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फ्लश बॅक 987
पिताजी अवी के आने से काफ़ी खुश थे. घर मे हर दिन दीवाली जैसा महॉल रहने लगा.
जयसिंघ 1 महीना गाँव मे रह कर शहर3 चला गया था.
कुमार को .कंपनी की साइट दिखा दी
जयसिंघ अब सब कुछ फाइनल करने के लिए शहर3 जा रहा था
कुमार से ये पूछने की गाँव की कंपनी का कन्स्ट्रक्षन कब स्टार्ट करेगा
इधर समधन भी अपने बेटे के ससुराल की खातिरदारी का स्वाद लेकर अपने शहर2 चली गयी.
समधन कितने दिन यहाँ रहती. पर जितने दिन रही उतने दिन अपनी ज़िंदगी के हसीन पल जी लिए. समधन गाँव से अपने समधी के साथ बिताए पल को अपने साथ ले गयी.
नेहा नीता अवी के साथ सारा दिन बिताने लगी.
इस बीच पिताजी को नेहा नीता की शादी की फिकर होने लगी.
नेहा नीता की एज की सारी लड़कियो की शादी हो चुकी थी. माँ ने भी पिताजी को ये बात याद दिला दी कि नेहा नीता की शादी करनी है.
पिताजी उस काम मे लग गये.
इसी बीच स्वेता का बर्तडे भी आ गया. पूजा को खुश रखने के लिए स्वेता का बर्तडे अच्छे से मनाया जाने का सोचा गया.
पिछली बार जिस तरह सीतल का बर्तडे मनाया था वैसे स्वेता का मानने की बात सब को बता दिया.
चलो इस बहाने से 5 महीने बाद समधन वापस गाँव आएगी. फिर से समधी का प्यार पाने के लिए.
पिताजी तय्यारी मे लग गये.
मेहमान भी स्वेता के बर्तडे के लिए आ गये.
इस बार समधन के साथ रमेश के दोस्त सुरेश और जतिन भी आ गये.
पिछली बार काम की वजह से नही आ सके थे पर इस बार सुरेश और जतिन कुछ सोचकर आए थे.
सुरेश और जतिन के आने का सुनते ही रमेश को सुरेश की बात याद आ गयी.
रमेश ने पूजा से बात करने का फ़ैसला किया.
रमेश-सुनो
पूजा-हाँ
रमेश-माँ के साथ सुरेश और जतिन भी आ रहे है
पूजा-ये तो अच्छी बात
रमेश-हाँ, पर वो सिर्फ़ स्वेता के बर्तडे के लिए नही आ रहे
पूजा-कंपनी के काम से आ रहे है यही कहना चाहते है ना. मुझे पता है
रमेश-और भी एक खास काम के लिए आ रहे
पूजा-ऐसा कौनसा काम आ गया उनको
रमेश-वो सुरेश कह रहा था कि
पूजा-क्या कह रहा था
रमेश-उसे शादी करनी है. उसकी एज भी हो गयी है
पूजा-ये तो अच्छी बात है.
रमेश-उसे एक लड़की भी पसंद है.
पूजा-सुरेश ने पसंद की और अपनी भाभी को नही बताया .आने दो उनको ,अच्छी खबर लेती हूँ
रमेश-ये नही पुछोगी कि वो लड़की कौन है.
पूजा-कौन है वो जिसे सुरेश ने पसंद किया
रमेश-नेहा,
पूजा-क्या कहा
रमेश-हमारी नेहा,तुम्हारी बहन
पूजा-ऐसे कैसे
रमेश-मुझे क्या पता, उस ने कहा कि नेहा से शादी करना चाहता है.
पूजा-उसने कहा और,
रमेश-क्यूँ तुम्हें ये सुनकर अच्छा नही लगा.
पूजा सोचने लगी.
रमेश-सुरेश को मैं बचपन से जानता हूँ ,अच्छा दोस्त है मेरा,मेरे भाई जैसा है , तुम भी तो जानती हो, ना ड्रिंक करता है ना स्मोकिंग , उसका दिल साफ है
पूजा-हाँ, पर कभी इस बारे में सोचा नही था.
रमेश-तो अब सोच लो
पूजा-मेरे सोचने से क्या होता है
रमेश-तुम्हें पसंद है ना सुरेश,
पूजा-मैं क्या कहूँ
रमेश-तुम्हारी बहन केलिए सुरेश अच्छा रहेगा.नेहा हमारे साथ शहर2 मे रहेगी
पूजा-सुरेश है तो अच्छा , मैं देखती हूँ क्या कर सकती हूँ
रमेश-ये हुई ना बात, पिताजी से बात करके देखो
पूजा-पहले नेहा से बात करूँगी. कब आ रहे है
रमेश-आज दोपेहर तक आ जाएँगे.
पूजा-ठीक है. मैं कुछ करती हूँ पर नेहा ने ना किया तो मैं कुछ नही करूँगी
रमेश-हाँ हाँ ,नेहा की मर्ज़ी के बिना कुछ नही होगा.
पूजा-चलो अब बर्तडे की तय्यारी करनी है
रमेश-रूको तो,
पूजा-क्या है
रमेश-जतिन भी
पूजा-जतिन का क्या
रमेश-जतिन नीता
पूजा-वो बाद मे पहले नेहा का सोचने दो,
रमेश-ठीक है. मेरे लिए इतना कर देना
पूजा-आपके लिए नही अपनी बहन के लिए करूँगी
रमेश-दोनो एक ही बात है
पूजा-हो गया हो तो मैं जा सकती हूँ
रमेश ने पूजा को किस किया और दोनो अपने अपने काम मे लग गये.
पूजा बर्तडे से ज़्यादा नेहा के बारे में सोच रही थी.
पिताजी से पहले नेहा से पूछना होगा.
कल बर्तडे शाम मे रखा है. सुबह नेहा को मंदिर लेकर जाउन्गी वही उस से पूछ लूँगी
पूजा ने सोच लिया कि नेहा और सुरेश को कल मंदिर लेकर जाएगी.
रमेश सुरेश और अपनी माँ को लेने शहर चला गया.
सुरेश शहर मे रुकने वाला था पर रमेश ने एक बार पिताजी से मिलने के लिए गाँव लेकर आ गया.
समधन को देखते ही पिताजी के चेहरे पे एक मुकसान आ गयी.
समधन ने भी मुश्कुरा कर समधी की स्माइल का जवाब दिया .और अंदर चली गयी.
रमेश अपने दोस्तो को लेकर पिताजी के पास आ गये
रमेश-पिताजी ये मेरे दोस्त है, आप तो जानते ही है
पिताजी-हाँ ,इनको तो जानता हूँ शादी मे पूरे काम इन दोनो ने किए थे
सुरेश ने पिताजी के पैर छु कर आशीर्वाद लिया.
पिताजी-जीते रहो बेटा.
रमेश-पिताजी ये दोनो मेरे दोस्त कम भाई ज़्यादा है
पिताजी-पूजा ने बताया था .और शादी मे जिस तरह तुम्हारे साथ थे उस से पता चल गया था. वैसे ये तुम्हारे साथ काम करते है ना
रमेश-हाँ पिताजी, मेरे साथ ही काम करते है, हम तो बचपन से साथ है.
सुरेश-पिताजी ,हमारी भतीजी नही दिख रही है
पिताजी-वो अपने मौसी के साथ होगी.नेहा नेहा स्वेता को लेकर बाहर आना
नेहा स्वेता को लेकर आ गयी.और बाहर आते ही उसकी नज़र सुरेश पे गयी.
सुरेश भी नेहा की खूबसूरती को अपनी आँख मे क़ैद करने लगा.
सुरेश 2 साल बाद नेहा को देख रहा था. पिछली बार सीतल के पैदा होते समय देखा था.
पिछली नेहा और आज की नेहा मे ज़मीन आसमान का फरक था.
नेहा आज उस स्टेज पर थी कि किसी को भी अपनी खूबसूरती मे डूबा सके
कुछ देर दोनो एक दूसरे से नैन मटक्का करते रहे.
पिताजी को किसी ने आवाज़ दी और वो वहाँ से चले गये.
पिताजी के जाते ही नेहा क़समकस मे थी कि क्या करे .
वो सुरेश से बात तो करना चाहती थी पर करने की हिम्मत नही थी.
रमेश-नेहा इधर आओ, वहाँ क्यूँ खड़ी हो
अपने जीजाजी की बात सुनते ही नेहा स्वेता को लेकर आ गयी.
रमेश-नेहा , देखो मेरे दोस्त आए है इनका पूरा ध्यान रखना ,कोई शिकायत नही मिलनी चाहिए
नेहा-जी जीजाजी
रमेश-तुम देखो सुरेश को क्या चाहिए मैं अंदर जाके आता हूँ
अब तो नेहा बुरी तरह से फस चुकी थी. उसके पसीने छूट रहे थे
जतिन भी वहाँ से निकल गया .
सुरेश-कैसी हो नेहा.
नेहा-जी
सुरेश-हमे याद किया कि नही.
नेहा-हाँ नही हाँ नही नही
सुरेश हँसने लगा.
सुरेश-मुझसे डरने की ज़रूरत नही. हम पहले भी तो मिले है.
नेहा-हाँ, तुम कब आए
सुरेश-कुछ देर हुई. तुम कहो ,पढ़ाई कैसी चल रही है.
नेहा-पढ़ाई तो हो गयी
सुरेश-आगे नही पढ़ना
नेहा-नही,
सुरेश-क्यूँ?
नेहा-माँ ने कहा कि... तुम्हारे लिए नाश्ता लाती हूँ
सुरेश-रूको
नेहा रुक गयी
सुरेश-तुम ......,कुछ नही,
नेहा-मैं नाश्ता लेकर आती हूँ
नेहा नाश्ता लेने चली गयी और पूजा सुरेश के पास आ गयी.
पूजा-कैसे हो देवर जी
सुरेश-भाभी जी आप, मैं ठीक हूँ.
पूजा-कहो हमारे गाँव मे कैसे आना हुआ
सुरेश-गाँव मे क्यूँ आते है. उसी लिए आया हूँ
पूजा-तुम्हारे भैया जब आए थे तब यहाँ से शादी करके गये थे
सुरेश-मैं भी शादी करके जाना चाहता हूँ.
पूजा-किस से मेरी सहेली मंदा से
सुरेश-आपकी बहन से ,नेहा से
पूजा-भाभी से साली बनाने का इरादा लगता है
सुरेश-भाभी मेरी साली बन जाओ ना
पूजा-भाभी हूँ तो इतना हसी मज़ाक करते हो जब साली बनूँगी तो ,नही बाबा मुझे नही बन ना साली
सुरेश-भाभी, अपने देवर के लिए, मैं वादा करता हूँ मैं देवर बन के रहूँगा.बस नेहा से मेरी शादी करवा दो
पूजा-पक्का वादा ना
सुरेश-हाँ,
पूजा-और
सुरेश-आप का गुलाम बन जाउन्गा ,
पूजा-फिर तो कुछ करना होगा .
सुरेश-मेरी प्यारी भाभी
पूजा-कल सुबह मंदिर आ जाना
सुरेश-मंदिर क्यूँ
पूजा-नेहा को लेकर आउन्गि. तुम बात कर लेना
सुरेश-ये तो बढ़िया रहेगा.
पूजा-हाँ तब तक नेहा के हाथ का नाश्ता करो
सुरेश-नेहा बना रही है
पूजा-हाँ, मैं ने तो यही सुना है, मैं जाती हूँ वरना नेहा यहाँ नही आएगी
पूजा अंदर जाने लगी.
सुरेश-भाभी
पूजा-हाँ
सुरेश-थॅंक्स
पूजा-अभी नेहा ने हाँ नही कहा .उसके हाँ करने के बाद थॅंक्स कहना.
पूजा अंदर चली गयी और सुरेश नेहा का इंतज़ार करने लगा.
पिताजी अवी के आने से काफ़ी खुश थे. घर मे हर दिन दीवाली जैसा महॉल रहने लगा.
जयसिंघ 1 महीना गाँव मे रह कर शहर3 चला गया था.
कुमार को .कंपनी की साइट दिखा दी
जयसिंघ अब सब कुछ फाइनल करने के लिए शहर3 जा रहा था
कुमार से ये पूछने की गाँव की कंपनी का कन्स्ट्रक्षन कब स्टार्ट करेगा
इधर समधन भी अपने बेटे के ससुराल की खातिरदारी का स्वाद लेकर अपने शहर2 चली गयी.
समधन कितने दिन यहाँ रहती. पर जितने दिन रही उतने दिन अपनी ज़िंदगी के हसीन पल जी लिए. समधन गाँव से अपने समधी के साथ बिताए पल को अपने साथ ले गयी.
नेहा नीता अवी के साथ सारा दिन बिताने लगी.
इस बीच पिताजी को नेहा नीता की शादी की फिकर होने लगी.
नेहा नीता की एज की सारी लड़कियो की शादी हो चुकी थी. माँ ने भी पिताजी को ये बात याद दिला दी कि नेहा नीता की शादी करनी है.
पिताजी उस काम मे लग गये.
इसी बीच स्वेता का बर्तडे भी आ गया. पूजा को खुश रखने के लिए स्वेता का बर्तडे अच्छे से मनाया जाने का सोचा गया.
पिछली बार जिस तरह सीतल का बर्तडे मनाया था वैसे स्वेता का मानने की बात सब को बता दिया.
चलो इस बहाने से 5 महीने बाद समधन वापस गाँव आएगी. फिर से समधी का प्यार पाने के लिए.
पिताजी तय्यारी मे लग गये.
मेहमान भी स्वेता के बर्तडे के लिए आ गये.
इस बार समधन के साथ रमेश के दोस्त सुरेश और जतिन भी आ गये.
पिछली बार काम की वजह से नही आ सके थे पर इस बार सुरेश और जतिन कुछ सोचकर आए थे.
सुरेश और जतिन के आने का सुनते ही रमेश को सुरेश की बात याद आ गयी.
रमेश ने पूजा से बात करने का फ़ैसला किया.
रमेश-सुनो
पूजा-हाँ
रमेश-माँ के साथ सुरेश और जतिन भी आ रहे है
पूजा-ये तो अच्छी बात
रमेश-हाँ, पर वो सिर्फ़ स्वेता के बर्तडे के लिए नही आ रहे
पूजा-कंपनी के काम से आ रहे है यही कहना चाहते है ना. मुझे पता है
रमेश-और भी एक खास काम के लिए आ रहे
पूजा-ऐसा कौनसा काम आ गया उनको
रमेश-वो सुरेश कह रहा था कि
पूजा-क्या कह रहा था
रमेश-उसे शादी करनी है. उसकी एज भी हो गयी है
पूजा-ये तो अच्छी बात है.
रमेश-उसे एक लड़की भी पसंद है.
पूजा-सुरेश ने पसंद की और अपनी भाभी को नही बताया .आने दो उनको ,अच्छी खबर लेती हूँ
रमेश-ये नही पुछोगी कि वो लड़की कौन है.
पूजा-कौन है वो जिसे सुरेश ने पसंद किया
रमेश-नेहा,
पूजा-क्या कहा
रमेश-हमारी नेहा,तुम्हारी बहन
पूजा-ऐसे कैसे
रमेश-मुझे क्या पता, उस ने कहा कि नेहा से शादी करना चाहता है.
पूजा-उसने कहा और,
रमेश-क्यूँ तुम्हें ये सुनकर अच्छा नही लगा.
पूजा सोचने लगी.
रमेश-सुरेश को मैं बचपन से जानता हूँ ,अच्छा दोस्त है मेरा,मेरे भाई जैसा है , तुम भी तो जानती हो, ना ड्रिंक करता है ना स्मोकिंग , उसका दिल साफ है
पूजा-हाँ, पर कभी इस बारे में सोचा नही था.
रमेश-तो अब सोच लो
पूजा-मेरे सोचने से क्या होता है
रमेश-तुम्हें पसंद है ना सुरेश,
पूजा-मैं क्या कहूँ
रमेश-तुम्हारी बहन केलिए सुरेश अच्छा रहेगा.नेहा हमारे साथ शहर2 मे रहेगी
पूजा-सुरेश है तो अच्छा , मैं देखती हूँ क्या कर सकती हूँ
रमेश-ये हुई ना बात, पिताजी से बात करके देखो
पूजा-पहले नेहा से बात करूँगी. कब आ रहे है
रमेश-आज दोपेहर तक आ जाएँगे.
पूजा-ठीक है. मैं कुछ करती हूँ पर नेहा ने ना किया तो मैं कुछ नही करूँगी
रमेश-हाँ हाँ ,नेहा की मर्ज़ी के बिना कुछ नही होगा.
पूजा-चलो अब बर्तडे की तय्यारी करनी है
रमेश-रूको तो,
पूजा-क्या है
रमेश-जतिन भी
पूजा-जतिन का क्या
रमेश-जतिन नीता
पूजा-वो बाद मे पहले नेहा का सोचने दो,
रमेश-ठीक है. मेरे लिए इतना कर देना
पूजा-आपके लिए नही अपनी बहन के लिए करूँगी
रमेश-दोनो एक ही बात है
पूजा-हो गया हो तो मैं जा सकती हूँ
रमेश ने पूजा को किस किया और दोनो अपने अपने काम मे लग गये.
पूजा बर्तडे से ज़्यादा नेहा के बारे में सोच रही थी.
पिताजी से पहले नेहा से पूछना होगा.
कल बर्तडे शाम मे रखा है. सुबह नेहा को मंदिर लेकर जाउन्गी वही उस से पूछ लूँगी
पूजा ने सोच लिया कि नेहा और सुरेश को कल मंदिर लेकर जाएगी.
रमेश सुरेश और अपनी माँ को लेने शहर चला गया.
सुरेश शहर मे रुकने वाला था पर रमेश ने एक बार पिताजी से मिलने के लिए गाँव लेकर आ गया.
समधन को देखते ही पिताजी के चेहरे पे एक मुकसान आ गयी.
समधन ने भी मुश्कुरा कर समधी की स्माइल का जवाब दिया .और अंदर चली गयी.
रमेश अपने दोस्तो को लेकर पिताजी के पास आ गये
रमेश-पिताजी ये मेरे दोस्त है, आप तो जानते ही है
पिताजी-हाँ ,इनको तो जानता हूँ शादी मे पूरे काम इन दोनो ने किए थे
सुरेश ने पिताजी के पैर छु कर आशीर्वाद लिया.
पिताजी-जीते रहो बेटा.
रमेश-पिताजी ये दोनो मेरे दोस्त कम भाई ज़्यादा है
पिताजी-पूजा ने बताया था .और शादी मे जिस तरह तुम्हारे साथ थे उस से पता चल गया था. वैसे ये तुम्हारे साथ काम करते है ना
रमेश-हाँ पिताजी, मेरे साथ ही काम करते है, हम तो बचपन से साथ है.
सुरेश-पिताजी ,हमारी भतीजी नही दिख रही है
पिताजी-वो अपने मौसी के साथ होगी.नेहा नेहा स्वेता को लेकर बाहर आना
नेहा स्वेता को लेकर आ गयी.और बाहर आते ही उसकी नज़र सुरेश पे गयी.
सुरेश भी नेहा की खूबसूरती को अपनी आँख मे क़ैद करने लगा.
सुरेश 2 साल बाद नेहा को देख रहा था. पिछली बार सीतल के पैदा होते समय देखा था.
पिछली नेहा और आज की नेहा मे ज़मीन आसमान का फरक था.
नेहा आज उस स्टेज पर थी कि किसी को भी अपनी खूबसूरती मे डूबा सके
कुछ देर दोनो एक दूसरे से नैन मटक्का करते रहे.
पिताजी को किसी ने आवाज़ दी और वो वहाँ से चले गये.
पिताजी के जाते ही नेहा क़समकस मे थी कि क्या करे .
वो सुरेश से बात तो करना चाहती थी पर करने की हिम्मत नही थी.
रमेश-नेहा इधर आओ, वहाँ क्यूँ खड़ी हो
अपने जीजाजी की बात सुनते ही नेहा स्वेता को लेकर आ गयी.
रमेश-नेहा , देखो मेरे दोस्त आए है इनका पूरा ध्यान रखना ,कोई शिकायत नही मिलनी चाहिए
नेहा-जी जीजाजी
रमेश-तुम देखो सुरेश को क्या चाहिए मैं अंदर जाके आता हूँ
अब तो नेहा बुरी तरह से फस चुकी थी. उसके पसीने छूट रहे थे
जतिन भी वहाँ से निकल गया .
सुरेश-कैसी हो नेहा.
नेहा-जी
सुरेश-हमे याद किया कि नही.
नेहा-हाँ नही हाँ नही नही
सुरेश हँसने लगा.
सुरेश-मुझसे डरने की ज़रूरत नही. हम पहले भी तो मिले है.
नेहा-हाँ, तुम कब आए
सुरेश-कुछ देर हुई. तुम कहो ,पढ़ाई कैसी चल रही है.
नेहा-पढ़ाई तो हो गयी
सुरेश-आगे नही पढ़ना
नेहा-नही,
सुरेश-क्यूँ?
नेहा-माँ ने कहा कि... तुम्हारे लिए नाश्ता लाती हूँ
सुरेश-रूको
नेहा रुक गयी
सुरेश-तुम ......,कुछ नही,
नेहा-मैं नाश्ता लेकर आती हूँ
नेहा नाश्ता लेने चली गयी और पूजा सुरेश के पास आ गयी.
पूजा-कैसे हो देवर जी
सुरेश-भाभी जी आप, मैं ठीक हूँ.
पूजा-कहो हमारे गाँव मे कैसे आना हुआ
सुरेश-गाँव मे क्यूँ आते है. उसी लिए आया हूँ
पूजा-तुम्हारे भैया जब आए थे तब यहाँ से शादी करके गये थे
सुरेश-मैं भी शादी करके जाना चाहता हूँ.
पूजा-किस से मेरी सहेली मंदा से
सुरेश-आपकी बहन से ,नेहा से
पूजा-भाभी से साली बनाने का इरादा लगता है
सुरेश-भाभी मेरी साली बन जाओ ना
पूजा-भाभी हूँ तो इतना हसी मज़ाक करते हो जब साली बनूँगी तो ,नही बाबा मुझे नही बन ना साली
सुरेश-भाभी, अपने देवर के लिए, मैं वादा करता हूँ मैं देवर बन के रहूँगा.बस नेहा से मेरी शादी करवा दो
पूजा-पक्का वादा ना
सुरेश-हाँ,
पूजा-और
सुरेश-आप का गुलाम बन जाउन्गा ,
पूजा-फिर तो कुछ करना होगा .
सुरेश-मेरी प्यारी भाभी
पूजा-कल सुबह मंदिर आ जाना
सुरेश-मंदिर क्यूँ
पूजा-नेहा को लेकर आउन्गि. तुम बात कर लेना
सुरेश-ये तो बढ़िया रहेगा.
पूजा-हाँ तब तक नेहा के हाथ का नाश्ता करो
सुरेश-नेहा बना रही है
पूजा-हाँ, मैं ने तो यही सुना है, मैं जाती हूँ वरना नेहा यहाँ नही आएगी
पूजा अंदर जाने लगी.
सुरेश-भाभी
पूजा-हाँ
सुरेश-थॅंक्स
पूजा-अभी नेहा ने हाँ नही कहा .उसके हाँ करने के बाद थॅंक्स कहना.
पूजा अंदर चली गयी और सुरेश नेहा का इंतज़ार करने लगा.