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StoryPublisher
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अपडेट 287
{ रीया(ज़्)-रीया को ज़ीया
ज़ीया(र)-ज़ीया को रीया बना दिया }
घर आकर मैं खाना खा कर सो गया. मोबाइल मे 2.30 बजे का अलार्म लगा दिया.
आज रीया(ज़्) की गंद मार कर अपना खेल ख़तम कर दूँगा.
फिर दोपेहर मे मैं उठकर फ्रेश होगया और छत पर चला गया. अभी 3.00 बज रहे थे पर वो अभी तक आई नही.
मैं ने स्टोर रूम मे जाकर ज़रूरत का समान रख दिया और वापस अपनी छत पर आ गया.
3.10 हो गये पर वो आई नही. मैं छत पर घूमने लगा. 5 मिनट के बाद वो आ गयी. मैं उसकी छत पर चला गया.
अवी-हाई ज़ीया
रीया(ज़्)-हाई
अवी-रीया कहाँ है
रीया(ज़्)-वो सो रही है
अवी-(मतलब ज़ीया सो रही है) चले फिर
रीया(ज़्)-पर पहले ये बताओ इतनी जल्दी क्यू बुलाया
अवी-आज ज़्यादा मज़े करेंगे. अब चलो जल्दी.
मैं रीया(ज़्) को लेकर स्टोर रूम मे चला गया.
रीया(ज़्)-आज करने क्या वाले हो
अवी- तुम्हारी गंद मारने वाला हू
रीया(ज़्)-गंदा क्यू बोल रहे हो
अवी-उस्ड गंद ही तो कहते है
रीया(ज़्)-मैं वहाँ नही करूँगी
अवी-क्यू?
रीया(ज़्)-वहाँ ज़्यादा दर्द होता है
अवी-किसने कहा
रीया(ज़्)-वो ब्लू फिल्म मे देखा है
अवी-ब्लू फिल्म मे कुछ भी दिखाते है.तोड़ा दर्द होगा .जैसे उस्दिन हुआ था
रीया(ज़्)-पक्का ज़्यादा दर्द नही होगा
अवी-देखो मैं तेल लाया हू. जिससे तुम्हे दर्द कम होगा.
रीया(ज़्)-अगर ज़्यादा दर्द हुआ तो
अवी-नही करूँगा
रीया(ज़्)-पक्का ना
अवी-हाँ.अब जल्दी से कपड़े निकालो
रीया(ज़्)-तुम भी निकालो ना
अवी-मैं तो निकाल रहा हू
फिर मैं ने और रीया(ज़्) ने कपड़े निकाल दिए.
हम दोनो नंगे हो गये.रीया(ज़्) की चूत खुली हुई थी. गुलाबी चूत देख कर मेरे मुँह मे पानी आ गया और मेरे लंड पे भी पानी आ गया.
मैं रीया(ज़्) के गले लग गया और होंठो को चूसने लगा.मेरा लंड रीया(ज़्) की चूत पर रगड़ रहा था.
मैं ने किस करते हुए अपना एक हाथ मे लंड पकड़ लिया और रीया(ज़्) की चूत पर रख दिया .
लंड चूत पर रखते ही मैं थोड़ा आगे सरक गया. लंड का टोपा अंदर गया.
मैं ने लंड के टोपा अंदर रहने दिया और रीया(ज़्) के होंठो को चूसने लगा.थोड़ी देर तक हम एक दूसरे के होंठो को चूस्ते रहे.
फिर मैं अलग हो गया. अलग होते ही लंड का टोपा चूत से बाहर आ गया.
फिर मैं ने ज़मीन पर बेडशीट डाल दी जो मैं अपने साथ लाया था
और रीया(ज़्) के आने से पहले स्टोर रूम मे रख दी थी.
मैं ने रीया(ज़्) को 69 पोज़िशन मे आने को कहा. पहले मैं बेडशीट पर लेट गया.
मेरे मुँह पर चूत रख कर रीया(ज़्) ने मेरे लंड के पास अपना मुँह ले गयी.
रीया(ज़्) ने मेरे लंड को चाटना सुरू किया.पूरे टोपे पर रीया(ज़्) अपनी जीभ घुमा रही थी.
मुझे तड़फ़ा कर लंड चूस रही थी.
मैं ने भी रीया(ज़्) की चूत पर किस किया. फिर दाने को जीभ से चाटने लगा. जीभ से चूत के दाने के साथ खेलने लगा.
मेरी जीभ दाने को छूते ही रीया(ज़्) ने लंड को मुँह मे ले लिया फिर लंड को चूसने लगी.
मैं ने अपनी जीभ रीया(ज़्) की गुलाबी चूत मे डाल दी और चूत को चाटने लगा ,जीभ से चोदने लगा. कभी चूत को चूस लेता.
ऐसे तो टाइम लगेगा. क्यू ना रीया(ज़्) की चूत चूस्ते हुए गंद मे तेल लगा लू, रीया(ज़्) तो उधर लंड चूस रही है, अभी गंद पर तेल लगाया तो रीया(ज़्) को ज़्यादा दर्द नही होगा.
फिर मैं ने तेल की बॉटल से तेल निकाल कर उंगली पे डाल दिया. और उंगली से रीया(ज़्) के गंद के छेद को नरम करने लगा.
चूत मे जीभ और गंद के छेद पर उंगली इस से रीया(ज़्) गरम हो गयी और लंड को ज़ोर से चूसने लगी.
मैं ने उंगली को रीया(ज़्) की गंद के छेद मे डाल दी. रीया(ज़्) ने मेरे लंड को दबा दिया.
पर मैं कहाँ रुकने वाला था.मैं चूत मे जीभ डाल कर चाटने लगा और उंगली को गंद मे अंदर बाहर करने लगा.
मैं ज़ोर से रीया(ज़्) की चूत चाटने लगा जिस से रीया(ज़्) मज़े मे गंद का दर्द भूल जाए
थोड़ी देर रीया(ज़्) की गंद मे उंगली करने के बाद मैं ने उंगली बाहर निकाल ली.
और 2 उंगली पे तेल लगा लिया और रीया(ज़्) की गंद पर भी तेल लगा लिया.मैं ने तेल को चूत पर आने नही दिया.
फिर मैं ने धीरे धीरे 2 उंगली गंद मे डाल दी.रीया(ज़्) ने लंड पर दाँतों से काट लिया.
मुझे दर्द हुआ पर रीया(ज़्) ने लंड को मुँह मे जल्दी से बाहर निकाल लिया.
और हल्की आअहह भरी.पर मैं ने उंगली और जीभ बाहर नही निकाली.उंगली को गंद मे डाल कर चोदने लगा.और जीभ से चूत चाटने लगा.
रीया(ज़्) शीष्कारिया लेने लगी.
मैं ने तब तक उंगली बाहर नही निकाली जब तक रीया(ज़्) ने पानी नही छोड़ा.
रीया(ज़्) ने पानी छोड़ दिया मैं ने सारा पानी पी लिया और उंगली को बाहर निकाला
अवी-दर्द हुआ
रीया(ज़्)-नही.
अवी-मज़ा आया
रीया(ज़्) -हाँ
अवी-सोचो उंगली से इतना मज़ा आया तो लंड से कितना आएगा.
रीया(ज़्) -वो तो उंगली से बड़ा है
अवी-जिस तरह चूत मे जाने के बाद मज़ा आया वैसे ही गंद मे जाने के बाद मज़ा आएगा. मैं तुम पर फ़ैसला छोड़ता हू ,
रीया(ज़्) सोचने लगी.
अवी-(बोल तो दिया ,हाँ कर दो)
रीया(ज़्) -दर्द हुआ तो रुक जाना
अवी-मैं क्या तुम्हे दर्द होने दूँगा.
और फिर मैं ने रीया(ज़्) को बेडशीट पर लिटा दिया और मैं रीया(ज़्) के साइड मे आ गया.
मैं ने उंगली पर तेल लिया और उंगली को रीया(ज़्) की गंद मे डाल दिया. रीया(ज़्) उछल पड़ी. मैं ने लंड को रीया(ज़्) की चूत मे डाल दिया.
फिर रीया(ज़्) उछल पड़ी
मैं ने लंड और उंगली हिलाना सुरू किया .रीया(ज़्) डबल मज़ा ले रही थी.मैं धक्के लगाता रहा .
रीया(ज़्) आवाज़े निकालती रही. उुउऊहही माआअ बसस्सस्स आसस्रसे हहिईीईई और ज्ज्जजूर्र्र ज़ोर से करो. हााआ बस कर्र्रते रहो
मैं धक्के लगाता गया और उंगली को बाहर निकाल कर फिर तेल लगा कर अंदर डाल देता
5 मिनट तक मैं रीया(ज़्) की चुदाई करता रहा. फिर रीया(ज़्) ने पानी छोड़ दिया.और मैं ने लंड बाहर निकाल लिया.