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मैं और मेरा परिवार

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फ्लश 1025

छोटू की शादी होते ही माँ की चिंता ख़तम हो गयी

शालिनी ने सुमन को बहुत सी बाते बता दी

माँ को अब घर की चिंता नही थी

इसी बीच नीता ने अपनी माँ को शहर2 बुला लिया

नीता की डेलिवरी जो थी

अब घर को देखने के लिए सुमन थी

ऐसे मे माँ नीता के घर चली गयी

सब ने घर की ज़िम्मेदारी उठा ली

पिताजी ने भी खेतो का काम छोटू के भरोसे छोड़ दिया और ठाकुरजी के साथ ज़्यादातर हवेली रहने लगे

पिताजी ऐसा इस लिए कर रहे थे कि एक तो माँ नीता के पास गयी थी

और नये शादी सुदा जोड़े को प्राइवसी मिले उस लिए पिताजी हवेली ही रहते थे

नीहा ने कोमल के रूप मे खुशी दी थी अब नीता की बारी थी

अब नीता के घर से खुशख़बरी आनी बाकी थी.

कुछ महीने बाद नीता ने भी सबको खुशकबरी सुना दी

नीता की प्रेगॅनेन्सी भी शहर2 मे हुई

नीता के ससुराल मे कोई नही था जिस से नीता की देख भाल माँ को करनी पड़ी.

माँ के शहर2 जाते ही पिताजी हवेली मे रहने लगे और छोटू सुमन के प्यार मे खोया था

दोनो अपनी मर्ज़ी से रहने लगे.

नीता को जुड़वा बच्चे हुए, एक लड़का और एक लड़की.

शालिनी तब भी नीता नेहा से मिलने आ गयी.

शालिनी को एक बहाना चाहिए था जिस से जयसिंघ भी उसको मना ना कर सके.

शालिनी ने जयसिंघ को चलने को कहा पर उसने आने से मना कर दिया

अगर वो नीता के बच्चे को देखने आता और नेहा की कोमल से मिलने नही आया उस से नेहा को कैसा लगेगा

इस लिए जयसिंघ ने ना जाने का फ़ैसला किया

फिर से पिताजी को अपने पोते को प्यार करने मिला .अवी को प्यार करने से पिताजी को अलग खुशी मिलती थी.

जतिन ने अपने बेटे का नाम नीता को जो पसंद था वही रखा, बेटे का नाम राजेश और बेटी का नाम लीना रखा.

नीता 2 बच्चो के लिए तय्यार नही थी पर अब हुए तो नीता ने उनको इस दुनिया को जीना सिखाना सुरू किया.

माँ नीता के पास रहने लगी. माँ के जाने से छोटू और सुमन ने घर का ध्यान रखा

फिर भी इन्सब मे हर कोई खुश था.

नीता के माँ बन ने के 5 महीने बाद नेहा ने फिर से एक बेटी को जनम दिया.

माँ वही रुकी हुई थी

नीता को.मदद करते हुए नेहा की डेलिवरी भी हो गयी

फिर से बेटी होने से सुरेश उदास था पर नेहा के प्यार की वजह से उसने इस बात पे ज़्यादा ध्यान नही दिया.

सुरेश के छोटे भाई की शादी अभी होनी बाकी थी.(सुरेश की फॅमिली मे वो उसका छोटा भाई माँ और पिताजी थे )

नेहा और सुरेश ने 2 बेटी पे ओपरेशन करा दिया ,नीता ने भी अपना ओपरेशन कर दिया.

हर साल पिताजी को एक पोता पोती मिल रही थी.

पहले पूजा ,फिर शालिनी, नेहा ,उसके बाद नीता,सब ने पिताजी को दादा /नाना बना कर खुशी दे रहे थे

माँ एक साल तक शहर2 मे नीता के घर पे रही

नीता के खुद बच्चो को संभालने से माँ गाँव आ गयी.

गाँव आते ही माँ को लगा कि सुमन ने अब तक खुश खबरी नही दी

एक साल हो गया शादी को

माजी को अब डर लगने लगा था

अब तो छोटू बड़ा हो गया था जिस से माजी उसको डॉक्टर के पास कैसे ले जाती

और गाँव का पुराने वैद्य की डेत हो चुकी थी

अब माँ को बड़ी चिंता होने लगी

माँ ने गाँव आते ही पिताजी से बात की , पिताजी ने कहा की आराम से बच्चे हो जाएँगे उनको प्यार तो करने दो

पिताजी ने यही कहा कि छोटू का हाथ काम मे बस गया तो वो खुद आगे का सोच लेंगे

पर माँ ने पिताजी के एक बात नही मानी और वो जल्द से जल्द छोटू को बाप बना हुआ देखना चाहती थी

शादी करने के बाद छोटू सब ठीक हो जाएगा ऐसा माँ को लग रहा था.

माँ थोड़ी परेशान रहने लगी

वो बात कैसे करे बहू और छोटू से यही सोच रही थी

इसी बीच पूजा फिर से माँ बन गयी.

तो माँ को फिर से शहर2 जाना पड़ा

पूजा ने एक बेटे को जनम दिया ,

पिताजी पूजा को बेटा होने से खुशी से फूले नही समा रहे थे.

पिताजी पूजा को अपना बेटा मानते थे . पूजा को बेटा होने से पिताजी सब से ज़्यादा खुश थे.
 
शालिनी इसी का इंतज़ार कर रही थी. शालिनी के आते ही पिताजी ने हमेशा की तरह वही सवाल पूछा और शालिनी ने उनकी गोद मे अवी को दिया.

पूजा ने बेटा होते ही ऑपरेशन करा लिया.

समधन पोता होते ही उनके सारे अरमान पूरे हुए.

समधन ने अपनी खुशी अपने दूसरे पति मतलब पिताजी के साथ रात भर मनाई

पूजा के माँ बनने के बाद जब माजी गाँव आई तो वो अलग ही रूप मे थी

माजी ने आते ही सुमन को परेशान करना स्टार्ट किया

उनको पोता चाहिए था

अब इस मे बिचारी सुमन क्या करती

वो तो चुप चाप माजी बात सुनती थी

छोटू ने सुमन को प्यार करना बंद नही किया

छोटू सुमन को हिम्मत से काम लेने को बोलता

माँ की चिंताएँ बढ़ रही थी

माँ सोचने लगी कि सुमन मे ही खोट होगा

उनको.लग रहा था कि डॉक्टेर ने कहा था कि छोटू फिट है

ऐसे मे माजी को सुमन मे दोष नज़र आ रहा था

माँ इस बात से सोच मे डूबी रहती

थोड़ी चिड चिड करने लगी थी

सुमन से ठीक से बात नही करती

सुमन पे गुस्सा करती

सुमन को तो उसके मायके भी भेज दिया पर सुमन वापस आ गयी

अगर माँ सुमन को कुछ कहती तो आँसू छोटू की आँखो से निकलने लगते

माँ भी क्या करती वो बस अपने बेटे को बाप बनता हुआ देखना चाहती थी

उस बीच जयसुंघ का जनम दिन आया

फिर तो माँ और दुख मे डूब गयी

एक तरफ छोटू की टेन्षन तो दूसरी तरफ जयसिंघ की याद आ रही थी

और उनको पिताजी से ही दूर रहना पड़ रहा था बेटियो के लिए

पिताजी ने जान लिया कि सास बहू मे क्या चल रहा है

माँ के दिल की बात जान गये थे

और इस बार पिताजी माँ छोटू और सुमन को बाहर घुमाने ले गये

ऐसी जगह जहाँ जाकर माँ को इतनी खुशी मिली कि वो कुछ दिन वही रुक गयी

उनको तो यकीन नही हो रहा था जी पिताजी ने किया

फिर से सब खुश थे

पर उसी बीच एक बुरी खबर सुनने को.मिली

,एक बुरी खबर सुन कर माँ को शहर2 जाना पड़ा.

नेहा के सास ससुर अपने छोटे बेटे के साथ उसके लिए शादी का रिश्ता लेकर जा रहे थे कि बस का आक्सिडेंट हो गया.

पिताजी को खबर मिलते ही बिना देर की सब नेहा के घर चले गये.

आक्सिडेंट इतना भयानक था कि एक भी पॅसिनजर नही बच पाया.

नेहा के सास ससुर और देवर इस दुनिया मे नही रहे, साथ मे रमेश की माँ जो लड़की दिखा रही थी वो भी उस बस मेथी.

समधन भी इस दुनिया मे नही रही.

समधन पिताजी की दूसरी बीवी की तरह थी. पिताजी समधन के जाने से दुखी हो गये.

पिताजी ने समधन को आख़िरी के दिनो मे जो प्यार दिया उस से समधन खुश थी, अपने पोते का चेहरा देख कर समधन खुशी खुशी भगवान के घर चली गयी.

नेहा और सुरेश को इसका जोरदार झटका लगा.

सब ने नेहा और सुरेश को हिम्मत रखने को कहा.

शालिनी के आने से नेहा के आसुओं का बाँध टूट गया.

शालिनी ने साथ पहली बार जयसिंघ भी आया था .

जयसिंघ को भी लगा कि इस वक्त उसको जाना ही होगा

भले वो बात ना करे ऑर उसको वहाँ देख कर नेहा का दर्द तो कम होगा कि उसका भाई भी आया है

वो बाहर ही रहा ,पर अपने भैया को देख कर नेहा को दिलासा मिली कि उसके साथ पूरी फॅमिली है.

माँ नेहा का दुख दूर करने के लिए वही रुक गयी.

सुमन की शादी को 2 साल हुए थे

जिस से वो घर की ज़िम्मेदारी अच्छे से उठा रही थी

सुमन ने अपनी सास को निराश नही किया .और अकेले घर की देखभाल करने लगी.

पिताजी भी महीने मे एक बार माँ से मिलने चले जाते.

छोटू ने पूरा काम अपने कंधो पे ले लिया.

छोटू और सुमन ने मिल के घर को संभाल लिया.

छोटू और सुमन का प्यार और मज़बूत होता गया.

पिताजी ने सुमन पे जो विश्वास दिखाया उसपे सुमन सही साबित हुई.

बिना अपनी सास के जेठानी के सुमन ने इतने बड़े घर को और छोटू ने खेतो को संभाल लिया.

क्यूँ कि.माँ छोटू की शादी के बाद घर कम और शहर 2 ज़्यादा रहने लगी थी
 
फ्लश 1026

दिन हफ़्तो मे ,हफ्ते महीनो मे ,और महीने सालो मे बीत गये.

माँ नेहा के साथ रहने लगी, जिस से नीता को भी सहारा मिल गया.

इधर सुमन और छोटू प्यार करने मे कोई कमी नही रख रहे थे.

पर अभी तक पिताजी को खुशख़बरी सुन ने को नही मिली.

3 साल बीत गये ,माँ भी गाँव वापस आ गयी पर सुमन की तरफ से खुशख़बरी मिल नही रही थी.

माँ और पिताजी ने सुमन से बात की पर इसमे सुमन क्या कर सकती थी.

पर माँ को छोटू को बाप बने हुए देखना था.

माँ इस वजह से चिड चिड़ी रहने लगी

सुमन ने खत लिख कर शालिनी को बताया

शालिनी ने कहा कि भक़्गवान पे विश्वास रखो , वो सब ठीक कर देगा

शालिनी ने सुमन को समझाया कि इस मुश्किल समय मे टूटे ना

हिम्मत से काम ले , छोटू के प्यार पे विश्वास रखो

माजी छोटू को बहुत प्यार करती है जिस से उनकी जगह कोई भी होता तो यही कहता , बस तुम सयम से काम लेना

शालिनी की बातों से सुमन को सपोर्ट मिला

माजी की कड़वी बातों को उनका आशीर्वाद समझने लगी

सुमन के नसीब मे माँ बनना होगा तो वो ज़रूर माँ बन जाएगी

छोटू भी सुमन की तरफ से बोलता था

पर माँ सुमन पर ज़ोर डालने लगी. पर पिताजी ने माँ को रोक लिया ,पिताजी को भगवान पर विश्वास था.

पिताजी ने सुमन पर भरोसा करते हुए इंतज़ार करने का सोचा.

माँ महीने मे एक बार अपनी बेटियो को मिलने ज़रूर जाती.

शालिनी भी सुमन के माँ बन ने का इंतज़ार कर रही थी

देखते देखते और समय बीतता गया.

नेहा और सुरेश भी पिछली बाते भूल कर नये से ज़िंदगी जीने लगे

सुरेश और नेहा मे बेटे को लेकर एक 2 बार झगड़ा भी हो गया.पर बाद मे सुरेश ने नेहा के प्यार के सामने कोमल और कविता को बेटे की तरह प्यार करना सुरू किया

पर नेहा कोमल और कविता से खुश थी ,वो नही चाहती थी कि बेटा होने से उसका असर अपनी बेटी पर हो.

नेहा के लिए कोमल ही सब कुछ थी.

सुरेश ने पहले सोचा था कि उसके छोटे भाई को बेटा होगा ,जिस से उनका नाम आगे चलेगा .

पर आक्सिडेंट मे उसके छोटे भाई की डेत होने से सुरेश नेहा से बात की इस बारे में

पर नेहा ने कोमल के लिए सुरेश को मना कर दिया .

सुरेश अपने माता पिता को खो चुका था अब नेहा को खोना नही चाहता था.

सुरेश ने नेहा से माफी माँग ली और कोमल को बेटे जैसा प्यार करने लगा.

नेहा सुरेश का प्यार पा कर अपने दुख भूल गयी.

सुरेश अपने काम मे लग गया ,अपनी बेटियो के लिए पैसे कमाने लगा.

सब अपनी दुनिया मे खुशी खुशी रहने लगे.

पर इधर सुमन माँ ना बन ने से दुखी रहने लगी

छोटू भी इस बात की वजह से सो नही पा रहा था.

माँ बार बार छोटू को कहती कि सुमन को कुछ कहो पर छोटू सुमन से प्यार जो करता था ऐसे मे वो सुमन को दुख नही देना चाहता था

माँ से अब और बर्दास्त नही हो रहा था.

माँ ने छोटू पे दबाव डालना सुरू किया .

माँ सुमन को इसके लिए ज़िम्मेदार मान रही थी.

छोटू ने माँ के कहने पे अपने दिल पे पत्थर रख कर सुमन को उसके मायके भेज दिया.

उस दिन छोटू बहुत रोया था अपने कमरे जिस दिन सुमन को उसके मायके भेजा था

पर माँ के लिए छोटू को सुमन को मायके भेजना पड़ा

माँ ने घर छोड़ कर जाने की बात जो कही थी

सुमन को जहाँ इतना प्यार मिला उस घर को छोड़ कर जाने का मन नही हो रहा था.

पर सुमन को अपने मायके जाना पड़ा.

मायके जाकर सुमन को उसकी बड़ी बहन ने इतना परेशान किया कि सुमन 1 हफ्ते मे अपने पति के पास वापस आ गयी.

सुमन को अपने पति और सास की गालियाँ सुन ना मंज़ूर थी पर अपनी बड़ी बहन का परेशान करना कभी भी मंज़ूर नही था.

शालिनी ने भी यही कहा कि अब उसका घर ससुराल है ,कैसा भी क्यूँ ना हो , लाइफ मे दुख सुख तो मिलता रहता है , आज दर्द मिलेगा तो कल खुशी मिलेगी

सुमन के वापस आने से माँ ने छोटू की दूसरी शादी करने का फ़ैसला किया.

पर छोटू ने सुमन के प्यार की वजह से मना कर दिया. पिताजी ने भी विरोध दिखाया.

ऐसे मे माँ की एक ना चली पर छोटू के मन मे दूसरी शादी का बीज़ घुस गया था.

पर छोटू सुमन के साथ रह कर खुश था.पर माँ को दिखाने के लिए सुमन को उनके सामने भला बुरा बोल देता.पर कमरे मे जाते ही सुमन से माफी माँग लेता

पर दिल के एक कौने मे छोटू को लगता कि वो भी बाप बन जाए.

सुमन छोटू का दर्द जानती थी .पर वो क्या कर सकती थी. वो भी भगवान भरोसे थी.

ऐसे मे पिताजी को पता चला कि उनके दामाद दुबई जा रहे थे.

रमेश तो पहले भी जाना चाहता था पर पूजा ने रोक लिया ,पर इस बार पूजा रमेश को रोक नही पाई.

सुरेश अपने माता पिता की यादो से निकलने और कोमल कविता को अच्छी ज़िंदगी देने के लिए दुबई जा रहा था. नेहा ने सुरेश को रोकना चाहा पर सुरेश ने नेहा को दुबई जाने के लिए मना लिया.

जतिन भी दोनो के साथ दुबई चला गया. नीता तो जतिन को हमेशा सपोर्ट करती थी. नीता ने जतिन को रोका नही.

पिताजी ने उनकी ज़िंदगी मे ज़्यादा दखल देना सही नही समझा.

रमेश सुरेश और जतिन 3 साल के लिए दुबई चले गये.

तीनो साल मे 1 महीने के लिए वापस आ सकते थे.

नेहा नीता पास पास रहने से उनको ज़्यादा प्राब्लम नही हुई.

स्वेता के बड़े होने से पूजा भी अकेले रह सकती थी

इसी बीच रमेश को दुबई गये हुए 6 महीने हो गये.

पूजा अपने तीनो बचो के साथ अकेली रहने लगी.

इतने बड़े घर मे अकेली औरत मतलब चोरों के लिए एक इन्विटेशन था.

एक रात पूजा के घर मे 2 चोर घुस गये.

पूजा अपने बच्चों के साथ अपने कमरे मे सो रही थी.

चोरो ने पूजा के घर को लूटना सुरू किया.

चोरों ने घर मे रखी हुई ज्वेलरी और पैसे चुराने से सुरू किए.

पूजा को पता चल गया कि उसके घर मे चोर घुस गये है.

पूजा उनको सबक सिखा सकती थी

पर पूजा अपने बच्चो की सेफ्टी के लिए सोने का नाटक करती रही.

चोरो ने पूरा घर साफ कर लिया.

पूजा का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. पूजा उन दोनो से लड़ सकती थी पर बच्चो को ख़तरे डालना सही नही होता.

पूजा वैसे ही सोने का नाटक करने लगी .अच्छा हुआ जो पूजा और बच्चों को कुछ नही हुआ.

चोरो के जाते ही पूजा ने अपनी आँख खोली ,और देखने लगी कि वो गये या नही.

चोरो के जाते ही पूजा ने घर की अलमारी देखी. वहाँ रखे हुए सारे पैसे चोरी हो गये.

पूजा ने देर ना करते हुए ठाकुरजी की हवेली पे फोन किया.

पूजा ने ठाकुरजी को बता दिया कि उसके घर मे चोरी हो गयी.

ठाकुरजी ने पूजा को अपना ख़याल रखने को कहा और रात मे कार से पिताजी के पास गये.

इतनी रात मे ठाकुरजी की आवाज़ सुनकर पिताजी ने गेट खोल दिया.

पिताजी-क्या हुआ ,इतनी रात मे आ गये

ठाकुरजी-पूजा के घर मे चोरी हुई है.

पिताजी-पूजा कैसी है

ठाकुरजी-पूजा ठीक है पर डरी हुई है.

पिताजी-तुम कार लेकर आए हो

ठाकुरजी-हाँ, चलो पूजा के पास चलते है.

पिताजी ने माँ को बता दिया कि पूजा के घर मे चोरी हुई है.

माँ ने ये सुनते ही पूजा के पास जाने की ज़िद्द कर ली.

ठाकुर पिताजी और माँ रात मे शहर2 की तरफ पूजा के घर आ गये.

सुबह होते ही पिताजी पूजा के घर पहुँच गये.

पूजा अपने पिताजी को देखते ही उनके गले लग गयी.

और रात मे जो हुआ वो पिताजी को बता दिया.

पिताजी ने पूजा को होसला बढ़ाया और उसका डर दूर करने लगे.

पूजा के रोने से स्वेता सीतल भी रोने लगी.

पिताजी ने बड़ी मुश्किल से पूजा को शांत किया.

पिताजी ने फोन करके रमेश को चोरी के बारे में बता दिया.

रमेश को पूजा की फिकर होने लगी .वो पूजा से मिलने आना चाहता था पर अग्रीमेंट की वजह से आ नही सका.

रमेश ने पिताजी को अपनी समस्या बता दी जिस से रमेश ने पिताजी को पूजा के साथ रुकने को कहा.

पिताजी पूजा को गाँव लेकर जाना चाहते थे पर स्वेता का स्कूल था जिस से पिताजी वही रुक गये.

पिताजी ने पूजा का डर दूर करने के लिए कुछ दिन यही रुकने का फ़ैसला किया.

नेहा नीता भी पूजा से मिलने आ गयी.

पिताजी कुछ दिन पूजा के पास रुकने से पूजा को होसला मिलने लगा.

माँ ठाकुर के साथ वापस गाँव आ गयी.

पिताजी के ना होने से माँ सुमन को परेशान करने लगी.

सुमन को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा था.

सुमन इसे भी अपनी सास का प्यार समझ कर बर्दास्त कर लेती.

माँ कभी सुमन को परेशान करती तो कभी प्यार से खाना भी खिलाती.

माँ ज़्यादातर समय अपने बेटियो के पास रहने से सुमन के साथ कम समय बिता रही थी.

ऐसे मे सुमन अपनी सासकी गालियों को हसके सुन लेती.

इसी बीच नीता के घर से पता चला कि लीना बीमार है.

लीना के बार बार बीमार पड़ने से नीता घबरा गयी.

नीता ने अपनी माँ को अपने पास बुला लिया.

पिताजी पूजा के घर थे और नीता के घर माँ चली गयी.

सुमन फिर से छोटू के साथ अकेली घर मे रह गयी.

माँ के आते ही नीता को हिम्मत मिल गयी.
 
फ्लॅशबॅक 1027

माँ ने आते ही लीना का ख़याल रखना सुरू किया.

पूजा के पास पिताजी थे

और माँ नीता के घर पे थी ,

माँ-नीता ,मेडिसिन कहाँ है, लीना को दी कि नही.

नीता-अभी लाती हूँ.

नीता ने मेडिसिन की बॉटल देखी तो वो ख़तम हो चुकी थी.

नीता-माँ मेडिसिन ख़तम हो गयी.

माँ-मेरा मूह क्या देख रही है जा खरीद कर ला ,

नीता ने पैसे लिए और मेडिकल स्टोर मे चली गयी. मेडिकल स्टोर बंद था ,ये देख कर नीता इधर उधर दूसरा मेडिकल स्टोर देखने लगी.

पर नीता को मेडिकल स्टोर नही मिलने से उसको टेन्षन आने लगा.

ऐसे मे नीता जल्दी जल्दी रोड क्रॉस करने लगी कि एक कार के सामने आ गयी.

नीता ने अपने सर को हाथो से छुपा लिया. कार का ब्रेक लग गया वरना नीता का आक्सिडेंट हो जाता.

ड्राइवर नीता को गाली देने के लिए बाहर निकला ,ड्राइवर कुछ बोल ने वाला था कि

जयसिंघ-नीता

नीता ने उपर देखा तो अपने भाई को देख कर रोते हुए जयसिंघ के गले लग गयी.

जयसिंघ-क्या हुआ नीता,ऐसे रोड पे भाग क्यूँ रही हो.

नीता-भैया वो

जयसिंघ-बता क्या हुआ

नीता-भैया लीना की तबीयत खराब है और मेडिसिन भी ख़तम हो गयी .और मेडिकल स्टोर भी बंद है.

जयसिंघ-मुझे बता कौनसी मेडिसिन चाहिए मैं लेकर आता हूँ.

नीता ने मेडिसन का नाम बता दिया.

जयसिंघ-तू घर जा ,मैं अभी लेकर आता हूँ. डरना मत मैं हूँ ना.

नीता जल्दी अपने घर चली गयी. और जयसिंघ मेडिसिन लाने चला गया.

माँ-कहाँ है मेडिसिन

नीता-भैया लाने गये है

माँ-जयसिंघ ,वो कहाँ मिला.

नीता ने माँ को सब बता दिया. माँ जयसिंघ का इंतज़ार करने लगी

नेहा भी अपने बेटियो के साथ नीता के पास आ गयी.

बाहर बारिश भी होने लगी.

जयसिंघ मेडिसिन लेकर आ गया .माँ को जयसिंघ के आने से हिम्मत मिल गयी.

माँ ने लीना को मेडिसिन खिला दी.

नेहा अपने भैया को देख कर खुश हो गयी. जयसिंघ ने नेहा की तरफ नही देखा पर कोमल अपने मामा की गोद मे जाकर बैठ गयी.

कोमल के गोद मे बैठने से जयसिंघ को कोमल को प्यार करना पड़ा.

ये देख कर नेहा को अच्छा लगा .माँ भी जयसिंघ को कोमल के साथ खेलते हुए देख कर खुश हो गयी.

नीता ने जयसिंघ के लिए टी बनाई. जयसिंघ अपनी माँ के साथ बाते करने मे इतना खो गया कि वो भूल गया कि कार मे उसके दोस्त बैठे हुए है.

जयसिंघ को आने मे देर होने से कुमार और अजीत कार से उतर कर घर के अंदर आ गये.

कुमार को गेट के पास देखते ही नेहा को गुस्सा आ गया.

नेहा को फिर से देख कर कुमार को उसका मारा हुआ थप्पड़ याद आ गया.

कुमार उस बात को भूल चुका था पर नेहा को देखते ही उसका हाथ अपने गाल पर गया.

नेहा ने कुमार की तरफ गुस्से से देखा और टी का कप ज़मीन पर पटक कर अंदर के कमरे मे चली गयी.

जयसिंघ जल्दी गेट के पास गया.

जयसिंघ-तुम अंदर क्यूँ आए

कुमार-हमे देर हो रही है.हमे चलना चाहिए

जयसिंघ-इतनी बारिश मे जाना मुश्किल होगा.

अजीत-हम जा रहे है तू आ रहा है कि नही.

जयसिंघ-तुम आगे निकलो मैं सुबह तक आ जाउन्गा.

कुमार और अजीत वहाँ से चले गये. और जयसिंघ हाल मे आकर बैठ गया.

माँ-तू इनको यहाँ क्यूँ लाया

जयसिंघ-माँ ,सब इतनी जल्दी हुआ कि ,नीता को रोड पे इधर उधर भागते देख कर ,मैं ने इनको कार मे बैठ रहने को कहा पर मुझे आपने रोक लिया तो वो

माँ-जाने दे ,तेरी ग़लती नही है

जयसिंघ-माँ मुझे जाना होगा.

माँ-आज यहीं रुक जा ,सुबह चले जाना.

जयसिंघ-माँ मुझे सुबह एक मीटिंग मे जाना है.

माँ-कहा ना कल चले जाना, अब कुछ मत कह ,देख लीना की तबीयत ठीक नही है

नेहा कोमल औरकविता को लेकर अपने घर चली गयी.

जयसिंघ नीता के घर रुक गया.

अच्छा हुआ जयसिंघ रुक गया .रात मे लीना की तबीयत कुछ ज़्यादा खराब हो गयी.

बाहर बारिश चल रही थी. ऐसे मे जयसिंघ के रुकने से माँ को मदद हो गयी.

लीना की तबीयत ज़्यादा बिगड़ने से उसको हॉस्पिटल ले जाना ज़रूरी हो गया

जयसिंघ ने लीना को हॉस्पिटल ले जाने के लिए टॅक्सी बुला ली.

जयसिंघ को बड़ी मुश्किल से टॅक्सी मिली.

बाहर जोरो से बारिश हो रही थी

जयसिंघ जिस कार से आया था वो कार कुमार और अजीत ले गये थे

जयसिंघ के टॅक्सी लाते ही नीता माँ के साथ लीना को हॉस्पिटल ले गयी.

जयसिंघ ना होता तो नीता और माँ इतनी बारिश मे क्या करती.

जयसिंघ लीना को लेकर हॉस्पिटल आ गया

इधर कुमार और अजीत को नेहा को देखते ही पुरानी बात याद आ गयी.

कुमार नेहा के थप्पड़ को भूल चुका था पर नेहा को देखते ही कुमार को वो थप्पड़ याद आ गया.वो बेज़्जती याद आ गयी ,,

कुमार के दिमाग़ से नेहा का चेहरा हट नही रहा था.

कुमार को दूसरे सिटी जाना था पर कुमार ने अपनी कार बार के सामने रोक दी.

अजीत समझ गया था कि कुमार अपना गुस्सा ठंडा करने के लिए शराब पीना चाहता है.

अजीत कुमार के साथ बार मे बैठ कर शराब पीने लगे.

कुमार-ये खुद को समझती क्या है.इस से भी अच्छी लड़की से शादी की है मैं ने.

अजीत-नही तो क्या, ये गाँव की लड़की खुद को महारानी समझती है.

कुमार-मुझसे शादी करती तो राज करती,

अजीत-साली को पता नही उसने क्या ठुकराया है.

कुमार-सही कहा ,शहर3 की अमीर लड़की ने मुझे शादी की ,उसकी इतनी हैसियत नही थी कि मुझ से शादी कर सके फिर भी मैं उसके साथ शादी करने को तय्यार हुआ था

अजीत-ये गाँव की लड़किया ऐसी ही होती है, गोबर मे रहना चाहती हैं ,तुम से शादी करती तो 2 लंड मिल जाते

कुमार-सही कहा, मेरी बीवी एक झटके मे तेरे साथ करने को तय्यार हो गयी. कोई दूसरा टेस्ट करता तो इसकी खूबसूरती कम थोड़ी हो जाती.

अजीत-वो तो आज भी कमाल की लग रही थी.

कुमार-मैं थूकता हूँ उस पे ,

अजीत-वो तुझ पे थूकती है

कुमार-क्या कहा मादरचोद तूने

अजीत-शादी मे तुझे थप्पड़ मारा और आज भी तुझपे थूक कर गयी है.

कुमार-उस वक्त हम उसके गाँव मे थे वरना उसको बताता मैं क्या चीज़ हूँ.

अजीत-क्या बताता ,अब तक चूहे की तरह छुपा हुआ था तू,और वो थप्पड़ तुझे नही मुझे लगा था.

कुमार-उस थप्पड़ को मैं आज तक नही भुला.

अजीत-तू तो उसको भूल ही जा ,वहाँ शादी मे तुझसे कुछ किया नही गया ,और आज भी डर के वहाँ से चला आया

कुमार-मैं जयसिंघ की वजह से चुप था.

अजीत-जयसिंघ से नही तू नेहा से डरता है

कुमार-डरता नही. साली अकेले मे मिली तो बताउन्गा उसको,

अजीत-अभी भी तो अकेली है ,उसका पति दुबई गया है

कुमार-तुझे कैसे पता.

अजीत-तू तो उसको भूल गया था पर मैं उसपे नज़र रखे हुए था .

कुमार-चल फिर इस बारिश मे उसको नंगा करते हैं ,साली को ऐसा थप्पड़ मारूँगा कि ज़िंदगी भर वो मुझे याद रखेगी.

अजीत-इसमे मैं तेरे साथ हूँ

कुमार-इस जयसिंघ का क्या करें

अजीत-उसको मैं संभाल लूँगा ,

कुमार-चल ,नेहा को खूबसूरती पे दाग लगाने ,

अजीत-चल

और दोनो ने शराब का आख़िरी सीप लिया और बॉटल फोड़ कर कार मे बैठ कर नेहा के घर की तरफ जाने लगे.
 
फ्लश बॅक 1028

जयसिंघ नीता और माँ के साथ हॉस्पिटल जा चुका था.

नेहा अपने बेटियो के साथ अकेली घर मे बैठ कर टीवी देख रही थी.

बाहर बारिश सुरू थी ,नेहा बारिश का मज़ा पकोडे खाते हुए ले रही थी.

नेहा इस बात से अंजान थी कि उसकी तरफ तूफान आ रहा था.

अजीत और कुमार शराब के नशे मे नेहा से थप्पड़ का बदला लेने आ रहे थे

अजीत को बस जयसिंघ से दूर रहना था. जयसिंघ नेहा के घर नही जाएगा ये बात अजीत को पता थी.

अजीत ने जिस दिन नेहा को नंगा देखा था उसी दिन से उसका नेहा की चुदाई करने का मन हो रहा था.

आज वो मोका उसे मिल रहा था.

अजीत को पता था कि जयसिंघ नेहा के घर नही आएगा. मतलब इस बारिश मे नेहा की खूबसूरती का मज़ा ले सकता है.

अजीत कार चलते हुए नेहा के घर के सामने आ गया.

अजीत-तू यही रुक मैं देख कर आता हूँ.

कुमार कार मे रुक गया और अजीत ने नेहा के घर को अच्छे से देख लिया.

नेहा घर मे अकेली है ये अजीत को पता चल गया.

अजीत ने एक बार नीता के घर को देखा .नीता के घर मे अंधेरा था.

अजीत ने पास जाके देखा तो घर पे लॉक लगा हुआ था .अजीत ने सोचा कि जयसिंघ नेहा के घर तो नही जाएगा ,फिर कहाँ गया होगा.

शायद हॉस्पिटल गया होगा. अपनी भांजी को लेके ,यही अच्छा मोकका है. बारिश का फ़ायदा उठा सकता हूँ.

अजीत वापस कार के पास आया .और कार को नेहा के घर से दूर पार्क किया.

कुमार-क्या हुआ.

अजीत-जयसिंघ हॉस्पिटल गया है. नेहा अकेली है

कुमार-चल साली को नंगा करते है.

अजीत कुमार पैदल नेहा के घर गये.और डोरबेल बजाई

रात मे बेल बजने से नेहा सोचने लगी कि इतनी रात मे कौन होगा. शायद माँ होगी.लीना की तबीयत खराब हो गयी होंगी

नेहा ने गेट खोला ,और सामने अजीत कुमार को देखते ही बिना देर किए वो समझ गयी कि ये यहाँ क्यूँ आए है

नेहा ने जैसे गेट खोला था वैसे ही बंद करने लगी.

नेहा के गेट बंद करने से पहले अजीत ने गेट को बंद होने से रोका.

कुमार ने गेट पर लात मारकर गेट खोल दिया. नेहा दूर जाके गिर गयी.

अजीत और कुमार दोनो अंदर आ गये और गेट अंदर से बंद किया.

नेहा जल्दी खड़ी हो गयी और अंदर के कमरे मे भाग ने लगी.

कुमार-पकड़ उसे ,भागने मत दे

अजीत नेहा की तरफ लपका था कि नेहा पीछे हो गयी और कमरे मे घुस गयी.

अजीत खड़ा होके नेहा को डोर बंद करने से रोकता उस से पहले नेहा ने अपने बेडरूम का डोर बंद कर दिया.

अजीत डोर पर धक्के मार कर गेट खोलने की कोशिश करने लगा.

नेहा डरी हुई डोर के पीछे खड़ी थी.

अजीत लगातार डोर खोलने की कोशिश करने लगा.

नेहा भगवान से दुआ माँग रही थी कि डोर ना खुले

नेहा के चिल्लाने का कोई फ़ायदा नही हो रहा था

बाहर बारिश होने से उसकी आवाज़ कोई नही सुनेगा

नेहा इतनी डरी हुई थी कि उसको अपनी बेटी का ख़याल नही आया.

अजीत ने डोर पर धक्के मारना बंद किया .और कुमार के पास आ गया.

डोर पर धक्के मारने बंद होते नेहा के पसीने छूटने लगे कि आगे क्या होगा.

कुमार-नेहा डोर खोलो

कुमार की आवाज़ सुनते ही नेहा डर के मारे कापने लगी.

कुमार-नेहा डोर खोलो वरना तुम्हारी बेटी को मार डालूँगा.

कुमार के मूह से अपनी बेटी के बारे में सुनते ही नेहा ने बेड की तरफ देखा. बेड पर कविता सो रही थी.

कोमल ,कोमल कहाँ है, कोमल तो सोफे पे सो रही थी.

कुमार-नेहा मैं आख़िरी बार बोल रहा हू डोर खोलो वरना.

कोमल कुमार के हाथ मे है इस बात से नेहा ने कोमल को बचाने के लिए डोर खोल दिया

डोर खोलते ही अजीत नेहा के गाल पर थप्पड़ मारके अंदर ले गया.

कुमार कोमल की गर्दन एक हाथ मे पकड़ कर बेडरूम मे आ गया.

नेहा-मेरी बेटी को छोड़ दो ,उसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है

कुमार-इसने तो सही कहा,इसने हमारा क्या बिगाड़ा है जो बिगाड़ा है वो नेहा ने बिगाड़ा है

अजीत-उसको मेरी तरफ दे और तू नेहा को संभाल

अजीत ने कोमल को पकड़ लिया

कुमार-तुझे बहुत शोक है ना थप्पड़ मारने का .आज तुझे ऐसा थप्पड़ मारूँगा कि तू याद रखेगी

नेहा-मुझे जाने दो, मैं तुम से माफी मांगती हूँ.

कुमार-माफी ,तुझे क्या लगता है इतनी आसानी से तुझे माफ़ कर देंगे .

अजीत-साली को नंगा कर

कुमार-सुना मेरे दोस्त ने क्या कहा.

नेहा-पहले मेरी बेटी को जाने दो ,

कुमार-ये ऐसी नही मानेगी. अजीत

अजीत ने कोमल की गर्दन दबानी सुरू की

नेहा-रुक जाओ ,उसे कुछ मत करना

अजीत-तो जल्दी हमे अपनी खूबसूरती दिखाओ

नेहा ने एक बार कोमल की तरफ देखा ,कोमल को रोता हुआ देख कर नेहा का दिल रोने लगा.

नेहा कैसे भी करके कोमल को अजीत के हाथो से निकालना चाहती थी.

नेहा को अपनी इज़्ज़त से ज़्यादा कोमल की जान प्यारी थी.

नेहा ने अपने कपड़े निकालने सुरू किए

कुमार-जल्दी निकाल ,तुझे मेरी रंडी बनाना है.

नेहा ने अपनी साड़ी निकाल दी.

कुमार-ब्लाउस क्या तेरा बाप निकालेगा.चल निकाल

अजीत-एक दिन इसके बाप से इसके कपड़े निकलवाएँगे.

नेहा अजीत की बात सुनकर रोने लगी.

नेहा-तुम्हें ये सब करके क्या मिलेगा.

कुमार-एक वर्ड और निकाला तो ,चल जल्दी कपड़े निकाल,अजीत इसने देर की तो समझ गया ना.

अजीत-इसकी बेटी की ऐसी की तैसी कर दूँगा.

नेहा-नही नही उसे कुछ मत करना ,मैं निकाल रही हूँ

नेहा ने रोते हुए अपना ब्लाउस और पेटिकोट निकाल दिया.

कोमल अपनी माँ को रोते हुए कपड़े निकालते हुए देख कर और ज़ोर से रोने लगी.

कुमार-इसको चुप कर ,सारा नशा उतर रहा है.

अजीत-ने कोमल के मूह पे हाथ रख दिया.

कुमार-ब्रा पैंटी निकाल

नेहा को उनकी बात सुन ने के अलावा दूसरा रास्ता नही दिख रहा था.

नेहा को अपनी ब्रा निकाल ने मे अपनी पूरी हिम्मत लगानी पड़ी.

ब्रा नीचे गिरते ही अजीत के आँखो मे चमक आ गयी.

अजीत-देखा आज भी वैसे ही जैसे पहले थी, लगता है इसका पति नामर्द है

कुमार-हम है ना ,आज इसको कच्चा खा जाएँगे.

अजीत-पैंटी निकाल,

नेहा ने सुरेश से माफी माँगते हुए अपनी पैंटी निकाल दी .और रोने लगी.

नेहा अपने बदन को हाथो से छुपाने लगी

नेहा-भगवान के लिए मुझे जाने दो,

अजीत-ज़्यादा बोला तो तेरी बेटी को भगवान के पास भेज देंगे

नेहा-तुम ने जैसा कहा मैं ने वैसा की ,मेरी बेटी को जाने दो

कुमार-ये तो शुरुआत है,

और कुमार नेहा के पास आ गया.

जैसे जैसे कुमार आगे आ रहा था नेहा पीछे पीछे जाने लगी.

नेहा-मेरे पास मत आना ,

कुमार-पास नही आउन्गा तो तुझे मसलूँगा कैसे

और कुमार ने लपक कर नेहा को पकड़ लिया .

नेहा कुमार के हाथ मे आते ही उसके हाथ से निकलने के लिए अपने हाथ पैर पटकने लगी.

अब तक सब आराम से हो रहा था पर नेहा इतनी आसानी से उसके हाथ मे नही आने वाली थी.

नेहा कुमार के हाथ से निकालने की पूरी कोशिश कर रही थी.

कुमार ने नेहा के गाल पर थप्पड़ मार कर उसे बेड पर पटक दिया.

नेहा बेड पर गिरते ही वहाँ से उतना चाहती थी कि कुमार उसके उपर आ गया.

कुमार ने नेहा को दबोचना सुरू किया.

नेहा अपने हाथ पैर अपने सर को इधर घुमा रही थी.

नेहा कुमार छोड़ देने को कह रही थी.

कोमल अपनी माँ की आवाज़ सुन रही थी .अपनी माँ को रोता हुआ देख रही थी.

कोमल को लग लगा था कि अंकल उसकी माँ को मार रहे है. इसी लिए उसकी माँ रो रही है.

नेहा को नंगा देखते ही अजीत की पकड़ कोमल से ढीली हो गयी.

अजीत का लंड खड़ा हो गया

कुछ साल पहले की बात याद आ गई जब पहली बार नेहा को होटेल मे नंगा देखा था

अजीत की पकड़ ढीली होते ही कोमल ने अजीत को ज़ोर से काट लिया.

कोमल के काटने से अजीत की चीख निकल गयी. अजीत ने कोमल को दूर फेक दिया.

अजीत की आवाज़ सुनते ही कुमार ने पीछे पलट कर देखा.

कुमार के पीछे देखते ही नेहा ने टेबल पे रखा हुआ फ्लवर प्लॉट कुमार के सर पे दे मारा.

फ्लवर प्लॉट इतनी ज़ोर से लगा कि कुमार के सर से खून निकल गया.

कुमार को दर्द हो रहा था वो नेहा के उपर से उठ कर खड़ा हो गया.और दर्द से तड़पने लगा

अजीत जल्दी कुमार के पास जाकर कुमार को देखने लगा

कुमार दर्द से तड़फ़ रहा था.

नेहा ने मोका देखते ही कविता को उठा लिया और कोमल का हाथ पकड़ कर वहाँ से भाग गयी.

नेहा के कमरे से बाहर जाते ही अजीत भी उसके पीछे भागने लगा.

नेहा जल्दी दूसरे कमरे मे चली गयी और डोर लॉक कर दिया.

अजीत ने नेहा को कमरे मे जाता हुआ देख लिया.

वो अच्छे से नेहा को भोग सकता था पर अब नेहा को कमरे से बाहर कैसे निकालेगा

अजीत वापस कुमार के पास आ गया. कुमार ने अपने सर पे हाथ लगा कर रखा था.

कुमार-कहाँ गयी.

अजीत-वो गयी. हमे यहाँ से जाना चाहिए

कुमार-वो जयसिंघ को सब बता देगी. उसे मार डालते है.

अजीत-ऐसा किया तो हम मर जाएँगे.तू चल यहाँ से मैं देखता हूँ जयसिंघ को , जयसिंघ को जैसे शालिनी के समय उल्लू बना कर तुमसे माफी मँगवाई थी वैसे इस बार करूँगा , जयसिंघ को शक नही होने दूँगा

अजीत ने कुमार को कार मे जाकर बैठने को कहा.

और उसने एक बार नेहा के कमरे पे धक्का दे कर देखा पर डोर नही खुला.

फिर अजीत को बाहर से टॅक्सी की आवाज़ सुनाई दी.

अजीत ने खिड़की से देखा तो जयसिंघ था .जयसिंघ के आते ही उसे अंदर जाने तक अजीत वही रुका रहा.

फिर अजीत थोड़ी देर बाद कुमार के पास चला गया .और दोनो वहाँ से भाग गये.
 
फ्लॅशबॅक 1029

नेहा कविता और कोमल के साथ कमरे मे बंद हो गयी.

कविता तो सो रही थी ,पर कोमल अपनी माँ के साथ रो रही थी.

नेहा कमरे मे आते ही एक कौने मे जाकर अपने पैरो को पकड़ बैठ गयी.

कोमल अपनी माँ के पास खड़ी होकर रो रही थी.

नेहा की नज़र डोर की तरफ थी. वो डोर कभी ना खुले ऐसा उसे लग रहा था.

नेहा काफ़ी डरी हुई थी

फूल सी बच्ची के साथ ऐसा होने से वो डर के मारे काँप रही थी

नेहा की आँख मे एक डर था ,नेहा के हाथ पैर काप रहे थे.

अजीत ने जब कुमार को कार मे छोड़ कर फिर से डोर पर धक्का दिया तो नेहा और ज़्यादा डर गयी.

नेहा ने कोमल को अपनी बाहों मे छुपा लिया.

नेहा कोमल को खुद से दूर होने नही दे रही थी

बाहर बारिश और बिजली का कडकना , कोमल का रोना , नेहा को डरा रहे थे

कविता सो रही थी ये अच्छा हुआ

नेहा के लिए ये डरावना सपना था

कोमल को कुछ हो जाने का डर , नेहा को कुछ सोचने ही नही दे रहा था

कोमल नेहा के लिए सब कुछ थी ,,

अजीत जिस तरह कोमल की गर्दन दबा रहा था जिसे देख कर नेहा की जान जा रही थी

कोमल अपनी माँ के गले लग कर रो रही थी. कोमल के रोने से नेहा का डर उस पे हावी हो रहा था.

नेहा के आसू सूख गये थे. नेहा की आँख रो रो कर लाल हो गयी.

बिजली कड़क ने से नेहा के रोंगटे खड़े हो जाते.

घड़ी के काटे की आवाज़ टिक टिक सुनकर नेहा को लगता कि कोई डोर पे धक्का दे रहा हो.

ये अंधेरी रात नेहा को खा रही थी

नेहा जिसको पिताजी ने फूलो की तरह संभाला था

नेहा जिसके उपर कभी कोई मुशिबत आने नही दी ,,

नेहा के उपर पिताजी ने कभी माँ को हाथ उठाने नही दिया आज उस नेहा के साथ इतना कुछ हो जाने से वो इतनी घबरा गयी कि उसके सोचने की शक्ति ख़तम हो गयी

ये बारिश नेहा की आँखो से खून के आसू निकाल रही थी

रोते रोते कोमल भी अपनी माँ की बाहों मे सो गयी.

नेहा सहमी हुई ,डरी हुई ,इस भयानक रात जल्दी ख़तम हो ऐसा लग रहा था.

और ये डोर कभी ना खुले ऐसा सोच रही थी

बाहर आसमान रो रहा था और अंदर नेहा रो रही थी.

नेहा की आँखो के सामने वो सीन बार बार आ रहा था. कोमल की गर्दन पर पंजा,

कोमल की गर्दन पे पंजा देखते ही नेहा का रोम रोम कापने लग जाता.

नेहा रात भर सोई नही ,सुबह कब की हो चुकी थी पर नेहा वैसी ही कमरे के कौने के बैठी हुई थी.

कोमल उठ चुकी थी , और अपनी माँ को हिला रही थी.

नेहा को होश मे ला रही थी

नन्नी सी जान को कुछ समझ नही आ रहा था

वो अपनी माँ को ऐसे हालत मे देख कर रो रही थी

कोमल नेहा को पुकार रही थी पर नेहा का डर उसपे हावी हो चुका था

कोमल को कुछ ही जाने के डर से नेहा बहुत डर चुकी थी

नेहा के साथ ऐसा कुछ हो जाता तो वो इतना नही डरती पर कोमल के गर्दन पे पंजा , ये ख़याल दिमाग़ ने आते ही नेहा डर जाती

नेहा पे कोई असर नही हो रहा था .वो वैसी नंगी बैठी हुई थी.

कोमल अपनी माँ को भूक लगी है कह रही थी, पर उसके तरफ से कोई जवाब नही मिल रहा था.

कविता भी उठ चुकी थी और रोए जा रही थी.

कोमल डोर के पास गयी .और डोर खोलने की कोशिश कर रही थी.पर उस से डोर नही खुल रहा था.

डोर के नीचे का लॉक कोमल ने खोल दिया पर उपर का लॉक वो कैसे खोलती

कोमल ने खिड़की खोल कर अपनी मौसी को आवाज़ देना सुरू किया.

जयसिंघ सुबह सुबह चला गया था. उसकी.मीटिंग जो थी ,,

लीना को हॉस्पिटल से लाते ही सुबह जयसिंघ अपने रास्ते चला गया

घर मे नीता और माँ थी.

कोमल हमेशा अपनी मौसी को ऐसे ही खिड़की से आवाज़ देती थी

नीता अपने घर मे थी इस बात से अंजान कि नेहा के साथ रात को क्या क्या नही हुआ

नीता तो लीना के तबीयत से टेन्षन मे थी

पर इधर नीता की जान नेहा की जान पर ख़तरा मंडरा रहा था

इस तूफ़ानी रात ने नेहा को इतना रुलाया कि उसकी रोने की आवाज़ नीता भी नही सुन पाई

पर नेहा ने खुद को और कोमल को बचा लिया

अगर नीता को थोड़ा भी शक हो जाता तो वो हॉस्पिटल से भाग कर आती , लीना से ज़्यादा नेहा प्यारी थी नीता को

कोमल हमेशा की तरह खिड़की से अपनी मौसी को आवज़ दे रही थी

कोमल की आवाज़ सुनकर नीता अपनी खिड़की मे आकर कोमल को जवाब देने लगी.

कोमल को इस तरह रोते हुए देख कर नीता सोचने लगी कि क्या हुआ

नेहा तो कोमल को कभी मारती नही फिर कोमल इतनी सुबह रो क्यूँ रही है

कोमल का रोता हुआ देख कर नीता ने पूछा कि क्या हुआ.

नीता-कोमल क्या हुआ

कोमल-माँ ,माँ

नीता-क्या हुआ माँ को

कोमल-माँ .

नीता- माँ कहा है

कोमल- माँ बात नही कर रही है , माँ रो रही है

नीता को कुछ गड़बड़ लगी.नीता ने अपनी माँ को लीना के पास रुकने को कहा और नेहा के घर मे आ गयी.
 
फ्लशनकक 1030

कविता भी उठ चुकी थी और रोए जा रही थी.

कोमल डोर के पास गयी .और डोर खोलने की कोशिश कर रही थी.पर उस से डोर नही खुल रहा था.

डोर के नीचे का लॉक कोमल ने खोल दिया पर उपर का लॉक वो कैसे खोलती

कोमल ने खिड़की खोल कर अपनी मौसी को आवाज़ देना सुरू किया.

जयसिंघ सुबह सुबह चला गया था. उसकी.मीटिंग जो थी ,,

लीना को हॉस्पिटल से लाते ही सुबह जयसिंघ अपने रास्ते चला गया

घर मे नीता और माँ थी.

कोमल हमेशा अपनी मौसी को ऐसे खिड़की से आवाज़ देती थी

कोमल की आवाज़ सुनकर नीता अपने खिड़की मे आकर कोमल को जवाब देने लगी.

कोमल का रोता हुआ देख कर नीता ने पूछा कि क्या हुआ.

नीता-कोमल क्या हुआ

कोमल-माँ ,माँ

नीता-क्या हुआ माँ को

कोमल-माँ .

नीता- माँ कहाँ है

कोमल- माँ बात नही कर रही है ,माँ रो रही है

नीता को कुछ गड़बड़ लगी.नीता ने अपनी माँ को लीना के पास रुकने को कहा और नेहा के घर मे आ गयी.

घर का गेट खुला देखते ही नीता की धड़कने तेज चलने लगी.

गेट खुला है तो कोमल उसके घर आने की जगा खिड़की से रो क्यूँ रही थी

नीता ने नेहा को आवाज़ दी पर नेहा ने कोई जवाब नही दिया.

नीता उस कमरे मे गयी जहाँ से कोमल ने आवाज़ दी थी.

कमरा अंदर से लॉक देख कर नीता ने डोर पर नॉक करके आवाज़ दी

डोर से आवाज़ आते ही नेहा और डर गयी

उसको लगा कि अजीत कुमार होगा

नेहा डर के मारे कोई आवाज़ नही दे रही थी

नीता-नेहा ,नेहा ,डोर खोलो

नेहा डोर की आवाज़ सुनते ही और डरने लगी.

नीता-नेहा डोर खोल ,

नेहा का जवाब ना पाकर नीता ने बाहर जाकर खिड़की से अंदर देखा.

नीता ने कमरे मे कविता को बेड पर रोता हुआ देखा

और कोमल को कौने मे खड़ा होकर रोते हुए देखा.

कोमल कौने को तरफ देख कर क्यूँ रो रही है

नीता-कोमल

अपनी मौसी की आवाज़ सुनकर कोमल खिड़की के पास आ गयी.

नीता-माँ कहा है

कोमल ने कौने की तरफ उंगली दिखा दी

नीता-कोमल डोर खोलो

कोमल ने ना मे गर्दन घुमा दी.

नीता ने बहुत कोशिश की ,पर नेहा को देख नही पाई.

नीता भागते हुए पड़ोसी के घर पे गयी और पूजा दीदी को कॉल किया.

पूजा- हेलो

नीता-दीदी मैं नीता ,पिताजी को लेकर जल्दी घर आओ, जल्दी.

नीता ने इतना बोल कर फोन कट किया.

पूजा समझ गयी कि कोई बहुत बड़ी बात है.

नीता ऐसमज़ाक नही करेगी

पूजा ने बात पिताजी को बताई

पूजा पिताजी बिना देर किए उसी हालत मे , नीता के घर की तरफ निकल पड़े.

नीता ने एक फोन ठाकुरजी को किया

ठाकुरजी- हेलो

नीता- ठाकुरजी मैं नीता

ठाकुरजी- नीता बेटी तुम

नीता- ठाकुरजी आप जल्दी यहाँ आइए , नेहा मुशिबत मे है

इतना सुनते ही ठाकुरजी ने फोन रख दिया

ठाकुरजी भी शहर2 के लिए निकल गये

नीता पड़ोसी को बता कर हंगामा नही करना चाहती थी.

नीता को इतना पता था की नेहा अंदर कमरे मे है और रो रही है.

नीता ने नेहा के रोने की आवाज़ सुन ली थी

मतलब ऐसा वैसा कुछ नही हुआ है

शायद सुरेश जीजा जी ने नेहा को कुछ कहा होगा

पर नेहा के घर तो फोन नही है फिर बात क्या होंगी

नेहा ज़िंदा है , पर वो डोर क्यूँ नही खोल रही है

नेहा से पहले कोमल और कविता का रोना बंद

करना होगा

दोनो भूकी है ,

नीता फोन करके अपने घर गयी .और लीना की दूध की बॉटल मे कविता के लिए दूध भर दिया. कोमल के लिए नाश्ता वो अपने साथ लिया और उसको लेकर नेहा के घर चली गयी.

माँ ने पूछा कि क्या हुआ ,नीता ने इतना कहा कि आप यहीं रुक जाइए.

नीता वापस खिड़की मे गयी और कोमल को दूध की बॉटल दी

नीता-कोमल इसको कविता को दो

कोमल ने बॉटल को कविता को दिया. कविता ने बॉटल का दूध पीना सुरू किया.

नीता ने कोमल को नाश्ता दिया .और खाने को कहा.

नीता-कोमल रोना मत ,मौसी है ना.

कोमल ने हाँ मे गर्दन घुमा दी.

नीता कुल्हाली लेकर डोर के पास आ गयी .और डोर को तोड़ना सुरू किया.

3 4 वॉर से डोर मे होल हो गया.

नीता ने होल से अंदर देखा तो नेहा को कमरे मे एक कौने मे नंगा बैठ कर रोते हुए देखा.

नेहा को ऐसा देखते ही नीता को जोरदार झटका लगा

रात मे यहाँ कुछ तो हुआ है.

नीता ने एक लॉक खोल दिया.अब उपर वाला लॉक खोलना था

नीता ने डोर को तोड़ना सुरू कर दिया.

इधर पिताजी और पूजा नीता के घर आ गये.

पिताजी-नीता कहाँ है

माँ-क्या हुआ.बात क्या है आप इतनी सुबह ,

पिताजी-ज़ोर से नीता कहाँ है

माँ-नेहा के घर

नेहा का नाम सुनते ही पिताजी भागते हुए नेहा के घर जाने लगे.

पूजा ने माँ को वही रुकने को कहा. और अपने बच्चो को माँ के पास दे कर नेहा के घर चली गयी.

पर माँ को भी डर लग रहा था

लीना सो रही थी

जिस से माँ स्वेता सीतल राज और राजेश को लेकर नेहा के घर आ गयी

माँ को पिताजी के इस तरह सुबह यहाँ आने से , इस तरह भाग कर नेहा के घर जाने से डर लग रहा था

पूजा तो नाइटी मे आई है ज़रूर कुछ बात होंगी और नीता कुल्हाड़ी लेकर क्यूँ गयी

माँ भी बचैन.हो के लेकर पिताजी के पीछे पीछे आ गयी

पिताजी नेहा के घर आते ही नीता को कुल्हाड़ी से डोर तोड़ते हुए देखा.

पिताजी भाग कर नीता के पास आ गये.

पिताजी-नेहा कहाँ है.

नीता ने रोते हुए कमरे के अंदर उंगली दिखाई.

पिताजी ने होल से अंदर देखा तो पिताजी गुस्से से पागल हो गये.

पूजा भी नेहा के घर आ गयी.

पिताजी ने डोर पर पूरी ताक़त और गुस्से मे लात मारकर डोर खोल दिया.

नीता और पूजा डोर खोलते ही अंदर गयी. पूजा नेहा को ऐसा देख कर शॉक्ड हो गयी.

नीता ने ब्लंकेट उठाया और नेहा के उपर डाल दिया.

नेहा अभी तक रो रही थी.

माँ ने बच्चों को लेकर नेहा के घर आ गयी.

नीता नेहा के पास बैठ कर उसको होश मे लाने की कोशिश कर रही थी.

पूजा कोमल को अपनी गोद मे उठा कर बाहर आ गयी.

माँ कमरे मे आते ही नेहा को ऐसे देख कर पिताजी से पूछने लगी

माँ-क्या हुआ नेहा को

पिताजी की आँखो मे आसू आ गये.

माँ-क्या हुआ नेहा को

नीता नेहा को होश मे लाने की कोशिश कर रही थी

नीता ने 3 4 थप्पड़ नेहा के गाल पर मारे

नीता के थप्पड़ से नेहा होश मे आ गयी .

नेहा ने नीता को देखते ही रोते हुए उसे गले लगा किया.

नीता-ये कैसे हुआ

नेहा नीता के गले लग कर रोती गयी.

नीता के कान मे नेहा ने एक नाम बताया "कुमार"

इतना कह कर नेहा बेहोश हो गयी.
 
फ्लॅशबॅक 1031

नेहा बेहोश हो गयी.

नीता और पूजा ने उसको सहारा दे कर बेड पर लिटा दिया.

पिताजी-क्या कहा नेहा ने

नीता-हमे डॉक्टर को बुलाना चाहिए ,

पिताजी-मैं ने पूछा क्या कहा नेहा ने

नीता-भाभी को बुलाने के लिए कहा.

और नीता कमरे से बाहर चली गयी.

नीता कोई हंगामा नही चाहती थी

उसको पता था कि कुमार का नाम सुनते ही पिताजी क्या करेंगे

जब तक ठाकुरजी नही आते नीता पिताजी को कुछ नही बताएगी

ठाकुरजी पिताजी को रोक सकते है

पिताजी जब सुनेंगे कि नेहा के इस हालत जे पीछे कुमार है तो पिताजी उसे ज़िंदा ज़मीन मे गाढ देंगे

कुमार का नाम आते ही नीता ने समझदारी से काम लेते हुए भाभी को बुलाना ठीक समझा

कुमार का मॅटर सिर्फ़ शालिनी हॅंडल कर सकती थी

नीता ने भाभी को फोन करके यहाँ उसने जो देखा ,रात मे भैया आए थे और नेहा ने कुमार का नाम लिए सब बता दिया.

कुमार का नाम सुनते ही शालिनी बिना देर किए जल्द से जल्द नेहा के पास आना चाहती थी

शालिनी अपने मायके मेथी. वहाँ से नीता का फोन आते ही शालिनी अपने पिताजी और अवी के साथ निकल गयी.

नीता ने भैया को कॉल करके बुलाने को शालिनी भाभी को कहा,

शालिनी ने कंपनी मे कॉल.करके मीटिंग वाली जगह कॉल करके शहर2 आने को कहा

फिर नीता ने ठाकुरजी को पहले फोन करके अच्छा किया

ठाकुर जी जितना जल्दी आएँगे उतना अच्छा होगा

ठाकुर ही थे जो पिताजी के गुस्से को कम कर सकते थे.

शालिनी ने जयसिंघ को कॉल करके नीता के घर बुलाया.

नीता का नाम सुनते ही जयसिंघ को लगा कि लीना को कुछ हुआ तो नही.

जयसिंघ मीटिंग ख़तम करके नीता के घर की तरफ निकल गया.

मीटिंग मे कुमार और अजीत भी थे ,

सब कुछ नॉर्मल दिखा रहे थे अजीत और कुमार

अजीत ने रात मे कुमार का इलाज भी किया

और कुमार की चोट को नकली बालो से छुपा दिया

देख कर कोई बोल ही नही सकता था कि कुमार को चोट लगी है

और सबको बता दिया कि कोई पूछे तो कहना हम रात मे ही आए थे

जब जयसिंघ सुबह मिला कुमार और अजीत से सब नॉर्मल ही हुआ

दोनो ने बताया कि वो रात मे होटेल आए

जयसिंघ दोनो को नॉर्मल देख कर रिलॅक्स हो गया उसको लगा कि नेहा की वजह से फिर से लफडा ना हो जाए

फिर तीनो मीटिंग मे बिज़ी हो गये

अजीत ने सब अच्छे से मेनेज कर लिया था

जयसिंघ को थोड़ा भी शक नही हुआ दोनो पे , वो तो मीटिंग मे बिज़ी हो गया बड़ा टेंडर था ये

नीता भाभी को कॉल करने के बाद नेहा के घर आ गयी.

नीता-पूजा दीदी डॉक्टर को बुलाना होगा.

पिताजी-हॉस्पिटल लेकर चलो

नीता-नही ,डॉक्टर को यही बुलाते है

पूजा-मैं लेकर आती हूँ .तुम बच्चो को देखो

माँ नेहा के पास बैठ कर कविता को देख रही थी.

पूजा ने डॉक्टर को बुला लिया.

डॉक्टर ने चेक किया .और नेहा को इंजेक्षन लगा दिया.

पिताजी-क्या हुआ नेहा को

डॉक्टर-किसी बात से डर गयी है. और रात भर सोई भी नही है 3 4 घंटे मे होश आ जाएगा .

पिताजी नेहा के होश मे आने का इंतज़ार करने लगे

नीता सोचने लगी कि हुआ क्या है ,नेहा ने कुमार का नाम क्यूँ लिया .कहीं कुमार ने... मैं ने भाभी को बुला कर अच्छा किया .वरना पिताजी कुमार का नाम सुनते तो क्या कर बैठते

शालिनी अपने पिताजी के साथ नेहा के घर आ गयी.

शालिनी को देखते ही नीता ने उसको गले लगा लिया.

नीता ने शालिनी के कान मे एक बात बताई.

नीता-नेहा ने बस इतना कहा , कुमार

शालिनी के लिए इतना काफ़ी था .शालिनी नेहा के पास जाकर उसके सर पे हाथ घुमाने लगी.और उसके सर पे किस किया.

कोमल ने अपनी मामी को देखते शालिनी के पास भाग कर आ गयी.

कोमल-मामी, माँ को मार रहे थे.

पिताजी कोमल के मूह से माँ को मार रहे थे ये सुनकर उसके पास आ गये

पिताजी-क्या हुआ था कोमल

कोमल-वो माँ रो रही थी

पिताजी-क्यूँ रो रही थी

कोमल-माँ को मार रहे थे

शालिनी-तुम ने नहा लिया

कोमल-नही, ब्रश भी नही किया

पिताजी- कोमल किसने मारा तुम्हारी माँ को

शालिनी- कोमल तुम्हें तो रोज ब्रश करना चाहिए ,, बिना ब्रश किए खाना नही खाना चाहिए

पिताजी - मैं बात कर रहा हूँ कोमल से ,, तुम बीच मे मत बोलो

शालिनी पिताजी की बात होते ही बीच मे बोल कर कोमल को.कुछ कहने से रोक देती

शालिनी-माँ ने भी नहाया नही था इसी लिए अंकल ने मारा, तुम नहा लो फिर वो अंकल नही मारेंगे.

कोमल-माँ नही रोएगी

शालिनी-नही. तुम नहा लो फिर माँ तुमको चॉक्लेट देगी. नीता कोमल को ले जाओ

कोमल चॉक्लेट का नाम सुनते ही नीता मौसी के साथ नहाने चली गयी.

थोड़ी देर बाद नेहा को होश आ गया.

नेहा ने होश मे आते ही अपनी भाभी को देखते गले लगा लिया.और रोने लगी.

पिताजी नेहा के पास आ गये

नेहा-भाभी वो

शालिनी-तुम आराम करो बाद मे बात करते है.

नेहा-भाभी वो कुमार

कुमार का नाम सुनते ही पिताजी आगे आ गये

पिताजी-कुमार क्या

नेहा-भाभी वो कुमार

शालिनी-पूजा पानी लेकर आओ

पूजा ने नेहा के लिए पानी लाया. नेहा ने पानी एक सीप मे पी लिया

शालिनी-अब बताओ क्या हुआ

नेहा-वो कल कुमार और अजीत ने

पिताजी-क्या किया उसने

नेहा ने रात मे जो जो हुआ वो बताना सुरू किया.

जैसे जैसे नेहा बता रही थी. वैसे वैसे पिताजी का गुस्सा बढ़ रहा था.

नेहा की बात सुनकर माँ ,शालिनी, पूजा, नीता सब रोने लगे.

पिताजी तो गुस्से से आग बाबूला हो रहे थे.

नेहा ने सारी बात बताते शालिनी के गले लग कर रोने लगी.

नेहा-भाभी वो कोमल को मारना चाहते थे

शालिनी-मेरे होते हुए कोमल को कुछ नही होगा.

नेहा-वो कोमल को रुला रहे थे.

शालिनी-मैं हूँ ना, तू रोना बंद कर,तू रोएगी तो कोमल रोएगी ,और कोमल रोएगी तो मैं भी रो दूँगी.अपनी भाभी को तू रुलाएगी.

नेहा-नही,

शालिनी-तू कपड़े पहन ले ,फिर बात करते है

नेहा ने अपनी भाभी की बात मान ली. नेहा ने कपड़े पहन लिए

पिताजी गुस्से से आगबबूला हो गये

और खिड़की को मुक्का मार कर ग्लास तोड़ दिया

पिताजी-उस कुमार को जान से मार दूँगा.

माजी-रुक जाइए.

पिताजी-तुम आज कुछ मत बोलना

पिताजी गुस्से से बाहर जा रहे थे कि ठाकुरजी डोर पर आ गये.

ठाकुरजी-कहाँ जा रहे हो गुस्से मे

पिताजी-तुम्हें किसने बुलाया.

ठाकुरजी-कहाँ जा रहे हो.

पिताजी-मुझे रोक ने की ग़लती मत करना

ठाकुरजी-कहाँ जा रहे हो

पिताजी ने ठाकुरजी को सारी बात बता दी.

ठाकुरजी-तो ये बात है, चल मैं भी आता हूँ

दोनो कुमार को मारने जा रहे थे कि शालिनी के पिताजी ने उनको रोक दिया

शालिनी के पिताजी-ऐसे गुस्सा करने से कुछ नही होगा. दामाद जी आ रहे है

पिताजी-ये सब जयसिंघ की वजह से हुआ है

शालिनी के पिताजी -इसमे दामाद जी की क्या ग़लती है

पिताजी-तुम को कुछ पता नही है. तुम इस से दूर रहो

शालिनी के पिता जी -इस बात को ठंडे दिमाग़ से सोचना चाहिए.

पिताजी-कहा ना इस से दूर रहो.

पिताजी गुस्से से कमरे मे इधर उधर घूम रहे थे.

माँ को पिताजी के गुस्से से डर लग रहा था.

माँ को पता था कि पिताजी का गुस्सा कैसा है

शालिनी ने अवी को उनके सामने जाने को कहा. पर उस से भी कुछ काम नही हुआ

जयसिंघ को खबर मिलते ही पहले नीता के घर गया पर वहाँ उसे कोई नही मिला.

नेहा के घर के सामने ठाकुरजी की कार देखते ही जयसिंघ समझ गया कि कुछ गड़बड़ हुई है.

जयसिंघ का दिल नेहा के घर मे जाने से रोक रहा था.

पर जयसिंघ को जा कर देखना था कि बात क्या है.

जयसिंघ के घर मे घुसते ही पिताजी का गुस्सा और बढ़ गया.

जयसिंघ सब को एक साथ देख कर सोचने लगा कि अब क्या हुआ है.

पिताजी-तुझे पैदा करके मैं ने सबसे बड़ी ग़लती की

जयसिंघ-बात क्या है.पिताजी

पिताजी-देख अपनी बहन को कैसी हालत हुई है उसकी

नेहा अपनी भाभी के गले लगी हुई थी.

जयसिंघ-क्या हुआ नेहा को

पिताजी-उसका नाम अपनी गंदी ज़ुबान पर मत ले

जयसिंघ-शालिनी क्या हुआ है.

शालिनी-रात मे कुमार ने नेहा के साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की. वो अच्छा हुआ जो नेहा बच गयी.

जयसिंघ-कुमार ,क्या बक रही हो, वो तो कर रात को होटेल मे था, मेरे साथ था

शालिनी-यही सच है

जयसिंघ-नेहा ने कहा होगा. किसने ने देखा है

किसीने जवाब नही दिया.

जयसिंघ-नेहा तुम्हारा प्राब्लम क्या है. क्यूँ ये सब कर रही हो

पिताजी ने जयसिंघ की बात सुनते ही उसे जोरदार थप्पड़ मारा.

पिताजी के थप्पड़ मारने से जयसिंघ के मूह से खून निकल गया.

बच्चे जो खेल रहे थे वो डर के दूसरे कमरे मे चले गये

घर मे पिन ड्रॉप साइलेंट हो गया.

सब पिताजी और जयसिंघ की तरफ देखने लगे.
 
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