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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) पार्ट -2

रिसेस ख़तम होने को था, सभी लड़कियाँ असेंब्ली रूम से अपनी अपनी क्लास के लिए चल पड़ी थी.., रूचि को पेशाब लगी थी तो वो क्लास रूम में जाने से पहले टाय्लेट की तरफ चल दी…!

स्कूल का टाय्लेट बिल्डिंग में पीछे की तरफ था.., उसके ठीक पीछे डिग्री कॉलेज का भी पीछे का भाग था जो खाली पड़ा था और उसमें टिनशेड डालकर कॉलेज का कबाड़ भरा हुआ था…!

स्कूल के गर्ल्स टाय्लेट के वॉशबेसिन के बाजू में ही एक विंडो थी जो सीधी कॉलेज के उस कबाड़ वाले पोर्षन की तरफ खुलती थी..,

रूचि जब पेशाब करके बेसिन पर अपने हाथ धो रही थी तभी उसे कुच्छ आवाज़ें सुनाई दी जो कि कॉलेज के उस हिस्से से आ रही थी.., स्वाभाविक तौर पर वो विंडो से उधर की तरफ देखने लगी…!

कबाड़ के पिच्छले हिस्से में एक वेस्टेज स्यूवर टॅंक बना हुआ था जिसका सेमेंट का बड़ा सा ढक्कन किसी बड़े से चबूतरे की तरह मेन फ्लोर से करीब एक या डेढ़ फीट हाइट में बना हुआ था…!

रूचि को उस चबूतरे नुमा ढक्कन पर कुच्छ लड़के बैठे दिखाई दिए जिनमें एक रॉकी भी था.., उन्होने अपने अपने हाथ में कुच्छ करेन्सी नोट जैसा पकड़ा हुआ था..,

रूचि को इन लड़कों में कोई इंटेरेस्ट नही था सो जस्ट हाथ धोकर वो अपनी क्लास में जाने के लिए मुड़ने ही वाली थी कि तभी रॉकी ने अपने हाथ में पकड़े हुए नोट जिसपर कुच्छ चुने जैसा सफेद पाउडर रखा हुआ था, उसे अपनी नाक के आगे रखकर ज़ोर्से अंदर को साँस ली..,

वो चुटकी भर पाउडर साँस के साथ उसकी नाक में चला गया…, पाउडर के अंदर जाते ही रॉकी के मूह से नशे में डूबी आहह..निकली – आअहह…क्या माल है यार.., मज़ा आगया.., इतना कहकर वो उस टॅंक के फ्लोर पर जहाँ बैठा था वहीं पीछे की तरफ पीठ के बल लुढ़क गया…!

उसको ऐसा करते देखकर रूचि उत्सुकतावस देखने के लिए खड़ी हो गयी.., रॉकी के बाद दूसरे लड़के ने भी ऐसा ही किया और वो भी पीछे को लुढ़क गया.., इस तरह रूचि के देखते देखते लाइन से बैठे वहाँ तीन और लड़के टॅंक पर लुढ़के पड़े थे…!

रूचि इतना तो समझ गयी थी कि रॉकी और उसके दोस्त कोई अच्छा काम तो कर नही सकते हैं.., ज़रूर कुच्छ ऐसी वैसी चीज़ का डोस ले रहे हैं जो शरीर में नशा पैदा करती हो…!

निडर लड़की ये जान’ने की आख़िर वो ऐसा क्या कर रहे हैं, देखने टाय्लेट से निकलकर, टाय्लेट का चक्कर लगाते हुए पीछे की तरफ पहुँच गयी..,

स्कूल और कॉलेज दोनो के बीच में एक 3 फीट उँची बाउंड्री थी जिसके इस पार लंबी लंबी घास और कुच्छ छोटे-छोटे झाड़ जैसे भी खड़े थे..,

वो जब बाउंड्री के पास पहुँची तो उन चारों के आगे दो लड़के और लुढ़के पड़े उसे दिखे जो कबाड़ की आड़ की वजह से टाय्लेट की विंडो से नही दिख रहे थे.

रूचि के लंबी लंबी घास से गुजरने से हल्की हल्की सर-सराहट पैदा हो रही थी.., उनके नज़दीक ही कोई है ऐसा आभास होते ही रॉकी अपनी जगह से उठकर बैठा और रूचि को देखते ही बोला –

ओये झाँसी की रानी.., क्या देख रही है..? हम लोग मज़े कर रहे हैं.., तुझे भी लेने हैं तो आजा करवा देते हैं.., कसम से बहुत मज़ा आएगा तुझे…!

रॉकी के मूह से ये शब्द सुनकर रूचि गुस्से से बोली – कमीने मे जानती हूँ तुम लोग यहाँ नशा कर रहे हो.., अभी जाकर तुम्हारी ये करतूत प्रिन्सिपल को बताती हूँ, इतना कहकर वो जाने के लिए पलटने लगी…!

इन दोनो की बातें सुनकर वाकी के दोस्त भी होश में आ चुके थे.., उनमें से एक हड़बड़ाते हुए बोला – अब्बे साले पकडो उसे, कहीं साली सच में प्रिन्सिपल को ना बोल दे…!

उसकी बात सुन रॉकी समेत वो 6 के 6 लड़के रूचि को पकड़ने के लिए लपके..,

 
रूचि अब वहाँ से जल्दी से जल्दी निकल जाना चाहती थी.., लेकिन घास लंबी होने के कारण वो भाग ना सकी.., इतने में वो लड़के बौंड्री फांदकर उसके पास जा पहुँचे और उसे चारों तरफ से घेर लिया…!

रूचि ने बिना डरे उन्हें चेतावनी देते हुए कहा – हाथ मत लगाना मुझे वरना ठीक नही होगा…!

रॉकी – क्या करेगी तू हमारा..?

रूचि – लगता है उस दिन की मार भूल गया हरामजादे.., ?

रॉकी – उस दिन की बात छोड़, आज तू हमसे बचकर दिखा तब देखते हैं तू कितनी बड़ी शेरनी है…!

रूचि – हरामिओ.., अपने आप में मर्द बनते हो.., दम है तो एक-एक करके आओ.., फिर बताती हूँ कि मे क्या हूँ..?

रूचि की बात सुनकर उनमें से एक तगड़ा सा लड़का आगे आते हुए बोला – चल आजा मुझे दिखा अपने हाथ.., देखता हूँ तू कैसे बच पाती है मुझसे…?

ये कहकर वो रूचि की तरफ झपटा.., लेकिन वो तब तक अपनी जगह छोड़ चुकी थी…, झोंक झोंक में वो अपनी दोनो बाजुओं को पकड़ने वाले अंदाज में आपस में मिलाकर लड़खड़ाते हुए आगे निकल गया…,

पीछे से रूचि की एक भरपूर ठोकर उसके कूल्हे पर पड़ी और वो मूह के बल घास में गिर पड़ा…!

ये देखकर किसी और में उससे अकेले लड़ने की हिम्मत नही हुई और वो सब एक साथ उसपर झपट पड़े…!

सबने मिलकर उसे पकड़ लिया.., अकेली लड़की सिर्फ़ हाथ पैर मारती रही लेकिन इतने लोगों से कैसे मुकाबला करती.., किसी ने उसके हाथ पकड़े.., किसी ने पैर और एक ने उसका मूह दबा लिया जिससे वो चिल्ला भी ना सके.., और उसे उठाकर उसी कबाड़ वाले एरिया की तरफ चल दिए….!!!

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अमित… जोकि रूचि पर नज़र रखने के लिए उसके पीछे साया बनकर रहता था.., उसने रिसेस में ही उसे टाय्लेट की तरफ जाते देखा था.., लेकिन पिच्छले 15-20 मिनिट में भी वो जब वापस अपनी क्लास की तरफ नही लौटी तो उसे कुच्छ शक हुआ और वो उसे देखने के लिए टाय्लेट की तरफ चल पड़ा…!

टाय्लेट में कोई नही था.., उसने आवाज़ भी लगाई लेकिन कोई उत्तर नही मिला.. तो उसका शक यकीन में बदल गया.., उसने इधर उधर चारों ओर उसे खोज मारा लेकिन उसका कोई पता नही चला.., तभी उसे बाउंड्री के पास की घास कुच्छ तूडी मूडी सी दिखी..,

अमित समझ गया कि रूचि के साथ कुच्छ तो ग़लत हुआ है.., अभी वो असमंजस की स्थिति में खड़ा सोच ही रहा था कि उसे कहाँ तलाश करूँ कि तभी बाउंड्री के पार कबाड़ से उसे किसी लड़की के मूह से गून..गून की आवाज़ सुनाई दी.., जैसे कोई किसी का मूह दबा रहा हो…!

अमित को पक्का यकीन हो गया कि आज रॉकी ने अपना कमीनपन दिखा ही दिया है.., वो ये भी जानता था कि एक-दो रूचि को काबू में नही कर सकते.., ज़रूर ये ज़्यादा लोग ही होंगे.., इसलिए उसने उनसे सीधे भिड़ने से पहले मुझे मेसेज कर दिया…!

मे अपना एक केस निपटाकर कोर्ट रूम से बाहर आ रहा था कि तभी मुझे अपने मोबाइल में मेसेज टोन सुनाई दी.., देखा तो अमित का मेसेज था…!

कम फास्ट.., शी ईज़ इन ट्रबल, बॅक साइड ऑफ कॉलेज डिस्पोज़ल यार्ड…

मेसेज पढ़ते ही मेने पार्किंग में खड़ी अपनी गाड़ी की तरफ दौड़ लगा दी...., भागते हुए ही अपना कोट उतारा, गाड़ी का गेट खोलकर अपनी फाइल और कोट पिच्छली सीट पर फेंका…

पार्किंग से गाड़ी निकाली और रोड पर आते ही मेने अपनी गाड़ी कॉलेज की तरफ फुल स्पीड में दौड़ा दी….!!!

कॉलेज के पीछे वाला भाग जिसकी लोकेशन अमित ने मेसेज में दी थी.., मेन गेट के बाए साइड के रोड से टच था.., रोड और उसके बीच में 8-9 फीट उँची बाउंड्री, उसके उपर काँच के टुकड़े लगाए हुए थे, साथ ही बौंड्री से लगे हुए लंबे लंबे सुरू के पेड़…!

मे मेन गेट से जाकर अपना समय बर्बाद नही करना चाहता था.., सो गाड़ी को रोड साइड में खड़ा किया और गाड़ी लॉक की, उचक कर बाउंड्री पर अपने हाथ जमाए और अपने शारीर को उपर उठाता चला गया…,

इस प्रयास में एक-दो काँच का नुकीला टुकड़ा मेरे हाथों में भी चुभ गया.., लेकिन किसे परवाह थी इस सबकी, बाउंड्री के दूसरी तरफ छलान्ग लगाई और पलक झपकते ही में उस जगह पर था…!

देखा तो सामने 6 लड़के अमित और रूचि से उलझे हुए थे.. 3-3 दोनो को काबू में करने की कोशिश में लगे हुए थे.., कहना ग़लत नही होगा कि वो उसे काबू में कर चुके थे..!

अमित पहले ही पस्त हो गया था.., अब उसके उपर बस एक लड़का बैठा उसे बस दबोचे रखने की कोशिश में था.., अमित के कपड़े जहाँ तहाँ से फट चुके थे.., होठों और सिर से खून रिस रहा था…, फिर भी वो चिल्लाए जा रहा था उनपर…!

उधर वाकी के लड़कों ने रूचि के कपड़े उसके शरीर से निकालने की कोशिश शुरू कर दी थी.., उसकी सलवार उसके पैरों में पड़ी थी.., कुर्ता भी काई जगह से फट चुका था और उसके नाज़ुक अंग उसमें से झाँक रहे थे..,

होठ खून से लाल हो रहे थे.., लेकिन उस शेरनी की बच्ची ने अभी तक हार नही मानी थी.., वो लगातार उन्हें गालियाँ देती हुई अपने हाथ पैर चला रही थी..,!

वो पाँचों लड़के उस पर झुके हुए थे और उसे काबू में करने का भरसक प्रयास कर रहे थे.., ये कहना बिल्कुल ग़लत नही होगा कि अगर उसकी जगह कोई और लड़की होती तो अबतक उसकी इज़्ज़त तार-तार हो चुकी होती…!

 
मेने बिना कुच्छ बोले ही उनमें से दो लड़कों के पीछे से गले पकड़े, सिर उपर किए और भड़ाक से दोनो के सिर आपस में टकरा दिए..,

वो दर्द से बिलबिलाए लेकिन मेने उन्हें उठाकर एक साथ दूर फेंक दिया…, तबतक वाकी के तीनो को भी मेरे आने का पता चल चुका था और वो रूचि को छोड़कर मेरी तरफ लपके…,

मेने आगे बढ़कर एक लड़के को उठा लिया और वाकी उन दोनो के उपर उछाल दिया.., वो तीनों आपस में उलझ कर रह गये.., तबतक वो पहले वाले दोनो लड़के अपने होश संभालते हुए मेरी तरफ लपके और पीछे से उन दोनो ने मुझे पकड़ लिया…!

उतने में वो तीनो भी उठ चुके थे.., लेकिन तबतक रूचि अपनी सलवार पहन चुकी थी.., और किसी घायल शेरनी की तरह विकी पर झपट पड़ी.., उनमें से एक बंदा मेरी तरफ बढ़ा..,

वो दो लड़के कसकर मेरे बाजुओं को पकड़े हुए थे, उन्हें पूरा भरोसा था कि वो मुझे काबू में कर चुके हैं.., मेने भी कोई ज़्यादा हील हुज्जत नही दिखाई उनसे अपने को छुड़ाने की…,

लेकिन जैसे ही वो लड़का सामने से मेरी हद में आया.., मेने फुर्ती से अपने आप को थोड़ा नीचे झुकाया और फिर उन्ही दोनो लड़कों का सहारा लेकर उपर उछला और भड़क से मेरे दोनो पैरों की ठोकर उस सामने वाले की छाती पर पड़ी…,

वार इतना ताक़तवर था कि वो दस फुट दूर उनका तीसरा साथी जो अभी उठने की कोशिश कर ही रहा था वो फिरसे उसके उपर जाकर गिरा…!

इन सबको पिटता देख अमित को भी जोश आगया और उसने पलटी देकर अपने उपर बैठे हुए उस छटे लड़के को अपने नीचे लिया और उसके मूह पर तबाद-तोड़ घूँसे बरसाने लगा…!

उधर रूचि ने साले रॉकी की रेल बना रखी थी.., उसने उसे अपने लात और घूँसों पर ले लिया.., अब उसके मूह से सिर्फ़ चीखें ही निकल रही थी…!

इधर मेने एक जोरदार झटका देकर उन दोनो लड़कों को अपने से अलग किया और उनपर पिल पड़ा.., अब सीन पूरी तरह से बदल चुका था..,

अब वो सारे लड़के सिर्फ़ अपने आप को हमारे करार प्रहारों से बचाने की कोशिश ही कर रहे थे.., लेकिन हम तीनों ही कुच्छ हद तक ट्रेंड फाइटर थे और वो सब नशे में…!

वहाँ कबाड़े के बीच अब उन सभी लड़कों की सिर्फ़ चीखें ही चीखें सुनाई दे रही थी जिन्हें सुनकर कुच्छ स्टूडेंट्स वहाँ आगये और खड़े होकर रॉकी और उसके आवारा दोस्तों की धुनाई देखने लगे…!

हम तीनों ने मिलकर उन 6 के 6 लड़कों की हालत इतनी खराब करदी कि अब उनमें से किसी किसी की शकल भी पहचान में नही आ रही थी.., कपड़े तार-तार होकर शरीर पर झूल रहे थे…!

अंत में अब उन सभी के अंदर अपने पैरों पर खड़े रहने की भी हिम्मत नही बची थी…!

मेने पीटना बंद करके एसएसपी कृष्ण कांत को फोन लगाया और अतिशीघ्र संबंधित थाने की पोलीस को मौके पर पहुँचने के लिए कहा..,

उन्होने माजरे को जानने के लिए पुछा तो मेने कहा – अभी समय नही है बाद में बताता हूँ…!

इतने में किसी ने प्रिन्सिपल को भी खबर करदी और वो अपने स्टाफ के साथ आ धमका, जैसे ही उसने रॉकी को वहाँ इस हालत में देखा तो वो उल्टा हमारे उपर ही सवाल करने लगा…!

मेने उससे कहा – ये जगह आपके सवालों के जबाब देने के लिए उचित नही है.., ऐसा ना हो कि जो करतूत इन लड़कों ने की है उसे सारा कॉलेज और स्कूल सुने और आपकी संस्था का नाम खराब हो…!

 
मेरी बात उसकी समझ में आगयि और मे अमित को वहीं छोड़कर रूचि के साथ प्रिन्सिपल के ऑफीस की तरफ चल दिए…!!!

अभी हम फ्रंट ग्राउंड से होते हुए उसके ऑफीस की तरफ जा ही रहे थे कि वहाँ एक पोलीस जीप दल-बल के साथ आ पहुँची…!

इनस्पेक्टर मुझे पहचानता था.., सो मेरे पास आकर बोला – क्या हुआ वकील साब..?

मे – वहाँ पीछे कुच्छ गुंडे पड़े हैं उन्हें डालकर थाने ले चलो मे 10 मिनिट में वहाँ पहुँचता हूँ..,

मेरी बात सुनकर प्रिन्सिपल हड़बड़ा गया और हकलाते हुए बोला – य.ये..यी आप क्या कह रहे हैं..? वो लड़के तो हमारे कॉलेज के स्टूडेंट्स हैं…, उन्हें आप गुंडे कैसे कह सकते हैं..? और ये पोलीस आपने हमारे बिना पुच्छे कैसे बुला ली…?

मेने इनस्पेक्टर को इशारा किया – आप अपना काम कीजिए इनस्पेक्टर.., और आप मेरे साथ चलिए.., आपके ऑफीस में चलकर सारी बात समझाता हूँ आपको….!

पोलीस ने सारे लड़कों को उठा उठाकर जीप में डाला.., अमित ने वहाँ से ड्रग्स भी बरामद करा दिए.., और वो पोलीस के साथ ही थाने चला गया…!

प्रिन्सिपल के ऑफीस में पहुँचते ही मेने रूचि से कहा – रूचि बेटा प्रिन्सिपल साब को सारी बात बताओ.., मेरी बात सुनकर उसने शुरू से एंड तक सारी बातें बता दी जो मुझे भी पता नही थी…!

अब कहिए प्रिन्सिपल साब…, वो लड़के गुंडे मवाली से कम हैं या ज़्यादा हैं.., एक तो ड्रग्स का धंधा आपके कॉलेज में चल रहा है उपर से उन्होने एक इनोसेंट लड़की के साथ रेप अटेंप्ट करने की कोशिश भी की है..,

प्रिन्सिपल मेरी बात सुनकर गिड-गिडाते हुए बोला – वकील साब प्लीज़ मेरी मजबूरी समझिए…, मे जानता हूँ वो रॉकी एक नंबर का छटा हुआ बदमाश है…, लेकिन साथ ही वो इस कॉलेज के चेयरमैन का लड़का है…,

हम चाह कर भी उसका कुच्छ नही बिगाड़ सकते.., अगर चेयरमैन को पता चल गया कि उसके लड़के को पोलीस कॉलेज के अंदर से उठा ले गयी है तो वो मुझे कॉलेज से निकाल देगा…!

मे – तो लगाइए उसे फोन और यहाँ बुलाइये.., और उसी को क्यों.., पूरे बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स को बुलाइये.., यकीन मानिए वो आपको छू भी नही पाएगा…!

प्रिन्सिपल – ये आप इतने यकीन के साथ कैसे कह सकते हैं…?

मे आपके चेयरमैन विक्रम राठी को अच्छी तरह से जानता हूँ, वो खुद नही चाहेंगे कि एक लड़के की वजह से पूरा कॉलेज बदनाम हो…!

एक काम करिए.., आप सभी डाइरेक्टर्स की मीटिंग बुलाइये.., तब तक मे थाने जाकर आता हूँ.., अगर आपके साथ कुच्छ भी ग़लत हुआ तो इस कॉलेज में ताला लगवाने की ज़िम्मेदारी मेरी रही.., यही नही.. आप अपनी नौकरी की चिंता तो बिल्कुल ही छोड़ दीजिए…!

प्रिंसीपल – आप सच कह रहे हैं ना..,

मे – 100% सच.., इतना कहकर मेने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा और बोला – आप गुरु हैं.., बच्चों को अच्छा भविश्य देना आपकी ज़िम्मेदारी है.., उनको सच्चाई का पाठ पढ़ाते हैं.., तो फिर बिना सोच विचार के सच का साथ दीजिए आपको कुच्छ नही होगा..,

इतना कहकर मे अपनी चेयर से उठते हुए रूचि से बोला – चल बेटा.., और मे रूचि को अपने साथ लेकर प्रिन्सिपल के ऑफीस से निकल लिया…….!!!!

 
रूचि को घर के आगे ड्रॉप करके मे थाने पहुँचा, इनस्पेक्टर पूरण सिंग मेरा ही इंतेजार कर रहा था.., अभी तक उसने एफआइआर दर्ज नही की थी..,

मेने रूचि को इस मामले में मात्र एक आइ बीटनेस्स के तौर पर ही दर्शाया और उन 6 लड़कों पर सिर्फ़ ड्रग्स रखने और इस्तेमाल का केस दर्ज करवा दिया..,

इतने में प्रिन्सिपल का फोन आ गया और मे वहाँ से सीधा कॉलेज पहुँचा जहाँ कॉलेज के सभी ट्रस्टी मौजूद थे…,

विकी का बाप राठी आग बाबूला हो रहा था, बार बार प्रिन्सिपल को कॉलेज से निकालने की धमकी दे रहा था..,

उसके जबाब में प्रिन्सिपल उसके सामने गिडगिडाते हुए कह रहा था – इसमें मेरा कोई दोष नही है सर.., वो तो रंगे हाथों उस वकील की भतीजी जो कि हमारे ही स्कूल में पढ़ती है उसने उन लड़कों को नशा लेते हुए देख लिया…!

यही नही आपके बेटे समेत उन सभी लड़कों ने उसके साथ ज़बरदस्ती की, उसके कपड़े फाडे.., अगर उसने रेपअटेंप्ट करने का केस और डाल दिया तो फिर उनका जैल से छुड़ाना भी मुश्किल हो जाएगा…!

तभी मेने उस हॉल में प्रवेश किया जिसमें ये मीटिंग चल रही थी…

मुझे देखते ही राठी ने मेरा गिरेबान पकड़ कर झकझोरते हुए कहा – ये तूने अच्छा नही किया वकील…, मेरे बेटे को अरेस्ट करवाकर तूने अच्छा नही किया…!

अब देख मे क्या करता हूँ.., अपने बेटे को तो मे यौं चुटकी बजाते ही छुड़वा लूँगा.., और इस हरामजादे प्रिन्सिपल की तो मे जिंदगी बर्बाद करके रख दूँगा…,

मेने उसके हाथ पकड़कर अपने गिरेवान से अलग किए और बड़े शांत लहजे में कहा – मुझे बड़ा अफ़सोस हुआ राठी साब कि आप अब भी अपने बेटे का ही बचाव कर रहे हैं..,

जबकि होना तो ये चाहिए था कि कॉलेज की रेप्युटेशन बचाने के लिए आपको प्रिन्सिपल साब को इनाम देना चाहिए था…, वैसे आप इनको किस बिना पर कॉलेज से निकाल सकते हैं…? क्या जुर्म है इनका..?

राठी भड़कते हुए बोला – मे इस कॉलेज का चेयरमैन हूँ, सबसे ज़्यादा चंदा देता हूँ.., मे चाहूं तो एक मिनिट में इस कॉलेज और स्कूल को ताला लगवा सकता हूँ…!

मेने उन तमाम ट्रस्टीस की तरफ देखते हुए कहा – क्या आप सब लोगों का भी यही कहना है…?

पहले तो वो सबने मेरी तरफ देखा और फिर आपस में एक दूसरे को देखने लगे.., फिर उनमें से एक सज्जन बोले – हम तो चाहेंगे कि ये कॉलेज शांति से चलता रहे.., शहर में ही नही बल्कि प्रदेश में भी हमारे कॉलेज की अच्छी रेप्युटेशन है…!

मे- और वो रेप्युटेशन किसकी वजह से है..?

वो – ओबियज़ली प्रिन्सिपल साब के अच्छे प्रशासनिक कार्यों की वजह से ही है...

मे- तो क्या आप लोग चाहेंगे कि इतने अच्छे प्रिन्सिपल इस कॉलेज से चले जायें..?

दूसरा सदस्य – चाहता तो कोई नही है, लेकिन हम राठी साब के खिलाफ भी नही जा सकते, आख़िर उनका हम सब में सबसे ज़्यादा योगदान है इस कॉलेज को चलाने में…!

मे – कितना योगदान है…?

राठी – ओये वकील.., अपनी औकात में रहकर बात कर.., 5 करोड़ रुपये दिए हैं मेने इस कॉलेज को…!

मेने फ़ौरन एक चेक अपने बॅग से निकाला.., 5 करोड़ की रकम भरी और साइन करके राठी के हाथ में थमाते हुए कहा – ये रही आपके चंदे की रकम.., चाहो तो बॅंक को फोन करके पुच्छ लो कि इतनी रकम इस अकाउंट में है या नही और आज से आप इस कॉलेज के ट्रस्टी नही है.., यू कॅन गो नाउ….!

 
सब कुच्छ इतना जल्दी से हुआ कि सभी ट्रस्टी अवाक रह गये.., फिर उनमें से एक सज्जन बोले – अच्छा हुआ वकील साब आपने राठी को उसकी औकात दिखा दी वरना ये और इसका लड़का इस कॉलेज को बंद करवा कर ही छोड़ते…!

हमें प्रिन्सिपल की शिकायतें तो काफ़ी दिनो से मिल रही थी.., लेकिन कुच्छ कर नही पा रहे थे.., अब जाओ राठी यहाँ से अपनी मनहूस शकल लेकर अब क्यों खड़े हो.., आज से हमारे कॉलेज को नया चेयरमैन मिल गया है…!

वकील साब आप हमारे कॉलेज के नये चेयरमैन की कुर्सी सम्भालो….!

राठी अपने पैर पटकता हुआ और गीदड़ भवकी देता हुआ वहाँ से निकल गया.., उसके बाद मेने सब लोगों से कहा – मे आपकाचेयरमैन नही हूँ..,

ये रकम मेरी तरफ से नही है.., ये मेरे क्लाइंट मिस्टर. राम नारायण गुप्ता की तरफ से है.. और आज से वो ही इस कुर्सी के अधिकारी हैं…!

मेरे इस खुलासे से वो सभी भोंचक्के से रह गये.., उन्हें ये विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि गुप्ता जी जैसे बड़े बिज़्नेस के अकाउंट का चेक मेने कैसे साइन कर दिया….!!!

जो भी हो, कॉलेज के वाकी मेंबर राठी से छुटकारा पाने से बड़े खुश थे.., कोई भी नही चाहता था किसी एक आदमी की वजह से कॉलेज की रेप्युटेशन खराब हो..,

प्रिन्सिपल को नया चेर्मन मिल गया था और अब वो खुलकर अपने हिसाब से कॉलेज को संभाल सकते थे…!

मेने गुप्ता जी को ये खबर फोन पर देना ठीक नही समझा.., क्या पता वो इस समय कहाँ और किस मूड में हों, इसलिए शाम को खुद चलकर ये खबर देना ठीक समझा….,

शाम को काम ज़्यादा इकट्ठा हो गया था सो निकलते-निकलते रात के 9:45 बज गये जब में गुप्ता जी के यहाँ पहुँचा…!

सौभाग्य से गुप्तजी आज जल्दी घर आगये थे.., और इस समय अपनी बेटी खुशी और सेठानी के साथ बैठकर डिन्नर कर रहे थे.., उनका बेटा और बहू शायद कहीं बाहर गये हुए थे…!

मुझे आया देख गुप्ता जी बोले – आओ अंकुश बहुत सही समय पर आए हो भाई, आओ बैठो खाना खाओ..,

मे – नही सर आप खाइए.., मे तो घर जाकर ही खाउन्गा.., घर पर मेरा इंतेजार हो रहा होगा.., यहाँ मे एक ज़रूरी काम से आया था…,

गुप्ता जी – अरे तो घर पर फोन करके मना करदो, वो खाने पर आपका वेट नही करेंगे.., अब जब खाने का समय

भी है और हम सब लोग खा भी रहे हैं तो ऐसे में आपका यौंही बैठना हमें कुच्छ ठीक नही लग रहा भाई…!

खुशी – हां वकील भैया, अब आप हमारे साथ खाना खाकर ही जाएँगे बस..

जब वो सभी लोग फोर्स करने लगे तो फिर मुझे भी खाने पर बैठना ही पड़ा.., खाने के दौरान ही मेने गुप्ता जी को आज कॉलेज में हुई सारी घटना कह सुनाई…!

गुप्ता जी कुच्छ देर बाद बोले – चलो ये तो आपने सही किया कि कॉलेज को उस राठी जैसे हरामखोर के चंगुल से आज़ाद करा लिया लेकिन अब उसकी चेर्मनशिप की ज़िम्मेदारी भी तुम ही संभालना भैया.., मेरे पास इन सब के लिए समय नही है…!

मे – तो घर के किसी और सद्स्य को बना दीजिए…!

सेठानी – इसका मतलब तुम अपने आप को हमारे घर के सद्स्य नही मानते हो ? भाई हम तो तुम्हें अपने घर का ही हिस्सा मानते हैं.., अब तुम ना मानो तो अलग बात है.

मे सेठानी की बात सुनकर निरुत्तर हो गया फिर भी कुच्छ तो बोलना ही था – ऐसी बात नही है आंटी जी.., मे भी अपने आप को आप लोगों से अलग नही मानता इसी अधिकार से तो मेने बिना पुच्छे वो चेक काट कर दे दिया था…!

गुप्ता जी – तो फिर सम्भालो ये ज़िम्मेदारी भी तुम्ही संभाल लो…!

मेने हार मानते हुए कहा – जैसा आपका आदेश…!

 
तबतक गुप्ता जी का खाना ख़तम हो चुका था सो वो उठते हुए बोले – भाई मेरा तो खाना हो गया.., शांति तुम अच्छे से अंकुश को खाना खिलाओ.., मे तो चला सोने…!

इतना कहकर गुप्ता जी अपने कमरे की तरफ चल दिए और खुशी और शांति देवी मेरा खाने में साथ देती रही और साथ साथ हम तीनों में हसी मज़ाक भी चलता रहा..,

खाने के बाद सेठानी बोली – खुशी बेटा तुम भैया को अपने कमरे में ले चलो.., मे फ्रीज़ से आइस-क्रीम लेकर वहीं आती हूँ, आराम से बैठकर आइस-क्रीम खाते हुए बातें करेंगे…..!

और हां…, अपने घर फोन करके बोल दो वो तुम्हारा इंतेजार ना करें…,

मे समझ गया कि आज की आइस-क्रीम की दावत कैसी होने वाली है.., सो हँसते हुए मेने खुशी के कंधे पर हाथ रखा.., और हम दोनो उसके कमरे की तरफ चल दिए…!

कमरे में घुसते ही खुशी मुझसे बेतहासा लिपट गयी.., अपनी चूत को मेरे अधजगे लौडे के उपर दबाते हुए अपने पंजों पर उचक कर उसने मेरे होठों पर किस किया.., मेने भी उसकी मोटी मुलायम गान्ड को अपनी मुट्ठी में भरकर ज़ोर्से मसल्ते हुए अपनी तरफ खींचा…!

आअहह…भैया…आराम से ये तुम्हारी बेहन की गान्ड है.., किसी मुजरिम की गर्दन नही…, और अपने इस सिपाही से कहो थोड़ा अकड़ कम करे वरना कपड़ों के साथ ही अंदर ना घुस जाए…!

इस समय खुशी एक टाइट फिट स्लेक्स की लेंगिग और एक लूस स्लेवलेस्स टॉप जो उसकी नाभि से भी काफ़ी उपर तक था.., और उसकी बड़ी बड़ी चुचियों पर हॅंगिंग हो रहा था पहने थी..,

मेने उसकी गान्ड के दोनो शिखरों पर अपने हाथ जमाए और उन्हें दबाते हुए उसके होंठो को चूसने लगा.., खुशी की चूत जो उसके चिपके हुए लेंगिग में उभर आई थी उसके ठीक उपर मेरा लंड उसकी फांकों को दबाए हुए था…!

खुशी मूह से गुउन्न..ग्गुउन्न.. की आवाज़ें निकालती हुई अपनी चूत को मेरे लंड के उभार पर रगड़ने लगी…, कुच्छ देर होंठ चुसाई करते हुए मेने उसके टॉप को निकाल फेंका, अब उसके पिंक ब्रा में क़ैद 34” के एकदम तने हुए दूधिया दो पके हुए अनार मेरी मुत्ठियों में समाए हुए थे जिन्हें मे बड़ी बेदर्दी से मसालने लगा…!!

वो भी उतनी ही बेदर्दी से मेरे होठों को चूस्ते हुए अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थी.., हम दोनो पर वासना इस कदर हाबी होने लगी कि कान तक लाल पड़ गये.., आँखों में मानो खून उतर आया हो…!

मेने अपने हाथों को खुशी की जांघों के नीचे लगाया और उसे अपनी गोद में उठा लिया.., उठाए हुए लाकर उसके पलंग पर पटक दिया…, वो दो-तीन बार 6” मोटे डनलॉप पर उपर नीचे हुई, फिर बैठकर मेरे पॅंट की जीप खींच कर उसे नीचे खींच दिया…!

अंडरवेर में मेरा 8.5” लंबा और करीब 3” मोटा कोबरा अपना फन फैलाने की कोशिश कर रहा था लेकिन उस बेचारे को बाहर आने का रास्ता नही मिल पा रहा था..,

उसकी हालत पर तरस खाकर खुशी ने उसे रास्ता दिखा दिया.., मेरे अंडरवेर को भी नीचे खींच कर उसने उसे अपनी मुट्ठी में लेकर देखने लगी…!

ओ माइ गॉड ! भैया…, ये तो और ज़्यादा बड़ा लग रहा है पहले से उउम्म्मन्णन…ये कहकर पहले उसने उसको किस किया फिर उसके खाल को नीचे करके उसके गरम दहक्ते लाल सेब जैसे सुपाडे पर अपनी जीभ फिराने लगी…!

अभी वो उसे अपने मूह में लेकर चूसना चाहती थी कि तभी सेठानी की आवाज़ ने उसे रोक दिया…, रुक जा खुशी.., आइस-क्रीम नही खानी क्या…?

खुशी – नही मम्मी बाद में पहले मुझे इसकी मलाई टेस्ट करने दो..,

सेठानी – अरे पगली तो मे कब उसे चूसने को माना कर रही हूँ…, ले पहले इसके उपर खूब सारी चॉकलेट आइस-क्रीम लगा ले फिर चूसना.., देखना क्या मस्त टेस्ट बनता है…!

ओह वाउ ! क्या आइडिया निकाला है.., यू आर सो जीनियस मामा…, लाओ जल्दी लाओ..,

 
सेठानी ने आइस-क्रीम पॅक खुशी के हाथ में थमाते हुए अपना एक मात्रा गाउन भी निकाल दिया और डिब्बे से थोड़ी सी आइस-क्रीम अपनी चुचियों पर लेपने लगी..,

उधर जैसे ही खुशी ने ठंडी-ठंडी आइस-क्रीम मेरे गरम गरम लौडे की उपर चुपड़ी.., एक ठंडी सी लहर मेरी गान्ड के छेद तक फैल गयी जिस’से मेरी गान्ड का छेद सिकुड़ने लगा.., लेकिन उसकी ठंडक पाकर मेरे लंड की स्किन और ज़्यादा सख़्त होने लगी…!

खुशी आइस-क्रीम चुपड-चुपड कर मेरे लौडे को पूरी तन्मयता से चूसे जा रही थी.., इधर आइस-क्रीम की ठंडक से सेठानी के बड़े बड़े चुचक कड़क होकर मोटी जामुन जैसे हो गये,

उनके उपर लगी आइस-क्रीम को मेने अपनी जीभ से चाट’ते हुए उनकी बड़ी बड़ी पपीते जैसी चुचियों पर लगी आइस-क्रीम भी चाटने लगा…,

हम तीनों को ही बहुत मज़ा आ रहा था.., जब ठंडी-ठंडी आइस-क्रीम सेठानी अपनी चुचियों पर लगाती तो उनके मूह से ससिईइ…आअहह…उउउहह…जैसे शब्द निकल पड़ते…!

इस तरह मेने और खुशी ने मिलकर 1/4 डिब्बा खाली कर दिया.., फिर मेने खुशी की ब्रा को भी खींच निकाला..,

अब सीन चेंज हो गया था.., सेठानी मेरे लंड से आइस-क्रीम चाटने लगी और मे खुशी के बड़े-बड़े अनारों से…!

ठंडी आइस-क्रीम ने उसके निप्प्लो को कंचे के माफिक कड़क कर दिया था.., वो अब आइस-क्रीम की ठंडक और मेरी जीभ के चाटने से लंबी लंबी साँस लेते हुए सिसकियाँ भरने लगी थी..,

अब मेने खुशी को नीचे से भी नंगा कर दिया और उसकी चूत पर आइस-क्रीम लगाकर अपनी जीभ लगाकर चाटने लगा..,

खुशी की चूत इतनी देर में वैसे ही गीली होने लगी थी.., उसका कामरस आइस-क्रीम के साथ मिक्स होकर मुझे अलग ही स्वाद दे रहा था…!

खुशी को भी आइस-क्रीम लगी अपनी चूत चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा था.., उसकी गरम गरम सिसकियाँ कमरे के माहौल को भी गरम करने लगी थी..,

एक समय ऐसा आया कि वो अपने आपको संभाल ना सकी और मेरे मूह में ही झड गयी.., आइस-क्रीम मिक्स उसका सारा रस मेरे उदर में उतर गया…!!!

इधर सेठानी ने चूस-चुस्कर मेरे लंड का बुरा हाल कर दिया था.., मेने उन्हें रोक कर पलंग पर घोड़ी बनाया.., थोड़ी सी आइस-क्रीम उनकी चूत और गान्ड पर मलि.., फिर दोनो को अच्छे से चाट-चाट कर साफ किया..,

इस वजह से सेठानी भी बहुत गरम हो गयी और मेरा लंड अपनी चूत में डलवाने के लिए उतावली होने लगी…!

मेने भी देर नही की और अपना मूसल पीछे से उनकी गरम चूत में पेल दिया…, अपनी माँ को मेरे मूसल से चुदते देख खुशी फिरसे गरम होने लगी.., और अपनी चिकनी चमेली को अपने हाथ से सहलाते हुए मेरी तरफ देखने लगी…!

मेने उसको भी सेठानी के उपर उनकी पीठ पर उल्टा लिटा दिया.., और सेठानी की चूत से अपना मूसल निकल कर खुशी की चूत में डाल दिया…!

खुशी एक बार में मेरा एक तिहाई लंड ही ले पाई थी की बुरी तरह से कराह उठी… आअहह…भैया..धीरे…, हाई राम कितना मोटा हो गया है ये तो…!

धीरे-धीरे करके जब वो पूरा लंड लेने लगी तो मे बारी-बारी से दोनो माँ बेटी की चुतो में लंड पेल पेल कर उन दोनो को एक साथ चोदने लगा…!

सेठानी एक बार झड़कर साइड में लुढ़क गयी और लंबी लंबी साँस लेने लगी.., लेकिन खुशी नयी लौंडिया थी.., इतनी जल्दी हार मानने वाली नही थी..,

फिर भी मेरे मूसल की मार वो ज़्यादा देर तक नही झेल सकी और 5 मिनिट बाद ही उसने भी हथियार डाल दिए…

इधर मेरा भी अब होने ही वाला था सो अपना मूसल खुशी की चूत से निकाल कर उसके मूह में डालकर उसके मूह को चोदते हुए उसके मूह में ही झड़ने लगा…!

मेरी पूरी मलाई ओवरफ्लो होकर उसके मूह से निकल कर उसकी चुचियों पर टपकने लगी जिसे उसने अपने एक हाथ से दोनो अनारों पर मल दिया..,

सेठानी भी इस मज़े से भला कैसे दूर रह पाती सो अपनी लंबी सी ज़ुबान निकाल कर बिल्ली की तरह उसकी चुचियो से मेरी मलाई को चाटने लगी…!

दोनो माँ बेटी को एक बार अच्छे से चोद-चोदकर मे अपने घर को निकल लिया और करीब दो बजे जाकर एक बार अपनी प्यारी पतिव्रता पत्नी निशा को भी संतुष्ट करना पड़ा…,

आख़िर बेचारी ने इतनी रात को मेरे लिए अपनी नींद खराब करके गेट खोला था तो इतना इनाम तो उसे भी मिलना ही चाहिए था.., अब हम दोनो ही संतुष्ट हो गये थे सो नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर सो गये……..!!!

 
दूसरे दिन पोलीस ने उन लड़कों की पेशी कोर्ट में कराई जहाँ राठी ने पैसों के दम पर संबंधित जज से उन लड़कों की जमानत करा ली….!

दिन गुज़रते रहे, मेरे और रूचि के बीच हल्की-फुल्की चुहलबाज़ी होती रहती थी.., टीज़िंग चलती रहती थी लेकिन ना तो वो अपनी सीमा को पार कर पा रही थी..,

मेरी तरफ से तो खैर ऐसा कोई चान्स ही नही था कि मे अपनी बेटी समान भतीजी के बारे में कुच्छ ऐसा वैसा सोचता.., एक बार सोचता भी तो भी अपनी तरफ से पहल नही कर सकता था…!

दिनभर अपने काम में व्यस्त रहता.., रात को कभी कभी दो-दो घोड़ियों की सवारी करने को मिल जाती थी.., और सुबह फिरसे वोही रूटीन वर्क.., लाइफ बड़े आराम और सुकून से कट रही थी…,

लेकिन अंदर ही अंदर कुच्छ तो चल रहा था जो हमें बाहर से नही दिख रहा था.., क्या पता था कि कोई भयंकर किस्म का तूफान हमारी जिंदगी में आने वाला है जो सब कुच्छ हिलाकर रख देगा…….!!!

एक दिन देर शाम को मे अपने ऑफीस से लौट रहा था कि तभी छोटी चाची का फोन आया.., वो बड़ी हड़बड़ाई हुई सी लग रही थी..,

मेरे हेलो बोलते ही वो बोली – लल्ला तुम फ़ौरन यहाँ आजाओ.., संजू का कल से कोई पता नही चल रहा, ना जाने कहाँ चला गया है वो.., किसी को कुच्छ बता कर भी नही गया है…!

मे – आप चिंता मत करो.., इधर उधर कहीं मटरगस्ति करते हुए निकल गया होगा.., आ जाएगा…!

चाची – नही लल्ला.., दो दिन हो गये.., कहीं जाता तो बता तो देता.., यहाँ किसी को कुच्छ बोलकर भी नही गया.., मेरा तो दिल घबरा रहा है.., कहीं किसी ने उसके साथ कुछ…,

मेने चाची का वाक्य पूरा होने से पहले ही कहा – नही..नही..आप ऐसा कुच्छ मत सोचो.., अच्छा मे कल सुबह गाँव पहुँचता हूँ.., आप बेफिकर रहो…!

बात सोचने वाली तो थी.., मेने चाची को तो बोल दिया फिकर ना करने को लेकिन फिकर करने वाली बात तो थी.., आख़िर दो दिन से वो कहाँ गायब हो गया पट्ठा…

कहीं बाहर जाना था तो बताकर जाता.., वैसे उसे यहाँ जानने वाला कोई भी तो नही था तो फिर आख़िर गया तो कहाँ..?

मेने घर जाकर सारी बात बताई.., सभी ने यही कहा कि आजाएगा.., बिना नाथ-पघे का बाल है…, लेकिन मेरा मन इन सब दिलासाओं से नही माना और में सुबह पौ फटते ही गाँव की तरफ निकल लिया….!

सूरज अभी ठीक से निकला ही था कि मे गाँव पहुँच गया…, आस-पास में खूब पुच्छ ताच्छ की लेकिन कोई सुराग नही मिला…!

फिर हमने सोचा कि शायद हो सकता है उसे अपने गाँव की याद आगयि हो और वो गाँव में लोगों से मिलने चला गया हो.., एक हफ़्ता उसके लौटने का इंतेज़ार किया लेकिन वो नही आया तो मे उसके गाँव महाराष्ट्र भी देखने गया लेकिन वहाँ भी उसका कोई सुराग नही मिला…!

हमने पोलीस में कंप्लेंट लिखवा दी.., पूर्व सरपंच रामसिंघ और उसके बेटे पर शक़ गया.. लेकिन वो अपने बच्चों की कसम खाकर बोला –

तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो बेटा.., थोड़े बहुत आपस के झगड़े हर जगह होते हैं.., इसका मतलब ये तो नही कि ऐसे झगड़े किसी के कत्ल का कारण बन जायें..!

यहाँ तक कि वो खुद भी हमारे साथ इधर-उधर जाकर संजू की तलाश करवाता रहा.., हफ्ते दस दिन तक हमने उसे खूब तलाश किया लेकिन हमें एक भी ऐसा आदमी नही मिला जो ये कह सके कि उसने संजू को फलाँ समय पर फलाँ जगह पर देखा था…!

तक कर हमने उसकी तलाश ये सोचकर बंद करदी कि अब भगवान ने चाहा तो वो हमारे पास वापस आ जाएगा वरना तो वो बिना बताए ही हमे छोड़कर कहीं चला गया है और शायद अब कभी ना लौटे….!!!

संजू को गायब हुए दो महीने बीत चुके थे, इश्स बीच हमने उसे तलाश करने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नही लौटा तो फिर हमने भी उसका इंतेज़ार करना बंद कर दिया…!

 
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