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Guest
चुचि पर हाथ लगते ही उसके मुँह से सिसकी नकल गयी…उसने अपना एक हाथ मेरी कमर में डाल कर, अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया…!
मेने हड़बड़ा कर अपना हाथ उसकी चुचि से हटाना चाहा…तो फ़ौरन उसने अपना एक हाथ मेरे हाथ के उपर रख दिया, और उसे ज़ोर्से दबा कर वो मेरे शरीर से चिपक गयी…
अपनी गर्दन उठाकर उसने मेरी आँखों में झाँका…हम दोनो की नज़रें जुड़ गयी…और कुछ देर तक टक-टॅकी लगाए एक दूसरे को देखते रहे…
उसकी कमर से लिपटे मेरे हाथ ने शरारत कर दी, और वो उसकी गोल-मटोल, बाहर को उभरी हुई गान्ड, जो इस स्थिति में और ज़्यादा उभर आई थी, उसपर फिसल कर पहुँच गया… और उसके गान्ड के उभर को ज़ोर्से भींच दिया…
औचह….मुम्मिईीईईईईईई…. उसके मुँह से एक मेते-2 दर्द भरी कराह निकल गयी… और इसी के साथ हम दोनो की तंद्रा भी भंग होगयि…!
वो झट से अलग हो गयी, और गर्दन झुकाए मेरे बराबर में फिरसे चलने लगी…
मेने उससे पुछा – मघना जी कहीं चोट तो नही आई आपको…?
वो – नही, थॅंक्स आपने मुझे गिरने से बचा लिया….!
मे – सॉरी ! वो आपको संभालने के चक्कर में थोड़ा ज़ोर से पकड़ लिया आपको..
वो गर्दन नीचे करके मंद-मंद मुस्करती हुई बोली – इट्स ओके, मे ठीक हूँ..
दो-तीन खेत पार करते ही हम बगीचे में पहुँच गये… मन्झ्ले चाचा ने उसको अच्छे से संभाला हुआ था, अब बीच – 2 में कुछ फूलों के पेड़ भी लगा दिए थे…
बगीचे की हरियाली देख कर वो बड़ी खुश हुई…, इधर से उधर घूम-2 कर फूलों पर उड़ती हुई रंग-बिरंगी तितलियों को पकड़ने की कोशिश करने लगी..
फूलों की क्यारी के बीच में एक आम का बहुत बड़ा और पुराना पेड़ था, जिसके मोटे तने के सराउंडिंग मिट्टी डालकर एक गोल सा चबूतरा बनाया हुया था, जिस पर हरी-2 दूब घास खड़ी थी…
मे उस चबूतरे पर जाकर बैठ गया, और उसे इधर से उधर दौड़ते हुए देखने लगा…
कभी कभी, सुबह की ठंडी हवा के हल्के-2 झोंकों से उसकी जुल्फें उड़कर उसके गुलाबी गालों को चूम लेती थी…!
कुछ देर बाद वो थक गयी, और मेरी बगल में बैठकर अपनी साँसों को संयत करने लगी…….!
उसकी साँसों की गति के साथ-साथ उसकी 34 की चुचियाँ भी उपर-नीचे हो रही थी..
साँसों को कंट्रोल करते हुए वो बोली - आपका गाओं सच में बहुत अच्छा है, और सबसे अच्छा आपका ये बगीचा है, जी करता है यहीं रह जाउ…!
मेने जब उसकी तरफ निगाह डाली, तो वो एकटक मेरी ओर ही देख रही थी… मेने उसके चेहरे पर नज़र डालते हुए कहा – रुक जाइए ना ! आपका ही घर है ये भी…
वो थोड़ा मायूसी भरे स्वर में बोली – मजबूरी है, पढ़ाई भी तो करनी है…मम्मी पापा के अरमान पूरे करने हैं…!
फिर अपनी गर्दन नीचे झुका कर बोली – आप लोगों के बारे में मे कितना ग़लत थी, लेकिन यहाँ आकर आपके परिवार का अपनापन देख कर मुझे अपने आप पर ग्लानि सी होने लगी है….!
और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर कहने लगी – आप सच में बहुत अच्छे इंसान हैं, निशा भाभी बहुत खुश नसीब हैं, मुझे तो अब उनसे जलन हो रही है…
झोंक-2 में उसके मुँह से ये शब्द निकल तो गये… लेकिन जैसे ही उसने इस बारे में ध्यान दिया, फ़ौरन शर्मिंदगी के कारण उसकी गर्दन झुक गयी……!
मेघना के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मे उसकी तरफ देखने लगा, जो अब शर्म से अपनी गर्दन झुकाए अपनी नज़रों को ज़मीन में गढ़ाए हुई थी…!
इतने में उसके बालों की एक लत शरारत करती हुई उसके गुलाबी गाल पर आकर खेलने लगी, लगा मानो चाँद पर कोई बदली का कतरा आ ठहरा हो..
बरबस ही मेरा हाथ उठा और उसकी लट को संवारते हुए उसके चाँद से मुखड़े पर नज़र गढ़ाए हुए बोला – आपको निशा से जलन क्यों हो रही है मेघना जी….?
मेरी बात का उसने तुरंत कोई जबाब नही दिया, बस अपनी नज़रें ज़मीन में गढ़ाए बैठी रही…!
उसके चेहरे पर शर्मिंदगी साफ दिखाई दे रही थी, मेने उसके हाथ को सहलाते हुए फिर से पुछा – बोलिए ना मेघना जी…
उसके होंठ कंप-कपा उठे, बड़ी मुश्किल से अपनी पलकों को उठाकर उसने एक नज़र मेरे चेहरे पर डाली, और अपने काँपते होठों को खोला – आप जैसा हॅंडसम और सुलझा हुआ जीवन साथी जो मिला है उन्हें…!
मेने ठहाका सा लगाते हुए कहा – मे ऑर हॅंडसम, आप मज़ाक बहुत अच्छा कर लेती हैं मेघना जी, ऐसा क्या दिखा आपको मुझमें जिससे मे हॅंडसम दिखाई दे रहा हूँ…?
उसने भरपूर नज़र मेरे चेहरे पर डाली और फिर मेरी आँखों में आँखें डालकर बोली – मेरी नज़र में आप किसी फिल्मी हीरो से कम नही हैं,
और सबसे बड़ी खूबी आप सभी के साथ इतने अच्छे से समन्वय बना लेते हैं, हर बात का सल्यूशन है आपके पास…,
एक परफेक्ट मॅन की सारी खूबियाँ हैं आपके पास, एक लड़की को अपने जीवन साथी से और क्या चाहिए…!
मे – तो अब जलन करने से क्या हासिल होगा, जो होना था सो तो हो गया, अब आपके जो भी अरमान हों, जो भी मुझसे पाना चाहती हैं, वो अभी भी मिल सकता है…!
मेरी बात सुनते ही एक झटके से उसने अपना सर उठाया, और मेरी तरफ देखने लगी…, उसकी आँखों में एक सवाल था, मानो वो पुच्छना चाहती हो कि क्या ऐसा संभव है...?
मे उसकी नज़रों की भाषा अच्छे से समझ चुका था, मेरे चेहरे पर एक अर्थ्मयि मुस्कान तैर गयी,
मेने हड़बड़ा कर अपना हाथ उसकी चुचि से हटाना चाहा…तो फ़ौरन उसने अपना एक हाथ मेरे हाथ के उपर रख दिया, और उसे ज़ोर्से दबा कर वो मेरे शरीर से चिपक गयी…
अपनी गर्दन उठाकर उसने मेरी आँखों में झाँका…हम दोनो की नज़रें जुड़ गयी…और कुछ देर तक टक-टॅकी लगाए एक दूसरे को देखते रहे…
उसकी कमर से लिपटे मेरे हाथ ने शरारत कर दी, और वो उसकी गोल-मटोल, बाहर को उभरी हुई गान्ड, जो इस स्थिति में और ज़्यादा उभर आई थी, उसपर फिसल कर पहुँच गया… और उसके गान्ड के उभर को ज़ोर्से भींच दिया…
औचह….मुम्मिईीईईईईईई…. उसके मुँह से एक मेते-2 दर्द भरी कराह निकल गयी… और इसी के साथ हम दोनो की तंद्रा भी भंग होगयि…!
वो झट से अलग हो गयी, और गर्दन झुकाए मेरे बराबर में फिरसे चलने लगी…
मेने उससे पुछा – मघना जी कहीं चोट तो नही आई आपको…?
वो – नही, थॅंक्स आपने मुझे गिरने से बचा लिया….!
मे – सॉरी ! वो आपको संभालने के चक्कर में थोड़ा ज़ोर से पकड़ लिया आपको..
वो गर्दन नीचे करके मंद-मंद मुस्करती हुई बोली – इट्स ओके, मे ठीक हूँ..
दो-तीन खेत पार करते ही हम बगीचे में पहुँच गये… मन्झ्ले चाचा ने उसको अच्छे से संभाला हुआ था, अब बीच – 2 में कुछ फूलों के पेड़ भी लगा दिए थे…
बगीचे की हरियाली देख कर वो बड़ी खुश हुई…, इधर से उधर घूम-2 कर फूलों पर उड़ती हुई रंग-बिरंगी तितलियों को पकड़ने की कोशिश करने लगी..
फूलों की क्यारी के बीच में एक आम का बहुत बड़ा और पुराना पेड़ था, जिसके मोटे तने के सराउंडिंग मिट्टी डालकर एक गोल सा चबूतरा बनाया हुया था, जिस पर हरी-2 दूब घास खड़ी थी…
मे उस चबूतरे पर जाकर बैठ गया, और उसे इधर से उधर दौड़ते हुए देखने लगा…
कभी कभी, सुबह की ठंडी हवा के हल्के-2 झोंकों से उसकी जुल्फें उड़कर उसके गुलाबी गालों को चूम लेती थी…!
कुछ देर बाद वो थक गयी, और मेरी बगल में बैठकर अपनी साँसों को संयत करने लगी…….!
उसकी साँसों की गति के साथ-साथ उसकी 34 की चुचियाँ भी उपर-नीचे हो रही थी..
साँसों को कंट्रोल करते हुए वो बोली - आपका गाओं सच में बहुत अच्छा है, और सबसे अच्छा आपका ये बगीचा है, जी करता है यहीं रह जाउ…!
मेने जब उसकी तरफ निगाह डाली, तो वो एकटक मेरी ओर ही देख रही थी… मेने उसके चेहरे पर नज़र डालते हुए कहा – रुक जाइए ना ! आपका ही घर है ये भी…
वो थोड़ा मायूसी भरे स्वर में बोली – मजबूरी है, पढ़ाई भी तो करनी है…मम्मी पापा के अरमान पूरे करने हैं…!
फिर अपनी गर्दन नीचे झुका कर बोली – आप लोगों के बारे में मे कितना ग़लत थी, लेकिन यहाँ आकर आपके परिवार का अपनापन देख कर मुझे अपने आप पर ग्लानि सी होने लगी है….!
और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर कहने लगी – आप सच में बहुत अच्छे इंसान हैं, निशा भाभी बहुत खुश नसीब हैं, मुझे तो अब उनसे जलन हो रही है…
झोंक-2 में उसके मुँह से ये शब्द निकल तो गये… लेकिन जैसे ही उसने इस बारे में ध्यान दिया, फ़ौरन शर्मिंदगी के कारण उसकी गर्दन झुक गयी……!
मेघना के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मे उसकी तरफ देखने लगा, जो अब शर्म से अपनी गर्दन झुकाए अपनी नज़रों को ज़मीन में गढ़ाए हुई थी…!
इतने में उसके बालों की एक लत शरारत करती हुई उसके गुलाबी गाल पर आकर खेलने लगी, लगा मानो चाँद पर कोई बदली का कतरा आ ठहरा हो..
बरबस ही मेरा हाथ उठा और उसकी लट को संवारते हुए उसके चाँद से मुखड़े पर नज़र गढ़ाए हुए बोला – आपको निशा से जलन क्यों हो रही है मेघना जी….?
मेरी बात का उसने तुरंत कोई जबाब नही दिया, बस अपनी नज़रें ज़मीन में गढ़ाए बैठी रही…!
उसके चेहरे पर शर्मिंदगी साफ दिखाई दे रही थी, मेने उसके हाथ को सहलाते हुए फिर से पुछा – बोलिए ना मेघना जी…
उसके होंठ कंप-कपा उठे, बड़ी मुश्किल से अपनी पलकों को उठाकर उसने एक नज़र मेरे चेहरे पर डाली, और अपने काँपते होठों को खोला – आप जैसा हॅंडसम और सुलझा हुआ जीवन साथी जो मिला है उन्हें…!
मेने ठहाका सा लगाते हुए कहा – मे ऑर हॅंडसम, आप मज़ाक बहुत अच्छा कर लेती हैं मेघना जी, ऐसा क्या दिखा आपको मुझमें जिससे मे हॅंडसम दिखाई दे रहा हूँ…?
उसने भरपूर नज़र मेरे चेहरे पर डाली और फिर मेरी आँखों में आँखें डालकर बोली – मेरी नज़र में आप किसी फिल्मी हीरो से कम नही हैं,
और सबसे बड़ी खूबी आप सभी के साथ इतने अच्छे से समन्वय बना लेते हैं, हर बात का सल्यूशन है आपके पास…,
एक परफेक्ट मॅन की सारी खूबियाँ हैं आपके पास, एक लड़की को अपने जीवन साथी से और क्या चाहिए…!
मे – तो अब जलन करने से क्या हासिल होगा, जो होना था सो तो हो गया, अब आपके जो भी अरमान हों, जो भी मुझसे पाना चाहती हैं, वो अभी भी मिल सकता है…!
मेरी बात सुनते ही एक झटके से उसने अपना सर उठाया, और मेरी तरफ देखने लगी…, उसकी आँखों में एक सवाल था, मानो वो पुच्छना चाहती हो कि क्या ऐसा संभव है...?
मे उसकी नज़रों की भाषा अच्छे से समझ चुका था, मेरे चेहरे पर एक अर्थ्मयि मुस्कान तैर गयी,