• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास ) complete

लज़्जत और जोश में डूबी हुई नीलोफर अब अपने हिप्स को उठा उठा कर आगे पीछे करने लगी.और बे इकतियार उस के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं.

नीलोफर के मुँह से निकलती हुई सिसकियाँ जमशेद के साथ साथ ज़ाहिद को भी बुरी तरह से गरमा चुकी थीं और उस के हाथ भी अपने लंड पर तेज़ी से फिसल रहे थे.

दूसरी तरफ जमशेद ने अब अपनी बेहन के पावं की उंगलियो को चाटते चाटते अपना मुँह आहिस्ता आहिस्ता बेहन की टाँग की पिंदलियों के ऊपर से फेरते हुए उस की गुदाज रानों की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया

नीलोफर की गोश्त से भरी हुई मोटी मोटी रानों पर ज्यूँ ज्यूँ उस के भाई की आग बरसाती गरम ज़ुबान फिरने लगी. तो नीलोफर का जिस्म मज़े के मारे बिस्तर पर मचलने लगा.

रानों के दरमियाँ से होता हुआ जमशेद का मुँह निलफोर की फुददी के बहुत नज़दीक पहुँचन चुका था.

अपनी बेहन की चूत के इतने नज़दीक पहुँचते ही बेहन की चूत की प्यारी प्यारी खुसबु का नशा जमशेद के दिमाग़ पर छाने लगा.

इसी नशे में डूबते हुए जमशेद ने अपनी बेहन के चूतड़ को दोनो हाथों से पकड़ा.और नीलोफर की गान्ड को सहलाते हुए उस की टाँगे चौड़ी कीं और अपने मुँह को आगे बढ़ाते हुए अपनी बेहन की चूत की गुदाज होंठो पर अपने होंठ रख कर बेहन की रस भरी चूत को चूमने लगा.

जमशेद का मुँह नीलोफर की चूत से टकराते ही नीलोफर की चूत का दाना (क्लिट) गरम हो कर उस की चूत के ऊपर एक शान से अकड़ कर खड़ा होने लगा.

जमशेद ने अपनी बेहन की चूत पर अपनी ज़ुबान को ऊपर नीचे घुमाते हुए चूत के दाने (क्लिट) को अपने मुँह में भरा और बेहन के छोले को चूसने लगा.

चूत के दाने को अपनी ज़ुबान से रगड़ते रगड़ते जमशेद ने दाने को अपने होंठो में भर कर काबू किया और फिर दाने को अपने होंठो से खींच कर ज़ोर से बाहर की तरफ खींचा और फिर छोड़ दिया..

जमशेद ने फिर यह हरकत कई बार दुहाराई. वो अब एक दीवाने की तरह अपनी बेहन की चूत को चाट रहा था.

अपने भाई के इस वहशियाना प्यार को पा कर नीलोफर की चूत से रस का झरना बहाने लगा. और वो भी अपने चुतड उठा उठा कर अपने भाई के मुँह पर वहशीपन अंदाज़ में ज़ोर ज़ोर से मारने लगी.

“हाआआआआ ओह” लज़्जत और जिस्मानी भूक से बेकाबू होते हुए नीलोफर की सिसकियाँ पूरे कमरे में ज़ोर ज़ोर से गूंजने लगीं थीं.

बाथरूम में खड़े हुए ज़ाहिद को यह नज़रा देख कर अपने ऊपर काबू पाना मुश्किल हो रहा था.

उस का दिल भी यह चाह रहा था कि वो भी नीलोफर के जवान और खूबसूरत जिस्म से खैल कर अपने लंड को ठंडा करे.

मगर आगे बढ़ने की बजाय वो उधर ही खड़ा रह कर दोनो बेहन भाई की मस्तियों से लुफ्त अंदोज़ होता रहा.

उधर कमरे में अपने भाई से अपनी चूत चटवाती नीलोफर के सबर का पैमाना लबरेज़ हो गया.

और “भाई बस करो और जल्दी से मेरे अंदर डाल दो” कहते हुए उस ने जमशेद को उस के सिर के बालों से पकड़ कर अपने उपर खींच लिया.

जमशेद अपनी बेहन की बेताबी देख कर मुस्कराया और उस ने अपनी बेहन की लंबी टाँगों को अपने हाथ में थाम कर अपने कंधों पर रखा लिया .

फिर अपने लंड को दूसरे हाथ से पकड़ कर बेहन की चूत के सुराख पर उपर नीचे रगड़ा.

जिस से जमशेद के लंड की टोपी उस की बेहन की चूत के रस से बहुत गीली हो गई..

ज्यों ही जमशेद ने अपने लंड की टोपी अपनी बेहन की चूत के मुँह पर रखा

तो मज़े से बे काबू नीलोफर के सारे बदन में एक कप कपि सी तरी हो गई.

नीलोफर की चूत उस के भाई के चाटने और अपनी चूत के पानी से भीग भीग कर पूरी गीली हो चुकी थी.

जब नीलोफर ने देखा के उस का भाई अपन लंड उस के अंदर डालने की बजाय उस की फुद्दि से सिर्फ़ छेड़ छाड़ ही कर रहा है तो उस के सबर का पेमाना लबरेज होने लगा.

नीलोफर: “भाई प्लीज़ अंदर डालो ना”

जमशेद बोला: जान क्या डालू अंदर”

नीलोफर: “भाई अंदर डालो ना प्लीज़ और मत तड़पाओ मुझे”

“खुल के बताओ क्या डालू अंदर बाजी” जमशेद को शायद अपनी बेहन की बेचैनि देख कर उसे छेड़ने और मस्ती करने में मज़ा आ रहा था.

नीलोफर: “अपना लंड मेरी चूत में डालो और मुझे चोदो प्लीज़, मुझ से अब मज़ीद सब्र नही हो रहा भाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई”

ये सुनते ही जमशेद ने अपनी बेहन की आँखो में आँखे डालते हुए अपने लंड का दबाव बेहन की चूत पर बढ़ाया. तो उस का लंड अपना रास्ता बनाता चूत में आराम से जाने लगा.

 
vnraj wrote: कहानी गर्म हो रही है धीरे धीरे
 
एक साल की चुदाई के बाद भाई का लंड नीलोफर की चूत के लिए अब अजनबी नही रहा था.

बल्कि अगर यह कहा जाय कि नीलोफर के निकाह नामे में लिखा हुआ उस के हज़्बेंड का नाम तो सिर्फ़ एक कागज़ी करवाई थी.

जब कि हक़ीकत में उस का असल शोहर तो उस का अपना भाई ही था. जो हफ्ते में दो तीन दफ़ा अपनी बेहन नीलोफर को एक बीवी की तरह चोद कर अपना शौहर वाला फर्ज़ निबटा रहा था.

इस लिए ज्यों ही जमशेद का लंड उस की बेहन की चूत में दाखिल हुआ तो नीलोफर एक दम चिल्लाई आआआआहह… आहिस्ताअ…आहह”.और उस की चूत खुशी में झूमते हुए गुनगुना उठी,

“ आइए आप का इंतिज़ार था”

जमशेद हल्का सा ऊपर उठा जिस की वजह से उस का लंड उस की बेहन की चूत से थोड़ा से बाहर निकला फिर दुबारा नीचे होते हुए उस ने दुबारा अपना लंड बेहन की चूत की वादियों में धकेल दिया.

इस के साथ उस ने अपने मुँह को थोड़ा नीचे किया और अपनी बेहन की छाती पर ऊपर नीचे होते हुए बेहन के बड़े बड़े मम्मों के निपल को अपने मूँह मे ले लिया और उस को सक करने लगा.

जब कि दूसरे साथ से उस ने बेहन के दूसरे मम्मे को काबू किया और नीलोफर के मम्मो को बहुत ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा.

नीलोफर भी आहहे भरती अपने भाई के लंड को अपनी चूत के अंदर महसूस कर के मज़े ले रही थी.

“हाईईईईई मेरे शोहर का मुझ से ताल्लुक सिर्फ़ एक निकाह नामे तक ही है. मेरे असल शौहर तो तुम हो मेरे भाई.मेरी फुद्दि को तुम्हारे लंड की आदत हो गई हैं भाई. अब तो में अपने शोहर से चुदवाते वक्त भी अपनी चूत में तुम्हारे लंड का ही तसव्वुर करती हूँ भाई”नीलोफर ने सिसकियाँ लेते हुए जमशेद से कहा.

इस के साथ साथ ही नीलोफर ने अपना एक हाथ अपनी चूत पर ले जा कर अपनी चूत के दाने को अपने हाथ से रगड़ना शुरू कर दिया.

अपनी बेहन की यह हरकत देख कर जमशेद मस्ती और जोश से बे हाल हो गया.

नीलोफर अपनी फुद्दि को ऊपर की तरह उठा उठा कर अपने भाई का पूरा लंड अपने अंदर ले रही थी.

उस की फुद्दि अपनी पानी छोड़ छोड़ कर बहुत गीली हो गई थी. जिस की वजह से जमशेद को अपनी बेहन की चूत में लंड पेलने का बहुत ज़्यादा स्वाद मिल रहा था.

अपनी बेहन को चोदते चोदते जमशेद रुका और अपना लंड बेहन की फुद्दि से निकाल लिया.

जमशेद का लौडा निलफोर की पानी छोड़ती फुद्दि से बहुत ज़्यादा गीला हो चुका था. और उस के लंड पर उस की बेहन की फुददी का सफेद जूस लगा हुआ साफ नज़र आ रहा था.

जमशेद ने अपने लंड को अपनी बेहन नीलोफर की आँखों के सामने लहराते हुआ कहा “ देखो तुम्हारी चूत कितनी मनी छोड़ रही है मेरे लंड को अपने अंदर ले कर मेरी जान”.

नीलोफर: ज़ाहिर है भाई जब आप इतने जोश से मेरी चूत की चुदाई कर रहे हो तो फुद्दि गरम हो कर पानी तो छोड़ेगी ना.

जमशेद अपनी बेहन की बात पर मुस्कुराया और उस ने अपने लंड पर लगे हुए बेहन का जूस को बिस्तर की चादर से सॉफ कर के एक झटके से लंड दुबारा अपनी बेहन की फुद्दि में डाल दिया.

अब जमशेद ज़ोर ज़ोर से अपनी बेहन की चूत को चोद रहा था. और साथ ही साथ वो कभी अपनी बेहन के एक मम्मे को तो कभी दूसरे मम्मे को अपने होंठो और हाथो से चूस्ता और दबाता जा रहा था कमरे में चुदाई की “ठप्प्प्प्प्प ठप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प के साथ साथ नीलोफर के मुँह से आहह आहह की आवाज़े भी निकल रही थी.

उधर बाथरूम में यह सारा नज़ारा ज़ाहिद के लिए ना क़ाबले बर्दाश्त था.

ज़ाहिद फॉरन अपनी शर्ट उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया और अपने लंड को हाथ में थामे दबे पाऊँ बिस्तर की तरफ बढ़ता चला गया.

और कमरे में जा कर नीलोफर के सिरहाने के पीछे खामोशी से खड़ा हो गया.

और नज़दीक से दोनो बेहन भाई की चुदाई को देखते हुए अपने लंड की हल्के हल्के मूठ लगाने लगा.

बिस्तर पर लेटी हुई नीलोफर की आँखे अपने भाई के लंड के स्वाद की शिद्दत की वजह से बंद थीं.

जब कि जमशेद भी अपनी बेहन के ऊपर झुका हुआ उस के होंठो का रस पीने में मसरूफ़ था.

इस लिए अपनी पूर जोश चुदाई में मगन दोनो बेहन भाई को ज़ाहिद की अपने पास मौजूदगी का फॉरन अहसास नही हुआ.

चुदाई में मशगूल जमशेद ज्यों ही अपनी बेहन के होंठो से अल्हेदा हो कर ऊपर उठा. तो उस की नज़रें उस की बेहन के सर के बिल्कुल पीछे खड़े एएसआइ ज़ाहिद पर पड़ी .

ज़ाहिद को यूँ बेकरार हालत में अपने इतने नज़दीक देख कर जमशेद एक लम्हे के लिए घबराया और हक्का बक्का रह गया.

इस से पहले के जमशेद अपना मुँह खोलता, ज़ाहिद ने अपनी मुँह पर अपनी उंगली रखते हुए जमशेद को खामोश रहने का इशारा किया.

जमशेद ज़ाहिद के इशारे के मुताबिक ना चाहते हुए भी खामोश रहने पर मजबूर हो गया.

ज़ाहिद की नज़रें नीलोफर के जवान,खूबसूरत और नंगे जिस्म पर वहसियाना अंदाज़ में जमी हुई थीं.जब के दोनो बेहन भाई की चुदाई का सारा मंज़र देख कर उस का लंड फूल तन का खड़ा था.

जमशेद ने जब ज़ाहिद को इस तरह अपनी बेहन के नंगे बदन का जायज़ा लेते देखा. तो ना जाने क्यों जमशेद को ज़ाहिद की इस हरकत पर गुसे आने की बजाय जमशेद को ज़ाहिद का इस तरह नीलोफर के नंगे बदन को घूर्ना अच्छा लगने लगा.

इस लिए उस ने ज़ाहिद की कमरे मे मौजूदगी के बावजूद अपनी बेहन की चूत में घुसे हुए अपने लंड को एक लम्हे के लिए भी नही रोका. बल्कि वो जोश में आते हुए और ज़ोर ज़ोर से अपनी बेहन को चोदने लगा.

नीलोफर की आँखे अभी तक बूँद थीं और वो हर बात से बे खबर अपना मुँह को हल्का से खोले अपने भाई के लौन्डे को अपनी फुद्दि के अंदर बाहर होता हुआ एंजाय कर रही थी.

ज़ाहिद अभी तक नीलोफर के सर के पीछे खड़ा कुछ सोच रहा था.

फिर अचानक ज़ाहिद के दिमाग़ में एक ख्याल आया. जिस पर उस ने अपने फंफंाते हुए लंड को अपने हाथ में था और थोड़ा आगे बढ़ कर अपने सामने लेटी हुई नीलोफर के खुले हुए गुलाबी होंठो के दरमियाँ अपना लंड रख दिया.

नीलोफर के होंठो के दरमियाँ लंड रखते ही ज़ाहिद के लंड की टोपी से उस का लंड का थोड़ा से वीर्य निकला. जिस ने नीलोफर के होंठो को गीला कर दिया.

अपनी आँखे मुन्दे बिस्तर पर लेटी नीलोफर अपने भाई का लंड नज़ाने कितनी बार चूस चुकी थी. इस लिए वो मर्द के लंड के स्वाद को अच्छी तरह पहचानती थी.

“जमशेद भाई तो मेरी चूत को चोद रहा है तो फिर मेरे मुँह में यह गरम गरम लंड किस का है” यह सोचते ही नीलोफर ने हड़बड़ा कर अपनी आँखे खोलीं.तो देखा कि एएसआइ ज़ाहिद उस के पास खड़ा अपना मोटा ताज़ा लंड उस के होंठो के दरमियाँ रगड़ने में मसगूल है.

नीलोफर ज़ाहिद की इस हरकत के लिए तैयार नही थी. क्योंकि उस ने तो यह सोचा भी ना था. कि उस की जिंदगी में कभी ऐसा मोका भी आए गा जब एक अजनबी उस के मुँह में इस तरह अचानक अपना लंड घुसेड दे गा और वो कुछ भी ना कर पाए गी.

इस लिए उस ने फॉरन अपने भाई जमशेद की तरफ देखा जो कि ज़ाहिद की मौजूदगी में भी उसे चोदने में मसरूफ़ था.

नीलोफर की तरह जमशेद भी ज़ाहिद का इस हरक्त पर हेरान हुआ. मगर उस ने ज़ाहिद को रोकने की कोई कॉसिश इस लिए नही की. क्योंकि वो इस तरह के सीन कई दफ़ा पॉर्न मूवीस में देख चुका था.

जब एक लड़का का लंड लड़की की चूत में और दूसरा उस के मुँह में होता है. और जमशेद को इस तरह के सीन देखने में मज़ा आता था.

इस लिए आज जिंदगी में पहली बार मूवीस में देखा हुआ सीन जमशेद ना सिर्फ़ लाइव देख रहा था. बल्कि वो और उस की सग़ी बेहन इस से सीन का खुद एक हिस्सा भी बन चुके थे.

नीलोफर की नज़रें सावलिया अंदाज़ में अपने भाई की तरफ गईं.उस का ख्याल था कि शायद उस का भाई जमशेद एएसआइ ज़ाहिद को अपनी हरकत से रोकने की कॉसिश करे गा.

मगर वो यह नही जानती थी कि अपनी बेहन को कई बार चोद कर बेहन चोद बन जाने वाला उस का भाई जमशेद आज एएसआइ ज़ाहिद के लंड को अपनी ही बेहन के मुँह में जाता देख कर एक बेगैरत भी बन चुका है.

और फिर जमशेद ने नीलोफर की आँखों में आँखे डाल कर उसे इशारे से कहा कि जो हो रहा है उसे होने दो.

 
नीलोफर को अपने भाई के इस अंदाज़ से हैरत हुई और उस ने खुद अपने मुँह में घुसे हुए ज़ाहिद के लंड को निकालने की एक नाकाम कॉसिश की.मगर ज़ाहिद के मज़बूत हाथो ने उस के कमज़ोर बाज़ुओं को अपनी जकड में ले लिया और वो कुछ ना कर पाई.

ज़ाहिद ने अब अपनी गान्ड को हल्का हल्का आगे पीछे हिलाना शुरू किया.

नीलोफर के थूक से ज़ाहिद का लंड गीला हो चुका था. इस वजह से अब ज़ाहिद का लंड नीलोफर के नरम होंठो से रगड़ ख़ाता उस के मुँह में आसानी से अंदर बाहर होने लगा.

ज़ाहिद का लंड बहुत मोटा था.इस लिए नीलोफर को ज़ाहिद का लंड अपने मुँह में लेने के लिए अपना पूरा मुँह खोलना पड़ रहा था.

नीलोफर ने ज़ाहिद के लंड को अपने मुँह में जाने से रोकने के लिए थोड़ी मुज़मत तो की.

मगर आज अपने जिस्म को दो मर्दो के हाथो में खेलता हुआ पा कर उस का अपने उपर कंट्रोल टूट गया. और उस की चूत बुरी तरह गीली होने लगी.

नीलोफर का दिल और दिमाग़ तो उसे रोकने की कॉसिश में थे. मगर उस की चूत में लगी हुई आग उसे किसी और ही बात पर बहका रही थी.

उस समझ आने लगा कि मुज़हमत का कोई फ़ायदा नही है. इस लिए उस ने भी जज़्बात की रौ में बह कर ज़ाहिद के लंड को पकड़ लिया और उसे अपने मुँह में डालने लगी.

अपनी बेहन की इस हरकत को देख कर जमशेद को भी जोश आ गया ऑर वो भी स्पीड में आते हुए अपनी बेहन की चूत में तेज तेज घस्से मारने लगा.

जमशेद गान्डू(गे) तो नही था. मगर इस के बावजूद अपनी बेहन के होंठो के दरमियाँ फिरते हुए ज़ाहिद के इतने बड़े और मोटे लंड को देख कर वो अपने ऊपर काबू ना रख पाया.

और फिर अपनी बेहन को चोदते चोदते जमशेद को नज़ाने की सूझी. के उस ने भी अपनी बेहन के ऊपर लेटते हुए नीलोफर के मुँह में धन्से हुए ज़ाहिद के मोटे तगड़े लंड के ऊपर अपनी ज़ुबान रख दी और ज़ाहिद का लंड सक करने लगा.

जमशेद को यूँ ज़ाहिद का लंड चुसते देख कर नीलोफर और ज़ाहिद दोनो के मुँह से एक सिसकारी निकली” आआःःःःःःःःःःःःहाआआआआआआआआआआआआआआआआआआ”

जमशेद ने जो हरकत की उस ने ना सिर्फ़ ज़ाहिद बल्कि नीलोफर को भी हक्का बक्का कर दिया.

“भाई यह आप क्या कर रहे हैं” नीलोफर ज़ाहिद के लंड को अपने मुँह से निकालते हुए ज़ोर से चिल्लाई.

“उफफफफफफफ्फ़ मेरी जान,यह हरगिज़ मत समझना कि में गान्डु हूँ. बस बात यह है कि आज तुम को अपने सामने किसी और मर्द का लंड चूस्ते देख कर में भी हवस की आग में बहक गया हूँ” जमशेद ने ज़ाहिद के लंड से अपनी ज़ुबान हटाते हुए जवाब दिया.

जमशेद अपनी इस हरकत से खुद भी बहुत शर्मिंदा हुआ.उस को अब अपनी बेहन से आँखे मिलाने की हिम्मत नही हो रही थी.इस लिए वो नीलोफर से नज़रें चुराते हुए थोड़ा नीचे झुका और अपनी बेहन के तने हुए निपल्स को मुँह में भर कर प्यार करने लगा.

अपने भाई को यूँ दीवाना वार किसी और मर्द के लंड की चुसाइ लगाती देख कर निलफोर की चूत में से उस का पानी एक फव्वारे की तरह बहने लगा.

उस ने भी अब और जोश में आते हुए ज़ाहिद के लंड की टोपी को अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया.

जब के नीचे से उस की फुद्दि अब पहले से ज़्यादा तेज़ी से उठा और उठ कर अपने भाई के लंड को अपने अंदर समाने लगी.

एएसआइ ज़ाहिद के लिए भी उस की जिंदगी का यह पहला तजुर्बा था. जब दो ज़ुबाने एक साथ उस के लंड पर चल रही थीं.

और वो दो ज़ुबाने ना सिर्फ़ एक मर्द और एक औरत की थीं. बल्कि वो दोनो मर्द औरत आपस में बेहन भाई भी थे.

ज़ाहिद ने भी जोश में आते हुए नीलोफर को उस के सर से पकड़ लिया ऑर ज़ोर ज़ोर से अपना लंड नीलोफर के मुँह में आगे पीछे करने लगा. कि जैसे वो नीलोफर के मुँह को चोद रहा है..

एएसआइ ज़ाहिद का लंड नीलोफर के मुँह में जा कर अब मज़ीद सख़्त ओर लंबा होता जा रहा था.

अपने भाई से चुदवाते हुए नीलोफर भी ज़ाहिद के लंड को मज़े मज़े से चूसने लगी.

कमरे में बिछे बिस्तर पर उन तीनो की चुदाई कुछ देर इसी अंदाज़ में जारी रही.

फिर कुछ मिनिट्स के बाद जमशेद अपना लंड अपनी बेहन की चूत से बाहर निकल कर खुद बिस्तर पर लेट गया और नीलोफर को अपने हवा में तने हुए लंड पर आन कर बैठ जाने का कहा.

अपने भाई के हुकम की तकमील करते हुए नीलोफर ने ज़ाहिद के लंड को अपने मुँह से निकाला और अपने भाई के बदन के ऊपर जा कर उस के लौडे को अपने हाथ में था और आहिस्ता आहिस्ता अपने जिस्म को नीचे लाने लगी.जिस वजह से जमशेद का लंड इंच बाइ इंच उस की बेहन की चूत में समाने लगा.

जब नीलोफर अपने भाई के लंड को उस की जड़ तक अपने अंदर ले चुकी. तो वो अपने भाई के लंड पर बैठ कर ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत को अपने भाई के लंड से चुदवाने लगी.

इस पोज़िशन में नीलोफर की तंग चूत में उस के भाई जमशेद का लंड बहुत ही ज़्यादा फँस फँस कर अंदर बाहर हो रहा था.

जिस की वजह से नीलोफर को बहुत मज़ा आ रहा था और पूरे कमरे में उस की लज़्ज़त भरी तेज चीखे गूँज रहीं थीं.

आआआआहहुउऊुुुुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफूऊओुईईईईई माआआआऐययईईईईईईईन्न्नननननणणन् म्म्म्मउमममममममाआआआररर्र्र्र्र्र्ररर गगगगगगगैइिईईईईईईई उूुुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफ्फ़ भाई आप बहुत अच्छी चुदाई करते हैं.

आआआआआहह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है उूुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ प्लीज़ और तेज झटके मारो उूुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ और ज़ोर से मेरी चुदाई करो.

जमशेद अपनी बेहन की लज़्ज़त भरी चीखे सुन कर और तेज़ी से उस की प्यासी चूत को चोदने लगा.

जमशेद के ज़ोर दार झटकों की वजह से उस की बेहन उस के लंड पर बैठी लज़्ज़त से बुरी तरह मचल रही थी.

ज़ाहिद पहले तो कुछ देर यूँ ही खड़ा दोनो बेहन भाई की चुदाई का नज़ारा देख कर मूठ लगाता रहा.

फिर चन्द लम्हे बाद वो उठ कर नीलोफर के पीछे आन बैठा और जमशेद के लंड को उस की बेहन की चूत में आते जाते देखने लगा.

जमशेद के लंड के ऊपर झुक कर बैठने की वजह से नीलोफर की टाँगे चौड़ी हो रही थीं.

जिस की वजह से उस के पीछे बैठे एएसआइ ज़ाहिद को नीलोफर की गान्ड का हल्का हल्का खुलता और बंद होता ब्राउन कलर का सुराख बिल्कुल सॉफ दिखाई देने लगा.

एएसआइ ज़ाहिद इस से पहले काफ़ी औरतो की गान्ड को चोद चुका था.इस लिए नीलोफर की गान्ड के सुराख को पहली नज़र में ही देख कर ज़ाहिद के तजुर्बे ने उसे बता दिया कि नीलोफर की गान्ड अभी तक कंवारी है.

नीलोफर की मोटी और उभरी हुई गान्ड के कंवारे ब्राउन सुराख को देख कर ज़ाहिद का लंड खुशी से उछलने लगा.

 
उस का दिल चाहने लगा कि वो आगे बढ़ कर नीलोफर की गान्ड के खुलते और बंद होते सुराख की खुसबू को ना सिर्फ़ सूँघे बल्कि गान्ड के सुराख को अपनी ज़ुबान से चूखे,चूमे और चाटे.

यह ही सोच कर ज़ाहिद आहिस्ता से आगे बढ़ा और नीलोफर के पीछे बिस्तर पर बैठे बैठे अपने हाथों से उस की गान्ड को थोड़ा और चौड़ा किया.और फिर साथ ही झुक कर उस ने अपनी नोकिली ज़ुबान की टिप से नीलोफर की गान्ड के सुराख को हल्का सा छुआ.

ज्यों ही एएसआइ ज़ाहिद की ज़ुबान नीलोफर की गान्ड के सुराख से टच हुई. तो नीलोफर के मुँह से एक सिसकरीईईईईईई फुटीईईईईईईईईईई.“हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़”.

ज़ाहिद की गरम ज़ुबान नीलोफर की गान्ड के सुराख से टकराने की वजह नीलोफर को एक हल्की सी गुदगुदी हुई. जिस की वजह से वो थोड़ी सी कांप गई और उस ने अपनी गान्ड के सुराख को भींच कर टाइट कर लिया.

ज़ाहिद ने जब नीलोफर को यूँ अपनी गान्ड टाइट करते देखा तो उस ने नीलोफर की गान्ड की बड़ी और गुदाज पहाड़ियों को अपने हाथो में थाम कर खोला और पहले तो उस पर एक तवील चूमि ली. और फिर नीलोफर की गान्ड के सुराख को मुँह में भर कर उसे पागलों की तरह अपनी ज़ुबान से चाटने लगा.

आज तक जमशेद या नीलोफर के शोहर ने नीलोफर की गान्ड पर इस तरहा से प्यार नही किया था. इस लिए यह नीलोफर के लिए एक नया तजुर्बा था.

उस को ज़ाहिद की ज़ुबान अपनी गान्ड पर फिरते हुए महसूस कर के बहुत मज़ा आ रहा था और वो लज़्ज़त के मारे सिसकारियाँ लेने लगी.

अपने भाई के लंड को अपने अंदर बाहर लेती और एएसआइ ज़ाहिद के मुँह से अपनी गान्ड के सुराख को चटवाती नीलोफर लज़्ज़त के मारे मरी जा रही थी.

अपनी गान्ड के अंदर तक जाती ज़ाहिद की ज़ुबान ने उसे मज़े से बेहाल कर दिया था.

मज़े की शिद्दत से वो पागल हुए जा रही थी.उस का बस चलता तो वो ज़ाहिद की ज़ुबान को अपनी गान्ड की तह तक ले जाती.

जमशेद भी ज़ाहिद की नीलोफर की चौड़ी गान्ड में घुमती हुई ज़ुबान की लापर्र्ररर लाप्र्र्रर और नीलोफर की सिसकारीओं को सुन कर जोश में अपनी बेहन की चूत के मज़े लेने में मगन था.

अपने अपने जिस्मो की आग ने दोनो बहन भाई को इतना मस्त कर दिया था. कि वो दोनो यह ना देख पाए कि एएसआइ ज़ाहिद नीलोफर की गान्ड के सुराख को अपनी ज़ुबान से तर करने के साथ साथ बिस्तर की साइड टेबल पर पड़ी पोंड क्रीम से अपने लंड को भी फुल तर कर के उसे नीलोफर की कंवारी गान्ड में डालने के लिए तैयार कर चुका है.

इस से पहले के नीलोफर या जमशेद कुछ समझ पाते. ज़ाहिद ने नीलोफर के पीछे घुटनो के बल बैठ कर अपने तने हुए मोटे,सख़्त और बड़े लंड को हाथ में थामा और फिर एक दम से अपना मस्त लंड नीलोफर की गान्ड पर रख कर एक ज़ोरदार झटका मारा.

नीलोफर की गान्ड से “घुऊदूप” की एक तेज आवाज़ निकली और ज़ाहिद का बड़ा लंड नीलोफर की गान्ड की दीवारों को बुरी तरहा से चीरता हुआ जड़ तक उस की गान्ड के अंदर घुस्स गया.

ज़ाहिद का झटका इतना अचानक और इतना ज़ोरदार था. कि नीलोफर के हलक़ से बे इकतियार एक चीख निकल गई और वो झटके के ज़ोर से अपने सामने लेटे हुए अपने भाई जमशेद की छाती पर गिर पड़ी.

“यह किस ने

मेरी गान्ड में

इतना बड़ा लंड डाला

मार डाला हाएएयी मार डाला”

नीलोफर दर्द की शिद्दत से चिल्ला उठी.

“हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई मेंन्नननननननननननणणन् मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गई आआआआआआआआआआ.................................ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ.............................

...आMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMईईईई अम्मिईीई......... मेरिइईईईईईईईईईईईईई तो फटत्त गेिईईईईईई नीलोफर की आवाज़ इतनी उँची थी कि यक़ीनन कमरे से बाहर भी उस की चीख की आवाज़ ज़रूर पहुँची हो गी.

नीलोफर ने आगे बढ़ते हुए अपने आप को ज़ाहिद के लंड के चुंगल से बचाने की एक नाकाम कोशिस की. मगर ज़ाहिद ने नीलोफर की गान्ड की पहाड़ियों को अपने हाथ में कस कर था और अपना लंड एक झटके से नीलोफर की गान्ड से बाहर निकाल लिया.

एएसआइ ज़ाहिद का लंड नीलोफर की गान्ड में बुरी तरहा से फँसा हुआ था.

इस लिए ज्यों ही ज़ाहिद ने अपना लंड नीलोफर की गान्ड से निकाला तो ऐसी आवाज़ आई जैसे किसी बॉटल का ढक्कन खोल दिया हो.

ज़ाहिद ने दोबारा झटका मारा,नीलोफर दुबारा चीखी और झटके के ज़ोर से फिर अपने भाई के उपेर गिर पड़ी.

अब की बार जमशेद ने अपनी बेहन के जिस्म के गिर्द अपने हाथ बाँध कर उसे अपनी बाज़ुओं में क़ैद कर लिया. और अपनी बेहन के मुँह पर अपना मुँह राख कर उस के होंठो को चूसने लगा.

जमशेद ने जब ज़ाहिद को यूँ नीलोफर की कंवारी गान्ड की सील तोड़ते हुए देखा तो उसे बहुत मज़ा आया.

वो इस से पहले कई बार अपनी बेहन से उस की गान्ड मारने की फरमाइश कर चुका था. मगर नीलाफर ने आज तक उस की यह बात नही मानी थी.

इस लिए आज ज़ाहिद से नीलोफर की गान्ड चुदाई के बाद जमशेद को यकीन था. कि अब जल्द ही वो भी अपनी बेहन की गान्ड का स्वाद चाख पाए गा.

जमशेद ने इशारे से ज़ाहिद को अपनी चुदाई रोकने को कहा. तो नीलोफर की गान्ड में झटके मारता हुआ ज़ाहिद रुक गया.

असल में जमशेद चाहता था कि ज़ाहिद थोड़ा रुक कर नीलोफर को संभालने का मोका दे. ता कि नीलोफर की गान्ड ज़ाहिद के मोटे और बड़े लंड को अपने अंदर अड्जस्ट कर सके.

क्योंकि एक दफ़ा जब नीलोफर की गान्ड का दर्द काम हो गा. तो उस के बाद वो सही मायनों में ज़ाहिद के लंड को अपनी गान्ड में ले कर मज़े से चुदवा सके गी.

 
vnraj wrote: ऊफफफफ कहीं भी रोक देते है । जरा हमलोगो का भी ख्याल रखिये
 
कुछ देर ज़ाहिद ने ऊपर से कोई हरकत ना की मगर नीचे से जमशेद हल्के हल्के झटके मारता हुआ अपनी बेहन की चूत को चोदने में मसरूफ़ रहा.

नीलोफर ने अब अपनी गान्ड को थोड़ा ढीला छोड़ दिया. जिस की वजह उस की गान्ड में दर्द की शिद्दत कम होने लगी और अब उसे अपनी गान्ड में फँसा हुआ ज़ाहिद का लंड अच्छा लगने लगा.

जब ज़ाहिद ने महसूस किया कि नीलोफर की गान्ड की दीवारे उस के लंड के इर्द गिर्द थोड़ी ढीली पड़ने लगी हैं. तो वो भी समझ गया कि अब नीलोफर की गान्ड ने उस के लंड को अपनी आगोश में “काबूलियत” का “शरफ” बख्स दिया है.

इस बात को जानते ही ज़ाहिद ने आहिस्ता आहिस्ता अपने लंड को आगे पीछे कर के नीलोफर की गान्ड की चुदाई दुबारा से शुरू कर दी.

ज़ाहिद ने अपना पूरा दबाव नीलोफर की पुष्ट पर डाला हुआ था. जिस की वजह से नीलोफर बुरी तरहा अपनी भाई के सीने से चिपटी हुई थी. और ज़ाहिद के झटकों की वजह से नीलोफर के बड़े बड़े मम्मे के निपल्स उस के भाई की सख़्त छाती से रगड़ खा रहे थे. इस वजह से नीलोफर को अपनी चुदाई का और भी मज़ा आ आने लगा.

नीलोफर की चूत और गान्ड के दरमियानी हिस्से में जो उस के बदन का पतला सा गोश्त था.उस गोश्त के अंदर से जमशेद को नीलोफर की गान्ड में जाता हुआ ज़ाहिद का लंड अपने लंड से टकराता हुआ महसूस हो रहा था.

जब कि नीचे से ज़ाहिद के लटकते हुए टटटे जमशेद के टट्टो के साथ टकरा रहे थे.

अब नीलोफर अपने भाई और एएसआइ ज़ाहिद के दरमियाँ में एक स्वन्डविच बनी हुई थी. और वो दोनो नीलोफर की चूत और गान्ड को मज़े ले ले कर चोद रहे थे.

नीलोफर ने इस से पहले कभी दो मर्दो से एक साथ नही चुदवाया था. इस लिए चुदाई के इस अंदाज़ ने उस को जिन्सी लज़्ज़त की उन मंज़िलो तक पहुँचा दिया कि जिस का उस ने कभी तसव्वुर भी नही किया था.

वो अब तक कितनी बार झड चुकी थी. इस का खुद उसे भी नही पता था.झड झड कर नीलोफर की चूत पूरी सूख चुकी थी.

नीलोफर को अपनी इस तरह की चुदवाइ का बहुत मज़ा आ रहा था और वो मज़े के आलम में चीखने लगी.

जमशेद और ज़ाहिद को नीलोफर की चूत और गान्ड की चुदाई करते हुए 10 मिनिट्स से ज़्यादा का टाइम हो गाया था.और इस ज़ोरदार चुदाई की वजह से वो तीनो पसीने पसीने हो गये थे.

कुछ लम्हे बाद जमशेद बोला: ओह्ह्ह्ह नीलोफर मेरी जान में अब छूटने वाला हूँ.

ज़ाहिद ने ज्यों ही यह सुना तो वो नीलोफर के पीछे से फॉरन बोला: यार थोड़ा सबर कर में भी छूटने लगा हूँ दोनो साथ छूटेंगे.

फिर दोनो ने एक साथ पूरे जोश में आ कर नीलोफर की चूत और गान्ड में झटके मारे.

दोनो के लंड ने एक साथ झटका खाया और दोनो के लंड से एक साथ वीर्य की पिचकारी निकली. जो नीलोफर की चूत और गान्ड को एक साथ भरती चली गई.

दो लंड के गरमा गरम वीर्य को एक साथ अपनी चूत और गान्ड के अंदर छूटता हुआ महसूस कर के नीलोफर को जो मज़ा मिला वो उस के लिए ना क़ाबले बयान था.

मज़े की शिद्दत से महज़ूज़ होते हुए नीलोफर के जिस्म ने एक झटका खाया और उस की अपनी चूत ने भी एक बार फिर अपना पानी छोड़ दिया.

अपनी चूत का पानी छूटा हुआ महसूस करते ही नीलोफर को ऐसा स्वाद आया कि उस ने मज़े में आते हुए अपनी आँखे बंद कर लीं.

नीलोफर की ऐसी चुदाई आज तक किसी ने नही की थी.वो अपने हाल से बे हाल हो गई थी. और वो इस भरपूर चुदाई के हाथो बिल्कुल मदहोश हो चुकी थी.

अब वो तीनो बिस्तर पर एक दूसरे के ऊपर उसी तरह पड़े लंबी लंबी साँसे ले रहे थे.

जमशेद और ज़ाहिद के लंड अभी तक नीलोफर की गान्ड और चूत में धन्से हुए थे. और उन के लंड का रस आहिस्ता आहिस्ता बहता हुआ नीलोफर की चूत और गान्ड से बाहर निकल कर बिस्तर की चादर में जज़्ब हो रहा था.

कुछ देर बाद जब अपने जिस्म के ऊपर बेसूध पड़े एएसआइ ज़ाहिद के जिस्म का बोझ नीलोफर के लिए ना क़ाबले बर्दास्त हो गया तो उस ने ज़ाहिद को अपने जिस्म से अलग होने को कहा.

ज्यों ही ज़ाहिद नीलोफर से अलहदा हो कर बिस्तर पर ढेर हुआ. तो नीलोफर की जान में जान आई.

थोड़ी देर अपनी बिखरी सांसो को बहाल करने के बाद नीलोफर अपनी भाई के लंड से उठी और अपने कपड़े ले कर बाथरूम की तरफ चल पड़ी.

आज दो मर्दो के हाथो अपनी चुदाई और ख़ास्स तौर पर पहली दफ़ा गान्ड मरवाई के बाद नीलोफर के लिए इस वक्त बाथरूम तक चल कर जाना भी मुश्किल हो रहा था.

उस की चूत और गान्ड चुदाई की शिद्दत की वजह से सूज कर फूल गईं थीं. और उस की चूत और गान्ड में बुरी तरह से एक जलन सी हो रही थी.जिस की वजह से उस के लिए चलना भी मुहाल हो रहा था.

जैसे तैसे कर के वो बाथरूम पहुँची और अपने मुँह और जिस्म को सॉफ कर के उस ने बड़ी मुश्किल से अपने कपड़े पहने और फिर बाथरूम से बाहर निकल आई.

नीलोफर के बाथरूम से बाहर आने तक जमशेद और ज़ाहिद भी अपने अपने कपड़े पहन चुके थे.

ज्यों ही नीलोफर बाथरूम से वापिस लॉटी तो एएसआइ ज़ाहिद ने दोनो बेहन भाई को अपनी क़ैद से रिहाई की सज़ा सुनाई.

जमशेद और नीलोफर को यकीन ना हुआ कि ज़ाहिद उन को यूँ पैसे लिए बगैर जाने दे गा.

मगर फिर ज्यों ही उन्हो ने ज़ाहिद के मुँह से चले जाने के इलफ़ाज़ सुने. तो जमशेद और नीलोफर ने फॉरन कमरे से बाहर निकल जाने में ही अपनी ख़ैरियत समझी.

वो दोनो बेहन भाई जैसे ही कमरे से बाहर निकलने लगे तो ज़ाहिद ने उन को पीछे से आ कर फिर रोक लिया.

ज़ाहिद: में तुम दोनो को एक शर्त पर जाने की इजाज़त दे रहा हूँ.

जमशेद: वो क्या?.

ज़ाहिद: बात यह है कि आज नीलोफर को चोद कर मुझे बहुत मज़ा आया है और में चाहता हूँ कि तुम कभी कभार उसे मुझ से चुदवाने के लिए इधर ले आया करो.

यह कह कर ज़ाहिद ने जमशेद को अपने मकान की चाभी देते हुए कहा” इसे अपने पास रख लो और जब दिल चाहे तुम लोग बिना किसी खोफ़ के इधर आ कर एक दूसरे के साथ चुदाई कर सकते हो.

जमशेद दिली तौर पर ज़ाहिद की किसी शर्त या ऑफर को कबूल करने पर तैयार ना हुआ. मगर मोके की नज़ाकत को समझते हुए उस ने खामोशी इक्तियार कर के ज़ाहिद से चाभी ले कर अपनी पॉकेट में रख ली और अपनी बेहन को ले कर तेज़ी से बाहर निकल गया.

उस शाम जब ज़ाहिद अपने घर वापिस आया तो उस की नज़र घर के सहन में काम करती अपनी बेहन शाज़िया पर पड़ी. जो उस वक्त एक टब में पानी ले कर सब घर वालो कपड़े धोने में मसरूफ़ थी.

ज़ाहिद को घर के अंदर आते देख कर शाज़िया ने अपने भाई को सलाम किया और भाई का हाल चाल पूछ कर दुबारा अपने काम में मसरूफ़ हो गई.

शाज़िया को देखते ही ज़ाहिद को दिन में नीलोफर की कही हुई बात याद आ गई. कि जवान जिस्म की आग बहुत ज़ालिम होती है. और जवानी की यह आग रात की तन्हाई में एक अकेली औरत को उस के बिस्तर पर बहुत तंग करती है.

ज़ाहिद यह बात याद कर के सोच में पड़ गया. कि अगर शादी शुदा होने के बावजूद नीलोफर को उस की जिस्म की आग इतना तंग कर सकती है.के वो अपने शोहर के होते हुए भी अपने ही सगे भाई से चुदवाने पर मजबोर हो जाय.

जब कि उस की बेहन शाज़िया तो एक तलाक़ याफ़्ता औरत है. वो अभी जवान है और नीलोफर की तरह यक़ीनन शाज़िया की जवानी के भी जज़्बात होंगे . तो वो कैसे अपने इन जज़्बात को ठंडा करती होगी.

आज दिन को पेश आने वाले वाकये का खुमार अभी तक ज़ाहिद के होशो-हवास पर छाया हुआ था. जिस ने ज़ाहिद को अपनी बेहन के बड़े में पहली बार ऐसा कुछ सोचने पर मजबूर ज़रूर कर दिया था. जब के आम हालत में ज़ाहिद के दिमाग़ में इस किस्म की सोच आना एक नामुमकिन सी बात होती.

लेकिन इस के साथ साथ हर भाई की तरह ज़ाहिद के लिए भी उस की बेहन एक शरीफ और पाक बाज़ औरत थी.और अपनी बेहन के मुतलक ज़ाहिद ज़ेहनी तौर पर यह बात कबूल करने को तैयार नही हो पा रहा था. कि नीलोफर की तरह उस की बेहन शाज़िया भी गरम होती हो गी.

इस लिए वो अपने दिमाग़ में आने वाले इन ख्यालात को झटकता हुआ अपनी अम्मी के पास टीवी लाउन्ज में जा बैठा.

 
ज़ाहिद की अम्मी ने अपने बेटे के लिए खाना लगा दिया. ज़ाहिद खाना खाते ही अम्मी को खुदा हाफ़िज़ कह कर अपने कमरे में चला आया और एक फिर की स्टडी करने लगा.

ज़ाहिद को दूसरे दिन सुबह जल्दी उठा कर पिंडी जाना था. इस लिए वो जल्द ही बिस्तर पर सोने के लिए लेट गया और दिन भर की थकावट की बदोलत वो फ़ॉरन ही नींद में चला गया.

उधर भाई की नज़रो में शरीफ और नेक परवीन नज़र आने वाली शाज़िया की हालत भी नीलोफर से मुक्तिलफ नही थी.

शाज़िया के जिस्म में भी जवानी की आग तो बहुत थी. मगर अपनी इस आग को किसी गैर मर्द से बुझवाने के लिए वो कोई ख़तरा मोल नही ले सकती थी.

क्योंकि वो नही चाहती थी.कि इस के किसी भी ग़लत कदम से उस के खानदान की इज़्ज़त पर कोई उंगली उठाए.

मगर इस के बावजूद सच्ची बात तो यह थी. कि नीलोफर की तरह शाज़िया को भी तलाक़ के बाद उस के अपने जिस्म की आग ने बहुत परेशान कर रखा था.

लेकिन शाज़िया अपने जिस्म की आग को अभी तक अपने अंदर ही रख ने में कामयाब रही थी.

क्योंकि इस आग को संभालने का हल उस ने यह निकाला था. कि वो बाथरूम में नहाते वक्त अक्सर अपनी जवानी की आग को अपनी उंगली से ठंडा कर के पूर सकून हो जाती थी.

उस रात भी शाज़िया किचन में सारे काम निपटा कर थकि हारी अपने कमरे में आइए तो देखा कि उस की अम्मी उस के आने से पहले ही सो चुकी हैं.

शाज़िया ने भी खामोशी से अपना बिस्तर सीधा किया और अपना दुपट्टा उतार कर अपने सिरहाने रखा और अपने बिस्तर पर लेट गई.

कमरे में उस की अम्मी के ख़र्राटों की आवाज़ पूरी तरह से गूँज रही थी. इस लिए इस शोर में शाज़िया का सोना मुहाल हो रहा था.

वैसे भी आज नींद शाज़िया की आँखों से कोसो दूर थी. वो करवट ले कर कभी इधर तो कभी उधर , कभी सीधा तो कभी उल्टा हो रही थी.

इस की वजह यह थी. कि हर शादी शुदा लड़की की तरह शाज़िया को तलाक़ के बाद भी अपनी सुहाग रात कभी नही भूली थी. और आज फिर शाजिया को अपनी सुहाग रात शिद्दत से याद आ रही थी.

उस रात शाज़िया को उस के सबका शोहर ने 3 बार चोदा था और उन की चुदाई सुबह होने तक चली थी.

अपनी सुहाग रात को याद कर के शाज़िया की हालत बिगड़ने लगी और उस का पूरा जिस्म पसीने से भीगने लगा.जब कि प्यास कर मारे उस का गला भी खुश्क हो चुका था.

शाज़िया ने अपनी कमीज़ के कोने को उठा कर अपना चहरा सॉफ किया. फिर और दूसरे बिस्तर पर सोई हुई अपनी अम्मी की तरफ देख कर वो यह इतमीनान करने लगी कि वाकई ही उस की अम्मी सो चुकी हैं या नही.

कमरे में हल्की हल्की रोशनी की वजह से उस को नज़र आया कि उस की अम्मी वाकई ही दूसरी तरफ करवट बदल कर सो रहीं हैं. तो शाज़िया ने पहले तो अपने दोनो हाथो से अपनी बड़ी बड़ी छातियों को अपने हाथो में ले कर उन को हल्का हल्का दबाना शुरू किया.

फिर थोड़ी देर अपने मम्मों से खेलने के बाद शाजिया ने अपना एक हाथ आहिस्ता आहिस्ता अपने पेट से नीचे ले जा कर उसे अपनी शलवार के अंदर डाला और अपने हाथ को अपनी चूत के ऊपर रख दिया.

अपने चूचों से खुद की छेड़ खानी करने ही से शाज़िया की हालत बहुत बिगड़ चुकी थी. अपने चूचों को अपने हाथों से प्रेस करने की बदोलत ना सिर्फ़ शाज़िया की चूत बिल्कुल गीली हो गई थी. बल्कि उस की सारी शलवार भी चूत का पानी छूटने की वजह से गीली हो गई थी.

शाज़िया ने अपने हाथ को अपनी चूत के ऊपर रखते ही अपनी गीली चूत में दो उंगलियाँ डाल दीं और बहुत तेज़ी के साथ अपनी उंगलियों को चूत में अंदर बाहर करने लगी.

शाज़िया के दिमाग़ में शादी के दिनो के वो सारे मंज़र घूमने लगे. जब उस का शोहर उसे तरह तरह के पोज़ में चोदता था.

अपने पुराने शोहर का लंबा, मोटा और सख़्त लंड शाज़िया को इस वक्त बहुत याद आ रहा था.और वो गरम होते हुए अपनी चूत को खुद ही अपनी उंगलियों से चोद रही थी.

इस तरह अपनी चूत से खेलते वक्त शिद्दती जज़्बात से बेबस हो कर शाज़िया अपने होश गँवा बैठी.

उसे यह याद ही ना रहा कि उस के साथ कमरे में उस की अम्मी भी सो रही हैं.

अपनी चूत को रगड़ते रगड़ते शाज़िया के मुँह से “सीयी सीयी सी उम्मह उम्मह” की आवाज़ें आने लगीं.जिन को सुन कर कमरे के दूसरी तरफ़ सोती हुई शाज़िया की अम्मी रज़िया बीबी की आँखे अचानक खुल गई.

पहले तो रज़िया बीबी को समझ नही आई कि यह किस किस्म की आवाज़ें उस के कानो में सुनाई दे रही हैं. फिर जब उस की आँखें कमरे की हल्की रोशनी में देखने के काबिल हुईं. तो उस ने अपनी बेटी शाज़िया के जिस्म के निचले हिस्से पर पड़ी चादर को तेज़ी से ऊपर नीचे होते देखा तो वो हैरत जदा रह गई.

रज़िया बीबी खुद बेवा की ज़िंदगी गुज़ार रही थी. इस लिए वो अपनी बेटी की तरफ देखते और कमरे में आती आवाज़ों को सुन कर फॉरन समझ गई. कि इस वक्त उस की बेटी शाज़िया किस किसम का “खेल” खेलने में मसरूफ़ है.

फिर रज़िया के देखते ही देखते शाज़िया के जिस्म ने एक ज़ोर का झटका लिया और फिर वो पुरसकून हो गई.

शाज़िया की अम्मी ने अपनी बेटी को अपनी चूत में उंगली मारते देख तो लिया था. मगर वो यह बात सोच कर चुप हो गई कि आख़िर जवान बेटी के भी जज़्बात हैं.

और अपने शोहर से तलाक़ के बाद अपने जवानी के मचलते जज़्बात को बुझाने के लिए अब शाज़िया कर भी क्या सकती थी.

यही बात सोच कर रज़िया बीबी ने करवट बदली और फिर से सोने के जतन करने लगी.

 


उधर अपनी अम्मी के जाग जाने से बे खबर शाज़िया ने भी अपनी चूत के पानी को निकाल कर सकून की साँस ली और अपने हाथ को अपनी शलवार के अंदर ही छोड़ कर नींद में चली गई.

दूसरे दिन ज़ाहिद को एक केस के सिलसिले में रावलपिंडी की हाइ कोर्ट में अपना बयान रेकॉर्ड करवाना था. इस लिए वो अपनी अम्मी और बेहन शाज़िया के उठने से पहले ही घर से निकल कर पिंडी चला गया.

शाज़िया सुबह उठ कर स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगी. जब कि उस की अम्मी ने हाथ मुँह धो कर अपने और शाज़िया के लिए नाश्ता तैयार करना शुरू कर दिया.

नाश्ते से फारिग होते ही शाज़िया के कानों में अपनी स्कूल वॅन के हॉर्न की आवाज़ सुनाई दी. तो वो जल्दी से अम्मी को खुदा हाफ़िज़ कह कर स्कूल के लिए निकल पड़ी.

स्कूल पहुँच कर ज्यों ही शाज़िया स्टाफ रूम में दाखिल हुई. तो उस का सामना चेयर पर बैठी हुई एक खूबसूरत और जवान टीचर से हुआ.

शाज़िया यह ज़रूर जानती थी कि यह टीचर अभी नई नई (न्यू) उस के स्कूल में आई है. मगर इस टीचर से अभी तक शाज़िया का तार्रुफ नही हुआ था.

जब उस टीचर ने शाज़िया को स्टाफ रूम में दाखिल होते देखा तो वो अपनी चेयर से उठ खड़ी हुई और शाज़िया की तरफ अपना हाथ बढ़ाते हुए बोली” अस्लाम-वालेकुम मेरा नाम नीलोफर है और में आप के स्कूल में अभी नई आई हूँ.

(जी हां रीडर्स यह टीचर वो ही नीलोफर थी. जिस को एक दिन पहले एएसआइ ज़ाहिद ने अपने ही भाई के साथ चुदाई करते रंगे हाथों पकड़ा था.

चूँकि नीलोफर ने उसी सुबह ज़ाहिद को उस की बेहन शाज़िया के साथ स्कूल के गेट पर देखा हुआ था. इसी लिए वो अल कौसेर होटेल के रूम में ज़ाहिद को देख कर चोन्कि थी.)

शाज़िया: वाले-कूम-सलाम, आप से मिल कर ख़ुसी हुई.

यह कह कर शाज़िया ने भी उसे अपना तारूफ़ करवाया और फिर वो दोनो अपनी अपनी क्लास को अटेंड करने निकल गईं.

नीलोफर ने अपनी क्लास के स्टूडेंट्स को पढ़ने के लिए सबक दिया और खुद सीट पर बैठ कर कुछ सोचने लगी.

इस के बावजूद नीलोफर ने कल दो मर्दो से एक साथ चुदवा कर जिन्सी जिंदगी का एक नया मज़ा लूटा था. मगर फिर भी नीलोफर को एएसआइ ज़ाहिद के पोलीस रेड की वजह से इस तरह रंगे हाथों पकड़े जाने और फिर यूँ अपनी गान्ड की सील तुड़वाने का बहुत रंज हुआ था.

अब जब कि एक बार की चुदाई के बाद एएसआइ ज़ाहिद ने उस को दुबारा अपने पास आ कर चुदवाने का कह दिया था. तो अब नीलोफर को यह डर लग गया था कि वो नज़ाने कब तक एएसआइ ज़ाहिद के हाथों ब्लॅक मैल होती रहे गी.

इस लिए वो अब यह सोचने पर मजबूर हो गई. कि किस तरह जल्द आज़ जल्द वो कोई ऐसी राह निकाल ले जिस की वजह से एएसआइ ज़ाहिद उन दोनो बेहन भाई की जान छोड़ दे.

सोचते सोचते नीलोफर को एक प्लान ज़हन में आया और इस को सोच कर वो खुद-ब-खुद ही मुस्कराने लगी.

फिर उसी दिन घर जा कर नीलोफर ने अपने भाई जमशेद को बुलाया और उस को अपना सारा प्लान बता दिया.

जमशेद भी यह जानता था. कि अगर वो चुप रहे तो एएसआइ ज़ाहिद उन को हमेशा किसी ना किसी तरीके से ब्लॅक मैल करता रहे गा.

इस लिए अपनी बेहन का प्लान सुन कर उसे भी यकीन हो गया कि अगर उन की किस्मत ने साथ दिया तो वो एएसआइ ज़ाहिद से छुटकारा हाँसिल कर सकते हैं.

उधर पिंडी में कोर्ट से फारिग हो कर ज़ाहिद सदर बाज़ार चला आया.

कल उस का मोबाइल फोन उस के हाथ से गिर कर टूट जाने की वजह से उस के पास अब कोई फोन नही था. इस लिए ज़ाहिद ने एक नया फोन मोबाइल खरीदने का इरादा किया.

आज कल स्मार्ट फोन्स मार्केट में आ जाने की वजह से हर दूसरा आदमी इस किस्म के फोन्स का दीवाना बना नज़र आता है.

और जो लोग आइफ़ोन या सॅमसंग गॅलक्सी अफोर्ड नही कर सकते,उन के लिए कई तरह के दूसरे ब्रांड के स्मार्ट फोन्स मार्केट में दस्तियाब हैं.

इस लिए एक मोबाइल शॉप पर नये फोन चेक करते हुए ज़ाहिद ने “क्यू मोबाइल” के नये मॉडेल के ड्युयल सिम वाले दो स्मार्ट फोन खरीद लिए.

एक फोन ज़ाहिद ने अपने लिए खरीदा और दूसरा उस ने अपनी बेहन शाज़िया को तोहफे में देने के इरादे से खदीद लिया.फिर ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के लिए भी कुछ शलवार कमीज़ सूट्स खरीदे और झेलम वापिस आने के लिए फ्लाइयिंग कोच (वॅन) में बैठ गया.

झेलम वापसी के सफ़र के दौरान ज़ाहिद फिर से नीलोफर और उस के भाई के ताल्लुक़ात के बड़े में सोचने लगा.

ज़ाहिद के दिल में ख्यान आया कि यह कैसे मुमकिन है कि एक सगा भाई अपने जिन्सी जज़्बात के हाथो मजबूर हो कर अपनी ही सग़ी बेहन से जिस्मानी ताल्लुक़ात कायम कर बैठे.

यह ही बात सोचते सोचते कल शाम की तरह ज़ाहिद का ध्यान दुबारा अपनी बेहन शाज़िया की तरफ चला गया.

“मेरी बेहन को तलाक़ हुए काफ़ी टाइम हो चुका है. तो वो अब अपनी जवानी के उभरते हुए जज़्बात को कैसे ठंडा करती हो गी” ज़ाहिद के ज़हन में कल वाला सवाल दुबारा फिर से गूंजा.

नीलोफर की उस के भाई के साथ चुदाई देखने के बाद ज़ाहिद का लंड भी अब आहिस्ता आहिस्ता ज़ाहिद को उस की अपनी ही सग़ी बेहन की जानिब “मायाल” करने की कोशिस कर रहा था. मगर ज़ाहिद के दिल और दिमाग़ उसे इस किस्म की ग़लत सोचों से बाज़ रहने की तालकीन कर रहे थे.

इस कशमकश में गिरफ्तार ज़ाहिद कभी अपने लंड की बात मान लेता और कभी अपने दिल-ओ-दिमाग़ की सुन लेता.

“उफ़फ्फ़ में यह किस सोच में पड़ गया हूँ. मुझे ऐसा नही सोचना चाहिए अपनी बेहन के बारे में” अपनी बेहन का ख्याल ज़हन में आते ही ज़ाहिद को एक धक्का सा लगा.

और ज़ाहिद ने अपने दिमाग़ से अपनी बेहन के ख्याल निकालने की कॉसिश करते हुए अपनी नज़रों को रोड की तरफ लगा दिया. ता कि चलती वॅन में से बाहर का नज़ारा देखते हुए उस की सोच उस के काबू में आ जाए.

मगर सयाने कहते हैं कि इंसान कभी अपनी सोचो पर काबू नही पा सका है. इस लिए ज़ाहिद की सोच भी रह रह कर उस के दिमाग़ को उस की बेहन की तरफ मुत्वज्जो करने पर तुली हुई थी.

“नीलोफर की तरह मेरी बेहन का बदन भी तो प्यास हो गा तो क्यों ना में भी अपन ही बेहन को फासने की कोशिश करूँ” ज़ाहिद के ज़हन में पहली बार अपनी बेहन के बारे में यह गंदा ख़याल उमड़ा.

“मुझे शरम आनी चाहिए अपनी इस घटिया सोच पर, जमशेद ने जो कुछ अपनी बेहन के साथ किया उस का हिसाब वो खुद दे गा,जो भी हो आख़िर शाज़िया मेरी सग़ी बेहन है और अपनी बेहन के बारे में मेरा इस तरह सोचना भी एक गुनाह है” ज़ाहिद यह बात सोच कर ही काँप गया और फॉरन ही उस के ज़मीर ने उस की सोच पर मालमत करते हुए ज़ाहिद को समझाया.

 
Back
Top