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वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास ) complete

नीलोफर की बात सुन कर शाज़िया को बहुत गुस्सा आया और वो फोन पर ही अपनी सहेली से लड़ने लगी.

मगर नीलोफर शाज़िया से दोस्ती के बाद उस की तबीयत को समझ गई थी. इस लिए उस ने शाज़िया की किसी तलख बात का जवाब ना दिया और खामोशी से शाज़िया की सारी गुस्से वाली बातों को सुनती रही.

कुछ देर बाद जब शाज़िया अपने दिल की भडास निकल चुकी तो उस का गुस्सा खुद ब खुद ठंडा हो गया.

नीलोफर को जब पूरा यकीन हो गया कि शाज़िया अब अपना सारा गुस्सा उस पर निकाल कर पुरसकून हो चुकी है. तो उस ने दुबारा से अपनी बात स्टार्ट की.

नीलोफर: शाज़िया में जानती हूँ कि में ने जो किया वो ग़लत है. मगर यकीन मानो मुझे तुम्हारा इस तरह घुट घुट कर जीना ज़रा भी पसंद नही. इस लिए तुम्हारी जिंदगी में एक नई बहार लाने के लिए तुम को बताए बैगर में ने कदम उठा लिया.

शाज़िया: मगर यार खुद सोचो कि यह कितनी ग़लत बात है कि तुम एक गैर मर्द को मेरी नंगी फोटो दिखा दीं.

नीलोफर: जानू जब तुम उस का नंगा जिस्म देख चुकी हो तो उस का हक भी तो बनता है कि वो भी तुम्हारे दिल कश बदन का नज़ारा ले. वैसे सच पूछो तो एक दूसरे के नंगे जिस्म देख कर तुम दोनो अब एक दूसरे के लिए गैर नही रहे.

नीलोफर यह बात कहते हुए हंस दी.

शाज़िया को समझ नही आ रही थी कि वो अब करे तो क्या करे.इस लिए अब उस ने नीलोफर की बात का जवाब देना मुनासिब ना समझा और खामोश हो गई.

“अच्छा में रिज़वान (ज़ाहिद) की दो फोटो तुम को सेंड कर रही हूँ.इन को देखो और एंजाय कर के सो जाओ,सुबह तुम से स्कूल में मुलाकात हो गी” नीलोफर को जब शाज़िया की तरफ से कोई जवाब नही आया. तो उस ने फिर फोन की लाइन पर छाई हुई खामोशी को तोड़ते हुए कहा और फोन बंद कर दिया.

नीलोफर के फोन काटते ही शाज़िया को “व्हाट्सअप” के ज़रिए नीलोफर की भेजी हुई फोटोस मिल गईं.

शाज़िया बिस्तर पर लेटी लेटी अपनी दोस्त नीलोफर की सेंड की हुई रिज़वान (ज़ाहिद) की फोटोस को देखने लगी.

उन दोनो फोटोस में रिज़वान (ज़ाहिद) के चेहरे को फोटो शॉप से छुपा दिया गया था. मगर वो फोटो में पूरा नंगा था.और उस का लंड अपनी पूरी आबो ताब से तन कर खड़ा नज़र आ रहा था.

अपने हाथ में पकड़े हुए स्मार्ट फोन को टच करते हुए शाज़िया ने फोन की स्क्रीन का साइज़ बड़ा किया. और उस रिज़वान (ज़ाहिद) के लंड को और नज़दीक करते हुए उस के लंड का बगौर जायज़ा लेने लगी.

इतने मोटे और बड़े लंड को अपने आँखों के इतने नज़दीक देख कर कर शाज़िया के मुँह में पानी आने लगा और नीचे से भी गरम हो कर उस की फुद्दि भी अपना पानी छोड़ने लगी.

शाज़िया अपनी आँखे फाड़ फाड़ कर फोन की स्क्रीन पर नज़र आते हुए लंड को देखने में मसरूफ़ थी.

लंड को देखने के दौरान ही वो अपने दिल ही दिल में रिज़वान (ज़ाहिद) के लंड की लंबाई और मोटाई के बारे में सोचने लगी.

फोटो को देखते देखते शाज़िया का हाथ बे इख्तियारी में उस की शलवार के अंदर दाखिल हुआ. और फिर आहिस्ता आहिस्ता सरकता हुआ उस की फुद्दि पर आन पहुँचा.

फुद्दी पर अपने हाथ को ला कर शाज़िया ने अपनी उंगली अपनी चूत मे डाली और चूत के दाने को रगड़ रगड़ कर अपनी प्यास को ठंडा करने की नाकाम कॉसिश करने लगी.

आज इतने अरसे बाद लंड की फोटो को ही देख कर शाज़िया इतनी गरम हो चुकी थी. कि अब अपनी उंगली से उस की चूत की आग काम होने में नही आ रही थी.

बल्कि आज तो उस की चूत की आग कम होने की बजाय और मज़ीद भड़क उठी थी.

शाज़िया ने फोन को अपने मुँह पर रखा और अपनी नुकीली ज़ुबान को अपने मुँह से बाहर निकाला और स्क्रीन पर नज़र आने वाले लंड पर अपनी ज़ुबान फेरने लगी.

फिर जब फोन की स्क्रीन को चाट चाट कर शाज़िया का दिल ना भरा. तो उस ने फोन को नीचे ले जा कर फोन को अपनी चूत पर रखा और अपनी गान्ड को हल्का से उठा कर ऐसे पोज़ में ऊपर नीचे होने लगी. जैसे हक़ीकत में कोई लंड उस की फुद्दि के अंदर जा रहा हो.

अपनी फुद्दि से खेलते कलीते शाज़िया को नीलोफर की बातें याद आने लगी, "शाज़िया यार जितनी आग तुम्हारी चूत में दबी हुई है.इस आग को ठंडा करने के लिए तुम्हे एक मोटे बड़े और सख़्त जवान लंड की ज़रूरत है और अगर तुम चाहो तो में तुम्हारे लिए लंड का बन्दो बस्त कर सकती हूँ”

आज अपनी चूत से खेलते हुए शाज़िया को यकीन हो गया. कि वाकई ही उस की प्यासी फुद्दि अब उस की उंगलियों से मज़ीद ठंडी नही हो सके गी.

अब वाकई ही उसे अपनी प्यासी चूत की प्यास बुझाने के लिए अपनी चूत में गरम और मोटा लंबा और असली लंड चाहिए था.

इस लिए अब शाज़िया ने फ़ैसला कर लिया कि अब चाहे जो भी हो. वो भी अब मज़ीद घुट घुट कर जीने की बजाय नीलोफर की तरह इस शख्स "रिज़वान" से अपनेताल्लुकात कायम कर के उस के लंड का स्वाद चख कर रहे गी.

यह फ़ैसला करने की देर थी. कि शाज़िया के जिस्म ने एक झटका लिया और उस की फुद्दि का बाँध टूट गया.

शाज़िया की चूत से झड़ते हुए पानी की एक नदी बहने लगी. और उस का पूरा हाथ अपनी चूत से निकलते हुए पानी से भीग गया.

शाज़िया आज से पहले कभी इतना नही छूटी थी. इस लिए उसे आज बहुत मज़ा आया.

फारिग होते ही शाजिया ने अपने हाथ को शलवार से बाहर निकाला और अपनी उंगली को अपने होंठो के दरमियाँ ला कर उंगली पर लगे अपनी चूत के पानी को चाट चाट कर सॉफ करने लगी.फिर कुछ देर बाद शाज़िया को भी नींद आ गई.

दूसरी सुबह जब शाज़िया और नीलोफर स्कूल के फारिग टाइम में इकट्ठी हुईं तो नीलोफर ने शाज़िया से पूछा “ सूनाओ फिर कैसी लगीं रिज़वान की तस्वीरे”.

“नीलोफर यार कोई और बात करो” शाज़िया ने शरमाते हुए मोज़ू चेंज करने का कहा.

“बताओ ना,मज़ा आया ना देख कर रिज़वान का बड़ा और मोटा लंड” नीलोफर ने फिर शाज़िया को छेड़ा.

“यार तंग ना करो मुझे शरम आती है” शाज़िया ने दुबारा नीलोफर को टालते हुए कहा.

“शाज़िया शरमाना छोड़ो और मान जाओ कि रिज़वान के लंड को देख कर तुम्हारी फुद्दि ने रात को पानी छोड़ा है” नीलोफर ने मुस्कराते हुए अपनी सहेली से कहा और उस के हाथ पर अपना हाथ रख कर ज़ोर से दबाया.

नीलोफर की बात सुन कर शाज़िया ने खामोशी इख्तियार की. तो नीलोफर को यकीन हो गया कि शाज़िया ने वाकई ही रात अपने भाई के लंड को देख कर अपनी चूत में उंगली मारी है.

“हां यार ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ रात को,और क्या बताऊ कि रिज़वान का लंड तो मेरे सबका शोहर से इतना बड़ा है कि मुझे तो समझ नही आती कि तुम इस को कैसे अपनी फुद्दि में ले लेती हो” शाज़िया ने नीलोफर से कहा.

“बानू जल्द ही जब यह लंड तुम्हारी चूत की दीवारों को चीरता हुआ तुम्हारी फुद्दि के अंदर घुसे गा तो तुम को मालूम हो जाए गा कि मेरी क्या हालत होती है इस मोटे लंड को अपनी चूत में लेते वक्त” नीलोफर ने हँसते हुए शाज़िया को जवाब दिया.

“नीलोफर यकीन मानो मुझे शादी से पहले भी और तलाक़ के बाद भी इसी किस्म के मोटे बड़े और सख़्त जवान लंड की तलब रही है, और जब से इस लंड की फोटो को अपनी फुद्दि के ऊपर रगड़ा है, मेरी फुद्दि इतनी गरम हो गई है कि अब इस लंड को अपने अंदर लिए बिना इस को चैन नही मिले गा यार”शाज़िया ने झिझकते झिझकते नीलोफर से अपने दिल की बात कह दी.

“उफफफफफफफफफफफ्फ़ यार मुझे पता था. कि तुम्हारी गरम और प्यासी फुद्दि को ऐसा जवान और तगड़ा लंड ही चाहिए,फिकर ना करो में जल्द ही तुम दोनो का आपस में मिलाप करवा दूं गी, ताकि मेरी तरह तुम भी असली लंड का मज़ा दुबारा से ले सको” नीलोफर अपनी दोस्त शाज़िया की बात सुन कर बहुत खुश हुई और उस ने उफनते जज्वात में अपनी सहेली को अपनी बाहों में भरते हुए कहा.

शाज़िया: नही यार में इस तरह एक दम एक अंजान आदमी से नही मिल सकती.

नीलोफर: तो फिर तुम क्या चाहती हो.

शाज़िया: में रिज़वान (ज़ाहिद) से मिलने से पहले इस से फोन पर बात करना चाहती हूँ,ता कि जब इस से आमने सामने मुलाकात हो तो मुझे इस का सामना करने में कोई मुश्किल या शरम महसूस ना हो.

 
नीलोफर शाज़िया की बात सुन कर घबरा गई. क्योंकि उसे डर लग गया कि एक तो दोनो बेहन भाई को एक दूसरे का फोन नंबर लाज़मान पता हो गा.

दूसरा कहीं वो फोन पर एक दूसरे की आवाज़ पहचान गये .तो उस का बना बनाया काम बिगड़ जाए गा.

नीलोफर थोड़ी देर कशमकश रही और फिर जब उसे शाज़िया को ज़ाहिद से बात चीत से रोकने का कोई बहाना ना सूझा तो वो आख़िर बे दिली से बोली. “अच्छा तो ठीक है में उसको को तुम्हारा नंबर दे दूं गी और वो तुम को फोन कर ले गा”

शाज़िया: नही तुम इस को मेरा असल नंबर मत देना. में कल एक नई सिम ले कर उस का नंबर रिज़वान( ज़ाहिद) को दूं गी. और फिर वो मुझ से फोन पर डाइरेक्ट वाय्स चॅट नही बल्कि टेक्स्ट मेसेज के ज़रिए बात चीत कर सकता है.

शाज़िया की बात सुन कर नीलिफर की जान में जान आई.

नीलोफर तो यह ही चाहती थी.कि अगर शाज़िया और ज़ाहिद किसी तरह आपस में डाइरेक्ट बात ना करें तो उस के प्लान के लिए अच्छा रहेगा.

फिर उसी दिन स्कूल से वापसी पर दोनो सहेलियाँ एक मोबाइल कंपनी “टेलिनोर” के ऑफीस गईं.

टेलिनोर के ऑफीस में शाज़िया ने एक फ़र्ज़ी नाम से एक नई सिम को आक्टीवेट करवा कर उसे अपने डबल सिम वाले स्मार्ट फोन में डाला और अपना नया नंबर नीलोफर को दे दिया.

फिर ऑफीस के बाहर से दोनो एक रिक्शा में सवार हुई और शाज़िया नीलोफर को रास्ते में उस के घर उतार कर अपने घर चली गई.

नीलोफर ने अपने घर पहुँचते ही ज़ाहिद को कॉल मिला दी.

ज़ाहिद पोलीस स्टेशन में बैठा किसी केस की एफआइआर फाड़ रहा था. ज्यों ही उस के फोन की घंटी बजी. तो उस ने फॉरन अपने खास नंबर वाले मोबाइल फोन पर निगाह दौड़ाई.

ज़ाहिद पहले ही से एक दो नही बल्कि तीन मुक्तिलफ टेलिफोन कंपनियों के नंबर्स इस्तेमाल करता था.

जिन में से दो नंबर्स तो उस ने आम इस्तेमाल के लिए रखे हुए थे.

जब कि एक नंबर उस ने सिर्फ़ खास खास लोगों को दिया हुआ था. और इस नंबर का ईलम उस की अम्मी या उस की तीनो बहनों में से किसी को भी नही था.

ज़ाहिद ने यह खास नंबर नीलोफर को भी दिया हुआ था. ता कि जब भी नीलोफर उस से बात करना चाहे तो वो इस नंबर पर उस से रबता कर ले.

ज़ाहिद ने नीलोफर का नंबर अपने फोन की स्क्रीन पर देखा तो जल्दी से फोन उठा कर बोला “हां जान केसी हो”.

नीलोफर: में ठीक हूँ तुम जल्दी से यह फोन नंबर नोट कर लो.

ज़ाहिद ने नीलोफर के दिए हुए नंबर को अपने पास लिख लिया और पूछा “यह किस का नंबर है मेरी जान”.

“यह तुम्हारी दूसरी जान का नंबर है जिस के लिए आज कल तुम्हारा लंड बहुत मचल रहा है” नीलोफर ने जवाब दिया.

फिर नीलोफर ने ज़ाहिद को सारी बात बता दी कि उस की सहेली साजिदा ज़ाहिद से मिलने से पहले एसएमएस के ज़रिए उस से बात करना चाहती है.

नीलोफर: वो आज रात तुम्हारे मेसेज का इंतज़ार करे गी. और याद रखना कि वो तुम से मिलना तो चाहती है मगर साथ में शर्मा भी रही है.इस लिए तुम कोशिश कर के उस से बे तकल्लुफी पेदा कर लूँ ता कि जल्द आज़ जल्द तुम्हारा और उस का मिलाप हो जाय.

“उूुउउफ़फ्फ़ यार मेरा तो दिल अभी से उस नाज़नीन से बात करने को चाह रहा है, रात का इंतज़ार अब कौन कम्बख़्त करे,वैसे तुम मुझ पर भरोसा रखो में उस को जल्दी ही लाइन पर ले आउन्गा मेरी जान” ज़ाहिद ने अपने लंड को अपनी पॅंट की पॉकेट में से मसलते हुए कहा.

नीलोफर: नही अभी मेसेज मत करना क्योंकि उस के घर वाले इधर उधर उस के आस पास ही होंगे. और एक बात ज़हन में रखना कि में ने साजिदा को तुम्हारा नाम रिज़वान बताया है. और उसे कहा है कि तुम एक प्राइवेट कंपनी में नोकरी करते हो.

“अच्छा में रिज़वान बन कर ही उस से बात करूँगा ” ज़ाहिद ने नीलोफर की बात सुन कर उस पर रज़ामंदी का इज़हार किया.

फिर थोड़ी देर इधर उधर की कुछ बातें कर के नीलोफर ने फोन काट दिया.

नीलोफर से उस की सहेली साजिदा की बातें कर के ज़ाहिद का दिल बेचैन हो गया. उस का बस नही चल रहा था. कि वो किसी तरह घड़ी की सूइयां आगे कर के फॉरन दिन को रात में बदल दे.

अभी ज़ाहिद साजिदा के जिस्म के बारे में ही सोचने में मसरूफ़ था.कि डीएसपी साब का फोन आया और उस ने ज़ाहिद को अपने ऑफीस में आ कर मिलने का हुकम दिया.

डीएसपी साब के हुकम के मुताबिक ज़ाहिद उन को मिलने डीएसपी ऑफीस पहुँचा. तो उस को पता चला कि डीएसपी ने उस को एक मिनिस्टर साब की सेक्यूरिटी की ड्यूटी सर अंजाम देने के लिए बुलाया है. फिर ज़ाहिद मिनिस्टर साब के साथ रात देर गये तक अपनी ड्यूटी देता रहा.

ज़ाहिद उस दिन रात को काफ़ी लेट अपने घर आया. घर में दाखिल होने पर उस ने घर में मुकमल खामोसी महसूस की. तो उसे अहसास हुआ कि उस की बेहन शाज़िया और अम्मी अपने अपने कमरों में जा कर शायद सो चुकी हैं.

ज़ाहिद आज खाना बाहर से ही खा कर आया था. इस लिए उस ने भी सीधा अपने कमरे में जा कर सोने का फ़ैसला किया.

ज़ाहिद ने अपना यूनिफॉर्म चेंज किया और सिर्फ़ शलवार पहने ही बिस्तर पर लेट कर नीलोफर की सहेली साजिदा (शाज़िया) को “हेलो” का एसएमएस सेंड कर दिया.

शाज़िया अभी अभी अपने बिस्तर पर लेटी ही थी. कि “टन” की आवाज़ से बिस्तर की साइड टेबल पर रखा हुआ उस का फोन बोल उठा.

शाज़िया समझ गई कि किसी ने उसे एसएमएस किया है. उस ने लेटे लेटे हाथ बढ़ा कर अपना मोबाइल उठाया और मेसेज पर कर रिप्लाइ किया” आप कौन?”

“में रिज़वान हूँ और मुझे आप का नंबर आप की दोस्त नीलोफर ने दिया है” ज़ाहिद ने जवाव लिखा.

 
शाज़िया ने नीलोफर को रिज़वान (ज़ाहिद) से एसएमएस के ज़रिए बात चीत करने का कह तो दिया था.मगर अब जब ज़ाहिद का मेसेज आया तो शाज़िया को समझ में नही आ रहा था. कि वो क्या और कैसे इस आदमी से बात करे.

शाज़िया तलाक़ के बाद पहली बार किसी मर्द से इस तरह छुप छुप कर रात के अंधेरे में फोन चॅट कर रही थी. इस लिए उस के दिल की धड़कन तेज होने लगी थी.

ज़ाहिद ने कुछ देर शाज़िया के रिप्लाइ का इंतजार किया. मगर जब देखा कि शाज़िया उस को रिप्लाइ नही कर रही तो उस ने फिर लिखा “ नीलोफर ने मुझे आप की फोटोस दिखाई हैं. और यकीन माने जब से आप की फोटोस देखी हैं मेरे तो होश ही उड़ गये हैं”.

ज़ाहिद का एसएमएस पढ़ कर शाज़िया समझ गई. कि रिज़वान (ज़ाहिद) उस की नंगी फोटोस के बारे में बात कर रहा है.

वो रिज़वान (ज़ाहिद) से यह तवक्को नही कर रही थी. कि वो उस से एक दम यूँ फ्री होने लगे गा. इस लिए ज़ाहिद का यह मेसेज पर कर शाज़िया को बहुत ज़्यादा शरम महसूस हुई और उस का पैसा छूट गया.

उस की समझ में न आया कि वो रिज़वान( ज़ाहिद) की इस बात का क्या जवाब दे. इस लिए उस ने मुनासिब यह समझा कि वो उस को दुबारा कोई रिप्लाइ ना करे.

जब ज़ाहिद ने देखा कि कि तरफ से कोई रिप्लाइ नही आ रहा तो उस ने फिर एक मेसेज लिखा “ लगता है आप को मेरा यूँ आप से फ्री होना अच्छा नही लगा.और आप को मुझ से बात करने में शर्म आ रही है. कोई बात नही में अब दुबारा आप को तंग नही करूँगा . मगर जाने से पहले आप से यह ज़रूर कहना चाहूँगा कि में ने आप का चेहरा तो अभी तक नही देखा. मगर आप के बदन को देख कर में वाकई ही ना सिर्फ़ आप का दीवाना हो गया हूँ बल्कि आप से इश्क़ भी कर बैठा हूँ और अपने इस इश्क को सच साबित करने के लिए अपनी जान भी क़ुरबान करने को तैयार हूँ”

शाज़िया को ज़ाहिद की यह बात पढ़ कर बहुत हैरत हुई.क्योंकि वो तो अपनी सहेली के कहने पर और अपनी फुद्दि की गर्मी के हाथो मजबूर होते हुए इस आदमी से चुदवाने के लिए अपने आप को ज़ेहनी तौर पर तैयार कर चुकी थी.

और शाज़िया को यह यकीन था. कि चूँकि रिज़वान (ज़ाहिद) उस की सहेली नीलोफर को चोदता रहता है.

इस लिए वो नीलोफर की तरह उस से भी जिस्मानी ताल्लुक़ात इस्तिवर कर के चोदे गा. और फिर कुछ टाइम तक इस्तेमाल कर के उसे एक टिश्यू पेपर की तरह फैंक दे गा.

मगर उस की सोच के बार अक्स रिज़वान (ज़ाहिद) तो उस से सिर्फ़ वक्ति तौर पर जिस्मानी ताल्लुक़ात कायम करने के मूड में नही लगता था.

बल्कि उस के एसएमएस पढ़ कर लगता था कि वो तो शाज़िया से अपने दिल की बात कह कर उसे अपनी महबूबा बनाने के चक्कर में है.

(सियाने कहते हैं कि लड़कियाँ बड़ी पागल होती हैं. जब भी कोई उन से प्यार के दो बोल बोलता है. उन का दिल फॉरन मोम हो कर पिघल जाता हैं. इस लिए ऐसा ही कुछ उस वक्त शाज़िया के साथ भी हुआ)

आज से पहले तक शाज़िया की ज़िंदगी में कभी ऐसा लम्हा नही आया था. कि जब किसी मर्द ने उस से इस तरह से इज़हार-ए-मुहब्बत नही किया हो.

और तो और शादी के बाद भी उस के सबका शोहार ने कभी उस खुल कर अपने प्यार का इज़हार नही किया और ना ही उस को कभी “आइ लव यू” तक बोला था.

मगर आज जब रिज़वान ( ज़ाहिद ) ने उस से प्यार का इज़हार किया. तो रिज़वान (ज़ाहिद ) की इस बात पर ना सिर्फ़ शाज़िया का दिल अब पहले से भी ज़्यादा तेज़ी के साथ धड़कने लगा बल्कि उस की फुद्दि और ज़्यादा गरम हो कर अपना पानी छोड़ने लगी.

रिज़वान(ज़ाहिद) के इज़हार-ए-मोहबत पर गरम होते हुए शाज़िया ने बिना सोचे समझे एक दम से ज़ाहिद को एसएमएस किया “ जनाब ना तो आप मुझ से कभी मिले हैं और ना में आप से, तो फिर आप कैसे मुझे देखे बिना मुझ से प्यार कर सकते हैं”

शाज़िया का रिप्लाइ पर कर ज़ाहिद मुस्करा दिया और उस ने साजिदा (शाज़िया) को जवाब दिया,“प्यार का ताल्लुक दिल से होता है और सच पूछो तो में आप को पहली नज़र में ही दिल चुका हूँ,रह गई मिलने की बात तो आप जब चाहे में आप से मिलने को तैयार हूँ”

शाज़िया को रिज़वान (ज़ाहिद) की बातों से ना जाने क्यों यह यकीन होने लगा.कि वो जो कुछ एसएमएस में लिख रहा है. वो झूट नही .बल्कि उस के सारे के सारे लिखे हुए इलफ़ाज़ रिज़वान (ज़ाहिद) के सच्चे दिल की आवाज़ हैं.

शाज़िया तो वैसे भी अपनी फुद्दि की प्यास मिटाने के लिए रिज़वान (ज़ाहिद) से मिलने को तैयार थी. और फिर फोन पर आज की पहली ही चॅट ने शाज़िया के दिल में रिज़वान (ज़ाहिद) के मुतलक शरम और जिगाख पहले से बहुत कम कर दी.

मगर इस के बावजूद वो रिज़वान (ज़ाहिद) को जल्द मिलने का वादा कर के उसे हरगिज़ यह तासूर नही देना चाहती थी कि वो कोई “गश्ती” या “ चीप किसम की “आम” औरत है.

इस लिए उस ने ज़ाहिद से कहा कि वो उस से मिलने के मुतलक सोचे गी और फिर अपना फ़ैसला नीलोफर को बता दे गी.

 
ज़ाहिद भी यह बात जान चुका था कि. साजिदा (शाज़िया) उस को पसंद करने और उस से मिलने को तैयार है. मगर वो फॉरन उस से मिलने से कतरा रही है.

इस लिए उस ने भी साजिदा (शाज़िया) को वक्त देना मुनासिब समझा और खुदा हाफ़िज़ का एसएमएस लिख कर सो गया.

दूसरे दिन नीलोफर शाज़िया से मिली तो उस ने फॉरन उस से रिज़वान (ज़ाहिद) के मुतलक पूछा.

नीलोफर: क्यों बन्नो रात को यार का मेसेज आया?.

“नही तो” शाज़िया ने जान बूझ कर अपनी सहेली से झूठ बोला.

नीलोफर: में नही मानती,अच्छा मुझे अपना फोन दिखाओ.

“वो में आज घर भूल आई हूँ” शाज़िया ने एक और झूठ बोला.

“बकवास ना करो,में खुद तुम्हारे बॅग में से फोन निकाल लेती हूँ”कहते हुए नीलोफर ने जबर्जस्ती शाज़िया के हाथ से उस का बॅग छीना और उस का फोन निकाल लिया.

फिर नीलोफर ने चस्के ले ले कर शाज़िया और ज़ाहिद के दरमियाँ होने वाले मेसेज को चस्के लगा लगा कर पढ़ा और शाज़िया को बोली.

“अच्छा रात भर अपने आशिक़ से चॅट करती रही हो और अब मुझ से झूट बोलती हो, मैं ही तुम दोनो को एक दूसरे के करीब ला रही हूँ और मुझ से ही अपनी बातें छुपाने लगी हो बानो” सारी चॅट पढ़ कर नीलोफर ने मज़ाक में अपनी सहेली से नकली गुस्सा करते हुए कहा.

“ऐसी कोई बात नही बस वैसे ही तुम को तंग करने को दिल कर रहा था” शाज़िया ने अपनी सहेली के गुस्से पर मुस्कराते हुए नीलोफर को अपनी बाहों में भरा और गले से लगा लिया.

“अच्छा तो कब मिलवाऊ तुम को उस से” नीलोफर ने शाज़िया से पूछा.

“एक दो दिन में तुम को बता दूं गी” कहते हुए शाज़िया अपनी क्लास अटेंड करने चल पड़ी.

दूसरी रात शाज़िया अपने बिस्तर पर लेटी ज़ाहिद के एसएमएस का इंतिज़ार करती रही मगर. ज़ाहिद ने जान बूझ कर शाज़िया को उस रात एसएमएस नही किया.

असल में अब ज़ाहिद यह चाहता था. कि साजिदा (शाज़िया) उसे खुद एसएमएस कर के उस से बात करे. इस लिए उस ने जान बूझ कर उसे मेसेज नही किया.

जब तीन दिन तक ज़ाहिद का एसएमएस नही आया तो शाज़िया के सब्र का पैमाना लबरेज हो गया और उस ने उसी वक्त ज़ाहिद को एसएमएस किया.

ज़ाहिद उस दिन एक सरकारी काम के सीलसले में लाहोर आया हुआ था. और वो अपनी दिन भर की मुसरिफयत से फारिग हो कर उस वक्त लाहोर रैलवे स्टेशन के करीब बने हुए एक छोटे से होटेल में रात गुज़ारने के लिए होटेल के कमरे में पहुँचा ही था.

जब ज़ाहिद ने साजिदा( शाज़िया) का एसएमएस देखा .तो उस के दिल के साथ साथ उस का लंड भी खुशी से उछल पड़ा.

वो समझ गया कि नीलोफर की कही हुई बात वाकई ही सही है. कि उस की सहेली की चूत में बहुत आग है. और यह उस की फुद्दि की प्यास और आग ही का असर है कि वो ज़ाहिद के एसएमएस ना आने पर बे काबू हो कर उसे मेसेज करने पर मजबूर हो गई है.

 
ज़ाहिद ने शाज़िया का “हाई” का मेसेज पढ़ कर शाज़िया को रिप्लाइ किया “कैसी हैं आप”

“में ठीक हूँ आप कैसे हैं” शाज़िया ने जवाब लिखा.

“बस आप की याद और इंतज़ार में ही बैठा हुआ हूँ” ज़ाहिद ने लिखा.

“अच्छा मुझे नही पता था कि आप बहुत बे सबरे इंसान हैं” शाज़िया ज़ाहिद का मेसेज पढ़ कर खुश हुई और रिप्लाइ किया.

“बस क्या करूँ आप चीज़ ही इतनी मस्त हैं कि इंतज़ार मुश्किल होता जा रहा है” ज़ाहिद ने दुबारा शाज़िया को छेड़ा.

“अच्छा बाबा में आप को कल पक्का बता दूं गी कि आप से कब मिल सकती हूँ” शाज़िया अब मज़ीद ज़ाहिद को तरसाने के मूड में नही थी. इस लिए उस ने ज़ाहिद को खुश करने के लिए उसे रिप्लाइ कर दिया.

ज़ाहिद साजिदा (शाज़िया) का एसएमएस पढ़ कर बहुत खुश हुआ और उसे उम्मीद हो गई कि जल्द ही वो इस गरम और प्यासी लड़की को अपनी बाहों में भर कर उस की और अपनी प्यास बुझा सके गा.

ज़ाहिद: आप से एक बात पुच्छू नाराज़ तो नही हो गीं?.

शाज़िया: क्या?

“आप के मम्मे तो में ने देखे हैं.बहुत ही बड़े और प्यारे हैं आप के,और अगर आप को बुरा ना लगे तो क्या में आप के चूचों का साइज़ पूछ सकता हूँ?.

रिज़वान (ज़ाहिद) के उस खुले और बे शरम सवाल को पढ़ कर शाज़िया उस से गुस्सा होने की बजाय अब नीचे से गरम होने लगी थी.

“क्यों” शाज़िया ने फॉरन ही ज़ाहिद को जवाव लिखा.

शाज़िया के जवाब को पढ़ कर ज़ाहिद को और यकीन हो गया कि अब”मछली” उस के “जाल” में पूरी तरह से फँस चुकी हैं. क्योंकि अगर साजिदा (शाज़िया) उस के इस गंदे सवाल का बुरा मानती तो “क्यों” का रिप्लाइ हरगिज़ ना करती.

इस लिए अब ज़ाहिद नीलोफर की सहेली साजिदा (शाज़िया) से पूरी तरह बे शरम हो कर बात करने के मूड में आ गया.और वो एक हाथ से अपने लंड की हल्के हल्के मूठ लगाते हुए,दूसरे हाथ से मेसेज लिखने लगा.

“ वो में आप को तोहफे में ब्रेज़ियर और पैंटी देना चाहता हूँ, और मेरी ख्वाहिश है कि आप मुझे मेरी गिफ्ट की हुई ब्रेज़ियर और पैंटी में अपनी तस्वीर खींच कर मुझे सेंड करें.” ज़ाहिद ने लिखा.

अपनी सहेली नीलोफर से अपने लेज़्बीयन ताल्लुक़ात कायम करने के बाद शाज़िया रात को देर तक उस से इस किस्म की गंदी चॅट करने की आदि हो चुकी थी. मगर उस को अपनी सहेली से किसी भी गंदी से गंदी बात की चेट का वो मज़ा नही आया था. जो आज उसे रिज़वान(ज़ाहिद) से चॅट करते वक्त मिलने लगा था.

उस की वजह शायद यह रही हो गी कि जो भी हो आख़िर शाज़िया की तरह नीलोफर थी तो एक औरत.

और औरत और मर्द की आपस में अट्रॅक्षन एक क़ुदरती अमल है.जिस का अपना एक अलग ही मज़ा है.

वैसे भी ज़ाहिद की नगी फोटोस और वीडियोस देख कर और उस से चॅट के ज़रिए बात कर के शाज़िया अब अपनी शर्म-ओ-हया का परदा उठा कर नीलोफर की तरह पूरा बे शरम बनने का सोच चुकी थी.

इस लिए शाज़िया ने बिना किसी झिझक के,फोन के दूसरे एंड पर एक अजनबी आदमी को अपने ब्रेज़ियर का साइज़ बता दिया, “ मैं ब्रेज़ियर 40 डीडी की और पैंटी लार्ज साइज़ की पहनती हूँ”

“उफफफफफफफ्फ़ बड़ा मस्त साइज़ है आप का” ज़ाहिद ने मेसेज पढ़ कर जोश में अपने लंड को मसल्ते हुए रिप्लाइ किया.

“अच्छा में कल नीलोफर के हाथ आप को अपना पसंदीदा ब्रेज़ियर और पैंटी का सेट भिजवा दूं गा, आप कल उसे पहन कर मुझे अपनी फोटो ज़रूर सेंड करना प्लीज़” ज़ाहिद ने शाज़िया को एसएमएस किया.

“ठीक है में कॉसिश करूँगी” शाज़िया ने जवाब दिया. और फिर एक दो लतीफ़े शेयर करने के बाद दोनो में चॅट ख़तम हो गई.

दूसरे दिन ज़ाहिद ने झेलम वापसी से पहले लाहोर से साजिदा( शाज़िया) के बताए हुए साइज़ के मुताबिक ग्रे कलर में “नेट” वाला एक एक बहुत ही प्यारा और सेक्सी ब्रेज़ियर और पैंटी का सेट खरीद लिया.

ज़ाहिद सीधा पोलीस स्टेशन आया और उस ने जमशेद को फोन किया कि वो उस से पोलीस स्टेशन आ कर मिले.

 
कुछ टाइम बाद जब जमशेद आ कर एएसआइ ज़ाहिद से मिला तो ज़ाहिद ने उसे एक पॅकेट देते हुए कहा कि यह अपनी बाजी को दे देना.

ज्यों ही जमशेद ज़ाहिद से वो पॅकेट ले कर रवाना हुआ तो ज़ाहिद ने एसएमएस के ज़रिए नीलोफर को साजिदा( शाज़िया) के गिफ्ट के मुतलक बता दिया.

नीलोफर उस वक्त स्कूल में ही थी. उस ने अपने भाई जमशेद को फोन किया कि वो ज़ाहिद का दिया हुआ पॅकेट उसे स्कूल में ही दे जाय.

अपने भाई से पॅकेट वसूल कर के नीलोफर शाज़िया के पास आई और उसे कहा.

नीलोफर: शाज़िया देख तेरे यार ने तुम्हारे लिए तोहफा भेजा है.

शाज़िया ने नीलोफर के हाथ से पॅकेट लिया और उसे अपने बारे पर्स में रखने लगी.

“दिखा तो सही तेरे लिए क्या तोहफा आया है मेरी जान” नीलोफर ने शाज़िया को पॅकेट पर्स में रखते देखा तो बोली.

“कुछ नही घर जा कर देखूँगी तो तुम को बता दूँगी” शाज़िया ने जान छुड़ाने की कोशिस की.

“मुझे तो इतने दिन से चोद्चोद कर मेरी फुद्दि का फुदा बनाने के बावजूद कभी कुछ गिफ्ट नही दिया और तेरी “ली” भी नही तो अभी से तोहफे शुरू,यार मुझे तो तुम से जलसी होने लगी है” नीलोफर ने हँसते हुए कहा.

नीलोफर की इस बात पर शाज़िया ने भी ज़ोर का कहकहा लगाया. और इधर उधर देख कर उस ने पर्स में से पॅकेट निकाल कर नीलोफर के सामने खोला. तो सेक्सी ब्रेज़ियर और पैंटी देख कर नीलोफर बहुत खुश हुई.

उस ने दिल ही दिल में कहा “ वाह ज़ाहिद ने तो अपनी बहन के लिए बहुत ही सेक्सी और रिवीलिंग किस्म का पैंटी और ब्रा का गिफ्ट भेजा है”.

“यार ये तो बहुत सेक्सी और मस्त तोहफा है,तुम इस को ही पहन कर अपने यार से पहली मुलाकात करना” नीलोफर ने शाज़िया को छेड़ा.

“अच्छा देख लिए अब में वापिस इस को अपने पर्स में रख लूँ अगर इजाज़त हो तो” शाज़िया ने नीलोफर की बात पर मुस्कराते हुए कहा.

कुछ देर बाद उन की स्कूल से छुट्टी का टाइम हो गया और वो दोनो अपने अपने घर चली आईं.

उस रात ज़ाहिद ने फिर शाज़िया को एसएमएस किया.

ज़ाहिद: मेरा तोहफा मिला.

शाज़िया: जी.

ज़ाहिद: कैसा लगा.

शाज़िया: अच्छा है.

ज़ाहिद: सर्फ अच्छा है?,

“नही बहुत ही अच्छा है मुझे बहुत पसंद आया” शाज़िया ने जवाब लिखा.

“तो अभी पहन कर मुझे फोटो सेंड करो” ज़ाहिद ने मसेज किया.

“आज नही फिर कभी” शाज़िया अभी ज़ाहिद को तड़पाने के मूड में थी.

“अच्छा फिर वादा करो कि पहली मुलाकात पर ये ही पहन कर आओ गी” ज़ाहिद ने फरमाइश की.

“सोचूँगी” शाज़िया ने एक अदा से रिप्लाइ किया.

“अच्छा आप को एक बात बताऊ और फिर आप से एक सवाल पूछूँ” ज़ाहिद ने एसएमएस सेंड किया.

“एक तो आप सवाल बहुत पूछते हैं,अच्छा पूछो” शाज़िया ने रिप्लाइ किया.

“आप को बताना ये है कि मुझे शेव चूत बहुत पसंद है,और आप से पूछना ये है कि आप ने कूब अपनी फुद्दि शेव की थी” ज़ाहिद ने शाज़िया को एसएमएस सेंड किया.

शाज़िया ज़ाहिद का मसेज पढ़ कर मुस्कुराइ और जवाब लिखा “ आज सुबह ही”

“उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ फिर तो आपकी चूत की स्किन बहुत नरम और मुलायम हो गी इस वक्त” ज़ाहिद ने मस्ती में आते हुए एसएमएस लिखा.

शाज़िया को ज़ाहिद के “उफफफफफफफफफ्फ़” के मसेज ने इतना गरम किया. कि उस की फुद्दि का पानी छूटने लगा. जिस से शाज़िया की चूत का बुरा हाल हो गया.

“ फिर आप से कब आमने सामने मुलाकात हो गी?” ज़ाहिद ने शाज़िया से पूछा.

अच्छा में नीलोफर से कह देती हूँ ,कल या परसों आप से मिल सकती हूँ,अगर आप और नीलोफर तैयार हों तो” शाज़िया ने जवाब लिखा.

ज़ाहिद: ठीक में कल नीलोफर से बात कर लूँगा .

ज़ाहिद और शाज़िया दोनो अपने दिल ही दिल बहुत खुश हुए और फिर उन्होने जल्द मिलने का एक दूसरे से वादा कर के चॅट बंद कर दी.

 
ज़ाहिद शुरू शुरू में वाकई ही नीलोफर की सहेली साजिदा (शाज़िया) से सिर्फ़ नीलोफर की तरह सिर्फ़ चुदाई के नाजायज़ ताल्लुक़ात कायम करना चाहता था.

मगर फिर आहिस्ता आहिस्ता उस को शाज़िया इतनी पसंद आने लगी.कि वो उस को हमेशा हमेशा के लिए अपने बिस्तर की ज़ीनत बनाने का फ़ैसला कर बैठा.

इस की वजह शायद ये थी. कि साजिदा का बदन ज़ाहिद को बिल्कुल अपनी बहन शाज़िया की तरह भरा भरा नज़र आया था. इसी लिए ज़ाहिद को साजिदा (शाज़िया) पहली ही नज़र में बहुत भा गई थी.

क्यों कि वो जानता था. वो अगर चाहता भी तो उन दोनो बहन भाई के दरमियाँ कभी भी जमशेद और उस की बहन नीलोफर की तरह के ताल्लुक़ात कायम नही हो सकते थे.

इसीलिए इस सुरते हाल में अगर वो अपनी बहन शाज़िया को नही चोद सकता. तो क्यों ना एक ऐसी लड़की को अपनी महबूबा बना कर चोद ले. जो उस की बहन ना सही उस की बहन जैसा जिस्म तो रखती ही है.

दूसरे दिन शाज़िया ने जब स्कूल के फ्री पीरियड में अपनी सहेली से मुलाकात की. तो उस ने नीलोफर को आहिस्ता से कहा “ यार में रिज़वान से मिलने को तैयार हूँ,तुम मुलाकात का वक्त और जगह अरेंज कर कर रिज़वान और मुझे बता दो”

“तो क्यू मिलवाऊं तुम दोनो “लैला मजनू” को एक दूसरे के साथ” नीलोफर ने मुस्कुराते हुए शाज़िया से पूछा.

“जितना जल्द अज जल्द हो सके यार” शाज़िया ने नीलोफर को जवाब दिया.

“जल्द अज जल्द भी अगले हफ्ते से पहले मुलाकात नामुमकिन है जानू” नीलोफर ने शाज़िया को तंग करने के लिए जान बूझ कर थोड़ा लंबा टाइम बताया.

शाज़िया ने स्टाफ रूम में इधर उधर देख कर ये स्योर किया. कि उन के अलावा तो कोई और कमरे में मौजूद नही है. और फिर ये बात कहते हुए उस ने नीलोफर के सामने ही अपनी शलवार के ऊपर से अपनी फुद्दि पर अपना हाथ तेज़ी से रगड़ा और बोली “उफफफफफफफफ्फ़ ,नही यार एक हफ़्ता तो बहुत ज़्यादा है,इस से पहले कुछ करो ना”

“अच्छा तो मेरी बन्नो की झिझक ख़तम होते ही अब मेरी सहेली की फुद्दि को अपने यार के लंड की इतनी शिद्दत से तलब हो गई कि अब उस के लिए इंतिज़ार मुहाल हो रहा है, इसे कहते हैं कि, या तो मुर्दा बोले ना, अगर बोले तो फिर कफ़न ही फाड़ आए” नीलोफर ने शाज़िया की हालत को देख कर शरारती मुस्कान में उसे कहा.

“बकवास ना करो,एक तो खुद मुझे इस किस्म की ग़लत राह पर डाला है और ऊपर से मुझ पर तंज़ करती हो” शाज़िया नीलोफर के मज़ाक पर झुंझला उठी.

“अच्छा कुछ करती हूँ में” कहते हुए नीलोफर ने शाज़िया हो अपनी बाहों में भरा और दोनो सहेलियाँ खिल खिला कर हंस पड़ी.

एक तरफ शाज़िया उस वक्त इसीलिए खुश थी. कि जल्द ही उस की मुलाकात उस के ख्वाबो के शहज़ादे से होने वाली थी.

जो उस की रूखी ज़िंदगी और प्यासी चूत में फिर से रोनक और स्वाद लेने वाला था.

जब कि दूसरी तरफ नीलोफर उस वक्त इसीलिए हंस रही थी.कि आख़िर उस ने दोनो बहन भाई को अंजाने में एक दूसरे के नंगे जिस्म दिखा कर और एसएमएस के ज़रिए आधी मुलाकात करवा कर. उन में एक दूसरे के लिए गरमी और प्यास इतनी बढ़ा दी थी. कि अब जज़्बात के हाथों मजबूर हो कर वो दोनो ज़ना करने पर तूल गये थे.

फिर स्कूल से घर वापिस आ कर नीलोफर ने ज़ाहिद को फोन मिलाया.

नीलोफर: किधर हो यार.

ज़ाहिद: पोलीस स्टेशन में.

नीलोफर: अच्छा कल मेरे घर आ सकते हो

ज़ाहिद: क्यों.

प्लास्टिक के लंड से खुद भी तुम्हारी गान्ड मारनी है और अपने भाई के लंड से भी चुदवाना है तुम्हे” नीलोफर ने ज़ाहिद के “क्यों” के सवाल पर चिड़ते हुए कहा.

“इतना गुस्सा ,आज लगता है अंगरों पर ही बैठी हो जान” ज़ाहिद ने नीलोफर को तपते लहजे में बोलते सुना तो हंसते हुए बोला.

“फुद्दि के, गुस्सा ना आए तो और क्या आए,एक तो मेरी चूत को लूट का माल समझ कर मुफ़्त में ही मज़े लेते हो, और दूसरा जब नई फुद्दि से मिलाप करवाने जा रही हूँ तो पूछते हो “क्यों” गान्डु कहीं का” ज़ाहिद के हँसने पर नीलोफर को और गुस्सा आया और तो तड़प कर बोली.

ज़ाहिद समझ गया कि नीलोफर को उस का तोहफा ना मिलने का गुस्सा है.

“अच्छा बाबा ग़लती हो गई.अब की बार तुम्हारा गिफ्ट भी साथ ही दूँगा,अब गुस्सा थूक दो जानू” ज़ाहिद ने फोन पर मिन्नत के अंदाज़ में नीलोफर से माफी माँगते हुए कहा.

“अच्छा कल मेरे सास और सुसर झेलम से बाहर जा रहे हैं,इसीलिए तुम कल दोपहर को ठीक 3 बजे मेरे घर आ जाना” नीलोफर ने ज़ाहिद से कहा.

“अच्छा जान में तो कल उड़ कर पहुँचुँगा तुम्हारे घर, यकीन करो में और मेरा लंड तुम्हारी सहेली की चूत के लिए बे करार हो रहे हैं” ज़ाहिद ने अपने लंड को पॅंट के ऊपर से रगड़ते हुए कहा.

“ठीक है फिर कल ही मुलाकात हो गी,वैसे मेरी सहेली की चूत भी तुम्हारे लंड के लिए इसी तरह तड़प रही है” नीलोफर ने ज़ाहिद को जवाब दिया.

उस के बाद नीलोफर ने शाज़िया को फोन किया और बताया कि वो कल स्कूल से छुट्टी मारे गी.

फिर साथ ही साथ नीलोफर ने शाज़िया को अगली दोपहर फ़ोन पर पोने तीन (2.45 पीएम) उसे अपने घर आ कर रिज़वान (ज़ाहिद) से मिलने का टाइम दे दिया.

“ठीक है में कल स्कूल से छुट्टी के बाद सीधे तुम्हारे घर आ जाउन्गी” शाज़िया ने जब सुना कि कल उस की मुलाकात आख़िर कार उस के यार और चोदु से होने की घड़ी आयी है. तो वो खुश से उछल पड़ी.

वो रात अपने बिस्तर पर करवटें बदल बदल कर शाज़िया ने किस तरह रात गुज़ारी.

ये वो ही जानती थी. या उस के बिस्तर की चादर पर पड़ी सलवटें जानती थी.

 
सुबह नहा धो कर शाज़िया ने रिज़वान( ज़ाहिद) का दिया हुआ गिफ्ट निकाल कर पहनना चाहा. तो पता चला कि उस का वो बॅग जिस में उस ने रिज़वान (ज़ाहिद) का दिया हुआ गिफ्ट रखा है. वो उस के कमरे में नही है.

शाज़िया ने नंगी हालत में ही अपने कमरे का दरवाज़ा खोला और दरवाज़े की ऑर से किचन में काम करती हुई अपनी अम्मी रज़िया बीबी को आवाज़ दी “अम्मी मेरा स्कूल वाला बॅग नही मिल रहा”.

“बेटी वो तो मैने कल अपनी अलमारी में रखा था” रज़िया बीबी ने किचन से ही जवाब दिया.

“अम्मी वो मुझे चाहिए, क्या आप मुझे वो बॅग निकाल कर पकड़ा दो गी प्लीज़” शाज़िया ने दरवाज़े की ओट से अपनी अम्मी से दरख़्वास्त की.

“शाज़िया बेटा मुझे सुबह से उस अलमारी की चाभी नही मिल रही,पता नही में कहाँ रख कर भूल गईं हूँ” अम्मी का जवाब शाज़िया के कानों में पड़ा.

“उफफफफफफफफफफफ्फ़ ये अम्मी ने किया कम दिखा है, अब में रिज़वान (ज़ाहिद) से क्या कहूँगी” शाज़िया ने गुस्से में अपने कमरे को ज़ोर से पटकते हुए अपने अपने से कहा.

हस्बे मामूल शाज़िया को आज भी अपने स्कूल से देर हो रही थी.

इसीलिए उस ने जल्दी में एक दूसरे कलर का ब्रा और पैंटी पहना.

और फिर कपड़े पहन कर जल्दी जल्दी नाश्ता किया और स्कूल को रवाना हो गई.

नीलोफर ने अपनी छुट्टी का शाज़िया को कल ही बता दिया था. इस ले गुज़शता रात की तरह शाज़िया के लिए ये दिन भी नीलोफर के बिना बहुत और बच्चेदानी से ही गुज़ारा.

फिर दोपहर को ज्यों ही स्कूल से छुट्टी हुई तो शाज़िया ने रिक्शा लिया और अपनी सहेली के घर की तरफ चल पड़ी.

रास्ते में उस ने अपनी अम्मी को फोन पर बता दिया कि वो अपनी सहेली के घर जा रही है और इसीलिए कुछ देर ठहर कर घर वापिस आए गी.

उधर ज़ाहिद का दिल भी आज अपने किसी काम में नही लग रहा था.

वो सारा दिन पोलीस चोकी के पास अपने किराए के मकान में बैठा हुआ. अपने लंड से खेलता और दोपहर के 3 बजने का इंतिज़ार करता रहा.

जब इंतजार करते करते उस को सबर ना हुआ तो वो अपनी मोटर साइकल ले कर नीलोफर के घर की तरफ निकल गया.और वो नीलोफर के बताए हुए वक्त से थोड़ा पहले ही नीलोफर के घर पहुँच गया.

“तुम तो काफ़ी जल्दी आ गये,क्यों सबर नही हो रहा” नीलोफर ने ज़ाहिद को अपने ड्रॉयिंग रूम में बैठा कर दरवाज़े का परदा उस के आगे करते हुए पूछा.

“हां यार तुम्हारी सहेली से मुलाकात की खुशी में आज तो वक्त ही गुज़ारना मुहाल हो रहा है” ज़ाहिद ने नीलोफर को जवाब दिया.

इतनी देर में दूसरी तरफ शाज़िया भी नीलोफर के घर के दरवाज़े की बेल बजा कर घर के बाहर इंतिज़ार करने लगी.

“तुम बैठो में देखती हूँ कौन आया है” बेल की आवाज़ सुन कर नीलोफर ड्राइंग रूम से बाहर निकली और ड्राइंग रूम के दरवाजे को बाहर से कुण्डी लगा दी. ताकि उस के साथ ज़ाहिद कहीं बाहर ही ना आ जाय.

थोड़ी देर बाद नीलोफर ने ज्यूँ ही अपने घर का दरवाज़ा खोला शाज़िया अंदर दाखिल हुई.

“हाई बानू बहुत तैयारी कर के आई हो लगता है अपने होने वाले यार पर बिजलियाँ गिराने का इरादा है आज” नीलोफर ने सरगोशी के अंदाज़ में शाज़िया से कहा.

और शाज़िया को उस के बाज़ू से पकड़ कर तकरीबन खैंचती हुई अपने बेड रूम में ले आई.

आज शाज़िया वाकई ही बहुत अच्छी तरह से तैयार हो कर आई थी. इसीलिए वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी.

शाज़िया नीलोफर की बात सुन कर शरमा गई.

“लंड के “अलावा” में अभी खाने,पीने के लिए क्या पेश करूँ तुम को बानू” नीलोफर ने शाज़िया को अपने कमरे में रखे हुए सोफे पर बैठते, शरारती अंदाज़ में पूछा.

“बहुत खराब हो तुम नीलोफर,मुझे सख़्त प्यास लगी है पानी पिला दो प्लीज़” शाज़िया ने नीलोफर की बात पर हँसते हुए कहा.

“पिलाती हूँ तुम को पानी मगर उस से पहले में ये तो देख लूँ कि तुम्हारे मुँह की तरह तुम्हारी चूत भी किसी पानी के लिए प्यासी हो रही है कि नही” ये कहते हुए नीलोफर शाज़िया के पास ही सोफे पर बैठ गई.

नीलोफर की बात सुन कर शाज़िया की पहले से ही गरम चूत अपना पानी छोड़ने लगी.

 
नीलोफर ने शाज़िया को अपनी बाहों में भरा और अपना हाथ शाज़िया की एलास्टिक वाली शलवार के अंदर से शाज़िया की फुद्दि में डाला. तो उस ने शाज़िया की चूत को बहुत ही गरम और पानी पानी होता पाया.

“बानू तुम्हारी चूत तो अपने यार से मिलने से पहले ही इतना पानी छोड़ रही है. जब उस का लंड अपने अंदर लोगी तो तुम्हारा क्या हाल हो गा जान” नीलोफर ने अपनी उंगली को शाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर आहिस्ता आहिस्ता फेरते हुए कहा.

नीलोफर के इस तरह करने से शाज़िया की साँसे मज़े से उखड़ने लगीं. और उस की चूत ने और गरम हो कर नीलोफर की उंगली को अपने पानी से तर कर दिया.

“ तुम बैठो में अभी तुम्हारे लिए पानी लाती हूँ” नीलोफर ने कुछ मिनिट्स बाद शाज़िया की फुद्दि के पानी से भरी हुई अपनी उंगली को बाहर निकाला और शाज़िया के पास से उठ खड़ी हुई.

नीलोफर अपने बेड रूम से निकल कर फॉरन ड्रॉयिंग रूम में बैठे हुए एएसआइ ज़ाहिद के पास चली आई.

निलफोर ने ज़ाहिद के पास बैठते ही अपनी उंगली उस के मुँह में डाली और बोली, “मेरी उंगली पर मेरी सहेली की गरम और प्यासी चूत का पानी लगा हुआ है. इस को चूस कर उस की गर्मी का अंदाज़ा लगा सकते हो, कि वो तुम्हारे लंड के लिए कितनी तड़प रही है”

ज़ाहिद ने फॉरन अपने मुँह में डाली हुई नीलोफर की उंगली को चूसना शुरू कर दिया. उस को नीलोफर की उंगली पर लगे हुए नमकीन पानी का ज़ायक़ा बहुत ही अच्छा लगा और वो नीलोफर की उंगली को “शर्प शरप” कर के चाटने लगा.

“बस भी करो मेरी उंगली ही खा जाओ गे क्या” नीलोफर ने ज़ाहिद के मुँह से अपनी उंगली निकाली और उसे धकेल कर थोड़ा पीछे किया.

“वाकई ही तुम्हारी सहेली की चूत के पानी का ज़ायक़ा बहुत मस्त है” ज़ाहिद ने अपने होंठो पर ज़ुबान फेरते हुए कहा.

“अच्छा अब जल्द ही साजिदा की फुद्दि तुम को रियल में मिल जाए गी,दिल भर कर अपने होंठो और ज़ुबान की प्यास बुझा लेना,अब तुम मुझे बताओ कि तुम्हारा लंड कितना तड़प रहा है मेरी सहेली की प्यासी,गरम फुद्दि में जाने के लिए” नीलोफर ने ज़ाहिद की पॅंट की ज़िप खोल कर उस के खड़ा हुआ मोटा लंड बाहर निकालते हुए कहा.

ज़ाहिद के लंड को आज एक नई फुद्दि चोदने को मिल रही थी. इसीलिए वो आज पहले से भी ज़्यादा जोश में आते हुए सख़्त और तन चुका था.

“वाह ये तो ऐसे अकड़ कर खड़ा है जैसे कोई फोजी बॉर्डर पर खड़ा होता है”

नीलोफर ने कहते हुए अपना सर झुकाया और ज़ाहिद के लंड को अपने मुँह में लेते हुए कहा.

“ओह” ज्यों ही नीलोफर ने ज़ाहिद के लंड को अपने मुँह में लिया ज़ाहिद के मुँह से एक सिसकारी फूट गई.

नीलोफर ने कुछ देर गरम जोशी से ज़ाहिद के लंड को चूसा . तो ज़ाहिद के लंड से थोड़ा सा पानी निकलने लगा.

नीलोफर समझ गई कि अगर उस ने थोड़ी देर और ज़ाहिद के लंड को चूसा तो वो उस के मुँह में ही फारिग हो जाय गा.

इसीलिए नीलोफर रुक गई और ज़ाहिद के मोटे लंड को अपने मुँह से निकाल कर दुबारा अपने हाथ में पकड़ कर लंड की तरफ देखा.

ज़ाहिद के लंड की लंबाई पर नीलोफर के मुँह का काफ़ी सारा थूक लगा हुआ था.

जब कि उस के लंड की मोटी टोपी से उस का प्री कम (पानी) बूँद की शकल में हल्का हल्का से निकल रहा था.

नीलोफर ने ज़ाहिद के लंड के पानी पर अपनी उंगली फेर कर अपनी उंगली को ज़ाहिद के लंड की मनी से तर कर लिया.

“जिस तरह मैने मिलने से पहले ही अपनी सहेली की चूत का पानी तुम को टेस्ट करवाया है, उसी तरह अब में अपनी सहेली को पहले तुम्हारे लंड के पानी का ज़ायक़ा से टेस्ट करवा दूँ,ता कि तुम दोनो जब मिलो तो एक दूसरे के लिए बिल्कुल भी अजनबी ना रहो” कहते हुए नीलोफर ने ज़ाहिद के लंड को दुबारा उस की पॅंट में क़ैद कर के ऊपर से ज़िप की कुण्डी लगा दी. और किचन से पानी का ग्लास भर कर शाज़िया के पास चली आई.

कमारे में शाज़िया शिद्दत से नीलोफर के लोटने का इंतिज़ार कर रही थी.

“किधर रह गई थी तुम,मेरी तो प्यास की शिद्दत से जान ही निकली जा रही है नीलोफर” ज्यों ही शाज़िया ने नीलोफर को दरवाजे से अंदर आते देखा उस की जान में जान आई. और उस ने अपनी सहेली से पूछा.

“ मुँह खोलो में आज खुद तुम को अपने हाथ से पानी पिलाती हूँ" नीलोफर ने शाज़िया के नज़दीक होते हुए कहा.

ज्यों ही शाज़िया ने अपना मुँह खोला, नीलोफर ने ज़ाहिद के लंड के पानी से तर अपनी उंगली उस के मुँह में पूरी डाल दी और बोली"लो आज अपने यार के मोटे ताज़े लंड का पानी पी कर अपनी प्यास बुझाओ मेरी जान,क्या बताऊ तुम्हारी फुद्दि के लिए कितना तना हुआ है तुम्हारे यार का लंड"

शाज़िया नीलोफर की बात सुन कर अपने होश-ओ-हवास जैसे खो बैठी. नीलोफर की उंगली पर लगे लंड के ताज़ा पानी के ज़ायक़े ने उसे इतना मस्त कर दिया कि उसे अपने मुँह और गले के खुशक होने का अहसास ही ना रहा.

शाज़िया ने बिना किसी झिझक के अपना मुँह खोला और ज़ाहिद की तरह वो भी नीलोफर की उंगली को चाट चाट कर उंगली पर लगे हुए अपने सगे भाई के लंड के नमकीन पानी को सॉफ करते हुए अपने मुँह में उडेलने लगी.

“उम्म्म्मममममममम” आज इतने अरसे बाद असली लंड के पानी को छू कर मज़ा ही आ गया है” शाज़िया ने नीलोफर की उंगली पर अपनी ज़ुबान रगड़ते हुए कहा.

नीलोफर खामोशी से खड़ी शाज़िया से अपनी उंगली चुस्वाती रही. वो चाहती थी कि शाज़िया खूब अच्छी तरह से अपने भाई के लंड के पानी का स्वाद चख ले तो फिर वो उसे ज़ाहिद के पास ले जाय.

 
जब शाज़िया नीलोफर की उंगली चूस चूस कर थक गई. तो उस ने नीलोफर की उंगली को अपने मुँह से निकाला. और अपने भाई ज़ाहिद की तरह वो भी अपने होंठो पर ज़ुबान फेर कर मज़े से नीलोफर की तरफ देख कर मुस्कुरा दी.

“दिल भर गया है तो चलो अब तुम को इस टेस्टी लंड से असल ज़िंदगी में मिलवा दूं” नीलोफर ने शाजिया को उस के बाज़ू से पकड़ा और ड्रॉयिंग रूम की तरफ चल पड़ी. जिधर सोफे पर बैठा हुआ ज़ाहिद पॅंट में खड़े अपने लंड को हाथ से मसल्ते हुए उन दोनो के इंतिज़ार में था.

“लो जी आज एक गरम लंड और प्यासी चूत की पहली मुलाकात हो गई,अब जल्दी से आगे बढ़ कर एक दूसरे के जवान प्यासे जिस्मो की प्यास बुझा दो तुम दोनो,साजिदा मीट रिज़वान ,और रिज़वान प्लीज़ मीट साजिदा, मेरी प्यारी और बे इंतिहा गरम सहेली” ड्रॉयिंग रूम में एंटर होते हुए नीलोफर ज़ोर से बोली और उस ने मूड कर ड्राइंग रूम के दरवाज़े को बंद किया तो घर के एक कमरे में छुप कर बैठे हुए नीलोफर के भाई जमशेद ने बाहर से कुण्डी लगा दी. ता कि शाज़िया को ड्राइंग रूम से भाग जाने का मोका ना मिले.

सोफे पर बैठे हुए ज़ाहिद और नीलोफर के पहलू में खड़ी शाज़िया की नज़रें जब आपस में मिली. तो दोनो बहन भाई एक दूसरे को यूँ अपने सामने देख कर हेरत जदा रह गये.

दोनो बहन भाई को यूँ अचानक एक दूसरे के सामने आ कर इतना शॉक पहुँचा. जिस से एक तरफ शाज़िया की गरम फुद्दि में से बहता हुआ पानी रुक गया.तो दूसरी तरफ ज़ाहिद की पॅंट में खड़ा हुआ उस का लंड अकड़ने की जगह की तरह फॉरन बैठ गया.

नीलोफर ने आज शाज़िया और ज़ाहिद की हालत बिल्कुल ऐसे कर दी थी. जैसे आज से कुछ महीने पहले नीलोफर और उस के भाई जमशेद की ज़ाहिद के सामने बैठे हुए हो रही थी.

दोनो बहन भाई शर्मिंदगी और हेरत का बुत बने एक दूसरे को आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहे थे. उन दोनो को यकीन नही हो रहा था. कि वो ज़िंदगी में कभी इस तरह भी आपस में मुलाकात करेंगे.

“नीलोफर ये क्या मज़ाक है,ये साजिदा नही बल्कि मेरी सग़ी बहन शाज़िया है” ज़ाहिद ने हेरान होते हुए नीलोफर से कहा.

“में जानती हूँ कि ये तुम्हारी बहन शाज़िया है ज़ाहिद, और इसी बहन की फुद्दि का पानी अभी अभी बारे शौक से चखा है तुम ने मेरे यार” नीलोफर ने मुस्कुराते हुए ज़ाहिद को जवाब दिया.

“क्या” नीलोफर के जवाब पर दोनो बहन भाई के मुँह से एक साथ ये इलफ़ाज़ निकले.

शाज़िया की हालत देख कर यूँ लग रहा था. जैसे उस के जिस्म से किसी ने खून का आखरी क़तरा भी निकाल लिया हो.जिस से वो एक ज़िंदा लाश बन गई हो.

शाज़िया को समझ नही आ रहा था कि ये सब किया है. और क्यों उस की सहेली ने जानते बूझते उन दोनो बहन भाई के साथ इतना घटिया ड्रामा किया है.

शाज़िया को नीलोफर पर बे इंतिहा गुस्सा आने लगा. उस का बस नही चल रहा था कि वो नीलोफर को क़ातल ही कर दे. जिस ने उन दोनो बहन भाई को धोके में रख कर ना सिर्फ़ उन को एक दूसरे के नंगे जिस्म के एक एक हिस्से से रूबरू कर वा दिया था. बल्कि उस ने आज उन दोनो सगे बहन भाई के लंड और फुद्दि का पानी भी एक दूसरे को चखवा दिया था.

बहरहाल अब जो भी हो शाज़िया अब मज़ीद उधर रुक कर अपने आप को मज़ीद तमाशा नही बनाना चाहती थी .इसीलिए उस ने इरादा किया कि वो जल्द अज जल्द उधर से निकल जाय.

ये सोच कर वो वापिस जाने के लिए ज्यों ही मूडी तो ड्रॉयिंग रूम के दरवाज़े को बाहर से बंद पाया.

“दरवाज़ा खोलो और मुझे जान दो” शाज़िया ने इंतिहाई गुस्से से नीलोफर को कहा.

नीलोफर ने शाज़िया के गुस्से को नज़र अंदाज़ करते हुए उस के पीछे आ कर शाज़िया को कंधे से पकड़ते हुए कहा “शाज़िया में जानती हूँ तुम दोनो बहन भाई इस वक्त मेरी की हुई इस हरकत पर बहुत गुस्से में हो,मगर रुक जाओ में सारी बात तफ़सील से बताती हूँ कि मैने ये सब क्यों किया”

शाज़िया: छोड़ो मुझे जाने दो,मुझे तुम को अपनी सहेली कहते हुए भी शर्म आ रही है नीलोफर.

“ शाज़िया प्लीज़ सिर्फ़ चन्द मिनिट्स रुक जाओ मैं तुम को आज सब कुछ खुल कर बता देती हूँ” नीलोफर ने शाज़िया को पकड़ कर अपने साथ ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठाते हुए कहा.

 
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