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मैं और मेरा परिवार

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चॅप्टर 876

आज का दिन अजीब था मेरे लिए

दादाजी और नानाजी के बारे मे जान कर मैं रात भर सो नही पाया

माँ और पापा के बारे मे जान कर खुशी हुई थी पर नाना नानी के बारे मे जान कर दुख हुआ

पर जो हो गया उसे बदल नही सकते

मैं तो नाना नानी को याद करके रात भर भर रोता रहता

पर छोटी चाची ने मुझे बताया कि मुझे क्या करना चाहिए

छोटी चाची की बात सही थी

इतने दिनो बाद सब के चेहरे पे खुशी दिखाई दी है , ये टूर सबके लिए नयी खुशिया लेकर आएगा

मैं अपनी वजह से दूसरो की खुशियो को कुछ नही होने दूँगा

छोटी चाची की बात मानते हुए मैं कल मंदिर मे जाकर नाना नानी के लिए पूजा करूँगा

और सबके साथ इस टूर को जैसा प्लान किया था वैसे एंजाय करूँगा

यही सब सोचते सोचते थोड़ी देर के लिए मुझे नींद आ गयी

बड़ी चाची के प्यार के आगोश मे सो गया.

सुबह चाची ने मेरे माथे पर किस करके जगाया.

ब चाची-अवी अब कैसा लग रहा .है

मैं ने कोई जवाब नही दिया

मुझे ऐसे चुप देख कर छोटी चाची ने इशारे से स्माइल करने को कहा , और मुझे थप्पड़ भी दिखाया अगर मैं ने ग़लती की तो ......

मुझे चुप देख कर बड़ी चाची के एक्सपीरियंस भी चेंज हो रहे थे

मुझे समझ मे आ गया कि मेरे ऐसे रहने से क्या होगा

मैं ने एक पल के लिए आँख बंद की और रात मे जो हुआ उसको अपने दिमाग़ से निकाल दिया

ब चाची- अवी क्या हुआ , कैसा लग रहा है तुम्हें

अवी-ऐसा की नयी सुबह हुई है.

मेरी बात सुनकर छोटी चाची ने चैन की साँस ली

ब चाची-ये अची बात है. हर दिन की शुरुआत ऐसी करो कि लगे नयी सुबह नयी उम्मीद लेकर आई है ,

अवी-जी,

ब चाची-मीना तू नहाने जाने वाली थी ना

सी चाची- जा ही रही थी

ब चाकगी- बच्चों को भी नहला दे

सी चाची- जी

और छोटी चाची ने मेरे माथे पे एक किस किया और नहाने चली गयी

अवी-और सीमा चाची.

ब चाची-वो आराम कर रही है. वो थोड़ी देर मे उठ जाएँगी तब मिल लेना.

अवी-और चाचा जी,उनका गुस्सा कम हुआ

ब चाची-वो तो अभी यहाँ आकर नीचे घूमने गये है. ये पता करने कि यहाँ घूमने की कौन कौनसी जगह.

अवी-वो हम ने प्लान बना लिया .आप तैयार हो जाइए मैं सबको बता देता हूँ कि हमारा क्या प्रोग्राम है.

ब चाची-पहले तू तो फ्रेश हो जा .

अवी-मेरे फ्रेश होने तक बाकी सब तैयार हो जाएँगे

ब चाची-अवी तू ऐसे ही रहा कर ,तुझे इस तरह देख कर शालिनी भाभी को अच्छा लगता होगा

अवी- जी ,

और मैं ने बड़ी चाची का आशीर्वाद लिया

बड़ी चाची ने मुझे गले लगा कर आशीर्वाद दिया

फिर मैं बाकियो के रूम मे जाने लगा .ये बताने के लिए हमे क्या करने वाले है.

पहले पूजा बुआ के रूम मे गया .राज ने बताया कि पूजा बुआ नहा रही थी . अगर राज ना होता तो मैं भी बुआ के साथ नहा लेता.

फिर मैं नीता बुआ के कमरे मे गया तो ,नेहा बुआ और नीता बुआ साड़ी पहन रही थी.

नेहा बुआ और नीता बुआ एक दूसरे की परछाई दिखती है. अगर उनको एक दूसरे के सामने खड़ा किया जाए तो ऐसा लगेगा कि वो मिरर मे देख रही हो.

अगर यहाँ नेहा बुआ ना होती तो मैं नीता बुआ को प्यार वाली झप्पी ज़रूर देता.

मैं बुआ को तैयार रहने का बोल कर अपनी नटखट बहनों के रूम मे गया.

छोटी चाची सच कहती है , मेरे खुश रहते बाकी सब को खुशी मिलती है

फिर मैं कविता लीना के कमरे मे गया

मैं ने बेल बजाई तो कविता ने डोर खोला .

कविता नहाते हुए डोर खोलने आई थी. उसके बदन पर सोप लगा हुआ था. वो छोटा सा टवल लपेट कर आई थी.पर डोर खोलते ही उसने अपना टवल खोल दिया

अवी-कविता ये क्या है. कोई ऐसे डोर खोलता है क्या

कविता-भैया मॅजिक आइ से मैं ने देखा था. आप थे इस लिए डोर और टवल खोल दिया.

अवी-ठीक है. तुम जल्दी नहा कर तैयार हो जाओ ,ये लीना कहाँ है.

कविता-वो नहा रही है.

अवी-तुम दोनो साथ मे नहा रही थी.

कविता-हाँ,और अब आप भी हमारे साथ नहाने वाले है.

अवी-तुम पागल तो नही हो गयी.

कविता-10 मिनट की बात है. बात तब मे थोड़ी मस्ती करेंगे

अवी- आज नही , कल पक्का

कविता- भैया हम यहाँ मस्ती करने आए है ,, और आप हो कि , जाइए मैं आपसे बात नही करूँगी

अवी- मेरी बात तो सुनो

कविता- मुझे कुछ नही सुना है , आप जा सकते है

यही होगा , इनको कौन बताए कि मैं , इसी लिए छोटी चाची ने कहा था की

अवी-ठीक है. तुम्हें नाराज़ नही करूँगा. लेकिन सिर्फ़ नहाएँगे,, इस से आगे कुछ नही

कविता-लव यू भैया. चलिए लीना को सर्प्राइज़्ड देते है.

और कविता ने मुझे नंगे बाथरूम मे आने को कहा. और खुद भाग कर बाथरूम मे चली गयी.

लीना-कविता कौन था जो इतनी देर लगा दी.

कविता-गेस कर ,

लीना-भैया थे

कविता-हाँ,

लीना-तो उनको जाने क्यूँ दिया. यहाँ लेकर आती. साथ मे नहाते हुए मस्ती करते

मैं नंगा अपने खड़े लंड को लेकर बाथरूम मे आ गया.

अवी-तो तुम्हें मेरा साथ मस्ती करनी है.

लीना-वाउ भैया आप,कविता तेरा जवाब नही.

और लीना भाग कर मेरे पास आ गयी और मेरे गले लगने की जगह मेरे लंड के गले लग गयी.

मेरे लंड को अपने मुँह मे ले लिया.

लीना की इस हरकत पे मुझे हसी आ गयी. मैं ने कुछ सेकेंड उसे लंड चूसने दिया और उसे खड़ा करके अपने गोद मे उठा कर बाथटब मे ले गया.

कविता-लीना ये क्या कर रही थी. भैया ने इसके लिए मना किया

लीना-भैया ये क्या कर दिया.

अवी-अभी कुछ दिन पहले तुम्हें प्यार किया था अब सिर्फ़ थोड़ी मस्ती चलेगी. अगर मस्ती से ज़्यादा करने की सोची तो मैं दुबारा तुम्हारी बात नही मानूँगा.

लीना-ओक ,वैसे आप हमारे साथ नहाने वाले है ये काफ़ी है.

कविता-भैया लीना ने तो उसे प्यार कर ली ,मेरा क्या होगा.

अवी-तुम्हारी ग़लती है जो भाग कर बाथरूम मे आ गयी.

कविता-जाने दीजिए.

और दोनो मुझसे स्नेक की तरह लिपटने लगी.

दोनो अपने नाज़ुक नाज़ुक हाथो से मेरी शरीर को सहलाने लगी.

मेरे कसरती शरीर को पिघलाने लगी.

दोनो का एक हाथ तो मेरे चेस्ट को सहला रहा था और दूसरा हाथ मेरे लंड पे था.

दोनो झगड़ा कर रही थी ,मेरे लंड को अपने हाथो मे पकड़ ने के लिए.

पर सोप की वजह से उनके हाथ फिसल रहे थे.

हम ज़ाक बना कर एक दूसरे के उपर डाल रहे थे.

लीना ने तो झाग को अपने बदन पे ऐसे लगाया कि झाग उसके बूब्स और चूत को छुपा रहे थे.

ऐसा लग रहा था कि उसने झाग की ब्रा पैंटी पहनी हो.

कविता ने अपने गालो पे झाग लगा कर दादी बना दी. और सर पे झाग का ताज पहन लिया.

मेरी दोनो नटखट ,चंचल बहनों के आपस काफ़ी आइडिया थे.

मैं ने दोनो के उपर पानी डालके फिर से उनको नंगा कर दिया.

मेरे ऐसा करते दोनो मेरे उपर टूट पड़ी. और मेरे लंड पे झाग डाल कर हिमालय माउंटन बना दिया

क्रेवीटीविटी का जीता जागता नमूना थी मेरी बहनें.

ये तो कुछ नही, मेरे चेस्ट पे अपने बूब्स जैसे झाग के बूब्स बना दिए.

और लंड भी छुपा दिया.

और मेरे बूब्स देख कर हँसने लगी.

उनकी हसी देख कर मैं उनको कुछ करने से मना नही कर सकता था.

दोनो मेरे साथ अजीबो ग़रीब मस्ती करते हुए नहाने लगी.

पूरे बाथरूम का नक्शा बदल दिया दोनो ने

कविता और लीना जब थक गयी तो मेरे दोनो तरफ मेरी बाहों मे आकर आराम से बाथटब मे बैठ गयी.

कविता-भैया ये कभी बैठा था भी है या ऐसे खड़ा रहता है.

अवी-इतनी सुंदर अप्सरा को देख कर कैसे बैठ सकता था.

लीना-अगर आप कहो तो हम प्यार करके इस बैठा देते है

कविता-एक बार हाँ कर दो

अवी-नही, पहले हम बहुत प्यार कर चुकी हो . मैं नही चाहता कि मेरे प्यार करने से तुम्हारे पति के लिए बचे ही ना

कविता-प्यार मिलता रहेगा तो हम और ज़्यादा खूबसूरत हो जाएँगी.

अवी-किसने कहा.

कविता-हमे पता है. और इंटरनेट पे भी पढ़ा है.

अवी-लेकिन अभी पूरा प्यार करूँगा तो बाद मे कौन करेगा.

लीना-भैया कल किसने देखा है.

अवी-किसीने देखा कि नही मुझे नही पता पर हमे देखना है. समझी

कविता-मतलब

अवी-मतलब हम कल भी प्यार करेंगे

लीना-सच ,हम कल प्यार करेंगे

अवी-मेरी प्यारी बहाना हम कल नही. आने वाले कल की बात कर रहा हूँ

कविता-सीधा सीधा कहो ना लीना के बर्तडे पे प्यार करेंगे.

अवी-वो तुम्हें पता है. मैं फिर से क्यू बताऊ

लीना-भैया हम मेरे बर्तडे पे नया क्या करेंगे

अवी-वो तुम सोचो,

कविता-फिर तो मज़ा आएगा. वैसे भैया एक बात थी.

अवी-क्या?

लीना-भैया हमे रानी दीदी पसंद है. बहुत अच्छी है रानी दीदी.

अवी-तो

कविता-भैया रानी दीदी बहुत अच्छी है.

अवी-कहीं तुम

लीना-भैया आप रानी दीदी से शादी करना ,

अवी-वो तुम्हारी जैसी नही है. वरना उस को अपनी गर्लफ्रेंड बना लेता.

कविता-इतनी सी बात , आप कहो तो हम रानी दीदी को अपने जैसा बना दे

अवी-नही.

लीना-तो भैया आप रानी दीदी से बात करेंगे

अवी-सोचूँगा. वैसे इस बात के लिए टाइम है.

कविता-कोई उड़ा ले जाए उस से पहले रानी दीदी से बात कर लो.

अवी-तुम्हें सच मे रानी को अपने भाभी बनाना है

कविता-हाँ,

अवी-ठीक है, समझो रानी ही तुम्हारी भाभी बनेंगी.

कविता लीना-थॅंक यू भैया.

अवी-तुमने मेरा तो फिक्स किया .तुम्हारा क्या

कविता-मेरी गर्लफ्रेंड लीना है. और बाय्फ्रेंड आप हो

लीना-मेरे बाय्फ्रेंड आप हो और मेरी गर्लफ्रेंड कविता है.

अवी-तो तुम किसी और को बाय्फ्रेंड नही बनाओगी.

कविता-आप से अच्छा मिला तो भी नही बनाएँगे. इसी लिए तो महिला कॉलेज मे अड्मिशन लिया है.

अवी-और शादी

लीना-उसके लिए तो टाइम है पर

कविता-हमारे लिए लड़का आप ढूंढ़ेंगे. जैसे हम ने रानी दीदी को आपके लिए सेलेक्ट किया.

अवी-ठीक है. तुम्हारे लिए राज कुमार ढूंढूंगा

लीना-लेकिन तब तक हमारे राजकुमार आप हो.

अवी-तो रानी के मिलने तक तुम दोनो मेरी रानी रहोगी

कविता-यही तो आपकी बात मुझे पसंद है.

अवी-और क्या क्या पसंद है मुझे पता है.

कविता-भैया एक बार

अवी-ठीक है. मैं 5 मिनट मे शवर लेता हूँ तब तक तुम्हें जो करना है कर लो

मेरी बात सुनते ही दोनो खुश हो गयी.

मैं बाथटब से शवर के नीचे आगया.

कविता ने पहले मेरे लंड को साफ किया .

और अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी.

तो लीना मेरे शरीर पे लगा हुआ झाग साफ करने लगी.

फिर लीना मुझे प्यार करने लगी. और कविता ने मेरे उपर फिर झाग डाला और मुझे नहलाने लगी.

दोनो ने मुझे इतना प्यार दिया कि दोनो को अपनी क्रीम खिलाए बिना मुझे चैन नही आता.

दोनो ने बाथटब मे मुझे इतना गरम कर दिया था कि मेरी गरमी जल्दी निकल गयी.

मेरी क्रीम खा कर कविता और लीना खुश हो गयी.

मेरी बहनें जिसके साथ शादी करेंगी उसे इतना प्यार मिलेगा कि वो बेडरूम से बाहर कभी निकलेगा नही.

ऐसे मे उनके लिए लाखों मे एक दूल्हे ढूंढूंगा .

मेरी गरम बहन को ठंडा करने के लिए हिमालय या किसी बर्फ़ीली जगह पे हूनीमन पे भेजूँगा.

मुझे तो उनके नये नये आइडिया और प्लान देख कर लगता है कि दोनो ने शादी के बाद क्या करना है ये भी सोच रखा होगा

पर अभी तो उनके खेलने कूदने के दिन है.

उनको उनके मर्ज़ी से मस्ती करने देता हूँ.

आज़ादी पंछी की तरह लाइफ जीने देता हूँ और ईगल से उसकी रक्षा करने के लिए मैं हूँ ही.

दोनो ने इस दिन की शुरुआत इतनी अच्छी होगी कभी सोचा नही था.

दिन की शुरुआत अच्छी होंगी तो पूरा दिन खुशी या ही खुशिया लाएगा.

दोनो मुझे नहलाने के बाद खुद शवर लेने लगी.

मैं ने दोनो को स्वीट सी किस दे कर जल्दी तैयार रहने को कहा .

इसी लिए चाची मुझे कुछ नही बताती

कुछ बताएँगी और मैं उसी के बारे मे सोच कर आज को खराब कर दूँगा

इसका असर बाकी सब पे होगा

सबने कितना कुछ सोच रखा होगा इस टूर के लिए कि वो ये करेंगे वो करेंगे

अगेर मेरी वजह से उनकी इच्छा पूरी नही हुई तो

जैसे चाचा ने सोचा था कि बड़ी चाची के साथ हूनीमन मनाएँगे पर मेरे वजह से उनको गुस्सा आ गया

कविता लीना ने भी ऐसा कितना कुछ सोचा होगा कि ये करेंगी वो करेंगी

रानी कोमल का भी कुछ प्लान होगा

स्वेता दीदी और सीतल दीदी का प्लान तो मैं ने खुद बनाए है अगर मैं ने इंटेरेस्ट नही दिखाया तो वो प्लान फैल हो जाएगा ,

राज राजेश विद्या ने भी बहुत कुछ सोच रखा है बुआ भी फिर से बचपन एंजाय करेंगी

ये सब मुझपे डिपंड करता है

और वैसे भी इस टूर की ज़िम्मेदारी मैं ने उठाई है ,अगर मैं ही इंटेरेस्ट नही दिखाउन्गा तो ये टूर फैल हो जाएगा

यही सब सोचते हुए मैं अपने कमरे मे आ गया

अपने रूम मे जाते मुझे झटका लगा.
 
चॅप्टर 876आ

मैं अपने रूम मे आते , मैं सामने का नज़ारा देख कर शॉक्ड हुआ.

राजेश एक लड़की की चुदाई कर रहा था.

ये तो होटेल की रेसिपिनिस्ट है. जो मज़े से राजेश का लंड चूस रही थी.

राजेश तो फ्रेश लग रहा था और वो लड़की को देख रहा था कि वो नींद से जाग कर लंड चूस रही थी.

अवी-राजेश ये क्या हो रहा है .

मेरी आवाज़ सुनते ही ,मुझे देखते ही वो लड़की बाथरूम मे भाग गयी.

राजेश-क्या भैया ,अच्छा मज़ा ले रहा था आप बीच मे आ गयी.

अवी-मज़े के बच्चे. मेरी जगह कोई और होता तो. वैसे ये है कौन

राजेश-रेसिपिनिस्ट है. पिच्छली बार रूम बुक करने आया था तब पहचान हो गयी.

अवी-और

राजेश-कल आप कहाँ गये ये देखने के लिए आया था कि ये मिल गयी. और फिर बातों बातों मे उसको बेड पर ले आया.

अवी-चल ठीक है. जा खुद हल्का हो और उसको कपड़े पहन कर भेज दे ,हमे घूमने जाना है

राजेश उसके कपड़े लेकर बाथरूम मे चला गया.

राजेश के हल्का होने के बाद वो रेसिपिनिस्ट चली गयी.और फिर मैं फ्रेश होज़ा राजेश को उसके काम समझा दिया.

राजेश ने सबको चाची की रूम मे भुला लिया.

मेरे आते सब मेरी तरफ देख रहे थे पर चाचा ने मेरे आते अमित को उठा कर बाहर चले गये.

मैं ने खुद को स्ट्रॉंग किया

मैं ने चाचा पे ध्यान नही दिया. और सबको आज का प्लान बताने लगा.

हम पहले नाश्ता करके यहा के मंदिर जाएँगे .जो काफ़ी मशहूर है.

मेरी बात सुनते ही छोटी चाची की रात की बात याद आई मंदिर मे पूजा करने की

मंदिर जाने की बात सुनते ही चाची और बुआ खुश हो गयी. पर मेरी बहनें नाराज़ हो गयी. टूर पे मंदिर जाना उनको पसंद कैसे आता.

मेरी बहनों के लिए मैं ने पास का हिल्ल स्टेशन सेलेक्ट किया.

हिल स्टेशन का नाम सुनते ही मेरी बहनें उछल पड़ी.

चाचा के नाराज़ होने से राजेश और मुझे सब देखना था. जिसमे राज ने भी हमारी मदद की.

मैं सबको होटेल की कॅंटीन मे ले गया .उनके नाश्ता करने तक. ड्राइवर को सब समझा दिया. और हम बचो को ले जाने का इंतज़ाम करने लगे .

राज और विद्या अपना अपना काम कर रहे थे. उनको फोटो लेने का इम्पोर्टेंट काम जो मिला था. मस्ती करते हुए चुप चाप फोटो निकालने मे वो एक्सपर्ट थे.

मैं तो ये टूर सबके लिए स्पेशल बनाने वाला था.

आज तो सिर्फ़ घूमना होगा ,

सारी तैयारी करते मैं भी नाश्ता करने लगा.

कविता-भैया ,हम तो कल वापस जाएँगे ऐसे मे इतना ही प्रोग्राम बनाया. आपने

अवी-तुम्हें किसने बताया कि हम कल वापस जाने वाले

नीता बुआ-तो

अवी-बस हम कल नही जाएँगे. कल भी यही रह के एंजाय करेंगे.

सीतल दीदी-ये तो बढ़िया रहेगा.

अवी-और दीदी कल आपके लिए एक सर्प्राइज़्ड है.

सीतल दीदी-मेरे लिए ,कैसा सर्प्राइज़्ड

राज-दीदी भैया बता देंगे तो सर्प्राइज़्ड कैसे रहेगा.

स्वेता दीदी-जो सर्प्राइज़्ड होगा वो कल मिल जाएगा आज तो एंजाय करेंगे.

नाश्ता करते हम सब मंदिर की तरफ चले गये.

पुराना मंदिर था जिस से लोग इस मंदिर को बहुत मानते थे. और आर्कटिक्चर और कला कृति देखने लायक थी.

हम मंदिर मे आते ,मंदिर के बिग स्टक्चर को देख कर हम प्रभावित हुए.

सुबह की पूजा चालू थी.जिस से लोगो ने भीड़ करके रखी थी.

मंदिर को देखते सब के चेहरे पे खुशी दिख रही

चाची और बुआ तो मंदिर मे पूजा करने लगी

मैं ने भी पूजा की थाली ले ली

छोटी चाची मेरे साथ थी

सी चाची- अवी पूजा कर लो तुम्हें अच्छा लगेगा

अवी- आपकी बात सही थी , सबकी खुशी मेरे साथ जुड़ी है

सी चाची- मैं तो तेरे अच्छे के लिए कहती हूँ

अवी- चलिए पूजा करते है

बुआ और चाची ने पूजा कर ली थी

मुझे पूजा की थाली लेकर आते हुए देख कर बड़ी चाची को अच्छा लगा

मैं छोटी चाची के साथ मंदिर के अंदर आ गया

और पूजा करनी सुरू की

मैं आँख बंद करके अपने नाना नानी की आत्मा को शांति मिले इसकी दुआ कर रहा था

छोटी चाची भी आँख बंद करके भगवान से कुछ माँग रही थी

सी चाची- भगवान मुझे माफ़ कर देना

हमने पूजा कर ली

फिर मैं बाकियो के साथ घुल मिल गया

अब अच्छा लग रहा था

सब मेरा ही इंतजार कर रहे थे मंदिर मे फोटो निकालने के लिए

मैं ने अपने चेहरे पे स्माइल लाई और सबके साथ मंदिर मे घूमने लगा

चाची और बुआ अपने तरीके से मंदिर को देख रही थी

और हम मंदिर की शिल्पकृति देखने लगे

इतने अच्छे मंदिर की हर एक चीज़ इतने अच्छे से बनाई गयी थी कि देखने वाला तारीफ किए बिना रह नही सकता था.

ऐसी जगह को फोटो मे क़ायदे तो हर कोई करना चाहेंगा ऐसे मे हम कहा पीछे रहते.

हम भी सुरू हो गये.राज और विद्या कॅमरा की बॅटरी ख़तम करने पे लग गये.

चाची और बुआ कहाँ पीछे रहती. वो भी फोटो निकालने मे आगे आ गयी.

हम मंदिर कम देख रहे थे और फोटो ज़्यादा निकाल रहे थे.

2 कॅमरा कम थे तो क्या हुआ मोबाइल ज़िंदाबाद.

इनको अपनी मस्ती करने दी और मैं ने मोका देख कर रानी को कोप्चे मे ले गया

मेरा मूड और अच्छा हो इसका इलाज सिर्फ़ रानी के पास था

रानी के साथ थोड़ी प्यारी भरी बात की तो मेरा मूड अच्छा बन जाएगा

इस लिए मोका देख कर मैं ने रानी को अकेले मे बुला लिया

अवी-तुम मेरी गर्ल हो या मेरे फॅमिली की.

रानी-दोनो की अब बोलो

अवी-मेरे पास आती हो तो अपना दिमाग़ घर पे रख दिया करो.

रानी-सॉरी बाबा,

अवी-ऐसे नही एक किस दो,

इस बार रानी ने ज़्यादा मना नही किया एक स्वीट सा किस दे कर मेरा मूड ठीक किया.

अवी-ओह रानी. तुम्हारे स्वीट किस से कहीं मुझे डायबेटीएस ना हो जाए

रानी-तो किस करना बंद करू.

अवी-करके देखो ,फिर देखना मैं कहाँ कहाँ किस करता हूँ.

मेरी बात सुनकर शरमाने की जगह रानी अपने स्टाइल मे जवाब देने लगी.

रानी-तुम्हें कभी रोका है मैं ने ,सिर्फ़ डॉक्टर बनने तक रुकने को कहा है.

रानी के इतना कहते मैं ने उसके सलवार का नाडा अपने हाथो से पकड़ लिया

अवी-खोलू ,

रानी-खोल दो ,

अवी-सोच लो

रानी-स्वेता दीदी

रानी की बात सुनते ही मैं ने नाडा छोड़ दिया .और पीछे मूड कर स्वेता दीदी को देखने लगा.

स्वेता दीदी मेरे पीछे नही थी. और रानी मेरे पीछे नही थी.मेरी हालत देख कर हँसने लगी

रानी को हँसता हुआ देख कर मैं ने उसे पकड़ लिया

अवी-मुझे उल्लू बनाती हो.

रानी-अवी दर्द हो रहा है,

अवी-अब और उल्लू नही बनाने दूँगा.

रानी-अवी सच मे दर्द हो रहा है.

अवी-तुम्हारे दर्द की तो

बिना उसको छोड़े मैं ने उसके नशीले होंटो का रस पीना सुरू किया.

रानी अपने दर्द को भूल कर मेरा साथ देने लगी.

मैने उसके प्यार मे पिघल कर उसको छोड़ दिया.

हम किस करते हुए इतना खो गये कि हमे पता ही नही चला कि हम कहाँ है.

वो तो अच्छा हुआ कविता मुझे आवाज़ देते हुए हमारे पास आ रही थी.

कविता की आवाज़ सुनते ही मैं ने रानी को छोड़ दिया.

रानी ने जल्दी से खुद को ठीक किया तब तक कविता हमारे पास आ गयी.

मुझे और रानी को ऐसे खोपचे मे देख कर कविता हमे घूर के देखने लगी.

अवी-कविता क्या हुआ

कविता-मामी रानी को बुला रही थी.

रानी कुछ कहे बिना वहाँ से चली गयी. और कविता मुझे घूर के देखने लगी.

अवी-तू ऐसी क्या देख रही है

कविता-क्या हो रहा था यहाँ.

अवी-कुछ भी तो नही.

कविता-कुछ तो हो रहा था. वरना रानी दीदी ऐसे क्यूँ चली गयी.

अवी-मैं ना वो, तेरी बात कर रहा था.

कविता-मेरी बात

अवी-तूने तो कहा था कि रानी को तुम भाभी के रूप मे देखना चाहती हो.

कविता-वाउ, लव यू भैया.क्या कहा रानी दीदी ने

अवी-मेरे कुछ कहने से पहले तू आ गयी. और हमारी बात सुरू होने से पहले ख़तम हो गयी.

कविता-ये मैं ने क्या कर दिया.

अवी-कोई बात नही, नेक्स्ट टाइम बात करूँगा. चलो अब

कविता-देखना भैया. रानी दीदी ना नही कहेंगी.

अवी-चल अब

कविता डबल खुश हो गयी.

मंदिर मे हम ने अछा समय बिताया.

चाचा सिर्फ़ दिखने के लिए हंस रहे थे पर अंदर से वो काफ़ी गुस्से मे थे मुझपे

मुझे उनके गुस्से का कुछ करना होगा

पर पहले हम हिल स्टेशन पे जाने वाले थे.

मंदिर की शांत हवाओं का मज़ा लेने के बाद हम लंच करके हिल स्टेशन की तरफ निकल पड़े.
 
चॅप्टर 877

हिल स्टेशन की तरफ जाते हुए सब जोश मे आ गये.

अभी बारिश का सेशन सुरू होने वाला था जिस से आसमान मे बदल दिख रहे थे.

हिल स्टेशन पर जाते समय ऐसा लग रहा था बदल को चीरते हुए हम उपर जा रहे हो.

सब विंडो सीट पर बैठ कर अपना हाथ बाहर निकाल कर बादलों को छुने की कोशिस कर रहे थे.

चाची और बुआ भी छोटी बच्ची बन कर कविता और लीना की तरह मस्ती कर रही थी.

अमित सुमित और पारी ताज़ी फ्रेश वादियो मे आकर खिल उठे थे.

बस इंतजार था बस रुकने का. और बस के रुकते ही सब एक साथ चिल्लाते हुए नीचे उतर गये.

नीचे उतर सब ने ताज़ी हवा मे आते ही चैन की सास लेके हसीन वादियो के हसीन नज़ारे देखने मे खो गये.

इतनी हसीन वादियो मे सब ऐसे खो गये कि उनके पैर अपने आप आगे बढ़ रहे थे.

ऐसे मे सबका साथ होना सेफ्टी के नज़रिए से सही था.

हम बिना ग्रूप बनाए ,एक साथ इन हसीन वादियो को अपने आँख मे क़ैद करने का फ़ैसला किया .

पहले तो हम मंकी पॉइंट पर चले गये जहाँ एक पहाड़ का स्टक्चर मंकी के फेस जैसा था .और उसके आसपास मंकी ने अपना डेरा बनाया था.

इस पॉइंट पे आकर ,नीचे की हरियाली से भरपूर जंगल देख कर ,हमे तो हमारे गाओं की याद आ गयी.

चाची तो मंकी को अपने हाथो मे मूँगफली लेकर खिलाते हुए फोटो निकालने लगी.

कविता और लीना तो इधर से उधर भाग कर मंकी को भागने लगी. और राज उनकी फोटो निकालने लगा.

एक मंकी राज की हरकतों ध्यान से देख रहा था.

जैसे राज का ध्यान दूसरी और गया तो उस मंकी ने राज का कॅमरा छीन लिया.

और भाग कर पेड़ पे चला गया.

राज तो पहले डर गया पर पूजा बुआ ने उसे संभाल लिया.

वो मंकी राज के कॅमरा के साथ खेलने लगा.

वो कुछ इधर उधर की फोटो भी निकाल रहा था

सीतल दीदी-राज तेरा कॅमरा तो चला गया.

राज-माँ, मेरा कॅमरा

राजेश-राज वो बचपन की स्टोरी जैसा करो. तुम मंकी पे कुछ फेक के मारो वो तुम्हारा कॅमरा फेक देगा.

स्वेता दीदी -आइडिया अच्छा है पर उसने कॅमरा फेक दिया तो टूट जाएगा.

कोमल-राज ये मूँगफली दो ,शायद मान जाए

राज ने ट्राइ किया .वो मंकी तो नीचे तो आया पर उसने कॅमरा पीछे रख कर राज के पास मूँगफली खाने आ गया.

इसी का फ़ायदा उठा कर राजेश ने कॅमरा ले लिया. और वो मंकी अपने हाथ मलते रह गया.

और हम जीत का जश्न मनाते हुए इन पहाड़ी हवाओं का मज़ा लेने लगे.

मैं भी अपनी फॅमिली के साथ मज़े से हसीन नज़रों का लुफ्त उठाने लगा.

इस बीच एक छोटा सा मंकी कोमल का इतना दीवाना हुआ कि वो कोमल के कंधे पे बैठ गया.

कोमल ने हमे आवाज़ दी. इतना अच्छा नज़ारा देख कर हम तो कोमल की फोटो पे फोटो लेने लगे.

हम भी उसके साथ फोटो खिचने लगे .फिर भी वो मंकी कोमल से दूर नही हुआ.

बड़ी मेहनत से वो मंकी कोमल से दूर हुआ.

म चाची-यहाँ तो बड़ा मज़ा आ रहा है.

रानी-अब नेक्स्ट पॉइंट पे चलते है.

लीना-नेक्स्ट तो लवर पॉइंट है पता नही वहाँ क्या होगा.

पूजा बुआ-वहाँ हम आकर क्या करेंगे. तुम सब जाओ हम दूसरे पॉइंट पे जाते है.

कविता-मौसी आप भी वहाँ आकर जवान हो जाइए.

पूजा बुआ-तुझे क्या मैं बूढ़ी लग रही हू.

लीना -चलो ना मौसी

हमारे ज़िद्द के सामने बुआ और चाची मान गयी.

लवर पॉइंट पे जाते ही हम कपल टू डाइक पर सिर्फ़ बातें करते हुए ,

ऐसे मे हम भी उन सब मे घुल गये.

रानी मुझे इशारा करके एक कपल की तरफ दिखा रही थी. वहाँ एक कपल टईतेनिक की तरह फोटो निकाल रहा था.

ये देख कर मुझे चाचा का गुस्सा ख़तम करने का आइडिया आ गया.

अवी-यहाँ हम क्या कर सकते है

रानी-फोटो निकालते है

कोमल-पर बॅकग्राउंड तो लवर वाला है.

अवी-हमारे पास तो कपल है. चाचा और चाची

ब चाची-अवी

स्वेता दीदी-मामा मामी टईतेनिक वाला पोज़

म चाची-पहले मैं

ब चाची-सीमा तुझे जो करना है वो कर, मैं नही करने वाली.

पर हम ने तो स्ट्राइक कर दी. जिसमे बुआ ने भी साथ दिया.

फिर क्या था चाचा और बड़ी चाची को वादियो के हसीन बॅकग्राउंड के सामने खड़ा किया.

बड़ी चाची तो शरम से पानी पानी हो गयी.

कविता और लीना तो उनको अलग अलग पॉज़ मे खड़े करके फोटो निकलवा रही थी.

चाचा के चेहरे पे स्माइल देख कर मुझे अच्छा लगा.

चाचा तो कुछ ज़्यादा ही जोश मे आ गये. सबके सामने बड़ी चाची के गाल पर पप्पी ली.

राज ने इस सीन को फोटो मे क़ैद किया.

बड़ी चाची शरम से तो मर जाती. बड़ी चाची भाग कर पूजा बुआ के पीछे छुप गयी.

चाचा अब रुकने वाले नही थे. उनका जोश कंट्रोल मे नही था.

चाचा ने तो सीमा चाची को गोद मे उठा कर फोटो निकाले

सीमा चाची को यही चाहिए था. वो तो बेशरम बनके फोटो निकाल रही थी.

यहाँ तो सीमा चाची ने खुद चाचा को पप्पी दे कर फोटो निकाली.

फिर छोटी चाची के साथ कविता के कहने पे इतने पॉज़ मे फोटो निकाली कि विद्या के कॅमरा का मेमोरी कार्ड फुल हो गया .

मेरे पास एक्सट्रा कार्ड था जिस से फोटो फिर से निकालने सुरू हो गये.

मुझे चाचा का चाची के साथ फोटो निकालने पे जलन तो हो रही थी.

पर चाची मेरी माँ थी तो चाचा जी मेरे पापा हो गये .पापा माँ को प्यार तो करेंगे ही.

मैं इस सिचुयेशन मे अच्छा बेटा बन कर अपनी माँ और पापा के इस प्यार को यादगार बनाने लगा.

फिर चाचा ने बच्चों के साथ उनकी माँ को लेकर फोटो निकाले

जब बड़ी चाची और सुमित की बारी आई तो वो बहुत शरमा रही थी.

पर उनको आना तो था ही. इस बार चाचा ने कोई ऐसी वैसी हरकत नही की.

फिर एक तीनो चाची ,तीनो बच्चे और चाचा मिलके फोटो निकाल रहे थे कि बड़ी चाची ने मुझे भी अपने पास बुला कर फॅमिली फोटो ले लिया.

लीना-मामा मामी का हो गया अब मौसी की बारी

नीता बुआ-पर हम किसके साथ फोटो निकालेंगे

लीना-आप तीन तो राज राजेश भैया अवी भैया तीन

स्वेता दीदी-सही कहा.माँ मौसी इनके साथ फोटो निकालेंगे.

बुआ के हाँ करते ही मैं पूजा के पीछे खड़ा हो गया. नेहा बुआ और राजेश तो राज नीता बुआ के आगे खड़ा हो गया.

मेरी तीन बुआ और हम तीन .और मेरी क्रेवेटिवे दिमाग़ वाली बहनें ,फिर क्या था फ्लश पे फ्लश पड़ रहे थे हमारे चेहरे पे

बुआ को एक्सचेंज किया. और जब नेहा बुआ मेरे साथ खड़ी हुई तो वो अनकन्फोर्ट्ब्ल फील कर रही थी. पर जल्दी फोटो निकाल कर बुआ ने जगह चेंज की.

बुआ के बाद चाची ने भी हमारा साथ दिया.

छोटी चाची केसाथ फोटो निकाल कर मुझे अच्छा लगा.

इसी का फ़ायदा उठा कर कविता को आँख मार कर रानी के साथ फोटो निकाल लिया.

कविता ने अपना दिमाग़ लगा कर मुझे और रानी को कपल बना दिया इस लवर पॉइंट पे.

कोमल कहाँ पीछे रहती. मैं ने तो विद्या को भी चान्स दिया.

फिर एक फुल फॅमिली फोटो जिस से हमे ये टूर हमेशा याद रहेगा वो निकाल लिया.

फिर हम सनसेट देखने के लिए चले गये.

यहाँ आकर हम ने अपनी फॅमिली को एक नयी डोर से बाँध दिया.

यहाँ की हसीन वादियो मे हम ने जो पल बिताए वो हमे हमेशा याद रहेंगे

पर अभी सनसेट देखना बाकी था.

सनसेट, सूरज को आसमान मे गायब होते देखने के लिए काफ़ी भीड़ थी.

पर हम अच्छी जगह देख का सनसेट को देखने लगे.

इस यादगार दिन को इस तरह सनसेट देखते हुए अपने ख़यालो मे क़ैद करना कितना अच्छा लग रहा है.

सूरज को हर पल थोड़ा तोड़ा गायब होते हुए देखना अपने आप मे हसीन पल था.

ऐसे मे रानी ने कोमल का हाथ पकड़ लिया. और सनसेट को देखने लगी.

कोमल ने मेरा हाथ पकड़ लिया और सुरू हो गयी एक मज़बूत रिस्ते की सुरुआत

सब ने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर सूरज के सामने जैसे कसम खा ली कि हम इस प्यारे रिश्ते की डोर को कभी टूटने नही देंगे.

सबकी आँख जैसी सूरज पे जम गयी थी.

सूरज हमे आशीर्वाद देते हुए आसमान मे गायब हो रहा था.

हम सब को साथ देखने लिए जैसे सूरज माँ पापा नाना नानी की तीसरी आँख बनकर आया था.

हमे साथ देख कर आसमान मे गायब होकर मेरी माँ को को बताने जाएगा कि उनकी फॅमिली मे कितना प्यार है.

सबकी आँख मे खुशी आँसू आ गये.

ऐसे आँसू तो मैं हर दिन अपनी आँख से निकालूँगा.

बहुत अच्छा लग रहा था . ये टूर जाने का आइडिया चाचा का था .मैं दिल से चाचा को थॅंक्स कहूँगा जिनकी वजह से हम ने इतने अच्छे दिन को सही मायने मे जिया.

सूरज का आशीर्वाद लेके हम थोड़ी देर के लिए वैसे उसी जगह पर बैठ गये.

और पूरे दिन को याद करने लगे.

एक एक सेकेंड को याद करके फिर से इस दिन को जीने लगे.
 
अपडेट 878

पूरा दिन पूरे फॅमिली के साथ बिताने से ज़्यादा अच्छा कुछ हो नही सकता.

पहले मंदिर जैसी शांत जगह पर समय बिताना.फिर हसीन वादियो मे मस्ती करते हुए हसीन नज़ारे देखना.

छोटे से लेके बडो का भी मस्ती करना. चाचा की छोटे बच्चो जैसी हरकते करना.

सनसेट का अपने माता पिता का आशीर्वाद समझ कर इस दिन की मस्ती को यही ख़तम कर दी.

सनसेट देखने के बाद हम ने हिल स्टेशन पे नाश्ता किया और होटेल की तरफ निकल पड़े

होटेल जाते हुए हमे थकान महसूस नही हो रही थी. इतनी अच्छी जगह पर आकर कोई थक ही नही सकता.

सब आज दिन भर जो एंजाय किया उसकी बातें कर रहे थे.

राज और विद्या के कमेरे मे दिन भर की फोटो देख रहे थे.

जैसे चाचा और बड़ी चाची के पप्पी का फोटो आया तो वो फोटो बड़ी चाची और बुआ को दिखाने के लिए कोमल लेकर गयी.

अपनी इस तरह की फोटो देख कर बड़ी चाची ने दोनो हाथो से चेहरा छुपा दिया.

नीता बुआ और सीमा चाची ,बड़ी चाची की खिचाई कर रही थी.

बड़ी चाची फोटो डेलीट करने को कह रही थी,पर ऐसे फोटो बड़ी मुश्किल से निकाली जाती है.

चाचा तो इस से खुश हो गये

और मैं होटेल मे जाकर उनको डबल खुश करने का प्लान सोच रहा था.

और बातों बातों मे होटेल कब आ गया पता ही नही चला.

होटेल आते मैं ने सबको फ्रेश होकर नीचे डिन्नर करने आने को कहा.

सब अपने अपने रूम मे जाते ही मैं ने राजेश को नीचे रोक लिया.

अवी-राजेश

राजेश-हाँ भैया

अवी-चलो तुम्हारी रिसेपसनिस्ट से मिलते है.

राजेश-मैं भी वही सोच रहा था. आज रात हम साथ मे उसकी बजाएँगे

राजेश के साथ मैं उस रिसेप्सनिस्ट के पास चला गया.

वो राजेश को देख कर खुश हो गयी पर राजेश के साथ मुझे देख कर शरमाने लगी.

रिसेप्सनिस्ट-कहिए सर मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ

राजेश-ये मेरे भैया है. ये तुमसे बात करना चाहते है

राजेश की बात सुनते वो थोड़ी डर गयी.

रिसेप्सनिस्ट-सर वो जो भी हुआ....

अवी-तुम्हारे होटेल मे कोई हूनीमन सूट है.

राजेश-हूनीमन सूट ,मज़ा आएगा. है ना.

रिसेप्सनिस्ट-वो मैं ....

अवी-तुम डर क्यूँ रही हो, किसी और के लिए चाहिए.

राजेश-भैया मुझे लगा था कि. वैसे किसके लिए चाहिए

अवी-चाचा और चाची के लिए

रिसेप्सनिस्ट-एक स्पेशल हूनीमन सूट है.

अवी-एक काम करो बुक कर दो. और बढ़िया गुलाब के फूल से सज़ा देना

रिसेप्सनिस्ट-हो जाएगा. पर इसके लिए 2 घंटे लग जाएँगे.

अवी-ठीक है .2 घंटे ,तब तक हम डिन्नर कर लेंगे . तुम रूम को ऐसा सजाना कि देखने वाला देखते रह जाए

रिसेप्सनिस्ट-हो जाएगा. मैं खुद अपने आँख के सामने काम करवाउन्गी.

अवी-रूम सजाने के बाद मुझे कॉल करना,चलो राजेश

राजेश-उसके बाद मुझे कॉल करना

और राजेश ने उसे आँख मार दी. वो रेसीपिन्स्ट ने स्माइल करके राजेश को जवाब दिया.

चाचा को मेरा सर्प्राइज़ ज़रूर पसंद आएगा.

चाचा अपना 2न्ड हूनीमन एंजाय करते मेरे उपर जो गुस्सा है वो कम हो जाएगा.

मैं उनके प्यार के बीच मे आ गया था अब उनको उनका प्यार वापस लौटा दूँगा

मेरा एक दिमाग़ इसका विरोध कर रहा था और दूसरा दिमाग़ कह रहा था कि उनके लिए ये बढ़िया गिफ्ट रहेगा

इस से चाचा और चाची के बीच मे प्यार और बढ़ जाएगा , और ज्योति बुआ की तरफ चाचा देखेंगे भी नही

यही ठीक रहेगा मेरी फॅमिली के लिए

रूम बुक तो हो गया .छोटी चाची को बता देता हूँ. वो बड़ी चाची को दुल्हन बना देंगी.

मैं राजेश को रूम मे भेज कर छोटी चाची के पास चला गया.

छोटी चाची को मैं ने कॉल करके बाहर बुला लिया.

छोटी चाची-क्या बात है अवी, तुमने अंदर आने की जगह मुझे बाहर क्यूँ बुलाया

अवी-चाचा की वजह से

छोटी चाची-उनकी बात को दिल पे मत लिया करो. उनका गुस्सा अपने आप कम हो जाएगा.तुम आराम करो

अवी-वो कब होगा पता नही पर मैं ने उनको खुश करने के लिए एक सर्प्राइज़्ड प्लान किया है

छोटी चाची-क्या?

अवी-मैं ने हूनीमन सूट बुक किया

सी चाची-फिर तो तेरे चाचा हवा मे उड़ने लगेंगे.और तुझे थॅंक्स कहेंगे

अवी-वो कुछ कहेंगे कि नही मुझे नही पता .पर आपको बड़ी चाची को दुल्हन बनाकर इस हनीमून सूट मे भेजना होगा. वो भी 2 घंटों मे

सी चाची-हो जाएगा.दीदी को ऐसी सज़ा कर तेरे चाचा के सामने भेजूँगी कि तेरे चाचा दीदी को देखते ही रहेंगे.

अवी-कल मेरी वजह से जो हुआ वो आज चाचा भूल जाएँगे

सी चाची-वो तो है. वैसे कल तेरे चाचा रोमॅंटिक मूड मे थे पर तूने उनका प्लान खराब कर दिया.

अवी-पता है मुझे. उसकी की भरपाई कर रहा हूँ.

सी चाची-अच्छा है ना उनका 2न्ड हूनीमन हो जाएगा.

अवी-यादगार मिलन होगा .वैसे मैं ने सारा बंदोबस्त कर दिया है.

सी चाची-मैं भी दीदी को दुल्हन बना देती हूँ

अवी-वैसे सीमा चाची कैसी है.

सी चाची-उनको क्या हुआ .वो खुश है.

अवी-कल चाचा ने

सी चाची-सीमा दीदी तो चाचा के गुस्से से पूरी तरह संतुष्ट हो गयी.

अवी-मेरी वजह से उनके साथ

सी चाची-सीमा दीदी को इसकी आदत है. वो पहले भी तेरे चाचा का गुस्सा बर्दास्त कर चुकी है. उनको इसी मे मज़ा आता है.

अवी-आपके पास 2 घंटे है.

सी चाची-बहुत है 2 घंटे. एक काम करना हमारा खाना रूम मे भेजना .और तेरे चाचा को मैं नीचे भेज दूँगी. ताकि सर्प्राइज़ बना रहे.दीदी और तेरे चाचा ये दिन कभी नही भूलेंगे

अवी-ये तो हो गया चाचा का. और मेरे लिए कुछ मिलेगा.

सी चाची-किस दुउऊउउ

और एक प्यारा सा स्वीट सा किस मिलते ही आज का दिन स्पेशल हो गया.

किस करके चाची अपने रूम मे जाने लगी कि मैं ने हल्का सा थप्पड़ उनकी गंद पर मारा.

चाची ने एक नॉटी स्माइल दी और अपने रूम मे चली गयी.

मैं फ्रेश होकर राजेश के साथ नीचे होटेल की कॅंटीन मे चला गया.

हम ने फोन करके सबको नीचे बुला लिया.

बुआ और चाचा भी हमारे साथ नीचे खाना खाने के लिए आ गये.

पूजा बुआ-सुमन मीना कहाँ है. वो नही आई

अवी-उनको बच्चो को खाना खिलाना है. इस लिए वो अपने रूम मे खाना खा लेंगी

चाचा-मैं भी उपर उनके साथ खाना खा लेता हूँ.

राजेश-मामा ,एक दिन तो हमारे साथ खाने का मज़ा लीजिए.

सीतल दीदी-मामा थोड़ा टाइम हमारे लिए भी रखा कीजिए

फिर पूजा बुआ के ज़ोर डालने पे चाचा को रुकना पड़ा.

चाचा के रुकने से मेरा प्लान कामयाब हो रहा था.

मैं ने चाचा को ज़्यादा खाना खाने नही दिया.

मेरे रोकने से चाचा को और गुस्सा आने लगा पर पूजा बुआ की वजह से चुप रहना पड़ा.

फ्रेश होने के लिए सब ने काफ़ी टाइम लगा दिया था. ऐसे मे 2 घंटे जल्दी बीत गये.

हमारे डिन्नर होने से पहले रिसेप्सनिस्ट का मसेज आया .काम हो गया.

मैं ने छोटी चाची को मेसेज किया कि बड़ी चाची को उस हूनीमन सूट मे भेज दो

चाची का रिप्लाइ आया कि वो रूम मे पहुँच गये है.

बड़ी चाची कमरा देख कर पूछ रही थी कि ये किसने किया .मेरा नाम आते ही बड़ी चाची को कल सुबह वाली बात याद आ गयी की मैं ने उनको और चाचा को प्यार करते हुए देखा था.

सब प्लान के मुताबिक चल रहा था.

ऐसे मे अब चाचा को बड़ी चाची के पास ले जाने का समय आ गया था.

अवी-चाचा जी आप से एक बात करनी थी.

चाचा-पहले खाना ख़तम करने दो बात फिर करेंगे

अवी-अर्जेंट बात थी

पूजा बुआ-क्या हुआ अवी

अवी-कुछ नही बुआ एक काम था चाचा से

पूजा बुआ-तुम अवी से बात करो .खाना कहाँ भाग के जाने वाला है

चाचा ने गुस्से से एक बार मेरी तरफ देखा और मेरे साथ साइड मे आ गये.

चाचा-क्या है. बोलो जल्दी

अवी-वो यहाँ नही बता सकता ,आपको मेरे साथ उपर चलना है

चाचा-ऐसी क्या बात है

अवी-वो उपर जाके पता चल जाएगी.

चाचा-(ठीक से सोने नही देता और खाने भी नही देता ).चलो

मैं चाचा को लेकर उपर आ गया

चाचा को मुझपे गुस्सा आ रहा था.

चाचा को कल बीच मे प्यार करते हुए डिस्ट्रब किया .और आज खाना खाते हुए बीच मे उठाया

चाचा का गुस्सा अगर कंट्रोल से बाहर गया तो मेरी वॉट लग जाएगी.

मैं चुप चाप चलते हुए चाचा को हूनीमन सूट के सामने ले आया.

चाचा-ये कहाँ ले आए हो

अवी-आपको कुछ दिखाना था.

चाचा-ये किसका रूम है.

अवी-आप खुद देख लो

चाचा-क्या मतलब.

अवी-आप रूम मे जाकर देखो सब अपने आप समझ जाओगे

चाचा-घटिया मज़ाक कर रहे हो तो मुझसे बुरा कोई नही होगा

इतना बोल कर चाचा रूम के अंदर चले गये

बड़ी चाची को मेरी वजह से शरम ना आए इस लिए मैं बाहर रुक गया.

छोटी चाची और सीमा चाची दूर से छुप कर देखने लगी.

चाचा को अंदर जाकर ज़ोर का झटका लगा होगा.

बेड को ,रूम को फुलो से सज़ा हुआ देख कर ,बेड पे एक दुल्हन को देख कर चाचा सर्प्राइज़्ड हुए होंगे.

दुल्हन का घूँघट उठाते ही ,बड़ी चाची को देख कर चाचा का दिल नाचने लगा होगा.

मैं कुछ देर वही रुक रहा.

मुझे पता था कि चाचा को ये गिफ्ट ज़रूर पसंद आएगा

अब तो चाचा कल सुबह बाहर निकलेंगे

चाचा तो आज बाहर नही आएँगे इस लिए मैं वहाँ से वापस जाने लगा था कि रूम का डोर खुल गया.

चाचा रूम से बाहर आते ही मेरे गले लग गये.

अवी-चाचा जी सर्प्राइज़्ड कैसा लगा.

चाचा-मुझे माफ़ कर देना. मैं ने कल की वजह से आज तुमसे ठीक से बात नही की, और तुम ने

अवी-आप बड़े है. आपको माफी नही माँगनी चाहिए

चाचा-मैं भी ना छोटी सी बात के लिए गुस्सा हो गया था.

अवी-जो हो गया सो हो गया.जल्दी अंदर जाइए वरना चाची गुस्सा हो जाएगी

चाचा-धन्यवाद ,ये सुरपरिज़े मुझे हमेशा याद रहेगा.

और चाचा ने मुझे फिर से गले लगा लिया और अंदर चले गये बड़ी चाची को गले लगाने के लिए.
 
चॅप्टर 879

चाचा तो आज कल की पूरी कसर निकाल देंगे. आज सुहागरात मना कर चाचा बड़ी चाची को इतना प्यार करेंगे कि जिस से मेरे उपर का गुस्सा ख़तम हो जाएगा.

चाचा के लिए टूर अब यादगार रहेगा.

चाचा के रूम मे जाते ही. छोटी चाची ने मुझे आवाज़ दे कर अपने रूम मे बुलाया.

अवी-चाची ,रूम ठीक सजाया था ना

म चाची-हाँ, रूम मे जाते ही ऐसा लगा कि खुद जाकर बेड पे घूँघट ओढ़ के बैठ जाउ

अवी-आपका नंबर भी आएगा.

सी चाची-क्या मतलब

अवी-कल आप मे से जिसे जाना होगा वो जा सकती है. कल के लिए भी रूम बुक किया है.

म चाची-सच, फिर तो मज़ा आएगा.

अवी-लेकिन आप 2 और रात एक है हमारे पास

सी चाची-तो क्या हुआ. दीदी चली जाएगी कल

म चाची-मैं क्यूँ, तू जाएगी. मैं कल उनके साथ थी. अब तेरी बारी है.

सी चाची-पर आपको ऐसा ही तो चाहिए था. आपको फिर से सुहागरात मनानी थी ना.

म चाची-तो क्या हुआ. कल मैं उनके साथ थी, आज सुमन दीदी है तो कल तू होगी.

सी चाची-नही दीदी ,आप चली जाना ,आपका सपना था फिर से सुहागरात मनाने का.

अवी-मैं क्या कहता आप एक साथ चली जाना

म चाची-नही.

सी चाची-बिल्कुल नही

अवी-फिर आप खुद डिसाइड कर लीजिए

म चाची-इसमे डिसाइड करने जैसा कुछ नही है.मीना तू जाएगी उनके पास कल

सी चाची-अवी एक रात और नही रुक सकते.

अवी-चाची मैं तो रुक जाउन्गा .पर सबके कॉलेज स्टार्ट होंगे. कोमल की पढ़ाई उसकी ट्यूशन

म चाची-कहा ना ,मीना तू जाएगी

अवी-कल हम दोपेहर के बाद शॉपिंग जाने वाले है. ऐसे मे आप मत आना

म चाची-तो क्या होगा.

अवी-दोपेहर 3 से 10 तक और उसके बाद कोई दूसरा चाचा के साथ रहेगा.

सी चाची-ये ठीक रहेगा. है ना दीदी

म चाची-हाँ, तू पहले फिर मैं .

सी चाची-जैसा आप कहे

म चाची-तुम बातें करो मैं बाथरूम होकर आती हूँ.

सीमा चाची के जाते ही छोटी चाची मुझे अजीब नज़ारो से देखने लगी.

अवी-क्या हुआ चाची

सी चाची-तू ये सब क्यूँ कर रहा है.

अवी-अपनी चाची और चाचा के खुशी के लिए कर रहा हूँ

सी चाची-तुझे ये सब करके अच्छा लगेगा

अवी-हां, क्यूँ कि आप सब खुश रहेंगी.

सी चाची-मुझे अपने चाचा के साथ देख कर तुम्हें अच्छा लगेगा

अवी-आप खुश है यही मेरे लिए सब कुछ है

सी चाची-अपने दिल पे हाथ रख के बोलो

अवी-मैं खुश हूँ

सी चाची-अपने दिल पे हाथ रख के बोलो, मुझे अपने चाचा के साथ देख के तुम्हें बुरा नही लगता

मैं ने चाची के चेस्ट पे हाथ रखा.

सी चाची- मेरे नही अपने दिल पे हाथ रखो

अवी-मेरा दिल तो आपके पास है.

सी चाची-कल मैं दीदी को भेजूँगी. मैं नही जाउन्गी

अवी-आपको जाना होगा. और रही बात मेरे खुश रहने की तो आपका दिल मेरे पास है. आपकी आत्मा मेरे पास, ये मुझे हमेशा खुश रखेंगे.

सी चाची-अवी तू मुझे पहले क्यूँ नही मिला.

अवी-क्यू कि मुझे आपसे माँ और बीवी दोनो प्यार चाहिए था.

सी चाची-मैं ज़रूर पिछले जनम मे अच्छे काम किए होंगे जो मुझे तू मिला है.

अवी-पिछले जनम का तो पता नही पर आपने इस जनम मे बहुत अच्छे काम किए जिसका फल आपको मिल रहा है.

म चाची-कैसा फल

सी चाची-कुछ नही. कल की बात कर रहे थे.

म चाची-कल तो मज़ा आएगा.

अवी-पूरा मज़ा करना चाची वरना मेरी मेहनत बेकार हो जाएगी

म चाची-तू बेफिकर रह. मैं तेरे चाचा को ऐसा काढ़ा पिलाउन्गी कि वो कल सोएंगे ही नही.

अवी-लेकिन मुझे तो अब नींद आ रही है.

म चाची-तू आराम कर. कितना काम करता रहता है

अवी-आपके लिए करना पड़ता है.

और चाची ने मुझे स्वीट सी गुड नाइट किस दी. और बच्चो को प्यार करके मैं बुआ के पास नीचे चला गया.

नीचे जाते रिसेप्सनिस्ट को बता दिया कि उसे कल क्या करना है.

उसको अच्छी टिप दी जिस से वो मेरा काम अच्छे से कर देगी.

मेरे आने तक सब का खाना हो चुका था.

मेरे आते ही हम ने साथ मे स्वीट्स खा ली.

फिर बुआ अपने रूम मे चली गयी.

और मेरी बहनें और भाई कोमल के रूम मे मस्ती करने लगे.

कोमल अपने साथ लॅपटॉप लाई थी जिस से सारे फोटो वही पर सेव किए.

फिर हम मस्ती करते आज के फोटो देखते हुए मस्ती करने लगे.

कविता-कोमल दीदी और उनका बाय्फ्रेंड

स्क्रीन पे कोमल और मंकी की फोटो थी. मंकी को कोमल का बाय्फ्रेंड बना कर सब मज़ाक उड़ाने लगे

कोमल को मज़ाक ज़्यादा बर्दास्त नही हुआ.

उसकी आँख मे पानी आने लगा तो मैं ने उसे अपने पास बुलाया.

अवी-कविता लीना बहुत हो गया मज़ाक

कविता-सॉरी दीदी

अवी-देखो कोमल कविता ने माफी माँग ली .अब एक प्यारी सी स्माइल करो

कोमल ने कुछ रेस्पॉन्स नही दिया.

ऐसे मे मैं ने सबको इशारा किया .मेरा इशारा मिलते ही सब कोमल पे टूट पड़े

और कोमल को गुदगुदी करके हँसाने लगे

कोमल इस हमले से बच नही पाई और सरेंडर करके कविता को माफ़ किया.

और हम फिर से मस्ती करने लगे.

कविता और लीना तो पिल्लो फाइट खेलने लगी.

स्वेता दीदी. सीतल दीदी के मोबाइल पे कॉल आते ही दोनो अपने रूम मे चली गयी.

राज पूजा बुआ के पास तो राजेश रिसेप्सनिस्ट के पास चला गया.

कविता और लीना जल्दी वहाँ से भाग गयी अपने रूम मे ,पता नही वो क्या करेंगी अपने रूम मे

रानी को भी उसकी मम्मी का कॉल आते ही वो बिज़ी हो गयी.

फिर क्या था मैं विद्या के साथ उनके रूम से बाहर आ गया.
 
चॅप्टर 880

सब अपने अपने काम मे बिज़ी हो गये.

राजेश रिसीप्निस्ट के साथ लगा होगा .मैं उसके पास जाउ या फिर

मैं सोच ही रहा था कि मेरी नज़र लटकती मटकती हुए विद्या पर गयी.

गम को भूलने के लिए नशा बेस्ट दवा होता है ऐसा सुना था

पंकज हमेशा कहता है कि नशा हर गम को खुशी मे बदल देता है

आज का दिन अजीब था

कल और आज का दिन अजीब था

चाची कहती है कि मैं खुश रहूं ताकि सब खुश रहे

ये बात भी सही थी

लेकिन ये मुश्किल था पर अब तक सब ठीक रहा

अब नशीली रात के नशे मे गम को.भूल जाता हूँ

पर मैं अपने रूम मे गया तो वहाँ राजेश होगा और वो कहेगा चलो साथ मे रिसेप्सनिस्ट की चुदाई करते है

फिर से राजेश के साथ मिलके चुदाई करना ठीक नही होगा

पिच्छली बार राजेश के साथ मिलके चुदाई करने से क्या हुआ था मुझे याद है

लेकिन मैं जाउ कहाँ

जिसके भी रूम मे गया वो मुझे सोने नही देंगी

क्यूँ ना मैं विद्या के पास जाउ वो अकेली है

विद्या के साथ टाइम पास होगा और वहाँ मैं अपनी मर्ज़ी से कुछ भी कर सकता हूँ

और वहाँ मेरा गम.भुलाने के लिए नशा भी होगा

विद्या के जिस्म का नशा काफ़ी होगा गम भुलाने को

विद्या का पूरा टेस्ट अब तक मैं ने नही लिया चलो आज इसका नशा भी करता हूँ जिस से मेरा मूड ठीक हो जाएगा और विद्या भी खुश हो जाएगी

विद्या की गंद का नाम ज़ुबान पे आते ही मेरा लंड फुदकने लगा.

जगह भी अच्छी है. और शिकार भी शिकार होने को तैयार है.और इसका नशा करना भी ठीक रहेगा

इस से अच्छा मोका कहाँ मिलेगा. आज विद्या तो खुश कर देता हूँ.

विद्या तो अकेली है. पूरी रात विद्या को प्यार कर सकता हू.

मैं विद्या की गंद को देखते हुए उसके पीछे पीछे जाने लगा.

विद्या को इस बात का पता नही था कि मैं उसे प्यार करने वाला हूँ

विद्या ने जैसे अपने रूम का डोर खोला वो अंदर गयी ,, और डोर बंद होने से पहले मैं एंटर हो गया.

विद्या रूम मे जाते ही बाथरूम मे घुस गयी थी .मैं बेड पे लेट कर उसका इंतजार करने लगा.

विद्या जब मुझे अपने रूम मे देखेगी तो उसके चेहरे पे जो खुशी होगी वो देखने लायक होगी.

मैं विद्या के आने तक अपनी टीशर्ट निकाल कुछ पीने का ऑर्डर किया.

ऑर्डर आ गया पर विद्या बाथरूम से बाहर नही आई.

मैं बाथरूम के पास गया तो अंदर से विद्या के गाने की आवाज़ आ रही थी. और साथ मे शवर से पानी गिरने की आवाज़ सुनाई दे रही थी

विद्या तो फ़ुर्सत से नहा रही थी.

मैं वापस बेड पर आकर बीयर पीने लगा और पास मे रखा हुआ फ्लवर प्लॉट गिरा दिया .जिसकी आवाज़ सुनकर पानी गिरना बंद हुआ.

विद्या-कौन है वहाँ.

विद्या टवल लपेट कर बाथरूम से बाहर आ गयी.

अवी-कितना टाइम लगाती हो नहाने के लिए

विद्या-तुम हो ,मैं कितनी डर गयी थी.

अवी-तुम डर गयी थी. अगर और थोड़ी देर करती तो डोर तोड़ देता.

विद्या-अच्छा. फिर अंदर क्यूँ नही आए. और यहाँ कैसे आ गये

अवी-तुम्हारे पीछे पीछे आ गया था.

विद्या-तो सीधे बाथरूम मे आ जाते. साथ मे नहा लेते

अवी-कितनी बार नहाऊ. सुबह से नहा ही रहा हूँ . पर तुम इतनी देर से क्या कर रही थी.

विद्या-सच बताऊ, तुम्हें याद करके उंगली कर रही थी.

अवी-कैसी लड़की हो तुम ,कुछ तो शरम किया करो

विद्या-मुझे बेशरम तुम ने ही तो बनाया है. और तुम से क्या शरमाना ,

और विद्या टवल से अपने बदन को पौछने लगी.

अवी-टवल खोल दो और आराम से पौंछ लो अपने बदन को

विद्या-इतनी जल्दी क्या है. पूरी रात है हमारे पास

अवी-पूरी रात, मुझे आराम भी करना है.

विद्या-मैं हूँ ना. कहो तो तुम्हारे पैर दबा दूं.

अवी-पैर दबाने है, हाथ क्यूँ नही पता है, पैर दबातें हुए कुछ और दबाना चाहती हो

विद्या-आज तुम मेरे रूम मे आए हो .ऐसे तो जाने नही दूँगी.

अवी-आज रात मैं सिर्फ़ तुम्हारा हूँ.

और विधवा ने टवल निकाल लिया और अपने एक पैर को मेरी चेस्ट पे रख के टवल से पौन्छने लगी

अवी-ये क्या कर रही हो. मुझे पैर मार रही हो

विद्या-तुम्हें पैर दिख रहे है .पैरो के बीच की गहराई नही दिख रही.

अवी-वो देखने की नही प्यार करने की चीज़ है.पर

विद्या-पर क्या

अवी-पर आज पीछे और आगे प्यार करने आया हूँ

विद्या-वो मुझे पता है. तुम्हें देखते ही समझ गयी थी आज मेरी फटने वाली है

अवी-मैं तो आराम से करता हूँ तुम्हें तो पता है.

विद्या-पता है फिर भी मैं ने कुछ दिनो से उंगली पे तेल लगा कर इस दिन के लिए तय्यारी की है

अवी-फिर तो देखना होगा ,वैसे तुम बिना कपड़ो की हॉट लगती हो

विद्या-और कपड़ो के

अवी-कपड़ो से याद आया ,तुम कुछ पहनने वाली हो कि नही.

विद्या-क्या फ़ायदा तुम निकालने वाले तो हो

अवी-आज कपड़े पहना कर प्यार करूँगा.

विद्या-वो कैसे

अवी-सिर्फ़ एक कपड़ा पहनाउंगा.

विद्या-तो ऐसा कहो ना.अच्छा हुआ मैं वो पैंटी लेकर आ गयी.

और विद्या अपने बॅग से पैंटी लेकर आ गयी.

पैंटी को टेबल पे रख के मेरी बाहों मे आकर बैठ गयी.

अवी-तुम्हारे बूब्स मे दूध होता तो मज़ा आ जाता.

विद्या-वो लाना तुम्हारे लंड पे है.

अवी-जब आएगा तब पिला देना

विद्या-अब क्या पी रहे हो

अवी-बीयर, तुम पियोगी

विद्या-तुम ड्रिंक करते हो.

अवी-बस बीयर पीता हूँ.आज ऐसा लगा कि थोड़ी पीनी चाहिए

विद्या-मैं नही पीती. मुझे बस एक नशीली चीज़ पीना पसंद है वो है तुम्हारा वीर्य

अवी-वो भी पिला दूँगा. पहले कुछ बातें करे

विद्या-अभी क्या कर रहे है.

अवी-मेरा मतलब है कि तुम इस टूर पे कैसा लग रहा है.

विद्या-क्या कहूँ, तुम्हारी फॅमिली जैसी फॅमिली ढूँढने पे नही मिलेंगी. और मुझे अपनी बेटी बनाकर टूर पे लाए है. इस से ज़्यादा मुझे नही चाहिए ,मेरे लिए तो तुम्हारी फॅमिली के साथ बिताए हुए हर एक पल अनमोल लगते है.

अवी-क्या बात है तुम तो सेनटी हो गयी.

विद्या-अवी मुझे अपनी फॅमिली से कभी दूर मत करना वरना मैं जी नही पाउन्गी.

अवी-तुम्हें एक दिन तो जाना होगा.

विद्या-मैं इस फॅमिली को छोड़ कर कही नही जाउन्गी.

अवी-तो क्या शादी नही करोगी.

विद्या-मुझे नही करनी शादी. मैं ऐसी ठीक हूँ.

अवी-जाने दो वो बाद की बात है. आज तो तुम्हें जी भर के प्यार करूँगा.

विद्या-आज तो मैं तुम्हें सोने नही दूँगी.इतने दिन बाद मिलते हो आज मैं तुम्हें नही छोड़ूँगी.

अवी-सही कहा. मुझे छोड़ना मत

विद्या-पहले प्यार करो ना

अवी-कर तो रहा हूँ.

विद्या-कहाँ.

अवी-देखो मेरा हाथ कहाँ है.

मैं विद्या की चूत को प्यार से सहलाने लगा.

विद्या को पता चलते ही वो मेरे हाथ के साथ साथ अपने बदन को हिलाने लगी.

विद्या-अवी अच्छे से करो ना.

अवी-पहले बीयर का नशा चढ़ने दो फिर तुम्हारा नशा उतारूँगा

विद्या-मुझे दो मैं ख़तम करती हूँ बीयर

अवी-रहने दो ,बस थोड़ी बाकी है

विद्या-मेरा पानी तो बीयर से नशीला है. उसे पी लो

अवी-विद्या आज मैं ने गोली खा ली है

विद्या-गोली

अवी-एक डॉक्टर ने बताया था इसे खाने से ज़्यादा देर सेक्स कर सकते है.

विद्या-फिर तो मज़ा आएगा.

अवी-इसी लिए कहता हूँ थोड़ा रूको

विद्या-तब तक मैं तेल लगा लूँ.

अवी-ये ठीक रहेगा.

विद्या अपनी गंद पे तेल लगाने लगी.और मैं बीयर पीने लगा.
 
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