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मैं और मेरा परिवार

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चॅप्टर 929

सब अपनी तरफ से मदद कर रहे थे जिस से ये बर्तडे सिर्फ़ बर्तडे ना रह कर एक मध्यम हो गया 2 फॅमिली की नज़दीकिया बढ़ाने का.

बातें करते हुए काम करना, काम करते हुए प्यार भरा रिश्ते जोड़ना ,कितना अच्छा लगता है.

आज की दावत मे तो प्यार ही प्यार होगा.

बुआ चाची ने रानी की मम्मी से ऐसे रिस्ता बना लिया कि जिस से 2 फॅमिली को एक होने से कोई नही रोक सकता.

मेरे लिए तो आज की दावत स्पेशल थी.

आज की दावत मे सबका प्यार जो शामिल था.

कोमल ने तो आज सबके दिल जीत लिए. कोमल के वजह से नेहा बुआ का सर उचा हो गया.

बड़ी चाची को रानी के यहाँ आकर अपने घर जैसा फील हो रहा है.

खाना तो सबने मिलके तैयार कर लिया. जिसकी खुसबु से मैं किचन की तरफ आ गया.

अवी-आंटी खाने की खुसबी अच्छी आ रही है.

रानी की मम्मी-सबने मिलके बनाया है. स्पेशल तो होगा ही.

अवी-आंटी मैं टेस्ट करू .मुझसे तो रुका नही जा रहा.

नीता बुआ-चल भाग यहाँ से, दावत केक काटने के बाद शुरू होगी.

अवी-बुआ बस टेस्ट करूँगा.

म चाची-बिल्कुल नही,

अवी-चाची आप भी.

रानी की मम्मी-अवी बस हो गया.रानी कोमल तैयार हो जाए ,केक काटने का समय हो गया

रानी-हमारा काम भी हो गया. अभी फ्रेश होती हूँ

कोमल-सहेलियो के आने का समय हो गया है.

रानी की मम्मी-किसे बुलाया तुम ने .मैं ने मना किया था ना.

कोमल-आंटी ,3 4 सहेली और पड़ोसियो को बुलाया ,उनके बिना बर्तडे कैसे होगा.

रानी की मम्मी-ठीक है तुम दोनो तैयार हो जाओ.

कोमल-जी आंटी

नेहा बुआ-ज़्यादा देर मत लगाना .

रानी-आंटी मैं अपने रूम मे तैयार होती हूँ ,कोमल मम्मी के रूम मे हो जाएगी.

नेहा बुआ-ये ठीक रहेगा. समय बच जाएगा.

कविता-दीदी हम ने हमारा काम कर दिया

रानी-हो गया हॉल सजाके

लीना-आप खुद चल के देख लो

नीता बुआ-मैं भी तो देखु हमारी नटखट बेटियो ने क्या किया.

और हम सब हॉल मे आ गये.

हॉल को कविता और लीना अच्छे से सजाया था.

देखते ऐसा लग रहा था कि दोनो को एक एक पप्पी दे दूं.

नीता बुआ ने तो खुश होकर उनको गले लगा लिया.

कविता और लीना अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गयी.

रानी की मम्मी-रानी कोमल तुम यही खड़ी हो ,जल्दी जाओ तैयार हो जाओ

कोमल रानी के कमरे मे जाकर अपने कपड़े लेकर आ गयी.

राज रानी के दूसरे कमरे का गेट खोलने की कोशिस कर रहा था.

इस कमरे मे रानी ने मेरी फोटो लगा कर रखी थी.

रानी-राज क्या कर रहे हो

राज-दीदी ये रूम बंद क्यूँ है.

रानी-उस रूम मे मेरे पापा की यादे रखी हुई है ,उसे बंद ही रहने दो

रानी ने झूठ कहा ताकि कोई दुबारा उस कमरे मे जाए नही

कोमल -राज तुम रानी को तंग मत करो ,

राज पूजा बुआ के पास चला गया. राज के शिकायत करने पे विद्या उसे छत पे ले गयी. और शहर की बिल्डिंग दिखाते हुए उसके साथ खेलने लगी.

नीता बुआ-कविता लीना मेरे साथ चलो तुम्हें केक दिखाती हूँ .रानी और कोमल ने खुद बनाया है

कविता-दीदी ने बनाया है फिर तो मैं ज़रूर देखूँगी.

रानी की सहेलिया आ गयी तो आंटी उनको देखने लगी.

रानी को उसके रूम मे गये हुए काफ़ी समय हो गया था.

मैं मौका देख कर रानी के रूम मे चला गया.

रानी फ्रेश हो चुकी थी.

और बर्तडे के लिए ड्रेस पहनने की जगह साड़ी पहने रही थी.

सारी पहने मे रानी को परेशानी हो रही थी.

पल्लू को ठीक से मोड़ नही पा रही थी.

रानी तो हर ड्रेस .मे सुंदर लगती है पर साड़ी की खूबसूरत की बात अलग होती है.

रानी का साड़ी पहनने का तरीका भी अलग था.

ज़्यादातर अओरत की नाभि पल्लू के पीछे चुप जाती हाइपर रानी पल्लू की एक फोल्ड को निकाल कर अपने पेट को उससे धक देती ताकि उसकी नाभि छुपी रहे.

उपर ब्लाउस के पास तो उसे समझ नही रहा था की क्या किया जाए.

झुकने से ब्लाउस से उसके बूब्स नज़र आ जाते थे.

मैं तो उसके पीछे खड़ा था जिस से मैं समझ नही पाया कि उसे परेशानी हो रही है.

मैं तो रानी को साड़ी मे देख कर उसे पीछे से पकड़ लिया.

अवी-मेरी रानी सारी मे अप्सरा लग रही है

रानी-दूर हाथों ,सारी पहने मे परेशानी हो रही है

अवी-क्या हुआ. सारी मे तो तुम खूबसूरत दिख रही हो.

रानी-तुम्हें तो बस तारीफ करना आता है. मैं यहाँ साड़ी कैसे पहनु ये सोच रही हूँ

अवी-क्या हुआ मुझे बताओ ,मैं मदद करता हूँ

रानी-तुम्हारा काम साड़ी पहनाना नही होता.

अवी-डार्लिंग साड़ी पहनाउन्गा नही तो निकालूंगी कैसे

रानी-ये देखो पल्लू के ऐसा रखने से ,मेरे झटके क्या हो रहे है

अवी-वाउ ,ये तो अच्छा है. मुझे इतना सुंदर नज़ारा जो देखने को मिलेगा.

रानी-मार खाओगे.किसी और ने देखा तो

अवी-इसका सोल्युशन है मेरे पास

रानी-क्या बताओ ना.

अवी-बता तो दूँगा पर मुझे क्या मिलेगा.

रानी-जो तुम चाहो

अवी-मेरी तरफ पलट जाओ

रानी मेरे तरफ पलट गई. उसके हाथ मे उसका पल्लू था

अवी-पल्लू पहन लो

रानी-लो पहन लिया

अवी-पल्लू की लास्ट की फोल्ड निकालो

रानी-लो निकाल ली

अवी-उसके ब्लाउज के दूसरी तरफ ले जाकर पिन लगा दो. जैसे अपना पेट छुपाया है.

रानी-वो तो मैं लूँगी पर वो अच्छा नही दिखेगा

अवी-वो फ्लवर वाली पिन लगाओ ऐसा लगेगा कि फ्लवर के लिए इस तरह साड़ी पहनी है. फ्लवर से उसकी तरफ किसी का ध्यान नही जाएगा

रानी- लव यू ,

अवी-मेरा इनाम

रानी-क्या चाहिए मेरे दिल के राजा को

अवी-तुम्हें प्यार करना है.

रानी-पिच्छली बार जैसा प्यार नही करने दूँगी.

अवी-उपर से

रानी-फिर तो मुझे दुबारा फ्रेश होना पड़ेगा.

अवी-तुम बोलती बहुत हो

और मैं ने रानी के होंटो को अपने होंटो से लॉक कर दिया.

रानी के मीठे मीठे होंटो का रस पीना शुरू किया.

कितनी बार रानी के होंटो का रस पिया है पर उसमे जो प्यार है वो कम होने की जगह बढ़ रहा है.

रानी और मैं किस करने मे इतने माहिर हो गये कि बस होंटो को होन्ट मिलाने की देरी होती है. प्यार तो अपने आप मिल जाता है.

कितने सॉफ्ट होन्ट है. इतने बार चूसने के बाद उसकी सॉफ्टनेस कम नही हुई है.

रानी पहले तो ना करती है पर बाद मे किस करने मे खुद को डूबा देती है.

वो पूरी दुनिया को भूल कर मुझे किस करती है.

आज तो रानी अपने प्यार को नदी की तरह बहाने दे रही थी.

प्यार भरा किसा वाइल्ड बनने जा रहा था.

रानी ने मेरे हाथो को पकड़ कर अपने पीछे रख दिए.

और मुझे वाइल्ड किस करने को बढ़ावा दे रही थी.

रानी के नरम नरम चूतड़ को अपने हाथो के दबातें रानी मेरी जीभको चूसने लगी.

पिछले साल रानी शरमा रही थी और आज मुझे से ज़्यादा जोश मे थी.

रानी ने मेरे होंटो को काट कर किस ख़तम किया.

उसकी चेस्ट की धड़कने की आवाज़ सुनाई दे रही थी.

अवी-आइ लव यू

रानी-अवी तुम्हारे बिना मैं नही रह सकती

अवी-क्या हुआ.

रानी-हम कब एक होंगे

अवी-मेरे बर्तडे के दिन

रानी-तुम्हारा बर्तडे तो 4 साल मे एक बार आता है.

अवी-तो क्या हुआ. जिस दिन आएगा उस दिन तुम्हें इतना प्यार करूँगा कि तुम सोच नही सकती.

रानी-सच

अवी-हाँ,

रानी-उस दिन का इंतजार रहेगा.

अवी-तुम से ज़्यादा तो मैं तुम्हें प्यार करने को तरस रहा हूँ

रानी-वो दिख रहा है. अब तो हाथ हटा दो

मैं ने हाथ हटाने की जगह फिर से उसके चूतड़ दबा दिए

ऐसा करते वो मेरे करीब आ गयी और हमारे होन्ट फिर से मिल गये

रानी को बस शुरुआत करके देना पड़ता है.

फिर तो रानी खुद प्यार करने लग जाती है

रानी को किस करके मैं उसके सामने बैठ गया.

और उसकी साड़ी की पिन निकाल दी जिस से उसकी नाभि मेरे सामने आ गयी.

मैं ने रानी के नाभि को उस से भी ज़्यादा संदर थी उस पे किस किया.

मेरे ऐसा करते ही रानी ने अपनी आँख बंद की और मेरे सर को पकड़ लिया.

मुझे दूर करने की जगह और पास लाकर मुझे अपनी नाभि को प्यार करने का इन्विटेशन दिया

रानी की नाभि जो हमारे प्यार से गहरी थी उसे किस करते रानी का प्यार बाहर आ गया.

रानी के मुँह से शीष्कारी निकल गयी.

उसकी प्यारी शीष्कारी सुनकर मैं खड़ा हो गया.और उसे फिर से किस करने लगा.

रानी ने तो मेरे होंटो की जगह मेरे चेहरे पे किस करने लगी.

वो ज़्यादा एग्ज़ाइट हो गयी थी.

वो मेरे प्यार मे डूब गयी थी.

उसे रोकने के लिए मैं ने उसे कस के गले लगा लिया.

अवी-रानी इस सब के लिए टाइम है.

रानी-तुम्हें मुझपे गुस्सा आ रहा होगा ना

अवी-क्यूँ ,मैं तुम पे गुस्सा क्यूँ करूँगा.

रानी-तुम ने मेरे बर्तडे के क्या क्या सोचा होगा और मैं हूँ कि तुम्हें हर बार रोकती हूँ.

अवी-इसे तो प्यार कहते है. एक पार्टनर को दूसरे पार्टनर को प्यार के समुन्द्र मे डूबने से बचाते रहना चाहिए

रानी-पर प्यार के समुन्द्र मे तो हर कोई डूबना चाहता है.

अवी-उसके लिए टाइम है. पहले हमे अपने प्यार को नाम देना होगा. वरना जमाना ऐसे समुन्द्र और नदी के रिश्ते को ग़लत समझता है वैसे हमारे रिश्ते तो ग़लत समझेगा

रानी-नदी तो अपना मीठा जल समुन्द्र को दे कर उसके नमकीन जल को मीठा करती रहती है. नदी जैसी दीवानी कोई नही है.

अवी-तुम हो ना. जो मुझे एक दीवानी की तरह प्यार करती हो

रानी-प्यार करती रहूंगी.

अवी-चलो अब कोई आ जाएगा.

रानी-थोड़ी देर ऐसे मुझे गले लगा कर रहो ना मुझे तुम्हारी धड़कने सुननी है.

अवी-नही सुन पाउन्गि .मेरा दिल तो तुम्हारे पास है.

रानी-तो क्या हुआ ,आज हमारी धड़कानो को एक हो जाने दो

अवी-तुम मेरी धड़कने सुनो मैं तुम्हारी धड़कने सुनता हूँ.

और हम गले लग कर एक दूसरे की धड़कने को सुनने लगे.

रानी-इस से प्यारा संगीत दुनिया मे होगा ही नही.

अवी-सही कहा. प्यार की तरंगों से निकल रही ये धुन कितनी प्यार की है.

रानी-ऐसा लग रहा है हमारी सौल इस संगीत मे नाच रही है.

अवी-मैं तो ये संगीत ऐसे ज़िंदगी भर सुनता रहूं.

रानी-मैं भी.

हम ऐसे एक दूसरे की धड़कने को सुनते रहे.

धदकनो की संगीत मे मुझे रोने की आवाज़ सुनाई दे रही थी.

अवी-क्या हुआ रानी.रो क्यूँ रही हो

रानी-आज पापा होते तो कितना अच्छा होता.

अवी-तुम्हारे पापा आज तुम्हें देख रहे होंगे तो हमे आशीवाद दे रहे होंगे

रानी-ऐसा क्यूँ लगता है तुम्हें

अवी-क्यूँ कि मेरे माँ और पापा भी वही है. उन्हों तुम्हारे पापा से तुम्हारा हाथ माँगा होगा मेरे लिए.

रानी-ऐसा हुआ होगा.

अवी-हाँ. तभी तो उनका आशीर्वाद हमे मिल रहा है .और हमारा प्यार नयी उँचाई छु रहा है.

रानी-अवी मेरी एक बात मानोगे

अवी-कहो

रानी-मेरी शादी हो गयी तो मम्मी अकेली रह जाएगी

अवी-किसने कहा तुम्हें

रानी-तो क्या वो हमारे साथ रहेगी

अवी-उनको दहेज मे मागुंगा मैं.

रानी-वो नही मानेंगी.

अवी-तुम्हारी खुशी के लिए सबको मना लूँगा.

रानी-अवी इतने सपने मत दिखाओ

अवी-क्यूँ?

रानी-सपने टूट जाते है तो बहुत दर्द होता है

अवी-मैं तुम्हारा हर सपना पूरा करूँगा.

रानी-कहना आसान होता है

अवी-तुम ऐसे कमज़ोर पड़ जाओगी तो मैं अकेले सपने पूरे कैसे करूँगा.मुझे तुम्हारे साथ की ज़रूरत है.

रानी-अगर भगवान ने हमारा साथ ज़्यादा लंबा ना लिखा हो तो

अवी-मेरी माँ और पापा भगवान से कहेंगे कि हमारा साथ कभी छूटे ना. और मैं अपनी किस्मत बदल दूँगा.

रानी-मेरे लिए

अवी-तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ

रानी मेरी बात सुनकर भावुक हो गयी.

मेरे गले लग कर धीरे धीरे खुशी के आँसू बहाने देने लगी.

मैं रानी को अपने गले लगा कर उसे प्यार करने लगा.

हम दोनो बेख़बर होके एक दूसरे की धड़कनो को सुन ने लगे

हम भूल गये कि रानी के इतने देर लगाने से कोई उसे ढूंढता हुआ यहाँ आ सकता है.

रानी तो मेरी बाहों मे आकर सब कुछ भूल जाती है.

पर मुझे मिरर मे जो दिखा उसे देखते ही मेरी आँख खुली की खुली रह गयी

मिरर मे रूम का डोर साफ दिखाई दे रहा था.

और डोर पास खड़ी थी कोमल

कोमल को मिरर मे देखते ही मेरी धड़कने तेज चलने लगी.

कोमल हमे ऐसी हालत मे देखेगी तो क्या होगा ये सोच भी नही सकते.
 
चॅप्टर 930

मैं रानी के गले लगा हुआ था.

कोमल रूम के डोर के पास खड़ी थी ,

मैं कोमल को मिरर मे देख रहा था.

रानी इस बात से अंजान थी कि कोमल ने हमे इस हालत मे देखा है. वो तो मेरी धड़कनें सुन रही थी.

कोमल के चेहरे के रियेक्शन चेंज हो रहे थे उनको देख कर मेरी धड़कने तेज चलने लगी.

मेरी तेज धड़कनो को सुनते ही रानी को मेरी सिचुयेशन का पता चला.

मुझे कुछ करना होगा .वरना कोमल मेरी जान ले लेगी.

मैं ने एक पल के लिए आँख बंद की और सोचने लगा कि ऐसे मे मुझे क्या करना चाहिए

और ऐसा आइडिया अपने दिमाग़ मे आया कि जिस से कोमल को समझाया जा सकता है.

मैं ने धीरे से रानी से बात की

अवी-रानी रोना शुरू करो. कुछ मत पूछना बस रोना शुरू करो

रानी मेरी तेज धड़कानों से समझ गयी थी कुछ तो हुआ है.

ऐसे मे रानी ने बिना कुछ पूछे धीरे धीरे रोना शुरू किया.

रानी के दिमाग़ की दाद दूँगा .उसने धीरे धीरे रोने से स्टार्ट किया ताकि रियल लगे.

अवी-बस करो रानी ,तुम्हारे पापा नही है तो क्या हुआ हम हैं ना

रानी समझ गयी कि उसे रोना क्यूँ है.

रानी-आज पापा की बहुत याद आ रही है.उनके बिना बर्तडे कैसे मनाउ

अवी-तुम्हारे पापा नही है तो क्या हुआ .हम हैं ना ,तुम्हारी मम्मी जब तुम्हें रोता हुआ देखेंगी तो उनका क्या होगा सोचा है

रानी-पर पापा ,वो मुझे अकेला छोड़ कर चले गये.

अवी-तुम अब अकेली नही हो ,तुम्हारी मम्मी तुम्हारे साथ है. कोमल तुम्हारे साथ है. मैं हूँ मेरी फॅमिली है ,नेहा बुआ तो तुम्हें अपनी बेटी मानती है. हम सबके लिए रोना बंद करो

कोमल हमारी बातें वही रह कर सुन रही थी.

कोमल के आँख मे भी आँसू आ गये.

रानी-कैसे करू ,ये आँसू रुकते ही नही,

अवी-मेरे पास जितना रोना है रो लो .मैं तुम्हारा फ्रेंड हूँ .पर कोमल तो तुम्हें अपनी बहन मानती है अगर उसके सामने रो-ओगी तो उसको कैसा लगेंगा. वो तुम्हारे बर्तडे के लिए कितनी खुश है. उसे तुम रुलाना चाहती हो

रानी-नही नही. मैं कोमल को कैसे रुला सकती हूँ.

अवी-तो रोना बंद करो. देखो कोमल किसी भी वक्त यहाँ आ सकती है. और उसने हमे ऐसे देखा तो वो पगली कुछ भी समझ लेगी.

मेरी बात सुनते ही कोमल ने अपने आँसू पोछ लिए.

अवी-रानी तुम्हारे पापा अभी भी तुम्हें उपर से देख रहे होंगे .तुमको रोता हुआ देख कर उनको कैसा लग रहा होगा.

रानी-पापा मेरे हर बर्तडे पे मुझे जो प्यार करते थे उनको याद करके रोना आ रहा है.

अवी-वो तो आज खुश होंगे कि उनकी बेटी अपनी मम्मी का सहारा बन गयी है

रानी-पापा के बिना हम ने कैसे दिन निकाले होंगे हमे पता है

अवी-लेकिन अब देखो ,कोमल की वजह से तुम्हें इतने प्यार करने वाले मिले. कोमल जैसी बहन मिली है

रानी-कोमल की वजह से तो मुझे फॅमिली का प्यार मिला है.वो तो मेरी बहन है. थॅंक्स अवी तुम्हारे जैसा फ्रेंड मिलते नही. मेरी हिम्मत बढ़ाने के लिए थॅंक्स

अवी-फ्रेंड्स को थॅंक्स नही बोलते ,

रानी से बात करते हुए मैं मिरर की तरफ चुपके से देख रहा था.

कोमल ने अपने आँसू पोन्छ लिया. और रूम से बाहर चली गयी.

कोमल के जाते ही मैं ने रानी को बता दिया कि डोर के पास कोमल थी.

अवी-कोमल आई थी.

रानी-वो चली गयी.

अवी-हाँ,

रानी-आज तो फस गये थे. अच्छा हुआ तुम्हें पता चल गया .पर तुम्हें कैसे पता चला

अवी-मिरर मे देखा .अब तो अलग हो जाओ वरना फिर कोई आ जाएगी

रानी मुझसे अलग होते ही ,कोमल इस बार रानी को आवाज़ देते हुए अंदर आ गयी.

कोमल-रानी रानी, कब से अंदर हो तैयारी हुई कि नही

और कोमल रूम मे आ गयी.

कोमल को देख कर ऐसा लग नही रहा था की उसने हमे गले लगते हुए देखा था.

कोमल के आते ही रानी अपने ने अपने आँसू पोंच्छ लिए

कोमल-रानी क्या हुआ ,रो क्यूँ रही हो ,

रानी-कुछ नही ऐसे ही.

कोमल-अवी तुम यहाँ क्या कर रहे हो ,अवी ने रुलाया होगा.

रानी-नही ,अवी ने तो मुझे रोने से मना किया था

कोमल-रो क्यूँ रही थी.

रानी-पापा की याद आ रही थी.

कोमल-इसमे रोने की क्या ज़रूरत है.अंकल नही है तो क्या हुआ मैं हूँ ना ,मुझे तुम अपनी बहन मानती हो तो मेरे पापा तुम्हारे भी तो पापा हुए ना

कोमल के इतना कहते ही रानी भाग कर कोमल के गले लग कर रोने लगी.

कोमल-पगली अब क्यूँ रो रही है.

रानी-कोमल मुझे माफ़ करना

कोमल-तुम रोना बंद कर तो फिर माफ़ करूँगी

रानी-उसके लिए नही.

कोमल-तो किस लिए

रानी-अबी नही बता सकती पर मुझे समझने की कॉसिश करना .

कोमल-जब सही समय आएगा तो बता देना जो बताना है.

रानी-कोमल अपनी बहन को माफ़ करना

रानी मेरे और उसके बारे मे कोमल से बात छुपाने की माफी माँग रही थी.

रानी एमोशन मे सब बता देगी.

अवी-कोमल रानी को चुप करा दो. कब से रो रही है.

कोमल-तुम यहाँ क्या कर रहे हो

अवी-मैं ने रानी को रोता हुआ देखा तो उसका दर्द कम करने आया था.

कोमल-थॅंक्स .मेरी बहन का ध्यान रखने के लिए.

अवी-हम फ्रेंड है. फ्रेंड ही दर्द भरे समय मे काम आते है.

रानी-तुम दोनो ने मेरी लाइफ मे जो खुशिया लाई वो मैं कभी नही भूलूंगी.

कोमल-ये रोना बंद करो ,पूरा मेकप खराब हो रहा है.

अवी-कोमल तुम्हारा गिफ्ट अभी दे दो. उसका ईस्तमाल करने का समय आ गया है.

कोमल-तुम गिफ्ट लेकर आओ ,मैं रानी को अप्सरा बनाती हूँ

मैं गिफ्ट लेने के लिए हॉल मे आ गया.

कोमल को नॉर्मल देख कर मैं रिलॅक्स हो गया.

कोमल रानी को तैयार होने मे मदद करने लगी.

कोमल से झूठ बोलने से रानी को बुरा लग रहा था. एक तरफ कोमल थी और दूसरी तरफ मैं ,ऐसे मे रानी कोमल को सच कैसे बताती .

पर कोमल के साथ से रानी को हिम्मत मिल रही थी.

कोमल और रानी एक दूसरे के काफ़ी करीब आ चुकी थी.

पता नही तब क्या होगा जब कोमल को रानी और मेरे रिश्ते के बारे मे पता चलेगा.

तब की तब देखूँगा.

यहाँ तो दो बहनें तैयार हो रही थी.

कोमल ने रानी को दुल्हन की तरह सज़ा दिया था.

कोमल-अवी अब बताओ हमारी रानी कैसी दिख रही है.

अवी-ऐसा लग रहा है कि 2 अप्सरा जन्नत से ज़मीन पर आई हो. कोमल और रानी

रानी-थॅंक्स कोमल, थॅंक्स अवी

कोमल अवी-मार खाएगी दुबारा थॅंक्स कहा तो

हमारे एक साथ बोलने से हम तीनो हँसने लगे.

रानी को काफ़ी देर हो गयी थी जिस से आंटी रानी को बुलाने अंदर आ गयी.

रानी की मम्मी-रानी क्या कर रही हो

रानी-हो गया मम्मी

रानी और कोमल को देखते ही आंटी की आँख मे खुशी के आँसू आ गये

रानी की मम्मी-तुम दोनो तो दुल्हन की तरह सजी हो

कोमल-आंटी आपको पसंद नही आया

रानी की मम्मी-मेरी दोनो बेटी बड़ी हो गयी.जल्दी शादी करवानी होगी

कोमल रानी-शादी तो डॉक्टर बन ने के बाद

दोनो एक साथ बोल पड़ी और मेरी तरफ देखने लगी.जैसे पूछ रही हो डॉक्टर बनने तक रुकना होगा.

रानी की मम्मी-जब तुम कहोगी तभी होगी.चलो अब

कोमल और रानी आंटी के जाने लगी थी कि मैं ने कोमल को रोक लिया.

अवी-कोमल

कोमल-अवी थॅंक्स. रानी को सहारा देने को

अवी-क्या मतलब

कोमल-मैं ने देखा था कि तुम रानी को रोने से रोक रहे थे

अवी-(पता है मुझे)तुम्हें पता था

कोमल-हाँ,

अवी-तुमने कुछ ग़लत तो नही समझा

कोमल-समझती तो यहाँ ऐसे बात ना करती. रानी को उसके पापा की यादो से बाहर निकाल कर अच्छा किया.

अवी-तुम खुश हो ना

कोमल-हाँ,

अवी-सच

कोमल-हाँ, रानी ने मुझे बताया था कि वो अपने पापा को कितनी मिस करती है. पर आज अच्छा लगा कि वो रोने की जगह खुश है

अवी-हाँ, वो तो यहाँ चुपके चुपके रो रही थी. मैं ना आता और आंटी आ जाती तो क्या होता

कोमल-तुम्हें मुझे बताना चाहिए था. मैं समझा देती

अवी-नेक्स्ट टाइम तुम्हें बताउन्गा.

कोमल-चले अब

अवी-एक मिनिट

कोमल-क्या हुआ

अवी-तुम इस साड़ी मे खूबसूरत लग रही हो

कोमल-थॅंक्स

अवी-पर एक कमी है

कोमल-क्या

अवी-पलट जाओ, फिर बताता हूँ

कोमल-लो पलट गयी

मैं ने टेबल पे रखा हुआ गुलाब का फूल उठा लिया

और गुलाब के फूल को कोमल के बालो मे लगा दिया.

अवी-अब अप्सरा लग रही हो

कोमल ने खुद को मिरर मे देखा.

अपने बालो मे गुलाब का फूल देख कर कोमल की खुशी का ठिकाना नही था.

कोमल इतनी खुश हुई के मेरे गले लग गयी.

और मेरे गाल पे पप्पी दे कर शर्मा के भाग गयी.

ये कोमल भी ना.

मैं कोमल की हरकत पे हँसते हुए हॉल मे आगया.
 
अपडेट 930आ

हॉल मे बुआ और चाची ने पूरा इंतज़ाम कर के रखा था.

कविता और लीना इतने कम समय मे हॉल को अच्छे से सजाया था.

रानी ने अपनी कुछ सहेली और जूनियर को बुलाया था.

उनके आने से मुझे कंपनी मिल गयी.

रानी और कोमल ने उनका स्वागत किया. रानी के पड़ोस मे रहने वाले बच्चे भी आए थे.

छोटी चाची जब केक हॉल मे लाई तो केक को देखते ही सबके मूह मे पानी आ गया.

राज तो अपना कॅमरा लेके लग गया फोटो निकालने मे.

केक के साथ तो सबने फोटो निकाले.

रानी की मम्मी की सहेली भी आ गयी

रानी की मम्मी ने सबसे उनकी पहचान करवा दी

फिर रानी अपनी जगह पे जाकर खड़ी हो गयी,

रानी-कोमल तुम भी आओ

कोमल-मैं कैसे. बर्तडे तुम्हारा है

रानी-मैं तुम्हारे साथ बर्तडे मनाना चाहती हूँ.

रानी की मम्मी-कोमल और रानी मिलके केक काटेंगी .

कोमल को जो प्यार कर रहे थे वो देख कर नेहा बुआ को अच्छा लग रहा था.

कविता-दीदी एक साथ कॅंडल को फूँक मारी

रानी और कोमल फूँक मार रही थी उसका मोबाइल बजने लगा.

रानी का मोबाइल विद्या के पास था.

विद्या-स्वेता का कॉल है

स्वेता दीदी का नाम सुनते ही फोन पूजा बुआ ने लिया और फोन पिक अप करके स्पीकर ऑन किया.

रानी और कोमल ने फूँक मार कर कॅंडल बुझा दी.

और हम सब एक साथ रानी को विश करने लगे .

स्वेता दीदी ने राइट टाइम पे कॉल किया था. वो यहाँ ना होके हमारे साथ रानी का बर्तडे मे शामिल हुई.

कॅंडल बुझते ही कविता और लीना ने एक एक करके हम सब के उपर जो बलून थे उनको फोड़ दिया.

और हमारे उपर रंगबेरंगी पेपर की बारिश हुई.

वाउ कविता और लीना के क्या कहने मानेजमेंट की गुरु बन जाएगी दोनो,

सब के लिए अनोखा बर्तडे साबित हो रहा था

फिर रानी ने कोमल का हाथ अपने हाथो मे लेकर केक काट लिया.

और दोनो ने एक एक पीस उठा कर एक दूसरे को खिला कर विश किया.

राज ने इस पल को अपने केमरे मे क़ैद किया.

फिर से दोनो ने पीस उठाया ,मुझे लगा कि रानी अपनी मम्मी को खिलाएगी. पर ऐसा नही हुआ. रानी ने नेहा बुआ को केक खिलाया और कोमल ने रानी की मम्मी को केक खिलाया.

और फिर कविता लीना ने चाकू अपने हाथ मे लिया और केक के टुकड़े टुकड़े कर दिए.

रानी और कोमल ने अपने हाथो से सबको केक खिलाया.साथ मे सबके पैर छु कर आशीर्वाद लिया.

चाची ने रानी को बर्तडे गिफ्ट मे सुंदर सा नेक्लेस दिया.

नेकेलेस देखते वो फॉर्मल बातें शुरू हो गयी इसकी क्या ज़रूरत थी

पर चाची ने रानी को अपने हाथो से नेकेलेस पहना दिया जिस से रानी की खूबसूरती मे चार चाँद लग गये.

कविता और लीना की बारी आई तब तो कमाल हो गया.

केक तो कविता लीना ने चुप चाप खा लिया पर.

कविता-दीदी आपने सबके पैर छुये .हमारा आशीर्वाद लेना होगा.

लीना-वरना हम गिफ्ट नही देंगे

नीता बुआ-रानी ये दोनो हमारे घर की दादी माँ है इनका आशीर्वाद अलग तरह से लेना

रानी ने थोड़ा बचा हुआ केक उनके गालो पे लगा लिया.

रानी-पैरी पोना दादी माँ

लीना-ते क्या किया माँ,

और सब उन पे हँसने लगे

जब मेरी बारी आई तो कोमल और रानी दोनो ने अपना हाथ आगे बढ़ाया जिसमे केक था.

अब किसका केक लूँ.

कोमल और रानी ने एक साथ मुझे केक खिलाया जिस से मैं खुश हुआ.

डबल खुश तब हुआ जब दोनो ने एक साथ मेरे गाल पे किस किया.

एक तरफ से रानी ने किस किया और एक तरफ से कोमल ने किस किया.

मेरे तो गाल लाल हो गये .शरम की वजह से हुए या लिपस्टिक की वजह से पता नही. पर गाल लाल ज़रूर हो गये.

और मैं राज को एक गिफ्ट ज़रूर दूँगा क्यूँ कि उसने इस पल की फोटो जो निकाली थी.

अब थी मेरे गिफ्ट देने की बारी

सब ने रानी को गिफ्ट दिया क्यूँ कि उनको पता नही था कि कोमल साथ मे केक काटेगी

कोमल का चेहरा थोड़ा मायूस हो गया था.

जैसे ही मैने कोमल का हाथ रानी के हाथ के साथ पकड़ा गिफ्ट के लिए तो उसके चेहरे चमक आ गयी.

अवी-मैं सिर्फ़ बर्तडे गर्ल के लिए गिफ्ट नही लाया .मैं फ्रेंड ग्रूप के लिए गिफ्ट लाया हूँ

कविता-मतलब हमे भी गिफ्ट मिलेगा

अवी-हाँ

और मैं ने फ्रेंड ग्रूप के मेंबर के हाथो मे सुंदर सा फ्रेंड नाम लिखा हुआ ब्रेसलेट पहना दिया.

ब्रेसलेट देखते सब उछल पड़ी और एक साथ मेरे गले लग गयी.

मैं तो सबके बीच मे फस ही गया.

मेरी हालत देखते ही चाची बुआ आंटी पेट पकड़ कर हंस रही थी.

विद्या भी उनके साथ मेरे गले लग गयी

हमारी मस्ती को स्वेता दीदी सीतल दीदी लाइव सुन रहे थे

मैं तो बच गया .

पर राज का नंबर आते ही सबने ने अपने हाथ मे केक लिया. चाची बुआ आंटी भी राज पे टूट पड़ी.

राज के मज़े हो गये .सब ने केक के साथ राज को एक पप्पी जो दी.

पर राज ने सिर्फ़ अपनी टीचर विद्या को रिटर्न पप्पी दी.

केक सब को खिलाने के बाद रानी ने अपनी सहेली और पड़ोसियो को नाश्ता दिया

और स्वेता दीदी से बात की

रानी को इतना खुश देख कर आंटी के आँख मे खुशी आँसू आ गये.

अपने आँसू को छुपाने के लिए आंटी किचन मे चली गयी.

मैं भी आंटी के पीछे पीछे किचन मे चला गया.

अवी-क्या हुआ आंटी

रानी की मम्मी-अवी तुम ने जो रानी को खुशी दी उसे देख कर मैं अपनी भावनाओं को रोक नही पाई. ये खुशी के आँसू है.

अवी-मैं ने क्या किया ,रानी है ही इतनी प्यारी की उसे सब प्यार करते है.

रानी की मम्मी-अवी, रानी के पापा के जाने के बाद रानी ने कभी बर्तडे सेलेब्रेट नही किया.

अवी-हाँ ,बताया था उसे ,पिछली बार हम ने उस सर्प्राइज़्ड दिया था.

रानी की मम्मी-पर पिछली बार कॉलेज से आकर वो बहुत रोई थी.शायद उसे अपने पापा की याद आई होगी

अवी-नही आंटी वो पीछे बर्तडे पे मेरी वजह से रोई थी उसने मुझे प्रपोज किया था और मैं ने मना किया तो वो रोई थी.

रानी की मम्मी-उसने मुझे ऐसा कुछ नही बताया.

अवी-कैसे बताती क्यूँ कि दूसरे दिन मैं ने उसे प्रपोज किया था .और वो खुश हो गयी.

रानी की मम्मी-और आज देखो कितनी खुश है. उसे ऐसे ही खुश रखना.

अवी-मैं उसे हमेशा खुश रखूँगा क्यूँ कि रोते हुए वो बंदरिया लगती है.

रानी की मम्मी-तुम भी ना.मैं जैसा दामाद चाहती थी तुम वैसे ही हो

अवी-मैं तो एक बूढ़ी सास चाहता था पर आप तो सेक्सी है.

रानी की मम्मी-क्या कहा .रूको तुम्हें अभी बताती हूँ

अवी-सांसु जी आप का दामाद हूँ ,

रानी की मम्मी-दामाद नही मेरे बेटे हो.

अवी-ये क्या बोल दिया .अब तो आपके साथ मज़ाक नही कर पाउन्गा.

रानी की मम्मी-रानी हैं ना मज़ाक के लिए .लो लड्डू खा लो

आंटी ने मुझे लड्डू खिला के मूह मीठा किया.

इस तरह प्यार और सिर्फ़ प्यार इस बर्तडे पे सबको मिला.

रानी के लिए ये यादगार बर्तडे साबित हुआ.

रानी और कोमल ने साथ मे बर्तडे मना कर अपना रिश्ता मज़बूत किया.

ऐसे प्यार से भर पूर हस्ते खेलते हुए घर को किसी की नज़र ना लगे.

मैं अपनी फॅमिली को हस्ता हुआ देखना चाहता हूँ.

डर इस बात का है कि खुशी एक दिन की होती है और गम 4 दिन का होता है.
 
अपडेट 930ब

केक काटना तो हो गया.

रानी ने अपनी सहेलियो को नाश्ता करवाया ,

सहेलिया और पड़ोसियो के जाते ही हम एक दूसरे की तरफ देखने लगे.

कविता-ऐसे हम एक दूसरे की तरफ क्यूँ देख रहे है

विद्या-अब आगे का क्या प्लान है वो सोच रहे

कविता-मुझे तो भूक लगी है.सुबह से कुछ नही खाया दावत के चक्कर मे

लीना-रानी दीदी की दावत के लिए पूरा पेट खाली करके इंतज़ार कर रहे है

नेहा बुआ-बहनजी दावत शुरू कर देते है

रानी की मम्मी-मैं भी यही सोच रही हूँ

पूजा बुआ-पहले बच्चो को खाना खिला देते है .वो सुबह से रुके है

म चाची-मैं क्या सोच रही हूँ साथ मे खाना खाते है .

रानी की मम्मी-आइडिया तो अच्छा है पर खाना परोसेगा कौन

सी चाची-जिसको जो चाहिए वो खुद ले लेंगा.

ब चाची-सीमा ने कहा तो साथ मे खाना खाते है.अवी

अवी-समझ गया .मुझे क्या करना है.राज मेरी मदद करना

रानी की मम्मी-करने क्या वाले हो

अवी-आप खाने के बर्तन लेकर आइए

और मैं सोफे को हिला कर जगह बनाने लगा.

नेहा बुआ-शाम की ठंडी हवा चल रही है. और आज बारिश भी नही होगी तो क्यू ना हम छत पर खाना खाए.

नीता बुआ-नेहा तेरा जवाब नही.

रानी-मैं और कोमल छत पे जगह बनाते है

विद्या-मैं लीना के साथ बर्तन उपर लेके जाती हूँ

ब चाची-तो सब लग जाओ काम पे

और हम छत पर खुले आसमान के नीचे दावत का मज़ा लेने वाले थे.

छत पे काफ़ी जगह थी. मैं बच्चों के लिए गद्दा उपर लेके गया.

और बाकी समान उपर ले जाने मे मदद करने लगा

सब एक दूसरे का हाथ बटा रहे थे .और राज हमारी फोटो निकाल रहा था

सब समान उपर जाते ही सब ने एक सर्कल बना लिया.

और शुरू हो गयी हमारी दावत .जिस मे पाँच पकवान थे.

स्वीट्स थे, नमकीन था, चटपटा खाना था. तेज सब्जी थी, स्वादिष्ट खीर थी. पूरी प्लेट भर जाए इतने पकवान थे.

पकवान प्लेट मे आते ही सबके मूह मे पानी आ गया.

राज-लड्डू कहाँ है.

रानी की मम्मी-लड्डू लाना तो भूल गये .रानी नीचे जाकर ले आओ

रानी-अभी लाती हूँ

सी चाची-अवी को आवाज़ देना पता नही नीचे क्या कर रहा है.

रानी-जी चाची.

और रानी लड्डू लाने के लिए नीचे आ गयी और सीधा किचन मे चली गयी.

रानी-यही तो लड्डू रखे थे कहाँ चले गये.

रानी किचन मे इधर उधर लड्डू ढूँढने लगी पर लड्डू कही नही मिले.

रानी-लगता है उपर ही होगे राज ने ठीक से देखा नही होगा. पर ये अवी कहाँ है

रानी मुझे ढूँढते हुए अपने रूम मे आ गयी.

रानी-तुम यहाँ क्या कर रहे हो

अवी-मूह मीठा किए बिना दावत मे जाउन्गा नही.

रानी-कितना मूह मीठा करवाते हो

अवी-तुम्हें क्या लगा किस करने की बात कर रहा हूँ

रानी-तो

अवी-मैं तो लड्डू की बात कर रहा था

और मैं ने लड्डू की टोकरी उपर बेड पे रानी के सामने रख दी

रानी-लड्डू यहाँ छुपा के रखे थे .मैं कहाँ कहाँ ढूँढ रही थी.

अवी-तो मूह मीठा करा रही हो

रानी-तुम बहुत तंग करते हो .आज ऐसा मूह मीठा कराउन्गी कि मेरे नाम की माला जपोगे

अवी-अच्छा मैं भी तो देखु

रानी ने टोकरी मे से एक लड्डू उठा लिया और मेरे मूह के पास लाने लगी.

मेरे मूह मे लड्डू आधा डाल कर आधा लड्डू अपने मूह मे लेलिया.

मैं ने लड्डू को तोड़ा नही. जिस से हमारा मूह 0 शेप का होकर हमारे होन्ट एक दूसरे से मिल गये.

हमारे होंटो के बीच मे लड्डू फस गया.

उपर के होंठ उपर के होन्ट से मिला था और नीचे का होंठ नीचे के होंठ से और बीच मे लड्डू जिस से हमारा मूह0 शेप का हो गया.

मैं रानी के आँख मे देख रहा था और रानी मेरे आँख मे डूब रही थी

मैं अपनी जीभ से लड्डू को रानी के मूह मे पुश करने लगा .तो रानी अपनी जीभ से लड्डू को मेरे मुँह मे पुश करने लगी.

किस तो चल रहा था साथ मे लड्डू कौन खाएगा ये गेम चल रहा था.

रानी के इसतरह मूह मीठा करना मुझे पसंद आया .

कभी कभी रानी का स्मार्ट होने पे गुस्सा आता है तो कभी कभी प्यार आता है.

और इसी हमारे प्यार ने लड्डू के 2 टुकड़े कर दिए.

हम दोनो ने प्यार के लड्डू से अपना मूह मीठा किया.

प्यार का लड्डू तो खा लिया अब शादी का लड्डू कब खाने को मिलेगा.

अवी-ये तो प्यार का लड्डू था. शादी का लड्डू

रानी-शादी का लड्डू शादी के दिन खिला दूँगी.और मिसटर शादी मे लड्डू नही जलेबी मूह मे लेकर थोड़ी जाती है और

अवी-और रात मे

रानी-पान खाए सैया हमारे

अवी-पूरी पढ़ाई कर ली शादी की

रानी-क्या करू शादी का लड्डू मुझे भी खाना है. पर उसके लिए टाइम है तो इस लड्डू से काम चला रही हूँ.

अवी-शादी के बाद रोज तुम्हें लड्डू बनाने को लगाउन्गा. फिर इसी तरह मूह मीठा करने को बोलूँगा.

रानी-वो बाद की बात है चलो उपर सब इंतज़ार कर रहे है

और रानी मुझे छत पर ले गयी.

म चाची-अवी कहाँ रह गया था.

अवी-वॉशरूम गया था

कविता-भैया हमारे साथ खाना खाने आ जाओ

अवी-तुम्हारे पास जगह नही है.मैं यहीं कोमल के पास बैठ जाता हूँ.

कोमल के बाजू मैं बैठ गया और मेरे दूसरे तरफ रानी बैठ गयी.

और हमारी दावत शुरू हो गयी .

पहला नीवाला मूह मे जाते ही सब के मूह से तारीफ निकलनी शुरू हुई.

ब चाची-टेस्ट से लग रहा है सब्जी नीता और नेहा ने बनाई है.

कविता-मामी ये सब्जी टेस्ट कर लो .सीमा मामी ने बनाई.

रानी की मम्मी-हर एक आइटम का टेस्ट लाजवाब है

नेहा बुआ-लड्डू तो खाते रहने का मन हो रहा है.

कोमल-माँ, मैं ने बनाए है.

रानी-आंटी मैं ने बनाए है.

पूजा बुआ-दोनो ने मिलकेबनाए है तभी इतने टेस्टी है

मैं ने लड्डू आधा खा कर प्लेट मे रखा था कि मेरा आधा लड्डू गायब हो गया.

मेरा लड्डू किसने खाया.

मैं ने खाया होगा शायद टेस्ट की वजह से याद नही रहा .

मैं जब भी लड्डू का एक बाइट खा लेता तो आधा लड्डू प्लेट से गायब हो जाता.

एक तरफ रानी थी और दूसरी तरफ कोमल ,

जाने दो मुझे क्या है. मैं तो रानी के घर की दावत से अपना पूरा पेट भरने लगा.

ऐसी दावत का लुफ्ट तो मैं ने कभी उठाया नही था.

इस दावत मे प्यार ही प्यार भरा हुआ था.

रानी के बर्तडे की दावत चाची और बुआ को बहुत पसंद आई.

मैं ने तो डकार लेने तक खाना खाया.

सबके चेहरे पे खुशी देख कर आंटी और रानी को अच्छा लगा. उनका मकसद पूरा हुआ. चाची और बुआ से प्यार का रिश्ता जुड़ गया

रानी और कोमल ने सबके दिल मे जगह बना ली.

दावत के हर एक नीवाले पे तारीफ निकल रही थी.

इतना टेस्टी खाना तो किसी ने खाया नही होगा.

अगर इसमे बड़ी चाची का हाथ लगा होता तो उंगलिया तक खा जाते

फिर भी सबकी मेहनत और प्यार रंग लाया. खाने की तारीफ करके पेट भर जाएगा ऐसा लग रहा था.

हम सबको जितना खाना लग सकता है उतना ही बनाया था जिस से हम हर एक आइटम का टेस्ट कर सके

राज नेतो सबसे पहले खाना स्टार्ट किया और सबसे लास्ट मे खाना ख़तम किया.हाजमोला का इस्तेमाल किया फिर भी वो लड्डू ख़ाता गया.

ओवरॉल दावत बेस्ट थी. ऐसी दावत हर रोज हो ऐसा लग रहा था.

आंटी ने 1स्ट इंप्रेशन मे चाची और बुआ से ना टूटने वाला रिश्ता बना दिया.
 
चॅप्टर 930सी

रानी के घर की दावत ने तो सबका दिल जीत लिया

और पेट का क्या हाल हुआ पूछो ही मत ,पेट मे जगह ही नही बची थी.

ऐसे मे रानी आइस क्रीम लेकर आ गयी.

रानी-चाची आइस क्रीम

ब चाची-अब तो एक नीवाला भी नही लूँगी. एक एक बोल के तुमने लिमिट क्रॉस कर दी

सी चाची-मेरी तरफ तो देखना भी मत ,

रानी- चाची ऐसे थोड़े ही होता है. स्वीट्स तो लेना ही होगा.

म चाची-एक काम कर पॅक कर दे,घर जाके खा लूँगी

रानी-बुआ आपको तो लेना होगा

पूजा बुआ-नीता को दे उसे पसंद है

नीता बुआ -दीदी मुझे क्यूँ फसा रही हो

रानी-मुझे पता है कौन आइस क्रीम देगी. मेरे हाथो से खिलाउन्गि तो नेहा बुआ मना नही करेगी.

नेहा बुआ-रानी तूने तो फसा दिया , बस एक बाइट लूँगी

रानी-ये हुई ना बात ,

और रानी ने बड़े प्यार से नेहा बुआ को आइस क्रीम खिला दी.

कविता लीना और राज ने तो आइस क्रीम भी खा ली.

और हम छत पे बातें करने लगे.

शाम की ठंडी हवा मे बातें करने का सिलसिला जो शुरू हुआ वो रुकने का नाम नहीì लेगा.

मैं तो छत की एक कॉर्नर से शहर कोदेख रहा था

मुझे अकेला देख कर कोमल मेरे पास आ गयी.

कोमल- अकेले अकेले क्या सोच रहे हो

अवी-शहर को देख रहा हूँ. दिन मे कितनी भागदौड़ रहती है और अब कितना शांत है.

कोमल-ऐसे बोरिंग बातें मत सोचा करो

अवी-तो क्या सोचूँ

कोमल-कुछ मत सोचो ,आइस क्रीम खा लो

अवी-बिल्कुल नही

कोमल-मैं अपने हाथो से खिलाऊ तब भी नही लोंगे

अवी-तुम किस ख़ुसी मे खिला रही हो

कोमल-चुप चाप मूह खोलो वरना पेट पे मुक्का मारूँगी

अवी-अब ये क्या था

कोमल-कल का आक्षन भूल गये.

अवी-कोमल डॉन ,अब तो आइस क्रीम खानी होगी

कोमल प्यार से मुझे आइस क्रीम खिलाने लगी.

कोमल-प्यार से बोला तो नाटक कर रहे थे .और उंगली टेडी की तो तो कैसे चुप चाप खा रहे हो

अवी-कोमल डियर उंगली टेडी करने पे ज़्यादा आइस्क्रीम हाथ मे आती है.

कोमल-क्या बात है. बातें अच्छी करने लगे हो

अवी-कुछ दिनो से दिल मे जो आ रहा है वही ज़ुबान पे आ रहा है पता नही ऐसा क्यूँ हो रहा है.

कोमल-कही शायरी की किताबें तो नही पढ़ रहे

अवी-किताबो का तो पता नही पर मेज़े शायरी वाले है.

कोमल-मेसेज ,कौन कर रहा है

अवी-जूनियर ,अपने कॉलेज के ,

कोमल-लड़के या लड़किया

अवी-इतने भी दिन बुरे नही आए कि लड़को के मेसेज आएँ मुझे

कोमल-कौन है बताओ मुझे

कोमल ने थोड़े गुस्से मे कहा था.

अवी-तुम्हें क्यू बताऊ ,

कोमल-अपना मोबाइल दिखाओ

मोबाइल मेरे हाथो से छीन ने लगी

अवी-क्या कर रही हो

कोमल-मुझे मोबाइल दिखाओ .

अवी-तुम भी ना ,मैं मज़ाक कर रहा था

कोमल-मोबाइल दिखाओ सब पता चल जाएगा.

अवी-तुम्हें मुझपे विश्वास भी नही रहा.लो देख लो

मैं ने कोमल के हाथ मे मोबाइल दे दिया.

कोमल ने मोबाइल देखा तो ऐसा हो जाएगा कि उसे मुझपे विश्वास नही है.

कोमल ने बिना मोबाइल देखे मुझे दे दिया.

कोमल-तुम पे खुद से ज़्यादा विश्वास करती हूँ.

अवी-मुझे पता है. तुम्हें मेरा दूसरो के साथ रहना पसंद नही.

कोमल-फिर ऐसा मज़ाक क्यूँ करते हो

अवी-तुम्हें सताने का मन हुआ .

कोमल-माँ को नाम बता दूं

अवी-उनको पता है मेरा नाम ,

कोमल-अपने पीजे अपने पास रखो

अवी-वैसे कोमल तुम खाना अच्छा बनाती हो.

कोमल-अभी तो सीख रही हूँ जब सीख जाउन्गी तब खा कर देखना

अवी-फिर तो तुम्हारे हाथ का खाना खाउन्गा रोज

कोमल-ऐसे नही मिलेगा ,

अवी-तो

कोमल-मुझे गिफ्ट मिलेगा तभी मिलेगा

अवी-ये तो महनगा होगा

कोमल-सोच लो

अवी-बाइक पे घुमाने ले जाउन्गा.

कोमल-फिर तो खाने मे स्वीट्स भी दूँगी

रानी-स्वीट्स, किसे चाहिए

अवी-कोमल को चाहिए

कोमल-मुझे नही चाहिए

अवी-रानी तुम लेकर आओ

कोमल-मुझे नही चाहिए मैं जा रही हूँ आंटी के पास

कोमल तो चली गयी

अवी-रानी डार्लिंग

रानी-धीरे बोलो कोई सुन लेगा.

अवी-तुम्हारे हाथो मे जादू है .चूमने काट दिल कर रहा है.

रानी-अपनी भावनयो पे काबू रखो

अवी-कैसे राकु ,लड्डू इतना टेस्टी उपर से तुम इतनी नमकीन ,कैसे कंट्रोल करू

रानी-तो क्या मुझे खाने का दिल कर रहा है.

अवी-हाँ, तुम तो तंदूरी मुर्गी दिख रही हो

रानी-मुझे मुर्गी बोल रहे हो.

अवी-तुम्हें तो शादी के बाद बिना पकाए खा जाउन्गा.

रानी-सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को काटा नही करते

अवी-तो क्या करते है

रानी-इतना प्यार करते है कि वो प्यारा सा सोने जैसा बच्चा दे

अवी-मेरी मुर्गी कितने अंडे देगी.

रानी-मुर्गे को कितने चाहिए उतने तो बिल्कुल नही दूँगी.

अवी-वो तो शादी के बाद देखेंगे.मुझे तो क्रिकेट टीम चाहिए

रानी-मुर्गी के बच्चे क्रिकेट नही खेलते

अवी-तुम मेरी माँ हो ,कभी तो हार मान लिया करो

रानी-हार तो जाती पर तुम मुझे हारते हुए देखना नही चाहते इस लिए खुद हार मान लेते हो

अवी-गर्लफ्रेंड बनाओ तो स्मार्ट मत बनाओ.वरना प्यार करना मुश्किल हो जाता है.

रानी-अवी को मुश्किलो का सामना करना आता है. और मुझे प्यार करना आता है.

अवी-इस बात पे एक किस हो जाए

रानी-यहाँ पर

अवी-जाते समय गुड बाइ किस तो मिलेगा.

रानी-गुड बाइ, जा रहे हो

अवी-जाने का दिल तो नही हो रहा है पर जाना पड़ेगा तभी तो सपने मे मिलेंगे

रानी-पक्का सपने मे मिलने आओगे

अवी-सपने मे आकर इतना प्यार करूँगा कि तुम सपने से उठना नही चाहोगी.

रानी-इंतज़ार रहेगा सपने मे आने का. मुझे जाने की तैयारी करने जाना होगा.

अवी-आइ लव यू

रानी-आइ लव यू टू

और रानी आंटी के साथ नीचे चली गयी

हम भी नीचे आ गये.

इस प्यार से भरे दिन को अलविदा कहने का समय आ गया था.

आज शाम कैसे हो गयी किसी को पता ही नही चला.

इस दावत के हसीन पल अपने साथ ले जाने को हम तैयार थे.

आंटी ने चाची बुआ और हम सबके लिए गिफ्ट तैयार रखे थे

चाची और बुआ ने गिफ्ट लेने से मना किया पर आंटी ने ज़िद करके चाची को मना लिया.

एक दूसरे के गले मिल कर फिर से मिलने का वादा करने लगे.

कोमल तो आज रानी के साथ रुकना चाहती थी

नेहा बुआ ने इजाज़त दे दी. तो रानी और कोमल आज गप्पे मार कर इस दिन को फिर से जीना चाहती थी.

मैं ने आंटी के पैर छू कर आशीर्वाद लिया .

रानी ने चाची और बुआ का आशीर्वाद लिया

और रानी ने मुझे एक गुड बाइ किस किया .

इस दिन की याद हम अपने साथ ले जाने लगे .
 
चॅप्टर 930डी

रानी के घर बिताया हुआ वो दिन ,वो हसीन पल,कभी भूल ही नही सकते.

रानी जो कभी अपना बर्तडे सेलेब्रेट नही करती उसका बर्तडे इस तरह सेलेब्रेट होगा,उसके लिए तो ये दिन यादगार बन गया.

आंटी ने जिस वजह से ये दावत रखी थी ,उनको चाची और बुआ से मिलने का, बातें करने का, सुख दुख की बातें बता कर के एक नया रिश्ता जोड़ने का मौका मिला था.

रानी की फॅमिली मे सिर्फ़ वो और उसके मम्मी पापा थे. रानी के पापा के जाने के बाद रानी तो फॅमिली का मतलब भूल गयी थी. पर मेरी फॅमिली का प्यार मिलते ही उसे एक फॅमिली मिल गयी.

रानी को कोमल जैसी फ्रेंड कम बहन मिल गयी. माँ जैसा प्यार करने वाली चाची और बुआ मिल गयी. उसे तो मुझे प्यार करके सब कुछ मिल गया.

रानी है ही इतनी प्यारी कि उसे हर कोई प्यार करता है.

आंटी को रानी के चेहरे पे खुशी देख अपने आँसू पे कंट्रोल नही रहा.

आंटी ने दुआ माँगी की रानी ऐसे हँसती खेलती रहे. हमेशा खुश रहे.

नेहा बुआ भी काफ़ी दिनो बाद इस तरह किसी दावत को एंजाय कर रही थी.

नेहा बुआ को खुश देख कर पूजा बुआ को अच्छा लगा.

बड़ी चाची को रानी की मम्मी की मेहमान नवाज़ी पसंद आई.

सीमा चाची इतना मान समान पा कर खुद के भावनाओं को रोक नही पा रही थी.

छोटी चाची मेरे और रानी के रिश्ते को मज़बूती दे रही थी. एक लव कपल की अरेज मॅरेज करने के लिए 2 फॅमिली को मिला रही थी.

कोमल ने तो सबका दिल जीत लिया.

अगर कोमल मेरी बहन ना होती तो आज वो मेरी गर्लफ्रेंड होती.

कोमल और रानी मे कंपेर नही कर सकता. इतनी उनकी खूबिया मिलती है.

हम तो शाम होते घर की तरफ निकल पड़े पर कोमल रानी की मदद करने के लिए वही रुक गयी.

फंक्षन मे लोग मदद तो करते है पर फंक्षन हो जाने के बाद कोई हेल्प नही करता .पर कोमल रानी की मदद करने के लिए रुक गयी.

आंटी ने चाचा के लिए खाना पॅक करके दिया था.

चाचा ने जब घर पे खाना खाया तो उनका एक्सपेस्षन देखने लायक थे चाचा सोच रहे होंगे कि काश वो दावत मे आते तो टेस्टी खाने का लुफ्त अच्छे से उठा सकते थे

सब ने अपनी लिमिट से ज़्यादा खाना खाया था. जिस से सब घर आते ही बेड पे लेट गये.

विद्या भी घर आते ही बेड पर लेट कर सो गयी .

राज तो टॅक्सी मे सो गया था जिस से उसका कॅमरा मेरे पास रह गया.

ये अच्छा हुआ ,राज का कॅमरा मेरे पास है मैं रानी के कुछ फोटो अपने पास रख सकता हूँ.

मैं सोने की जगह फोटो देखने लगा.

रानी और कोमल के फोटो इतने खूबसूरत थे कि मैं डबल देखने लगा.

रानी और कोमल ने मुझे जो एक साथ पप्पी की थी वो फोटो को मैं ने अपने मोबाइल का वॉलपेपर रख लिया.

मैं ने सारे फोटो ,पूरे हसीन पलों को अपने लॅपटॉप मे सेव करके रख दिया.

और फिर से फोटो देखने लगा.

मैं फोटो देख कर पूरे दिन को फिर से जी रहा था कि रानी की मम्मी का फोन आया.

इतनी रात को आंटी का फोन

अवी-हेलो आंटी

रानी की मम्मी-अवी मैं ने डिस्ट्रब तो नही किया.

अवी-नही आंटी .मैं अभी तक सोया नही था ,

रानी की मम्मी-रानी से बात कर रहे थे

अवी-रानी अब मेरी गर्लफ्रेंड नही रही .वो तो मेरी फॅमिली की गर्लफ्रेंड बन गयी. उसके पास तो मेरे लिए टाइम ही नही होता.

रानी की मम्मी-मैं बात करूँ रानी ने से

अवी-ऐसा किया तो रानी गुस्सा हो जाएगी. वैसे आंटी आपने इतनी रात को कॉल कैसे किया

रानी की मम्मी-देखो मैं ने जिस लिए फोन किया वो बात करने की जगह मैं क्या बात करने लगी.

अवी-कुछ ज़रूरी काम था

रानी की मम्मी-मैं ने तो इस लिए फोन किया कि हमारे तरफ से कोई कमी तो नही हुई ना

अवी-आंटी सब कुछ पर्फेक्ट था. चाची और बुआ खुश है.

रानी की मम्मी-मैं अकेली क्या क्या करती ,पर तुम्हारी चाची और बुआ ने जो मदद की ,उनसे मैं काम नही करवाना चाहती थी पर मुझे अकेला काम करते हुए देख कर मदद करने लगी.

अवी-आंटी फॅमिली मे एक दूसरे को मदद करने को प्यार कहते है.

रानी की मम्मी-अवी तुम्हारी फॅमिली मे जो प्यार है उसे देख कर मुझे आज फील हुआ कि रानी को अपने दादा दादी नाना नानी की कितनी कमी फील होती होगी.

अवी-अब नही होगी , अब तो रानी मेरी फॅमिली का हिस्सा बन गयी.

रानी की मम्मी-रानी तुम सब के साथ कितनी खुश रहती है ये देख कर आज मुझे बहुत अच्छा लगा.

और आंटी धीरे धीरे रोने लगी

अवी-ये क्या आंटी आप रो रही है

रानी की मम्मी-ये तो खुशी के आँसू है.

अवी-फिर तो आपको ऐसे रोते रहना होगा क्यूँ कि मैं रानी को इतनी खुशिया दूँगा की आप देखती रहेगी.

रानी की मम्मी-सच

अवी-आंटी रानी को मैं कभी रोने नही दूँगा.

रानी की मम्मी-मुझे तुमसे यही उम्मीद थी. अब मुझे रानी की चिंता नही है.उसके साथ तुम जो हो

अवी-और मैं उसके साथ हमेशा रहूँगा.

रानी की मम्मी-प्रॉमिस करो कि तुम रानी का साथ नही छोड़ोगे

अवी-रानी मेरी सौल है और मैं शरीर हूँ. हम ने एक दूसरे का साथ छोड़ा तो क्या होगा पता हैं ना आपको. मैं रानी का साथ कभी नही छोड़ूँगा.

रानी की मम्मी-मैं हमेशा एक बेटा चाहती थी. और तुम्हारे रूप मे मुझे एक बेटा मिल गया.

और आंटी भावुक होने लगी. मैं आंटी को शांत करने लगा.

आंटी के नॉर्मल होते ही हम ने फोन रख दिया.

आंटी को रानी की जो चिंता थी कि उनके बाद रानी का क्या होगा. वो ख़तम हो गयी.

अबी तो रानी का कॉल आना चाहिए था पर आंटी का कॉल आ गया.

कोमल वहाँ ना रुकी होती तो रानी मुझे कॉल ज़रूर करती

रानी से तो अब बातें होती रहेगी.

रानी के हसीन सपने देखते हुए मैं सो गया.

फिर एक नयी सुबह नयी उमंग लेकर हमारी ज़िंदगी मे आ गयी

मुझे तो हर सुबह एक माया चेलेंज लेकर आती है.

और चाँद की चाँदनी उस चेलेंज को सॉल्व करने मे मेरी मदद करती है.

नया दिन नयी मस्ती नया अड्वेंचर यही तो लाइफ है .इसी को जन्नत कहते है.

हम खुद अपने लिए जन्नत बनाते है और खुद हेल बन जाता है.

लेकिन अभी तो जन्नत का मज़ा ले रहा था.

घर पे मेरे बच्चो के साथ प्यार करना. किरण से मिलने जाना.

चाची के साथ प्यार भरी मस्ती मज़ाक करना. तीनो चाची का प्यार पाना ,उनको खुश रखना.

बुआ के साथ वक्त बताना ,अपने माता पिता के बारे मे इन्फर्मेशन निकालना.

कविता और लीना की मस्ती को छुपाना , राज के साथ बच्चा बन जाना.

राजेश के साथ वीकॅंड पे धमाल करना.

कोमल के साथ पढ़ाई करना

एरिएंड ग्रूप के साथ मस्ती करते हुए कॉलेज लाइफ जीना.

कोमल के बदलने से कॉलेज लाइफ और मस्ती भरी हो गयी.

रानी के साथ कोमल के सामने फ्रेंड की हद तक रहना

और टाइम निकाल कर रानी को पेड़ के पीछे ले जाकर प्यार करना.

रानी को गुस्सा दिला कर प्यार से मनाना ,कोमल के साथ छेड़छाड़ करना.

कविता लीना को मस्ती करने मे मदद करना.

उनके कॉलेज की मस्ती सुनना , कविता लीना के फ्रेंड्स से चॅट करना.

कविता लीना को जो घर दिया वो उनका फन अड्डा बन गया था.

कविता लीना अपने मोबाइल से अवी बनकर खुद अपनी सीनियर से चॅट करती .उनको डेट के लिए पूछती.

सेट्टिंग हो गयी तो मुझे डेट पर भेज देती

कविता लीना की फ्रेंड्स के साथ डेट पे जाकर मस्ती करना .और डस्टबिन को कॉंडम से भरता जाना.

कविता लीना ने तो मेरे नाम के सिम ले लिए और मैं बन कर घंटों चॅट करती रहती.

अपने फ्रेंड्स और सीनियर को मेरे लिए पटा लेती. मतलब वो अवी बन कर पटा लेती और डेट पे मुझे भेजती.

कविता लीना को लड़कियो के साथ लड़का बन कर चॅट करने मे मज़ा आता.

कविता लीना का महिला कॉलेज मे जाने का मुझे फ़ायदा हो रहा था.

हर हफ्ते नयी लड़की के साथ डेट पे जाना अवेसम था

मैं कविता लीना को मना करता पर वो कहाँ मानने वाली थी. उनको तो चॅट करने मे मज़ा आता था

कविता लीना के कॉलेज की लड़किया एकदम हॉट और सेक्सी थी. कविता पर्फेक्ट लड़की को मेरे लिए सेट करती थी.

कभी कभी तो वो कॉलेज मे कॉल करके बुला लेती .

मेरी बहनें मेरा पूरा ध्यान रख रही थी.

कविता और लीना का मैं जितना ख़याल रखता उतना वो मेरा ख़याल रख रही थी.

कविता और लीना के साथ डेट पे जाने से विद्या की चुदाई कम कर दी थी.

फिर भी विद्या खुश थी.

कविता और लीना चॅट करके ,अपने कॉलेज लाइफ मे खुश थी.

मैं कविता और लीना की फ्रेंड को डेट करके खुश था .

रानी कोमल के साथ खुश था.

चाची बुआ के साथ खुश था

अपने भाई बहन के साथ मैं खुश था.
 
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