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फ्लॅशबॅक 999
नेहा को कोई रास्ता नही मिल रहा था.
अजीत और कुमार के प्लान से जयसिंघ अंजान था
पर नेहा को सब पता चल गया
पर उसकी बात का सबूत नही था
ऐसे मे उसकी बात पे कौन विश्वास करता
देखते देखते 2 दिन निकल गये ,नेहा अपने ख़यालो मे खोती जा रही थी.
उसको एक छोटी सी उम्मीद भी नही दिख रही थी.
नेहा ज़्यादातर समय अपने कमरे मे रह कर सोचती रहने लगी.
किसी को लगा शादी की वजह से नेहा कमरे मे रह कर अपने बचपन के दिनो को याद कर रही है.
किसी को लग रहा था कि उसकी तबीयत ठीक नही है.
किसी को लग रहा था कि गाँव छोड़ कर जाने से सेनटी हो गयी है.
ऐसे मे शालिनी घर की बहू ,जो गाँव और शहर3 दोनो जगह रह चुकी है. अलग अलग लोगो से मिलती है. उसकी आँख कुछ अलग बात नेहा की खोमोसी मे देख रही थी.
शालिनी ने अपनी ननंद मे 2 दिन से आए हुए बदलाव को ओब्जर्व कर चुकी थी.
जब से नेहा कुमार के साथ घूमने गयी थी तब से नेहा मे ये बदलाव दिख रहा था.
शालिनी को लग रहा था की कुछ तो बात है जो हँसती हुई नेहा को ऐसे गुम्सुम बना दिया है.
शालिनी ,नेहा और कुमार के शादी से खुश नही थी, उसने जयसिंघ को कहा भी था कि नेहा के लिए कुमार ठीक आदमी.नही है पर जयसिंघ के आँख पर दोस्ती की पट्टी लगी हुई थी.
ऐसे मे नेहा का इस तरह रहना शालिनी को हजम नही हो रहा था
शालिनी को पता था कि कुमार की सोच कैसी है
पर उसके पास जयसिंघ की बताने के लिए सबूत नही था
ऐसे शालिनी ने एक अच्छा मोका देख कर नेहा को अकेले मे पकड़ लिया
शालिनी नेहा से बात करने के लिए उसके कमरे मे चली गयी जहाँ पर नेहा बिस्तेर पे लेट कर छत की तरफ देख रही थी.
शालिनी-नेहा ,
नेहा अपनी भाभी की बात सुनकर होश मे आ गयी.
नेहा-क्या कहा आपने
शालिनी-मैं ने तो कुछ नही कहा ,तू बता किस के सपने देख रही है
नेहा-मैं तो जाग रही हूँ. सपने तो सोते हुए देखे जाते है
शालिनी-पर मेरी ननंद तो दिन मे सपने देख रही है.
नेहा-ऐसा कुछ नही है
शालिनी-लगता है कुमार के सपने देख रही है.
कुमार का नाम सुनते ही नेहा का चेहरा सीरीयस हो गया .इतना काफ़ी था शालिनी के लिए
समझ गयी कि.नेहा के ऐसे रहने के पीछे कुमार है
शालिनी-बता क्या हुआ है.
भाभी को मज़ाक करते हुए अचानक सीरीयस देख कर नेहा हड़बड़ा गयी.
नेहा-कुछ भी तो नही
शालिनी-देख मुझे पता है कुछ तो है जो अंदर अंदर तुझे खाए जा रहा है. मुझे बता मैं तेरी मदद कर सकती हूँ.
नेहा-ऐसा कुछ नही है
शालिनी-तुझ से ज़्यादा दुनिया देखी है, कुमार के साथ कुछ हुआ है जिस से तू परेशान है.
नेहा-आप जाइए यहाँ से ,मुझे अकेला छोड़ दीजिए
शालिनी-देखो नेहा ,मुझे पता है तू इस शादी से खुश नही है,कुमार तेरे लायक नही है.
नेहा-नही है तो आपने कुछ किया क्यूँ नही
शालिनी-तेरे भैया ने मुझे कुछ पूछा ही नही और सीधे कुमार को यहाँ लेकर आ गये.मैं रात मे तुम्हारे भैया से बात करने का
सोच रही थी कि तूने भी हाँ कर दी.
नेहा-मैं ने हाँ नही की थी. अपने कमरे मे जाने को कोई कैसे हाँ समझ सकता है
शालिनी-मतलब तुझे कुमार से शादी नही करनी थी.
नेहा-वो बहुत गंदा है
शालिनी-मुझे बता ,मैं तेरी मदद ज़रूर करूँगी.मैं तुझे अपनी छोटी बहन मानती हूँ
नेहा-मेरी कोई मदद नही कर सकता
शालिनी-ऐसा तू सोचती है.मैं ने तो तुझे हमेशा अपनी छोटी बहन समझा है.और तेरे लिए कुछ भी कर सकती हूँ.
नेहा-कुछ भी कर सकती है तो मेरी शादी रुकवा दीजिए
शालिनी-मुझे सिर्फ़ एक वजह बता शादी ना करने की,फिर कोई कुछ भी कहे मैं तेरी शादी कुमार के साथ नही होने दूँगी. बस एक वजह बता ,मुझे एक वजह बता कर देख फिर तेरी भाभी क्या करती है , भले तुम्हारे भैया गुस्सा हो जाए पर मैं तेरी शादी होने नही दूँगी
अपनी भाभी की बात सुनकर नेहा रोते हुए गले लग गयी.
नेहा-भाभी कुमार बहुत गंदा है, बहुत गंदा है
शालिनी-क्या हुआ बता मुझे
नेहा-वो नीता के साथ गंदा काम करना चाहता है. आपके साथ भी.
शालिनी-मुझे पता है वो कैसा है. उसकी तो बुरी नज़र है मुझपे ,मैं ने तेरे भैया को बताया था पर तेरे भैया अपने दोस्तो के
बारे में कुछ सुन ना नही चाहते, अब तो कुमार ने अपनी लिमिट क्रॉस कर ली है. नीता पे बुरी नज़र रखता है,
नेहा-भाभी कुछ करो ना ,नीता को बचाओ
शालिनी-नीता तभी बच सकती है जब तेरी शादी कुमार से ना हो
नेहा-आप पिताजी से बात करो ना
शालिनी-पहले ये बता तुझे ये कैसे पता चला कुमार नीता पे गंदी नज़र रखता है.
नेहा-मैं आप को पूरी बात बताती हूँ
और उस्दिन जो जो हुआ वो नेहा अपनी भाभी को बताने लगी.
शालिनी-ये तो बहुत बड़ा कमीना है, तू.पागल है तुझे इतना कुछ पता था फिर भी ऐसे चुप चाप बैठी है.
नेहा-मैं ने बहुत सोचा भाभी, पर मुझे कोई रास्ता नही दिख रहा था.शादी ना करूँ तो भैया नाराज़ हो जाएँगे ,पिताजी की
इज़्ज़त का क्या होगा,
शालिनी-और हाँ करने से जैसे तुझे अवॉर्ड मिलने वाला था.
नेहा-भाभी कुछ करो ना ,
शालिनी-अब बात बहुत आगे जा चुकी है, 3 दिन बाद तेरी शादी है.
नेहा-आपने कहा था कि आप कुछ भी करेगी.
शालिनी-सोचने तो दे, बहुत कुछ दाँव पे लगा है.
नेहा-आप ही कुछ कर सकती है .मेरी ग़लती है मुझे आप से बात करनी चाहिए थी.
और नेहा रोने लगी.
शालिनी-तू रोना बंद कर.मुझे सोचने दे, ये मामला थोड़ा कॉंप्लिकेट है.
नेहा-मेरे लिए नही नीता के लिए कुछ कीजिए
शालिनी-तू नीता के लिए कुछ भी कर सकती हो ना
नेहा-हा, नीता मेरी जान है
शालिनी-तो मैं पिताजी से बात करती हूँ.
नेहा-पिताजी को पता चला तो वो कुमार को मार डालेंगे और फिर पिताजी को जैल होगी, मैं पिताजी के बिना नही रह सकती
शालिनी- ये रिस्की होगा कि ये बताना कि कुमार की तुम पे नीता पे मुझपे बुरी नज़र है ,, पिताजी तो कुमार की जान ले लेंगे
नेहा- कुछ और सोचो ना भाभी
शालिनी-इतना बताते है कि कुमार की शादी हो चुकी है. फिर तेरी शादी कॅन्सल हो जाएगी.
नेहा-मेरी शादी ना होने से पिताजी की इज़्ज़त का क्या होगा. पिताजी तो ये सोचेंगे कि इसके बाद मेरी शादी कैसे होगी.माँ तो
जीते जी.मर जाएगी
शालिनी-क्यूँ ना उसी दिन किसी और से जैसे तेरा कोई क्लासमेट होगा उस से तेरी शादी करवा देते है. है कोई तेरे पसंद का कोई क्लासमेट
नेहा-क्लासमेट नही, वो सुरेश
शालिनी-सुरेश, पूजा का मूह बोला देवर
नेहा-हाँ. वो मुझे प्यार करता है. ये रिंग दी थी उसने , और मैं भी
शालिनी-सुरेश से प्यार करने के बाद भी तू शादी को तय्यार कैसे हुई. तू ना एक नंबर की ईडियट है
नेहा- भाभी
शालिनी- सुरेश से तू प्यार करती है
नेहा- हाँ
ढालिनी- मुझे सब बता कुछ भी मत छुपाना
नेहा ने सुरेश के बारे में बताना सुरू किया.
शालिनी-तेरी जैसी ईडियट नही देखी मैं ने ,सुरेश की जगह कुमार को हाँ कर दिया ,
नेहा-भाभी
शालिनी-तू मेरा नाम भी मत ले ,इतनी ईडियट तू कैसे हो सकती है
नेहा-मैं तो बस सब को खुश देखना चाहती थी.माँ को भैया मिल जाएँगे पिताजी को अवी मिल जाएगा
शालिनी-खुद दुखी होकर दूसरो को खुश करना चाहती थी. वाह रे मेरी ननंद,
नेहा-भाभी आप तो ऐसा मत कहिए
शालिनी-तू सुरेश से शादी करना चाहती है ना
नेहा-हाँ
शालिनी-ठीक है फिर ,अब सब ठीक होगा.
नेहा-वो कैसे
शालिनी-तेरी शादी उसी दिन होगी जब तय हुई है पर सुरेश के साथ होंगी
नेहा-और कुमार
शालिनी-उसको सबके सामने तुम्हें थप्पड़ मारना होगा,तभी ये शादी टूट ने से तुझे कोई कुछ नही कहेगा.
नेहा-मुझसे नही होगा
शालिनी-फिर नीता को कुमार के हाथो मे जाने दे,
नेहा-थप्पड़ मार कर मैं क्या कहूँगी
शालिनी-वो थप्पड़ इस लिए है कि कुमार ने जो नीता और तेरे साथ किया उसकी सज़ा. और तू इतना कहना कि कुमार की पहले भी शादी हो चुकी है. तू इस से शादी नही करना चाहती है.
नेहा-पिताजी गुस्सा हो जाएँगे
शालिनी-मैं हूँ ना, बाद मे पिताजी को मैं सब बता दूँगी.
नेहा-और भैया
शालिनी-कोई एक तो नाराज़ होगा ही. तेरे भैया ही सही.पर तू टेन्षन मत ले मैं उनको मना लूँगी.
नेहा- भैया नाराज़ होंगे
शालिनी- एक तरफ तेरे भैया है और दूसरी तरफ हम सब , , अब तू फ़ैसला कर
नेहा - मेरी जगह आप होती तो क्या करती
शालिनी- मैं फॅमिली के साथ जाती,
नेहा- तो सब कुछ मुझे करना होगा.
शालिनी-हाँ, मैं ने किया तो सब कुछ और समझ जाएँगे .तू करेगी तो सब ठीक होगा.बस नीता के बारे में सोचना
नेहा-उसको ऐसा थप्पड़ मारूँगी कि वो ज़िंदगी भर याद रखेगा.
शालिनी-तो सब प्लान मे हिसाब से करना ,
नेहा-आप देखती जाओ
शालिनी-और सुरेश का कुछ सोचती हूँ.
नेहा-वो तो मुझ पे नाराज़ होगा.
शालिनी-तूने काम ही ऐसा किया है कि वो तो गुस्सा होगा.
नेहा-अगर उसने मुझसे शादी करने से मना किया तो
शालिनी-मैं हूँ ना ,तू बस खुश रहा कर. ऐसे रोती हुई अच्छी नही लगती.
नेहा ने भाभी को गले लगा लिया.
शालिनी-क्या जब देखो तब गले लगती हो ,लगता है सुहागरात जल्दी करनी है.
नेहा-आप भी ना भाभी.
शालिनी-मेरी बात ध्यान से सुन
नेहा-जी
शालिनी-चाहे कुछ भी हो जाए ,कुछ भी, तू पीछे नही हटेगी.एक बार सोच लिया तो सोच लिया
नेहा-क्या होने वाला है
शालिनी-कुछ नही. बस तू हिम्मत नही हारना बाकी सब मैं देख लूँगी.अपनी भाभी पे विश्वास रखना
नेहा-आप मेरे साथ हो तो मुझे किसी बात कर डर नही है
शालिनी-चल अब सुरेश के नाम की मेहन्दी लगा मैं दूल्हे को मना ने का सोचती हूँ
नेहा-सुरेश से मेरी तरफ से माफी माँग लेना
शालिनी-वो सुहागरात मे तू माँग लेना.
नेहा-आप भी ना
और शालिनी ने नेहा के सर पे किस किया और नेहा के कमरे से बाहर आ गयी.
नेहा को कोई रास्ता नही मिल रहा था.
अजीत और कुमार के प्लान से जयसिंघ अंजान था
पर नेहा को सब पता चल गया
पर उसकी बात का सबूत नही था
ऐसे मे उसकी बात पे कौन विश्वास करता
देखते देखते 2 दिन निकल गये ,नेहा अपने ख़यालो मे खोती जा रही थी.
उसको एक छोटी सी उम्मीद भी नही दिख रही थी.
नेहा ज़्यादातर समय अपने कमरे मे रह कर सोचती रहने लगी.
किसी को लगा शादी की वजह से नेहा कमरे मे रह कर अपने बचपन के दिनो को याद कर रही है.
किसी को लग रहा था कि उसकी तबीयत ठीक नही है.
किसी को लग रहा था कि गाँव छोड़ कर जाने से सेनटी हो गयी है.
ऐसे मे शालिनी घर की बहू ,जो गाँव और शहर3 दोनो जगह रह चुकी है. अलग अलग लोगो से मिलती है. उसकी आँख कुछ अलग बात नेहा की खोमोसी मे देख रही थी.
शालिनी ने अपनी ननंद मे 2 दिन से आए हुए बदलाव को ओब्जर्व कर चुकी थी.
जब से नेहा कुमार के साथ घूमने गयी थी तब से नेहा मे ये बदलाव दिख रहा था.
शालिनी को लग रहा था की कुछ तो बात है जो हँसती हुई नेहा को ऐसे गुम्सुम बना दिया है.
शालिनी ,नेहा और कुमार के शादी से खुश नही थी, उसने जयसिंघ को कहा भी था कि नेहा के लिए कुमार ठीक आदमी.नही है पर जयसिंघ के आँख पर दोस्ती की पट्टी लगी हुई थी.
ऐसे मे नेहा का इस तरह रहना शालिनी को हजम नही हो रहा था
शालिनी को पता था कि कुमार की सोच कैसी है
पर उसके पास जयसिंघ की बताने के लिए सबूत नही था
ऐसे शालिनी ने एक अच्छा मोका देख कर नेहा को अकेले मे पकड़ लिया
शालिनी नेहा से बात करने के लिए उसके कमरे मे चली गयी जहाँ पर नेहा बिस्तेर पे लेट कर छत की तरफ देख रही थी.
शालिनी-नेहा ,
नेहा अपनी भाभी की बात सुनकर होश मे आ गयी.
नेहा-क्या कहा आपने
शालिनी-मैं ने तो कुछ नही कहा ,तू बता किस के सपने देख रही है
नेहा-मैं तो जाग रही हूँ. सपने तो सोते हुए देखे जाते है
शालिनी-पर मेरी ननंद तो दिन मे सपने देख रही है.
नेहा-ऐसा कुछ नही है
शालिनी-लगता है कुमार के सपने देख रही है.
कुमार का नाम सुनते ही नेहा का चेहरा सीरीयस हो गया .इतना काफ़ी था शालिनी के लिए
समझ गयी कि.नेहा के ऐसे रहने के पीछे कुमार है
शालिनी-बता क्या हुआ है.
भाभी को मज़ाक करते हुए अचानक सीरीयस देख कर नेहा हड़बड़ा गयी.
नेहा-कुछ भी तो नही
शालिनी-देख मुझे पता है कुछ तो है जो अंदर अंदर तुझे खाए जा रहा है. मुझे बता मैं तेरी मदद कर सकती हूँ.
नेहा-ऐसा कुछ नही है
शालिनी-तुझ से ज़्यादा दुनिया देखी है, कुमार के साथ कुछ हुआ है जिस से तू परेशान है.
नेहा-आप जाइए यहाँ से ,मुझे अकेला छोड़ दीजिए
शालिनी-देखो नेहा ,मुझे पता है तू इस शादी से खुश नही है,कुमार तेरे लायक नही है.
नेहा-नही है तो आपने कुछ किया क्यूँ नही
शालिनी-तेरे भैया ने मुझे कुछ पूछा ही नही और सीधे कुमार को यहाँ लेकर आ गये.मैं रात मे तुम्हारे भैया से बात करने का
सोच रही थी कि तूने भी हाँ कर दी.
नेहा-मैं ने हाँ नही की थी. अपने कमरे मे जाने को कोई कैसे हाँ समझ सकता है
शालिनी-मतलब तुझे कुमार से शादी नही करनी थी.
नेहा-वो बहुत गंदा है
शालिनी-मुझे बता ,मैं तेरी मदद ज़रूर करूँगी.मैं तुझे अपनी छोटी बहन मानती हूँ
नेहा-मेरी कोई मदद नही कर सकता
शालिनी-ऐसा तू सोचती है.मैं ने तो तुझे हमेशा अपनी छोटी बहन समझा है.और तेरे लिए कुछ भी कर सकती हूँ.
नेहा-कुछ भी कर सकती है तो मेरी शादी रुकवा दीजिए
शालिनी-मुझे सिर्फ़ एक वजह बता शादी ना करने की,फिर कोई कुछ भी कहे मैं तेरी शादी कुमार के साथ नही होने दूँगी. बस एक वजह बता ,मुझे एक वजह बता कर देख फिर तेरी भाभी क्या करती है , भले तुम्हारे भैया गुस्सा हो जाए पर मैं तेरी शादी होने नही दूँगी
अपनी भाभी की बात सुनकर नेहा रोते हुए गले लग गयी.
नेहा-भाभी कुमार बहुत गंदा है, बहुत गंदा है
शालिनी-क्या हुआ बता मुझे
नेहा-वो नीता के साथ गंदा काम करना चाहता है. आपके साथ भी.
शालिनी-मुझे पता है वो कैसा है. उसकी तो बुरी नज़र है मुझपे ,मैं ने तेरे भैया को बताया था पर तेरे भैया अपने दोस्तो के
बारे में कुछ सुन ना नही चाहते, अब तो कुमार ने अपनी लिमिट क्रॉस कर ली है. नीता पे बुरी नज़र रखता है,
नेहा-भाभी कुछ करो ना ,नीता को बचाओ
शालिनी-नीता तभी बच सकती है जब तेरी शादी कुमार से ना हो
नेहा-आप पिताजी से बात करो ना
शालिनी-पहले ये बता तुझे ये कैसे पता चला कुमार नीता पे गंदी नज़र रखता है.
नेहा-मैं आप को पूरी बात बताती हूँ
और उस्दिन जो जो हुआ वो नेहा अपनी भाभी को बताने लगी.
शालिनी-ये तो बहुत बड़ा कमीना है, तू.पागल है तुझे इतना कुछ पता था फिर भी ऐसे चुप चाप बैठी है.
नेहा-मैं ने बहुत सोचा भाभी, पर मुझे कोई रास्ता नही दिख रहा था.शादी ना करूँ तो भैया नाराज़ हो जाएँगे ,पिताजी की
इज़्ज़त का क्या होगा,
शालिनी-और हाँ करने से जैसे तुझे अवॉर्ड मिलने वाला था.
नेहा-भाभी कुछ करो ना ,
शालिनी-अब बात बहुत आगे जा चुकी है, 3 दिन बाद तेरी शादी है.
नेहा-आपने कहा था कि आप कुछ भी करेगी.
शालिनी-सोचने तो दे, बहुत कुछ दाँव पे लगा है.
नेहा-आप ही कुछ कर सकती है .मेरी ग़लती है मुझे आप से बात करनी चाहिए थी.
और नेहा रोने लगी.
शालिनी-तू रोना बंद कर.मुझे सोचने दे, ये मामला थोड़ा कॉंप्लिकेट है.
नेहा-मेरे लिए नही नीता के लिए कुछ कीजिए
शालिनी-तू नीता के लिए कुछ भी कर सकती हो ना
नेहा-हा, नीता मेरी जान है
शालिनी-तो मैं पिताजी से बात करती हूँ.
नेहा-पिताजी को पता चला तो वो कुमार को मार डालेंगे और फिर पिताजी को जैल होगी, मैं पिताजी के बिना नही रह सकती
शालिनी- ये रिस्की होगा कि ये बताना कि कुमार की तुम पे नीता पे मुझपे बुरी नज़र है ,, पिताजी तो कुमार की जान ले लेंगे
नेहा- कुछ और सोचो ना भाभी
शालिनी-इतना बताते है कि कुमार की शादी हो चुकी है. फिर तेरी शादी कॅन्सल हो जाएगी.
नेहा-मेरी शादी ना होने से पिताजी की इज़्ज़त का क्या होगा. पिताजी तो ये सोचेंगे कि इसके बाद मेरी शादी कैसे होगी.माँ तो
जीते जी.मर जाएगी
शालिनी-क्यूँ ना उसी दिन किसी और से जैसे तेरा कोई क्लासमेट होगा उस से तेरी शादी करवा देते है. है कोई तेरे पसंद का कोई क्लासमेट
नेहा-क्लासमेट नही, वो सुरेश
शालिनी-सुरेश, पूजा का मूह बोला देवर
नेहा-हाँ. वो मुझे प्यार करता है. ये रिंग दी थी उसने , और मैं भी
शालिनी-सुरेश से प्यार करने के बाद भी तू शादी को तय्यार कैसे हुई. तू ना एक नंबर की ईडियट है
नेहा- भाभी
शालिनी- सुरेश से तू प्यार करती है
नेहा- हाँ
ढालिनी- मुझे सब बता कुछ भी मत छुपाना
नेहा ने सुरेश के बारे में बताना सुरू किया.
शालिनी-तेरी जैसी ईडियट नही देखी मैं ने ,सुरेश की जगह कुमार को हाँ कर दिया ,
नेहा-भाभी
शालिनी-तू मेरा नाम भी मत ले ,इतनी ईडियट तू कैसे हो सकती है
नेहा-मैं तो बस सब को खुश देखना चाहती थी.माँ को भैया मिल जाएँगे पिताजी को अवी मिल जाएगा
शालिनी-खुद दुखी होकर दूसरो को खुश करना चाहती थी. वाह रे मेरी ननंद,
नेहा-भाभी आप तो ऐसा मत कहिए
शालिनी-तू सुरेश से शादी करना चाहती है ना
नेहा-हाँ
शालिनी-ठीक है फिर ,अब सब ठीक होगा.
नेहा-वो कैसे
शालिनी-तेरी शादी उसी दिन होगी जब तय हुई है पर सुरेश के साथ होंगी
नेहा-और कुमार
शालिनी-उसको सबके सामने तुम्हें थप्पड़ मारना होगा,तभी ये शादी टूट ने से तुझे कोई कुछ नही कहेगा.
नेहा-मुझसे नही होगा
शालिनी-फिर नीता को कुमार के हाथो मे जाने दे,
नेहा-थप्पड़ मार कर मैं क्या कहूँगी
शालिनी-वो थप्पड़ इस लिए है कि कुमार ने जो नीता और तेरे साथ किया उसकी सज़ा. और तू इतना कहना कि कुमार की पहले भी शादी हो चुकी है. तू इस से शादी नही करना चाहती है.
नेहा-पिताजी गुस्सा हो जाएँगे
शालिनी-मैं हूँ ना, बाद मे पिताजी को मैं सब बता दूँगी.
नेहा-और भैया
शालिनी-कोई एक तो नाराज़ होगा ही. तेरे भैया ही सही.पर तू टेन्षन मत ले मैं उनको मना लूँगी.
नेहा- भैया नाराज़ होंगे
शालिनी- एक तरफ तेरे भैया है और दूसरी तरफ हम सब , , अब तू फ़ैसला कर
नेहा - मेरी जगह आप होती तो क्या करती
शालिनी- मैं फॅमिली के साथ जाती,
नेहा- तो सब कुछ मुझे करना होगा.
शालिनी-हाँ, मैं ने किया तो सब कुछ और समझ जाएँगे .तू करेगी तो सब ठीक होगा.बस नीता के बारे में सोचना
नेहा-उसको ऐसा थप्पड़ मारूँगी कि वो ज़िंदगी भर याद रखेगा.
शालिनी-तो सब प्लान मे हिसाब से करना ,
नेहा-आप देखती जाओ
शालिनी-और सुरेश का कुछ सोचती हूँ.
नेहा-वो तो मुझ पे नाराज़ होगा.
शालिनी-तूने काम ही ऐसा किया है कि वो तो गुस्सा होगा.
नेहा-अगर उसने मुझसे शादी करने से मना किया तो
शालिनी-मैं हूँ ना ,तू बस खुश रहा कर. ऐसे रोती हुई अच्छी नही लगती.
नेहा ने भाभी को गले लगा लिया.
शालिनी-क्या जब देखो तब गले लगती हो ,लगता है सुहागरात जल्दी करनी है.
नेहा-आप भी ना भाभी.
शालिनी-मेरी बात ध्यान से सुन
नेहा-जी
शालिनी-चाहे कुछ भी हो जाए ,कुछ भी, तू पीछे नही हटेगी.एक बार सोच लिया तो सोच लिया
नेहा-क्या होने वाला है
शालिनी-कुछ नही. बस तू हिम्मत नही हारना बाकी सब मैं देख लूँगी.अपनी भाभी पे विश्वास रखना
नेहा-आप मेरे साथ हो तो मुझे किसी बात कर डर नही है
शालिनी-चल अब सुरेश के नाम की मेहन्दी लगा मैं दूल्हे को मना ने का सोचती हूँ
नेहा-सुरेश से मेरी तरफ से माफी माँग लेना
शालिनी-वो सुहागरात मे तू माँग लेना.
नेहा-आप भी ना
और शालिनी ने नेहा के सर पे किस किया और नेहा के कमरे से बाहर आ गयी.