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मैं और मेरा परिवार

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474

रात मे ठकुराइन की चुदाई करने के बाद मैं सुबह उठ कर अपने घर चला गया.

इन 6 दिनो मे मैं बहुत कम बार अपने घर गया था.

चाची के साथ ठीक से बात भी नही हो पाई.

कल से तो मेला शुरू हो जाएगा.

मुझे आज थोड़ा आराम करना चाहिए

मैं घर जाकर अपने कमरे मे सो गया.

बाहर कॉटन के गद्दे पर सो जाओ पर उस पे वो नींद नही आती जो अपने कमरे मे अपने बेड पर सोने से आती है.

मैं तो घर आकर सो गया.

बड़ी चाची मुझे अपने से दूर देख कर उदास थी. मैं घर कम और हवेली ज़्यादा जाने लगा था जिस से बड़ी चाची मेरे बारे मे सोचती रहती थी.

बड़ी चाची ने 6 दिन मे मुझे ठीक से प्यार तो छोड़ो बात करने भी नही मिली.

यहाँ तक कि बड़ी चाची के हाथ का खाना भी खाने को नही मिला.

बड़ी चाची को उदास और ख़यालो मे खोया देख कर छोटी चाची ने बड़ी चाची से बात करने का फ़ैसला किया.

सी चाची-दीदी

बड़ी चाची ने कोई जवाब नही दिया .वो बस मेरे बारे मे सोचती रही.

सी चाची-दीदी ,दीदी ,

ब चाची-हड़बड़ा कर क्या हुआ ,

सी चाची-कुछ नही.

ब चाची-ह्म्म्मी

सी चाची-दीदी क्या सोच रही हो

ब चाची-कुछ नही...वो अवी के बारे मे सोच रही थी.

सी चाची-अवी के बारे मे

ब चाची-हाँ, देखा नही तूने अवी हम से बात भी नही कर रहा

सी चाची-आप भी ना दीदी, कुछ भी सोचती रहती हो

ब चाची-मैं क्या झूठ बोल रही हू

सी चाची-ऐसा मैं ने कब कहा.

ब चाची-तो फिर

सी चाची-दीदी आपको पता है ना अवी को कितना काम है, ऐसे मे उसे हम से बात करने के लिए समय कहाँ मिलेगा

ब चाची-2 मिनिट के लिए तो बात कर सकता है

सी चाची-दीदी हम ने अवी को इतनी ज़िम्मेदारी का काम दिया है ,अवी बस वो काम पूरा कर रहा है और हमारा नाम रोशन कर रहा है

ब चाची-वो तो अवी के चाचा ने काम करने से मना किया था इस लिए हम ने अवी को वो ज़िम्मेदारी दी है

सी चाची-हाँ ,पर आपने देखा नही, जो काम अवी के चाचा को पूरा करने मे 1 महीना लग जाता ,उस काम को अवी ने 5 दिन मे कितने अच्छे से पूरा काम किया. हर तरफ अवी के नाम लिया जा रहा है. और हम यही तो चाहती है कि अवी का नाम हो

ब चाची-वो सब ठीक है. पर ठाकुर,हवेली

सी चाची-ठाकुर हवेली,मैं समझी नही

ब चाची-तुम्हें पता है ना ठाकुरों के शौक कैसे होते है

सी चाची-हाँ पता है

ब चाची-रणजीतसिंघ के साथ रह कर ऐसे शौक अवी को लग गये तो

सी चाची-नही लगेंगे, हमारा अवी इन सब से दूर रहता है. वो शराब के नाम से दूर रहता है

ब चाची-वो तो मुझे भी पता है

सी चाची-फिर आप किस बारे मे बात कर रही है

ब चाची-मैं मेले की बात कर रही हू. पिछले मेले मे ठाकुर ने कितनी लड़कियो के साथ हवेली पर...तू समझ रही है ना

सी चाची-तो ये बात है

ब चाची-हाँ, तू तो पिछले मेले के बाद इस घर मे आई थी. तुझे पता नही. वो ठाकुर हवेली मे मेले के समय क्या क्या करता था और साथ मे अवी के दादाजी भी

सी चाची-ये आपको कैसे पता

ब चाची-एक दिन अवी के दादाजी को बुलाने हवेली गयी थी तब देखा था

सी चाची-आपको लगता है हमारा अवी भी ऐसा करेगा

ब चाची-अब मैं तुम्हें क्या बताऊ मीना, उस दिन अवी का वो देख कर मैं हर बार यही सोच रही हू कि अवी को हवेली मे बुरी आदत जल्दी लग जाएगी.

सी चाची-तो आप ही बताइए क्या किया जाए. अवी को तो मेले के काम के लिए रणजीतसिंघ के साथ रहना होगा. इस लिए अवी को हवेली तो जाना होगा.

ब चाची-ये ही तो परेशानी है

सी चाची-आपको मेले मे हवेली पर ये सब होता है पता था तो अवी को मेले का काम क्यू दिया

ब चाची-अवी के चाचा ने मना कर दिया था. और मेला तो हमारी फॅमिली की परंपरा है. अवी के चाचा के बाद सिर्फ़ अवी हमारे घर मे बड़ा है. उसके सिवा मैं किसे ये काम देती

सी चाची-तो फिर ये हवेली के बारे मे सोचना बंद कीजिए

ब चाची-कैसे करू मीना, 6 दिन से अवी,हर रात को हवेली मे सो रहा है. मुझे तो बहुत डर लग रहा है

सी चाची-तो आप ही बताइए मैं क्या करू

ब चाची-तू ऐसा कुछ सोच ना मीना जिस से अवी मेले का काम भी करे और अवी को हवेली भी ना जाना पड़े

सी चाची-ये तो मुश्किल काम है

ब चाची-तू मेरे लिए बस ये काम कर दे

सी चाची-आपके लिए तो सब कुछ, मुझे सोचने दीजिए

सी चाची-(क्या किया जाए,कैसे, अवी मेले का काम भी करे और हवेली ना जाए. और अवी मज़ा भी कर सके और बड़ी चाची को अच्छा भी लगे.हाँ ये हो सकता है)

सी चाची-दीदी अवी हवेली मे ना रहे यही चाहती है ना

ब चाची-हाँ, हवेली छोड़ कर वो कही भी रहेगा तो मुझे कोई परेशानी नही है

सी चाची-हमारे खेत का घर3 कैसा रहेगा.वहाँ से खेतो मे जो लोगो के रहने लिए बनाया है अवी उस पे नज़र रख सकता है. वहाँ सो भी सकता है. और ऐसा करने से अवी हवेली भी नही जा पाएगा

ब चाची-हाँ ये ठीक रहेगा. तेरा जवाब नही मीना. पर अवी के चाचा अवी को खेत वाला घर3 नही देंगे. वो तो वहाँ किसी को आने नही देते.दिन मे तो चल जाएगा पर रात मे अवी के चाचा उस घर3 को लॉक लगा देते है

सी चाची-वो आप मुझ पर छोड़ दो मैं अवी के चाचा को सभाल लूँगी.

ब चाची-अवी को भी तू बता, तेरी बात वो जल्दी मानता है

सी चाची-ठीक है. अब तो आप खुश है

ब चाची-हाँ, पर अवी को कहना कि आज वही पर सोना है,कल पूजा करनी है

सी चाची-और कुछ

ब चाची-नही,अब मैं आराम से पूजा की तय्यारी करती हू

सी चाची-हाँ कीजिए, पर मुझे आप से एक बात पूछनी है

ब चाची-हाँ पूछ

सी चाची-आप को ये पता चल गया ना अवी बड़ा हो गया है और साथ मे अवी का वो भी

ब चाची-हाँ, पता ही नही चला कब हमारा अवी बड़ा हो गया और...रुक बाद मे तूने क्या कहा...

छोटी चाची भाग कर मेरे कमरे मे आ गयी

बड़ी चाची छोटी चाची के पीछे पीछे मेरे कमरे मे आ गयी

ब चाची-क्या कहा था तूने

सी चाची-धीरे ,अवी सो रहा है.

ब चाची-कितना काम कर रहा है अवी, देख कितने आराम से सो रहा है

सी चाची-हाँ, चलिए हम हॉल मे चलते है, अवी को आज आराम करने की ज़्यादा ज़रूरत है ,कल से अवी को खाने के लिए समय नही मिलेगा

फिर छोटी चाची और बड़ी चाची हॉल मे जाकर बातें करने लगी.

 


475

आज मैं दोपहर तक सोता रहा.

दोपहर मे छोटी चाची ने मुझे नींद से जगाया.

सी चाची-अवी उठो, दोपहर हो गयी. कब तक सोते रहोगे

अवी-सोने दो ना चाची

सी चाची-दोपहर हो गयी. तुझे मंदिर नही जाना

अवी-आज रणजीतसिंघ मंदिर का काम देख रहा है. मैं शाम मे जाउन्गा.

सी चाची-फिर उठना मुझे तुम से ज़रूरी बात करनी है.

मैं ने अपना सर छोटी चाची की गोद मे रख कर लेट गया

अवी-बताइए

सी चाची-तुम्हें मेले का काम मिला इस लिए तुम्हें कोई परेशानी तो नही हो रही है

अवी-मैं तो खुश हूँ कि आपने मुझे इस काबिल समझ कर इतना बड़ा ज़िम्मेदारी का काम दिया है

सी चाची-और बता कैसे चल रहा है मेले का काम

अवी-काम तो लगभग हो गया.

सी चाची-देखा मैं ने,बहुत अच्छा काम किया तूने

अवी-सब आपके प्यार के वजह से हो पाया है

सी चाची-वैसे तू सिर्फ़ काम करता रहा या मस्ती भी की

अवी-क्या बताऊ चाची, 6 दिनो मे मेरा पूरा तेल निकल गया

सी चाची-मतलब तू सिर्फ़ काम करता ,मुझे तो लगा रणजीतसिंघ के साथ रह कर मस्ती भी की होगी.और हवेली मे इतनी राते सिर्फ़ सोते रहे

अवी-रणजीतसिंघ के साथ काम करने मे मज़ा आया

सी चाची-क्या मज़ा किया

अवी-कहाँ से बताऊ

सी चाची-मुझे ये बता तूने रणजीतसिंघ के साथ दोस्ती की.

अवी-हाँ की

सी चाची-जैसे ठाकुर और तुम्हारे दादाजी की थी ऐसी दोस्ती की बात कर रही हू

अवी-हाँ वैसी ही दोस्ती की

सी चाची-पता है मैं तुम्हें रणजीतसिंघ के साथ दोस्ती करने क्यू बोल रही हू

अवी-नही

सी चाची-ठाकुर के साथ दोस्ती करने से हमेशा फ़ायदा होता है.अब बता 6 दिनो मे तूने क्या किया

अवी-5 दिन तो काम मे निकल गये

सी चाची-और कल क्या किया

अवी-कल रणजीतसिंघ को उसका मनपसंद गिफ्ट दिया. जिस से रणजीतसिंघ मुझ पर खुश हो गया

सी चाची-क्या दिया गिफ्ट मे

अवी-एक कुवारि गंद

सी चाची-किस की

अवी-आपको वो सेल्स गर्ल पता है मिसेज़ वर्मा के घर मैं ने उसकी चुदाई की थी.

सी चाची-हाँ पता है. तो उसकी दी

अवी-हाँ

सी चाची-पहले तू मार लेता फिर रणजीतसिंघ को देता

अवी-रणजीतसिंघ से दोस्ती करने के लिए ऐसा करना पड़ा.

सी चाची-तो इस तरह तूने रणजीतसिंघ से दोस्ती की

अवी-हाँ

सी चाची-रणजीतसिंघ के बाद तो तूने भी उस सेल्स गर्ल की चुदाई की होगी.

अवी-नही की, रणजीतसिंघ को गंद मारना बहुत पसंद है. उस ने सेल्स गर्ल की ऐसी गंद मारी कि वो कुछ करने की हालत मे नही थी.

सी चाची-मतलब तू बस देखता रहा

अवी-और क्या करता, रणजीतसिंघकी दोस्ती के लिए इतना तो करना पड़ेगा.और वैसे भी वो सेल्स गर्ल मेरे लिए अनलकी थी

सी चाची-अनलकी वो कैसे

अवी-जब मैं ने पहली बार उसकी चुदाई की थी उसके बाद बड़ी चाची मुझ पर गुस्सा हो गयी. और मुझे उसकी गंद मारने को नही मिली. दूसरी बार जब मिली तो मैं बीमार हो गया. और उसकी गंद मारने को नही मिली. मतलब वो मेरे लिए अनलकी थी.

सी चाची-ये तो तूने सही कहा. पर उसकी चुदाई करने के बाद रणजीतसिंघ ने क्या कहा

अवी-उस ने कहा कि वो मेले मे मुझे मज़ा करवाएगा

सी चाची-एक के बदल एक मत लेना

अवी-मैं एक के बदले 10 लूँगा

सी चाची-तेरे साथ इतना ही हुआ.तू तो हवेली मे सो ता था.वहाँ क्या हुआ

अवी-उसके बारे मे मत पूछिए. वो ठकुराइन...

सी चाची-ठकुराइन से दूर रहना बहुत तेज औरत है वो.

अवी-मैं तो दूर ही रह रहा था पर ठकुराइन तो.,

सी चाची-ठकुराइन तो क्या. क्या हुआ, शुरुआत से बता

अवी-मैं ने छोटी चाची को कल रात वाली सारी बात बता दी.

सी चाची-उस ने तुम्हें थप्पड़ मारा. और तुम चुप चाप खा कर आ गये मुझे तुम से ये उम्मीद नही थी. मुझे ही ठकुराइन का कुछ करना होगा

अवी-मैं क्या करता चाची, वो गाओं की ठकुराइन है. और उसने बड़ी चाची की धमकी दी थी.

सी चाची-ये तूने अच्छा किया. वो गाओं की ठकुराइन है, पर थप्पड़ का बदला तो लेना होगा

अवी-उस के बारे मे भी मैं ने सोचा है

सी चाची-क्या, सोचा है

अवी-ठकुराइन सज़ा के बहाने मुझसे 1 महीना चुदाई करना चाहती हैना. मैं उसके साथ चुदाई नही करूँगा और

सी चाची-और जब वो तड़पेगी तो तू उसकी गंद मार कर अपने थप्पड़ का जवाब देगा

अवी-हाँ, ऐसा ही करूँगा.

सी चाची-ठकुराइन से ज़्यादा पंगा मत लेना.

अवी-बस छोटा सा सबक सिखाउन्गा. पर एक प्राब्लम है

सी चाची-क्या ?

अवी-मुझे 1 महीना हवेली से दूर रहना होगा. पर हवेली से दूर रहा तो रणजीतसिंघ के साथ मिलकर मज़े कैसे करूँगा

सी चाची-उसका हल है मेरे पास

अवी-कौनसा हल

ब चाची-किस बारे मे बात हो रही है तुम दोनो की

बड़ी चाची खाना लेकर कमरे मे आ गयी.

सी चाची-कुछ नही दीदी मेले के बारे मे बात कर रही थी.आपने जो कहा था वही बता रही थी अवी को

ब चाची-उसे बाद मे बताना पहले अवी को खाना खाने दो .देखो काम कर कर के कैसी हालत हो गयी.

अवी-आप के हाथो का खाना ना खाने की वजह से ऐसा हुआ . आज तो आपके हाथ से खाउन्गा

ब चाची-मैं भी तो तुम्हें अपने हाथो से खिलाने आई हूँ .चल हाथ मुँह धो ले .

मैं मुँह हाथ धो कर बड़ी चाची के साथ खाना खाने लगा.

छोटी चाची और सीमा चाची भी हमारे साथ खाना खाने लगी.

 


476

खाना खाने के बाद बड़ी चाची और सीमा चाची अपने कमरे मे चली गयी.

मेरे कमरे मे अब छोटी चाची और मैं रह गया था.

हमारी बातें फिर शुरू हो गयी

अवी-आप हवेली मे ना रहने का हल बता रही थी.

सी चाची-हाँ, तू हवेली की जगह अपने खेत वाले घर3 मे सोया कर

अवी-खेत वाला घर3, ये तो बहुत अच्छा होगा. खेत मे दूसरे गाओं से आए हुए लोग भी होगे. उनके साथ मस्ती कर सकता हू.

सी चाची-मैं ने भी यही सोचा था. मतलब तुम्हारे हवेली मे रहने से सुमन दीदी परेशान थी. ये उन्ही का आइडिया है तुझे हवेली से दूर रखने का. और मेरा आइडिया तुझे मस्ती करने की लिए एक अच्छी जगह देने का

अवी-खेत का घर3 अच्छा रहेगा.वहाँ हवेली मे सब लोग होंगे .उनके होते हुए रणजीतसिंघ के साथ मिलकर मस्ती नही कर सकता था.

सी चाची-तो ये फिक्स हो गया. तुम खेत वाले घर3 मे रहोगे

अवी-हाँ, मैं आज ही वहाँ ज़रूरी समान रख देता हू

सी चाची-आज से नही, कल से ,आज तुम्हें वही सोना होगा

अवी-क्यू?

सी चाची-कल से मेला शुरू होगा ,पूजा करने के लिए हमे एक साथ मंदिर जाना होगा.

अवी-ठीक है कल जाउन्गा.

सी चाची-और हाँ, मुझे बताया कर क्या क्या करता है तू

अवी-एक साथ बताउन्गा. मेले के बाद,

सी चाची-ठीक है. पर ठकुराइन के साथ कुछ हुआ तो पहले मुझे बताना

अवी-जी चाची.

सी चाची-वैसे अवी तूने सोचा है मेले मे कौन कौन आएगा

अवी-नही. पर एक बात सोची है

सी चाची-क्या?

अवी-मैं ने जीतनों के साथ चुदाई की है वो सब वहाँ मेले मे होगे.

सी चाची-मैं इसकी बात कर रही थी. तो क्या फ़ैसला किया

अवी-मैं ने जिन के साथ चुदाई की है उनके साथ मेले मे नही करूँगा.

सी चाची-मेरे साथ भी नही

अवी-क्या कहा. आप,आपके लिए तो किसी की तरफ देखूँगा भी नही..आप सच मे

सी चाची-मैं मज़ाक कर रही थी. तूने सही सोचा.

अवी-आप ऐसा मज़ाक मत किया करे

सी चाची-ठीक है नही करूँगी.

अवी-चाची ,

सी चाची-हाँ बोलना

अवी-वो खेत वाला घर3,चाचा

सी चाची-तेरे चाचा को मैं संभाल लूँगी.

अवी-फिर ठीक है.

सी चाची-वैसे मैं ने सुना है कि रानी 1 महीने के लिए मेला देखने के लिए कोमल के घर आ रही है

अवी-हाँ.

सी चाची-फिर तू तो रानी के साथ रहेगा.

अवी-कोमल रानी को मेरे पास भी नही आने देगी.

सी चाची-मैं रानी को तेरे पास लाउ

अवी-नही रहने दीजिए

सी चाची-क्यू?

अवी-रानी मेरे पास आएगी तो ,मैं तो पूरा 1 महीना घर मे रानी के साथ रहूँगा.फिर मेले का क्या होगा

सी चाची-ये भी सही है. पर मैं रानी को कहूँगी कि सुमन दीदी का ख़याल रखे

अवी-मैं आपको यहीं कहने वाला था

सी चाची-दीदी खुश हो गयी तो ...फिर शहनाई बजेगी

अवी-हाँ,

सी चाची-चल अब फ्रेश हो जा

अवी-मैं तो और आराम करूँगा

सी चाची-दोपहर तक सोने के बाद भी

अवी-हाँ,

सी चाची-थोड़ा घूम ले. देख कर आ जा कि मेले का काम ठीक चल रहा है कि नही.

अवी-वो रणजीतसिंघ देख लेगा

सी चाची-बुआ के घर जा रानी आई होगी .

अवी-रानी, मैं तो भूल गया.कोमल ने मुझे रानी को लाने के लिए कहा था.

सी चाची-फिर जा जल्दी

अवी-कोमल तो गुस्सा हो गयी होगी. सीधा रानी के पास जाता हू

सी चाची-जैसा करना है वैसा कर पर एक बार पूजा के घर होकर आना

अवी-पूजा बुआ के घर .

सी चाची-हाँ, राज तुम्हें बुलाने आया था. शायद स्वेता और सीतल आई होगी

अवी-हाँ, उन से भी मिलना होगा.

सी चाची-जा जल्दी

फिर मैं फ्रेश होकर शहर ,रानी को लेने चला गया.

 


477

फ्रेश होकर मैं ने रानी को कॉल किया. रानी मेरा इंतज़ार कर रही थी.

मैं रानी को लेने के लिए शहर चला गया.

हमारे गाओं जाने वाला रास्ता गाड़ियों और लोगो से भरा हुआ था.

मुझे शहर जाने मे ज़्यादा समय लग गया.

शहर मे मैं साइड रानी के घर चला गया.

रानी समान पॅक करके मेरा इंतज़ार कर रही थी.

अवी-गुस्सा हो

रानी-नही

अवी-सॉरी,तुम्हें इंतज़ार करवाया

रानी-मैं तो ज़िंदगी भर तुम्हारा इंतज़ार कर सकती हू

अवी-आंटी कहाँ है

रानी-मम्मी तो चली गयी.

मैं ने रानी को गले लगा लिया. रानी तो इसी का इंतज़ार कर रही थी.

अवी-बेडरूम मे चलें

रानी-कोमल

अवी-थोड़ी देर के लिए

रानी-चलो

बेडरूम मे आकर मैं रानी के साथ बेड पर लेट गया

रानी मेरे चेस्ट पर सर रख कर लेट गयी.

अवी-किस मिलेगा

रानी-नही मिलेगा.

अवी-क्यू नही मिलेगा.

रानी ने मुझे किस किया

रानी-तुम्हें पूछने की क्या ज़रूरत है.

अवी-सॉरी,

फिर हम थोड़ी देर बेड पर लेट कर किस करते रहे.

अवी-अब चलो ,नही तो कोमल मुझ पर गुस्सा हो जाएगी.

रानी-हाँ चलो

फिर मैं रानी को लेकर गाओं आ गया.

रानी को पहले अपने घर ले गया. वहाँ पर रानी ने थोड़ी देर चाची से बात की और फिर कोमल के घर चला गया.

कोमल-कितनी देर कर दी तुम ने

अवी-वो मेरी...

रानी-अवी समय पर आया था पर मुझे समान पॅक करने मे देर हो गयी.

रानी ने मेरी ग़लती को अपनी ग़लती बता दी.

कोमल-चलो मेरे कमरे मे,

अवी-मैं चलता हू

कोमल-रूको थोड़ी देर,

अवी-तुम दोनो समान सेट करोगी, मैं क्या करूँगा बैठ कर

कोमल-अब तुम बड़े हो गये ना. बड़े बड़े काम कर रहे हो, अब मेरे साथ क्यू रहोगे

अवी-कुछ भी, लो बैठ गया

कोमल-रानी तुम्हें पता है ,मेले का पूरा काम अवी ने किया है.

रानी-अवी ने

कोमल-हाँ, और कल पूजा भी अवी करेगा.

रानी-सच ,फिर तो अवी को बहुत काम होगा

कोमल-हाँ,

रानी-फिर तो अवी को तुम्हें जाने देना चाहिए. क्या पता कुछ ज़रूरी काम होगा

कोमल-ये तो मैं ने सोचा नही.अवी तुम्हें कोई काम है.

अवी-हाँ, पूजा बुआ के घर जाना था और फिर मंदिर मे

कोमल-फिर तो तुम्हें जाना चाहिए. तुम अपना काम करो. रानी है मेरे साथ बातें करने के लिए. और हाँ स्वेता दीदी और सीतल दीदी आई है.

अवी-पता है. स्वेता दीदी ने बुलाया है मुझे

फिर मैं रानी को कोमल के पास छोड़ कर पूजा बुआ के घर चला गया.

रानी मेरा कितना ख़याल रखती है. कोमल को मेरे लिए मना लिया

मैं पूजा बुआ के घर आ गया.

पूजा बुआ के घर महफ़िल सजी हुई थी.

स्वेता दीदी और सीतल दीदी के साथ पूनम दीदी भी आई थी

अवी-दीदी आप कब आई. मुझे बता दिया होता तो मैं लेने आ जाता

स्वेता दीदी-तुम्हें पहले इतना काम है. इस लिए हम ने तुम्हें नही बताया.

अवी-काम तो होता रहता है

स्वेता दीदी-वो छोड़ ये बता मेले का काम तुझे मिला है. वो कैसा चल रहा है

अवी-सब ठीक तक चल रहा है

स्वेता दीदी-सीतल वो पॅकेट लाना जो डॉक्टर ने दिया था.

सीतल दीदी पॅकेट लेकर आ गयी. जैसा सारा और ज़ोया ने बताया पॅकेट वैसा ही पॅक था. मतलब दीदी ने पॅकेट खोल कर नही देखा

मैं ने पॅकेट ले लिया

स्वेता दीदी-अवी क्या है इस मे ,जो डॉक्टर खुद देने आई थी.

अवी-छोटी चाची के लिए मेडिसिन है.वो यहाँ मिलना मुश्किल था तो मैं ने डॉक्टर को बोल कर बुला लिया(झूठ)

अवी-दीदी रोहन नही आया मेला देखने

स्वेता दीदी-वो कल आएँगे ,पूजा कर के कल ही वापस जाने वाले है.

अवी-इतनी जल्दी वापस जाएँगे

स्वेता-हाँ

मैं स्वेता दीदी के साथ बातें कर रहा था कि अंदर से एक शख्स हॉल मे आया.

ये ज्योति बुआ थी. मैं ज्योति बुआ देख कर नाराज़ हो गया. मुझे गुस्सा आ रहा था.

पर ज्योति बुआ ने हमारी मदद की थी इस लिए मैं ने खुद पे कंट्रोल किया.

मुझे पता था कि ज्योति बुआ मेला देखने नही ,चाचा से मिलने आई है.

मुझे चाचा को ज्योति बुआ से दूर रखना होगा.

दूर रखने की ज़रूरत नही है. खेत के घर मे तो मैं रहूँगा. और चाचा के पास दूसरी जगह नही है. मतलब मैं रिलॅक्स हो सकता हू.

इतने सब के होते हुए ज्योति बुआ अकेली चाचा को नही मिलेंगी.

थोड़ी देर स्वेता दीदी, सीतल दीदी, और पूनम दीदी से बात करने के बाद मैं नीता बुआ के घर चला गया.

राजेश भी आया था मेला देखने के लिए. पर वो सिर्फ़ 10 दिन के लिए आया था.

तीनो बुआ से मिलने के बाद मैं घर चला गया.

घर जाते ही छोटी चाची ने खेत वाले घर3 की चाबी मुझे दी.

पता नही छोटी चाची ने चाचा को कैसे मनाया होगा. चाचा ने तो खेत का घर3 ज्योति बुआ की चुदाई करने के लिए रखा होगा. पर जाने दो मुझे घर3 की चाबी मिल गयी.

 


478

मैं पॅकेट लेकर खेत वाले घर3 मे आ गया.

वाहा आकर मैं ने पॅकेट खोल दिया.

पॅकेट के अंदर सेक्स बढ़ाने वाली मेडिसिन, पेन किल्लर, कॉंडम, और कुछ ज़रूरत का समान था.

मैं ने सारा समान घर3 मे छुपा कर रख दिया.

और अपने जेब मे 2 3 कॉंडम रख दिए. क्या पता कब काम आ जाए.

घर3 को लॉक करने के बाद मैं खेत मे लोगो के रहने के लिए जगह बनाई थी वहाँ घूमने लगा. मेरे आते ही वहाँ पर देख रेख करने के लिए जो लड़को को रखा था वो मेरे पास गये. और मेरे साथ घूमते हुए लोगो के बारे मे बताने लगे.

मुझे लोगो मे इंटेरेस्ट नही था. जो था वो चुदाई मे था.

मैं अपने लिए शिकार ढूँढने लगा. रणजीतसिंघ तो मुझे नयी चूत देगा पर मुझे भी कुछ अपने लिए देखना होगा.

मैं खेत मे घूमने लगा. ज़्यादातर औरत और लड़किया चुदाई के लिए दिखा नही थी पर कुछ लड़किया और औरते ऐसी थी कि उनकी तरफ देखे बिना रह नही सका

मैं ने कुछ लड़कियो और औरतो को सेलेक्ट किया. इन मे से कुछ के साथ चुदाई ज़रूर करूँगा.

मैं खेत मे घूम रहा था कि मेरी नज़र कुवरसिंघ पर पड़ी.

ये यहाँ क्या कर रहा है. शायद अपने लिए शिकार ढूँढ रहा होगा.

मैं ने कुवरसिंघ की नज़र का पीछा किया.

कुवरसिंघ जिस औरत को देख रहा था उसे देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया.

क्या खूबसूरत थी, बदन पूरा भरा हुआ, सर से लेके पैरो तक गोरी, हर एक पार्ट पर्फेक्ट था. उसे देख कर लग रहा था कि इसकी शादी अभी अभी हुई है.

मुझे इसके साथ किस भी हालत मे चुदाई करनी है. पर ये तो कुवरसिंघ को भी पसंद आ गयी. कुवरसिंघ इसे पा कर रहेगा.

उस औरत को पता था कि कुवरसिंघ उसकी तरफ देख रहा है. वो चुप के से अपनी गर्दन घुमा कर कुवरसिंघ की तरफ देख रही थी.

ये तो मुझसे पहले कुवरसिंघ को मिल जाएगी. क्या करू, रणजीतसिंघ को बोलता हू वो कुछ कर सकता है.

मैं और कुवरसिंघ उसके तरफ देख रहे थे कि शायद उसके पति ने उसे आवाज़ दी. सविता इधर आना.वो अपने पति के पास चली गयी.

तो उसका नाम सविता है, मैं उसकी फॅमिली की तरफ देखने लगा. उसकी फॅमिली मे एक से बढ़कर एक पहलवान जैसे आदमी थे. ये तो बड़ी फॅमिली है.

सविता के जाने के बाद कुवरसिंघ अपने आदमियो के साथ चला गया और मैं खेतो मे घूमने लगा.

सविता के बाद जो लड़की मुझे पसंद आई मैं उसके पास चला गया.

अवी-सुनो

वो लड़की पलट गयी.

शीला-जी

अवी-कहाँ से हो

शीला-उसने अपने गाओं का नाम बताया.

अवी-मुझे जानती हो

शीला-आप वही है जो इस मेले का काम संभाल रहे है

अवी-हाँ, मेरा नाम अवी है और तुम्हारा

शीला-मैं शीला

अवी-प्यारा नाम है,

शीला-शुक्रिया

अवी-वैसे तुम्हें वहाँ कोई दिखता तो नही है

शीला-नही. इस बार यहाँ पर सब कुछ नया है

अवी-हाँ,तुम मेला का मज़ा लो. और कोई दिखता हो तो मुझे बता देना

शीला-जी

वो अपनी सहेली के पास चली गयी.और उनसे बातें करने लगी.

ये क्या पागलों की तरह उस से बात की .थोड़ा ठीक से तो बात कर लेता.

शीला अपनी सहेली के साथ हँस कर बात कर रही थी. शायद शीला कुछ बता रही थी.

शीला मेरे बारे मे बता रही थी. अगर अच्छी बातें बता रही है तो मेरे लिए अच्छा है और मुझ पे हँस रही है तो मैं गया काम से

खेतो मे घूमने के बाद मैं मंदिर चला गया.

पंडित जी कल की पूजा की तय्यारी कर रहे थे.

पंडिताइन पंडित की मदद कर रही थी.

मेरे आते ही पंडिताइन ने मेरी तरफ देख कर स्माइल की और अपने काम मे लग गयी.

थोड़ी देर बाद रणजीतसिंघ आ गया.

रणजीतसिंघ के साथ मिलकर एक बार सब को अपना अपना काम बता दिया.

मेले मे घूम कर सब से पूछताछ की, फिर जो दुकान लगे थे उसके बारे मे जानकारी ली.

इनस्पेक्टर के साथ मिलकर मेले के बारे मे बात चीत की.

फिर रणजीतसिंघ ने मुझे हवेली चलने को कहा.

रणजीतसिंघ-चलो हवेली चलते है

अवी-आज नही आ सकता,

रणजीतसिंघ-क्यू?

अवी-कल पूजा हैना

रणजीतसिंघ-हाँ, ठीक है कल आ जाना तुम्हारे लिए गिफ्ट है

अवी-मैं ने सोचा है कि 1 महीना मैं खेत मे जो हमारा घर3 है वहीं रहूँगा.

रणजीतसिंघ-खेत मे क्यू, हवेली चलो तुम्हें खुश कर दूँगा.

अवी-खेत मे जो हम ने लोगो के रहने के लिए जगह बनाई है. वहाँ लोगो का ध्यान तो रखना होगा. इसी लिए मैं खेत मे रहूँगा

रणजीतसिंघ-ये तो तुम ने अच्छा सोचा. पर तुम्हारा गिफ्ट

अवी-खेत मे लेकर आ जाओ

रणजीतसिंघ-वो गिफ्ट चाहिए तो हवेली आना होगा.

अवी-फिर तो 1 महीना रुकना होगा मुझे

रणजीतसिंघ-कोई बात नही. वो गिफ्ट बाद मे दूँगा.

अवी-आप बस एक गिफ्ट से काम निपटा रहे हो

रणजीतसिंघ-वो गिफ्ट खास है. तुम्हें खेत मे दूसरे गिफ्ट दूँगा. और कुछ गिफ्ट साथ मे खोलेंगे .

अवी-फिर तो मज़ा आएगा. आपके साथ रह कर मैं भी कुछ सीख जाउन्गा

रणजीतसिंघ-हवेली की जगह खेत मे मज़ा करेंगे. पर

अवी-पर क्या

रणजीतसिंघ-कल का दिन निकलने के बाद, कल पूजा पर ध्यान देंगे, उस के नेक्स्ट दिन से मज़ा करेंगे

अवी-ये आपने सही कहा. (ये हवेली पे कौनसा गिफ्ट देने वाला है. देखते है 1 महीने बाद क्या मिलता है)

रणजीतसिंघ-कल पूजा मे मिलते है

रणजीतसिंघ हवेली चला गया और मैं घर चला गया.

चाची बूआयों के साथ मिल कर पूजा की तय्यारी करने लगी. मैं भी मदद करने वाला था पर चाची ने मुझे सोने को कहा.

कल से मेला शुरू होगा.

 


479

आज से मेला शुरू हो रहा है.

चाची ने मुझे सुबह 4.00 बजे उठाया,

पूजा सुबह 6.00 बजे शुरू होगी. पर आज पहला दिन था इस लिए हम सब सुबह 4.00 बजे उठ गये.

सब अपनी अपनी तय्यारी मे लग गये.

बड़ी चाची घर मे जो मंदिर था वहाँ पूजा कर रही थी.

सीमा चाची और छोटी चाची पूजा का समान ले रही थी. रति बचो को देख रही थी.

पर चाचा सो रहे थे.

मैं फ्रेश होने चला गया. छोटी चाची ने मुझे पूजा मे पहनने वाले कपड़े दिए.

छोटी चाची ने मुझे एक धोती और एक सफेद गमछा दिया.

मुझे धोती पहन कर पूजा करनी थी.

ये मेरे फॅमिली की परंपरा थी. मुझे तो धोती पहननि पड़ेगी.

मैं 5.00 बजे फ्रेश हो गया.

बुआ और मेरी बहने भी तय्यार हो कर आ गयी.

राज के पापा मेले मे नही आए थे. अगले साल दीदी की शादी होगी. और राज के पापा ने डिसाइड किया था कि वो अब यही पर सेट्ल होकर काम करेंगे. जिस से उनका इस साल गाओं आना पासिबल नही था. चाचा भी उठ कर फ्रेश होने चले गये.

तीनो बुआ चाची की मदद करने लगी.

मैं अपने कमरे मे बैठ कर इंतज़ार कर रहा था कि छोटी चाची मुझे बुलाने आएगी.

छोटी चाची मुझे बुलाने आ गयी. छोटी चाची मुझे घर मे जो मंदिर था वहाँ लेकर गयी. और ज़मीन पर रंगोली के बीच मे बैठा दिया.

सब मुझे धोती मे देख कर हँस रहे थे.

मैं ने एक नज़र सब पे डाली.

बुआ और चाची अपना काम कर रही थी.

मैं ने स्वेता और सीतल दीदी की तरफ देखा. दोनो ने साड़ी पहनी थी. दोनो दुल्हन की तरह सजी हुई थी.

मैं रानी को देखना चाहता था, उसने क्या पहना है.

छोटी चाची ने जो साड़ी रानी को दी थी जब पहली बार रानी हमारे घर आई थी. वही साड़ी रानी ने पहनी थी. मैं तो रानी को साड़ी मे देखता रह गया.

कोमल ने भी साड़ी पहनी थी. रानी और कोमल दोनो बहनों की तरह दिख रही थी.दोनो मे फरख करना मुश्किल था.

फिर बड़ी चाची ने मुझे पूजा के लिए तय्यार किया.

फिर 5.30 पर हम मंदिर की तरफ निकल गये.

ठाकुर ने हमारे लिए कार भेजी थी जो 1 महीना हमारे यहाँ रहने वाली थी.

हम सब 2 कार मे बैठ कर मंदिर आ गये.

मंदिर मे लोगो की भीड़ लगी हुई थी.बहुत लंबी लाइन लगी हुई थी. हमे कार थोड़ी दूर रोकनी पड़ी.

फिर हम पैदल मंदिर की तरफ जाने लगे. मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई आवाज़ दे रहा है. पर मैं ने उस पर ध्यान नही दिया.

रोहन की फॅमिली भी आ चुकी थी. वो मंदिर मे हमारा इंतज़ार कर रहे थे.

मैं ने एक बार सब पे नज़र घुमाई. लोगो की भीड़ ज़्यादा थी. पर सब अच्छे से संभाल लिया था. जिस की वजह से कोई परेशानी नही हो रही थी.

हम मंदिर मे आ गये.

ठाकुर की फॅमिली भी मंदिर मे आ गयी.

ठकुराइन तो मुझे गुस्से से देख रही थी. मैं ने ठकुराइन पर ध्यान नही दिया .

एक तरफ ठाकुर की फॅमिली खड़ी थी और दूसरी तरफ हमारी.

मेरे एक तरफ रानी खड़ी थी. रानी के पीछे चाची खड़ी थी.

छोटी चाची ने जान बुज़ कर रानी को मेरे एक तरफ खड़ा किया था. ताकि मैं और रानी साथ मे पूजा कर सके

मेरी दूसरी तरफ कोमल खड़ी थी.कोमल के पीछे बुआ खड़ी थी.कोमल रानी की तरह मेरे एक तरफ खड़ी थी.

पंडित जी ने पूजा शुरू की

पूजा 2 घंटे चलने वाली थी.

पंडित जी ने मुझसे और रणजीतसिंघ से पूजा करवानी शुरू की.

पंडित जी जैसा जैसा करने को बोल रहे थे हम वैसा वैसा कर रहे थे.

मैं और रणजीतसिंघ साथ मे पूजा कर रहे थे फिर सब ये क्यू कह रहे कि पहले ठाकुर पूजा करेगा और बाद मे मैं.

धीरे धीरे पूजा आगे बढ़ने लगी.

फिर पंडित जी ने हमारे हाथ मे पूजा की थाली दी.

रणजीतसिंघ के हाथ मे जो थाली थी उसे रणजीतसिंघ की बीवी ने भी हाथ लगाया था. मतलब वो दोनो पूजा कर रहे थे.

मेरे हाथ मे जो थाली थी उसे एक तरफ से रानी और दूसरी तरफ से कोमल ने पकड़ लिया.

मेरे हाथ मे पूजा की थाली आते ही कोमल ने हाथ लगाया था. पर रानी खड़ी थी.

छोटी चाची ने रानी को इशारा कर के पूजा की थाली पकड़ने को कहा.

पूजा फिर शुरू हो गयी.

पंडितजी हमे बताते गये हम वैसे करते गये.

पूजा ख़तम होते मेले की शुरुआत हो गयी.

(पूजा मे बहुत कुछ था पर वो बता नही सकता. )

पूजा ख़तम होते ही पंडित जी ने हमे भगवान का आशीर्वाद लेने को कहा.

पहले रणजीतसिंघ अपनी बीवी कामिनी के साथ भगवान के दर्शन किए.

फिर मैं गया. मेरे साथ रानी और कोमल थी. रानी का तो समझ सकता था पर कोमल?

फिर सब ने एक एक करके दर्शन कर लिए.

फिर पंडित जी ने लोगो को एक एक करके दर्शन करने को कहा

लोग एक एक करके भगवान के दर्शन करने लगे.

ठाकुर की फॅमिली और मेरी फॅमिली दोनो मंदिर मे जो हमारे लिए जगह बनाई थी वहाँ जाकर बैठ गये.

मैं बैठने की जगह ,काम ठीक चल रहा है कि नही ये देख रहा था.

लोगो के लिए जो प्रषाद बनाया था मैं वहाँ चला गया. और लोगो को अपने हाथ से प्रसाद देने लगा.

सब कुछ अच्छे से चल रहा था.

प्रसाद लेने बहुत से पहचान वाले आए थे पर मैं ने उन पर ध्यान नही दिया.

धीरे धीरे लोग दर्शन कर रहे थे और मैं उनको प्रषाद दे रहा था.

पूजा ख़तम हो कर 2 घंटे हो गये पर लोगो की लाइन ख़तम होने का नाम नही ले रही थी.

मैं ने और 1 घंटा लोगो को प्रषाद दिया और फिर लड़को को काम पर लगा कर अपनी फॅमिली मे पास चला गया.

वहाँ पर पूजा की बातें हो रही थी. रानी और कोमल के चेहरे पे एक जैसी चमक थी.पता नही ये किस बात की चमक थी. रानी का तो समझ सकता हू पर कोमल

फिर थोड़ी देर मंदिर मे बैठने के बाद हम सब घर आ गये.

पूजा बुआ रोहन की फॅमिली को अपने साथ अपने घर ले गयी.

रानी और कोमल मेरे साथ मेरे घर आ गयी

मैं घर आ कर कपड़े बदल कर बाइक लेकर फिर मंदिर चला गया.

 


480

कपड़े चेंज करने के बाद मैं वापस मंदिर मे आ गया.

सब काम ठीक चल रहा था.

मैं मंदिर के पास जो चोकी बनाई थी वहाँ जाकर लोगो पर नज़र रख रहा था.

पहला दिन होने से भीड़ ज़्यादा थी. कुछ लोग इस भीड़ का फ़ायदा उठा रहे थे.

औरतों और लड़कियो के बदन को दबा रहे थे. कुछ लोग चुप के से लड़कियो की गंद दबा देते. कुछ लड़किया इसका मज़ा ले रही थी और कुछ लड़किया एक जोरदार थप्पड़ मार देती.

सब लोग अपने हिसाब से मेले का मज़ा ले रहे थे.

मैं भी अपने लिए शिकार ढूँढ रहा था.

इतनी भीड़ मे मुझे सविता कही दिख नही रही थी. मैं प्रसाद वाली जगह पर आकर बैठ गया.

सब यहाँ पर प्रषाद लेने आते है.

समय निकल रहा था. पर ना सविता दिख रही थी और ना शीला दिख रही थी.

करीब 1 घंटे के बाद शीला प्रसाद लेने आ गयी.

शीला-क्या मुझे प्रसाद मिलेगा

मैं ने आवाज़ की डायरेक्षण मे देखा .ये तो शीला थी.

अवी-सब को मिलता है. तुम्हें तो ज़्यादा मिलेगा

शीला-ज़्यादा क्यू

अवी-तुम्हें मैं पहचानता हू ना इस लिए

शीला-तुम्हें तो मेरे नाम के अलावा कुछ नही पता

अवी-तो बता दो

शीला-मैं किसी को भी अपने बारे मे नही बताती.

अवी-फिर किसे बताती हो

शीला-जो अच्छा लगता है उसे बताती हू

अवी-मतलब मेरा नंबर नही आएगा

शीला-हमे मिले हुए एक दिन ही हुआ है.इतनी जल्दी किसी का नंबर नही आता ,पर क्या पता कल मेले के बता भी दूं,

और इतना कह कर शीला चली गयी.

शीला को कल मेले मे देख लूँगा. और मैं वापस अपने काम मे लग गया.

थोड़ी देर बाद एक औरत मेरे पास आकर प्रसाद माँगने लगी.

शोभा-सिर्फ़ लड़कियो को प्रषाद दोगे

अवी-क्या मतलब

शोभा-मुझे भी प्रसाद दो

अवी-आप ले पाओगी

शोभा-लेने के लिए सब कुछ ले सकती हू

अवी-फिर तो आपको देना होगा

शोभा-दो ना जल्दी ,

मैं ने उस औरत को प्रसाद दे दिया.प्रसाद लेकर जाने लगी.

अवी-काकी अपना नाम तो बता दो ,दुबारा प्रसाद देना हो तो जल्दी दे दूँगा.

शोभा-मेरा नाम शोभा है.

शोभा अपना नाम बता कर चली गयी.

शोभा का बदन देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है.

देखते है अगर दुबारा मिली तो कुछ बन पाएगा. पर इतनी भीड़ मे कहाँ मिलेगी वो. मुझे तो पता भी नही वो कहाँ रुकी है.

मैं फिर से अपने काम मे लग गया.

मेरी तरह मेरे साथ जो काम कर रहे थे वो लड़के भी चान्स मार रहे थे.

पर मैं वहाँ होने से उनका काम बिगाड़ रहा था.

ज़्यादा तर लड़किया मेरे साथ बातें कर रही थी.

मुझे भी लग रहा था कि ये लड़के इतना काम रहे है इनको भी थोड़ा इनाम मिलना चाहिए.

वैसे अब मेला शुरू होने मे 2 घंटे रह गये थे.

मैं इधर उधर देखने लगा. जब कोई अच्छी लड़की या औरत आती तभी मैं आगे आकर उनको प्रसाद देता.

मैं अपना काम कर रहा था कि रिया प्रसाद लेने आ गयी.

रिया ने जब मुझे वहाँ देखा तो वो मुझे गुस्से से देखने लगी.

मैं रिया को मिले हुए लगभग 7 महीने हो गये थे. बिना कुछ बोले मैं ने उसके साथ चुदाई करना बंद किया था.

मुझे रिया से बात करनी थी पर यहाँ बात करना ठीक नही होता .रिया इसी गाओं की है यहाँ बात की तो गड़बड़ हो जाएगी.

मैं सोच रहा था कि रिया प्रसाद लेके गुस्से से चली गयी.

मेले के बाद रिया से बात करूँगा. उसे सॉरी कहूँगा.

मैं रिया के बारे मे सोच रहा था कि रणजीतसिंघ मंदिर आ गया.

रणजीतसिंघ-ये क्या कर रहे हो

अवी-लोगो को प्रसाद दे रहा हू

रणजीतसिंघ-ये सब लड़को को करने दो.

अवी-आज पहला दिन है तो प्रसाद दे रहा हू .कल से लड़को को लगा दूँगा

रणजीतसिंघ-मान गये तुम्हें, चलो अब घर जाकर मेले के लिए तय्यार हो कर आ जाओ

अवी-हाँ ,मेले मे मिलते है

रणजीतसिंघ-अब जाओ ना जल्दी

अवी-आप चलिए मैं लड़को को बता कर आता हू

रणजीतसिंघ वापस हवेली चला गया. और मैं लड़को के पास आ गया.

मैं ने लड़को को बता दिया कि मैं जा रहा हू अब तुम संभाल लो

मैं लड़को को बता रहा था कि पीछे से एक आवाज़ आई.

लड़की-मुझे प्रसाद नही दोगे

मैं उस आवाज़ वाली लड़की की तरफ देखता रहा. मुझे ये कुछ जानी पहचानी लग रही थी.

 


481

मैं फिर से अपने काम मे लग गया.फिर से एक आवाज़ ने मेरा ध्यान अपनी तरफ खिचा

मोना-मुझे प्रसाद नही दोगे

मैं उस आवाज़ वाली लड़की की तरफ देखता रहा. मुझे ये कुछ जानी पहचानी लग रही थी.

अवी-क्या हम पहले भी मिल चुके है

मोना-हँसने लगी,बहुत बार मिले है

अवी-(मिले है पर मुझे याद नही आ रहा) आप बता सकती है हम कहाँ मिले थे.और आप का नाम क्या है

मोना-हम तुम्हारे आम के भागीचे मे मिले थे. अब नाम तुम खुद पता कर लो

अवी-( आप के भागीचे सीतल नही, रिया नही,कमला काकी नही.अरे ये तो मोना है. पर 9 महीने मे ये इतनी बदल कैसे गयी.ये मेकप,इतनी सारी ज्यूयल्री, मॉर्डन ड्रेस, इतनी बदल कैसे गयी.) तुम मोना हो ना

मोना-हाँ

अवी-इतनी बदल कैसे गयी तुम, क्या कुबेर का खजाना हाथ लग गया क्या.

मोना-ये तो लंबी कहानी है.

अवी-चलो फिर गाओं की तरफ चलते हुए बता दो

मोना-पहले प्रसाद तो दो

मोना को प्रसाद देने के बाद मैं मोना के साथ गाओं की तरफ निकल पड़ा.

वैसे भी दोपहर मे मेला शुरू होने वाला था. वहाँ पर फॅमिली को लेकर आना होगा.

मैं ने बाइक मंदिर के पास रहने दी और मोना के साथ बातें करते हुए गाओं की तरफ जाने लगा

अवी-अब बताओ, गाओं की लड़की इतनी मॉर्डन कैसे हो गयी.

मोना-तुम्हें शुरू से बताती हू. किसी को बताना मत

अवी-नही बताउन्गा.

मोना-तुम्हारे साथ चुदाई करने के बाद मेरी सास ने मुझे शहर भेज दिया

अवी-तुम्हारी सास को पता चल गया था कि तुम मेरे साथ चुदाई करती हो ,इसी लिए तुम्हें शहर भेज कर मेरे साथ चुदाई करने लगी.

मोना-तो ये बात थी. जाने दो मेरे लिए तो शहर जाना से फ़ायदा हुआ

अवी-वो कैसे

मोना-मेरा पति शहर मे एक फॅक्टरी मे काम करता था.पैसे बहुत कम मिलते थे. इस लिए मैं भी काम करने लगी.

उसी फॅक्टरी के मालिक के घर मैं नौकर बन गयी. घर का काम करने लगी.

वहाँ पर सिर्फ़ मालकिन और मालिक रहते थे. उनकी सिर्फ़ एक बेटी थी. वो अमेरिका मे रहती है.

मालिक को हफ्ते मे एक बार चुदाई चाहिए थी. और मालकिन को हर दिन. मालकिन हमेशा मालिक से झगड़ा करती. मालिक मालकिन से इस लिए एक बार चुदाई करता था क्यू कि मालिक को नयी चूत चाहिए थी. मालकिन की चूत मारने मे उनको इंटेरेस्ट नही था.

मैं इस बात को जान गयी. और मालिक को अपने तरफ अट्रॅक्ट करने लगी.

मालिक तो ठरकी था. वो मेरे पीछे जल्दी लग गया.

मैं ने ये बात अपने पति को बताई. फिर हम ने सोचा कि मैं मालिक के साथ और मेरा पति मलिकिन के साथ चुदाई करके पैसे कमा सकते है.

मैं ने पहले मालिक को फसाया. वो जल्दी मेरी तरफ अट्रॅक्ट हो गया. और मैं उसके साथ चुदाई करने लगी.

मालिक को मैं ने इतना खुश किया कि वो मुझ पर पानी की तरह पैसा बहाने लगा.

फिर मालिक को कह कर अपने पति को घर पे काम करने पे लगा दिया.

और फिर मैं ने मालकिन से बात करके उनको समझा कर अपने पति के साथ चुदाई करने को तय्यार किया.

मालकिन अपनी चूत की खुजली मिटाने के लिए मेरे पति को जितना माँगे उतना पैसा देती है.

इस तरह हम पैसे कमा रहे है.हम ने इतने पैसे कमा लिए कि हम ने शहर मे एक खुद का छोटा सा घर खरीद लिया.

पर उस घर मे मैं अब तक रहने नही गयी.मैं और मेरा पति मालिक के घर मे रहते है.

तुम्हें पता है अब हम चुदाई कैसे करते है

अवी-मुझे कैसे पता होगा

मोना-मैं बताती हू. रात मे मालिक उपर वाले कमरे मे आकर मुझे बुला कर मेरे साथ चुदाई करते है और उसी समय मेरा पति मालकिन की चुदाई करता है.

अवी-तुम्हारे तो मज़े ही मज़े है.

मोना-हाँ, 2 लंड और बहुत सारे पैसे, यहाँ गाओं मे रहती तो खेतो मे काम करते रहना पड़ता

अवी-अब वापस क्यू आ गयी हो

मोना-एक काम है इस लिए मजबूरी मे आना पड़ा

अवी-मजबूरी मे

मोना-अपने गाओं का ठाकुर तो पता होगा तुम्हें

अवी-हाँ पता है

मोना-उनका जो छोटा बेटा है

अवी-कुवरसिंघ

मोना-हाँ वही. वो मेरे मालिक का दोस्त है.

अवी-कुवरसिंघ को खुश करने आई हो

मोना-नही. रूको तुम सब बताती हू किसी को बताना मत

अवी-मैं किसी को क्यू बताउन्गा

मोना-एक दिन मालकिन पार्टी के लिए बाहर गयी थी. मालिक ने कुवरसिंघ को घर बुलाया .फिर मालिक ने शराब के नशे मे कुवरसिंघ को मेरे और अपने रिश्ते के बारे मे बता दिया.

उसके बाद कुवरसिंघ ने मालिक और मेरा वीडियो रेकॉर्ड कर लिया. अब कुवरसिंघ मेरे मालिक को ब्लॅकमेल कर रहा है.

अवी-ब्लॅकमेल

मोना-हाँ, वो कहता है उसे 30 लाख चाहिए नही तो वो मालकिन को सब कुछ बता देगा.

अवी-बताने दो ना, मालकिन भी तो तुम्हारे पति के साथ चुदाई करती है ये बात तुम अपने मालिक को बता दो.

मोना-नही बता सकती, अगर ऐसा किया तो मालिक को लगेगा कि हम पति पत्नी उनको फसा रहे है.या फिर ऐसा ही सोचा जा सकता है कि कुवरसिंघ से हम मिले हुए है. क्यू कि हम कुवरसिंघ के गाओं से है.

अवी-ये भी हो सकता है. फिर क्या हुआ

मोना-होना क्या है ,मालिक पैसे देने को तय्यार है पर इस ठाकुर का भरोसा नही.वो ठाकुर है फिर इतने कम पैसे क्यू माँग रहा है. कही ऐसा तो नही पहले 30 लाख माँग कर देख रहा हो और पैसे लेने के बाद फिर ब्लॅकमेल कर के ज़्यादा पैसे माँग ले

अवी-हाँ, कुवरसिंघ बहुत कमीना है.पर तुम क्या करने आई हो (सभी फॅक्टरी रणजीतसिंघ देखता है. कुवरसिंघ के अयाशियों के लिए उसको पैसे देना बंद किया होगा)

मोना-मालिक ने कहा कि कुवरसिंघ के साथ चुदाई करके कुछ पता लगाओ कि वो क्या करने वाला है. और अगर टेप मिल गयी तो चुरालेना

अवी-कुवरसिंघ को तो पता है तुम अपने मालिक के साथ चुदाई करती हो

मोना-तो क्या हुआ ,जब तुम मुझे पहचानने मे ग़लती कर सखते हो ,तो कुवरसिंघ ने सिर्फ़ एक बार देखा है.

अवी-तो इसी लिए तुम इतनी सज धज के आई हो

मोना-हाँ,

अवी-और तुम कुवरसिंघ के साथ चुदाई करोगी.

मोना-हां

अवी-उस से टेप के बारे मे पूछ लोगि

मोना-हाँ

अवी-और वो बता देगा.ऐसा तुम्हें लगता है

मोना-हां

अवी-तुम कुवरसिंघ के बारे मे कुछ नही जानती. उसे इस बात की खबर लग गयी तो वो तुम्हारा खून कर देगा

मोना-ये पता है मुझे

अवी-मेरी मानो उसे पैसे दे दो. चुदाई करने के बारे मे भूल जाओ

मोना-मालिक पैसे देने को तय्यार है. पैसे मेरे पास है. मैं सिर्फ़ एक कोशिस करूँगी. अगर काम बन गया तो टेप मालिक को दूँगी और पैसे खुद रख लूँगी.

अवी-तुम तो दिमाग़ का इस्तेमाल करने लग गयी हो

मोना-करना पड़ता है

अवी-पर एक बात कहूँगा ,ये काम बहुत मुश्किल है.

मोना-पता है. पर हो गया तो मुझे 30 लाख मिलेगे.

अवी-पर ये तो तुम अपने मालिक के साथ धोका कर रही हो

मोना-धोका नही,मदद

अवी-मदद कैसे

मोना-अगर टेप मिल गया तो कुवरसिंघ दुबारा मलिक को परेशान नही कर पाएगा. और मुझे पैसे मिल जाएँगे.और मालिक मुझ पर खुश हो जाएगा.

अवी-ये तो अच्छा प्लान है. पर तुम मेले के समय क्यू आई

मोना-कुवरसिंघ मेले के समय चुप चाप तो नही बैठा रहेंगा. वो मेले का फ़ायदा ज़रूर उठाएगा. वो शिकार की तलाश मे रहेगा

अवी-और तुम उसके साथ चुदाई करोगी

मोना-हाँ

अवी-(मोना का प्लान तो बहुत बकवास है, कुवरसिंघ इतनी आसानी से मोना के जाल मे नही फसेगा. कुवरसिंघ से टेप हासिल करना है तो पहले उसका भरोसा जीतना होगा. तब जाके वो टेप वापस करेगा) मोना

मोना-हाँ

अवी-अगर मैं तुम्हारी मदद करू तो

मोना-मेरी मदद ,

अवी-हां तुम्हारी मदद

मोना-पर तुम क्यू मेरी मदद करोगे .

अवी-मुझे भी कुवरसिंघ से अपना हिसाब बराबर करना है(रति का रेप और हवेली मे मेरा मज़ाक उड़ाया उसका हिसाब बराबर करना है)

मोना-पर तुम कैसे मदद करोगे

अवी-वो सोचा नही पर कुछ सोच लूँगा. तुम अकेली ये काम नही कर सकती.तुम्हें मेरी मदद लेनी चाहिए

मोना-कुछ सोचते हुए, ठीक है

अवी- और देखो काम हो गया तो मुझे उस पैसे मे से 15 लाख देना होगा.

मोना-15 लाख ,रहने दो मैं खुद कर लूँगी.

अवी-सोच लो . तुम कुवरसिंघ के साथ पंगा ले रही हो. और तुम ने देखा होगा कि मैं अब पहले वाला अवी नही रहा. अब मेरा उठना बैठना ठाकुर के साथ होता है. मेरी मदद लेने से तुम्हारा काम जल्दी हो जाएगा. मतलब हो जाएगा. तुम अकेली करोगी तो काम होना ना के बराबर है.और तुम्हें 15 लाख तो मिल रहे है.

मोना-(अवी कह तो सही रहा है. इसकी मदद से काम हो जाएगा. जाने दो मुझे 15 लाख तो मिल जाएँगे) ठीक है पर पैसे काम होने के बाद मिलेंगे

अवी-ठीक है.

मोना-पर तुम ने बताया नही कि तुम क्या करने वाले हो

अवी-तुम्हें कल बताउन्गा.आज मेले मे जाना है.

मोना-ठीक है. मेरा नंबर ले लो

अवी-मोबाइल लिया है. चलो दो नंबर

हम ने नंबर एक्सचेंज किए

अवी-ये बात किसी को बताना मत

मोना-मैं ने अपने पति को भी नही बताया

अवी-पर मुझे तो बताया

मोना-मुझे पता था कि तुम किसी को नही बताओगे. और तुम मेरे काम भी आ सकते हो इसी लिए बताया.

अवी-तुम्हारा भाई भी तो काम आ सकता है ,क्या उसे भी बताया

मोना-मेरा भाई, वो तो चूत देख कर सब उगलने वालो मे से है. उसे बता दिया तो पूरे गाओं को पता चल जाएगा.

अवी-(जितने कम लोगो को पता है उतना अच्छा होगा) ठीक है कल इसी समय मंदिर मे मिलना ,तब तुम्हें बताउन्गा कि क्या करना है.( रात मे कुछ सोच लूँगा)

मोना-ठीक है

फिर मोना अपने घर चली गयी और मैं अपने घर चला गया.

 


482

मोना के साथ बातें करने के बाद मैं घर चला गया.

घर पर सब मेरा इंतज़ार कर रहे थे मेले मे जाने के लिए.

रोहन की फॅमिली आने की वजह से चाची और बुआ मेले मे आने वाली नही थी.वैसे भी चाची ने मेले मे आने से मना किया था.मेला तो बच्चों के लिए होता है.

चाचा भी कही दिख नही रहे थे.

मेरी बहनें सज धज कर मेरा इंतज़ार कर रही थी.

रोहन और सोहन भी हमारे साथ मेला देखने आ रहे थे.

मतलब स्वेता दीदी और सीतल दीदी रोहन और सोहन के साथ रहेगी.

इस का मतलब कविता लीना,राज, राजेश ,कोमल और रानी और पूनम दीदी मेरे साथ मेला देखेंगी.

मैं घर आकर पहले फ्रेश हो गया फिर रोहन और सोहन के साथ बातें करने लगा.

फिर हम 3.00 बजे मेला देखने के लिए निकल पड़े

ठाकुर ने जो कार हमे दी थी उसी मे बैठ कर हम मेले मे पहुँच गये

हम मेले मे आते ही 2 ग्रूप मे डिवाइड हो गये.

स्वेता दीदी और सीतल दीदी रोहन और सोहन के साथ मेले मे घूमने लगे.

रोहन और सोहन बस एक दिन रुकने वाले थे. जिस की वजह से पूनम दीदी ने स्वेता दीदी और सीतल दीदी को उनके साथ घूमने जाने दिया.

हम ने एक बड़ा ग्रूप बना लिया .पर इस मे हम 4 4 लोगो मे ग्रूप बना कर मेला देखने लगे.

कविता लीना राजेश और पूनम दीदी साथ साथ चलने लगे.

मैं कोमल रानी और राज के साथ उनके पीछे पीछे जाने लगा.

मेले मे उम्मीद से ज़्यादा भीड़ थी. जिस की वजह से हम ग्रूप बना कर चल रहे थे.

मेले मे बड़े बड़े झूले, खाने पीने की दुकान, खरीदी करने के लिए दुकान थी.

मुझे मेले मे ज़्यादा तर हर लोग जानते थे. मेले का काम जो मेरी तरफ था.

राज कविता और लीना ने सब से पहले बड़े झूले मे जाने का फ़ैसला किया.

झूले मे बैठने के लिए मैं टिकेट लेने चला गया. मुझे टिकेट मिल गयी पर वो झूले वाला मुझसे पैसे नही ले रहा था.

मुझे पता है कि यहाँ पर कोई मुझसे पैसे नही लेगा.

हमे तो लाइन मे भी नही लगना पड़ा. झूले वाले ने हम झूले मे बैठा दिया.

पूनम दीदी का ग्रूप एक साथ और मेरा ग्रूप दूसरे बॉक्स मे बैठ गये.

मेरे बाजू मे कोमल बैठी और सामने राज के साथ रानी बैठ गयी.

झूले ने चक्कर लगाना शुरू किया.

झूला उपर जाते ही कोमल ने मेरे हाथ को कस के पकड़ लिया .और मेरे साथ पूरे गाओं को देखने लगी.

मुझे झूले मे कोई इंटेरेस्ट नही था. मैं तो रानी की तरफ देख रहा था.

रानी भी मेरी तरफ देख कर झूले का मज़ा ले रही थी.

हम दोनो एक दूसरे की तरफ देख रहे थे. और मैं अपने पैरो से रानी के पैरो के साथ मस्ती भी कर रहा था.

कोमल से छुप कर रानी के साथ मस्ती करने मे मज़ा आ रहा था.

मैं ने फिर कोमल की तरफ देखते हुए ज़ोर से कहा. वो देखो हमारे खेत

कोमल और राज खेत की तरफ देखने लगे.रानी भी आगे आकर खेत की तरफ देखने लगी.

रानी के आगे आते ही मैं ने रानी के गालो पर किस किया.कोमल और राज तो खेत देख रहे थे.

रानी मेरी चालाकी पे हँसने लगी.

मेरे झूले मे बैठने से वो झूले वाला रोकने का नाम नही ले रहा था.

मैं ने उस झूले वाले को रोकने को कहा .

मेले मे पहले झूले का चक्कर लगाने मे मज़ा आया.

रानी को किस करने से झूले का मज़ा डबल हो गया.

फिर हम सब मेले मे घूमने लगे.

मेले मे 5 बड़े झूले थे. आज एक झूले का मज़ा लिया कल दूसरे झूले का मज़ा लेंगे .

हम मेले मे घूमते हुए हल्का नाश्ता करने लगे.

हमारे लव बर्ड तो अपने तरीके से मेले का मज़ा ले रहे थे.

हम मेले मे घूम रहे थे की सामने लड़कियो को जो पसंद होता है उसकी दुकान थी.

हमारे ग्रूप मे ज़्यादा लड़किया होने से हम चूड़ियाँ (बॅंगल) की दुकान मे चले गये.

सब रंग बिरंगी चूड़ियाँ देखने लगी.

कविता और लीना तो चूड़ियों पर टूट पड़ी. पूनम दीदी भी कहाँ पीछे रहने वाली थी. भले पूनम दीदी शहर मे रहती हो पर मेले की चूड़ियों की बात ही अलग होती है. हर किसी को अपनी तरफ अट्रॅक्ट करती है

मैं तो हमेशा रानी और कोमल के बीच मे खड़ा रहता था .मतलब जहाँ मैं खड़ा रहूं उसके एक तरफ रानी और दूसरी तरफ कोमल खड़ी हो जाती.

मुझे कुछ चूड़ियाँ बहुत पसंद आ गयी.मैं ने एक चूद्डियो को हाथ लगा कर देखा था कि कोमल ने उसी चूड़ी को अपने लिए खरीद लिया.

मैं ने कोमल का ध्यान दूसरी तरफ होते ही कुछ चूड़ियाँ उठाकर रानी जिस तरफ थी उस हाथ मे ले ली.

और साथ मे कोमल जिस तरफ थी उस हाथ मे भी कुछ चूड़ियाँ ली.

हाथ मे चूड़ियाँ लेते ही मैं ने रानी के हाथो मे वैसे ही कोमल से छुप कर चूड़ियाँ पहना दी.

रानी चूड़ियाँ देख कर खुश हो गयी.

मेरे दूसरे हाथ की चूड़ियों को कोमल का हाथ लग गया.

कोई गड़बड़ ना हो इस लिए मैं ने कोमल के हाथो मे भी चूड़ियाँ पहना दी. मेरे इस तरह चूड़ियाँ पहना ने से कोमल भी खुश थी.

फिर मैं ने कविता लीना और पूनम दीदी को भी चूड़ियाँ पहना दी.

और चाचियो के लिए भी चूड़ियाँ खरीद ली.

चूड़ियाँ खरीद ने के बाद हम खाना खाने के लिए एक दुकान मे चले गये.

दुकान मे भीड़ थी पर मेरे आते ही दुकान के मालिक ने हमारे बैठने के लिए जगा बना दी.

हमारा बैठना तो एक जैसा था.कोमल के बाजू मे और रानी मेरे आगे

हम ने नाश्ते का ऑर्डर दिया. नाश्ता करते हुए इस बार रानी मेरे पैरो के साथ खेल रही थी.

रानी के पैर मेरे पैरो को टच होते ही मैं ने रानी की तरफ देखा.

रानी मुझे इशारा करके मेरे प्लेट का नाश्ता खाना है बोल रही थी.

मैं ने टेबल पर रखा हुआ ग्लास नीचे गिरा दिया.

ग्लास नीचे गिरते ही कोमल ग्लास को उठाने के लिए झुक गयी. राज तो अपनी ही मस्ती मे नाश्ता कर रहा था.

मैं ने उसी समय रानी को अपने हाथ से मेरी प्लेट का नाश्ता खिला दिया.

रानी खुश हो गयी. हम फिर से नाश्ता करने लगे.

रानी ने फिर से मेरे पैरो को टच किया.

मैं ने रानी की तरफ देखा वो फिर से मुझे खिलाने को कह रही थी.

मैं फिर से ग्लास को हाथ लगाता कि रानी ने ग्लास उठा लिया. और मुझे ऐसा करने से रोक दिया.

अब क्या करे, रानी को नाश्ता कैसे खिलाऊ.

मैं ने कोमल की तरफ देखा

अवी-कोमल रूको आज मैं तुम्हें अपने हाथ से खिलाता हू

मेरी बात सुनकर कोमल खुश हो गयी.

मैं कोमल को एक बाइट खिला दिया.

राज आ जाओ तुम्हें भी खिलाता हू. मैं राज को भी खाना खिलाने लगा.

अवी-अरे रानी तुम क्यू ऐसी बैठी हो, ले लो तुम्हें भी अपने हाथ से खिलाता हू

मैं ने रानी को खाना खिलाया. रानी मेरे दिमाग़ की दाद देने लगी.

कोमल मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देख रही थी.

मैं ने कोमल को चुपके से समझा दिया कि रानी हमारे घर आई है हमारे साथ मेला देखने आई है. अगर मैं सिर्फ़ तुम्हें प्यार से खिलाता तो वो उदास हो जाती और अपनी मम्मी को याद करती .इसी लिए उसे खाना खिलाया.

मेरी बात सुनकर कोमल के चेहरे पे फिर खुशी झलकने लगी.

नाश्ता करने के बाद हम फिर से मेले मे घूमने लगे.

हमे घूमते हुए मेरे क्लासमेट भी मिल रहे थे.

सब के साथ बातें करना.मेले का मज़ा करना. मस्ती करना.नये नये पकवान खाना, इतना मज़ा आ रहा था कि पूछो मत

समय कैसे कट रहा था पता नही चल रहा था.

हमे ठाकुर की फॅमिली भी मिल गयी.

ठाकुर और ठकुराइन, रणजीतसिंघ कामिनी ,रणजीतसिंघ का बेटा और बेटी जो कुछ दिन के लिए आए थे, ठाकुर की बेटी पायल, और एक उदास चेहरे वाली रेशमा. कुवरसिंघ के ना होने से शायद रेशमा उदास थी.

ठाकुर की फॅमिली अपने तरह से मेले को एंजाय कर रही थी.

कोमल तो पायल को सब बता रही थी कैसे उस ने मेला एंजाय किया.

कोमल की बातें सुनकर पायल का चेहरा छोटा होगया. शायद पायल ने हमारी तरह मेला एंजाय नही किया था.

ठकुराइन तो मुझे गुस्से से देख रही थी.

ठाकुर की फॅमिली से मिलने के बाद हम खरीदी करने लगे.

राज राजेश और मैं कुली बन गये थे. मेरे बहनों ने इतनी खरीदी की, जिस से मेरी जेब खाली हो गयी.

भाई के पैसे खर्च करना तो बहनों को पहला हक होता है

कुछ जगह पर मुझ से पैसे नही ले रहे थे जिस की वजह से मेरी जेब खाली होने से बच गयी.

उधर स्वेता दीदी और सीतल दीदी ने भी रोहन और सोहन को कुली बना दिया था.

स्वेता दीदी और सीतल दीदी के आते ही सब बातें करने लगे.

मैं ने राज और राजेश को रोहन सोहन के पास रुकने को कहा और रानी को सबकी नज़र बचा कर एक कॉर्नर मे ले गया.

अवी-मेरा इनाम

रानी-कैसा इनाम

अवी-तुम्हें खाना खिलाया उसके लिए मेरा मुँह मीठा नही करोगी.

रानी-वो तो अड्वान्स मे मिल गया तुम्हें

अवी-कब

रानी-गुस्से मे मेरे गाल पे किस किस ने लिया था

अवी-वो तो

रानी-क्या वो तो

अवी-मुझे किस नही मिलेगा

रानी-नही

अवी-वो तो गाल पे लिया था.

रानी-पर लिया तो था ना

अवी-समझ गया. चलो

रानी-कहाँ

अवी-यहाँ रुक कर क्या करना है.मुँह मीठा तो नही होने वाला

रानी-तुम ने मेरे गाल पर किस करके अपना मुँह मीठा किया. अब मुझे मुँह मीठा करने दो

और रानी ने मेरे होंठो पर किस कर दिया

रानी-हो गया मेरा मुँह मीठा

अवी-तुम ग्रेट हो

रानी-चलो अब

अवी-तुम पहले जाओ मैं आइस क्रीम लेकर आता हू

रानी चली गयी. फिर मैं आइस क्रीम लेकर सब के पास आ गया.

सीतल दीदी-अवी कहाँ गये थे.

अवी-आइस क्रीम लाने

मैं ने सब को आइस क्रीम दे दी. पर रानी और मेरे लिए नही लाई थी

सीतल दीदी-तुम नही खाओगे

अवी-रानी की तरफ देखते हुए मैं ने पहले ही मीठा खा लिया था. अब आइस क्रीम खा कर मज़ा नही आएगा.

कोमल-रानी के लिए नही लाए

अवी-रानी ने पहले ही बता दिया कि वो आइस क्रीम नही खाने वाली है.

रानी-मुश्कूराने लगी.

सब ने आइस क्रीम खा ली

अवी-चले अब, 8.00 बज रहे है

स्वेता-हाँ चलते है. रोहन को जाना भी है

फिर हम अपने घर की तरफ निकल पड़े

मेले मे पहला दिन बढ़िया रहा. सब ने एंजाय किया. खूब मस्ती मज़ा हुआ, खरीदी हो गयी.

घर पहुँचते ही हम थोड़ी देर बैठ कर आराम करने लगे.

रोहन और सोहन जाने की तय्यारी करने लगे.

थोड़ी देर आराम करने के बाद रोहन की फॅमिली चली गयी.

सब स्वेता दीदी के घर पर जमा हुए थे. रोहन के जाने के बाद मेले मे जो जो खरीद की ,मस्ती की उसकी बातें होने लगी.

इनकी बातें तो चलती रहेंगी.

मैं ने सब को बाइ बोला और चाचियो के साथ अपने घर आ गया.

 


483

मैं चाचियो के साथ घर आ गया. चाचा गाओं मे घूमने जाना है बोल कर चले गये.

घर जाते ही मैं ने चाचियो को अपने कमरे मे बुला लिया

ब चाची-अवी क्या बात है.

अवी-बताता हू पहले अपनी आँखे बंद कीजिए.

म चाची-हमारे लिए गिफ्ट लेकर आए हो

अवी-हाँ, पर पहले आप सब आँखे बंद कीजिए

सी चाची-ठीक है ,देखो हम आँखे बंद कर रहे है.

चाचियो ने अपनी आँखे बंद की. मैं ने बॅग मे से चूड़ियाँ निकाल ली. और पहले बड़ी चाची के हाथो मे पहना दी.

बड़ी चाची को कहा कि अभी आँखे मत खोलना.

फिर मैं ने सीमा चाची के हाथो मे चूड़ियाँ पहना दी. चूड़ियाँ हाथो मे जाते ही सीमा चाची ने अपनी आँखे खोल दी.

म चाची-चूड़ियाँ. देख मीना अवी हमारे लिए चूड़ियाँ लेकर आया है. देखना कितनी प्यारी और संदर है.

सीमा चाची की बात सुनकर छोटी चाची और बड़ी चाची ने अपनी आँखे खोल ली.

सीमा चाची ने मेरा पूरा प्लान खराब कर दिया.

ब चाची-सीमा ये क्या किया. अवी ने रुकने को कहा था ना.

म चाची-चूड़ियाँ देख कर मैं खुद को रोक नही पाई. और चूड़ियाँ तो अवी लेकर आया जिस से मैं खुद को कैसे रोकती.

अवी-जाने दीजिए.

मैं ने फिर छोटी चाची के हाथो मे चूड़ियाँ पहना दी.

तीनो चाचिया चूड़ियाँ देख कर खुश हो गयी.

चाची ने मुझे एक एक करके गले लगा लिया.

ब चाची-अवी तू कितना ख़याल रखता है हमारा. तुम्हारे चाचा ने भी कभी हमारा इतना ख़याल नही रखा है

म चाची-हाँ दीदी, अवी हमारी छोटी छोटी बातों का पूरा ख़याल रखता है. हम मेले मे नही गये पर देखिए अवी हमारे लिए मेले की सब से संदर चीज़ लेकर आ गया.

सी चाची-आख़िर बेटा किस का है

म चाची-मेरा प्यारा बेटा

सी चाची-आपका, अवी मेरा प्यारा बेटा है

ब चाची-हम तीनो का बेटा है

म चाची-सही कहा दीदी आपने,वैसे अवी मेले मे क्या क्या किया तुम ने

अवी-आपके बिना मेले मे मज़ा नही आया.

म चाची-कल से हम भी आएगे. हमे मेला दिखाउन्गा ना

अवी-आप के लिए ही तो इतनी मेहनत कर के मेले का काम किया है.

म चाची-कल से हम सब जाएँगे मेले मे

ब चाची-पर इतनी देर मेले मे बच्चों को वो भी भीड़ मे ले जाना ठीक नही होगा.

अवी-आप उसकी टेन्षन मत लीजिए. हम शाम को मेले मे जाएँगे. 5.00 बजे. उस समय मंदिर मे पूजा रहती है .मेले मे भीड़ कम रहती है.और धूप भी कम होगी.

ब चाची-हाँ ,और तेरी बुआ भी रहेगी. तुम दोनो झूले का मज़ा लेना मैं और पूजा बच्चों को देखेंगे.

अवी-और हन मेरे साथ रहने से मेले मे हमे परेशानी नही होगी.

म चाची-फिर तो मज़ा आएगा.

अवी-हन, और साथ मे चाचा भी रहेंगे ना

सी चाची-तेरे चाचा,उनको तो भूल जाओ,

ब चाची-तेरे चाचा मेले मे अपने दोस्तो के साथ रहते है. वो हमारे साथ नही होगे

अवी-कोई बात नही मैं हूँ ना

म चाची-हाँ, हमारा अवी है फिर हमे किसी बात की टेन्षन नही है. पर तू अकेला और हम सब को संभाल पाएगा

अवी-आप बस देखती जाओ,मैं क्या करता हू.

सी चाची-फिर तो कल मज़ा आएगा.

ब चाची-कल का कल देखते है. चलो खाना खाने चलते है. सुबह से कुछ नही खाया है.

अवी-मुझे तो जोरो की भूक लगी है.

फिर मैं ने चाचियो के साथ खाना खा लिया.

खाना खाने के बाद मैं अपने ज़रूरत का समान लेकर खेत वाले घर3 चला गया.

वहाँ पर समान रख कर मैं मेले मे चला गया.

अभी तो 10.00 बज रहे थे. मेला 11.00 बजे तक चलने वाला था.

मैं मेले की जगमगाती लाइट का मज़ा लेने के लिए फिर मेले मे आ गया.

कुछ लोग अपने घर जा रहे थे. मैं मेले मे जा रहा था.

लोगो के घर जाने के बाद भी मुझे भीड़ उतनी ही लग रही थी.जितनी पहले थी.

मैं इस बार मेले को एक आम लड़के की तरह एंजाय करना चाहता था. मुझे लोग जो इज़्ज़त और रेस्पेक्ट दे कर पैसे नही ले रहे थे. ये मुझे नही चाहिए था.

मैं आम लड़के की तरह लाइन मे लग कर धक्के खाते हुए झूले मे बैठना चाहता था.

मैं ने अपने मुँह पर कपड़ा बाँध लिया. वैसे भी ठंडी का मौसम था .

मैं अब बिंदास होकर मेले मे घूम रहा था.

शाम मे रानी के साथ जिस झूले मे बैठा था उसमे मैं फिर से बैठना चाहता था.

मैं ने टिकेट खरीद ली और लाइन मे लग गया.

लड़को और लड़कियो की एक ही लाइन थी. जिस का फ़ायदा लड़के उठा रहे थे.

मेरे आगे 2 लड़किया थी.

मैं उनका चेहरा देख नही पा रहा था पर उनकी बातों से लग रहा था कि वो दोनो सहेलिया है.

मेरे सामने जो लड़की थी उसकी फिगर अच्छी थी. उसका ड्रेस भी अच्छा था.

मेरे और उसकी लड़की के बीच मे बहुत कम फासला था.

मैं अपना नंबर आने का इंतज़ार कर रहा था कि पीछे से किसी ने मुझे धक्का मारा.

लाइन मे लगे हुए एक दूसरे से टकराने लगे.

मैं भी उस लड़की से टकरा गया.

मेरा लंड जो उस लड़की के बदन को देख कर थोड़ा खड़ा हुआ था वो सीधा जाकर उस लड़की की गंद मे घुस गया.

उस लड़की ने पीछे मूड कर देखा .

लड़की-ठीक से खड़े नही रह सकते, पोलीस को बुलाऊ

अवी-सॉरी, वो पीछे से किसी ने धक्का दिया था.

लड़की-ये बहुत पुराना बहाना है. मुझे पागल समझ रहे हो.

दूसरी लड़की- जाने दे रुकसाना ,ग़लती से धक्का लग गया होगा

रुकसाना-तू नही जानती रज़िया ,इन लड़को को बस

रज़िया-जाने दे, देख झूला रुक गया है. अब हमारा नंबर आएगा.

रुकसाना मुझे गुस्से से देख कर लाइन मे आगे बढ़ने लगी.

दोनो देखने मे एक से बढ़कर एक थी. शायद दोनो मुझे से कुछ साल बड़ी थी.

उनके बूब्स, उनके होंठ, उसका ड्रेस, मैं बस देखते रह गया था.

चलो जाने दो, झूला रुक गया. अब मेरा नंबर था झूले मे बैठने का

लाइन आगे बढ़ रही थी. मुझे तो लग रहा था कि मेरा नंबर आने से पहले झूला फिर शुरू हो जाएगा.और मुझे फिर झूला रुकने का इंतज़ार करना होगा.

पर मेरी किस्मत अच्छी थी. मेरा नंबर जब आया तब एक बॉक्स खाली था.

पर फिर एक प्राब्लम हो गयी. बॉक्स मे 4 लोग बैठ सकते है. या फिर 3 ,2 लोगो को बैठने नही दे रहे थे.

मेरे सामने जो लड़किया थी रुकसाना और रज़िया दोनो खड़ी होकर और एक या 2 लोगो के आने का इंतज़ार कर रही थी.

झूले वाला-तुम अकेले हो

अवी-हाँ

झूले वाला- आप दोनो इस लड़के के साथ बैठ जाइए.

रख्साना-इसके साथ ,मैं नही बैठने वाली

झूले वाला-ये आख़िरी बॉक्स है ,अगर इसके साथ नही बैठी तो तुम दोनो को रुकना होगा.

रज़िया-चलना बैठ ते है. वैसे भी इस झूले के चक्कर मे बहुत समय बर्बाद हुआ है. मैं और समय बर्बाद नही करना चाहती.

रुकसाना-ठीक है

फिर झूले वाले ने हम तीनो को बैठा दिया

रुकसाना और रज़िया मेरे सामने बैठ गयी. और दूसरी तरफ मैं अकेला बैठ गया.

रुकसाना मुझे गुस्से से देख रही थी.

रज़िया नॉर्मल थी

 
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