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फ्लश 1025
छोटू की शादी होते ही माँ की चिंता ख़तम हो गयी
शालिनी ने सुमन को बहुत सी बाते बता दी
माँ को अब घर की चिंता नही थी
इसी बीच नीता ने अपनी माँ को शहर2 बुला लिया
नीता की डेलिवरी जो थी
अब घर को देखने के लिए सुमन थी
ऐसे मे माँ नीता के घर चली गयी
सब ने घर की ज़िम्मेदारी उठा ली
पिताजी ने भी खेतो का काम छोटू के भरोसे छोड़ दिया और ठाकुरजी के साथ ज़्यादातर हवेली रहने लगे
पिताजी ऐसा इस लिए कर रहे थे कि एक तो माँ नीता के पास गयी थी
और नये शादी सुदा जोड़े को प्राइवसी मिले उस लिए पिताजी हवेली ही रहते थे
नीहा ने कोमल के रूप मे खुशी दी थी अब नीता की बारी थी
अब नीता के घर से खुशख़बरी आनी बाकी थी.
कुछ महीने बाद नीता ने भी सबको खुशकबरी सुना दी
नीता की प्रेगॅनेन्सी भी शहर2 मे हुई
नीता के ससुराल मे कोई नही था जिस से नीता की देख भाल माँ को करनी पड़ी.
माँ के शहर2 जाते ही पिताजी हवेली मे रहने लगे और छोटू सुमन के प्यार मे खोया था
दोनो अपनी मर्ज़ी से रहने लगे.
नीता को जुड़वा बच्चे हुए, एक लड़का और एक लड़की.
शालिनी तब भी नीता नेहा से मिलने आ गयी.
शालिनी को एक बहाना चाहिए था जिस से जयसिंघ भी उसको मना ना कर सके.
शालिनी ने जयसिंघ को चलने को कहा पर उसने आने से मना कर दिया
अगर वो नीता के बच्चे को देखने आता और नेहा की कोमल से मिलने नही आया उस से नेहा को कैसा लगेगा
इस लिए जयसिंघ ने ना जाने का फ़ैसला किया
फिर से पिताजी को अपने पोते को प्यार करने मिला .अवी को प्यार करने से पिताजी को अलग खुशी मिलती थी.
जतिन ने अपने बेटे का नाम नीता को जो पसंद था वही रखा, बेटे का नाम राजेश और बेटी का नाम लीना रखा.
नीता 2 बच्चो के लिए तय्यार नही थी पर अब हुए तो नीता ने उनको इस दुनिया को जीना सिखाना सुरू किया.
माँ नीता के पास रहने लगी. माँ के जाने से छोटू और सुमन ने घर का ध्यान रखा
फिर भी इन्सब मे हर कोई खुश था.
नीता के माँ बन ने के 5 महीने बाद नेहा ने फिर से एक बेटी को जनम दिया.
माँ वही रुकी हुई थी
नीता को.मदद करते हुए नेहा की डेलिवरी भी हो गयी
फिर से बेटी होने से सुरेश उदास था पर नेहा के प्यार की वजह से उसने इस बात पे ज़्यादा ध्यान नही दिया.
सुरेश के छोटे भाई की शादी अभी होनी बाकी थी.(सुरेश की फॅमिली मे वो उसका छोटा भाई माँ और पिताजी थे )
नेहा और सुरेश ने 2 बेटी पे ओपरेशन करा दिया ,नीता ने भी अपना ओपरेशन कर दिया.
हर साल पिताजी को एक पोता पोती मिल रही थी.
पहले पूजा ,फिर शालिनी, नेहा ,उसके बाद नीता,सब ने पिताजी को दादा /नाना बना कर खुशी दे रहे थे
माँ एक साल तक शहर2 मे नीता के घर पे रही
नीता के खुद बच्चो को संभालने से माँ गाँव आ गयी.
गाँव आते ही माँ को लगा कि सुमन ने अब तक खुश खबरी नही दी
एक साल हो गया शादी को
माजी को अब डर लगने लगा था
अब तो छोटू बड़ा हो गया था जिस से माजी उसको डॉक्टर के पास कैसे ले जाती
और गाँव का पुराने वैद्य की डेत हो चुकी थी
अब माँ को बड़ी चिंता होने लगी
माँ ने गाँव आते ही पिताजी से बात की , पिताजी ने कहा की आराम से बच्चे हो जाएँगे उनको प्यार तो करने दो
पिताजी ने यही कहा कि छोटू का हाथ काम मे बस गया तो वो खुद आगे का सोच लेंगे
पर माँ ने पिताजी के एक बात नही मानी और वो जल्द से जल्द छोटू को बाप बना हुआ देखना चाहती थी
शादी करने के बाद छोटू सब ठीक हो जाएगा ऐसा माँ को लग रहा था.
माँ थोड़ी परेशान रहने लगी
वो बात कैसे करे बहू और छोटू से यही सोच रही थी
इसी बीच पूजा फिर से माँ बन गयी.
तो माँ को फिर से शहर2 जाना पड़ा
पूजा ने एक बेटे को जनम दिया ,
पिताजी पूजा को बेटा होने से खुशी से फूले नही समा रहे थे.
पिताजी पूजा को अपना बेटा मानते थे . पूजा को बेटा होने से पिताजी सब से ज़्यादा खुश थे.
छोटू की शादी होते ही माँ की चिंता ख़तम हो गयी
शालिनी ने सुमन को बहुत सी बाते बता दी
माँ को अब घर की चिंता नही थी
इसी बीच नीता ने अपनी माँ को शहर2 बुला लिया
नीता की डेलिवरी जो थी
अब घर को देखने के लिए सुमन थी
ऐसे मे माँ नीता के घर चली गयी
सब ने घर की ज़िम्मेदारी उठा ली
पिताजी ने भी खेतो का काम छोटू के भरोसे छोड़ दिया और ठाकुरजी के साथ ज़्यादातर हवेली रहने लगे
पिताजी ऐसा इस लिए कर रहे थे कि एक तो माँ नीता के पास गयी थी
और नये शादी सुदा जोड़े को प्राइवसी मिले उस लिए पिताजी हवेली ही रहते थे
नीहा ने कोमल के रूप मे खुशी दी थी अब नीता की बारी थी
अब नीता के घर से खुशख़बरी आनी बाकी थी.
कुछ महीने बाद नीता ने भी सबको खुशकबरी सुना दी
नीता की प्रेगॅनेन्सी भी शहर2 मे हुई
नीता के ससुराल मे कोई नही था जिस से नीता की देख भाल माँ को करनी पड़ी.
माँ के शहर2 जाते ही पिताजी हवेली मे रहने लगे और छोटू सुमन के प्यार मे खोया था
दोनो अपनी मर्ज़ी से रहने लगे.
नीता को जुड़वा बच्चे हुए, एक लड़का और एक लड़की.
शालिनी तब भी नीता नेहा से मिलने आ गयी.
शालिनी को एक बहाना चाहिए था जिस से जयसिंघ भी उसको मना ना कर सके.
शालिनी ने जयसिंघ को चलने को कहा पर उसने आने से मना कर दिया
अगर वो नीता के बच्चे को देखने आता और नेहा की कोमल से मिलने नही आया उस से नेहा को कैसा लगेगा
इस लिए जयसिंघ ने ना जाने का फ़ैसला किया
फिर से पिताजी को अपने पोते को प्यार करने मिला .अवी को प्यार करने से पिताजी को अलग खुशी मिलती थी.
जतिन ने अपने बेटे का नाम नीता को जो पसंद था वही रखा, बेटे का नाम राजेश और बेटी का नाम लीना रखा.
नीता 2 बच्चो के लिए तय्यार नही थी पर अब हुए तो नीता ने उनको इस दुनिया को जीना सिखाना सुरू किया.
माँ नीता के पास रहने लगी. माँ के जाने से छोटू और सुमन ने घर का ध्यान रखा
फिर भी इन्सब मे हर कोई खुश था.
नीता के माँ बन ने के 5 महीने बाद नेहा ने फिर से एक बेटी को जनम दिया.
माँ वही रुकी हुई थी
नीता को.मदद करते हुए नेहा की डेलिवरी भी हो गयी
फिर से बेटी होने से सुरेश उदास था पर नेहा के प्यार की वजह से उसने इस बात पे ज़्यादा ध्यान नही दिया.
सुरेश के छोटे भाई की शादी अभी होनी बाकी थी.(सुरेश की फॅमिली मे वो उसका छोटा भाई माँ और पिताजी थे )
नेहा और सुरेश ने 2 बेटी पे ओपरेशन करा दिया ,नीता ने भी अपना ओपरेशन कर दिया.
हर साल पिताजी को एक पोता पोती मिल रही थी.
पहले पूजा ,फिर शालिनी, नेहा ,उसके बाद नीता,सब ने पिताजी को दादा /नाना बना कर खुशी दे रहे थे
माँ एक साल तक शहर2 मे नीता के घर पे रही
नीता के खुद बच्चो को संभालने से माँ गाँव आ गयी.
गाँव आते ही माँ को लगा कि सुमन ने अब तक खुश खबरी नही दी
एक साल हो गया शादी को
माजी को अब डर लगने लगा था
अब तो छोटू बड़ा हो गया था जिस से माजी उसको डॉक्टर के पास कैसे ले जाती
और गाँव का पुराने वैद्य की डेत हो चुकी थी
अब माँ को बड़ी चिंता होने लगी
माँ ने गाँव आते ही पिताजी से बात की , पिताजी ने कहा की आराम से बच्चे हो जाएँगे उनको प्यार तो करने दो
पिताजी ने यही कहा कि छोटू का हाथ काम मे बस गया तो वो खुद आगे का सोच लेंगे
पर माँ ने पिताजी के एक बात नही मानी और वो जल्द से जल्द छोटू को बाप बना हुआ देखना चाहती थी
शादी करने के बाद छोटू सब ठीक हो जाएगा ऐसा माँ को लग रहा था.
माँ थोड़ी परेशान रहने लगी
वो बात कैसे करे बहू और छोटू से यही सोच रही थी
इसी बीच पूजा फिर से माँ बन गयी.
तो माँ को फिर से शहर2 जाना पड़ा
पूजा ने एक बेटे को जनम दिया ,
पिताजी पूजा को बेटा होने से खुशी से फूले नही समा रहे थे.
पिताजी पूजा को अपना बेटा मानते थे . पूजा को बेटा होने से पिताजी सब से ज़्यादा खुश थे.