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मैं और मेरा परिवार

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चॅप्टर 955

कोमल-माँ ,पापा और अवी अभी तक आए क्यूँ नही.

नेहा बुआ-हाँ, टाइम तो हो गया .अब तक तो आ जाना चाहिए थे

कोमल-लीना के घर गये होगे. कविता को भेज कर देखते है.

नेहा बुआ-यही से आवाज़ दे कर देख

कोमल के गेट के पास आ गयी और लीना को आवाज़ देने लगी.

कोमल-लीना लीना

नीता बुआ- लीना, कोमल तुम्हें आवाज़ दे रही है

लीना-हाँ दीदी

कोमल-अवी पापा आ गये

लीना-नही, अभी तक तो नही आए है.

कोमल-माँ ,कविता को भेज कर देखते है. शायद बस लेट हो

नेहा बुआ- ठीक है ,कविता जा कर देख

कविता बस स्टॉप पर चली गयी. और भागते हुए वापस आ गयी.

कोमल-क्या हुआ

कविता-भैया वहाँ पर नही है. और कोई भी नही है.

कोमल-अवी कहा गया होगा.

नेहा बुआ-तूने पूछा नही की बस आई कि नही.

कविता-वहाँ कोई नही था. दुकान भी बंद थी जहाँ बस रुकती है.

कोमल-मैं अवी को फोन लगाती हूँ.

कोमल मुझे फोन लगाने लगी. सिर्फ़ रिंग जा रही थी ,मैं फोन नही उठा रहा था.

नेहा बुआ-क्या हुआ ,कहाँ है वो

कोमल-फोन नही उठा रहा. छोटी मामी को फोन करती हूँ

कोमल ने छोटी चाची को कॉल किया

कोमल-मामी अवी आया है वहाँ पर

सी चाची-नही तो ,वो तुम्हारे पास रुका था.

कोमल-हाँ, पर उसे पापा को लाने बस स्टॉप पर भेजा था .पर वो वहाँ नही है .और कॉल भी नही उठा रहा

सी चाची-मैं ट्राइ करके देखती हूँ. वो यही कहीं होगा.

कोमल-अवी से बात होते ही बता दीजिएगा.

कोमल-अवी घर पे भी नही है.

नेहा बुआ-कहाँ गया होगा. एक काम ठीक से नही करता.

छोटी चाची मुझे कॉल लगाने लगी. एग्ज़ॅम की वजह से मोबाइल साइलेंट पे रखा था जिस से मैं फोन नही उठा रहा था

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अवी-ये सपना है, छोटी चाची सब ठीक कर देंगी, छोटी चाची कुछ भी कर सकती है,वो सब ठीक कर देंगी

लीना के पापा-अवी अवी,ये कहाँ चला गया.

वॉर्ड बॉय-आप उसको देखो थोड़ी देर मैं इनको रूम मे रखता हूँ

लीना के पापा मुझे ढूँढने लगे.

मैं हॉस्पिटल के गेट के पास खड़ा था .

अवी-छोटी चाची सब ठीक कर देंगी.वो कुछ भी कर सकती है.

अवी-छोटी चाची , छोटी चाची, कहाँ है ,यही तो थी, हमेशा मेरे साथ रहती है, चाची

मैं चाची को इधर उधर देखने लगा ,आती जाती औरतों मे चाची को ढूँढ ने लगा.

अवी-ये सपना है, मेरा सपना है.मैं चाहू तो चाची को यहाँ ला सकता हूँ. चाची आ जाओ

मैं चाची को बुलाने लगा. चाची को बुलाने के बाद भी चाची ना आने पर मैं फिर से डरने लगा.

अवी-चाची कहाँ हो तुम ,मुझे अकेला छोड़ कर कहाँ चली गयी हो, तुम्हारा बेटा अकेला है, मुझे आपकी ज़रूरत है.

मैं चाची का नाम लेकर रोने लगा .आते जाते लोग मुझे देख कर बाते कर रहे थे.

लड़का-हेलो ,हेलो चाची

एक लड़का फोन पर बात कर रहा था

चाची का नाम सुनते ही मैं ने उस लड़के के हाथ से मोबाइल ले लिया.

अवी-हेलो चाची कहाँ हो तुम ,मैं अवी ,मुझे अकेला छोड़ कर कहाँ चली गयी.

अननोन-कौन अवी ,मैं किसी अवी को नही जानती.

उस लड़के ने मुझ से मोबाइल ले लिया.मैं उससे मोबाइल माँग रहा था पर वो मुझे मोबाइल नही दे रहा था.

अवी-चाची ने मुझे पहचाना नही , चाची ने मुझे पहचाना नही,ये बुरा सपना है ,ये सपना है ,चाची मुझे ऐसा नही कह सकती.ये सपना है

उस लड़के ने मेरी हालत देखी और मुझे अपने रूम मे ले गया.

लीना के पापा मुझे ढूँढने लगे .पर वो लड़का मुझे अपने कमरे ले गया.

वो समझ गया कि मैं उसकी चाची को अपनी चाची समझ रहा हूँ.

मेरी हालत देखते हुए उसने मेरे जेब चेक किए और मेरा मोबाइल ले लिया
 
मोबाइल पर छोटी चाची का कॉल आ रहा था .

अननोन-हेलो

सी चाची-अवी कहाँ हो तुम ,मैं कब से तुम्हें कॉल कर रही हूँ.

अननोन-आप अवी की चाची बोल रही है.

सी चाची-तुम कौन हो

अननोन-मैं हॉस्पिटल से बोल रहा हूँ, मुझे अवी वहीं मिला, उसे शायद कोई सदमा लगा है.

सी चाची-हॉस्पिटल मे ,क्या हुआ अवी को

अननोन-वो तो पता नही, बार बार कह रहा है कि ये सपना है.शायद सदमे मे ,आप जल्दी हॉस्पिटल आ जाइए.

सी चाची-तुम अवी के पास रहना मैं अभी आती हूँ.

अवी हॉस्पिटल मे कैसे गया.कोमल ने कहा था कि वो उसके पापा को लेने गया था.

ये नीता क्यूँ फोन कर रही है

नीता बुआ-मीना

सी चाची-जल्दी बोल ,मुझे अवी के पास जाना है

नीता बुआ-अवी मिल गया ,कहाँ है वो

सी चाची-क्या मतलब मिल गया. नीता क्या हो रहा है

नीता बुआ-वो कोमल के पापा को हार्ट अटॅक आया था. लीना के पापा और अवी कोमल के पापा को वैसे ही हॉस्पिटल मे ले गये थे. पर

सी चाची-नीता क्या हुआ

नीता बुआ-रोते हुए ,कोमल के पापा इस दुनिया मे नही रहे ,उनकी डेत हो गयी. और अवी ये बात मान ने को तय्यार नही था. पता नही वो कहाँ गया.

सी चाची-नेहा को बताया.

नीता बुआ-उसे कैसे बताऊं समझ नही आ रहा.

सी चाची-मैं सुमन दीदी को भेजती हूँ. पूजा दीदी के साथ मिल कर उनको बताने की कोशिस करते है.

नीता बुआ-तू जल्दी आ जा ,मैं ने दीदी को बता दिया है. वो मेरे यहाँ आई है.

सी चाची-आ रही हूँ

छोटी चाची ने फोन रख दिया

सी चाची-दीदी दीदी

ब चाची-क्या है मीना,

सी चाची-दीदी ,कोमल के पापा इस दुनिया मे नही रहे

ब चाची-मीना मुझे ऐसा मज़ाक पसंद नही है.

सी चाची-उनको हार्ट अटॅक आया था. अवी और लीना के पापा हॉस्पिटल ले गये पर उनको बचा नही पाए

बड़ी चाची और सीमा चाची के पैरो तले ज़मीन खिसक गयी.

सीमा चाची रोने लगी

सी चाची-दीदी रोना बंद करो ,हम ऐसा रोएंगे तो नेहा का क्या होगा. कोमल कविता को हमे संभालना होगा.

ब चाची-तू सही कह रही है. हमे नेहा के पास जाना होगा.

सी चाची-सीमा दीदी आप बच्चो के साथ यही रुकिये. रति तू अवी के चाचा को बताने खेत मे जा ,और वापस आकर दीदी के साथ रुकना. विद्या तू मेरे साथ चल

छोटी चाची विद्या और बड़ी चाची के साथ नीता बुआ के घर जाने लगे.

बड़ी चाची की आँख मे पानी आ रहा था.

सी चाची-दीदी ,आप रोएंगी तो हमारा क्या होगा. हम किस की तरफ देखेंगे

ब चाची-तुम इतनी पत्थर दिल कैसे हो सकती हो

सी चाची-दीदी मुझे भी रोना आ रहा है . पर हम रोएंगे तो कविता कोमल को कौन सहारा देगा.वहाँ अवी अकेला हॉस्पिटल है वो कैसा है ,उसको कैसा लग रहा होगा. हमे हिम्मत से काम लेना होगा.

ब चाची-तू सही कह रही है.पर मैं रोक नही पाती

सी चाची-कुछ देर के लिए ,नेहा को बताने तक रुक जाइए .

ब चाची-कोशिस करती हूँ.

सी चाची-विद्या तुझे स्कूटी चलानी आती है .

विद्या-हाँ,

सी चाची-तो सुन,कोमल से स्कूटी लेकर आ . और बस स्टॉप पर मेरा इंतज़ार करना. और ध्यान रखना कोमल को कुछ पता ना चले.

विद्या-जी ,अभी जाती हूँ

विद्या जल्दी जल्दी कोमल के घर जाने लगी.

ब चाची-तुम कहाँ जा रही है.

सी चाची-मुझे हॉस्पिटल जाना है, अवी वहाँ अकेला है. मुझे उसे देखना है.

ब चाची-मैं भी चलूंगी.वो ठीक तो है ना ,

सी चाची-आपको यही रुकना होगा ,मैं अवी को संभाल लूँगी(आप अवी को उस हालत मे देख नही पाएँगी. पता नही कैसा होगा अवी, कहीं फिर सदमे मे ना चला जाए )

ब चाची-ठीक है. पर यहाँ नेहा को कौन बताएगा. तुम अच्छे से संभालती हो

सी चाची- मुझे कुछ सोचने दीजिए

और छोटी चाची ने ठकुराइन को कॉल किया

सी चाची-हेलो ,ठकुराइन

ठकुराइन-हेलो मीना

सी चाची-मुझे कार चाहिए थी. हॉस्पिटल जाना है. बहुत ज़रूरी है. आपको अभी नही बता सकती.

ठकुराइन-मैं भेजती हूँ

सी चाची-जल्दी चाहिए थी. नीता के घर भेज देना.2 कार भेजना

ठकुराइन-भेज दूँगी. कुछ सीरीयस तो नही है

सी चाची-नेहा के पति को अटॅक आया है

ठकुराइन-अटॅक .अभी भेजती हूँ

चाची ने हॉस्पिटल जाने का इंतज़ाम कर दिया.

सी चाची-आप क्या कह रही थी

ब चाची-नेहा को कौन बताएगा.

सी चाची-पूजा दीदी बताएँगी. चलिए जल्दी.
 
चॅप्टर 956

बड़ी चाची छोटी चाची के साथ नीता बुआ के घर पहुँच गयी.

नेहा बुआ को ना दिखे इस तरह सब नीता बुआ के घर चली गयी.

छोटी चाची को देखते नीता बुआ भागते हुए आकर गले लग गयी. और रोने लगी.

सी चाची-नीता ऐसे रोने से कैसे काम चलेगा.

नीता बुआ-नेहा के साथ ...

सी चाची-होनी को कौन टाल सकता है.जो होता है उसका हमे सामना करना चाहिए .ना कि रोते रहना चाहिए.

पूजा बुआ-मीना सही कह रही है. हमे नेहा को संभालना होगा

सी चाची-लीना कहाँ है.

पूजा बुआ-उसे मेरे घर भेजा है. राज के साथ रहने को कहा है.

सी चाची-अच्छा किया .लीना और राज को सीमा दीदी के पास भेज दो ,वहाँ अच्छे से रहेंगे.

राज के पापा -मैं लेकर जाता हूँ .

राज के पापा राज और लीना को सीमा चाची के पास ले जाने लगे

सी चाची-पूजा दीदी ,नेहा को आप को संभालना होगा.

पूजा बुआ-मैं ,मैं नही कर पाउन्गि.

सी चाची-आप बड़ी है. ये काम आपको करना होगा. बस झूठ बोल कर नेहा को हॉस्पिटल लाना होगा

नीता बुआ-झूठ क्यूँ

सी चाची-उनको कहना कि बस का आक्सिडेंट हुआ है. थोड़ी चोट लगी है. हॉस्पिटल मे अड्मिट किया है

पूजा बुआ-इस से क्या होगा.

सी चाची-हॉस्पिटल जाकर मैं संभाल लूँगी. आप को इतना काम करना होगा बाकी मैं हॉस्पिटल मे मिलूंगी

पूजा बुआ-तू कहाँ जा रही है.तू रुक ना ,तेरे बिना मैं कैसे करूँगी

सी चाची-करना होगा.और (क्या बताऊं) हॉस्पिटल मे संभालने जा रही हूँ .ताकि नेहा को बता सकूँ

नीता बुआ-नेहा को तुम्हें संभालना होगा.

सी चाची-मैं हॉस्पिटल मे संभाल लूँगी.हॉस्पिटल जाने के लिए कार बुलाई है

ब चाची-तू अब जा हम यहाँ देख लेंगे.

छोटी चाची विद्या के पास जाने लगी.

लीना कविता को संभाल सकती है पर कविता के रोते ही वो भी रोने लगेगी.. कविता को दूर रख भी नही सकती. वो अपने पापा के बारे में पूछेंगी.

विद्या छोटी चाची का इंतज़ार कर रही थी.

सी चाची-चलो विद्या. फुल स्पीड मे चला ,कहीं पे रुकना मत ,

विद्या-जी ,हवा मे उड़ा लूँगी.

विद्या और छोटी चाची के साथ हॉस्पिटल जाने लगी.विद्या स्कूटी(अक्तिवा) के वाइब्रेशन होने तक की स्पीड से चलने लगी.

सी चाची-पता नही अवी कैसा होगा ,उस पे क्या बीत रही होगी.

विद्या-अवी हिम्मतवाला है

सी चाची-तू अवी के बारे में कुछ नही जानती ,

विद्या-अवी ठीक तो होगा ना

सी चाची-हाँ, रानी को कॉल करती हूँ ,तू चलाते रह

छोटी चाची ने रानी को कॉल किया

सी चाची-हेलो रानी

रानी-हाँ चाची

सी चाची-तू कहाँ है

रानी-घर पे

सी चाची-एक काम कर इसी वक्त गाँव आ जा

रानी-क्या हुआ, सब ठीक है ना

सी चाची-एक भी सवाल मत पूछ ,जो कह रही हूँ वो सुन

रानी-जी

सी चाची-तू गाँव आ, और सीधा हमारे घर आना ,वहाँ राज और लीना मिलेंगे उनको अपने साथ अपने घर ले जा ,और आज वही रखना

रानी-जी

सी चाची-और सुन ,कोई भी मिले कुछ भी कहे कुछ मत सुन ना .बस राज और लीना को कैसे भी करके अपने साथ ले जाना ,और मेरे फोन का इंतज़ार करना.

रानी-जी.

सी चाची-क्या जी जी लगा रखा है. निकल जल्दी ,और एक भी ग़लती की तो मुझसे बुरा कोई नही होगा.

रानी-नही होगी.

सी चाची-मेरे गुस्से से समझ जाना कि काम कितना ज़रूरी है. और तुझ से अच्छा कोई नही करेंगा इसी लिए तुझे कह रही हूँ

रानी-समझ गयी. आप बेफिकर रहिए ,काम हो जाएगा .

रानी के घर राज और लीना रहेंगी तो वो उनके लिए अच्छा होगा.

राज को तो कुछ दिन इन सब से दूर रखना होगा.

लीना को कविता के लिए कल भूलना होगा. लीना के बिना कविता अधूरी है.

छोटी चाची हॉस्पिटल आने का इंतज़ार करने लगी.

छोटी चाची की आँखो मे पानी आ गया. छोटी चाची धीरे धीरे रोने लगी.

विद्या-आप रो रही है

सी चाची-क्यूँ मैं रो नही सकती

विद्या-अभी तो आप सबको ना रोने के बारे में बता रही थी

सी चाची-अगर उस वक्त मैं रोती तो सब को कौन संभालता ,तब किसी ना किसी को समझदारी से काम लेना था. मुझे इसकी आदत है .

विद्या-इस लिए अवी आपको इतना मानता है

सी चाची- अवी, तू जल्दी चल और कविता के साथ तू रहना ठीक है

विद्या-जी, आप जैसा कोई नही होगा.

छोटी चाची और विद्या हॉस्पिटल मे पहुँच गयी.
 
छोटी चाची को हॉस्पिटल के गाते के सामने लीना के पापा मिल गये.

सी चाची-भाई साब ,उनको कहाँ रखा है

लीना के पापा-उनको रूम मे रखा है. पर अवी कहाँ चला गया कुछ पता नही लग रहा है

सी चाची-मुझे पता है. मैं उसके पास जाती हूँ .आप विद्या के साथ यही रुकिये

लीना के पापा-वो सब कब तक आएँगे

सी चाची-जल्दी आएँगे. उनको कुछ पता नही है. विद्या उनके आते ही मुझे कॉल करना

विद्या-जी चाची

फिर छोटी चाची मेरे पास आ गयी.

मैं कमरे के कॉर्नर मे बैठ कर बड़बड़ा रहा था

अवी-ये सपना है, छोटी चाची सब ठीक कर देंगी. छोटी चाची, चाची ने मुझे पहचाना नही ,चाची ने मुझे पहचाना नही

सी चाची-अवी

अवी-चाची ने मुझे पहचाना नही.

चाची को मेरी ऐसी हालत देख कर दर्द हो रहा था .पर वो रोने लगती तो मेरा क्या होता

चाची ने खुद को संभाले रखा और मुझे नॉर्मल करने का सोचने लगा.

सी चाची-क्या हुआ था .तुम्हें पता है

लड़का-ज़्यादा तो नही पता ,ये गेट के पास पागलो जैसे बोल रहा था.ये सपना है ये सपना है

सी चाची-फिर क्या हुआ

लड़का-मैं फोन पर बात कर रहा ताकि इसने छीन लिया और मेरी चाची को अपनी चाची समझ कर बात करने लगा. मेरी चाची के ना पहचानने ये समझ रहा है कि इसकी चाची ने कहा है

सी चाची-शुक्रिया. तुम ने अवी को अपने पास रखा ,

लड़का-मेरी जगह कोई भी होता वो यही करता .आप देखिए मैं चलता हूँ

वो लड़का चला गया

छोटी चाची मेरे पास आकर बैठ गयी.

और मेरे मोबाइल पे कॉल किया. मेरा मोबाइल साइलेंट देख कर चाची ने नॉर्मल किया.

मेरे मोबाइल की रिंग सुनकर मैं ने मोबाइल उठा लिया

अवी-हेलो चाची, आप कहाँ हो ,मैं यहाँ अकेला हूँ ,आप कहाँ हो ,मुझे डर लग रहा है.

सी चाची-मैं तेरे पास ही हूँ ,

अवी-आप झूठ बोल रही, सब झूठ बोल रहे है.आप ने मुझे पहचाना नही.

सी चाची-मेरा बेटा रोता हुआ मैं ने कभी देखा नही. तू रोते हुए बात कर रहा था इस लिए मैं पहचान नही पाई.

अवी-चाची ने मुझे पहचाना नही.

सी चाची-मैं ने पहचान लिया था बस तेरा रोना बंद करने के लिए ऐसा मज़ाक किया

अवी-आप झूठ बोल रही.

सी चाची-नही .

अवी-फिर सब झूठ बोल रहे हैं

सी चाची-क्या झूठ बोला है .बता मुझे ,मैं सब ठीक कर दूँगी

अवी-छोटी चाची सब ठीक कर देंगी.

सी चाची-हाँ ,मैं सब ठीक कर दूँगी. बता मुझे

अवी-छोटी चाची सब ठीक कर देंगी.

सी चाची-बताएगा तो एक किस दूँगी

अवी-वो अंकल कह रहे हैं कि कोमल के पापा , कोमल का क्या होगा ,कोमल के साथ ऐसा क्यूँ हो रहा है.

सी चाची-कुछ भी तो नही हुआ.

अवी-डॉक्टर ने कहा कि

सी चाची-डॉक्टर कहाँ है डॉक्टर

अवी-यहीं तो थे,कहाँ गये

सी चाची-मैं बताऊं

अवी-हाँ ,बताइए डॉक्टर कहाँ गया है.

सी चाची-डॉक्टर चला गया

अवी-कहाँ गया

सी चाची-तेरा सपना है तुझे पता होगा.

अवी-मेरा सपना

सी चाची-ये सपना है, तू सपना देख रहा है

अवी-ये सपना है,

सी चाची-हाँ, मैं तुझे ना पहचानू ये कभी हो सकता है. ये तो सिर्फ़ सपने मे हो सकता है

अवी-ये सपना है. हाँ ये सपना है, मैं यही कह रहा था पर किसी ने मेरी बात नही सुनी.

सी चाची-मैं हूँ ना ,मुझे तुम पे पूरा विश्वास है

अवी-आप सब ठीक कर देंगी.

सी चाची-हाँ ,सब ठीक कर दूँगी. पहले तू सपना देखना बंद कर

अवी-मुझे नही पता सपना देखना कैसे बंद किया जाता है.

सी चाची-अपनी आँख बंद कर

अवी-कर ली.

सी चाची-अपने दिल पे हाथ रख

अवी-रख दिया.

सी चाची-आँख खोल कर किसे देखना चाहता है

अवी-छोटी चाची को

सी चाची-धीरे धीरे आँख खोल,

छोटी चाची मेरे सामने आकर बैठ गयी.

मैं धीरे धीरे आँख खोलने लगा.आँख खोलते ही मुझे छोटी चाची दिखाई दी

छोटी चाची को देखते ही मैं चाची के गले लग गया .और रोने लगा.

अवी-कहाँ थी आप ,मैं कितना डर गया था

सी चाची-मैं तो हमेशा तुम्हारे साथ रहती हूँ ,

अवी-आप मुझे अकेला मत छोड़ा कीजिए

सी चाची-नही छोड़ूँगी, ये बता तुझे डर क्यूँ लग रहा था. मेरा शेर बेटा ऐसे कैसे डर गया

अवी-पता नही.

सी चाची-चल मैं बताती हूँ, पर पहले तुझे एक प्यारा सा किस दूं

अवी-हाँ,

छोटी चाची ने इधर उधर देखा और मुझे किस किया .और मुझे प्यार का अहसास दिलाने लगी.
 


चॅप्टर 957

छोटी चाची मुझे किस करके मुझे नॉर्मल कर रही थी.

चाची को प्यार करने से मैं खुद को होश मे ला रहा था.

चाची ने खुद को कमज़ोर होने नही दिया .चाचा के समय मैं ने चाची को प्यार दे कर उनकी हिम्मत बनाए रखी थी.

आज चाची मुझे वही प्यार का अहसास दिला कर मेरी कमज़ोरी दूर कर रही थी.

चाची के बाहों मे मुझे जो सुख जो आनंद मिलता था वो मुझे कही और मिलना मुश्किल था.

चाची को प्यार करने से माँ की ममता और बीवी का प्यार दोनो मिलता था जो मुझे अपनी जान से ज़्यादा प्यारा था.

चाची ने अपने दिल पे पत्थर रख कर मुझे अपने सपने से बाहर निकाला. ये काम डॉक्टर भी नही कर सकता था. पर चाची मेरी हर एक अंग से परिचित थी उनको पता है मुझे कैसे प्यार करके ठीक किया जा सकता है.

सब कहते है चाची पत्थर दिल है पर मुझे पता है चाची के दिल मे कितना प्यार है.

चाची मुझे देखते ही टूट गयी होगी. मुझे पागलो जैसे देख कर उनको कैसा लगा होगा वो मैं बया नही कर सकता.

बड़ी चाची तो मुझे ऐसे देखते ही पता नही खुद को क्या कर बैठती. सीमा चाची तो बेहोश हो जाती, वो मुझे ऐसे देख नही पाती .इसी लिए छोटी चाची हॉस्पिटल मे पहले आई ताकि बड़ी चाची मुझे ऐसे हालत मे ना देखे .

बड़ी चाची मुझे रोता हुआ देख कर खुद को कंट्रोल रखती क्यूँ की बात ही ऐसी थी. पर मेरा पागल पन देखते ही खुद पागल हो जाती

चाची के लिए मैं सब कुछ हूँ ,मेरे ठीक होते ही चाची की आँख मे पानी आ गया.

किस करते हुए उनके आसू आँखो से निकलते हुए होंठ पर आ गये.

चाची के मीठे होंटो की मिठास मे नमकीन अहसास होते ही मैं ने किस करना बंद किया.

चाची को रोता हुआ देख कर मेरी आँख मे भी पानी आ गया.

अवी-चाची, आप रो क्यूँ रही हैं .

सी चाची-तुझे ,तूने कैसे मान लिया कि मैं तुझे पहचानूँगी नही.

अवी-वो तो सपना था

सी चाची-कुछ भी हो, सपने मे भी तू ऐसा कैसे सोच सकता है.

अवी-पता नही चाची,क्या हो रहा था, मैं तो बस स्टॉप पर था कोमल के पापा को लाने गया था.

सी चाची-दुबारा ऐसा सोचना मत,

अवी-चाची ,कोमल कहाँ है वो मुझपे गुस्सा हो रही होगी ना मैं उसके पापा को लाने की जगह यहाँ घर मे आ गया..

अवी-ये तो मेरा कमरा नही.हम कहाँ है

सी चाची-हॉस्पिटल मे, तुझे कुछ याद नही है.

अवी-मैं कोमल के घर पे था ,कोमल ने मुझे उसके पापा को लाने कहा था, मैं बस स्टॉप पर गया था और

सी चाची-और

अवी-अंकल को ,

पूरी फिल्म मेरी आँख के सामने घूमने लगी. अंकल को हार्ट अटॅक आना, बस से हॉस्पिटल आना, डॉक्टर का कहना की अंकल इस दुनिया मे नही है.

पूरी घटना याद आते ही मेरी आँख मे पानी आ गया .मैं रोने लगा.

छोटी चाची मेरे आसू पौछने लगी. और मेरे गले लग गयी.

अवी-वो सपना नही था.कोमल के पापा

सी चाची-वो हमे छोड़ कर चले गये है.वो इस दुनिया मे नही रहे .

अवी-नही ये ,नही हो सकता ,कोमल को मैं क्या कहूँगा

और मैं फुट फुट कर रोने लगा. छोटी चाची ने मुझे गले लगा लिया. और मुझे अपना दर्द बाहर निकालने दिया

अवी-चाची ये क्या हो गया ,आप कुछ कीजिए ना ,कोमल को मैं क्या कहूँगा

सी चाची-मैं हूँ ना ,तू रोना बंद कर,

अवी-कैसे बंद करू ,कोमल के सामने कैसे जाउन्गा.

सी चाची-तुम्हें जाना होगा.तुम्हें कोमल के लिए रोना बंद करना होगा.

अवी-मुझ से नही होगा.

और मैं लगातार रोने लगा.चाची भी मेरे साथ रोने लगी.

सी चाची-अवईीई

अवी-मैं कोमल को क्या बताउन्गा. कोमल वहाँ मेरा इंतज़ार कर रही होगी.मैं कही चला जाउन्गा ,कोमल के सामने नही जा सकता.

सी चाची-तुम चला जाएगा तो कोमल का क्या होगा. उसके पापा के जाने के बाद तू भी गया तो कोमल मर जाएगी.

अवी-नही कोमल को कुछ नही होने दूँगा

सी चाची-तेरे बिना कोमल जीते जी मर जाएगी.

अवी-नही.कोमल को कुछ नही होगा, मैं उसे कुछ होने नही दूँगा, मुझे जाना होगा. मुझे कोमल के पास जाना होगा. कोमल ये सह नही पाएगा

सी चाची-तू नही जाएगा

अवी-नही, मुझे जाना होगा कोमल के लिए जाना होगा. छोड़िए मुझे

सी चाची-नही, तू खुद रो रहा है कोमल के पास जाकर तू कुछ नही कर पाएगा.

अवी-नही, मुझे जाना होगा ,कोमल मेरा इंतज़ार कर रही होगी ,मुझे जाना होगा ,मुझे छोड़िए,वो खुद को कुछ कर बैठेगी ,मुझे जाना होगा.

सी चाची-तुझे ऐसा देख कर कोमल क्या सोचेंगी, तू मेरे पास रुक

अवी-रोते हुए चाची मुझे जाने दीजिए ..कोमल के पास जाने दीजिए

सी चाची-उसके पास जाकर तू रोएगा ,उस से अच्छा है यही मेरे पास रो

अवी-चाची मुझे जाने दीजिए ,मैं नही रोउंगा ,मुझे जाने दीजिए

सी चाची-तू खुद को नही संभाल पा रहा है तो कोमल को क्या संभालेगा.

अवी-मुझे कुछ नही पता ,मुझे जाने दीजिए ,कोमल मेरे बिना टूट जाएगी.

सी चाची-तुझे ऐसा देख कर और टूट जाएगी.

अवी-नही, वो मेरे साथ खुश रहती है.मुझे जाने दीजिए ,उसे मेरी ज़रूरत होगी,

सी चाची-तुझे खुद मेरी ज़रूरत है. और तू दूसरे की ज़रूरत बन ना चाहता है.

अवी-भगवान के लिए मुझे जाने दीजिए,

और मैं चाची की गिरफ़्त से निकलना चाहता था.

चाची का पल्लू नीचे गिर गया था पर ,पर चाची मुझे छोड़ नही रही थी.

चाची का मोबाइल बज रहा था पर चाची मुझे पकड़ी हुई थी.

नेहा बुआ और बाकी सब हॉस्पिटल मे आ चुके थे पर फिर भी चाची उनकी तरफ नही जा रही थी.

सी चाची-तू कहीं नही जाएगा . तू यहीं रुक

अवी-मुझे जाने दीजिए

सी चाची-गुस्से से ,बिल्कुल चुप ,एक वर्ड मूह से निकाला तो मेरा मरा हुआ मूह देखेगा.

अवी-मैं रोने लगा,

सी चाची-चल मेरे साथ , कोमल के पास जाना है तुझे ,चल मेरे साथ ,खुद को तो संभाल नही पा रहा और कोमल के पास जाना चाहता है.

मैं बिना आवाज़ किए रोने लगा.

सी चाची-ऐसे ही रहना , तुम समझता क्यूँ नही.तू रोएगा तो कोमल का क्या होगा .तुझे उसको हिम्मत देनी होगी.कोमल को तेरी ज़रूरत है, एक रोते हुए अवी की नही.

मैं ने अपने आसू पोछ दिए. फिर भी पानी निकल रहा था.

अवी-चाची, मुझे

सी चाची-चल मेरे साथ पर रोना मत, मेरा शेर बेटा है ना, शेर की आँख मे आसू अच्छे नही लगते

और चाची ने मेरे आँख पर किस किया .और रोने से जो मेरी आँख लाल हो गयी थी उनको ठंडक मिल गयी.

सी चाची-तू रोएगा तो कोमल रोएगी ,तू थोड़ा बर्दास्त कर ,कोमल को तेरा सहारा चाहिए

अवी-मुझे अपने साथ ले चलिए

सी चाची-(अवी , भगवान के लिए रोना मत ,कोमल को तू ही सहारा दे सकता है. तेरे बहुत करीब है कोमल ,)चलो

चाची मुझे लेकर हॉस्पिटल के गेट के पास आ गयी .गेट के पास सिर्फ़ विद्या थी.

सी चाची-सब लोग कहाँ है.

विद्या-वो वो

सी चाची-मैं ने पूछा सब लोग कहाँ है.

विद्या-नेहा बुआ के आते ही मैं आपको कॉल कर रही थी कि वॉर्ड बॉय ने बीच मे आकर डेड बॉडी का नाम पूछा.

सी चाची-कहाँ है सब

विद्या-उस कमरे मे ,जहाँ अंकल को रखा है.

सी चाची-कविता और कोमल

विद्या-कविता को नीता बुआ बाहर ले गयी है. चाची अवी

छोटी चाची ने पीछे मूड कर देखा ,मैं उस कमरे की तरफ भाग रहा था.

छोटी चाची और विद्या भी मेरे पीछे भागते हुए कमरेके पास आ गयी.

मैं कमरे के गेट के पास खड़ा होकर अंदर देखने लगा

नेहा बुआ अंकल के पास बैठ कर रो रही थी.

और कोमल अपने पापा को नींद से जगा रही थी.

 
चॅप्टर 958

नेहा बुआ अंकल के पास बैठ कर रो रही थी.

पूजा बुआ नेहा बुआ को हौंसला दिला रही थी.

कोमल अपने पापा को जगा रही थी. बड़ी चाची ने कोमल को पकड़ कर रखा था.

कोमल-पापा उठिए ना ,मैं ने आपके लिए खाना बनाया है. उठिए ना.

कमरे मे सब रो रहे थे. नेहा बुआ की बुरी हालत हो चुकी थी. उनके बाल बिखर चुके थे, उनके आँख से पानी निकल रहा था ,आँख लाल हो चुकी थी.

पूजा बुआ रोते हुए नेहा बुआ को संभालने की कोशिश कर रही थी.

कोमल-मामी देखो ना पापा उठ नही रहे है, उठिए ना पापा ,

ब चाची-सोने दो उनको, वो अब नही उठेंगे

कोमल-नही , मैं उठाउंगी उनको ,मेरी आवाज़ सुनते ही उठेंगे

रमेश अंकल -कोमल संभाल खुद को

कोमल-पापा उठिए ना, आपकी कोमल आपको बुला रही है. उठिए ना पापा

पूजा बुआ ने नेहा बुआ को गले लगा लिया .और रोने लगी

कोमल-उठिए ना पापा ,खाना ठंडा हो रहा है. मैं ने बनाया है. आपकी कोमल ने

कोमल मान ने को तय्यार नही थी कि उसके पापा अब कभी नही उठेंगे.

कोमल अपने पापा को उठाते हुए रो रही थी.

कोमल-पापा उठिए ना,कितनी देर सोएंगे ,मैं ने आपके लिए वॉच लाई है. उठिए ना पापा,देखा ना माँ रो रही है. बस एक बार अपनी आँख खोलो ना ,

कोमल को इस हालत मे देखते ही छोटी चाची कोमल के पास चली गयी.

सी चाची-कोमल ,वो अब कभी नही उठेंगे.

कोमल-मामी आप कुछ करो ना, अवी कहता है कि आप कुछ भी कर सकती है.पापा को उठने को बोलिए ना.

सी चाची-कोमल, वो थक गये, उनको सोने दो ,

कोमल-मामी ,एक बार आँख खोलने को कहो ना, अवी कहता है आप कुछ भी कर सकती है

कोमल-अवी ,अवी कहाँ है,अवी मेरी बात मानता है. वो आपको कहेगा तो आप उसकी बता ज़रूर मानेंगी

कोमल मेरा नाम लेकर रो रही थी. मैं उसको क्या कहूँगा ,

उसके मुझे देखने से पहले यहाँ से जाना चाहिए

मैं पलटने वाला था कि कोमल मेरा नाम लेकर गेट कीतरफ देखा.

मुझे गेट के पास खड़ा देखते ही वो भागते हुए मेरे पास आ गयी.

कोमल-अवी कहाँ थे तुम ,कब से तुम्हें बुला रही थी

कोमल के मूह से अपना नाम सुनते ही रोने लगा.

कोमल के चेहरे पे हसी लाने के लिए क्या कुछ नही किया मैं ने

लेकिन आज उसके आसू पोछने की हिम्मत नही हो रही थी.

कोमल की आँख मे पहली बस आसू देख रहा था. उसकी आँखो मे आसू देखते ही मैं खुद को कंट्रोल नही कर पाया और मैं रोने लगा.

कोमल मेरा हाथ पकड़ कर छोटी चाची के पास ले गयी

कोमल-अवी मामी से कहो ना पापा को उठाने को ,वो तुम्हारी बात मानती है. कहो ना मामी से की पापा को जगाए

मैं कोमल को क्या कहूँ ,मेरे अल्फ़ाज़ मेरे मूह मे दब गये थे.

एक वर्ड नाइकाल्न को तय्यार नही था.ऐसा लग रहा था कि मेरी ज़ुबान कट गयी है.

आज मेरी ज़ुबान भी मेरा साथ देने को तय्यार नही थी.

ऐसे मे मैं ने कोमल को गले लगा लिया .और रोने लगा.

मेरे गले लगते ही कोमल की भावनाएँ बहने लगी

कोमल का मन जो अब तक मान ने को तय्यार नही था ,वो मेरे रोने से बिना कुछ कहे ,खून के आसू रोने लगा.

मेरे गले लगी कोमल फुट फुट कर रोने लगी.

मैं उसको दिलासा देने लगा.

चाची ने हमे रोने दिया .जब तक हम रोएंगे नही तब तक हमारा दर्द छुपा रहेगा.दिल को दर्द के बोझ से जितनी जल्दी हल्का किया उतना अच्छा होता है.

मैं कोमल का दर्द बाँटने की कोशिस कर रहा था.

कोमल और नेहा बुआ का दुख कम करनेकी सब कोशिस कर रही थी.

कविता वो इन सब से अंज़ान थी. पर उसको पता चलेगा तो ..उस बच्ची का क्या होगा.

मैं तो यही सोच रहा था .और कोमल मेरे गाल लग कर रो रही थी.

अचानक कोमल का रोना बंद हो गया,कोमल का रोना बंद होने से लगा कि उसने मान लिया कि उसके पापा कभी नही उठेंगे.

अवी-कोमल

कोमल ने कोई जवाब नही दिया.कोमल के जवाब ना देने से मुझे घबराहट होने लगी.

मैं ने कोमल को अपने से अलग किया तो कोमल की आँख बंद थी.

अवी-कोमल क्या हुआ ,चाची कोमल आँख नही खोल रही

छोटी चाची ने कोमल को देखा

सी चाची-विद्या डॉक्टर को बुलाओ,कोमल बेहोश हो गयी.

मैं कोमल को उठाने की कोशिश करने लगा.

अवी-चाची देखो ना

सी चाची-कोमल बेहोश हुई है.

विद्या डॉक्टर को लेकर आ गयी. डॉक्टर ने कोमल को चेक किया .और कोमल को आराम करने को कहा.

नेहा बुआ उधर रोती रही ,उनकी आँख सूज गयी थी.

नेहा बुआ पूजा बुआ के गले लग रख लगातार रोती जा रही थी.

शाम भी हो चुकी थी. ऐसे मे बुआ और कोमल को घर ले जाने का समय हो गया था.

छोटी चाची ने दोनो को नींद का इंजेक्षन दे कर घर लेकर जाने का सोचा.

नेहा बुआ ऐसे मे कंट्रोल करना मुश्किल था. वो रात भर रो कर अपनी हालत खराब कर देंगी

और उनकी हालत देख कर कोमल और कविता का क्या होगा. ये सोच कर छोटी चाची अपने काम मे लग गयी.

कविता को कल बताने का फ़ैसला किया गया.

लीना के पापा कविता को लेकर रानी के घर गये .जहाँ पर लीना और राज को रखा गया था.

लीना अपने पापा को देख कर खुश हो गयी .और कविता लीना को देख

रानी और उसकी मम्मी को बता दिया कि कोमल के पापा की डेत हो गयी है.

रानी ये सुनकर थोड़ी देर रोती रही पर छोटी चाची के कहने पे वो कोमल को संभालने के लिए तय्यार हो गयी.

रानी और मैं इस दुख से गुजर चुके थे.मैं खुद को कंट्रोल मे नही रख पा रहा था.जिस से चाची ने मेरी जगह रानी को कहा कि कोमल के साथ रहे.

लीना के पापा कविता लीना और राज के साथ रानी के घर रुक गये. जिस से कविता ने ज़्यादा पूछताताछ नही की .

घर आकर सब शोक मे थे.सब की आँखे सूज गई थी.
 
चॅप्टर 959

नेहा बुआ सफेद साड़ी मे बैठ कर रो रही थी.

कोमल को स्वेता दीदी और रानी ने संभाल कर रखा था.

कविता अपने पापा को देख कर रो रही. सीतल दीदी और पूनम दीदी उसके साथ उसको दिलासा देते हुए रो रही थी.

नीता बुआ भी कविता के पास बैठी थी.

चाचा ,राज के पापा और लीना के पापा ने सब इंतज़ाम किया था.

मैं एक कॉर्नर मे खड़ा होकर रो रहा था. चाची ने मुझ से कोई बात नही की.

कोमल ने फिर से घर मे हंगामा करते हुए रोना सुरू कर दिया.

कोमल-पापा ,

कोमल का देखते हुए कविता ने भी रोना सुरू किया .

कविता रोते हुए मेरे पास आ गयी.

कविता-भैया ,आप कुछ करो, पापा को उठाओ ना

मैं ने कविता को गले लगा लिया.

कोमल-अवी ,

और कोमल भी भागते हुए मेरे गले लग गयी.

कविता और कोमल दोनो मेरे गले लग कर रो रही थी.

कविता-भैया आप पापा को लाने गये थे ना, आप ने कुछ क्यूँ नही किया

कविता के सवाल का मैं क्या जवाब दूं. मुझे समझ नही आ रहा था.

कोमल-अवी तुम ने

कविता-भैया

दोनो मुझे सवाल पूछते हुए रो रही थी.

कोमल-अवी तुम पापा को लेकर क्यूँ नही आए,

कविता-पापा को क्या हुआ था

और एक जोरदार थप्पड़ मेरे गाल पर पड़ा.

कविता और कोमल मेरे गले लगी थी वो दूर हो गयी.

और एक थप्पड़ मेरे गाल पे पड़ा .

थप्पड़ नेहा बुआ ने मारा था.

थप्पड़ की आवाज़ सुनकर पूरे घर मे पिन ड्रॉप साइलेंट हो गया.

नेहा बुआ ने अचानक मुझे थप्पड़ क्यूँ मारा ,इस का जवाब मैं और बाकी सब ढूँढ रहे थे.

कविता और कोमल ,मुझे थप्पड़ मारते ही और ज़ोर से रोने लगी.

नेहा बुआ-इसी ने मारा ,इसी ने मारा ,

नेहा बुआ के वर्ड सुनते ही सब मेरी तरफ अजीब तरीके से देख रहे थे.

नेहा बुआ-तूने मारा ,कविता तेरे पापा को इसी ने मारा होगा.

कविता अपनी माँ की बात सुनकर और रोने लगी.

नीता बुआ भाग कर कविता के पास आ गयी.

कविता-मौसी माँ क्या कह रही है.

नीता बुआ-कुछ नही ,चलो मेरे साथ

नीता बुआ कविता को दूसरे कमरे मे ले गयी.

नेहा बुआ-जैसा बाप वैसा बेटा ,दोनो ने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी है

मैं नेहा बुआ की तरफ देखता रह गया.

नेहा बुआ-तेरे बाप ने कोई कसर नही छोड़ी जो मेरे पति की जान ले ली तूने

पूजा बुआ-नेहा ,खुद को सम्भालो ,इसमे अवी की ग़लती नही है.

नेहा बुआ-तुम्हें पता है फिर भी, अवी ने किया है, मुझे इसे भेजना नही चाहिए था. सोचा था कि अपने बाप की तरह नही होगा.ये तो उस से भी कमीना निकला

पूजा बुआ-नेहा ,सब के सामने तमाशा मत करो

नेहा बुआ-मैं तमाशा कर रही हूँ, इसने मेरा तमाशा बना दिया .

ब चाची-नेहा ,तुझे कुछ पता नही

नेहा बुआ-तुम्हें कुछ पता नही होगा.कोमल इस से दूर रहे ये तेरे पापा की तरह तुझे भी कुछ कर देगा .

कोमल कभी अपनी माँ की तरफ तो कभी मेरी तरफ देखते हुए रो रही थी.

नेहा बुआ-तू ,निकल जा मेरे घर से ,मेरी कोमल से दूर रह

और नेहा बुआ मुझे घर से निकालने लगी.

कोमल-माँ ,अवी ऐसा नही है

नेहा बुआ-तुझे कुछ पता नही है. इसी ने मारा है.

और बड़ी चाची नेहा बुआ को रोक रही थी.

पर नेहा बुआ ने मुझे घर से धक्के मार कर निकाल दिया.

सब मेरी तरफ देख कर बाते कर रहे थे ,मुझे घूर घूर कर देखने लगे.

बड़ी चाची और पूजा बुआ नेहा बुआ को समझा रही थी.कोमल अपनी माँ के अचानक इस तरह मुझपे भड़कने से समझ नही पा रही थी कि आख़िर हो क्या रहा था.

मैं भी कोमल की तरह शॉक्ड था कि नेहा बुआ ऐसा क्यूँ कर रही है.

मेरे पापा को नेहा बुआ इतनी गालियाँ क्यूँ दे रही थी.

मैं पहले सदमे था और नेहा बुआ के इस तरह मुझे मरने से ,मेरे पापा के बारे में बुरा भला कहने से मुझे गुस्सा आ रहा था.

कोमल लगातार रोती जा रही थी. पहले पापा और अब अपनी माँ से मुझे इस तरह धक्के मार कर निकालने पे वो टूट ती जा रही थी.

सभी मुझे घर से निकाल ने पे रो रहे थे.

रानी भी रो रही थी.

छोटी चाची बड़ी चाची के पीछे खड़ी थी. वो भी कुछ नही कह रही थी.

मैं ने एक बार चाची की तरफ देखा ,और रोते हुए वहाँ से जाने लगा.

कोमल- अवी रुक जाओ मुझे अकेला छोड़ कर मत जाओ

मैं ने पीछे मूड कर कोमल की तरफ देखा ,और अपना सर नीचे कर के घर की तरफ जाने लगा.

ब चाची-अवी

सी चाची-मैं देखती हूँ.

छोटी चाची मेरे पीछे पीछे घर आ गयी.

मैं अपने कमरे मे बेड पर लेट कर नेहा बुआ के वर्ड को याद करने लगा.

नेहा बुआ मुझसे इतनी नफ़रत क्यूँ करती है. मैं ने ऐसा क्या किया.

नेहा बुआ ने ऐसा क्यूँ कहा की मैं ने अपने पापा की तरह उनको बर्बाद किया है.

मेरे पापा ऐसा कैसे कर सकते है. मेरे पापा अपनी बहन के साथ ऐसा क्यूँ करेंगे

मुझे तो ऐसा कुछ याद नही है.

मेरी माँ तो हमेशा नेहा बुआ की बाते करती रहती थी.फिर भी नेहा बुआ मुझसे इतनी नफ़रत क्यूँ करती है.

मैं तो उनसे हमेशा प्यार से बात करता हूँ. कोमल के पापा के जाने से मुझे भी दर्द हुआ

मुझे उनका हत्यारा कैसे कह सकती है.

कोमल मेरे बारे में क्या सोचेगी. कविता के दिमाग़ पे इसका क्या असर होगा.

छोटी चाची मुझे अपने कमरे मे देख कर रिलॅक्स हो गयी. उनको लग रहा था कि मैं खुद को कुछ ना कर दूं

छोटी चाची मेरे पास आकर बेड पर लेट गयी.

और मेरी तरह छत की तरफ देखने लगी

सी चाची-तुम्हें नेहा पर गुस्सा आ रहा होगा .आना भी चाहिए तुम्हारे पापा के बारे में इतना बुरा भला जो कहा

चाची की बात सुनकर मैं रोने लगा

सी चाची-नेहा तुमसे बहुत प्यार करती है.बस थोड़ी सी मिसअंडरस्टेंडिंग है.तुम्हारे पापा पे गुसा है जिस का गुस्सा तुम पे निकाल रही है.

मैं ने चाची की तरफ देखा

सी चाची-तुझे एक कहानी सुनाती हूँ ,

अवी-नेहा बुआ मुझपे इतना गुस्सा क्यूँ करती है.आप ये बताइए ,वरना मुझे अकेला छोड़ दो

सी चाची-उसमे कुछ नही ,मेरी कहानी सुनेगा ,

अवी-इतना कुछ हो गया और आप हो कि, मुझे अकेला छोड़ दीजिए

सी चाची-मैं तो तुझे कहानी सुनाए बिना नही जाउन्गी

अवी-आप को कुछ नही लग रहा ,मुझे थप्पड़ मारा ,मुझे निकाल दिया गया है .और आप ऐसे बात कर रही कि कुछ हुआ ही ना हो

सी चाची-वो छोड़ .मेरी कहानी सुन पहले ,

एक गाँव था ,

बड़ा प्यारा गाँव था.

उस गाँव मे एक फॅमिली थी ,

हस्ती खेलती फॅमिली ,

उस फॅमिली के मुखिया का नाम योगेंद्रसिंघ था.
 
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