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फ्लॅशबॅक 1032
जयसिंघ थप्पड़ खा कर अपना खून साफ करने लगा.
जयसिंघ को थप्पड़ खा कर गुस्सा आ गया.पर थप्पड़ मारने वाले उसके पिताजी थे इस लिए उसने अपना गुस्सा कंट्रोल किया.
शालिनी अपने पति का खून देख कर उनके पास जाना चाहती थी पर नेहा ने उसको ऐसा गले लगा लिया था कि उसको अपने पिता को भेजना पड़ा.
शालिनी के पिता ने आगे जाकर अपने दामाद को संभाल लिया .और ठाकुरजी ने पिताजी को पकड़ लिया.
पिताजी-क्या कहा नेहा झूठ बोल रही है
जयसिंघ-हाँ वो झूठ बोल रही है.
पिताजी-एक बार और कहा तो मैं भूल जाउन्गा कि तू मेरा बेटा है
जयसिंघ-अभी भी आप मुझे अपने बेटा कहाँ मानते हो , मैं तो आपका कोई नही हूँ तभी मुझे थप्पड़ मारा
जयसिंघ की बात सुनकर माँ और पिताजी को झटका लगा.
माजी-तू ये क्या बोल रहा है
जयसिंघ-मैं सही कह रहा हूँ ,हमेशा उस नेहा की बात सुनते है मैं तो इनका कोई हूँ ही नही.
पिताजी-नेहा तेरी बहन है तुझे वो झूठी लगती है
जयसिंघ-हाँ, किसी ने देखा कुमार को यहाँ.उसको मैं ने मीटिंग के लिए भेजा था वो यहा कैसे आ सकता है, वो वहाँ मीटिंग मे है , मेरे सामने था
पिताजी-तेरे कहने का मतलब है नेहा ने खुद अपने कपड़े फाडे है ,खुद ऐसी हालत बनाई है
जयसिंघ-बात कुछ और भी हो सकती है. आप पूरी बात सुनते कहाँ है.जब देखो तब गुस्सा करते हो , गुस्सा करने से क्या होगा
माजी-जयसिंघ अपने पिताजी से बात कर रहे हो भूलो मत
जयसिंघ-मैं नही ये भूल जाते है कि मैं इनका बेटा हूँ.
शालिनी-आप नेहा की बात तो सुन लीजिए
जयसिंघ-क्या सुनूँ ,पिताजी कुछ सोचने देंगे तभी सोचूँगा ना
पिताजी-तेरे जैसा भाई इसे मिला है तभी उसकी हालत ऐसी हुई है.इस्क खून नही खौल रहा नेहा की हालत देख कर
जयसिंघ- अगर नेहा के साथ कुछ हुआ होगा तो आपसे पहले मैं उसको मारूँगा जिसने नेहा को हाथ लगाया हो
पूजा-भैया ,कोमल झूठ क्यूँ बोलेगी ,वो तो बच्ची है उसने जो देखा है वही बताएगी ना
जयसिंघ-मुझे नही पता कोमल ने क्या देखा है ,या उसको क्या बताया गया है.
शालिनी-पहले सुन लीजिए ,फिर बताना क्या सच है और क्या झूठ है.
और शालिनी ने जयसिंघ को सब कुछ बता दिया.
जयसिंघ-मैं ने सही कहा था ,
नेहा-आप मुझे झूठ बोल रहे है, अपनी बहन को ,और उस 2 दिन के दोस्त पे इतना यकीन है
जयसिंघ-तू बात ही मत कर. मैं आज सुबह अजीत कुमार से मिला था .अगर वो रात मे यहा होते तो मीटिंग मे कैसे पहुँचते ,वहाँ सब ने बताया कि कुमार रात को वहाँ आया था.और ना उसको कोई चोट थी
नेहा-वो झूठ बोल रहे है
जयसिंघ-तूने कहा कि तूने कुमार को फ्लवर प्लॉट मारा तो ,फिर तो उसका खून निकला होगा.
नेहा-निकला था
जयसिंघ-पर उसके सर पे कोई निशान नही था ,ना ही कोई मलम लगा हुआ था. ना हेर कट किए हुए थे
नेहा-भाभी मैं सच बोल रही हूँ
शालिनी-मुझे तुम पर पूरा भरोसा है. तू झूठ नही बोल सकती, ना ही मेरी कोमल
जयसिंघ-सब तुम्हारे सामने है फिर भी नेहा की बात पे तुम्हें विश्वास है.
नीता-मुझे भी है. मैं ने नेहा की आँख मे डर देखा है.
नेहा-उस कमरे मे खून पड़ा होगा .
पूजा उस कमरे मे चली गयी पर वहाँ खून नही था फ्लवर प्लॉट ठीक ठाक था. उस पे भी खून का निशान नही था.
पूजा-यहाँ कोई खून का निशान नही है.
[अजीत ने खून को साफ कर दिया था .और फ्लवर प्लॉट टूटा नही था,घर मे एक जैसे 4 फ्लवर प्लॉट थे , अजीत ने बेडरूम के ग्लोवर प्लॉट को हॉल के फ्लवर प्लॉट से बदल दिया था जिस से फ्लवर प्लॉट पर कोई निशान भी नही था]
नेहा-ये कैसे हो सकता है.
जयसिंघ-यही सच है. तू कुमार को फसा रही है.
नेहा-मैं सच कह कर रही हू . कोमल की कसम
जयसिंघ-अपनी बेटी की झूठी कसम मत खा ,वरना वो मररर
जयसिंघ की बात पूरी होने से पहले नेहा ने अपने भाई को थप्पड़ मारा
नेहा-दुबारा कोमल के बारे में कुछ कहा तो मैं जान ले लूँगी.
जयसिंघ को नेहा के थप्पड़ मारने से गुस्सा आ गया
जयसिंघ भी नेहा को थप्पड़ मारने को हाथ उठा लिया था पर नेहा के गाल के पास जाकर रुक गया
नेहा को थप्पड़ मारते हुए देख पिताजी गुस्से से पागल हो गये.
पिताजी ने किसी बात की परवा नही की और जयसिंघ पर टूट पड़े.
पिताजी जयसिंघ को थप्पड़ पे थप्पड़ मारते गये.
पिताजी-तेरी हिम्मत कैसे हुए मेरी बेटी पे हाथ उठाने की. मैं ने आज तक उस पे हाथ नही उठाया ,और तूने नेहा को थप्पड़ मारा
,और तूने नेहा को थप्पड़ मारा
पिताजी जयसिंघ को मारने लगे.
जयसिंघ अपने पिताजी को रोक सकता था पर पिताजी पे जयसिंघ कभी हाथ नही उठाएगा.
अपने पति को मार खाते हुए देख कर शालिनी पिताजी को रोकने लगी.
शालिनी-पिताजी इनको मत मारिए
पिताजी-तू हट जा बहू इसका दिमाग़ ठिकाने लाना ज़रूरी है.
पिताजी ने शालिनी को अलग किया और जयसिंघ को मारने लगे.
शालिनी के पिताजी अपने दामाद को बचाने के लिए आगे आ गये.
ठाकुरजी भी पिताजी को रोक रहे थे पर पिताजी आज रुकने वाले नही.
जयसिंघ ने लिमिट क्रॉस कर दी थी
ज़गदने मे कोई रोकने जाता है तो एक 2 थप्पड़ उसे भी पड़ते है.
पिताजी का एक थप्पड़ शालिनी के पिता के गाल पर पड़ा.
शालिनी के पिता को गुस्सा आ गया .पर वो अपनी बेटी की वजह से कुछ बोले नही.
अपने ससुर को थप्पड़ लगते ही जयसिंघ ने पिताजी का हाथ पकड़ लिया.
जयसिंघ-बस बहुत हो गया
शालिनी-पिताजी आप ठीक हो ना
शालिनी के पिताजी-मैं ठीक हूँ, पर अपने ससुर को समझा दे,
जयसिंघ-आप को जो करना था वो आपने कर लिया ,
पिताजी-तेरी वजह से हो रहा है
जयसिंघ-मेरी नही नेहा की वजह से ये सब हो रहा है.
शालिनी-पिताजी आप ठीक हो ना
शालिनी का पिता-योगेन्द्र सिंग ये तुम ने ठीक नही किया. गुस्सा हमे भी आता है
पिताजी-ये हमारे घर का मामला है तुम बीच मे बोलने वाले कौन होते हो
शालिनी का पिता-बात मेरी बेटी के पति की है,
शालिनी-पिताजी इसे यही ख़तम कर दो
शालिनी का पिता-तू भी इनकी तरफ से बोल रही है.
शालिनी-मेरे कहने का वो मतलब नही था.
शालिनी का पिता-मैं बाहर रुक रहा हूँ, तुझे आना है तो आ वरना मैं जा रहा हूँ
शालिनी के पिताजी बाहर चले गये
जयसिंघ-पिताजी ये ठीक नही हुआ.
पिताजी-तू अपनी गंदी ज़ुबान से मेरा नाम मत ले
जयसिंघ-आप हमेशा खुद की मनमानी करते है.और अपनी बेटी को सर पे चढ़ा रखा है
पिताजी-तू मत सीखा मुझे क्या करना है
जयसिंघ-आप अभी भी नेहा को समझा दो ,
शालिनी-नेहा ऐसी नही है, कुमार गंदा इंसान है. उसकी नज़र नेहा पे थी, नीता पे थी. नेहा के ज़रिए मुझे पाना चाहता था
जयसिंघ-तू भी नेहा की तरह बाते करने लगी है. कुमार चाहता तो शादी मे जो हुआ उसके बाद मुझे कंपनी से निकाल देता.पर उसने दोस्ती की खातिर ऐसा नही किया तू उसपे शक कर रही हो, वो तुम्हें अपनी बहन मानता है , तुमने उसे पार्टी मे थप्पड़ मारा था फिर भी उसने कुछ नही कहा और तुम उस पे शक कर रही हो
शालिनी-आप कुछ भी कहो मुझे पता है नेहा मुझसे कभी झूठ नही बोलेगी. वो कुमार इतना घटिया इंसान था कि नीता को कपड़े बदलते हुए देखता था.
पिताजी-उस कुमार की तो, उसे मैं जान से मार डालूँगा.
जयसिंघ-आप ऐसा नही करेंगे
पिताजी-तू रोकेगा मुझे
जयसिंघ-हां,
पिताजी-तू अपनी बहन के गुनहगार को बचाएगा
जयसिंघ-उसने कुछ नही किया है तो ज़रूर बचाउन्गा,
पिताजी-तू मेरा बेटा हो ही नही सकता
जयसिंघ-आपने कभी समझा ही नही.
पिताजी-निकल जा यहाँ से दुबारा अपनी शकल मत दिखाना.मैं समझूंगा कि मुझे सिर्फ़ एक बेटा था ,
जयसिंघ-चलो शालिनी.अवी को भी अपने साथ लो.
पिताजी-ले जा ,मेरा छोटू मुझे पोता देगा ,आज से मेरा सिर्फ़ एक बेटा है वो है छोटू, छोटू के बेटे को अपना वारिश बनाउन्गा ,
माजी-ये आप क्या कह रहे है.
पिताजी-इसके जैसा बेटा होने से बे औलाद होना अच्छा होता
जयसिंघ-चलो शालिनी, अब हम एक पल भी यहा नही रुकेंगे
शालिनी ने एक बार पिताजी की तरफ देखा .और अवी को उठा कर जयसिंघ के पास गयी.
नेहा-भाभी
शालिनी ने नेहा की तरफ देखा ,नेहा रो रही थी.
शालिनी ऐसे मे क्या करती ,
नेहा वहाँ रो रही थी और जयसिंघ चलने को बोल रहा था
नेहा से शालिनी का रिस्ता जयसिंघ की वजह से जुड़ा था
शालिनी उसी रिस्ते की डोर के साथ शालिनी जाने लगी
जयसिंघ-चलो यहाँ से
जयसिंघ अपनी बीवी और बेटे के साथ जाने लगा
माजी-जयसिंघ रुक जाओ,
माँ जयसिंघ को रोकने के लिए आगे पैर रखा था कि उनका पैर खिलोने पे पड़ गया.
माँ फिसल कर गिर गयी.
माँ की चीख निकल गयी.
माँ-जयसीिंघह
माँ की चीख सुनते ही पिताजी माँ के पास आ गये.
जयसिंघ और शालिनी भी रुक गये.
पिताजी ने माँ को पलट दिया
माँ के पेट मे कुल्हाड़ी घुसी हुई थी.
जयसिंघ थप्पड़ खा कर अपना खून साफ करने लगा.
जयसिंघ को थप्पड़ खा कर गुस्सा आ गया.पर थप्पड़ मारने वाले उसके पिताजी थे इस लिए उसने अपना गुस्सा कंट्रोल किया.
शालिनी अपने पति का खून देख कर उनके पास जाना चाहती थी पर नेहा ने उसको ऐसा गले लगा लिया था कि उसको अपने पिता को भेजना पड़ा.
शालिनी के पिता ने आगे जाकर अपने दामाद को संभाल लिया .और ठाकुरजी ने पिताजी को पकड़ लिया.
पिताजी-क्या कहा नेहा झूठ बोल रही है
जयसिंघ-हाँ वो झूठ बोल रही है.
पिताजी-एक बार और कहा तो मैं भूल जाउन्गा कि तू मेरा बेटा है
जयसिंघ-अभी भी आप मुझे अपने बेटा कहाँ मानते हो , मैं तो आपका कोई नही हूँ तभी मुझे थप्पड़ मारा
जयसिंघ की बात सुनकर माँ और पिताजी को झटका लगा.
माजी-तू ये क्या बोल रहा है
जयसिंघ-मैं सही कह रहा हूँ ,हमेशा उस नेहा की बात सुनते है मैं तो इनका कोई हूँ ही नही.
पिताजी-नेहा तेरी बहन है तुझे वो झूठी लगती है
जयसिंघ-हाँ, किसी ने देखा कुमार को यहाँ.उसको मैं ने मीटिंग के लिए भेजा था वो यहा कैसे आ सकता है, वो वहाँ मीटिंग मे है , मेरे सामने था
पिताजी-तेरे कहने का मतलब है नेहा ने खुद अपने कपड़े फाडे है ,खुद ऐसी हालत बनाई है
जयसिंघ-बात कुछ और भी हो सकती है. आप पूरी बात सुनते कहाँ है.जब देखो तब गुस्सा करते हो , गुस्सा करने से क्या होगा
माजी-जयसिंघ अपने पिताजी से बात कर रहे हो भूलो मत
जयसिंघ-मैं नही ये भूल जाते है कि मैं इनका बेटा हूँ.
शालिनी-आप नेहा की बात तो सुन लीजिए
जयसिंघ-क्या सुनूँ ,पिताजी कुछ सोचने देंगे तभी सोचूँगा ना
पिताजी-तेरे जैसा भाई इसे मिला है तभी उसकी हालत ऐसी हुई है.इस्क खून नही खौल रहा नेहा की हालत देख कर
जयसिंघ- अगर नेहा के साथ कुछ हुआ होगा तो आपसे पहले मैं उसको मारूँगा जिसने नेहा को हाथ लगाया हो
पूजा-भैया ,कोमल झूठ क्यूँ बोलेगी ,वो तो बच्ची है उसने जो देखा है वही बताएगी ना
जयसिंघ-मुझे नही पता कोमल ने क्या देखा है ,या उसको क्या बताया गया है.
शालिनी-पहले सुन लीजिए ,फिर बताना क्या सच है और क्या झूठ है.
और शालिनी ने जयसिंघ को सब कुछ बता दिया.
जयसिंघ-मैं ने सही कहा था ,
नेहा-आप मुझे झूठ बोल रहे है, अपनी बहन को ,और उस 2 दिन के दोस्त पे इतना यकीन है
जयसिंघ-तू बात ही मत कर. मैं आज सुबह अजीत कुमार से मिला था .अगर वो रात मे यहा होते तो मीटिंग मे कैसे पहुँचते ,वहाँ सब ने बताया कि कुमार रात को वहाँ आया था.और ना उसको कोई चोट थी
नेहा-वो झूठ बोल रहे है
जयसिंघ-तूने कहा कि तूने कुमार को फ्लवर प्लॉट मारा तो ,फिर तो उसका खून निकला होगा.
नेहा-निकला था
जयसिंघ-पर उसके सर पे कोई निशान नही था ,ना ही कोई मलम लगा हुआ था. ना हेर कट किए हुए थे
नेहा-भाभी मैं सच बोल रही हूँ
शालिनी-मुझे तुम पर पूरा भरोसा है. तू झूठ नही बोल सकती, ना ही मेरी कोमल
जयसिंघ-सब तुम्हारे सामने है फिर भी नेहा की बात पे तुम्हें विश्वास है.
नीता-मुझे भी है. मैं ने नेहा की आँख मे डर देखा है.
नेहा-उस कमरे मे खून पड़ा होगा .
पूजा उस कमरे मे चली गयी पर वहाँ खून नही था फ्लवर प्लॉट ठीक ठाक था. उस पे भी खून का निशान नही था.
पूजा-यहाँ कोई खून का निशान नही है.
[अजीत ने खून को साफ कर दिया था .और फ्लवर प्लॉट टूटा नही था,घर मे एक जैसे 4 फ्लवर प्लॉट थे , अजीत ने बेडरूम के ग्लोवर प्लॉट को हॉल के फ्लवर प्लॉट से बदल दिया था जिस से फ्लवर प्लॉट पर कोई निशान भी नही था]
नेहा-ये कैसे हो सकता है.
जयसिंघ-यही सच है. तू कुमार को फसा रही है.
नेहा-मैं सच कह कर रही हू . कोमल की कसम
जयसिंघ-अपनी बेटी की झूठी कसम मत खा ,वरना वो मररर
जयसिंघ की बात पूरी होने से पहले नेहा ने अपने भाई को थप्पड़ मारा
नेहा-दुबारा कोमल के बारे में कुछ कहा तो मैं जान ले लूँगी.
जयसिंघ को नेहा के थप्पड़ मारने से गुस्सा आ गया
जयसिंघ भी नेहा को थप्पड़ मारने को हाथ उठा लिया था पर नेहा के गाल के पास जाकर रुक गया
नेहा को थप्पड़ मारते हुए देख पिताजी गुस्से से पागल हो गये.
पिताजी ने किसी बात की परवा नही की और जयसिंघ पर टूट पड़े.
पिताजी जयसिंघ को थप्पड़ पे थप्पड़ मारते गये.
पिताजी-तेरी हिम्मत कैसे हुए मेरी बेटी पे हाथ उठाने की. मैं ने आज तक उस पे हाथ नही उठाया ,और तूने नेहा को थप्पड़ मारा
,और तूने नेहा को थप्पड़ मारा
पिताजी जयसिंघ को मारने लगे.
जयसिंघ अपने पिताजी को रोक सकता था पर पिताजी पे जयसिंघ कभी हाथ नही उठाएगा.
अपने पति को मार खाते हुए देख कर शालिनी पिताजी को रोकने लगी.
शालिनी-पिताजी इनको मत मारिए
पिताजी-तू हट जा बहू इसका दिमाग़ ठिकाने लाना ज़रूरी है.
पिताजी ने शालिनी को अलग किया और जयसिंघ को मारने लगे.
शालिनी के पिताजी अपने दामाद को बचाने के लिए आगे आ गये.
ठाकुरजी भी पिताजी को रोक रहे थे पर पिताजी आज रुकने वाले नही.
जयसिंघ ने लिमिट क्रॉस कर दी थी
ज़गदने मे कोई रोकने जाता है तो एक 2 थप्पड़ उसे भी पड़ते है.
पिताजी का एक थप्पड़ शालिनी के पिता के गाल पर पड़ा.
शालिनी के पिता को गुस्सा आ गया .पर वो अपनी बेटी की वजह से कुछ बोले नही.
अपने ससुर को थप्पड़ लगते ही जयसिंघ ने पिताजी का हाथ पकड़ लिया.
जयसिंघ-बस बहुत हो गया
शालिनी-पिताजी आप ठीक हो ना
शालिनी के पिताजी-मैं ठीक हूँ, पर अपने ससुर को समझा दे,
जयसिंघ-आप को जो करना था वो आपने कर लिया ,
पिताजी-तेरी वजह से हो रहा है
जयसिंघ-मेरी नही नेहा की वजह से ये सब हो रहा है.
शालिनी-पिताजी आप ठीक हो ना
शालिनी का पिता-योगेन्द्र सिंग ये तुम ने ठीक नही किया. गुस्सा हमे भी आता है
पिताजी-ये हमारे घर का मामला है तुम बीच मे बोलने वाले कौन होते हो
शालिनी का पिता-बात मेरी बेटी के पति की है,
शालिनी-पिताजी इसे यही ख़तम कर दो
शालिनी का पिता-तू भी इनकी तरफ से बोल रही है.
शालिनी-मेरे कहने का वो मतलब नही था.
शालिनी का पिता-मैं बाहर रुक रहा हूँ, तुझे आना है तो आ वरना मैं जा रहा हूँ
शालिनी के पिताजी बाहर चले गये
जयसिंघ-पिताजी ये ठीक नही हुआ.
पिताजी-तू अपनी गंदी ज़ुबान से मेरा नाम मत ले
जयसिंघ-आप हमेशा खुद की मनमानी करते है.और अपनी बेटी को सर पे चढ़ा रखा है
पिताजी-तू मत सीखा मुझे क्या करना है
जयसिंघ-आप अभी भी नेहा को समझा दो ,
शालिनी-नेहा ऐसी नही है, कुमार गंदा इंसान है. उसकी नज़र नेहा पे थी, नीता पे थी. नेहा के ज़रिए मुझे पाना चाहता था
जयसिंघ-तू भी नेहा की तरह बाते करने लगी है. कुमार चाहता तो शादी मे जो हुआ उसके बाद मुझे कंपनी से निकाल देता.पर उसने दोस्ती की खातिर ऐसा नही किया तू उसपे शक कर रही हो, वो तुम्हें अपनी बहन मानता है , तुमने उसे पार्टी मे थप्पड़ मारा था फिर भी उसने कुछ नही कहा और तुम उस पे शक कर रही हो
शालिनी-आप कुछ भी कहो मुझे पता है नेहा मुझसे कभी झूठ नही बोलेगी. वो कुमार इतना घटिया इंसान था कि नीता को कपड़े बदलते हुए देखता था.
पिताजी-उस कुमार की तो, उसे मैं जान से मार डालूँगा.
जयसिंघ-आप ऐसा नही करेंगे
पिताजी-तू रोकेगा मुझे
जयसिंघ-हां,
पिताजी-तू अपनी बहन के गुनहगार को बचाएगा
जयसिंघ-उसने कुछ नही किया है तो ज़रूर बचाउन्गा,
पिताजी-तू मेरा बेटा हो ही नही सकता
जयसिंघ-आपने कभी समझा ही नही.
पिताजी-निकल जा यहाँ से दुबारा अपनी शकल मत दिखाना.मैं समझूंगा कि मुझे सिर्फ़ एक बेटा था ,
जयसिंघ-चलो शालिनी.अवी को भी अपने साथ लो.
पिताजी-ले जा ,मेरा छोटू मुझे पोता देगा ,आज से मेरा सिर्फ़ एक बेटा है वो है छोटू, छोटू के बेटे को अपना वारिश बनाउन्गा ,
माजी-ये आप क्या कह रहे है.
पिताजी-इसके जैसा बेटा होने से बे औलाद होना अच्छा होता
जयसिंघ-चलो शालिनी, अब हम एक पल भी यहा नही रुकेंगे
शालिनी ने एक बार पिताजी की तरफ देखा .और अवी को उठा कर जयसिंघ के पास गयी.
नेहा-भाभी
शालिनी ने नेहा की तरफ देखा ,नेहा रो रही थी.
शालिनी ऐसे मे क्या करती ,
नेहा वहाँ रो रही थी और जयसिंघ चलने को बोल रहा था
नेहा से शालिनी का रिस्ता जयसिंघ की वजह से जुड़ा था
शालिनी उसी रिस्ते की डोर के साथ शालिनी जाने लगी
जयसिंघ-चलो यहाँ से
जयसिंघ अपनी बीवी और बेटे के साथ जाने लगा
माजी-जयसिंघ रुक जाओ,
माँ जयसिंघ को रोकने के लिए आगे पैर रखा था कि उनका पैर खिलोने पे पड़ गया.
माँ फिसल कर गिर गयी.
माँ की चीख निकल गयी.
माँ-जयसीिंघह
माँ की चीख सुनते ही पिताजी माँ के पास आ गये.
जयसिंघ और शालिनी भी रुक गये.
पिताजी ने माँ को पलट दिया
माँ के पेट मे कुल्हाड़ी घुसी हुई थी.