फ्लश बॅक 1011
रात मे नेहा की नथ सुरेश ने उतार दी और नीता की नथ जतिन ने.
नेहा नीता के लिए कल का दिन बहुत खास था ,दोनो बहनों की शादी हो गयी. उनको जैसा जीवन साथी चाहिए वैसा पार्टनर मिल गया.
दोनो बहनें हमेशा साथ रहेगी. अपने दीदी के साथ शहर2 मे रहेगी.
दोनो के जीवन की नयी शुरुआत होने जा रही थी.
रात मे पूजा की भी जमकर चुदाई हुई थी.
शालिनी तो अपने पति मे बारे में सोच कर करवट बदलती रही.
सुबह होते ही शालिनी पहले गेट के पास जाकर देखा कि जयसिंघ वापस आया तो नही.
पर जयसिंघ का कुछ पता नही था.
सुबह होते ही नेहा ने खुद को नंगा सुरेश की बाहों पे पाकर शरमा गयी. और उठ कर अपने कपड़े पहन लिए.
और बेडशीट पर खून लगा हुआ देख कर कल की रात याद करने लगी.
सुहागरात को याद करके नेहा ने सुरेश के सर पे किस किया और सुरेश के बदन पर चद्दर डाल कर बाहर आ गयी.
नीता ने सुबह होते खुद को जतिन के उपर पैर रख कर सोता हुआ पा कर जतिन को किस करके उठा लिया.
जतिन ने नीता को देख कर समझ गया कि वो सपना नही हक़ीकत थी.
नीता उठाने वाली थी कि जतिन ने नीता को अपने उपर खीच लिया और फिर से नीता के साथ सो गया. नीता भी थोड़ी देर जतिन के साथ फिर से सो गयी.
सुबह होते ही बाकी सब अपने काम मे लग गये.
पिताजी ने फ्रेश होते शालिनी को अपने कमरे मे बुलाया ,
शालिनी को पता था कि पिताजी ने उसको क्यूँ बुलाया है. शालिनी पिताजी के कमरे मे चली गयी.
पिताजी के साथ माँ भी थी.
पिताजी-बहू तुम्हें पता है हमने तुम्हें क्यूँ बुलाया है
शालिनी-हाँ पिताजी
पिताजी-कल जो हुआ उसमे मैं ने तुम्हारा साथ दिया बिना कुछ पूछे
शालिनी-मैं आपका विश्वास कभी टूटने नही दूँगी.
माँ-हमे पता है बहू कि तू फॅमिली के बारे में सोचती है. पर हमे जान ना है कि बात क्या है
पिताजी-कल जो हुआ वो क्यूँ हुआ ,क्या सच है क्या झूठ है
शालिनी-कल नेहा ने जो कहा वो सच है,
पिताजी-मतलब कुमार की शादी हो चुकी है ये बात तुम्हें पता थी तो तुम ने हमे पहले क्यूँ नही बताया
शालिनी-मुझे नेहा ने बताया ,मुझे इसके बारे में पहले पता होता तो मैं नेहा की शादी होने नही देती
पिताजी-नेहा को कैसे पता चला
शालिनी-वो उस्दिन नेहा नीता के साथ घूमने गयी थी उस्दिन नेहा ने कुमार और अजीत की बाते सुन ली थी.
माँ-मतलब तुम्हें नेहा से पता चला.
शालिनी-हाँ,
माँ-और तुम्हें नेहा की बात सही लगी.
शालिनी-माजी नेहा मेरी छोटी बहन जैसी है,उसकी बात पे विश्वास नही करेंगे तो किस की बात पे करेंगे.
पिताजी-सही कहा बहू ने
शालिनी-और वो कुमार अच्छा आदमी नही है. उसकी नज़र मुझपे भी थी ,और नीता पे भी थी, मैं ने उनको बताया पर उनको मेरी बात पे विश्वास नही हुआ.
पिताजी-ये बात पहले क्यूँ नही बताई
शालिनी-उनको बताया पर वो मेरी बात सुन ने को तय्यार नही थे. मैं तो गुस्सा भी हुई थी जब कुमार का रिस्ता लेकर आए थे
पिताजी-जाने दो उसे, और तुम अपना ध्यान रखना दुबारा कुमार ने कुछ ऐसा वैसा किया तो मुझे बताना
शालिनी-जी
माँ-ये सुरेश ,क्या ये नेहा के लिए ठीक होगा
शालिनी-हाँ, नेहा और सुरेश एक दूसरे को पसंद करते है.
पिताजी-पसंद करते हैं ,इसका क्या मतलब हुआ
शालिनी-कुमार से पहले सुरेश ने नेहा को शादी के लिए पूछा था, नेहा उसको हाँ करने वाली थी कि आपके कुमार के लिए हाँ कर दी
पिताजी-मैं ने तो पूछा था नेहा से
शालिनी-वो पगली आपको अपने पोते के साथ प्यार करने को मिले इस लिए सुरेश को भुला कर कुमार से शादी करने को तय्यार हो गयी.और माजी को जयसिंघ मिल जाए इस लिए नेहा ने शादी को हाँ कहा था, आप दोनो के लिए नेहा ने अपने प्यार को भुला दिया था
पिताजी-मेरी नेहा ने ऐसा किया. मुझे गर्व है अपनी बेटी पे
माँ-इसका मतलब सुरेश से शादी करने के लिए कुमार पे झूठा इल्ज़ाम लगाया
शालिनी-नही माजी, नेहा तो कुमार के साथ सगाई होते ही सुरेश को भूल गयी थी.और कुमार से शादी की तय्यारी मे लग गयी.
पिताजी-ये इरादा बदल कैसे गया
शालिनी-उस्दिन नेहा अगर कुमार के साथ घूमने ना जाती तो नेहा को कुमार के बारे में कभी पता नही चलता ,
पिताजी-अच्छा हुआ कुमार के साथ नही हुई नेहा की शादी
शालिनी-पिताजी ,नेहा ने उसके बाद भी किसी को कुछ नही बताया .अच्छा हुआ मैं ने पूछ लिया .वरना वो पगली खुद की बलि देने वाली थी ,
यहाँ तक कि स्यूयिसाइड का सोचा था नेहा ने , शादी ना हुई तो आपकी बेज़्जती होंगी इसकी वजह से नेहा स्यूयिसाइड करने का सोच रही थी
पिताजी-तेरे रूप मे हमे लक्ष्मी मिली है
माँ-नेहा ने ऐसा किया ,मुझे नेहा पे विश्वास रखना चाहिए था.
पिताजी-तुम खुद को गुनहगार मत समझो ,हो जाता है कभी कभी. कभी तुम ग़लत होती हो तो मैं होता हूँ ना तुम्हारा साथ देने के लिए
माँ-फिर भी मैं नेहा से माफी माँग लूँगी.
शालिनी-क्या मैं जा सकती हूँ.
पिताजी-तुम कहाँ जा रही हो
शालिनी-मुझे जाना होगा पिताजी, वो यहाँ आएँगे नही ,और उनके बिना मैं नही रह सकती.
माँ-मुझे इसी बात का डर था
शालिनी-माजी वो अभी गुस्से मे है,उनका गुस्सा शांत करने के लिए मुझे जाना होगा.
पिताजी-मैं तुझे नही रोकुंगा ,पर तू वादा कर जयसिंघ को एक दिन यहाँ लेकर आएगी
शालिनी-मैं वादा करती हूँ. आपका पोता आपके साथ रहेगा.
पिताजी-अपना ख़याल रखना ,अवी का ख़याल रखना
माँ-बहू तू भी जा रही है.
शालिनी-जाना होगा माजी, किसी को तो इसका भुगतान करना होगा.
पिताजी-थोड़ी देर रुक जाती ,नेहा नीता को अलविदा कर देती
शालिनी-उनके जाने के बाद ही जाउन्गी वरना नेहा खुद को कसूरवार समझेगी
पिताजी-तू मेरी बहू नही बेटी है.
शालिनी-आप भी नेहा को कुछ मत बताना
पिताजी-उसको इसके बारे में कभी पता नही चलेगा.
शालिनी-चलिए माजी ,नेहा नीता को उसकी नये घर भेजने की तय्यारी करनी है.
शालिनी माँ के साथ नेहा नीता के ससुराल जाने की तय्यारी करने लगी
नेहा और नीता अपने ससुराल जाने के लिए तय्यार हो गयी.
नेहा और नीता ने अपना समान पॅक कर लिया.
सुरेश और जतिन भी तय्यार थे अपनी बीवियो को अपने घर ले जाने के लिए.
रमेश लड़कियो की तरफ से सुरेश और जतिन की खातिरदारी कर रहे थे.
नेहा के लिए ,सुरेश के माता पिता को समझाने के लिए रमेश और पूजा भी उनके साथ जा रही थी.
समधन ने भी उनके साथ जाकर सुरेश के माता पिता को समझाने का काम अपने हाथ लिया.
समधन के ऐसा करने से पिताजी खुश हो गये. पिताजी ने सब ठीक हो जाने के बाद वापस आने को कहा.
समधन सुरेश के माता पिताज़ को अच्छे से जानती है जिस से ज़्यादा प्राब्लम नही होगी.
नेहा नीता की पॅकिंग होते ही शालिनी उनके कमरे मे चली गयी.
शालिनी-नेहा पॅकिंग हो गयी.
नेहा-हाँ भाभी
शालिनी-अब तो तुम ससुराल जाओगी.
ससुराल का नाम सुनते ही नेहा और नीता रोने लगी.
शालिनी-क्या हुआ,
नीता-हमे यहाँ से जाना होगा,
शालिनी-जाना तो पड़ेगा सबको एक दिन जाना पड़ता है.मैं भी तो अपना घर छोड़ कर आई थी.
नेहा-आपकी बहुत याद आएगी.
शालिनी-हम मिलते रहेगे ना, ऐसा थोड़े ही है जो हम नही मिलेंगे
नेहा-फिर भी आप को हर दिन याद करूँगी. आप ना होती तो मेरी शादी सुरेश से ना होती
शालिनी-तेरे नसीब मे था सुरेश ,और नीता के नसीब मे जतिन ,
नीता-भाभी आप भी चलिए ना
शालिनी-मैं आउन्गि ,अपने भानजे को मिलने ,
नेहा-मैं इंतज़ार करूँगी
शालिनी-नेहा अगर तुम्हारे भैया कुछ कहे तो दिल पे मत लेना वो थोड़े गुस्सा है.
नेहा-जी, आप भैया का गुस्सा ख़तम कर देना.
शालिनी-नीता, तू अब बच्चो जैसी हरकत मत करना, तुझे समझदारी से जतिन का साथ देना होगा. उसको तेरे सहारे की ज़रूरत हमेशा पड़ेगी. उसका सहारा बन कर रहना
नीता-जी भाभी
और शालिनी ने अपनी दोनो ननंद को गले लगा लिया.
शालिनी के साथ साथ नेहा और नीता भी रोने लगी.
नेहा नीता सबके दिलो मे बसी हुई थी .उनके जाने के बाद सब को उनकी कमी महसूस होगी.