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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) पार्ट -2

संजू ने उसे किसी बच्ची की तरह पलटकर उसका मूह अपनी तरफ कर लिया, उसके सुन्दर से गोल-मटोल चेहरे को अपने दोनो हाथों में भरकर उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला – और मे कैसा इंशान लगा तुम्हें…?

श्यामा पर संजू की लच्छेदार बातों और उसकी हरकतों से वासना का खुमार चढ़ने लगा था.., आँखों में लाल डोरे तैरने लगे थे…, अपनी लरजती ज़ुबान से बड़ी मुश्किल से वो बोली – आ..आअप्प्प..भीइ..बहुत अच्छे हैं…संजूऊू..ज्जिि…!

उसके मूह से ये शब्द सुनते ही संजू के तपते होंठ उसके लरजते होठों पर चिपक गये और श्यामा के वाकई के शब्द उसके अंदर ही जप्त हो कर रह गये…!

वो दोनो एक दूसरे के होठों को लेमन्चूस की तरह चूसने लगे…, संजू का लंड उसके कपड़ों में ही खड़ा होकर श्यामा की मुलायम गान्ड में ठोकरें मारने लगा…!

संजू के हाथ उसके कठोरे उभारों का मर्दन करते जा रहे थे…, श्यामा जैसी नाज़ुक कमसिन औरत पर इतने सारे हमले एक साथ होने से उसकी चूत अपना कामरस छोड़े बिना ना रह सकी…!

संजू की उंगलियों ने भी करतब करना शुरू कर दिया और किस करते हुए उसने उसकी चोली के सारे बटन खोल डाले…!

वो उसे वहीं चारपाई पर लिटाकर उसके अनारों को मसल्ते हुए, उसकी सुराइदार गर्दन को चूमते हुए पैरों से उसके घांघारे को उपर सरकाने लगा…!

घुटनो से उपर आते ही उसका एक हाथ उसकी गोरी-चिकनी जांघों पर फिसलने लगा और धीरे धीरे उसका वो हाथ जैसे ही उसके यौनी प्रदेश पर पहुँचा.. श्यामा के मूह से एक मादक सिसक फुट पड़ी…!

उसकी चड्डी उसी के कामरस से गीली हो चुकी थी.., चड्डी के उपर से ही उसकी एक उंगली उसकी फांकों के बीच की दरार में घूमने लगी…!

सस्सिईइ…आअहह…उउउम्म्मंणणन्…करते हुए श्यामा ने अपनी दोनो जांघों को और खोल दिया…, संजू को समझते देर नही लगी की लौंडिया अब पूरी तरह से तैयार हो चुकी है…,

सो उसने उसके पैरों के पास पहुँचकर जैसे ही उसकी कच्छी को उतारने के लिए हाथ बढ़ाया….. तभी एक आवाज़ उसके कानों में पड़ी…., ये क्या हो रहा है यहाँ..??????

संजू ने हड़बड़ा कर आवाज़ की दिशा में देखा…, सामने श्यामा की जेठानी राम दुलारी अपने मूह पर हाथ रखे हुए विश्मय से अंदर चल रही काम लीला को देख रही थी…!

संजू ने झट-पाट श्यामा के घांघारे को उसके पैरों तक खिसका कर चारपाई से नीचे उतारने के लिए अपना एक पैर ज़मीन से टीकाया ही था कि पीछे से श्यामा ने उसकी कलाई थाम ली…!

 
संजू ने पलटकर उसकी तरफ देखा….. मुझे यौं अधूरा छोड़कर कहाँ जा रहे हो संजुज़ी… श्यामा किसी घायल हिरनी की तरह तड़प्ते हुए बोली…!

संजू के मूह से कोई बोल नही फूटा…, उसने बस मूक निगाहों से रामदुलारी की तरफ इशारा किया…, श्यामा ने एक नज़र अपनी जेठानी पर डाली और मुस्कुरा कर बोली…..!

तुम उनकी चिंता मत करो…, बस अपना काम पूरा करते रहो…, आओ मेरे राजा.. ये कहते हुए उसने संजू को फिरसे अपने उपर खींच लिया…!

उसकी इस हरकत पर रामदुलारी के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी…, वो उन दोनो के पास आकर बोली – अरी करम्जलि… साली छिनाल… चुदास की मारी कुतिया, कम से कम दरवाजा तो बंद कर लेती…, अभी मेरी जगह कोई और होता तो…?

आअहह…जीज्ज़िि…कुच्छ मत कहो…, तुम्हारे उस ना मर्द देवर से तो कुच्छ होता जाता नही है.., भला हो पंडितजी का जो वो संजुज़ी को यहाँ छोड़ गये हैं…!

हाए संजुज़ी…प्लीज़ कुच्छ करो ना..ये कहते हुए उसने संजू के हाथ अपने खुले हुए अनारों पर जमा दिए…!

संजू ने एक नज़र रामदुलारी पर डाली और ज़ोर्से श्यामा के अनारों को मसल दिया…..!

सस्स्सिईईई…आअहह…रजाअ.. ज्जिि…आराम से…, कहते हुए श्यामा उसे अपने उपर खींचने लगी…!

इन दोनो के प्रेम प्रलाप को देख कर रामदुलारी की चूत में भी खुजली होने लगाई थी, वो अपने लहँगे के उपर से ही अपनी चूत को खुजाते हुए बोली – अरईइ तो कम से कम कोठे में तो चल.., खुला आँगन है, इधर उधर से किसी ने

झाँक लिया तो बड़ी बदनामी वाली बात हो जाएगी…!

दुलारी की बात सुनकर संजू नीचे उतर गया.., श्यामा ने भी चारपाई से नीचे पैर रखते हुए कहा – हाए संजू जी मुझे अपनी गोद में उठा लो ना..प्लीज़, ये कहते हुए वो सचमुच उसके गले में बाहें डालकर झूल गयी…!

संजू ने किसी गुड़िया की तरह उसे अपनी गोद में उठा लिया…, श्यामा ने अपनी दोनो टाँगें उसकी कमर में लपेट ली…, उसका पाजामे के अंदर पूरी तरह फन फैला चुका नाग श्यामा की गान्ड पर जा टिका…!

लंड की गर्मी से उसकी चूत पिघलने लगी.., संजू उसे गोद लिए कोठे के अंदर तक आगया.., आगे आगे बेसबरी में कदम बढ़ती हुई दुलारी थी…!

दुलारी ने फुर्ती से ज़मीन पर गद्दा बिच्छा दिया.., जिसपर जाकर संजू ने शयामा को खड़ा कर दिया…!

श्यामा चुदने के लिए इतनी उतबली हो रही थी कि उसने एक मिनिट के अंदर अपने सारे कपड़े अपने शरीर से अलग कर दिए और वो संजू के कपड़ों पर भी टूट पड़ी…!

श्यामा के नंगे छरहरे साँचे में ढले 34-28-34 फिगर वाले बदन को देख कर संजू की बान्छे खिल उठी.., उसने अपनी शायरट उतार कर एक तरफ फेंक दी.., तब तक श्यामा उसके पाजामा को उतार चुकी थी.., और अंडर वेअर के उपर से ही उसके कड़क मस्त लंड को मुट्ठी में लेकर मसल्ने लगी…!

उनकी कॉम्क्रीडा का असर दुलारी पर भी हो रहा था…, उसने भी अपनी चोली के बटन खोल डाले और अपने भारी भारी स्तनों को अपने ही हाथों में लेकर मसलने लगी…!

संजू श्यामा के पतली कमर में एक हाथ डालकर उसके होठों का रस पीने लगा.., साथ ही उसका दूसरा हाथ उसके

अनारों का रस निचोड़ने में व्यस्त हो गया….!

 
इस दो तरफ़ा मार से श्यामा सिहर उठी…, उसकी चूत से बूँद बूँद करके काम रस बिस्तर पर टपकने लगा…!

संजू ने उसे बिस्तर पर टिका दिया और खुद उसकी कड़क कठोर गोल-गोल चुचियों से खेलने लगा…, एक चुचि को मूह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को स्पंज की गेंद के तरह मुट्ठी में कसकर दबाने लगा…!

श्यमा का पल-पल बुरा हाल होता जा रहा था…, उसकी आँखों में चुदने की याचना साफ-साफ दिखाई दे रही थी…, लेकिन संजू तो बस अपनी ही धुन में मगन उसे बिस्तर पर धकेलता हुआ उसकी जांघों के बीच जा पहुँचा….!

उसकी मुनिया से लार के तार निकल रहे थे जिन्हें संजू ने अपनी जीभ ले जाकर चाट लिया…, संजू की जीभ का स्पर्श पाते ही श्यामा का बदन जुड़ी के मरीज की तरह थरथरा उठा…..!

सस्स्सिईईईई….हाअयईी…मेरे राज्जाआ…क्या कर रहे हो…?? अब नही रहा जाता मुझसे…उउउम्म्मननन्ग्घ…जीज्ज़िि…बोलो ना…!

रामदुलारी से अपनी प्यारी छोटी बेहन की तड़प सहन नही हुई…, उसने संजू का अंडरवेर नीचे सरका कर उसके लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर श्यामा की रसीली चूत की गीली गरम फांकों पर टिका दिया…!

संजू ने भी मौके की नज़ाकत को समझते हुए श्यामा की सुडौल मुलायम जांघों को अपनी जांघों पर चढ़ाया और अपने लंड को 2-3 बार उसकी अधखुली चूत के मूह पर उपर से नीचे तक फिराया…!

श्यामा सिसकते हुए बोली… आअहह….सस्सिईईई.. अब देर मत करो राजा…, चोदो मुझे वरना मे मर ही जाउन्गि…अब..!

उपर से दुलारी ने भी उसकी पीठ सहलाते हुए आगे बढ़ने का इशारा करते हुए उसकी गान्ड पर चपत लगाते हुए कहा… अब डाल भी दे भडुये…क्यों तडपा रहा है बेचारी को…!

दुलारी की बात पर संजू के चेहरे पर मुस्कान आ गयी.. और उसने एक जबरदस्त धक्का देकर एक ही झटके में अपना

मोटा ताज़ा लंड ¾ तक श्यामा की गुफा में उतार दिया…!

इस हमले से श्यमा का मूह खुला का खुला रह गया…, उसके मूह से मादक कराह निकल पड़ी…आआहह…मार डाला..हरजाई….धीरे…उउउफफफ्फ़…

संजू ने एक लंबी साँस लेकर अपने लौडे को थोड़ा बाहर किया.., और फिर उससे भी तगड़ा झटका मारकर जड़ तक अपना

लंड श्यामा की चूत में पेल दिया…..!

 
बहुत मस्त लौंडिया थी श्यामा, थोड़ी देर बाद ही वो अपनी पतली कमर उच्छाल-उच्छाल कर लंड का मज़ा लेने लगी…,

झड़ने तक उसकी गान्ड बिस्तर से नही टिकी....

उसने संजू को भी ये एहसास दिला दिया कि इस लौंडिया को चोदना माने जन्नत के नज़ारे देखने से कम नही है…

बाजू में बैठी दुलारी ने भी अपना लहंगा कमर तक चढ़ा लिया और अपनी तीन-तीन उंगलियों को अपनी चूत की गहराइयों में उतारकर अपनी चूत को चोदने लगी….!

एक बार श्यामा को जमकर चोदने के बाद दुलारी भी अपनी भारी भरकम गान्ड खोलकर उसके सामने पसर गयी.., जिसका संजू को पहले से ही अनुमान भी था…!

लेकिन पहलवान सरीखे संजू पर क्या फ़र्क पड़ना था.., सो वो दोनो बहनों को अच्छी तरह से ठंडा करके अपने कपड़े संभालता हुआ, नयी नयी कटारीदार मूँछो पर ताव देता हुआ दुलारी के घर से चाची के घर को निकल लिया…!

मे और चाची अपना मनपसंद खेल खेलकर आँगन में बैठे बातें कर ही रहे थे जब संजू वहाँ पहुँचा…!

हम दोनो की नज़र आपस में टकराई.., इशारों ही इशारों में उसने बता दिया कि काम अच्छे से हो गया है…..!!

थोड़ी देर बाद चाचा भी आगये, चाची उठकर खाने के इन्तेजाम में जुट गयी.., और हम तीनों आपस में बातें करते हुए खाने का इंतजार करने लगे……..!!

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संजू का दिल गाँव के वातावरण में रमने लगा था…, फक्कड़ आदमी उसे चाहिए क्या..? जमकर मेहनत करना और दो वक़्त का बढ़िया खाना…,

उपर से अब उसके लिए दो-दो चूतें भी थी.., जब भी मन करता वो दुलारी के घर जा पहुँचता.., कभी-कभी तो उन दोनो में से कोई एक या फिर दोनो, उसके पास खेतों में ही पहुँच जाती थी…!

एक दिन संजू अपने पूरे चक के बस यौंही चक्कर काट रहा था.., हमारे खेतों के दूसरी तरफ एक और गाँव था जो लगभग हमारे खेतों से उतना ही दूर था जितना हमारा अपना गाँव…!

घूमते घामते हुए जब संजू खेतों के दूसरी छोर पर पहुचा जहाँ से उस दूसरे गाँव की हद शुरू होती थी.., हमारे खेत अपने गाँव की सीमा पर ही थे…!

दोनो गाँव की सीमा पर एक नहर थी जिसके द्वारा कभी गंगा का पानी इस पूरे इलाक़े की सिंचाई के काम आता था आज दशकों से सुखी पड़ी थी.., जो अब एक तरह से झाड़ियों से ढक चुकी थी…!

नहर की अपोजिट साइड की पटरी पर एक झाड़ी की ओट में संजू को एक भरे हुए बदन की औरत जो की मुसलमानी टाइप के सलवार कुर्ता पहने थी आज़ार आई…!

उसका मूह झाड़ियों की तरफ था और खड़े होकर वो अपनी सलवार का नाडा खोल रही थी.., कौतूहल बस संजू उसे वहीं खड़े होकर देखने लगा…!

देखते ही देखते उस औरत ने पीछे से अपना कुर्ता उपर किया और सलवार नीचे करके वो वहीं मूतने बैठ गयी…!

संजू उस औरत की गोरी-गोरी विशालकाय गान्ड को देखने का मोह छोड़ ना सका और वो बड़े ध्यान से उसे मुतते हुए देखने लगा…!

उस औरत की गान्ड के पाट कुच्छ ज़्यादा ही बाहर को निकले हुए थे जिसकी वजह से संजू को उसके मूत की मोटी सी धार और गान्ड के बीच की कत्थयि रंग की दरार तो दिख रही थी लेकिन उसके भोस्डे के दर्शन नही हो पा रहे थे…!

वो उत्सुकताबस दबे पाँव उस औरत के नज़दीक जाने लगा.., वो जैसे ही नहर की गहराई में पहुँचा, अंदर से उसे उसकी काली काली लेकिन छोटे बालों वाली झान्टो के बीच फूली हुई चूत के दर्शन क्षण मात्र के लिए हो गये जब वो औरत मूतने के बाद अपनी गान्ड को और उपर की तरफ उठाकर अपने भोस्डे से टपकते मूत की बूँदों को निहार रही थी…!

इसका मतलब अब वो खड़ी होने वाली है, कहीं वो औरत उसे देख ना ले इसलिए संजू वहीं एक झाड़ी की ओट में हो गया……!

 


एक बार अपनी सलवार का नाडा बाँधकर वो औरत संजू की तरफ पलटी…, उसे वो जानी पहचानी सी नज़र आई.., थोड़ा और ध्यान से देखने पर उसकी सारी शंकायं दूर हो गयी, संजू उसे अच्छे से पहचान चुका था…!

लेकिन ये यहाँ इस पास के गाँव में मिलेगी इस बात की उसे बेहद हैरानी हो रही थी…!

वो औरत अपनी 36” की गान्ड मतकाते हुए पटरी के दूसरी तरफ चली गयी.., संजू कुच्छ देर वहीं खड़े रहकर मन ही मन विचार करने लगा.., कि ये तो वहाँ शहर में रहती थी तो फिर इस गाँव में क्या कर रही है…!

कुच्छ सोचकर वो भी उस औरत की दिशा में चल पड़ा…!

दूसरी तरफ एक खेत में उसकी 8-10 बकरियाँ घस्स चर रही थी, वो उन्हें इकट्ठा करने लगी, जब सब एक साथ आगयि, तो उन्हें हांकते हुए अपने गाँव की तरफ चल दी…!

संजू थोड़ा तेज तेज कदम बढ़कर उसके पास जा पहुँचा और पीछे से उसने उसे आवाज़ दी….. ज़रा सुनिए तो….!!!

वो औरत उसकी आवाज़ सुनकर एकदम से पलटी और अपने सामने संजू को खड़ा देख कर वो बुरी तरह से चोंक पड़ी….. अरे सजु तुम और यहाँ… कैसे भाई..????

संजू – यही सवाल मे तुमसे पुच्छना चाहता था.., मे तो यहाँ पास के गाँव में ही वहाँ के सरपंच की खेती वाडी देखता हूँ…, लेकिन तुम यहाँ कैसे…?

वो औरत जो कोई और नही युसुफ की बड़ी बेहन वहीदा थी, जिसका निकाह युसुफ ने अपने ही गॅंग के असलम के साथ कर दिया था, जो एक पक्की रांड़ थी.., ड्रग्स के धंधे में ग्राहक पटाने के मामले में वो अपने जिस्म को परोसने में भी देर नही लगाती थी…!

वहीदा – वहाँ अड्डे पर रेड पड़ने के बाद हम सब लोग शहर छोड़ने पर मजबूर हो गये.., ये गाँव मेरे शौहर का है.., तो च्छूपने के लिए हमें यहाँ से ज़्यादा मुनासिब जगह और कोई नही लगी.., सो हम दोनो अब यहीं आकर रहने लगे हैं….!

संजू – तो अब युसुफ भाई और बाकी घरवाले आजकल कहाँ हैं…???

वहीदा – कुच्छ दिन तक तो वो इधर से उधर छुपते च्छूपाते रहे लेकिन अब कुच्छ महीनो से कोई खैर खबर नही है उन लोगों की…!

तुम सूनाओ, यहाँ कोई रिस्तेदारि बगैरह है जहाँ रहते हो आजकल…???

संजू – मेरी यहाँ कहाँ से कोई रिस्तेदारि होगी.., तुम शायद निर्मला को तो जानती ही हो, उसी के कुच्छ रिस्तेदार यहाँ रहते हैं… उनके पास ही रहता हूँ, वहाँ की भगदड़ से बचते बचाते हुए हम दोनो भी यहीं चले आए.., वरना मेरा तो यहाँ कोई ठिकाना ही नही था…!

वहीदा अपनी बकरियों को गाँव की तरफ हांकती हुई बोली – आओ चलो हमारे घर, तुम भी देख लोगे.., कभी कभार घूमने आ जाया करना हमारे पास…!

बातें करते करते वो दोनो कुच्छ दूर और निकल आए, अब उसका गाँव थोड़ा ही दूर था.., तभी गाँव की तरह से एक लड़की उनकी तरफ आती दिखाई दी…!

तेज़ी से चली आरहि उस लड़की को देख कर संजू ने दूर से ही अंदाज़ा लगा लिया कि वो उनकी तरफ ही आ रही है.., संजू ने वहीदा से पुछा…, वहीदा बेहन ये लड़की कों है जो हमारी ही तरफ आ रही है…?

वहीदा – ये मेरी सबसे छोटी ननद है शकीला, बहुत ही चुलबुली.., देखो तो कैसी हिरनी के जैसी कुलाचें भरते हुए चली आ रही है…!

 
थोड़ा नज़दीक आने पर संजू ने उस लड़की को गौर से देखा.., रंग ना ज़्यादा गोरा और ना ऐसा की उसे पक्का कहा जा सके.., अगर ये शहर की आबो-हवा में रहती होती तो शर्तिया दूध जैसी चमक रही होती…!

18-19 साल की ये बाला, छरहरे बदन की हाइट कुच्छ ज़्यादा नही यही कोई 5’4 लेकिन फिगर उसका 32-26-34…, कमर इतनी पतली की चलते हुए लहराने लगे.., चुचियाँ अभी विकसित होने को उतबली हो रही थी.., शायद किसी मर्द के हाथों के इंतेजार में…!

आगे से गान्ड की गोलाइयाँ कुच्छ क्लियर तो नही थी.., लेकिन अंदाज़ा था कि वो भी थोड़ी सी मेहनत करने पर लंड का पानी हिलाने लायक हो सकती थी…!

गोल-मटोल चेहरा, हल्के से फूले हुए उसके गुलाबी गाल, पतले-पतले रसीले होठ… पुराने से सलवार सूट में वो चंचल हिरनी हाँफती हुई उनके सामने आकर खड़ी हो गयी और संजू की तरफ देखते हुए बोली – भाभिजान…ये कॉन हैं…?

वहीदा उसके बेहद करीब जाकर बोली – तेरे लिए दूल्हा ढूँढ कर लाई हूँ.., कैसा लगा…?

धत्त्त… शकीला ने शर्मा कर जबाब दिया.., ये कैसा मज़ाक है…, बताइए ना…ये कॉन हैं और जंगल में कहाँ से मिल गये आपको…?

वहीदा – ये संजू भाई है.., शहर में हमारे साथ ही काम करते थे युसुफ भाईजान के अज़ीज दोस्त…, तुम कहो तो इनसे तुम्हारा निकाह करवा दूँ…!

शकीला शर्म से अपना सिर झुका कर बोली – मुझे नही करना कोई निकाह विकह..,

वहीदा – क्यों पसंद नही है…? या ** का पसंद नही है मेरी राज्जू..?

शकीला – ऐसी कोई बात नही है…, चलो अब मज़ाक छोड़ो…, अम्मी आपको याद कर रही हैं…!

वहीदा ने संजू से एक घर की तरफ इशारा करते हुए कहा – भाई वो देखो मेरा घर.., अभी तो मेरे शौहर घर पर नही होंगे.., तुम बाद में हमारे यहाँ आना ज़रूर…!

संजू ने एक नज़र शकीला के खिलते यौबन पर डाली जो एकटक उसी की तरफ देख रही थी.., एक बार दोनो को नज़रें टकराई.., फिर शरमा कर शकीला ने फ़ौरन अपनी नज़र झुका ली…!

पलटते हुए एक बार फिर उस चंचल बाला ने संजू की तरफ तिर्छि नज़र से देखा और एक दिलकश मुस्कान बिखेरती हुई बकरियों को घर की तरफ हांकते हुए चल दी….

 
संजू अपने होतो पर मुस्कान लाते हुए बोला – वहीदा बेहन, अब तो तुम्हारे घर आना जाना लगा ही रहेगा.., अच्छा अब में चलता हूँ.., जल्दी ही मिलने अवँगा….बाइ….!

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एक बार फिर वही नहर का किनारा.., आज संजू इसी आशा में फिरसे उधर घूमते हुए चला गया कि शायद आज भी वहीदा उसे बकरियाँ चराते हुए मिलेगी.., और इसी बहाने वो उसके घर तक पहुँच जाएगा…!

लेकिन आज वहीदा की जगह वो चंचल हिरनी उसे बकरियाँ चराते हुए मिली…, देखते ही संजू की बान्छे खिल उठी.., उसकी बकरियाँ नहर के अंदर की झाड़ियों से पत्तियाँ चुन-चुनकर खा रही थी…!

शकीला एक बड़ी सी झाड़ी के नीचे छान्व में बैठी कुच्छ गुन-गुना रही थी जब दबे पाँव संजू उसके करीब पहुँचा….!

अरे शकीला… तुम ! आज तुम्हारी भाभी नही आई…? संजू ने उसे एक साथ संबोधित करके कहा तो वो अचानक से उसकी आवाज़ पर चोंक पड़ी…, झट से खड़े होते हुए बोली – नही उनको घर पे कुच्छ काम था…, लगता है आप यहाँ भाभिजान से ही मिलने आए हैं…!

संजू – नही ऐसी कोई बात नही है.., मेरे तो खेत ही यही हैं.., चक्कर लगाने चला आया था…, तुम्हें देखा तो

सोचा पूछ लूँ.., वैसे आज तुम्हारे भाईजान घर पर हैं…?

शकीला के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गयी.., और बड़ी शोखी के साथ बोली – भाईजान हैं तभी तो वो आज नही

आई हैं…, वैसे आपको भाभिजान से क्या काम था….?

सवाल करते हुए उसने अपनी नज़रें संजू के चेहरे पर गढ़ा दी.. जिनमें जमानेभर का अल्हाड़पन समाया हुया था…!

मासूम सी नज़र आराही शकीला के इस शरारत भरे सवाल पर कुच्छ देर तक संजू उसकी मासूमियत को निहारता रहा फिर कुच्छ देर बाद बोला – काम तो कुच्छ नही था.., वैसे बिना किसी काम के नही पूछ सकता..?

शकीला – आप लोग शहर में एक साथ रहते थे, तो कुच्छ ना कुच्छ काम तो रहता ही होगा एक दूसरे से.., वैसे भी भाभिजान हर किसी के काम के लिए तैयार हो जाती हैं…!

संजू उसके बेहद करीब पहुच चुका था उसे इस अल्हड़ जवानी की दहलीज पर कदम रख रही शकीला से बातें करने में मज़ा आ रहा था सो बात को आगे बढ़ाता हुआ बोला – हर किसी के मतलब किस तरह के काम के लिए…?

शकीला उसके इस अचानक सवाल से कुच्छ हड़बड़ा गयी.., अपनी पाटर पाटर बातें करने की आदत की मुतविक उसने बोल तो दिया था लेकिन अब संजू के इस सवाल का वो क्या जबाब दे की उसकी मनचली भाभी किस तरह के काम के लिए तैयार रहती है…!

उसने अपनी नज़रें झुका ली और पैर के अंगूठे से ज़मीन को कुरेदने लगी…, संजू ने अपना हाथ आगे करके उसके कंधे पर रखा…, किसी मर्द का हाथ अपने बदन से टच होने पर वो अंदर तक सिहर गयी…!

 
उसने अपनी केटीली पलकों को उठाकर संजू की तरफ देखा जो उसके थरथरते होठों को ही देख रहा था…,

उसे अपनी ओर देखते पाकर वो फिर बोला – तुमने जबाब नही दिया.., वो किस तरह के काम के लिए तैयार रहती हैं…?

शकीला ने हकलाते हुए बड़ी मुश्किल से जबाब दिया… मुझे…नही… मालूम…. आप उनसे ही पुच्छ लेना…!

संजू ने उसके कंधे को सहलाते हुए पुछा – अच्छा एक बात का सही से जबाब देना…, ये कहते हुए वो थोड़ी देर के लिए रुका.., शकीला ने नज़र उठाकर उसकी तरफ देखा मानो पुच्छ रही हो क्या..?

मे अगर तुम्हारे घर आउ तो तुम्हें बुरा तो नही लगेगा..?

शकीला ने तपाक से कहा – क्यों..? मुझे क्यों बुरा लगेगा..? मे तो चाहती हूँ.. अभी आप हमारे घर चलिए… उल्टा मुझे तो और खुशी हो…. ये कहते कहते अचानक वो रुक गयी…!

संजू का हाथ अब उसकी पीठ तक पहुँच चुका था.., उसके चुप होते ही बोला – हां.. हां.. बोलो.. तुम्हें मेरे आने से खुशी होगी…?

शकीला ने शरमाते हुए जबाब देने की जगह अपनी गर्दन हां में हिलाई…,

अबतक संजू उसके पीछे जा पहुँच था, अब उसके दोनो हाथ उसके दोनो कंधों पर थे.., कंधों से नीचे उसकी बाजुओं को सहलाते हुए बोला – क्यों..? मुझ जैसे अजनबी के आने से तुम्हें खुशी क्यों होगी..?

यौं हौले-हौले संजू के द्वारा उसके कंधों फिर बाजुओं को सहलाना शकीला को बड़ा अच्छा लग रहा था.., वो थोड़ा अपने बाजुओं को सिकोडते हुए बड़े भोलेपन से बोली…

आप तो मेरे भाईजान और भाभिजान के दोस्त हैं तो फिर अजनबी कैसे हुए..?

संजू उसके जबाब से प्रभावित हुए बिना नही रह सका.., उसकी तारीफ करते हुए बोला – एक बात कहूँ शकीला…, तुम सनडर ही नही समझदार भी हो…!

शकीला अपनी तारीफ़ सुनकर खुश हो गयी.., वो उसकी तरफ पलटते हुए बोली- क्या सच में मे आपको सुन्दर लगती हूँ या ऐसे ही बना रहे हैं…?

संजू – कसम से तुम निहायत ही खूबसूरत हो ये कहते हुए उसने सामने से उसके बाजुओं को पकड़ लिया…, तुम्हारे ये पतले पतले रसीले होत.., आहह.. जी करता है इनसे कुच्छ रस मे भी चुरा लूँ…!

शकीला ने शर्म से अपना चाँद सा चेहरा नीचे झुका लिया.. और लारजति आवाज़ में बोली – ये आप क्या कह रहे हैं…, खुदा के वास्ते इतना बड़ा झूठ मत बोलिए…!

संजू को लगा कि उसे उसकी तरफ से मौन स्वीकृति मिल गयी है.., सो उसने एक कदम और आगे आकर शकीला को अपनी बाहों में भर लिया और उसके पतले पतले होठों पर अपने खुश्क होठ रख दिए…!

शकीला के जीवन का ये पहला अनुभव था जब किसी मर्द के होठों ने उसके कुंवारे होठों को छुआ हो…! उसकी आँखें बंद हो गयी.., एक अजीब से एहसास में वो अपनी सुध-बुध खो बैठी..!

संजू ने जल्दी ही उसे अपने बंधन से मुक्त कर दिया.., वो देखना चाहता था कि लौंडिया इससपर क्या रिक्ट करती है.., कहीं नाराज़ ना हो जाए..,

लेकिन उसके छोड़ते ही शकीला ने उसे प्रश्नवचक नज़रों से देखा…मानो पुच्छना चाहती हो की इतना जल्दी क्यों ख़तम कर दिया ये चुंम्बन…!

संजू ने डरते हुए कहा – सॉरी शकीला.., तुम्हारे हुश्न को देख कर मे अपने आप पर कंट्रोल नही रख सका…!

शकीला सिर झुकाए हुए ही बोली – इसमें सॉरी की क्या बात है.., सच कहूँ तो मुझे आपका ये चुंम्बन लेना अच्छा लगा…!

 
संजू खुशी से झूम उठा और उसे बाहों में लेकर झूमते हुए बोला – सच शकीला.., तुम्हें मेरा चुंम्बन अच्छा लगा.., ऊहह..शकीला मेरी जान तुम सच में बहुत अच्छी लड़की हो …

फिर वो उसे अपनी गोद में लेकर बैठ गया.., शकीला के पूरे बदन में जैसे गुदगुदी सी होने लगी थी.., उसके नाज़ुक अंग अब फड़फड़ने लगे थे.., मन कर रहा था की संजू उसे अपनी बाहों में भरकर ज़ोर्से भींचे, उसकी चुचियों को मसल डाले…!

उधर इतना कुच्छ होने से संजू के पाजामा में तंबू बन चुका था जो अब शकीला की मुलायम बॉल जैसी गान्ड के नीचे दबा पड़ा था…!

संजू उसे अपने गोद में लिए हुए एक टीले जैसी जगह पर बैठ गया, उसके पतले पेट को सहलाते हुए उसने उसके चेहरे को अपनी तरफ किया और एक बार फिर उसने उसके रसीले होठों को चूम लिया…!

मे तुम्हें कैसा लगता हूँ शकीला…? संजू ने उसके चाँद से मुखड़े को अपने दोनो हाथों के बीच थामकर पुच्छा…!

शकीला – आप भी एकदम किसी फिल्मी हीरो से लगते हैं.., मेने तो कल ही पहली नज़र में आपको अपना दिल दे दिया था…!

संजू ने ज़ोर्से उसे अपने से कसते हुए कहा – सच में.. ऊहह..शकीला मेरी जान…, ये कहते हुए उसने पहली बार उसके कच्चे अनारों को छुआ और हल्के हाथ से सहलाने के बाद उन्हें हल्के से दबा दिया…!

शकीला मानो जन्नत में पहुँच गयी और उसने सामने से संजू के होठों को चूम लिया…, संजू ने उसका निमंत्रण ठुकराया नही और उसका स्वागत करते हुए वो भी उसके होठों को चूसने लगा…!

शकीला को गोद में बिठाए हुए ही वो दोनो चुम्म्बनो में खो गये, संजू का एक हाथ उसके अनारो की गोलाई मापने लगा.., वो दोनो सुध-बुध खोकर एक दूसरे में खोते चले गये….!

तभी एक झटके से शकीला का हाथ पकड़कर किसी ने ज़ोर्से उसे खींचा.., वो संजू की गोद से निकालकर ज़मीन पर आगयि…, सामने उसकी भाभी वहीदा बड़े गुस्से से उन दोनो को देख रही थी…!

बिना कुच्छ कहे सुने वो शकीला को खींचती हुई वहाँ से ले जाने लगी…!

तभी संजू ने हाथ बढ़कर उसे रोकने की कोशिश करते हुए कहा – वहीदा बेहन…रूको…मे शकीला से प्याररर….कहते कहते वो बैठकर हाँफने लगा मानो मेलों दौड़कर आया हो…!

जब उसने अपने आस-पास देखा तो अपने आप को चाची के आँगन में चारपाई के उपर पाया.., उसका शरीर पसीने से तर हो रहा था…!

ऊहह…तो ये सपना था… काश ये हक़ीकत होती.., कितना मज़ा आरहा था…, साली वहीदा को भी अभी आना था.., कितना अच्छा सपना तोड़ दिया…!

सपने की याद करके उसके चेहरे पर मुस्कान आगयि.., उठकर वो बाथरूम में खाली होने गया और फिर पानी पीकर फिरसे अपने बिस्तर पर लेट गया.., लेकिन अब शायद ही उसे नींद आने वाली थी…!

करवट बदलते हुए उसने वाकी की रात इश्स इंतेजार में काटी की कल किसी वक़्त वो वहीदा के घर ज़रूर जाएगा…..!!!

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