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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 999

नेहा को कोई रास्ता नही मिल रहा था.

अजीत और कुमार के प्लान से जयसिंघ अंजान था

पर नेहा को सब पता चल गया

पर उसकी बात का सबूत नही था

ऐसे मे उसकी बात पे कौन विश्वास करता

देखते देखते 2 दिन निकल गये ,नेहा अपने ख़यालो मे खोती जा रही थी.

उसको एक छोटी सी उम्मीद भी नही दिख रही थी.

नेहा ज़्यादातर समय अपने कमरे मे रह कर सोचती रहने लगी.

किसी को लगा शादी की वजह से नेहा कमरे मे रह कर अपने बचपन के दिनो को याद कर रही है.

किसी को लग रहा था कि उसकी तबीयत ठीक नही है.

किसी को लग रहा था कि गाँव छोड़ कर जाने से सेनटी हो गयी है.

ऐसे मे शालिनी घर की बहू ,जो गाँव और शहर3 दोनो जगह रह चुकी है. अलग अलग लोगो से मिलती है. उसकी आँख कुछ अलग बात नेहा की खोमोसी मे देख रही थी.

शालिनी ने अपनी ननंद मे 2 दिन से आए हुए बदलाव को ओब्जर्व कर चुकी थी.

जब से नेहा कुमार के साथ घूमने गयी थी तब से नेहा मे ये बदलाव दिख रहा था.

शालिनी को लग रहा था की कुछ तो बात है जो हँसती हुई नेहा को ऐसे गुम्सुम बना दिया है.

शालिनी ,नेहा और कुमार के शादी से खुश नही थी, उसने जयसिंघ को कहा भी था कि नेहा के लिए कुमार ठीक आदमी.नही है पर जयसिंघ के आँख पर दोस्ती की पट्टी लगी हुई थी.

ऐसे मे नेहा का इस तरह रहना शालिनी को हजम नही हो रहा था

शालिनी को पता था कि कुमार की सोच कैसी है

पर उसके पास जयसिंघ की बताने के लिए सबूत नही था

ऐसे शालिनी ने एक अच्छा मोका देख कर नेहा को अकेले मे पकड़ लिया

शालिनी नेहा से बात करने के लिए उसके कमरे मे चली गयी जहाँ पर नेहा बिस्तेर पे लेट कर छत की तरफ देख रही थी.

शालिनी-नेहा ,

नेहा अपनी भाभी की बात सुनकर होश मे आ गयी.

नेहा-क्या कहा आपने

शालिनी-मैं ने तो कुछ नही कहा ,तू बता किस के सपने देख रही है

नेहा-मैं तो जाग रही हूँ. सपने तो सोते हुए देखे जाते है

शालिनी-पर मेरी ननंद तो दिन मे सपने देख रही है.

नेहा-ऐसा कुछ नही है

शालिनी-लगता है कुमार के सपने देख रही है.

कुमार का नाम सुनते ही नेहा का चेहरा सीरीयस हो गया .इतना काफ़ी था शालिनी के लिए

समझ गयी कि.नेहा के ऐसे रहने के पीछे कुमार है

शालिनी-बता क्या हुआ है.

भाभी को मज़ाक करते हुए अचानक सीरीयस देख कर नेहा हड़बड़ा गयी.

नेहा-कुछ भी तो नही

शालिनी-देख मुझे पता है कुछ तो है जो अंदर अंदर तुझे खाए जा रहा है. मुझे बता मैं तेरी मदद कर सकती हूँ.

नेहा-ऐसा कुछ नही है

शालिनी-तुझ से ज़्यादा दुनिया देखी है, कुमार के साथ कुछ हुआ है जिस से तू परेशान है.

नेहा-आप जाइए यहाँ से ,मुझे अकेला छोड़ दीजिए

शालिनी-देखो नेहा ,मुझे पता है तू इस शादी से खुश नही है,कुमार तेरे लायक नही है.

नेहा-नही है तो आपने कुछ किया क्यूँ नही

शालिनी-तेरे भैया ने मुझे कुछ पूछा ही नही और सीधे कुमार को यहाँ लेकर आ गये.मैं रात मे तुम्हारे भैया से बात करने का

सोच रही थी कि तूने भी हाँ कर दी.

नेहा-मैं ने हाँ नही की थी. अपने कमरे मे जाने को कोई कैसे हाँ समझ सकता है

शालिनी-मतलब तुझे कुमार से शादी नही करनी थी.

नेहा-वो बहुत गंदा है

शालिनी-मुझे बता ,मैं तेरी मदद ज़रूर करूँगी.मैं तुझे अपनी छोटी बहन मानती हूँ

नेहा-मेरी कोई मदद नही कर सकता

शालिनी-ऐसा तू सोचती है.मैं ने तो तुझे हमेशा अपनी छोटी बहन समझा है.और तेरे लिए कुछ भी कर सकती हूँ.

नेहा-कुछ भी कर सकती है तो मेरी शादी रुकवा दीजिए

शालिनी-मुझे सिर्फ़ एक वजह बता शादी ना करने की,फिर कोई कुछ भी कहे मैं तेरी शादी कुमार के साथ नही होने दूँगी. बस एक वजह बता ,मुझे एक वजह बता कर देख फिर तेरी भाभी क्या करती है , भले तुम्हारे भैया गुस्सा हो जाए पर मैं तेरी शादी होने नही दूँगी

अपनी भाभी की बात सुनकर नेहा रोते हुए गले लग गयी.

नेहा-भाभी कुमार बहुत गंदा है, बहुत गंदा है

शालिनी-क्या हुआ बता मुझे

नेहा-वो नीता के साथ गंदा काम करना चाहता है. आपके साथ भी.

शालिनी-मुझे पता है वो कैसा है. उसकी तो बुरी नज़र है मुझपे ,मैं ने तेरे भैया को बताया था पर तेरे भैया अपने दोस्तो के

बारे में कुछ सुन ना नही चाहते, अब तो कुमार ने अपनी लिमिट क्रॉस कर ली है. नीता पे बुरी नज़र रखता है,

नेहा-भाभी कुछ करो ना ,नीता को बचाओ

शालिनी-नीता तभी बच सकती है जब तेरी शादी कुमार से ना हो

नेहा-आप पिताजी से बात करो ना

शालिनी-पहले ये बता तुझे ये कैसे पता चला कुमार नीता पे गंदी नज़र रखता है.

नेहा-मैं आप को पूरी बात बताती हूँ

और उस्दिन जो जो हुआ वो नेहा अपनी भाभी को बताने लगी.

शालिनी-ये तो बहुत बड़ा कमीना है, तू.पागल है तुझे इतना कुछ पता था फिर भी ऐसे चुप चाप बैठी है.

नेहा-मैं ने बहुत सोचा भाभी, पर मुझे कोई रास्ता नही दिख रहा था.शादी ना करूँ तो भैया नाराज़ हो जाएँगे ,पिताजी की

इज़्ज़त का क्या होगा,

शालिनी-और हाँ करने से जैसे तुझे अवॉर्ड मिलने वाला था.

नेहा-भाभी कुछ करो ना ,

शालिनी-अब बात बहुत आगे जा चुकी है, 3 दिन बाद तेरी शादी है.

नेहा-आपने कहा था कि आप कुछ भी करेगी.

शालिनी-सोचने तो दे, बहुत कुछ दाँव पे लगा है.

नेहा-आप ही कुछ कर सकती है .मेरी ग़लती है मुझे आप से बात करनी चाहिए थी.

और नेहा रोने लगी.

शालिनी-तू रोना बंद कर.मुझे सोचने दे, ये मामला थोड़ा कॉंप्लिकेट है.

नेहा-मेरे लिए नही नीता के लिए कुछ कीजिए

शालिनी-तू नीता के लिए कुछ भी कर सकती हो ना

नेहा-हा, नीता मेरी जान है

शालिनी-तो मैं पिताजी से बात करती हूँ.

नेहा-पिताजी को पता चला तो वो कुमार को मार डालेंगे और फिर पिताजी को जैल होगी, मैं पिताजी के बिना नही रह सकती

शालिनी- ये रिस्की होगा कि ये बताना कि कुमार की तुम पे नीता पे मुझपे बुरी नज़र है ,, पिताजी तो कुमार की जान ले लेंगे

नेहा- कुछ और सोचो ना भाभी

शालिनी-इतना बताते है कि कुमार की शादी हो चुकी है. फिर तेरी शादी कॅन्सल हो जाएगी.

नेहा-मेरी शादी ना होने से पिताजी की इज़्ज़त का क्या होगा. पिताजी तो ये सोचेंगे कि इसके बाद मेरी शादी कैसे होगी.माँ तो

जीते जी.मर जाएगी

शालिनी-क्यूँ ना उसी दिन किसी और से जैसे तेरा कोई क्लासमेट होगा उस से तेरी शादी करवा देते है. है कोई तेरे पसंद का कोई क्लासमेट

नेहा-क्लासमेट नही, वो सुरेश

शालिनी-सुरेश, पूजा का मूह बोला देवर

नेहा-हाँ. वो मुझे प्यार करता है. ये रिंग दी थी उसने , और मैं भी

शालिनी-सुरेश से प्यार करने के बाद भी तू शादी को तय्यार कैसे हुई. तू ना एक नंबर की ईडियट है

नेहा- भाभी

शालिनी- सुरेश से तू प्यार करती है

नेहा- हाँ

ढालिनी- मुझे सब बता कुछ भी मत छुपाना

नेहा ने सुरेश के बारे में बताना सुरू किया.

शालिनी-तेरी जैसी ईडियट नही देखी मैं ने ,सुरेश की जगह कुमार को हाँ कर दिया ,

नेहा-भाभी

शालिनी-तू मेरा नाम भी मत ले ,इतनी ईडियट तू कैसे हो सकती है

नेहा-मैं तो बस सब को खुश देखना चाहती थी.माँ को भैया मिल जाएँगे पिताजी को अवी मिल जाएगा

शालिनी-खुद दुखी होकर दूसरो को खुश करना चाहती थी. वाह रे मेरी ननंद,

नेहा-भाभी आप तो ऐसा मत कहिए

शालिनी-तू सुरेश से शादी करना चाहती है ना

नेहा-हाँ

शालिनी-ठीक है फिर ,अब सब ठीक होगा.

नेहा-वो कैसे

शालिनी-तेरी शादी उसी दिन होगी जब तय हुई है पर सुरेश के साथ होंगी

नेहा-और कुमार

शालिनी-उसको सबके सामने तुम्हें थप्पड़ मारना होगा,तभी ये शादी टूट ने से तुझे कोई कुछ नही कहेगा.

नेहा-मुझसे नही होगा

शालिनी-फिर नीता को कुमार के हाथो मे जाने दे,

नेहा-थप्पड़ मार कर मैं क्या कहूँगी

शालिनी-वो थप्पड़ इस लिए है कि कुमार ने जो नीता और तेरे साथ किया उसकी सज़ा. और तू इतना कहना कि कुमार की पहले भी शादी हो चुकी है. तू इस से शादी नही करना चाहती है.

नेहा-पिताजी गुस्सा हो जाएँगे

शालिनी-मैं हूँ ना, बाद मे पिताजी को मैं सब बता दूँगी.

नेहा-और भैया

शालिनी-कोई एक तो नाराज़ होगा ही. तेरे भैया ही सही.पर तू टेन्षन मत ले मैं उनको मना लूँगी.

नेहा- भैया नाराज़ होंगे

शालिनी- एक तरफ तेरे भैया है और दूसरी तरफ हम सब , , अब तू फ़ैसला कर

नेहा - मेरी जगह आप होती तो क्या करती

शालिनी- मैं फॅमिली के साथ जाती,

नेहा- तो सब कुछ मुझे करना होगा.

शालिनी-हाँ, मैं ने किया तो सब कुछ और समझ जाएँगे .तू करेगी तो सब ठीक होगा.बस नीता के बारे में सोचना

नेहा-उसको ऐसा थप्पड़ मारूँगी कि वो ज़िंदगी भर याद रखेगा.

शालिनी-तो सब प्लान मे हिसाब से करना ,

नेहा-आप देखती जाओ

शालिनी-और सुरेश का कुछ सोचती हूँ.

नेहा-वो तो मुझ पे नाराज़ होगा.

शालिनी-तूने काम ही ऐसा किया है कि वो तो गुस्सा होगा.

नेहा-अगर उसने मुझसे शादी करने से मना किया तो

शालिनी-मैं हूँ ना ,तू बस खुश रहा कर. ऐसे रोती हुई अच्छी नही लगती.

नेहा ने भाभी को गले लगा लिया.

शालिनी-क्या जब देखो तब गले लगती हो ,लगता है सुहागरात जल्दी करनी है.

नेहा-आप भी ना भाभी.

शालिनी-मेरी बात ध्यान से सुन

नेहा-जी

शालिनी-चाहे कुछ भी हो जाए ,कुछ भी, तू पीछे नही हटेगी.एक बार सोच लिया तो सोच लिया

नेहा-क्या होने वाला है

शालिनी-कुछ नही. बस तू हिम्मत नही हारना बाकी सब मैं देख लूँगी.अपनी भाभी पे विश्वास रखना

नेहा-आप मेरे साथ हो तो मुझे किसी बात कर डर नही है

शालिनी-चल अब सुरेश के नाम की मेहन्दी लगा मैं दूल्हे को मना ने का सोचती हूँ

नेहा-सुरेश से मेरी तरफ से माफी माँग लेना

शालिनी-वो सुहागरात मे तू माँग लेना.

नेहा-आप भी ना

और शालिनी ने नेहा के सर पे किस किया और नेहा के कमरे से बाहर आ गयी.
 
फ्लश बॅक 1000

नेहा से बात करके शालिनी अपने कमरे मे चली गयी

और पुरानी बात को याद करने लगी

2 साल और पीछे चलते है =====>

बात तब की है जब जयसिंघ की शादी हुई थी

जयसिंघ अपनी शादी से खुश था

पर कुमार कंपनी के लॉस की वजह से नाराज़ था जिस से कुमार जयसिंघ के शादी मे नही आया

कुमार के ना आने की वजह जयसिंघ को पता थी

जयसिंघ शादी के 6 7 महीने बाद भी शहर3 नही गया था जिस से कुमार भड़क गया था

पर जैसे जयसिंघ शहर 3 मे आया था वैसे ही कुमार को झटका लग गया

जयसिंघ शालिनी को शहर3 मे लाकर खुश था

.शालिनी अपना घर देख कर उसको सपनो का महल समझने लगी

शालिनी की आँख की चमक देख कर जयसिंघ खुश हो गया

इतना खुश हुआ कि वो शालिनी को अपनी गोद मे उठा कर पूरा घर दिखाने लगा

शालिनी जयसिंघ के प्यार से खुश थी

और इस अपने नये घर को प्यार से सजाने लगी

जतसिंघ भी शालिनी को मदद करने लगा

8 9 महीने से यहाँ कोई नही आया था ,

जयसिंघ और शालिनी अपने घर को क्लीन करने लगे

दोनो इस से थक कर पसीने पसीने हो गये

जयसिंघ - तुम तो पसीने मे भीग गयी हो

शालिनी- आप भी पसीने मे भीग गये है

जयसिंघ- चलो साथ मे नहाते है

शालिनी- मुझे नही नहाना आपके साथ , और कैसा कोई नही करता

जयसिंघ- गाँव मे नही कर पाए वहाँ नेहा नीता थी पर यहा तो सिर्फ़ हम दोनो है

शालिनी- बिल्कुल नही , आप मुझे तंग करोगे तो मैं गाँव वापस चली जाउन्गि

जयसिंघ- एक बार नहा कर तो देख लो

शालिनी- नही कहा ना ,

जयसिंघ- ठीक है , पहले तुम नहा लो बाद मे मैं नहा लूँगा

शालिनी- ऐसे अच्छे बच्चे बन कर रहना

जयसिंघ- अब बताओ कि घर कैसा लगा

शालिनी- ये तो सपनो का महल है

जयसिंघ- अब तक ये महल अधूरा था अब तुम्हारे आने से देखो कैसे खिल उठा है

शालिनी- इस महल को अब मैं प्यार से भर दूँगी

जयसिंघ- तो प्यार करे

शालिनी- पहले मुझे नहाना है

जयसिंघ- तुम टवल लेकर बाथरूम मे जाओ मैं तब तक बॅग मे से कपड़े निकाल दूँगा

शालिनी- आप कौन हो

जयसिंघ-क्या हुआ

शालिनी- गाँव मे तो एक भी काम नही करते थे और यहाँ इतना काम करने मे मेरी मदद कर रहे हो

जयसिंघ- तुम्हें रानी जैसा रखना है

शालिनी- रानी , हम हमारी बेटी का नाम रानी रखेंगे

जयसिंघ- तो पहले प्यार तो करने दो

और जयसिंघ जैसे झपटने लगा शालिनी पे , शालिनी जयसिंघ के हाथ मे आने से पहले टवल लेकर बाथरूम मे चली गयी

जयसिंघ बॅग मे से कपड़े निकालने लगा कि शालिनी की आवाज़ आ गयी

शालिनी - सुनिए

जयसिंघ- क्या हुआ

शालिनी- मुझे इस बाथरूम मे कुछ समझ नही आ रहा है किस को कैसे ईस्तमाल करना है

जयसिंघ - मैं आकर बता देता हू

शालिनी ने पेटिकोट पहन लिया और बाथरूम का डोर ओपन किया

जयसिंघ को पता था कि ऐसा ही कुछ होगा

बाथटब और नयी नयी चीज़े देख कर शालिनी उसको आवाज़ देगी

शालिनी के डोर खोलते ही जयसिंघ बाथरूम मे घुस कर डोर बंद किया

ये क्या जयसिंघ अंडरवेर मे था

शालिनी- आप ने कपड़े क्यूँ निकाले

जयसिंघ- कहा था कि साथ मे नहाते है

शालिनी- आप चीटिंग कर रहे हो

जयसिंघ- इसे प्यार कहते है

शालिनी- जाइए मैं आपसे बात नही करूँगी

जयसिंघ- बात किसे करना है , अब तो बारिश मे प्यार करूँगा तुम्हें

शालिनी- बारिश , बारिश कहाँ है

जयसिंघ- अभी दिखाता हूँ

जयसिंघ ने बाथरूम मे आते ही शालिनी को अपनी बहो मे लिया और शावेर ऑन किया

और बाथरूम की बारिश मे जयसिंघ शालिनी प्यार करने लगे

इस घर को अपने प्यार से भरने लगे

जयसिंघ अब खुल के शालिनी से प्यार कर सकता है

गाँव मे नेहा की वजह से जयसिंघ शालिनी के साथ अकेला समय दे नही सकता था

पर यहाँ तो दोनो लव बर्ड अकेले है

जयसिंघ के प्यार को शालिनी रोक नही सकती थी

दोनो बाथटब मे डूब कर प्यार करने लगे

शालिनी जयसिंघ का पूरा साथ दे रही थी

दोनो पानी को अपने प्यार की आग से गरम करने लगे

शालिनी को एक बार शावर मे और एक बार बाथटब मे प्यार किया

और शालिनी.को बता भी दिया बाथरूम के बारे में

शालिनी-आप ने चीटिंग क्यूँ की

जयसिंघ- चीटिंग करने से प्यार करने को मिला है

शालिनी-पर चीटिंग क्यूँ की

जयसिंघ- तुम्हें प्यार करके मज़ा नही आया

शालिनी-इस बारिश मे भीग कर प्यार करने को मैं कभी नही भूलूंगी

जयसिंघ- तभी मुझे 2 बार प्यार करने दिया

शालिनी-यहाँ तो सब कितना अच्छा है

जयसिंघ- तभी तो कहा था कि शहर3 चलो

शालिनी-पर गाँव की नदी मे नहाने जैसा मज़ा यहाँ नही मिला

जयसिंघ- वो भी मिल जाएगा

शालिनी-अब मुझे छोड़िए

जयसिंघ- कुछ देर रुक जाओ

शालिनी-कोल्ड हो जाएगा ,

जयसिंघ- तो शावर मे नहा लो फिर टवल इस्तेमाल करना

शालिनी-उतना तो पता है , ये ज़ॅक भी निकालनी होती है

जयसिंघ- आइ लव यू शालिनी

शालिनी-आइ लव यू टू मेरे राजकुमार

जयसिंघ शालिनी को प्यार करने के बाद बाथटब मे पड़ा रहा

शालिनी शावर मे नहा कर खुद को ड्राइ करने लगी

शाकिनी ने टवल से अपने बदन को छुपा दिया

जयसिंघ- टवल मेरे लिए रहने दो

शालिनी-मैं क्या बिना कपड़ो के बाहर जाउ

जयांघ- यहाँ सिर्फ़ हम दोनो है

शालिनी- पेटिकोट पहन कर जाती हूँ

और शालिनी ने पेटिकोट अपने बूब्स के उपर बढ़ा दिया और बाथरूम से बाहर आ गयी

शालिनी बेडरूम के डोर से बाहर जाने की बजाय हॉल वाले डोर से बाथरूम से बाहर निकली , उसी डोर से अंदर गयी थी शालिनी ,

शालिनी जैसे बाथरूम से हॉल मे आ गयी तो उसकी आँख फटी की फटी रह गयी

.हाल मे एक आदमी उसको आँख फाड़ कर देखने लगा

शालिनी को तो झटका लग गया

पर उस आदमी को जन्नत की परी के दर्शन हो गये थे

शालिनी का भीगा हुआ बदन देख कर वो तो खुद को भूल ही गया

शालिनी जल्दी होश मे आकर बेडरूम मे भाग गयी

और बेडरूम का डोर बंद कर दिया

शालिनी को यकीन नही हो रहा था कि वो इस हालत मे पराए मर्द के सामने आ गयी

पर ये है कौन

और घर का डोर तो लॉक था फिर ये अंदर कैसे आ गया

और कितना कमीना था वो

कैसे बेशरमो की तरह शालिनी को देख रहा था

अच्छा हुआ मैं ने उनकी बात नही मानी

और बिना पेटिकोट के आती तो

शालिनी शॉक मे थी

उदर उस आदमी को जैसे यहाँ आकर जन्नत की परी मिल गयी

शालिनी को इस हालत मे देख कर उसका हाथ तो लंड पे चला गया था

एक नज़र मे उसको शालिनी की खूबसूरती से प्यार हो गया

उसे यकीन नही हो रहा था कि कोई इतनी खूबसूरत भी हो सकती है

पर ये थी कौन

कोई भी हो , थी तो अप्सरा

सर से लेकर पैरो तक खूबसूरती फूल था

वो तो अभी तक वैसे खड़ा रह कर शालिनी के ख़यालो मे डूबा था

और जयसिंघ शावर ले रहा था
 
भाइयो दोस्तो मित्रो आप सभी के सहयोग से आज इस कहानी के 1000 ( एक हज़ार ) पोस्ट पूरे हो चुके हैं

जब इस कहानी को मैने पोस्ट करना शुरू किया था तब मुझे भी उम्मीद नही कि हमारा सफ़र इतना लंबा और अच्छा चलेगा

वैसे तो इस कहानी ने पहले ही कीर्तिमान बना रखे हैं पर मुझे उम्मीद है कि अभी और भी कीर्तिमान बनेंगे आप सभी के सहयोग से


आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद
 
फ्लश बॅक 1001

शालिनी इस हालत मे पराए मर्द के सामने आने से शर्मा रही थी

जयसिंघ शावर ले रहा था

और वो आदमी वही खड़ा था जैसे अभी तक शालिनी उसके सामने हो और वो उसे देख रहा हो

जयसिंघ शावर लेकर बाथरूम से हॉल मे आ गया

जयसिंघ हॉल मे आते ही उसकी नज़र उस आदमी पे गयी जो फ़्रीज़ होकर जयसिंघ की तरफ देख रहा था

जयसिंघ- कुमार तुम , तुम कब आए

ये कुमार था

जिसने शालिनी को पेटिकोट मे देखा है

जयसिंघ के आवाज़ का कुमार ने कोई जवाब नही दिया

जयसुंघ-कुमार , कुमार

कुमार पे तो शालिनी की खूबसूरती का जादू चल गया था

कुमार इतने आसानी से होश मे नही आएगा

जयसिंघ कुमार के पास जाकर कुमार को हिला कर होश मे लाया

कुमार होश मे आ गया , और पागलो की तरह उधर उधर देखने लगा

जैसे उसकी आँख शालिनी को ढूँढ रही हो

जयसिंघ- क्या हुआ तुझे कहाँ खो गया

कुमार-वो मैं

जयसिंघ- क्या हुआ , कोई भूत देख लिया क्या तूने

कुमार-भूत नही यार एक अपसरा को देखा मैने अभी

जयसिंघ- अबे साले वो अप्सरा नही मेरी बीवी है

कुमार-क्या

जयसिंघ- तूने शालिनी की देखा होगा ,

कुमार-तेरी बीवी

जयसिंघ- जब पहली बार मैने शालिनी को देखा था तो मैं भी ऐसे ही होश खो बैठा था

कुमार-वो तेरी बीवी है

जयसिंघ- हाँ ,

कुमार-( जयसिंघ को इतनी खूबसूरत लड़की कैसे मिल गयी , वो मेरे लिए बनी है ) तूने कहा ढूँढ लिया इसको

जयसिंघ- पिताजी ने ढूंढी है मेरे लिए

कुमार-लकी है तू ,

जयसिंघ- तू बैठ बाकी बात बाद मे मे करते है , मैं कपड़े पहन कर आता हूँ

और जयसिंघ बेडरूम मे चला गया

शालिनी ने तो डोर पहले खोला ही नही

पर जयसिंघ का नाम सुनते ही शालिनी ने डोर खोल दिया और जयसिंघ के गले लग गयी

शालिनी अभी तक पेटिकोट मे थी

शालिनी कभी किसी के सामने इस हालत मे नही गयी थी और उसका अंजान शहर मे पहला दिन था जिस से वो थोड़ी डर की वजह से जयसिंघ के गले लग गयी

जयसिंघ- क्या हुआ , तुम अभी तक तय्यार नही हुई

शालिनी- वो बाहर एक आदमी

जयसिंघ-वो कुमार है मेरा पार्टनर

शालिनी- उसने मुझे ऐसे हालत मे

जतसिंघ- अरे वो तुम्हारा देवर है , तुम इतनी डर क्यूँ रही हो ऐसा तो होता रहता है , तुम्हें कहाँ पता था कि वो बाहर है ,, तुम भूल जाओ उस बात को

शालिनी- जी

जयसिंवह- और कपड़े पहन लो वरना मैं फिर सुरू हो जाउन्गा

शालिनी- वो गया

जयसिंघ- तुमसे मिलने आया है , जल्दी तय्यार हो जाओ , और ये बात को भूल जाओ

और शालिनी उस बात को भूल कर कपड़े पहने लगी ,जयसिंघ भी कपड़े पहनने लगा

शालिनी- एक बात पुच्छू

जयसिंघ- हाँ पूछो

शालिनी-कुमार की शादी हुई है

जयसिंघ- नही

शालिनी- तभी वी ऐसे घूर के देख रहा था

जयसिंघ- तुम इतनी सुंदर हो कि मैं भी पहली नज़र मे तुम्हें देखता रह गया था

शालिनी- प्यार और हवस आँख से दिख जाती है

जयसिंघ- क्या मतलब

शालिनी- आपकी आँख मे प्यार था , और कुमार की आँख मे मुझे हवस दिखी

जयसनघ- वो ऐसा नही बहुत शरीफ है , अजीत मेरा दूसरा पार्टनर वो थोड़ा उस टाइप का आदमी है , पर उसकी शादी हो चुकी है , तुम अजीत से दूर रहना कुमार तो छोटू जैसा है

शालिनी - मैं तो दोनो से दूर रहूंगी

जयसिंघ- जैसा तुम ठीक समझो

शालिनी- वैसे हमने तो डोर बंद किया था फिर वो अंदर कैसे आ गया

जयसिंघ- मैं यहाँ अकेला रहता था ना

शालिनी- तो

जयसिंघ- तो सुरू सुरू मे कंपनी का काम ज़्यादा था तो कुमार कभी कभी यही सो जाता था , तो उसके पास एक की रहती थी , उसी की का ईस्तमाल किया होगा

शालिनी- उसे समझना चाहिए ना कि अब आपकी शादी हुई है

जयसिंघ- पहला दिन है , सुरू मे ग़लती हो जाती है

शालिनी- ठीक है पर आप की माँग लेना

जयसिंघ- माँग लूँगा

शालिनी- आज ही , अभी माँग लीजिए ,

जयसिंघ- लो बाबा , अभी बाहर जाते ही माँग लूँगा , चलो अब वो बाहर इंतज़ार कर रहा है

शालिनी- आप मज़ाक मत करना उसके सामने ,पहले ही मुझे शरम आ रही उसके सामने जाने से

जयसिंघ- मज़ाक सिर्फ़ हम दोनो अकेले होते है तभी करता हूँ , चलो अब उसको टी पिलानी है तुम्हें

और जयसिंघ शालिनी के साथ हॉल मे आ गया

शालिनी जयसिंघ के पीछे पीछे चल रही थी

जैसे ही कुमार की नज़र शालिनी पे पड़ी तो वो देखता रह गया

शालिनी साड़ी मे और ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी

कुमार तो शालिनी का दीवाना हो गया था

जयसिंघ- कुमार ये है मेरी बीवी शालिनी , और शालिनी ये है मेरा पार्टनर और तुम्हारा देवर कुमार

कुमार- नमस्ते भाभी जी

शालिनी- नमस्ते

कुमार- भाभी शादी मे आ नही पाया , तो अभी विश कर देता हूँ , शादी मुबारक हो

शालिनी ने कुछ नही कहा क्यूँ कि कुमार की आँखे शालिनी को स्कॅन कर रही थी

ये शालिनी को अच्छा नही लग रहा था

शालिनी जल्द से जल्द वहाँ से जाना चाहती थी

शालिनी- मैं टी बनाती हूँ

और शालिनी किचिन मे चली गयी

कुमार-भाभी को क्या हुआ

जयसिंघ- वो थोड़ी शर्मीली है , और अभी पहचान नही हुई जिस से वो बात कैसे करे ये सोच रही है

कुमार-वैसे कुछ भी बोल , भाभी अच्छी मिली है तुझे

जयसिंघ- मेरी बीवी तेरी भाभी है

कुमार-मेरा वही मतलब था

जयसिंघ- तू शादी मे क्यूँ नही आया

कुमार-गुस्सा आया था तुझपे

जयसिंघ- क्यूँ?

कुमार-1 महीने का बोलके गया था और 2 महीने तक कोई खबर नही , कितना मुश्किल था कंपनी संभालना

जयसिंघ- पर शादी मे आना चाहिए था तुझे

कुमार-शादी मे आता तो तेरी जगह मैं दूल्हा बन जाता

जयसिंघ- गंद मे लात मार ले भगा देता

कुमार-अब तो फॅमिली वाला इंसान बन गया है

जयसिंघ- तू भी कर ले शादी

कुमार-मैं ऐसे अकेला ठीक हूँ

जयसिंघ- शादी नही करेगा

कुमार-एक लड़की पसंद आई तो पता चला वो तो मेरी भाभी है ,

जयसिंघ- तू दिखने मे अच्छा है पैसा है तुझे कोई और मिल जाएगी , अच्छी लड़की देख कर शादी कर ले

कुमार-देखता हूँ , लेकिन अभी तो नही करूँगा

जयसिंघ- और बता क्या चल रहा है

कुमार-कंपनी लॉस मे चल रही है

जयसिंघ- अब मैं आ गया हूँ ना , सब ठीक कर दूँगा

कुमार-पर साले इतने दिन गाँव मे क्यूँ रुका

जयसिंघ- रुकना पड़ता है तू नही समझेगा

कुमार-जाने दे , ये बता शादी की पार्टी तो बनती है

जयसिंघ- अगले सनडे को पार्टी दे दूँगा , सबको बुलाउन्गा

कुमार-भाभी अभी तक टी लेकर नही आई

जयसिंघ- आ जाएगी , वैसे वो की मुझे वापस दे , अब इस की की तुझे ज़रूरत नही है

कुमार-( एक ड्यूप्लिकेट बना कर रखना चाहिए था ,जिस से शालिनी को नहाते हुए देखता ) ले , और भाभी को सॉरी बोलना की ग़लती से उस हालत मे देख लिया

जयसिंघ- तू खुद बोल दे

कुमार-मैं बोलूँगा तो उनको लगेगा कि मैं इस बात को याद करके उनका मज़ाक उड़ा रहा है ( शरीफ बनके रहना होगा )

जयसिंघ- लो टी आ गयी

और शालिनी ने टी कुमार और जयसिंघ को दी ,

टी देते हुए कुमार ने शालिनी के हाथ को टच कर ही लिया

इस से शालिनी को पूरा यकीन हो गया कि कुमार की सोच क्या है

फिर भी शालिनी ने एक और बार ट्राइ करके देखा ,

टी के बाद पान देते हुए भी कुमार ने शालिनी के हाथ को टच किया

शालिनी समझ गयी कि कुमार से 10 कदम दूर रहना होगा

कुमार ने शालिनी को फिर से शादी के मुबारक बाद दी , और हाथ आगे किया

.शालिनी को हाथ मिलाना ही पड़ा ,

शालिनी कुमार के हाथ मिलाने के तरीके से भी समझ गयी कि कुमार चालाक लोमड़ी है , जयसिंघ के सामने अच्छा बनता है

और मोका देखते ही फ़ायदा उठा रहा है

शालिनी ने भी सोच लिया कि कुमार लोमड़ी है तो वो भी शेरनी बन जाएगी

जयसिंघ से बात करने से कोई फ़ायदा नही होगा क्यूँ कि उनकी दोस्ती इतनी पुरानी है कि वो कुछ कहेंगे तो जयसिंघ कहेगा

पहले दिन शिकायत कर रही हो ताकि गाँव जाना पड़े

कुमार शादी की मुबारक बात दे कर वापस चला गया

शालिनी ने चैन की सास ली

और जयसुंघ से बाते करने लगी

पूछने लगी उनके कॉलेज की बात , कंपनी की बाते कुमार और अजीत के बारे में जान कर खुद को सेफ रखना चाहती थी

जयसिंघ शालिनी को खुश देख कर सोचने लगा कि पहले तो शालिनी शहर3 आने से मना कर रही थी पर अब देखो कितनी

खुश है वैसे पिताजी भी यहाँ आकर खुश हो जाएँगे

बस शालिनी मेरे साथ रही तो हम मिलके पिताजी को यहाँ शहर3 मे लाएँगे

और पिताजी सोच रहे होंगे कि शालिनी बेटी का साथ रहा तो जयसिंघ गाँव मे वापस आ जाएगा
 
फ्लॅशबॅक 1002

कुमार शालिनी को देखते ही उसको अपना बनाने का सोचने लगा

कुमार पे जुनून सवार हो गया

शालिनी की खूबसूरती ने कुमार को पागल बना दिया था

कुमार के सामने शालिनी को भीगा हुआ बदन आ रहा था

शालिनी से मिलने के बाद कुमार सीधा अजीत के घर गया

और अजीत की बीवी की ऐसे चुदाई की , जिस से अजीत की बीवी 2 दिन तक लंगड़ा कर चलेगी

.शालिनी की जगह अजीत की बीवी को शालिनी समझ कर चुदाई कर रहा था कुमार

जब दोपेहर मे अजीत खाना खाने घर आया और कुमार को इस तरह अपनी बीवी की चुदाई करते हुए देखा तो वो भी शोक्ड हो गया ,

कुमार क्यो क्या हुआ जो वो इस तरह चुदाई कर रहा है

अजीत- क्या हुआ तुझे

कुमार- जयसिंघ की बीवी पे दिल आ गया है मेरा

अजीत- व्हाट

कुमार- कितनी खूबसूरत है है शालिनी, बस एक बार मिल जाए , मैं सब कुछ जयसिंघ के नाम कर दूं

अजीत-तू पागल हो गया है

कुमार- तू भी उसको नहा कर बाथरूम से बाहर निकलते हुए देखता तो वही पे रेप कर देता उसका

अजीत- फिर तो देखना पड़ेगा

कुमार वापस अजीत की बीवी की चुदाई करने लगा और अजीत जयसिंघ से मिलने गया

अजीत का भी कुमार जैसा हाल हुआ शालिनी को देख कर

शालिनी को देखने के बाद अजीत सीधा अपने घर गया और कुमार को अपनी बीवी के उपर से हटा कर अपनी गर्मी ठंडी करने लगा

कुमार- बोला था ना , शालिनी आग है आग

अजीत- तुझेमिल जाए तो मुझे बस एक दिन के लिए देना शालिनी को

कुमार - मैं तो शालिनी को पा कर रहूँगा

अजीत- और जयसिंघ , उसे पता चला तो वो पहलवान हमारी हड्डी तोड़ देगा

कुमार- शालिनी के लिए कुछ भी कर लूँगा , क्या नरम हाथ थे उसके

अजीत- तूने छुआ भी उसे ,

कुमार- हाँ , और उसकी वो गोरी गोरी टाँगे , जिसपे पानी टपक रहा था , ये लेग पीस को खाने का मन कर रहा था

.अजीत- कंट्रोल रख वरना मरवा देगा

कुमार- कंट्रोल ही तो नही हो रहा है , शालिनी के सामने आते ही मैं सबकुछ भूल जाता हूँ

अजीत- फिर तो तू जयसिंघ के हाथ का मार ख़ाके रहेगा

कुमार- भाड़ मे जाए जयसिंघ , मैं शालिनी को सिड्यूस करने वाला हूँ

अजीत- कर , अगर सिड्यूस हुई तो मुझे भी देना और जयसिंघ की मार मिली तो मुझे मत देना

और कुमार दिन रात शालिनी के सपने देखने लगा

हर लड़की मे उसे शालिनी दिखने लगी

वो किसी ना किसी बहाने जयसिंघ के घर जाने लगा

पर शालिनी दूर से कुमार से बात करती

कुमार किसी दिन शालिनी को ना देखे तो उसे नींद नही आ रही थी

रोज पता नही कितनी बार शालिनी के नाम की मूठ मारने लगा

जयसिंघ तो शालिनी और कंपनी मे बिज़ी रहने लगा

जयसिंघ की 2 बीवी थी , एक शालिनी और दूसरी कंपनी

जयसिंघ शालिनी को पूरा समय दे रहा था

क्यूँ कि अब तक उसने कंपनी को ही अपना सब कुछ दिया था .

.शालिनी को शहर3 दिखाना , पार्क मे ले जाना , मस्ती और प्यार उसमे जयसिंघ डूब गया था

पिताजी ने कहा था कि खुद को कभी भूलना मत

पर जयसिंघ शालिनी के प्यार मे खुद को भूल गया

और जयसिंघ शालिनी की सबसे पहचान करवाना चाहता था

इस लिए जयसिंघ ने सनडे को एक पार्टी रखी

उस पार्टी मे जयसिंघ ने अपने कॉलेज फ्रेंड , अपने टीचर , अपने कंपनी का स्टाफ , कंपनी के कस्टमर और कुछ बड़े लोगो को बुला लिया

बढ़िया पार्टी देना चाहता था जयसिंघ अपनी बीवी के लिए

शालिनी के कहने पे जयसिंघ ने पिताजी को भी इन्वाइट किया , सिर्फ़ एक दिन के लिए तो आ जाए

पर पिताजी को पता था कि एक मिनिट के लिए भी गये जयसिंघ उनको रोक लेगा

पिताजी खुश थे कि जयसिंघ ने उनको इन्वाइट किया

पार्टी की तैयारी जयसिंघ ज़ोर शोर से कर रहा था

कुमार भी अपने मकसद के पीछे लग रहा था

पार्टी की तैयारी के लिए कुमार की मदद तो चाहिए थी जयसिंघ को

इस मोके का फ़ायदा उठा कर कुमार शालिनी के पास जाने की कॉसिश कर रहा था

शालिनी ने जयसिंघ को बताया भी

ज्यसिंघ ने शालिनी को कहा कि ये पहले दिन उस आक्सिडेंट की वजह से उसकी सोच ऐसी हो गयी है

शालिनी को कुमार के देखने से भी उसकी हवस ही दिख रही है ऐसा जयसिंघ का मानना था

शालिनी ने भी ज़्यादा बात नही की इस बारे में

औ वो दिन भी आ गया ,जब जयसिंघ दुनिया को ये बताएगा कि शालिनी उसकी बीवी है

कुमार भी पूरी तय्यारी से आया था

शालिनी तो जन्नत की हूर की तरह तय्यार हुई थी

शालिनी की खूब सुरती की तो आज तारीफ होने वाली थी

जयसिंघ ने शालिनी की दिल खोल कर तारीफ की

पार्टी चालू होते ही मेहमान आने लगे

मेहमानों के आते ही उनकी नज़र शालिनी पे जाती

वो पार्टी की जान बन गई थी

फिर कुमार आते ही वो तो शालिनी की खूबसूरती मे खो गया

कुमार ने गुलाब का फूल दे कर शालिनी की खूबसूरती की तारीफ की

आज तो कुमार को अट्क आते रह गया

कुमार बड़ी मुश्किल से खुद पे कंट्रोल किए हुए था

कुमार की हालत पे अजीत हँस रहा था

अजीत कुमार के साथ मज़ाक करने के मूड मे था

अजीत कुमार को पार्टी मे छेड़ने लगा शालिनी के नाम से

अजीत -वो देख शालिनी की गंद क्या दिख रही है

कुमार-मेरे मूह मे पानी आ गया

अजीत-मैं तो कच्चा खा जाउ शालिनी की गंद को

कुमार- मैं तो पूजा करूँगा दिन रात उसकी

अजीत-तू मंदिर के बाहर घंटी बजाते रह मैं चला दर्शन करने

कुमार- क्या कर रहा है

अजीत-शालिनी की गंद को बिना टच किए इस पार्टी से जाउन्गा नही

कुमार-कुछ गड़बड़ मत कर

अजीत- तू बस देखता रह , मैं शालिनी के मज़े लेकर आता हूँ

कुमार-अबे सुन तो

और अजीत ने कुमार की एक भी बात नही मानी और वो शालिनी की गांद को टच करने चला गया

कुमार अजीत को शालिनी के पास जाते हुए देख रहा था

जयसिंघ शालिनी.की पहचान कुछ लोगो से करवा रहा था

अजीत भी उनके पास जाकर शालिनी क पास खड़ा हो गया

कुमार देख ही रहा था कि अजीत क्या करने का वाला है

शालिनी बात करने मे बिज़ी थी

जयसिंघ जिस से बात कर रहा था उस आदमी ने वेटर को बुला लिया ड्रिंक लेकर

वेटर अजीत के पास से होते हुए शालिनी के पास से जाकर उनके सामने जो आदमी है उसे ड्रिंक देने वाला था

जैसे ही वेटर अजीतके पास आया तो अजीत ने टाँग डाल कर वेटर का बॅलेन्स बिगाड़ दिया

वेटर शालिनी के पास गिरने वाला था

शालिनी घबरा गयी और वहाँ हलचल हो गयी

जयसिंश ने शालिनी के उपर ड्रिंक गिरने से बचाने के लिए अपनी तरफ खिचा

इस हलचल का फ़ायदा उठाते हुए अजीत ने शालिनी की गंद को दबा दिया

कुमार उसकी तरफ ही देख रहा था जिस से उसने ही देख लिया

अजीत ने शालिनी की गंद मसल दी

शालिनी कुछ समझ ही नही पाई कि क्या हुआ

उसको लगा कि ये जयसिंघ का हाथ होगा

शालिनी के जयसिंघ के पास जाते ही अजीत थोड़ी दूर हो गया जिस से उस पे शक ना हो

शालिनी के उपर ड्रिंक गिरने से बच गया

शालिनी भी इस से सम्भल गयी

शालिनी ने देखा कि जयसिंश ने हाथ से तो उसके कंधे और हाथ पकड़ हुआ था

शालिनी शॉक हो गयी , मतलब किसी और सिचुयेशन का अडवांतेज लिया है

शालिनी ने इधर उधर देखा तो उसे सब उसे से दूर दिखे

शालिनी ने तोड़ा ज़ोर डाला तो शालिनी को याद आया कि अजीत इस आक्सिडेंट से पहले उसके पास खड़ा था

और अब तो अजीत बहुत दूर खड़ा है

शालिनी समझ गयी कि ये अजीत ने किया है और उस पे कोई शक ना करे इस लिए वो दूर गया है

शालिनी इसे पहली ग़लती समझ कर भूल गयी

अजीत अपनी जीत की हँसी लेकर कुमार के पास आ गया

अजीत-देखा मेरा कमाल

कुमार-तूने तो टच कर ही लिया

अजीत- तू बस दूर से देखता रह मैं तो प्रसाद खा कर भी आया हूँ

कुमार- काश तेरी जगह मैं होता

अजीत-जगह बनानी पड़ती है

कुमार-सही कहा ,मैं कब से ट्राइ कर रहा हूँ और तूने टच कर भी लिया

और कुमार ने अजीत के हाथ को किस कर लिया

अजीत -ये क्या कर रहा है

कुमार-इस हाथ से शालिनी को टच किया है इस लिए प्यार कर रहा हूँ

अजीत-अबे जयसिंघ तो अपना लंड उसके अंदर डालता होगा तो क्या उसके लंड को चूसेगा

कुमार-वो भी कर लूँगा बस शालिनी मिल जाए

अजीत-तू बस सोचता है,कुछ करेगा या नही तो कुछ नही होगा ,तू अपने सपनेदेख मैं चला पेट पूजा करने

और अजीत खाना खाने चला गया और कुमार सोचने लगा कि अजीत ने तो एक झटके मे शालिनी की गंद को मसल दिया

वहाँ मुझे होना चाहिए था

शालिनी मेरी है

ऐसे बोलने से थोड़ी मिलेगी

कुछ करना होगा

जैसे अजीत ने किया

अजीत जैसा लूसर कर सकता है तो मैं तो आराम से कर सकता हूँ

मैं भी वही तरीका इस्तेमाल कर सकता हूँ जो अजीत ने किया है

शालिनी को शक भी नही होगा जैसे अजीत के समय नही हुआ

पर फिर से वेटर के साथ आक्सिडेंट हुआ तो शक हो जाएगा

कुछ और सोचना होगा

मिल गया आइडिया

शालिनी खाना लेने जा रही है

यहाँ खुद कुछ काम बन सकता है

कुमार के आने तक शालिनी ने खाना ले भी लिया

बस इंतज़ार करने लगा जब शालिनी वापस खाना लेने जाएगी

कुमार खाना कम खा रहा था और शालिनी की तरफ ज़्यादा देख रहा था

औद्र शालिनी के थाली मे से गुलाब जामुन ख़तम हो गये

शालिमि गुलाब जामुन लेने चली गयी

उस काउंटर पे बच्चों और लॅडीस की भीड़ थी

गुलाब जामुन जो थे

कुमार ने अपनी थाली मे के गुलाब जामुन खा लिए और शालिनी के पीछे जाकर गुलाब जामुन लेने लगा

शालिनी बच्चो को गुलाब जामुन पहले लेने दे रही थी

कुमार सोच रहा था कि धक्का कैसे दे

कोई मिल ही नही रहा था

ऐसे मे कुमार ने खुद गिरने का नाटक करते हुए फ़ायदा उठाने का सोचा

और सही मोका देख कर ,

और लेडीज़ के आते ही कुमार ने फिसलने का नाटक किया

और वो शालिनी की पीठ से जा टकराया और दूसरी तरफ गिरने का नाटक करते हुए शालिनी की गंद को ज़ोर से दबा फिया

अजीत ने प्यार से मसला था ताकि शालिनी को ज़्यादा फील ना हो

लेकिन ये बात कुमार को कहाँ पता था

जैसे कुमार ने शालिनी की गंद दबाई

शालिनी को लगा कि ये फिर से अजीत फ़ायदा ले रहा है

शालिनी ने पलटने के साथ ही कुमार के गाल पर ऐसा थप्पड़ मारा कि पार्टी मे सन्नाटा हो गया

जो खाना खा रहे थे उनके हाथ और मूह रुक गये थे

सब शालिनी की तरफ देखने लगे

कुमार के गाल पे शालिनी की 4 उंगली दिखने लगी

शालिनी को ये बर्दास्त नही नही हुआ था

शालिनी कुमार को देख कर थोड़ी शोक्ड हुई

पर उसे समझ मे आ गया कि पहले एक फ्रेंड ने अजीत ने किया और अब कुमार उसकी गंद दबा रहा है

शालिनी भी तेज दिमाग़ वाली थी

कुमार को तो दिन मे तारे दिखाई देने लगे

किसी को कुछ समझ नही आ रहा था कि ये हो क्या रहा है

शालिनी ने कुमार को थप्पड़ क्यूँ मारा ये किसी को नही पता था

सब आँख फाड़ कर देखने लगे

अजीत को हँसी आ रही थी कुमार पे जो ऐसी ईडियट जैसी ग़लती की और टेन्षन आ रहा था कि कुमार का क्या होगा
 
फ्लश बॅक 1003

शालिनी ने कुमार को थप्पड़ मार दिया

पूरी पार्टी मे सन्नाटा फैल गया

सब बस देखते रह गये

शालिनी समझ गयी कि कुमार ने ये जान बुझ कर किया

पहले अजीत ने किया और उसका देख कर मे बी शरत लगा कर कुमार भी ट्राइ करने आया था

पर शालिनी ने इस बार ऐसा जवाब दिया कि कुमार और अजीत दुबारा आँख उठा कर नही देखेंगे

पर शालिनी को ये अहसास भी हो गया कि उसके हाथो से क्या हो गया

पूरे शहर के बड़े बड़े लोग यहाँ थे

उनके सामने कुमार को थप्पड़ मारना मतलब जयसिंघ और कुमार के बीच मे दूरिया पैदा होंगी मे बी जयसिंघ को कंपनी से निकाल भी सकता है

जयसिंघ ने इस कंपनी के लिए क्या कुछ नही किया

कुमार के लिए शालिनी गिल्टी फील नही कर रही थी वो तो जयसिंघ के लिए परेशान हो रही थी

क्यूँ कि सारे लोग उसकी तरफ देख रहे थे

ऐसे मे शस्लिनी ने समझदारी वाला स्टेप चल दिया

शालिनी ने बेहोश होने का नाटक किया

ताकि सबको लगे कि दौरा पड़ गया था जिस से ये सब हुआ है , 1 स्ट टाइम इतने लोगो के बीच होने से कभी कभी मानसिक संतुलन खो देते है लोग

शालिनी ने इसी का फ़ायदा उठा लिया

और बेहोश होने का नाटक किया

इसी लिए तो पिताजी ने शालिनी को अपनी बहू बना दिया

सब कुछ समझ लेती है शालिनी कि क्या करना है

.शालिनी को बेहोश होता हुआ देख कर जयसिंघ भाग कर शालिनी के पास गया और उसको संभाल लिया

शालिनी ने अपनी आँखे बंद की

जयसिंघ शालिनी से बात करके होश मे लाना चाहता था

कुमार को तो कुछ समझ ही नही आ रहा था

थप्पड़ मारने के बाद शालिनी बेहोश क्यूँ हो गयी

जयसिंघ शालिनी को होश मे ला रहा था कि एक ओल्ड मॅन सामने आया

ओल्ड मॅन- जयसिंघ शायद टुमरी बीवी पहली बार इतने लोगो के बीच , शहर वालो की तरह रहने की वजह से खुद को संभाल नही पाई और

कुमार को थप्पड़ मार कर अपना टेन्षन निकालने के चक्कर मे बेहोश हो गयी

जयसिंघ- आप ठीक कह रहे है

ओल्ड मॅन- इसको अंदर ले जा , डॉक्टेर को फोन कर दो

और जयसिंघ शालिनी को उठा कर बेडरूम मे ले गया पार्टी छत पे चल रही थी

जयसिंघ के पीछे पीछे अजीत अजीत की बीवी कुमार को भी अपने साथ लेकर बेडरूम मे आ गये

जयसिंघ ने शालिनी को बेड पे लिटा दिया

अजीत बीवी - भाई साब डॉक्टेर को फोन कर दो

जयसिंघ उठ कर हॉल मे जाने वाला था कि शालिनी उठ कर बैठ गयी और जयसिंघ को आवाज़ दी

शालिनी- मैं ठीक हूँ

जतसिंघ- तुम आराम करो मैं अभी डॉक्टेर को बुलाता हूँ

शालिनी- मैं ठीक हूँ मुझे कुछ नही हुआ है

जयसिंघ- तुम बेहोश हुई थी

शालिनी- वो नाटक था ताकि ज़्यादा तमाशा ना बन जाए सबके सामने

जयसिंघ- क्या मतलब तमाशा

शालिनी- अपने दोस्त से पूछ लीजिए क्या हुआ था

जयसिंघ- कुमार क्या हुआ था , क्यूँ शालिनी ने तुम्हें थप्पड़ मारा

कुमार ने कुछ नही कहा

अजीत समझ गया कि कुमार फस गया है

ऐसे मे वो बचा लेगा तो वो कुमार की नज़रों मे मददगार बन जाएगा

जयसिंघ- कुमार मैं ने कुछ पूछा है

शालिनी- ये क्या बताएगा उसकी तो बोलती बंद हो गयी हो गयी , चोरी जो पकड़ी गयी है

जयसिंघ- तुम ही बताओ बात क्या है

शालिनी- आपको क्या लगता है कि मेरे पास ही 2 बार आक्सिडेंट क्यूँ हुआ , पहले वेटर गिर गया और बाद मे खाने की टेबल पे कुमार गिर गया

जयसिंघ- तुम कहना क्या चाहती हो

शालिनी- वेटर जब गिरा तब अजीत मेरे पास था और बाद मे कुमार मेरे पास था

जयसिंघ- साफ साफ बताओ बात क्या है

शस्लिनी- ये एक्सीडेंट का फ़ायदा उठा रहे थे

जयसिंघ ये सुनते ही भड़क गया

और कुमार की गर्दन पकड़ ली

जयसिंघ- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई , तुम दोस्त हो इसका ये मतलब नही कि कुछ भी करोगे

जयसिंघ कुमार की गर्दन दबाने लगा

अजीत बीच मे आ गया

अजीत - जयसिंघ छोड़ दो कुमार को ये सब हुआ वो इतफाक भी तो हो सकता है

जयसिंघ- तू भी था वहाँ पे ,

और जयसिंघ ने दोनो की गर्दन पकड़ ली

कुमार कुछ नही बोल रहा था

अजीत- मेरी बात तो सुन

जयसिंघ- बोल जल्दी वरना तेरा मूह तोड़ दूँगा

अजीत- ये सब इतफाक से हुआ ,

जयसिंघ- क्या मतलब

अजीत- देख कुमार को उस पे इतना बड़ा इल्ज़ाम लगते ही कैसे स्टॅच्यू बन गया है

शालिनी- चोर साबित होने पे चोर भी ऐसे ही चुप हो जाता है

अजीत- भाभिजी पॉसिबिल्टी दोनो ही है

जयसिंघ ने गर्दन छोड़ दी

जतसिंघ- बोल क्या बोलना है

अजीत- भाभिजी जहाँ कुमार आपसे टकराया वहाँ बच्चे थे भीड़ ज़्यादा थी

शालिनी- तो क्या

अजीत- फिर अचानक 4 5 औरते आ गयी जिस से कुमार का बॅलेन्स बिगड़ गया

जयसिंघ- कैसा बेलेन्स

अजीत- कुमार के हाथ मे थाली थी , पीछे आई औरत ने धक्का मार दिया जिस से खाना बचा ले ना गिरे इस लिए उसके हाथ मे जो आया

उसने पकड़ लिया , इस लिए कुमार ने आपकी कमर पकड़ ली

अजीत को पता था कि सब के सामने गाँव की लड़की गंद दबा दी ये नही कहेगी

जयसिंघ- शालिनी ऐसा हुआ था

शालिनी- वो गिरा था पर उसने

जयसिंघ- बोलो रुक क्यूँ गयी

शालिनी- वहाँ भीड़ तो थी

जयसिंघ-ये आक्सिडेंट था

शालिनी-ये आक्सिडेंट था तो , अजीत को ये सब कैसे पता

अजीर- भाभी हम साथ मे खाना खा रहे थे कुमार गुलाब जामुन लाने लगा तो मैं उसके आने जा इंतज़ार करने लगा , जब वो आया नही तो मैं कुमार की तरफ देखने लगा तभी ये सब हुआ

शालिनी-(ये भी बहुत चालाक है ) और वो वेटर वाला
 
अजीत - वो सिर्फ़ एक आक्सिडेंट था , मैं तो दूर हो गया था वेटर के गिरते

जयसिंघ - वहाँ क्या हुआ था शालिनी

शालिनी- मुझे लगा किसी ने

अजीत - किसी ने कमर पकड़ ली है ना भाभिजी

शालिनी कैसे कहे गंद दबा दी

शालिनी को अजीत पे बहुत गुस्सा आ रहा था

क्यूँ की कुमार की बात मे बी आसिडेंट हो

पर वेटर वाला आक्सिडेंट नही था ये शालिनी को पता था

शालिनी को लगा कि ये अजीत होगा इस लिए उसने थप्पड़ मारा

पर निकला कुमार

वहाँ भीड़ तो बहुत थी

शालिनी का भी बेलेन्स जा रह था

शालिनी को 69% लग रहा था कि कुमार ने जानबूझ कर नही किया

कुमार भी शॉक्ड था थप्पड़ से

ऐसा तभी होता है हब कुछ अनएक्सपेक्ट होता है

अजीत- भाभी वेटर के वक्त वो हाथ जयसिंघ का हो भी सकता है

शालिनी- हो तो सकता है

जयसिंघ- शालिनी कुच्छ करने से पहले मुझे बताना चाहिए था तुम्हें

शालिनी- वो सब इतने अचानक हुआ था कि

जयसिंघ- बिना वजा कुमार को थप्पड़ मार दिया

अजीत- घर की बात है ये सब तो होता है , वैसे भाभी ने पार्टी मे तमाशा ना करके अच्छा किया सबको लगेगा कि भाभी की तबीयत ठीक

नही थी जिस से कुमार को थप्पड़ मारा

जयसिंघ- फिर शालिनी ने कुमार से माफी माँग ली

कुमार अजीत की तरफ देखने लगा

किस तरह अजीत ने उसे बचा लिया

कुमार तो अजीत के पैर धो कर पानी पिएगा

शालिनी- सॉरी देवर्जी ,

.कुमार- कोई बात नही भाभिजी , ये घर की बात है

जयसिंघ - तुम पार्टी मे जाकर बता दो कि शालिनी की तबीयत ठीक नही है जिस से वो आराम कर रही है

अजीत चला गया

जयसिंघ- कुमार सॉरी , शालिनी की तरफ से मैं तुमसे माफी माँगता हूँ

कुमार- कोई बात नही ,

और कुमार बाहर पार्टी मे चला गया

जयसिंघ ने शालिनी को आराम करने को कहा और पार्टी मे जाकर सब से माफी माँगने लगा

सब नॉर्मल हो गये

अजीत ने कुमार को समझा दिया कि अब शालिनी से दूर रहना

कुमार ने अजीत को थॅंक्स कहा

और अजीत ने कुमार को कहा कि ये शक कभी ख़तम नही होगा इसका सिर्फ़ एक इलाज है कुमार

शालिनी को बहन बना ले

कुमार ने अजीत की बात मान ली , उसका शालिनी का भूत उतर गया

और वादा किया की वो शालिनी से राखी बँधवा लेगा पर शालिनी को एक दिन पा कर रहेगा

इधर पार्टी ख्तम होते ही सब मेहमान वापस चले गये

जयसिंघ भी शालिनी के पास आ गया

शालिनी बेड पे लेट कर रो रही थी

जयसिंघ शालिनी के पास आकर उसकी गोद मे सर रख बैठ गया

जयसिंघ- क्या हुआ मेरे सोना को , रो क्यूँ रही हो

शालिनी-मैं बहुत बुरी हूँ

जयसिंघ- ऐसा तुम्हें क्यूँ लगता है

शालिनी-मेरे वजश् से आपको सबसे माफी माँगनी पड़ी

जयसिंघ- माफी माँगने से आदमी छोटा नही हो जाता , आदमी को सुकून मिलता है

शालिनी-सब मेरी ग़लती है

जयसिंघ- मेरी शालिनी ग़लती नही कर सकती अब बताओ रीयल मे क्या हुआ था

शालिनी-कुमार की बात आक्सिडेंट जैसी लग रही थी

जयसिंघ- सुरू से बताओ

शालिनी-वेटर जब गिरा था तब आप और अजीत मेरे पास खड़े थे

जयसिंघ- हाँ

शालिनी-जैसे ही वेटर गिरा तो आपने मुझे कहाँ से पकड़ा था

जयसिंघ- एक हाथ से तुम्हें अपने तरफ खिचा और तुम गिर ना जाओ जिस से दूसरे तरफ के कंधे को दूसरे हाथ से पकड़ लिया

शालिनी- आपके हाथो मे मेरे हाथ थे तो कौन मेरी गंद कौन दबा सकता है

जयसिंघ- क्या कहा ,

शालिनी-किसी ने पीछे से दवा दिया था

जयसिंघ-पर अजीत ने कहा कि कमर पकड़ी थी और तुमने भी हाँ कहा

शालिनी- तो सबके सामने कहती गंद दबाई है

जयसिंघ- वहाँ सिर्फ़ अजीत था और अजीत कितना कमीना है मुझे पता है ,तुम पहले बता देती तो मैं तभी उसका मूह तोड़ देता

शालिनी-और कुमार के वक्त जो हुआ मे बी वो आक्सिडेंट हो क्यूँ कि वहाँ बच्चे बहुत मस्ती कर रहे थे ,

जयसिंघ- इतना बताओ कि कुमार के कहाँ पकड़ा था

शालिनी- (क्या बताऊ , सच बताया तो कुमार और इनके बीच झगड़ा हो जाएगा जो इनके लिए अच्छा नही होगा ) कमर और पीछे वाला थोड़ा हिस्सा

जयसिंघ- तुम्हें लगा कि ये जानबूझ कर किया है इस लिए कुमार को मारा

शालिनी- मुझे पता नही था वो कुमार है वरना मैं आपको बता देती , मुझे लगा फिर से अजीतहै इस लिए थप्पड़ मारा

जयसिंघ- कुमार अच्छा आदमी है , वो ऐसा जानबूझ कर नही करेगा , पर अजीत को मैं छोड़ूँगा नही

शालिनी-( मुझे शक है कि कुमार ने भी जानबूझ कर किया ,) जाने दीजिए अब उस थप्पड़ से दोनो दूर रहेंगे

जयसिंघ- जितना दूर रहेंगे उतना मुझसे बचेंगे वरना तुम्हें जिस हाथ से टच किया वो काट दूँगा

शालिनी-अब अगली बार कभी ऐसा हुआ तो पहले आपको बता दूँगी

जयसिंघ- मुझे बताने की फिकर मत करना तुम्हें जो अच्छा लगे वो करना , मुझे तुमपे पूरा विश्वास है की तुम ग़लत नही कर सकती

शालिनी- आप को मुझपे इतना विश्वास है

जयसिंघ- प्यार करता हू तुम्हें , तुमपे विश्वास ना करूँगा तो क्या दूसरो पे करूँ

शालिनी- आपको अजीत की बतो पे शक नही हुआ

जयसिंघ- मैं ने कुमार की वजह से कुछ नही कहा , कुमार ऐसा नही करेगा ये मुझे पता है

शालिनी- और मैं कहूँ की कुमार ने जानबूझ कर किया है तो

.जयसिंघ- फिर मैं फ़ैसला तुम पे छोड़ दूँगा , तुम जो करोगी वही सही समझूंगा , पर सबूत हो तो अच्छा होता है , तुम ना सबूत भी जमा करती जाओ

शालिनी- आप बहुत स्मार्ट हो

जयसिंघ- तुम भी स्मार्ट हो , बेहोश होने का नाटक करके अच्छा किया

शालिनी- आपके साथ रहने से आप आए सिख रही हूँ

जयसिंघ- चलो देखता हूँ कि प्यार करके कितना सीखा है मुझसे

और जयसिंघ शालिनी को प्यार की दुनिया मे ले गया
 
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