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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 1010

जतिन-नीता

नीता-हाँ

जतिन-दर्द हुआ

नीता-नही,

जातीं-मेरी कसम खा कर बोलो,

नीता-तुम्हारे प्यार मे दर्द का पता नही चला. पर अब दर्द हो रहा है.

जतिन-कल तक वो ठीक हो जाएगा .वैसे राजेश के लिए अंदर ही डाल दिया है.

नीता-इतनी जल्दी क्या है, राजेश को आराम से इस दुनिया मे लाएँगे ,पहले हम अपना घर तो बसा लेंगे , क्या पता तुम ने घर की क्या हालत

बना कर रखी है.

जतिन-तुम्हें उसे घर बनाना है, हमारा घर ,प्यार वाला घर ,तुम कर पायोगी ना, मेरे माता पिता होते तो ...

नीता-हम मिलकर बनाएँगे, अब उठो मुझे फ्रेश होना है.

जतिन नीता के उपर से उठ गया और खुद नीता की सफाई करने लगा.

नीता जतिन को रोक रही थी पर जतिन को पता था कि नीता उठेगी तो उसे दर्द होगा.

नीता जतिन का प्यार देख कर खुश हो गयी. और जतिन को गले लगा कर अपनी नयी ज़िंदगी के सपने देखते हुए सो गये.

इधर नेहा और नीता की सुहागरात हो रही थी. उधर पूजा और रमेश सुहागरात मनाने के बारे में सोच रहे थे.

रमेश-मुझे तो ये सपना लग रहा है. सुरेश की शादी नेहा से हो गयी.

पूजा-सपना नही हक़ीकत है. हम ने जो सोचा था वो पूरा हो गया

रमेश-सब भाभी ने किया ,

पूजा-हाँ, हमे भाभी को पहले बता देना चाहिए था.

रमेश-कुछ भी हो नेहा के लिए वो कुमार ठीक नही था. उसकी पहले भी शादी हो चुकी थी.

पूजा-हो भी सकता है या फिर भाभी ने नाटक किया हो

रमेश-भाभी ऐसा नाटक नही करेगी. अगर भाभी झूठ बोल रही होती तो कुमार ऐसे चला नही जाता

पूजा-हाँ, पर भाभी को ये पहले पता था तो शादी के दिन ऐसा क्यूँ किया

रमेश-क्यूँ कि नेहा को कोई ग़लत ना समझे, अगर पहले शादी कॅन्सल होती तो लोग समझते नेहा ने सुरेश के लिए शादी तोड़ी है. पर अब देखो सुरेश हीरो बन गया है.

पूजा-मान गये भाभी को, पर मैं आपसे नाराज़ हूँ

रमेश-मैं ने क्या किया

पूजा-आपको इसके बारे में पता था तो मुझे पहले क्यूँ नही बताया

रमेश-मैं ने अंदाज़ा लगाया था. भाभी शादी से 3 दिन पहले सुरेश से ऐसे थोड़े मिलने आती.

पूजा-वो ठीक है, फिर भी मैं आप से नाराज़ हूँ

रमेश-क्यूँ?

पूजा-नेहा की सुरेश से शादी ना होने पे आप ने मेरी कैसी चुदाई की थी.

रमेश-सॉरी उस्दिन मैं गुस्से मे था.

पूजा-आज तो खुश हो ना, फिर

रमेश-फिर ,चलो हम भी सुहागरात मनाते है.तुम नयी साड़ी पहन लो

पूजा-सुहागरात ,ऐसे ठीक है ना

रमेश-तुम भी ना, सोचो तीनो बहनों की सुहागरात एक रात मे होगी. पहनो साड़ी, और आज रात भर तुम्हें सोने नही दूँगा.

पूजा रमेश की बात सुनकर खुश हो गयी. और रमेश के गले लग गयी.

रमेश ने भाई जैसे दोस्त की शादी की खुशी मे पूजा के साथ फिर से सुहागरात मनाना सुरू किया.

पूजा इस बात से बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइट थी कि तीनो बहनों की सुहागरात एक रात को हो रही है.

रमेश ने पूजा को रात भर सोने नही दिया.

पूजा को कमरे मे घुमा घुमा कर चुदाई करता गया.

पूजा रमेश की चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट हो गयी.

खास करके अपने पति को खुश देख कर पूजा खुश थी.

इधर दूसरी तरफ जयसिंघ नीता को आशीर्वाद दे कर पता नही कहाँ चला गया था.

शालिनी को जयसिंघ की चिंता होने लगी थी.

शालिनी को नींद नही आ रही थी.

शालिनी ने अपनी ननंद को अपनी फॅमिली के खुशी के लिए अपने पति को दुखी किया.

शालिनी ने ठीक किया कि नही ये उसे भी पता नही था. पर घर की बहू होने के नाते उसे अपने फॅमिली के बारे में पहले सोचना था.उसने वही किया.

शालिनी खुद रो कर दूसरो को खुश रकने पे विश्वास रखती थी.

शालिनी अपने पति को मना तो लेगी पर नेहा के प्रति जो गुस्सा जयसिंघ के दिमाग़ मे पैदा हुआ उसको कम करना मुश्किल था.

पर बाकी लोगो के लिए जयसिंघ के दिमाग़ मे नफ़रत पैदा नही होने देगी.

शालिनी अपने बेटे अवी को दूध पिला कर माँ के पास सो गयी.

माँ शालिनी के पास आने से पहले पिताजी के साथ बात कर रही थी

माँ-आज जो हुआ ठीक नही हुआ

पिताजी-क्या मतलब

माँ-आज हुआ उस से जयसिंघ को गुस्सा आया होगा.

पिताजी-जयसिंघ का सोचते रहते तो नेहा की ज़िंदगी बर्बाद होती

माँ-जयसिंघ जानता है कुमार को ,उसी एक बार बात सुन लेते तो

पिताजी-कुमार की पहली शादी के बारे में जयसिंघ को पता नही होगा. पर नेहा को पता चल गया.

माँ-पूरी बात पता करने के बजाय आपने कुमार पे हाथ उठा लिया.

पिताजी-तो क्या मैं नेहा को उसे मारने देता.

माँ-रोक कर पूछ तो लेते

पिताजी-पूछने वाला था ,पर बहू जिस तरह नेहा के साथ थी उस से मैं समझ गया कि नेहा ने जो किया वो सही किया

माँ-क्या मतलब

पिताजी-अगर नेहा झूठ बोल रही होती तो बहू उसका साथ नही देती. कुछ तो सच्चाई होगी तभी बहू ने नेहा का साथ दिया. और हम तो नेहा के माता पिता है हम उसका साथ नही देंगे तो कौन देगा.

माँ-पर जयसिंघ

पिताजी-मुझे बहू पर पूरा विश्वास है वो जयसिंघ को एक दिन ज़रूर मना लेगी.

माँ-बहू पर तो मुझे भी विश्वास है, पर सुरेश के साथ शादी जल्दी नही हो गयी.

पिताजी-तुम ही तो कह रही थी कौन शादी करेगा तो सुरेश आगे आ गया.

माँ-अगर उसके माता पिता ने नेहा को अपनाया नही तो

पिताजी-रमेश दामाद ने बताया मुझे ,सुरेश अच्छा लड़का है. दामाद जी के भाई जैसा है. दामाद जी सब ठीक कर देंगे

माँ-और ये जतिन

पिताजी-सुरेश का दोस्त है. नीता नेहा के बिना नही रह सकती इस लिए हाँ कर दी

माँ-पूजा ने बताया कि इसके माता पिता नही है.

पिताजी-तो क्या हुआ ,जतिन सुसेश का बड़ा भाई मानता है,नेहा और नीता साथ रहेगी तो ये उनके लिए अच्छा होगा. अगर दूर रहती तो दोनो खुश नही रहती.

माँ-पर

पिताजी-तुम टेन्षन मत लो ,हम दामाद जी के माता पिता बन जाएँगे, वैसे ग़लती हमारी है नेहा की शादी के चक्कर मे हम नीता को भूल गये थे.

मा-आप खुश हो इन सब से

पिताजी-हाँ, बस डर है की जयसिंघ अवी को यहाँ से ले जाएगा .

माँ-मुझे भी वही डर लग रहा है.

पिताजी-हमे बहू पे विश्वास रखना होगा

माँ-मुझे बहू पे पूरा विश्वास है, हमे ने पिछले जनम मे कोई अच्छे काम किए होगे तभी शालिनी जैसी बहू हमे मिली है.

पिताजी-बहू बस जयसिंघ को मना ले तो मैं आराम कर सकता हूँ

माँ-हाँ, बस छोटू के लिए एक शालिनी जैसी बहू मिल जाए तो,

पिताजी-मैं बात कर रहा हूँ. छोटू को बड़ा होने दो उसके लिए अच्छी बीवी ढूँढ लेंगे

माँ-बहुत रात हो गयी ,कल बहुत काम भी करना है.

पिताजी-हाँ, नेहा और नीता कल चली जाएगी. उनके बिना घर सुना सुना लगेगा.

माँ-उनको तो एक दिन जाना ही था ,पर अच्छा है तीनो बेतियाँ एक ही शहर2 मे रहेगी.

पिताजी-हाँ,जाओ बहू तुम्हारा इंतज़ार कर रही होगी

माँ पिताजी से बात करके शालिनी के साथ सो गयी.

उधर जयसिंघ नेहा पर बहुत गुस्सा था .

एक तो नेहा ने सबके सामने कुमार को थप्पड़ मारा और फिर किसी दूसरे लड़के के साथ शादी कर ली जिसे जानती भी नही.

जयसिंघ के दिल मे नेहा के लिए नफ़रत का पौधा बड़ा होने लगा.
 
फ्लश बॅक 1011

रात मे नेहा की नथ सुरेश ने उतार दी और नीता की नथ जतिन ने.

नेहा नीता के लिए कल का दिन बहुत खास था ,दोनो बहनों की शादी हो गयी. उनको जैसा जीवन साथी चाहिए वैसा पार्टनर मिल गया.

दोनो बहनें हमेशा साथ रहेगी. अपने दीदी के साथ शहर2 मे रहेगी.

दोनो के जीवन की नयी शुरुआत होने जा रही थी.

रात मे पूजा की भी जमकर चुदाई हुई थी.

शालिनी तो अपने पति मे बारे में सोच कर करवट बदलती रही.

सुबह होते ही शालिनी पहले गेट के पास जाकर देखा कि जयसिंघ वापस आया तो नही.

पर जयसिंघ का कुछ पता नही था.

सुबह होते ही नेहा ने खुद को नंगा सुरेश की बाहों पे पाकर शरमा गयी. और उठ कर अपने कपड़े पहन लिए.

और बेडशीट पर खून लगा हुआ देख कर कल की रात याद करने लगी.

सुहागरात को याद करके नेहा ने सुरेश के सर पे किस किया और सुरेश के बदन पर चद्दर डाल कर बाहर आ गयी.

नीता ने सुबह होते खुद को जतिन के उपर पैर रख कर सोता हुआ पा कर जतिन को किस करके उठा लिया.

जतिन ने नीता को देख कर समझ गया कि वो सपना नही हक़ीकत थी.

नीता उठाने वाली थी कि जतिन ने नीता को अपने उपर खीच लिया और फिर से नीता के साथ सो गया. नीता भी थोड़ी देर जतिन के साथ फिर से सो गयी.

सुबह होते ही बाकी सब अपने काम मे लग गये.

पिताजी ने फ्रेश होते शालिनी को अपने कमरे मे बुलाया ,

शालिनी को पता था कि पिताजी ने उसको क्यूँ बुलाया है. शालिनी पिताजी के कमरे मे चली गयी.

पिताजी के साथ माँ भी थी.

पिताजी-बहू तुम्हें पता है हमने तुम्हें क्यूँ बुलाया है

शालिनी-हाँ पिताजी

पिताजी-कल जो हुआ उसमे मैं ने तुम्हारा साथ दिया बिना कुछ पूछे

शालिनी-मैं आपका विश्वास कभी टूटने नही दूँगी.

माँ-हमे पता है बहू कि तू फॅमिली के बारे में सोचती है. पर हमे जान ना है कि बात क्या है

पिताजी-कल जो हुआ वो क्यूँ हुआ ,क्या सच है क्या झूठ है

शालिनी-कल नेहा ने जो कहा वो सच है,

पिताजी-मतलब कुमार की शादी हो चुकी है ये बात तुम्हें पता थी तो तुम ने हमे पहले क्यूँ नही बताया

शालिनी-मुझे नेहा ने बताया ,मुझे इसके बारे में पहले पता होता तो मैं नेहा की शादी होने नही देती

पिताजी-नेहा को कैसे पता चला

शालिनी-वो उस्दिन नेहा नीता के साथ घूमने गयी थी उस्दिन नेहा ने कुमार और अजीत की बाते सुन ली थी.

माँ-मतलब तुम्हें नेहा से पता चला.

शालिनी-हाँ,

माँ-और तुम्हें नेहा की बात सही लगी.

शालिनी-माजी नेहा मेरी छोटी बहन जैसी है,उसकी बात पे विश्वास नही करेंगे तो किस की बात पे करेंगे.

पिताजी-सही कहा बहू ने

शालिनी-और वो कुमार अच्छा आदमी नही है. उसकी नज़र मुझपे भी थी ,और नीता पे भी थी, मैं ने उनको बताया पर उनको मेरी बात पे विश्वास नही हुआ.

पिताजी-ये बात पहले क्यूँ नही बताई

शालिनी-उनको बताया पर वो मेरी बात सुन ने को तय्यार नही थे. मैं तो गुस्सा भी हुई थी जब कुमार का रिस्ता लेकर आए थे

पिताजी-जाने दो उसे, और तुम अपना ध्यान रखना दुबारा कुमार ने कुछ ऐसा वैसा किया तो मुझे बताना

शालिनी-जी

माँ-ये सुरेश ,क्या ये नेहा के लिए ठीक होगा

शालिनी-हाँ, नेहा और सुरेश एक दूसरे को पसंद करते है.

पिताजी-पसंद करते हैं ,इसका क्या मतलब हुआ

शालिनी-कुमार से पहले सुरेश ने नेहा को शादी के लिए पूछा था, नेहा उसको हाँ करने वाली थी कि आपके कुमार के लिए हाँ कर दी

पिताजी-मैं ने तो पूछा था नेहा से

शालिनी-वो पगली आपको अपने पोते के साथ प्यार करने को मिले इस लिए सुरेश को भुला कर कुमार से शादी करने को तय्यार हो गयी.और माजी को जयसिंघ मिल जाए इस लिए नेहा ने शादी को हाँ कहा था, आप दोनो के लिए नेहा ने अपने प्यार को भुला दिया था

पिताजी-मेरी नेहा ने ऐसा किया. मुझे गर्व है अपनी बेटी पे

माँ-इसका मतलब सुरेश से शादी करने के लिए कुमार पे झूठा इल्ज़ाम लगाया

शालिनी-नही माजी, नेहा तो कुमार के साथ सगाई होते ही सुरेश को भूल गयी थी.और कुमार से शादी की तय्यारी मे लग गयी.

पिताजी-ये इरादा बदल कैसे गया

शालिनी-उस्दिन नेहा अगर कुमार के साथ घूमने ना जाती तो नेहा को कुमार के बारे में कभी पता नही चलता ,

पिताजी-अच्छा हुआ कुमार के साथ नही हुई नेहा की शादी

शालिनी-पिताजी ,नेहा ने उसके बाद भी किसी को कुछ नही बताया .अच्छा हुआ मैं ने पूछ लिया .वरना वो पगली खुद की बलि देने वाली थी ,

यहाँ तक कि स्यूयिसाइड का सोचा था नेहा ने , शादी ना हुई तो आपकी बेज़्जती होंगी इसकी वजह से नेहा स्यूयिसाइड करने का सोच रही थी

पिताजी-तेरे रूप मे हमे लक्ष्मी मिली है

माँ-नेहा ने ऐसा किया ,मुझे नेहा पे विश्वास रखना चाहिए था.

पिताजी-तुम खुद को गुनहगार मत समझो ,हो जाता है कभी कभी. कभी तुम ग़लत होती हो तो मैं होता हूँ ना तुम्हारा साथ देने के लिए

माँ-फिर भी मैं नेहा से माफी माँग लूँगी.

शालिनी-क्या मैं जा सकती हूँ.

पिताजी-तुम कहाँ जा रही हो

शालिनी-मुझे जाना होगा पिताजी, वो यहाँ आएँगे नही ,और उनके बिना मैं नही रह सकती.

माँ-मुझे इसी बात का डर था

शालिनी-माजी वो अभी गुस्से मे है,उनका गुस्सा शांत करने के लिए मुझे जाना होगा.

पिताजी-मैं तुझे नही रोकुंगा ,पर तू वादा कर जयसिंघ को एक दिन यहाँ लेकर आएगी

शालिनी-मैं वादा करती हूँ. आपका पोता आपके साथ रहेगा.

पिताजी-अपना ख़याल रखना ,अवी का ख़याल रखना

माँ-बहू तू भी जा रही है.

शालिनी-जाना होगा माजी, किसी को तो इसका भुगतान करना होगा.

पिताजी-थोड़ी देर रुक जाती ,नेहा नीता को अलविदा कर देती

शालिनी-उनके जाने के बाद ही जाउन्गी वरना नेहा खुद को कसूरवार समझेगी

पिताजी-तू मेरी बहू नही बेटी है.

शालिनी-आप भी नेहा को कुछ मत बताना

पिताजी-उसको इसके बारे में कभी पता नही चलेगा.

शालिनी-चलिए माजी ,नेहा नीता को उसकी नये घर भेजने की तय्यारी करनी है.

शालिनी माँ के साथ नेहा नीता के ससुराल जाने की तय्यारी करने लगी

नेहा और नीता अपने ससुराल जाने के लिए तय्यार हो गयी.

नेहा और नीता ने अपना समान पॅक कर लिया.

सुरेश और जतिन भी तय्यार थे अपनी बीवियो को अपने घर ले जाने के लिए.

रमेश लड़कियो की तरफ से सुरेश और जतिन की खातिरदारी कर रहे थे.

नेहा के लिए ,सुरेश के माता पिता को समझाने के लिए रमेश और पूजा भी उनके साथ जा रही थी.

समधन ने भी उनके साथ जाकर सुरेश के माता पिता को समझाने का काम अपने हाथ लिया.

समधन के ऐसा करने से पिताजी खुश हो गये. पिताजी ने सब ठीक हो जाने के बाद वापस आने को कहा.

समधन सुरेश के माता पिताज़ को अच्छे से जानती है जिस से ज़्यादा प्राब्लम नही होगी.

नेहा नीता की पॅकिंग होते ही शालिनी उनके कमरे मे चली गयी.

शालिनी-नेहा पॅकिंग हो गयी.

नेहा-हाँ भाभी

शालिनी-अब तो तुम ससुराल जाओगी.

ससुराल का नाम सुनते ही नेहा और नीता रोने लगी.

शालिनी-क्या हुआ,

नीता-हमे यहाँ से जाना होगा,

शालिनी-जाना तो पड़ेगा सबको एक दिन जाना पड़ता है.मैं भी तो अपना घर छोड़ कर आई थी.

नेहा-आपकी बहुत याद आएगी.

शालिनी-हम मिलते रहेगे ना, ऐसा थोड़े ही है जो हम नही मिलेंगे

नेहा-फिर भी आप को हर दिन याद करूँगी. आप ना होती तो मेरी शादी सुरेश से ना होती

शालिनी-तेरे नसीब मे था सुरेश ,और नीता के नसीब मे जतिन ,

नीता-भाभी आप भी चलिए ना

शालिनी-मैं आउन्गि ,अपने भानजे को मिलने ,

नेहा-मैं इंतज़ार करूँगी

शालिनी-नेहा अगर तुम्हारे भैया कुछ कहे तो दिल पे मत लेना वो थोड़े गुस्सा है.

नेहा-जी, आप भैया का गुस्सा ख़तम कर देना.

शालिनी-नीता, तू अब बच्चो जैसी हरकत मत करना, तुझे समझदारी से जतिन का साथ देना होगा. उसको तेरे सहारे की ज़रूरत हमेशा पड़ेगी. उसका सहारा बन कर रहना

नीता-जी भाभी

और शालिनी ने अपनी दोनो ननंद को गले लगा लिया.

शालिनी के साथ साथ नेहा और नीता भी रोने लगी.

नेहा नीता सबके दिलो मे बसी हुई थी .उनके जाने के बाद सब को उनकी कमी महसूस होगी.
 
फ्लॅशबॅक 1012

नेहा नीता के जाने से हर किसी की आँख मे पानी आ गया.

नेहा तो अपनी भाभी को छोड़ने को तय्यार नही थी.

शालिनी रोते हुए नेहा को समझा रही थी.

माँ और पिताजी का भी यही हाल था. पूजा के समय कोई इतना नही रोया था क्यूँ कि नेहा नीता उनको हंसा रही थी.

पूजा के समय नेहा नीता ने किसी को रोने नही दिया.

पर इस बार ऐसा लग रहा था कि तीनो बहनें जा रही हो .

पूजा भी अपना समान पॅक करके 1 हफ्ते के लिए नेहा के साथ जा रही थी.

पिताजी अपनी लाडली बेटियो के जाने से काफ़ी दुखी थे. साथ मे बहू भी जाएगी इस से उनके आँखो से पानी निकल रहा था.

अगर नेहा को पता चलता कि शालिनी भाभी उसकी वजह से जा रही है तो नेहा रो रो कर पूरा घर सर पे उठा लेती.

छोटू ने जाते हुए नेहा को नेहा दीदी कह कर महॉल को थोड़ा हल्का कर दिया.

नेहा और नीता को पहले मंदिर ले जाया गया .जहाँ पर नेहा ने सुरेश के साथ आशीर्वाद लिया ,और नीता ने जतिन के साथ आशीर्वाद लिया

पूजा ने भी लगे हाथ रमेश के साथ भगवान का आशीर्वाद लिया.

नेहा को लग रहा था कि उसके भैया उसे मिलने आएँगे .

वो लास्ट समय तक किसी ना किसी के बहाने से रुक कर भैया का इंतज़ार कर रही थी.

शालिनी ने नेहा को गले लगा लिया .और उसके उज्ज्वल फ्यूचर के लिए दुआ की.

नेहा और नीता ने सबके पैर छु कर आशीर्वाद लिया .

और आख़िरी बार दोनो अपने कमरे मे चली गयी .अपने बचपन के दिनो को याद करके कभी हस्ती तो कभी रोने लगती.

दोनो काफ़ी देर तक अपने कमरे मे रही, पिताजी ने उनको खुद बाहर निकलने तक किसी को अंदर नही जाने दिया.

नेहा नीता ने अपने बचपन की सारी चीज़े पॅक करके रखी ताकि वो बाद मे अपने साथ ले जा सके

नेहा नीता हँसते हुए अपने कमरे से बाहर आई और अपने पिताजी के गले लग गयी.

ठाकुर ने सब के लिए कार बुलाई , जिस से तीनो 3 कार मे बैठ कर अपने गाँव को अलविदा करते हुए अपने ससुराल चली गयी.

जयसिंघ पेड़ के पीछे छुप कर अपनी बहनों को जाता हुआ देख रहा था.

जयसिंघ को नेहा पे गुस्सा आ रहा था पर थी तो वो उसकी बहन ना.

एक दिल मे नेहा के लिए नफ़रत थी तो दूसरे दिल मे नेहा के लिए प्यार था.

जयसिंघ की शायद यही किस्मत थी कि वो अपनी बहनो को अलविदा भी नही कर पाया

नेहा नीता और पूजा के जाते ही पूरा घर खाली हो गया.

इतने बड़े घर मे नेहा नीता के बिना अधूरा सा लग रहा था.

नेहा नीता के जाने के बाद पिताजी घंटो तक उनके कमरे मे बैठ कर उनको याद करते रहे.

फिर वो समय भी आ गया जिस से पिताजी की आँखो से फिर से पानी निकलने लगा

शालिनी अवी के साथ जाने के लिए तय्यार हो गयी.

पिताजी अब अपनी बहू को किस मूह से रोकते ,

पिताजी अपने बेटियो के बाद अपनी बहू और पोते के जाने से टूट रहे थे.

पर इसमे शालिनी भी कुछ नही कर सकती थी.

शस्लिनी ने जयसिंघ की गाँव लाने के लिए जो सोचा था वो हो नही पाया

अब शालिनी को कुछ और सोचना होगा

अब तो शालिनी को जयसिंघ का सामना करना था

पता नही जयसिंघ उसे क्या कहेगा

किसी को खुशी मिलती है तो किसी और को दुख सहना पड़ता है.

पेड़ से फ्रूट नीचे गिरता है तो पेड़ को दर्द होता है पर उस फ्रूट को खा कर दूसरो को जीवन मिलता है.

यही चलता आ रहा है और यही चलता रहेगा.

शालिनी को पता था कि उसको कहाँ जाना है. शालिनी अपने पति को अच्छे से जानती है.

जयसिंघ घर नही आएगा बस कही पर बैठ कर शालिनी का इंतज़ार करेगा.

पिताजी ने अवी को जी भरके प्यार कर किया .पर अपने पोते के दूर जाने का गुम तो उनका था ही.

माँ भी अपने बेटे को समझती थी ,दोनो बाप बेटे ना कभी झुकेंगे और ना कभी माफी मागेंगे .

ऐसे मे बीच मे फँसती है तो एक माँ ही, ना वो बेटे की तरफ से बोल सकती और ना अपने पति के बारे में कुछ सुन सकती है.

शालिनी ने माँ और पिताजी का आशीर्वाद लिया और अपने पति के पास जाने लगी.

पिताजी-बहू शहर तक छोड़ देता हूँ

शालिनी-नही पिताजी मैं चली जाउन्गी. आप आएगे तो ...वो यही गाँव मे होंगे ,

छोटू ने अपने देवर होने का फ़र्ज़ पूरा किया ,भाभी का बॅग उठा कर उनके साथ जाने लगा.

ये देख कर पिताजी को छोटू पर गर्व हुआ.उनका छोटा बेटा उनके रास्ते पे चलेगा.

शालिनी गाँव के बस स्टॉप पर आ गयी जहाँ पे जयसिंघ बैठा हुआ शालिनी का इंतज़ार कर रहा था.

शालिनी ने छोटू को वापस जाने को कहा.

छोटू ने अपने बड़े भाई की तरफ देखा जो नीचे ज़मीन की तरफ देख रहे थे. उनका हाल बता रहा था कल वो सोए नही.

शालिनी अवी को लेकर जयसिंघ के पास बैठ गयी.

शालिनी ने जयसिंघ के हाथ को अपने हाथ मे लिया.

जयसिंघ-ये तुम ने किया ना

शालिनी ने कोई जवाब नही दिया ,उसकी आँखो मे पानी आ गया.

जयसिंघ-ये तुम ने किया ना

शालिनी-आपको बताया था कि कुमार नेहा के लिए ठीक नही है.

जयसिंघ-कुमार मे कोई बुराई नही थी.

शालिनी-आप अपने दोस्त को जानते नही है.

जयसिंघ-मेरे दोस्त को मैं नही जानूँगी तो कौन जान सकता है.

शालिनी-नेहा की उस से शादी होती तो पूरी फॅमिली बर्बाद हो जाती.

जयसिंघ-तुम

शालिनी-आप मुझ पे भरोसा नही करते तभी उस कुमार की तरफ से बोल रहे है.

जयसिंघ-तुम्हें प्यार ना करता तो यहाँ तुम्हारा इंतज़ार नही करता रहता.

शालिनी-मैं प्यार की नही भरोसे की बात कर रही हूँ

जयसिंघ-तुम ने अच्छा नही किया ,पता नही अब क्या होगा

शालिनी-आपके बिना कंपनी नही चलेगी,

जयसिंघ-मैं कंपनी की बात नही कर रहा हू, नीता कैसी है

शालिनी-नेहा खुश है.

जयसिंघ-मैं ने नीता के बारे में पूछा है

शालिनी-सुरेश नेहा को खुश रखेगा.नेहा खुश थी, लास्ट समय तक आपका ही इंतज़ार कर रही थी

जयसिंघ नेहा के बारे में जानने के लिए नीता का नाम ले रहा था

जयसिंघ-चलो यहाँ से

शालिनी-आप एक बार नेहा से मिल लेते तो

जयसिंघ-उस का चेहरा भी देखना पसंद नही करूँगा मैं

और जयसिंघ रोने लगा

शालिनी-फिर यहाँ छुप कर उसको जाते हुए क्यूँ देख रहे थे.

जयसिंघ-मैं नीता को देख रहा था.

जयसिंघ कितना भी झूठ बोले पर शालिनी सच जान ही लेती थी

शालिनी-चलिए घर पिताजी इंतज़ार कर रहे है.

जयसिंघ-अब यहाँ कुछ नही रहा ,हम अपने घर जाएँगे .और इस बारे में तुम कुछ मत कहना

शालिनी-आप जहाँ रहेंगे मैं भी वही रहूंगी ना.बस आ गयी.

शालिनी चुप चाप जयसिंघ के साथ बस मे बैठ गयी.

शालिनी ने एक बार पलट कर गाँव को देखा ,उसका दिल नही कर रहा था कि गाँव को छोड़ कर जाए .पर जो चाहते है वो हो ऐसा ज़रूरी नही है.

शालिनी के जाते जी घर मे माँ पिताजी और छोटू रह गये
 
फ्लॅशबॅक 1013

सुरेश के इस तरह शादी करने से उसके माता पिता थोड़े नाराज़ हो गये.पर उनकी सालो की ख्वाहिश पूरी हो गयी.

सुरेश ने शादी कर ली. उनको बहू मिल गयी.

पूजा को वो हमेशा पसंद करते थे .पूजा की बहन उनकी बहू बन ने से वो खुश हो गये.

नेहा का पूरे मान समान के साथ वेलकम किया गया.

दूसरी तरफ नीता अपने घर आ गयी. वहाँ पर पूजा ने उसका घर परवेश किया.

नीता के ना सास ससुर थे और ना कोई देवर था.

नीता ने घर मे आते ही एक झाड़ू अपने हाथ मे लिए और एक झाड़ू जतिन के हाथ मे दिया .और दोनो ने अपना घर बसाना सुरू किया.

पूजा ने नीता को आते काम करते हुए देखा तो उसे अपनी बहन पर गर्व महसूस हुआ.

पूजा ने अपनी दोनो बहनों को उनके ससुराल मे सेट्ल कर दिया.

पूजा का घर शहर2 के दूसरे तरफ था तो नेहा और नीता का घर एक दूसरे से लगा हुआ था.

नेहा का घर बड़ा था पर नीता अपने छोटे घर मे जतिन के साथ खुश थी.

पूजा ने दोनो को कुछ टिप्स दी और वापस गाँव आ गयी.

रमेश को और 5 महीने शहर की कंपनी मे काम करना था.

इस बार समधन भी पूरे 5 महीने गाँव मे रुकने के लिए आ गयी.

समधन ने अपनी तबियत का बहाना कर दिया कि उसको इस गाँव की हवा पानी सूट हो गया है.

रमेश तो बस अपनी माँ को खुश देखना चाहता था.

पिताजी ने माँ के साथ समधन को खुश करके अपने पोते से दूर रहने का गम को भूलना सुरू किया

सब अपनी लाइफ जी रहे थे.

नेहा और नीता ने अपनी नयी ज़िंदगी की शुरुआत सुरू कर दी.

शालिनी जयसिंघ के साथ शहर3 मे रहने लगी.

कुमार को जयसिंघ को माफ़ करना पड़ा वरना कंपनी बंद पड़ जाती.

पर गाँव मे कंपनी खोलने के बारे में बात बंद हो गयी

शालिनी ने कितना सोचा था कि जयसिंघ गाँव आ जाएगा पर सब पे पानी फेर दिया

जयसिंघ को लगा कि कुमार ने दोस्ती की वजह से माफ़ किया है.

कुमार ने उस घटना के 2 महीने बाद एक अमीर लड़की से शादी कर ली.और घर दामाद जैसा रहने लगा.

शालिनी अपने पति का गुस्सा कम करने की पूरी कोशिश कर रही थी.

पर ये गुस्सा इतनी जल्दी ख़तम होने वाला नही था.

माँ को घर के सारे काम करने पड़ रहे थे.

वो दिन था जब माँ आराम से बैठी रहा करती थी और आज पूजा उनको घर काम मे मदद करती थी.

पूजा कितने दिन रहेगी,उसको भी तो अपने घर जाना होगा.

नेहा अपने ससुराल मे खुश थी ,और जल्दी नेहा ने सब को एक खूसखबरी

दी.

नेहा माँ बन ने वाली थी. ये खुशख़बरी मिलते माँ और पिताजी नेहा से मिलने चले गये.

सब ने नेहा को माँ बन ने की बधाई दी .पर नेहा की भाभी उसको कही नही दिख रही थी.

नेहा ने अपनी भाभी के बारे में पूछा तो पिताजी ने कहा तेरे माँ बनते ही वो आ जाएगी अब वो अपने घर गयी है.

पिताजी नीता का नया रूप देख कर खुश हो गये.

नीता ने अपने घर को अच्छे से संभाल लिया था.

नीता ने एक साल रुक कर फॅमिली को आगे बढ़ाने का सोचा था.

नीता का ऐसा करना पिताजी को अच्छा लगा. नीता पहले सेट्ल होना चाहती है फिर आगे का सोचने वाली है.

छोटू के एग्ज़ॅम होने से वो नेहा से मिलने नही जा सका, समधन छोटू के साथ गाँव मे रुक गयी.

इस बीच समधन को जो पिताजी की चुदाई का चस्का लगा था वो छोटू ने कंटिन्यू किया.

छोटू ने समधन को घर के हर एक कौने मे ले जाकर चुदाई की.

समधन जवान लंड के धक्के से अपनी प्यास बुझाने लगी.

छोटू चुदाई के एग्ज़ॅम मे पास हो गया पर 10 थ क्लास मे फिर से फैल हो गया .ये 3र्ड टाइम था.

ऐसे ही दिन निकलते गये.

रमेश का यहाँ का काम ख़तम हो गया.

पूजा स्वेता सीतल के साथ शहर2 चली गयी.

पूजा के आने से ज्योति को अपने घर जाना पड़ा ,समधन पिताजी से जल्दी मिलने का वादा करके चली गयी.

अब तो घर पूरा खाली हो गया. छोटू अपने दोस्तो के साथ बाहर घूमता रहता ,तो पिताजी बिज़ी रहने के लिए हवेली जाते थे.

घर मे माँ अकेली रह जाती.

नेहा की डेलिवरी भी शहर2 मे होने वाली थी. वरना नेहा गाँव मे आ जाती.

नेहा ने एक बेटी को जनम दिया.

नेहा के माँ बनते ही सब नेहा से मिलने आ गये.

नेहा ने एक बेटी को जनम दिया था.

नेहा सब लोगो के बीच मे अपनी भाभी को ढूँढ रही थी.

शालिनी को जब पता चला कि नेहा ने बेटी को जनम दिया है तो वो खुद को रोक नही पाई.

जयसिंघ को बिना बताए घर पे लेटर छोड़ कर शालिनी शहर3 से शहर2 चली गयी.

शालिनी जैसे ही नेहा के रूम मे एंटर हुई नेहा के खुशी का कोई ठिकाना नही था.

शालिनी को देख कर पिताजी भी खुश हो गये .पिताजी ने इशारे से जयसिंघ के बारे में पूछा तो शालिनी ने अवी को उनकी गोद मे दिया.

पिताजी अवी को प्यार करने लगे ,और शालिनी नेहा की बेटी को देखने लगी.

शालिनी-नेहा तुम्हारी बेटी तो गुलाब की तरह कोमल है.बिल्कुल तुम्हारे जैसी

नेहा-आप कल क्यूँ नही आई ,मैं कब से आपका इंतज़ार कर रही थी.और मेरी तरह नही आपकी तरह बनाउन्गी मैं मेरी बेटी को

शालिनी-वो जाने दे ,तेरी बेटी कितनी सुंदर है. अगर ये अवी की बहन ना होती तो इसी से अपने बेटे की शादी करवाती.

नेहा-सच भाभी

शालिनी-देख अपनी शादी का नाम सुनते ही अपनी मामी की उंगली पकड़ ली

नेहा- भाभी अभी तो इस दुनिया मे आई है

शालिनी- तो क्या हुआ , देख ये तो मेरी गोद मे आकर रोना भूल गयी

नेहा- अपनी मामी पसंद आ गयी

शालिनी- कितनी क्यूट है , काश मेरी भी एक ऐसी बेटी होती

नेहा-भाभी, ये आपकी ही बेटी है

शालिनी- मेरी बेटी , फिर देखना मैं इसको बहुत प्यार दूँगी तुझसे भी ज़्यादा

नेहा- मेरी बेटी लकी है जिसको आप माँ जैसा प्यार देगी

शालिनी- तू आराम कर मैं तो अपनी बेटी के साथ खेलती हूँ

शालिनी को भी एक बेटी की इच्छा थी पर अवी के आते ही वो इच्छा पूरी नही हुई ,, लेकिन नेहा की बेटी के आते ही वो इच्छा पूरी हो गयी

नेहा की बेटी को शालिनी भाभी ने अपनी बेटी बना लिया

शालिनी 1महीने के लिए नीता के घर रुकी क्यूँ की पिताजी को अवी को प्यार जो करना था.

पर शालिनी को भी अपनी नयी बेटी को प्यार करना था

जब नेहा ने अपनी बेटी का नाम कोमल रखा तो शालिनी भाभी की खुशी का कोई ठिकाना नही

कोमल को एक साथ 2 माँ का प्यार मिल रहा था

नेहा बहुत खुश थी शालिनी भाभी का कोमल के लिए प्यार देख कर

इस 1 महीने मे शालिनी भाभी ने इतना प्यार कोमल को दिया कि जयसिंघ की कमी महसूस नही हुई

जयसिंघ समझ गया कि शालिनी कहाँ है. वो शालिनी से इतना प्यार करता था की उसको कुछ कह भी नही सकता था.

शालिनी अपने पति और पिताजी दोनो को खुश रखने की पूरी कोशिश कर रही थी.

नेहा के माँ बन ने से घर मे फिर से खुशिया आने लगी.

नेहा ने अपनी बेटी का नाम कोमल रखा , भाभी ने जो कहा उसकी को नाम रख दिया.

पिताजी अपनी नवासी कोमल और पोते अवी को प्यार करके खुश हो गये.

शालिनी भाभी तो एक ही बात कहती थी की कोमल को वो अपनी बहू बना लेगी

फिर से सब अपनी लाइफ मे लग गये.

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फ्लश बॅक 1014

पिताजी और जयसिंघ मे फिर से दूरिया पैदा हो गयी थी

इस बार नेहा की शादी मे ऐसा कुछ हो गया की क्या बताऊ

जयसिंघ को लग रहा था कि नेहा ने जयसिंघ के मूह पे थप्पड़ मारा हो

जयसिंघ अब गाँव मे कैसे रहता

कैसे अपनी फॅमिली अपने गाँव वालो का सामना करता

सब तो उसे गुनहगार कहते कि नेहा की शादी ऐसे आदमी से कर रहा था

नेहा के पास कोई सबूत नही था

पर पिताजी को नेहा की ज़ुबान ही सबूत जैसी थी

शालिनी ने भी अपनी ननद का साथ दिया

शालिनी ने उस बात की परवाह नही की , जयसिंघ उसको छोड़ देगा

शालिनी ने बस घर के बारे में सोचा

जयसिंघ ने शालिनी को ऐसा करने पे कुछ नही कहा

कैसे कहता

शालिनी से प्यार जो करता था

वही तो एक थी जो उसको समझती थी

जयसिंघ को बुरा लगा कि शालिनी ने उसका साथ नही दिया

पर दिल के किसी कौने मे अछा भी लगा कि शालिनी ने उसकी बहन का साथ दिया

पर वो नेहा से नज़रें भी कैसे मिला पाता

जयसिंघ ने किसी से कुछ नही कहा

और अपनी बीवी अपने बेटे अवी के साथ शहर3 चला गया

पिताजी अपनी बहू को जाते हुए देखते रहे

पिताजी अवी को कैसे रोकते ,

नेहा की शादी मे इतना कुछ हुआ कि पिताजी किस मूह से अवी को रोकते

किस मूह से शालिनी को रुकने को कहते

जयसिंघ ने भी शालिनी को चलने को नही कहा , बस बस स्टॉप पे इंतज़ार कर रहा था

अगर शालिनी नही आती तो जयसिंघ अकेला चला जाता

ऐसे मे शालिनी बीच मे फस गयी थी

एक तरफ पिताजी और दूसरी तरफ जयसिंघ

पिताजी को भी पता था कि इस वक्त शालिनी की ज़रूरत जयसिंघ को है

जयसिंघ को शालिनी के सहारे की ज़रूरत है

ऐसे मे पिताजी ने अपने दिल पे पत्थर रख कर अवी को शालिनी के साथ शहर3 जाने दिया

जिस बात को कहने से जयसिंघ डर रहा था

कैसे पिताजी को कहेगा कि उसको शहर3 मे रहना है वो अपने आप ही गया

पर शालिनी ने एक रास्ता ढूँढ निकाला था

गाँव मे कंपनी निकालने का

और उसकी सुरुआत कुमार और नेहा के शादी से हो रही थी

पर ये शादी शालिनी ने नही होने दी

और अब गाँव मे कंपनी खोलने का सपना टूट गया

जयसिंघ के सपने बस टूटने के लिए बने थे

एक एक करके सब सपने टूट रहे थे

जयसिंघ बस रोने के सिवा कुछ नही कर सकता था

जो कुछ सोचा था सब पानी मे बह गया

शालिनी ने जयसिंघ को गाँव लाने का एक रास्ता ढूँढ निकाला था पर वो नेहा की ख़ुसीयो के सामने कमज़ोर था

नेहा की ख़ुसीयो के लिए शालिनी ने खुद इस रास्ते को बंद कर दिया

रास्ते तो बहुत मिलते है

पर नेहा को सिर्फ़ एक लाइफ मिली है वो शालिनी बर्बाद कैसे होने देती

शालिनी ने वही किया जो एक बड़ी बहन अपनी छोटी बहन के लिए करती

शालिनी ने नेहा के लिए अपने शादी सुदा लाइफ की परवा नही की

शालिनी का नेहा के लिए प्यार देख कर पिताजी को थोड़ी तो खुशी मिली

माजी सिर्फ़ देखती रह गयी

एक तरफ कलेजा का टुकड़ा जयसिंघ था तो दूसरी तरफ नेहा और नेहा के पिताजी थे

माजी बस देखती रह गयी

माजी क्या बोलती

माजी को पिताजी ले विश्वास था और पिताजी को अपनी बहू पे

भगवान ने चाहा तो शालिनी सब ठीक कर देगी

जयसिंघ शालिनी के साथ शहर3 आ गया

ना शालिनी ने जयसिंघ से बात की और ना शालिनी कुछ बात करके जयसिंघ को दुख पहुँचाना चाहती थी

शहर3 आते ही जयसिंघ ने शालिनी से इतना पूछा कि वो ग़लत था क्या

जयसिंघ ग़लती नही था

कौन कैसा है ये जानने के लिए पूरी ज़िंदगी कम पड़ जाती

ऐसे मे जयसिंघ की ग़लती कैसे मान सकती थी शालिनी

जयसिंघ तो अपनी बहन के अच्छे के लिए कर रहा था

और नेहा की सुरेश से शादी होने से जयसिंघ को लगा कि नेहा ने सुरेश के लिए ऐसा किया

शालिनी ने बताया कि दोनो एक दूसरे से प्यार करते है

जयसिंघ इस पे क्या कहता

जयसिंघ तो शहर3 आते ही शालिनी की गोद मे सर रख कर रोता रहा

शालिनी भी जयसिंघ के साथ थी

पर किसी को ख़ुसी तो किसी को गम तो मिलता है

यही तो नेचर का रूल है

नेहा को ख़ुसी मिली और जयसिंघ को दर्द

पर शालिनी को क्यूँ आँसू मिले

शालिनी के रोने से काम नही चलता

जयसिंघ के लिए शालिनी को अपनी हिम्मत टूटने नही देनी थी

शालिनी ने जयसिंघ को हिम्मत दी

उसे इस घटना से बाहर निकालने का रास्ता दिखाया

कुछ दिन जयसिंघ को मेडैटेशन सेंटर ले गयी

जयसिंघ कुछ हद तक नॉर्मल हो गया पर अब कुमार क्या कहेगा

कुमार की तो बेज़्जती कर दी नेहा और शालिनी ने

जयसिंघ ऐसे मे कुमार से कैसे बात करता

पर कुमार को इस बेज़्जती से गुस्सा आया

पर जयसिंघ का रीप्लेसमेंट उसके पास नही था

कुमार को कंपनी के बारे में अभी बहुत कुछ जानना था

तब तक जयसिंघ को झेलना ही था

जयसिंघ ने कुमार से माफी माँग ली

अजीत ने कुमार को जयसिंघ को माफ़ करने को कहा ताकि जयसिंघ को उसकी पहली शादी का पता ना चले

कुमार को भी लगा की जयसिंघ को माफ़ कर देता हूँ और गाँव की ब्रांच वाली कंपनी को भूलने को बोलता हूँ

पर वो पाटनेर्शिप के पेपर पे सिग्नेचर हो चुकी थी वो बदलना मुश्किल था

जिस से कुमार ने अभी के लिए गाँव की कंपनी के बारे में बात करना बंद किया

जयसिंघ ने खुद कहा कि अब गाँव मे ब्रांच ओपन नही करेंगे

जयसिंघ को कुमार की माफी मिलते ही वो फिर से कंपनी के कामो मे लग कर उस बात को भूलने लगा

पर नेहा के लिए जयसिंघ के दिल मे नफ़रत पैदा हो गयी

नेहा नाम से नफ़रत हो गयी थी जयसिंघ को

शालिनी इस समय जयसिंघ से बात करके और परेशान नही करना चाहती थी

ऐसे मे शालिनी नया रास्ता ढूँढने लगी
 
फ्लश 97

शालिनी को लगा कि नेहा के माँ बनते ही वो जयसिंघ से बात करेगी

पर जयसिंघ तो नेहा की बात करते ही उठ कर बाहर चला जाता

जयसिंघ कुछ सुनने को तय्यार नही था

जयसिंघ के ना मानने से शालिनी अवी को लेकर नेहा की बेटी को देखने चली गयी

जयसिंघ ने शालिनी को रोका नही जिसमे शालिनी को एक उम्मीद दिखी की जयसिंघ पिघल सकता है

शालिनी के आने से नेहा को सबसे ज़्यादा खुशी हुई

नेहा ने शालिनी ने जयसिंघ के बारे में पूछा तो शालिनी ने कहा कि वो सब ठीक कर देगी

नेहा को शालिनी भाभी पे विश्वास था

शालिनी ने नेहा की बेटी का तारीफ करते हुए कहा कि गुलाब के फूलों की तरह कोमल है

और नेहा ने उसी पे अपनी बेटी का नाम रख दिया कोमल

शालिनी 1 महीने तक नेहा के यहा रुकी

जयसिंघ ने फिर भी शालिनी को कुछ नही कहा

शालिनी ने उस समय बस कोमल को प्यार करती रही , जयसिंघ के हिस्से का प्यार भी शालिनी कोमल को करने लगी

और पिताजी को कुछ समय के लिए ही क्यूँ ना हो उनका वारिश को प्यार करने मिला

पिताजी अवी को प्यार कर रहे थे

और शालिनी नेहा की बेटी कोमल को

शालिनी ने नेहा को बता दिया की कोमल उसकी बेटी है

नेहा उसी से खुश हो गयी

शालिनी ने नेहा और कोमल के फोटो ले लिए

शालिनी दोनो घरो को खुश रख रही थी

शालिनी 1 महीने बाद वापस गयी तो अपने साथ नेहा और कोमल के फोटो की एक बड़ी फ्रेम बना कर अपने घर मे लगाई

जयसिंघ की नज़र जब उस फोटो पे गयी तो उसकी आँख मे आसू आए

जयसिंघ एक पल के लिए भूल गया कि नेहा के शादी के समय क्या हुआ था

जयसिंघ नेहा और कोमल के फोटो के पास आकर उनको छु कर देखने लगा

शालिनी को ये देख कर अच्छा लगा

जयसिंघ का गुस्सा कम करने के लिए ये तरीका ढूँढ निकाला था शालिनी ने

.पर जयसिंघ जल्दी होश मे आया और घर से बाहर चला गया बिना कुछ बताए

शालिनी को इतना तो यकीन आ गया कि जयसिंघ अभी भी नेहा से प्यार करता है

जयसिंघ को गुस्सा आया होता तो वो फोटो निकाल कर फेक देता

फोटो को ना निकालने से शालिनी की हिम्मत बढ़ती गयी

जयसिंघ शालिनी को दुख नही पहुँचाना चाहता था

अगर वो फोटो फेक देता तो शालिनी के साथ झगड़ा हो जाता

जयसिंघ ने अब तक बहुत कुछ खो दिया है

अब शालिनी को खोना नही चाहता था

इस लिए जयसिंघ ने शालिनी को दुख पहुँचे ऐसा कुछ नही किया

पर रोज उस फोटो को देख कर ये सोचता कि कोमल कितनी प्यारी है

कोमल तो नेहा से भी प्यारी है

यही सब चलता रहता

पर शालिनी हार मान ही नही रही थी

वो तो जयसिंघ को गाँव लेकर ही जाएगी
 
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