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Guest
मेरी पीठ पर तेल की धार डालते हुए भाभी ने पूछा – लल्ला ! बुआ की सोनचिरैया ऐसे ही बिना पंख फड़फडाए चली गयी…?
पहले तो मे भाभी की बात का मतलव समझ ही नही पाया, सो अपनी गर्दन मॉड्कर उनकी तरफ देखने लगा…
भाभी के होंठों पर मनमोहक स्माइल थी, वो मेरे कंधों पर अपने हाथों का दबाब डालते हुए रगड़ा मारती हुई बोली –
घूमो मत…मेने जो पूछा है उसका जबाब मुँह से दो…
मेने कहा - मे आपकी बात का मतलव ही नही समझा, तो जबाब क्या दूँ…?
भाभी – अरे राजे ! मे ये पुच्छ रही हूँ, कि विजेता के साथ कुछ किया या ऐसे ही कोरी की कोरी निकल गयी…
भाभी की बात का मतलव समझते ही मेरे होंठों पर मुस्कान आ गयी, फिर थोड़ा शब्दों का चयन करने के बाद बोला – आपको क्या लगता है…?
वो – अब मे क्या जानू..? इसलिए तो तुमसे पुछ रही हूँ,
मेने हँसते हुए कहा – भाभी ! हमारे घर के प्रेम-पूर्ण वातावरण में कोई चिड़िया आए, और वो प्रेम-प्रलाप ना कर पाए, ऐसा संभव है क्या…?
वो उत्तेजित होते हुए बोली – इसका मतलव वो भी दाना चुग गयी…? बताओ ना कैसे, कब, और क्या हुआ था…?
मेने उन्हें रामा दीदी और उसके बीच सेक्सी कहानियाँ पढ़ते-2 जो लेस्बियान सेक्स के दौरान जो कर रही थीं, वो सब डीटेल मेने बताया…
भाभी मेरी बातें सुनकर उत्तेजित हो रही थी, ना जाने कब उन्होने अपनी माक्ष्य निकाल कर एक तरफ फेंक दी, और वो मालिश करते हुए अपने नंगे आमों को मेरी पीठ पर रगड़ने लगी…
कुछ देर बाद उन्होने मुझे सीधा लेटने को कहा – मे जैसे ही पलटा, तो देखा, भाभी के शरीर पर कपड़े का एक रेशा तक नही था…
मेने झपट कर उनके आमों को पकड़ना चाहा, तो उन्होने मेरा हाथ झटक दिया और बोली.. अपने हाथ पैर मत चलाओ, बस ज़ुबान चलाओ, और आगे क्या हुआ वो बताओ…
मे उन्हें आगे की कहानी सुनने लगा…
जैसे – 2 हमारी थ्रीसम चुदाई का किस्सा आगे बढ़ रहा था, भाभी की हरकतें उतनी ही वाइल्ड होती जा रही थी,
उन्होने मेरे लंड को अंडरवेर से बाहर निकाल कर अपनी मुट्ठी में लेकर एक बार चूमा, और फिर अपनी नंगी चूत को मेरे तंबू पर बुरी तरह मसल्ने लगी…
चुचियों की घुंडिया, फूलकर कड़क हो चुकी थी, और अब वो किसी गोल काँच के कंचे की तरह मोटी होकर इस समय मेरे सीने पर बुरी तरह घिस रही थी…
मेरे हाथ उनकी गान्ड पर कस गये, और मे उन्हें मसल्ने लगा, तभी मुझे दरवाजे पर कुछ आहट महसूस हुई,
देखा तो रामा दीदी, दरवाजे में हल्की सी झिरी बनाकर हमें देख रही थी…
मेने भाभी के कान में कहा – भाभी… दीदी हमें देख रही है…
भाभी की आँखें मस्ती में मूंद चुकी थी, वो वासना भारी आवाज़ में बोली –
चुपके-चुपके क्यों देख रही हो ननद रानी, अंदर आ जाओ, मिलकर मज़ा करते हैं…
भाभी का इतना कहना था, कि रामा दीदी झट से अंदर आ गयी, और दरवाजा बंद कर के हमारे पास आकर चटाई पर बैठ गयी…
भाभी ने मेरे ऊपर सवारी किए हुए ही, झपटकर उसका सर अपने हाथों में जकड़ा, और उसके होंठों को अपने मुँह में भरकर उसके होंठ चूसने लगी…
भाभी इस समय अपने होशो हवास में नही लग रही थी, वासना उनके सर पर सवार थी, जो उनकी हरकतों से साफ-साफ लग रहा था…
वो दोनो एक दूसरे को किस करने में जुटी थी, मेने लेटे लेटे ही दीदी की कमीज़ में हाथ डालकर उसके संतरे को मसल दिया…
उसके बाद भाभी मेरे मुँह पर आकर बैठ गयी, और दीदी को मेरा लंड चूसने का इशारा किया…
उसने मेरा शॉर्ट निकाल कर अलग कर दिया, में भाभी की गान्ड मसल्ते हुए चूत से निकल रहे रस को चाट रहा था,
दीदी ने मेरे लंड को मुट्ठी में कसकर अपने होंठों से सुपाडे को चूमा, और अपनी जीभ से एक बार जड़ से लेकर टोपे तक चाटा..
भाभी ने उसकी पाजामी को पेंटी समेत उसकी जांघों तक सरका दिया, और अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगी.
रामा लंड के पी होल को जीभ से चाट कर वो उसे अपने मुँह में लेने ही वाली थी कि, तभी नीचे से बाबूजी की आवाज़ सुनाई दी…
रामा बेटी… कहाँ हो सब लोग…?
पहले तो मे भाभी की बात का मतलव समझ ही नही पाया, सो अपनी गर्दन मॉड्कर उनकी तरफ देखने लगा…
भाभी के होंठों पर मनमोहक स्माइल थी, वो मेरे कंधों पर अपने हाथों का दबाब डालते हुए रगड़ा मारती हुई बोली –
घूमो मत…मेने जो पूछा है उसका जबाब मुँह से दो…
मेने कहा - मे आपकी बात का मतलव ही नही समझा, तो जबाब क्या दूँ…?
भाभी – अरे राजे ! मे ये पुच्छ रही हूँ, कि विजेता के साथ कुछ किया या ऐसे ही कोरी की कोरी निकल गयी…
भाभी की बात का मतलव समझते ही मेरे होंठों पर मुस्कान आ गयी, फिर थोड़ा शब्दों का चयन करने के बाद बोला – आपको क्या लगता है…?
वो – अब मे क्या जानू..? इसलिए तो तुमसे पुछ रही हूँ,
मेने हँसते हुए कहा – भाभी ! हमारे घर के प्रेम-पूर्ण वातावरण में कोई चिड़िया आए, और वो प्रेम-प्रलाप ना कर पाए, ऐसा संभव है क्या…?
वो उत्तेजित होते हुए बोली – इसका मतलव वो भी दाना चुग गयी…? बताओ ना कैसे, कब, और क्या हुआ था…?
मेने उन्हें रामा दीदी और उसके बीच सेक्सी कहानियाँ पढ़ते-2 जो लेस्बियान सेक्स के दौरान जो कर रही थीं, वो सब डीटेल मेने बताया…
भाभी मेरी बातें सुनकर उत्तेजित हो रही थी, ना जाने कब उन्होने अपनी माक्ष्य निकाल कर एक तरफ फेंक दी, और वो मालिश करते हुए अपने नंगे आमों को मेरी पीठ पर रगड़ने लगी…
कुछ देर बाद उन्होने मुझे सीधा लेटने को कहा – मे जैसे ही पलटा, तो देखा, भाभी के शरीर पर कपड़े का एक रेशा तक नही था…
मेने झपट कर उनके आमों को पकड़ना चाहा, तो उन्होने मेरा हाथ झटक दिया और बोली.. अपने हाथ पैर मत चलाओ, बस ज़ुबान चलाओ, और आगे क्या हुआ वो बताओ…
मे उन्हें आगे की कहानी सुनने लगा…
जैसे – 2 हमारी थ्रीसम चुदाई का किस्सा आगे बढ़ रहा था, भाभी की हरकतें उतनी ही वाइल्ड होती जा रही थी,
उन्होने मेरे लंड को अंडरवेर से बाहर निकाल कर अपनी मुट्ठी में लेकर एक बार चूमा, और फिर अपनी नंगी चूत को मेरे तंबू पर बुरी तरह मसल्ने लगी…
चुचियों की घुंडिया, फूलकर कड़क हो चुकी थी, और अब वो किसी गोल काँच के कंचे की तरह मोटी होकर इस समय मेरे सीने पर बुरी तरह घिस रही थी…
मेरे हाथ उनकी गान्ड पर कस गये, और मे उन्हें मसल्ने लगा, तभी मुझे दरवाजे पर कुछ आहट महसूस हुई,
देखा तो रामा दीदी, दरवाजे में हल्की सी झिरी बनाकर हमें देख रही थी…
मेने भाभी के कान में कहा – भाभी… दीदी हमें देख रही है…
भाभी की आँखें मस्ती में मूंद चुकी थी, वो वासना भारी आवाज़ में बोली –
चुपके-चुपके क्यों देख रही हो ननद रानी, अंदर आ जाओ, मिलकर मज़ा करते हैं…
भाभी का इतना कहना था, कि रामा दीदी झट से अंदर आ गयी, और दरवाजा बंद कर के हमारे पास आकर चटाई पर बैठ गयी…
भाभी ने मेरे ऊपर सवारी किए हुए ही, झपटकर उसका सर अपने हाथों में जकड़ा, और उसके होंठों को अपने मुँह में भरकर उसके होंठ चूसने लगी…
भाभी इस समय अपने होशो हवास में नही लग रही थी, वासना उनके सर पर सवार थी, जो उनकी हरकतों से साफ-साफ लग रहा था…
वो दोनो एक दूसरे को किस करने में जुटी थी, मेने लेटे लेटे ही दीदी की कमीज़ में हाथ डालकर उसके संतरे को मसल दिया…
उसके बाद भाभी मेरे मुँह पर आकर बैठ गयी, और दीदी को मेरा लंड चूसने का इशारा किया…
उसने मेरा शॉर्ट निकाल कर अलग कर दिया, में भाभी की गान्ड मसल्ते हुए चूत से निकल रहे रस को चाट रहा था,
दीदी ने मेरे लंड को मुट्ठी में कसकर अपने होंठों से सुपाडे को चूमा, और अपनी जीभ से एक बार जड़ से लेकर टोपे तक चाटा..
भाभी ने उसकी पाजामी को पेंटी समेत उसकी जांघों तक सरका दिया, और अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगी.
रामा लंड के पी होल को जीभ से चाट कर वो उसे अपने मुँह में लेने ही वाली थी कि, तभी नीचे से बाबूजी की आवाज़ सुनाई दी…
रामा बेटी… कहाँ हो सब लोग…?