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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 960

नीता-नेहा उठ ना ,

नेहा-सोने दो ना,

नीता-माँ बुला रही है

नेहा-इतनी सुबह,

नीता-कल भैया आने वाले है

नेहा-भैया ,

नीता-अब कैसे उठ गयी.

नेहा-तू मज़ाक कर रही है तो मेरे हाथ से मार खाएगी

नीता-मुझे मारेगी. जा मैं नही बताती,

नेहा-सॉरी ,अब बता ना ,क्या सच मे भैया आ रहे है

नीता-हाँ, और भाभी भी आ रही ,डेलिवरी के लिए.

नेहा-सच ,पहले क्यूँ नही बताया. भाभी के लिए तय्यारी करनी होगी.

नीता-पहले फ्रेश तो हो जा

नेहा भागते हुए अपनी माँ के कमरे मे गयी.

नेहा-माँ, भैया भाभी आ रहे हैं

माजी-हाँ ,कल आने वाले है. बहू की डेलिवरी यही करेंगे

नीता-भाभी अपने मायके नही जाएगी.

माजी-नही, तुम्हारे पिताजी चाहते है कि डेलिवरी यहीं हो ,

नेहा-फिर तो मुझे बहुत काम करना होगा. मैं अभी से काम मे लगती हूँ.

नीता-भैया भाभी किस कमरे मे रुकेंगे.

माजी-छोटू (चाचा) के कमरे मे .

नेहा-तो छोटू कहाँ रहेगा.

माजी-हम हॉल मे सोएंगे.और छोटू स्टोर रूम मे.

नीता बुआ-मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा

माजी-तुम दोनो एक कमरे मे सोती हो, छोटू के कमरे मे बहू रहेगी, मेरे कमरे मे पूजा और दामाद जी रहेंगे. और हॉल मे मैं तुम्हारे पिताजी और छोटू स्टोर रूम मे सोएगा.

नेहा-पूजा दीदी भी आ रही है ,जीजाजी के साथ कौन कौन आ रहा है

माजी-पूजा ,दामाद जी ,स्वेता और सीतल आ रही है.

नीता- स्वेता सीतल भी आ रही है फिर तो बहुत मज़ा आएगा

नेहा-बस इतने ही लोग आ रहे है

माजी-हाँ, दामाद जी यहाँ काम से आ रहे है. उनको वापस शहर के कंपनी मे काम करने भेजा है.

नीता-जीजाजी का अच्छा है ,शहर2 के कंपनी मे कुछ दिन काम करते है ,फिर यहाँ हमारे गाँव आकर शहर के कंपनी मे काम करते है.

माजी- दोनो कंपनी एक ही है. कभी या काम करते तो कभी वहाँ

नेहा-पिछली बार तो जीजाजी अपने दोस्तो के साथ आए थे,

माजी-तब उनकी शादी कहाँ हुई थी इस लिए वो शहर मे रुके थे .अब तो वो यही रुकेंगे हमारे साथ

नीता-तू क्यूँ इतना पूछ रही है. चल भाभी के लिए कमरा तय्यार करते है.

नेहा-हाँ चल ,पता नही छोटू ने कमरे की क्या हालत बनाके रखी थी.

( अब बड़ी चाची और सीमा चाची रहती है वो कमरा पहले नेहा नीता और पूजा का हुआ करता था. पूजा की शादी के बाद नेहा और नीता का हो गया)

(छोटू मतलब चाचा, घर मे सब से छोटे होने से उनको छोटू कह के बुलाते थे. वो कमरा पहले छोटू और जयसिंघ का था .जयसिंघ की शादी के बाद छोटू को अकेले को वो कमरा मिला . अब उस कमरे मे चाचा और छोटी चाची रहती है.)

(मेरा कमरा पहले दादा दादी का था . )

(स्टोर हाउस ,2 मिनिट मे कमरा तो 2 मिनिट मे स्टोर हाउस बन जाता था,अब उस कमरे मे विद्या रहती है.)

नेहा और नीता छोटू के कमरे मे चली गयी. छोटू अभी तक सो रहा था.

नेहा -देख कैसा सो रहा है.

नीता-2 ही तो काम करता है. एक दोस्तो के साथ घूमना और दूसरा खाना खा कर सोना.पढ़ाई तो करना इसे आता ही नही.

नेहा-कुछ भी बोल ,दोनो काम मन लगा कर करता है

नीता-छोटू उठ , सुबह हो गयी

छोटू-कितनी बार कहा कि मुझे छोटू मत कहो,अब मैं बड़ा हो गहा हूँ

नेहा-तू कितना भी बड़ा हो जाए रहेगा तो हमेशा छोटा ही

नीता-अब उठ जल्दी

छोटू-मुझे और सोना है. सोने दो

नेहा-अब उठ और अपने दोस्तो के साथ घूमने जा

छोटू-मेरे दोस्तो के बारे में कुछ मत बोलना

नीता-कैसे दोस्त बना कर रखे है. सब तुझ से बड़े है.

छोटू-मैं बड़ा हो गया हूँ ,इसी लिए मेरे दोस्त बड़े है

नेहा-इसी लिए कहती हूँ पढ़ाई पर ध्यान दे ,तुझे तेरे जैसी अनपढ़ बीवी मिलेगी.

नीता-भैया को देख ,भाभी कितनी पड़ी लिखी है.कुछ सीख उनसे

नेहा-चल उठ अब

छोटू-मुझे उठा क्यूँ रही हो

नीता-भैया भाभी आ रहे है.

छोटू-मैं क्या करूँ ,मुझे सोने दो

नेहा-बाहर जाके सो जा, हमे कमरा ठीक करना है

छोटू-ये मेरा कमरा है. मैं क्यूँ बाहर जाउ

नीता-क्यूँ कि

नेहा-यहाँ भैया भाभी रहेंगे

छोटू-तो मैं कहाँ रहूँगा

नीता बुआ-स्टोर रूम मे , उसे कमरा बना देंगे

नेहा-चल उठ जल्दी

छोटू-मैं नही जाउन्गा वहाँ पर,

नीता-माँ देखो ,छोटू हमारी बात नही मान रहा

माजी-क्या हुआ

नीता-छोटुयही रहने की ज़िद्द कर रहा है.

माजी-छोटू मेरा प्यारा बेटा , अपनी माँ की बात नही मानेगा.

छोटू-मैं वहाँ नही रहूँगा

माजी-तेरी भाभी आ रही है. वो माँ बन ने वाली है. उसके लिए ये कमरा ठीक रहेगा

छोटू-मुझे स्टोर रूम मे नींद नही आती

माजी-हॉल मे सोएगा

छोटू-हाँ

माजी-तू हॉल मे सोना ,मैं और तेरे पिताजी स्टोर रूम मे सोएंगे.

छोटू-ठीक है.

माजी-फ्रेश हो जा. अपनी बहनों को काम करने दे

छोटू फ्रेश होने चला गया .

नेहा और नीता कमरा ठीक करने मे लग गयी .

भैया भाभी जो आ रहे थे.

साथ मे पूजा दीदी और जीजाजी भी आ रहे थे.

स्वेता और सीतल के साथ खेलने के लिए नेहा और नीता तय्यार थी.

दोनो खुश थी क्यूँ भैया भाभी आ रही थी

भैया उनके लिए गिफ्ट लाएँगे ,लेकिन उनका बेस्ट गुड गिफ्ट था उनकी भाभी , भाभी आते ही जैसे नेहा नीता खुद को भूल ही जाती है ,दिन रात भाभी के साथ रहती है , शालिनी ने जैसा वादा किया वो पूरा कर दिया , हर 3 महीने मे एक बार गाँव ज़रूर आती , शालिनी के आते ही सब के लिए दीवाली हो जाती ,, नेहा नीता को भाभी के आने का इंतज़ार था ,

भाभी माँ बन ने वाली थी. नेहा और नीता बुआ बने वाली थी. ये तो उनके लिए अपनी भाभी की तरफ से गिफ्ट था

साथ ही पूजा दीदी आ रही थी .इस बार दोनो साली तय्यार थी अपने जीजाजी के स्वागत के लिए.

माजी-अवी की दादी

पिताजी(योगेंद्रसिंघ)-अवी के दादाजी

नेहा-नेहा बुआ

नीता-नीता बुआ

पूजा-पूजा बुआ

छोटू-अवी का चाचा

जयसिंघ-अवी के पापा

शालिनी-अवी की माँ

रमेश-पूजा का पति

सुरेश-रमेश का दोस्त

जतिन-रमेश का दोस्त

अजीत- जयसिंघ का दोस्त

कुमार- जयसिंघ का दोस्त

ठाकुरजी.(प्रतापसिंघ )- रणजीतसिंघ के पिता

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फ्लॅशबॅक 961

नेहा नीता शालिनी भाभी के आने की तय्यारी मे लगी हुई थी

ये करेंगी

वो करेंगी

नेहा नीता ने बहुत कुछ सोच रखा था

दोनो इस बार शालिनी भाभी को वापस जाने ही नही देंगी

क्या क्या सोच रही थी नेहा नीता

पर इधर पिताजी को अलग ही परेशानी सता रही थी

शालिनी माँ तो बन रही थी पर उनको डर था कि जयसिंघ अपना वादा पूरा नही करेगा

जयसिंघ को बेटी हुई तो कोई बात नही

अगर बेटा हुआ और जयसिंघ ने ऑपरेशन कर दिया और अपने बेटे को शहर3 लेकर गया तो

पिताजी को इस बात ने परेशान किया हुआ था

पिताजी को शालिनी पे विश्वास था

पर जयसिंघ एक अलग ही सोच का बना हुआ था

जयसिंघ ने पिताजी की पसंद की लड़की से शादी तो कर ली ,

पर दूसरा वादा पूरा करना मुश्किल था जयसिंघ को

पिताजी भी एक बाप है , वो बाप की फीलिंग को जानते है ,

जिस से पिताजी सोच मे डूबे हुए थे

ठाकुरजी-क्या हुआ योगेंद्रसिंघ , क्या सोच रहा है

पिताजी-कुछ नही ,मेरा बेटा आ रहा है.(अवी के दादा जी)

ठाकुरजी-जयसिंघ आ रहा है ,ये तो अच्छी बात है.

पिताजी-हाँ, मेरी बहू माँ बन ने वाली है

ठाकुरजी-तू खुश होने की जगह उदास क्यूँ है.

पिताजी-मुझे पोता चाहिए .जो मेरा नाम आगे चलाएगा

ठाकुरजी-भगवान ने चाहा तो तुझे पोता ही होगा.

पिताजी-बात वो नही है , अगर बेटा हुआ तो

ठाकुरजी-तुझे पोता ही होगा.

पिताजी-काश ऐसा ही हो

ठाकुरजी-तू इतना टेन्षन मत ले ,इस बार नही हुआ तो अगली बार होगा.

पिताजी-इस बार ही होना चाहिए, वो शहर मे कहते है ना कि एक संतान ही रखेंगे

ठाकुरजी-तो क्या हुआ ,

पिताजी-जयसिंघ शहर3 जाके शहर3 वालो जैसा हो गया है. उसने भी यही किया तो,और मुझे जो वादा किया था वो पूरा नही किया तो

ठाकुरजी-तो क्या हुआ , जयसिंघ बेटा नही देगा यो तेरा छोटा बेटा है ना

पिताजी-छोटू ,वो तो बस दोस्तो के साथ घूम कर बिगड़ता जा रहा है. उसको कितना समझाया पर वो है कि मेरी बात ही नही मानता , जब भी कुछ कहूँ यो अपनी माँ के पीछे छुप जाता है , उस से मुझे कोई उमीद नही है.और हमने डिसाइड किया है कि मेरा वारिश जयसिंघ का बेटा होगा ताकि बाद मे झगड़ा ना हो

ठाकुरजी-तू कहे तो तेरे बड़े बेटे जयसिंघ से मैं बात करूँ

पिताजी-नही, वो किसी की बात नही मानता

ठाकुरजी-तू ज़्यादा टेन्षन मत ले,वरना जल्दी बड़ा हो जाएगा .

पिताजी-खुद को देख ,बुढ़ापे मे जवानी चढ़ि है तुझे

ठाकुरजी-मेरी जवानी तो उमर बढ़ने के साथ बढ़ती जा रही है.

पिताजी-कुछ तो शरम कर ,

ठाकुरजी-एक बार बेशरम बन कर देखना चाहिए.

पिताजी-इतना भी नही, तेरी दूसरी बीवी तेरे बेटे रणजीतसिंघ से कितने साल बड़ी होगी. दोनो भाई बहन दिखते है

ठाकुरजी-कुछ भी मत बोल ,वो उसकी माँ, जब से आई है रणजीतसिंघ उसके पास ही रहता है.

पिताजी-और कुवरसिंघ का क्या है, वो हॉस्टिल मे ठीक से तो रह रहा है ना

ठाकुरजी-तूने अच्छा किया जो कुवर को हॉस्टिल भेजने का आइडिया दिया , अब कहीं जाके उसे अकल आएगी , और वो भी एक दिन ठकुराइन को माँ मान लेगा.

पिताजी-वो दिन जल्दी आएगा

ठाकुरजी-तुझे क्या लगता है मैं ने दूसरी शादी क्यूँ की

पिताजी-तुझे पे जवानी का भूत चढ़ा था.

ठाकुरजी-वो भी एक वजह है पर हवेली को ठकुराइन चाहिए , और गाँव को ठकुराइन भी तो चाहिए थी.और मुझे लगा की रंजीत और कुवार को माँ मिलेगी तो उनका ख़याल रखने वाली मिल जाएगी और मैं अपने काम कर पाउन्गा

पिताजी-ये सही कहा गाँव को ठकुराइन की ज़्यादा ज़रूरत थी. वैसे नयी ठकुराइन बहुत खूबसूरत है.

ठाकुरजी-तू फिर सुरू हो गया

पिताजी-वो मेरी भाभी है, पर गाँव मे ठकुराइन की बाते होती है.

ठाकुरजी-सब की ज़ुबान काट दूँगा.

पिताजी- और मेरी

ठाकुरजी- तू तो मेरा भाई है

पिताजी-तेरे लिए अच्छा है ना कि ठकुराइन की खूबसूरती का मज़ा सिर्फ़ तू ले सकता है.

ठाकुरजी-वो तो है पर भूल गया कि मैं तुझे क्या कहा था मेरे बाद तुझे ठकुराइन का ख़याल रखना होगा

पिताजी- याद है , पर कुछ भी कह ठकुराइन की खूबसूरती के क्या कहने

ठाकुरजी-उसकी खूबसूरती को देख कर 2 मिनिट मे फिर से खड़ा हो जाता है.

पिताजी-मेरा तो खड़ा ही रहता है

ठाकुरजी-तू ऐसे नही मानेगा.

पिताजी-भाभी के बारे में मज़ाक भी नही कर सकता

ठाकुरजी-तुझ पे तो जान से ज़्यादा भरोसा करता हूँ

पिताजी-तेरी जान मैं ने बचाई थी. भूल मत ,

पिताजी-तेरे लिए गोली खाई थी. देख हाथ पर अभी भी निशान है

ठाकुरजी-तेरे जैसा दोस्त उस गोली की वजह से मिला है.

पिताजी-वैसे अब कहाँ है तेरा सौतेला भाई,उस दिन के बाद कही दिखा ही नही.

ठाकुरजी-कहाँ होगा. 2 फीट ज़मीन के अंदर है, तुझे बताया था ना

पिताजी-तो वो बात सही थी. कि तूने अपने भाई को मार डाला. मुझे तो लगा तू मज़ाक कर रहा है

ठाकुरजी-उसे मैं नही मारता तो वो मुझे मार देता

पिताजी-चल छोड़ उस बात को ,कल से मैं यहाँ नही आउन्गा.मेरा बेटा और बहू आ रही है

ठाकुरजी-क्या यार ,चल ठीक है, कुछ महीने मैं भी बंद कर दूँगा.

पिताजी-ठकुराइन मुझे दुआ देंगी क़ी उनका पति उनके साथ सोएगा.

ठाकुरजी- तू वापस ठकुराइन पे आ गया . तेरे लिए एक खुश खबरी है

पिताजी-क्या फिर से ठकुराइन माँ बन ने वाली है

ठाकुरजी-नही, पायल के वक्त तो मैं परेशान था कि अगर बेटा हुआ तो फिर से हवेली का ठाकुर बन ने को लड़ाई होंगी ,पर अच्छा हुआ ठकुराइन को बेटी हुई , और उसी वक्त मैं ने ठकुराइन को कहा कि इस बाद हमे कोई संतान नही चाहिए , मैं नही चाहता कि मेरी तरह मेरे बेटे भी झगड़ा करे हवेली का ठाकुर बनने को , और ठकुराइन भी रंजीत और कुवर को अपना सगा बेटा मानती है जिस से उसने मेरी बात को सहमति दी

पिताजी-मतलब तू ठकुराइन को हाथ भी नही लगाता .भाभी जी को मुझे खुश करना होगा.

ठाकुरजी-मेरा कहने का मतलब था कि

पिताजी-पता है मुझे ,मैं मज़ाक कर रहा था. और मैं इसी बात से टेन्षन मे था.

ठाकुरजी-किसी बात से

पिताजी-जैसे तूने पायल के पैदा होने के बाद ठकुराइन को फिर माँ ना बनाने का फ़ैसला किया है .वैसा अगर मेरे बेटे जयसिंघ ने किया तो

ठाकुरजी-मैं ने इस लिए किया कि सौतेला भाई होते ही रंजीत और कुवार मे झगड़े ना हो जाए.

पिताजी- वो पता है तूने ऐसा क्यूँ किया

ठाकुरजी- अगर जयसिंघ को 2 बेटे हुए तो

पिताजी- जो बड़ा बेटा होगा वो मेरा वारिश बनेगा ,

ठाकुरजी- तू जैसा चाहता है वैसा ही होगा

पिताजी- काश ऐसा ही हो , अपने वक्त तो शादी होते पहले साल एक बच्चा हो जाता था पर आज कल फॅमिली प्लॅनिंग करते है

ठाकुरजी- ज़्यादा टेन्षन मत ले शालिनी है ना , वो सब ठीक कर देगी

पिताजी- शालिनी बहू का ही सहारा है , उस से ही मुझे उम्मीद है

ठाकुरजी - सब ठीक हो जाएगा , शालिनी सब ठीक कर देगी , तूने शालिनी को कितनी मेहनत से ढूँढ निकाला था जयसिंघ के लिए , शालिनी सब ठीक कर देगी

पिताजी- सब तेरी मदद की वजह से हुआ है

ठाकुरजी-मैं कुछ नही किया , , तूने शालिनी को पसंद किया था और जिस तरह तूने जयसिंघ और शालिनी को मिलाया वो मुझे आज भी याद है

पिताजी- मैं ने अपनी पसंद को अपने बेटे की पसंद बना दिया

और पिताजी 3 साल पहले की बात को याद करने लगे

जयसिंघ और शालिनी की शादी को याद करने लगे
 
फ्लॅशबॅक 962

पिताजी और ठाकुरजी शालिनी की शादी कैसे हुई वो याद कर रहे थे

ठाकुरजी- तूने अपने लिए अच्छी बहू ढूँढ निकाली थी

पिताजी-चल छोड़ ,तू खूसखबरी की बात कर रहा था

ठाकुरजी-आज एक नये शिकार को बुलाया है.

पिताजी-मैं ने कहा ना कुछ दिन बंद करते है

ठाकुरजी-आज आख़िरी बार

पिताजी-ठीक है. कुवारि है

ठाकुरजी-कुवारि लड़कियों मे रिस्क होता है. ध्यान नही रखती और माँ बन जाती है.

पिताजी-वो तो है. शादी शुदा हुई तो माँ बन गयी तो प्राब्लम नही होती

ठाकुरजी-तो बुलाऊ

पिताजी-पहले नाम तो बता

ठाकुरजी-हमारे गाँव की पुष्पा

पिताजी-पुष्पा ,उसके तो घर मे 3 दिन पहले बेटी पैदा हुई है उसकी बात तो नही कर रहा

ठाकुरजी-उसी की बात कर रहा था. अपनी बेटी की नामकरण मे क्या गंद हिला रही थी.

पिताजी-उसकी गंद पर तो मेरी भी नज़र थी. 1 2 साल मे काफ़ी गरम हो गयी है.

ठाकुरजी-तो आज मार लेते है.

पिताजी-बुला जल्दी,मेरा तो उसके नाम से खड़ा हो गया है

ठाकुरजी-उसे अंदर भेजो

ठाकुर का नौकर पुष्पा को बुलाने गया.

पिताजी-उसकी बहू भी कमाल की ही ,ऐसा सुन ने मे आया है

ठाकुरजी-हाँ, मैं तो दोनो को बुला रहा था

पिताजी-सास बहू एक साथ ,मज़ा आ जाता,उसको भी बुला लो

ठाकुरजी-पुष्पा मना कर रही है. बहू को जाने देने की बात कर रही थी.अभी माँ बनी है.

पिताजी-और तूने मान ली,वैसे माँ बन ने के बाद बदन खुल जाता है.

ठाकुरजी-क्या करूँ ,उसकी बहू को कुछ दिन गाँव को देखने दे ,एक दिन आएगी तो हमारे लंड के नीचे.

पिताजी-वो तो है, लो आ गयी

पुष्पा-मालिक ,मैं आ गयी.

पिताजी-पुष्पा तुम तो कमाल की दिख रही हो

पुष्पा-सब आपके लिए है मालिक

ठाकुरजी-तेरी बहू भी तेरी जैसी है.

पुष्पा-मालिक उसे जाने दो उसको अपनी बच्ची का ख़याल रखने दो

ठाकुरजी-हम है ना ख़याल रखने को

पुष्पा-मालिक मेरा कहने का मतलब था कि

पिताजी-क्या नाम है तेरी बहू का

पुष्पा-मंगला नाम है उसका (मंगला काकी जिस की अवी ने चुदाई की है, और रति की भी)

ठाकुरजी-पुष्पा तेरी बहू राज़ करेगी गाँव मे ,देखा है मैने उसका बदन अब खुलने लगा है.

पिताजी-उसे संभाल के रखना वरना लोगो का तो तुम्हें पता है.

पुष्पा-जी मालिक ,पूरा ध्यान रखूँगी उसका

ठाकुरजी-अब हमारा ध्यान रख

पुष्पा-जी मालिक

ठाकुरजी और योगेंद्रसिंघ तय्यार हो गये पुष्पा की चुदाई करने को.

पुष्पा का मज़ा योगेन्द्र सिंग लेगा. और उसकी पोती रति जो अभी पैदा हुई है उसका मज़ा योगेंद्रसिंघ का पोता अवी लेगा इस बात से दोनो अंजान थे.

ठाकुरजी-पुष्पा अपने बदन के दर्शन तो करवा ज़रा

पुष्पा-जी मालिक

पुष्पा ने अपने कपड़े निकाल दिए ,साड़ी ब्लाउस और पेटिकोट निकाल कर खड़ी हो गयी.

पुष्पा को शरम आ रही थी पर ठाकुरजी को ना कहने की हिम्मत नही थी उसमे

पुष्पा नंगी ,उन दोनो के सामने खड़ी थी.

योगेंद्रसिंघ और प्रतापसिंघ ने अपनी पैंट निकाल दी .और अपने हथियार को बाहर निकाल लिया.

पुष्पा-मालिक आप तो मेरी फाड़ देंगे. ये क्या है ,इतने बड़े

ठाकुर-तूने क्यूँ निकाला, पहले मैं करूँगा.

पिताजी-पिछली बार तूने किया था .इस बार मेरी बारी है

ठाकुर-तेरा 9 का लंड फाड़ देगा उसकी

पिताजी-तेरा भी कुछ कम नही है. पिछली बार उसको कितना रुलाया था

ठाकुर-तेरा लंड इतना गोरा कैसे है.

पिताजी-क्यूँ कि तेरा काला है

ठाकुर-तेरी माँ को अँग्रेज़ ने चोदा होगा तभी तेरा इतना गोरा है.

पिताजी-तेरी माँ को नीग्रो ने चोदा होगा जो तेरा काला है.

पुष्पा-मालिक आप दोनो के अच्छे है.

ठाकुरजी-चल फिर तू हो जा सुरू

पिताजी-तू बाहर जाके हिला तब तक इसकी गंद फाड़ता हूँ,

ठाकुरजी ने अपना लंड पॅंट मे डाला और बाहर चला गया.

कमरे मे सिर्फ़ योगेंद्रसिंघ और नंगी पुष्पा रह गये

पिताजी-इधर आ

पुष्पा अपनी गंद हिलाते हुए योगेंद्रसिंघ के पास आ गयी.

योगेंद्रसिंघ ने उसकी चूत को देखा .और अपनी उंगली उसकी चूत मे घुसा दी

पुष्पा के मूह से आहह निकल गया

पिताजी-तेरी चूत मारने मे मज़ा आएगा

पुष्पा-मालिक आप चूत मार लो पर गंद मे मत करना. मेरी गंद फट जाएगी

पिताजी-हिरण शेर के सामने आकर ये नही कहता कि पेट मत खाना.तू बस मज़ा ले , देख कल तू भागती हुई आएगी और कहेगी मेरी मारो

पुष्पा-जी

पिताजी-अब प्यार कर मेरे शेर को , मूह खोल कर चूसना सुरू कर

पुष्पा नीचे बैठ गयी और योगेंद्रसिंघ का लंड हाथ मे पकड़ लिया .

हाथ मे पकड़ते ही पुष्पा का बदन होने वाले दर्द से काप ने लगा.

पुष्पा यहाँ से चुदाई किए बिना जा नही सकती.उसने हिम्मत करते हुए लंड मूह मे ले लिया.

योगेंद्रसिंघ का मोटा लंबा लंड मूह मे लेने मे पुष्पा को मुश्किल हो रही थी.पर उसने आधा लंड मूह मे लिया.

पिताजी- चूसना सुरू करो

पुष्पा ने योगेंद्रसिंघ के लंड को चूसना सुरू किया

पुष्पा धीरे धीरे लंड चूस रही थी.

उसके मूह मे योगेंद्रसिंघ का लंड पूरा फिट हो चुका था जिस से पुष्पा अपने दातों से बचा कर लंड चूस रही थी.

योगेंद्रसिंघ को इसमे मज़ा नही आ रहा था. योगेंद्रसिंघ ने पुष्पा के सर को पकड़ कर पूरा लंड मूह मे पेल दिया.

पुष्पा पूरे लंड के लिए तय्यार नही थी.उसका दम घुटने लगा था.

योगेंद्रसिंघ ने उसके सर को पकड़ रखा ताकि पुष्पा लंड बाहर ना निकाल सके .पूरा लंड मूह मे डालने से योगेंद्रसिंघ खुश हो गया.

फिर एक झटके मे पुष्पा के मूह से लंड बाहर निकाल लिया जिस से उसका थूक लंड के साथ बाहर आ गया.

पुष्पा योगेंद्रसिंघ का लंड बाहर निकलते ही खांसने लगी. खाँसते हुए वो लंड को

देखने लगी. लंड पर उसका थूक लगा हुआ था जिस से लंड की चमक पुष्पा की आँखो को अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रही थी.

योगेंद्रसिंघ ने पुष्पा को और लंड चूसवाने की जगह उसे बेड पर लिटा दिया.

पुष्पा समझ गयी कि उसकी चूत आज असली लंड को अपने अंदर लेने वाली है.

वो इस बात से खुश थी कि ऐसा लंड उसकी चूत मे जाने वाला है जिस के बारे में सपने देखे थे .और डर भी रही थी कि उसकी चूत इतना मोटा लंड लेकर फट जाएगी.

योगेंद्रसिंघ ने पुष्पा के पैरो को फैला दिया .और उसके बालो मे चूत को ढूँढने लगे.

चूत मिलते ही योगेंद्रसिंघ ने अपने दानव को चूत पे रखा .

योगेंद्रसिंघ के टोपे ने पुष्पा की चूत को पूरा कवर कर लिया.

पुष्पा लंड को चूत पे महसूस करते थरथर काप रही थी.

योगेंद्रसिंघ को पता था कि लंड अंदर कैसे डालना है, और कैसे पुष्पा को मज़ा देना है.

योगेंद्रसिंघ ने धीरे धीरे लंड को अंदर पुश करना सुरू किया.

पुष्पा चुदि हुई होने से आधा लंड उसकी चूत मे पुश करके चला गया

पुश करते हुए योगेंद्रसिंघ ताक़त लगा रहा था. क्यूँ कि चूत के हिसाब से लंड मोटा था .पहली बार इतना मोटा लंड उसकी चूत मे जा रहा था.

पुश करने से लंड धीरे धीरे अंदर जा रहा था जिस से पुष्पा को धीरे धीरे दर्द मिल रहा था

अगर योगेंद्रसिंघ झटका मारता तो पुष्पा की चीखे निकल रही होती.

फिर भी पुष्पा को दर्द हो रहा था पर चीख निकलने जितना नही हो रहा था.

उसके आँख से पानी

निकल रहा था.

योगेंद्रसिंघ आधा लंड डाल कर थोड़ी देर रुक गया

ऐसा करने से पुष्पा अपना दर्द बर्दास्त करते हुए नॉर्मल हो रही थी.

पुष्पा नॉर्मल हो रही थी कि योगेंद्रसिंघ ने एक जोरदार झटका मार कर पूरा लंड पुष्पा की चूत मे डाल दिया.

योगेंद्रसिंघ का लंबा लंड पुष्पा की चूत को चीरता हुआ अंदर जाकर बच्चेदानी से टकरा गया.

वहाँ तक कभी किसी का लंड नही गया होगा जिस से पुष्पा की चीखे निकल गयी.

आआअहह मररररर गाइिईई ,म्‍म्म्मलिक आआप ने ये क्य्ाआआ किय्ाआअ ,ऊओीईए मैंन्न्न् आआअहह मरररर गाइिईई.

पुष्पा चिल्ला रही थी ,उसके चिल्लाने से योगेंद्रसिंघ सिंग वैसे रुक गया

ठाकुरजी-मार दिया क्या बे

पिताजी-मादरचोद तू अपना लंड हिला मुझे अपना काम करने दे

ठाकुरजी-कमिने मेरे लिए कुछ तो रख

पिताजी- इसकी गंद तेरे लिए छोड़ रहा हूँ. मज़ा करना

ठाकुरजी-तू गंद नही मारेगा ,कही सूरज दूसरी तरफ से तो नही निकल गया.

पिताजी-चुप रह वरना तेरी गंद मारूँगा

आआअहह मररररर गाइिईई ,म्‍म्म्ममलिक मुझीए जाने दूऊव माआआआआअ ,बचावउ मुझीईई... मैंन्न्न् आआअहह मरररर गाइिईई.

योगेंद्रसिंघ पुष्पा के दूध को अपने हाथो से मसल्ने लगा.

पुष्पा योगेंद्रसिंघ के नीचे से निकलने की कॉसिश कर रही थी.

योगेंद्रसिंघ गाँव का पहलवान था उसके हाथो से कोई निकल नही सकता था.

पुष्पा मुर्गी की तरह तडप रही थी. उसकी चूत से ज़रूर खून निकला होगा.

पुष्पा अपने हाथ पैर पटक रही थी. अपने सर को इधर उधर घुमा रही थी

मालिक मुझे छोड़ दो मैंन्न नहिी कर सकतिई

पिताजी -और चिल्लाई तो गंद मे डालूँगा ,

पुष्पा गंद का नाम सुनते ही डर के मारे चुप हो गयी. उसने अपने मूह पे हाथ रख दिया .उसकी आँख से पानी निकल रहा था.

उसके चुप होते ही योगेंद्रसिंघ ने अपना लंड बाहर निकाल लिया ,

योगेंद्रसिंघ के टोपे पे हल्का खून लगा हुआ था.

लंड बाहर निकलते ही पुष्पा ने राहत की सास ली.

योगेंद्रसिंघ ने वापस आधा लंड चूत मे डाला ,और उठाने लंड से पुष्पा की चूत मारने लगा.

लंड के अंदर बाहर होने से पुष्पा को दर्द हो रहा था पर आधा लंड बाहर होने से खुश थी.

योगेंद्रसिंघ आधे लंड से पुष्पा की चूत मारने लगा.

दीरे दीरे पुष्पा को मस्ती मे लाने लगा ताकि पूरा लंड जल्दी अंदर डाल सके

चुदि हुई चूत को फाड़ने मे अभी शुरुआत हुई थी.

पुष्पा की योगेंद्रसिंघ का आधे लंड से चुदाई करना अच्छा लगा

पुष्पा भी अपने दर्द को भूल कर योगेंद्रसिंघ का साथ देने लगी.

और योगेंद्रसिंघ के धक्को के साथ मज़े मे शीष्कारी लेने लगी

पुष्पा मस्ती मे इतनी खो गयी कि लंड कब पूरा अंदर जाके चूत को फाड़ने लगा उसे पता भी नही लगा.

योगेंद्रसिंघ के लंड ने पुष्पा की चूत का पानी निकाल दिया.

इतना पानी निकाला कि पुष्पा को भी विश्वास नही हो रहा था कि उसकी चूत मे इतना पानी है

चूत का पानी निकलते ही चूत और लंड गीले हो गये.

चूत गीली होते ही लंड ने अपनी गति बढ़ा दी.

योगेंद्रसिंघ धीरे धीरे अपनी गति बढ़ा रहा था पुष्पा की चूत मे धक्के मारने लगा.

पुष्पा और योगेंद्रसिंघ दोनो मस्ती मे चुदाई को एंजाय कर रहे थे.

क्या चुदाई हो रही थी ,बाहर बैठा ठाकुर शीष्कारी सुनकर अपना लंड हिला रहा था

पुष्पा पानी पे पानी छोड़ रही थी .और योगेंद्रसिंघ धक्के पे धक्के मार रहा था.

योगेंद्रसिंघ लंबी चुदाई का घोड़ा था .वो अपनी घोड़ी को भी साथ मे लेकर चुदाई करता था.
 
फ्लॅशबॅक 963

गाँव मे सब ने शालिनी भाभी के आने की तय्यारी कर ली

शहर3 मे जयसिंघ और शालिनी अपनी पॅकिंग कर रहे थे

जयसिंघ-तुम ने तय्यारी कर ली ना.

शालिनी-हाँ, सब समान पॅक कर लिया.

जयसिंघ-वहाँ गाँव मे कुछ नही मिलता ,अच्छे से पॅक कर्लो जो चाहिए.

शालिनी-इतना अच्छा गाँव है,कितना प्यार है गाँव मे , आप का तो वहाँ बचपन गुज़रा है. आप को गाँव जाना पसंद क्यूँ नही है

जयसिंघ-तुम्हें बताया ना हम यहाँ क्यूँ है . यहा शहर3 मे देखो क्या कुछ नही है हमारे पास ,पैसे है,अपना घर है, सबकुछ तो है.

शालिनी-यहाँ प्यार नही है. बडो का आशीर्वाद नही है, वहाँ गाँव मे सब अपने है. वहाँ हमारी फॅमिली है, हँसता खेलता घर है.

जयसिंघ-मेरा दिमाग़ खराब मत करो वरना गाँव लेकर नही जाउन्गा ,

शालिनी-मत लेकर जाओ , मुझे क्या है आपको पिताजी की डाट सुननी पड़ेंगी

जयसिंघ-तुमने खत लिख कर पिताजी को माँ बन ने की बात बताई ना

शालिनी- हाँ

जयसिंघ-तभी सोचु पिताजी ने तुम्हें गाँव क्यूँ बुलाया है , हम बस तुम्हारी डेलिवरी को जा रहे है

शालिनी- वैसे एक पुछु , गाँव मे तो हॉस्पिटल भी नही है फिर आप मेरी डेलिवरी गाँव मे करने को कैसे तय्यार हुए है

जयसिंघ- पहले बहुत बार पिताजी को मैं नाराज़ कर चुका हूँ , अब और उनको नाराज़ नही करना चाहता , और इस बार नाराज़ नही करना चाहता था.

शालिनी-मैं तो कहती हूँ ,आप भी मेरे साथ डेलिवरी तक वही रुक जाइए

जयसिंघ-नही. मैं वहाँ नही रुकुंगा.मैं वहाँ रुका तो कंपनी का क्या होगा , शादी के समय रुका था तो कंपनी बंद करने की नोबत आ गयी थी

शालिनी-नेहा नीता के लिए , माजी के लिए कुछ दिन रुक जाइए

जयसिंघ-उनके लिए तो 1 हफ़्ता रुक रहा हूँ. मैं तो उनको शहर3 बुला रहा हूँ पर वो है कि गाँव छोड़ना नही चाहती

शालिनी-भूल जाओ, वो नही आएँगी .और मैं भी नही आउन्गि

जयसिंघ-क्या कहा.

शालिनी-कुछ नही.

जयसिंघ-मैं सब का भला चाह रहा हूँ.सब को शहर3 मे बुला रहा हूँ. शहर3 मे सब की लाइफ बदल जाएगी. छोटू भी अपने दोस्तो से दूर हो जाएगा .

शालिनी-मुझे पता है. आप सब के अच्छे की बात कर रहे है.पर उनको गाँव मे रहना पसंद है

जयसिंघ-इस बार मैं मना ही लूँगा.

शालिनी-पहले चलिए तो सही.

जयसिंघ-सो जाओ, कल लंबा सफ़र करना है.

शालिनी-गुड नाइट

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नेहा अपने भैया भाभी के आने की खुशी मे सुबह जल्दी उठ गयी.

नेहा और नीता ने पूरा घर सर पे उठा रखा था.

भाग दौड़ करके अपना काम जल्दी ख़तम करना चाहती थी.

पिताजी अपने बेटियो की भाग दौड़ देख कर खुश थे

आज कितने दिनो बाद पूरी फॅमिली एक साथ फिर से पूरी होने वाली थी.पिताजी दादाजी बन जाएँगे जल्दी

पूजा दीदी भी अपने पति के साथ गाँव के लिए निकल की तय्यारी कर रही थी

छोटू आराम से सो रहा था ,दिन भर घूमता रहता है और सुबह देर तक सोना उसकी आदत हो गयी थी.

माँ के लाड प्यार ने उसे बिगाड़ रखा था.

पिताजी ने बहुत बार समझाया पर छोटू को तो माजी का प्यार बचा ही लेता

नेहा-माँ ये बेडशीट किसी ने चेंज की, भाभी को पिंक कलर पसंद है

नीता-मैं ने की है ,भैया को ब्लू कलर पसंद है.

नेहा-देख नीता ,ये बेडशीट रहेगी बेड पर, अगर तूने चेंज की तो मुझ से बुरा कोई नही होगा

नीता-ब्लू बेडशीट रहेगी. भैया की पसंद चलेगी

नेहा-मैं तुझसे बड़ी हूँ

नीता-5 मिनिट बड़ी है. ज़्यादा हुकुम मत चला.

मा-ये बेडशीट लो ,दोनो के कलर है

नेहा-माँ आप ना आती तो इसका मूह नोच लेती

नीता-बड़ी आई मूह नोचने वाली, जंगली बिल्ली कही की

नेहा-मुझे बिल्ली मत कह

नीता-एक बार नही, 1000 बार कहूँगी. नेहा जंगली बिल्ली ,नेहा जंगली बिल्ली

नेहा-नीता तुझे मेरे हाथ से कोई नही बचा सकता ,

नेहा का गुस्सा देख कर नीता भागने लगी

नेहा-अब कहाँ भाग रही है ,रुक,तुझे आज सबक सीखा कर रहूंगी

नीता-माँ ,बचाओ जंगली बिल्ली मेरे पीछे भाग रही है

नेहा-नीता की बच्ची, तू तो गयी आज काम से

माजी-नेहा क्या कर रही. इतनी बड़ी हो गयी और बच्चों जैसी हरकत कर रही है.

नेहा-आज मैं किसी की बात नही सुनूँगी.

नीता-पहले पकड़ कर तो दिखा

नेहा-हाथ मे आई तो तब बताउन्गी तुझे

नेहा नीता छोटी बच्ची की तरह एक दूसरे के पीछे भाग रही थी.

छोटू अपनी बहनों को मस्ती देख कर मज़ा ले रहा था.

छोटू-नेहा आज इसको छोड़ना मत

नेहा उसको छोटू कहती थी जिस से वो नेहा को नाम से बुलाता था.

नीता भागते भागते रुक गयी.और नेहा ने उसेपकड़ लिया

नेहा-अब दिखाती हूँ तुझे

नीता-छोड़ मुझे

नेहा-अब क्या हुआ ,बड़ी मज़ाक उड़ा रही थी मेरा

नीता -रुक तो ,मुझे टॅक्सी की आवाज़ सुनाई दे रही है

नेहा-मुझ से बचना इतना आसान नही है. कोई और तरीका ढूँढ

नीता-भैया आ गये

नेहा-क्या कहा

नीता -वो देख टॅक्सी, माँ भैया भाभी आ गये

नीता की आवाज़ सुनकर सब गेट के पास आ गये.

गेट के पास एक टॅक्सी आकर रुक गयी. टॅक्सी मे भैया भाभी को देख कर नेहा नीता भागते हुए टॅक्सी के पास चली गयी

नेहा-भैया

और नेहा ने अपने भैया को गले लगा लिया

जयसिंघ-नेहा तू तो कितनी बड़ी हो गयी.

नीता-भैया मैं भी बड़ी हो गयी हूँ.

नीता भी गले लग गयी

जयसिंघ-तुम दोनो बड़ी हो गयी हो,ये छोटू कहाँ है

शालिनी-मैं भी हूँ यहाँ पर

छोटू-भाभी दीजिए समान मैं लेता हूँ

शालिनी-मेरा देवर बड़ा हो गया. बिना वजह सब इसे छोटू कहते है.

छोटू-मैं नेहा को यही कह रहा था. अब आप आ गयी है ना आप भी बताइए उनको

माजी- यही बात करते रहोगे या घर मे भी आने दोगे इनको ,सफ़र करके आए है ,

नेहा-चलिए भाभी.

छोटू ने समान उठा लिया और नेहा नीता भैया भाभी को लेकर अंदर आ गये

नेहा-भाभी चलिए, आपके लिए कमरा तय्यार किया है.

नीता-चलो ना भाभी .

माजी-नेहा नीता क्या है ये सब ,उसको बैठने दो ,अब कुछ महीने वो यही रुकेंगी

पिताजी-कुछ महीने नही, अब वो यही रहेंगे

अपने पिताजी की बात सुनकर जयसिंघ को जिस का डर था वही हो गया.

जयसिंघ-पिताजी वो

माँ-बाते तो होती रहेंगी.नेहा बहू को उसके कमरे मे ले जाओ

भैया भाभी के साथ नेहा नीता कमरे मे चली गयी.

कमरे मे जाते ही नेहा नीता जो बाते सुरू की ,कि क्या बताऊ

दोपहर से शाम और खाना खाने के बाद देर रात तक नेहा नीता भाभी से बात करती रही.

जब माँ नेहा नीता पे गुस्सा हुई तब जाके वो दोनो अपने कमरे मे चली गयी.
 
फ्लॅशबॅक 964

नेक्स्ट डे

नेहा-भाभी ये लीजिए गरमा गरम टी

जयसिंघ-मैं भी हूँ यहाँ. तुम तो सिर्फ़ एक कप लेकर आई हो

नीता-भैया आपकी टी मैं लेकर आई हूँ

शालिनी-नेहा तुम 2 कप लेकर आ सकती थी

नीता-भाभी ,हम ने सब काम बाँट लिए है. आधे काम नेहा करेंगी .और आधे मैं

शालिनी-आप पे मैं बहुत नाराज़ हूँ

जयसिंघ-मैं ने क्या किया

शालिनी-इतनी प्यार करने वाली प्यारी ननंद से दूर जो रखा है.

अपनी भाभी की बात सुनकर दोनो खुश हो गयी.

जयसिंघ-तो अपने साथ शहर3 ले चलो

नेहा -हमे नही जाना शहर3 मे ,हम यही ठीक है

शालिनी-आप फिर सुरू मत हो जाना ,इतना अच्छा गाँव कोई पागल ही छोड़ कर जाएगा

जयसिंघ-तुम ने मुझे पागल कहा

नेहा नीता भैया भाभी की बाते सुनकर हँसने लगी.

शालिनी-हाँ, आप पागल है,जो शहर3 जाकर रहते है. मेरी ननंद समझदार है जो गाँव मे रहती है. अब तो मैं भी यही रहूंगी

नेहा-याआ हू, भाभी यही रहेंगी. चले दे पैसे

नीता - भाभी आपने मुझे हरा दिया. तुझे बाद मे पैसे दूँगी

शालिनी-कैसे पैसे

नेहा-हम ने बेट लगाई थी. आपके यहाँ रहने पे

नीता-मैं तो हार के भी जीत गयी.

जयसिंघ-नीता तू जीती है .हम कुछ महीने के लिए आए है. मैं तो अगले हफ्ते वापस जाउन्गा

भैया की बाते सुनकर नेहा और नीता उदास हो गयी.

शालिनी-आप कुछ भी कहो, मैं अपनी ननंद को छोड़ कर नही जाउन्गी

जयसिंघ-तुम सिर्फ़ कुछ महीनो के लिए आई हो.और इस बात पे मुझे कुछ नही सुन ना है.

अपनी भाभी की बात सुनकर नेहा अपने भैया पे गुस्सा करने लगी.

नेहा -भैया ,आप इतने दिनो बाद आए हो और जल्दी जाने की बात कर रहे हो

नीता-हाँ, आप आने जाने की बात कर रहे है.

शालिनी-उनको जाने दो मैं तो यही रुकूंगी. मेरी प्यारी ननंद के साथ

जयसिंघ-मैं भी देखता हूँ तुम यहा कैसे रुकती हो, तुम्हें पता है ना मेरा क्या होता है तुम्हारे बिना

शालिनी- आप कहीं भी सुरू हो जाते हो

जयसिंघ बाहर चला गया .जयसिंघ के जल्दी जाने की बात से नेहा नीता का मूड ऑफ हो गया.

शालिनी-तुम क्यूँ मूड ऑफ कर रही हो, हम मिल कर तुम्हारे भैया को मना लेंगे. मेरा साथ दोगि ना .

नेहा नीता-हाँ, हम तो यही चाहते है.

शालिनी-तो हम आज से काम मे लग जाते है.

नेहा-हमे क्या करना होगा

शालिनी-कुछ नही अपने पिताजी को कहो ,तुम्हारे भैया कुछ नही कर पाएँगे. थोड़े दिन गुस्सा हो जाएँगे पर आना तो यही होगा. मैं रुक गयी तो वो वहाँ आते रहेंगे.

नीता -हम अभी बात करते है .पिताजी भी यही चाहते है

शालिनी-अभी नही कुछ दिन रूको, वैसे मैं ने सुना है पूजा भी आ रही है.

नेहा-दीदी अगले हफ्ते आ रही है

शालिनी-ये तो अच्छी बात है. और बताओ क्या चल रहा तुम दोनो का

नेहा-किस बारे में बात कर रही है

शालिनी-तुम इतनी बड़ी हो गयी हो, कोई लड़का पसंद किया कि नही, शादी की उमर हो गयी है

नेहा-शादी ,इसके बारे में तो मैं ने कुछ सोचा नही है.

शालिनी-तुम्हारी उमर तो हो गयी. अब क्या बूढ़ी होने पे शादी करनी है

नेहा-अभी तो खेलने के दिन है.

शालिनी-नीता ने तो किया होगा.क्यूँ नीता

नीता-सच कहूँ भाभी

शालिनी-हाँ बोल ना ,मुझे बताया तो मैं मदद ही करूँगी

नीता-नेहा को जीजाजी का दोस्त अच्छा लगता है.

नेहा-मैं ने कब कहा ऐसा ,भाभी ये झूठ बोल रही है

नीता-मैं क्यूँ झूठ बोलू

शालिनी-नीता तू बोलती रहे मैं भी तो सुनू ,नेहा के किस्से

नेहा-भाभी ऐसा कुछ नही है.

नीता-भाभी, नेहा सच कह रही है. बस नेहा ने कहा था कि जीजाजी का दोस्त अच्छा लड़का है.

शालिनी-बस इतना ही, मुझे तो लगा पूजा की तरह नेहा ने भी लड़का ढूँढ लिया होगा.

नेहा-पूजा दीदी ने तो हमे पता भी लगने नही दिया.

शालिनी-काफ़ी तेज है पूजा.जल्दी शादी कर ली. पर कुछ भी हो पूजा ने अच्छा जीवन साथी चुना है.

नेहा-हाँ, जीजाजी बहुत अच्छे है.

नीता-उनका दोस्त भी.

शालिनी-कितने दोस्त है तुम्हारे जीजाजी के

नेहा-जीजा जी का 1 दोस्त है. और दोस्त का एक दोस्त है.

शालिनी-लो हो गया काम,तुम दोनो के लिए 2 दोस्त ,तीनो बहनें एक साथ

एक शहर2 मे

नीता-सुन ने मे अच्छा लग रहा है

शालिनी-सुन ने मे अच्छा लग रहा है तो सोचो ,ऐसा हुआ तो कितना अच्छा होगा

नेहा-हमारी किस्मत इतनी अच्छी नही है.

शालिनी-क्यूँ ?

नेहा-वो शहर2 मे रहने वाले और हम गाँव मे

शालिनी-तुम्हारे रमेश जीजू भी तो शहर2मे रहता है.उन्होने ने तो जमा ही लिया ना

नेहा-दीदी की बात अलग है

शालिनी-क्या अलग है मैं भी तो सुनूँ.

नेहा-दीदी को जीजाजी पसंद थे. जीजाजी ने प्रपोज़ किया और दीदी ने हाँ कह दिया.

नीता-हमारी इतनी अच्छी किस्मत कहाँ है.हमे तो गाँव मे कोई मिल जाएगा .

शालिनी-तुम देखना तुम्हें भी एक अच्छा जीवन साथी मिलेगा.

नेहा-वो जब मिलेगा तब देखेंगे.तब तक हम मस्ती करेंगे

शालिनी-तुम दोनो करो ,मुझसे नही होगा

नेहा-भाभी, बेटा है या बेटी है

शालिनी-तुझे क्या चाहिए

नेहा-मुझे तो कोई भी चाहिए ,आख़िरी मे बुआ जो बनूँगी.

नीता-बेटा जल्दी दुनिया मे आ जा ,तेरी बुआ तेरे साथ खेलने को बेताब है

नेहा-भाभी पेट मे लात मारता होगा ना

शालिनी-कभी कभी मारता है. तू बात करके देख

नेहा-नन्हे राजकुमार को नेहा बुआ पसंद है या नीता बुआ

नीता-कुछ भी, उसे तो मैं पसंद हूँ देखना वो मुझे तुमसे ज़्यादा प्यार करेगा

नेहा -मुझसे करेगा. है ना मेरा बेटा राजा

शालिनी-लात मारी,

नेहा-सच भाभी

शालिनी-हाँ ,सच मे

नेहा-देखा ,मुझ से ज़्यादा प्यार करता है

नीता-उसे आने तो दे फिर देखेंगे किस से ज़्यादा प्यार करता है.

नेहा-देख लेना मुझे ज़्यादा प्यार करेगा और मैं तो भाभी से ज़्यादा प्यार करूँगी

शालिनी-तुम दोनो ऐसे लड़ते रहोगी क्या . मुझे फ्रेश तो होने दो

नेहा-चलिए मैं आपको बाथरूम तक ले जाती हूँ

शालिनी-मैं जा सकती हूँ, तुम दोनो भी फ्रेश हो जाओ

नेहा और नीता अपने भैया भाभी के साथ इतना घुल मिल गयी की दिन कैसे निकलते गये पता ही नही चला.

शालिनी को भी अपने ससुराल आकर इतना प्यार करने वाली ननंद मिल गयी. प्यारा सा देवर, माँ पिताजी जैसा प्यार करने वाली सास ससुर मिल गये.

शालिनी को शहर3 से ज़्यादा गाँव मे रहना पसंद आ रहा था

जयसिंघ पिछली बार दिमाग़ लगा कर शालिनी को शहर3 लेकर गया था .

वरना पिछली बार जब जयसिंघ और शालिनी गाँव आई थी तो शालिनी आम खाने के लिए यही रुकने वाली थी ,पर जयसिंघ उसको अपने साथ शहर3 लेकर गया

इस बार वो शालिनी को गाँव तो लेकर आ गया था पर उसे शालिनी को वापस लेकर जाना मुश्किल लग रहा था. क्यूँ की पिताजी का 2 न्ड प्रॉमिस जयसिंघ को याद था

जयसिंघ बाप बन ने का इंतज़ार कर रहा था, बाप बनते ही वो शालनी को लेकर वापस शहर3 चला जाएगा .पर पिताजी के प्रॉमिस के चलते जयसिंघ को कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे

दिन धीरे धीरे कटने लगे. और देखते देखते 1 हफ़्ता गुजर गया.

जयसिंघ वापस जाने का दिन आ गया था.वो कंपनी का काम बीच मे छोड़ कर आया था. उसके पार्टनर उसे फोन करके बुला रहे थे.

पूरी कंपनी जयसिंघ पर डिपंड थी.उसके पार्टनर का पैसा था दिमाग़ पूरा जयसिंघ था.

जयसिंघ के बिना कंपनी जैसे रुक गयी थी.
 
फ्लॅशबॅक 965

जयसिंघ ने पिताजी का एक प्रॉमिस तो पूरा कर दिया

पिताजी की पसंद की लड़की से शादी कर ली

पर अब दूसरा प्रॉमिस वो कैसे पूरा करेगा

अपने बच्चे को गाँव मे कैसे रखेगा

जयसिंघ अपने होने वाले बच्चे को शहर3 मे रखना चाहता था

उसको पढ़ा लिखा कर नयी दुनिया मे जीना सिखाना चाहता था

हर बाप यही चाहता है कि उसके बच्चों को सारी खुशिया मिले

जयसिंघ को लगता था कि वो सारी खुशिया शहर3 मे है

शालिनी इस बात से खुश नही थी

वो तो अपने बच्चो को गाँव मे रखने को एक झटके मे तय्यार हो जाएगी

शालिनी की पता है कि गाँव की मीट्टी की ताक़त कैसी होती है

गाँव की मीट्टी मे खेलने से उसका बच्चा कैसे बनेगा

शालिनी तो खुश थी कि पिताजी ने जयसिंघ से ऐसा प्रॉमिस लिया है

इस प्रॉमिस से शालिनी को भी गाँव मे रहने मिलेगा

पर जयसिंघ तो कुछ और सोच रहा है

शालिनी तो दोनो तरफ से फसि हुई थी

एक तरफ शालिनी का पति जो शहर3 मे रहना चाहता है

और दूसरी तरफ उसके ससुर जो उसको अपने बाप से ज़्यादा प्यारे हो गये जो शालिनी के बच्चों को गाँव मे रखना चाहते है

ऐसे मे तो शालिनी क्या करेगी

जयसिंघ तो शालिनी के पीछे हाथ धो कर लगा हुआ था

जयसिंघ तो यही शहर3 मे डेलिवरी करवाना चाहते था शालिनी की

पर पिताजी के सामने उसकी चली ही नही

जयसिंघ को शालिनी की डेलिवरी के लिए गाँव आना ही पड़ा

शालिनी ने अपने मायके की जगह ससुराल मे डेलिवरी करनी ठीक समझी

यहा डेलिवरी होंगी तो सब खुश हो जाएँगे

जयसिंघ को एक और टेन्षन ने पकड़ लिया

गाँव मे हॉस्पिटल.नही है ऐसे मे डेलिवरी मे कुछ प्राब्लम हुई थी

गाँव मे यो सिर्फ़ वैद्य है

जयसिंघ को पता है कि गाँव मे कितनी परेशानी होती है

पर पिताजी और माजी के लिए जयसिंघ शालिनी को गाँव लेकर आ ही गया

जयसिंघ ने गाँव आकर पहले शहर जाकर एक हॉस्पिटल मे बात कर ली कि अमरजेंसी मे वो गाँव आ जाए ,

जयसिंघ ने अड्वान्स मे हॉस्पिटल के डॉक्टर को पैसे दे रखे थे

जयसिंघ अपने बच्चों के साथ कोई रिस्क नही ले सकता था

जयसिंघ पूरा इंतज़ाम कर रहा था

उसकी शालिनी को गाँव मे रख कर वापस शहर3 जाना था

जयसिंघ ने ठाकुरजी को बोल कर कार का इंतज़ाम भी कर दिया था

डॉक्टर को भी पैसे दे कर बता दिया कि गाँव से फोन आते ही जल्द से जल्द गाँव चले जाए

शालिनी के खाने से लेकर मेडिसिन तक सारा इंतज़ाम जयसिंघ ने कर दिया था

जयसिंघ बाप बनने की वजह से कुछ ज़्यादा ही टेन्षन ले रहा था

ऐसा होता है जब बाप बनते है

छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा जाता है

जयसिंघ तो शहर3 से गाँव आया था ऐसे मे उसने नेहा नीता को खास तरीके से बता दिया कि अपनी भाभी का ख़याल कैसे रखना है

जयसिंघ का शालिनी को छोड़ कर जाने का दिल तो नही कर रहा था

पर उधर कंपनी को बड़ा प्रॉजेक्ट मिला था वो सिर्फ़ जयसिंघ ही कर सकता था

अजीत और कुमार अकेले नही कर पाएँगे

शादी के समय कुमार ने मेनेज कर लिया था पर इस बार कुमार अकेले नही कर पाएगा इस लिए जयसिंघ को जाना भी ज़रूरी था

पर उस से पहले एक बात ने जयसिंघ का दिमाग़ खराब कर दिया था

वो था कि बच्चा हो जाने के बाद कहाँ रहेगा

ऐसे मे जयसिंघ शालिनी से बात करना चाहता था

शालिनी भी अपने प्यार की हालत देख कर समझ गयी कि प्राब्लम क्या है

शालिनी- क्या बात है , आप कुछ परेशान दिख रहे है

जयसिंघ-शालिनी मैं बहुत परेशान हूँ

शालिनी- बात क्या है

जयसिंघ-तुम्हें तो पता है

शालिनी- डेलिवरी शहर3 मे ना करके गाँव मे करने से आप परेशान है

जयसिंघ-ये भी एक वजह है

शालिनी- यहाँ गाँव मे डेलिवरी करना ठीक रहेगा

जयसिंघ-शहर3 मे सारी सुविधा है

शालिनी- तो यहाँ क्यूँ लेकर आए आप

जयसिंघ-माँ ने कहा , माँ की बात कैसे मना कर सकता है

शालिनी- पर इसका एक फ़ायदा भी है

जयसिंघ-क्या ?

शालिनी- देखिए शहर3 मे तो आप दिन भर कंपनी मे रहते है , और अभी जो प्रोजेक्ट मिला है वहाँ से आपको टाइम मिलेगा ही नही

जयसिंघ-हाँ , बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है , मुझे दिन रात कंपनी मे रहना पड़ेगा

शालिनी- और इस हालत मे मैं अकेली शहर3 मे रहती , मेरी देखभाल कौन करता

जयसिंघ-माँ को बुला लेते शहर3

शालिनी- माजी नही आती ये आपको पता है

जयसिंघ-मैं तुम्हारी माँ की बात कर रहा हूँ

शालिनी- फिर तो मेरी माँ कहती की हमारे गाँव आ जाओ उस से तो अच्छा ये गाँव है

जयसिंघ-वो कैसे

शालिनी- यहाँ नेहा नीता मेरे साथ पूरा दिन रहेंगी मेरा देखभाल रखने को , आपको चिंता लेने ही नही देंगी नेहा नीता , और कुछ हुआ तो प्यारा गाँव है मेरी मदद को

जयसिंघ-बात तो सही है , पर यहाँ से हॉस्पिटल बहुत दूर है

शालिनी- तो क्या हुआ , मैं जल्दी अड्मिट हो जाउन्गी हॉस्पिटल मे आओ टेन्षन मत लो

जयसिंघ-तुम संभाल लोगि ना , क्यूँ कि मुझे वापस भी जाना है

शालिनी- मैं आपके बच्चे का पूरा ध्यान रखूँगी मेरे पेट मे वो सेफ है

जयसिंघ-तुम मेरी जान हो

शालिनी- और सुनिए , आपके पिताजी यही पैदा हुए थे , आप भी यही पैदा हुए थे , और आपका बच्चा भी यही पैदा होगा ,

जयसिंघ-इस से पिताजी खुश हो जाएँगे

शालिनी- आप बेफिकर होकर वापस शहर3 चले जाइए मैं यहाँ आराम से रहूंगी

जयसिंघ-दर्द होते ही माँ को बता देना

शालिनी- बता दूँगी और पूजा भी यहाँ पे है उसको सब पता है क्या करना होता है

जयसिंघ-पूजा से पूछते रहना

शालिनी- आप अपनी सारी टेन्षन ख़तम कर दीजिए

जयसिंघ-ये तो मामूली टेन्षन है

शालिनी- क्या मतलब मामूली , ये मामूली है तो बड़ी कौनसी है

जयसिंघ-तुम्हें बताया था ना

शालिनी- फिर से बता दीजिए

जयसिंघ-पिताजी का प्रॉमिस

शालिनी- अच्छा , पिताजी के प्रॉमिस की बात कर रहे है

जयसिंघ-हाँ ,

शालिनी- आपको प्रॉमिस से इतना डर लग रहा है यो प्रोमुसे किया ही क्यूँ

जयसिंघ-अपने सपने के लिए

शालिनी- आपने वो भी सपने जला दिए है

जयसिंघ-हाँ ,

शालिनी- आप वो सपना फिर पूरा करने का क्यूँ नही सोचते

जयसिंघ-अब वो सपना पूरा नही हो पाएगा

शालिनी- तब आप अकेले थे अब मैं हूँ आपके साथ , हम.मिलके आपका सपना पूरा करेंगे

जयसिंघ-तुम अकेली हो जिसको मेरा सपना पसंद आया है

शालिनी- आप पिताजी को बताते उनको भी आप का सपना अच्छा लगता ,

जयसिंघ-मैं उनको करके दिखाना चाहता था ,

शालिनी- अब करते है

जयसिंघ-नही हो पाएगा

शालिनी- मैं हूँ ना आपके साथ

जयसिंघ-तुम

शालिनी- मैं आपके साथ हमेशा रहूंगी , आप फिर से उस सपने को पूरा करने का सोचिए

जयसिंघ-ठीक है , शहर3 जाके सोच लूँगा

शालिनी- मुझे प्रॉमिस कीजिए आप अपने सपने के बारे में ज़रूर सोचेंगे

जयसिंघ- प्रॉमिस करता हूँ

जयसिंघ ने शालिनी को प्रॉमिस कर दिया पर बात कुछ और थी ,

बात थी जयसिंघ के बेटे की

जयसिंघ-तुम प्रॉमिस करो कि मेरा साथ कभी नही छोड़ोगी , दुनिया मुझे बुरा कहेगी तब भी नही

शालिनी- ये मंगलसूत्र जब पहना था तभी प्रॉमिस कर दिया था

जयसिंघ-देखी तुम बात को कहाँ से कहाँ लेकर जा रही हो

शालिनी- हाँ , आप पिताजी के प्रॉमिस की बात कर रहे थे

जयसिंघ-पहला प्रॉमिस तो पूरा कर दिया ,

शालिनी- पिताजी की मनपसंद लड़की से शादी करने का प्रॉमिस

जयसिंघ-हाँ

शालिनी- देखिए उस प्रॉमिस की वजह से आप आज कितने खुश है

जयसिंघ-उस प्रॉमिस से मुझे तुम मिली हो

शालिनी- पर पिताजी ने कितना अच्छा सोचा , अपना प्रॉमिस भी पूरा कर लिया आपकी पसंद भी पूछ ली

जयसिंघ-हाँ , पिताजी ने अच्छा तरीका ढूँढा था , सबकी पसंद से तुम मुझे मिली हो

शालिनी- जैसे 1स्ट प्रॉमिस पूरा हुआ वैसे दूसरा प्रॉमिस पूरा कर देते है

जयसिंघ-वो नही कर सकता

शालिनी- पहले प्रॉमिस से आपको ही खुशी मिली है

जयसिंघ-पर दूसरा प्रॉमिस ये है कि मैं अपने बेटे से दूर रहूं

शालिनी- आप ग़लत मतलब निकाल रहे है

जयसिंघ-तो सही मतलब क्या है

शालिनी- पिताजी ने कहा था कि हमारा बेटा गाँव मे रहेगा

जयसिंघ-तो उसका यही मतलब हुआ ना कि मेरा बेटा यहाँ रहेगा और मैं शहर3 मे

शालिनी- हम भी यही गाँव मे रहेंगे

जयसिंघ-ये नही हो सकता

शालिनी- क्यूँ नही हो सकता है

जयसिंघ-वहाँ शहर3 मे मैं ने अपने लिए बसाई हुई छोटी सी दुनिया है , वो मैं सब छोड़ नही सकता है

शालिनी- फिर तो आपको अपने बेटे के साथ मुझे छोड़ना पड़ेगा

जयसिंघ-ये तुम क्या बोल रही हो

शालिनी- आप शहर3 नही छोड़ सकते , पिताजी अपना प्रॉमिस पूरा करके रहेंगे , मैं अपने बेटे को नही छोड़ सकती , तो

जयसिंघ-तो तुम मुझे छोड़ कर रहोगी

शालिनी- आप भी यही गाँव मे आ जाइए ना

जयसिंघ-ये मुश्किल है

शालिनी- पर नामुमकिन नही है

जयसिंघ-पर पिताजी मान जाए तो हम शहर3 मे रह सकते है

शालिनी- पिताजी नही मानेगे

जयसिंघ-पिताजी से तुम बात करना

शालिनी- मैं नही करने वाली पिताजी से बात , आप हर बार मुझे आगे कर देते हो

जयसिंघ-हमारी शादी के बाद शहर3 जाने के समय पिताजी ने तुम्हारी बात मान ली थी

शालिनी- आप मुझे फसा रहे हो

जयसिंघ-तुम बात करो पिताजी से , कहो कि हम शहर3 मे रहेंगे , उनका प्रॉमिस हम अलग तरीके से पूरा करेंगे

शालिनी- मुझे सोचने दीजिए

जतसिंघ- सोचो

और शालिनी जयसिंघ की बात पे सोचने लगी

शालिनी भी पढ़ी लिखी थी वो एक ऐसा हल ढूँढने लगी कि सब खुश हो जाए
 
फ्लॅशबॅक 966

जयसिंघ ने शालिनी को फसा दिया

एक तरफ जयसिंघ दूसरी तरफ पिताजी , बीच मे फस गयी शालिनी अपने होने वाले बच्चे के साथ

शालिनी- मैं क्या कह रही हूँ हम दोनो बात करते है पिताजी से

जयसिंघ-फिर तो पिताजी यही कहेंगे कि मैं अपना प्रॉमिस पूरा नही कर रहा हूँ

शालिनी- तो बोल दीजिए ना सीधे सीधे पिताजी से

जयसिंघ-इस घर का खून है मुझमे , मैं प्रॉमिस कैसे तोड़ सकता हूँ

शालिनी- अच्छा है आपका , प्रॉमिस तोड़ना नही चाहते , और पिताजी से बात करने से डर रहे है

जयसिंघ-तुम करो ना पिताजी से बात

शालिनी- क्या कहूँ कि आप प्रोमिस तोड़ रहे है

जयसिंघ-ऐसा मत कहना , कुछ और बोलना जैसे की बच्चे की पढ़ाई के लिए शहर3 रहना चाहती हो

शालिनी- मैं पिताजी से झूठ नही बोलूँगी

जयसिंघ-और मेरा क्या , मेरा साथ छोड़ रही हो

शालिनी- आप का साथ कभी नही छोड़ सकती , मुझे कुछ सोचने दीजिए

जयसिंघ-सोचो , जल्दी सोचो , मेरा तो दिमाग़ ने काम करना बंद किया है

शालिनी- आप शहर3 छोड़ना नही चाहते , अपने बेटे को यहाँ गाँव मे रखना नही चाहते , पिताजी से किया हुआ प्रॉमिस पूरा करना चाहते हो , फिर तो एक रास्ता है

जयसिंघ-क्या

शालिनी- मुझे जुड़वा बच्चे हो जाए

जयसिंघ-मज़ाक नही

शालिनी- एक काम करते है हम पिताजी को जितने बच्चे चाहिए उतने देते है

जयसिंघ-कहा ना मज़ाक नही

शालिनी-मैं सीरीयस हूँ , पहला बेटा पिताजी को देंगे और दूसरा हमारे पास रहेगा

जयसिंघ-नही , बेटी हुई तो बेटे के लिए फिर से कॉसिश करेंगे , और बेटा हुआ तो तुम ऑपरेशन कराना

शालिनी- ये क्या बात हुई

जयसिंघ-हम दो और हमारा एक बचा

शालिनी- पर बेटा ही क्यूँ

जयसिंघ-क्यूँ कि वो वारिश होगा इस घर का , मैं ने प्रॉमिस किया है पिताजी से

शालिनी- ये कौनसा प्रॉमिस है

जयसिंघ-पिताजी ने कहा था कि उनका वारिश मेरा बेटा होगा ,

शालिनी- फिर आप अपने बेटे को गाँव मे रहने देंगे क्यूँ कि वो वारिश होगा

जयसिंघ-मेरा बेटा वारिश होगा पर वो शहर3 मे रहेगा

शालिनी- ये कैसे हो सकता है

जयसिंघ-तुम्हें यही करना है

शालिनी- आप मुझे मुशिबत मे फसा रहे हो

जयसिंघ-तो हल ढूँढ लो

शालिनी- इस घर का वारिश भी होगा और इस घर मे भी नही रखना चाहते , आप ना मेरी गर्दन दबा दो

जयसिंघ-शालिनी , यहाँ मैं टेन्षन से मर रहा हू और तुम हो कि मज़ाक कर रही हो

शालिनी- मज़ाक आप कर रहे हो , बेटे को वारिश बनाना है पर गाँव मे रखना नही चाहते , पिताजी का प्रॉमिस पूरा करना है पर बेटे को खुद से दूर नही रखना है ,

जयसिंघ-मेरा दिमाग़ का फ्यूज़ उड़ गया है , तुम ही कुछ सोचो

शालिनी- ऐसे मे सिर्फ़ एक रास्ता निकल सकता है

जयसिंघ-क्या ?

शालिनी- आप को कुछ बात माँ से करनी होंगी और कुछ बाते पिताजी से

जयसिंघ-जैसे

शालिनी- मुझे सोचने दीजिए

जयसिंघ-तो सोचो ना

शालिनी- आप मेरे कुछ सवाल के जवाब दीजिए

जयसिंघ-पूछो

शालिनी- आप को गाँव मे रहने से प्राब्लम क्या है

जयसिंघ-शहर3 ने रहने मे बुराई क्या है

शालिनी- शहर3 की जगह दूसरा शहर नही चलेगा

जयसिंघ-चल जाएगा पर शहर3 मे मेरी कंपनी है

शालिनी- मेरे सवाल का जवाब दीजिए

जयसिंघ-ओके , तुम जितना पुछोगी उतना बोलूँगा

शालिनी- तो आप दूसरे शहर मे रह सकते है

जयसिंघ-हाँ

शालिनी- पूजा का शहर2 चलेगा

जयसिंघ-हाँ

शालिनी- हमारे गाँव के पास वाला शहर चलेगा

जयसिंघ-चल जाएगा (एक्सट्रीम कंडीशन मे)

शालिनी- हमे बेटी हुई तो

जयसिंघ-पिताजी को बेटा चाहिए

शालिनी- बेटा होने तक मैं माँ बनूँगी

जयसिंघ-हाँ

शालिनी- बेटा हुआ तो

जयसिंघ-पिताजी अपने पास रखने को बोलेंगे

शालिनी- आप क्या करेंगे

जयसिंघ-सिंग हूँ मैं , प्रॉमिस किया है पूरा करूँगा ,

शालिनी- और मेरा क्या

जयसिंघ-उसी लिए तो तुम्हें सोचने को कहा है

शालिनी- और मैं कहूँ की बेटे को पिताजी के पास रख दो तो

जयसिंघ-मैं रोज रोउंगा अपने बेटे को याद करके , उस के सिवा क्या कर सकता हूँ

शालिनी- आपको एक बात बता दूं , पिताजी को आप समझ ही नही पाए हो

जयसिंघ-क्या मतलब

शालिनी- पिताजी ने अपने पहले प्रॉमिस अपनी पसंद की लड़की से शादी करना , ये तो बिना आपको मुझसे मिलाए बिना पूरा कर सकते थे , पिताजी जिस से कहते आप शादी कर लेते , पर पिताजी ने ऐसा नही किया , पिताजी जिस से कहते आप शादी कर लेते , पर पिताजी ने ऐसा नही किया , पिताजी ने आपकी पसंद का ध्यान रखा ,

जयसिंघ-हाँ

शालिनी- तो क्या आपको लगता है पिताजी एक बेटे को उसकी माँ से दूर रखेंगे , एक बेटे को अपने बाप के प्यार से दूर रखेंगे , पिताजी खुद 5 बच्चों के बाप है , वो ऐसा करेंगे आपने सोचा ही कैसे

जयसिंघ-मेरा दिमाग़ ही काम नही कर रहा है

शालिनी- आप पिताजी से कहेंगे कि आपको अपने बेटे के साथ शहर3 रहना है तो वो मना नही करेंगे , वो भी बाप है ,उनको एक बाप की फीलिंग क्या होती है वो पता है

जयसिंघ-इसी लिए तो मैं प्रोमिस पूरा भी करना चाहता हूँ और शहर3 भी रहना चाहता हूँ

शालिनी- हम कल प्यार से पिताजी से बात करेंगे

जयसिंघ-तुम अकेली करना , मैं पिताजी का सामना नही कर सकता

शालिनी- कैसे सिंग हो आप , अपने पिताजी से बात करने को डर रहे हो

जयसिंघ-मैं अकेले 10 लोगो को पटक सकता हूँ पर वो पिताजी हैं

शालिनी- तो मेरे पास एक रास्ता है

जयसिंघ-क्या

शालिनी- आप जल्दी शहर3 चले जाइए

जयसिंघ-फिर

शालिनी- अपने बच्चे के पैदा होते ही गाँव आ जाइए

जयसिंघ-फिर

शालिनी- तब तक मैं कुछ सोच लूँगी

जयसिंघ-शालिनी

शालिनी- पक्का तब तक मैं कुछ सोचूँगी

जयसिंघ-कल बात करके रखती तो बाद मे अच्छा होगा

शालिनी- क्यूँ अच्छा नही होगा

जयसिंघ-अगर हमे बेटा हुआ तो पिताजी उसको खुद से दूर नही करेंगे

शालिनी- बेटे पे जितना बाप का हक होता है उतना ही उसके दादाजी का भी हक होता है

जयसिंघ-तुम समझती क्यूँ नही हो

शालिनी- मैं सब समझ गयी हूँ

जयसिंघ-क्या

शालिनी- पूरा प्राब्लम मुझे समझ मे आ गया

जयसिंघ-तो हल बताओ

शालिनी- प्राब्लम कॉंप्लिकेटेड है , तो सल्यूशन आराम से मिलेगा

जयसिंघ-देखो बाद मे कुछ गड़बड़ हुई तो

शालिनी- वो ज़िम्मेदारी मेरी रहेगी

जयसिंघ-तुम्हें पता है ना , तुम्हारे एक तरफ मैं और दूसरे

तरफ पिताजी है

शालिनी- जी , और घर की बहू का यही काम होता है कि पति और घर के बाकी मेंबर को साथ बनाए रखे , उनको खुशी दे , उनको प्यार के रिस्ते से बाँध दे

जयसिंघ-सुनने मे अच्छा लग रहा है

शालिनी- आपका क्या है करना तो मुझे पड़ता है , आप फसा देते हो मुझे

जयसिंघ-मेरी प्यारी शालिनी सब संभाल लेगी ये मुझे पता है

शालिनी- मैं संभाल तो लूँगी पर आपको मैं जैसा कहूँगी वैसा करना होगा

जयसिंघ-मेरी शालिनी जो कहेगी वही करूँगा

शालिनी- तो अपने सपने के बारे में फिर से सोचना

जयसिंघ-तुम भी मेरे बच्चे का ध्यान रखना ,

शालिनी- वो मेरे पेट मे सेफ है

जयसिंघ-और हाँ थोड़ा भी दर्द हुआ तो

शालिनी- मुझे पता है , आप इंजिनियर हो डॉक्टर नही

जयसिंघ-पहली बार बाप बनने वाला हूँ टेन्षन तो होगी

शालिनी- टेन्षन मुझे लेनी चाहिए मैं माँ बन रही हूँ

जयसिंघ-देखो मेरे जाने के बाद अपना ख़याल रखना

शालिनी- जी

जयसिंघ-नेहा नीता को मैं ने बता दिया है कि तुम्हारा ख़याल रखे

शालिनी- फिर तो टेन्षन की बात ही नही है

जयसिंघ-और छोटू है मेडिसिन लाने को , पूजा से पूछते रहना , शरमाना मत

शालिनी- मैं क्या कोई छोटी बच्ची हूँ जो इस तरह बता रहे हो

जयसिंघ-मेरे दिल को तसल्ली तो होने दो

शालिनी- आप कल शहर3 चले जाइए , यहाँ मैं हूँ , और आपकी प्राब्लम का हल मैं ढूँढ लूँगी

जयसिंघ-मुझे पूरा विश्वास है तुमपे

शालिनी- अब सोने दीजिए , बहुत रात हो गयी है

जयसिंघ-सोने से पहले थोड़ा प्यार करते है

शालिनी- बिल्कुल नही , जो करना है अपने बच्चे के हो जाने के बाद करना

जयसिंघ-तुम्हारा पेट बड़ा हो गया है

शालिनी- मुझे सोने दीजिए , आप तंग करोगे तो नींद पूरी नही होंगी और इसका असर बच्चे पे होगा

जयसिंघ-सॉरी बाबा , सो जाओ

और जयसिंघ ने शालिनी को किस करके सुला दिया

कल जयसिंघ शहर चला जाएगा

.शालिनी को फिर एक ज़िम्मेदारी मिल गयी

.शालिनी कौनसा हल ढूँढती है वो देखना होगा
 
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