S
StoryPublisher
Guest
खुशी ने झेंपकर मेरे लंड को चूम लिया, और फिर उसके सुपाडे को पूरा खोलकर उसे चाटने लगी…,
उसपर हल्की सी प्री-कम की चिपकी थी, तो वो उसका स्वाद लेकर बोली – आपका भी टेस्टी है, ये कहकर उसने उसे अपने मूह में गडप्प कर लिया……!
खुशी पूरे इंटेरेस्ट के साथ मेरा लंड चूस रही थी, वो एक दम स्टील रोड की तरह शख्त हो चुका था, जो अब किसी भी चूत की सील फाड़ने में सक्षम था,
मेने अपना हाथ खुशी के सर पर रख कर उसने रुकने का इशारा किया, वो लंड मूह लिए हुए ही मेरी तरफ देखने लगी…
मेने कहा – बस अब बहुत हो गया, इसका रस मूह से ही पीना है या फिर…अपनी बात अधूरी छोड़ कर मे हँसने लगा…
वो मेरी बात समझकर रुक गयी, तो मेने उसे अपने बगल में लिटा लिया और उसके होठों को चूमकर उसके पूरे बदन पर हाथ फिराया,… वो मचल उठी…
फिर मे उसकी जांघों के बीच आकर अपने घुटने टेक कर बैठ गया, उसकी मखमली जांघों को सहलाकर उन्हें चूमने, चाटने लगा…
अपने हाथ को अपने थूक से गीला करके उसकी चूत के आस- पास सहलाया…
खुशी के अंदर बहुत चुदास भरी हुई थी, मेरा हाथ लगते ही उसकी चूत फिरसे चुहुने लगी.., मेने एक बार उसके रस को जीभ से चाटा…खुशी की सिसकी निकल गयी…!
अब वो वक़्त आ गया था, जिसके इंतेज़ार में खुशी ना जाने कितने दिनो से आस लगाए हुए थी, सो अपने लौडे को हाथ में लेकेर उसकी मुनियाँ के होठों पर रखकर उपर नीचे फिराया…
गरम लंड के एहसास को अपनी चूत की बंद फांकों के उपर महसूस करके, खुशी ने एक झूर-झूरी सी ली…
फिर मेने उसके बंद होठों को फैलाकर अपने सुपाडे लायक जगह बनाई, और अपना टमाटर जैसा गरम सुपाडा उस जगह में फिट कर दिया….
एक बार फिर उसके मांसल बदन को सहला कर उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – रेडी बेबी…?
उसने बंद आँखों से हुउंम्म…करके अपनी रज़ामंदी दी, और मेने एक हल्का सा धक्का उसकी कोरी चूत में लगा दिया…!
खुशी ने अपने होठ कसकर बंद कर रखे थे, फिर भी उसके मूह से उउउन्नग्ज्ग…जैसी आवाज़ निकल ही गयी, और मेरा सुपाडा उसकी चूत की पतली सी झिल्ली से जा टकराया…
मेने खुशी के होठ चूमकर उसके कान में फुफुसा कर कहा – यही वो दीवार है खुशी जो अब धराशाहि होनी है, और इसके उस पर तुम्हारे लिए असीम आनंद का खजाना छुपा है…
इसलिए थोड़ा सा सहन करना मेरी गुड़िया, उसने बंद आखों से ही सर हिलाकर हामी भर दी…
मेने अपना लंड थोड़ा सा बाहर को किया, और दूसरे ही पल एक करारा सा धक्का उसकी चूत में मार दिया….
छ्हाअर्र्र्र्र्र…की आवाज़ के साथ ही खुशी की सील टूट गयी, और मेरा आधे से भी ज़्यादा लंड उसकी कोरी गदर चूत में पेवस्त हो गया….
खुशी दर्द के मारे तड़प उठी, लाख कोशिश के बाद भी उसकी चीख निकल गयी...
म्म्म्माआआआआअ……मर गाइिईईईईईई…., दर्द से उसकी आँखें छल-छला गयी.
मेने उसके बालों में सहलकर कहा – बस हो गया मेरी बेहन, ये कहकर मे उसके होठों को चूसने लगा…
एक हाथ से उसके अनारों को सहलाता रहा..., कुच्छ देर में उसका दर्द कम हो गया, मेने फिर एक फाइनल कोशिश की और अपने लंड को जड़ तक उसकी नयी चूत में डालकर कर ठहर गया…
खुशी दर्द से कराह रही थी, मेने फिर से उसके निपल्स को चाटने मसल्ने से उसके दर्द को कम करने की कोशिश की…
कुच्छ देर बाद वो शांत हुई, तो मेने धीरे-धीरे अपनी कोशिश शुरू कर दी…और हल्के हल्के धक्के लगाकर उसे चोदने लगा…!
थोड़े से धक्के तेज करते ही खुशी दर्द से दोहरी हो गयी, धनुष की तरह पीठ मोड़ कर उसने अपना सिर बिस्तर से टिका लिया…,
धक्कों के कारण उसका मूह खुल गया, वो बुरी तरह कराहने लगी…
लेकिन मेने अब अपनी स्पीड कम नही की, कुच्छ देर के बाद उसकी चूत रस छोड़ने लगी, अब उसे भी मज़ा आने लगा था,
वो अब दर्द को दरकिनार करके, मज़े से मेरा लंड लेने लगी, उसकी दर्द भरी कराहें सिसकियों में बदल चुकी थी…!
एक बार खुशी को उपर से चोदने के बाद, मेने उसे अपने उपर बिठा लिया…, अब वो मेरे लंड के उपर बैठकर अपने मनमाने तरीक़े से चुदने लगी….!
मे खुशी को एक घंटे तक चोदता रहा, इस बीच वो अनगिनत बार झड़ी, मे भी दो बार अपना वीर्य उसकी चूत में भर चुका था,
आख़िर में घोड़ी बनाकर उसकी मोटी-मोटी गान्ड को दबाकर चोदने में मुझे सबसे ज़्यादा मज़ा आया, और इसी पोज़िशन के बाद हमने अपनी चुदाई ख़तम की…
खुशी के चेहरे पर संपूर्ण तृप्ति के भाव थे, वो मेरे बदन से बहुत देर तक चिपकी रही…!
मेने उसकी गान्ड मसल कर पुछा – अब तो खुश हो तुम, करली अपने मन की…!
थॅंक यू भैया, आपने मेरी इक्च्छा पूरी कर दी, ये कहकर खुशी ने मेरे लंड को चूम लिया…
फ्रेश होकर खुशी किचन से नौकरानी की मदद से अपन दोनो के लिए खाना वहीं बेडरूम में ही ले आई,
मीठी-मीठी छेड़-छाड़ और हसी-ठिठोली के बीच हम दोनो ने साथ मिलकर खाना खाया, कुछ देर रुक कर मे उसे एक किस करके उसके रूम से बाहर आ गया…
उसपर हल्की सी प्री-कम की चिपकी थी, तो वो उसका स्वाद लेकर बोली – आपका भी टेस्टी है, ये कहकर उसने उसे अपने मूह में गडप्प कर लिया……!
खुशी पूरे इंटेरेस्ट के साथ मेरा लंड चूस रही थी, वो एक दम स्टील रोड की तरह शख्त हो चुका था, जो अब किसी भी चूत की सील फाड़ने में सक्षम था,
मेने अपना हाथ खुशी के सर पर रख कर उसने रुकने का इशारा किया, वो लंड मूह लिए हुए ही मेरी तरफ देखने लगी…
मेने कहा – बस अब बहुत हो गया, इसका रस मूह से ही पीना है या फिर…अपनी बात अधूरी छोड़ कर मे हँसने लगा…
वो मेरी बात समझकर रुक गयी, तो मेने उसे अपने बगल में लिटा लिया और उसके होठों को चूमकर उसके पूरे बदन पर हाथ फिराया,… वो मचल उठी…
फिर मे उसकी जांघों के बीच आकर अपने घुटने टेक कर बैठ गया, उसकी मखमली जांघों को सहलाकर उन्हें चूमने, चाटने लगा…
अपने हाथ को अपने थूक से गीला करके उसकी चूत के आस- पास सहलाया…
खुशी के अंदर बहुत चुदास भरी हुई थी, मेरा हाथ लगते ही उसकी चूत फिरसे चुहुने लगी.., मेने एक बार उसके रस को जीभ से चाटा…खुशी की सिसकी निकल गयी…!
अब वो वक़्त आ गया था, जिसके इंतेज़ार में खुशी ना जाने कितने दिनो से आस लगाए हुए थी, सो अपने लौडे को हाथ में लेकेर उसकी मुनियाँ के होठों पर रखकर उपर नीचे फिराया…
गरम लंड के एहसास को अपनी चूत की बंद फांकों के उपर महसूस करके, खुशी ने एक झूर-झूरी सी ली…
फिर मेने उसके बंद होठों को फैलाकर अपने सुपाडे लायक जगह बनाई, और अपना टमाटर जैसा गरम सुपाडा उस जगह में फिट कर दिया….
एक बार फिर उसके मांसल बदन को सहला कर उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – रेडी बेबी…?
उसने बंद आँखों से हुउंम्म…करके अपनी रज़ामंदी दी, और मेने एक हल्का सा धक्का उसकी कोरी चूत में लगा दिया…!
खुशी ने अपने होठ कसकर बंद कर रखे थे, फिर भी उसके मूह से उउउन्नग्ज्ग…जैसी आवाज़ निकल ही गयी, और मेरा सुपाडा उसकी चूत की पतली सी झिल्ली से जा टकराया…
मेने खुशी के होठ चूमकर उसके कान में फुफुसा कर कहा – यही वो दीवार है खुशी जो अब धराशाहि होनी है, और इसके उस पर तुम्हारे लिए असीम आनंद का खजाना छुपा है…
इसलिए थोड़ा सा सहन करना मेरी गुड़िया, उसने बंद आखों से ही सर हिलाकर हामी भर दी…
मेने अपना लंड थोड़ा सा बाहर को किया, और दूसरे ही पल एक करारा सा धक्का उसकी चूत में मार दिया….
छ्हाअर्र्र्र्र्र…की आवाज़ के साथ ही खुशी की सील टूट गयी, और मेरा आधे से भी ज़्यादा लंड उसकी कोरी गदर चूत में पेवस्त हो गया….
खुशी दर्द के मारे तड़प उठी, लाख कोशिश के बाद भी उसकी चीख निकल गयी...
म्म्म्माआआआआअ……मर गाइिईईईईईई…., दर्द से उसकी आँखें छल-छला गयी.
मेने उसके बालों में सहलकर कहा – बस हो गया मेरी बेहन, ये कहकर मे उसके होठों को चूसने लगा…
एक हाथ से उसके अनारों को सहलाता रहा..., कुच्छ देर में उसका दर्द कम हो गया, मेने फिर एक फाइनल कोशिश की और अपने लंड को जड़ तक उसकी नयी चूत में डालकर कर ठहर गया…
खुशी दर्द से कराह रही थी, मेने फिर से उसके निपल्स को चाटने मसल्ने से उसके दर्द को कम करने की कोशिश की…
कुच्छ देर बाद वो शांत हुई, तो मेने धीरे-धीरे अपनी कोशिश शुरू कर दी…और हल्के हल्के धक्के लगाकर उसे चोदने लगा…!
थोड़े से धक्के तेज करते ही खुशी दर्द से दोहरी हो गयी, धनुष की तरह पीठ मोड़ कर उसने अपना सिर बिस्तर से टिका लिया…,
धक्कों के कारण उसका मूह खुल गया, वो बुरी तरह कराहने लगी…
लेकिन मेने अब अपनी स्पीड कम नही की, कुच्छ देर के बाद उसकी चूत रस छोड़ने लगी, अब उसे भी मज़ा आने लगा था,
वो अब दर्द को दरकिनार करके, मज़े से मेरा लंड लेने लगी, उसकी दर्द भरी कराहें सिसकियों में बदल चुकी थी…!
एक बार खुशी को उपर से चोदने के बाद, मेने उसे अपने उपर बिठा लिया…, अब वो मेरे लंड के उपर बैठकर अपने मनमाने तरीक़े से चुदने लगी….!
मे खुशी को एक घंटे तक चोदता रहा, इस बीच वो अनगिनत बार झड़ी, मे भी दो बार अपना वीर्य उसकी चूत में भर चुका था,
आख़िर में घोड़ी बनाकर उसकी मोटी-मोटी गान्ड को दबाकर चोदने में मुझे सबसे ज़्यादा मज़ा आया, और इसी पोज़िशन के बाद हमने अपनी चुदाई ख़तम की…
खुशी के चेहरे पर संपूर्ण तृप्ति के भाव थे, वो मेरे बदन से बहुत देर तक चिपकी रही…!
मेने उसकी गान्ड मसल कर पुछा – अब तो खुश हो तुम, करली अपने मन की…!
थॅंक यू भैया, आपने मेरी इक्च्छा पूरी कर दी, ये कहकर खुशी ने मेरे लंड को चूम लिया…
फ्रेश होकर खुशी किचन से नौकरानी की मदद से अपन दोनो के लिए खाना वहीं बेडरूम में ही ले आई,
मीठी-मीठी छेड़-छाड़ और हसी-ठिठोली के बीच हम दोनो ने साथ मिलकर खाना खाया, कुछ देर रुक कर मे उसे एक किस करके उसके रूम से बाहर आ गया…