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नेक्स्ट डे मैं जल्दी उठ गया. छोटी चाची मुझे इतनी जल्दी फ्रेश होता हुआ देख कर मेरा मज़ाक उड़ाने लगी.
मैं फ्रेश होकर सुबह के 9.00 बज़े बाइक लेकर नीता बुआ के घर आ गया.
अवी-बुआ लीना कहाँ है
नीता बुआ-वो फ्रेश हो रही है
अवी-लीना को बता दीजिए कि मैं आ गया हू.
नीता बुआ-उसे पता है तुम आ गये हो तभी नहाने चली गयी है. तुम बैठो, जब तक लीना नही आती मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बनाती हू.
अवी-नाश्ता मत बनाइए. हम बाहर ही खा लेंगे
नीता बुआ-ठीक है.
मैं लीना का इंतज़ार करने लगा कि तभी कविता आ गयी. शायद लीना को बर्तडे विश करने आई हो.
अवी-लीना को मिलने आई हो
कविता-हाँ भैया
हाँ कहकर कविता लीना के कमरे मे भाग गयी.थोड़ी देर बाद कविता और लीना हॉल मे आ गयी.
अवी-लीना चलो तुम्हारे लिए बर्तडे गिफ्ट लेने चलते है
लीना मेरी बात सुनकर खुश हो गयी.
लीना को जो चाहिए था वो उस मिल रहा था.
लीना-हाँ चलिए.
नीता बुआ-अवी कब तक वापस आओगे
मेरे बोलने से पहले लीना ने जवाब दे दिया.
लीना-दोपेहर तक आ जाएँगे
नीता बुआ-थोड़ा जलदी आ जाना,बर्तडे की तय्यारी करनी है.
लीना-जल्दी नही आ सकते.क्यू कि पहले केक खरीद ना है,फिर गिफ्ट,फिर होटेल मे खाना खाना है. इतना करने से दोपेहर तो हो जाएगी
नीता बुआ-ठीक है पर जल्दी आने की कोशिश करना
लीना-जाएँगे तभी तो वापस आएगा
नीता बुआ-अवी आराम से जाना
अवी-जी बुआ
मैं ने बाइक निकाल दी.
अवी-बैठो ,खड़ी क्यू हो
लीना-कविता तू बीच मे आ जा मैं पीछे बैठे जाती हू
कविता भी हमारे साथ आ रही है, अब क्या करना चाहती है लीना
अवी-कविता भी आ रही है
लीना-हाँ
अवी-(अब ये क्या नया चक्कर है.) कविता मेरे लिए एक ग्लास पानी तो लाना
कविता-अभी लाती हू
कविता घर के अंदर चली गयी.
अवी-कविता अगर हमारे साथ आएगी तो कैसे चलेगा
लीना-मैं ने बताया था ना कि मेरे साथ एक और भी है जो औरत बन ना चाहती है
अवी-तो क्या वो कविता है
लीना-हाँ,अब मना मत करना.
अवी-कविता के बारे मे तुम ने पहले क्यू नही बताया
लीना-अगर पहले बता देती तो आप मना कर देते.
अवी-मैं अब भी मना कर सकता हू
लीना-आपको तो पता है मैं और कविता एक दूसरे के बिना नही रह सकते है. हम जो भी करते है साथ मे करते है. और आज भी हम साथ मे आपसे प्यार करेंगे.
अवी-(मुझे छोटी चाची की बात याद आ गयी. शायद छोटी चाची कविता की बात कर रही थी.) ठीक है .पर पहले मेरी एक बात माननी होगी.
लीना-कौन सी बात
अवी-बीच मे तुम्हे बैठना होगा
लीना-मुझे गले लगा लिया थॅंक यू भैया.
कविता पानी लेकर आ गयी.
कविता-भैया पानी
लीना-फेक दो पानी को और चलो जल्दी भैया ने हाँ कर दी.
लीना और कविता बाइक पर बैठे गयी. और हम शहर की तरफ निकल पड़े.
लीना ने मुझे कस के पकड़ रखा था
अवी-लीना बाइक तो धीरे चल रही है फिर तुम्हे मुझे पकड़ ने की क्या ज़रूरत है.
लीना-आज आप हम दोनो के है , 4 महीने से इस दिन का इंतज़ार किया है, कंट्रोल नही हो रहा.
कविता-मुझे भी भैया को प्यार करने दे
लीना -तू आते वक्त बीच मे बैठ लेना.
लीना-भैया हम शहर मे कहाँ करेंगे
अवी-ये तो तुम्हे पता होगा
लीना-मैं कहाँ शहर जाती हू. मुझे कुछ नही पता शहर के बारे मे.आप ही देख लो अपने किसी फ्रेंड का घर
अवी-ठीक है. पहले शॉपिंग करना है या प्यार करना है
कविता- भैया,शॉपिंग बाद मे करेंगे.
लीना-हाँ शॉपिंग बाद मे करेंगे
अवी-बाद मे तुम शॉपिंग कर नही पाओगी.
कविता-शॉपिंग मे सिर्फ़ आप जाना .हम तब तक आराम करेंगे
अवी-तुम दोनो ने तो पहले से सब सोच रखा है
लीना-हाँ,इस लिए तो माँ को कहा है कि हम दोपेहर मे आएँगे
कविता-अब जल्दी चलो ना भैया,
अवी-लगता है ज़्यादा ही सोच रखा है तुम दोनो ने .जो थोड़ा रुक भी नही सकती
कविता-हम तो बस..
लीना-आप बाइक की स्पीड बढ़ा दीजिए
अवी-तो चलो फिर
मैं ने स्पीड बढ़ा दी.और हम शहर पहोच गये. एक शॉप से कुछ खाने का समान ले लिया.और फिर कविता और लीना को शहर वाले घर2 मे ले आया. बाइक रुकते ही मैं ने लीना को चाबी दी. लीना ने गेट खोल दिया. और हम सब अंदर चले गये