• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मैं और मेरा परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
फ्लॅशबॅक 1032

जयसिंघ थप्पड़ खा कर अपना खून साफ करने लगा.

जयसिंघ को थप्पड़ खा कर गुस्सा आ गया.पर थप्पड़ मारने वाले उसके पिताजी थे इस लिए उसने अपना गुस्सा कंट्रोल किया.

शालिनी अपने पति का खून देख कर उनके पास जाना चाहती थी पर नेहा ने उसको ऐसा गले लगा लिया था कि उसको अपने पिता को भेजना पड़ा.

शालिनी के पिता ने आगे जाकर अपने दामाद को संभाल लिया .और ठाकुरजी ने पिताजी को पकड़ लिया.

पिताजी-क्या कहा नेहा झूठ बोल रही है

जयसिंघ-हाँ वो झूठ बोल रही है.

पिताजी-एक बार और कहा तो मैं भूल जाउन्गा कि तू मेरा बेटा है

जयसिंघ-अभी भी आप मुझे अपने बेटा कहाँ मानते हो , मैं तो आपका कोई नही हूँ तभी मुझे थप्पड़ मारा

जयसिंघ की बात सुनकर माँ और पिताजी को झटका लगा.

माजी-तू ये क्या बोल रहा है

जयसिंघ-मैं सही कह रहा हूँ ,हमेशा उस नेहा की बात सुनते है मैं तो इनका कोई हूँ ही नही.

पिताजी-नेहा तेरी बहन है तुझे वो झूठी लगती है

जयसिंघ-हाँ, किसी ने देखा कुमार को यहाँ.उसको मैं ने मीटिंग के लिए भेजा था वो यहा कैसे आ सकता है, वो वहाँ मीटिंग मे है , मेरे सामने था

पिताजी-तेरे कहने का मतलब है नेहा ने खुद अपने कपड़े फाडे है ,खुद ऐसी हालत बनाई है

जयसिंघ-बात कुछ और भी हो सकती है. आप पूरी बात सुनते कहाँ है.जब देखो तब गुस्सा करते हो , गुस्सा करने से क्या होगा

माजी-जयसिंघ अपने पिताजी से बात कर रहे हो भूलो मत

जयसिंघ-मैं नही ये भूल जाते है कि मैं इनका बेटा हूँ.

शालिनी-आप नेहा की बात तो सुन लीजिए

जयसिंघ-क्या सुनूँ ,पिताजी कुछ सोचने देंगे तभी सोचूँगा ना

पिताजी-तेरे जैसा भाई इसे मिला है तभी उसकी हालत ऐसी हुई है.इस्क खून नही खौल रहा नेहा की हालत देख कर

जयसिंघ- अगर नेहा के साथ कुछ हुआ होगा तो आपसे पहले मैं उसको मारूँगा जिसने नेहा को हाथ लगाया हो

पूजा-भैया ,कोमल झूठ क्यूँ बोलेगी ,वो तो बच्ची है उसने जो देखा है वही बताएगी ना

जयसिंघ-मुझे नही पता कोमल ने क्या देखा है ,या उसको क्या बताया गया है.

शालिनी-पहले सुन लीजिए ,फिर बताना क्या सच है और क्या झूठ है.

और शालिनी ने जयसिंघ को सब कुछ बता दिया.

जयसिंघ-मैं ने सही कहा था ,

नेहा-आप मुझे झूठ बोल रहे है, अपनी बहन को ,और उस 2 दिन के दोस्त पे इतना यकीन है

जयसिंघ-तू बात ही मत कर. मैं आज सुबह अजीत कुमार से मिला था .अगर वो रात मे यहा होते तो मीटिंग मे कैसे पहुँचते ,वहाँ सब ने बताया कि कुमार रात को वहाँ आया था.और ना उसको कोई चोट थी

नेहा-वो झूठ बोल रहे है

जयसिंघ-तूने कहा कि तूने कुमार को फ्लवर प्लॉट मारा तो ,फिर तो उसका खून निकला होगा.

नेहा-निकला था

जयसिंघ-पर उसके सर पे कोई निशान नही था ,ना ही कोई मलम लगा हुआ था. ना हेर कट किए हुए थे

नेहा-भाभी मैं सच बोल रही हूँ

शालिनी-मुझे तुम पर पूरा भरोसा है. तू झूठ नही बोल सकती, ना ही मेरी कोमल

जयसिंघ-सब तुम्हारे सामने है फिर भी नेहा की बात पे तुम्हें विश्वास है.

नीता-मुझे भी है. मैं ने नेहा की आँख मे डर देखा है.

नेहा-उस कमरे मे खून पड़ा होगा .

पूजा उस कमरे मे चली गयी पर वहाँ खून नही था फ्लवर प्लॉट ठीक ठाक था. उस पे भी खून का निशान नही था.

पूजा-यहाँ कोई खून का निशान नही है.

[अजीत ने खून को साफ कर दिया था .और फ्लवर प्लॉट टूटा नही था,घर मे एक जैसे 4 फ्लवर प्लॉट थे , अजीत ने बेडरूम के ग्लोवर प्लॉट को हॉल के फ्लवर प्लॉट से बदल दिया था जिस से फ्लवर प्लॉट पर कोई निशान भी नही था]

नेहा-ये कैसे हो सकता है.

जयसिंघ-यही सच है. तू कुमार को फसा रही है.

नेहा-मैं सच कह कर रही हू . कोमल की कसम

जयसिंघ-अपनी बेटी की झूठी कसम मत खा ,वरना वो मररर

जयसिंघ की बात पूरी होने से पहले नेहा ने अपने भाई को थप्पड़ मारा

नेहा-दुबारा कोमल के बारे में कुछ कहा तो मैं जान ले लूँगी.

जयसिंघ को नेहा के थप्पड़ मारने से गुस्सा आ गया

जयसिंघ भी नेहा को थप्पड़ मारने को हाथ उठा लिया था पर नेहा के गाल के पास जाकर रुक गया

नेहा को थप्पड़ मारते हुए देख पिताजी गुस्से से पागल हो गये.

पिताजी ने किसी बात की परवा नही की और जयसिंघ पर टूट पड़े.

पिताजी जयसिंघ को थप्पड़ पे थप्पड़ मारते गये.

पिताजी-तेरी हिम्मत कैसे हुए मेरी बेटी पे हाथ उठाने की. मैं ने आज तक उस पे हाथ नही उठाया ,और तूने नेहा को थप्पड़ मारा

,और तूने नेहा को थप्पड़ मारा

पिताजी जयसिंघ को मारने लगे.

जयसिंघ अपने पिताजी को रोक सकता था पर पिताजी पे जयसिंघ कभी हाथ नही उठाएगा.

अपने पति को मार खाते हुए देख कर शालिनी पिताजी को रोकने लगी.

शालिनी-पिताजी इनको मत मारिए

पिताजी-तू हट जा बहू इसका दिमाग़ ठिकाने लाना ज़रूरी है.

पिताजी ने शालिनी को अलग किया और जयसिंघ को मारने लगे.

शालिनी के पिताजी अपने दामाद को बचाने के लिए आगे आ गये.

ठाकुरजी भी पिताजी को रोक रहे थे पर पिताजी आज रुकने वाले नही.

जयसिंघ ने लिमिट क्रॉस कर दी थी

ज़गदने मे कोई रोकने जाता है तो एक 2 थप्पड़ उसे भी पड़ते है.

पिताजी का एक थप्पड़ शालिनी के पिता के गाल पर पड़ा.

शालिनी के पिता को गुस्सा आ गया .पर वो अपनी बेटी की वजह से कुछ बोले नही.

अपने ससुर को थप्पड़ लगते ही जयसिंघ ने पिताजी का हाथ पकड़ लिया.

जयसिंघ-बस बहुत हो गया

शालिनी-पिताजी आप ठीक हो ना

शालिनी के पिताजी-मैं ठीक हूँ, पर अपने ससुर को समझा दे,

जयसिंघ-आप को जो करना था वो आपने कर लिया ,

पिताजी-तेरी वजह से हो रहा है

जयसिंघ-मेरी नही नेहा की वजह से ये सब हो रहा है.

शालिनी-पिताजी आप ठीक हो ना

शालिनी का पिता-योगेन्द्र सिंग ये तुम ने ठीक नही किया. गुस्सा हमे भी आता है

पिताजी-ये हमारे घर का मामला है तुम बीच मे बोलने वाले कौन होते हो

शालिनी का पिता-बात मेरी बेटी के पति की है,

शालिनी-पिताजी इसे यही ख़तम कर दो

शालिनी का पिता-तू भी इनकी तरफ से बोल रही है.

शालिनी-मेरे कहने का वो मतलब नही था.

शालिनी का पिता-मैं बाहर रुक रहा हूँ, तुझे आना है तो आ वरना मैं जा रहा हूँ

शालिनी के पिताजी बाहर चले गये

जयसिंघ-पिताजी ये ठीक नही हुआ.

पिताजी-तू अपनी गंदी ज़ुबान से मेरा नाम मत ले

जयसिंघ-आप हमेशा खुद की मनमानी करते है.और अपनी बेटी को सर पे चढ़ा रखा है

पिताजी-तू मत सीखा मुझे क्या करना है

जयसिंघ-आप अभी भी नेहा को समझा दो ,

शालिनी-नेहा ऐसी नही है, कुमार गंदा इंसान है. उसकी नज़र नेहा पे थी, नीता पे थी. नेहा के ज़रिए मुझे पाना चाहता था

जयसिंघ-तू भी नेहा की तरह बाते करने लगी है. कुमार चाहता तो शादी मे जो हुआ उसके बाद मुझे कंपनी से निकाल देता.पर उसने दोस्ती की खातिर ऐसा नही किया तू उसपे शक कर रही हो, वो तुम्हें अपनी बहन मानता है , तुमने उसे पार्टी मे थप्पड़ मारा था फिर भी उसने कुछ नही कहा और तुम उस पे शक कर रही हो

शालिनी-आप कुछ भी कहो मुझे पता है नेहा मुझसे कभी झूठ नही बोलेगी. वो कुमार इतना घटिया इंसान था कि नीता को कपड़े बदलते हुए देखता था.

पिताजी-उस कुमार की तो, उसे मैं जान से मार डालूँगा.

जयसिंघ-आप ऐसा नही करेंगे

पिताजी-तू रोकेगा मुझे

जयसिंघ-हां,

पिताजी-तू अपनी बहन के गुनहगार को बचाएगा

जयसिंघ-उसने कुछ नही किया है तो ज़रूर बचाउन्गा,

पिताजी-तू मेरा बेटा हो ही नही सकता

जयसिंघ-आपने कभी समझा ही नही.

पिताजी-निकल जा यहाँ से दुबारा अपनी शकल मत दिखाना.मैं समझूंगा कि मुझे सिर्फ़ एक बेटा था ,

जयसिंघ-चलो शालिनी.अवी को भी अपने साथ लो.

पिताजी-ले जा ,मेरा छोटू मुझे पोता देगा ,आज से मेरा सिर्फ़ एक बेटा है वो है छोटू, छोटू के बेटे को अपना वारिश बनाउन्गा ,

माजी-ये आप क्या कह रहे है.

पिताजी-इसके जैसा बेटा होने से बे औलाद होना अच्छा होता

जयसिंघ-चलो शालिनी, अब हम एक पल भी यहा नही रुकेंगे

शालिनी ने एक बार पिताजी की तरफ देखा .और अवी को उठा कर जयसिंघ के पास गयी.

नेहा-भाभी

शालिनी ने नेहा की तरफ देखा ,नेहा रो रही थी.

शालिनी ऐसे मे क्या करती ,

नेहा वहाँ रो रही थी और जयसिंघ चलने को बोल रहा था

नेहा से शालिनी का रिस्ता जयसिंघ की वजह से जुड़ा था

शालिनी उसी रिस्ते की डोर के साथ शालिनी जाने लगी

जयसिंघ-चलो यहाँ से

जयसिंघ अपनी बीवी और बेटे के साथ जाने लगा

माजी-जयसिंघ रुक जाओ,

माँ जयसिंघ को रोकने के लिए आगे पैर रखा था कि उनका पैर खिलोने पे पड़ गया.

माँ फिसल कर गिर गयी.

माँ की चीख निकल गयी.

माँ-जयसीिंघह

माँ की चीख सुनते ही पिताजी माँ के पास आ गये.

जयसिंघ और शालिनी भी रुक गये.

पिताजी ने माँ को पलट दिया

माँ के पेट मे कुल्हाड़ी घुसी हुई थी.
 
फ्लॅशबॅक 1033

माँ के पेट मे कुल्हाड़ी घुस गयी थी.

पिताजी ये देखते ही ज़ोर से चिल्लाने लगे.

जयसिंघ और शालिनी भी भागते हुए माँ के पास आ गये.

माँ को इस हालत मे देखते ही जयसिंघ खुद को रोक नही पाया

जयसिंघ-माँ

और जयसिंघ अपनी माँ का हाथ पकड़ने वाला था कि पिताजी ने उसे धक्का दे कर दूर कर दिया.

पिताजी-दूर हो जा ,ये सब तेरी वजह से हुआ है. अगर तेरी माँ को कुछ हुआ तो तेरी जान ले लूँगा.

माँ-आअहह जयसिंघ को कुछ मत कहिए.

नेहा तो ये देखते ही खुद को संभाल ही नही पाई

नीता और पूजा भी भाग कर अपनी माँ के पास आ गयी

पिताजी-कुछ मत कहो ,तुम्हें दर्द होगा.

मा,-जयसिंघ

पिताजी-कोई डॉक्टर को बुलाओ

जयसिंघ-माँ,

माँ-जयसिंघ

जयसिंघ-मैं आपको कुछ नही होने दूँगा

शालिनी-माँ को हॉस्पिटल ले चलिए

पिताजी ने माँ को गोद मे उठा लिया.और माँ को ठाकुरजी के कार मे ले आए .

जयसिंघ अपनी माँ का हाथ पकड़े हुए था.

पिताजी माँ को लेकर कार मे बैठ गये और साथ मे जयसिंघ भी.

ठाकुर कार को हवा मे उड़ाते हुआ हॉस्पिटल ले आए.

पिताजी वैसे ही माँ को गोद मे उठा कर हॉस्पिटल मे चले गये कुल्हाड़ी अभी भी माँ के पेट मे थी.

डॉक्टर जल्दी माँ को ओपरेशन रूम मे ले गये .माँ का ऑपरेशन सुरू हो गया.

ऑपरेशन रूम के सामने पिताजी और जयसिंघ खड़े होकर रो रहे थे.

नेहा नीता और पूजा भी हॉस्पिटल मे आ गयी .और रोना सुरू किया.

शालिनी और शालिनी के पिता जी भी हॉस्पिटल मे आ गये.

शालिनी को तो कुछ समझ ही नही आ रहा था

ये क्या हो गया

इतना कुछ हो जाएगा ये किसी ने सोचा नही था

अगेर माँ को कुछ हो गया तो जयसिंघ को इसकी बहुत बड़ी किम्मत चुकानी पड़ेगी ये शालिनी को पता था

शालिनी बस दुआ कर रही थी माँ को कुछ ना हो

हर कोई यही दुआ कर रहे थे कि माँ को कुछ ना हो

शालिनी के पिता पिताजी को सहारा देना चाहते थे पर वो किस मूह से उनसे बात करते .अभी थोड़ी देर पहले उननो पिताजी से झगड़ा किया .अब पछता रहे थे

नीता-मेरी वजह से हुआ है.

पूजा-तूने क्या किया

नीता-मैं ने वहाँ कुल्हाड़ी फेकि थी

पूजा-फिर तो मेरी ग़लती है. वो स्वेता का खिलोना था.

नेहा-मेरी वजह से माँ की ऐसी हालत हुई है.मेरी ग़लती है

तीनो बहनें खुद को को कसूर वार मान रही थी.

तीनो को लग रहा था कि ये सब उनकी वजह से हुआ है .

तीनो ने सोच भी लिया कि उनकी वजह से ये सब हुआ है

जयसिंघ अपनी बहनों को देखता रह गया .उसके आँख से पानी निकल रहा था.

जयसिंघ अपनी.माँ के बहुत करीब था

माँ को अगेर कुछ हो गया तो वो खुद को कभी माफ़ नही कर पाएगा

जयसिंघ ऐसा कभी नही चाहता था.

शालिनी भी रो रही थी.क्या से क्या हो गया.

एक पल मे पूरी फॅमिली बिखर गयी.

शालिनी ने नेहा नीता को गले लगा लिया.

शालिनी-कुछ नही होगा माँ को

नेहा-भाभी ये क्या हो गया. मेरे साथ ऐसा क्यूँ हो रहा है

शालिनी-जिसे जितना प्यार मिलता है उतना दर्द भी मिलता है.

नेहा-मेरे साथ ही क्यूँ हो रहा है

शालिनी-कुछ भी तो नही हूँ ,पिछली बार बच गयी .इस बार भी बच गयी. मैं तुझे कभी कुछ नही होने दूँगी.

नीता-भाभी भैया ने ऐसा क्यूँ किया

शालिनी-उनकी आँख पर दोस्ती की पट्टी बँधी हुई है .जिस दिन निकल जाएगी तब सब अच्छा हो जाएगा .

पिताजी-कुछ अच्छा नही होगा.

ठाकुर-हिम्मत रखो, तुम ऐसा कहोंगे तो नेहा नीता का क्या होगा , छोटू को जब ये पता चलेगा तो उसको तुम्हें संभालना होगा

पिताजी-कैसे रोकू ,जब अपना बेटा अपने जान का दुश्मन हो तो कैसे हिम्मत रखू

ठाकुर-बेटा है ग़लती हो जाती है

पिताजी-एक बार नही कितनी बार ग़लती करेगा.

पहले गाँव छोड़ कर गया. घर की बहू को दूर रखा, घर के वारिस को दूर रखा , नेहा का साथ नही दिया , और अब

ठाकुर-ये समय सही नही है इन बातों के लिए

पिताजी-ऐसा बेटा किस काम का जो अपनी बहन पे विश्वास नही रखता ,अपनी बहन को झूठी बोलता है. अपनी माँ को मार दिया

आख़िरी वर्ड सुनते ही जयसिंघ वही ज़मीन पर गिर गया.

जयसिंघ अपने पिताजी की बात सुनकर खून के आसू रोने लगा.

शालिनी के पिता ने जयसिंघ को उठा कर चेयर पे बैठा दिया.और उसको सहारा देने लगे

पर लास्ट मे पिताजी ने जो कहा कि "जयसिंघ ने माँ को मारा है "ये बात किसी के दिमाग़ मे बस गयी ,

पिताजी-अगर नेहा की माँ को कुछ हुआ तो मैं इसको छोड़ूँगा नही.

शालिनी-पिताजी इनकी क्या ग़लती है.

पिताजी-ये तू कह रही है.मुझे तुमसे ये उम्मीद नही थी बहू

शालिनी-पिताजी ये एक आक्सिडेंट है.

पिताजी-आक्सिडेंट , इसने मारा है मेरी पत्नी को , जयसिंघ ने मारा है अपनी माँ को

अपने पिताजी की बात सुनते ही नेहा को गुस्सा आ गया .नेहा जयसिंघ के सामने जाकर खड़ी हो गयी,

पिताजी ने भावनाओं मे बह कर ये बोल दिया था , पर नेहा के दिमाग़ ने इसी को सच मान लिया

नेहा के दिल मे जयसिंघ के लिए नफ़रत पैदा हो गयी

नेहा को अपने पिताजी की बात सही लगी

नेहा जयसिंघ के पास आ गयी

नेहा को देखते ही जयसिंघ को उसको गले लगा कर रोने का दिल हो रहा था

जयसिंघ सामने खड़ा हो गया ,

दोनो भाई बहन रो रहे थे

नेहा ने अपने आसू को पोछ लिए

और जयसिंघ के गाल पर थप्पड़ मार दिया

बस एक थप्पड़ नही ,

नेहा बिना रुके जयसिंघ को थप्पड़ मारती गयी

और बोलने लगी कि तुमने माँ को मारा है

नेहा को किसी ने रोका नही

जयसिंघ को भी लग रहा था कि वो सज़ा के काबिल है

उसे सज़ा मिलनी चाहिए

नेहा जयसिंघ को थप्पड़ मारते मारते थक कर वही नीचे बैठ कर रोने लगी

नेहा-मारो मुझे ,मुझे भी मार डालो , जैसे माँ को मारा है

जयसिंघ रोने लगा.

नेहा-मैं नफ़रत करती हूँ आपसे नफ़रत, मुझे लगा आप एक दिन मुझे समझ जाओगे पर मैं ग़लत थी. आपने मारा है माँ को, आपने

जयसिंघ अपनी बहन की बात सुनते ही टूट सा गया.

शालिनी ने नेहा को वहाँ से अलग किया.और जयसिंघ के पास बैठ गयी.

जयसिंघ शालिनी के गले लग कर रोने लगा.

जयसिंघ छोटे बच्चे की तरह रोने लगा.

शालिनी जयसिंघ को शांत करने की कोशिश करने लगी.

पूजा भी अपने भाई को बहुत कुछ बोलना चाहती थी पर बोल नही पाई.

शालिनी ऐसी जगह फसि हुई थी कि वो ना नेहा की तरफ से बोल सकती थी और ना अपने पति के

और जिसका डर था वही हुआ

डॉक्टर ऑपरेशन रूम से बाहर आ गये

डॉक्टर-सॉरी हम उनको बचा नही पाए ,कुल्हाड़ी उनके दिल के करीब थी ,हम ने पूरी कोशिश की पर हम बचा नही पाए

डॉक्टर के बोल अपने कानो पर पड़ते ही पिताजी घुटनो पर नीचे गिर गये और उनकी आँख से आसू निकलने लगे.

नेहा नीता और पूजा डॉक्टर की बात सुनते ही ऐसे रोने लगी कि नर्स को उनको पकड़ना पड़ा.

माँ के जाने की बात सुनकर पिताजी का दिल चिर गया.

पिताजी की जान उनके शरीर से चली गयी थी.

पिताजी ने माँ के बिना जीने के बारे में कभी सोचा नही था.

पिताजी को ऐसा लग रहा था कि उनके सीने से उनका दिल निकाल लिया हो.

जयसिंघ को अपनी माँ के जाने की बात सुनकर जोरदार झटका लगा.

जयसिंघ रोते हुए खड़ा हो गया .और अपने पिताजी के पास जाने लगा.

जयसिंघ से चला भी नही जा रहा था ,जयसिंघ गिरते हुए अपने पिताजी के पास जाकर बैठ गया.

जयसिंघ को अपने सामने देख कर पिताजी को उसकी जान लेने का मन हो रहा था पर वो ऐसा कर नही सकते थे.

बोलना आसान होता है कि अपने बेटे की जान ले लूँगा और करना नामुमकिन होता है.

जयसिंघ ने अपने पिताजी के हाथ पकड़ कर अपने गले पर रख दिया

और खुद को मारने के लिए बोल रहे थे

जयसिंघ अपने पिताजी के हाथो से अपनी गर्दन दबा रहा था.

जयसिंघ को ऐसा करते हुए देख कर पिताजी फुट फुट कर रोने लगे.

जयसिंघ रोते हुए अपने पिताजी के हाथो को पकड़ कर अपने गालो पर थप्पड़ मारने लगा.

शालिनी भी रो रही थी. शालिनी अपनी ननंद को संभालते हुए रो रही थी.

ठाकुर पिताजी को संभालने की पूरी कोशिश कर रहे थे.

जयसिंघ खुद को गुनहगार मान रहा था.

नेहा अपनी माँ के जाने का ज़िम्मेदार अपने भाई को मान कर उसके लिए अपने दिल मे नफ़रत पैदा कर ली.

इसमे किसी ग़लती थी ये सब से बड़ा सवाल था.

सब ने तो जयसिंघ को ज़िम्मेदार मान लिया था .पर क्या उसने किया है ,

पिताजी माँ को देखने के लिए रूम मे चले गये .

माँ को इस तरह बेड पर लेटा हुआ देख कर उनकी आँख से पानी निकल रहा था.

पिताजी-तुम मुझे अकेला छोड़ कर क्यूँ गयी. हम ने साथ रहने की कसमे खाई थी .क्या हुआ उस कसमो का,

शालिनी-पिताजी

पिताजी-देखो ना बहू ,मुझे अकेला छोड़ कर चली गयी. एक बार भी नही सोचा की उसके बिना मैं कैसे जीऊँगा

शालिनी-आप ऐसे रोएंगे तो हमारा क्या होगा.

पिताजी-मैं इसके बिना कैसे जीऊँगा.

शालिनी-हमारे लिए जीना होगा आपको,नेहा के लिए जीना होगा

पिताजी-उस जयसिंघ के लिए ,उसको मेरी नज़रों से दूर लेके जाओ वरना मैं उसे......

शालिनी पिताजी की बात सुनते समझ गयी कि अब पिताजी को जयसिंघ से नफ़रत हो गयी है.

शालिनी ने माँ को वचन दिया था कि वो घर को कभी टूटने नही देगी. पर शालिनी अपना वचन पूरा नही कर पाई.

अब शालिनी कुछ नही कर सकती थी.

जयसिंघ को गाँव लाने के लिए शालिनी ने क्या कुछ नही किया .

अब शालिनी रोने के सिवा कुछ नही कर सकती थी.

जयसिंघ अपनी माँ के जाने से रोते रोते बेहोश हो गया.

नेहा नीता और पूजा एक दूसरे के आसू पोछते हुए माँ के जाने का दर्द बाँट रही थी.

पिताजी माँ के साथ उसी बेड पर लेट कर रोते रोते बेहोश हो गये.

शालिनी पिताजी को ऐसे माँ के साथ सोते हुए देख कर ,उनका प्यार देख कर ,खुद को रोक नही पाई .और रूम का गेट बंद करके पिताजी को माँ के पास वैसे ही सोने दिया.
 
फ्लॅशबॅक 1034

दूसरे दिन माँ को गाँव लाया गया.

छोटू अपनी माँ को देखते पागलो की तरह रोने लगा.

छोटू के लिए माँ ही सब कुछ थी

छोटू माँ के बिना रहने का सोच भी नही सकता , छोटू भी माँ के साथ जाने की बात कर रह था

सब से ज़्यादा छोटू रो रहा था

छोटू को संभालने के लिए 2 लोग लगे. सुमन भी अपनी सास को देख कर शालिनी के गले लग कर रो रही थी

जयसिंघ एक कौने मे बैठ कर खून के आसू निकाल रहा था.

नेहा और नीता तो माँ के पास बैठ कर उनका हाथ पकड़े हुए रो रही थी.

पूजा बच्चो को संभाल रही थी .

माँ के जाने की खबर रमेश को बताई गयी.

रमेश कंपनी से छुट्टी निकालने की पूरी कोशिश कर रहा था. पर छुट्टी मिलना मुश्किल लग रहा था.

बड़ी मुश्किल से रमेश को छुट्टी मिली पर 2 दिन बाद की.

पिताजी को यकीन करना मुश्किल हो रहा था कि माँ उनको छोड़ कर जा चुकी है.

पिताजी अपने गुस्से को अपने सीने मे दबा कर जयसिंघ को देख रहे थे.

ठाकुर ने सब इंतज़ाम कर दिया. सब को बताया गया कि पैर फिसल कर आक्स पर गिरने से डेत हुई है.

छोटू से भी बात छुपाई गयी कि उस दिन नेहा के घर पे क्या हुआ था

उस दिन वहाँ जो जो प्रेज़ेंट था उनको ही पता था कि क्या हुआ था

अगर छोटू को पता चला कि जयसिंघ की वजह से माँ उसे छोड़ कर चली गयी है

फिर तो छोटू जयसिंघ को जान से मार देगा

छोटू के लिए यही अच्छा था कि उसे झूठ बताया जाए

ये बात सब से छुपाई गयी कि उस से पहले क्या हुआ था. सब इसको आक्सिडेंटल डेत मान रहे थे

पिताजी रोते हुए माँ के पास आए ,और माँ के सर पे किस किया .और माँ को उठाने लगे.

जयसिंघ ने आगे आकर रोते हुए अपनी माँ को उठाने मे पिताजी की मदद की.

पिताजी जयसिंघ छोटू और ठाकुरजी ने माँ को उठा कर चिता पे लिटा दिया.

पंडितजी अंतीमसंस्कार की तय्यारी करने लगे.

शालिनी और बाकी सब भी खुद को रोक नही पाए और माँ को देखने के लिए शमशान पर आ गये.

पिताजी लगातार रो रहे थे.

पंडितजी ने चिता को आग देने के लिए पिताजी को पूछा.

पंडितजी-चिता को आग कौन देगा.

पिताजी ने रोते हुए पंडितजी की तरफ देखा, पिताजी के मूह से जयसिंघ का नाम नही निकल रहा था

माँ की यही इच्छा था कि उनकी चिता को आग जयसिंघ दे

पंडितजी ने फिर से एक बार पूछा,पर पिताजी बस रोते रहे.

ठाकुर-जयसिंघ देगा.

पंडितजी ने जयसिंघ मे मशाल दी .

जयसिंघ ने अपने पिताजी की तरफ देखा और अपनी माँ की चीता को आग दी.

पिताजी माँ की चिता को जलते हुए देखते रह गये

वहाँ से कोई घर जाने के लिए हिला नही. पिताजी के साथ सब रोते हुए माँ को अलविदा कर रहे थे.

आग शांत होते ही पिताजी खड़े हो गये और अपने आसू पोछ लिए.

पिताजी ने छोटू का हाथ पकड़ लिया और दूसरी तरफ अपनी बेटियो का , और अपने घर ले जाने लगे

जयसिंघ पिताजी को ऐसे जाते हुए देख कर फिर से रोने लगा.

शालिनी ने जयसिंघ को हिम्मत दी और घर ले जाने लगी.

पिताजी अपनी बेटियो के साथ घर आ गये. पिताजी ने मा के फोटो की तरफ देखा और अपने दिल को पत्थर का बना दिया.

पिताजी ने अवी को अपनी गोद मे उठा लिया.अवी अपने दादाजी की गोद मे आते ही उनके गाल पे एक किस किया.

पिताजी की आँख से आसू निकल गये .अपने दादाजी को रोता हुआ देख अवी भी रोने लगा.

पिताजी अवी को उठा कर गेट के पास आ गये जहाँ पर जयसिंघ और शालिनी खड़े थे.

पिताजी के पीछे बाकी सब भी आ गये.

पिताजी ने अवी को शालिनी की गोद मे दिया.

पिताजी ने एक बार अपनी बहू और पोते की तरफ देखा और गेट बंद कर दिया.

गेट बंद करते ही पिताजी रोने लगे. पिताजी के साथ बाकी सब भी रोने लगे.

पूजा समझ गयी कि पिताजी ने क्या किया है.

पिताजी के इस तरह गेट बंद करने से जयसिंघ पूरी तरह से टूट गया.

शालिनी रोते हुए अपनी पति को संभाल रही थी.

जयसिंघ वही गेट के पास बैठ कर रोते हुए अपने पिताजी को गेट खोलने को कह रहा था.

पिताजी जयसिंघ की आवाज़ सुनकर रोते हुए अपने बेटियो को गले लगा लिया.

पिताजी-चले जाओ यहाँ से दुबारा मेरे सामने मत आना ,

जयसिंघ वही रोते हुए अपने पिताजी को गेट खोलने को कहता गया.

शालिनी ने जयसिंघ को चलने को कहा.

पहली बार शालिनी जयसिंघ को यहाँ से चलने को कह रही थी.

शालिनी को पता था कि पिताजी जयसिंघ को कभी माफ़ नही करेंगे.

पिताजी ने माफ़ कर भी दिया पर नेहा जयसिंघ को कभी माफ़ नही करेगी

शालिनी उस दिन का इंतज़ार करने के लिए खुद को मेंटली तय्यार करने लगी जिस दिन पिताजी जयसिंघ को माफ़ करेंगे.

शालिनी जयसिंघ को वहाँ से ले गयी. जयसिंघ हमेशा गाँव से जाना चाहता था पर आज जयसिंघ गाँव छोड़ने को तय्यार नही था.

जयसिंघ शालिनी को यही रहने के लिए बोल रहा था

पर शालिनी जयसिंघ को गाँव से वापस ले जाने लगी

शालिनी को ये करना ही था

अगर ज़सयसिंघ यहाँ रहा तो पिताजी के घाव कभी नही भरेंगे

भगवान कैसे कैसे दिन दिखता है

शालिनी हमेशा जयसिंघ को गाँव लाने की कॉसिश करती और आज खुद जयसिंघ को गाँव से दूर ले जा रही थी

शालिनी बड़ी मुश्किल से जयसिंघ को गाँव से ले गयी.

पिताजी अपने पोते को दूर कर के कैसे खुश रह पाते ,पिताजी का दिल उसी दिन पत्थर का होगा जिस दिन माँ चली गयी.

पिताजी ने अपने पोते के लिए रोना बंद किया .और अपनी बेटियो के लिए जीना सुरू किया.

इस तरह जयसिंघ और शालिनी अपने घर से दूर हो गये.

जयसिंघ के लिए नेहा के दिल मे नफ़रत पैदा हो गयी.

पिताजी अपनी पत्नी की इच्छा पूरी करने पे लग गये. छोटू को बाप बनाने की.

दूसरी तरफ जयसिंघ कुछ समय के लिए माँ की डेत के सदमे मे चला गया.

शालिनी अपने तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी जयसिंघ को सदमे से बाहर निकालने की.

शालिनी अपने पति के साथ शहर3 मे रहने लगी और पिताजी अपनी बेटियो के साथ गाँव मे.

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

छोटी चाची ने आज मुझे वो कहानी सुनाई उसे सुनकर मैं रोने लगा.

आज तक मुझे कितनी बाते छुपाई गयी.

पापा को ऐसा नही करना चाहिए था. पर इसमे पापा की ग़लती नही थी.

दोस्त पे हमेशा अपनी फॅमिली से ज़्यादा विश्वास हर कोई करता है.

पापा की सामने सारे सबूत नेहा बुआ के खिलाफ थे ऐसे मे वो भी क्या करते

मेरी माँ के बारे में जान कर मुझे उनका बेटे होने पे अभिमान हुआ.

माँ ने पूरे घर को एक करना चाहा ,हमेशा सच का साथ दिया. अपनी फॅमिली को इम्पोर्टेंट दिया.

मैं अपने माँ और पापा की कहानी सुन कर रोने लगा.

छोटी चाची मुझे रोता हुआ देख कर रोने लगी.

चाची ने मुझे गले लगा लिया.

मैं चाची के गले लग कर रोने लगा.
 
चॅप्टर 1035

सी चाची-तू रो क्यूँ रहा है.

अवी-इतना कुछ हो गया और आज तक आपने मुझे कुछ नही बताया

सी चाची-कैसे बताती. तुम सुन ने की हालत मे था ही नही.

अवी-मैं ने सुन लिया ना, कुछ कहा क्या बीच मे

सी चाची-बड़ा आया सुन लिए बोलने वाला, मैं जैसे जैसे बता रही थी तू वैसे वैसे रो रहा था.

अवी-मैं नही रोया

सी चाची-आँख से पानी निकल रहा है और कहता है रो नही रहा हूँ.

अवी-वो अपने आप निकल रहे है.

सी चाची-अब बंद कर रोना वरना आगे क्या हुआ वो नही बताउन्गी.

अवी-मैं रोक रहा हूँ पर आसू रुकने का नाम नही ले रहे है

सी चाची-मुझे बता मैं रोक दूँगी.

अवी-माँ(शालिनी) ने मुझ से सब कुछ छुपाया क्यूँ

सी चाची-तू कितना छोटा था उस वक्त ,तुझे कैसे बताती शालिनी भाभी.

अवी-पर मैं ने कितनी बार पूछा था कि दादाजी हमारे घर क्यूँ नही आते ,एक बार भी नही बताया

सी चाची-कैसे बताती ,और क्या कहती तुम्हारे पापा ने दादी को मारा है इस लिए दादाजी नही आते

अवी-पापा ने कुछ नही किया, आप को ऐसा लगता है पापा ने दादी को मारा है.

सी चाची-नही, कोई बेटा अपनी माँ को कैसे मार सकता है

अवी-फिर आपने ऐसा क्यूँ कहा

सी चाची-वो तो इसी लिए कहा कि ये दादाजी ना आने की वजह थी.

अवी-पर पापा को ऐसा नही करना चाहिए था.थोड़ा भरोसा करते तो

सी चाची-तुम्हारे पापा ने कुछ नही किया. वो तो पैर फिसलने से हुआ.

अवी-मैं नेहा बुआ की बात कर रहा हूँ

सी चाची-नेहा के साथ जो हुआ वो उसकी किस्मत मे लिखा था ,तुम्हारे पापा ने कुछ नही किया.

अवी-पापा को नेहा बुआ की बात पे विश्वास करना चाहिए था.

सी चाची-नेहा के पास अपनी बात साबित करने के लिए कोई सबूत नही था .ऐसे मे तुम्हारे पापा ने कुछ ग़लत नही किया.

अवी-ये आप कैसे बोल सकती है

सी चाची-नेहा के शादी के समय जो हुआ वो ऐसी सिचुयेशन थी जहा तुम्हारे पापा को अपने दोस्त और अपनी बहन मे से किसी एक को सेलेक्ट करना था

अवी-पापा को नेहा बुआ का साथ देना चाहिए था

सी चाची-कैसे देते ,तुम्हारे पापा ने वो शादी करवाई थी ,तुम्हारे पापा ने कुमार को वहाँ लाया था.कुमार उनका दोस्त था,दोस्त पे हम हमेशा ज़्यादा विश्वास करते है. तुम्हारे पापा ने भी वही किया.और कुमार की शादी हो चुकी है ये जयसिंघ से कैसे चुप सकती है , तुम्हारे पापा को नेहा की बात पे भरोसा नही हो रहा था , और शायद उनको खुद पे गुस्सा आ रहा होगा , क्या पता क्या था उनके दिल मे

अवी-नेहा बुआ उनकी बहन थी.

सी चाची-हाँ नेहा उनकी बहन थी. पर तुम्हारे पापा की सोच थी कि उनका दोस्त अपनी शादी की बात क्यूँ छुपाएगा. तुम्हारे पापा तो सुलह करवा रहे थे वो इस लिए कुमार के पीछे गये थे कि अगेर दूल्हा ऐसे मंडप से चला जाएगा तो कौन नेहा से शादी करेगा , तुम्हारे पापा नेहा के लिए कुमार को मना रहे थे,

अवी-तो पापा ने उसके बाद नेहा बुआ से बात करना बंद क्यूँ किया.

सी चाची-तुम्हारे पापा कुमार को समझाने गये थे. तुम्हारे पापा नही चाहते थे कि उनकी बहन की शादी मे दूल्हा ऐसे मंडप छोड़ कर जाए.ऐसे मे नेहा से कौन शादी करता

पर इधर नेहा को सुरेश के साथ शादी करते हुए देख कर उनको गुस्सा आ गया. तुम्हारे पापा को लगा कि नेहा ने सुरेश से शादी करने के लिए ऐसा किया है.

अवी-माँ ने पापा को बताया क्यूँ नही

सी चाची-तुम्हारी माँ ने तुम्हारे पापा को बता दिया पर तुम्हारे पापा कुछ सुन ने को तय्यार नही थे. , तुम्हारी माँ ने जब कहा कि नेहा और सुरेश एक दूसरे से प्यार करते है तो जयसिंघ को लगा कि नेहा ने ये सब सुरेश से शादी करने को किया है ,

अवी-तो ग़लती किसी की है

सी चाची-ग़लती उसकी है जिसने नेहा की किस्मत को ऐसा लिखा है

अवी-पर उसके बाद जो हुआ कुमार ने जो नेहा बुआ के साथ करना चाहा उसके बाद तो पापा की ग़लती थी?

सी चाची-तुम्हारे पापा ने जो देखा उसके साथ चलना सही समझा.

अवी-क्या मतलब

सी चाची-अजीत ने कमरे मे वापस जाकर खून को साफ किया क्यूँ कि उसको तुम्हारे पापा का डर था.सारे सबूत मिटा दिए

फ्लिवेर पॉट को चेंज किया

फिर उसने कुमार की चोट पे टाँके लगा दिए. जिसके लिए कुमार को अपने बाल काटने लगे.

अजीत ने कुमार को नकली बाल लगवा दिए ,और चोट छुप गयी.अजीत ने मीटिंग मे जो था उनको समझा दिया कि तुम्हारे पिताजी को बता दे कि वो रात मे वहाँ आए थे.

तुम ही सोचो तुम्हारे पापा क्या करते

अवी-सही कहा पापा को किसी ने समझा ही ना

सी चाची-तुम्हारे माँ थी ना, उनको पता था कि तुम्हारे पापा बिना वजह नेहा को झूठी नही बोलेंगे

अवी-माँ ने दादाजी को समझाना चाहिए था.

सी चाची-शालिनी भाभी से जितना हो सका उतना उन्होने ने किया ,पर वो ऐसी सिचुयेशन थी की कर कोई अपनी जगह सही था.

अवी-क्या मतलब

सी चाची-तुम्हारे दादाजी सही थे क्यूँ कि वो नेहा से प्यार करते थे,दादाजी ने वही किया जो एक बाप करता

तुम्हारे पापा ने जो देखा उसी के साथ चलना सही समझा.

शालिनी भाभी दोनो के बीच मे फसि हुई थी. तुम्हारी दादी ना अपने बेटे की तरफ से बोल सकती थी और ना अपने पति की

अवी-पर दादी को पापा ने कहाँ मारा है?

सी चाची-तुम्हारे दादाजी ऐसा सोचते है कि तुम्हारी दादी तुम्हारे पापा के वजह से इस दुनिया मे नही है. और देखा जाए तो नेहा ,नीता और पूजा के वजह से तुम्हारी दादी इस दुनिया मे नही रही.देखा जाए तो उस घर मे जितने थे उनकी वजह से तुम्हारी दादी की डेत हुई है

नीता ने कुल्हाड़ी वहाँ रखी, पूजा दीदी की बेटी का खिलोना था, और नेहा की वजह से ये सब हो रहा था. पर सब तुम्हारे पापा को दोषी मान रहे थे

अवी-फिर मेरे पापा को अकेले को सज़ा क्यूँ मिली

सी चाची-क्यूँ कि वो सिचुयेशन ऐसी थी.एक तरफ तुम्हारी तीन बुआ और दूसरी तरफ तुम्हारे पापा

अवी-माँ ने दादाजी को समझाना चाहिए था. उनकी बात हर कोई मानता था

सी चाची-शालिनी भाभी ने पूरी कोशिश की, पर वो इस तरह फसि हुई थी कि वो कुछ समझ पाती इस से पहले तुम्हारी दादी के साथ हादसा हो गया

अवी-माँ ने फिर भी सब को संभाले रखा.

सी चाची-तुम्हारी माँ जैसी बहू पा कर तुम्हारी दादी बहुत खुश थी. वो खुशी खुशी घर को शालिनी के भरोसे छोड़ कर चली गयी.

अवी-माँ ने सब के दिल मे थी

सी चाची-तू भी उनकी तरह है, सब के दिलो मे बस गया है

अवी-आपकी वजह से

सी चाची-तेरी माँ की वजह से, शालिनी भाभी ने जो सुमन दीदी को सिखाया ,वही मैं सीख गयी और तुझे उनके तरह बनाया ,मतलब तू अपनी माँ की तरह बना.

अवी-आज माँ होती तो कितनी खुश होती.

सी चाची-आसमान से शालिनी भाभी तुम्हें देख कर खुश होगी.

अवी-मैं माँ को हमेशा खुश रकने की कोशिश करूँगा.

सी चाची-तू अपने दादाजी जैसा है.

अवी-हमे नेहा बुआ के पास जाना चाहिए

सी चाची-तू वहाँ जाकर फिर रोने लग जाएगा .

अवी-मुझे अब पता है कि मुझे क्या करना चाहिए

सी चाची-नेहा तुम से बहुत प्यार करती है.

अवी-आपकी कहानी से समझ गया मैं

सी चाची-क्या समझा

अवी-नेहा बुआ को मेरी ज़रूरत है

सी चाची-तू नेहा का सहारा बनेगा.

अवी-हाँ, मैं आज तक उनको बुरा समझ रहा था पर वो ऐसी नही है.

सी चाची-मैं तो तुझे हमेशा कहती थी कि नेहा को अपने प्यार से बदल देना.

अवी-तब मैं समझा नही था .आज समझ गया हूँ, और मैं नेहा बुआ को बताउन्गा कि मेरे पापा ग़लत नही है मेरे पापा कितना प्यार करते थे उनसे वो बताउन्गा, मेरे पापा की कोई ग़लती नही थी

सी चाची-नेहा तुम्हें बुरा भला कहेगी, जिस से तुम रोने लगोगे.

अवी-मैं नही रोउन्गा.

सी चाची-क्या करेगा.

अवी-कोमल को देख कर अपने कान बंद करूँगा.

सी चाची-चलो

अवी-एक मिनिट

सी चाची-क्या हुआ

अवी-कोमल की बात पे पापा ने विश्वास क्यूँ नही किया.

सी चाची-कोमल इतनी छोटी थी कि कैसे उसके बाते पे कोई विश्वास करता.

अवी-पर दादाजी ने तो

सी चाची-दादाजी ने कोमल की बात सुनकर नेहा से पूछा था. तब वो बात समझ गये.

अवी-फिर भी पापा को एक बार बुआ पे भरोसा करना चाहिए था

सी चाची-ग़लती सब से होती है.

अवी-मतलब पापा ग़लत थे

सी चाची-कहा ना कोई ग़लत नही था.

अवी-आप ग़लत थी

सी चाची-क्या कहा.

अवी-आपने आज तक मुझसे ये बात जो छुपाई

सी चाची-अब बता दिया ना.

अवी-पहले बता देती तो इस वक्त मैं कोमल के साथ होता

सी चाची-देखो मैं कान पकड़ रही हूँ.सॉरी

चाची मुझसे माफी माँगने लगी.
 
चॅप्टर 1036

अवी-आप कुछ भी करिए मैं आप से नाराज़ हूँ

सी चाची-इस बार माफ़ कर दे, आगे से कुछ नही छुपाउन्गी.

अवी-आप मुझे कहती है सब बताया कर और आप ने

सी चाची-तूने भी तो चाचा की बात छुपाई थी.

अवी-मैं सही समय का इंतज़ार कर रहा था.

सी चाची-मैं भी वही कर रही थी.इस बार अपनी चाची को माफ़ कर ,मैं आगे की कहानी भी बता दूँगी

अवी-आगे का मुझे पता है. फिर माँ और पापा का आक्सिडेंट हुआ ,और मैं यहाँ आ गया

सी चाची-मैं ने कहा ना तुझे कुछ पता नही है. तुझे सब झूठ बताया गया था.

अवी-झूठ ,किस बारे में

सी चाची-तुम खुद सोच क्या हो सकता .

अवी-हाँ, दादी की डेत चाचा की शादी से पहले हुई ये झूठ बताया गया था.

सी चाची-तुम्हारे चाचा की दूसरी शादी से पहले दादी की डेत हुई.

अवी-पर आपने कहा था कि बड़ी चाची ने अकेले घर संभाला था

सी चाची-सही तो कहा, सुमन दीदी के शादी होते ही तुम्हारी दादी नेहा के घर गयी थी. ,उसके बाद भी नेहा नीता के घर जाती थी .सुमन दीदी ने अकेले घर संभाला था

अवी-बताया आपने कि बड़ी चाची ने चाचा को कैसे बदल दिया .और घर संभाल लिया.

सी चाची-उसके बाद दादी के कहने पे तुम्हारे चाचा सुमन दीदी को परेशान करने लगे.

अवी-वो पता है मुझे ,सीमा चाची ने बताया था ,बड़ी चाची मायके गयी थी फिर उनकी दीदी ने उनको परेशान किया ,और बड़ी चाची वापस आ गयी और चाचा को दूसरी शादी की इजाज़त दी

सी चाची-सुमन दीदी वापस आई उसके बाद दादी की डेत हुई .उसके बाद दादाजी ने तुम्हारे चाचा की दूसरी शादी करवा दी. तुम्हारे चाचा ने कर ली. तुम्हारे चाचा को भी अपनी माँ की इच्छा पूरी करनी थी , उनको दादी बनाना था , फिर पता नही तुम्हारे चाचा को क्या हुआ की वो वापस अपने दोस्तो के साथ रहने लगे. खेतो का काम ठीक से नही करते थे

अवी-शायद उनको पता चल गया होगा कि वो कभी बाप नही बन सकते

सी चाची-ये तो आज भी उनको पता नही है. वो तो यही समझते थे कि कमी हम मे है.

अवी-एक बात पुच्छू

सी चाची-हाँ पूछो

अवी-चाचा सच मे 4थ शादी करने वाले थे.या आपने झूठ कहा.

सी चाची-तुम्हारे चाचा दूसरी शादी के लिए तय्यार नही थे.

अवी-फिर कैसे तय्यार हुए

सी चाची- तुम्हारी दादी तुम्हारे चाचा को बाप बने देखना चाहती थी. तुम्हारे दादाजी ने इसी लिए दूसरी शादी करने को चाचा को कहा

अवी-दादाजी ने

सी चाची-हाँ, और तुम्हारे चाचा ने हाँ कर दी, माजी की बजह से तेरे चाचा ने हाँ कर दी

अवी-आप के साथ शादी कैसे हुई. क्या दादाजी के कहने पे चाचा ने फिर शादी की.

सी चाची-नही, मेरे साथ शादी के लिए तुम्हारे चाचा ने दादाजी से कहा. तुम्हारे चाचा दादाजी को पोता देना चाहते थे.

अवी- एक मिनिट , दूसरी शादी के लिए दादाजी ने चाचा को मनाया , और 3 र्ड शादी के लिए चाचा ने दादाजी को मनाया , ये कैसे हो सकता है

सी चाची- ये आगे पता चलेगा , और शादी पोते के लिए की गयी

अवी-आप ने उनको पोता दे दिया

सी चाची-देना पड़ा ,उसके वजह से हर कोई खुश हो गया.

अवी-ये बताइए और क्या क्या छुपाया है मुझसे से

सी चाची-बहुत कुछ छुपाया है.

अवी-पर क्यूँ

सी चाची-क्यूँ कि तुम अपने माता पिता के डेत के बाद 2 साल ऐसे सदमे मे चले गये थे की क्या बताऊ , ये कहा जा सकता है कि तुम कोमा मे थे , ऐसे मे किसी की हिम्मत नही हुई. और तुम्हारे दादाजी ने मना किया था. उसके बाद दादाजी के साथ जो हुआ.

अवी-क्या हुआ था दादाजी को, मुझे ऐसा लग रहा कि दादाजी के बीमारी के पीछे का सच मुझसे छुपाया गया है.

सी चाची-तुम्हें बता ही देती हूँ

अवी-आप मुझसे कुछ मत छुपाना

सी चाची-तुम्हारे दादाजी पहलवान थे वो ऐसे बीमार कैसे पड़ सकते थे.

अवी-फिर क्या हुआ था.

सी चाची-कुमार ने गोली मारी थी ,

अवी-क्या?

सी चाची-हाँ दादाजी को गोली मारी थी.

अवी-ये बात छुपा कर आपने ठीक नही किया.

सी चाची-ये बात तो सिर्फ़ मुझे ,सुमन दीदी, ठाकुरजी को पता है ,बाकी सब को कहा गया कि दादाजी बिल्डिंग से गिर गये थे. और तुम्हें बताया गया कि वो बीमार है

अवी-ऐसा क्यूँ किया

सी चाची-तुम्हारी हालत ऐसी नही थी कि दादाजी की बात सुन पाते. तुम्हारी हालत तो दादाजी को बेड पर लेटे हुए देख कर और खराब हो गयी थी. इसी लिए दादाजी को आश्रम ले जाना पड़ा.

अवी-आप ने इतना कुछ छुपाया मुझसे

सी चाची-तेरी भलाई के लिए करना पड़ा. तू अकेला वारिस था इस घर का.

अवी-दादाजी के बारे में बताना चाहिए था.

सी चाची-मैं मज़बूर थी. हम तुम्हें खोना नही चाहते थे. मुझे माफ़ कर दे

मैं ने कुछ नही कहा.

सी चाची-अवी मुझे माफ़ कर दो ,मैं ने सबकी भलाई के लिए ऐसा किया

अवी-आपको पहले ये सच बता देना चाहिए था

सी चाची-नही बता सकती थी,उस वक्त वही रास्ता सही था जो हम ने इस्तेमाल किया.

अवी-झूठ बोल कर

सी चाची-तो तुम्हें दादाजी के बारे में बताती फिर ये सब भी बताना पड़ता. तुम फिरसे सदमे मे चले जाते.हम तुम्हें खोना नही चाहते थे.

अवी-आप पहले बता देती तो मैं जल्दी बड़ा हो जाता.

सी चाची-मैं माफी मांगती हूँ.तुम चाहो तो मैं यहा से चली जाउन्गी पर मुझसे नाराज़ मत रहो,

अवी-एक प्रॉमिस पर

सी चाची-मुझे सब मज़बूर है.

अवी-आज के बाद आप मुझसे कुछ नही छुपाएगी.कुछ भी

सी चाची-मैं अमित की कसम खाती हूँ

अवी-अमित से याद आया ,आपको माँ बना कर मैं भी खुश था.

सी चाची-पता है मुझे ,तभी से तुम बदल गये .यही देख कर सुमन दीदी खुश रहने लगी.

अवी-अब बताइए ,दादाजी को क्या हुआ था.

सी चाची-अजीत ने गोली मारी थी.

अवी-पर क्यूँ

सी चाची-तुम रोना मत तभी बताउन्गी.

अवी-नही रोउंगा.

सी चाची-कुमार ने .,मैं सुरू से बताती हूँ.

अवी-पहले बतियाए अजीत और कुमार ने ऐसा क्यूँ किया और वो कहा है. उसे मैं मार डालूँगा.

सी चाची-वो मर चुके है.

अवी-किस ने मारा

सी चाची-कुमार को तुम्हारे दादाजी ने मारा .और अजीत को ठाकुरजी ने ,जब उनको पता चला कि दादाजी को अजीत ने मारा तो ठाकुरजी ने उसको कुत्ते की मौत दी.

अवी-दादाजी के साथ इतना कुछ हुआ और आपने मुझसे छुपाए रखा

सी चाची-तुम्हारी हालत

अवी-मुझे पूरी बात सुन नी है. और ठाकुरजी ने हमारी मदद की

सी चाची-वो हमेशा तुम्हारे दादाजी की मदद करते थे.

अवी-और मैं ने उनके साथ क्या किया.

सी चाची-तूने उनके साथ कुछ बुरा नही किया. तूने तो ठाकुरजी का घर बर्बाद होने से बचा लिया.ठाकुर कितने खुश है तुम पे

अवी-पर

सी चाची-तू खुद उनसे मिल के देख लेना. वो तुम्हारे अहसानमंद है जो कुवर और रंजीत को तुम ने एक किया

अवी-मैं उनसे ज़रूर मिलूँगा.

सी चाची-मिल लेना. मैं भी ठकुराइन के थप्पड़ मारने पे तुझे कहा था कि उनको सज़ा देना.ठकुराइन ने तुझे मारा था इस बात से गुस्सा हो गयी थी .पर तूने जो उनकी मदद की उसके लिए मैं खुश थी.

अवी-मैं एक बार ठाकुरजी से माफी माँग लूँगा.

सी चाची-जैसा तुम्हें ठीक लगे वैसा करना पर तुम ने कुछ ग़लत नही किया. तब तुमको पता नही था. फिर भी तुम ने पूरी ठाकुरजी की फॅमिली को खुशी दी. वो आज तुम्हारी वजह से खुश है. उनकी खुशी की वजह तुम हो.

अवी-अगर मुझे तब पता होता तो ... आप मुझे कहानी बताने वाली थी.

सी चाची-वही से सुरू करती हूँ जहाँ ख़तम की थी.

अवी-मैं अपने माँ और पापा के साथ गाँव छोड़ कर गया था.
 
फ्लॅशबॅक 1037

शालिनी जयसिंघ के साथ गाँव छोड़ कर चली गयी

पिताजी गेट के पास बैठ कर रोते रहे.

नेहा नीता और पूजा अपने पिताजी के गले लग कर रो रही थी.

छोटू को लगा कि नेहा की शादी मे जो हुआ था उस से जयसिंघ चला गया है.इसी लिए पिताजी ने जयसिंघ को निकाला है

सुमन को शालिनी ने सब बता दिया .शालिनी चाहती थी कि घर की बहू को पता रहे क़ि बात क्या है.

शालिनी ने नेहा के घर जो हुआ वो बता कर आने वाले सिचुयेशन के लिए तय्यार रहने को कहा.

शालिनी को डर था कि पिताजी जयसिंघ को कभी घर नही आने देंगे .ऐसे मे सुमन को अकेले घर संभालना होगा.

माँ के जाते ही शालिनी घर मे बड़ी हो गयी. शालिनी को जल्दी सबके लिए सोचना था .

शालिनी ने सुमन को कहा कि घर का ध्यान रखना ,चाहे कुछ भी हो जाए, फॅमिली के बारे में सोचना.

पहले अपनी फॅमिली की खुशी देखना फिर अपने बारे में सोचना.

सुमन ने शालिनी भाभी को वचन दिया कि वो घर की भलाई के बारे में सोचेगी.

पिताजी को ऐसा रोते हुए देख कर सुमन ने एक एक करके अपनी ननंद को कमरे मे जाकर समझाया कि वो रोएगी तो पिताजी रोएंगे.

पूजा सुमन की बात समझ गयी और खुद के भावनाओ को कंट्रोल मे रखते हुए नेहा और नीता को संभाल लिया.

पिताजी वहाँ से उठ कर अपने कमरे मे चले गये. और माँ की यादो मे खो गये.

पिताजी ने उस रात ना कुछ खाया .और ना रात भर सो पाए.

सुमन अपनी ननंद के साथ घर को संभालने लगी.

पूजा और नीता जल्दी संभाल गयी. उनको समझ मे आ गया कि ग़लती किसी की नही है.

पर नेहा के दिल मे जयसिंघ के लिए नफ़रत और अपनी भाभी से प्यार था .ऐसे मे अवी के कभी प्रति कभी नफ़रत पैदा हो गयी.

ऐसे ही एक दिन पिताजी ने अपनी भावनाओ को कंट्रोल करते हुए अपने घर के बारे में सोचना सुरू किया.

पहले पिताजी माँ की आस्थिया लाए. और उनको टेबल पर रख दिया.

छोटू अपनी माँ के जाने से अपने कमरे मे बंद था

पिताजी से ज़्यादा खराब हालत थी छोटू की

पिताजी ने अपनी बहू सुमन और बेटियो को माँ की आस्थियो के पास बुलाया.

पिताजी-तुम 4 के अलावा मेरा कोई नही है

सुमन-शालिनी भाभी

पिताजी-मैं ने कहा तुम चारो के अलावा मेरा कोई नही है.

पूजा-जी पिताजी

पिताजी-मैं चाहता हूँ तुम सब मेरे आँख के सामने रहो

सुमन-हम तो यही है.

पिताजी-मैं पूजा से बात कर रहा हूँ.

पूजा- पिताजी आप कहना क्या चाहते है

पिताजी-तुम यही गाँव मे रहो, मेरी आँख के सामने

पूजा-ये कैसे हो सकता है

पिताजी-क्यूँ नही हो सकता

पूजा-वो नही मानेंगे

पिताजी-मैं रमेश से बात करता हूँ.

पूजा-वो घरदमाद नही बनेंगे

पिताजी-मैं घर दामाद की बात नही कर रहा हूँ

पूजा-फिर

पिताजी-मैं यही पर शहर2 जैसे घर बना दूँगा. इसी गाँव मे

पूजा-फिर भी वो नही मानेंगे

पिताजी-रमेश से मैं बात करूँगा. तुम तीनो यहा रहोगी तो मैं टुमारा ध्यान रख पाउन्गा. एक साथ रहोगी तो सेफ रहोगी.तुम्हारी माँ मुझे अकेला छोड़ कर चली गयी , ऐसे मे मुझे तुम सबका ध्यान रखना होगा और ये तभी हो सकता है तुम एक जगह रहो ताकि नेहा के साथ जो हुआ वैसा दुबारा ना हो

सब ने पिताजी की बात को सपोर्ट किया

माँ के जाने की वजह से पिताजी जो सोच रहे थे उसमे सबने पिताजी का साथ दिया

पूजा-मुझे अपने गाँव मे रहने से क्या ऐतराज़ हो सकता है. आप उनको मना लीजिए

पिताजी-रमेश को छूरि की वजह बता देंगे .वो मान जाएगा .

पूजा-फिर भी मना करेंगे

पिताजी-तुम ही बताओ ,क्या किया जाए जिस से रमेश मान जाएगा .

पूजा-मैं क्या बता सकती हूँ

पिताजी-तुझे गाँव मे मेरे सामने रहना पसंद तो है ना

पूजा-जी, मैं तो गाँव मे रहने को तय्यार हूँ

पिताजी-फिर रमेश को मना ले, मैं अकेला सब नही संभाल सकता. तुम्हारी माँ थी तब बात अलग थी. अब तो मुझे तुम्हारी माँ बन कर तुम्हारा ध्यान रखना होगा.

अपने पिताजी की बात सुनकर पूजा की आँख मे आसू आ गये

पूजा-मैं ज्योति दीदी से बात करती हूँ, वो उनकी बात मान जाते है.

पिताजी-नेहा तुम

नेहा-जैसा आप ठीक समझे

पिताजी-तू बता

नेहा-उस घर मे माँ के साथ जो हुआ, मेरे साथ जो हुआ ,उसके बाद मैं वहाँ रह नही पाउन्गी.

पिताजी-सुरेश से मैं बात करूँगा .पर कुमार ने क्या किया और जयसिंघ के साथ क्या हुआ उनको पता नही चलना चाहिए.

नेहा-नही बताउन्गी.

पिताजी-सुरेश मान जाएगा . नीता

नीता-जी

पिताजी-तूने क्या सोचा है

नीता-उस घर को बड़ी मेहनत से बनाया है

पिताजी-तुम जैसा चाहोगी वैसा होगा. मैं तुम पे फ़ैसला छोड़ता हूँ

नीता-उस घर को जतिन और मैं ने प्यार से बनाया है

पिताजी-ठीक है, तुम वही रहना

नीता-मैं उस घर मे नही रह सकती

पिताजी-अभी तो कहा कि

नीता-उस घर को वैसे रहने दूँगी, पर वहाँ नही रह सकती. मैं जब भी उस खिड़की की तरफ देखूँगी तो मुझे कोमल को रोना याद आएगा.

पिताजी-जतिन को कैसे समझाएँगे

नीता-उनको मैं समझा दूँगी .नेहा जहा रहेगी वही मैं रहूंगी

नीता की बात सुनते नेहा ने उसे गले लगा लिया.

नीता को शालिनी भाभी ने बताया था कि नेहा ने उसके लिए कुमार से शादी करने को मना किया था

नेहा.उसको कितना प्यार करती हाजी ये नीता को पता था

ऐसे मे नेहा के बुरे समय मे नीता उस से दूर जैसे रहती

नीता ने नेहा के साथ रहने का फ़ैसला किया

पिताजी-कल दामाद आ जाएँगे. तुम उनसे बात करना.

पूजा-जी पिताजी

पिताजी-बहू

सुमन-जी पिताजी

पिताजी-तुम्हारी सास की एक इच्छा थी.

सुमन-जी

पिताजी-वो छोटू को बाप बना हुआ देखना चाहती थी.

सुमन-मुझे पता है

पिताजी-तुम्हें क्या लगता है.कि मुझे क्या करना चाहिए

सुमन-आप जो सही समझे वो कीजिए , आप जो सोचेंगे वो सबके लिए अच्छा होगा

पिताजी-मैं सोच रहा था कि छोटू की दूसरी शादी करवा दूं

सुमन-दूसरी शादी

पूजा-पिताजी अभी तो माँ...और आप शादी करवाने की बात कर रहे है

पिताजी-मुझे पता है मैं क्या कर रहा हूँ. सुमन तुम क्या कहती हो.

सुमन सोचने लगी.

पिताजी-तुम जैसा कहोगी वैसा करेंगे. फ़ैसला तुम्हें करना है

सुमन-जो फॅमिली के लिए अच्छा होगा वही कीजिए

पिताजी-मैं इसको तुम्हारी हाँ समझु

सुमन-जी ,

सुमन ने अपने दिल पे पत्थर रख कर हाँ कर दी.

सुमन को शालिनी की बात याद आई. पहले फॅमिली के बारे में सोचना फिर अपने बारे में

सुमन ने शालिनी भी की तरह सोचते हुए वो फ़ैसला लिया जो क्खी औरत लेना नही चाहती

पिताजी-बहू हम सब की भलाई के लिए कर रहे है

सुमन-जी पिताजी,

पिताजी-छोटू से मैं बात करूँगा.

सुमन-जैसा आप ठीक समझे

सुमन छोटू की दूसरी शादी के लिए तय्यार हो गयी.

सुमन को पता था कि वो क्या करने जा रही है.

सुमन ने अपने पति को बाप ना बनने के दर्द से गुज़रते हुए देखा था.सुमन तो छोटू की खुशी के लिए कर रही थी ( पर छोटू की खुशी किसमे है ये किसी ने पूछा ही नही)

सुमन ने माँ को कही बार इस बात से रोका था की छोटू की दूसरी शादी ना हो. पिताजी ने उसका साथ दिया था.

पर आज पिताजी के कहते सुमन को हाँ करनी पड़ी. सुमन को पिताजी पे पूरा विश्वास था.

बस सुमन को इस बात से डर लग रहा था कि वो क्या कहेंगे

छोटू सुमन से बहुत प्यार करता है,ऐसे मे सुमन के हाँ करने से छोटू पे क्या असर पड़ेगा.

पिताजी ने सब के लिए कुछ ना कुछ सोच लिया था.

पिताजी ने छोटू के हाथो से माँ की अस्थिया नदी मे बहा दी.

और अपने दामाद का इंतज़ार करने लगे.
 
फ्लॅशबॅक 1038

दूसरे दिन दामाद जी आ गये.

रमेश सुरेश और जतिन ने आते हादसे के बारे में पूछा

पूजा ने बता दिया कि माँ का पैर फिसल गया और कुल्हाड़ी पे गिर गयी जिस से उनकी डेत हो गयी.

रमेश ने अपनी सास के बारे में सुनते शोक प्रकट किया.

तीनो दामाद को देख कर पिताजी को राहत मिली.

रमेश सुरेश और जतिन सीधे गाँव मे आए थे. वो अपने घर नही गये थे.

नेहा और नीता अपने पति को कमरे मे ले गयी.

हॉल मे पिताजी ,रमेश और पूजा रह गयी.

पिताजी-कैसे हो, काम कैसा चल रहा है.

रमेश-काम तो अच्छा चल रहा है.

पिताजी-और कब तक वहाँ रहना होगा.

रमेश-अग्रीमेंट के हिसाब से और 2 1/2 साल रहना होगा.

पूजा-मैं इतने साल तक अकेली कैसे रहूंगी.

रमेश-अग्रीमेंट किया है

पूजा-शहर2 मे मुझे अकेले रहने मे डर लग रहा है.उस चोरी के बाद पिताजी थे तो हिम्मत थी पर अब पिताजी वहाँ कैसे आ सकते है.

रमेश-कुछ सोचते है इसके बारे में, अभी इसके लिए सही समय नही है

पूजा-आप तो 2 दिन के लिए आए हो, ऐसे मे कब सोचेंगे, फिर से चोर आने के बाद, पिछली बार चोरो ने हमे कुछ नही किया पर अगली बार कुछ किया तो

रमेश-कहा ना कुछ करते है

पिताजी-मैं क्या कह रहा हूँ

रमेश-जी पिताजी

पिताजी-पूजा का शहर2 मे अकेले रहना ठीक नही होगा. मैं भी उसके पास नही रह सकता.और रहूँगा भी तो कब तक

रमेश-जी मैं समझ सकता हूँ

पिताजी-पूजा और बच्चो की सेफ्टी के लिए उसको यही गाँव मे रहने दो.

रमेश-ये तो अच्छा होगा.

पिताजी-मैं हमेशा के लिए कह रहा हूँ.

रमेश-ये नही हो सकता

पिताजी-क्यू? तुम वहाँ दुबई मे रहोगे ,पूजा शहर2 मे अकेली नही रह सकती

रमेश-मैं मानता हूँ पूजा अकेली नही रह सकती पर ,यहा रहना अच्छा नही होगा. घरदमाद बनना मुझे पसंद नही है

पिताजी-घरदमाद नही. पूजा के लिए यही गाँव मे अलग घर बना दूँगा. शहर2 जैसा

रमेश-इसकी ज़रूरत नही है. पूजा शहर2 मे रह लेगी.

पूजा-मैं नही रहने वाली अकेले.

रमेश-ज्योति को बुला लेते है

पूजा-मेरे गाँव मे रहने से ,ज्योति दीदी शहर2 वाले घर रह सकती हैं . उनकी जॉब मे उस बिल्डिंग मे नही रह सकते. ज्योति को हमारे घर मे रहने देते है मैं यहा गाँव मे रह लूँगी.

रमेश-क्या कहा, ज्योति के लिए इतना प्यार कहाँ से पैदा हो गया.

पूजा-मैं ने ज्योति दीदी से बात कर ली है. वो खुश है मुझसे, उनको मेरी बात अच्छी लगी ,( क्यू अच्छी नही लगेगी चोर्री भी तो उसी ने करवाई थी)

रमेश-ज्योति तुमसे खुश है.

पिताजी-दामाद जी मना मत कीजिए, समधन होती तो गाँव मे रहने को हा कर देती. समधन को ये गाँव कितना प्यारा था.ये आपको पता है , वो आज जिंदा होती तो यही रहने की ज़िद्द करती , हमारे लिए नही अपनी माँ के लिए हा कर दो , अपनी माँ के लिए हाँ कर दो

रमेश-पर दुबई से आने के बाद

पिताजी-यहा शहर वाली कंपनी है ना, आपकी बहन भी शहर2 मे खुश रहेगी.समधन के लिए हाँ कर दो, समधन की यही इच्छा थी कि वो ज़्यादा से ज़्यादा समय गाँव मे रहे. वो तो नही रही पर उनके पोतो को गाँव मे रहने दो, उनको अच्छा लगेगा.

रमेश-मैं सोच कर बताता हूँ

उधर नेहा और सुरेश बात करने लगे.

सुरेश-ये कैसे हो गया.

नेहा सुरेश के गले लग कर रोने लगी.

सुरेश-शांत हो जाओ ऐसे रोने से काम कैसे चलेगा.

नेहा-वो माँ, मेरे सामने

सुरेश-मैं समझ सकता हूँ, तुम्हें कैसा लग रहा है.

नेहा-वो हमारे घर मे

सुरेश-वो घर ही मनहूस हो गया है, मेरे माता पिता और छोटे भाई को खा गया , और अब तुम्हारी माँ के साथ ये सब हुआ

नेहा-मैं वहाँ नही जाउन्गी.

सुरेश-मैं दुबई से आते ही नया घर ले लूँगा.

नेहा-तब तक मैं कहाँ रहूंगी.

सुरेश-यही रह लो,तुम्हें अच्छा लगेगा

नेहा-पिताजी के घर इतने दिन कैसे रह सकती हूँ.

सुरेश-मैं रेंट मे नया घर लेकर देता हूँ

नेहा-रेंट के घर मे मैं अकेली कैसे रहूंगी.

सुरेश-पूजा भाभी के पास रहोगी.

नेहा-पूजा दीदी भी शहर2 मे नही रहना चाहती है. उनके घर चोरी हुई थी.वो भी डरी हुई थी , अब तो पिताजी भी गाँव नही छोड़ पाएँगे

सुरेश-तुम ही बताओ, तुम जैसा कहोगी वैसा करेंगे.

नेहा-पिताजी पूजा दीदी को गाँव मे घर बना कर दे रहे है. मैं भी पिताजी को बोल देती हूँ

सुरेश-ये ठीक नही होगा

नेहा-मैं वहाँ शहर2 मे नही रहूंगी.

सुरेश-ठीक है जैसा तुम ठीक समझो, मैं पैसे निकाल कर देता हूँ. पिताजी को दे देना

नेहा-आप ने उस घर मे अपना बचपन बिताया है.

सुरेश-उस घर मे रहूँगा तो माँ पिताजी की याद आएगी. उनकी याद ना आए इसी लिए दुबई गया हूँ ना. तुम्हें जैसा ठीक लगे वैसा करना, हम यही रहेंगे ,

नेहा-आप रमेश जीजाजी को बोलिए ना पूजा दीदी को हाँ कर दे,

सुरेश-मैं बात करता हूँ. बस तुम खुश रहना.तुम्हारे सिवा मेरा कोई नही है

और नेहा ने सुरेश को गले लगा लिया.
 
Back
Top