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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 974

रमेश ने अपने दिल की बात पूजा को बताई

रमेश के प्यार करने का तरीका अलग था

वो जो बोलता उसमे उसका प्यार दिखाई देने लगा पूजा को

रमेश जो बोलता वो सब सच बोलता

रमेश ने अपने बारे में पूजा को सब कुछ बता दिया

पूजा से कितना प्यार करता है वो बताया

शादी के बाद वो कितना प्यार करेगा वो भी बताया

रमेश की बातों मे पूजा सीसी सिर्फ़ प्यार ही प्यार दिख रहा था

रमेश ने पूजा की ऐसी जगह प्रपोज़ किया जहाँ हर लड़का प्रपोज़ करने से डरता है

रमेश ने पहले पूजा को मंदिर मे प्रपोज किया फिर पूजा के पिताजी के सामने प्रपोज़ किया

रमेश को किसी बात का डर नही था और वो छुप छुप कर प्यार करने पे विश्वास नही रखता था , उसने जान बुझ कर पूजा को उसके पिताजी के सामने प्रपोज़ किया

रमेश मे इतना कॉन्फिडेन्स था कि वो पूजा की रक्षा कर सके

अच्छा जॉब पर था

खुद का घर था ,

दिखने मे अच्छा था जैसा पूजा को चाहिए वैसा था

पूजा के सपनो के राजकुमार जैसा था रमेश

रमेश की हर एक बात पूजा को पसंद आई उसका प्रपोज़ करना पूजा को प्यार करने के लिए मनाना

पहले प्यार को नाम देना चाहता है रमेश फिर पूजा को ज़िंदगी भर प्यार करना चाहता है

पूजा को भी रमेश पसंद था पर वो हाँ क्यू कह रही थी

ये बात रमेश ने भी नोटीस की , पूजा का उसको गले लगाना उसको प्यार करना , रमेश मंदा का नाम लेकर पूजा को जला रहा था ताकि पूजा के दिल की बात ज़ुबान पर आ जाए

रमेश ने झूठ मूठ का कमरे से बाहर जाने का नाटक किया

रमेश के बाहर जाते ही पूजा को लगा जैसे उसका सब कुछ लूट गया वो

उसकी आत्मा उससे दूर जा रही हो

पूजा को खुद पर गुस्सा आ गया

पूजा ने गुस्से मे खुद के बाल नोच लिए और भाग कर कमरे से बाहर आ गयी

पूजा-----

मैं वैसे ही रमेश के पीछे गयी.

मेरे बाल बिखरे हुए थे ,कपड़े मुरझाए हुए थे.

मेरा दुपट्टा मेरे बदन पे कम ज़मीन पर ज़्यादा था.

जैसे ही मैं बाहर आई रमेश घर से बाहर जाने वाला था कि.मैं ने रमेश का हाथ पकड़ लिया

रमेश रुक गया

मैं रमेश का हाथ पकड़ कर वापस कमरे मे ले जाने लगी

मेरी बात अभी पूरी नही हुई थी

पिताजी ने मेरी हालत देखी तो गुस्से मे उनकी आँख लाल हो गयी.

माँ को तो हार्ट अटॅक आते आते रह गया

पिताजी के कुछ कहने या करने से पहले मैं रमेश का हाथ पकड़ कर अपने कमरे मे ले गयी पास चली गयी

पहली बार डोर खुला रखा था

पर इस बार रमेश वापस मंदा के पास ना जाए इस लिए मैं ने डोर अंदर से बंद किया

रमेश मुझे देखता रह गया , और अंदर ही अंदर हंस रहा था , उसको पता लग गया कि मैं उसको मिल गयी हूँ

मैं ने डोर बंद कर दिया और डोर को अपनी पीठ लगा कर खड़ी हो गयी जैसे मुझे डर हो कि रमेश कही मुझसे दूर ना चला जाए

रमेश- मुझे यहाँ क्यू लेकर आई हो ,, और डोर क्यूँ बंद कर दिया

पूजा- मेरी बात पूरी नही हुई है

रमेश- तुमने बात सुरू कब की है

पूजा- तुमने मुझे बोलने कब दिया

रमेश- पूछा ना कि तुम मुझसे शादी करोगी , और तुमने कहा की नही

पूजा- मैं ने ऐसा कब कहा

रमेश- झूठ मत बोलो

पूजा- मैं ने कहा मुझे सोचने दो

रमेश- तुम सोचो तब तक मैं मंदा से मिलके आता हू

पूजा- यहाँ से बाहर जाके देखो , टाँग तोड़ दूँगी

रमेश- मेरी बीवी तो गुस्सा वाली भी है अच्छा हुआ पता चला ,,

पूजा- मैं तुम्हारी बीवी नही हूँ

रमेश- कौन हो तुम

पूजा- पूजा नाम है मेरा , 12त मे पढ़ती हूँ ,

रमेश- तुम्हारे घर मे कौन कौन है

पूजा- मेरे पिताजी जिनके हाथ मे गन है जो एक सेकेंड मे टुमरी जान ले सकते है , मेरी माँ , मेरे बड़े भैया , मेरी दो छोटी बहनें और एक प्यारा सा छोटा भाई

रमेश- 2 सालिया मिलेंगी , अच्छा है मेरे लिया

पूजा- क्या कहा

रमेश- मेरी साली.का नाम तो बताओ

पूजा- नेहा नीता , वो तुम्हारी साली नही है

रमेश- मतलब तुम्हें मैं पसंद नही हूँ

पूजा- सोचने दो

रमेश- अब क्या बूढ़ी होने तक सोचोगी , मेरी माँ शाम तक आ जाएगी , मंदा तो आज ही शादी भी करने को तय्यार हो जाएगी

पूजा- तुम मेरे पिताजी को कुस्ती मे हरा दोगे ना

रमेश- क्या ?

पूजा- वो क्या है ना कि मैं ने अपने फिराजी से कहा था कि जो उनके सामने खड़ा रह पाएगा उसी से शादी करूँगी

रमेश- बस इतनी सी बात है , एक झटके मे हरा दूँगा

पूजा- मेरे पिताजी अब तक बस एक बार हार चुके है कुस्ती मे और वो भी जानबूझ कर हारे थे

रमेश- व्हाट

पूजा- वो पहलवान है

रमेश- तुमने कहाँ फसा दिया

पूजा- इसी लिए मैं सोच रही थी

रमेश- तुम ये बताओ तुम मुझे प्यार करती हो कि नही

पूजा- तुम दिखने मे अच्छे हो ,, बॉडी भी अच्छी दिख रही है ,इंजिनियर हो , साफ दिल के हो ,

रमेश- तो मैं तुम्हें पसंद हूँ

पूजा- तुम्हारे प्रपोज़ करने का अंदाज़ा मुझे पसंद आया

रमेश- आज कल प्यार का नाम सुनते ही खून ख़राबा होता है , एक ग़लत फ़हमी से खून कर देते है इस लिए मैं चाहता था कि हमारे बीच कोई ग़लतफ़हमी या झूठ या छुपना छुपाना ना हो , उस लिए भगवान के सामने तुम्हें प्रपोज़ किया

पूजा- यही तो तुम्हारा स्टाइल पसंद आया

रमेश- और तुम्हारे पिताजी तुमसे प्यार करते है तो उनको भी लगेगा कि मुझे कुछ तो बात है जो उनके सामने उनकी बेटी को प्रपोज़ किया , गन से भी नही डरा , तुमसे कितना प्यार करता हू ये पता चल गया होगा तुम्हारे पिताजी को

पूजा- वो सब तो ठीक है , पर तुम हार गये तो

रमेश- प्यार करने वाले हारते नही है

पूजा- ये मूवी नही रियल है

रमेश- तुम्हें मुझपे विश्वास है ना

पूजा- तुमसे अभी तो मिली हूँ

रमेश- कभी कभी किसी के बारे में जाने को पूरी ज़िंदगी कम पड़ जाती है और कभी कभी एक पल मे सब कुछ पता चल जाता है

पूजा- तुम्हें विश्वास तो है पर अपने पिताजी पे तुमसे ज़्यादा विश्वास है

रमेश- क्या मतलब

पूजा- मुझे पिताजी पे विश्वास है कि वो कभी नही हारेंगे

रमेश- मैं तो तुम्हें पाने के लिए पूरी जान लगा दूँगा

पूजा- तुम्हें समझ नही रहे हो

रमेश- तुम मुझे प्यार करती हो और मुझसे शादी करना चाहती हो ना

पूजा- हाँ , पर मैं ये नही चाहती कि तुम हार जाओ फिर मुझे तुम्हें भूलना होगा

रमेश- डरो मत , तुम हाँ कहो फिर देखो ,मैं क्या करता हूँ

पूजा- क्या करोगे

रमेश- तुमसे शादी करूँगा

पूजा- ये भूल जाओ कि मैं भाग कर शादी करूँगी

रमेश- तुम्हारे पिताजी हमारी शादी करेंगे , और मैं भाग कर शादी करने पे विश्वास नही रखता , माता पिता के आशीर्वाद से शादी होनी चाहिए

पूजा- ठीक है मैं बात करती हूँ पिताजी से

रमेश- क्या कहोगी

पूजा- यही कि मुझे मेरे सपनो का राजकुमार मिल गया है

रमेश- ओह नो , अब मंदा को भूलना होगा

पूजा- क्या कहा

रमेश- मज़ाक कर रहा था , तुम गुस्से मे बहुत सुन्दर दिखती हो

पूजा- ज़्यादा मस्का मत लगाओ , कुस्ती खेलने को तय्यार हो जाओ

रमेश- कुस्ती की जगह पंजा लड़ाना नही चलेगा

पूजा- नही , और मैं तुम्हारे जीतने के बाद बताउन्गी कि मैं तुमसे शादी करूँगी कि नही

रमेश- जैसा तुम ठीक समझो

मैं रमेश से बात कर रही थी बाहर पता नही क्या हो रहा था

पिताजी बाहर खड़े सोचते रह गये कि ये हो क्या रहा है.

पिताजी ने गेट पर नॉक किया

पिताजी- पूजा क्या हो रहा है अंदर

पूजा-पिताजी रुकिये 2 मिनिट

रमेश से बात करने के बाद हम बाहर आ गये.

पिताजी-पूजा ये क्या हो रहा है, तुम अंदर क्या कर रही थी

पूजा-पिताजी रमेश मुझसे शादी करना चाहता है .

पिताजी- क्या , ये कौन है कहाँ से आया है कुछ पता नही है ,, इसकी हिम्मत कैसे हुई

पूजा- पिताजी रमेश आपसे कुस्ती खेलना चाहता है

पिताजी-क्या कहा

पूजा- रमेश आपको हरा कर मुझसे शादी करना चाहता है

पिताजी- ये तुम क्या कह रही है

पूजा- पिताजी मैं ने कहा था ना कि जो आपके सामने खड़ा होगा उस से शादी करूँगी ,

माजी-पूजा ये सब क्या है , ऐसे थोड़ी होती है शादी

पिताजी- तुम एक.मिनिट रूको

पूजा- रमेश ने मुझे अपने बारे में सब कुछ बता दिया है ,

पिताजी- पूजा तुझे पता है ना तू क्या कह रही है

पूजा- रमेश अच्छा लड़का है , आप कुस्ति खेलिए अगर रमेश जीत गया तो बात करेंगे वरना ये यहाँ से चला जाएगा , उस गन की ज़रूरत नही पड़ेगी

पिताजी- ठीक है ,

माजी- बिना बात किए शादी नही होगी पहले बता दे रही हूँ

पूजा- माँ जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा

पिताजी- चलो अखाड़े मे

पूजा- पिताजी यही आँगन मे खेलते है बिना वजह पूरे गाँव को पता चल जाएगा

पिताजी- ठीक है

पिताजी कुश्ति की तैयारी करने लगे

रमेश मे कॉन्फिडेन्स तो था पर पता नही क्या होगा

पूजा को पता था कि उसके पिताजी कभी नही हारेंगे , उसको रमेश को भूलना होगा , इसी लिए उसने रमेश को हाँ नही कहा ,

पर रमेश के हारते ही पूजा को दिल टूट जाएगा

पूजा पहली बार दुआ कर रही थी कि उसके पिताजी ये कुश्ती हार जाए

उधर माँ पिताजी से बात कर रही थी

माजी- ये सब क्या है

पिताजी- तुम टेन्षन मत लो , इस लड़के को हरा दूँगा , ये चुप चाप यहाँ से चला जाएगा , खून ख़राबे से यही अच्छा है

माजी- आपकी बात सही है , पर पूजा क्या चाहती है ये पूछा आपने

पिताजी- पहले कुश्ती हो जाने दो फिर देखते है ,

पिताजी और रमेश तय्यार हो गये कुश्ती खेलने के लिए
 
फ्लश बॅक 975

पूजा के कहने पे पिताजी तय्यार हो गये कुश्ती खेलने को

पिताजी को ये आइडिया अच्छा लगा

बिना किसी खून ख़राबे के बात ख़तम हो जाएगी

वरना पिताजी तो रमेश की जान ले लेते

पिताजी को लगा क़ि रमेश ने उनको हरा दिया तो पूजा के शादी की बात कर सकते है

पर रमेश के जीतने के चान्सस कम थे

माजी को भी लग रहा था कि पिताजी जीतेंगे पर पूजा चाहती क्या है ये इम्पोर्टेंट था

माजी ने ये बात पिताजी को बता दी कि पूजा क्या चाहती है इस पे सोचना

पूजा रमेश की तरफ खड़ी थी

पूजा को अपना प्यार पाने से पहले खोने का डर सता रहा था

पूजा रमेश भी पिताजी की बॉडी देख कर थोड़ा अपना कॉन्फिडेन्स लूस कर बैठा पर पूजा ने उसको हिम्मत दी

पिताजी- तय्यार हो बर्खुरदार

रमेश- हाँ , आज आपको हरा कर पूजा से शादी करूँगा

पिताजी- फिर तो ये कभी हो ही नही पाएगा क्यूँ कि मैं ने हारना सीखा ही नही

रमेश- प्यार की ताक़त के सामने अच्छे अच्छे पहलवान हार जाते है

पूजा- आपका हो गया होगा तो मैं रूल बताती हूँ

पिताजी- पूजा कैसे रूल , रमेश हार गया तो वो यहाँ से चला जाएगा सिंपल

पूजा रमेश को जिताना चाहती थी

पूजा- ये कुश्ती मेरे लिए हो रही है तो मेरे रूल होंगे , कुश्ती 3, बार होगी जो 2 बार जीतेगा वो विन्नर

पिताजी- पूजा कुश्ती मे ऐसा नही होता

पूजा- पिताजी रमेश को कुश्ती के बारे में ज़्यादा पता नही है , पहली बार मे तो ये हार जाएगा , रामश को फिर से मोका मिले इस लिए ये रूल है

पिताजी- ठीक है जैसा तुम कहो

और दोनो मैदान मे आ गये

फिराजी के सामने रमेश टिक ही नही पाएगा ये बात वहाँ जो मोजूद थे सबको पता थी

पूजा तो बस दुआ माँगने के सिवा कुछ नही कर सकती थी

माँ बस मुझे देख रही थी

उनको मेरी परेशानी साफ दिखाई दे रही थी

रमेश और पिताजी आपने सामने आ गये

दोनो मे कुश्ती सुरू हो गयी

जैसा सोचा था वैसा ही हो रहा था

पिताजी रमेश पे भारी पड़ रहे थे

रमेश तो पिताजी मे सामने कुछ भी नही था

पिताजी की ताक़त और उनके दाँवपेच के सामने रमेश हारता हुआ नज़र आ रहा था

रमेश अपना दिमाग़ लगा रहा था पर पिताजी तो कुश्ती मे चेम्पियन थे

पिताजी- और ज़ोर लगाओ , मैं तो हिल भी नही रहा हूँ अपनी जगह से

रमेश पूरी ताक़त लगा रहा था पर पिताजी उसको मात दे रहे थे

मैं अपने नाख़ून खा रही थी

रमेश को हारता हुआ देख कर मेरे पसीने निकल रहे थे

मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था

और फिर पिताजी ने पहला राउंड ख़तम करने का सोचा

और रमेश को ज़ोर दार नीचे पटक दिया

पिताजी जीत गये

पर रमेश को पटकने से उसके हाथ पे चोट लग गयी

रमेश के हाथ से खून निकलने लगा

ये देख कर पूजा भाग कर रमेश के पास गयी

और रमेश के खून को निकलने से रोकने लगी

पिताजी और माँ तो शॉक्ड होकर मुझे देख रहे थे

मैं पिताजी के पास जा कर जीतने की बधाई देने की जगह रमेश के पास जाकर उसका खून रोक रही थी

मैं ने अपना रुमाल निकाल कर रमेश के हाथ पर लगा दिया

पूजा- पिताजी आप देख कर खेल नही सकते , देखा नही कितनी चोट लग गयी रमेश को ,

पूजा की बात सुनते ही पिताजी और माँ एक दूसरे के चेहरे देखने लगे

उनको तो समझ मे नही आया कि पूजा को आज हो क्या गया है

पूजा- रमेश तुम ठीक तो हो ना

रमेश- ये तो मामूली चोट है

पूजा-तुम्हें ज़्यादा चोट लगी है इस कुश्ती को यही रोक देते है

रमेश- तुम्हारे लिए मुझे ये कुश्ती जीतनी होगी , तुम बैठो , अभी 2 राउंड बाकी है

पूजा - पर

रमेश- तुम चिंता मत करो , बस दुआ करो कि मैं जीत जाउ

और मैं अपनी जगह पे चली गयी

पूजा- पिताजी तोड़ा आराम से , रमेश कोई पहलवान नही है आओ तो

माजी- पूजा ये क्या तरीका है बात करने का अपने पिताजी से

पूजा- मैं तो बस

पिताजी- सही तो कहा पूजा ने ,, ये जगह भी तो अखाड़ा नही है यहाँ गीरेंगे तो चोट तो लगेगी ,

पूजा के कहने पर फिर से कुश्ती सुरू हो गयी

स्कोर था पिताजी 1 रमेश 0

फिर से कुश्ती सुरू हुई

इस बार रमेश कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से लगा रहा था

शायद मेरी उसके लिए फिकर देख कर रमेश कुछ ज़्यादा ही जोश से लड़ रहा था

पर ये कुश्ती थी

यहाँ जोश के साथ दिमाग़ भी ईस्तमाल करना पड़ता है

पिताजी के पास इतनी सारी रणनीति थी कि पूछो ही मत

रमेश को पहले ज़ोर निकालने दिया

रमेश को थका रहे थे पिताजी

ताकि जब वो ज़ोर लगाए तो एक झटके मे पटक दे रमेश को

और हुआ भी ऐसा ही

रमेश का जोश ठंडा पड़ रहा था

पूजा के हाथ काप रहे थे

पूजा आँख बंद करके दुआ माँग रही थी

पूजा की हालत देख कर माजी समझ गयी कि हो क्या रहा है

पिताजी अब रमेश पे अपना ज़ोर लगाने वाले थे

पिताजी ने ज़ोर लगाना सुरू किया रमेश पीछे हट रहा था

अब पिताजी ने रमेश के उपर अच्छी पकड़ बना ली

और पटकने वाले थे कि माँ की चीख सुनाई दी सबको

माँ नीचे गिर गयी थी

माँ की चीख सुनते ही पिताजी रुक गये

माँ नीचे गिरी हुई थी और अपने पैर पकड़ कर सहला रही थी

माँ को इस हालत मे देख जर पिताजी ने रमेश को छोड़ दिया और माँ के पास जाने वाले थे कि रमेश ने इस बात का फ़ायदा उठा लिया पिताजी को पटक दिया

पिताजी का ध्यान माँ पे था जिस से वो संभाल नही पाए और रमेश 2 राउंड जीत गया

पिताजी को रमेश पे गुस्सा तो आया पर वो जल्दी माँ के पास गये

पूजा और रमेश भी आ गये

पिताजी- क्या हुआ

माजी-कुछ नही , मोच आ गयी थी पैरो मे

पिताजी- छोटू वैद्या को बुलाओ

माजी- अब ठीक है , मैं ने सहला कर ठीक कर दिया

पित्स्जी- पक्का तुम ठीक हो

मसजी- हाँ, आप कुश्ती खेलिए

पूजा- पिताजी आप हार गये

पिताजी- ये धोके से हुआ

पूजा- प्यार और जंग मे सब चलता है

पिताजी- पूजा तुम किस की तरफ हो

पूजा- वो मैं

माजी- अब आख़िरी बार है , जाइए खेलिए

पूजा रमेश को अपने साथ लेकर गयी

पूजा- रमेश पिताजी की कमर को पकड़ना , ताकि तुम उनको हरा सको

रमेश- तुम्हारे पिताजी की हराना बहुत मुश्किल है , फिर भी मैं अपनी तरफ से पूरी कॉसिश करूँगा

पूजा- तुम्हें जीतना है याद रखना ,

रमेश- तुम्हारे लिए तो जीत कर रहूँगा

पिताजी- क्या बाते हो रही है

पूजा- कुछ नही ,

और रमेश मैदान मे आ गया

स्कोर था पिताजी1 रमेश 1

ये फाइनल राउंड था दोनो को जीतना ज़रूरी था

फिर से कुस्ती सुरू हो गयी

इस बार रमेश फुल जोश मे था , एक जीत का जोश था उसका डर ख़तम हो चुका था

पिताजी थोड़े कन्फ्यूज़ लग रहे थे

पिताजी रमेश से ज़्यादा मुझे देख रहे थे

मेरी आँखो मे कुछ पढ़ने की कोशिस कर रहे थे

कुश्ती सुरू भी हो गयी पर पिताजी बस मेरी तरफ देख रहे थे

पता नही क्या सोच रहे थे

रमेश पिताजी पे भारी पड़ रहा था

ये देख कर मैं भी भूल गयी कि रमेश पिताजी से लड़ रहा है

मैं रमेश का नाम ले रही थी

मेरे ऐसा करते ही पिताजी समझ गये कि मैं क्या चाहती हूँ

पिताजी के चेहरे पे एक स्माइल आ गयी

और अपनी बेटी के लिए पिताजी ने हारने का फ़ैसला किया

पिताजी ने रमेश के उपर ज़ोर लगाया

ऐसा दिखाया कि वो भी जीतना चाहते है

लेकिन अचानक पिताजी ने पैरे फिसलने का नाटक किया

और रमेश ने उसका फ़ायदा उठाते हुए पिताजी को पटक दिया

किसी को यकीन नही हो रहा था

पिताजी हार गये

छोटू तो हॅंग गया था

मैं भी कुछ देर के लिए शॉक्ड हो गयी

फिर जैसे लगा कि रमेश मेरा हो गया है तो मैं भाग कर रमेश के गले लग गयी

मुझे इस तरह रमेश के गले लगे हुए देख कर पिताजी के चेहरे पे स्माइल थी

माँ भी समझ गयी कि मैं क्या चाहती हूँ

मैं तो सब कुछ भूल कर रमेश की जीत की खुशी मना रही थी

पिताजी ने हमे आवाज़ दे कर अलग कर दिया

पिताजी- पूजा ये सब क्या है

पूजा- पिताजी आप हार गये

पिताजी- रमेश ने हरा दिया मुझे

पूजा- तो

पिताजी- तो क्या ,बात करते है

पूजा- पहले मैं बात कर लूँ रमेश से

पिताजी- ठीक है , तू जो चाहती है वही होगा

माजी- मैं क्या कह रही थी

पिताजी- तुम कुछ देर चुप रहो

माजी- पर

पिताजी- पूजा क्या चाहती है वो देखते है फिर बात करेंगे

माजी- मैं भी यही कहना चाहती थी

रमेश खुश था उसको मैं मिल गयी थी

रमेश को यकीन नही हो रहा था कि वो जीत गया है

उसको तो ये सपने है ऐसा लग रहा था

पूजा - रमेश तुम जीत गये

रमेश तो होश मे नही था

पूजा- रमेश तुम जीत गये

रमेश- तुम मेरी हो

मुझे अपने प्यार का इज़हार जो करना था अब
 
फ्लॅशबॅक 976

रमेश और पिताजी के बीच कुस्ती खेली गयी

मुझे पता था कि पिताजी को हराना मुश्किल है

और मैं ऐसा चाहती थी कि रमेश मेरे पिताजी को हरा दे

जो नमुकिन था

मुझे तो मेरा प्यार खोते हुए दिखाई दे रहा था

मैं भी ना , क्या ज़रूरत थी पिताजी के साथ कुस्ति खेलने को बोलने की

रमेश को खोने से डर लग रहा था

पर कुस्ति का रिज़ल्ट आया वो देख कर मैं बहुत खुश हुई

पहली बार पिताजी के हारने पे मैं खुश थी

मुझे रमेश मिल गया

मुझे यकीन नही हो रहा था कि रमेश ने मेरे लिए पिताजी को हरा दिया

रमेश भी शॉक्ड था की ये कैसे हो गया

पर एक बात थी , माँ और पिताजी मेरे दिल की बात जान गये थे

उनको पता था कि मेरी खुशी किस मे है

पिताजी आज जानबूझ कर हार गये और माँ भी जानबूझ कर फिसल गयी थी

ये मुझे बाद मे पिताजी ने बताया था , शादी के बाद बताया था

मैं इतनी खुश थी रमेश के जीत पर कि क्या बताऊ

मुझे तो जन्नत मिल गयी हो ऐसी खुश हो रही थी

मैं तो नाचने लगी

मेरे रिक्षन से पिताजी समझ गये कि उनके हारने से उनकी बेटी जीत गयी है

लेकिन कुस्ति खेली क्यूँ गयी ये किसी को पता नही था

रमेश के जीतने से अब पिताजी रमेश से बात करेंगे

और रमेश अपने जीतने से शादी के सपने देखने लगे

मैं भी रमेश को अपना बनाने के सपने देख रही थी

रमेश जीत गया अब मेरी बारी थी प्यार का इज़हार करने का

मैं ने पिताजी से बात की और वापस रमेश के साथ कमरे मे चली गयी

इस बार माँ और पिताजी ने कोई ऐतराज़ नही जताया

कमरे मे जाते ही , गेट बंद करते ही रमेश ने मुझे गले लगा लिया और मेरे कान मे कहा

रमेश-शादी मुबारक हो,

पूजा-क्या कहा तुमने

रमेश-अपने पति से ऐसी बात करते है. आप कहना चाहिए

पूजा-मैं तुम से बात करने लाई हूँ यहाँ पर,मैने हाँ नही कहा है

रमेश-हाँ नही कहा तो मुझे अब तक गले क्यूँ लगा कर रखा है.

पूजा-तुम्हें मेरे गले लगे हो

रमेश-बात एक ही है ,

और रमेश वैसे गले लगाते हुए मुझे बेड पर ले गया.

मैं उसकी बाहों से दूर नही होना चाहती थी. एक अजीब सा सुकून मिला मुझे

रमेश - तो , मैने तुम्हारे लिए तुम्हारे पिताजी को हरा दिया

पूजा-तो

रमेश- तो अपने दिल की बात बता दो

पूजा- मेरे दिल मे कुछ नही है

रामेआ- अच्छा , तो.मुझे मंदा से बात करनी होंगी

मंदा का नाम सुनते ही मैं ने रमेश को कस के पलट लिया

पूजा-तुम.मेरे हो , दुबारा ऐसा कहा तो टाँग तोड़ दूँगी , पहलवान की बेटी हूँ मैं

रमेश- शादी के बाद मेरा क्या होगा

पूजा- वही होगा जो मंजूरे पूजा होंगी

और मैं हँसने लगी

रमेश- बड़ी हसी आ रही है , अभी तुम्हारी हसी बंद करता हूँ

पूजा - कैसे

रमेश-मेरे प्यार से

और रमेश ने मेरे होंटो से अपने होन्ट मिला दिए.

उसके होंटो से मेरे होंटो से मिलते ही मेरी आँख अपने आप बंद हो गयी .और मैं खुद को इस दुनिया से दूर किसी और दुनिया मे महसूस करने लगी

मेरा पहला किस था ,वो किस मैं कभी नही भूलूंगी ,क्या किस था वो ,किस करने मे इतना सुकून मिलता है पहली बार फील कर रही थी.

रमेश भी मुझे किस करके ऐसे आनद को महसूस कर रहा था जिस से उसे लग रहा था कि अब तक वो अधूरा था .आज जाके वो पूरा हुआ है

रमेश ने मुझे किस किया ,रमेश मुझे किस करता गया.

मेरे पिताजी गेट के पास खड़े थे और मैं ऐसे आदमी को किस कर रहा थी जिसे मैं कुछ घंटे पहले मिली हूँ.और इन कुछ घंटो मे मेरा दिल क्या मेरी आत्मा जीत ली

सिर्फ़ हमारे होंठ नही मिल रहे थे ,हमारा एक एक अंग किस कर रहा था.

हमारी आत्मा एक दूसरे को.किस कर रहे थे

मेरा बदन रमेश के शरीर की गर्मी मे पिघल रहा था.

उसका किस करना मैं आज तक नही भूली.

किस करने के बाद रमेश ने मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी आँख से पूछ ने लगा कि मेरा जवाब क्या है

मैं ने पलके झुका कर हाँ कहा.

हाँ कहते ही वो मेरे उपर से अलग हुआ और

रमेश- माँ को जल्दी बुलाना होगा

पूजा - तुम्हारी माँ की

और मैं ने रमेश को वापस बेड पर गिरा दिया

रमेश ने मेरे अंदर एक आग लगाई थी वो आग अब बढ़ती जाएगी.

पता नही रमेश के बिना मैं कैसे करूँगी.

रमेश को अपने उपर गिरा के इस बार मैं रमेश को किस करने लगी.

मेरे किस करने से रमेश को उसका जवाब प्रूफ के साथ मिला ,

पिताजी बाहर खड़े सोचते रह गये कि ये हो क्या रहा है.

पिताजी ने गेट पर नॉक किया

पूजा-पिताजी रुकिये 2 मिनिट

और फिर से रमेश को किस करने लगी.

किस करने के बाद रमेश ने मुझे फिर से प्रपोज़ किया
 
रमेश- पूजा तुम.मुझ से शादी करोगी

पूजा-जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी करूँगी

रमेश- माँ निकल चुकी होंगी शहर2 से , वो तो शेहरा और रिंग लेकर घूमती है मेरी शादी के लिए

पूजा- तो क्या यहाँ भी रिंग लेकर आएँगी

रमेश- मेरी माँ की अपने पोते पोती का चेहरा देखना है

पूजा- तो देर किस बात की है

रमेश- तो आज सगाई कर लेते है , मेरी माँ की टेन्षन ख़तम.हो जाएगी

पूजा-मेरे पिताजी नही.मानेगे , वो पहले पूछताछ करेंगे

रमेश- मैं अपनी कंपनी के मेनेज़र और कुछ फ्रेंड को बुलाता हूँ फिर तो चल जाए गा

पूजा- तुम टेन्षन मत लो , तुमसे ज़्यादा अब मुझे शादी करने की जल्दी है

रमेश - फिर भी तुम्हारे पिताजी.मान जाए गे

पूजा- मेरे पिताजी को मुझे खुश देखना है , हाँ वो तुम्हारे बारे पूछताछ करेंगे तब सगाई होंगी

रमेश- आज सिर्फ़ मेरी माँ और तुम्हारे पिताजी के सामने रिंग बदल लेते है , और डाइरेक्ट शादी क्या कहती हो

पूजा- ये हो सकता है

रमेश- तो शादी की मुबारक बाद हो

पूजा- तुम्हें भी.शादी मुबाराक हो

और हम.बाहर आ गये

पिताजी वही अपने अंदाज़ मे बात करने को तय्यार थे

पिताजी-पूजा ये क्या हो रहा है, इतनी देर से क्या बात हो रही थी

पूजा-मैं रमेश से शादी करना चाहती हूँ.

पिताजी-क्या कहा

पूजा-पिताजी रमेश से अच्छा पति नही मिलेगा मुझे, मुझे जैसा राजकुमार चाहिए वैसे सारी खूबिया है रमेश मे

पिताजी-ये कौन है कहाँ से आया है कुछ पता है तुम्हें,ऐसे शादी नही की जाती,

मैं ने सुबह से लेकर अब तक की सारी बात बता दी.

पिताजी-तुम्हें पसंद है ये( ये तो मुझे पता है कि पूजा को रमेश पसंद है बस पूजा के मूह से सुनना चाहता हूँ )

पूजा-हाँ, और 1 महीने के अंदर हमारी शादी करा दीजिए

पिताजी-तेरी उमर

पूजा-मुझे कुछ पता नही है, मुझे रमेश से शादी करनी है.

पिताजी-ठीक है पर मुझे इसकी फॅमिली से मिलना होगा

माजी- रमेश को.कहो.इसकी फॅमिली को बुला ले

रमेश-वो शाम तक आ जाएँगे. उनको बुलाया है

पूजा- रमेश की.माँ आ रही है

पिताजी- ये तो अच्छी बात है

पूजा-हाँ आज बात करके रिंग बदल देते है

माजी- पूजा ऐसा नही होता

पूजा- माँ बात करके रिंग बदल लेंगे

पिताजी- देखो पूजा ,, लड़का हमे भी पसंद है , बस कुछ बाते होंगी फिर शादी होंगी

पूजा - लेकिन

पिताजी- सब इतनी जल्दी नही होता , अभी बात करते है और अगले हफ्ते सब ठीक रहा तो सगाई कर देंगे

माजी- घर देखना पड़ता है बाकी बाते देखनी पड़ती है

उसके बाद सगाई होंगी

पूजा- आपको रमेश पसंद है यही मेरे लिए खुशी की बात है अब आप जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा

पिताजी- छोटू जा ठाकुरजी को बुला के ला

माजी-ठाकुरजी हाँ हाँ उनको बुलाते है

पिताजी- ठाकुर सब पता कर लेगा एक झटके मे उसके पहचान वाले बहुत है शहर2 मे

माजी- इतनी जल्दी कुछ नही करेंगे , जयसिंघ को तो आने दीजिए तब होंगी सगाई

पिताजी- हम सगाई नही कर रहे है आज बस बाते होंगी

माजी- पूजा जा तय्यार हो जा , और इनको भी मलम पट्टी कर दे

पिताजी- और तुम.इतनी परेशान क्यूँ हो , हम.सब देख कर ही बात आगे लेकर जाएँगे

माजी- जैसा आप ठीक समझे

पिताजी- जयसिंघ के आने मे टाइम लगेगा , तब तक है पूरी बात पता कर लेंगे , जयसिंघ खुश होगा पूजा की शादी की बात सुनकर

माजी- जी

पिताजी- छोटू तू अभी तक गया नही

छोटू- ठाकुरजी को क्या कहूँ ये आपने बताया नही

पिताजी- ठाकुर को बोलना कि पूजा को देखने लड़के वाले आए है और

छोटू- और सगाई है

इतना बोल कर छोटू भाग गया

पिताजी- ये छोटू भी ना , चलो ठाकुर के आने तक हम बात कर लेते है

पूजा-पिताजी ,आप बेस्ट पिताजी हो

पिताजी- तूने सोच लिया ना कि तू क्या करने जा रही है

पूजा- हाँ ,, आपको कहा था ना कि.मुझे अपने सपनो के राजकुमार का इंतज़ार था जो आपके सामने मेरा हाथ माँगे , वो राजकुमार रमेश है

पिताजी- ठीक है , तू प्यार कर मैं रमेश की पूछताछ करता हूँ

माजी- आप ये क्या बोल रहे हो

पिताजी- शादी तुम्हें या मुझे नही करनी है , पूजा को शादी करनी है , उसे रमेश के साथ लाइफ काटनी है , उसको रमेश पसंद है उसपे विश्वास हो गया है तो हमे उसका साथ देना चाहिए

माजी-कुछ घंटो की पहचान है ये

पिताजी- कभी कभी एक पल भी काफ़ी हो जाता है किसी को पहचानने के लिए प्यार करने के लिए , पूजा को उसका राजकुमार मिल गया उस से ज़्यादा हमे क्या चाहिए

माजी- पर

पिताजी- जिस तरह रमेश ने पूजा का दिल जीता है उस से मुझे भी रमेश पसंद आया है , उसने जिस तरह अपने प्यार का इज़हार किया उस से उसका प्यार कितना सच्चा है ये पता चलता है

पिताजी पूजा के साथ थे

और मैं पिताजी के गले लग गयी.

पिताजी-तुम ने इसमे कुछ देखा होगा तभी तो तुमने इसे पसंद किया है, बाकी काम मुझपे छोड़ दो

पूजा-आपकी बेटी कभी ग़लत नही होंगी

पिताजी की बात से रमेश और पूजा दोनो खुश थे
 
फ्लॅशबॅक 977

मेरे और रमेश के रिश्ते को पिताजी ने हाँ कर दी

पर माँ को अभी भी फिकर हो रही थी

माँ की बात से पिताजी सहमत थे

पिताजी भी कुछ बाते क्लियर किए बिना हाँ नही करेंगे

बस मेरे के लिए हाँ कर दी

ठाकुरजी के आने तक , उनके रमेश के बारे में पता करने तक पिताजी कुछ फिक्स नही करेंगे

मुझे जल्दबाज़ी करते हुए देख कर पिताजी खुद रामेश के यहाँ जाके देखने की जगह ठाकुरजी की मदद ले रहे थे

ठाकुरजी के पहचान के बहुत लोग है शहर2 वहाँ से वो पता लगा सकते है

छोटू गया था ठाकुरजी को बताने

पर छोटू ने सब गड़बड़ कर दी

जैसे कि आदत होती है जब कोई कुछ बताता है तो हम बोलते हुए जाते है ताकि भूल ना जाए

छोटू भी ये बोलते गया कि लड़का देखने आया है पूजा दीदी को और सगाई है

हवेली जाने के लिए गाँव के बीचो बीच से जाना पड़ता है जहा सब लोगो बैठ रहते है

.छोटू की बात सबने सुन ली

सरपंच ने छोटू को रोक कर पूछा तो छोटू ने बता दिया कि घर पे क्या हो रहा है

मेरी सगाई , योगेन्द्रसिंग की बेटी की सगाई और वो सब ना आए ये हो ही नही सकता

फिर क्या था छोटू गया हवेली की तरफ और गाँव वाले एक एक करके मेरे घर आने लगे

पहले सरपंचजी आ गये

सर्पसंच- योगेन्द्र तू तो हमे भूलगया

सरपंचजी को देख कर पिताजी शॉक्ड हो गये

पिताजी- क्या बात , तुम यहाँ कैसे

सरपंचजी- तुम कितना भी छुपा लो पर हमसे कुछ छुप नही सकता , तो ये लड़का है

पिताजी- तुम क्या बात कर रहे हो

सरपंच- लड़का तो दिखने मे अच्छा है , पूजा बेटी को खुश रखेगा , लेकिन लड़के वाले कहाँ गये , शायद रिंग लेने गये होंगे सही कहा ना

सारांच की बात सुनते ही सब एक दूसरे के चेहरे देखने लगे

माँ और पिताजी तो अपने सर पर हाथ रख कर बैठ गये

पूजा और रमेश का वही हाल था ,

रमेश ने सोचा कि बस फॅमिली के सामने रिंग एक्सचेंज करेंगे अगर सब ठीक रहा तो पर यहाँ तो लोग आते जा रहे थे

गाँव का पाटिल भी आ गया , वैद्या जी , और बाकी अब भी धीरे धीरे आने लगे

छोटू ने ये बात कुछ लोगो को बताई थी पर ये बात आग की तरह फैल गयी गाँव मे

औरते भी आ रही थी

पिताजी- तुम्हें किसने बताया

सरपंच- छोटू ने

सबने फिर से अपने सर पे हाथ रख दिए

छोटू ने अच्छा हुआ ये नही बताया कि शादी होने वाली है

पिताजी टेन्षन मे आ गये

बिना रमेश के बारे में बिना पूछताछ किए सगाई कैसे कर दें

माजी ने पिताजी के कंधे पे हाथ रख दिया

माजी- आप हिम्मत से काम लीजिए

पिताजी- ये छोटू भी ना

माजी- बात तो गाँव मे फैल गयी

पिताजी- अब तो सगाई करनी पड़ेगी

माजी- लेकिन बिना लड़के के बारे में जाने सगाई कैसे कर सकते है

पिताजी- मैं भी यही सोच रहा था

माजी- अब क्या करे

पिताजी- ठाकुर को आने दो ,

रमेश और मैं सब से बात कर रहे थे

सरपंचजी- योगेन्द्र यहाँ तो कुछ इंतज़ाम नही है

पिताजी- वो मैं

सरपंच- डर क्यूँ रहा है , ये शहर के लड़के ऐसे ही होते है , चट मँगनी पट ब्याह , तू टेन्षन मत ले हम है ना

सरपंचजी- पाटिल गाँव की पंचायत से स्पीकर और सजावट का सामान लेकर आ जाओ , पूजा बेटी की सगाई धूम धड़ाके के साथ होंगी

सरपंच के कहते ही गाँव के लड़के काम मे लग गये

मंदा को भी मेरी सगाई की बात पता चल गयी

मंदा गुस्सा करते हुए घर आ गयी

मुझे तो उसको शांत करने मे सारा टाइम निकल गया

गाँव वालो ने घर को सज़ा दिया

सरपचजी- जयसिंघ कहाँ है

पिताजी- जयसिंघ शहर3 मे ......

सरपंचजी- कोई बात नही उसको तार गया नही होगा , जयसिंघ जब रमेश को देखेगा तो खुश हो जाएगा

पिताजी ने बस हाँ ने गर्दन घुमाई

पिताजी को तो कुछ समझ नही आ रहा था

छोटू ठाकुरजी और ठकुराइन को लेकर आ गया

ठाकुरजी घर की सजावट देख कर गुस्से मे आ गये कि पिताजी ने उनको कुछ बताया नही

.ठाकुरजी गुस्से मे पिताजी के पास आ गये

ठाकुरजी को देखते ही पिताजी उनको कमरे मे ले गये माँ और ठकुराइन भी पीछे पीछे गयी

ठाकुरजी के कुछ कहने से पहले पिताजी ने सारी बात बता दी

ठाकुरजी ने पूरी बात सुनकर अपने सर पे हाथ रख दिया

पिताजी- तू ही बता अब मैं क्या करूँ

ठाकुरही- छोटू ने फसा दिया , अब तो सगाई करनी होंगी वरना लोग क्या सोचेंगे

पिताजी- लेकिन रमेश के बारे में पता तो करना होगा

माजी- जयसिंघ नही है यहाँ पर

ठकुराइन - नेहा नीता भी नही है

पिताजी- तू कुछ कर , जल्दी पता लगा रमेश के बारे में

ठाकुर जी- मुझे बस 3 घंटे दे , सब कुछ पता लगा लूँगा , उसकी कंपनी के बारे में तो एक झटके मे पता कर लूँगा

और ठाकुरजी बाहर जाने लगे

पिताजी- कहाँ जा रहा है

ठाकुरजी- फोन करने , पहले शहर2 मे अपने आदमियो को फोन लगा देता हूँ , फिर कंपनी मे , उसके बाद छोटू की माँ के गाँव के पोस्ट घर मे फोन करके बोलता हूँ कि नेहा नीता को गाँव भेज दो

माजी- और जयसिंघ

ठाकुरजी- वो शहर3 मे रहता है फिर भी ट्राइ करते है ,

और ठाकुरजी जिस स्पीड से आए थे उसी स्पीड से वापस चले गये

थोड़ी देर बाद सुरेश जतिन और रमेश की माँ भी आ गयी

उनके आते ही बातों को सिलसिला सुरू जो गया

रमेश की माँ को कमरे मे लेकर जाके पिताजी और माँ ने बात की ताकि गाँव वालो को ऐसा ना लगे कि अभी तक बात हुई ही ना हो

पिताजी रमेश की माँ की बातों से खुश हुए

माँ को जो टेन्षन था वो ख़तम.हो गया

पर पिताजी को ठाकुरजी का इंतज़ार था

और ठाकुरजी भागते हुए आ गये

पिताजी- क्या पता चला

ठाकुरजी- रमेश ने जो बताया सब सच है , लड़का अच्छा है , ना दारू पीता है ना कोई शोक है , दिल का अच्छा है ,, अपनी बहन की शादी खुद करवाई है , अपनी माँ की सेवा करके सबके दिल जीत चुका है , अपने घर को खुद चलाता है , अच्छी कंपनी मे काम करता है , पेमेंट कम है पर जल्दी बढ़ जाएगा क्यूँ कि उसका नाम प्रमोशन लिस्ट मे है , , मेनेज़र मेरा दोस्त है उसने खुद बताया ,

पिताजी- सब अच्छे से चेक किया ना

ठाकुरजी- हाँ , पूजा मेरी भी बेटी जैसी है ,

माजी- भाई साब , जयसिंघ का क्या हुआ

ठाकुरजी- नेहा नीता निकल चुकी है पर जयसिंघ का जो अड्रेस आपने दिया वहाँ वो नही है ,

पिताजी- तुझे कंपनी का नाम बताया था ना

ठाकुरजी- वहाँ भी फोन किया पर जयसिंघ आज कंपनी मे आया ही नही ( जयसिंघ गाँव आने की तय्यारी कर रहा था )

माजी- जयसिंघ के बिना

ठाकुरजी- जयसिंघ को.मैं समझा दूँगा

पिताजी- लेकिन

ताक्रजी- लड़के का घर देखना , उसके बारे में और बाते पता करना वो बाद ने देख लेंगे , सगाई हो रही है शादी नही

पिताजी- ठीक है ,, चलो सगाई की तय्यारी करो मैं पूजा से मिलके आता हूँ

पिताजी मेरे पास आगये

पिताजी-पूजा

पूजा- पिताजी ये सब क्या हो रहा है , मेरा तो सर चकरा रहा है

पिताजी- तेरी सगाई होंगी

पूजा- लेकिन भैया

पिताजी- अब क्या कर सकते है

पूजा- लेकिन

पिताजी- तुम खुश है ना

पूजा- हाँ

पिताजी- तू टेन्षन मत ले और हाँ आज क्या हुआ किसी को.मत बताना , नेहा नीता और छोटू को तो बिल्कुल ही नही

पूजा - उस छोटू

पिताजी- जाने दे , उसकी भी ग़लती नही है , पर तू यही कहना कि लड़का अच्छा था , जिस से सगाई कर ली

पूजा- जी , पर हम ऐसा क्यूँ कर रहे है

पिताजी- नेहा नीता या छोटू को कुछ पता चला और उनके मूह से गाँव वाली.को पता चला तो गड़बड़ हो जाएगी , सब क्या सोचेंगे कि सगाई किस तरह की है ,

पूजा- जी

फिर क्या था

मेरी सगाई की तय्यारी मे लग गये सब

नेहा नीता आ गयी

दोनो गुस्सा होने की जगह मुझे तय्यार करने लगी

रमेश भी खुश था

माँ ने भी अब ज़्यादा कुछ नही सोचा और सगाई कर दी

सगाई गाँव वालो ने बढ़िया तरीके से की

ठाकुरजी पिताजी को हिम्मत दे रहे थे

पता नही जयसिंघ भैया क्या कहेंगे

ठाकुरजी ने पूरा साथ दिया पिताजी का

पूजा और रमेश की सगाई हो गयी

सगाई होते ही रमेश सहर चला गया ,

रमेश तो यही चाहता था कि आज शादी हो जाए पर पिताजी और माजी ये कभी नही चाहते थे

पूजा रमेश के सपने देखने लगी

पिताजी और माँ रिलॅक्स हो गये कि सब अच्छे से हो गया

छोटू को किसी ने कुछ नही कहा बस पिताजी ने उसको बताया कि आज घर मे जो हो गया किसी को मत बताना वरना पिटाई होगी

छोटू ने अपना मूह बंद कर दिया

नेहा नीता मेरी खिचाई करने लगी

और पूछने लगी कि ये सब कैसे हुआ

मैं ने उनको शॉर्टकट मे थोड़ा बहुत बता दिया

इस तरह मेरी सगाई हुई

और फिर शादी हुई
 
फ्लॅशबॅक 978

पूजा-ये थी मेरे एक दिन के प्यार की कहानी, सुबह प्यार हुआ दोपेहर मे इज़हार किया ,शाम को शादी फिक्स हुई

शालिनी-पूजा तुम ने सही फ़ैसला किया

पूजा-हाँ भाभी , तब मैं देर करती तो रमेश के प्यार को खो देती

नेहा-हमे तो मंदिर की पिटाई के बारे में नही पता था

पूजा-ठाकुरजी के आदमी को कोई . तो उनकी बदनामी नही होगी. उस बात को दबा दिया था

नीता-तभी मैं सोचु ,वहाँ भैया नही थे हम नही थे और पिताजी ने शादी फिक्स कर दी

पूजा-अच्छे काम जल्दी करने चाहिए

शालिनी-फिर आगे क्या हुआ था.

पूजा-रमेश ने अपने दोस्तो को फोन करके घर बुला लिया. वो डरे हुए थे ,गाँव के आदमियो को जो मारा था

शालिनी-फिर क्या हुआ

पूजा-रमेश ने पहली बार कमरे से बाहर ,उसने उनके लिए बहू ढूँढ ली है.

शालिनी-रमेश की माँ ने बिना कुछ कहे हाँ कर दिया.

पूजा-हाँ, उनको जल्द से जल्द एक बहू चाहिए थी.शादी की डेट 24 दिन बाद की निकली

शालिनी-तेरी पढ़ाई

पूजा-शादी के बाद एग्ज़ॅम दी और पास हो गयी. उसके आगे कुछ नही किया

नेहा-दीदी, जीजाजी लकी है जो उनको आप मिली है.

पूजा-मैं लकी हूँ जो रमेश मुझे मिला है

नीता-दोनो एक ही बात है

पूजा-कह सकती है.

नेहा-शादी इतनी जल्दी हो गयी तो आपने प्यार कम किया है

पूजा-नही,शादी के बाद मुझे इतना प्यार मिला कि अब एक दिन बिना प्यार के रह नही सकती

शालिनी-काश मेरी भी तेरी जैसी शादी होती

पूजा-भैया कैसे है मुझे पता है

नेहा-क्या मतलब

पूजा-देखा नही 3 साल बाद माँ बनाया है.

शालिनी-वो तो है, शहर3 मे काफ़ी रोमॅंटिक जैसे रहते है तुम्हारे भैया.

पूजा-मतलब आपका मेरा जैसा हाल है

शालिनी-तेरे जैसा होता तो अब तक 3 साल मे 3 पैदा कर देती

पूजा-देखते है, भैया 50 तो ज़रूर मारेंगे

शालिनी-50 ,मुझे मारना चाहती है क्या

पूजा-10 , काफ़ी होगे

शालिनी-तेरे भैया से पूछना ,मैं तो तय्यार हूँ.

पूजा-अच्छा काफ़ी रात हो गयी है

शालिनी-पूजा आज मेरे पास सो जाना

पूजा-क्या भाभी ,वो इंतज़ार कर रहे होंगे

शालिनी-एक दिन दूर नही रह सकती मेरे लिए

पूजा-आपके लिए तो कुछ भी, उनको बता कर आती हूँ

नेहा-हम भी सोने जाते है. काश जीजाजी ने पहले मुझे देखा होता

नीता-तुझे क्यूँ .मुझे देखते तो मुझे पसंद करते

शालिनी-ये दोनो फिर सुरू हो गयी.

पूजा-मैं स्वेता को उनके पास रख के आती हूँ .आप सीतल का ध्यान रखना

और नेहा नीता बाते करते हुए अपने कमरे मे चली गयी. और पूजा स्वेता को लेकर अपने पति के पास

शालिनी सीतल का ध्यान रखते हुए पूजा का इंतज़ार करने लगी.

पूजा एक घंटे बाद शालिनी के पास आ गयी

शालिनी-तुम चुदाई करके आ रही है ना

पूजा-हाँ ,

शालिनी-तू एक दिन भी नही रह सकती

पूजा-भाभी बहुत बुरा हाल होता है.

शालिनी-कंट्रोल रखा कर

पूजा-नही होता भाभी. 4 सालो मे इतना प्यार मिला कि प्यार के बिना नही रह पाती

शालिनी-अगर रमेश कहीं काम के लिए गया तो

पूजा-गये थे 1 महीने के लिए ,वो 1 महीना कैसे गुज़रा है वो मुझे पता है

शालिनी-तू कंट्रोल करना सीख वरना तू बहक जाएगी.

पूजा-मैं उनसे दूर नही हो सकती

शालिनी-जैसे अब 1 साल के लिए यहाँ आए और वैसे कही और गये तो

पूजा-जाने वाले थे

शालिनी-कहाँ पर

पूजा-दुबई, पर मैं ने जाने नही दिया.3 साल का कंपनी अग्रीमेंट था ,साल मे 1 महीने के वापस आएँगे.

शालिनी-तुमने उनको जाने नही दिया.

पूजा-कैसे जाने देती. वो ज़िद्द कर रहे थे कि पैसे अच्छे मिलेंगे. पर मैं ने जाने नही दिया

शालिनी-उनको स्वेता और सीतल का फ्यूचर का सोचना है. इसी लिए जाना चाहते होगे. इसी लिए कहती हूँ कंट्रोल कर

पूजा-आप सही कहती है. धीरे धीरे कंट्रोल करूँगी

शालिनी-जल्दी करना होगा.स्वेता सीतल के बड़े होते ही पैसे कमाने का प्रेशर बढ़ेगा. और तू तो 3र्ड बच्चा भी पैदा करने वाली है फिर तो ,तू खुद सोच

पूजा-मैं क्या करूँ भाभी .खुजली इतनी होती है की मैं इनके बिना नही रह पाती

शालिनी-देख इस बार तो तूने रमेश को रोक लिया है पर अगली बार रमेश दुबई ज़रूर जाएगा . उसको सब का सोचना है .वो सिर्फ़ चुदाई करके अपने बच्चो को पेट नही भर पाएगा.

पूजा-आप ही कुछ रास्ता बताइए

शालिनी-तू एक दिन के बाद चुदाई किया कर, धीरे धीरे 2 दिन,जब कंट्रोल करने लगेगी तो डेली चुदाई करना पर कंट्रोल करते हुए

पूजा-मैं कोशिश करूँगी वैसे मूली खरीद के रखती हूँ

शालिनी-मूली, तू भी ना .अब बता अपनी कहानी

पूजा-कहानी तो हो गयी

शालिनी-नेहा नीता थी इस लिए मैं ने पूछा नही था.

पूजा-मैं समझी नही भाभी

शालिनी-तूने शादी से पहले रमेश से प्यार तो किया होगा

पूजा-मैं आपकी कसम खाती हूँ रमेश ने मुझे औरत बनाया था

शालिनी-पर शादी से पहले ना

पूजा-आपको कैसे पता

शालिनी-मेरी ननंद पहला किस करके बिना पिताजी की परवाह किए रमेश को दुबारा अंदर ले गयी थी. ये सब बता रहा है.और

पूजा-और क्या

शालिनी-अभी तू चुदाई करके आई है ये इसका सबूत है

पूजा-मान गये आपको भाभी

शालिनी-बताना कब किया ,और तेरी सहेली का क्या हुआ

पूजा-सहेली क्या?

शालिनी-रमेश के दोस्त पंडितजी के घर ले गये थे ना वहाँ कुछ किया होगा .

पूजा-वो ऐसे नही है. सुरेश रमेश जैसा सरीफ़ है.

शालिनी-मुझे लगा कि तेरी सहेली ने मज़े किए होगे

पूजा-किए ना

शालिनी-अभी तो ना कहा था

पूजा-रमेश के दोस्तो के साथ नही अपने भाई राकेश के साथ

शालिनी-अपने भाई के साथ ,कुछ भी.

पूजा-सच भाभी ,मेरी शादी की बात सुनकर राकेश स्यूयिसाइड करने वाला था

शालिनी-क्या बात कर रही हो

पूजा-हाँ, राकेश को स्यूयिसाइड से रोकने के लिए मेरी सहेली ने उसको प्यार करना स्टार्ट किया, राकेश मंदा को मैं समझ कर प्यार करने लगा

शालिनी-भाई बहन पहली बार सुन रही हूँ.

पूजा-राकेश भी खुश हो गया और मेरी सहेली भी.

शालिनी-उनको छोड़ ये बता तेरा क्या हुआ

पूजा-शादी फिक्स हुई.

शालिनी-आगे

पूजा-फिर शादी की तय्यारी. मैं तो बिज़ी हो गयी

शालिनी-आगे बता

पूजा-फिर 1 हफ्ते बाद रमेश ने पिताजी से इजाज़त ली और मुझे घुमाने ले गया,इसमे भैया ने मेरी बहुत मदद की , मेरी शादी भैया ने करवाई थी ,

शालिनी-कहाँ पर

पूजा-शहर गये थे घूमने के लिए

शालिनी-तुझे अकेले जाने दिया

पूजा-नेहा और मेरी सहेली थी साथ मे ,

और पूजा रमेश के साथ बिताए हुए पॅलो के बारे बताने लगी

भाभी और ननद की बातें बहुत लंबी चली
 
फ्लॅशबॅक 979

दिन धीरे धीरे बीतने लगे.

खुशी के दिन कैसे चले जाते है पता ही नही चलता

शालिनी और पूजा इन दिनो मे काफ़ी करीब आ गयी.

दोनो भाभी ननंद ऐसे बाते करती थी कि जैसे बहनें हो

उनका प्यार देख कर पिताजी भी खुश थे .पिताजी ने ठाकुरजी की हवेली जाना भी बंद कर दिया.

दिन भर वो अपने पोती स्वेता और सीतल के साथ खेलने मे बिता देते.

छोटू भी अपने पिता के साथ अपनी भांजी के साथ खेलने लग जाता. छोटू मामा जो था.

नेहा नीता कभी अपनी दीदी के साथ तो कभी भाभी के साथ रह कर उनका एक्सपीरियेन्सस सुन कर अपने शादी के सपने देखने लगी.

नेहा नीता अपने जीजाजी को तंग करने मे कोई कसर नही छोड़ती थी.

कभी अपने जीजाजी के कपड़े छुपा देती तो कभी उनके शूस छुपा देती.

गरम पानी की जगा ठंडा पानी नहाने के लिए देती तो कभी सोप गायब कर देती.

रमेश अपनी साली की हरकतों से गुस्सा होने की जगह उनके साथ मस्ती करता.

रमेश अपनी साली के साथ अपने तरीके से मस्ती करता था.

माँ सब को हँसता खेलता देख कर खुश थी .और रात मे पिताजी उनकी चुदाई करके डबल खुश कर देते.

सनडे को नेहा नीता अपने जीजाजी को घुमाने ले जाने की ज़िद्द करती .

अपनी नटखट साली की बात रमेश मान जाता .और उनको कभी मूवी तो कभी शहर मे खाना खिलाने ले जाता.

कभी पूजा उनके साथ घूमने जाती तो कभी अपनी भाभी के साथ उनको कंपनी देने को रुक जाती.

पिताजी ने अपने दामाद को पूरा गाँव दिखा दिया. योगेंद्रसिंघ का दामाद होने से रमेश को काफ़ी रेस्पेक्ट देने लगे गाँव वाले

ऐसे एक दिन पिताजी रमेश और अपनी फॅमिली के साथ हवेली चले गये.

ठाकुरजी ने योगेंद्रसिंघ की फॅमिली का जोरदार स्वागत किया.

हवेली मे ठाकुरजी उनकी दूसरी बीवी ठकुराइन, पहली बीवी का बेटा रंजीत और कुवर, और ठाकुर की बेटी पायल जो अभी हवेली का हिस्सा बनी थी.

रमेश ठाकुर की हवेली देख कर काफ़ी खुश हुआ.

योगेंद्रसिंघ का दामाद तो ठाकुरजी का दामाद हो गया.

रमेश की खातिर दारी मे कोई कमी नही थी.

ठाकुरजी ने खुद रमेश पूजा और शालिनी को हवेली दिखाई.

ठाकुरजी के खुद दिखाने से रमेश को जो रेस्पेक्ट मिली ,उसे देख कर पूजा काफ़ी खुश थी.

पहली बार रमेश को ठाकुर से माफी माँगनी पड़ी थी. लेकिन इस बार ठाकुरजी ने रमेश को जो मान दिया उस से रमेश पिछली बाते भूल गया.

ठाकुरजी-दामाद जी कैसी लगी हवेली

रमेश-हवेली तो काफ़ी खूबसूरत है

ठाकुर-चलो खाना खाते है.

रमेश-चलिए

ठकुराइन ने मेहमानो का पूरा ध्यान रखा.

ठकुराइन भी हवेली मे नयी थी पर खाना खुद बनाया

पिताजी ने ठाकुरजी को स्पेशली बताया था कि रमेश की खातिरदारी अच्छे से हो

रमेश पिछले गीले शिकवे भूल कर गाँव मे अच्छे से अड्जस्ट हो गया.

एक सनडे को हवेली तो नेक्स्ट सनडे पिताजी सभी फॅमिली के साथ मंदिर चले गये.

जहाँ पूजा और रमेश के प्यार की शुरुआत हुई.

पिताजी अपने दामाद को मंदिर और मेले के बारे में बताने लगे.

पिताजी-बेटा इस मंदिर की वजह से हमारे गाँव का नाम है.

रमेश-काफ़ी सुना है मंदिर के बारे में

पिताजी-मंदिर के साथ ठाकुरजी और हमारे फॅमिली की हिस्टरी जुड़ी है

रमेश-पूजा ने बताया था.यहाँ मेला भी होता है

पिताजी-मेला नही, महामेला कहो, दूर दूर से लोग आते है यहाँ पर

रमेश-मेले मे तो काफ़ी भीड़ होती होगी

पिताजी-हाँ, पूरे गाँव मे जगह नही रहती पैर रखने को

रमेश-अगर ये जंगल काट दिया तो लोगो के लिए जगह हो जाएगी

पिताजी-इस जंगल को जिसने काटने की कोशिश की वो कामयाब नही हुआ.

रमेश-मैं समझा नही.

पिताजी-पिछली बार एक कॉंट्रॅक्टर को जंगल काट ने का कांट्रॅक्ट मिला था. पर वो जंगल काटने से एक दिन पहले मर गया

रमेश-कोई जादू होगा

पिताजी-पता नही ,पर सदियो से ये जंगल ऐसा ही है. गाँव के लोगो को कभी नुकसान नही हुआ.

रमेश-ये अच्छी बात है.

पिताजी-वो छोड़ो, मेले के समय हमारी फॅमिली और ठाकुर की फॅमिली यहाँ पहले पूजा करती है फिर मेला सुरू होता है.

रमेश-मतलब ये मेला आपके लिए काफ़ी मायने रखता है

पिताजी-हाँ.इसी लिए जयसिंघ को यहाँ रहने को कहता हूँ.

रमेश-छोटू . अच्छे से

पिताजी-पता नही. पर मुझे अपने बाद किसी को तो ये ज़िम्मेदारी देनी होगी.वैसे छोटू

रमेश-छोटू को मैं अपने साथ रखता हूँ. मेरे साथ रह कर सुधर जाएगा

पिताजी-उसकी ज़रूरत नही है. मैं उसको ठीक कर दूँगा

रमेश-हाँ, अभी तो वो बच्चा है. बड़ा होगा तो समझ जाएगा .

पिताजी-चलो पूजा करते है.

रमेश-हाँ चलिए

पूजा अपने पति रमेश के साथ वापस उसी मंदिर मे जहाँ रमेश ने उसे प्रपोज़ किया था वहाँ आकर लग रहा था कि जन्नत मे आई है

इसी मंदिर मे उनकी शादी भी हुई थी.

पूजा और रमेश अपने शादी के दिन को याद करके काफ़ी खुश थे

शालिनी भी खुशी थी. शादी के बाद वो गाँव मे पहली बार यही आई थी .

यहाँ पूजा और दर्शन के बाद अपने घर गयी थी.

मंदिर मे पूजा करने के बाद सब खेत मे चले गये.

पिताजी ने रमेश को अपने खेत दिखाए

ऐसे दिन हसी खुशी बीत ते गये.
 
फ्लश बॅक 980

देखते देखते पूजा को अपने मायके आकर 2 महीने हो गये.

इस 2 महीने मे पूजा अपने पति के साथ मायके मे रानी की तरह रह रही थी.

इस बीच सीतल का बर्तडे आ गया.

अपने पोती का बर्तडे मनाने की तय्यारी मे पिताजी लग गये.

पिताजी ने ठाकुर की फॅमिली ,और गाँव के कुछ लोगो को बुलाने का फ़ैसला किया.

पिताजी ने अपने घर को सजाना सुरू किया .जिसे देख कर पूजा खुश थी. अपने बेटी के लिए अपने पिताजी का प्यार देख कर पूजा खुशी से पागल हो गयी.

पिताजी ने बर्तडे के दिन सबको खाना देने का प्रोग्राम बना लिया .उसकी के लिए पिताजी मार्केट मे चले गये ,कुछ खरीदी करने लिए.

रमेश ने अपनी माँ को को पहले चिट्ठी भेज कर बुला लिया था. रमेश की माँ अपने पोती से मिलने के लिए निकल चुकी थी.

रमेश की माँ बर्तडे के एक दिन पहले गाँव आ कर आचे से 2 3 दिन रह कर जाने का प्लान बना कर आ गयी.

रमेश अपनी माँ को लेने के लिए और कल के लिए केक का ऑर्डर लेने शहर चला गया.

रमेश की माँ अपने बेटे को 2 महीने बाद देख कर अपनी खुशी को छुपा नही पाई और रमेश के गले लग गयी.

उसके पति की डेत के बाद रमेश ने पूरी ज़िम्मेदारी अपने सर उठा ली थी. अपनी बहन ज्योति की शादी करवा दी. अपनी माँ का पूरा ख़याल रख रहा था. पूजा जैसी बहू मिली थी.इस सब से उसे सब कुछ मिला था.

रमेश अपनी माँ को लेकर गाँव आ गया.

पूजा अपनी सास को देख कर उनके पैर छु कर अपने सँस्कार की झलक दिखाई.

पूजा के साथ साथ नेहा और नीता ने भी आशीर्वाद लिया .इस से ज़्यादा किसी सास को क्या चाहिए

माजी-नमस्ते सम्धन जी, आने मे कोई तकलीफ़ तो नही हुई

समधन जी-पोती से मिलने की खुशी के सामने दूसरे तरफ ध्यान नही गया. बस थोड़ा प्राब्लम हुआ था पर उतना तो होता ही है.

माजी-नेहा समधन के लिए नाश्ता टी बना लो

सम्धन-इसकी का ज़रूरत है. पहले तो मैं स्वेता सीतल से मिलना चाहती हूँ

नीता स्वेता सीतल को लेकर आ गयी

सांदन-मेरा प्यारा बच्चा ,अपनी दादी को याद किया ना ,और अपनी नानी को परेशान किया कि नही.

माजी-स्वेता तो अपनी मौसी के साथ खेलती रहती थी.

समधन-मौसी को ज़्यादा तंग मत करना ,

माजी-उनका तो हक है, वो तंग नही करेंगी तो कौन करेंगा.

सांदन-वो तो है. स्वेता तो यहाँ अच्छे से घुल मिल गयी.

माजी-हाँ, नेहा और नीता जो उनके साथ खेलती है,

समधन-एक बात कहूँ, बच्चो के बिना मन नही लगता.वहाँ ज्योति के बच्चे है पर स्वेता सीतल की बात ही अलग है

माजी-वो तो है ,स्वेता बड़ी होकर आपकी तरह बन जाएगी. स्वेता तो आप पर गयी है.

समधन-मुझे भी ऐसा ही लगता है. पर एक पोता मिल जाता तो

माजी-वो भी मिल जाएगा ,दामाद जी ने कुछ सोचा होगा ना.

समधन-कह तो रहा था कि 2 3 साल के बाद ..

माजी-लीजिए ,नाश्ता भी आ गया.

समधन-बेटी रहती है तो काम करने मे मदद मिलती है.

माजी-हाँ, ये दोनो पूरा काम करती है,मैं तो 2 महीने से रशोई घर गयी ही नही.

समधन-वो तो है वैसे आपका बेटा नही दिख रहा

माजी-बड़ा बेटा शहर3 मे है और छोटू गाँव मे अपने दोस्तो के पास गया है

समधन-वैसे एक बात कहूँ आपकी बेटियाँ बड़ी हो गयी है, उनके शादी के लिए कुछ सोचा है.

माँ-उनके पिताजी देख रहे है. कोई अच्छा रिस्ता मिलते ही शादी कर देंगे.

शालिनी-नमस्ते माजी

समधन-ये शायद आपकी बहू है

माजी-हाँ, ये भी जल्दी माँ बनने वाली है.

समधन-आप तो दादी बन ने वाली है.अभी से बधाई देती हूँ ,

माजी-इतनी क्या जल्दी है.आप कुछ दिन तो रुकेंगी ना यहाँ पर

समधन-हाँ, इतने दिन बाद पोती से मिलने आई हूँ, कुछ दिन रुक कर जाउन्गी.

माजी-आप फ्रेश होकर आराम कीजिए

पूजा-सासू माँ कहाँ रुकेंगी

माजी-तुम्हारे साथ ...

समधन-पूजा के साथ तो बच्चे होगे, मैं आपके साथ सो लूँगी. इसी बहाने से आप के साथ बाते हो जाएगी

माजी-पर

समधन-पर वर कुछ नही, लड़के के तरफ से हूँ, समधन हूँ ,इतना तो हक रखती हूँ

माजी-हाँ हाँ,क्यूँ नही,पूजा मेरे कमरे मे समान रख दो

पूजा-पिताजी ,वो कहाँ सोएंगे

माजी-उस कमरे मे तीन लोग रह सकते है.

पूजा समान रखने चली गयी.

समधन-वैसे समधी कही दिख नही रहे

पिताजी-समधन ने बुलाया और समधी हाज़िर है

समधन-नमस्ते

माजी-आप बाते कीजिए,मैं सामान अंदर रखती हूँ

पिताजी ने समान माँ को दिया .माँ बॅग लेकर रशोई घर मे चली

पिताजी-कहिए आने मे कोई तकलीफ़ तो नही हुई.

समधन-जी ,सफ़र लंबा था पर ठीक हुआ

पिताजी-आप बता देती तो अपने दोस्त की कार भेज देता ,

समधन-इसकी क्या ज़रूरत है

पिताजी-आप समधन हो, शादी मे खातिरदारी अच्छे से नही कर पाया. अगर समधी जी होते तो, अब तो आप ही की सेवा करनी होगी

समधन-आप भी ना,जितना मिलता है उसी मे मैं खुश हूँ

पिताजी-ये लीजिए आपके लिए जलेबी लाया हूँ, गरम है ,खा कर देखिए.

समधन-जलेबी, काफ़ी दिन हो गये खाए हुए,

और एक जलेबी उठा ली

पिताजी-एक से क्या होगा.

और पिताजी ने इधर उधर देखा और किसी को पास मे ना देख कर समधन को अपने हाथ से जलेबी खिलाने लगे

समधन-नही नही, मैं खा लूँगी

पिताजी-हमारे हाथ से तो एक खानी पड़ेगी.

समधन ने जलेबी का एक बाइट ले लिया.

पिताजी-और कहिए कैसा लगा हमारा गाँव

समधन-अभी देखा कहाँ है

पिताजी-आप अगर रुक रही होगी तो मैं दिखा दूँगा .काफ़ी बड़ा है

समधन-क्या?

पिताजी-गाँव काफ़ी बड़ा है.

समधन-कुछ दिन रुकने वाली हूँ

पिताजी-फिर तो आपको दिखाना होगा.

समधन-दिखा दीजिएगा. गाँव देखने लायक दिख रहा है

पिताजी-दूर दूर से लोग आते है देखने के लिए.आपको पसंद आएगा.

समधन-वो देखने के बता दूँगी. अच्छा मैं फ्रेश होकर आती हूँ

पिताजी-आप तो ऐसे ही अच्छी लग रही है.

समधन-मैं सफ़र करके आई हूँ, अपने बेटे के ससुराल मे अच्छी तो दिखना होगा

पिताजी-जैसे आपकी मर्ज़ी,आप फ्रेश हो जाइए मैं आपके लिए इत्र भेज देता हूँ.

समधन-नही मैं नही लगाती.

पिताजी-लगा कर देखो, पूरे गाँव मे आपकी महक फैल जाएगी

समधन-आप भी ना ,ठीक है भिजवा दीजिएगा

रमेश की माँ बाथरूम मे चली गयी.

और पिताजी ने समधन के लिए इत्र निकाल कर पूजा के हाथो भेज दिया.

छोटू घर को सजाने मे लग गया .और नेहा नीता उसकी मदद करने लगी.

समधन जब फ्रेश होकर आई और नये कपड़े पहन कर उस पे इत्र लगाया तो ,इत्र की स्मेल से समधन खुश हो गयी.

समधन अपनी खुसबु पूरे घर मे फैलाने लगी.

सब ने समधन के इत्र की तारीफ की.

समधन अपने समधी के दिए हुए इत्र से अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गयी.

पिताजी-क्या बात है समधन ,काफ़ी खुश लग रही है.

समधन-हाँ, आपके दिए इत्र की वजह से खुश हूँ. कहाँ से लिया है इत्र

पिताजी-आपको पसंद आया

समधन-हाँ, मैं रख लूँ इसे, आप दूसरा ले लेना

पिताजी-वो आपके लिए स्पेशल बनाया था. वो आपके लिए है.

समधन-मैं जान सकती हूँ ,इतनी मेहरबानी क्यूँ

पिताजी-मेरी समधन की पूरे गाँव मे तारीफ हो ,

समधन-मुझे तारीफ सुन ना पसंद नही है

पिताजी-पर मैं तो गाँव को दिखना चाहता हूँ की मेरी समधन कुछ कम नही है.

समधन-ऐसे तो मेरा जीना मुश्किल होगा, सब मुझसे मिलने आएँगे

पिताजी-मेरे होते हुए कोई आपको परेशान नही कर सकता ,

पूजा-सासू माँ खाना लगा दूं

समधन-हाँ लगा दे ,

और रमेश की माँ अपनी बहू के साथ उसके कमरे मे चली गयी.
 
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