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Guest
संजू ने उसे किसी बच्ची की तरह पलटकर उसका मूह अपनी तरफ कर लिया, उसके सुन्दर से गोल-मटोल चेहरे को अपने दोनो हाथों में भरकर उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला – और मे कैसा इंशान लगा तुम्हें…?
श्यामा पर संजू की लच्छेदार बातों और उसकी हरकतों से वासना का खुमार चढ़ने लगा था.., आँखों में लाल डोरे तैरने लगे थे…, अपनी लरजती ज़ुबान से बड़ी मुश्किल से वो बोली – आ..आअप्प्प..भीइ..बहुत अच्छे हैं…संजूऊू..ज्जिि…!
उसके मूह से ये शब्द सुनते ही संजू के तपते होंठ उसके लरजते होठों पर चिपक गये और श्यामा के वाकई के शब्द उसके अंदर ही जप्त हो कर रह गये…!
वो दोनो एक दूसरे के होठों को लेमन्चूस की तरह चूसने लगे…, संजू का लंड उसके कपड़ों में ही खड़ा होकर श्यामा की मुलायम गान्ड में ठोकरें मारने लगा…!
संजू के हाथ उसके कठोरे उभारों का मर्दन करते जा रहे थे…, श्यामा जैसी नाज़ुक कमसिन औरत पर इतने सारे हमले एक साथ होने से उसकी चूत अपना कामरस छोड़े बिना ना रह सकी…!
संजू की उंगलियों ने भी करतब करना शुरू कर दिया और किस करते हुए उसने उसकी चोली के सारे बटन खोल डाले…!
वो उसे वहीं चारपाई पर लिटाकर उसके अनारों को मसल्ते हुए, उसकी सुराइदार गर्दन को चूमते हुए पैरों से उसके घांघारे को उपर सरकाने लगा…!
घुटनो से उपर आते ही उसका एक हाथ उसकी गोरी-चिकनी जांघों पर फिसलने लगा और धीरे धीरे उसका वो हाथ जैसे ही उसके यौनी प्रदेश पर पहुँचा.. श्यामा के मूह से एक मादक सिसक फुट पड़ी…!
उसकी चड्डी उसी के कामरस से गीली हो चुकी थी.., चड्डी के उपर से ही उसकी एक उंगली उसकी फांकों के बीच की दरार में घूमने लगी…!
सस्सिईइ…आअहह…उउउम्म्मंणणन्…करते हुए श्यामा ने अपनी दोनो जांघों को और खोल दिया…, संजू को समझते देर नही लगी की लौंडिया अब पूरी तरह से तैयार हो चुकी है…,
सो उसने उसके पैरों के पास पहुँचकर जैसे ही उसकी कच्छी को उतारने के लिए हाथ बढ़ाया….. तभी एक आवाज़ उसके कानों में पड़ी…., ये क्या हो रहा है यहाँ..??????
संजू ने हड़बड़ा कर आवाज़ की दिशा में देखा…, सामने श्यामा की जेठानी राम दुलारी अपने मूह पर हाथ रखे हुए विश्मय से अंदर चल रही काम लीला को देख रही थी…!
संजू ने झट-पाट श्यामा के घांघारे को उसके पैरों तक खिसका कर चारपाई से नीचे उतारने के लिए अपना एक पैर ज़मीन से टीकाया ही था कि पीछे से श्यामा ने उसकी कलाई थाम ली…!
श्यामा पर संजू की लच्छेदार बातों और उसकी हरकतों से वासना का खुमार चढ़ने लगा था.., आँखों में लाल डोरे तैरने लगे थे…, अपनी लरजती ज़ुबान से बड़ी मुश्किल से वो बोली – आ..आअप्प्प..भीइ..बहुत अच्छे हैं…संजूऊू..ज्जिि…!
उसके मूह से ये शब्द सुनते ही संजू के तपते होंठ उसके लरजते होठों पर चिपक गये और श्यामा के वाकई के शब्द उसके अंदर ही जप्त हो कर रह गये…!
वो दोनो एक दूसरे के होठों को लेमन्चूस की तरह चूसने लगे…, संजू का लंड उसके कपड़ों में ही खड़ा होकर श्यामा की मुलायम गान्ड में ठोकरें मारने लगा…!
संजू के हाथ उसके कठोरे उभारों का मर्दन करते जा रहे थे…, श्यामा जैसी नाज़ुक कमसिन औरत पर इतने सारे हमले एक साथ होने से उसकी चूत अपना कामरस छोड़े बिना ना रह सकी…!
संजू की उंगलियों ने भी करतब करना शुरू कर दिया और किस करते हुए उसने उसकी चोली के सारे बटन खोल डाले…!
वो उसे वहीं चारपाई पर लिटाकर उसके अनारों को मसल्ते हुए, उसकी सुराइदार गर्दन को चूमते हुए पैरों से उसके घांघारे को उपर सरकाने लगा…!
घुटनो से उपर आते ही उसका एक हाथ उसकी गोरी-चिकनी जांघों पर फिसलने लगा और धीरे धीरे उसका वो हाथ जैसे ही उसके यौनी प्रदेश पर पहुँचा.. श्यामा के मूह से एक मादक सिसक फुट पड़ी…!
उसकी चड्डी उसी के कामरस से गीली हो चुकी थी.., चड्डी के उपर से ही उसकी एक उंगली उसकी फांकों के बीच की दरार में घूमने लगी…!
सस्सिईइ…आअहह…उउउम्म्मंणणन्…करते हुए श्यामा ने अपनी दोनो जांघों को और खोल दिया…, संजू को समझते देर नही लगी की लौंडिया अब पूरी तरह से तैयार हो चुकी है…,
सो उसने उसके पैरों के पास पहुँचकर जैसे ही उसकी कच्छी को उतारने के लिए हाथ बढ़ाया….. तभी एक आवाज़ उसके कानों में पड़ी…., ये क्या हो रहा है यहाँ..??????
संजू ने हड़बड़ा कर आवाज़ की दिशा में देखा…, सामने श्यामा की जेठानी राम दुलारी अपने मूह पर हाथ रखे हुए विश्मय से अंदर चल रही काम लीला को देख रही थी…!
संजू ने झट-पाट श्यामा के घांघारे को उसके पैरों तक खिसका कर चारपाई से नीचे उतारने के लिए अपना एक पैर ज़मीन से टीकाया ही था कि पीछे से श्यामा ने उसकी कलाई थाम ली…!