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346 ए
मिसेज़ डूबे जो कब से अपनी चूत को मुझ से बचा रही थी आज वो चूत मेरे सामने थी.
मिसेज़ दूबे की चूत मेरे सामने आते ही मेरे लंड ने सर उठाना सुरू कर दिया.
मिसेज़ दुबे को एक ना एक दिन मेरे नीचे आना था. और वो दिन आज आ गया.
मैं ने मिसेज़ दूबे की चूत पर अपना हाथ घुमाने लगा.
मेरा टच अपनी चूत पर महसूस करके मिसेज़ दूबे के बदन मे बिजली दौड़ने लगी.
मिसेज़ दूबे का बदन काँप रहा था और चूत की गर्मी की वजह से बदन भी गरम हो रहा था.
फिर मैं ने देर ना करते हुए अपनी उंगली मिसेज़ दूबे की चूत मे डाल दी.
चूत पे उंगली रखते ही उंगली चूत मे फिसलते हुए अंदर चली गयी.
मिसेज़ दूबे की चूत ऐसी हो गयी थी कि जैसे चूत मे मक्खन लगा हो ,और जो चीज़ चूत को टच हो वो अंदर चली जाए.
उंगली अंदर जाते ही मिसेज़ दूबे के मूह से हल्की सी आअहह निकल गयी.
उंगली अंदर जाते ही मैं ने बाहर निकाल ली पर मिसेज़ दूबे की चूत इतनी चिकनी हो गयी कि उंगली बार बार अंदर जा रही थी.
मैं ने उंगली को अंदर बाहर करना सुरू किया. और मिसेज़ दूबे के उपर आकर गरम जोशी से उसके होंटो से अपने होन्ट मिला दिए
किचन मे मिसेज़ दूबे मेरे होंटो को चूस रही थी और अब मैं मिसेज़ दूबे के होंटो को चूसने लगा.
मिसेज़ दूबे के होंटो को चूसने से मिसेज़ दूबे ने भी मेरे होंटो को चूसना सुरू किया.
मिसेज़ दूबे मुझ से ज़्यादा जोश के साथ किस कर रही थी.
मैं पहले 2 चुदाई कर चुका था जिस से मेरा जोश कम था ,पर मिसेज़ दूबे ने कोई कमी नही रखी मुझे किस करने मे
किस करने का जोश इतना था कि होंटो को चूसने के साथ साथ चेहरे पे भी किस कर रही थी.
इधर मैं चूत मे उंगली करके मिसेज़ दूबे को जोश दिलवा रहा था.
जिस तरह से मैं ने रीया को कोई चान्स नही दिया था वैसे ही मैं मिसेज़ दूबे को भी कोई चान्स नही देना चाहता था
सब कुछ बिना ब्रेक के करना था. एक बार चुदाई हो गयी कि नेक्स्ट टाइम सब आराम से कर सकता हू
मैं ने दूसरे हाथ को भी काम पे लगा दिया. मैं एक हाथ से उसके बड़े बड़े बूब्स दबा रहा था तो दूसरा हाथ उसकी चूत पर था.
10 मिनिट तक मैं मिसेज़ दुबे गरम करता रहा. बीच मे मैं ने चूत मे उंगली करना बंद कर दिया था.
किस करने के बाद मिसेज़ दूबे हाफ़ रही थी.
मैं ने यही सही समय सोच कर अपनी जीन्स को निकाल दिया.
जींस निकलते ही मेरा लंड जो मिसेज़ दूबे की चूत देख कर खड़ा हुआ था वो मिसेज़ दूबे की चूत पर दस्तक देने लगा.
मैं ने मिसेज़ दुबे को चुदाई करने के लिए पूरी तरह से तय्यार कर लिया था.
उसकी चूत गरम थी. लंड लेने को तय्यार थी , मैं ने लंड को मिसेज़ दूबे की चूत पर रख कर एक झटके मे पूरा अंदर डाल दिया.
1 हफ्ते से जो मेरा दिमाग़ खराब करके रखा था वो एक झटके मे ठीक कर दिया.
मिसेज़ दूबे ने ये सोचा नही था कि मैं एक झटके मे पूरा लंड डाल दूँगा.
लंड अंदर जाते ही मिसेज़ दूबे के मूह से चीख निकल गयी .मर गयी... क्या किया तुमने....आआअहह..
मिसेज़ दूबे ने 1 हफ्ते से मुझे तड़फ़ाया था उसका हिसाब बराबर कर रहा था.
मैं ने मिसेज़ दूबे की चीख की कोई परवाह नही की और ज़ोर दार धक्के मारने लगा.
मिसेज़ दूबे चिल्लाती रही.पर उसने मुझे रोकने की कोशिस नही की.
दर्द भी ना हो और मज़ा भी आए ऐसा कभी होता है क्या. ये बात मिसेज़ दूबे को पता थी.
उसे पता था कि थोड़ी देर दर्द होगा फिर मज़ा मिलेंगा. और मुझे रोक दिया तो चुदाई अधूरी ना रह जाए इस लिए मिसेज़ दूबे चिल्ला रही थी पर मुझे रुकने को नही बोल रही थी.
मैं मिसेज़ दूबे के बूब्स को दबाने लगा .जो बूब्स पहले से बड़े थे उनको और बड़ा करने की कोशिस कर रहा था.
मिसेज़ दूबे के बड़े बड़े बूब्स दबाने मे मज़ा आ रहा था.
मिसेज़ दूबे के बूब्स को दबाते हुए मैं जोरदार धक्के मार रहा था.
मिसेज़ दूबे ने कब से अपना पानी रोक रहा था वो मेरे धक्को से चूत मे सूनामी ला रहा था.
और 5 मिनिट मे सूनामी कंट्रोल से बाहर हो गयी .और मिसेज़ दूबे की चूत से पानी निकल गया.
जिस तरह मेरा वीर्य ज़्यादा निकला था वैसे मिसेज़ दूबे का पहला पानी फ्लड लेकर आया.
मिसेज़ दूबे के पानी ने मेरे लंड को और सोफे को गीला कर दिया.
इतना पानी निकलने से मिसेज़ दूबे ने राहत की सास ली.
मिसेज़ दूबे का पानी निकला था मेरा वीर्य निकलना बाकी था.
मतलब चुदाई सुरू थी.
मैं मिसेज़ दूबे की चूत मे धक्के मारता गया.
पानी निकालने से मिसेज़ दूबे को हल्का हल्का महसूस हो रहा था.
जिस से मेरे धक्को का मिसेज़ दूबे को मज़ा आने लगा .उसकी चीखे शीष्कारियो मे बदल गयी.
मैं ने उसके बूब्स को दबाना बंद कर दिया और बस धक्के लगाने पे फोकस करने लगा.
मुझे आज बस मिसेज़ दूबे की चूत मे अपना वीर्य डालना था ,और मैं उसी पे लग गया.
मैं पूरी ताक़त लगाकर धक्के मारता गया और वो चीखो के साथ शीष्कारिया लेती गयी.
जैसा देखते है वैसा होता नही. लाइव शो देखना और खुद चुदाई करना इस मे ज़मीन आसमान का फ़र्क है
देखते हुए लगता है कि धक्के मार रहा है पर जब वो धक्के खुद लो तो तब समझ मे आता है.
मिसेज़ दूबे मेरे धक्को का एक्सपीरियेन्स लेते हुए फिर से झड गयी.
मिसेज़ दूबे ने भी मिसेज़ पवार की तरह अपनी टंकी को पानी से भर के रखा था.
दूसरी बार पानी निकलने के बाद मिसेज़ दूबे मेरे धक्को के साथ अपनी गंद उपर नीचे कर रही थी.
जिस तरह मिसेज़ पवार मुझे ज़ोर से धक्के मारने को कह रही थी उसी तरह मिसेज़ दूबे नही बोल रही थी. बस सिसकारियाँ लेती रही.
पर अपनी गंद उठा कर ये बता रही थी और ज़ोर से धक्के मारो
मैं तो अपनी ताक़त लगा कर धक्के मार रहा था.
ऐसे धक्के मारने से मिसेज़ दूबे मेरा पूरा साथ दे रही थी. मेरे धक्के के साथ वो भी मज़े मे शीष्कारिया ले रही.
.............ऊऊऊऊऊऊऊहह...
उूुुुुुुुुुउउईईईईईईईईईई....
मैं इस एक पोज़िशन मे धक्के मारते हुए थक गया था ,पर मैं पोज़िशन भी बदल नही सकता था .
मुझे सोफे पर धक्के मारने मे परेशानी हो रही थी फिर भी मैं रुका नही बल्कि और ज़ोर से धक्के मारने लगा.
आज इस धक्को ने इस सोसाइटी की हर औरत ने किसी का लंड ले लिया.
मैं ने मिसेज़ दूबे की चूत मारने मे कोई कसर नही छोड़ी.
मेरे वॉर से मिसेज़ दूबे की चूत से पानी बहता जा रहा था. मैं धक्के लगाता जा रहा था.
बीच बीच मे मैं उसके निपल को मरोड़ देता जिससे उसके मूह से चीख निकल जाती.
ऐसे मस्ती करते हुए मिसेज़ दूबे की चूत मारने मे मज़ा आ रहा था.
मैं मज़े के साथ मिसेज़ दूबे की फटी हुई चूत को और फाड़ रहा था.
हमारी चुदाई का सिलसिला 50 मिनिट तक चलता रहा.
इस बीच मैं ने उसके बूब्स,निपल को मरोड़ कर लाल कर दिया था. और चूत का पूसा भोसडा बना दिया .
इस लंबी चुदाई मे मिसेज़ दूबे ने 4 बार अपना पानी छोड़ा.
मैं ने भी अपना वीर्य मिसेज़ दूबे की चूत मे डाल दिया .
हम दोनो का पानी एक साथ निकल गया. जिस से उसने अपनी आँखे बंद कर ली थी.
मैं मिसेज़ दूबे की चूत मार कर थक गया था. और मिसेज़ दूबे मेरे धक्को से थक गयी थी.
मेरा वीर्य निकलते ही मैं ने लंड बाहर निकाल लिया .
मुझे थोड़ा आराम करने की ज़रूरत थी पर मैं यहाँ रुक नही सकता था.
मैं अपने कपड़े पहन कर मोबाइल को लेकर बाहर चला आया. मिसेज़ दूबे अपनी आँखे बंद किए नॉर्मल हो रही थी.
अगर वो होश मे आ गयी तो मैं उसके सवालो के जवाब नही दे सकता था. इस लिए मैं ने बाहर आना जाना सही समझा.
मैं उसके सवालो के जवाब दे सकता था पर आज नही, आज लगातार 3 चुदाई करने के बाद मुझे आराम करने की ज़रूरत थी.
मिसेज़ दूबे को फेस करने के लिए फ्रेश दिमाग़ की ज़रूरत थी.
मिस दूबे के आँखे खोलने से पहले मैं अपने घर2 चला गया.