S
StoryPublisher
Guest
मस्ती में उसकी आँखे बंद हो गयी, अपनी एक टाँग उठाकर उसने मेरे कंधे पर टिका ली, और मेरे सर के बालों में अपनी उंगलियाँ फँसाए, वो किसी दूसरी दुनिया की सैर पर निकल पड़ी…
अपनी जीभ की नोक को अंदर तक पेल कर, मे उसकी चूत को किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा.. फिर उसके भग्नासा (क्लिट) को अपने होंठों में दबा कर अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी…
वो दर्द से कराह उठी… आह.. इसका मतलब इसकी चूत उंगली लायक ही है अभी..
मेने उसके क्लिट को चूस्ते हुए धीरे-2 अपनी उंगली को अंदर-बाहर कर के उसे चोदने लगा…
उसकी मुनिया लगातार रस बहा रही थी.. जिसे में अपनी जीभ से चाटता जा रहा था…
आख़िरकार उसकी रस से भरी गगर छलक पड़ी.., उसने मेरे मुँह को बुरी तरह से अपनी रस गगर के मुँह पर दबा दिया…
वो अपने पंजों पर खड़ी होकर किल्कारियाँ मारती हुई झड़ने लगी…..!
______________________________
मेने खड़े होकर उसको चूमते हुए पूछा – मेरी सेवा पसंद आई.. भौजी…?
वो – वादा करो देवर्जी… ऐसी सेवा मुझे आगे भी मिलती रहेगी… जब आपकी इच्छा हो तब.. मे आपसे कोई ज़ोर ज़बरदस्ती से नही कहूँगी… बस जब आपका मन करे..
मे कोशिश करूँगा, वादा नही कर सकता…, लेकिन अभी तो पूरी पिक्चर वाकी है मेरी जान.. उसे तो देखलो…
वो मेरे होंठों को चूमकर बोली – आपके ट्रेलर से ही पता लग रहा है कि.., पिक्चर सूपर हिट होगी..
मे – तो फिर अब मेरे बबुआ की भी थोड़ी सेवा हो जाए… ये कह कर मेने उसके कंधों पर दबाब डाल कर उसे बिठा दिया..,
अपने घुटनों पर बैठ उसने मेरा अंडरवेर नीचे कर दिया.. जिसे मेने अपने पैर से दूर फेंक दिया…
सबसे पहले उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ा और बोली – आहह…. ये इतना गरम क्यों है देवर जी…?
सामने इतना गरम कुंड जो है… मेने हँसते हुए उसकी बात का जबाब दिया तो वो उसे अपने गाल से रगड़ते हुए बोली
कितना लंबा तगड़ा हथियार है तुम्हारा, मेरी छ्होटी सी चूत की तो धज्जियाँ उड़ा देगा ये..….!
मे – ऐसा नही है भौजी, देखना कितना मज़ा देता है ये, आज के बाद तुम्हारी गुलाबो इसको ही लेने को तड़पति रहेगी..…
वो हूंम्म… कर के उसको उलट-पलट कर देखने लगी.. फिर उसने एक बार उसे चूम लिया…उउउम्म्म्मम…पुकछ…कितना प्यारा है ये…
हाथ से आगे पीछे करते हुए उसे एक बूँद उसके पी होल पर मोती जैसी चमकती नज़र आई, जिसे उसने अपनी जीभ की नोक पर ले लिया और चखने लगी…
हूंम्म्म… टेस्टी है… कह कर उसने मेरे लाल सेब जैसे सुपाडे को मुँह में भर लिया….और चूसने लगी…!
मेने उसके सर पर हाथ रख लिया और उसे सहलाने लगा… वो धीरे-2 उसे अंदर और अंदर लेती जा रही थी…
सीईईई…अह्ह्ह्ह… राणिि…ज़रा मेरे सिपाहियों की भी सेवा करती जाओ साथ में.. मेरी बात पर उसने सवालिया नज़र से मेरी तरफ सर उठा कर देखा..
मेने कहा… नीचे मेरे टट्टों को भी सहलाओ साथ में और चूसो भी… तो वो वैसा ही करने लगी… अब मुझे और ज़्यादा मज़ा आने लगा…
कुछ देर की चुसाई और सेवा भाव से मूसल राज आती प्रशन्न हो गये… और एकदम लट्ठ की तरह शख्त होकर ठुमके लगाने लगे…
मेने उसे वहीं घास पर लिटा दिया… और उसकी टाँगें मोड़ कर उसकी मुनिया को सहलाया, उसका हौसला बढ़ाया.. और फिर उसे चूम कर अपना सुपाडा उसकी गरम चूत के मुँह पर रख दिया…
अपनी जीभ की नोक को अंदर तक पेल कर, मे उसकी चूत को किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा.. फिर उसके भग्नासा (क्लिट) को अपने होंठों में दबा कर अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी…
वो दर्द से कराह उठी… आह.. इसका मतलब इसकी चूत उंगली लायक ही है अभी..
मेने उसके क्लिट को चूस्ते हुए धीरे-2 अपनी उंगली को अंदर-बाहर कर के उसे चोदने लगा…
उसकी मुनिया लगातार रस बहा रही थी.. जिसे में अपनी जीभ से चाटता जा रहा था…
आख़िरकार उसकी रस से भरी गगर छलक पड़ी.., उसने मेरे मुँह को बुरी तरह से अपनी रस गगर के मुँह पर दबा दिया…
वो अपने पंजों पर खड़ी होकर किल्कारियाँ मारती हुई झड़ने लगी…..!
______________________________
मेने खड़े होकर उसको चूमते हुए पूछा – मेरी सेवा पसंद आई.. भौजी…?
वो – वादा करो देवर्जी… ऐसी सेवा मुझे आगे भी मिलती रहेगी… जब आपकी इच्छा हो तब.. मे आपसे कोई ज़ोर ज़बरदस्ती से नही कहूँगी… बस जब आपका मन करे..
मे कोशिश करूँगा, वादा नही कर सकता…, लेकिन अभी तो पूरी पिक्चर वाकी है मेरी जान.. उसे तो देखलो…
वो मेरे होंठों को चूमकर बोली – आपके ट्रेलर से ही पता लग रहा है कि.., पिक्चर सूपर हिट होगी..
मे – तो फिर अब मेरे बबुआ की भी थोड़ी सेवा हो जाए… ये कह कर मेने उसके कंधों पर दबाब डाल कर उसे बिठा दिया..,
अपने घुटनों पर बैठ उसने मेरा अंडरवेर नीचे कर दिया.. जिसे मेने अपने पैर से दूर फेंक दिया…
सबसे पहले उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ा और बोली – आहह…. ये इतना गरम क्यों है देवर जी…?
सामने इतना गरम कुंड जो है… मेने हँसते हुए उसकी बात का जबाब दिया तो वो उसे अपने गाल से रगड़ते हुए बोली
कितना लंबा तगड़ा हथियार है तुम्हारा, मेरी छ्होटी सी चूत की तो धज्जियाँ उड़ा देगा ये..….!
मे – ऐसा नही है भौजी, देखना कितना मज़ा देता है ये, आज के बाद तुम्हारी गुलाबो इसको ही लेने को तड़पति रहेगी..…
वो हूंम्म… कर के उसको उलट-पलट कर देखने लगी.. फिर उसने एक बार उसे चूम लिया…उउउम्म्म्मम…पुकछ…कितना प्यारा है ये…
हाथ से आगे पीछे करते हुए उसे एक बूँद उसके पी होल पर मोती जैसी चमकती नज़र आई, जिसे उसने अपनी जीभ की नोक पर ले लिया और चखने लगी…
हूंम्म्म… टेस्टी है… कह कर उसने मेरे लाल सेब जैसे सुपाडे को मुँह में भर लिया….और चूसने लगी…!
मेने उसके सर पर हाथ रख लिया और उसे सहलाने लगा… वो धीरे-2 उसे अंदर और अंदर लेती जा रही थी…
सीईईई…अह्ह्ह्ह… राणिि…ज़रा मेरे सिपाहियों की भी सेवा करती जाओ साथ में.. मेरी बात पर उसने सवालिया नज़र से मेरी तरफ सर उठा कर देखा..
मेने कहा… नीचे मेरे टट्टों को भी सहलाओ साथ में और चूसो भी… तो वो वैसा ही करने लगी… अब मुझे और ज़्यादा मज़ा आने लगा…
कुछ देर की चुसाई और सेवा भाव से मूसल राज आती प्रशन्न हो गये… और एकदम लट्ठ की तरह शख्त होकर ठुमके लगाने लगे…
मेने उसे वहीं घास पर लिटा दिया… और उसकी टाँगें मोड़ कर उसकी मुनिया को सहलाया, उसका हौसला बढ़ाया.. और फिर उसे चूम कर अपना सुपाडा उसकी गरम चूत के मुँह पर रख दिया…