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Guest
रूचि अब जवानी की दहलीज पर कदम रख चुक्की थी…, घर में किसी चीज़ की कमी नही थी…, हमारे परिवार में रामा दीदी के बाद वो ही इकलौती लड़की थी.., सभी उसे बेहद प्यार करते थे..!
बचपन से ही वो मेरे बहुत ही करीब थी.., मेरी गोद में खेलना…, गाँव में भी स्कूल का कोई काम होता तो भाभी
मुझे ही भेजती.., उसको किसी भी चीज़ की ज़रूरत होती बस मेरी गोद में आकर बैठ जाती…!
फिर मेरी चिन को पकड़ कर जब अपनी डिमॅंड रखती… तो उसके भोलेपन को देखकर मुझे उसकी हर डिमॅंड पूरी करनी पड़ती….!
भाभी काई बार बोल भी चुकी थी…, लल्ला इसे इतना सिर मत चढ़ो वरना बिगड़ जाएगी.., अब ये बड़ी हो रही है.., कब तक इसकी डिमॅंड पूरी करते रहोगे…?
मे गोद में लिए हुए ही भाभी को अपनी तरफ खींचकर उनके गान्ड के उभारों को सहलाते हुए कहता – अभी हमारी बिटिया छोटी ही तो है.., जब बड़ी होकर शादी करके अपने घर चली जाएगी तो किसको प्यार करेंगे…?
भाभी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहती – बिगाड़ो इसे खूब बिगाड़ो, देखना एक दिन पछ्ताओगे…,
मे हॅस्कर रूचि की आँखों पर हाथ रख देता और भाभी के होठों पर चुंबन जड़ देता…, कभी कभी वो रूचि को भी डाँट देती.., लेकिन मे उनके सामने रूचि को मना कर देता…!
लेकिन उनके वहाँ से चले जाने के बाद रूचि को उसका मनपसंद चोकोबार थमाकर उसके मुलायम गाल पर एक किस कर देता…!
रूचि भोलेपन से जबाब देती – चाचू आप मुझे मम्मी से कम प्यार करते हैं.., मेरे होठों पर उंगली रख कर कहती.., उनको तो यहाँ पर क़िस्सी की आपने और मेरे गाल पर ही क्यों…?
उसकी बात पर मे सकपका जाता.. और बहाना बनाते हुए कहता – बेटा यहाँ की क़िस्सी सिर्फ़ बड़ों के लिए होती है.., आप तो अभी छोटी ही हो ना…, फिर वो ना समझते हुए भी हामी भर देती….!
शहर आने के बाद भी मे जब भी घर में घुसता उसके लिए कुच्छ ना कुच्छ लाता ही था…, सारी सुख सूबिधाओं में पली बढ़ी रूचि के शरीर का विकास भी समय से पहले ही होने लगा था…!
अब जब वो 12थ में पढ़ रही थी तब तक उसके शरीर का पूर्ण विकास हो चुका था…, रूचि अब अपनी मा से भी बढ़कर लगने लगी थी जब वो शादी होकर हमारे घर आई थी…!
सुन्दर गोल-मटोल चेहरा.., सुतवान नाक, कजरारी बड़ी बड़ी आँखें, लंबे बाल.., लंबी सुराइदार गर्दन.., 32-26-32 का शानदार कमसिन फिगर हाइट अभी से वो 5’7” थी…!
जब वो मुझे घर में कसरत करते देखती थी तभी से मेरे साथ साथ कुच्छ ना कुच्छ उच्छल कूद करती रहती…, शहर आकर मेने अपनी कोठी में छोटा सा जिम भी खोल रखा था.. जिसमें जिसकी मर्ज़ी होती अपने हिसाब से एक्सर्साइज़ कर लेता था…!
शहर आकर स्कूल में गर्ल्स स्पोर्ट्स होते थे.. कुच्छ ही दिनो बाद रूचि ने भी एक के बाद एक सभी आउटडोर-इनडोर स्पोर्ट्स में हिस्सा लेना शुरू कर दिया, जल्दी ही वो टेबल टेन्निस की एक अच्छी खिलाड़ी बन गयी…!
ज़्यादातर तो जब में जिम जाता उस समय तक रूचि स्कूल चली जाती थी.., लेकिन हॉलिडे वाले दिन वो मेरे साथ ही जिम करती.., मे भी उसे अपनी तरह से टिप्स देता था.., लेकिन अब कुच्छ दिनो से सब कुच्छ उल्टा होने लगा…!
बचपन से ही वो मेरे बहुत ही करीब थी.., मेरी गोद में खेलना…, गाँव में भी स्कूल का कोई काम होता तो भाभी
मुझे ही भेजती.., उसको किसी भी चीज़ की ज़रूरत होती बस मेरी गोद में आकर बैठ जाती…!
फिर मेरी चिन को पकड़ कर जब अपनी डिमॅंड रखती… तो उसके भोलेपन को देखकर मुझे उसकी हर डिमॅंड पूरी करनी पड़ती….!
भाभी काई बार बोल भी चुकी थी…, लल्ला इसे इतना सिर मत चढ़ो वरना बिगड़ जाएगी.., अब ये बड़ी हो रही है.., कब तक इसकी डिमॅंड पूरी करते रहोगे…?
मे गोद में लिए हुए ही भाभी को अपनी तरफ खींचकर उनके गान्ड के उभारों को सहलाते हुए कहता – अभी हमारी बिटिया छोटी ही तो है.., जब बड़ी होकर शादी करके अपने घर चली जाएगी तो किसको प्यार करेंगे…?
भाभी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहती – बिगाड़ो इसे खूब बिगाड़ो, देखना एक दिन पछ्ताओगे…,
मे हॅस्कर रूचि की आँखों पर हाथ रख देता और भाभी के होठों पर चुंबन जड़ देता…, कभी कभी वो रूचि को भी डाँट देती.., लेकिन मे उनके सामने रूचि को मना कर देता…!
लेकिन उनके वहाँ से चले जाने के बाद रूचि को उसका मनपसंद चोकोबार थमाकर उसके मुलायम गाल पर एक किस कर देता…!
रूचि भोलेपन से जबाब देती – चाचू आप मुझे मम्मी से कम प्यार करते हैं.., मेरे होठों पर उंगली रख कर कहती.., उनको तो यहाँ पर क़िस्सी की आपने और मेरे गाल पर ही क्यों…?
उसकी बात पर मे सकपका जाता.. और बहाना बनाते हुए कहता – बेटा यहाँ की क़िस्सी सिर्फ़ बड़ों के लिए होती है.., आप तो अभी छोटी ही हो ना…, फिर वो ना समझते हुए भी हामी भर देती….!
शहर आने के बाद भी मे जब भी घर में घुसता उसके लिए कुच्छ ना कुच्छ लाता ही था…, सारी सुख सूबिधाओं में पली बढ़ी रूचि के शरीर का विकास भी समय से पहले ही होने लगा था…!
अब जब वो 12थ में पढ़ रही थी तब तक उसके शरीर का पूर्ण विकास हो चुका था…, रूचि अब अपनी मा से भी बढ़कर लगने लगी थी जब वो शादी होकर हमारे घर आई थी…!
सुन्दर गोल-मटोल चेहरा.., सुतवान नाक, कजरारी बड़ी बड़ी आँखें, लंबे बाल.., लंबी सुराइदार गर्दन.., 32-26-32 का शानदार कमसिन फिगर हाइट अभी से वो 5’7” थी…!
जब वो मुझे घर में कसरत करते देखती थी तभी से मेरे साथ साथ कुच्छ ना कुच्छ उच्छल कूद करती रहती…, शहर आकर मेने अपनी कोठी में छोटा सा जिम भी खोल रखा था.. जिसमें जिसकी मर्ज़ी होती अपने हिसाब से एक्सर्साइज़ कर लेता था…!
शहर आकर स्कूल में गर्ल्स स्पोर्ट्स होते थे.. कुच्छ ही दिनो बाद रूचि ने भी एक के बाद एक सभी आउटडोर-इनडोर स्पोर्ट्स में हिस्सा लेना शुरू कर दिया, जल्दी ही वो टेबल टेन्निस की एक अच्छी खिलाड़ी बन गयी…!
ज़्यादातर तो जब में जिम जाता उस समय तक रूचि स्कूल चली जाती थी.., लेकिन हॉलिडे वाले दिन वो मेरे साथ ही जिम करती.., मे भी उसे अपनी तरह से टिप्स देता था.., लेकिन अब कुच्छ दिनो से सब कुच्छ उल्टा होने लगा…!