैसे थम सी गयी थी
घर मे बस पिताजी माजी और छोटू रह गये
अगर अवी रहता तो पिताजी की लाइफ इतनी बेरंग नही होती
पर पिताजी और माजी खुश थे अपनी बेटियो के बारे में सुनकर
नीता ने जिस तरह खुद की संभाला और समझदार बन गयी ये देख कर पिताजी को यकीन नही हो रहा था कि ये हमारी नीता है
नीता की शादी कैसे हुई
कोई तय्यार नही था इसके लिए
ना नीता को सास ससुराल थे ना कोई ननद देवर था
नीता और जतिन ने एक दूसरे का साथ देते हुए अपने घर को संभाल लिया
पिताजी को तो अपनी बेटियो पे नाज़ था
नीता ने अपने दम पे अपनी छोटी सी दुनिया नेहा के साथ सुरू की
नेहा के घर मे तो सास ससुर थे फिर भी उस घटना के बाद नेहा ने भी एक पॉज़िटिव शुरुआत की
सब कुछ पीछे छोड़ कर नयी शुरुआत की
नीता का सपना भी पूरा हुआ ,
शादी के बाद नेहा और नीता का घर एक दूसरे को लग कर था
नीता तो यही चाहती थी
माजी को अपनी बेटियो की क़ाबलियत देख कर सुकून मिला
हर तरफ से अच्छी खबर मिल रही थी
पूजा नेहा नीता तीनो एक ही शहर2 मे थे जिस से तीनो एक दूसरे के साथ थी
पर यहाँ पीछे रह गया था छोटू
छोटू की वजह से माँ का दिल तो लगा रहता था पर पिताजी के पास ना उनकी बेटियाँ थी ना पोते पोती थी ,
ऐसे मे पिताजी अपना दिल लगाने के लिए हवेली जाने लगे
ठाकुरजी के साथ थोड़ी बहुत मस्ती करते थे
नेहा की डेलिवरी गाँव मे करने की जगह सुरेश ने शहर2 मे की ,
पर नेहा को मदद मिले इस लिए माजी नीता जी घर जाकर 2महीने रही जब तक नेहा माँ नही बनी
ऐसा करने से नेहा को मदद मिल गयी
पर पिताजी माजी के बिना कैसे रहते
पर रहना तो पड़ेगा ना , अब बच्चो की शादी हो गयी
पिताजी माजी को जाने नही दे रहे थे
पर माजी ने खुद की कसम दी
माजी का दिल भी नही कर रहा था पिताजी से दूर जाने का
पर बच्चो के लिए ये सब तो करना पड़ता है
माजी के जाते घर मे दो खुले सांड़ घूमने लगे
एक पिताजी और दूसरा छोटू
पिताजी तो खेतो और हवेली मे जाते
जिस से छोटू को पूरी आज़ादी मिल गयी
छोटू तो घर मे जैसा चाहे वैसा रहता
छोटू तो कुछ लड़कियो को घर मे लाने लगा
माजी होती तो वो छोटू को ऐसा नही करने देती
ये सब इस लिए हो रहा था कि घर मे एक औरत नही थी
घर मे एक औरत का होना कितना ज़रूरी था ये माजी भूल गयी थी
पर शालिनी को ये बात पता थी
घर मे जब तक एक औरत नही होंगी तब तक वो घर नही बल्कि तबेला बन कर रह जाता है
ये सब माजी को पता था पर इनको कभी पूजा के पास जाना पड़ा तो कभी नेहा के यो कभी नीता के पास रहना
माजी को तो लगा कि पिताजी घर को संभाल लेंगे
शालिनी ने इस बात पे भी नज़र लगाकर रखी
वो थी ही ऐसी बहू कि सबका ध्यान रलती थी
नेहा को बेटी होते पिताजी तो सीधे नेहा के पास आ गये
और नेहा की बेटी को प्यार करने लगे
पिताजी के खुशी का कोई ठिकाना नही था
उनकी प्यारी बेटी को कोमल बेटी हुई थी
पिताजी की खुशी डबल शालिनी ने की
एक हाथ मे कोमल और दूसरे हाथ मे अवी
पिताजी को यही तो चाहिए था
माजी की आँख तो जयसिंघ को ढूँढ रही थी पर वो कही दिखाई नही दिया
शालिनी ने सबको विश्वास दिलाया कि वो सब ठीक कर देगी
पिताजी को तो उनका पोता पोती मिल गयी
ये खुशी के पल जल्दी ख़तम हो गये
शालिनी शहर3 वापस चली गयी और पिताजी को माजी के साथ गाँव आना पड़ा
पर उसके बाद नीता के बच्चे को देखने आई तब भी पिता जी ने शालिनी को 1 महीने के लिए रो क लिया
उसके बाद छोटू की शादी के बाद नीता ने राजेस और लीना को जानम दिया नेहा ने कविता की जनम दिया और उसके बाद पूजा ने एक बेटे
को जनम दिया
शालिनी ऐसे बहाने ढूँढती रहती कि उसको सबसे मिलने जाने को मिले
पिताजी तो हर महीने की शुरुआत मे शालिनी के खत का इंतज़ार करते
माजी को भी इसी का इंतज़ार था
और इस बार जो खत आया उस से पिताजी और खास करके माजी खुश हो गयी
--------->>>>>>>>>
माजी- बहू का खत आया कि नही
पिताजी-जा रहा हूँ पोस्ट घर ,
माजी- जल्दी जाइए ना , अवी कितना बड़ा हो गया होगा
पिताजी- तुमसे ज़्यादा मुझे जल्दी है अपने पोते की फोटो देखने की
माजी- हमारी बहू कितनी समझदार है , हमे खुश रखने के लिए हर महीने अवी की फोटो भेजती है और साथ मे वहाँ क्या हुआ वो भी बताती है
पिताजी- वो तुम्हारी बहू होंगी मेरी तो बेटी है
माजी- मेरी भी बेटी है शालिनी
पिताजी- अच्छा, शालिनी को मैं ने ढूँढ निकाला था
माजी- मैं ने भी मदद की थी , मुझे जयसिंघ से झूठ बोलने को कहा था आपने
पिताजी- पर उस झूठ से आज सब खुश है
माजी- बस जयसिंघ बात को समझ पाता तो
पिताजी- जयसिंघ को जाने दो , देखा नही शालिनी बहू ने नेहा और नीता की लाइफ बना दी
माजी- अपने पति के खिलाफ जाकर ऐसा कदम उठाना , बहादुरी का काम है , मुझसे तो नही होता
पिताजी- शालिनी ने ये साबित कर दिया नेहा की शादी मे की नेहा उसकी ननद नही बहन है
मसजी- आजकल की बहू तो सास ससुर की घर से निकाल देती है , पर हमारी बहू तो देवी है
पिताजी- हाँ , नेहा के लिए जो शालिनी ने किया वो मैं कभी नही भूल सकता
माजी- अब क्या यही बाते करेंगे आप
पिताजी- हमेशा बात तुम सुरू करती हो
मसजी- जब भी शालिनी का नाम आता है तो वो बाते अपने आप याद आती है
पिताजी- शालिनी मे कुछ बात है , देखा नही नेहा के माँ बनते ही वो आ गयी पर जयसिंघ नही आया ,,
माजी- कैसे सब संभालती होंगी शालिनी
पिताजी- पता नही जयसिंघ कैसा रखता होगा मेरी बेटी को
मसजी- बहू ने कहा था कि कोमल की फोटो देखते ही जयसिंघ की आँख मे आँसू आए थे
पिताजी- हाँ , और जयसिंघ ज़्यादा गुस्सा होता वो फोटो फेक देता पर उसने ऐसा नही किया
माजी- जयसिंघ बुरा नही है ,
पिताजी- शालिनी उसके साथ है फिर तुम क्यूँ डर रही हो
माजी- शालिनी जयसिंघ के साथ उसी लिए तो चैन से साँस ले पा रही हूँ
पिताजी- अब मैं जाऊं या कुछ बताना बाकी है
माजी- जाइए , और बहू का खत लेकर आना
पिताजी- खत नही आया होगा तो
माजी- तो आपको बाहर सोना पड़ेगा
पिताजी- फिर तो खत लाना ही होगा
और पिताजी शालिनी का खत लाने चले गये
शालिनी ने पिछले खत मे कहा था कि वो इस बार कुछ ऐसा लिख कर भेजेगी कि माजी खुश हो जाएगी
माजी को तो बस अब उस खत का इंतज़ार था
बहू किस खुश खबरी की बात कर रही थी
सुमन 2
शालिनी इस इंतज़ार मे थी कि जयसिंघ की किसी भी तरह नेहा के सामने ले जाए ताकि या तो पता चले कि आग कितनी लगी है
शालिनी को लगा कि नेहा के मा बनते जयसिंघ नेहा को मिलने जाएगा
पर ऐसा नही हुआ , जयसिंघ नेहा से मिलने नही गया
पर नेहा और कोमल की फोटो देख कर जयसिंघ के आँख के आँसू बता रहे थे कि जयसिंघ का दिल पत्थर का नही है
जयसिंघ को सही तरीके से हॅंडल किया जाए तो सब ठीक हो सकता है
बस ऐसा कुछ हो जाए कि जयसिंघ और नेहा आमने सामने आ जाए
ये कैसा होगा ये शालिनी ने सोच लिया
शालिनी हर महीने पिताजी को खत लिख कर जयसिंघ और शहर3 के बारे में बता देती थी
पिताजी को हर महीने अवी की फोटो भेज देती जिस से पिताजी को अच्छा लगता
माजी को भी अपनी बहू पर नाज़ था
शालिनी की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम थी
ऐसे एक दिन शालिनी ने खत मे वो लिखा जिसे सुनकर माजी खुश हो गयी
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नेहा नीता के शादी के बाद तो जैसे घर सुना सुना हो गया था
नेहा थी तब तक घर मे मस्ती मज़ाक चलता था
माजी को भी नेहा की मस्तिया अच्छी लगती थी
नेहा का परेशान करना सबको अच्छा लगता था
नेहा नीता के ससुराल जाते ही पिताजी और माजी अकेले पड़ गये
पूजा भी अपने ससुराल वापस चली गयी
नेहा नीता के जाने के बाद पिताजी कुछ दिन तक स्वेता सिस्टल के साथ अपना दिल लगाए हुए थे
पर पूजा के जाते ही पिताजी और माजी अकेले पड़ गये
तीनो बेटियो की शादी हो गयी , बहू भी शहर3 चली गयी ऐसे मे पिताजी की हस्ती खेलती ज़िंदगी जैसे थम सी गयी थी
घर मे बस पिताजी माजी और छोटू रह गये
अगर अवी रहता तो पिताजी की लाइफ इतनी बेरंग नही होती
पर पिताजी और माजी खुश थे अपनी बेटियो के बारे में सुनकर
नीता ने जिस तरह खुद की संभाला और समझदार बन गयी ये देख कर पिताजी को यकीन नही हो रहा था कि ये हमारी नीता है
नीता की शादी कैसे हुई
कोई तय्यार नही था इसके लिए
ना नीता को सास ससुराल थे ना कोई ननद देवर था
नीता और जतिन ने एक दूसरे का साथ देते हुए अपने घर को संभाल लिया
पिताजी को तो अपनी बेटियो पे नाज़ था
नीता ने अपने दम पे अपनी छोटी सी दुनिया नेहा के साथ सुरू की
नेहा के घर मे तो सास ससुर थे फिर भी उस घटना के बाद नेहा ने भी एक पॉज़िटिव शुरुआत की
सब कुछ पीछे छोड़ कर नयी शुरुआत की
नीता का सपना भी पूरा हुआ ,
शादी के बाद नेहा और नीता का घर एक दूसरे को लग कर था
नीता तो यही चाहती थी
माजी को अपनी बेटियो की क़ाबलियत देख कर सुकून मिला
हर तरफ से अच्छी खबर मिल रही थी
पूजा नेहा नीता तीनो एक ही शहर2 मे थे जिस से तीनो एक दूसरे के साथ थी
पर यहाँ पीछे रह गया था छोटू
छोटू की वजह से माँ का दिल तो लगा रहता था पर पिताजी के पास ना उनकी बेटियाँ थी ना पोते पोती थी ,
ऐसे मे पिताजी अपना दिल लगाने के लिए हवेली जाने लगे
ठाकुरजी के साथ थोड़ी बहुत मस्ती करते थे
नेहा की डेलिवरी गाँव मे करने की जगह सुरेश ने शहर2 मे की ,
पर नेहा को मदद मिले इस लिए माजी नीता जी घर जाकर 2महीने रही जब तक नेहा माँ नही बनी
ऐसा करने से नेहा को मदद मिल गयी
पर पिताजी माजी के बिना कैसे रहते
पर रहना तो पड़ेगा ना , अब बच्चो की शादी हो गयी
पिताजी माजी को जाने नही दे रहे थे
पर माजी ने खुद की कसम दी
माजी का दिल भी नही कर रहा था पिताजी से दूर जाने का
पर बच्चो के लिए ये सब तो करना पड़ता है
माजी के जाते घर मे दो खुले सांड़ घूमने लगे
एक पिताजी और दूसरा छोटू
पिताजी तो खेतो और हवेली मे जाते
जिस से छोटू को पूरी आज़ादी मिल गयी
छोटू तो घर मे जैसा चाहे वैसा रहता
छोटू तो कुछ लड़कियो को घर मे लाने लगा
माजी होती तो वो छोटू को ऐसा नही करने देती
ये सब इस लिए हो रहा था कि घर मे एक औरत नही थी
घर मे एक औरत का होना कितना ज़रूरी था ये माजी भूल गयी थी
पर शालिनी को ये बात पता थी
घर मे जब तक एक औरत नही होंगी तब तक वो घर नही बल्कि तबेला बन कर रह जाता है
ये सब माजी को पता था पर इनको कभी पूजा के पास जाना पड़ा तो कभी नेहा के यो कभी नीता के पास रहना
माजी को तो लगा कि पिताजी घर को संभाल लेंगे
शालिनी ने इस बात पे भी नज़र लगाकर रखी
वो थी ही ऐसी बहू कि सबका ध्यान रलती थी
नेहा को बेटी होते पिताजी तो सीधे नेहा के पास आ गये
और नेहा की बेटी को प्यार करने लगे
पिताजी के खुशी का कोई ठिकाना नही था
उनकी प्यारी बेटी को कोमल बेटी हुई थी
पिताजी की खुशी डबल शालिनी ने की
एक हाथ मे कोमल और दूसरे हाथ मे अवी
पिताजी को यही तो चाहिए था
माजी की आँख तो जयसिंघ को ढूँढ रही थी पर वो कही दिखाई नही दिया
शालिनी ने सबको विश्वास दिलाया कि वो सब ठीक कर देगी
पिताजी को तो उनका पोता पोती मिल गयी
ये खुशी के पल जल्दी ख़तम हो गये
शालिनी शहर3 वापस चली गयी और पिताजी को माजी के साथ गाँव आना पड़ा
पर उसके बाद नीता के बच्चे को देखने आई तब भी पिता जी ने शालिनी को 1 महीने के लिए रो क लिया
उसके बाद छोटू की शादी के बाद नीता ने राजेस और लीना को जानम दिया नेहा ने कविता की जनम दिया और उसके बाद पूजा ने एक बेटे
को जनम दिया
शालिनी ऐसे बहाने ढूँढती रहती कि उसको सबसे मिलने जाने को मिले
पिताजी तो हर महीने की शुरुआत मे शालिनी के खत का इंतज़ार करते
माजी को भी इसी का इंतज़ार था
और इस बार जो खत आया उस से पिताजी और खास करके माजी खुश हो गयी
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माजी- बहू का खत आया कि नही
पिताजी-जा रहा हूँ पोस्ट घर ,
माजी- जल्दी जाइए ना , अवी कितना बड़ा हो गया होगा
पिताजी- तुमसे ज़्यादा मुझे जल्दी है अपने पोते की फोटो देखने की
माजी- हमारी बहू कितनी समझदार है , हमे खुश रखने के लिए हर महीने अवी की फोटो भेजती है और साथ मे वहाँ क्या हुआ वो भी बताती है
पिताजी- वो तुम्हारी बहू होंगी मेरी तो बेटी है
माजी- मेरी भी बेटी है शालिनी
पिताजी- अच्छा, शालिनी को मैं ने ढूँढ निकाला था
माजी- मैं ने भी मदद की थी , मुझे जयसिंघ से झूठ बोलने को कहा था आपने
पिताजी- पर उस झूठ से आज सब खुश है
माजी- बस जयसिंघ बात को समझ पाता तो
पिताजी- जयसिंघ को जाने दो , देखा नही शालिनी बहू ने नेहा और नीता की लाइफ बना दी
माजी- अपने पति के खिलाफ जाकर ऐसा कदम उठाना , बहादुरी का काम है , मुझसे तो नही होता
पिताजी- शालिनी ने ये साबित कर दिया नेहा की शादी मे की नेहा उसकी ननद नही बहन है
मसजी- आजकल की बहू तो सास ससुर की घर से निकाल देती है , पर हमारी बहू तो देवी है
पिताजी- हाँ , नेहा के लिए जो शालिनी ने किया वो मैं कभी नही भूल सकता
माजी- अब क्या यही बाते करेंगे आप
पिताजी- हमेशा बात तुम सुरू करती हो
मसजी- जब भी शालिनी का नाम आता है तो वो बाते अपने आप याद आती है
पिताजी- शालिनी मे कुछ बात है , देखा नही नेहा के माँ बनते ही वो आ गयी पर जयसिंघ नही आया ,,
माजी- कैसे सब संभालती होंगी शालिनी
पिताजी- पता नही जयसिंघ कैसा रखता होगा मेरी बेटी को
मसजी- बहू ने कहा था कि कोमल की फोटो देखते ही जयसिंघ की आँख मे आँसू आए थे
पिताजी- हाँ , और जयसिंघ ज़्यादा गुस्सा होता वो फोटो फेक देता पर उसने ऐसा नही किया
माजी- जयसिंघ बुरा नही है ,
पिताजी- शालिनी उसके साथ है फिर तुम क्यूँ डर रही हो
माजी- शालिनी जयसिंघ के साथ उसी लिए तो चैन से साँस ले पा रही हूँ
पिताजी- अब मैं जाऊं या कुछ बताना बाकी है
माजी- जाइए , और बहू का खत लेकर आना
पिताजी- खत नही आया होगा तो
माजी- तो आपको बाहर सोना पड़ेगा
पिताजी- फिर तो खत लाना ही होगा
और पिताजी शालिनी का खत लाने चले गये
शालिनी ने पिछले खत मे कहा था कि वो इस बार कुछ ऐसा लिख कर भेजेगी कि माजी खुश हो जाएगी
माजी को तो बस अब उस खत का इंतज़ार था
बहू किस खुश खबरी की बात कर रही थी