S
StoryPublisher
Guest
प्राची 4-5 महीने की प्रेग्नेंट थी और अब वो सिर्फ़ घर पर ही रहकर आराम करती रहती.., मे भी अपने काम में व्यस्त रहता था सो प्राइवेट डिटेक्टिव एजेन्सी का काम एक तरह से ठप्प ही पड़ गया था…!
बाप बनाने की खुशी कृष्णा भैया के चेहरे पर देखते ही बनती थी, और हो भी क्यों ना पहली बार बाप बनाने की खुशी क्या होती है ये सभी जानते हैं.., और फिर वो तो बेचारे इस मामले में काफ़ी पिछड गये थे..,
मे उनसे छोटा था फिर भी मेरा बेटा अब दो साल का हो गया था.., कामिनी भाभी अगर अच्छे से घर गृहस्ती संभाल लेती तो आज वो भी बहुत पहले ही ये सुख ले चुके होते…!
खैर जब जब जो जो होना है तब तब सो सो होता है…, इसी खुशी में पूरे परिवार ने मिलकर प्राची की गोद भराई की रस्म रखी, गाँव से भी तीनों चाचाओं के परिवार शामिल होने आगये…!
कृष्णा भैया और प्राची हमारे बंगले पर ही आगये साथ में प्राची की मम्मी मधुमिता आंटी और उनका बेटा भी जो अब जवान हो चुका था…!
सुबह से ही सारे रस्मो रिवाज चलते रहे.., शाम को अच्छी ख़ासी दावत हुई और फिर एक एक करके सब लोग जाने लगे सिवाय छोटी चाची के, वो एक दो दिन और अपने बेटे के पास रहना चाहती थी…!
मे सबकी मेहमान नवाज़ी और फिर सबको यथा संभव दान दक्षिणा देकर विदा करने में व्यस्त रहा.., इसी में लगभग 10 बज गये थे.
बंगले के बाहर लॉबी में जब पूरी तरह शांति हो गयी.., यहाँ तक की केटरिंग, टेंट वाले भी अपना समान समेटने लगे तब मे अंदर आया.., भाभी के कमरे में निशा और चाची तीनों आपस में बातें कर रही थी…!
उन्हें बातें करते छोड़ मे अपने कमरे की तरफ बढ़ गया, सुबह से टाइट कपड़ों में भाग दौड़ करते करते.., अब जल्दी से रिलॅक्स होना चाहता था…!
लेकिन उससे पहले मेने एक बार फर्स्ट फ्लोर पर जाकर चेक कर लेना ज़्यादा ज़रूरी समझा.., औरतें तो बातों में लगी हुई थी.., रूचि अभी इतनी मेच्यूर नही हुई.., तो कुच्छ इधर उधर समान पड़ा तो नही.
एक बार रूचि के कमरे में नज़र मारी.., वो मुझे लाइट जलती छोड़कर अपने सीने पर बुक रखे हुए ही सोती नज़र आई.., अंदर जाकर उसके सीने से बुक हटाकर टेबल पर रखी..,
सोती हुई हमारी गुड़िया रानी कितनी मासूम लग रही थी.., कों कह सकता था कि अब वो मेरे साथ कैसी कैसी मस्ती करने लगी है.., उसके माथे पर एक किस करके मेने उसके कमरे की लाइट बंद की…!
उसके कमरे के बाहर आते ही मेने इधर उधर नज़र मारी.., सब कुच्छ ठीक तक ही था.., तभी मेरी नज़र लास्ट में बने गेस्ट रूम की तरफ गयी.., उसकी विंडो से छन-छन कर आरहि रोशनी बता रही थी कि कोई है उसमें…!
चाची को मे नीचे छोड़कर आया हूँ.., और कोई शायद ही बच्चा हो तो फिर और कों हो सकता है, ये जान’ने के लिए मे उस गेस्ट रूम की तरफ बढ़ गया…!
बाप बनाने की खुशी कृष्णा भैया के चेहरे पर देखते ही बनती थी, और हो भी क्यों ना पहली बार बाप बनाने की खुशी क्या होती है ये सभी जानते हैं.., और फिर वो तो बेचारे इस मामले में काफ़ी पिछड गये थे..,
मे उनसे छोटा था फिर भी मेरा बेटा अब दो साल का हो गया था.., कामिनी भाभी अगर अच्छे से घर गृहस्ती संभाल लेती तो आज वो भी बहुत पहले ही ये सुख ले चुके होते…!
खैर जब जब जो जो होना है तब तब सो सो होता है…, इसी खुशी में पूरे परिवार ने मिलकर प्राची की गोद भराई की रस्म रखी, गाँव से भी तीनों चाचाओं के परिवार शामिल होने आगये…!
कृष्णा भैया और प्राची हमारे बंगले पर ही आगये साथ में प्राची की मम्मी मधुमिता आंटी और उनका बेटा भी जो अब जवान हो चुका था…!
सुबह से ही सारे रस्मो रिवाज चलते रहे.., शाम को अच्छी ख़ासी दावत हुई और फिर एक एक करके सब लोग जाने लगे सिवाय छोटी चाची के, वो एक दो दिन और अपने बेटे के पास रहना चाहती थी…!
मे सबकी मेहमान नवाज़ी और फिर सबको यथा संभव दान दक्षिणा देकर विदा करने में व्यस्त रहा.., इसी में लगभग 10 बज गये थे.
बंगले के बाहर लॉबी में जब पूरी तरह शांति हो गयी.., यहाँ तक की केटरिंग, टेंट वाले भी अपना समान समेटने लगे तब मे अंदर आया.., भाभी के कमरे में निशा और चाची तीनों आपस में बातें कर रही थी…!
उन्हें बातें करते छोड़ मे अपने कमरे की तरफ बढ़ गया, सुबह से टाइट कपड़ों में भाग दौड़ करते करते.., अब जल्दी से रिलॅक्स होना चाहता था…!
लेकिन उससे पहले मेने एक बार फर्स्ट फ्लोर पर जाकर चेक कर लेना ज़्यादा ज़रूरी समझा.., औरतें तो बातों में लगी हुई थी.., रूचि अभी इतनी मेच्यूर नही हुई.., तो कुच्छ इधर उधर समान पड़ा तो नही.
एक बार रूचि के कमरे में नज़र मारी.., वो मुझे लाइट जलती छोड़कर अपने सीने पर बुक रखे हुए ही सोती नज़र आई.., अंदर जाकर उसके सीने से बुक हटाकर टेबल पर रखी..,
सोती हुई हमारी गुड़िया रानी कितनी मासूम लग रही थी.., कों कह सकता था कि अब वो मेरे साथ कैसी कैसी मस्ती करने लगी है.., उसके माथे पर एक किस करके मेने उसके कमरे की लाइट बंद की…!
उसके कमरे के बाहर आते ही मेने इधर उधर नज़र मारी.., सब कुच्छ ठीक तक ही था.., तभी मेरी नज़र लास्ट में बने गेस्ट रूम की तरफ गयी.., उसकी विंडो से छन-छन कर आरहि रोशनी बता रही थी कि कोई है उसमें…!
चाची को मे नीचे छोड़कर आया हूँ.., और कोई शायद ही बच्चा हो तो फिर और कों हो सकता है, ये जान’ने के लिए मे उस गेस्ट रूम की तरफ बढ़ गया…!