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मैं और मेरा परिवार

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810 डी

राजेश के फ्रेश होते ही हम शॉपिंग करने चले गये

उसी नये शॉप मे गया जहाँ पर मेले मे शॉपिंग की थी.

तब राजेश जल्दी चला गया था जिस से उसे कुछ दे नही पाया.

अब राजेश को उसके तरीके से शॉपिंग करने देता हूँ.

राजेश शॉप को देखते सोचने लगा कि यहाँ इतनी बड़ी शॉप भी हो सकती है.

राजेश तो अपने कपड़े शहर2 से लेता था आज शहर से लेने वाला था.

शॉप मे आते ही मैं पहले उस शॉप गर्ल को ढूँढने लगा जिसने पिछली बार शॉपिंग करवाई थी.

पर वो कहीं दिख नही रही थी.

जाने दो उसकी मदद नही चाहिए क्यू कि हम जेंट्स सेक्षन मे चले गये

छोटे टाउन मे इतनी अच्छी शॉप खुल ने से हर कोई शॉपिंग को यही आता था.

अच्छा है ,शहर डेवेलप्ड हो रहा है, कॉटन का मार्केट हमारे छोटे से टाउन बाकी के बड़े टाउन से ज़्यादा अच्छा था.

कॉटन मार्केट के वजसे कॉटन मिल,, गारमेंट मिल, कोल्ट प्रोसेसिंग मिल, ज़्यादा थे.

उनकी वजह से छोटे मोटे मिल भी बन गये थे.

ठाकुरजी, हरीश की फॅमिली हमारे डिस्ट्रिक्ट की रिच फिमिली थी. हरीश की फॅमिली के ज़्यादा मिल्स थे. पंकज के पापा के कारटन की कंपनी थी जो हर कोम्पनी मे अपना माल भेजते थे.सिर्फ़ हरीश के पापा की कंपनी मे नही भेजते थे.

ठाकुर जी के पास क्लॉत प्रोसेसिंग की मिलथी बाकी की कंपनी एलेकट्रोन्सिस गुड की थी. मेरी पाटनेर्शिप पता नही किस कंपनी मे है, जिस मे भी हो मुझे तो प्रॉफिट मिलता रहेगा.

मुझे बिज़्नेस मे पैर रखने मे टाइम है पहले राजेश की शॉपिंग करवाता हूँ.

राजेश जेंट्स सेक्षन मे जाते अपने लिए ड्रेस निकालने लगा.

राजेश ने लड़कियो की तरह ज़्यादा टाइम नही लगाया.

राजेश ने 1 घंटे मे पूरी शॉपिंग कर ली. सब कुछ खरीद लिए सर से लेकर पैरो तक, मतलब कप से लेकर शूस तक सब खरीद लिया

अवी-हो गयी शॉपिंग

राजेश-हाँ, सब ले लिया

अवी-और कुछ लेना हो तो ले लो

राजेश-मुझे तो यही बहुत लग रहा है. बिल ज़्यादा हो जाएगा.

अवी-बिल की टेन्षन तुम मत लो

राजेश-माँ देखेगी तो गुस्सा करेगी.

अवी-बुआ कुछ नही कहेगी. वैसे भी तुम्हारी मेले की शॉपिंग बाकी थी

राजेश-बताया लीना ने कि आपने सबको गिफ्ट दिए.

अवी-सिर्फ़ तू रह गया था.

राजेश-मेरा भी हो गया.

अवी-सोच ले भाई की पॉकेट को लूटने का इतना अच्छा मोका दुबारा नही मिलेगा

राजेश-नही मिला तो भी चल जाएगा ,आज इस से ज़्यादा शॉपिंग नही कर सकता.

अवी-मुझे क्या है. चल एक ड्रेस ट्राइ कर और उसे पहने रहना

राजेश-आप बिल पे करो .मैं ड्रेस पहन कर आता हूँ

अवी-ड्रेस काउंटर पर ले जाने पड़ते है. पहले बिल पे करते है फिर ड्रेस पहन लेना

बिल ज़्यादा नही हुआ था. राजेश ने चद्देर देख कर पैर लंबे किए थे

बिल पे होते राजेश ने एक ड्रेस पहन लिया.

अवी-हीरो लग रहा है.

राजेश-हीरो बन ने के लिए सलून जाना होगा.

अवी-मेरे भी बाल बढ़ गये है. चल मैं भी बाल कटवालेता करता हूँ.

राजेश-यहाँ कोई अच्छा सलून तो होगा ही.

अवी-चल तुझे मेरे वाले सलून ले चलता हूँ. जहाँ मैं अपने बाल कटवाता हूँ.

राजेश-मुझे बाल कटवाने नही करने बस शेप देना है

अवी-चल तो ,वहाँ सब हो जाता है.

शॉपिंग के बाद मैं राजेश के साथ सलून चला गया.

राजेश ने अपनी मर्ज़ी से बाल सेट किए और मैं ने बाल कटवाए किए.

अवी-बन गया हीरो

राजेश-आप भी हीरो लग रहे है

अवी-चल किसी केफे मे चलते है वही पता चल जाएगा कौन हीरो है.

राजेश-वहाँ लड़कियो से पता करना चाहते है

अवी-हाँ, और कॉफी पीकर घर चलते है.

राजेश-चलो

हम कॉफी पीने केफे मे आ गये .यहाँ मैं रानी और कोमल के साथ आता था.

हमारे केफे मे आते ही सबकी नज़र हमारी तरफ हो गयी.

लड़कियो की आँखे मे चमक थी और लड़को की आँखो मे जलन क्यू कि उनकी गर्लफ्रेंड हमारी तरफ देख रही थी.

राजेश-भैया लगता है यहाँ आपका रेप होने वाला है.

अवी-मेरा नही तेरा होगा समझा.

राजेश-देख लो सब आपकी तरफ देख रही है.

अवी-क्यू कि तू मेरे साथ है.

हम एक टेबल पे जाके बैठे जहाँ पर लड़किया ज़्यादा थी.

राजेश-मैं ब्लॅक टी वित लेमन पिउगा.

अवी-ये क्या है, चुप चाप कॉफी पिएँगे

राजेश-भैया आप कॉफी पियो,मैं तो ब्लॅक टी पिउगा.

अवी-तू बैठ मैं लेकर आता हूँ

मैं ऑर्डर देने चला गया. सेल्फ़ सर्विस जो थी.

मेरे काउंटर पर आते ही राजेश के पास मेरी चेयर पे एक लड़की आकर बैठ गयी.

राजेश लकी है.

राजेश इस लड़की को ज़रूर पटा लेगा

मैं काउंटर पर ऑर्डर ले रहा था कि मेरे साइड मे एक लड़की आकर खड़ी हो गयी.

और एक पेपर पे अपना नंबर लिखने लगी

मैं चुप चाप उसकी हरकतों को देखने लगा.

उसने नंबर लिख कर मेरा जो ऑर्डर था उसमे रख दिया.

और अपना ऑर्डर लेकर अपने बाय्फ्रेंड के पास चली गयी.

मेरे आते राजेश के पास बैठी हुई लड़की उठ कर केफे से बाहर चली गयी.

अवी-बोला था ना कि लड़किया तुझे देख रही थी.

राजेश-वो तो

अवी-कौन थी, क्या बोल रही थी

राजेश-मेरे फ्रेंड की बड़ी बहन है. अपने बाय्फ्रेंड के साथ यहाँ आई थी.

अवी-तेरे दोस्त की बहन ,तुझे कैसे पहचान लिया

राजेश-मेरी फोटो देखी होगी अपने भाई के साथ.

अवी-क्या कह रही थी.

राजेश-कुछ नही. बस ऐसे ही. और अपना नंबर दे गयी

अवी-कॉल करना ,जल्दी पट जाएगी.

राजेश-मेरा छोड़िए. उस लड़कीने आपको नंबर दिया कि नही

अवी-मुझे क्यूँ वो नंबर देगी. वो अपना ऑर्डर लेने गयी थी.

राजेश-उसकी तरफ देखो, उसके टेबल पर पहले 2 कप रखे है. वो कॉफी पी चुकी है. फिर उसे फिरसे कॉफी पीने की ज़रूरत क्या पड़ी.

अवी-स्मार्ट हो. चल जल्दी कॉफी ख़तम करके चलते हैं ,

राजेश-आप उसे कॉल करेंगे

अवी-किसके पास इतना टाइम है. अगर कभी टाइम मिला तो कर लूँगा.

राजेश-मेरा हो गया ,

हम केफे से बाहर आ गये .और राजेश उस लड़की के नंबर वाला पेज फेकने लगा.

अवी-क्या कर रहे हो

राजेश-उसका बाय्फ्रेंड है. और वो मेरे दोस्त की बहन है

अवी-तो क्या हुआ. उसने नंबर दिया ऐसे फेक मत बस अपने पास रख,

राजेश-क्यूँ?

अवी-क्या पता कब काम आ जाए.

राजेश-वो मेरे दोस्त की बहन है.

अवी-तो क्या हुआ ,तूने जिसके साथ किया होगा शायद वो मेरे किसी फ्रेंड की बहन होगी. वो खुद तेरी फ्रेंड बनना चाहती है तो बन जा ,

राजेश-उसे खुद मुझसे दोस्ती करनी है , उसके बाय्फ्रेंड होते हुए, आप ठीक कह रहे है. नंबर फेकने से मैं ईडियट साबित होता.

अवी-ओह ईडियट आज भी यहीं रुकने का इरादा है क्या ,चल बैठ बाइक पर

खरीदी करते ही मैं राजेश के साथ गाओं की तरफ जाने लगा.

शाम हो रही है. मुझे जल्दी जाना होगा वरना चाची मुझ पे नाराज़ होगी.

हम गाओं के आधे रास्ते आए थे कि मुझे कोमल दिखाई दी.

कोमल अपने क्लासस करके घर जा रही थी.

मैं ने अपनी बाइक कोमल की स्कूटी के पीछे ले ली और हॉर्न बजाने लगा.

कोमल ने पीछे मूड कर देखा ,

मुझे देखते ही अपनी बाइक रोक दी,मैं ने भी उसके पास बाइक रोक दी

कोमल-कहाँ घूम रहे हो.

अवी-शहर गया था एक काम से

कोमल-ये पीछे कौन बैठा है.

अवी-तुम खुद देख लो.

कोमल-जाना पहचाना दिख रहा है. अपनी कॅप और गॉगल निकालो

राजेश ने कॅप और गॉगल निकाल दिए

कोमल-राजेश ,ये तो राजेश है, पर ये ऐसे कैसे, ये हमारा राजेश हैना

अवी-तू खुद देख लो

राजेश-दीदी मैं राजेश ही हूँ

कोमल-ये क्या कर दिया. अवी राजेश तो पहचान मे नही आ रहा

अवी-धीरे धीरे इसकी आदत हो जाएगी.बोलो कैसा दिख रहा है राजेश

कोमल-हीरो ,राजेश तू ऐसे ही रहा कर, ऐसे अच्छा दिखता है. वो चंपू जैसा बिल्कुल अच्छा नही लगता.

राजेश-आज से मैं ऐसा ही रहूँगा

कोमल-ये कमाल अवी ने किया होगा.

राजेश-भैया को मना किया पर मेरी बात नही सुनी

कोमल-अच्छा किया अवी जो राजेश की बात नही सुनी, राजेश का नया रूप तो मुझे पसंद आया.

अवी-मेरी मेहनत सफल हुई. कोमल को राजेश का नया रूप जो पसंद आया.

कोमल-अवी उठो बाइक से

अवी-क्यू?

कोमल-उठो तो. तुम दोनो उठो

मैं और राजेश बाइक से नीचे उतर गये

कोमल-राजेश तुम अवी की जगह बैठो

राजेश-दीदी आप करना क्या चाहती हो

कोमल-बैठो तो

राजेश मेरी जगह बैठ गया और कोमल उसके पीछे बैठ गयी.

और मेरे हाथ मे शॉपिंग की बॅग रख दी

कोमल-अवी स्कूटी से आओ, मैं तो राजेश के साथ जाउन्गी

अवी-ये चीटिंग है. हीरो मैं ने बनाया और मुझे लटका रहे हो

कोमल-मुझे कुछ नही पता, राजेश चलो तुम

राजेश बाइक पर कोमल को लेकर निकल गया .

और मैं बॅग लेकर स्कूटी से उनके पीछे पीछे जाने लगा.

कोमल राजेश के साथ बातें करते हुए जा रही थी.

राजेश का नया रूप कोमल को पसंद आया यही काफ़ी है.

हम गाओं मे पहुँच गये. राजेश कोमल के साथ बाइक पर और मैं स्कूटी लेकर

बुआ और चाची नीता बुआ के घर के आगन मे बैठ कर हमारा इंतज़ार कर रही थी.

जैसे ही राजेश कोमल के साथ बाइक घर के पास पहुँची तो सबकी नज़र कोमल पर गयी.

कोमल को एक नये लड़के के साथ देखते सब अपनी जगह पर खड़े हो गये.

नेहा बुआ तो पहले खड़ी हो गयी.

कोमल को अंजान लड़के के साथ बाइक पर देखते ही नेहा बुआ गुस्से से खड़ी हो गयी.

 
811

कोमल को एक अंज़ान लड़के के साथ इस तरह बाइक पर देखते नेहा बुआ गुस्से मे खड़ी हो गयी.

चाची और बाकी सब भी कोमल की इस हरकत से खड़े हो गये

मैं थोड़ी दूरी पे था , स्कूटी धीरे धीरे उनके पीछे ले जा रहा था.

राजेश ने बाइक सीधे कॉंपाउंड के अंदर ले गया.

बाइक रुकते सब कोमल के पास आ गये और कोमल के रुकने से पहले सवाल पूछने लगे

नेहा बुआ-कोमल ये सब क्या है

कोमल-क्या हुआ माँ

नेहा बुआ-ये लड़का कौन है. और तू इसके साथ क्या कर रहा है.

पूजा बुआ-नेहा आराम से , कोमल को उतरने तो दो

नीता बुआ-कोमल ये सब क्या है. तुम इस तरह किसी के भी साथ घूमती हो

नीता बुआ की बात सुनते कोमल हँसने लगी.

नेहा बुआ-हंस क्यू रही हो. जवाब दो

ब चाची-कोमल कौन है , तेरा फ्रेंड है या...

पूजा बुआ-तेरी स्कूटी कहाँ है. कहीं खराब तो नही हो गयी जिस से इसको लिफ्ट माँग ली

कोमल-मुझे बोलने तो दीजिए

कविता लीना-ये अवी भैया की बाइक है. हम पहचानते है.ये देखिए हमारा नाम

नेहा बुआ-अवी की बाइक ,कोमल ये सब क्या हो रहा है. तेरी स्कूटी कहाँ है, ये लड़का कौन है जो अपना चेहरा छुपाए हुए है और अवी की बाइक इसके पास कैसे

नीता बुआ-अवी तो राजेश को लेकर गया था, कोमल अवी और राजेश कहाँ है ,क्या हुआ

कोमल-मौसी किसी को कुछ नही हुआ

ब चाची-अवी कहाँ है. और अवी की बाइक के साथ ये क्या कर रहा है

पूजा बुआ-शायद कोमल की स्कूटी खराब हुई होगी तो अवी उसे ठीक करा रहा होगा.और अपनी बाइक दे दी कोमल को

नीता बुआ-तो राजेश कहाँ है

कोमल फिर हँसने लगी.

ब चाची-कोमल तू कुछ बताती क्यूँ नही अवी कहाँ है

कोमल-क्या बताऊ मामी.मुझे तो आप सबकी बाते सुनकर हसी आ रही है.

राज-वो वहाँ है भैया ,छोटी मामी के साथ

पूजा बुआ-कहाँ

राज-वो वहाँ पर

मेरी तरफ सब की नज़र पड़ते ही मैं ने स्कूटी आगे बढ़ा दी .और छोटी चाची जो मुझे रास्ते मे दिखी जिस से मैं रुक गया था उनको लेकर नीता बुआ के घर आ गया.

पूजा बुआ-अवी कहाँ थे तुम

नीता बुआ-राजेश कहाँ है.उसे तुम लेकर गये थे ना

अवी-वो आया नही अब तक, उसे तो मैं ने कल ही यहाँ आने के लिए भेजा था(मैं भी थोड़े मज़ाक लेने के मूड मे था)

नीता बुआ-कल पर वो तो आया ही नही

नेहा बुआ-नीता किसके साथ भेजा था तूने ये तो देख लेती.

नीता बुआ-अवी राजेश कहाँ है.

नेहा बुआ-और ये तुम कोमल की स्कूटी लेकर क्यूँ घूम रहे हो

सी चाची-रूको ,एक एक कर पूछते है ऐसे एक साथ वो जवाब नही दे पाएगा.

पूजा बुआ-राजेश गायब है, कोमल अँज़न लड़के के साथ है, अवी कोमल की स्कूटी लेकर घूम रहा है. मुझे तो कुछ समझ मे नही आ रहा.

कविता-मौसी मेरी समझ मे सब आ गया है

नेहा बुआ-तुझे क्या समझ मे आया ,

कविता-ये कोमल दीदी के साथ कौन है मुझे पता चल गया.

नेहा बुआ-कौन है वो,जो तब से चुप चाप है ,अपना चेहरा छुपाए हुए है

कविता-मुझे ये भी पता चल गया कि राजेश भैया कहाँ है

नीता बुआ-कहाँ है राजेश

लीना-मैं बताती हूँ

नीता बुआ-बता जल्दी.वरना मार खाएगी

और लीना ने राजेश की कप गॉगल निकाल दिया और राजेश के सर को पकड़ कर उपर करके सबकी तरफ घुमा दिया.

लीना-ये रहे राजेश भैया ,सॉरी नये राजेश भैया

सब राजेश की तरफ आँखे फाड़ कर देखते रह गये .

उनको लगा नही था कि उनको राजेश को इस रूप मे देखने को मिलेगा.

उनकी तो बोलती बंद हो गयी.

सबकी शकल देख कर कोमल और मैं कविता और लीना हँसने लगे.

लीना-अवी भैया आपने तो गजब कर दिया ,

कविता-राजेश भैया तो पहचान मे नही आ रहे

राजेश-माँ ,ऐसे क्या देख रही हो. मैं राजेश हूँ आपका राजेश

नीता बुआ राजेश की आवाज़ सुनकर होश मे आ गयी और राजेश को गले लगा लिया.

नीता बुआ राजेश को देखते भौचक्की होकर उसको चूम ने लगी.

नेहा बुआ कोमल के पास गयी और उसका कान पकड़ लिया.

नेहा बुआ-अपनी माँ को डराती है और मज़ाक भी करती है

कोमल-आप ने सोच भी कैसे लिया मैं किसी के साथ भी घूम सकती हूँ

नेहा बुआ-ज़माना खराब है. और तू पहली बार अकेली शहर जा रही थी. मैं तो डर गयी थी

कोमल-अवी के होते हुए मुझे कुछ नही हो सकता. आप डरना बंद कीजिए

पूजा बुआ-तू हम सब के साथ मज़ाक कर रही थी.

कोमल-मौसी आप सब ने मुझे कुछ बोलने नही दिया.

ब चाची-तेरी हसी से हमे समझ जाना चाहिए था कि कुछ गड़बड़ है

कोमल-मामी, आप सब की बाते सुनकर मैं अपनी हसी रोक नही पाई.

नीता बुआ-लीना के साथ तुझे भी मार चाहिए

राजेश-मैं ने क्या किया

नीता बुआ-चुप चाप हमारी बाते सुन कर मज़ा ले रहा था.बता नही सकता था कितना डर गयी थी मैं जब अवी ने कहा कि तुझे कल ही वापस भेज दिया था .

राजेश-भैया ने कहा था कि उनके आने तक चुप रहना

नीता बुआ-भैया की फिकर थी अपनी माँ की नही. कितना डर गयी थी मैं

राजेश-सॉरी

नीता बुआ-क्या सॉरी ,कल से एक फोन भी नही किया.

राजेश-भैया ने कहा कि सर्प्राइज़ देंगे

नीता बुआ-फोन पे बात करने से क्या फरक पड़ता ,और ये सब क्या है.

राजेश-भैया

नीता बुआ-ये हेर कट ,गॉगल ,कपड़े कहाँ से आए

राजेश-भैया ने खरीद कर दिए

नीता बुआ-और तूने ले लिए ,इतने सारे बॅग ,क्या है

राजेश-मैं मना कर रहा था पर भैया का आपको तो पता है. कह रहे थे कि मेले मे मेरी शॉपिंग बाकी रह गयी थी.

नीता बुआ-वो ठीक है पर ये जीन्स टीशर्ट ,

राजेश-अच्छा लग रहा हूँ ना ,पापा जैसा दिख रहा हूँ

नीता बुआ-दिख तो रहे हो अपने पापा जैसे ,पर तुझे ये सब करने से मना किया था ना.

राजेश को लगा था कि नीता बुआ उसे देख कर खुश हो जाएँगी. पर यहाँ तो

राजेश का चेहरा उतर गया.

नीता बुआ-मैं ने कुछ पूछा है.

राजेश-मैं चेंज करके आता हूँ

नीता बुआ-पहले जवाब दो ,तुम इस तरह रहना पसंद है.

राजेश ने जवाब नही दिया.

नीता बुआ-राजेशह

राजेश ने हाँ मे गर्दन घुमा दी

नीता बुआ-तेरे इस तरह रहने से तेरी पढ़ाई पे असर होगा

राजेश-मैं चेंज करता हूँ

अवी-राजेश चेंज करने की ज़रूरत नही है.

नीता बुआ-अवी ,इसकी पढ़ाई पे असर होगा

अवी-नही होगा. मैं गारंटी लेता हूँ

नीता बुआ-पर

अवी-बुआ मैं आप को बाद मे समझा दूँगा.

नीता बुआ-राजेश ,तुम्हे इस तरह के कपड़े पहनना अच्छा लगता है.

राजेश-हां

नीता बुआ-तुम्हारे पापा को पता चला तो

राजेश-उनके आने तक पहन लूँगा.

नेहा बुआ-देख नीता मुझे कुछ प्राब्लम नही है ,राजेश ऐसा ही अच्छा लग रहा है

नीता बुआ-पर तेरी पढ़ाई पे इसका असर हुआ तो तेरे पापा को बुरा लगेगा

राजेश-मैं अपनी पढ़ाई पे इसका असर नही होने दूँगा

नीता बुआ-प्रॉमिस करते हो

राजेश-आपकी कसम

नीता बुआ-ठीक है. आज के बाद तू इस नये रूप मे रहेगा. तुम्हारे पापा को मैं संभाल लूँगी.

राजेश नीता बुआ के गले लग गया.

नेहा बुआ-वैसे तुम्हे इस रूप मे देख कर मुझे बहोत अच्छा लगा.

पूजा बुआ-ऐसे ही रहा कर ,अवी की तरह ,पर पढ़ाई पर भी ध्यान दिया कर

राजेश-मैं आपको कोई शिकायत का मोका नही दूँगा.

नेहा बुआ-नीता ,हमे भी मिलने देंगी कि नही

नीता बुआ-राजेश जितना मेरा बेटा है उतना तुम्हारा भी है. मिल लो अपने बेटे से

राजेश-मौसी कैसा लग रहा हूँ

नेहा बुआ-पहले तू जैसा रहता था वैसा तू मुझे बिल्कुल पसंद नही था,

राजेश-अब

नेहा बुआ-अब तू लग रहा है मेरा बेटा , राजेश सुपरस्टार

राजेश-थॅंक यू मौसी

नेहा बुआ-बस थॅंक यू से काम नही चलेगा मेरे गले नही लगेगा.

राजेश नेहा बुआ के गले लग गया.

नेहा बुआ-तू तो मुझ से भी बड़ा हो गया.नीता राजेश बड़ा हो गया

नीता बुआ-मुझे भी आज लग रहा है कि राजेश बड़ा हो गया है.

पूजा बुआ-हम भी लाइन मे है. हमे भूलो मत

नीता बुआ-अंदर चलते है फिर आराम से मिल लेना,लीना

नेहा बुआ-लीना कविता ये कहाँ गयी

कोमल-राजेश के बॅग भी गायब

राजेश-अंदर गयी होगी. बॅग मे चॉक्लेट थे

नीता बुआ-ये दोनो ना ,चलो हम भी चलते है

हम सब अंदर जाकर बाते करने लगे.

 
811 आ

हम घर के अंदर आ गया.

कविता लीना और राज सोफे पर बैठे कर चॉक्लेट खा रहे थे.

नेहा बुआ-कविता क्या कर रही हो

कविता-चॉक्लेट खा रही हो

नेहा बुआ-इस तरह ,पूरे चेहरे पे चॉक्लेट लगी है.

कविता-चॉक्लेट खाते नहा लूँगी.

नीता बुआ-लीना ,अपने भाई से तो मिल लो ,क्या चॉक्लेट के पीछे पड़ी हो

लीना-ये कविता और राज चॉक्लेट ख़तम कर देंगे

राजेश-लीना

लीना-भैया आप हीरो लग रहे हो

राजेश-मेरी तरफ तो देख ले

लीना-अवी भैया ने मुझे बताया था कि आप को अपने जैसा बना देंगे. थॅंक यू भैया .

राजेश-जाने दे मैं चॉक्लेट कोमल दीदी को देता हूँ

लीना ने राजेश के हाथ मे चॉक्लेट देखते भाग कर राजेश के पास आ गयी.

लीना-भैया आप के तो नये लुक के साथ सब कुछ बदल गया है.

राजेश-तुझे अपने भैया का नया रूप कैसा लगा.

लीना-आप ऐसे ही रहा करो ,मुझे ये नया लुक बहोत पसंद आया .आपकी ड्रेसिंग ,हेर स्टाइल सब कुछ

राजेश-फिर तो अब ऐसे रहा करूँगा.

लीना-लव यू भैया

अवी-मुझे भूल गयी.

लीना-मैं आपको कैसे भूल सकती हूँ. आपने तो आज सबसे बढ़िया गिफ्ट दिया है मुझे

अवी-तुम्हे राजेश चाहिए था. कैसा लगा अपने भैया को नये लुक मे देख कर

लीना-मैं आज बहोत खुश हूँ. मैं माँ को कहूँगी कि भैया को ऐसे रहने की पर्मिशन दे

नीता बुआ-तुम सब बैठो मैं नाश्ता लेकर आती हूँ

नेहा बुआ-रुक मैं भी आती हूँ मदद करने के लिए.

नीता बुआ-तू अपने बेटे को प्यार कर मैं बना लूँगी.

और नीता बुआ किचन मे चली गयी और हम सब राजेश की तारीफ करने लगे

पूजा बुआ बड़ी चाची को मेरा राजेश को नया रूप देना अच्छा लगा.

बड़ी चाची को मेरा अपने भाई बहनों के प्रति प्यार देख कर अच्छा लगा.

बड़ी चाची ने राजेश के साथ मुझे भी प्यार से चूम लिया

नीता बुआ-अवी इधर आना

अवी-क्याहुआ बुआ

नीता बुआ-एक डब्बा उपर रखा है उसे निकाल दो

पूजा बुआ-मैं जाती हूँ ,तुम रूको

सी चाची-नीता ने अवी को बुलाया है. उसे जाने दीजिए क्या पता दबा उपर हो

पूजा बुआ-अवी जा तू

मैं नीता बुआ की मदद करने के लिए किचन मे चला गया

अवी-बुआ आपने बुलाया था. कौनसा डब्बा निकालना है.

नीता बुआ-मैं ने तुम्हे बात करने बुलाया है

अवी-राजेश के बारे मे

नीता बुआ-हाँ,

अवी-पूछिए क्या पूछना है.

नीता बुआ-ये तुम क्या कर रहे हो मुझे समझ नही आ रहा,

अवी-क्या समझ मे नही आ रहा

नीता बुआ-ये राजेश को बदलना

अवी-इस नये राजेश मे क्या प्राब्लम है.

नीता बुआ-प्राब्लम कुछ नही है ,पर इस से राजेश बिगाड़ा गया तो

अवी-ऐसा नही होगा.राजेश को आपका प्यार बिगाड़ने नही देगा.

नीता बुआ-तुम समझ नही रहे हो, आज कल लड़के जल्दी बिगड़ जाते है.

अवी-आपको लगता है राजेश ऐसा वैसा कुछ करेगा.

नीता बुआ-किसी का क्या बोल सकते है,तुम्हे भी तो हम कितना सीधा समझते थे.

अवी-आप कहना क्या चाहती है

नीता बुआ-देखो अवी ,राजेश पहले भी झूठ बोल चुका है ,कि वो टूर पे गया है. अगर उसे ऐसे छूट मिल गयी तो वो हाथ से निकल जाएगा.

अवी-मैं आपको सब बात देता हूँ. राजेश 2 लाइफ जीता क्या

नीता बुआ-2 लाइफ , क्या मतलब

अवी-वो यहाँ गाओं मे अलग रहता है और स्कूल मे अलग तरह से रहता है.

नीता बुआ-मैं नही समझी

अवी-यहाँ राजेश आप जैसा चाहती थी वैसा रहता था. और अब जिस राजेश को देख रही है वैसा वो स्कूल मे रहता है.

नीता बुआ-ये क्या बोल रहे हो

अवी-यही सच है. राजेश 2 लाइफ जी रहा है

नीता बुआ-राजेश ने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई. उसे ऐसा करने की ज़रूरत क्या थी.

अवी-क्यू ना करता ,आपने उसे राजेश खन्ना जो बना कर रखा है

नीता बुआ-क्या बुराई है उसमे ,

अवी-आपको राजेश खन्ना पसंद है तो इसकी सज़ा राजेश को मिल रही है.

नीता बुआ-तू साइड साइड बता

अवी-बुआ ये 1970 नही है. राजेश आज के जमाने का लड़का है.वो आपकी तरह रहेगा तो लोग उसपे हँसते है.आप उसे 1970 का राजेश खन्ना बना कर रख रही है.

नीता बुआ-राजेश ने कभी कहा तो नही कि उसे इससे परेशानी होती है

अवी-कैसे कहेगा ,वो आप को दुखी नही करना चाहता था. आपको राजेश खन्ना पसंद है , ये बात उसे पता है. वो आप से बात करके आपकी पसंद का अपमान नही करना चाहता था, उसको खुद पे दूसरो का हसना स्वीकार था पर वो आपको दुखी नही करना चाहता था

नीता बुआ-एक बार बात तो करता,

अवी-आपको पता हैना राजेश आप से कितना प्यार करता है

नीता बुआ-मुझसे बात करता तो मैं कुछ ना कुछ ज़रूर करती

अवी-आपके कुछ करने से पहले राजेश ने एक नया रास्ता ढूँढ लिया.

नीता बुआ-2 लाइफ का

अवी-हाँ,वो स्कूल मे अलग तरह से रहता था और यहाँ गाओं मे आपको जैसा पसंद था वैसा रहता था.

नीता बुआ-मैं ने ये क्या किया ,मेरे वजह से राजेश को ऐसी 2 लाइफ ज़ीनी पड़ रही है.

अवी-ऐसा राजेश ने इस लिए किया ताकि सब खुश रहे. आप खुश रहे ,वो खुश रहे,

नीता बुआ-तभी वो हमेशा स्कूल जाने की बात करता था.

अवी-अब समझी आप, इसी लिए वो घर पे नही रुकता था.

नीता बुआ-इसमे मेरी ग़लती है. मेरे वजह से वो घर मे नही रुकता था.

अवी-आपके वजह से और आज कल फ्रेंड के साथ ज़्यादा रहने की आदत होती है लोगो को, चाचा को देखा नही आपने कैसे अपने दोस्तो के साथ रहते है

नीता बुआ-ये मैं क्या कर रही थी. खुद अपने बेटे का नुकसान कर रही थी.

और नीता बुआ रोने लगी

मैं ने नीता बुआ को गले लगा लिया.और उनको शांत करने लगा.

अवी-बुआ आपने जो किया वो ग़लत नही था.

नीता बुआ-मैं ने ये क्या किया.

अवी-आपने वही किया जो सही था .आपके वजह से राजेश पढ़ाई मे इतना तेज हो गया है.

नीता बुआ-पर वो बाहर की दुनिया से छुपाता रहता था.

अवी-उसमे उसकी बुराई छुपी थी.

नीता बुआ-मैं ने ये क्या किया

अवी-आपके प्यार की वजह से राजेश इतना अच्छा है. खुद रोता रहा पर अपनी माँ को खुशी देता रहा. ऐसा बेटा आपने अपने प्यार से बनाया है. आप खुद को दोषी मत मानिए. राजेश ने तो इसका रास्ता ढूँढ लिया था.

नीता बुआ-कितने साल से वो ऐसे 2 लाइफ जी रहा है

अवी-(2 बोलू ,नही) 3 साल

नीता बुआ-3 साल से राजेश ऐसी लाइफ जी रहा है.

अवी-इतना कुछ था फिर भी उसने अपनी पढ़ाई पे इसका असर नही होने दिया.

नीता बुआ-उसके नंबर बढ़ रहे थे

अवी-यही तो, राजेश स्कूल मे अलग रहता था फिर भी पढ़ाई करता रहा , राजेश दूसरे लड़के जैसा नही है.उसको पता है कि मस्ती के साथ पढ़ाई कितनी ज़रूरी है.

नीता बुआ-तुम ठीक कह रहे हो ,राजेश अपनी पढ़ाई से दूर नही हुआ.

अवी-इस लिए कहता हूँ कि राजेश के नये रूप से उसकी पढ़ाई पे कोई असर नही होगा. आप उसे उसकी मर्ज़ी से जीने दीजिए

नीता बुआ-तुम ठीक कह रहे हो ,राजेश को उसके मर्ज़ी से जीने देना चाहिए,वरना वो चुपके चुपके ग़लत रास्ते पे चला जाएगा और हमे पता भी नही चलेगा.

अवी-इसी लिए तो मैं उसका फ्रेंड बना हूँ ताकि उसके मन की बात जान सकूँ

नीता बुआ-तुम उसके फ्रेंड बन जाओ. और उसकी परेशानी ख़तम कर दो

अवी-आप बेफिकर रहिए ,मैं राजेश को ग़लत रास्ते पे नही जाने दूँगा. उसका पूरा ध्यान रखूँगा. मेरा भाई है वो

नीता बुआ-अवी तुम राजेश का ध्यान रखोगे ना

अवी-हाँ बुआ. उसका मैं हमेशा ध्यान रखूँगा.

नीता बुआ-उसे ग़लत रास्ते पे जाने से रोकोगे

अवी-हां, रोकुंगा. आप जैसा चाहती है वैसा होगा. राजेश ज़्यादा से ज़्यादा समय घर पे रहेगा .आपके साथ, और पढ़ाई भी करता रहेगा.

नीता बुआ-मैं बस राजेश को खुश देखना चाहती हूँ

अवी-मैं आपको निराश नही करूँगा.

नीता बुआ-मुझे तुम पर पूरा विश्वास है.

अवी-तो आप राजेश को राजेश खन्ना मत बनाना

नीता बुआ-नही बनाउन्गी. तुम जैसा चाहते हो वैसा करूँगी.

अवी-राजेश जैसा चाहता है वैसा करना.

नीता बुआ-राजेश पे मैं अपनी मर्ज़ी कभी नही लादुन्गी ,उसे जैसा अच्छा लगता है वैसा करने दूँगी.

अवी-ये बात राजेश से जाकर कहिए

नीता बुआ-सबके जाते कहूँगी.

अवी-अब तो मुझे छोड़िए.

नीता बुआ-क्यू छोड़ू, तू भी तो मेरा बेटा है. अपने बेटे को गले नही लगा सकती.

और नीता बुआ ने मुझे गले लगा लिया.

नीता बुआ को समझाने के बाद मेरा ध्यान दूर की तरफ गया.

नेहा बुआ हमारी बात सुन रही थी.

नेहा बुआ ने हमारी सारी बाते सुन ली

नेहा बुआ की आँखो मे हल्के आसू आ गये थे.

मेरी नज़र उनसे मिलते ही नेहा बुआ पलट कर हॉल मे चली गयी.

नेहा बुआ की आँखो मे आसू

ये मेरे लिए एक शॉक्ड था

मुझे तो लगा था कि नेहा बुआ का दिल पत्थर का बना है

उनके दिल मे सिर्फ़ नफ़रत है

पर उनकी आँखो मे आसू क्या मेरे लिए आए है

या फिर राजेश के लिए

नेहा बुआ को समझना मुश्किल है.

नीता बुआ को राजेश के बारे मे बता कर पूरी प्राब्लम सॉल्व कर दी

नीता बुआ को पता तो चला कि राजेश घर मे क्यू नही रुकता.

नीता बुआ को राजेश के दिल की बात तो पता चली .

नीता बुआ अब राजेश ज़्यादा पाबंदी नही लगाएँगी.

राजेश के लिए अच्छा हुआ जो वो अब नॉर्मल और बिंदास तरीके से जी सकता था. लाइफ को एंजाय कर सकता है.

राजेश एंजाय करने के साथ पढ़ाई भी करता रहेगा.

चलो सब के लिए अच्छा हो गया .मेरे वजह से जिस से बड़ी चाची खुश हो गयी.

मैं ने नीता बुआ को नाश्ता प्लेट मे डालने मे मदद की ,

बुआ और मैं नाश्ता और शरबत लेकर हॉल मे आ गये.

नेहा बुआ-राजेश

राजेश-हाँ मौसी

नेहा बुआ-तू आज से ऐसे ही रहना ,नीता ने कुछ कहा तो मुझे बताना ,उसे मैं संभाल लूँगी

राजेश-जी

नेहा बुआ-तू ना पहले चंपू जैसा दिखता था पर अब हीरो जैसा दिख रहा है, तू ना मुझे हीरो जैसा अच्छा लगता है.अब मैं हमेशा तुम्हे ऐसे देखना चाहती हूँ. अपनी मौसी की इच्छा पूरी करेगा ना

चाची ने मुझे बताया था कि नीता बुआ और नेहा बुआ एक दूसरे की जान है.

वो एक दूसरे से इतना प्यार करती है उतना अपनी बेटी से भी नही कर सकती .

नेहा बुआ को जो पसंद है वही नीता बुआ करती है चाहे कुछ भी हो जाए.

नीता बुआ और मेरी बाते नेहा बुआ ने सुन ली थी.

राजेश की खुशी किसमे है वो नेहा बुआ जान गयी.

नेहा बुआ को पता है कि नीता बुआ राजेश को खुश देखना चाहता है.

और राजेश की खुशी के लिए नेहा बुआ नीता बुआ को बता रही थी कि उनको क्या पसंद है.

नेहा बुआ को राजेश का नया लुक पसनद है ,ये सुनते अब ज़मीन फटे या आसमान गिरे ,नीता बुआ किसी की नही सुनेगी. वो राजेश को इस नये रूप मे रहने की पर्मीशन देंगी. अगर लीना के पापा ने भी विरोध किया फिर भी नीता बुआ राजेश को इस नये रूप मे रहने को कहेंगी .क्यू की नेहा बुआ को राजेश का नया लुक पसंद है.

नेहा बुआ ने नीता बुआ के लिए ऐसा किया. नीता बुआ खुश रहे ,राजेश खुश रहे, इस लिए ये बात कही कि नया राजेश उनको पसंद है.

राजेश-माँ ,की इजाज़त मिली तो मैं आपकी इच्छा ज़रूर पूरी करूँगा.

नेहा बुआ-नीता मैं राजेश को इसी रूप मे देखना चाहती हूँ. हमारा राजेश हीरो जैसा कितना अच्छा दिखता है.

नीता बुआ-राजेश पुराने कपड़े जला देना ,आज से तुझे जैसा रहना है वैसा रहेगा. नेहा जैसा कहती है वैसा रहेगा.

नेहा बुआ और नीता बुआ की बात सुनते ही छोटी चाची ने अपने सोचने की शक्ति बढ़ा दी और मेरी तरफ देखने लगी.

मैं ने उनको बाद मे बताने का इशारा किया.

नीता बुआ की बात सुनते ही राजेश खुशी से पागल हो गया.

राजेश अपनी जगह पर खड़ा होकर नाचने लगा.

राजेश को इस तरह खुश देख कर नीता बुआ समझ गयी की वो अब तक क्या कर रही थी और अब उन्होने क्या किया.

राजेश को खुश देख कर नेहा बुआ और नीता बुआ की आँखो मे पानी आ गया.

राजेश ने नाचते हुए नेहा बुआ का हाथ पकड़ कर खड़ा करके उनके साथ नाचने लगा.

राजेश-मौसी आइ लव यू ,आप बहोत अच्छी है. या हो

और राजेश नेहा बुआ को उठा कर नाचने लगा.

राजेश-मौसी आप ग्रेट हो, आप जैसा कोई नही है. आइ लव यू मौसी

नेहा बुआ-मैं गिर जाउन्गी.नीचे उतार

राजेश-मौसी आपको पता नही आपने क्या किया है. मौसी थॅंक यू, थॅंक यू मौसी

कोमल-राजेश को क्या हो गया

नीता बुआ-आज उसका नया जनम हुआ है.

नीता बुआ की आँखो मे खुशी के आसू आ गये.

राजेश के साथ कविता ,लीना और राज सॉंग लगा कर नाचने लगा.

राजेश-मौसी आप ही मुझ से सबसे ज़्यादा प्यार करती है. आइ लव यू मौसी,

नेहा बुआ-मैं गिर जाउन्गी.

बड़ी चाची , पूजा बुआ, सीमा चाची, छोटी चाची राजेश की खुशी को देख कर अपने आँखे पोन्छने लगी.

बड़ी चाची ने मुझे अपने पास बुलाया और मेरे माथे पर किस किया.

मुझे मेरा फल मिल गया. बड़ी चाची का प्यार.

राजेश ने नेहा बुआ को नीचे रख कर मेरे पास आ गया.

और मेरे गले लग कर रोने लगा.

राजेश-भैया आपने मेरी ज़िंदगी बदल ,

और फिर से रोने लगा.

कोमल-ये राजेश को क्या हुआ. पहले नाच रहा था और अब रो रहा था.

नेहा बुआ-तू नही समझेगी.

कोमल-समझा दो ना माँ

नेहा बुआ- राजेश अपनी खुशी अलग अलग तरीके से जाता रहा है

कोमल-ये कैसी खुशी है.

नेहा बुआ-मैं ने कहा था तू नही समझेगी

राजेश काफ़ी देर तक मेरे गले लग रख रोने लगा.

राजेश-भैया ,आपने मेरी लाइफ बदल दी. थॅंक्स भैया

अवी-तू खुश हैना ,बस यही काफ़ी है मेरे लिए

राजेश-भैया पता है मैं कैसे जी रहा था.

अवी-पता है. मेरा भाई है तू ,तेरा दर्द समझने ने मुझे देर लगी इसके लिए मुझे खुद पे गुस्सा आ रहा है.

राजेश-भैया आप ना होते तो

अवी-ये सोच की आज से मैं तेरे साथ हूँ

राजेश-थॅंक्स भैया

अवी-जा नीता बुआ से मिल ले

राजेश मुझसे अलग हुआ अपनी आँखे पोछ कर नीता बुआ जे पास चला गया.

राजेश-माँ

नीता बुआ-कुछ मत बोल

और नीता बुआ ने राजेश को गले लगा लिया

नीता बुआ-मुझे माफ़ कर दो राजेश, मेरे वजह से तुम्हे इतना दर्द मिला

राजेश-आप माफी माँग कर मुझे गुनहगार बना रही है.

नीता बुआ-तूने मुझे कभी बताया क्यूँ नही

राजेश-मैं आपको दुखी नही करना चाहता था

नीता बुआ-मुझे इतना प्यार करते हो,तू खुश हैना

राजेश-हां,

नीता बुआ-ऐसे खुश रहा कर. और अपने दिल की बाते बताया कर ऐसे दिल मे रखना ठीक नही होता.

राजेश-अभी कुछ नही छुपाउन्गा.

नीता बुआ-मेरा प्यारा बेटा

और नीता बुआ राजेश को चेहरे को चूम ने लगी.

लीना-मैं भी हूँ यहाँ पर

नीता बुआ-वहाँ क्यू खड़ी है. आ मेरे पास

नीता बुआ राजेश और लीना को प्यार करने लगी

और मैं अपनी चाची के पास जाकर बैठ गया.

अवी-चाची आपकी परेशानी ख़तम कर दी

ब चाची-मेरी परेशानी

अवी-हाँ, देखिए नीता बुआ कितनी खुश है.

ब चाची-तू अपनी बुआ को ऐसे खुश रखा कर ,उनको खुश देख कर मैं खुश होती हूँ

अवी-और आपको देख कर मैं खुश होता है.

म चाची-दीदी ,हमे चलना चाहिए ,विद्या और बच्चे वहाँ अकेले है.

ब चाची-हाँ चलते है

नीता बुआ-कोई कही नही जाएगा ,सब यही खाना खाते है

ब चाची-नीता फिर किसी दिन खिला देना,

पूजा बुआ-नीता तू अपने बच्चो के साथ प्यार कर ,जशन किसी और दिन मना लेंगे

नेहा बुआ-नीता ,दीदी सही कह रही है

राजेश-मौसी आप कहाँ जा रही है. आप रुकिये ना

नेहा बुआ-नही बाबा, फिर से मुझे उठा कर डॅन्स करने लग जाएगा.

कोमल-राजेश पहलवान हो गया है. जो मेरी मोटी माँ को.उठा लिया

नेहा बुआ-क्या कहा तूने मैं मोटी ,रुक तुझे अभी बताती हूँ

कोमल-चलो ना माँ, मैं क्लासस से सीधा यहाँ आ गयी.

नेहा बुआ-चल मेरी राजकुमारी,

म चाची-हम भी चलते है,चलो अवी

नीता बुआ-तुम्हे जाना है जा सकती हो .अवी आज यही रुकेगा.

राजेश-हाँ, भैया यही रुकेंगे

ब चाची-अवी को रुकना है तो रुक सकता है.

नीता बुआ-वो तो रुकेगा ही

अवी-बुआ आज नही. आज काफ़ी थक चुका हूँ.

नीता बुआ-अवी ,

अवी-बुआ कल पूरा दिन यही रहूँगा. आप के साथ ,आज जाने दीजिए

नीता बुआ-कल कोई बहाना नही चलेगा.

अवी-कल बेटा अपनी माँ को प्यार करने हाज़िर हो जाएगा.

लीना-भैया थॅंक्स,

अवी-दुबारा थॅंक्स कहा ना बात नही करूँगा.

लीना-लव यू भैया

नीता बुआ और राजेश का प्राब्लम सॉल्व करने के बाद मैं चाची के साथ घर आ गया.

2 दिन की मेहनत के बाद मुझे आराम चाहिए था.

पर घर जाते ही चाची मुझसे लाखों सवाल पूछेंगी.

.जिनके जवाब दिए बिना मुझे नींद नही आएगी

 
811सी

चाची ने घर आते पहले मुझे गले लगा कर चूमना शुरू किया

अवी - चाची क्या कर रही हो विद्या देख रही है

ब चाची- तू मेरा बेटा है तुझे प्यार करने से कैसा डर

अवी - इतना सारा प्यार

ब चाची- तूने आज मेरा नाम उँचा किया है

अवी - मैं ने तो बस अपनी फॅमिली को एक किया है

ब चाची- यही तो मैं चाहती हूँ , कि तू ऐसे अपने प्यार से सबको खुशी देता रहे

अवी - अपने भाई बहनों के लिए इतना तो मैं कर ही सकता हूँ

ब चाची- ऐसे ही अपने भाई बहनों को साथ लेकर चलना , उनको बीच मे मत छोड़ देना ,

अवी - जी

ब चाची- तेरी पूजा बुआ को तुझे देख कर तेरे पापा की याद आई थी

अवी - मेरे पापा की , क्या मेरे पापा भी ऐसे ही अपने भाई बहनों को प्यार करते थे

ब चाची- हाँ , सब साथ रहते थे , पर हर दिन एक जैसा नही होता , बड़े होते दूरिया पैदा हो जाती है

अवी - क्या हुआ था चाची ,

ब चाची-शादी के बाद दूर हो जाते हैना (झूठ) , पर तू ऐसा मत करना , हमेशा अपने भाई बहनों के साथ रहना

अवी - आपकी बात याद रखूँगा

ब चाची- मेरा प्यारा बेटा

अवी - चाची पूजा बुआ और नीता बुआ तो खुश हो गयी पर नेहा बुआ

ब चाची- नेहा बुआ क्या ?

अवी - उनको तो मेरी कोई बात पसंद नही आती , मेरी थोड़ी भी तारीफ नही की

बड़ी चाची छोटी चाची की तरफ देखने लगी

अवी - चाची नेहा बुआ ने राजेश को प्यार किया पर मुझे कुछ नही कहा

ब चाची- नेहा तो सब से ज़्यादा खुश थी

अवी - हाँ , पर मेरा नाम भी नही

ब चाची- देख , नेहा के प्यार करने का तरीका अलग है

अवी -मैं समझा नही

ब चाची- अगेर वो तेरी तारीफ करती तो तू हवा मे उड़ जाता , तुझे लगता कि तू कुछ भी कर सकता है , ऐसे मे तुझ मे ओवरकॉन्फिडेन्स पैदा ना हो इस लिए नेहा ऐसा करती है

अवी - मैं फिर भी नही समझा नेहा बुआ के प्यार को

ब चाची- देख मैं तेरी माँ हूँ , वैसे नेहा भी तेरी माँ है , मैं अपने प्यार को छुपा कर नही रखती , पर नेहा रखती है , मैं तेरी तारीफ करती हूँ तो नेहा तुझे ये बताती है कि ये सिर्फ़ एक स्टेप था तुझे और उपर जाना है अभी से हवा मे उड़ने लगेगा तो तू गिर जाएगा , तुझे गिरने से बचाने के लिए ऐसा कहती है

अवी - पर एक बार तो प्यार से मेरा नाम ले सकती थी , मुझे अच्छा लगता

ब चाची- नेहा तेरे अच्छे के लिए ऐसा करती है , इसमे उसका प्यार छुपा होता है , वो राजेश को नही तुझे प्यार कर रही थी , राजेश को तुम समझ कर प्यार कर रही थी ,

अवी - मुझे ऐसा प्यार नही चाहिए , हमेशा वो कुछ ना कुछ बुरा भला कहती है

ब चाची- अवी नेहा के भरा भुला कहने से ही तू इतना अच्छा बन पाया है

अवी - आपकी वजह से मैं ऐसा बना हूँ

ब चाची- तुझे कुछ पता नही है

अवी - तो बताइए ना

ब चाची- देख मेला का काम तुझे देने के लिए हम सब तय्यार थे सिवाय

अवी - सिवाय नेहा बुआ के , मना किया होगा नेहा बुआ

ब चाची- नेहा ने मना किया पर क्यूँ किया था पता है

अवी - नेहा बुआ मुझे पसंद नही करती

ब चाची- ये बात दुबारा मत कहना , नेहा के लिए तू क्या है ये सिर्फ़ मैं जानती हूँ

अवी - सॉरी चाची

ब चाची- ऐसे ही ग़लतियाँ तू ना करे इस लिए नेहा तुझे डाँटती रहती है

अवी - जी

ब चाची- पता है नेहा ने मेले का काम तुझे देने से मना क्यूँ किया था , क्यू कि नेहा को पता है कि ये काम कितना मुश्किल होता है , कितना टेन्षन होता है , कितना दबाव होता है , रात को सोने को समय नही मिलता , दिन मे खाने को टाइम नही मिलता , और सिर्फ़ 10 दिन बाकी थे मेले को , ऐसे मे मेले का काम तुझे देते तो तू ये काम कर नही पाता , ये नामुमकिन था ,

ब चाची- तुझे इस से बहोत ज़्यादा चोट लगती , तेरा नाम खराब हो जाता , तेरी शुरुआत खराब हो जाती तो आगे तेरा फ्यूचर पे असर होता , ठाकुर की हवेली पे क्या होता है हम सबको पता है , नेहा को डर था कि तुझे बुरी आदत लग जाएगी , ठाकुर के साथ रह कर तू शराब पीना शुरू कर देगा ,ठाकुर का छोटा बेटा कैसा है हम सबको पता है ऐसे मे तू वहाँ रहता तो तुझे भी वो आदत लग जाती

ब चाची- तुझे इन सब से दूर रखने के लिए नेहा ने मेले का काम तुझे देने से मना किया था , , उसको तेरी फिकर थी , उसने इसलिए मना नही किया कि वो तुझे नफ़रत करती है , इस लिए मना किया क्यू कि नेहा तुझे प्यार करती है

अवी - ऐसा था तो आपने मना क्यूँ नही किया मेले का काम मुझे देने से

ब चाची- तेरे चाचा ने मना कर दिया था , और ये हमारी परंपरा थी , ऐसे टूटने थोड़े देते , तेरे चाचा के बाद तू ही बड़ा है , और तुम्हारे दादाजी ने उनके बाद तुम्हे ये ज़िम्मेदारी देने को कहा था मुझे , उनको तुझ पे पूरा विश्वास था , तेरे दादाजी को पता था कि तू ही ये परंपरा आगे लेकर जाएगा ,

अवी - अगर मैं कर नही पाता मेले का काम तो

ब चाची- हमे तुझपे पूरा विश्वास था , तेरे दादाजी को तुझपे विश्वास था , हमारा प्यार तेरे साथ था , ऐसे कैसे तू कर नही पाता , मेरा बेटा सब मुश्किलो का सामना कर सकता है

अवी - तभी आपने मुझे हवेली जाने से मना किया था

ब चाची- हाँ , नेहा की बातों ने मुझे भी सोचने पे मज़बूर कर दिया , और मैं ने मीना को बोल कर तुझे घर3 मे रहने को कहा

अवी - इतना कुछ था तो नेहा बुआ ने हाँ कैसे कहा

ब चाची- नेहा तुझे मेले का काम देने से मना कर रही थी तेरी जगह राजेश को देने को कहा था , ये काम नामुमकिन था तो वो राजेश की बलि देने को तय्यार थी पर तुझे चोट लगने से बचाना चाहती थी

अवी - ये सब झूठ हैना , नेहा बुआ ऐसा कर ही नही सकती

ब चाची- यही सच है , नेहा तेरे भले का सोचती है

अवी - फिर बुआ तय्यार कैसे हुई

ब चाची- राजेश तुझसे भी छोटा है , उसे काम देते तो तुझ पे गाओं वाले सवाल पूछते , और राजेश को गाओं के बारे मे ज़्यादा कुछ पता नही है ऐसे मे वो कर ही नही पाता ,

अवी - पूजा बुआ ने समझाया होगा नेहा बुआ को

ब चाची- मैं ने समझाया उसको , तेरे दादाजी की बात नेहा को बताई , तुम्हारे दादाजी जो चाहते थे वो बताया , नेहा अपने पिताजी से बहुत प्यार करती है , उनकी बात को मना कैसे करती , नेहा ने दिल. पे पत्थर रख कर तुझे मेले का काम करने की इजाज़त दी

अवी - पर उनकी इजाज़त लेने की ज़रूरत क्या थी

ब चाची- अवी , जैसे मैं तेरी माँ हूँ वैसे नेहा भी है ,

अवी - सॉरी चाची

ब चाची- देखो अवी , तुम्हे जो सिंपल लगता है वो इतना सिंपल नही है , तुम्हे समय आने पर सब पता चल जाएगा

अवी - वो समय कब आएगा

म चाची- खाना खाने के बाद

ब चाची- मेरे बेटे ने इतना अच्छा काम किया है कि आज तो मैं अपने हाथो से खिलाओगे

अवी - चाची नेहा बुआ इतना प्यार करती है मुझसे

ब चाची- हाँ , हम तो शुरू से कहते आ रहे है , तू उसके प्यार को समझने की कॉसिश करना , देखा नही उस दिन कोमल को खुश देख कर तुझे प्यार करना चाहती थी , पर वो अपने फीलिंग को बाहर आने ही नही देती

अवी - मैं उनके प्यार को बाहर निकालूँगा ,

ब चाची- तू ने ऐसा किया ना तो मैं तुझे रोज अपने हाथो से खाना खिलाउन्गा

अवी - फिर तो मैं ऐसा ही करूँगा

ब चाची- चल अब खाना खा ले

फिर बड़ी चाची ने मुझे खाना खिलाया.

बड़ी चाची ने मुझे अपने हाथो से खाना खिलाया.

फिर चाची ने सवालो की बारिश शुरू की और मैं ने जवाब देना शुरू किया.

छोटी चाची चुप चाप सुन रही थी ,उनके सवालो के जवाब मैं कमरे मे दूँगा

सीमा चाची मुझे गरम गरम परान्ठे परोसती गयी. और अपने हसी मज़ाक वाले सवाल पूछ कर महॉल मज़ेदार बना रही थी

चाची के सवाल होते ही मैं बच्चो के साथ खेलने लगा.

मैं दूसरो को समय दे सकता हूँ तो अपने बच्चो के लिए समय निकाल ही सकता हूँ. उनके लिए थकान का बहाना नही चलेगा.

बच्चो को प्यार करने के बाद मैं अपने कमरे मे चला गया.

अपने कमरे मे आते ही मैं बड़ी चाची की बातों के बारे मे सोचने लगा

बड़ी चाची कह रही थी की नेहा बुआ मुझे प्यार करती है बस दिखाती नही

वो छुप कर मुझे प्यार करती है

मेरे अच्छे के लिए मुझे रोकती है टोकती है

बड़ी चाची क्या सच बोल रही थी

या फिर मुझसे सच छुपाने के लिए ऐसा कहा

बड़ी चाची मुझ से झूठ नही बोलती

ज़रूर कुछ तो बात होगी जिस से नेहा बुआ अपने प्यार को छुपा कर रखती है

नेहा बुआ की बात कभी कभी दर्द देती है तो कभी कभी प्यार भी नज़र आता है

मुझे खुद पता लगाना होगा कि नेहा बुआ ऐसी क्यू है

पर बड़ी चाची जब बोल रही थी तब छोटी चाची चुप थी

छोटी चाची ने कुछ भी नही कहा

एक वर्ड भी अपने मूह से नही निकाला

शायद उनको बुरा लगा होगा मेरा बड़ी चाची को पूछना

छोटी चाची ने कहा था कि मुझे कुछ भी पूछना हो तो उनसे पुच्छू

छोटी चाची को मेरा बड़ी चाची से सवाल पूछना बुरा ही लगा होगा

पर छोटी चाची कुछ बताती नही है

ऐसे ने बड़ी चाची से मैं ने पूछा तो क्या हुआ

मैं ऐसे ही इधर उधर से पूछ कर नेहा बुआ मेरे साथ ऐसे क्यू रहती है इसका पता लगा लूँगा

कोमल से कहा था की जितना हो सके नेहा बुआ के बारे मे मुझे बता दे

पर ये छोटी चाची अब तक आई क्यूँ नही

क्या उनको सच मे बुरा लगा होगा

बुरा लगा होगा तो भी छोटी चाची मेरे पास ज़रूर आएँगी

मैं छोटी चाची का इंतज़ार करने लगा

 
फ्लॅशबॅक 812

और छोटी चाची के आने का इंतज़ार करने लगा.

छोटी चाची को शायद बड़ी चाची ने बुलाया होगा

बड़ी चाची पहले छोटी चाची से बात करेंगी

छोटी चाची के चुप रहने से मुझे अजीब अजीब ख़याल आ रहे थे

और छोटी चाची को इतनी देर होने से मुझे पक्का शक हो रहा था कि बड़ी चाची और छोटी चाची कुछ बात कर रही होंगी

छोटी चाची ने मुझे मना किया था कि बड़ी चाची से इस बारे मे कुछ पूछने से

पर मैं ने आज बड़ी चाची से पूछ ही लिया

और बड़ी चाची ने मुझे बता दिया कि नेहा बुआ मेरे बारे मे क्या सोचती है

नेहा बुआ के बारे मे अब मुझे बहोत कुछ पता चल गया था

अब तो मैं सब से ऐसे ही थोड़ा थोड़ा पूछ लिया करूँगा जब तक छोटी चाची मुझे कुछ बताती नही है

और मेरा इंतज़ार ख़तम हो गया

छोटी चाची मेरे कमरे मे आ गयी

छोटी चाची के चेहरे का तेज थोड़ा कम हो गया था

ज़रूर कुछ बड़ी बात हुई होगी बड़ी चाची और छोटी चाची के बीच मे

अवी- चाची

सी चाची-अवी तूने ये क्या किया

अवी- क्या हुआ चाची

सी चाची-तूने तो कमाल कर दिया आज

अवी- राजेश के बारे मे बात कर रही है आप

सी चाची-हाँ ,तुझे क्या लगा किस बारे मे बात कर रही हूँ

अवी- मुझे लगा बड़ी चाची को मैं ने नेहा बुआ के बारे मे पूछा तो आपको गुस्सा आया होगा

सी चाची-गुस्सा , नही बहुत ज़्यादा गुस्सा आया है

अवी- ये मज़ाक था ना चाची

सी चाची-तूने सुमन दीदी से ये सब क्यू पूछा

अवी- बड़ी चाची ने आपको कुछ कहा क्या

सी चाची-मेरे सवाल का जवाब दे

अवी- जवाब आपको पता है

सी चाची-आज ऐसी क्या ज़रूरत पड़ गयी जो सुमन दीदी से पूछ लिया तूने

अवी- आज मैं ने इतना कुछ किया , राजेश खुश है नीता बुआ खुश है , नेहा बुआ खुश थी , पर मुझे नेहा बुआ ने थॅंक्स भी नही कहा , प्यार से नाम भी नही लिया

सी चाची-नेहा ऐसी ही है

अवी- वो ऐसी क्यू है इतना ही तो पूछा बड़ी चाची से

सी चाची-मुझे भी तो पूछ सकता था

अवी- आप कुछ बताती नही है

सी चाची-सही समय तो आने दो

अवी- हर सवाल का जवाब यही देती है आप

सी चाची-समय से पहले कुछ किया तो दर्द मिलता है

अवी- थोड़ा थोड़ा तो बता सकती हैना

सी चाची-थोड़ा थोड़ा कुछ नही होता

अवी- इसीलिए मैं ने बड़ी चाची से पूछा , देखा बड़ी चाची ने मुझे जवाब दे दिया

सी चाची-और तू इस जवाब से खुश हो गया

अवी- क्या मतलब

सी चाची-आधे अधूरे जवाब से तू खुश हो गया

अवी- बड़ी चाची से मैं इस से ज़्यादा पूछ नही पाया , उनको बुरा लग जाता तो

सी चाची-इसी लिए तो कह रही हूँ कि मुझे पूछा कर

अवी- आप बता देती

सी चाची-नही

अवी- इसी लिए बड़ी चाची से पूछा

सी चाची-तूने पूछ तो लिया पर उनको बुरा लगा होगा ये नही सोचा तूने

अवी- बड़ी चाची को बुरा क्यू लगेगा

सी चाची-दीदी जल्दी भावुक हो जाती है , वो तेरे सामने रोती थोड़ी

अवी- बड़ी चाची रो रही थी

सी चाची-और नही तो क्या , नेहा की वजह से तुझे दुख मिल रहा है तू परेशान है ये देख कर क्या उनको अच्छा लगा होगा

अवी- मैं तो

सी चाची-तुझे जो पूछना था मुझे पूछ लेता

अवी- सॉरी चाची

सी चाची-दुबारा ऐसा मत करना

अवी- बड़ी चाची से माफी माँग लेता हूँ

सी चाची-ऐसा तो बिल्कुल ही मत करना , वरना उनको और बुरा लगेगा , मैं ने उनको समझा दिया है

अवी- आपने बड़ी चाची को

सी चाची-मैं ने उनको सुला दिया है , पर तू दुबारा ऐसा मत करना

अवी- नही करूँगा , अब से आपको पूछा करूँगा

सी चाची-मुझ पे विश्वास रख , मैं तुझे एक दिन ज़रूर बता दूँगी

अवी- जी , मैं उस दिन का इंतज़ार करूँगा

सी चाची-अब तो लगता है वो समय जल्दी आ जाएगा

अवी- क्या मतलब

सी चाची-नेहा के दिल मे तेरे लिए प्यार पैदा हो रहा है

अवी- सच

सी चाची-हां , कोमल के बाद तुम ने नेहा की दूसरी कमज़ोरी को हाथ लगाया है

अवी- राजेश

सी चाची-नीता है नेहा की कमज़ोरी

अवी- नीता बुआ , वो तो उनकी बहन है

सी चाची-पूजा दीदी से ज़्यादा प्यार करती है नेहा नीता से ,

अवी- आपने पहले भी बताया था

सी चाची-नेहा की सिर्फ़ एक फ्रेंड है वो है नीता , देखा नही नेहा राजेश को कितना प्यार कर रही थी

अवी- बड़ी चाची ने कहा कि वो मुझे प्यार कर रही थी

सी चाची-दीदी ने सही कहा , कोमल के समय देखा नही था तुमने , नेहा अपने दिल की बात बताने से पहले कमरे मे भाग गयी थी , नेहा अपनी फीलिंग को दबा कर रखती है , उसको बहने नही देती

अवी- ये ग़लत बात है

सी चाची-हां , ऐसा करने से उनके दिल मे दर्द ही दर्द भर गया है

अवी- और नफ़रत

सी चाची-हां , तू बस अपने प्यार से उनके नफ़रत को कम कर देना

अवी- वो तो कर दूँगा पर मुझे नेहा बुआ के बारे मे कुछ भी पता नही है

सी चाची-एक कहानी सुनेगा

अवी- अब ये कहानी बीच मे कहाँ से आ गयी

सी चाची-बोल सुनेगा क्या

अवी- आप ऐसा ही करती हो , बात बदल देती हो इसी लिए बड़ी चाची से पूछ लिया

सी चाची-मैं कहानी अच्छे से बताती हूँ

अवी- मुझे नेहा बुआ के बारे मे जानना है

सी चाची-वो तो तुम्हे कभी ना कभी बता दूँगी

अवी-वो दिन कब आएगा

सी चाची-आएगा , जल्दी आएगा , तू बड़ा हो रहा है

अवी- इंतज़ार करूँगा

सी चाची-जो पूछा हो मुझे पूछा कर

अवी- तो पूछने पर आप बता देंगी

सी चाची-नही ,

अवी- ये चीटिंग

सी चाची-मैं ऐसी ही हूँ

अवी- तो मैं बड़ी चाची से पूछूँगा

सी चाची-और उनको रुला कर तुझे अच्छा लगेगा

अवी- आप से पूछ लूँगा पर पहले आपको राजेश के साथ क्या किया वो बताउन्गा

सी चाची-पहले मेरी कहानी सुन

अवी- आपको जानना नही है कि मैं ने क्या किया

सी चाची-वो बाद मे पूछ लूँगी पहले मेरी कहानी

अवी- आप बिना बताए मानेगी नही

सी चाची-मेरे बेटे को कहानी सुना कर सुलाना चाहती हूँ

अवी- बताई , आज कहानी सुनकर सोउंगा

सी चाची-हट मुझे बेड पर लेटने दे

अवी- आप , मैं आपकी गोद मे लेट जाउ

चाची बेड पे बैठ गयी और मैं उनकी गोद मे सर रख कर उनकी कहानी सुनने लगा

अवी- चाची शुरू करो

सी चाची-कहानी शुरू तो करूँगी , पर तुम्हे मेरी कुछ बाते माननी होंगी

अवी- क्या करना होगा मुझे

सी चाची-तू बीच मे कुछ नही बोलेगा , और कहानी सुनकर भी कुछ नही पूछेगा

अवी- कहानी मे ऐसा है क्या

सी चाची-प्रॉमिस कर

अवी- (कहानी तो है , इसमे इतना क्या सोचना है ) बताइए

सी चाची-प्रॉमिस करो

अवी- मैं कुछ नही पूछूँगा ना ही बीच मे और ना कहानी के बाद

सी चाची-तो सुन

वन्स अपॉन टाइम इन

अवी- रुकिये

सी चाची-मैं ने कहा था ना कि बीच मे मत बोलना

अवी- हिन्दी मे बताइए

सी चाची-ठीक है ,

तुम्हे एक नटखट , हश्मुख , एक प्यारी लड़की की कहानी बताती हूँ ,

ये कहानी एक छोटे से गाओं मे रहने वाली लड़की की है

जितना वो गाओं प्यारा था उस भी ज़्यादा वो लड़की प्यारी थी

हँसती खेलती , अपने भाई बहनों के साथ मस्ती करना यही उसकी लाइफ थी

अपने छोटी बहन को जान से ज़्यादा प्यार करती है

अपने बड़े भाई की लाडली है

अपने पिताजी के दिल का टुकड़ा है

सबकी ज़ुबान पर इन दो बहनों का नाम ही रहता है

माँ जी- रूको ये मत करना ............ ये क्या किया तुमने................ , इन दोनो से परेशान हो गयी हूँ.............. , पूरा खाना जला दिया है .............., अब भाग कहाँ रही हो ............., तुम्हारी पिटाई करनी होगी ..............., अब तुम्हारे पिताजी भी तुम्हे बचा नही पाएँगे ........................ कहाँ छुपी हो ................., बाहर निकलो............... , मुझे फिर से खाना बनाना होगा .............

अपनी छोटी बहन के साथ मिलके फिर से उसने अपनी माँ को तंग किया

पूरा खाना जला दिया

और हमेशा की तरह अपने पिताजी के पीछे जाकर छुप गयी होगी

उनका ये रोज का काम था , अपनी माँ को परेशान करना पीर अपने पिताजी के पीछे छुप जाना ,

उनको पता है कि पिताजी उनको माँ के गुस्से से बचा लेंगे

पिताजी-क्या हुआ ............., फिर से दोनो ने मस्ती की होंगी ,.............., तुम दोनो कब बड़ी होगी .............., अरे छुप जाओ तुम्हारी माँ आ रही है ................... तुम्हारी माँ बहोत गुस्से मे है .................. वहाँ नही बेड के नीचे छुप जाओ................ मैं बता दूँगा कि तुम दोनो यहाँ नही हो ..............

हमेशा की तरह पिताजी ने उनको छुपा दिया

उनकी माँ आज बहोत गुस्से मे थी , उनका गुस्सा सिर्फ़ पिताजी शांत कर सकते है ,

अपनी प्यारी बेटियो को पिताजी से बचा लिया ,

उनको बेड के नीचे छुपा दिया

माँ जी - कहाँ है वो दोनो

पिताजी-मुझे क्या पता मैं यहाँ अपना काम कर रहा हूँ

माँ जी - झूठ मत बोलिए , मुझे पता है वो दोनो यही आई होंगी

पिताजी-वो तो बाहर भाग गयी है

माँ जी - आने दो उनको आज उनको अच्छा सबक सिखाउन्गी

पिताजी-पर हुआ क्या है

माँ जी - पूरा खाना जला दिया है

पिताजी-फिर तो उनकी पिटाई करनी ही चाहिए , जाओ बाहर जाके देखो

माँ जी - आप आज उनके तरफ से नही बोल रहे है , कुछ तो गड़बड़ है

पिताजी-आज दोनो ने खाना जला दिया , कल कुछ भी कर सकती है , आज मैं तुम्हारे साथ हूँ , उनकी पिटाई कर देना ताकि वो दुबारा ऐसा ना करे

माँ जी - आप बीच मे मत आना

पिताजी-मैं तो दूर ही रहूँगा

माँ जी - कहाँ गयी वो

पिताजी-उनको बाहर भागते हुए देखा था

माँ जी - जाएँगी कहाँ , उनको आज मैं छोड़ूँगी नही

और माजी उनको ढूँढने के लिए बाहर चली गयी

माँ जी के जाते ही पिताजी बेड के पास आगये

पिताजी-तुम दोनो ने ये क्या किया , तुम्हारी माँ बहोत गुस्से मे है

पिताजी-कुछ देर यही रहना मेरे पास वरना तुम्हारी पिटाई हो जाएगी

दोनो की मस्ती उनकी एज के साथ कम होने की जगा बढ़ रही थी

पर उनके पिताजी उनको डाटने की जगह उनके साथ मस्ती करने मे लग जाते थे

हमेशा का यही ड्रामा था

माँ जी - वो दोनो तो कही नही मिली

पिताजी-जब आएँगी तब देख लेना , जाओ दुबारा खाना बना दो , मुझे भूक लगी है

माँ जी - अभी बनाती हूँ

माजी फिर से खाना बनाने के लिए चली गयी

पिताजी-अब बाहर निकलो , तुम्हारी माँ को खाना बनाने के लिए भेज दिया

दोनो हँसते हुए बाहर निकल आई

पिताजी-खाना बनाने तक यही रुकना , तब तक तुम्हारी माँ का गुस्सा ख़तम हो जाएगा

दोनो खुश हो गयी उनकी पिटाई बच गयी

पर फिर से एक जोरदर चीख सुनाई दी

पूजा - नेहा नीता , तुम दोनो को मैं छोड़ूँगी नही , तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी चीज़ो को हाथ लगाने की

ये थी उस नटखट लड़की की बड़ी बहन

लगता है नेहा और नीता ने फिर से पूजा की चीज़ो को हाथ लगाया है

पूजा की शेरनी की दहाड़ सुनकर पिताजी भी डर गये

माजी के गुस्से से ज़्यादा पूजा का गुस्सा ख़तरनाक था

नेहा और नीता डर गयी

और पिताजी ने उनको फिर से बेड के नीचे छुपा दिया

ये कहानी है नेहा की

 
फ्लॅशबॅक 812 ए

पूजा , घर की बड़ी बेटी

घर की शेरनी है

पूजा की दहाड़ शेरनी जैसी है

पूजा के मूह से अपना नाम सुनते ही नेहा और नीता फिर से बेड के नीचे छुप गयी

पिताजी भी पूजा की दहाड़ से डर गये ,

पिताजी जितना माजी से नही डरते उतना पूजा से डरते है

उनकी लाडली जो है ,

पिताजी पूजा को अपनी बेटी नही अपना बेटा मानते है

पूजा - कहाँ हो , आज तुम दोनो मेरे हाथ से मार खा कर रहोगी

पिताजी हॉल मे आ गये

पिताजी - क्या हुआ बेटी

पूजा - पिताजी आज आप बीच मे नही बोलेंगे

पिताजी - पर हुआ क्या है वो तो बताओ

पूजा - नेहा और नीता ने मेरी चीज़ो को हाथ कैसे लगाया

पिताजी- वो छोटी है , ग़लती हो गयी

पूजा - उनको कितनी बार बताया है कि मेरी चीज़ो को हाथ ना लगाए

पिताजी- तुम तीनो एक कमरे मे रहती हो तो इतना तो चलता है

पूजा - आप मेरे लिए नया कमरा बना दीजिए , मैं उनके साथ नही रहूंगी

पिताजी- आज ही बना दूँगा , गुस्सा थूक दो , देखो दोनो डर के छुप गयी है

पूजा - उनको इतना डर लगता है तो वो ऐसा करती ही क्यूँ है , कितनी बार कहा है मेरी चीज़ो को हाथ ना लगाए

पिताजी- मैं उनको समझा दूँगा , दुबारा वो ऐसा नही करेंगी

पूजा - आप हर बार यही कहते है

पिताजी- इस बार पक्का बोल दूँगा

पूजा - कहाँ है वो दोनो

पिताजी- बेड के नीचे छुप गयी है तेरी माँ भी गुस्सा है और तू भी , बिचारी डर गयी है , रो रही है

पूजा - नेहा और रो रही है , हंस रही होंगी , उसको तो रोना क्या होता है पता ही नही है

पिताजी- जाने दे ना , बच्ची है , मेरी शेरनी बेटी मेरी बात नही सुनेगी

पूजा - आपके लिए उनको छोड़ रही हूँ , पर दुबारा

पिताजी- मैं गारंटी देता हूँ ,

पूजा - दीजिए 1 रुपया

पिताजी- 1 रुपया किस लिए

पूजा - मेरी इंक की बॉटल गायब कर दी दोनो ने , नयी लेनी है

पिताजी- ये लो , पर अब बाहर मत जाना , खाना बन गया है खाना खा कर जाना

पूजा - जी , मैं खाना खा कर जाउन्गी सीधा शाम मे आउन्गि , मुझे अपनी सहेली मंदा के घर रुकना है

मंदा पूजा की बेस्ट फ्रेंड , दोनो बहनों की तरह रहती है , मंदा राकेश की बहन है , राकेश पूजा का लवर है , पूजा के पीछे पीछे भागता रहता है , पर एक नंबर का डरपोक है , पूजा की एक आवाज़ से पेशाब निकल जाती है ,फिर भी राकेश पूजा के पीछे पीछे लगा रहता है इस उम्मीद मे कि एक दिन पूजा उसके प्यार को समझ कर हाँ कर देगी

पिताजी- तू मंदा को यहाँ बुलाया कर ,

पूजा -मुझे उसके यहाँ काम है

पिताजी- क्या काम है

पूजा - आपको क्यू बताऊ

पिताजी- देख बेटी , वो राकेश

पूजा - पिताजी राकेश खरगोश है , और मैं शेरनी ,

पिताजी- ठीक है ,खाना खा कर जाना

पूजा 1 रुपया लेकर अपने कमरे मे चली गयी ,

10 पैसे की इंक लेगी और बाकी के पैसो को खर्च करेगी मंदा के साथ मिलके

पिताजी - नेहा नीता का क्या करूँ , इनको बचाते बचाते मेरे पसीने निकल जाते है

पिताजी फिर से बेड के पास आ गये

दोनो पूजा की बाते सुनकर हंस रही थी

पिताजी - तुम यहाँ हंस रही हो वहाँ मेरे पसीने निकल रहे थे

नेहा- पिताजी , आप गाओं के नंबर 1 पहलवान हो , और आप पूजा दीदी से डर रहे हो

पिताजी- बेटी मैं 10 आदमी को एक साथ पछाड़ दूं पर पूजा मुझे पछाड़ देती है , तुम उस से दूर रहा करो

नेहा - हम नही डरते पूजा दीदी से

पिताजी- अच्छा , मेरी नेहा बहादुर हो गयी है

नीता - मैं भी बहादुर हूँ पिताजी

नेहा - तुझसे ज़्यादा मैं बहादुर हूँ

नीता - कुस्ति खेल मेरे साथ फिर देख कौन बहादुर है

नेहा - मैं तुझसे बड़ी हूँ

नीता - कुछ मिनट का फरक है

पिताजी- झगड़ा मत करो , तुम दोनो

नेहा - हम दोनो बहादुर है

पिताजी- डरपोक हो , बहादुर होते तो बेड के नीचे नही छुपती

नीता -पिताजी , रानी लड़ाई नही खेलती,

नेहा - आप हमारे सेनापति हो , हमने आपको लड़ाई खेलने भेजा था

पिताजी- तुम दोनो की ऐसी बाते मुझे अच्छी लगती है

नीता - सेनापति , दुश्मन कहाँ है

पिताजी- रानी साहिबा , दुश्मन अपने कमरे मे है

नेहा - और पहली दुश्मन

पिताजी- वो खाना बना रही है

नीता - हम बाहर आ सकते है , मैदान क्लियर हैना

पिताजी- जी रानी साहिबा

और दोनो हंसते हुए बाहर आ गयी

अबी बाहर आई थी कि फिर से एक आवाज़ सुनाई दी जिस मे शिकायत साफ नज़र आ रही थी

छोटू- माँ , माँ , देखो नेहा ने क्या किया

ये छोटू है , योगेंद्र सिंग का छोटा बेटा (अवी का चाचा)

नेहा नीता से भी छोटा है ,

इसका नाम बदल कर छोटू नेहा और नीता ने ही रखा है पूजा के कहने पे

सबसे छ्होटा होने से , नेहा को इसको चिडाने मे मज़ा आता है इस लिए सब इसको छोटू कहते है

छोटू अपनी माँ का लाड़ला है

पिताजी को अपनी बेटियो से प्यार था तो माजी अपने बेटे को प्यार करती थी

छोटू की आवाज़ सुनते ही माजी बेलन लेकर बाहर आ गयी

मा जी- क्या हुआ मेरे सोना को

छोटू - देखो ना माँ मेरी नयी नोटबुक पे नेहा ने छोटू लिख दिया

माजी - नेहा , तुझे इस बेलन से ठीक करती हूँ , जा ढूँढ कहाँ है नेहा

छोटू - कहाँ होंगी , पिताजी के कमरे मे छुपी होंगी

माजी- चल मेरे साथ आज नेहा की अकल ठिकाने लाते है , बहुत परेशान करके रखा है जब देखो तब मस्ती करती है

पूजा - जय भैया बाहर आओ , माँ आज नेहा की पिटाई करेंगी

जय सिंग- पिताजी के होते हुए ये मुमकिन नही है

जयसिंघ , योगेंद्रसिंघ का बड़ा बेटा , (अवी के पापा जयसिंघ )

इस घर का वारिश

इंट्रोडक्षन -

योगेंद्रसिंघ- घर के मुखिया , रोज सुबह शाम कसरत करते है , गाओं मे इनसे सब डरते है , अपनी पत्नी से बहुत प्यार करते , अपनी पत्नी के बिना जीने का सोच भी नही सकते , अपनी बेटियो मे इनकी जान बस्ती है ,इनका एक बेस्ट फ्रेंड है ठाकुरजी (प्रतापसिंघ -रणजीतसिंघ का पिताजी), पिताजी ने ठाकुरजी की जान बचाई थी , तब से ठाकुरजी और पिताजी दोस्त बन गये

माँ जी - जितना पिताजी इनको प्यार करते है उनसे कही ज़्यादा माजी उनसे प्यार करती है , जब से शादी करके आई है कभी मायके नही गयी , क्यू कि पिताजी के बिना ये रह नही सकती , इनकी 2 कमज़ोरी है , एक उनके पति और दूसरे उनके बेटे , राजसिंघ और छोटू

जयसिंघ - घर का बड़ा बेटा , माँ का लाड़ला , पढ़ाई मे तेज , दिन भर किताबो मे घुसा रहता है , इसके सपने बड़े है , उनका पूरा करने के लिए जी जान लगा कर पढ़ाई कर रहा है , पिताजी के बाद जयसिंघ ही सबसे ज़्यादा प्यार करता है नेहा को (जयसिंघ अवी के पापा)

पूजा - बेटियो मे सब से बड़ी , घर की शेरनी , अपनी छोटी बहन की मस्ती से सब से ज़्यादा परेशान रहती है , पढ़ाई मे नॉर्मल ,एक खांस सहेली मंदा , एक लवर है राकेश मंदा का भाई , पर पूजा राकेश को भाव नही देती

नेहा - घर की नटखट मस्ती खोर, हर कोई इसके मस्ती के कारण परेशान रहता है , ऐसे बहुत कम लोग होंगे जिनको नेहा ने परेशान नही किया होगा , सब से ज़्यादा अपनी माँ और पूजा दीदी को परेशान करती है , उनको परेशान करने मे नेहा को ज़्यादा मज़ा आता है , नेहा की बेस्ट फ्रेंड उसकी जुड़वा बहन नीता है , या कहूँ तो नीता उसकी जान है , पढ़ाई मे पूजा से तेज है , और मस्ती करने मे इसको कोई हरा नही सकता

नीता -नेहा की जुड़वा बहन , कुछ मिनिट का फरक है , इसी को लेकर दोनो बहस करती रहती है कौन बड़ी है , नेहा की तरह मस्ती करती है पर नेहा को मस्ती मे हरा नही सकती , नेहा के साथ जीना ही उसका मकसद बन गया है ,, नेहा को कभी अकेला नही छोड़ती , उस से चिपकी रहती है , पढ़ाई मे पूजा से तेज पर नेहा से कम मार्क मिलते है

छोटू - घर का सबसे छोटा मेंबर माँ का लाड़ला , माँ के प्यार से पढ़ाई मे सबसे लास्ट रहता है , आराम करना , खेलना यही पसंद है , स्कूल मे ना जाने के बहाने ढूंढता रहता है , पर एक दिन अचानक इसमे बदलाव आ गया और रोज स्कूल जाने लगा फिर भी मार्क उतने ही मिले , पता नही स्कूल मे क्या करता है

मंदा - पूजा की सहेली

इंट्रोडक्षन एंड

 
पूजा - माँ बहुत गुस्से मे है ,

जयसिंघ- मुझे पढ़ाई करने दे , ये रोज का ड्रामा है कुछ नही होगा

पूजा - चलो ना देखते है

जयसिंघ- चल

और छोटू की वजह से माजी का गुस्सा और बढ़ गया

पिताजी ने माजी का गुस्सा कम कर दिया था पर छोटू ने आग ने तेल डाल दिया

माजी- कहाँ है नेहा

पिताजी- अब क्या हुआ , क्यू मेरी बेटियो के पीछे पड़ी रहती हो

माजी- आप अपनी बेटी को समझा दीजिए कि मेरे बेटे से दूर रहे

पिताजी- क्या हुआ छोटू को

छोटू- माँ देखो ना पिताजी ने भी छोटू कहा

माजी- ये सब उस नेहा की वजह से हो रहा है , आज इस बेलन से पिटाई करूँगी उसकी

पूजा - क्या हुआ छोटू

पूजा दीदी के मूह से भी छोटू वर्ड सुनते ही नेहा अपनी हँसी रोक नही पाई

माजी-क्या कहा तूने , तू होगी अपने पिता जी शेरनी , मेरे सामने तू बकरी है

छोटू- माँ , नेहा यही छुपी है , मैं ने उनकी हँसी सुनी है

जयसिंघ- तुझे कुछ भी सुनाई देता है नेहा यहा नही है

जयसिंघ भी पिताजी की तरह नेहा से बहुत प्यार करता है , वो भी नेहा को बचा रहा था

छोटू- माँ ये सब नेहा को बचा रहे है

माजी- आज ये बेलन से उसको सीधा कर दूँगी

नीता-नेहा आज तो हम बचेंगे नही

छोटू-माँ वो देखो बेड के नीचे छुपी है

नेहा -नीता क्या ज़रूरत थी बोलने की पकड़े गये ना

माजी- बाहर निकलो वरना मैं वहाँ आ जाउन्गी

नेहा - आप बेलन फेक दो तभी हम बाहर आएँगी

माजी- बाहर आती हो कि

पिताजी- नेहा बाहर मत आना

नेहा - जी पिताजी

माजी- आप के प्यार की वजह से नेहा बिगड़ रही है

पिताजी- तुम्हारे प्यार से छोटू बिगड़ रहा है , फैल होते होते बच गया

नेहा और नीता दाँत दिखा कर हँसने लगी

छोटू- मा

माजी-आप अपनी लाडली को देखो , ऐसा ना हो जाए हाथ से निकल जाए

पिताजी- मेरी बेटी ऐसी नही है

पूजा नेहा नीता- जी पिताजी

माजी- जी की बच्ची , बाहर निकल , आज तूने बहुत परेशान किया है

पिताजी - जाने दो ना बच्ची है

माजी- बच्ची बच्ची बोलते बोलते इसकी मस्ती कम होने की जगह बढ़ रही है

पूजा - जाने दो माँ ,

माजी- तू अभी नेहा पे गुस्सा हो रही थी और अब जाने देने को बोल रही है

नीता - माँ पिताजी ने उसको 1 रुपया दिया है ,

माजी - मैं फिर कह रही हूँ इतना लाड मत करो कि वो बिगड़ जाए , फिर सर पकड़ कर बैठना पड़ेगा

पिताजी- मेरी बेटी के साथ ऐसा कुछ नही होगा

माजी- पूरा गाओं राकेश और पूजा की बाते कर रहा है

पिताजी- बाते तो होती रहती है

पूजा - माँ वो डरपोक और मेरी क्या बराबरी करेगा , मेरी एक आवाज़ पे उसकी पेशाब निकलती है

जयसिंघ- जाने दो ना माँ , मुझे भूक लगी है

माजी-ऐसे कैसे जाने दूं , खाना जला दिया है

नेहा - खाना जलाया नही है

पिताजी- खाना जलाया नही है ऐसा बोल रही है

माजी- पूरी दाल खाली हो गयी है

नेहा - वो तो हमने दाल मे काली इंक डाली थी जिस से डाल खाली हो गयी है

पूजा - मेरी इंक दाल मे डाली , बाहर निकलो

पिताजी- तुम सब शांत रहो मैं पूछता हूँ

माजी- आज उसको नही छोड़ूँगी

पिताजी- फिर ऐसे खड़े रहो दिन भर

माजी- पूछिए

पिताजी- नेहा नीता बाहर आ जाओ मैं हूँ यहाँ पर

नेहा और नीता अपने मूह छोटा करके बाहर आ गयी जैसे रो रही हो

ये उनका हथियार था , उनका चेहरा देख कर पिताजी किसी को हाथ लगाने भी नही देंगे

नेहा और नीता बाहर निकलते ही पिताजी के पीछे छुप गयी

पिताजी- अब बताओ क्या हुआ

माजी - ये क्या तरीका हुआ पूछने का , डाँट कर पूछो

पिताजी- मैं पूछ रहा हू ना

छोटू- पहले मेरे बारे मे पूछिए

पिताजी- छोटू.तुम लास्ट मे

छोटू-माँ देखो पिताजी ने फिर से छोटू कहा

पूजा - चुप कर, तू छोटू है तो छोटू कह रहे है

छोटू- पूजा तेरी चोटी काट दूँगा

जयसिंघ- छोटू ये क्या तरीका है पूजा बड़ी है तुझसे , दीदी बोल

छोटू- वो मुझे छोटू बोलती है चल जाता है , वो मुझे छोटू कहेंगी तो मैं उनको पूजा कहूँगा

पिताजी- तुझे मार चाहिए

माजी- क्या कहा आपने, लगता है आपको बाहर सोना है आज

माँ की बात सुनते नेहा और नीता हँसने लगी

पिताजी- वो बदतमीज़ी कर रहा है

माजी- और नेहा क्या कर रही है

पिताजी- वो तो प्यार से बोलती है इसको छोटू

माजी- उसको पसंद नही है छोटू कहना ,

छोटू- माँ

माजी- मेरे प्यारे बेटे को कोई चिडाएगा नही

पूजा - तो कोई छोटू को छोटू नही कहेगा

जयसिंघ- छोटू को छोटू नही कहेंगे तो क्या कहेंगे वो भी बता दो

नेहा -मैं भी उसको छोटू नही कहूँगी

नीता - छोटू कोई नही बोलेगा लेकिन फिर बोलेंगे क्या

छोटू-माँ देखो सब जानबूझ कर मुझे चिड़ा रहे है

माजी- आज किसी को खाना नही दूँगी ,

छोटू नेहा को अंगूठा दिखाने लगा

पिताजी- तुम्हारे हाथ का खाना खाए बिना पेट नही भरता

माजी- ये सब छोटू कहने से पहले बोलना था

नेहा - पिताजी बाहर चलें खाना खाने

माजी- बिगाड़ो और

पिताजी- तुमने ही तो कहा कि खाना नही दूँगी , फिर मैं अपने बच्चो को भूका कैसे रहने दूं

माजी- तो क्या मैं रहने देती , मैं ने तो ऐसे ही

छोटू- माँ

पिताजी- चुप कर , माँ माँ करता रहता है , कभी तो पिताजी बोला कर

छोटू- आप मारते हो , कसरत करने को बोलते हो

पिताजी - तो क्या ज़िंदगी भर गधा बन कर रहेगा

छोटू- माँ देखो ना पिताजी क्या बोल रहे है

माजी- वो कुछ भी बोले , आपकी बेटियो से कई गुना अच्छा है मेरा बेटा

नेहा - हो गया , मुझे भूक लगी

माजी- तेरी चटनी दूँगी सबको खाने के लिए

पूजा - मुझे एक्सट्रा चिली के साथ चाय

नीता - मुझे टिका कम

जयसिंघ- मुझे स्वीट चटनी चाहिए

नेहा - मेरी चटनी मुझे मिलेगी क्या ?

फिर से नेहा और नीता हँसने लगी

और माँ अपने बेलन को अपने सर पर मारने लगी

 
812 बी

पिताजी-मेरी बेटी से जितना मुश्किल है

माजी- वो ऐसे ग़लती करती रहेंगी तो सर पीटना पड़ेगा

नेहा - माँ हमने किया क्या है

माजी- पूरी दाल जला दी

पिताजी- दाल जली नही है ऐसा कहा ना नेहा ने

नीता - सिर्फ़ काली हो गयी है

पिताजी- क्या ?

नेहा - पिताजी , दाल मे हमने दीदी की इंक डाल दी

पूजा - मेरी इंक ,

नेहा - दीदी आपको तो थॅंक्स कहना चाहिए , हमारे वजह से 1 रुपया मिला है आपको

पूजा - इसका ये मतलब नही है कि तू कुछ भी करेगी

नीता - दीदी दुबारा ऐसा नही करेंगे

पिताजी- पर तुमने ऐसा किया क्यूँ

नेहा - मास्टर जी ने कहा था

जयसिंघ- मास्टर जी ने , झूठ मत बोलो

नीता - सच भैया मास्टर जी ने कहा था

पिताजी- शुरू से बताओ क्या कहा किसने

नेहा - कल स्कूल मे मास्टर जी ने कहा कि "दाल मे कुछ काला है "

जयसिंघ- ये तो कहावत है

पिताजी- तो तूने इंक डाल दी दाल मे

नीता - पूरी बात तो सुनिए

पिताजी- कहो

नेहा - हम ने मास्टर जी को कहा कि दाल तो पीली(येल्लो) होती है

नीता - तो मस्टेरज़ी ने कहा कि दाल मे कुछ काला होता है ये कहावत है

पिताजी- तो

नेहा - हमने पूछा कि काला मतलब , क्या थोड़ी काली होती है जिससे हमे दिखाई नही देती

पूजा-मास्टर जी ने क्या कहा

नीता - ये इंक जैसी काली है वैसा काला

पिताजी- तो तुमने दाल मे इंक डाल दी

नेहा - हम देखना चाहते थे कि डाल मे काला कहाँ होता है

जयसिंघ-मास्टर जी से ठीक से पूछना था ना

नीता - कैसे पूछते , हमारे कुछ पूछने से पहले घंटी बज गयी और छुट्टी हो गयी

पूजा - तो आगे क्या हुआ

नेहा - घर आकेर रशोई घर मे देखा तो माँ ने दाल नही बनाई थी , पर आज बनाई थी

नीता - हमने माँ को रशोई घर से बाहर निकाला

पिताजी- वो कैसे किया

माजी- दोनो ने कहा कि बाहर बारिश हो रही है कपड़े गीले हो जाएँगे ,, तो मैं बाहर चली गयी ,

नेहा - फिर हमने दाल चेक की , पर दाल तो पीली थी , मास्टर जी ने कहा था कि डाल मे कुछ काला होता है, या फिर काला डालना होता है ,

जयसिंघ- मुझे पूछ लेती , मैं बता देता

नेहा - आपके पास आए थे पर आपने कहा बाद मे पूछना जो पूछना है

जयसिंघ-तो रुक जाती

नीता- रुक जाती तो दाल हमारे पेट मे चली जाती

पिताजी- दाल मे काला नही मिला

नीता - नही

पिताजी- फिर इंक क्यू डाली दाल मे

नेहा -मास्टर जी ने कहा था कि इंक जैसा काला तो हमे लगा कि इंक डाल दें दाल मे तो पता चल जाएगा

पूजा - मेरी इंक क्यू ली

नीता - हमारे पास ब्लू इंक थी , काली इंक सिर्फ़ आपके और भैया के पास होती है

पूजा - तो भैया की लेती ना

नेहा - भैया की क्यू लूँ , भैया पढ़ाई करते है , आपकी वाली इंक की बोटल एक महीने से वैसी ही पड़ी है

पूजा - चुप रहो

पिताजी- तुम मेरा 1 रुपया वापस करना

पूजा- अब नही मिलेगा

नीता - दीदी 10 पैसे मेरे है उसमे

पूजा - मिल जाएँगे तुमको

पिताजी- ये क्या चक्कर है

पूजा - कुछ नही , अरे हाँ तुम कुछ बता रही थी इंक के बारे मे ( ये तो उनकी चाल होती है , नेहा नीता पूजा की चीज़ो को हाथ लगाती है फिर पूजा गुस्सा होने का नाटक करती है और जो पैसे मिलते है वो आपस मे शेयर करती है )

नेहा - हाँ , तो हमने दीदी की इंक की बॉटल ले ली ,

छोटू- पर मेरी नोटबुक खराब क्यूँ की

नीता - चेक कर रहे थे कि इंक ब्लू है या ब्लॅक है

माजी- चेक करने के लिए इसकी बुक मिली

नीता - माँ वो नोटबुक ऐसेही पड़ी हुई थी

पिताजी- पर उसपे छोटू ही क्यूँ लिखा

नेहा - ऐसे ही , छोटू को तंग करने मे मज़ा आता है

पूजा - मुझे भी

छोटू- पूजा की बच्ची

पिताजी- छोटू चुप रहो

नीता - फिर हमने इंक दाल मे डाल दी

पिताजी- तो पता चला दाल मे क्या काला था

नेहा - हाँ , पूरी दाल ही काली थी

जयसिंघ- मेरी बहनें साइंटिस्ट बनेगी (यही बात अवी भी कहता है कविता और लीना को , )

पूजा - मैं तो बन जाउन्गी

जयसिंघ- मैं तेरी नही नेहा नीता की बात कर रहा था

पूजा - पिताजी देखो भैया क्या कह रहे है

पिताजी- जय सिंग , तुम बड़े हो

पूजा ने अंगूठा दिखा दिया अपने भैया को

नेहा - तो हमे दाल मे कुछ काला नही मिला

पिताजी- कैसे मिलता , वो काला कंकड़ तो निकाल लिया था

जयसिंघ- पिताजी डाल मे कुछ काला है इसका मतलब कुछ और होता है

नीता - क्या होता है भैया

जयसिंघ- मतलब कुछ सन्शय जैसा है , जैसे पूजा को 1 रुपया दिया और नीता 10 पैसे माँग रही है , मतलब कुछ तो गड़बड़ है , दाल मे कुछ काला है

नेहा - समझ गयी

नीता- भैया पहले बता देते तो दाल काली नही बन जाती

पिताजी- लो भगवान , मिल गया तुम्हारा जवाब

माजी - इनके मास्टर जी को बेलन से सीधा करना होगा , बच्चो को अधूरा ज्ञान नही देना चाहिए

पिताजी- देखा मेरी बेटियो को , इनकी कोई ग़लती नही थी

माजी- मेरी दाल की ग़लती क्या थी , कुछ के चक्केर मे पूरी दाल काली हो गयी

पूजा - दाल खा खा कर बोर हो गयी हूँ

माजी- मेरी दाल को कुछ मत कहना

छोटू- माँ मेरी नोटबुक

माजी- इसको 2 रुपये दीजिए

पूजा -2 रुपये

पिताजी-जयसिंघ ला देगा

माजी- पूजा को पैसे दे सकते तो मेरे बेटे को क्यू नही दे रहे हो

पिताजी- लो , 2 रुपये

छोटू ने 2 रुपये मिलते ही नेहा पूजा को ठेंगा दिखाया

नेहा- हमारे वजह से पूजा दीदी और छोटू को पैसे मिले है

माजी- फिर छोटू कहा तूने

नीता- माँ तुम्हारा छोटू भाग गया 2 रुपये मिलते ही

माजी- मैं भी जाती हूँ वरना फिर से दाल मे कुछ काला मिल जाएगा

और माँ के इस जोक पे सब हँसने लगे

जयसिंघ- मैं ने कहा था ना पिताजी कुछ नही होने देंगे

नेहा - दीदी मेरे 10 पैसे

नीता- मेरे भी 10 पैसे

पिताजी- ये क्या चक्कर है

पूजा - आप नही समझोगे ,

और तीनो अपने कमरे मे चली गयी

जयसिंघ- पूजा आपको चुना लगा कर गयी है पिताजी

पिताजी- पता है मुझे , मुझे मत बता , वो तीनो खुश हैना बस इतना ही चाहिए मुझे

और फिर दाल येल्लो वाली , काला निकल गया था

सब ने मिलके हंसते हुए खाना खा लिया

हमारी नेहा इसी तरह मस्ती मज़ाक करते हुए अपनी लाइफ जी रही थी

पिताजी भी उनके साथ मस्ती करते हुए छोटे बच्चे बन जाते

पूजा तो नेहा नीता पे ऐसे ही गुस्सा करती , फिर पैसे मिलते आपस मे बाँट लेती

जयसिंघ तो पढ़ाई मे बिज़ी रहता

पर जब नेहा कहती तो वो पढ़ाई छोड़ कर खेलने लग जाता

सभी 5 भाई बहन मिलके खेलने लग जाते तो सूरज कब ढल गया पता भी नही चलता

नेहा सिर्फ़ घर के लोगो को परेशान नही करती थी गाओं मे भी बहुत मस्ती करती थी

नीता और नेहा के किस्से गाओं मे मशहूर होने लगे

योगेंद्रसिंघ की वजह से किसी की हिम्मत ही नही होती कि कोई नेहा को रोक ले

एक बार तो पंडितजी को परेशान करने का सोच रही थी नेहा

ये हुआ ऐसे कि

ये बात एक साल बाद हुई थी

नेहा और नीता को अचानक मंदिर जाने की इच्छा हुई

तब जंगल ज़्यादा दूर तक फैला था , मंदिर तक जाने के लिए रास्ता था पर बारिश की वजह से रास्ता भी दिखाई नही देता

गाओं को लग कर था जंगल ,

मंदिर मे जाने के लिए जंगल से होकर जाना पड़ता था

नेहा ने मंदिर जाने का प्लान नीता को बता दिया ( लेकिन पिताजी और ठाकुरजी ने मेले के समय मंदिर तक के जंगल को कम कर दिया था .

नेहा - नीता , चल मंदिर चलते है

नीता- तू पागल है मंदिर तो जंगल मे है ,

नेहा - तो क्या हुआ , जंगल मे शेर नही है

नीता- तो क्या हुआ , मुझे डर लगता है

नेहा - डर तो मुझे भी लगता है ,

नीता- हवेली चलते है

नेहा - चल ना मंदिर

नीता- तू जाएगी तो मैं तो आउन्गि ही पर पिताजी

नेहा - उनको पंडितजी बताएँगे

नीता- पंडित जी , वो तो मंदिर मे होंगे वो कैसे बताएँगे

नेहा - मेरे पास एक प्लान है

नीता- बता ,

नेहा ने नीता को प्लान बता दिया

नीता- इसमे मज़ा तो आएगा पर पिताजी को परेशान नही करेंगे

नेहा - तो

नीता- पिताजी घबरा जाएँगे

नेहा - पिताजी को पता है हमारे बारे मे , वो ज़्यादा टेन्षन नही लेंगे

नीता- माँ को बताएँगे

नेहा - माँ तो ज़्यादा डर जाएँगी

नीता- तो क्या करे

नेहा - तू चल रही है क्या

नीता- चलो

दोनो तय्यार हो गयी मंदिर जाने को

पिताजी- ये क्या कर रही हो

नेहा -.प्लान बनाया है

पिताजी- अब क्या कर रही हो

नीता- नेहा से पूछिए

पिताजी-नेहा क्या चल रहा तुम्हारे दिमाग़ मे

नेहा -.मंदिर जा रहे है

पिताजी- क्या

नीता- मंदिर जा रहे है

पिताजी-जंगल मे जा रही हो

नेहा -.आप रोकोगे नही

पिताजी- तुम्हे जाने देने का सवाल ही पैदा नही होगा

नेहा- पिताजी जाने दीजिए ना

पिताजी-मैं भी आउन्गा

नेहा -आपके आने से प्लान खराब होगा

पिताजी- प्लान क्या है

नीता- ये टमाटर मेरे ड्रेस पे लगेगा , और मैं शेर ,

पिताजी-पंडितजी को परेशान करना है

नेहा -हाँ

पिताजी- क्यूँ उस पंडित की नींद खराब कर रही हो

नीता- बस थोड़ा मज़ाक कर रहे है

पिताजी-चलो मैं आता हूँ ,

नेहा -जाने दीजिए प्लान कॅन्सल , ऐसे मज़ा नही आएगा

पिताजी- तो यही घर पे जो करना वो करो पर जंगल ग़लती से भी मत जाना

नीता- कहा था तुम्हे

नेहा -पिताजी , जाइए मैं आपसे बात नही करूँगी

पिताजी- मैं चलता हूँ तो मना कर रही हो ,

नेहा - मैं रो दूँगी

पिताजी-तुझे अकेले कैसे जाने दे सकता हूँ

नेहा -मुझे जाना है तो जाना है

पिताजी- हवेली चल वहाँ जो करना है करना

नेहा - मुझे मंदिर जाना है वो भी अकेले

पिताजी- जयसिंघ

जयसिंघ- पिताजी आपने आवाज़ दिया

पिताजी- नेहा को मंदिर लेकर जाओ

जयसिंघ- मेरी पढ़ाई

पिताजी- जितना कहा है उतना करो

जयसिंघ- जी पिताजी

नेहा -मुझे अकेला जाना है

पिताजी- तू समझ क्यू नही रही है वो जंगल है

नीता- मैं भी तो रहूंगी ना साथ मे

पिताजी-तुम दोनो छोटी हो

माजी- मैं ने पहले ही कहा था कि इतना चढ़ाओ मत सर पे

पिताजी- मुझे सोचने दो

नेहा-मुझे जाने है मंदिर

माजी- एक थप्पड़ लगा दीजिए

पिताजी- क्या कहा

माजी- कुछ नही मैं तो ऐसे ही बोल रही थी

पिताजी -ऐसा दुबारा मत कहना

माजी- जी ,

पिताजी- जाओ तय्यरी करो जाने की

नेहा को इजाज़त मिलते ही वो खुश नही हुई

 
फ्लॅशबॅक 812सी

पिताजी ने नेहा और नीता को इजाज़त दे दी

पर नेहा को इजाज़त मिलने के बाद भी खुश नही थी

क्या चल रहा था नेहा के दिमाग़ मे

उसको तो इजाज़त मिल गयी पर उनके चेहरे पे ये फीकी स्माइल क्यू थी

दोनो अपने कमरे की तरफ जाने लगी तो पिताजी ने इनको रोक लिया

पिताजी- तुम दोनो को नही सब को तय्यार होने को कहा है

नेहा- पिताजी हमे अकेले जाना है

पिताजी- तुम मंदिर नही जा रही हो

नेहा - पर आपने अभी तो पर्मिशन दी थी

पिताजी- तुम छोटी हो मंदिर मे जाने को

नीता - पिताजी

पिताजी- तुम्हे शहर ले जाता हूँ , तुम मंदिर जाने का भूल जाओ

नेहा - हमे मंदिर जाना है

पिताजी- तुम्हे शहर ले जा रहा हूँ मंदिर जाने से ज़्यादा मज़ा आएगा

नीता - हमे पंडितजी को डराना है

पिताजी-शहर मे ज़्यादा मज़ा आएगा

नीता - हमे मंदिर जाना है

नेहा - हम शहर चलेंगे पर मैं जो कहूँगी वो करना होगा

पिताजी- तुम जो कहूँगी वही करेंगे

नीता - नेहा तुमने तो कहा था

नेहा - प्रॉमिस कीजिए

पिताजी- प्रॉमिस

नीता- पर हमे तो मंदिर जाना था

नेहा को शहर जाने की पर्मिशन मिलते वो उछल पड़ी

नीता को समझ नही आ रहा था कि नेहा कर क्या रही थी

प्लान तो मंदिर जाने का था

फिर नेहा शहर जाने की बात से इतनी खुश क्यू है

नीता तो अपना सर खुजा रही थी

पिताजी भी समझ नही पा रहे थे कि नेहा इतनी खुश क्यूँ है

उन्हो ने तो शहर जाने की इजाज़त दी फिर नेहा इतनी खुश क्यू है और नीता ऐसा रिक्ट क्यू कर रही थी

नीता - नेहा तुझे क्या हो गया , हमे मंदिर जाना था ना

नेहा - नीता हम शहर जाएँगे , राजेश खन्ना की नयी मूवी देखेंगे

नीता - क्या ?

नेहा - तूने तो रात मे कहा था कि राजेश खन्ना की नयी मूवी देखनी है तुझे

नीता - पर मंदिर जाने की बात

नेहा - वो नाटक था पिताजी को शहर ले जाने के लिए

पिताजी- तो तुम.मंदिर जाने का नाटक कर रही थी

नेहा - हाँ , मुझे शहर जाना था

पिताजी- तू सीधे सीधे बता देती तो मैं मना नही करता

नेहा - पर माँ मना करती ,

पिताजी- तू भी ना नेहा , चलो सब तय्यारी करो शहर जाएँगे हम

नीता - मुझे नही जाना शहर

नेहा- तुझे क्या हुआ

नीता - तूने अपना प्लान मुझे पहले क्यू नही बताया

नेहा - राजेश खन्ना की मूवी है

नीता - मुझे तूने बताया क्यू नही

नेहा - सॉरी बाबा , मैं ने तेरे लिए ये सब किया

नीता - तुझे बताना चाहिए था ,राजेश खन्ना से मुझे तू प्यारी है

पूजा-नीता नही आ रही है तो उसके पॉपकॉर्न मैं खा लूँगी

जयसिंघ-मैं भी नीता की आइस क्रीम खा लूँगा

नेहा - नीता नही जाएगी तो मैं भी नही जवँगी , नीता मैं ने तेरे लिए किया

पिताजी- नीता राजेश खाना की मूवी है

नीता - तुम दुबारा ऐसा मत करना , तभी आउन्गि

नेहा - अब सब कुछ तुझे बताया करूँगी

माजी - आप बिगाड़ रहे है दोनो को ,

छोटू- मैं तय्यार हूँ

पूजा - छोटू तुझे नही ले जा रहे है

छोटू- माँ मैं पूजा का खून पी जाउन्गा

नेहा- छोटू डार्क्युला बन गया , भागो शहर भागो

पिताजी- तुम चिंता मत करो मेरी बेटी अपनी मर्यादा जानती है

माजी- जैसा आप ठीक समझे

छोटू- चलिए ना मैं तय्यार हू

पिताजी- तुम सब भी तय्यार हो जाओ ,

नेहा ने फिर से अपनी शैतानी दिमाग़ से एक बढ़िया प्लान तय्यार किया

मंदिर जाने नही देंगे ये बात नेहा को पता थी तभी उसने मंदिर जाने का बहाने करके शहर जाने का प्रॉमिस करवा लिया

नेहा ने नीता के लिए सब किया

नीता को राजेश खन्ना कितना पसंद है ये सबको पता है

राजेश खन्ना की नयी मूवी और नीता ना देखे ये नेहा कैसे होने देती

नीता के लिए तो नेहा कुछ भी कर सकती है

नेहा और नीता का प्यार देख कर पिताजी को अच्छा लगा

पूजा को भी शहर जाने को मिल रहा है

वो भी शहर से अपने काम की चीज़े खरीद लेंगी

पूजा अपने पैसे बचा कर रखती है ताकि जब भी वो शहर जाने तो चुपके से उसकी चीज़े वो ले सके

जयसिंघ को भी कुछ किताबें ख़रीदनी थी

जयसिंघ को मूवी देखने मे इंटेरेस्ट नही था

पर थियेटर के पास जो मॉडर्न स्कूल है उसमे जयसिंघ का इंटेरेस्ट था

जयसिंघ उस स्कूल को देखने जाता है , उसकी इच्छा है कि वो ऐसे स्कूल मे पढ़ कर इंजिनियर बन जाए

छोटू तो नेहा के इस चक्केर की वजह से खुश था

उसे मूवी देखने को मिल रही थी

कल स्कूल मे अपने दोस्तो को मूवी के किस्से बता कर अपनी बढ़ाई करेगा

सब तय्यार होते पिताजी सबको शहर ले जाने लगे

नीता तो नेहा का हाथ पकड़ कर चल रही थी

नेहा ने सही टाइम पर ड्रामा किया , उनके गाओं मे जो एक बस आती है उस मे बैठ कर शहर आ गये

शहर आते सब थियेटर की तरफ जाने लगे

पाँचो भाई बहन एक दूसरे का हाथ पकड़ कर आगे आगे चल रहे थे ,

पिताजी और माजी उनके पीछे पीछे चल रहे थे

अपने बच्चो को इस तरह साथ साथ चलते हुए , उनका प्यार देख पिताजी और माजी खुश थे

माजी- सुनिए

पिताजी- हां ,

माजी- जय अपने भाई बहनों को कैसे साथ लेकर चल रहा है

पिताजी- हां, मैं चाहता हूँ कि वो सबको साथ लेकर चले

माजी- छोटू पे अगेर जय ने ध्यान दिया तो वो भी उसकी तरह पढ़ाई करेगा

पिताजी- छोटू को तुम्हारे लाड प्यार ने बिगाड़ दिया है

माजी- वो बचपन से ऐसा है तो उसमे उसकी क्या ग़लती , देखना मेरा छोटू इस घर को संभालेगा

पिताजी- तुम सही कह रही हो , जय के सपने बहुत बड़े है , मुझे डर लग रहा है उसके सपनो से

माजी- सपने देखना तो अच्छी बात होती है

पिताजी- पर जय कुछ ज़्यादा ही सीरीयस हो गया है , वो शहर3 जाकर पढ़ना चाहता है

माजी- जाने दीजिए ना , उसकी इतनी इच्छा है तो , उसको भी उसके मर्ज़ी से जीने दीजिए

पिताजी- अगेर वो शहर3 चला गया तो हमारे गाओं हमारी परंपरा का क्या होगा ,वो शहर की रोनक मे खो जाएगा

माजी- वो सिर्फ़ पढ़ने तो जाना चाहता है

पिताजी- तुम समझ नही रही हो ठाकुर ने मुझे बताया है कि एक बार अगर शहर चला गया तो गाओं वापस आना मुश्किल हो जाता है

माजी- ठाकुर भी तो विलायत से आए थे

पिताजी- उनको उनकी हवेली की वजह से आना पड़ा

माजी- जय भी आ जाएगा

पिताजी- उसके सपने बढ़ते जाएँगे शहर जाकर

माजी- सोचिए ना अगर जयसिंघ अच्छा ऑफीसर बन गया तो उसके पीछे पीछे पूजा नेहा नीता और छोटू भी कुछ बनेगे

पिताजी- लेकिन हमारी परंपरा

माजी- उसके लिए हम हैना

पिताजी- क्या मतलब

माजी- हमारा पोता होगा उसे हम अपनी परंपरा का इस घर का वारिश बनाएँगे

पिताजी- जयसिंघ के बेटे को

माजी- जयसिंघ या फिर छोटू के बेटे को

पिताजी- एक बार ठीक से सोचो

माजी- जयसिंघ या छोटू के बेटे को वारिश बना लेंगे

पिताजी- तो जयसिंघ को शहर 3 भेज दूं पढ़ाई करने को

माजी- इनको जीने दीजिए उनकी मर्ज़ी से ,

पिताजी- अगर हमारे पोते ने भी यही कहा तो

माजी- हम उसे अपने पास रखेंगे , जयसिंघ को समझाना मुश्किल होगा , वो अपने सपने को जीना चाहता है

पिताजी- तुम कह तो सही रही हो , जयसिंघ किसी भी पूजा मे भाग नही ले रहा है

माजी- उसका मन ही नही है इसमे तो वो हमारी परंपरा आगे लेकर गया तो भी उसका फ़ायदा नही होगा , मंदिर मे मेले के समय दिल से पूजा करनी पड़ती है , जय का दिल कही और होगा

पिताजी- मुझे इतना बताओ तुम क्या चाहती हो

माजी- जयसिंघ को शहर3 जाने दीजिए , उसे उसके मर्ज़ी से जीने दीजिए , आप देखना , हमने अगर सच्चे दिल से पूजा की है तो जयसिंघ खुद हमारे पास आएगा और कहेगा कि वो परंपरा आगे चलाना चाहता है

पिताजी- काश ऐसा हो

माजी- कल वो आगन मे अकेला बैठ कर आसमान की तरफ देख कर सोच रहा था

पिताजी- क्या कहा जय ने

माजी- वो कह रहा था कि आप सिर्फ़ अपनी बेटियो को प्यार करते है , आपको उसकी कोई परवाह नही है ,

पिताजी- उसने ऐसा कहा

माजी- मुझे ये सुनकर रोना आ गया था

पिताजी- तुम्हे तो पता है मैं सबको एक जैसा प्यार करता हूँ

माजी- पर जय नही समझ रहा ना , उसको तो शहर जाके पड़ना है बड़ा आदमी बनना है

पिताजी- वो अब यहाँ रहा तो , हमारे लिए अच्छा नही होगा और ना उसके लिए

माजी- मैं भी यही कह रही हूँ , पता नही किस मनहूस ने मेरे बेटे के दिमाग़ मे शहर जाने का भूत घुसा दिया है , उसे कीड़े पड़े

पिताजी- मैं कुछ करता हूँ

माजी- आप क्या करेंगे

पिताजी- मैं चाहता हूँ कि ये पाँचो भाई बहन ऐसे साथ साथ ज़िंदगी भर चले ,पर जयसिंघ के रास्ते अलग दिख रहे है

माजी- वो बड़ा होकेर ऐसा बोल रहा है जिस से मुझे डर है कि छोटू भी ऐसा ना सोच ले कि आप उसे प्यार नही करते

पिताजी- मैं बात करता हूँ जयसिंघ से

माजी- किस बारे मे

पिताजी- हम अपना वारिश अपने पोते को बनाएँगे

माजी- जी ,

पिताजी- तब जयसिंघ भी बीच मे आया तो मैं सुनूँगा नही , मेरा पोता ही मेरा वारिश बनेगा

माजी- अपने पोते को हम आपके जैसा बनाएँगे

पिताजी- हमे जयसिंघ से बहुत उम्मीद थी , जाने दो जीने दो उसे उसके मर्ज़ी से , उड़ने दो उसे ,

माजी- यही ठीक होगा

पिताजी- पर ऐसे नही उसे कुछ करना होगा

माजी- क्या ?

पिताजी- उसके अच्छे मार्क्स लाने होंगे तभी उसे शहर3 भेजेंगे

माजी- मैं दुआ करूँगी की उसे कम मार्क मिले ताकि वो गाओं मे ही रहे

पिताजी- और क्या कहा था जयसिंघ ने

माजी- उसने कहा कि दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गयी है और हम यही गाओं मे उसी पुरानी परंपरा मे फसे हुए है , उसे ये सब नही करना , उसे दुनिया के साथ चलना है , उसे बड़ा आदमी बनना है

पिताजी- वो अब हमारे काम नही आएगा

माजी- वही मैं कह रही थी

पिताजी- उसे शहर3 ही भेज देने मे उसकी और हमारी भलाई है , उसे शहर3 के कीड़े ने काट लिया है

माजी- आप बस सोच समझ कर फ़ैसला करना

पिताजी- हम मिलकर फ़ैसला करते है , और जयसिंघ को उसके मर्ज़ी से जीने देते है

माजी- जी , देखिए , जयसिंघ की नज़रें कहाँ है

जयसिंघ को जाना है थियेटर की तरफ पर वो स्कूल की तरफ देख रहा था

शहर के मॉडर्न स्कूल के बच्चों को देख कर जयसिंघ ने पूजा और छोटू का हाथ छोड़ दिया

बाकी चारो आगे जाने लगे

पर जयसिंघ वही रुक कर स्कूल की तरफ देखने लगा

माजी- देखा आपने

पिताजी- तुम सही कह रही हो ,जयसिंघ ने अपने भाई बहनों का साथ छोड़ दिया है , अभी से वो चारों जयसिंघ के बिना रहेंगे तो उनको आगे जाकर जयसिंघ की कमी महसूस नही होगी ,

माजी- जयसिंघ

पिताजी- रहने दो उसे यहाँ

माजी- पर

पिताजी- उसे कुछ देर अकेला छोड़ दो हम थियेटर मे चलते है

जयसिंघ स्कूल के पास चला गया

और बाकी सब थियेटर के अंदर आ गये

जयसिंघ तो दिन मे सपने देख ने लगा

उसे लग रहा था कि वो भी इस स्कूल मे पढ़ रहा है

वो तो सबको भूल ही गया और अपने सपनो मे खो गया

 


फ्लॅशबॅक 812 डी

जयसिंघ अपने सपने मे खो गया था

और बाकी सब स्कूल के सामने वाले छोटे से थियेटर मे चले गये

थियेटर का मालिक पिताजी का दोस्त था जिस से टिकेट मिल गयी ,

राजेश खन्ना की मूवी की टिकेट मिलना वो भी 1 स्ट दे वाली , मुश्किल होता है

पर पिताजी ने नेहा और नीता के लिए थियेटर वाले से दोस्ती कर ली जिस से उनको टिकेट मिल जाती है

छोटू- मुझे समोशा चाहिए

पिताजी - वो पिक्चर आधी होने के बाद मिलेगा अभी पॉपकॉर्न

छोटू- मैं भैया का पॉपकॉर्न भी लूँगा

नेहा - भैया कहाँ है

पूजा - कहाँ होंगे , स्कूल के सामने हमेशा की तरह

नीता- इतनी अच्छी मूवी छोड़ कर कैसे जा सकते है भैया

पूजा - भैया को ,यहाँ आते ही दिन मे सपने दिखाई देते है

पिताजी- तुम सब चलो अंदर

नेहा - पिताजी एक बात पुच्छू

पिताजी- हाँ पूछो ना ,

नेहा - भैया को आप शहर3 क्यू नही भेजते पढ़ाई करने को ,उनकी कितनी इच्छा है

पूजा - पिताजी मैं भी नेहा की बात से सहमत हूँ , भैया का सपना है शहर3 जाके पढ़ने का तो पढ़ने दीजिए ना

नीता -भैया शहर3 जाएँगे तो हमे भी नयी नयी बाते सीखने को मिलेंगी

पिताजी- उसके सपने बहुत बड़े है अगर पूरे हुए तो भी अच्छा नही होगा और नही पूरे हुए तो भी अच्छा नही होगा

नेहा - पिताजी ऐसे मे कॉसिश का तो समाधान रहता है कि हमने कॉसिश की है , ऐसा लगता कि अगर हारते नही तो जीत हमारी होती

पिताजी- मेरी बेटी इतनी अच्छी बाते करती है ये मुझे पता नही था , तू तो बड़ी हो गयी है

नीता- मैं भी बड़ी हुई हूँ

नेहा - तू कितनी भी बड़ी हो जा रहेंगी तो मुझसे छोटी ही

नीता- माँ मुझे बड़ा क्यू नही किया

माजी- मेरे बस मे कुछ नही था ,

छोटू- अगर होता तो माँ मुझे बड़ा बना देती हैना

माजी- तुम छोटा ही अच्छा है , इसी लिए तुझे इतना प्यार करती हूँ

पूजा - हम भैया की बात कर रहे थे

नेहा - मुझे लगता है अगर भैया को इतना अच्छा गाओं छोड़ कर बाहर जाना है तो ज़रूर उन्हो ने कुछ सोच रखा होगा

पूजा - मैं तो इसी गाओं मे रहूंगी

माजी- शादी के बाद तो तुझे जाना होगा

पूजा - पिताजी मुझे इसी गाओं मे रहना है

पिताजी- तुम्हारे दूल्हे को यहा लेकर आएँगे

नेहा - और मैं

नीता- मैं पहले बता रही हूँ , जहा नेहा रहेंगी वहाँ मैं रहूंगी

माजी- अब तुम बड़ी हो गयी हो , अब तो दूर रहना सीखो , शादी के बाद तुम्हे दूर रहना होगा

नीता- फिर तो मैं शादी ही नही करूँगी

नेहा - हम दो भाई से शादी करेंगी , फिर तो हम साथ रहेंगे

माजी- ये दोनो भी ना

पिताजी- सही तो कहा , साथ रहने मे इनको एक दूसरे का प्यार मिलता रहेगा

नेहा - एकता मे शक्ति

पिताजी- सही कहा , तो चले अंदर

पूजा - हम फिर बात बदल रहे है , हम भैया के बारे मे बात कर रहे थे

नेहा - पिताजी भैया को शहर3 जाने दीजिए ना , मैं ने भैया को कई बार अकेले बैठ कर सोचते हुए देखा है

पूजा - वो स्कूल मे भी यही सोचते रहते है , मास्टर जी कहते है बच्चे बड़े होते है तो उनको उड़ने के लिए घर छोड़ना पड़ता है

नीता - भैया को हमारा प्यार वापस गाओं मे लेकर आएगा

माजी- काश ऐसा हो

पिताजी- ठीक है , वैसे भी हम इस्पे बात कर चुके है , अब तुम सब भी यही चाहती हो तो मैं बात करता हूँ जयसिंघ से चलो अब मूवी देखने

नीता - अब तो मूवी देखने मे ज़्यादा मज़ा आएगा

और सब हॉल के अंदर आ गये

अंदर आते ही राजेश खन्ना को देखते ही नीता ने सिटी बजा दी

और नेहा नीता मूवी मे खो गये

पूजा को भी मूवी देकने मे मज़ा आ रहा था

पूजा को हेरोयिन के कपड़ो मे इंटेरेस्ट था ,

छोटू तो अपनी ही धुन मे अपनी माँ के साथ मूवी देख रहा था

पिताजी के दिमाग़ ने कुछ और चल रहा था

पिताजी मूवी नही देख रहे थे

वो जयसिंघ के बारे मे सोच रहे थे

जयसिंघ अगर वापस नही आया तो

उसने ज़िंदगी भर शहर3 मे रहने का फ़ैसला किया तो

अगर शादी के बाद उसने सारे रिस्ते तोड़ दिए तो

अगर उनके पोते को उनसे दूर किया तो

अगर जयसिंघ गाँव मे नही रहना चाहता है तो वो अपने बेटे को कैसे रहने देगा

मुझे जयसिंघ के लिए ऐसी जीवन साथी ढूँढनी होंगी जो उसको बदल दे , उसकी सोच को बदल दे

पर शहर3 जाके जयसिंघ ने शादी कर ली तो

मुझे क्या करना चाहिए

पिताजी की कशमकस को माजी समझ गयी

माजी- क्या बात है

पिताजी- कुछ नही

माजी- आप मुझसे तो झूठ मत बोलिए

पिताजी- जयसिंघ के बारे मे सोच रहा हू

माजी- क्या सोच रहे थे

पिताजी- तुम यही बच्चो के साथ रूको मैं बात करके आता हूँ जयसिंघ से

माजी- मैं भी चलती हूँ

पिताजी- तुम यही रूको , मैं उससे जो बात करूँगा तुम्हे बता दूँगा

माजी- जी , जल्दी आना

पिताजी- तुम डरो मत , मैं अभी आता हूँ

पिताजी बच्चो को माजी के भरोसे छोड़ कर थियेटर से बाहर आ गये

पिताजी स्कूल के पास गये

.जयसिंघ अभी तक वही खड़ा था ,

वो स्कूल के बच्चो को देख रहा था

पिताजी जयसिंघ के पास चले गये

पिताजी- जयसिंघ

जयसिंघ तो अपने ही ख़यालो मे खोया था

पिताजी- जयसिंघ

जयसिंघ-हाँ क्या हुआ ,

पिताजी- तुम्हे क्या हुआ

जयसिंघ-मूवी

पिताजी- वो तो कब की शुरू हो गयी है , सब मूवी देख रहे है

जयसिंघ-मैं वो यहाँ पर

पिताजी- तुम यहाँ क्या कर रहे हो मुझे पता है

जयसिंघ-पिताजी वो मैं

पिताजी- तुम्हे आगे बढ़ाना हैना

जयसिंघ-जी

पिताजी- तुम्हे गाओं की गलियो से निकल कर शहर3 के रोड पे भागना है

जयसिंघ-जी

पिताजी- पर ऐसा करने से कहीं तुम गिर गये तो

जयसिंघ-आपका बेटा हूँ गिर गया तो भी खड़ा होकर फिर से चलने लगूंगा

पिताजी- मेरा बेटा होता तो गाओं छोड़ने की बात कभी नही करता

जयसिंघ-मैं बस पढ़ाई करने जाना चाहता हूँ

पिताजी- तुझे भी पता है कि उसके बाद भी तू शहर3 मे रहेगा वही जॉब करेंगे

जयसिंघ-मैं खुद की कंपनी निकालना चाहता हूँ ,

पिताजी- उस से तुझे खुशी मिलेगी ?

जयसिंघ-हाँ

पिताजी- पर तूने आज अपने भाई बहनों का हाथ छोड़ दिया है ,फिर आगे तो तू उनको पूछेगा भी नही

जयसिंघ-मैं उनको भी साथ लेकर चलूँगा , उनकी लाइफ बदल दूँगा

पिताजी- पर तूने आज उनका हाथ छोड़ा है कल नही छोड़ेगा उसकी क्या गारन्टी है

जयसिंघ-आपका बेटा हूँ , ज़बान दूँगा तो पूरी ज़रूर करूँगा

पिताजी- क्या करेगा

जयसिंघ-आप जो बोलेंगे वो मैं करूँगा

पिताजी- तू शादी मेरी मर्ज़ी से करेगा

जयसिंघ-जी

पिताजी- तेरे बेटे पे मेरा हक होगा

जयसिंघ-जी

पिताजी- सोच कर बोलो

जयसिंघ-मुझे मंज़ूर है

पिताजी- तेरे बेटा वारिस बनेगा

जयसिंघ-जी

पिताजी- फिर मत कहना कि उसके भी सपने है

जयसिंघ-तब तक मैं खुद यहा वापस आ जाउन्गा

पिताजी- तो

जयसिंघ-तो मैं जा सकता हूँ शहर 3 मे

पिताजी- पहले मेरी बात सुन

जयसिंघ-जी

पिताजी- तूने तो तेरे भाई बहनों का हाथ छोड़ दिया आज , पर तेरे भाई बहन ने तेरे सपने को पूरे करने को कहा है मुझे , ये बात याद रखना कि तू तेरे भाई बहनों की वजह से अपने सपने पूरे कर रहा है

जयसिंघ-मैं उनके प्यार को कभी नही भूलूंगा

पिताजी- भूल गये तो भी मुझे दुख नही होगा पर खुद को कभी मत भूलना कि तुम कौन हो

जयसिंघ-खुद को जिस दिन भूलूंगा वो आख़िरी दिन होगा मेरा

पिताजी- कहाँ पढ़ना चाहता है , इस स्कूल मे

जयसिंघ-यहाँ नही , शहर3 मे पढ़ना चाहता हूँ

पिताजी- इतनी दूर

जयसिंघ-वहाँ अच्छा स्कूल और कॉलेज है

पिताजी- ठीक है , मैं बंदोबस्त करता हूँ , पर अपनी बात याद रखना

जयसिंघ-जी याद रखूँगा

पिताजी- और खुद को भूलने वाली बात भी

जयसिंघ-जी

पिताजी- और हाँ ये एक साल तुझे अपने भाई बहन के साथ गुजारना होगा , उनको खुश रखना होगा तभी तू अगले साल जा पाएगा शहर3 पढ़ाई करने को (एक साल बाद मे बी तू सबका प्यार देख कर शहर3 जाने को मना कर दे)

जयसिंघ-जी

पिताजी- इस साल अगर तू इस तहसील मे अव्वल आया तो तब तुझे शहर3 भेजूँगा

जयसिंघ-जी मैं जी जान लगा दूँगा

पिताजी चाह रहे थे कि जयसिंघ शहर3 जाए ही नही

पिताजी- चल अब सब तेरा इंतज़ार कर रहे है

जयसिंघ-क्या सच मैं शहर3 जाउन्गा

पिताजी- अगर तू मेरी बात याद रखेगा तभी जा पाएगा

इतना सुनते ही जयसिंघ पिताजी के गले लग गया

पिताजी- कभी दुबारा ये मत सोचना कि मैं तुम्हे प्यार नही करता , मैं तेरी भलाई के लिए तुझे शहर3 जाने नही दे रहा था

पिताजी- पर तुझे तेरे सपने हमसे ज़्यादा प्यारे है तो यही सही ,

पिताजी- ये साल अपने भाई बहनों के नाम कर देना

जयसिंघ-जी

पिताजी- फिर से कह रहा हूँ खुद को भूलना मत कि तुम कौन हो ,

जयसिंघ-जी , नही भूलूंगा

पिताजी- अपनी पहचान जो भूल जाता है वो जीते जी मर जाता है

जयसिंघ-मेरी पहचान मैं हूँ , मेरी फॅमिली है , मेरा गाओं है

जयसिंघ की बात से पिताजी खुश तो हुए

पर उनको पता था कि वो क्या करने जा रहे है

सब यही चाहते है तो यही सही

नेहा पूजा और नीता ने पिताजी को जयसिंघ के शहर3 भेजने की बात करके , पिताजी ने डिसाइड किया कि उनको क्या करना है

बस वो कुछ बाते क्लियर करना चाहते थे

पिताजी को पता था कि जयसिंघ की बीवी सोच बदल सकती है

वो अभी से जयसिंघ के लिए ऐसी बीवी ढूँढने मे लग जाएँगे जो जयसिंघ की बीवी नही इस घर की बेटी बन कर इस फॅमिली का हिस्सा बने

.तब जाके पिताजी जयसिंघ को वापस ला पाएगे

पिताजी ने सही सोचा

पिताजी ने दूर का सोचा कर जयसिंघ से शादी का प्रॉमिस करने को कहा

और पोते की बात करके क्लियर कर दिया कि वो उड़ सकता है पर उसको उसके उड़ने की कीमत मे उसका बेटा पिताजी को देना होगा

जयसिंघ आज जवानी की जोश मे हाँ तो बोल गया

पर पता नही आगे क्या होता है

सफ़र लंबा है

लंबे सफ़र मे अक्सर आदमी की सोच बदल जाती है जिस से सफ़र कभी तय नही होता है

जयसिंघ ने प्रॉमिस तो किया कि वो कौन है ये बात कभी नही भूलेगा

पर वो शहर ही क्या जो आदमी की पहचान ना भुला दे

शहर आकर अच्छे अच्छे आदमी खुद को ही भूल गये है

पर आज तो सब खुश थे पिताजी को जो चाहिए था वो मिला उनका वारिस

जयसिंघ को उसका सपना पूरा करने का चान्स मिला है

माजी अपने बेटे को खुश देख कर खुश थी

जयसिंघ के आते ही सबको मूवी और अच्छी लगने लगी

 
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