S
StoryPublisher
Guest
चार्लिस एंगलो इंडियन था और उसकी गिनती बेहद खतरनाक इंसानों में की जाती थी । शरीर की बनावट लम्बी-चौड़ी देवकाय- लगभग बीस पच्चीस आदमी उसके नौकर थे– यह सब के सब जरायमपेशा डाकू या कातिल थे । चार्लिस का कारोबार भी काफी फैला हुआ था । तीन जुएखाने चलते थे, इसके अलावा मुजरिमाना जिंदगी के तमाम धंधों से वह निकला हुआ था । बेहद लालची इंसान था– दौलत जिस जरिये से भी आती, उसे प्राप्त करने के लिए वह सभी काम कर सकता था । कई साल पहले भी उसने सोलो के लिए काम किया था लेकिन सोलो पुलिस के शिकंजे में आ गया था फिर शीघ्र ही फरार हो गया था और गिरफ्तारी के दौरान उसने किसी का नाम नहीं लिया था । अतः इस बार भी जब उसने चार्लिस को बुलवाया तो चार्लिस खुशी से उसके लिए काम करने को तैयार हो गया ।
सोलो के इरादे इस बार कुछ अधिक ही खतरनाक थे– इस बार वह किसी देश-विदेश के लिए काम नहीं कर रहा था बल्कि वह इस मुल्क में अपनी जमींदोज सरकार कायम करने आया था । उसकी प्लानिंग भी जबरदस्त थी– वह शुरू में सरकार और पुलिस को ब्लैकमेल करने का खतरनाक इरादा रखता था । उसका कहना था कि दूसरे मुल्कों की अपेक्षा इस देश में यह काम आसानी से हो सकता है । बहुत से असन्तुष्ट नेता उसका साथ देंगे । वह कानून व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करके पहले अपना सिक्का जमाना चाहता था ।
जिस तरह अमेरिका में माफिया काम करती है, ठीक उसी तरह की योजना उसके दिमाग में थी– बेरोजगारी यहाँ बहुत थी, इसलिए ऐसे बेरोजगारों का एक बहुत बड़ा संगठन तैयार करके उन्हें जरायम की जिंदगी में धकेलना आसान काम था । साम्प्रदायिकता की आग बड़ी जल्दी यहाँ भड़काई जा सकती थी और इस तरह के बहुत से नेता यहाँ थे जो इसी की कमाई खाते हैं । वह उन्हीं नेताओं के द्वारा सरकार को ब्लैकमेल करना चाहता था ।
सोलो ने चार्लिस के नाम पर बैंक अकाउंट खुलवा दिया था, जो बीस लाख रुपये से कम नहीं था । चार्लिस की अपनी आवश्यकताओं की समस्या अलग थी– और बीस लाख सिर्फ इसलिए अदा किये थे कि चार्लिस सोलो की आवश्यकतानुसार लोगों को उपलब्ध करने में जितना खर्चा करना चाहे कर ले, और चार्लिस बेहद संतुष्ट था– अब इस बड़ी रकम से चार छः लाख रुपया मार लेना उसके लिए कोई मुश्किल काम नहीं था, लेकिन कुछ और भी परेशानियों की वजह से वह सोलो की साख मजबूत करने के लिए काम करना चाहता था ।
सोलो के इरादे इस बार कुछ अधिक ही खतरनाक थे– इस बार वह किसी देश-विदेश के लिए काम नहीं कर रहा था बल्कि वह इस मुल्क में अपनी जमींदोज सरकार कायम करने आया था । उसकी प्लानिंग भी जबरदस्त थी– वह शुरू में सरकार और पुलिस को ब्लैकमेल करने का खतरनाक इरादा रखता था । उसका कहना था कि दूसरे मुल्कों की अपेक्षा इस देश में यह काम आसानी से हो सकता है । बहुत से असन्तुष्ट नेता उसका साथ देंगे । वह कानून व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करके पहले अपना सिक्का जमाना चाहता था ।
जिस तरह अमेरिका में माफिया काम करती है, ठीक उसी तरह की योजना उसके दिमाग में थी– बेरोजगारी यहाँ बहुत थी, इसलिए ऐसे बेरोजगारों का एक बहुत बड़ा संगठन तैयार करके उन्हें जरायम की जिंदगी में धकेलना आसान काम था । साम्प्रदायिकता की आग बड़ी जल्दी यहाँ भड़काई जा सकती थी और इस तरह के बहुत से नेता यहाँ थे जो इसी की कमाई खाते हैं । वह उन्हीं नेताओं के द्वारा सरकार को ब्लैकमेल करना चाहता था ।
सोलो ने चार्लिस के नाम पर बैंक अकाउंट खुलवा दिया था, जो बीस लाख रुपये से कम नहीं था । चार्लिस की अपनी आवश्यकताओं की समस्या अलग थी– और बीस लाख सिर्फ इसलिए अदा किये थे कि चार्लिस सोलो की आवश्यकतानुसार लोगों को उपलब्ध करने में जितना खर्चा करना चाहे कर ले, और चार्लिस बेहद संतुष्ट था– अब इस बड़ी रकम से चार छः लाख रुपया मार लेना उसके लिए कोई मुश्किल काम नहीं था, लेकिन कुछ और भी परेशानियों की वजह से वह सोलो की साख मजबूत करने के लिए काम करना चाहता था ।