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StoryPublisher
Guest
अपडेट 271
मैं घर आ गया. पर घर आते वक्त मैने प्रेग्नेन्सी रोकने की मेडिसिन और पेन किल्लर खरीद ली.
घर आकर मैं ने खाना खा लिया और कमरे मे सोने के लिए चला गया.
दोपहर मे 4.00 बजे मेरी नींद खुल गयी. मैं 10 मिनट मे फ्रेश होकर नीचे हॉल मे चला गया. ज्योति बुआ के साथ टी पीने के बाद मैं जल्दी से कमरे मे चला गया.
और फिर 4.30 बजे छत पर चला गया.छत पे जाकर ज़ीया का इंतज़ार करने लगा.5 मिनट बाद वो आ गयी.पर वो रीया थी कि ज़ीया .कुछ समझ मे नही आया.
पर जो भी थी उस से मुझे कोई फराक नही पड़ रहा था. मुझे सिर्फ़ उसकी छत पर जाना था.
वो हमारी छत के पास आकर खड़ी हो गयी.
उसने टी-शर्ट और लोवर पहन रखा था. वो जिस तरह से मुझे देख रही थी मैं समझ गया कि ये रीया है .अगर ज़ीया होती तो अब तक मुझसे बात कर लेती.पर अच्छा हुआ कि वो रीया है.
कल जब मैने अपनी छत को साफ किया तो मैं ज़ीया की छत पर गया था.ज़ीया की छत पर एक स्टोर रूम था जिस के गेट पर ताला लगा हुआ था.
वो ताला पुराना था. हाथ लगाते ही खुल गया और थोड़ा दबाने पर बंद हो गया.
मैं रीया की छत पर चला गया . रीया मुझे अपनी छत पर देख कर शॉक्ड हो गयी. मैं रीया के पास चला गया.
मैं ने जानबूझ कर रीया को ज़ीया कहा.
{ रीया(ज़्)-रीया को ज़ीया
ज़ीया(र)-ज़ीया को रीया
समझ कर पढ़ना }
अवी-ज़ीया कैसी हो,कल तुम्हे मज़ा आया था ना
रीया(ज़्)-मेरी तरफ देखने लगी
अवी-तुम ज़ीया ही हो ना.(मुझे पता है कि ये रीया है)
रीया(ज़्)-हाँ
अवी-(रीया ने हाँ कहा. और मेरा काम हो गया) कल तुम्हे मज़ा आया ना
रीया(ज़्)-(ज़ीया ने कल इसके साथ क्या किया था .ज़ीया बन ने का नाटक कर के पता लगाती हू) हाँ
अवी-(फस गयी रीया.रीया को लगा ज़ीया बन कर सब पता लगा लेती हू) कल तुमने कहा कि आज पूरा मज़ा करेंगे.
रीया(ज़्)-(ज़ीया ने इसके साथ क्या किया था.) कल की तरह आज भी मज़ा करेंगे
अवी-(कल तो कुछ किया ही नही ) चलो फिर
रीया(ज़्)-कहाँ
अवी-तुम ज़ीया ही हो ना
रीया(ज़्)-(दिमाग़ से काम लेना होगा. ज़ीया की बाते करके पता लगाना होगा) हाँ,तुम्हे ऐसा क्यू लगा
अवी-फिर पूछ क्यू रही हो कहाँ जाना है.कल की तरह स्टोर रूम मे चलते है.नही तो यहाँ रीया देख लेंगी.
रीया(ज़्)-वहाँ तो ताला है
अवी-वो तो खुल जाएगा .अब चलो जल्दी
मैं रीया(ज़्) को लेकर स्टोर रूम मे चला गया.और स्टोर रूम बंद कर दिया और खिड़की से हाथ डाल कर बाहर से ताला लगा लिया. और खिड़की बंद कर दी .
रीया(ज़्) सोच रही थी कि आगे क्या होगा.
मैं ने रीया(ज़्) को पकड़ लिया. रीया(ज़्) शॉक्ड हो गयी. और मैं ने ज़्यादा देर ना करते हुए रीया(ज़्) के होंठो पे किस कर दिया.
किस करते ही रीया(ज़्) शॉक्ड हो गयी .उसकी आँख बड़ी हो गयी. उसे कुछ समझ मे नही आ रहा था.
मैं रीया(ज़्) के होंठो को चूसने लगा. इस तरह चूस रहा था कि रीया(ज़्) पागल हो जाए.
कभी उपर के होंठो को तो कभी नीचे के होंठो को चूस रहा था.मैं ने दोनो हाथो से रीया(ज़्) के सर को पकड़ रखा था.जिस से रीया(ज़्) किस तोड़ ना सके और मुझे धक्का ना दे सके.
3 मिनट के बाद रीया(ज़्) ने अपने बदन को दिला छोड़ दिया. मैं ने अपने हाथ छोड़ दिए और रीया(ज़्) को दीवार से लगा लिया.
किस करने से रीया(ज़्) पर सेक्स का नशा छाने लगा. रीया(ज़्) मेरा साथ दे नही रही थी पर मुझे रोक भी नही रही थी.
मैं ने अपना हाथ रीया(ज़्) की गंद पर रख दिया और रीया(ज़्) की गंद दबाने लगा.
रीया(ज़्) अब पूरी तरह से सेक्स के नशे मे खो गयी थी.
रीया(ज़्) ने अपनी आँख बंद कर दी.
मैं रीया(ज़्) को सेक्स के नशे से बाहर आने नही दे सकता था. अगर उसे होश आ गया तो वो मेरे हाथ से निकल जाएँगी.
रीया(ज़्) को किस करने के साथ मुझे कुछ और भी करना होगा.
मैं ने किस करते हुए अपना एक हाथ रीया(ज़्) के लोवर मे डाल दिया.
मेरा हाथ सीधा रीया(ज़्) की पैंटी के अंदर चला गया.
रीया(ज़्) ने अपनी आँख खोल दी. पर मैं रीया(ज़्) को किस करता रहा और चूत को हाथ से मसल रहा था.
रीया(ज़्) की चूत गीली हो गयी थी.