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Guest
बाहर आते ही मेरा 9” लंबा और उसकी कलाई जितना मोटा लंड किसी कोबरा नाग की तरह फुनफुनाकर उसके मुँह पर जा लगा…!
शालिनी अपनी आँखें चौड़ी करके उसे देखने लगी…, अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली - हे राअंम्म्म….ये क्या है…?
इसे लंड कहते हैं जानेमन… मेने उसकी चुचिओ को दबाते हुए कहा…,
वो तो मे भी देख रही हूँ, लेकिन इतना बड़ा और मोटा…, किसी की भी चूत की धाज्जयाँ उड़ा देता होगा ये तो.. उसने झुरजूरी सी लेते हुए कहा…!
तुम्हें नही उड़वानी अपनी चूत की धज्जियाँ तो मे अपना समान पॅक करूँ डार्लिंग… मेने उसे चिढ़ते हुए कहा…
वो झट से बोल पड़ी, नही नही… मे तो अब इसे ज़रूर लूँगी, पहली बार इतना बड़ा लंड देखा हैं मेने, देखूं तो सही कैसा मज़ा आता है…!
इतना कहकर उसने मेरे 9” लंबे और 3” मोटे कड़क सोटे जैसे लंड को चूमा और उसकी गर्मी को अपने मुलायम फूले हुए गाल से सटा कर आँखें बंद करके उसे अपने गाल से मसाज सी देने लगी…!
एक दो बार उसने उसे हाथ से उपर नीचे किया, लंड के सुर्ख दहक्ते सुपाडे को जीभ से चाट कर उसने अपने मुँह में ले लिया, सुपाडे से ही उसका पूरा मुँह भर गया..
मेरी चीकू जैसी गोलियों को एक हाथ से सहलाते हुए वो उसे मस्ती में आकर चूसने लगी…!
कुछ ही देर में मेरा मूसल एकदम कड़क होकर किसी लोहे की रोड जैसा सख़्त हो गया, उसके चारों ओर के मसल्स बाहर को उभर आए, अब वो गोलाकार ना होकर किसी रोमबुस शेप रोड जैसा दिखने लगा…
मेने उसके कंधे पकड़ कर उपर उठने का इशारा किया, और उसके वाकी बचे कपड़ों को निकाल कर पूरी तरह से नंगा कर दिया…
एक बार उसके होठ चुस्कर, उसकी रसीली चूत को सहलाया, वो बूँद-बूँद करके रिसने लगी थी,
खड़े-खड़े ही मेने उसकी एक टाँग उपर की और अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर टिका कर एक धक्का मार दिया…
सर्र्र्र्र्र्र्ररर…. से गीली छूट में मेरा आधा लंड चला गया, वो अपनी आँखें बंद करके सिसक पड़ी…. आआहह…..सस्स्सिईईईईईईई….. कस गयी मेरी चूत…
उफफफफफ्फ़…बहुत मोटा है तुम्हारा मूसल… मेने एक और धक्का मार कर पुछा – पसंद आया मेरी जान…
वो सिसकते हुए बोली – उउईईई… माआ…माररर गयी रीि.., बहुत मज़ा है इसमें… अब चोदो मुझे…
मेने अपने आधे लंड को भी बाहर निकाल लिया, अब उसकी अच्छे से ग्रीसिंग हो चुकी थी उसी की चूत के ग्रीस से… मेने उसकी चूत की मोटी-मोटी फांकों के बीच अपना लंड रगड़ते हुए पुछा –
वो तुम बता रही थी, तुम्हारी देवरानी किसी ज़मींदार की बेटी है, कहाँ के ज़मींदार हैं वो….?
वो सिसक कर बोली – डार्लिंग ये बातों का वक़्त नही है..आअहह…इसे अंदर करो जल्दी.., मेरी चूत में आग लगी हुई है, और तुम्हें बातें सूझ रही हैं…
अपने लौडे की हल्की सी ठोकर उसकी गरम रसीली चूत की क्लिट की जड़ में लगाकर कहा – डालता हूँ ना, पहले बताओ तो सही वो कहाँ के ज़मींदार हैं…!
वो – आआहह….क्या बेकार की बातें ले बैठे, सस्सिईइ….आअहह… किशनगढ़ के ज़मींदार हैं वो…अब तो डालो राजा…. नही सबर होता मुझसे…
मेने अब अपने सुपाडे को उसके छेद पर रख कर हल्का सा अंदर करके बोला – उनका नाम क्या है…?
वो – आअहह…तुम क्यों पूछ रहे हो…? सूर्य प्रताप नाम है उनका… अब चोदो भी जल्दी से…सस्सिईई… हाआंन्न…आअहह… मज़ा आ गया… और अंदर करो, उउउफफफ्फ़….हाए रीए…मारीी……
पूरा लंड अंदर डालकर मेने उसे गोद में उठा लिया, और पलंग पर लिटाकर उसकी टाँगों को उपर करके एक बार लंड बाहर निकाल कर फिरसे एक ही झटके में अंदर डाल दिया……!
इस झटके से उसका मुँह भाड़ सा खुल गया…, उसके मुँह से एक कामुक कराह निकल पड़ी…आआययईीी….म्माआ….मार्रीि….उउउफफफ्फ़.. क्या मस्त हथियार है…
हहाईए…फाडो राजा मेरी चूत को, धज्जियाँ उड़ा दो इसकी…आज..
मेरे सोटे जैसा लंड अपनी चूत में लेकर वो मस्ती से अपनी गान्ड उठा-उठाकर चुदने लगी…!
कुछ देर में ही वो झड़ने लगी, और मेरी कमर में अपने पैरों की केँची डालकर मुझसे चिपक गयी…
कुछ देर रुक कर मेने उसे घोड़ी बना दिया, और उसकी 36 की गद्देदार गान्ड को मसल्ते हुए पीछे से अपना लंड उसकी रस से लबालब चूत में पेल दिया…
फुकच…से मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया, वो अपना मुँह उपर करके कराह उठी… आअहह…म्माआ…धीरे मेरे राजा…बहुत मोटा है,
मेने उसके कंधों पर अपने हाथ जमाए, और दे ढका-धक जो चुदाई की, वो अनाप-शनाप बकती हुई, चुदाई का मज़ा लेने लगी…!
20 मिनिट चोद कर मेने उसकी चूत को अपनी मलाई से भर दिया, वो औंधे मुँह पलंग पर गिर पड़ी, मे भी उसकी पीठ पर पसर कर अपनी साँसें ठीक करने लगा,
कुछ देर बाद हम अगल-बगल में पड़े एक दूसरे के बदन सहला रहे थे..
मेने उसके होठ चूमकर कहा – बहुत शानदार औरत हो तुम, बहुत मज़ा आया तुम्हें चोद्कर…
वो मेरे बदन से चिपकते हुए बोली – तुम भी बहुत मस्त चुदाई करते हो इस शानदार लंड से, पहली बार इतना मज़ा आया है मुझे कि बता नही सकती…!
फिर वो उठाते हुए बोली – अब मुझे घर जाना होगा, देर हो गयी तो पता नही वो ड्राइवर क्या-क्या नयी कहानी बना दे...?
मे उसे कपड़े पहनते हुए देखकर बोला – और कॉन-कॉन हैं घर में…?
ससुर हैं सास पहले ही चल बसी, हम दोनो अकेली दिनभर घर में रहती हैं, तीनो मर्द दिन में बाहर रहते हैं बिज्निस के काम से…!
मेने उठाते हुए कहा – चलो मे तुम्हें छोड़ देता हूँ तुम्हारे घर, वो मेरी बात मान गयी,
15 मिनट बाद हम उसके घर पर थे…, ये एक अच्छा ख़ासा बंगले नुमा घर था, हॉल में कदम रखते ही रागिनी दिखाई दी जो हॉल नुमा बैठक में सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी, हमें देखते ही बोली –
अरे दीदी, आप..? और ये कॉन है…? चूँकि मे जोसेफ वाले गेट-अप में था, फ्रेंच कट दादी, नीली आँखें, नाक थोड़ी फूली हुई सी…!
शालिनी – ये जोसेफ हैं, रास्ते में हमारी गाड़ी खराब हो गयी थी, इन्होने ही मुझे लिफ्ट दी और यहाँ तक लाए हैं,
फिर उसने सारी दास्तान कह सुनाई, खाली होटेल की अपनी चुदाई छोड़कर… !
शालिनी अपनी आँखें चौड़ी करके उसे देखने लगी…, अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली - हे राअंम्म्म….ये क्या है…?
इसे लंड कहते हैं जानेमन… मेने उसकी चुचिओ को दबाते हुए कहा…,
वो तो मे भी देख रही हूँ, लेकिन इतना बड़ा और मोटा…, किसी की भी चूत की धाज्जयाँ उड़ा देता होगा ये तो.. उसने झुरजूरी सी लेते हुए कहा…!
तुम्हें नही उड़वानी अपनी चूत की धज्जियाँ तो मे अपना समान पॅक करूँ डार्लिंग… मेने उसे चिढ़ते हुए कहा…
वो झट से बोल पड़ी, नही नही… मे तो अब इसे ज़रूर लूँगी, पहली बार इतना बड़ा लंड देखा हैं मेने, देखूं तो सही कैसा मज़ा आता है…!
इतना कहकर उसने मेरे 9” लंबे और 3” मोटे कड़क सोटे जैसे लंड को चूमा और उसकी गर्मी को अपने मुलायम फूले हुए गाल से सटा कर आँखें बंद करके उसे अपने गाल से मसाज सी देने लगी…!
एक दो बार उसने उसे हाथ से उपर नीचे किया, लंड के सुर्ख दहक्ते सुपाडे को जीभ से चाट कर उसने अपने मुँह में ले लिया, सुपाडे से ही उसका पूरा मुँह भर गया..
मेरी चीकू जैसी गोलियों को एक हाथ से सहलाते हुए वो उसे मस्ती में आकर चूसने लगी…!
कुछ ही देर में मेरा मूसल एकदम कड़क होकर किसी लोहे की रोड जैसा सख़्त हो गया, उसके चारों ओर के मसल्स बाहर को उभर आए, अब वो गोलाकार ना होकर किसी रोमबुस शेप रोड जैसा दिखने लगा…
मेने उसके कंधे पकड़ कर उपर उठने का इशारा किया, और उसके वाकी बचे कपड़ों को निकाल कर पूरी तरह से नंगा कर दिया…
एक बार उसके होठ चुस्कर, उसकी रसीली चूत को सहलाया, वो बूँद-बूँद करके रिसने लगी थी,
खड़े-खड़े ही मेने उसकी एक टाँग उपर की और अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर टिका कर एक धक्का मार दिया…
सर्र्र्र्र्र्र्ररर…. से गीली छूट में मेरा आधा लंड चला गया, वो अपनी आँखें बंद करके सिसक पड़ी…. आआहह…..सस्स्सिईईईईईईई….. कस गयी मेरी चूत…
उफफफफफ्फ़…बहुत मोटा है तुम्हारा मूसल… मेने एक और धक्का मार कर पुछा – पसंद आया मेरी जान…
वो सिसकते हुए बोली – उउईईई… माआ…माररर गयी रीि.., बहुत मज़ा है इसमें… अब चोदो मुझे…
मेने अपने आधे लंड को भी बाहर निकाल लिया, अब उसकी अच्छे से ग्रीसिंग हो चुकी थी उसी की चूत के ग्रीस से… मेने उसकी चूत की मोटी-मोटी फांकों के बीच अपना लंड रगड़ते हुए पुछा –
वो तुम बता रही थी, तुम्हारी देवरानी किसी ज़मींदार की बेटी है, कहाँ के ज़मींदार हैं वो….?
वो सिसक कर बोली – डार्लिंग ये बातों का वक़्त नही है..आअहह…इसे अंदर करो जल्दी.., मेरी चूत में आग लगी हुई है, और तुम्हें बातें सूझ रही हैं…
अपने लौडे की हल्की सी ठोकर उसकी गरम रसीली चूत की क्लिट की जड़ में लगाकर कहा – डालता हूँ ना, पहले बताओ तो सही वो कहाँ के ज़मींदार हैं…!
वो – आआहह….क्या बेकार की बातें ले बैठे, सस्सिईइ….आअहह… किशनगढ़ के ज़मींदार हैं वो…अब तो डालो राजा…. नही सबर होता मुझसे…
मेने अब अपने सुपाडे को उसके छेद पर रख कर हल्का सा अंदर करके बोला – उनका नाम क्या है…?
वो – आअहह…तुम क्यों पूछ रहे हो…? सूर्य प्रताप नाम है उनका… अब चोदो भी जल्दी से…सस्सिईई… हाआंन्न…आअहह… मज़ा आ गया… और अंदर करो, उउउफफफ्फ़….हाए रीए…मारीी……
पूरा लंड अंदर डालकर मेने उसे गोद में उठा लिया, और पलंग पर लिटाकर उसकी टाँगों को उपर करके एक बार लंड बाहर निकाल कर फिरसे एक ही झटके में अंदर डाल दिया……!
इस झटके से उसका मुँह भाड़ सा खुल गया…, उसके मुँह से एक कामुक कराह निकल पड़ी…आआययईीी….म्माआ….मार्रीि….उउउफफफ्फ़.. क्या मस्त हथियार है…
हहाईए…फाडो राजा मेरी चूत को, धज्जियाँ उड़ा दो इसकी…आज..
मेरे सोटे जैसा लंड अपनी चूत में लेकर वो मस्ती से अपनी गान्ड उठा-उठाकर चुदने लगी…!
कुछ देर में ही वो झड़ने लगी, और मेरी कमर में अपने पैरों की केँची डालकर मुझसे चिपक गयी…
कुछ देर रुक कर मेने उसे घोड़ी बना दिया, और उसकी 36 की गद्देदार गान्ड को मसल्ते हुए पीछे से अपना लंड उसकी रस से लबालब चूत में पेल दिया…
फुकच…से मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया, वो अपना मुँह उपर करके कराह उठी… आअहह…म्माआ…धीरे मेरे राजा…बहुत मोटा है,
मेने उसके कंधों पर अपने हाथ जमाए, और दे ढका-धक जो चुदाई की, वो अनाप-शनाप बकती हुई, चुदाई का मज़ा लेने लगी…!
20 मिनिट चोद कर मेने उसकी चूत को अपनी मलाई से भर दिया, वो औंधे मुँह पलंग पर गिर पड़ी, मे भी उसकी पीठ पर पसर कर अपनी साँसें ठीक करने लगा,
कुछ देर बाद हम अगल-बगल में पड़े एक दूसरे के बदन सहला रहे थे..
मेने उसके होठ चूमकर कहा – बहुत शानदार औरत हो तुम, बहुत मज़ा आया तुम्हें चोद्कर…
वो मेरे बदन से चिपकते हुए बोली – तुम भी बहुत मस्त चुदाई करते हो इस शानदार लंड से, पहली बार इतना मज़ा आया है मुझे कि बता नही सकती…!
फिर वो उठाते हुए बोली – अब मुझे घर जाना होगा, देर हो गयी तो पता नही वो ड्राइवर क्या-क्या नयी कहानी बना दे...?
मे उसे कपड़े पहनते हुए देखकर बोला – और कॉन-कॉन हैं घर में…?
ससुर हैं सास पहले ही चल बसी, हम दोनो अकेली दिनभर घर में रहती हैं, तीनो मर्द दिन में बाहर रहते हैं बिज्निस के काम से…!
मेने उठाते हुए कहा – चलो मे तुम्हें छोड़ देता हूँ तुम्हारे घर, वो मेरी बात मान गयी,
15 मिनट बाद हम उसके घर पर थे…, ये एक अच्छा ख़ासा बंगले नुमा घर था, हॉल में कदम रखते ही रागिनी दिखाई दी जो हॉल नुमा बैठक में सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी, हमें देखते ही बोली –
अरे दीदी, आप..? और ये कॉन है…? चूँकि मे जोसेफ वाले गेट-अप में था, फ्रेंच कट दादी, नीली आँखें, नाक थोड़ी फूली हुई सी…!
शालिनी – ये जोसेफ हैं, रास्ते में हमारी गाड़ी खराब हो गयी थी, इन्होने ही मुझे लिफ्ट दी और यहाँ तक लाए हैं,
फिर उसने सारी दास्तान कह सुनाई, खाली होटेल की अपनी चुदाई छोड़कर… !