• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मैं और मेरा परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
चॅप्टर 850 आ

मैं आराम से बीयर पी रहा था.

विद्या मेरे सामने चेयर पे बैठ कर मुझे अपनी चूत दिखा कर अपने गंद मे उंगली कर रही थी.

विद्या अपने नशीले बदन से मुझे अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रही थी.

उसका गुलाबी होंटो को अपने दाँतों मे दबाना ,अपने बूब्स को अपने जीभ से चाटना.

अपने पैर को खोलना बंद करना जिस से उसी उसकी चूत के दर्शन कातिल तरीके करवाना.

आज तो विद्या मेरी जान लेकर रहेगी.

मैं ने एक सीप मे बीयर ख़तम की और टेबल पे रखी हुई पैंटी अपने हाथो मे उठा कर विद्या को दिखाने लगा.

विद्या समझ गयी कि अब मैं क्या करने वाला हूँ.

विद्या चेर से उठ कर कॅट्वाक करते हुए मेरे पास आ गयी.

आज मैं पहली बार किसी को कपड़े पहना कर चुदाई करने वाला हूँ.

हर बार पैंटी निकाल कर चुदाई सुरू करता था .इस बार पैंटी पहना कर चुदाई करने वाला था.

जी स्ट्रिंग वाली पैंटी पहना कर विद्या की गंद मारने वाला हूँ.

विद्या ने मेरे पास आकर अपने पैर को मेरी चेस्ट पे रखा और मैं ने उसकी पैंटी पहना दी.

पैंटी से उसकी चूत को छुपाने के बाद मैं नेउसे अपने उपर गिरा दिया.

विद्या हवा मे लहराती हुई मेरे उपर गिर गयी और हमारे होंटो को मिलन हो गया.

विद्या इसी का इंतजार कर रही थी. उसने तो बीयर को बहुत गालियाँ दी होगी .

विद्या तो पूरी नंगी थी. पैंटी जिस से कुछ छुप नही सकता वो पहन कर मुझे किस कर रही थी.

मैं ने विद्या को किस करते हुए अपनी जीन्स विद्या की मदद से निकाल दी.

जीन्स निकालते ही मेरे लंड ने राहत की सास ली फिर भी पैंटी और अंडरवेअर चूत और लंड के मिलन के बीच मे आ रही थी

विद्या तो लंड से पहले मुझे प्यार करना चाहती थी. इसी लिए वो मेरे होंटो चूस कर इतने दिन का इंतजार का फल पूरा खाना चाहती थी.

मेरी नज़र तो विद्या की गंद पर थी.

आज तो विद्या की गंद ऐसी फाड़ुँगा कि दुबारा गंद मारते हुए वो चीखेंगी नही.

विद्या अपनी गंद को तेल लगा चुकी थी. ऐसे मे जल्दी असली गेम सुरू करने के मूड मे था.

आज पहले चूत नही मारूँगा. पहले गंद ,और सिर्फ़ गंद, अगर ज़्यादा ज़रूरती होंगी तो चूत मारूँगा

लेकिन ये क्या विद्या तो मुझसे ऐसे चिपक गयी जैसे स्नेक एक दूसरे से लिपटे है.

इतना ही नही विद्या मुझे किस करते हुए बेड पर इधर उधर अपने साथ लुड़का रही थी.

विद्या की जल्दी गंद फाडनी पड़ेंगी वरना वो मेरा रेप कर देगी.

मैं भी ना ,सोचने मे टाइम वेस्ट करता हूँ .और विद्या उस ने तो मेरी अंडरवेर फाड़ दी.

विद्या तो शेरनी की तरह मुझपे अटॅक कर रही थी.

लंड तो गोली खाने से कुछ ज़्यादा फूल गया था. लंड पे ब्लड वेन्स साफ नज़र आ रही थी.

विद्या मेरे लंड का विकराल रूप देख कर डर गयी.

पर डरने से काम कैसे चलेगा.

विद्या ने मेरे लंड कई बार प्यार किया था पर आज का लंड देख कर तो वो थोड़ी डर गयी थी.

पर विद्या ने अपनी गंद पे हाथ रख कर थोड़ा सहला दिया .और लंड को अपनी गंद के लिए चिकना बनाने लगी.

अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटने लगी.

मेरे लंड को अपने प्यार के जाल मे फसाने लगी.

मेरे लंड को धीरे धीरे चूसने लगी.

विद्या तो मुझे कुछ करने नही दे रही है.

मैं तो यहाँ विद्या को मसल्ने आया था पर यहाँ तो विद्या मुझे खा रही थी.

मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी कि इसके बाद इतना अच्छा मोका उसे मेरे लंड को प्यार करने को नही मिलेगा.

विद्या सब कुछ करेंगी तो मैं क्या करूँगा.

अवी-विद्या

विद्या-ह्म

अवी-मेरा भी थोड़ा ख़याल रखो.

विद्या-ह्म्मे

उसे तो मेरे लंड के सिवा कुछ और नही दिख रहा था.

उसे लग रहा था कि मैं उसका प्यारा खिलोना उस से छिन लूँगा.

अवी-विद्या 69

विद्या-ह्म

विद्या ने अपने मुँह से लंड बाहर नही निकाला. अपना सर हिलाके मुझे आवाज़ दी

और बिना लंड बाहर निकाले मेरे मुँह पे अपनी चूत लाकर मेरा लंड चूसने लगी.

मैं ने तो पहले उसके चूतड़ पे थप्पड़ मार कर ये देखा कि इनको कितने धक्को की ज़रूरत है.

चूतड़ मेरे थप्पड़ से हिलते हुए मुझ अपनी गंद का छेद दिखाने लगे

गंद का छेद पैंटी की स्ट्रिंग मुझसे छुपा नही पाई.

बहुत चिकना करके रखा था विद्या ने अपनी गंद को

आज तो विद्या की गंद मार कर मज़ा आ जाएगा.

गंद मारने से पहले अपनी प्यास तो बुझा दूं

मैं ने पैंटी को अपने हाथ से थोड़ा सरका दिया तो चूत से कुछ बूंदे नीचे गिर गयी.

विद्या तो पानी पानी हो रही है.

विद्या की चूत का पानी वेस्ट कैसे होने दूँगा.

मैं ने देर ना करते हुए अपनी जीभ से उसकी गीली चूत को चाट लिया.

वाउ क्या टेस्ट था. विद्या तो औरत बन गयी.विद्या का नशा मुझे सब गम भूलने मे मदद करेगा

टेस्टी पानी पीकर तो दिल खुश हो जाएगा.

मैं ने अपनी जीभ और उंगली को काम पे लगा दिया.

विद्या की चूत पे अपनी जीभ को डालने लगा.

विद्या तो इस से ज़्यादा फरक नही पड़ा.

वो तो अपने काम पे लगी हुई थी. मेरे लंड को प्यार करती रही.

हम दोनो एक दूसरे को ऐसे प्यार करने लगे कि पानी निकलने तक कोई रुकेंगा नही.

मैं तो गोली खा चुका था. ऐसे मे विद्या का पानी पहले निकल गया.

विद्या की चूत की धार सीधे मेरे मुँह आ गयी.

विद्या ने अपना पानी निकालने तक मेरा लंड अपने मुँह से बाहर निकाल दिया.

मैं ने उसका पानी पी लिया.

विद्या तो अपना पानी मुझे पिला के फिर से मेरा लंड अपने मुँह मे लेना चाहती थी पर मैं ने उसे रोक दिया.

विद्या तो मेरी तरफ गुस्से से देखने लगी.

मैं ने विद्या को शांत किया और उसको बेड पे लेटा दिया और मैं उसके पेट पे आ गया.

विद्या-मुझे चूसने दो

अवी-इतना पसंद आया है

विद्या-वो मेरा है. मुझे उसे प्यार करने दो

अवी-अलग तरह से चूसना चाहोगी.

विद्या-हाँ

मैं ने विद्या के सर को थोड़ा उपर किया

उसके बूब्स के बीच मे मेरा लंड आगया.

मैं ने विद्या को लंड को बूब्स से दबाने कोकहा.

विद्या के ऐसा करते ही मैं उसके बूब्स को चोदने लगा.

विद्या को अपने बूब्स को मेरे लंड से चुदवाने मे मज़ा आ रहा था.

मैं ने ऐसा झटका मारा कि मेरा लंड उसके मुँह के पास चला गया.

विद्या ने अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटना सुरू किया.

मैं उसके बूब्स को चोदने लगा.

विद्या मेरे लंड को चाटने लगा.

इसमे हम दोनो को मज़ा आने लगा.

विद्या को तो डबल मज़ा आ रहा था.

इस तरह लंड चूसने विद्या को अलग मज़ा दे रहा था.

पर इसमे विद्या की जीभ दुखने लगी.

विद्या के बूब्स को मेरे लंड ने लाल कर दिया.

अब उसकी गंद लाल करने का समय आ गया था.
 
चॅप्टर 880 ब

विद्या के बूब्स को चोदने के बाद उसकी गंद फाड़ने को मैं तैयार था.

मैं किस पोज़िशन मे उसकी गंद मारू यही सोच रहा था.

चलो इसकी गंद डॉगीस्टाइल मे मारता हूँ. इसमे मज़ा आएगा.

इसमे उसकी चीखे रोक तो नही पाउन्गा पर कोई बात नही या कौन उसकी चीखे सुनेंगा.

मैं ने उसे डॉगी स्टाइल पोज़िशन मे आने को कहा.

वो एक मासूम बच्चे की तरह मेरे बात को मान रही थी.उसके लिए मैं सब कुछ था.

वो बेड के किनारे पर डॉगी स्टाइल पोज़िशन मे आ गयी और मैं उसके ठीक पिछे अपने खड़े लंड को उसकी गंद मे घुसाने को तैयार था.

उसकी गांद लाजवाब लग रही थी और गंद की भूरी छेद जैसे मुझे चिढ़ा रही थी. मुझे लंड को जल्दी अंदर डालने को बोल रही थी

उसकी गंद मे जाने के लिए आज मेरा लंड खड़ा हुआ था.

मैं अपने दोनो हाथो से उसकी गंद मसल्ने लगा और उसके चूतड़ पे थप्पड़ मारने लगा.

उसके चूतड़ को थप्पड़ मार के मैं उसे गरम कर रहा था.

चूतड़ पर मारना गंद मारने मे मदद करता है.

उसकी पैंटी की स्ट्रिंग को मैं ने एक चूतड़ मे फसा दिया जिस से मेरा लंड और उसकी गंद के छेद आपने सामने आ गये.

खिलाड़ी आमने सामने आते मॅच सुरू कर देनी चाहिए.

मैं ने लंड का उसकी गंद से मिलन करा दिया.

अपना लंड उसके गंद के छेद के उपर रगड़ने लगा.

विद्या अपने दोनो चूतड़ के बीच मे मेरे लंड को दबाने लगी

और अपनी कमर को और आगे पिछे करने लगी.ताकि लंड उसकी गंद मे चला जाए.

विद्या ने चूत मारने को नही कहा. क्यूँ कि उसे पता था कि आज गंद मरवाना कितना ज़रूरी है. आज गंद खुलेंगी तभी तो घर मे उसकी चुदाई बिना आवाज़ की चलेगी.

मैं ने उसके दोनो लेग्स को चिपका दिया. क्या नज़ारा था विद्या की गंद और चूत का .चूतड़ के बीच मे फसा हुआ मेरा लंड.

विद्या के गोरे बदन पर मोटी सुडोल गंद जैसे कहर ढा रही थी.

अपनी उंगली उसकी गंद मे डाल कर मसाज करने की ज़रूरत नही थी विद्या ने अपनी गंद को तेल लगा कर तैयार किया था.

उसके चूतड़ मे मेरा लंड फँसने से उसकी गंद पे लगा हुआ तेल मेरे लंड पे लग गया.

विद्या तो इस इंतज़ार मे थी कि कब मैं उसकी गंद मार कर चीखे निकालूँगा.

तब से मेरा लंड उसकी चूतड़ मे फसा हुआ था .अब मेरे लंड को उसकी मंजलि तक पहुँचाने का समय आ गया था.

मैं ने अपने लंड के टोपा को उसकी गंद की छोटी सी छेद के मुँह पर रख दिया.

विद्या तैयार हो गयी मेरे लंड का झटका खाने को

मैं ने धीरे से एक झटका दिया पर मेरा लंड फिसल गया.

विद्या ने तेल ज़्यादा लगाया था. कोई बात नही मैं ने फिरसे अपने लंड को अड्जस्ट कर के झटका दिया.

इस बार मेरा लंड करीब 2 इंच अंदर चला गया.विद्या ने अपनी गंद उंगली डाल कर खोल रखी थी .पर उंगले कहाँ और लंड कहाँ.

विद्या के लिए मेरा टोपा बड़ा लग रहा था जिस से वो दर्द की वजह से चिल्ला उठी

“बाप रे बाप. मर गयी मैं. ऊ आहह. ह्म्म्म्ममम. बहुत दर्द हो रहा है.अवईीईईईईईईईईईईई........ माआआआआ.......... आआआहह........ दर्द्द्द्द्दद्ड...... प्लीज़ ज़रा धीरे करो. प्लीईईआसए”.

विद्या ने दर्द के मारे बेडशीट पकड़ ली.

विद्या को दर्द सहन नही हो पा रहा था. अभी तो शुरुआत थी.

मैं कुछ पल के लिए रुक कर धीरे धीरे अपने लंड को उसकी गंद मे घुसाने लगा.

विद्या अब भी दर्द के मारे कराह रही थी. उसकी गंद बहुत टाइट थी.

दूसरे झटके के साथ मेरा आधा लंड उसकी गंद मे घुस गया.

उसने ने अपनी गंद खोल के रखी हो .पर जब लंड अंदर जाता है तो दर्द बाहर निकलता है.

अवईीईईईईईई...... ओथनाआआआआ....... ईईईईईईईई....... और्र्र्र्र्ररर......मात्त्तटटतत्त....... डालनााआआ....... दर्द्द्द्द्द्दद्ड....... हूऊऊऊऊ...... रहाआआआअ........ हाईईईईईईईईईईईईईईईई.......

मैं थोड़ी देर के लिए रुक कर उसकी चूत मे उंगली करने लगा.

विद्या ने मेरा हाथ अलग किया और खुद चूत मे उंगली करने लगी.

विद्या का दर्द थोड़ा थोड़ा कम होते हुए देख कर मैं ने उसकी कमर को पकड़ लिया.

और अपने लंड को उसकी गंद मे धीरे धीरे आगे पिछे करने लगा.

विद्या कराह रही थी.पर मैं आधे लंड से धीरे धीरे धक्के मारने लगा.

मेरे ऐसा करने उसकी गंद खुलने लगी.

विद्या की गंद खुलते ही उसका दर्द कम हुआ पर अभी आधा लंड और जाना बाकी था.

मैं ने धक्को की स्पीड धीरे धीरे बढ़ानी सुरू की.

ऐसा करते ही विद्या को दर्द होने लगा तो मैं बीच बीच मे रुक कर अपने लंड को उसकी गंद मे घुमाने लगा.

मेरा साथ विद्या भी देने लगी. मेरे रुकते ही कभी कभी विद्या अपनी गंद को घूमते हुए मेरे लंड को फील करती.

इससे मुझे काफ़ी जोश आने लगा.ये जोश बाकी का लंड उसकी गंद मे डालनेको काफ़ी था.

फिर मैं ने अपनी पूरी ताक़त से एक जोरदार झटका मारा.

और मेरा पूरा लंड विद्या की गंद मे गया और उतनी चीख विद्या के मुँह से निकली.

इस बार भी वो चिल्लाई और मुझे रुकने को कहने लगी.

पर मैं रुकने की जगह धीरे धीरे गंद मारने लगा.

मेरे ना रुकने से विद्या ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत मे उंगली करने लगी.

पर विद्या ने लंड बाहर निकालने को नही कहा.

और हम दोनो के प्यार ने जल्दी दर्द को ख़तम करके मज़ा लेना सुरू कर दिया.

मैं धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ाने लगा.

विद्या भी मेरा पूरा साथ देने लगी.

उसने अपनी गंद को उपर की तरफ उठा केरखा था.जिस से मैं आराम से धक्के मार सकता था

जब भी मेरी कमर उसकी चूतड़ो से टकराता, तो रूम मे पॅट पॅट जैसी आवाज़ गूंजने लगती.

कभी कभी विद्या भी अपनी कमर को पीछे कर के मेरे धक्को का जवाब बेख़ुबी दे रही थी.

विद्या की मोन और चुदाई की आवाज़ मुझे नये जोश मे ले आई और मैं ज़ोर ज़ोर से अपने तगड़े लंड को आगे पिछे करने लगा.

विद्या भी अपनी गंद को उचा करके मेरे लंड पे मारने लगी.हमारे धक्के को मॅच करने की कोशिश करने लगी.

जब मैं अपने लंड को अंदर धकेल्ता तो वो अपनी कमर को पीछे ले आती और जब मैं अपने लंड को वापस खिचता तो वो भी अपनी कमर को आगे ले जाती.

मेरे धक्को से और उसकी चूत मे उंगली करने से उसका पानी निकलने वाला था

मैं अपना सारा होश खो रहा था विद्या की गंद मारने के लिए

कुछ ही पल मे विद्या की चूत से पानी निकल गया .और मैं रुक गया ताकि वो थोड़ा आराम कर सके

विद्या ने थोड़ी देर आराम किया ,और पानी पी कर फिर से अपनी गंद मे मेरा लंड लेने को तैयार हो गयी.

वो सीधी लेट गयी .और अपनी गंद के नीचे पिल्लो रख कर लंड अंदर जाने का इंतजार करने लगी.

मैं ने अपने लंड को पकड़ कर उसके गंद के मुँह पर रख कर धीरे से झटका मार कर अंदर डाल दिया.

कुछ ही पल मे मेरा पूरा मोटा तगड़ा लंड उसकी मोटी गंद मे समा गया.

और मैं अपने गरम रोड को अंडर बाहर करने लगा.

विद्या को दर्द के साथ साथ मज़ा भी आ रहा था.

धीरे धीरे मैं ने अपनी स्पीड बढ़ाई. जब जब मेरी कमर उसके गांद से टकराती, उसकी चुतदो मे वाइब्रेशन होने लगता . इसे देख कर मैं पूरे जोश से भर गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा.

जोरदार धक्को की वजह से उसके बूब्स हवा मे हिलने लगे. वो ज़ोर ज़ोर से मोन करने लगी और अपने बॉडी का आर्च बनाने लगी.

इस पोज़िशन मे मैं बहुत देर तक विद्या की गंद मारता रहा.

विद्या इसका पूरा मज़ा ले रही थी.दर्द को अलग रख कर मेरे धक्को का मज़ा लेने लगी.

फिर जैसे ही मैं ने लंड बाहर निकाला और उसे आराम करने का तोड़ टाइम दिया .

आराम करने के लिए विद्या ने अपने लेफ्ट करवट पर अपनी दोनो लेग्स को मोड़ कर लेती गयी.

विद्या को ऐसे पोज़िशन मे देख कर मेरा लंड फुदकने लगा .विद्या की गंद मे जाने को

विद्या आराम कर रही थी तो मैं जा कर विद्या के पिछे लेट गया

और अपना लंड उसके गंद की छेद पर रगड़ने लगा.

विद्या समझ गयी कि मैं फिर से गंद मारने वाला हूँ. मेरा वीर्य अब तक निकला नही था.

मैं ने देर ना करते हुए विद्या की छोटी सी गंद के छेद मे अपना तगड़ा लंड घुसेड दिया.

विद्या चीख पड़ी.

मैं एक हाथ से विद्या के बूब दबाने लगा और इधर मैं अपनी चुदाई की स्पीड भी बढ़ाने लगा

विद्या तो सातवे आसमान मे थी

मैं उसकी गंद मारता गया .वो शीष्कारिया लेती गयी.

फिर मैं आगे झुक कर उसके होंटो को किस करने लगा. वो भी मेरे होंटो को चूसने लगी.

मैं ने अपनी जीभ को उसके मुँह मे घुसा दिया और उसके जीभ के साथ खेलने लगा.

हम दोनो फिरसे गरम हो गये थे. हमारा बदन चिंगारी पैदा कर रहा था.

मैं ने उसके दोनो लेग्स को बिल्कुल स्ट्रेट किया और अपने राइट लेग से उसके दोनो लेग्स को लॉक कर दिया.

इधर मेरा लंड भी उसके दोनो बड़े बड़े चूतड़ो के बीच पीसने लगा.

मैं ने एक हाथ से उसके उपर वाले चूतड़ को उपर उठाया और जोरदार धक्के लगाने लगा.

उसने दर्द के मारे अपने एक हाथ से मेरी पीठ को ज़ोर से पकड़ लिया और अपने नाख़ून चुभाने लगी.

अब वो ज़ोर ज़ोर से कराह रही थी “और ज़ोर से चोदो मुझे. फाड़ दो मेरिइईईईईईईई गांद. आआअहह. ऊऊहह. बहुत मज़ा आ रहा है. ऐसे ही चोदते रहो. हाआाआअँ. बिल्कुल ऐसे ही. ओह. आईईईहह. उम्म्म्ममम. हां. हां”

उसकी आवाज़ और चुदाई की पाट पट पट पॅट आवाज़ मुझे मदहोश कर रही थी.

मैं पूरी तरह से खो चुका था. मेरे शरीर मे खून तेज़ी से दौड़ने लगा.

विद्या भी पूरे जोश मे आ गयी थी. उसने अपने बदन को पूरी तरह से टाइट कर के आर्च बना लिया था.

और मैं ने अपना गरम गरम वीर्य उसकी गंद के बिल्कुल अंदर छोड़ दिया.

मेरे वीर्य से उसकी गंद को ठंडक मिली.

उसकी इतनी लंबी गंद मारी कि वो खुश हो गयी.

उसे चूत ना मरवाने का गम रहेगा.पर अभी तो पूरी रात बाकी है.

चूत भी मार लूँगा.

लंबी चुदाई के बाद जब हम नॉर्मल हुए तो,हम दोनो वापस होश मे आए तो वो मुस्कुरा रही थी.

मैं जितना सॅटिस्फाइड था उससे कहीं ज़्यादा वो सॅटिस्फाइड लग रही थी.
 
चॅप्टर 880 सी

विद्या की गंद मार मुझे मज़ा आया. विद्या को मज़ा आया .

पर चुदाई ख़तम होते उसके बदन मे दर्द होने लगा.

उसकी गंद मे दर्द हो रहा था. वो बेड से उठ नही पा रही थी.

मैं ने विद्या को थोड़ी देर आराम करने दिया.

अवी-विद्या

विद्या-अवी दर्द हो रहा है.

अवी-पहली बार दर्द होता है. फिर करेंगे तो मज़ा आएगा.

विद्या-अवी कुछ करो ना .दर्द हो रहा है.

अवी-पेनकिलर और गरम पानी.

विद्या-मुझसे उठा नही जा रहा है

अवी-मैं तुम्हें बाथरूम मे जाता हूँ.

मैं ने विद्या को अपनी गोद मे उठाया और बाथरूम मे ले गया.

बाथरूम मे उसके लिए गरम पानी कर दिया .और वो अपनी गंद को गरम पानी से सिकाई करने लगी.

तब तक मैं ने उसके लिए पेन किल्लर लाया .और मैं फ्रेश होके बाल्कनी मे चला गया.

होटेल मे सब सो चुके थे .ऐसे मे मैं सिर्फ़ अंडरवेर मे बाल्कनी मे बैठ कर बीयर पीने लगा.

चुदाई करने के बाद बीयर पीते हुए चाँद को देखना अच्छा लग रहा था.

विद्या ने गरम पानी ने अपना आधा दर्द कम किया और बाकी दर्द पेन किल्लर ख़तम कर देगा.

विद्या फ्रेश होके मेरे पास आ गयी.

वो नाइटी पहन कर मेरे पास बाल्कनी मे आ गयी.

दूसरी चेर पे बैठने की जगह वो मेरे गोद मे आकर बैठ गयी.

अवी-अब कैसा लग रहा है

विद्या-दर्द कम है

अवी-आज के बाद सिर्फ़ मज़ा ही मज़ा होगा.

विद्या-वो पता है. अब हम घर मे भी प्यार कर सकते है

अवी-घर पे तो करेंगे पहले यहाँ तो कर लूँ

विद्या-फिर से करोगे

अवी-हा, पर चूत मारूँगा.

विद्या-धीरे धीरे करना

अवी-प्यार से करूँगा.

विद्या-चलो बेड पे

अवी-इतनी जल्दी क्या है. थोड़ी देर यही बैठो

विद्या-तुम फिर बीयर पी रहे हो, क्या बात है

अवी- कुछ नही

विद्या- कुछ तो बात है , क्यूँ कि आज मैं ने नये अवी की देखा है , और मे बी तुम किसी बात से परेशान हो या किसी गम मे हो जो बीयर पे बीयर पी रहे हो

अवी-ऐसे कुछ नही है , घर पे पीने को नही मिलती.

विद्या-तुम दारू मत पीना ,तुम ऐसे सरीफ़ अच्छे लगते हो

अवी-और तुम बिना कपड़ो की अच्छी लगती हो.

विद्या-तुम कहो तो ज़िंदगी भर बिना कपड़ो के रहूंगी

अवी-और चाची मेरी पिटाई करेंगी.

विद्या-अवी .तुम बहुत लकी हो जो इतना प्यार करने वाली चाची मिली है

अवी-लकी तो मैं हूँ. और तुम भी लकी हो.

विद्या-इतनी अच्छी फॅमिली का एक हिस्सा जो हूँ मैं

मैं बात कर रहा था कि मोबाइल पे एक मेसेज आया

अवी-विद्या .मोबाइल देना

विद्या ने मुझे मोबाइल दिया

विद्या-किसका मेसेज है

अवी-राजेश का

विद्या-वो तुम्हें बुला रहा है.

अवी-बुला तो रहा है. पर आज मैं तुम्हारे साथ सोउंगा.

विद्या-देख तो लो मेसेज मे क्या है.

अवी-तुम पढ़ लो

विद्या ने मेसेज पढ़ लिया.

विद्या-वो तुम्हें अर्जेंट्ली बुला रहा है

अवी-मेसेज करके पूछो ,क्या हुआ है.

विद्या ने मेसेज किया और राजेश का रिप्लाइ भी आ गया

अवी-क्या कहा राजेश

विद्या-कह रहा है कि चिड़िया जाल मे फँस गयी है. साथ मे चिड़िया का मज़ा लेते है.

अवी-तुम समझी राजेश ने क्या कहा.

विद्या-नही. वो किस चिड़िया की बात कर रहा है.

अवी-चिड़िया मतलब लड़की

विद्या-क्या ,लड़की, मतलब राजेश ने एक लड़की को पटाया है. और तुम्हें साथ मे मस्ती करने को बुला रहा है.

अवी-तुम तो स्मार्ट हो

विद्या-तुम राजेश के साथ मिल कर, वो तुम्हारा भाई है

अवी-तो क्या हुआ. वो भी जवान हो रहा है.

विद्या-तो तुम राजेश के पास जाओगे

अवी-कहा ना आज तुम्हारे पास रहूँगा.

विद्या-तो राजेश को क्या कहूँ

अवी-लिख दो ,तुम उस चिड़िया का मज़ा लो मैं मोरनी का मज़ा ले रहा हूँ.

विद्या-मोरनी. मतलब मैं

अवी-तुम मेरी मोरनी हो

विद्या-अगर राजेश ने मोरनी का मज़ा लेने की बात कही तो तुम करने दोगे

अवी-नही. इसका फ़ैसला तुम पर होगा.

विद्या-क्या मतलब

अवी-मैं तुम्हें कभी रोकुंगा नही.

विद्या-मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ

अवी-पर राजेश तो तुम्हारा भी भाई .अगर उसके भले के लिए करना पड़ा तो

विद्या-अपने भाई के लिए ,अपने फॅमिली के लिए कुछ भी करूँगी.

अवी-मैं यही सुनना चाहता था.

विद्या-तो राजेश को क्या कहूँ

अवी-बोलो कि वो अकेले मज़ा करे.

विद्या-क्या तुम्हें पता है वो कौन है.

अवी-हाँ, होटेल की रिसीप्निस्ट

विद्या-वो तो मुझसे भी सुंदर और हॉट है. तुम्हें उसके पास जाना चाहिए

अवी-वो अपने बदन की वजह से खूबसूरत है. पर तुम्हारा दिल खूबसूरत है. और मैं तुम्हें छोड़ कर किसी और के पास कैसे जा सकता हूँ.

विद्या-मैं तो कभी भी मिल सकती हूँ . पर वो रेसीपिन्स्ट दुबारा नही मिलेगी

अवी-वो तुम्हारे सामने पानी कम है. आज की रात तुम्हारी है.

विद्या-लव यू,

अवी-तुम मेरी फॅमिली हो .वो रिसीप्निस्ट कौन है. कोई नही है.

विद्या-मैं आज तुम्हें बहुत प्यार दूँगी.

अवी-तो शुरू करे

विद्या-चलो बेड पे

अवी-एक राउंड यही पर . बाल्कनी मे करते है.

विद्या-यहाँ. किसने ने देख लिया तो

अवी-अब जैसे बैठ है वैसे एक राउंड करते है.

विद्या-खुले मे ,नया मज़ा मिलेगा.

अवी-अपनी नाइटी उपर करो और मेरी अंडर वेर नीचे करो

विद्या-एक बार लंड चूसू

अवी-तुम्हें मेरा लंड बहुत पसंद है.

विद्या-हाँ,

अवी-चूस लो ,पर खा मत जाना

विद्या-मैं सोने के आंडी देने वाली मुर्गी को कातूँगी नही.

अवी-शुरू हो जाओ ,सुबह घूमने जाना है .

और विद्या अपने काम मे लग गयी.

विद्या मेरे लंड को फिर से प्यार से चूसने लगी.

विद्या को मेरा लंड चूसने मे ज़्यादा मज़ा आता था.

ऐसे मे वो अपना पूरा प्यार लंड चूसने मे लगा देती.

विद्या को इस बार मैं ने रोका नही.

मैं बीयर पी रहा था

उसे जितनी देर लंड चूसना था वो चूसने दिया.

विद्या के रुकते ही उसकी चूत मारनी शुरू कर दी .

मुँह से लंड बाहर निकलते ही चूत मे चला गया.

बाल्कनी मे विद्या की चुदाई करके दिल खुश हो गया.

विद्या तो इतनी खुश हो गयी कि हम ने पूरी चुदाई बाल्कनी मे की.

विद्या अपनी चुदाई से खुश थी और मैं उसे खुश देख कर खुश था.

विद्या को प्यार करने के बाद हम एक कपल की तरह एक दूसरे की बाहों मे सो गये

विद्या मेरे बाहों मे सुरक्षित थी जिस से वो चैन से सो गयी.

सुबह तो मैं अलार्म की आवाज़ सुन कर उठ गया.

पर्विद्या अपनी गंद मरवा के सो रही थी.

विद्या को थोड़ा आराम चाहिए था.

मैं ने उसे सोने दिया और अपने रूम मे चला गया.

मेरे रूम मे वही नज़ारा था जो थोड़ी देर पहले विद्या के रूम मे था.

राजेश रिसीप्निस्ट के साथ चिपक कर सो रहा था.

मैं ने दोनो के उपर चद्दर डाली और फ्रेश होने चला गया
 
चॅप्टर 881

एक और दिन टूर पे आड करने से सब खुश थे.

चाचा तो सबसे ज़्यादा खुश होंगे. कल उन्होंने 2न्ड सुहागरात मनाई है.

कल तो बड़ी चाची के लिए हसीन रात थी. तो आज सीमा चाची और छोटी चाची की रात थी

लेकिन उसके लिए चाचा को बताना होगा कि वो आज हमारे साथ घूमने नही आ सकते.

और चाचा का स्टॅमिना कैसे बढ़ाना है ये चाची को पता था.

मैं फ्रेश हो गया तब तक राजेश भी उठ गया.

अवी-लगता है रात मे काफ़ी मेहनत की

राजेश- मत पूछो भैया,काफ़ी गरम चूत है इसकी

अवी-तुम भी कहाँ कम हो .

राजेश- पर आप होते तो पूरी गरमी निकाल देते इसकी

अवी-आज उतार दूँगा.

राजेश- वैसे कल आप किस मोरनी के साथ थे

अवी-एक कॉलेज की फ्रेंड मिल गयी उसी के साथ था.

राजेश-मुझे बुला लेते .मैं इसके साथ बोर हो रहा था.

अवी-वो मेरे लिए बड़ी मुश्किल से मानी थी. तुम्हें बुला लेता तो भाग जाती.

राजेश- भैया मेरी सेट्टिंग भी किया करो,आपकी मोरनी मेरी चिड़िया से अच्छी होती हैं.

अवी-नेक्स्ट टाइम पहले तेरी बात करूँगा. चल तैयार हो जा. आज तुझे घुमाना है सब को

राजेश- मुझे क्यूँ

अवी-चाचा को कल रात के बाद आराम चाहिए. तो हमे देखना होगा सबको

राजेश- मैं अभी तैयार होता हूँ.

राजेश को उसका काम समझा कर मैं स्वेता दीदी के रूम मे चला गया.

स्वेता दीदी तैयार हो चुकी थी तो सीतल दीदी नहा कर टवल मे मिरर के सामने अपने बाल बना रही थी.

अवी-दीदी गुड मॉर्निंग

स्वेता दीदी- अवी ,तुम तो आज जल्दी तैयार हो गये

अवी-दीदी आपके लिए सर्प्राइज़ का बंदोबस्त करना था.

सीतल दीदी- अवी कैसा सर्प्राइज़

अवी-आप अच्छे से मेक अप करो ,फिर मैं आपको सर्प्राइज़ के बारे मे बताउन्गा.

स्वेता दीदी- अवी ,सिर्फ़ सीतल को गिफ्ट दोगे

अवी-दीदी आपके लिए भी कुछ सोचा है.

स्वेता दीदी- क्या.

अवी-वो नाश्ता करते हुए पता चल जाएगा. पर आप ड्रेस चेंज कीजिए आप पे ये अच्छा नही लगता.

सीतल दीदी-दीदी अवी सच कह रहा है. आप जीन्स पहन लो

स्वेता दीदी- मैं नयी सलवार कमीज़ पहन लेती हूँ.

इनका तो हो गया.

फिर मैं पूजा बुआ के रूम मे चला गया. पूजा बुआ टी पी रही थी.

अवी-बुआ अकेली अकेली टी पी रही हो.राज कहाँ है.

पूजा बुआ- राज तो नहा रहा है. 1 घंटा हो गया .उसे यहाँ बहुत मज़ा आ रहा है

अवी-और आपको, आप एंजाय कर रही है कि नही

पूजा बुआ- एंजाय तो बहुत कर रही हूँ. पर तुम्हारे अंकल होते तो हमारा 4थ हूनमून हो जाता

अवी-4त, तभी अंकल की याद आती है आपको.

पूजा बुआ-वो तो अब जल्दी वापस आएँगे. वैसे ये बता कल सुमन और तेरे चाचा कहाँ गये थे

अवी-कहीं गये नही थे. उनके लिए हूनीमन सूट बुक किया था.

पूजा बुआ- तभी सोचु ,सीमा इतनी उछल क्यूँ रही थी. उसका नंबर आज होगा.

अवी-उनको जाने दीजिए. मैं तो आपका नंबर लगाने का सोच रहा हूँ

पूजा बुआ- यहाँ नही. यहाँ सब है. क्या पता कौन आ जाए.रिस्की है यहाँ पर.

अवी-ठीक है. पर मेरी टी मे शक्कर कम है.

पूजा बुआ- तो डाल दो

पूजा बुआ के इतना कहते ही मैं ने उनको किस किया.

किस करते बुआ की आँख बड़ी बड़ी हो गयी.

सुबह सुबह बुआ को किस किया ,आज का दिन अच्छा जाएगा.

अवी-आप बहुत मीठी हो

पूजा बुआ- तुम्हारे अंकल भी यही कहते है.

अवी-एक और

पूजा बुआ- जल्दी लो ,अगर राज आ गया तो प्राब्लम हो जाएगी.

मैं पूजा बुआ के सर को पकड़ कर किस करने वाला था कि मुझे हल्की से आवाज़ सुनाई दी.

मैं ने किस करने की जगह बुआ के आँख मे फूँक मारी

राज-भैया क्या हुआ माँ को

राज की आवाज़ सुनते ही पूजा बुआ डर गयी .पर मैं ने उनको शांत रहने को कहा.

अवी-राज ,बुआ की आँखो मे कुछ चला गया .उसे फूँक मार के निकाल रहा हूँ

पूजा बुआ- राज तुम ने नहा लिया.

राज-माँ ,यहाँ का बाथरूम इतना अच्छा है कि ,फिर से नहाने का मन हो रहा है. माँ हम अपने घर भी ऐसा बाथरूम बनाएँगे

पूजा बुआ- तुम्हारे पापा को कहना. चलो कपड़े पहन लो वरना तुम्हें यही छोड़ कर चले जाएँगे घूमने

बुआ की बात सुनते राज कपड़े पहनने लगा.

और मैं बुआ को आँख मारके बाकियो उठाने चला गया.

मैं रानी के रूम मे जाने वाला था कि चाचा ने मुझे आवाज़ दी.

चाचा- अवी

अवी-जी चाचा जी

चाचा- अवी ,वो मैं तुमसे कुछ कहना चाहता था

अवी-कहिए

चाचा-मैं ये कहना चाहता था कि

अवी-जो कहना बाद मे कहना ,मुझे आपको कुछ बताना था.

चाचा- क्या

अवी-आप आज होटेल मे रुक कर आराम कीजिए. सीमा चाची के लिए वो रूम आज भी बुक किया है.

चाचा- सीमा, मुझे उस से माफी माँगनी थी.

अवी-इसकी ज़रूरत नही. वो आज आपके साथ उस रूम मे

चाचा-समझ गया. तुम बता देना कि मैं उसे यादकर रहा था. मैं सोने जाता हूँ

अवी-बता दूँगा , आप आराम कीजिए

चाचा- अवी. मैं कभी गुस्सा करू ना तो बुरा मत मान लेना. वो मुझे कभी कभी बिना वजह गुस्सा आता है

अवी-मैं बुरा मान लेता तो सर्प्राइज़्ड थोड़ी देता

चाचा-सर्प्राइज़्ड अच्छा था. मैं अपने रूम मे हूँ अगर किसी बात की ज़रूरत पड़ी तो मुझे बता देना.

चाचा तो दिन भर आराम करेंगे.

ऐसे मे अब मुझे और राजेश को सब संभालना था.

मेरा मेसेज मिलते सब नीचे होटेल की कॅंटीन मे नाश्ता करने आ गये

चाचा को छोड़ कर सब आ गये थे.

नाश्ता ऑर्डर करते ही कविता और लीना आज की प्लॅनिंग कर रही थी

मेरी नज़र तो रानी पे थी.

और मैं अपने पैर से रानी के पैर के साथ खेल रहा था.

रानी को मेरे साथ अकेले घूमना था. पर वो मुमकिन नही था.

उसका दिल कर रहा था कि मेरे साथ घूमने जाए ,मूवी देखे ,साथ मे कोल्ड ड्रिंक पीने का .

पर सबके होते हुए मुमकिन नही था.

पर हम ऐसे इतनी मस्ती कर रहे थे कि रानी इसमे खुश थी.

इतनी खुश थी कि उसे मुझसे नही मेरी फॅमिली से ज़्यादा प्यार हो गया था.

सब के ज़ुबान पे रानी का नाम था

मेरी प्यार रानी.

जितनी तारीफ की जाए रानी की उतनी कम है.

वो मेरे फॅमिली के साथ अपनी ज़िंदगी के हसीन पल बिताना चाहती थी.

कल भी रानी ने सब के साथ बहुत एंजाय किया.

और अपनी स्मार्टनेस दिखा कर मेरे साथ वक्त बिता ही लेती थी.

कोमल को लगता होगा कि रानी कितनी वॉशरूम जाती है. पर उसके क्या पता रानी वॉशरूम जाने के बहाने से मुझसे मिलने आती है.

रानी मेरे पैरो को नाश्ता करते हुए सहला रही थी.

ऐसे मे मैं उसके प्लेट से स्वीट सा नाश्ता करने लगा

अब तो ये नॉर्मल था जिस से मैं बेफिकर फ्रीली रानी के साथ नाश्ता कर रहा था

आज कल हम आँख ही आँख मे प्यार भरी बात कर रहे थे.

मैं रानी को इशारे कर रहा था. उसके आँखो डूब गया था कि मेरा मोबाइल बजने लगा

और रानी हँसते हुए मेरी तरफ देख रही थी.
 
चॅप्टर 882

नाश्ता करते हुए रानी से प्यार भरी गुपतगु करते हुए अचानक मेरा मोबाइल बजने लगा.

मैं ने मोबाइल मे देखा तो साइड मे जा कर बात करने लगा.

रोहन- हेलो अवी

अवी-हेलो

रोहन- कहाँ हो,

अवी-तुम कहाँ हो. पहुँचे कि नही

रोहन-सिटी मे एंटर कर लिया थोड़ी देर मे होटेल मे पहुँच जाउन्गा

अवी-अकेले हो या सोहन भी साथ मे

रोहन- सोहन के साथ आ रहा हूँ. वो तो मुझसे पहले तैयार हो गया था.

अवी-अच्छी बात है. होटेल मे आते ही सीधे कॅंटीन मे आ जाना हम वही पर है.

रोहन- 10 मिनट मे पहुँच जाउन्गा. बाइ

रोहन से बात करके मैं फिर से नाश्ता करने लगा.

टूर पे आए तो सोचा की दीदी को एक सर्प्राइज़्ड दूं.

स्वेता दीदी रोहन को और सीतल दीदी सोहन को देख कर खुश हो जाएगी.

हिल स्टेशन मे अपने पार्टनर के साथ प्यार भरे पल बिताना हमेशा एक हसीन पल साबित होता है.

और इसी बहाने से रोहन और सोहन के साथ पूरी फॅमिली वक्त बिता पाएँगी.

और मेरी दीदी को भी अपने लाइफ पार्टनर के साथ प्यार करने का मोका मिलेगा.

पूजा बुआ को भी अच्छा लगेगा कि उनके दामाद फॅमिली टूर मे शामिल हुए है.

मैं वापस नाश्ता कर रहा था कि सीतल दीदी ने बात करनी शुरू की.

सीतल दीदी- अवी कल तुम मुझे एक सर्प्राइज़ देने की बात कर रहे थे.

अवी-सर्प्राइज़ थोड़ी देर मे मिल जाएगा.

लीना-भैया ये चीटिंग है. दीदी को गिफ्ट मिलेगा और हमे नही

सीतल दीदी- लीना तुझे भी कुछ ना कुछ ज़रूर देगा अवी.

पूजा बुआ-कैसा सर्प्राइज़ ,मुझे भी कुछ बताओ

नीता बुआ-दीदी ये हमे कुछ नही बताते पता नही क्या क्या करते रहते है

स्वेता दीदी- मौसी हमे भी कुछ पता नही है.

कोमल-दीदी कुछ स्पेशल होगा ,

अवी-वेरी स्पेशल है

कोमल-मैं समझ गयी.

रानी-तो ये सुरपरीज़ है. बेस्ट सर्प्राइज़ है ये तो

सीतल दीदी- तुम दोनो को क्या समझ मे आया.

कोमल-दीदी , आप के मज़े है आज तो

सीतल दीदी- अवी तू ही बता ,और जल्दी

अवी-एंट्री गेट की तरफ देखो,

सीतल दीदी ने जैसे एंट्री गेट की तरफ देखा तो उसके खुशी का कोई ठिकाना नही था.

डोर पे सोहन खड़ा था.

सीतल दीदी इतनी खुश हो गयी कि वो भाग कर सोहन के गले लग जाती.

खड़ी होकर सोहन की तरफ जाने वाली थी स्वेता दीदी ने हाथ पकड़ कर रोक दिया.

अच्छा नही लगता बडो के सामने इस तरह अपने प्यार को देख कर अपने संस्कार भूल जाना.

सोहन के पीछे से रोहन के आगे आते ही स्वेता दीदी भी खड़ी हो गयी.

स्वेता दीदी के चेहरे पे एक प्यारी सी चमक दिखने लगी.

स्वेता दीदी ने मेरी तरफ देख कर अपने पलकें झुका कर मुझे थॅंक्स कहा.

पूजा बुआ अपने होने वाले दामाद को देख कर खुश हो गयी. बाकी सब शॉक्ड हो गये.

कविता और लीना तो भाग कर अपने होने वाले जीजाजी के पास चली गयी.

कविता और लीना अपने जीजाजी को लेकर बड़ी शांति के साथ हमारे पास आ गयी.

पूजा बुआ-रोहन बेटा . ऐसे अचानक ,कोई खबर नही.

पहले तो रोहन सोहन ने बुआ का आशीर्वाद लिया.

रोहन-अचानक प्लान बन गया.अवी का कल कॉल आया था ,और हमे इन्वाइट किया.

सोहन-फॅमिली टूर पे जायंड होने से एक दूसरे को जानने मे मदद होगी इस लिए हम आ गये

पूजा बुआ-अच्छा किया ,मैं ने कहा था अवी को कि तुम्हें बुला ले ताकि थोड़ा वक्त सब के साथ बिता पाए

पूजा बुआ ने कब कहा था. पूजा बुआ तो स्मार्ट निकली.

ब चाची-अब तो स्वेता सीतल का भी मन लगा रहेगा .

नेहा बुआ-हाँ, कल तो दिन भर रोहन सोहन की बातें कर रही थी.

सीतल दीदी- मौसी मैं ने कब .

सीतल दीदी की बात पूरी होने से पहले स्वेता दीदी ने कोहनी मार कर सीतल दीदी को रोक दिया.

रोहन सोहन स्वेता दीदी और सीतल दीदी के चेर पे बैठ गये .और दीदी पूजा बुआ के पीछे जाकर खड़ी हो गयी.

पूजा बुआ-सोहन बेटा घर पे सब कैसे है.

सोहन-उनको क्या हुआ .सब फिट है. बस इस इंतजार मे है कि रोहन की पढ़ाई कब पूरी होगी .और घर मे बहू कब आएँगी.

सोहन की बात सुनते ही सीतल दीदी शरमा गयी.

नीता बुआ-इनकी पढ़ाई होते ही शादी कर देंगे. दोनो जब देखो तब मोबाइल पे बातें करती रहती है.

रोहन-आंटी मैं स्वेता को कहता हूँ कि हफ्ते मे एक बार बात करेंगे पर वो है कि दिन मे 4 5 बार फोन करती है

स्वेता दीदी ने रोहन की बात सुनते ही उसको आँख दिखाई कि मैं ने ऐसा कब कहा.

रोहन की बात सुनते ही सब स्वेता दीदी की तरफ देख कर हँसने लगे

सी चाची-सोहन तुम्हारी पढ़ाई तो पूरी हो गयी ना.

सोहन-हाँ आंटी, इंजीनियरिंग तो हो गयी. डिग्री मिलनी बाकी है

कविता-जीजू आप एमबीए करने वाले हो

लीना-आपने कॅट की एग्ज़ॅम दी है

नेहा बुआ-कविता ,

नेहा बुआ कविता को चुप करना चाहती थी पर सोहन ने उनको जवाब दिया.

सोहन-अरे तुम दोनो को तो बहुत पता है.

कविता-जीजू हम भी एमबीए करना चाहती है

सोहन-ये तो अच्छी बात है. जब करना होगा तो मुझे बताना ,मैं तुम्हारी मदद करूँगा.

लीना-आप से मदद लेना अच्छा रहेगा.पर आप नही कर रहे एमबीए

सोहन-अभी कुछ सोचा नही है. पहले एक जॉब करूँगा .अगर ज़रूरत पड़ी तो जॉब करते हुए एमबीए करूँगा.

कविता-ये तो बढ़िया रहेगा

ब चाची-बातें तो होती रहेंगी.पहले नाश्ता करते है. राजेश

राजेश-मामी नाश्ता 2 मिनट मे आ जाएगा.

रोहन-कोमल तुम क्यूँ चुप चाप बैठी हो

कोमल-जीजाजी, आप पिछली बार मेले मे मिले थे उसके बाद तो आप अपनी सालियो को भूल गये

रोहन-मैं भुला नही था ,पर तुम्हारी दीदी इतनी खूबसूरत है कि उनसे नज़र ही नही हटती थी

सोहन-रोहन ने सही कहा. सीतल को मैं ने कितनी बार कहा कि अपनी बहनों को शहर2 घूमने ले आओ ,तो पता है सीतल क्या कहती है.

राज-क्या कहती है दीदी

सोहन-राज ,तुम तो बड़े हो गये

राज-जीजाजी मैं तो बड़ा हो गया हूँ पर ये सब मुझे बच्चा समझते है. वैसे दीदी क्या कह रही थी.

सोहन-सीतल ने कहा कि वो अकेली मेरे साथ घूमना चाहती है.

राज-दीदी आपने ऐसा क्यूँ कहा

सीतल दीदी-राज तुम्हारे जीजाजी चाहते है कि पहले वो जॉब जाय्निंग करेंगे फिर अपने पैसो से सबको घुमाने ले जाएँगे

सोहन-तब तो तुम्हें पूरा इंडिया घुमा दूँगा

पूजा बुआ-सोहन ,जाय्निंग कब है. और लोकेशन कौनसी सेलेक्ट की

सोहन-1 महीने बाद कंपनी जाय्न करनी है .और मुझे अपना ही शहर2 मिला है.

सीतल दीदी-मैं ने कहा था वरना ये तो मुंबई जाने का सोच रहे थे

स्वेता दीदी-और तुझे मैं ने कहा था

सी चाची-सोहन तो जॉब करेगा फिर फॅमिली बिज़्नेस कौन देखेंगा.

सोहन-वो रोहन संभाल लेगा. उसने तो अभी से काम शुरू किया

रोहन-शादी तक अपने पैरो पे खड़ा होना चाहता हूँ

नीता बुआ-ये अच्छी बात है.

म चाची-मैं तो सोच रही थी शादी से पहले मँगनी हो जाती तो कितना अच्छा होता.

ब चाची-सीमा तेरी बात ठीक है पर वो क्या सोचते है वो देखना होगा.

रोहन-आंटी मैं ने यही बात अपने पापा से कही थी. वो जल्दी आप से बात करेंगे

पूजा बुआ-ये अच्छा रहेगा. पर अभी तक कुछ बताया नही

सोहन-मेरी जाय्निंग के बाद वो आपसे बात करेंगे

कोमल-दीदी

स्वेता दीदी-लो नाश्ता आ गया.

हम फिर से थोड़ा थोड़ा नाश्ता करने लगे रोहन सोहन के साथ

कोमल-जीजाजी ,आप यहाँ दीदी के लिए आए है कि हमारे लिए

कविता-जीजाजी तो दीदी से रोज मिलते होंगे शहर2 मे ,आज तो जीजाजी हमारे साथ घूमेंगे

रोहन-हम तो अपनी सालियो के लिए आए है.

रानी-जीजाजी, एक नज़र दीदी की तरफ देख कर बोलिए

रोहन-तुम रानी हो ना, कोमल की फ्रेंड

रानी-आपकी साली हूँ,

सोहन-इतनी सारी सालियाँ है ,आज तो सालियो के साथ घूमेंगे

कविता-जीजाजी पर आप अपनी बड़ी साली को साथ लेकर आते तो अच्छा होता

रोहन-पूनम से बात की थी पर वो बिज़ी थी.

कोमल-पूनम दीदी से आप मिलते रहते है. आज हम से भी मिल लीजिए

रोहन-जैसा तुम कहो.

नेहा बुआ-लगता है जीजा साली के बीच मे से हमे निकल जाना चाहिए

ब चाची-आज कल के बच्चों की बातें समझ मे नही आती.

पूजा बुआ- बातें बहुत हो गयी. हम चलना चाहिए .अवी आज का क्या प्लान है

रोहन-अवी तुम तो एक दम चुप चाप हो

राजेश-जीजाजी भैया प्लान बना रहे थे

रोहन-अवी अच्छा प्लान बनाना

और रोहन ने मुझे इशारा किया कि प्लान ऐसा हो कि वो स्वेता दीदी के साथ ज़्यादा रह सके

सोहन-राजेश. कोंग्रट्ज़ ,तुमने तो कमाल कर दिया. मेरिट मे आ गये

राजेश-थॅंक यू जीजू

रोहन-हमे भी कुछ टिप देना ,हमारी गाड़ी तो पढ़ाई मे आगे चलती नही.

राजेश-मुझ से ज़्यादा स्वेता दीदी आपकी अच्छे से मदद करेंगी.

रोहन-वो तो ,जाने दो

पूजा बुआ-अवी क्या सोचा है.

अवी-प्लान सिंपल है. यहाँ से हम हिल स्टेशन जाकर बचे हुए पॉइंट देख लेंगे. फिर दोपेहर मे लंच कर के शॉपिंग करेंगे

रोहन-इसमे दम नही है. अच्छा प्लान बनाओ

अवी- ये जनरल प्लान था. अब सबके लिए सेपरेट प्लान है.

कोमल-अब बता भी दो

अवी-हम सब हिल स्टेशन पे नयी जगह देख लेंगे. फिर दोपेहर मे चाची होटेल मे वापस आएँगी. और हम शॉपिंग करने जाएँगे. और

राज-और क्या भैया

अवी-स्वेता दीदी और सीतल दीदी कल वाली जगह घूमने ले जाएँगे रोहन को ,फिर वो भी शॉपिंग करेंगे

रोहन-ये प्लान ठीक रहेगा.

राज-मैं भी कल वाली जगह देखना चाहता हूँ

पूजा बुआ-ठीक है तुम भी अपने जीजाजी के साथ चले जाना.

पूजा बुआ ने मुझे राज को भेजने का इशारा किया.

स्वेता दीदी-राज तुम हमारे साथ चलना .पर अपने जीजाजी को ज़्यादा परेशान मत करना

रोहन-सब से छोटा साला है. उसका पूरा हक है अपने जीजा को तंग करने का

सोहन-कविता लीना तुम भी चलो हमारे साथ

कविता-थॅंक यू जीजाजी. पर हम ने कल ही प्लान बनाया था नयी जगह जाने का .

कोमल-आप जल्दी हमे जाय्न कर लेना.

लीना-शॉपिंग पे मिलेंगे.

कविता और लीना ने समझदारी दिखाते हुए अपने जीजाजी के साथ जाने से मना किया.

प्लान बनते हुए हम बस के पास आ गये

रोहन सोहन कार से आए थे .मैं ने कहा था कि कार से आना ताकि वो दीदी को कार मे ले जाने के बहाने से अकेले घूमने जाएगे

कार देखते ही राज तो उछल पड़ा .राज कविता और लीना को अंगूठा दिखाते हुए कार मे जाकर बैठ गया.

नीता बुआ ने कविता और लीना की पीठ थप थपा कर शाबासी दी.

और दोनो को नीचे उतार दिया

पूजा बुआ और बड़ी चाची दीदी को अकेले भेजने के खिलाफ थी.

इसी लिए राज को उनके साथ भेजा.

रोहन की कार तो हवा मे उड़ते हुए गायब हो गयी.

और हम बस से उनके पीछे पीछे चले गये.
 
चॅप्टर 883

स्वेता दीदी और सीतल दीदी के लिए आज का दिन स्पेशल था,उनके जीवनसाथी उनके साथ थे.

मुझे पता था कि वो राज के साथ क्या करेंगे.

वो राज को पहले स्वेता दीदी और रोहन के साथ करेंगे और वो दोनो अकेले मे घूम लेंगे.

फिर राज को सीतल दीदी और सोहन संभालता .और स्वेता दीदी रोहन के साथ हसीन वादियो का मज़ा लेंगी.

आज तो मौसम भी बढ़िया था.

आसमान मे बदल थे, हवाएँ चल रही थी.

ऐसे मे हमारे पास भी बहुत कुछ था एंजाय करने को

बुआ का तो पता नही पर मेरी तीनो चाची खुश थी. और उनकी खुशी की वजह थी 2न्ड सुहागरात

मैं ने बस वाले को रोहन के कार से दूसरी तरफ ले जाने को कहा. और हम कश्मीरी तालाब देखने के लिए आ गये.

तालाब मे लोग बोटिंग का मज़ा ले रहे .फुल एंजाय कर रहे थे.

हम तो इसी का इंतजार कर रहे थे.

यहा बोटिंग करने का पूरा मज़ा लेना चाहते थे. इसमे बुआ और चाची मना नही कर सकती थी. क्यू कि सबको स्वीमिंग आती है.

पर चाची के पास तो बच्चे थे.

ऐसे मे हमने बड़ी बोट जिसमे हम सब आराम से बैठ सकते है. उसका मज़ा लेने का सोचा.

चाची और बुआ का एंजाय करके हो गया तो हम कपल बोट मे बैठ सकते है.

पर पहले चाची के नाम मस्ती करेंगे. हम बोट मे आते शुरू हो गयी टाइटॅनिक का सफ़र

बुआ और चाची तालाब मे बोटिंग का मज़ा लेने लगी. सबका 1स्ट टाइम था.

सीमा चाची तो हमेशा हमारे साथ रह कर बच्ची बन जाती है.

सीमा चाची हमारे उपर पानी फेक रही थी.

ब चाची-सीमा संभलके बच्चो के उपर पानी गिर जाएगा.

पूजा बुआ-सुमन चल हम उधर लास्ट मे बैठते है. इनको खेलने दो

बच्चो को सेफ जगह ले जाते ही हम मस्ती करने लगे.

नेहा बुआ भी हमारे साथ मस्ती कर रही थी.

कविता और लीना, ने तो नेहा बूआको टारगेट किया क्यूँ कि नेहा बुआ उनको हर बार टोकती है.

पानी के उपर मस्ती करना ,पानी मे मछलियो का तैरते हुए देखना.

मैं तो रानी के पास बैठा था क्यूँ कि मैं उसके साथ अपने स्टाइल मे इस टूर को जीना चाहता था.

राज यहाँ हमारे साथ होता तो वो सबसे ज़्यादा मस्ती करता.

कोमल आज तो फुल फॉर्म मे थी.

उसने तो मुझे भिगो ने की कसम खा ली थी.

मेरे उपर पानी डाल के वो हँसने लग जाती. और जब मेरी बारी आती तो नेहा बुआ के पीछे छुप कर मुझे ठेंगा दिखाती.

चाचा यहाँ होते तो वो चाची के साथ कल की तरह मस्ती ज़रूर करते

इस बोट की सफ़र अच्छा था

अब हम कपल बोट पे बैठना चाहते थे कि हॉर्स राइडिंग देखते सब उधर भाग गये.

हॉर्स पे बैठने की सबकी इच्छा हो रही थी.

हॉर्स पे बैठ कर फोटो निकालने चाहती थी मेरी बहनें

पर उनको डर भी लग रहा था कि हॉर्स मारेगा तो नही.

ऐसे मे पहले राजेश ने ट्राइ किया. राजेश पहले भी हॉर्स की सवारी कर चुका था.

उसने तो हॉर्स पे बैठते ही हॉर्स को ऐसे कंट्रोल किया कि हॉर्स ने अपने आगे के पैर हवा मे उठा लिए और विद्या ने बिना देर किए फोटो निकाल ली.

राजेश की करतब देख कर कविता और लीना भी ऐसी फोटो लेना चाहती थी.

सब ने हिम्मत दिखाई.

पर फोटो कपल मे निकाली गयी.

राजेश ने पहले कविता फिर लीना के साथ फोटो निकाली

मेरे साथ हॉर्स पे पहले कोमल बैठ गयी

कोमल-अवी मैं गिर जाउन्गी

अवी-मेरे होते हुए तुम्हें कुछ नही होगा.

कोमल-अवी लगाम खिचो और मुझे यहाँ से ले चलो ,कहीं दूर

अवी-कहीं दूर ले जाउ, हॉर्स वाला हमारी पिटाई करेगा

पर कोमल को हॉर्स की सवारी करनी थी तो मैं उसे मैदान का एक चक्कर लगाने लगा.

मेरे साथ हॉर्स की सवारी करते हुए कोमल यूनिकॉर्न पे बैटी एक एंजल लग रही थी.

कोमल को इस तरह हवा मे उड़ता हुआ देख कर बुआ खुश थी.

अवी-कोमल सवारी पूरी हुई.

कोमल- अवी एक और बार.

अवी-तुम कहो तो हॉर्स खरीद लूँ.

कोमल-नही. बस एक दिन के लिए हॉर्स पे बैठा जाता है.

अवी-क्या कह रही हो मेरी समझ मे नही आ रहा है.

कोमल- कुछ नही. एक और चक्कर लगाते है मैदान का

अवी-जो हुकुम महारानी.

कोमल- राजकुमार लगाम खिचो

और मैं ने कोमल को फिर हॉर्स की सवारी का मज़ा दिलवाया.

कोमल ने इसके बदले मेरे गाल पे पप्पी की और नेहा बुआ के पास जाकर बैठ गयी.

कोमल के बाद रानी का नंबर था .

राजेश ने लीना को बिठाया था जिस से मुझे रानी के साथ हॉर्स की सवारी करने का गोलडेन चान्स मिला.

मैं ने रानी को हाथ दिया हॉर्स पे बैठने के लिए.

और मैं धीरे हॉर्स चलाने लगा.

अवी-अब हॉर्स पे बैठने से सच मुच की रानी लग रही हो

रानी- मेरे राजकुमार के साथ हॉर्स की सवारी करने से मैं रानी लग रही हूँ

अवी-तुम्हें बाइक पे घूमने से ज़्यादा हॉर्स सवारी करने मे मज़ा आ रहा है.

रानी- फील हो रहा है तुम्हारा मज़ा.

अवी-रानी ,तुम हाँ कर दो इसी घोड़ी को लेकर तुम्हारे घर आ जाता हूँ .तुम्हारा हाथ माँगने

रानी- घोड़ी पे ,वो तो सीधा शादी पे आना

अवी-तुम्हें पता है लोग शादी घोड़ी पे क्यूँ बैठते है.

रानी- पता है. पर तुम कुछ बताने वाले हो ऐसा लग रहा है

अवी-मैं नही कॉन्सेप्ट बताता हूँ

रानी- बोलो

अवी-शादी मे घोड़ी की सवारी करके इस लिए आते है कि वो सुहागरात मे दुल्हन को घोड़ी बना कर उसकी सवारी कर सके.

रानी- छी कितना गंदा बोलते हो तुम

अवी-लो ,इसमे गंदा क्या है.

रानी- मैं लड़की हूँ .कुछ तो शरम किया करो

अवी-मेरी प्यारी रानी. तुम शादी के बाद मुझे अपनी सवारी करवाओगी कि नही.

रानी-तुम बहुत गंदे हो

अवी-मैं गंदा हूँ. फिर मेरी कसम खा कर बताओ कितनी ब्लू फिल्म देखी है.

रानी- 10 12

अवी-अब बोलो कौन गंदा है.

रानी-तुम रोमॅंटिक बातें करने की जगह ये क्या बोल रहे हो

अवी-तुम्हारी आँख समुंदर के मोटी जैसे संदर है. तुम्हारे रेशमी जुल्फे तुम्हारे गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठ, तुम्हारी दिलकश अदाए, तुम्हारा संदर बदन

रानी- बस बस.

अवी-इतने से हार गयी.

रानी- डार्लिंग ,हम चाची के पास पहुँच गये.

अवी-चलो एक और राउंड मारते है.

रानी- नही. इतना काफ़ी है. बाकी की सवारी शादी के बाद मैं करवाउंगी .

इतना बोल कर रानी कोमल के पास भाग गयी.

रानी के साथ मेरी ज़िंदगी हसी खुशी बीतने वाली है.

रानी के बाद मैं ने ज़िद करके छोटी चाची को अपने साथ हॉर्स की सवारी करवाई.

अवी-चाची कैसा लग रहा है. मेरे साथ हॉर्स की सवारी करके

सी चाची- ऐसा लग रहा है कि मेरा राजकुमार मेरे साथ शादी करके मुझे अपनी दुनिया मे ले जा रहा हो

अवी-मैं जल्दी आप उड़ा ले जाउन्गा.

सी चाची- मैं भी तुम्हारे साथ उड़ कर किसी नयी दुनिया मे जाना चाहती हूँ

अवी-मैं आपके लिए नयी दुनिया बसाउँगा. वैसे आपकी बहू पता है क्या कह रही थी.

सी चाची- क्या

अवी-यही कि ये घोड़ी की सवारी आख़िरी बार कर लो .शादी के बाद वो मुझे उसकी सवारी करवाउंगी.

सी चाची- ऐसा कहा रानी ने .अभी उसकी खिच्चाई लेती हूँ

अवी-अच्छे से लेना ताकि मैं जल्दी रानी की सवारी कर सकूँ

सी चाची- तू देखता जा ,

और हॉर्स सवारी के इनाम मे मुझे एक पप्पी मिली

फिर सीमा चाची की बारी थी. तो राजेश नीता बुआ को हॉर्स सवारी करवा रहा था.

अवी-चाची कैसा लग रहा है.

म चाची- मैं तो कब से ऐसा मज़ा लेना चाहती थी. आज ये सपना भी पूरा हो गया.

अवी-छोटी चाची ने बताया

म चाची- क्या बताया

अवी-कि आपको घोड़ी बनकर सवारी करवाना अच्छा लगता है.

म चाची- उसे ऐसा कहा रुक मीना की अभी खबर लेती हूँ

अवी-फिर जाने दीजिए. मैं तो सोच रहा था कि मैं आपकी सवारी करूँगा.

म चाची- जल्दी करवाउन्गी.

हॉर्स सवारी मे बहुत मज़ा आया.

सब ने एंजाय किया.

लास्ट मे मैं ने विद्या को पूछा कि वो ट्राइ करेगी

अवी-विद्या तुम सवारी करोगी.

विद्या- नही. कल एक घोड़े ने ऐसी मेरी सवारी की है कि कुछ दिन मुझे आराम चाहिए

हॉर्स सवारी के बाद हम कुछ देर एक कॅंटीन मे जाकर हल्का नाश्ता किया.

हमारे नाश्ता करने तक स्वेता दीदी भी आ गयी.

मैं ने स्वेता दीदी से पूछा कि वो किस किस पॉइंट पे गये तो .

पहला आन्सर था लवर पॉइंट

दूसरा पॉइंट था मंकी पॉइंट

तीसरा पॉइंट था लवर पॉइंट

मैं समझ गया कि किस तरह एंजाय किया.

लेकिन एक गड़बड़ हो गयी.

राज ने जैसे ही विद्या के कॅमरा मे बोटिंग और हॉर्स स्वारी की फोटो देखी तो वो ज़िद करने लगा .

राज की ज़िद्द के सामने हम हार गये.

राजेश ने राज को एक नही 3 4मैदान के चक्कर लगवाए

उस से भी ज़्यादा ये देखने लायक था.

दोनो भाई रोहन सोहन गोदी पे बैठ गये.

गोदी पे बैठ कर हमारे पास कॅंटीन मे आ गये.

स्टाइल से दोनो नीचे उतर कर अपने अपनी दुल्हन के पास गये.

घुटने के बल बैठ कर

रोहन ने स्वेता दीदी को प्रपोज किया

सोहन ने सीतल दीदी को प्रपोज किया.

हम तो ये सब देखते ही रह गये.

हमारी तरह होटेल के बाकी कस्टमर भी उनके तरफ देखने लगे.

स्वेता दीदी और सीतल दीदी के हाँ करते दोनो ने अपनी अपनी दुल्हन का हाथ पकड़ कर घोड़ी पे पास ले गये.

अपने हाथो पे दीदी का पैर रखबा कर उनको घोड़ी पे बैठा दिया.

और अपनी दुल्हन के साथ घोड़ी पे बैठ कर चले गये जैसे सच मे शादी के बाद दुल्हन ले जा रहे हो

लोगो ने तालिया बजानी शुरू की.

पूजा बुआ के साथ साथ सबकी आँख मे खुशी के आँसू आ गये.

अपनी बेटी को इतना प्यार करने वाले जीवनसाथी मिल गये ये देख कर हर माँ की आँख मे खुशी के आँसू आ गये.

इस प्यार भरे पल को विद्या ने अपने कॅमरा मे क़ैद किया

रोहन और सोहन का अंदाज़ सबको पसंद आया.
 
चॅप्टर 884

इतना एंजाय करने के बाद भी हमारे पास काफ़ी समय था.

ऐसे मे कपल बोट पे मज़ा करने से अच्छा क्या हो सकता है.

स्वेता दीदी और सीतल दीदी को यही तो चाहिए था.

कपल का नाम सुनते तीन जोड़िया फिक्स थी. 2लव बर्ड का ग्रूप. कविता और लीना.

ऐसे मे मैं राजेश और राज के लिए तीन सुंदर अप्सरा रह गयी.

ऐसे मे हम ने कपल बनाने के लिए चॉक्लेट का ईस्तमाल किया. जिसके पास सेम चॉक्लेट होंगे वो कपल बन जाएँगे.

और मेरी किस्मत अच्छी थी .मैं रानी के साथ बोटिंग करूँगा. कोमल राजेश और विद्या राज के साथ .

हम अपनी अपनी बोट लेकर तालाब मे उतर गये. फिर शुरू हो गया .नया गेम

कविता और लीना अपने बोट से दूसरो की बोट को टक्कर मार देती.

राज भी वही खेल रहा था.

और हमारे लव बर्ड हम दूर जाके प्यार कर रहे थे.

उनको कौन डिस्ट्रब करेगा.

मैं भी रानी के साथ बोटिंग को एंजाय कर रहा था.

अवी-रानी चलो हम भी स्वेता दीदी की तरह इन से दूर जाते है

रानी-मुझे नही जाना. मुझे तो यही मज़ा आ रहा है.

अवी-चलो तो तुम्हें बहुत मज़ा करवाउन्गा

रानी-पता है ,तुम्हें किस चाहिए. भूल जाओ.

अवी-तुम्हें भूल जाउ

रानी-भूल जाओ. मेरे लिए तुम्हारी फॅमिली काफ़ी है

अवी-तुम भी ना. प्यार करने का अच्छा मोका गवाँ रही हो.

रानी-ये भी तो प्यार है. किसने कहा प्यार का सिर्फ़ अकेले मे किया जाता है. देखो तुम्हारी बहनें कितनी खुश है

अवी-आज मैं समझ गया कि तेज दिमाग़ वाली गर्लफ्रेंड कभी मत बनाओ.

रानी-वेरी फन्नी, तुम्हें किस रात मे दूँगी.

ये भी मेरे लिए अच्छा था क्यूँ कि मेरी होने वाली बीवी मेरी बहन और भाई का पूरा ख़याल रखती है.

कोमल ने राजेश को दीदी को लाने को कहा.

कोमल की बात मानते हुए हम सब लव बर्ड को डिस्ट्रब करने चले गये

लव बर्ड प्यार कर चुके थे.जिस से वो भी हमारे साथ मस्ती करने लगे

रोहन सोहन अपनी सालियो के साथ अच्छा वक्त बिता रहे थे.

कविता लीना तो हर बार एमबीए की बातें करके सोहन को परेशान कर रही थी. पर सोहन उनके सारे सवाल के जवाब दे रहा था.

राज तो ज़्यादातर रोहन के साथ रहना पसंद करता था.

यहाँ काफ़ी मस्ती हो गयी. कोमल ने ज़्यादा एंजाय नही किया. मे बी उसे मेरे साथ बोटिंग करनी हो

पर अब काफ़ी समय हो गया था. पूजा बुआ ने भी हमे वापस होटेल चलने को कहा.

आज लंच करना तो भूल गये. और चाचा भी इंतजार कर रहे होंगे

हम ने जल्दी वापस होटेल जाने का इंतज़ाम कर लिया.

जिस तरह हम आए थे वैसे वापस जाने लगे. नयी याद अपने साथ लेकर होटेल जाने लगे.

होटेल मे मैं ने रिसेप्सनिस्ट को बता दिया ताकि आज फिर से वो रूम चाहिए .उसे पूरा प्लान बता दिया था.

साथ मे होटेल जाते हुए उसे बताया कि लंच तैयार रखे.

होटेल जाते ही सबको भूक लगी थी.

चाची को किसी और चीज़ की भूक लगी थी.

हमारे आते ही, रोहन सोहन को देखते ही चाचा ने उनको विश किया.

फिर साथ मे लंच करते इतनी हसी मज़ाक हुई कि हँसने से पेट भर गया.

साली जीजा की बातें हो तो क्या कहने ,बुआ और चाची ने तो चुप रहना सही समझा.

स्वेता दीदी पूरा ध्यान रख रही थी कि कविता लीना उल्टा सीधा ना बोल दे.

कविता लीना नटखट ज़रूर थी. पर स्मार्ट भी थी. उनको पता था कि कब मज़ाक करना चाहिए और कब नही.

राज की बातें थोड़ी मज़किया थी पर उसके छोटे होने से मज़ाक मे उसकी बात उड़ा देते थे.

कोमल और रानी भी जीजाजी के साथ फ्रीली बातें कर रही थी

बातें तो होती रहेंगी पर हमे शॉपिंग जाना था. चाचा को सुहागरात मनानी थी.

लंच ख़तम होते 5.00पीएम बज गये .अब तो डिन्नर करने की ज़रूरत नही होंगी.

अवी-चलो शॉपिंग चलते है.

सोहन-हाँ, जल्दी शॉपिंग करते है. हमे वापस भी जाना है

पूजा बुआ-बेटा बाहर मौसम खराब है. तुम आज रुक जाओ ,कल हमारे साथ वापस चले जाना

सोहन-हम रुक जाते पर मम्मी को बताया नही है. उनको पता चला कि हम आप से मिलने आए है तो वो गुस्सा करेंगी.

नेहा बुआ-क्या मतलब बताया नही

रोहन-आंटी हम अपने फ्रेंड से मिलने आए है ये बताया है घर पे

अवी-तो क्या हुआ. फिर बता दो कि आज फ्रेंड के घर रुक रहे हो

रोहन-वो बाद मे देखते है पहले शॉपिंग को चलते है. अगर देर हो गयी तो रुक जाएँगे

पूजा बुआ-आसमान मे तो बदल छाए हुए है. ऐसे मे शॉपिंग मुश्किल लग रही है.

अवी-बुआ ये हिल स्टेशन है यहाँ ऐसा ही मौसम रहता है.

ब चाची-हम यहीं रुकते है. तुम सब शॉपिंग करो

और हम फ्रेश होकर शॉपिंग के लिए निकल पड़े.

सीमा चाची तैयार होके चाचा के साथ प्यार करने के लिए चली गयी

मैं जो कर रहा था उसमे सबकी भलाई थी. भले मेरी खुशी ना हो पर बच्चों के लिए चाचा का खुश रहना ज़रूरी है.

चाची सब मेनेज कर लेंगी.

हम शॉपिंग के लिए चले गये.

पास ही आधे घंटे दूर एक छोटा सा गाओं था जहाँ पर शॉपिंग के लिए अच्छी शॉप थी

लव बर्ड को पूजा बुआ ने पूरी आज़ादी दे दी.

राज को इस बार उनके साथ नही भेजा .थोड़ा ट्रस्ट करना चाहिए.

लव बर्ड तो आज़ाद होते ही अपनी तरह से शॉपिंग करने लगे

बुआ भी अपने लिए शॉपिंग करना चाहती थी.

मैं और राजेश बाकियो के साथ शॉपिंग करने लगे.

एटीम कार्ड हमारे , खुशी उनकी. इस तरह शॉपिंग करने लगे.

जिसको जो चाहिए था वो उनको मिल रहा था.

विद्या हो या राज ,कोमल हो या कविता सबको उनकी पसंद की शॉपिंग करवा रहे थे.

जितनी शॉपिंग होंगी उतना अच्छा था.

रानी-कोमल वो वाला स्क्रॅप देखो.

कोमल-तुम ले लो मुझे तो ये पसंद है.

कविता-दीदी वो मैं ने सेलेक्ट किया है.

कोमल-तू रख .मैं दूसरा लेती हूँ

लीना-मुझे तो ये ड्रेस चाहिए

रानी-लीना वो तुम्हारे एज के लिए नही है. वो बॅकलेस ड्रेस है.

विद्या-लीना ये देखो उसी डिज़ाइन मे

लीना-वाव , मैं तो अब ये ही लूँगी.

कोमल-विद्या तुम भी पसंद करो. शॉपिंग तुम्हें भी करनी है.

अवी-कोमल तुम ही मदद करो विद्या क़ी. वो बहुत सोचती रहती है.

राज-भैया ये कैसा दिखेगा मुझपे

अवी-राजेश राज की मदद करो.

राजेश-चलो राज मैं तुम्हारी मदद करता हूँ.

रोहन-राज को शॉपिंग मैं करवाता हूँ.

लव बर्ड वापस आगये .अपनी शॉपिंग करले पर हमारी शॉपिंग ख़तम होने का नाम नही ले रही थी.

पूजा बुआ-रोहन बेटा इसकी क्या ज़रूरत है.

स्वेता दीदी ने रोहन के कान मे कुछ कहा और लव बर्ड वापस चले गये.

हम फिर से शॉपिंग करने लगे.

सबके हाथ मे अपने अपने बॅग से भर गये थे.

इतनी शॉपिंग से सब खुश हो गये.

रानी ने मेरे लिए एक टीशर्ट खरीद ली. कोमल ने भी उसी तरह की टीशर्ट खरीद ली.

मैं ने देख लिया था कि दोनो की टीशर्ट एक जैसी है. पर दोनो को पता नही था.

मैं उनको बताकर उनके गिफ्ट के पीछे की खुशी खराब नही करना चाहता था.

मैं ने रानी और कोमल दोनो की टीशर्ट अपने पास रख ली.

पूजा बुआ-जल्दी करो तूफान आने वाला है

नेहा बुआ-कविता अब बंद करो. बारिश होने वाली है.

कविता-हमारा हो गया

पूजा बुआ-अवी स्वेता को फोन करके बुला लो

स्वेता दीदी-फोन करने की ज़रूरत नही है ,हम आ गये

नीता बुआ-हमे जाना चाहिए बारिश आने से पहले

अवी-मैं बिल पे करता हूँ. आप सब बस मे जाकर बैठो

मैं ने हो सके उतनी जल्दी बिल पे किया .और राजेश ने बॅग बस मे रख दिए.

बारिश हल्की हल्की शुरू हो गयी थी.

स्वेता दीदी और रोहन कार से होटेल की तरफ रवाना हो गये

हम भी बस शुरू करके हम उस गाओं से बाहर आ गये थे कि कविता चिल्लाई

कविता-कोमल दीदी कहाँ है

सब इधर उधर देखने लगे.

रानी-अभी तो मेरे साथ , थी.

नेहा बुआ-फिर कहाँ है

रानी-अरे ,शायद वो ब्रॅकेट की शॉप मे रुक गयी होगी. उसे वो पसंद आया था.

अवी-मैं देखता हूँ

मैं भाग कर उस शॉप पे गया जहाँ जिसके बारे मे रानी ने कहा था.

शॉप दूर थी पर कोमल वहाँ मिल गयी.

कोमल ब्रेस्लेट खरीद रही थी.

अवी-तुम पागल हो. बता नही सकती थी.

कोमल-बस हो गया. चलो अब

हम बस की तरफ जाने लगे कि जोरदार बारिश शुरू हो गयी.

बस गाओं के बाहर थी वहाँ तक भाग कर जाना मुश्किल था.

इस लिए हम एक कपड़ो की शॉप मे रुक गये.

बारिश शुरू होते ही नेहा बुआ का कॉल आया.

नेहा बुआ-कोमल कहाँ हो तुम

कोमल-कपड़ो की शॉप मे .अवी के साथ

नेहा बुआ-उसे फोन दो

कोमल ने मुझे नेहा बुआ से बात करने को कहा.

अवी-हेलो बुआ

नेहा बुआ-कोमल का ध्यान रखना अगर उसकी एक छींक निकली ना मुझसे बुरा कोई नही होगा.

अवी-जी बुआ .मैं पूरा ध्यान रखूँगा

पूजा बुआ-अवी नेहा की बात पे ध्यान मत देना. तुम कोमल का ध्यान रखना

अवी-मैं हूँ कोमल के साथ. आप होटेल चले जाइए,

पूजा बुआ-हम रुकते है

अवी-बारिश को रुकने मे काफ़ी टाइम लगेगा. आप होटेल जाइए बारिश रुकते मैं टॅक्सी से आ जाउन्गा.या फिर रोहन को कार लेकर भेज देना , तब तक हम यहीं रुकते है

पूजा बुआ-अपना ध्यान रखना.

बारिश ने एक पल मे तूफान का रूप ले लिया था. ऐसे मे हम भाग कर बस के पास भी नही सकते थे.

बस भी शॉप के पास आ नही सकती थी.रोड बस के लिए छोटा था.

ऐसे मे उनको होटेल मे भेज दिया. 1 2 घंटे मे बारिश कम हो जाएगी.या तब तक रोहन कार लेकर आ जाएगा जो शॉप के पास आ जाएगी

पूजा बुआ से बात करने के बाद फिर से नेहा बुआ का कॉल आ गया.

नेहा बुआ-अवी

अवी-जी बुआ

नेहा बुआ-बारिश रुकते ही एक कॉल करना मैं रोहन को भेज दूँगी.नही नही मैं होटेल पहुँचते ही रोहन को भेज दूँगी

अवी-बुआ आप बेफिकर रहिए .मैं कोमल का पूरा ध्यान रखूँगा. आप आराम से होटेल जाइए.

नेहा बुआ को विश्वास दिलाया कि उनकी जान कोमल को कुछ नही होने दूँगा.
 
Back
Top