S
StoryPublisher
Guest
रिसेस ख़तम होने को था, सभी लड़कियाँ असेंब्ली रूम से अपनी अपनी क्लास के लिए चल पड़ी थी.., रूचि को पेशाब लगी थी तो वो क्लास रूम में जाने से पहले टाय्लेट की तरफ चल दी…!
स्कूल का टाय्लेट बिल्डिंग में पीछे की तरफ था.., उसके ठीक पीछे डिग्री कॉलेज का भी पीछे का भाग था जो खाली पड़ा था और उसमें टिनशेड डालकर कॉलेज का कबाड़ भरा हुआ था…!
स्कूल के गर्ल्स टाय्लेट के वॉशबेसिन के बाजू में ही एक विंडो थी जो सीधी कॉलेज के उस कबाड़ वाले पोर्षन की तरफ खुलती थी..,
रूचि जब पेशाब करके बेसिन पर अपने हाथ धो रही थी तभी उसे कुच्छ आवाज़ें सुनाई दी जो कि कॉलेज के उस हिस्से से आ रही थी.., स्वाभाविक तौर पर वो विंडो से उधर की तरफ देखने लगी…!
कबाड़ के पिच्छले हिस्से में एक वेस्टेज स्यूवर टॅंक बना हुआ था जिसका सेमेंट का बड़ा सा ढक्कन किसी बड़े से चबूतरे की तरह मेन फ्लोर से करीब एक या डेढ़ फीट हाइट में बना हुआ था…!
रूचि को उस चबूतरे नुमा ढक्कन पर कुच्छ लड़के बैठे दिखाई दिए जिनमें एक रॉकी भी था.., उन्होने अपने अपने हाथ में कुच्छ करेन्सी नोट जैसा पकड़ा हुआ था..,
रूचि को इन लड़कों में कोई इंटेरेस्ट नही था सो जस्ट हाथ धोकर वो अपनी क्लास में जाने के लिए मुड़ने ही वाली थी कि तभी रॉकी ने अपने हाथ में पकड़े हुए नोट जिसपर कुच्छ चुने जैसा सफेद पाउडर रखा हुआ था, उसे अपनी नाक के आगे रखकर ज़ोर्से अंदर को साँस ली..,
वो चुटकी भर पाउडर साँस के साथ उसकी नाक में चला गया…, पाउडर के अंदर जाते ही रॉकी के मूह से नशे में डूबी आहह..निकली – आअहह…क्या माल है यार.., मज़ा आगया.., इतना कहकर वो उस टॅंक के फ्लोर पर जहाँ बैठा था वहीं पीछे की तरफ पीठ के बल लुढ़क गया…!
उसको ऐसा करते देखकर रूचि उत्सुकतावस देखने के लिए खड़ी हो गयी.., रॉकी के बाद दूसरे लड़के ने भी ऐसा ही किया और वो भी पीछे को लुढ़क गया.., इस तरह रूचि के देखते देखते लाइन से बैठे वहाँ तीन और लड़के टॅंक पर लुढ़के पड़े थे…!
रूचि इतना तो समझ गयी थी कि रॉकी और उसके दोस्त कोई अच्छा काम तो कर नही सकते हैं.., ज़रूर कुच्छ ऐसी वैसी चीज़ का डोस ले रहे हैं जो शरीर में नशा पैदा करती हो…!
निडर लड़की ये जान’ने की आख़िर वो ऐसा क्या कर रहे हैं, देखने टाय्लेट से निकलकर, टाय्लेट का चक्कर लगाते हुए पीछे की तरफ पहुँच गयी..,
स्कूल और कॉलेज दोनो के बीच में एक 3 फीट उँची बाउंड्री थी जिसके इस पार लंबी लंबी घास और कुच्छ छोटे-छोटे झाड़ जैसे भी खड़े थे..,
वो जब बाउंड्री के पास पहुँची तो उन चारों के आगे दो लड़के और लुढ़के पड़े उसे दिखे जो कबाड़ की आड़ की वजह से टाय्लेट की विंडो से नही दिख रहे थे.
रूचि के लंबी लंबी घास से गुजरने से हल्की हल्की सर-सराहट पैदा हो रही थी.., उनके नज़दीक ही कोई है ऐसा आभास होते ही रॉकी अपनी जगह से उठकर बैठा और रूचि को देखते ही बोला –
ओये झाँसी की रानी.., क्या देख रही है..? हम लोग मज़े कर रहे हैं.., तुझे भी लेने हैं तो आजा करवा देते हैं.., कसम से बहुत मज़ा आएगा तुझे…!
रॉकी के मूह से ये शब्द सुनकर रूचि गुस्से से बोली – कमीने मे जानती हूँ तुम लोग यहाँ नशा कर रहे हो.., अभी जाकर तुम्हारी ये करतूत प्रिन्सिपल को बताती हूँ, इतना कहकर वो जाने के लिए पलटने लगी…!
इन दोनो की बातें सुनकर वाकी के दोस्त भी होश में आ चुके थे.., उनमें से एक हड़बड़ाते हुए बोला – अब्बे साले पकडो उसे, कहीं साली सच में प्रिन्सिपल को ना बोल दे…!
उसकी बात सुन रॉकी समेत वो 6 के 6 लड़के रूचि को पकड़ने के लिए लपके..,
स्कूल का टाय्लेट बिल्डिंग में पीछे की तरफ था.., उसके ठीक पीछे डिग्री कॉलेज का भी पीछे का भाग था जो खाली पड़ा था और उसमें टिनशेड डालकर कॉलेज का कबाड़ भरा हुआ था…!
स्कूल के गर्ल्स टाय्लेट के वॉशबेसिन के बाजू में ही एक विंडो थी जो सीधी कॉलेज के उस कबाड़ वाले पोर्षन की तरफ खुलती थी..,
रूचि जब पेशाब करके बेसिन पर अपने हाथ धो रही थी तभी उसे कुच्छ आवाज़ें सुनाई दी जो कि कॉलेज के उस हिस्से से आ रही थी.., स्वाभाविक तौर पर वो विंडो से उधर की तरफ देखने लगी…!
कबाड़ के पिच्छले हिस्से में एक वेस्टेज स्यूवर टॅंक बना हुआ था जिसका सेमेंट का बड़ा सा ढक्कन किसी बड़े से चबूतरे की तरह मेन फ्लोर से करीब एक या डेढ़ फीट हाइट में बना हुआ था…!
रूचि को उस चबूतरे नुमा ढक्कन पर कुच्छ लड़के बैठे दिखाई दिए जिनमें एक रॉकी भी था.., उन्होने अपने अपने हाथ में कुच्छ करेन्सी नोट जैसा पकड़ा हुआ था..,
रूचि को इन लड़कों में कोई इंटेरेस्ट नही था सो जस्ट हाथ धोकर वो अपनी क्लास में जाने के लिए मुड़ने ही वाली थी कि तभी रॉकी ने अपने हाथ में पकड़े हुए नोट जिसपर कुच्छ चुने जैसा सफेद पाउडर रखा हुआ था, उसे अपनी नाक के आगे रखकर ज़ोर्से अंदर को साँस ली..,
वो चुटकी भर पाउडर साँस के साथ उसकी नाक में चला गया…, पाउडर के अंदर जाते ही रॉकी के मूह से नशे में डूबी आहह..निकली – आअहह…क्या माल है यार.., मज़ा आगया.., इतना कहकर वो उस टॅंक के फ्लोर पर जहाँ बैठा था वहीं पीछे की तरफ पीठ के बल लुढ़क गया…!
उसको ऐसा करते देखकर रूचि उत्सुकतावस देखने के लिए खड़ी हो गयी.., रॉकी के बाद दूसरे लड़के ने भी ऐसा ही किया और वो भी पीछे को लुढ़क गया.., इस तरह रूचि के देखते देखते लाइन से बैठे वहाँ तीन और लड़के टॅंक पर लुढ़के पड़े थे…!
रूचि इतना तो समझ गयी थी कि रॉकी और उसके दोस्त कोई अच्छा काम तो कर नही सकते हैं.., ज़रूर कुच्छ ऐसी वैसी चीज़ का डोस ले रहे हैं जो शरीर में नशा पैदा करती हो…!
निडर लड़की ये जान’ने की आख़िर वो ऐसा क्या कर रहे हैं, देखने टाय्लेट से निकलकर, टाय्लेट का चक्कर लगाते हुए पीछे की तरफ पहुँच गयी..,
स्कूल और कॉलेज दोनो के बीच में एक 3 फीट उँची बाउंड्री थी जिसके इस पार लंबी लंबी घास और कुच्छ छोटे-छोटे झाड़ जैसे भी खड़े थे..,
वो जब बाउंड्री के पास पहुँची तो उन चारों के आगे दो लड़के और लुढ़के पड़े उसे दिखे जो कबाड़ की आड़ की वजह से टाय्लेट की विंडो से नही दिख रहे थे.
रूचि के लंबी लंबी घास से गुजरने से हल्की हल्की सर-सराहट पैदा हो रही थी.., उनके नज़दीक ही कोई है ऐसा आभास होते ही रॉकी अपनी जगह से उठकर बैठा और रूचि को देखते ही बोला –
ओये झाँसी की रानी.., क्या देख रही है..? हम लोग मज़े कर रहे हैं.., तुझे भी लेने हैं तो आजा करवा देते हैं.., कसम से बहुत मज़ा आएगा तुझे…!
रॉकी के मूह से ये शब्द सुनकर रूचि गुस्से से बोली – कमीने मे जानती हूँ तुम लोग यहाँ नशा कर रहे हो.., अभी जाकर तुम्हारी ये करतूत प्रिन्सिपल को बताती हूँ, इतना कहकर वो जाने के लिए पलटने लगी…!
इन दोनो की बातें सुनकर वाकी के दोस्त भी होश में आ चुके थे.., उनमें से एक हड़बड़ाते हुए बोला – अब्बे साले पकडो उसे, कहीं साली सच में प्रिन्सिपल को ना बोल दे…!
उसकी बात सुन रॉकी समेत वो 6 के 6 लड़के रूचि को पकड़ने के लिए लपके..,