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मैं और मेरा परिवार

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चॅप्टर 942 ब

चाची सच मे देवी सी ,

चाचा के साथ पत्नी धर्म निभाया , मुझे थोड़ा लिमिटेड मे प्यार करके खुश रखा , अपनी ज़िम्मेदारी पूरी की , बड़ी चाची का प्यार बरकरार रखा , उनका साथ मे रहना इस बात को चाची ने टूटने नही दिया बड़ी चाची के बताने तक मुझे प्यार करने नही दिया

एक औरत क्या क्या सहती है ये चाची को देख कर पता चल गया

कितना कुछ छुपा रहता है चाची के दिल मे

कितना कुछ बलिदान देना पड़ा है चाची को

और चाची चाचा को धोका नही देना चाहती मुझे प्यार करके , सिर्फ़ माँ बनने के लिए मेरे करीब आई

और चाचा चाची के होते हुए ज्योति बुआ के साथ मज़ा कर्जे अपने बच्चों का फ्यूचर ज्योति बुआ पे उड़ा रहे है

चाचा को इतना प्यार करने वाली पत्नी मिली है फिर भी वो दूसरो के पास जा रहे है

मेरी देवी जैसी चाची को शैतान मिला है

चाची की किस्मत ऐसे कैसे लिख सकता है भगवान ,

मैं ने चाची को चाचा के बारे मे बता तो दिया पर उनका दिल नही मान रहा था

उनको मेरी बात झूठ लग रही थी

चाचा को बाप बनना था और चाची ने उनको बेटा और बेटी दोनो दी है , फिर भी वो ज्योति बुआ के पास जा रहे है

चाचा के खाना खाने से पहले चाची खाना नही खाती , चाचा की लंबी उमर के लिए फास्ट रखती है , और चाचा चाची के साथ क्या कर रहा है

मैं रानी के साथ कभी ऐसा नही करूँगा , मैं शादी के बाद अपनी पत्नी का बनके रहूँगा

मेरी बात सुनते चाची सोचने लगी

अवी- चाची क्या हुआ

सी चाची -तुम झूठ बोल रहे हो

अवी- चाची अभी जो मैं ने शादी की बात कही उस की वजह से आपको झूठ लग रहा होगा

सी चाची -यही सच है , तू चाचा को बुरा साबित करना चाहता है

अवी- चाची मैं आपसे झूठ नही बोलता , ये आपको पता है

सी चाची -अभी तो कहा था कि एक बात झूठ कही थी

अवी- यही वो बात थी जो आप से छुपा कर रखी थी

सी चाची -मैं नही मानती

अवी- सच दर्द भरा होता है तो उस पे यकीन नही किया जाता , आपने ही कहा था

सी चाची -तुम्हारे चाचा को ऐसा करने की ज़रूरत नही है

अवी- क्यूँ ज़रूरत नही है

सी चाची -क्यूँ कि हँकी एक नही तीन पत्नी है

अवी- फिर भी चाचा ने आपको धोका दिया

सी चाची -अब वो ऐसा क्यूँ करेंगे , उनको बेटा चाहिए था वो हमने दिया है , एक नही तीन बच्चे दिए है

अवी- फिर भी चाचा दूसरो के साथ मज़ा करते है

सी चाची -उनको ऐसा करने की ज़रूरत नही है , सब कुछ तो हम दे रहे है

अवी- चाचा को आप से वो नही मिल रहा जो दूसरो से मिलता है

सी चाची -क्या मतलब

अवी- चाचा और मेरे अंदर एक ही खून है , मैं ऐसा हूँ तो चाचा भी ऐसे ही होंगे

सी चाची -तेरी बात अलग है ,

अवी- मेरी बात अलग कैसे हुई

सी चाची -कहा ना तुम जो कर रहे हो वो सही है

अवी- पर चाचा जो कर रहे है वो ग़लत है

सी चाची -तेरे पास सबूत क्या है

अवी- सबूत ही सबूत है

सी चाची -दिखा मुझे

अवी- पहले बताता हूँ ,

सी चाची -पहले दिखा

अवी- दिखा दिया तो आप मेरी बात पे विश्वास नही करेंगे

सी चाची -कौन है वो ये बता

अवी- ज्योति बुआ

सी चाची -ये क्या बोल रहा है

अवी- ज्योति बुआ के शहर के जलवे के सामने आप फीकी पड़ गयी

सी चाची -वो ऐसा क्यूँ करेंगी

अवी- पैसा

सी चाची -पैसे के लिए , उसको पैसे की ज़रूरत क्या है , राज के पापा इतने पैसे तो देते है

अवी- उनके बेटे की डेत हो चुकी है उनके भूडपे का सहारा कोई नही है तो वो पैसे कमा कर राक रही है

सी चाची -ये सच है

अवी- मैं शुरू से बताता हूँ आपको

सी चाची -कब से चालू है ये सब

अवी- पिछले साल से , आपकी डेलिवरी से स्टार्ट हुआ

सी चाची -और तू अब बता रहा है मुझे

अवी- तब कैसे बताता था , आप हॉस्पिटल मे थी , आप माँ बन गयी थी , अगर आपको तब सच बताता तो आप टूट जाती और उसका असर बच्चों पे होता

सी चाची -ये तुम ने सही सोचा पर तुम्हें मुझे बताना चाहिए था

अवी- चाची मुझे पता है आप से झूठ बोलते हुए मेरा दिल कितना रोया था

सी चाची -पूरी बात बता मुझे

अवी- आपकी डेलिवरी से सब स्टार्ट हुआ

आपके माँ बनते ही आपने चाचा के साथ सेक्स करना बंद किया

सी चाची -वो तो करना पड़ता है

अवी- चाचा कुछ महीनो से सेक्स के भूके थे , ऐसे मे हम शहर गये , वहाँ हम पैसे अपने साथ लेकर गये थे

सी चाची -तुम वापस नही आ सकते थे इस लिए लेकर गये थे

अवी- वो पैसे ज्योति बुआ को दिख गये , उनको पैसे चाहिए थे तो ज्योई बुआ ने चाचा को अपने जाल मे फसाया

सी चाची -उसे बुआ मत बोल

अवी- ज्योति ने चाचा को फसा लिया , चाचा को भी सेक्स चाहिए था , चाचा को सेक्स चाहिए और ज्योति को पैसा चाहिए , जिस से दोनो ने अपनी ज़रूरते एक दूसरे से पूरी की

सी चाची -तू क्या कर रहा था तुझे रोकना चाहिए था ना

अवी- मुझे पहले पता होता तो रोक लेता , मैं तो आपकी सेवा मे बिज़ी था , मुझे तो लास्ट के दिनो मे शक हुआ

सी चाची -तो तूने क्या किया

अवी- मैं आपको बता नही सकता था तो मैं ने चाचा और ज्योति को अलग किया , आप से गाँव जाने की बात करके

सी चाची -तो वो अलग हुए

अवी- हाँ , वो तो अलग हुए और हम गाँव मे आ गये

सी चाची -पर ज्योति ने पैसो के लिए ऐसा किया

अवी- वो रंडी है , शहर 2 मे बहुत लोगो को फसाया था , पर उनके बेटे की डेत के बाद सब छोड़ दिया था , पर चाचा के पास पैसे देख कर फिर रंडी बन गयी

सी चाची -उसे मैं छोड़ूँगी नही

अवी- किस किस को मारेंगी आप

सी चाची -क्या मतलब

अवी- चाचा हमे खेत मे क्यूँ नही आने देते है पता है

सी चाची -ताकि हमे खेत का काम करना ना पड़े

अवी- वो खेत ने मज़ा कर सके और आको पता ना चले इस लिए आपको खेत मे आने नही देते

सी चाची -तुम्हें कैसे पता

अवी- मेले मे मुझे कुछ पुराने पेपर मिले जिसमे लिखा था , मंडे को शांति ट्यूसडे को आंटी एट्सेटरा

सी चाची -तुम तब भी मुझे नही बताया

अवी- वो पेपर 2 साल पुराना था

सी चाची -पर वो अब भी करते होंगे

अवी- हाँ,

सी चाची -और तुम देखते रहे

अवी- मैं ने उनको उन औरतो से दूर किया

सी चाची -कैसे

अवी- आपको पता है दीवाली मे मैं ने झूठ कहा था आपको

सी चाची -हाँ अभी तो बात की

अवी- उस दिन मैं ने चाचा की चुदाई देखी

सी चाची -किसके साथ

अवी- मंगला काकी के साथ

सी चाची -मंगला काकी , उसने मेरे साथ धोका किया मैं उसे छोड़ूँगी नही

अवी- चाची इसमे ग़लती मंगला काकी की नही है ,जब पति की डेत हो जाती है तो घर चलाने को ये सब करना पड़ता है

सी चाची -पर मेरे पति के साथ

अवी- मंगला काकी का पति चाचा का दोस्त था , पर मेरे कहने पे चाचा के साथ करना बंद किया

सी चाची -वो अब भी कर रही होगी

अवी- नही , चाचा को हाथ भी लगाने नही देती , मैं ने रति की शादी करवाने का बात की है

सी चाची -तो तू अपने चाचा को औरतों से दूर रख रहा था

अवी- हाँ , पर ज्योति बुआ सॉरी , ज्योति बहुत चालाक है

सी चाची -क्या मतलब

अवी- मेले मे हम सब की आँख के नीचे ज्योति ने चाचा और चाचा के दोस्तो से सेक्स किया और पैसे कमाए

सी चाची -मेले मे , ये तुम्हें पता है

अवी- नही , वो आज पता चला ,

सी चाची -तेरे चाचा कितने पैसे उड़ाए है

अवी- एक गोल्ड का नेकक्लेस , 7.50लाख

सी चाची -हमे तो कुछ नही देते और उस रांड़ को गोल्ड का नेकक़लेस दिया

अवी- और अब तो

सी चाची -अब तो क्या

अवी- उस दिन फंक्षन मे चाचा ने 1लाख दिए

सी चाची -ये भी तुम ने छुपा दिया

अवी- बच्चों का फंक्षन खराब कैसे होने देता

सी चाची -और क्या लूटाया है

अवी- उस बावरची की गोल्ड की चैन

सी चाची -दूसरों का मत बता

अवी- आज मैं ने चाचा और ज्योति की बात सुनी

सी चाची -क्या बातें की

अवी- कल चाचा 2 डायमंड के नेकक्लेस देंगे ज्योति को

सी चाची -मेरे बेटे के पैसे है वो

अवी- कल यही होगा उस लिए आपको बताया

सी चाची -ऐसे कैसे मेरे बेटे के पैसे उड़ा सकते है , हम तो धोका दिया और अपने बच्चों की ज़िंदगी खराब कर रहे है

अवी- हमे चाचा को रोकना होगा वरना वो सब उड़ा देंगे

सी चाची -उनको तो मैं छोड़ूँगी नही

अवी- ज्योति रंडी है उसे कुछ फरक नही पड़ेगा हमे चाचा को सबक सिखाना होगा

सी चाची -तूने जो कहा है उसको सबूत क्या है

अवी- सबूत मेरी जेब मे है

सी चाची -दिखा मुझे

मैं ने अपना मोबाइल निकाला

अवी- ये देखिए पिछले साल का वीडियो

और मैं ने पिछले साल वाला वीडियो छोटी चाची को दिखाया

वीडियो देखते ही चाची की आँखो से पानी निकलने लगा

चाची ने थोड़ा वीडियो देख कर बंद कर दिया

अवी- ये है मंगला काकी का वीडियो

मंगला काकी को चाचा के साथ देखते ही चाची की आँख गुस्से से लाल हो गयी

उनको तो खून करने का मन कर रहा होगा मंगला काकी का

अवी- चाची

सी चाची -रति का मैं ने कितना ख़याल रखा और उसकी माँ मेरे पति को निगल गयी

अवी- मंगला काकी की मज़बूरी थी, ग़लती चाचा की है

सी चाची -और मत दिखा

अवी- आज की बात तो सुन लो

और आज का वीडियो प्ले किया

और चाचा ने थोड़ा वीडियो देखा और बाद मे सिर्फ़ बातें सुनने लगी

सी चाची ने बातें बड़ी गोर से सुनी

2 डायमंड की बात सुनते चाची का गुस्सा सातवे आसमान पे था

अवी- ये है शैतान

सी चाची -इस शैतान को मैं छोड़ूँगी नही

अवी- उसी लिए तो आपको बताया वरना बड़ी चाची को बताता

सी चाची -उनको बताना भी मत वो तो स्यूयिसाइड कर लेगी

अवी- सीमा चाची

सी चाची -सीमा दीदी सबको बता देगी , इनको तो मैं देखूँगी

अवी- और ज्योति

सी चाची -उनको मैं जान से मार डालूंगी

अवी- राज के पापा

मेरी बात सुनते चाची ने बेड पे मुक्का मारा

सी चाची -कल 3 बजे

अवी- 3 बजे हम केट मे जाएँगे

सी चाची -पर मुझे अब भी यकीन नही हो रहा है

अवी- सबूत आपके सामने

सी चाची -दिल नही मान रहा

अवी- यही सच है

सी चाची -कल तक कितना खुश थे हमारे साथ , फंक्षन मे किस तरह हमारे साथ थे

अवी- लेकिन आज ज्योति की बाहों मे है

सी चाची -उस ज्योति की तो

अवी- ज्योति का हमे क्या करना है , हमारा सिक्का खोटा है

सी चाची -ऐसा मेरे साथ ही क्यूँ होता है

अवी- भगवान ने आपके साथ ग़लत किया

सी चाची -मैं भगवान ज़रूर पूछूंगी कि मेरी किस्मत ऐसी क्यूँ लिखी है , मैं खुश थी तीसरी बीवी बनकर , अपना सब कुछ मान लिया था तुम्हारे चाचा को और तुम्हारे चाचा ने मेरे साथ ये क्या किया

और चाची मेरे गले लग कर रोने लगी

मैं चाची को समझाने लगा

उनका दर्द कम करने लगा
 
चॅप्टर 942 सी

चाची मेरे गले लग कर रोने लगी

चाची ने सबको खुश रखा और खुद दर्द अपने सीने मे छुपा कर ज़िंदगी जी रही थी

चाचा को मुझे बड़ी चाची को पूरी फॅमिली को खुश रखा और उनको क्या मिला धोका

चाचा को बेटा चाहिए वो भी दिया पर अपने आचल पे दाग नही लगने दिया

चाची ने हमेशा अपनी ज़िम्मेदारी पूरी की , पता नही चाची कौन सी ज़िम्मेदारी की बात कर रही थी , पर पूरी फॅमिली को बाँध कर रखा

आज मेरी वजह से उनके आँख मे आँसू आ गये

चाचा ने मेरी देवी जैसी चाची को रुला दिया

उनको इसकी सज़ा ज़रूर मिलेगी

अवी- चाची और कितना रोएंगी

सी चाची -मेरी ज़िंदगी मे रोना ही लिखा है

अवी- ऐसा किसी ने कहा ,

सी चाची -बचपन से रोती आ रही हूँ और आज भी रो रही हूँ

मेरी किस्मत ही ऐसी लिखी है

अवी- आपकी किस्मत मेरे साथ लिखी है

सी चाची -तू कुछ नही कर सकता , मुझे तो ऐसे ही जीना होगा

अवी- पहले आप ये रोना बंद करो

सी चाची -कैसे करूँ , ये मेरी सहेली है

अवी- आपने मेरी कसम ली थी कि आप मेरी हर बात मानेगी

सी चाची -मुझे रोने दो अवी , आज पूरे आँसू बहने दो

अवी- आप मेरी बात भी नही मानेगी

सी चाची -अब तू ही तो मेरा सहारा है ,

अवी- मैं अकेला नही हूँ , अमित है , आप अमित के लिए ये रोना बंद करो

सी चाची -हमारे बेटे के लिए

अवी- हाँ , हमारे बेटे के लिए , भगवान भी चाहता था कि चाचा की निशानी आप के साथ ना रहे इस लिए आपको मेरे बेटे की माँ बनाया है

सी चाची -तू सच कह रहा है

अवी- हाँ, आपको मेरे और हमारे बेटे के लिए जीना होगा

सी चाची -मेरा बेटा

और चाची ने अमित को अपने गोद मे लिया और उसे प्यार करने लगी

अवी- चाची मैं आपके साथ हमेशा रहूँगा , आप का दिल कभी नही दुखाउन्गा

सी चाची -ऐसा प्रॉमिस मत कर, अगर मेरा दिल और टूटा तो मैं मर जाउन्गी

अवी- मैं आपके दिल को टूटने नही दूँगा

सी चाची -टूट जाएगा , रानी से शादी करेगा तो मेरा क्या होगा

अवी- मैं रानी से बात करूँगा , वो मेरी बात ज़रूर मानेगी , मुझे यकीन है

सी चाची -कोई अपने पति को शेयर नही करता

अवी- अगर ऐसा हुआ तो मैं रानी से माफी माँग लूँगा पर आपको प्यार करता रहूँगा

सी चाची -तुझे तो झूठ बोलना भी नही आता

अवी- मैं सच बोल रहा हूँ

सी चाची -तूने इतना कहाँ यही बहुत है , पर सच यही है कि मुझे मे कमी है

अवी- आप पर्फेक्ट हो आप मे कोई कमी नही है आप देवी हो

सी चाची -मुझ मे कमी है तभी तो तुम्हारे चाचा मुझ छोड़ कर ज्योति के पास गये है

अवी- चाचा वो अमीर इंसान है जिनके पास तीन हीरे है पर वो कॉच के टुकड़े के पीछे भाग रहे है

सी चाची -उसी अमीर ने इस हीरो को भन्गार मे बेचने को मज़बूर किया

अवी- ऐसा कुछ नही होगा , इस हीरे को मैं अनमोल बनाउन्गा

सी चाची -तू कुछ नही कर पाएगा

अवी- आप एक चान्स तो दो मुझे

सी चाची -मुझे मेरी किस्मत ने कभी चान्स नही दिया तो तुझे क्या चान्स दूं

अवी- आज से आपकी किस्मत मेरी किस्मत से जुड़ गयी है

सी चाची -तेरी किस्मत को मेरी किस्मत की बुरी नज़र लग जाएगी

अवी- लग जाने दो पर आप को हँसना मैं सिखा दूँगा

सी चाची -बचपन से मैं रो रही हूँ और तुम मुझे हँसना सिखाने की बात कर रहे हो

मेरी बड़ी बहन की वजह से मेरा बचपन अंधेरे मे चला गया , तुम्हारे चाचा के साथ शादी करके मेरे सारे सपने टूट गये

और अब तेरे और अमित के रूप मे खुशियाँ मिली तो वो भी मुझसे दूर जा रही है

अवी- आप ये ग़लत फ़हमी निकाल दो , आज से मैं आपका बनके रहूँगा , सिर्फ़ आपका

सी चाची -ऐसा मत बोल वरना मैं लालची बन जाउन्गी

अवी-आप कहेंगी तो किसी की तरफ देखूँगा भी नही

सी चाची -मैं कौन होती हूँ कुछ वाली ,

अवी- अगर और ऐसा कुछ कहा तो मैं हमेशा के लिए यहाँ से चला जाउन्गा

सी चाची -तू भी जा रहा है , सब जाओ मुझे छोड़ कर

अवी- चाची आपको मेरी कसम प्लीज़ रोना बंद कर दो , अमित की कसम

सी चाची -कसमे वादे सब टूट गये

अवी- आप तो ऐसे बोल रही है सब कुछ लूट गया हो

सी चाची -उस ज्योति ने सब लूट ही तो लिया है

अवी- मैं तो आज भी आपका हूँ

सी चाची -तू उस से दूर रहना वरना वो तुम्हें भी मुझसे छीन लेगी

अवी- मुझे आप से रानी नही छीन पाई तो ज्योति क्या चीज़ है

सी चाची -पर तेरे चाचा को तो छीन लिया ना

अवी- वो चाचा ईडियट है ,

सी चाची -मैं क्या सुंदर नही हूँ जो उस मोटी के पास गये तेरे चाचा

अवी- आप तो बहुत खूबसूरत हो , उस चाँद पे दाग है पर आप दूध की तरह सफेद हो

सी चाची -फिर भी वो ज्योति ग्रहण बन गयी मेरी ज़िंदगी मे

अवी- उस ग्रहण की हमे हटाना होगा

सी चाची -वो गयी तो कोई और आ जाएगी

अवी- तो क्या बड़ी चाची को खोना चाहती है आप

सी चाची -नही नही उनको कुछ मत बताना

अवी- तो आपको कुछ करना होगा

सी चाची -एक हारा हुआ घोड़ा किसी काम का नही रहता

अवी- उस घोड़े को अच्छा घुड़सवार मिल जाए तो वो घोड़ा रेस जीत सकता है

सी चाची -ये सिर्फ़ सपने मे हो सकता है

अवी- ये आप बोल रही है , मेरी चाची

सी चाची -मेरी हिम्मत टूट गयी है

अवी- मुझे लगा आपकी हिम्मत मैं हूँ

सी चाची -तू है इसी लिए तो यहाँ सही सलामत हूँ

अवी- अब ज़्यादा ड्रामा कर रही है आप

सी चाची -ज़िंदगी ने खेल ही ऐसा खेला कि मैं हर बार हारती जा रही हूँ

अवी- आप को किस ने कहा आप हार गयी है

सी चाची -तेरे चाचा ने मुझे धोका दिया

अवी- तो उनको सुधारा भी जा सकता है

सी चाची -उनको सज़ा दे सकते है सुधार नही सकते

अवी- तो सज़ा दीजिए , आप खुद को सज़ा क्यूँ दे रही है , चाचा को सज़ा दीजिए , ज्योति को सज़ा दीजिए , आप अपने आँसू का बदला लीजिए

सी चाची -सही कहा मैं खुद को सज़ा क्यूँ दूं , सज़ा तो उनको मिलेगी जिन्होने ग़लती की है

अवी- मैं इस मे आपके साथ हूँ

सी चाची -सुमन दीदी को मैं कुछ होने नहीं दूँगी

अवी- सुमन चाची को पता नही चलने देंगे

सी चाची -अमित का फ्यूचर मैं उनको बर्बाद नही करने दूँगी

अवी- आपको लड़ना होगा

सी चाची -तुम मेरे साथ हो ना

अवी- मैं तो हमेशा आपके साथ रहता हूँ

सी चाची -तुम्हारे चाचा से सारे रिश्ते तोड़ दूँगी

अवी- मैं भी तोड़ दूँगा , मेरी चाची को रुलाया है इसकी सज़ा उनको ज़रूर मिलेगी.

सी चाची -उस ज्योति की तो , तू पूनम को बताना उसके बारे मे उसे से बड़ी सज़ा उसके लिए कोई नही होगी

अवी- पूनम दीदी को पता है , उन्होने ने मुझे सब बताया है

सी चाची -उसे पता

अवी- हाँ , वो आज बहुत रोई मेरे सामने

सी चाची -तो क्या करने का सोचा है तुमने

अवी- पूजा बुआ को बताया है ,

सी चाची -अच्छा किया पूजा दीदी अच्छी खबर लेगी उसकी

अवी- पूनम दीदी और हम कल रंगे हाथ पकड़ेंगे उनको

सी चाची -सही सोचा तुमने , मैं भी चलूंगी

अवी- आपको तो आना ही होगा , चाचा को आप ही ठीक कर सकते है

सी चाची -उनको मार नही नही सकती वरना सुमन दीदी का क्या जाउन्गा

अवी- मैं समझा नही ,

सी चाची -तुम्हारे चाचा को अलग सज़ा सोचनी होगी

अवी- वो आप सोचना

सी चाची -कल 3 बजे , तब तक कुछ ना कुछ सोच लूँगी

अवी- ये हुई ना बात ,

सी चाची -पूजा दीदी भी साथ होगी

अवी- नही वो घर पे ज्योति की खबर लेगी , उनकी गंद लाल करके यहाँ से भेजिंगी पूजा बुआ

सी चाची -बंदरी की तरह लाला करके छोड़ना

अवी- आप जैसा बोलेगी वैसा ही होगा

सी चाची -और तू , तुझे शादी करनी थी

अवी- वो मैं

सी चाची -बोलना अब

अवी- आपको बता रहा था कि चाचा नही है तो क्या हुआ मैं आपा पति हूँ

सी चाची -तो उस लिए शादी करने वाले थे

अवी- सच मे करने वाला था , मंगलसूत्र साड़ी सबकुछ लाया था

सी चाची -दिख रहा है .

अवी- तो पहन लो चाची

सी चाची -अभी नही , आज तूने मुझे बहुत रुलाया है

अवी- मैं ने रुलाया आपको

सी चाची -और नही तो क्या , पहले नही बता सकता था

अवी- मैं आपको परेशान कैसे होने देता

सी चाची -तूने भी तो कुछ नही किया , फिर भी मैं रोई ना

अवी- मैं ने पूरी कोशिस की पर मैं कामयाब नही हुआ

सी चाची -मेले मे तू बिज़ी था पर बाद मे तो ध्यान रखता

अवी- उसके बाद अभी तो आई है ज्योति ,

सी चाची -कितनो के साथ किया है दोनो ने और मुझे पूरी डीटेल चाहिए ज्योति की

अवी- क्या करेंगी जान कर

सी चाची -दुश्मन के बारे मे जितना पता हो उतना अच्छा होता है

अवी- तो अब आपको ऐसी बात बताउन्गा कि आपकी दुश्मन पहले हार चुकी है ये आपको पता चलेगा

सी चाची -पहले हार चुकी है से क्या मतलब

अवी- मुझे पूनम दीदी ने वो बात बताई जो किसी को पता नही

सी चाची -क्या

अवी- ज्योति का बेटा सन्नी ज्योति के वजह से मारा है , ज्योति को रंडी बन कर चुदाई करते हुए देख कर सन्नी भाग कर पूनम दीदी के पास जा रहा था तो उसका आक्सिडेंट हो गया

सी चाची -ज्योति को पता है

अवी- नही

सी चाची -तभी वो फिर से रंडी बन गयी

अवी- पूरी कहानी बताता हूँ

सी चाची -बता जल्दी ताकि कल उसकी हालत खराब कर दूं

अवी- तो सुनिए

और मैं चाची को ज्योति की पूरी हिस्टरी बताने लगा

जिसे सुनकर चाची हॅंग हो गयी

पूनम दीदी ने जो जो बताया वो चाची को बताता गया

चाची को पूनम दीदी के लिए दुख हुआ पर ज्योति के साथ जो हुआ उस पे तरह सा आने लगा

सी चाची -ये तो पहले ही मर चुकी है

अवी- वही तो , हमे बस चाचा को सुधारने होगा

सी चाची -सज़ा देनी होगी

अवी- वो कल होगा 3 बजे

सी चाची -3 बजे 13 बजा दूँगी

अवी- अब आप आराम कीजिए

सी चाची -तू कहाँ जा रहा है

अवी- सोने जा रहा है

सी चाची -मुझे अकेला छोड़ कर जा रहा है

अवी-आप कहे तो यही सो जाउन्गा

सी चाची -तुझे यहीं सोना होगा अपने बेटे और अपनी पत्नी के साथ

अवी-मुझे भी यही लग रहा था कि आज आपके साथ सो जाउ

सी चाची -आ मेरे पास

और चाची ने मुझे अपनी बाहों मे ले लिया

और मुझे अपने सीने से लगा कर मुझे सुलाने लगी

और खुद कुछ सोचने लगी

चाची काफ़ी देर तक सोचती रही और मेरे बालो मे उंगली घूमाती रही

मैं तो चाची की बाहों मे आते ही सो गया पर चाची को कहाँ नीद आने वाली थी

उनकी नीद तो उड़ चुकी थी

.अब तो चाचा को सबक सिखाने के बाद ही चाची को नीद आएगी

चाची ने सोच लिया कि उनको क्या करना होगा

और मेरे साथ सो गयी

कल का दिन बहुत बड़ा होगा हम सब के लिए
 
चॅप्टर 943

चाची को जब चाचा का सच पता चला तो उनको यकीन नही हो रहा था कि चाचा उनके साथ ऐसा कर सकते है

चाची ने उनके लिए क्या क्या नही किया

उनको बेटा चाहिए था , तो उनको बेटा दिया

फिर भी चाचा की इस हरकत पे चाची को गुस्सा आया

जब उनको पता चला कि उनके माँ बनते ही चाचा ज्योति के साथ थे तो उनको और ज़्यादा गुस्सा आया

अगर अभी उनके सामने ज्योति होती तो चाची उसकी जान ले लेती

चाची के कहने पे मैं उनको ज्योति कहने लगा

पर जब चाची को पता चला कि ज्योति का बेटा उनकी खुद की वजह से मर चुका है तो चाची को पूनम दीदी के दर्द का अहसास हुआ

और ये पता चला कि ज्योति तो मर चुकी है बस एक वर्ड बोलते ही ज्योति मर जाएगी

ये भग्वाव भी अजीब अजीब खेल खेलता है

चाची के दिल को चाचा के नाम की चैन से बाँध दिया और उस दिल मे मेरे लिए प्यार जगह दिया

चाची चाचा की चैन से बँधी होते हुए दोनो फ़र्ज़ निभा रही थी

अपने बेटे के रियल पापा को प्यार कर रही थी साथ मे दुनिया के लिए जो पापा है उनके साथ ज़िंदगी काट रही है

चाची औरत नही एक देवी है , जो खुद के सपनो का गला घौन्ट कर दूसरे की ज़िंदगी मे खुशिया लाती है

छोटी चाची की तरह बड़ी चाची और सीमा चाची ने भी बहुत कुछ बर्दास्त किया है

अगर उनको चाचा का सच पता चला तो क्या होगा , छोटी चाची हिम्मत टूट सकती है तो बड़ी चाची तो स्यूयिसाइड कर लेगी

अच्छा किया मैं ने जो सिर्फ़ छोटी चाची को बताया है

छोटी चाची ने भी यही कहा कि मुझे बड़ी चाची से ये बात छुपानी चाहिए

अब तो बस कल का इंतज़ार है

कल चाचा को रंगे हाथ पकड़ कर चाची अपने आँसू का बदला लेगी

कल पूनम दीदी भी अपनी माँ से कुछ ना कुछ ज़रूर कहेगी

पूजा बुआ को तो पहले ही उनपे गुस्सा आता है ऐसे मे पूजा बुआ तो उनको नंगा कर देगी

चाची भी कुछ सोच रही थी

उनको ऐसा फ़ैसला लेना होगा जिस से सबका भला होगा

चाचा को सज़ा भी मिलेगी , बड़ी चाची को पता भी नही चलेगा , फॅमिली को ज़्यादा नुकसान नही होगा

उधर पूनम दीदी को भी ऐसा ही करना होगा , ज्योति को सज़ा तो देनी होगी और अपने पापा से ये बात छुपानी होगी

देखते है कल क्या होता है

मैं सो गया क्यूँ कि मुझे कल के लिए बहुत कुछ करना था

कल की सुबह हमारे ज़िंदगी मे नयी किरण लेकर आने वाली थी

कल से बहुत कुछ बदल जाएगा

रिश्ते मे दरार आएँगी , नये रिश्ते जुड़ सकते है

इंतज़ार है सूरज के निकलने का ,

मैं दुआ कर रहा था कि कल का दिन हमारे नाम हो

चाची सोई कि नही ये तो मुझे नही पता, क्यूँ कि रात मे मैं पहले सो चुका था और सुबह चाची ने मुझे जगाया

चाची की आँख लाल थी , रोने से लाल हुई या रात भर ना सोने से या गुस्से से लाल हुई ये तो कहना मुश्किल था

चाची ने भी कुछ ज़्यादा बात नही की , मुझे जगह कर रशोई घर मे चली गयी

सब कुछ अजीब सा लग रहा था घर मे

घर जैसे मेरे लिए नया हो , या मेरे लिए अजनबी हो ऐसा लग रहा था

एक सन्नाटा छाया हुआ था , बच्चे के रोने की आवाज़ से मेरा सर चकरा रहा था

आज जो होगा उसे सोच कर मुझे अपनी फॅमिली की टेन्षन होने लगी

चाची चाचा के साथ क्या करेंगी ये तो मुझे नही पता , पर उसी पे मेरी फॅमिली का फ्यूचर डिपंड था

बड़ी चाची मुझे ऐसे चुप चाप घर को घूरते हुए देख कर मेरे पास आ गयी

ब चाची- अवी , उठ गये

अवी- हाँ

ब चाची- क्या हुआ , ऐसे कैसे घूर रहे हो

अवी- अपने घर को देख रहा हूँ , आज भी कैसे शान से खड़ा है

ब चाची- इस घर की परंपरा ने इसे मज़बूत बना कर रखा है , सबने अपने खून पसीने से इस घर को मज़बूत बनाया है और तुझे भी ये परंपरा आगे ले जानी है

अवी-आपको लगता है मैं ये कर पाउन्गा

ब चाची- हाँ, तुम्हारे दादाजी को लगता था इस लिए तो तुम्हारे चाचा के हाथो मे घर की कमान नही दी , तुम्हारे बड़े होने का इंतज़ार कर रहे है , तुम्हारे बड़े होने तक इस घर की ज़िम्मेदारी हमारे उपर है , जिस दिन तुम अपनी ज़िम्मेदारी उठाने लायक बन जाओगे तब हम आज़ाद हो जाएँगे

अवी- दादाजी ने चाचा को ज़िम्मेदारी क्यूँ नही दी

ब चाची- तुम्हारे दादाजी को लगा होगा कि तुम्हारे चाचा मे कुछ कमियाँ है जिस से तुम्हें अपना वारिस बनाया है

अवी- मुझे

ब चाची- हाँ , तू ही इस घर का वारिश है , तुझे अपनी फॅमिली की ज़िम्मेदारी उठानी होगी

अवी- मैं तो अभी छोटा हूँ

ब चाची-इसीलिए तो हम है , जल्दी बड़ा हो जा, और अपनी चाची को आज़ाद कर दे इस बोझ से

अवी- लेकिन मुझे करना क्या होगा

ब चाची- वो तुझे खुद पता चल जाएगा ,

अवी- मुझे नही लगता कि मैं ऐसी ज़िम्मेदारी उठा पाउन्गा

ब चाची- अबी थोड़ी ज़िमेदारी उठानी है , इसके लिए टाइम है

अवी- बाद मे भी मुझे और कुछ नही करना है ,मुझे तो बस आपका बेटा बन कर रहना है

ब चाची- तू तो हमेशा मेरा बेटा रहेगा 0, पर तुझे अपने दादा जी जैसा बनना हैं ना

अवी- दादाजी जैसा लेकिन मुझे तो कुछ याद ही नही है ज़्यादा अपने दादाजी के बारे मे

ब चाची- मैं हूँ ना बताने के लिए , मैं तो तुम्हें तुम्हारे दादाजी से भी अच्छा बनाउन्गी

अवी- वो कैसे

ब चाची- तुझे एक बात बताती हूँ , जो सब मे नही होती , हमेशा डिसिशन लेने से पहले अच्छे से सोच लेना कि तुम सही कर रहे जो या ग़लत , काय्न के दो बाजू होते है ये हमेशा याद रखना , दोनो बाजू को देख कर फ़ैसला करना कि कौन जीत गया है और कौन हारा है , क्या पता दूसरी बाजू मे कुछ और हो

अवी- काय्न की दो बाजू होती है ?

ब चाची- पता है एक ग़लत डिसिशन सब कुछ बदल देता है , हँसती हुई ज़िंदगी को रोने के लिए मज़बूर कर देता है , और जब हम घर के बड़े होते है तो डिसिशन सोच समझ कर लेना चाहिए ,

अवी- वो तो लेना ही पड़ता है

ब चाची- डिसिशन लेते हुए कभी कभी खुद की खुशियो को दाँव पे लगाना पड़ता है ताकि सामने वाले को खुशी मिले ,अपने से ज़्यादा अपनी फॅमिली के भले के लिए सोचना पड़ता है , हम रोए तो चलता है पर दूसरो की ज़िंदगी खुशियो से भरनी चाहिए

अवी-जी

ब चाची- और इस बात को भूलना मत कि काय्न की दो बाजू होती है , दोनो को देख कर फ़ैसला लेना सीखना

अवी- काय्न की दो बाजू

ब चाची- जैसे पाप पुन्य , सुख दुख, हसना रोना , जैसे हम किसी को रोता हुआ देखते है तो ये समझते है कि उसे दर्द हुआ होगा पर ये याद रखना कि आँख से जो आँसू निकालते है वो खुशी के आँसू भी हो सकते है ,

अवी- जी आपकी बात हमेशा याद रहूँगा

ब चाची- ग़लत , याद तो हर कोई रखता है , तू अपनी लाइफ मे ईस्तमाल करना , अपनी डिसिशन मे ईस्तमाल करना तब मुझे खुशी होगी

अवी- जी

ब चाची- मैं भी ना सुबह सुबह लेक्चर देने बैठ गयी , तू तो अभी तक फ्रेश भी नही हुआ ,जा फ्रेश हो जा मैं टी बनाकर लाती हू

अवी- जी

और मैं फ्रेश होने चला गया

नहाते हुए मुझे बड़ी चाची की बातें याद आने लगी

डिसिशन सोच समझ कर लेना चाहिए

बड़ी चाची हमेश ऐसे अच्छी अच्छी बातें बताती है

क्या मैं ने सही डिसिशन लिया है

चाचा के केस मे सब कुछ तो मेरे सामने हुआ है

कल खुद उनको ज्योति बुआ के साथ देखा है

चाची यहाँ उनके लिए परेशान हो रही थी कि चाचा ने टिफिन नही लिया तो खाना खाया होगा कि नही और उधर चाचा मस्ती कर रहे थे

छोटी चाची ने तो कुछ नही कहा

छोटी चाची तो मेरे साथ है

और मैं छोटी चाची के साथ हूँ

बड़ी चाची की बातों को मतलब समझना बड़ा मुश्किल होता है , बड़ी चाची ज़्यादा पड़ी नही है पर उनके लाइफ ने उनको जो शिक दी है वो उनके बोल थे

फ्रेश होते ही चाची ने मुझे नाश्ता दिया ,

नाश्ता करते हुए छोटी चाची मेरे कमरे मे आ गयी

सी चाची- अवी दीदी से क्या बात कर रहे थे

अवी- उनको कुछ नही बताया और बताउन्गा भी नही , वो तो मुझे इधर उधर की बातें बता रही थी

सी चाची- उनको भूल से भी बताना मत , मैं उनको और तुम्हें खोना नही चाहती

अवी- जी , आप आज एमोशनल मत होना

सी चाची- नही , आज मैं कमज़ोर नही पड़ सकती , तू सब तैयारी कर

अवी- चाची मैं सोच रहा था कि 3 की जगह 3.30 को चलते है

सी चाची- जो तुम्हें ठीक लगे वही करेंगे जा पूजा दीदी से बात कर

अवी- चाची एक बात तो बताना मैं भूल गया

सी चाची- क्या ,

अवी- पूजा बुआ को मैं ने चाचा और ज्योति के रिस्ते के बारें मे नही बताया , उनको ये बताया कि ज्योति का रिश्ता सरपंच से , चाचा के दोस्त से है

सी चाची- ये तो अच्छा हुआ , वरना कभी पूजा दीदी ने ग़लती से सुमन दीदी को बता दिया तो प्राब्लम हो जाती ,

अवी- मैं ने ठीक किया ना

सी चाची- हाँ , तू ने अच्छा किया , जा अब पूजा दीदी से मिल ले , और हाँ जितना हो सके उतना कम लोगो को पता हो इस बात का ध्यान रखना

अवी- जी , आप ठीक हो ना

सी चाची- मैं ठीक हूँ , बस कुछ देर अकेली रहना चाहती हूँ , जब जाना होगा तब मुझे आवाज़ देना

अवी- जी

चाची ने सही कहा , उनको कुछ देर अकेले रहने देना चाहिए ताकि वो अपनी दिमाग़ को शांत कर सके

मैं अपनी तैयारी करने के लिए पूजा बुआ की घर जाने लगा

अभी तक चाचा घर नही आए थे ,

दीवान जी से पता चला कि वो सुबह होते शहर चले गये एक काम से

शायद पैसे निकालने गये होंगे

या फिर आज की पार्टी की तैयारी करने गये होंगे

चाचा को तो शाम मे देख लूँगा

मैं पूजा बुआ और पूनम दीदी से मिलने आ गया

मेरे आते ही पहले राज ने मुझे पकड़ लिया

राज- भैया आज मैं शॉपिंग करने जा रहा हूँ

अवी- तेरे तो मज़े है

राज- माँ ने सिर्फ़ मुझे शॉपिंग करने को कहा है

अवी- दीवाली की शॉपिंग

राज- भैया मैं आपके लिए भी कुछ ना कुछ ज़रूर लाउन्गा

अवी- अच्छा गिफ्ट लाना पर तू जा किस के साथ रहा है

राज- स्वेता दीदी और सीतल दीदी के साथ , कोमल दीदी की स्कूटी लेकर जाएँगे

अवी- जा लिस्ट बना वरना भूल जाएगा क्या लेना है , पूजा बुआ कहाँ है

राज ने कहा कि पूजा बुआ अपने कमरे मे है , मेरे आते ही पूजा बुआ और पूनम दीदी ने अपनी बातें रोक ली

पूजा बुआ- अच्छा हुआ अवी तू आ गया , मैं तेरी बात कर रही थी

अवी- क्या बात कर रही थी

पूजा बुआ- पूनम ने मुझे सब बता दिया

अवी- मैने तो पहले ही आपको बता दिया था

पूजा बुआ- हाँ पर पूनम ने मेहता और बाकियो के बारे मे भी बताया

मैं ने पूनम दीदी की तरफ देखा तो उनका इशारा समझ गया कि सन्नी की बात छुपा दी है

अवी- तो आप हमारे साथ है

पूजा बुआ - हाँ पर मुझे लगता है मैं भी तुम्हारे साथ होनी चाहिए थी रंगे हाथ पकड़ते हुए

अवी- सब वहाँ जाएँगे तो कैसे चलेगा , और दूसरो के घर ड्रामा करना ठीक नही होगा

पूजा बुआ - ये भी सही है

अवी- आप ज्योति के घर आते ही उनकी हालत खराब करना

पूजा बुआ - मेरी बेटी को रुलाया है ज्योति ने , पूनम के एक एक आँसू का बदला लूँगी

अवी- जी , बस आप तैयार रहना

पूजा बुआ - मैं तो तैयार हूँ

अवी- बुआ बाकी बातें टी पीते हुए करते है

पूजा बुआ - तुम बैठो मैं टी लेकर आती हूँ

पूजा बुआ के जाते ही मैं पूनम दीदी से बात करने लगा

अवी- दीदी आप मेंटली तैयार हो ना

पूनम दीदी- हाँ , मैं आज फ़ैसला कर लूँगी

अवी- इस मे सब आपको करना होगा मैं कुछ नही करूँगा

पूनम दीदी - क्या मतलब तुम कुछ नही करोगे

अवी- मुझे अपने चाचा को संभालना होगा , और आप अपनी माँ को संभालना

पूनम दीदी- ऐसा कहो ना , ये मुझे पता है , मेरा प्राब्लम मुझे सॉल्व करनी होगी

अवी- मैं जितनी हो सके उतनी मदद करूँगा पर बाकी तो आपको संभालना होगा

पूनम दीदी- मेरे साथ पूजा मामी है

अवी- तो तैयार हो जाओ

फिर मैं थोड़ी देर पूजा बुआ के साथ बातें की

और पूनम दीदी को 2.50 बजे मेरे यहाँ आने को कहा

और मैं अपने घर आकर आराम करने लगा

छोटी चाची अमित के साथ अपने कमरे मे थी

वो सुबह के बाद कमरे से बाहर नही आई

बड़ी चाची ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नही है

ये क्या हो गया छोटी चाची को ,

मैं ने फोन करके पूछा तो पता चला कि वो अकेले रहने के लिए ऐसा कहा है

चाचा आज घर नही आए

ऐसे मे बड़ी चाची ने मुझे टिफिन ले जाने को कहा

बड़ी चाची को मैं ने बताया कि मैं दोपेहर मे खेत जा रहा हूँ तब टिफिन लेकर जाउन्गा

बड़ी चाची ने इस से ज़्यादा कुछ नही कहा ठीक है

आज तो मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था

क्या होगा दोपेहर मे ,

रानी ने भी पूछा कि क्या हुआ

उसे बताया कि सब ठीक है

रानी को मेरा पॉज़िटिव रिप्लाइ मिलते ही चैन आया वरना वो भी हमारे साथ परेशान होती

बस ये काली दोपेहर कैसे भी करके जल्दी निकाल जाए

और सब कुछ ठीक ही जाए

और कल का दिन नयी शुरुआत लेकर आए चाचा के लिए

चाची माफ़ करेंगी या सज़ा देगी चाचा को ये देखना होगा

पूनम दीदी ज्योति के साथ क्या करती है ये देखना होगा

पूजा बुआ ने क्या सोच कर रखा है वो देखना होगा

सब कुछ जैसा प्लान किया है वैसा होना चाहिए

इस होप के साथ मैं वॉच की तरफ देख रहा था

आज समय भी धीरे चल रहा था

ये इंतज़ार मेरी जान ले लेगा
 
चॅप्टर 943 आ

आज समय भी धीरे चल रहा था जैसे मुझे कुछ कहना चाहते हो

मेरे दिमाग़ मे बड़ी चाची की कही हुई बात घूमने लगी

पर एक तरफ छोटी चाची के आँसू दिख रहे थे

मैं अभी भी कन्फ्यूज़्ड था , क्या मैं सही कर रहा हूँ

इसी के साथ पूनम दीदी अपने समय पर मेरे पास आ गयी

मैं ने उनको बाहर रुकने को कहा और छोटी चाची को बुलाने चला गया

छोटी चाची ने एक आवाज़ मे अपने कमरे का डोर ओपन किया

चाची पूरी तैयारी मे थी,

सी चाची - समय हो गया

अवी- आप तो तैयार है

सी चाची - तुम भी तैयार हो जाओ मैं अमित को सीमा दीदी के पास रखती हूँ

और चाची सीमा चाची के पास गयी ,

बड़ी चाची ने छोटी से पूछा कि कहाँ जा रही है तो छोटी चाची ने डायरेक्ट कहा कि खेत मे जा रही हूँ

ऐसा जवाब सुनते मैं बीच मे आ गया

अवी- मेरे साथ चाचा को टिफिन देने जा रही है

ब चाची - पर तुम्हारी तो तबीयत ठीक नही थी

सी चाची-सर दर्द था अब ठीक हूँ

ब चाची - मैं टिफिन पॅक करती हूँ

और बड़ी चाची के टिफिन पॅक करते ही हम घर से बाहर आ गये

सी चाची - पूनम कहाँ है

अवी- वो बाहर हमारा इंतज़ार कर रही है

हम बाहर आके पूनम दीदी से मिल लिए

सी चाची - पूनम

पूनम दीदी- जी

सी चाची - तुम ठीक हो ना

पूनम दीदी - जी

सी चाची - हिम्मत मत हारना , बस थोड़ा दर्द होगा पर बाद मे सब ठीक होगा

पूनम दीदी- जी

सी चाची - तुम बहुत हिम्मत वाली हो जो इस बात को इतने सालो से छुपा के रखा और आज अपनी माँ का सामना करने जा रही हो ,

पूनम दीदी- पूजा मामी से सिखाया है

सी चाची - चलो ,

अवी- दीदी खुद को अकेला मत समझना , हम आपके साथ है

पूनम दीदी - तुम सबका प्यार ही तो मुझे इतनी हिम्मत दे रहा है की मैं अपनी मा को फेस करूँगी , वरना ये तो चलता रहता

सी चाची - अब ये सब बंद होगा हम बंद करेंगे

और हम एक दूसरे की हिम्मत बढ़ाते हुए खेत की तरफ जाने लगे

हमारे कदम बड़ी मुश्किल से आगे जा रहे थे पर आज आगे नही बड़े तो हम पीछे पड़ जाएँगे

पूनम दीदी चुप चाप चल रही थी , वो खुद से लड़ते हुए अपनी माँ का सामना करने जा रही थी

चाची का भी वही हाल था

और मैं तो आने वाले कल के बारे मे सोच रहा था

और उधर चाचा पार्टी कर रहे थे

इन सब से अंजान की उनके साथ क्या होगा

चाचा की तरफ छोटी चाची नाम का तूफान आ रहा था

इस तूफान मे चाचा का क्या हाल होगा ये तो मैं भी नही बता सालता

इतना ज़रूर है चाची जो करेंगी सोच समझ कर करेंगी

और मैं उनकी ताक़त बन कर उनके साथ रहूँगा

हम ऐसे अपने दिमाग़ से लड़ते हुए खेत मे आ गये

खेत मे आकर हमारी नज़र घर 3 पे पड़ी तो घर3 के बाहर 3 बाइक थी

लगता है चाचा ने अपने दोस्तो को बुलाया होगा

यहाँ बड़ी पार्टी चल रही है

खेत मे कोई मज़दूर नही था , सबको छुट्टी दी होगी चाचा ने

पूनम दीदी ने बताया था कि ज्योति 2 बजे घर से निकल गयी थी

मतलब पार्टी चालू हो गयी होगी

इस पार्टी मे भंग मिलने को हम आ गये थे

चाची ने बाइक देखते मेरी तरफ सवालिया नज़रो से देखा

अवी- चाचा के दोस्त होंगे , पार्टी चल रही होगी

पार्टी का नाम सुनते ही चाची की आँख लाल हो गयी

चाची ने पास मे पड़ी हुई लकड़ी उठा ली , और अपनी साड़ी को कमर से बाँध लिया

चाची को आज चाचा की चटनी बना देगी

चाची का देख कर पूनम दीदी ने भी लकड़ी उठा दी

दोनो तैयार थी सबकी धुलाई करने को

फिर मैं कहाँ पीछे रहता मैं ने बड़ी लकड़ी उठा ली , जिस का एक वार हड्डी तोड़ देगा

और हम आगे के डोर के पास आ गये

घर3 के अंदर से गाने की और मर्द की चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी

ज्योति की शीष्कारियाँ सुनाई नही दे रही थी

उनको रंगे हाथ पकड़ना है तो उनका सेक्स करते पकड़ना होगा

मैं डोर खटखटाने वाला था कि चाची ने मुझे रोक दिया

सी चाची - क्या कर रहा है डोर तोड़ दो

चाची की बात सही थी , डोर खटखटाने से वो होशियार हो जाएँगे

चाची ने मेरी कसरत करवा कर बॉडी बनाई थी उसके टेस्ट का समय आ गया था

मैं ने चाची का नाम लेकर जोरदार लत मारकर डोर तोड़ दिया

डोर को लात मारते ही डोर कब्ज़े से ढीला होकर खुल गया

डोर की आवाज़ सुनते ही सब हमारी तरफ देखने लगे

और हम अंदर का सीन देख कर शॉक्ड हो गये

हम ने जैसा सोचा था उस से ज़्यादा पा कर हॅंग हो गये

ज्योति ऐसा भी कर सकती है ये सोचा नही होगा किसी ने

ज्योति ने तो रंडी को भी पीछे छोड़ दिया

रंडी एक बार एक के साथ करती है पर यहाँ तो इतने लोग थे कि क्या बताऊ

गिनती कर नही सकता इतने थे

ज्योति सिर्फ़ चाचा के साथ होती तो अलग बात होती पर यहाँ तो इतने लोगो के साथ है

इतने लोगो के बीच मे अकेली ज्योति चुदवा रही थी

एक लंड चूत मे एक गंद मे

एक मूह और दो हाथो मे दो लंड ,

और 2 लंड वेटिंग पर थे

ये सब क्या है

कमरे मे जो बेड था उसे कमरे के बीच मे रखा था

बेड पर एक आदमी लेटा हुआ था उसके उपर ज्योति थी

सरपंच ज्योति के उपर था गंद मार रहा था ,

सरपंच का जीजा ज्योति से अपना लंड चूस्वा रहा था

2 फ्रूट मर्चेंट के लंड ज्योति के हाथ मे थे

बावरची और गाँव का पाटिल अपने लंड खुद हिला कर अपनी बारी का इंतज़ार करने लगे

इस मे चाचा कहाँ है

जो सीन हम देख रहे थे वो हमारे अंदर गुस्सा पैदा करने को काफ़ी था

ये सीन देख कर तो कोई भी औरत शर्मा जाए पर छोटी चाची और पूनम दीदी यहाँ इनकी पिटाई करने आई थी

सब हमे इस तरह कमरे ने देख कर शोक्ड हो गये

सब के लंड मुरझा गये थे , उनका थूक अपने हलक मे अटक गया था

पूनम दीदी ने इस हालत मे अपनी माँ को देखेगी कभी सोचा नही था

एक तो ठीक है 2 ठीक है पर इतने सारे ,

ज्योति तो रंडी की महारानी निकली

चाची की आँख चाचा को ढूँढ रही थी

जो आदमी बेड पे लेटा था वो अपनी मस्ती मे खोया था , और चुदाई कर रहा था

उसे गाने की आवाज़ के सामने और सेक्स के नशे मे हमारे आने की खबर नही होगी

ज्योति का चेहरा तो नीला काला पीला पड़ गया था

सारे रंग ज्योति के चेहरे पे दिख रहे थे

अपने बेटी को सामने देख कर उनके चेहरे पे सारे एक्शप्रेशन दिख रहे थे

ज्योति को तो साँप ने काट लिया हो ऐसी हालत हो गयी थी

सबको जोश हमे देख कर ठंडा पड़ गया

कुछ को लगा होगा कि हमारे साथ गाँव वाले भी होंगे

ये सोच कर सबकी फट गयी , हमारे हाथ मे डंडा देख कर अपनी गंद बचा ने का सोच रहे थे

हम सब स्टॅच्यू की तरह खड़े थे

कोई हरकत करने का सोच भी नही सकते

चाची की आँख चाचा को ढूँढ रही थी

चाचा को वहाँ ना देख कर खुश हुई होगी

पर बेड पे लेटा हुआ आदमी सबको रुका हुआ देख कर बोल पड़ा

चाचा- तुम सब रुक क्यूँ गये , आज ये हमारी है

चाची ने एक झटके मे आवाज़ पहचान ली

ये चाचा थे

चाची दुआ कर रही थी कि इनमे चाचा ना हो

पर चाचा की आवाज़ सुनते ही चाची का दिल टूट गया

चाची आवाज़ सुनते ही गुस्से की आग मे उबलने लगी

चाचा की आवाज़ सुनते ही सब होश मे आ गये सिवाय ज्योति के

और सब ज्योति से दूर हो गये

सबके दूर होते ही बेड पर सिर्फ़ चाचा और ज्योति रह गये

और चाचा की नज़र हम पर पड़ी

चाची को देखते ही चाचा का सर बेड पर गिर गया जो क्या हुआ वो देखने को उठा था

ज्योति अभी भी सदमे थी और वही सदमा चाचा को लगा

चाचा को देखते ही चाची ने लकड़ी उपर उठा ली और सब पे टूट पड़ी

चाची के जो सामने आ रहा था उसको लकड़ी से मारने लगी

चाचा के दोस्त अपनी इज़्ज़त बचाएँ या खुद की बचाएँ उस मे फसे हुए थे

उनको.लग रहा था कि बाहर और लोग होंगे जिस से वो खुद को बचा रहे थे

चाची को देखते ही पूनम दीदी भी सब पे टूट पड़ी

और जो सामने आता गया उसको मारने लगी अपना गुस्सा उनपे उतारने लगी

जिसने भी लकड़ी पकड़नी चाही उसके लंड पे एक जोरदार लात पड़ती

टेबल पे जो पैसे थे वो इस हलचल से हवा मे उड़ने लगे

मैं डोर के पास खड़ा था

किसी के एक पैर पे पॅंट थी उसके दूसरे पैर पे लकड़ी का वॉर पड़ता

वॉर ज़ोन बन गया था कमरा

ज्योति और चाचा अपनी बर्बादी को अपनी आँख के सामने देखते रह गये

चाचा को पता था कि उनका क्या हाल होगा

चाची उनको छोड़ेगी नही , चाचा की गर्दन चाची के हाथ मे थी

जिसको जो कपड़ा मिला वो उठा कर घर3 से भागना चाहता था

पर डोर के पास मैं खड़ा था एक बड़ा डंडा लेकर

मेरे लास आने से सब डर रहे थे

सब से पहले सरपंच आए तो

मैं ने उसकी गंद पे ऐसा वॉर किया कि वो बाहर जाके ज़मीन पर गिर गया और उसके मूह मे मिट्टी चली गयी और गंद एक एस्कंड मे लाल हो गया

एक एक करके सब बाहर जाने लगे

सबकी गंद को लाल कर दी मैं ने अपने एक वॉर से

जो बाहर जाता वो अपनी गंद पकड़ लेता

बाइक को वही छोड़ कर आम के बगीचे मे गायब होने लगे

महीने तक वो बैठ नही पाएँगे ऐसा वॉर किया था मैं ने

बावरची की चर्बी से उस पे मार का वॉर कम हुआ ऑर वो भी काले से हरा हो गया

सब अपनी अपनी इज़्ज़त बचा कर भाग गये

पाटिल सरपंच तो गाँव नही जा पाएँगे ऐसे मे वो भी बगीचे मे अपने इज़्ज़त बचाने के लिए छुप गये

सब के जाते ही कमरे मे हम पाच रह गये

चाचा अभी तक होश मे नही आए वो ऐसे ही लेटे रहे

ज्योति अपनी बेटी को देख रही थी

पूनम दीदी का गुस्सा देख कर ज्योति की आज सही मायने मे गंद फट के हाथ मे आई होगी

सबको भगाने से अच्छा हुआ कि हमारी फॅमिली ड्रामा हमारे तक सिमट रहता

सब के जाते ही चाची ने अपने हाथ की लकड़ी फैंक दी

और अपने सर पे हाथ रख कर रोते हुए नीचे बैठ गयी

पूनम दीदी भी दीवार के सहारे खड़े होकेर अपनी माँ की इज़्ज़त को ऐसे लूटते हुए देखने लगी

मैं ने रेडियो बंद किया

और कमरे मे ऐसा सन्नाटा हुआ कि कोई मर गया हो ऐसा लग रहा था

कमरे मे सन्नाटा होते ही ज्योति होश मे आ गयी

ज्योति चाचा के उपर से उठ गयी

और अपने कपड़े उठाने लगी

चाचा तो वैसे ही बेड पे लेटे रहे

उनका लंड तो डर की वजह से लुल्ली बन गया

चाची रो रही थी

पूनम दीदी की आँखो से आँसू निकल रहे थे

मैं चाची के नेक्स्ट स्टेप का इंतज़ार करने लगा

ज्योति का तो सब लूट गया

अब वो क्या कहेगी अपनी बेटी को

समय रुक सा गया था

सब कुछ ख़तम हो गया

चाचा को अपनी आँख के सामने अंधेरा दिख रहा था

ज्योति कुछ ना कुछ दिमाग़ लगा लेगी

ज्योति अपना दिमाग़ ईस्तमाल करके पूनम दीदी को बहला लेगी

पर चाचा चाची को क्या कहेंगे

सीमा चाची होती तो चाचा संभाल लेते

पर यहाँ तो छोटी चाची है ,

छोटी चाची क्या कर सकती है ये चाचा को पता है और देख भी लिया है

चाची को कितना गुस्सा आया होगा वो चाचा देख चुके थे

अब तो उपर वाला ही चाचा को बचा सकता है
 
चॅप्टर 943 बी

चाचा को चाची ने उस हालत मे देख लिया जिस मे देखने का सोच नही सकती

चाचा का ये रूप भी चाची कभी देखेंगी या चाची ने सोचा नही था

चाचा के लिए चाची ने क्या क्या नही किया और चाचा ने उसके बदले मे चाची को सिर्फ़ दर्द दिया

चाची को बस थोड़ा प्यार ही तो चाहिए था चाचा वो भी नही दे पाए

चाची ने अपने सपने तोड़ कर चाचा से शादी की , उनको लगा वो चाचा के साथ नये सपने देखेंगी पर सपने देखने से पहले टूट गये

चाचा ने चाची को मार डाला आज , चाची के लिए मर गये चाचा

उनके रिश्ते की डोर टूट जाएगी

चाची रो रही थी और चाचा उपर देखते रहे थे ,उनकी आँख से आँसू निकल रहे थे

चाचा को अपनी ग़लती पे रोना आ रहा था

अब चाची क्या कहेंगी और अब चाचा चाची को क्या बताएँगे इस पे सब डिपंड था

उधर पूनम दीदी का हाल तो बहुत बुरा था

पून्म दीदी ने सोचा कि ज्योति सिर्फ़ मेरे चाचा के साथ होगी पर यहाँ तो इतने सारे मर्दो के साथ थी

पूनम दीदी को पता था कि ग्रूप चुदाई की है ज्योति ने

पर खुद अपने आँख से देखना कोई बर्दास्त नही कर पाता

जैसे कल चाची को मैं ने चाचा का वीडियो दिखाया था फिर भी आज अपनी आँख के सामने चाचा को किसी और के साथ देख कर खुद को रोक नही पाई और रोने लगी

पूनम दीदी को ये झटका ज़ोर सेलगा

ज्योति कितनी बड़ी रंडी है ये आज उनको पता चल गया

ज्योति ने अपनी सारे हद पार कर ली , रंडी भी हज़ार बार सोचती है ग्रूप चुदाई के लिए पर ज्योति तो कल ग्रूप चुदाई सुनकर खुश हो गयी थी

चाची और पूनम दीदी का बहुत बुरा हाल था

दूसरी तरफ ज्योति ने अपने कपड़े पहन लिए

पर चाचा उसी हालत मे वैसे ही लेटे हुए थे , उनको तो यकीन नही हो रहा था कि ये क्या हो गया

इतने दिन से चोरी की पर आज पकड़े जाने पे डर तो लगता है

लेकिन चाचा की हालत कुछ और बता रही थी

चाचा की आँख से आँसू नही खून निकल रहा है ऐसा लग रहा था

चाचा ज़िंदा लाश की तरह बेड पे लेटे हुए थे

ज्योति ने तो अपने कपड़े पहन लिए जैसे उसको ज़्यादा फरक नही पड़ रहा हो और इसका सामने करने को तैयार हो

पर चाचा को देख कर लग रहा था कि उनको खुद पे गुस्सा आ रहा था , कि उन्होने ने ऐसा क्यूँ किया

अभी से उनके आँख से पश्चाताप के आँसू निकल रहे थे

चाचा को मैं कभी समझ ही.नही पाया

आज भी उनकी हालत देख कर चाचा को समझ नही पा रहा था

चाचा मेरे लिए एक मिस्त्री थे , जिसे मैं सॉल्व नही कर पा रहा था

उस्दिन जिस तरह मुझे अपने बचपन की बातें बताई वो चाचा अलग थे

उसके बाद अचानक ज्योति के साथ देखा वो चाचा अलग थे

फंक्षन के दिन जिस चाचा को देखा वो चाचा अलग थे

कल चुदाई करते हुए जिसको देखा वो कोई और चाचा लग रहे थे

और आज , अब चाचा की हालत देख कर एक नये चाचा को देख रहा था

चाचा गिरगिट है या मैं उनको समझ नही पा रहा हूँ

चाचा को देख कर मुझे एक पल के लिए उनको माफ़ करने का दिल कर रहा था

पर छोटी चाची की तरफ देखते हुए चाचा पे गुस्सा आ रहा था

ज्योति की हालत और चाचा की हालत मे ज़मीन आसमान का फरक था

ज्योति नॉर्मल थी जैसे उनको पता हो कि ये सब एक दिन होगा

पर चाचा की हालत कुछ और थी , वो इस के बारे मे सोच भी नही सकते थे , उनकी आँख से पश्चाताप के आँसू निकल रहे थे

मैं तो बस देखता रह गया कि ये हो क्या रहा है

कोई कुछ नही बोल रहा था

पूनम दीदी अपने प्लान के मुताबिक कुछ नही कर रही थी और चाची अपना प्लान खुद बनाती है

पूनम दीदी एक लड़की है उसका नाज़ुक दिल ये सब बर्दास्त करने के लिए कमज़ोर था

इस बीच ज्योति ने अपने कपड़े पहन लिए

और ज्योति पूनम दीदी के पास आ गयी

ज्योति को अपने बेटी की हालत देख कर थोड़ा दर्द हुआ होगा पर उनके एक्शप्रेशन नॉर्मल जैसे थे

ज्योति पूनम दीदी के पास आ गयी और पूनम दीदी को आवाज़ दी

ज्योई बुआ- पूनम

पूनम दीदी ने कुछ नही कहा

पूनम दीदी के रेस्पॉन्स ना मिलते देख ज्योति ने अपना हाथ आगे बदाया

ज्योति पूनम दीदी के हाथ को पकड़ कर होश मे लाई

होश मे आते ही पूनम ने अपनी माँ का हाथ झटक दिया

पूनम दीदी - हाथ मत लगाना मुझे

ज्योति बुआ -पूनम मेरी बात तो सुनो

पूनम दीदी- अब क्या सुनना बाकी रह गया

ज्योति बुआ -तुम ग़लत समझ रही हो

पूनम दीदी- मैं ने अपनी आँखो से देखा है

ज्योति बुआ -जो देखा है वो सही हो ये ज़रूरी नही है

पूनम दीदी- ये झूठ बोल ना बंद करो मुझे तो आपको माँ कहते हुए शरम आ रही है

ज्योति बुआ -तुम इस वक्त कुछ सुनने की हालत मे नही हो

पूनम दीदी-आप अपनी हालत देखो

और ज्योति बुआ ने फिर से पूनम का हाथ पकड़ा तो इस बार पूनम दीदी ज़ोर से हाथ झटक दिया

जिस से ज्योति नीचे गिर गयी

ज्योति समझ गयी कि उसकी कोई चाल काम नही आएगी

ऐसे मे ज्योति ने यहाँ से निकल जाना ठीक समझा

पर पैसे तो सारे हवा मे उड़ रहे थे

पैसे तो गये अब खुद को बचाने का सोच रही है

ज्योति को अच्छा बहाना सोचने के लिए टाइम चाहिए था

ऐसे मे ज्योति ने एक बार पूनम की तरफ़ देखा और नोटो की एक गॅडी अपने साथ लेकर बाहर चली गयी

प्लान ये था कि पूनम दीदी ज्योति को घर लेकर जाएगी पर पूनम दीदी तो होश मे नही है

ज्योति तो चली गयी

जिस तरह ज्योति चली गयी उस से समझ गया कि वो पूनम दीदी को आराम से हॅंडल कर लेगी

ज्योति ने इस दिन के लिए सब सोच रखा होगा

ज्योति तो चली गयी पर पूनम दीदी वही खड़ी थी

मैं पूनम दीदी को होश मे लाया

पूनम दीदी मेरे गले लग कर रोने लगी

मैं किसे शांत करूँ

चाचा पश्चाताप के आँसू निकल रहे थे

चाची चाचा के धोका देने पे रो रही थी

पूनम दीदी तो अपनी माँ के रॅनडिपन को देख कर रो रही थी

मैं पहले पूनम दीदी को शांत करने लगा

उसके ना होने से मैं चाची को संभाल पाउन्गा

पूनम दीदी - अवी , मेरी माँ , जितना सोचा था उस से ज़्यादा पाया

अवी- चुप हो जाओ , सम्भालो खुद को

पूनम दीदी- कैसे संभालू , मेरी माँ रंडी है

अवी -ऐसे रोते नही ,तुम्हें खुद का संभालना होगा

पूनम दीदी- मैं क्या करूँ ,

अवी -तुम सब प्लान खराब कर रही हो , तुम्हें अपनी माँ के साथ जाना था

पूनम दीदी- मेरी माँ , कहाँ गयी वो

अवी -जाकर देखो

पूनम दीदी ने कमरे मे इधर उधर देखा

अपनी माँ को ना देख घर3 से बाहर चली गयी

पूनम दीदी के जाते ही कमरे मे मैं चाची और चाचा थे

चाची को रोता हुआ देख कर मुझे भी रोना आ रहा था

पर मैं भी कमज़ोर पड़ गया तो चाची को कौन संभालेगा

चाचा की हालत बहुत खराब थी उनको संभालू या चाची को

बाहर बारिश भी शुरू हो गयी

जैसे भगवान भी चाची के साथ रो रहा हो

कमरे मे पैसो की बारिश हो रही थी

मैं पहले अपनी चाची के पास गया

चाची अपने सर को छुपा कर रो रही थी

उनके रोने से मुझे दर्द हो रहा था

कल भी चाची बहुत रोई थी और आज फिर रो रही है

चाची अपने सारे आँसू ख़तम.करना चाहती है ताकि फिर कभी दर्द ना हो दिल टूटने का

मैं चाची के पास बैठ कर उनके सर पे हाथ घुमाने लगा

अवी -चाची आप क्यूँ रो रही है

छोटी चाची ने कुछ नही कहा वो बस रोती गयी

अवी -चाची खुद को सज़ा मत दो सज़ा तो चाचा को मिलनी चाहिए

फिर भी चाची ने कुछ नही कहा

पर उनके रोने मे जो दर्द था वो कुछ और बता रहा था

उनके आँसू कह रहे हो मुझे आज रोने दो

अवी मुझे आज रोने दो आज मैं विधवा हुई हूँ

मेरा पति मर गया है

आज मुझे जी भर के रोने दो

मेरे आँसू मेरे माँग को अपने साथ बहा ले जाएगी

ये मन्गल्सुत्र मेरे लिए फासी का फंडा लग रहा है

इसे निकाल दो

मेरे लिए एक सफेद साड़ी ला दो

मेरा पति मर गया है ,

मैं विधवा हो गयी हुन्न

मेरा सब कुछ लूट गया है

अवी तुम्हारी चाची मर गयी है

मैं विधवा हो गयी हूँ ,

मेरे हाथो मे जो चूड़ी है वो हतकड़ी लग रही है इन्हे तोड़ दो

चाची के आँसू की बातें सुनकर मुझे रोना आ रहा था

कितना दर्द था छोटी चाची के आँसू मे

अगर छोटी चाची का ये हाल है तो बड़ी चाची का क्या होता

छोटी चाची के दिल मे चाचा और मैं हूँ

पर बड़ी चाची के दिल मे तो सिर्फ़ चाचा है

बड़ी चाची का दिल ये झटका बर्दास्त नही कर पाता

बड़ी चाची को हार्ट अटॅक आ जाता , और अगर हार्ट अटॅक नही आता तो बड़ी चाची किसी कुएँ मे जंप मार कर स्यूयिसाइड कर लेती

सीमा चाची तो चाचा को जान से मार देती

सीमा चाची का तो सर घूम जाता ये सब देख कर

सीमा चाची जितनी मज़किया है उतनी ही ख़तरनाक है

चाचा की लाश का गला घोंट देती इतना गुस्सा आता सीमा चाची को

पर छोटी चाची सिर्फ़ रो रही थी

क्यूँ कि वो कुछ ऐसा वैसा करके बड़ी चाची और सीमा चाची को दुख नही पहुँचाना चाहती

कुछ ऐसा वैसा करके फॅमिली को नुकसान नही पहुँचाना चाहती

छोटी चाची के उपर बहुत सी ज़िम्मेदारी है ऐसे मे वो रोने के सिवा कुछ नही कर सकती

पर चाचा को सज़ा नही दी तो उनको लाइसेन्स मिल जाएगा

पर चाची बस रोए जा रही थी

उनके पैरो मे दादाजी ने ज़िम्मेदारी की बेड़िया जो डाल दी थी

चाची के रेस्पॉन्स ना देने से मैं चाचा के पास गया

चाचा उसी तरह बेड पे पड़े थे

कुछ मोव्मेंट नही थी चाचा के शरीर ने

उनके पलके झपकाना भूल गये थे

उनकी आँख से आँसू निकल रहे थे जो रुकने का नाम नही ले रहे थे

छत की तरफ देख कर पता नही क्या सोच रहे थे

पर उनके चेहरे के एक्सप्रेशन बता रहे थे कि उनको अपनी ग़लती स्वीकार है और हर सज़ा भुगतने को तैयार है

बस एक बार उनको माफ़ कर दे छोटी चाची

बस एक बार

बस कुछ घंटो के लिए समय पीछे चला जाए

बस एक बार उनको मौका दे ग़लती सुधारने का

उनका बदन सुन्न पड़ हया था

पैसे उड़ कर उनके उपर गिर रहे थे

जैसे ये पैसे उनको दफ़न करना चाहते हो

चाचा की लाश जैसी हालत हो गयी थी

और चाची रोए जा रही थी

और मैं अपनी फॅमिली को टूटते हुए देख कर अंदर ही अंदर रो रहा था
 
चॅप्टर 943सी

चाची अपने आँसू बहा रही थी , उनके आँसू मे दर्द था

चाचा के आँख से आँसू निकल रहे थे , पश्चाताप के आँसू

और मैं दोनो की हालत देख कर अंदर ही अंदर रो रहा था

मैं ने चाचा को.होश मे लाना शुरू किया

चाचा के शरीर को हिलाने लगा

पर चाचा को इस से कोई फरक नही पड़ रहा था

अगर दोनो ऐसे रहेंगे तो कैसे चलेगा किसी को तो बात करनी होगी

चाचा को होश मे लाने के लिए मैं ने उनको थप्पड़ मारा

थप्पड़ पड़ते ही बड़े बड़े मजनू होश मे आते है तो चाचा क्या चीज़ है

मेरे एक थप्पड़ ने चाचा को होश मे लाया

चाचा होश मे आते ही उठ कर बैठ गये

मुझे अपना सामने देख कर चाचा को सारा सीन याद आया

उनको तो लग रहा होगा कि वो सपना देख रहे थे

पर ऐसा नही था ,

मुझे देखते ही अपनी हालत देखते ही समझ गये कि वो सब सच था

सब कुछ याद आते ही उनकी आँख से आँसू निकलने लगे

वो इधर उधर देखने लगे

कमरे मे पैसो की बारिश चालू थी

ऐसे मे चाचा छोटी चाची को ढूँढ रहे थे

चाची को रोता हुआ देखते ही चाचा उठ कर चाची.के पास गये और चाची के पैरो मे अपना सर रख कर माफी माँगने लगे

चाचा -मीना मुझे माफ़ कर दो

सी चाची ने कुछ नही कहा

चाचा -मीना तुम क्यूँ रो रही हो रोना तो मुझे चाहिए ,

छोटी चाची ने फिर भी कुछ नही कहा पर रोना बंद हो गया

चाचा -मीना गुनाह मैं ने किया है रोना तो मुझे चाहिए तुम खुद को सज़ा मत दो

और इस बार छोटी चाची चाचा के सर को अपने पैरो से हटा कर धक्का दिया

चाचा पीछे गिर गये

पर चाचा वापस चाची के पैरो मे सर रख कर माफी माँगने लगे

चाचा -मीना मैं तुम्हारा गुनहगार हूँ , मैं ने तुम्हें धोका दिया है

सी चाची -धोका नही तुमने मेरा खून किया है

आप से सीधा तुम पर आ गयी चाची

चाचा -मैं ने सबका खून किया है , हमारे रिश्तों का खून किया है , मुझे सज़ा दो मीना , मुझे सज़ा , पर खुद को सज़ा मत दो

सी चाची -तुम ने ये सब करके मुझे सज़ा दे दी है

चाचा -मीना

सी चाची -तुम्हारे लिए हमने क्या क्या नही किया और तुम ने हमारे प्यार के साथ धोका किया , हमारे प्यार का खून किया है तुमने

चाचा -मैं पापी हूँ मीना , मुझे सज़ा दो मार डालो मुझे मीना

सी चाची -तुम पापी , तुम शैतान हो ,

चाचा -तुम जो कहना चाहती है कहो , मुझे मारना चाहती हो मारो पर रो कर खुद को दर्द मत दो

सी चाची -दर्द तो तुमने दिया है , ये चोट आज तुमने दी है इसका जखम कभी नही भरेगा

चाचा -मुझे एक मौका दो मीना , मुझे सज़ा दो मीना

सी चाची -मौका तुम्हें तीन बार मिला है , सुमन दीदी सीमा दीदी , और मेरे रूप मे , फिर भी तुम्हें एक और मौका चाहिए

चाचा -मीना ये सब मैं करना नही चाहता था , सब अचानक हो गया मीना

ये क्या बोल रहे है चाचा

सी चाची -अचानक , झूठ मत बोलो , 1 साल से चल रहा है तुम्हारे नाटक मुझे पता है

चाचा -अवी ने बताया होगा ,

सी चाची -उसे बीच मत लाओ

चाचा -अवी तुम ही बताओ अपनी चाची को

सी चाची -वो क्या बताएगा , मुझे सब पता है ,

चाचा -मीना मेरी बात तो सुनो

सी चाची -अब क्या सुनू , तुमने तो कुछ सुनने के लायाल नही छोड़ा

चाचा -मीना , मैं ये सब छोड़ दूँगा , मुझे एक मौका दो मीना

चाचा को अपनी ग़लती मंज़ूर है ,

सी चाची -कितने मोके दूं , मुझे तो आज पता चला पर तुम कब से ये सब कर रहे हो मुझे सब पता चल गया है

चाचा ने अपना सर नीचे कर लिया

सी चाची -अब क्या हुआ बोलो

चाचा -मीना हालात ऐसे थे कि

सी चाची -हालात को दोष मत दो , मंडे को शांति , ट्यूसडे को आंटी क्या है ये

चाचा -मीना वो पुरानी बात है

सी चाची -वो पुरानी बात है और मंगला उसका क्या

चाचा ने मेरी तरफ देखा और अपना सर नीचे किया

सी चाची -अब बोलो क्या साप सूंघ गया क्या

चाचा -वो भी बंद किया है मैं ने

सी चाची -तुमने बंद किया , कितना झूठ बोलोगे

चाचा -मंगला ने मना किया उसके बाद मैं ने कभी टच भी नही लिया

सी चाची -मंगला ने नही अवी ने रोका है उसे

चाचा ने मुझे कुछ नही कहा

सी चाची -पता नही और कितने चक्कर होंगे

चाचा -मीना मैं वादा करता हूँ सब बंद कर दूँगा

सी चाची -तुमने तो हमारा विश्वास तोड़ा है अब तुमपे विश्वास कैसे करूँ

चाचा -तो मुझे सज़ा दो , तुम जो सज़ा दोगि मैं भुगत लूँगा

सी चाची -तुम्हें क्या लगता है , सज़ा भुगतने से सब ठीक हो जाएगा

चाचा -मुझे पता है कुछ ठीक नही होगा पर मुझे प्रायश्चित करने का मौका तो दो

सी चाची -तुम्हारे मूह से ऐसे वर्ड अच्छे नही लगते

चाचा -मीना ऐसा मत कहो , वरना मैं खुद को कुछ कर लूँगा

सी चाची -यही बाकी रह गया था , खुद को कुछ कर दो फिर सुमन दीदी भी स्यूयिसाइड कर लेगी

चाचा -नही नही उसे कुछ नही होने दूँगा

सी चाची -क्यूँ किया तुमने ऐसा

चाचा इस सवाल का क्या जवाब देते

सी चाची -क्यूँ किया , क्या कमी थी हम मे

चाचा -कमी मुझमे है ,अँधा हूँ मैं जो तुम्हें समझ नही पाया

सी चाची -अब समझ गयी तो देर हो गयी

चाचा -मीना बस एक बार मौका दो कोई शिकायत का मौका नही दूँगा

सी चाची -शिकायत तो हम करते थे पर तुमपे तो कोई असर नही हो रहा था

चाचा -मैं तुम सबको समझ ही नही पाया

सी चाची -तुम्हें तो बेटा चाहिए था ना , तीन बच्चे दिए फिर भी ये सब किया तुमने

चाचा को जो चाहिए था वो सबकुछ दिया चाची ने फिर भी चाचा ने ये सब किया

सी चाची -हमने अपने सपने तोड़ दिए तुम्हारे लिए ,और तुमने क्या लिया , हमारे प्यार को तोड़ दिया

चाचा -मीना मुझसे ग़लती हो गयी

सी चाची -ग़लती तो हमने की जो हमारा सबकुछ तुम्हें मान लिया था

चाचा -ग़लती मेरी है मीना

सी चाची -सुमन दीदी ने कितना कुछ सहा , कितना बरा भला कहा था बेटा ना होने पे

चाचा -वो मैं नही था

ये कैसा जवाब हुआ

सी चाची -सीमा चाची तो कुएँ मे जंप मारने वाली थी

चाचा -और शर्मिंदा मत करो

सी चाची - थोड़ी भी शर्म होती तो ये सब नही करते

चाचा के पास चाची के किसी सवाल का जवाब नही था

सी चाची -बोलो ना , हम वहाँ तुम्हारे बेटों को जनम दे रहे थे और तुम उस चुड़ैल के साथ थे

चाचा -वो मेरी ग़लती थी

सी चाची -ग़लती मत कहो , आदत कहो , ग़लती होती तो दुबारा नही करते

चाचा -मेरा दिमाग़ खराब हो गया था जो उस ज्योति के पीछे पड़ गया था

सी चाची -ज्योति का तुम तो सबके पीछे पड़े थे

चाचा -वो सब मैं छोड़ चुका था

सी चाची -तुम सैतान हो , सैतान अपनी आदत नही छोड़ता

चाचा -मीना मेरा यकीन करो

सी चाची -क्या यकीन करो , इसी लिए हमे खेत मे नही आने देते ना कि हम तुम्हें रंगे हाथ पकड़ ना ले

चाचा -ये सच नही है

सी चाची -यही सच है , वो क्या था मंडे को शांति

चाचा -वो पुरानी बात है

सी चाची -पुरानी पुरानी बोल कर तुम्हारे झूठ सच नही हो जाएगा

चाचा -मैं सच या झूठ के बीच में फसा हूँ मीना

सी चाची -तुम नही हम तुमसे शादी करके फस गये है

चाचा -ऐसा मत कहो तुम तो देवी हो

सी चाची -देवी कहते हो और दूसरो की पूजा करते हो

चाचा -मैं ने सिर्फ़ तुम तीनो की पूजा की है

सी चाची -ये क्या था जो आज कर रहे थे

चाचा -मेरे दिमाग़ मे शैतान चला गया था मीना ,

सी चाची -तुम कितना खुद को जस्टिफाइड करोगे

चाचा -मैं खुद को बेगुनाह नही बोल रहा हूँ , मैं तुम सबका गुनहगार हूँ , मुझे सज़ा दो ये कह रहा हूँ

सी चाची -तुम्हें सज़ा देनी वाली मैं कौन हूँ ,

चाचा -तुम मेरी पत्नी हो

सी चाची -वो हक तुम खो चुके हो

चाचा -ऐसा मत कहो मीना

सी चाची -तुमने खुद उस रिश्ते की ख़तम किया है ,

चाचा -इतनी बड़ी सज़ा मत दो मीना

सी चाची -मैं क्या सज़ा दूँगी तुम्हें , तुमने खुद सारे रिश्ते ख़तम कर दिए, अपने बेटों से भी तुम्हें दूर रखूँगी

चाचा -ऐसा मत कहो मीना

सी चाची - मैं ने तुम्हारे लिए अपने सपने तोड़ दिए , तुम्हें अपना सबकुछ माना और तुमने क्या किया ,हमे धोका दिया , तुम्हारी छाया भी पड़ने नही दूँगी अपने बच्चों पे

चाचा -ऐसा मत कहो , मीना , मुझे इतनी बड़ी सज़ा मत दो

सी चाची -अभी कह रहे थे कि मुझे सज़ा दो , यही था तुम्हारा माफी माँगना

चाचा -दूसरी कोई भी सज़ा दो मैं भुगत लूँगा

सी चाची -तुमने सारे हक खो दिए है ये भी हक खो बैठ हो तुम

चाची ने सच बता दिया कि मैं अमित का पापा हूँ तो चाचा सम्भल नही पाएँगे

शायद स्यूयिसाइड कर लेंगे

अवी- चाची इतनी बड़ी सज़ा मत दो चाचा को

मेरी बात सुनते ही चाचा को थोड़ी राहत मिली

चाचा -अवी भी कह रहा है , मीना अवी की बात सुन लो ,

सी चाची -तू बीच मे मत पड़

अवी- चाचा को अपनी ग़लती का अहसास है , उनको कोई और सज़ा दे दो

सी चाची -कहा ना तू बीच मे मत पड़

चाचा मेरे पैरो मे गिर गये

अवी- चाचा ये आप क्या कर रहे है , छोड़िए मेरे पैर

चाचा- अवी अपनी चाची को बोलना , कि मुझे इतनी बड़ी सज़ा मत दे

अवी- चाची मेरे लिए चाचा को माफ़ करके दूसरी सज़ा दो

सी चाची -तलाक़ देती हूँ

चाचा -मीना ऐसा मत कहो मैं तुम सब के बिना कहा जाउन्गा

सी चाची -ये पहले सोचना चाहिए था

चाचा -मेरी ग़लती की सज़ा मेरे बच्चों को मत दो

सी चाची -तुम्हारे बच्चे , मेरे बच्चे हैं वो ,

चाचा -ऐसा मत कहो

सी चाची -तुम्हें क्या लगता है वो ........

चाची की बात पूरी होने से पहले मैं बीच मे बोल पड़ा , क्यूँ कि सच बताने का ये सही समय नही था

अवी- चाची बच्चों पे चाचा को भी हक है

सी चाची -ये तू कह रहा है

अवी- हाँ ,

चाचा -अवी , ये ले लकड़ी और मुझे मार , मेरी चॅम्डी निकाल ले , पर मीना से बोलना मेरे बच्चों से मुझे दूर ना करे

अवी- आपने चाची के दिल को चोट पहुँचाई है और आप उसके बदले मे शरीर को चोट पहुँचाने की बात करते है

चाचा-मुझे दूसरी कोई भी सज़ा देने को कहो ना

सी चाची -अवी

मैं ने चाची की तरफ देख कर रिक्वेस्ट की

अवी- चाची

सी चाची -मैं इस इंसान से कोई रिश्ता नही रखना चाहती हूँ

चाचा -ऐसा मत कहो मीना , मैं अकेला पड़ जाउन्गा

सी चाची -उस चुड़ैल के पास जाना

चाचा -मेरी ग़लती है मैं देवी को छोड़ कर चुड़ैल के पास गया

और चाचा उठ कर अपने कपड़ों के पास गये

और अपना बेल्ट निकाला

अवी- चाचा जी क्या कर रहे हो

चाचा ने मेरी बात नही सुनी

और अपने आप को मारना शुरू किया

अपने बेल्ट से अपनी चमड़ी निकालनी शुरू की

छोटी चाची देखती रह गयी

चाचा लगतार खुद को पट्टे से मारने लगे

उनका खून निकलने लगा

पर चाची टस की मस नही हुई

चाचा बिना रुके अपनी पीठ को छलनी छलनी करने लगे

चाचा की आँखो मे अपने शरीर का दर्द नही दिख रहा था चाची को चोट पहुँचाने का दर्द दिख रहा था

मैं क्या करूँ कुछ समझ नही आ रहा था

चाची भी कुछ नही कर रही थी

सी चाची -कुछ भी कर लो मैं तुम्हें कभी माफ़ नही करूँगी

चाची को आज हुआ क्या है

मुझे कुछ करना होगा

मैं ने चाचा के हाथ से बेल्ट छीन लिया

चाचा की पीठ से खून निकल रहा था

चाचा को रोकते ही चाचा मेरे उपर गिर गये

फिर भी खुद को संभालते हुए चाची के पास गये और चाची से माफी माँगने लगे
 
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