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वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास ) complete

शाज़िया का दिल तो नही चाह रहा था. कि अपनी भाई की मौजूदगी में वो अंदर एक लम्हा भी रुके.मगर ड्राइंग रूम का दरवाज़ा बाहर से बंद होने की वजह से उस के पास अब ड्राइंग रूम में ही रुकने के अलावा कोई चारा नही था. इसीलिए वो मजबूरन नीलोफर के साथ सोफे पर बैठ गई और अपनी नज़रें नीचे फर्श पर गाढ दीं.

फिर नीलोफर ने शुरू से ले कर आख़िर तक शाज़िया को अपनी ज़िंदगी की सारी कहानी उसी तरह बयान कर दी. जिस तरह आज से कुछ महीने पहले उस ने शाज़िया के भाई एएसआइ ज़ाहिद को सुनाई थी.

जिस में नीलोफर ने अपने और अपने भाई जमशेद के जिन्सी ताल्लुक़ात का किस्सा भी खुलम खुले अल्फ़ाज़ में पूरी तफ़सील से शाज़िया को बता दिया.

साथ साथ नीलोफर ने शाज़िया को ये भी बता दिया.कि कैसे ज़ाहिद के पोलीस रेड के दौरान रंगे हाथों पकड़े जाने और फिर ज़ाहिद के हाथों ब्लॅकमेल होने के डर से ही नीलोफर ने उन दोनो बहन भाई शाज़िया और ज़ाहिद को भी एक दूसरे के साथ जिस्मानी ताल्लुक़ात कायम करने के लिए आमादा करने का सोचा.

शाज़िया अपनी दोस्त की सारी बातों को हेरत के साथ सुन तो रही थी.लेकिन साथ उसे शरम भी आ रही थी. कि उस का अपना सगा बड़ा भाई भी उसी कमरे में उस के साथ बैठा सारी ये सारी बातें सुन रहा है.

नीलोफर की सारी बाते सुनने के दौरान शाजिया को नीलोफर पर गुस्से बढ़ने के साथ साथ इस बात पर भी हैरत हो रही थी. कि क्यों उस के भाई ज़ाहिद ने उन दोनो बहन भाई के साथ की गई नीलोफर की इस जानिब पर शाज़िया की मुक़ाबले कम गुस्से का इज़हार किया था.

इधर ज़ाहिद का हाल ये था. कि पहले पहल तो उसे भी नीलोफर की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आया था.मगर अब जब उस ने देखा कि उस की बहन शाज़िया सामने वाले सोफे पर बैठ कर मजबूरन अपनी सहेली की बातों को सुन रही है. तो उसे नीलोफर की उन दोनो बहन भाई के साथ की गई इस हरकत पर आने वाला गुस्सा अब प्यार में बदल गया.

वो अब दिल ही दिल में नीलोफर का शूकर गुज़ार होने लगा. के जिस ने अंजाने में उन दोनो बहन भाई के जिस्मो का एक दूसरे का ना सिर्फ़ नज़ारा करवा दिया था. बल्कि उन दोनो की आपस में मुलाकात करवा कर शाज़िया और ज़ाहिद के दरमियाँ कायम बहन भाई वाले रिश्ते की झिझक और शरम के पर्दे को उतार फैंका था.

फिर ज्यों ही नीलोफर की बात ख़तम हुई. तो ड्राइंग रूम का दरवाज़ा खुला और नीलोफर का भाई जमशेद अंदर मुस्कुराता हुआ अंदर दाखिल हुआ.

“इस से मिलो शाज़िया, ये है मेरा भाई जमशेद, जो मेरा भाई भी है और मेरा यार भी’ ये कहते हुए नीलोफर भी अपने भाई को देख कर मुस्करते हुए सोफे से उठ खड़ी हुई.

जमशेद चलता हुआ अपनी बहन नीलोफर के नज़दीक पहुँचा. और अपनी बहन को अपनी बाहों में क़ैद करते हुए. उस ने अपने होन्ट नीलोफर के होंठो पर रख कर बहन के गुलाबी होंठो का रस चूमने लगा.

साथ ही साथ जमशेद का एक हाथ नीलोफर के पेट से होता हुआ उस की छाती पर आया. और शाज़िया के देखते ही देखते जमशेद ने नीलोफर के एक मम्मे को अपने हाथ में ले कर किस्सिंग के दौरान मसलना शुरू कर दिया.

शाज़िया अपनी सहेली और उस के भाई की इस हरकत को आँखे पर फाड़ कर ऐसे देखे जा रही थी.जैसे नीलोफर और उस का भाई जमशेद कोई आम इंसान नही बल्कि किसी दूसरे ग्रह का प्राणी हो.

दोनो बहन भाई को यूँ एक दूसरे से लिपटा देख कर शाज़िया के जिस्म से पसीने छूटने लगे.

उसे यकीन नही हो रहा था. कि वो जो कुछ अपनी आँखों के सामने होता देख रही है. वो वाकई ही ये हक़ीकत में हो भी सकता है.

शाज़िया का अब उधर अपने भाई के सामने बैठ कर ये सब देखना ना मुमकिन हो गया.

इसीलिए वो तेज़ी से उठी और दौड़ते हुए नीलोफर के कमरे से अपना पर्स उठा कर घर से बाहर निकल गई.

नीलोफर ने इस बार शाज़िया को रोकने की कोशिस नही की और जान बूझ कर उसे जाने दिया.

ज्यों ही शाज़िया कमरे से बाहर निकली. ज़ाहिद ने उठ कर नीलोफर को जमशेद की बाहों से निकाला और उसे अपनी बाहों में भरते हुए नीलोफर को दीवाना वार चूमने लगा.

“उफफफफफफफफफफ्फ़ ज़ाहिद पागल हो गये हो क्या” नीलोफर ने ज़ाहिद को जब उसे यूँ पागलो की तरह अपने चेहरे,गर्देन और होटो को चूमते देखा तो बोली.

नीलोफर तो ज़ाहिद की तरफ से गुस्से के इज़हार की तव्क्को कर रही थी.मगर उसे ज़ाहिद का ये अंदाज़ देख कर एक खुश गंवार हेरत हुई.

“हां में वाकई ही पागल हो गया हूँ निलो, यार तुम ने आज वो काम किया है जिस के लिए में उस वक्त से तरस रहा था, जब पहली बार तुम दोनो बहन भाई से मुलाकात हुई थी” ज़ाहिद ने नीलोफर के मम्मे को हाथ में पकड़ कर दबाते हुए कहा.

“और वो काम क्या है कुछ हम को भी तो बताओ” नीलोफर सब कुछ जानते हुए भी अंजान बनने की आक्टिंग करते हुए बोली.

“तुम दोनो बहन भाई की चुदाई देखने के बाद मेरे दिल में भी अपनी बहन शाज़िया के साथ जिन्सी ताल्लुक़ात कायम करने का ख्याल आ गया. मगर मुझे में ना तो जमशेद की तरह अपनी बहन के साथ किसी किस्म की हरकत करने का होसला था. ना ही मुझे ये समझ आ रही थी कि में शाज़िया से अपने दिल ही बात कैसे कहूँ,मगर तुम ने हम दोनो बहन भाई को एक दूसरे के नंगे जिस्मो का दीदार करवा कर मेरा आधा काम आसान कर दिया है,अब इस से अगला काम मेरा है. और मुझे उम्मीद है कि जल्द ही जमशेद की तरह में भी अपनी बहन की फुद्दि का मज़ा लेने में कामयाब हो जाऊं गा” ज़ाहिद ने नीलोफर के मम्मो को हाथ से दबाते और मसलते हुए कहा.

साथ ही ज़ाहिद ने नीलोफर को सोफे पर बैठाया और नीलोफर के एक तरफ जमशेद जब कि दूसरी तरफ ज़ाहिद आ कर बैठ गया.

अब नीलोफर उन दोनो के दरमियाँ थी. और ज़ाहिद नीलोफर के मुँह में मुँह डालने के साथ साथ नीलोफर के जवान मम्मो के साथ भी खेलने में मसरूफ़ था.

जब कि दूसरी तरफ से नीलोफर का भाई जमाशेद अपनी बहन के कानो और गर्देन पर किस्सस करता हुए नीलोफर के दूसरे मम्मे को छेड़ रहा था.

ज़ाहिद नीलोफर के जुवैसी होंटो को काटता हुआ बोला “नीलोफर में तो पहले ही अपनी बहन के लिए पागल हो रहा था. मगर याकीन मानो आज जब से मुझे ये पता चल चुका है कि कपड़ों के बिना मेरी अपनी बहन शाज़िया का जिस्म इतना जबर्जस्त है तो अब मेरे लिए उस से एक पल भी दूर रहना मुमकिन नही.

 
ज़ाहिद अभी इतनी ही बात कह पाया कि उस के टेबल पर रखे फोन की घेंटी बज उठी.

ज़ाहिद ने नीलोफर से अलहदा होते हुए अपना फोन चेक किया. तो स्क्रीन पर उस के पोलीस स्टेशन का नंबर शो हो रहा था.

ज़ाहिद ने फोन का जवाब दिया तो उस को खबर मिली कि उस के एरिया में एक क़तल हो गया है.

पोलीस स्टेशन का इंचार्ज होने की वजह से ज़ाहिद का मोका ए-वारदात पर जाना लाज़मी था. इसीलिए ज़ाहिद को ना चाहते हुए भी नीलोफर के घर से जाना पड़ गया.

ज़ाहिद के घर से जाने के बाद जमशेद नीलोफर को ले कर उस के कमरे में चला आया. और अपने और अपनी बहन के कपड़े उतार कर नीलोफर को उस के सुहाग के बेड पर ज़ोरदार तरीके से चोदने लगा.

शाज़िया बोझल कदमो के साथ अपने घर लोटी. वो आज पेश आनी वाले सुरते हाल से बहुत ही परेशान और रंजीदा थी.

शाज़िया की खुश किस्मती थी. कि उस की अम्मी उस वक्त अपने कमरे में बैठी फोन पर किसी से बातों में मसरूफ़ थी.

वरना उस की अम्मी रज़िया बीबी के लिए अपनी बेटी के चेहरे पर मजूद गुस्से,गम और परेशानी का असर पड़ना कोई मुश्किल काम ना होता.और उस के बाद फिर शाज़िया के लिए अपनी अम्मी के सवालों का जवाब देना या उन को टालना भी कोई आसान बात ना होती.

शाज़िया खामोशी से चलती हुई अपने कमरे में घुसी. और बिस्तर पर गिरते ही फूट फूट कर अपने साथ होने वाले वाकये पर ज़रो कतर रोने लगी.

आज का पेश आने वाला वाकीया उस के लिए ना काबले बर्दाश्त था. उस को समझ में नही आ रहा था. कि वो आज के बाद अपने सगे भाई का सामना कैसे करे गी.

जो उस का पूरा नंगा जिस्म ना सिर्फ़ देख चुका था. बल्कि वो अपनी चॅट के दौरान उस के बदन की तारीफ के पुल बाँधते हुए अंजाने में अपनी ही सग़ी बहन को अपनी महबूबा बनाने का इरादा ज़ाहिर कर चुका था.

जब कि शाज़िया को इस के साथ साथ अपने आप से भी घिन आने लगी थी. कि कैसे वो नीलोफर की बातों में आ कर अंजाने में अपने ही सगे बड़े भाई के लंड की दीवानी हो कर उस से चुदवाने पर तूल गई.और फिर उसे मिलने और प्यार करने नीलोफर के घर भी जा पहुँची थी.

दिन भर के सारे वाकीयत को सोच सोच कर शाज़िया पागल हुई जा रही थी.

सोचते सोचते उस का दिल चाहा कि वो कमरे में लगे पंखे के साथ लटक कर खुद खुशी कर ले.

मगर शाज़िया एक निहायत डरपोक लड़की थी.इसीलिए चाहते हुए भी अपने इस ख्याल को अमली जामा पहनाने की उस में हिम्मत नही हुई.

फिर कब वो रोते रोते सो गई ये उस को खुद भी पता ना चला.

रात के तकरीबन 8 बजे उस की अम्मी ने आ कर उसे उठाया. तो वो अम्मी से अपनी तबीयत का बहाना बना कर बिस्तर पर ही पड़ी रही.

रज़िया बीबी समझी कि उस की बेटी शायद स्कूल में मसरूफ़ियत की वजह से थक गई है. इसीलिए शाज़िया की अम्मी ने भी उसे ज़्यादा तंग ना किया और उस का खाना कमरे में ही रख कर खुद बाहर टीवी लाउन्ज में चली गईं.

शाज़िया के दिल की तरह उस की भूक भी आज जैसे उड़ चुकी थी. इसीलिए उस ने पास रखे खाने को नज़र उठा कर भी ना देखा और गुम सूम पड़ी कमरे की छत (रूफ) को घूरती रही.

फिर जब उस का ज़हन सोच सोच कर थक गया. तो वो दुबारा से नींद की वादी में डूब गई.

उस रात हस्बे मामूल ज़ाहिद अपनी ड्यूटी से लेट वापिस आया. तो उस वक्त तक उस की अम्मी और शाज़िया दोनो अपने कमरे में सो चुकी थी.

ज़ाहिद ने दिल ही दिल में सुख का सांस लिया.क्यों कि आज दिन में पेश आने वाले वाकिये के बाद अभी उस में भी अपनी बहन का सामना करने का होसला नही पैदा हुआ था.

फिर ज़ाहिद भी अपने कमरे में चला आया. और बिस्तर पर लेट कर अपनी बहन शाज़िया के बारे में सोचने लगा.

शाज़िया के बारे में सोचते सोचते ज़ाहिद के ज़हन में वो मंज़र याद आने लगा. जब उसने पिंडी से वापिसी पर पहली बार अपनी बहन को उस के कमरे में सोता देखा था. और अपनी बहन शाज़िया की मोटी भारी गान्ड को देख कर उस का दीवाना हो गया था.

फिर एक एक कर के वो सारे मंज़र ज़ाहिद के दिमाग़ में एक फिल्म की तरह चलने लगे.

जब उस ने पिछले चन्द दिनो में किसी ना किसी सेक्सी पोज़ में अपनी सग़ी बहन के गरम बदन का नज़ारा किया था.

इस के साथ साथ जब ज़ाहिद नीलोफर की दिखाई हुई शाज़िया की नंगी तस्वीरो और अपनी बहन की चूत के नमकीन पानी के जायके को ज़हन में लाया. तो अपनी बहन के नंगे वजूद को याद करते हुए ज़ाहिद तो जैसे पागल हो गया.

शाज़िया के मुतलक सोचते सोचते ज़ाहिद को यकीन हो गया कि.उस की अपनी सग़ी बहन ही वो औरत है. जिस औरत की तलाश में उस का लंड मारा मारा फिरता हुआ कई औरतों की फुद्दियो की सैर करता रहा है.

जिस औरत को वो आज तक बाहर की दुनिया में तलाश करता रहा.वो औरत तो उस की बहन के रूप में उस के अपने घर में छुपी हुई है.

और उस ने अपने दिल में ये फ़ैसला कर लिया कि अब कुछ भी हो. वो भी जमशेद की तरह अब अपनी सब शर्मो हया को एक तरफ रखते हुए.जल्द आज़ जल्द अपनी बहन को अपने बिस्तर की ज़ीनत बना कर उस की चूत का मज़ा ज़रूर ले गा.

क्यों कि बकॉल एक पंजाबी के शायर के,

“अन पग इशक दी भादी नई

जीने बहन बना के याडी नई”.

(उस शक्स का इश्क उस वक्त तक मुकम्मल नही होता. जब तक वो किसी लड़की को अपनी बहन कह कर ना चोद ले)

फिर शाजिया के बारे में ही सोचते और अपने लंड से खेलते खेलती ज़ाहिद भी आख़िर कार सो गया.

दूसरे दिन सुबह सवेरे ज़ाहिद तैयार हो कर पोलीस स्टेशन जाने के लिए अपने कमरे से निकला. तो उस ने अपनी बहन शाज़िया को किचन में अम्मी के साथ नाश्ते बनाते देखा.

शाज़िया से कल नीलोफर के घर की मुलाकात के बाद दोनो बहन भाई के अपने घर में ये पहला आमना सामना हुआ था.

अपनी बहन को किचन में अपनी अम्मी के साथ कायम करते देख कर ज़ाहिद के दिल के साथ साथ उस के लंड की धड़कन भी तेज हो गई.

जब कि ज़ाहिद ज्यों ही किचन में दाखिल हुआ. तो अपने भाई ज़ाहिद को आता देख कर शाज़िया के भी पसीने छूटने लगे.

कल के वाकई के बाद उस में अभी भी अपने भाई से नज़रें मिलाने की हिम्मत ना हुई.

ज्यों ही ज़ाहिद शाज़िया और अपनी अम्मी के नज़दीक पहुँचा तो शाज़िया ने एक दम से अम्मी की तरफ ध्यान देते हुए कहा “अम्मी भाई आ गये हैं आप इन के साथ बैठ कर नाश्ता कर लो”.

ये कहते हुए अपनी नज़रें झुका कर शाज़िया किचन में रखे हुए टेबल पर चाइ और नाश्ता रखने लगी.

रज़िया बीबी: शाज़िया बेटी आओ तुम भी हमारे साथ बैठ कर नाश्ता कर लो ना.

“नही अम्मी में चाइ के साथ रस खा चुकी हूँ,आप नाश्ता करें में थोड़ी देर में आती हूँ” शाज़िया अपने भाई के सामने मज़ीद रुकना नही चाहती थी. इसीलिए वो बहाना बना कर अपने कमरे में चली गई.

 
ज़ाहिद कुर्सी पर बैठ कर गान्ड मटकाती हुई अपनी बहन शाज़िया को किचन से बाहर जाता देख कर उस के भारी कुल्हों की पहाड़ियों में खो गया.

शाज़िया के जाने के बाद ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के साथ मिल कर नाश्ता किया और फिर अपनी ड्यूटी पर चला गया.

कमरे में पहुँच कर शाज़िया ने अपनी बिखरी सांसो को संभाला और अपना फोन उठा कर अपने स्कूल के प्रिन्सिपल से फोन पर तीन दिन की छुट्टी की रिक्वेस्ट की. जिस को प्रिन्सिपल ने मंज़ूर कर लिया.

उस रोज़ वाले वाकिये की वजह से आज शाज़िया का अपने स्कूल जाने और अपनी सहेली नीलोफर से मिलने को दिल नही कर रहा था. इसीलिए उस ने स्कूल से तीन दिन की ऑफ ले कर घर रहना ही मुनासिब समझा.

उस दिन जब नीलोफर ने अपनी सुजकी वॅन में शाज़िया को ना देखा. तो वो समझ गई कि आज शाज़िया ने आज स्कूल से छुट्टी मारी है.

नीलोफर ने स्कूल पहुँच कर शाज़िया को फोन मिलाया. तो अपने कमरे में बैठी शाज़िया ने नीलोफर का नंबर देख कर नफ़रत से फोन पर थुका, मगर फोन का जवाब नही दिया.

फोन की बजती बेल की आवाज़ सुन कर नीलोफर को अंदाज़ा हो गया कि शाज़िया जान बूझ उस का फोन अटेंड नही कर रही. नीलोफर समझ गई कि शाज़िया अभी तक उस की हरकत पर उस से नाराज़ है.

“कोई बात नही मुझे शाज़िया को एक दो दिन का वक्त देना चाहिए,ता कि उसे आराम और सकून से इस सारे मामले पर गौर करने का वक्त मिल सके” नीलोफर ने अपने आप से कहते हुए फोन की लाइन काट दी.

अगले दो दिन शाज़िया ने अपने घर में और ज़्यादा तर अपने कमरे में ही रह कर गुज़ारे. और अपने और अपने भाई ज़ाहिद के दरमियाँ होने वाले सारे किससे के मुतलक सोचती और दिल ही दिल में कुढती और रंजीदा होती रही.

घर में रहने के दौरान उस ने पूरी कोशिस रही. कि उस का अपने भाई ज़ाहिद से आमना सामना नही हो पाए.

इसीलिए जब भी ज़ाहिद घर आता. तो शाज़िया अपने आप को अपने कमरे तक सीमित कर लेती.

जब कि इन दो दिनो में ज़ाहिद की ये कोशिस रही. कि वो किसी तरह मोका देख कर शाज़िया से एक दफ़ा बात तो कर के देखे.

मगर शोमी किस्मत कि जब भी वो नोकरी से घर आया उस ने अपनी अम्मी को घर में ही मौजूद पाया. जिस वजह से ज़ाहिद को अपनी बहन शाज़िया से कोई बात करने का मोका ना मिला पाया.

इस दौरान उस ने नीलोफर से भी पूछा कि उस का रब्ता शाज़िया से हुआ ही कि नही. तो नीलोफर का जवाब भी नही में था.

ज़ाहिद ने अपने पोलीस स्टेशन और रात को अपने कमरे से खुद भी शाज़िया के दोनो नंबर्स पर कॉल करने की ट्राइ की. मगर उसे अपनी बहन शाज़िया के दोनो नंबर्स हमेशा बंद ही मिले.

पोलीस वालों की नोकरी भी अजीब होती है. कभी कभी किसी बेगुनाह आदमी को पोलीस इनकाउंटर में मार दो तो भी कुछ नही होता. और कभी सही काम करने पर भी सस्पेंड हो जाते हैं.

अपने बाकी जाती भाइयो (पोलीस कॉलीग्स) की मुक़ाबले ज़ाहिद इस मामले में खुशकिस्मत था.कि अपनी नोकरी के दौरान वो अभी तक किसी केस में सस्पेंड नही हुआ था.

उस की वजह ये थी कि वो अपने हर बड़े ऑफीसर से हमेशा बना कर रखता था.

मगर कहते हैं ना कि बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी. बिल्कुल इसी तरह शाज़िया वाले वाकये के तीसरे दिन जब ज़ाहिद दोपहर को अपने पोलीस स्टेशन गया. तो उस को पता चला कि एक केस की ग़लत इंक्वाइरी करने की वजह से एसपी साब ने उस को चार दिन के लिए सस्पेंड कर दिया है.

ज़ाहिद ये सज़ा पा कर बहुत खुश हुआ. कि चलो इस बहाने उस को अपने घर में आराम करने और अपनी बहन के नज़दीक आने का टाइम और मोका तो मिल पाए गा.

वरना 24 घंटे और 7 दिन की पोलीस ड्यूटी के दौरान ज़ाहिद को अपने घर में रहने का टाइम कम ही मिल पाता था.

उस दिन दोपहर में खलफ़े मामूल ज़ाहिद दिन के तकरीबन 4 बजे अपने घर चला आया. उस वक्त ज़ाहिद ने अपनी पोलीस यूनिफॉर्म की बजाय शलवार कमीज़ पहनी हुई थी.

जब ज़ाहिद घर में दाखिल होने लगा. तो उस ने अपनी अम्मी को घर से बाहर निकलते देखा.

“बेटा आज जल्दी घर चले आए,ख़ैरियत तो है ना” रज़िया बीबी ने घर से बाहर आते हुए अपने बेटे ज़ाहिद को देखा तो पूछने लगी.

“हां अम्मी जी ख़ैरियत ही है,आप किधर जा रही हैं?” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के सवाल का जवाब देते हुए ,उन से सवाल पूछा.

“बेटा में इधर मोहल्ले में ही किसी के घर जा रही हूँ,तुम चलो में अभी थोड़ी देर में आई” कहते हुए रज़िया बीबी चली गई.

जब ज़ाहिद घर में एंटर हुआ. तो उस ने अपनी बहन शाज़िया को ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठे हुए पाया.

शाज़िया सोफे पर अपनी राइट टाँग को अपनी लेफ्ट टाँग पर रख कर इस अदा से बैठी हुई थी. कि ड्राइंग रूम में दाखिल होते ज़ाहिद को राइट साइड अपनी बहन की मोटी रान और उस की भारी और बड़ी गान्ड का भरपूर नज़ारा देखने को मिल गया.

शाज़िया ताज़ा ताज़ा नहा कर बाथरूम से निकली थी. जिस वजह से उस के सारे बाल अभी तक गीले थे.

शाज़िया का खिला खिला और धुला धुला चेहरा और गीला महकता जिस्म. जिस की मदहोश करने वाली महेक किसी भी मर्द के होश उड़ा कर रख दे.

दुपट्टे के बगैर उस की कमीज़ में कसे हुए शाज़िया के मोटे और भारी मम्मे दूर से सॉफ नज़र आ रहे थे.और फिर ऊपर से शाज़िया की गान्ड का “फेलाव” उफफफफफफ्फ़ क्या ही उम्दा जिस्म था शाज़िया का.

ताज़ा ताज़ा नहा कर निकलने से शाज़िया की कमीज़ उस के जिस्म से चिपक रही थी. और उस के गीले बाल उस वक्त शाज़िया के हुश्न में इज़ाफ़ा कर रहे थे.

ज़ाहिद दरवाज़े पर ही खड़ा हो कर अपनी बहन के जवान प्यासे जिस्म का जायज़ा लेने लगा था.

बहन के गरम और प्यासे बदन को देख देख कर उस का लंड उस की शलवार में तन कर खड़ा हो गया.

अम्मी की गैर मौजूदगी में ज़ाहिद के लिए आज एक बहुत ही अच्छा मोका था. कि वो अपनी बहन से अब अपने दिल की बात कह सके.

इसीलिए ज़ाहिद आहिस्ता से चलता हुआ आ कर अपनी बहन के साथ सोफे पर बैठ गया.

अपने भाई के यूँ पास बैठने से शाज़िया तो जैसे शर्म से अपने ही अंदर सिमट कर रह गई.

ज़ाहिद ज्यों ही सोफे पर बैठा तो शाज़िया एक दम से उठी और अपने कमरे में जाने लगी.

ज़ाहिद अपना शिकार हाथ से निकलता देख कर एक दम शाजिया के पीछे भागा. और शाज़िया को पीछे से पकड़ कर उसे ड्राइंग रूम की दीवार से लगा दिया.

ज़ाहिद: शाज़िया में तुम से कुछ कहना चाहता हूँ.

“छोड़ो भाई अब हमारे दरमियाँ कहने को कुछ बाकी नही रहा” शाज़िया ने ज़ाहिद को अपने आप से अल्हेदा करने की कोशिस की.

“हमारी कहानी तो अभी शुरू हुई है मेरी बहन” ज़ाहिद ने शाज़िया के दोनो कंधो को मज़बूती से अपने हाथों में जकड़ते हुए कहा.

“किया मतलब आप का” शाज़िया ने अपने भाई के इस जवाब पर हेरत से उस की आँखों में देखते हुए पूछा.

“मातब ये कि शाजिया इस से पहले हमारे दरमियाँ जो कुछ हुआ वो सब अंजाने में हुआ. नीलोफर ने बे शक गुस्से में आ कर मुझ से बदला लेने के लिए हम दोनो बहन भाई से ये सब ड्रामा रचाया. मगर सच पूछो तो इस सारे खेल में, अंजाने में तुम को मिले बिना ही,में अपना दिल तुम को दे बैठा था, मुझे पता है कि मेरी ये बात तुम को बुरी लगेगी.मगर ये हक़ीकत है कि जब से मुझे पता चला है कि मेरे सपनो की रानी कोई आम औरत नही. बल्कि मेरी अपनी सग़ी बहन है. तो यकीन मानो मेरा ये इश्क तुम से कम होने की बजाय पहले से भी बढ़ गया है. “आइ लव यू शाज़िया, नोट ऐज बहन ,बट ऐज आ मॅन लव्स आ विमन”.

अपनी बहन से पहली बार अपने दिल की बात कहते हुए अगले ही लम्हे ज़ाहिद के होन्ट सीधे शाज़िया के होंटो की तरफ बढ़ाए.

 
मगर शाज़िया ने अपने होंठो को अपने भाई के होंठो से बचाने के लिए अपना मुँह ज्यों ही मोड़ा तो ज़ाहिद के होन्ट शाज़िया की राइट गाल के ऊपेर जा चिपके. और ज़ाहिद अपनी बहन शाज़िया के गाल को ऐसे चूमने लगा. जैसे कोई इंसान किसी मासूम बच्चे को प्यार करता है.

इस से पहले तक तो शाज़िया ये समझ रही थी.कि जो कुछ भी हुआ वो सिर्फ़ और सिर्फ़ उस की सहेली नीलोफर का किया धरा था. मगर अब भाई की इस हरकत ने उस के होश और हाथों के तोते ही जैसे उड़ा दिए.

“भाईईईईईईईईईईईईईईईईईई आप ये किया गुनाह कर रहे हैं,बहन हूँ में आप की,और आप की इज़्ज़त हूँ में” शाज़िया अपने भाई की इस हरकत और बातों से बोखला कर रह गई. और उस ने अपने आप को भाई की क़ैद से छूटने की कॉसिश करते हुए कहा.

"उफफफफफफफफ्फ़ मेरी बहन ये गुनाह सवाब की बात नही. ये दो जवान प्यासे जिस्मो की ज़रूरत का मामला है, मुझे पता है कि तुम्हारी इस जवानी को एक मोटे तगड़े लंड की ज़रूरत है. जब कि मेरे मोटे लंड को तुम जैसी एक प्यासी औरत की चूत की तलब,अगर तुम मेरा साथ दो तो हम दोनो एक दूसरे की प्यास को बुझा सकते हैं और इस तरह घर की इज़्ज़त घर में ही महफूज़ रहे गी मेरी जान” अपनी बहन से बे शर्मी से इतने गंदे इलफ़ाज़ बोलते हुए ज़ाहिद का हाथ अब आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की टाँगों के दरमियाँ आया. और उस ने अपनी बहन की फूली ही चूत को शलवार के उपर से अपनी मुट्ठी में काबू कर के सहलाना शुरू कर दिया.

शाज़िया की चूत इतनी गरम थी. कि अपनी बहन की चूत पर हाथ रखते ही ज़ाहिद को यूँ महसूस हुआ जैसे उस ने किसी तेज आग वाली भट्टी में हाथ डाल दिया हो. और उस भट्टी से निकलते हुए गरम आग के शोले उस के हाथ की उंगलियो को जला कर भसम कर देंगे.

उधर अपने भाई के हाथ को अपनी फुद्दि के ऊपर पा कर शाज़िया के मुँह से भी “हाईईईईईईईईईईईईईईईई”एक सिसकारी निकलते निकलते रह गई.

“भाई छोड़ दो मुझे , अपनी ही बहन के साथ इस किस्म की घटिया हरकत से आप को शरम आनी चाहिए,आप जानते नही कि आप को इस हरकत का कितना गुनाह हो गा” शाज़िया ने ज़ाहिद की बाहों में मचलते हुए कहा.

"इस का जवाब जवानी को प्यार करने से अगर गुनाह मिलता है तो मिलने दो मेरी जान” ज़ाहिद ने अपनी बहन की बात को अन सुनी करते हुए उस के गालों पर अपने होन्ट दुबारा चिस्पान किया और शाज़िया के जिस्म को और ज़ोर से कस कर अपने करीब कर लिया.

अपनी बहन को यूँ अपने इस कदर करीब करने से शाज़िया के मोटे और नरम मम्मे ज़ाहिद की सख़्त और चौड़ी छाती में जज़्ब हो गये.

जब कि नीचे से ज़ाहिद का लंड उस की शलवार के अंदर से ही शाज़िया के पेट से रगड़ खाने लगा.

अपने भाई की बाहों में क़ैद होने से शाज़िया को अपने सगे भाई का फन फनाता और लोहे की राड जैसे सख़्त लंड को अपने पेट से पहली दफ़ा टकराता हुए महसूस कर के शाज़िया को बहुत घबराहट होने लगी.

ये वो ही लंड था.जिस को देख कर शाज़िया की चूत कुछ दिन पहले इतनी गरम हुई थी. कि उस ने जोशे जज़्बात में आ कर उस लंड की फोटो को अपनी प्यासी फुद्दि पर रगड़ रगड़ कर अपनी फुद्दि का पानी छोड़ दिया था.

मगर आज अपने भाई की बाहों में क़ैद शाज़िया को इस लंड के इतने करीब हो कर बहुत शरम महसूस होने लगी थी. और वो अपने भाई की बाहों के घेरे को तोड़ कर उस से दूर भाग जाना चाहती थी.

अपनी बहन के भारी जिस्म को अपनी बाहों की क़ैद में जकड़े जकड़े ज़ाहिद ने अपने हाथ को शाज़िया के पेट के ऊपर से ले कर. उस की कमीज़ के ऊपर से ही अपनी बहन के मोटे और भारी मम्मे को पहली बार अपनी मुट्ठी में जकड़ा और उसे दबाने लगा.

शाज़िया का मम्मा इतना बड़ा था. कि वो ज़ाहिद के हाथ में नही समा पा रहा था.

ज़ाहिद ने आज तक इतने बड़े मम्मे को अपने हाथ में ले कर कभी नही दबाया था. इसीलिए आज पहली बार अपनी बहन की जवान छाती को अपने हाथ से मसल्ते हुए वो जोश और मज़े से बे हाल होने लगा.

शाज़िया के मम्मो और चूत को किसी मर्द का हाथ लगे तकरीबन दो साल होने को थे. इसीलिए उसे अपने ऊपर काबू पाना मुश्किल हो रहा था.

इस से पहले कि वो भी जज़्बात की रौ में बह कर अपने भाई के साथ हम बिस्तरी के गुनाह पर आमादा हो जाती.

वो जल्द अज जल्द अपने आप को अपने भाई से दूर करने का सोच कर अपने बचाव के लिए अपने हाथ पैर मार रही थी.

इसीलिए शाज़िया ने अपने आप को अपने भाई की बाजुओं की क़ैद से निकालने की नाकाम कॉसिश करते हुआ कहा ““ये क्या कर रहे हैं आप भाई.. आप होश में आइए, में बहन हूँ आप की, खुदा के लिए मुझे छोड़ दो ,ये ग़लत है भाई”.

ज़ाहिद ने शाज़िया को अपने सीने के साथ मज़ीद सख्ती से भींचते और अपनी बहन की गर्देन पर चूमते कहा “आआअहह,शाज़िया बहन तो तुम हो, मगर में इस से पहले ये नही जानता था कि इतनी गरम भी हो.मैने इस से पहले कई दफ़ा सोचा तो ज़रूर था, मगर कभी तुम को छूने की हिम्मत नही पड़ी, लेकिन जो काम नीलोफर ने किया उस के बाद अब में खुल कर अपने जज़्बात का इज़हार तुम से करना चाहता हूँ मेरी बहन,

(ज़ाहिद ये बात ब खूबी जानता था.कि उस की बहन शाज़िया जवानी की आग में जल रही है. लेकिन अपने ही सगे भाई से चुदवाने के लिए वो झिझक रही है. और ज़ाहिद को मालूम था. कि अपनी बहन की ये झिझक दूर करने के लिए उसे शुरू में शाज़िया के साथ थोड़ी ज़ोर ज़बरदस्ती करनी पड़े गी.)

इसी लिए अपनी बात ख़तम करते ही ज़ाहिद ने अपना जिस्म को थोड़ा नीचे झुकाया.साथ ही अपने दोनो हाथों से अपनी बहन के भारी चुतड़ों को अपने हाथों में कसते हुए.उस ने अपने जिस्म को एक दम से ऊपर की तरफ उठाया.

ज़ाहिद के इस तरह करने से उस का मोटा सख़्त लंड उस की बहन की गुदाज रानों से रगड़ ख़ाता शाज़िया की गरम और प्यासी चूत से जा टकराया.

“हाईईईईईईईईईई” ज़ाहिद के लंड की अपनी बहन की प्यासी गरम फुद्दि से पहली मुलाकात होते ही दोनो बहन भाई के मुँह से आवाज़ निकली.

ज़ाहिद अपनी बहन की चूत की गर्मी अपने लंड पर और शाजिया अपने भाई के मोटे ताज़े लंड की गर्मी अपनी चूत पर सॉफ तौर पर महसूस कर रही थी.

 


इस से पहले के ज़ाहिद कुछ और कहता या करता घर के दरवाज़े पर लगी डोर बेल बज गई.

ज़ाहिद समझ गया कि अम्मी वापिस आ चुकी हैं. इसीलिए अब शाज़िया को अपनी बाहों की क़ैद से आज़ाद करने के सिवा उस के पास कोई चारा नही था.

ज़ाहिद ने अपनी बहन को अपने चुंगल से आज़ाद करने से पहले अपनी बहन के गुदाज गालों की एक बार फिर एक भर पूर चुम्मि ली. और शाज़िया को अपनी क़ैद से रिहाई दे कर खूद बाहर का दरवाज़ा खोलने चला गया.

ज़ाहिद अपनी बहन शाज़िया को बहका कर अपने रास्ते पर लाना चाहता था. और अपने मकसद को पाने के लिए आज वो अपना चारा फैंक चुका था.

ज़ाहिद को अपनी किस्मत पर पूरा यकीन था. कि उस के फैंके हुए चारे में उस की बहन एक मछली की तरह ज़रूर अटके गी.

अपने इन ही ख्यालो में मगन होते और अपने खड़े लंड को बड़ी मुश्किल से अपनी शलवार में बिताते ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के लिए घर का दरवाज़ा खोल दिया.

उधर ज़ाहिद के शाज़िया को छोड़ कर बाहर निकलने की देर थी. कि शाज़िया अपनी बिखरी सांसो को समेटती हुई जल्दी से अपने कमरे में चली आई. और कमरे के दरवाज़े की कुण्डी लगा कर बिस्तर पर गिरते हुए फूट फूट कर रोने लगी.

शाज़िया तो अपने भाई के सामने यूँ अचानक बेनकाब होने और अपना राज़ खुल जाने की वजह से पहले ही बहुत परेशान थी. मगर अभी अभी ज़ाहिद ने अपने हाथों,होंठो और अल्फ़ाज़ से अपनी जिस गंदी ख्वाइश का इज़हार अपनी बहन से खुलम खुल्ला कर दिया था. उस ने शाज़िया को मज़ीद रंजीदा कर दिया था.

अब वो बिस्तर पर लेट कर रोते रोते फिर उस वक्त को कोस रही थी. जिस वक्त उस के भाई ज़ाहिद की मुलाकात नीलोफर और उस के भाई से हुई थी.

क्यों कि शाजिया अब ये बात जान चुकी थी. कि जिस तरह एक आम इंसान किसी गंदे आदमी के साथ रह कर गंदा हो जाता है

बिल्कुल इस तरह उस का भाई ज़ाहिद भी नीलोफर और उस के भाई से मिलने के बाद उन के रंग में रंग चुका है.

और अब वो भी नीलोफर और जमशेद की तरह गुनाह और सवाब की बात को हटा कर अपनी बहन की शलवार के नाडे को खोलने पर तूल चुका है.

इस के साथ साथ शाज़िया इस बात पर भी सोचने लगी. कि कैसे आज उस के ना चाहने के बावजूद ज़ाहिद की छेड़खानी ने उस की जवानी के जज़्बात को गरम कर दिया था.

शाज़िया ये बात अच्छी तरह जानती थी. कि आज के बाद उस के भाई का होसला पहले सी भी बढ़ जाए गा. और वो फिर मोका देख कर उस से अपनी गंदी ख्वाहिश का इज़हार ज़रूर करे गा.

शाज़िया सोचने लगी कि आज तो अम्मी के आ जाने की वजह से वो अपनी इज़्ज़त अपने ही भाई के हाथों बर्बाद होने से बचा पाई थी.

मगर उसे डर लग गया कि कहीं नीलोफर की तरह अगर वो भी बहक गई. तो अपनी जवानी के जज़्बात को अपने काबू में रखना उस के लिए फिर आसान ना रहे गा.

इस बात को सोचते सोचते शाज़िया ने अपने दिल में पक्का इरादा कर लिया. कि अब चाहे जैसा भी रिश्ता मिले वो अपनी अम्मी से कह कर जल्द अज जल्द अपनी शादी कर के इस घर और अपने भाई से दूर चली जाएगी.

दूसरे दिन सुबह जब ज़ाहिद अपने किसी काम के सिलसिले में घर से बाहर गया. तो शाज़िया ने मौका देख कर अपनी अम्मी से बात की.

शाज़िया: अम्मी आप खाला गुलशन से कहें कि मेरे लिए कोई रिश्ता तलाश करे.

(खाला गुलशन झेलम सिटी में ही एक रिश्ते करवाने वाली औरत थी. जो अपनी फीस ले कर लोगों के आपस में रिश्ते करवाती थी)

“बेटी गुलशन ने तो इस से पहले भी काफ़ी रिश्ते दिखाए हैं.मगर तुम को कोई रिश्ता पसंद ही नही आता” रज़िया बीबी ने अपनी बेटी की बात सुन कर जवाब दिया.

“अम्मी आप बस उन से बात करें,इस बार जो भी रिश्ता आया में हां कर दूंगी” शाजिया ने अपनी अम्मी की बात के जवाब में कहा.

रज़िया बीबी दो तीन दफ़ा रात की तन्हाई में अपनी बेटी को अपने जिस्म से खेलता और अपनी चूत की आग को ठंडा करते सुन चुकी थी.

इसीलिए वो अपनी बेटी की बात को सुन कर ये समझी कि शायद उस की बेटी के लिए अब एक मर्द के बगैर रहना मुहाल हो रहा है.और वो अपने बदन की जिन्सी भूक के हाथों मजबूर हो कर किसी भी किस्म के मर्द से शादी के लिए रज़ा मंद हो चुकी है.

मगर रज़िया ये हक़ीकत नही जान पाई थी. कि उस की बेटी असल में अपने जिस्म की भूक से नही. बल्कि उस के अपने ही सगे बेटे के हाथों और लंड से दूर हो जाने के लिए ना सिर्फ़ रंडवे, बच्चो वाले बल्कि किसी बूढ़े आदमी के पल्ले बँधने पर भी तूल गई है.

“अच्छा बेटी में आज ही गुलशन को फोन कर के उस से बात करती हूँ” रज़िया बीबी ने अपनी बेटी की बात मानते हुए कहा.

उसी दोपहर जब ज़ाहिद घर वापिस आया. तो उस ने अपनी अम्मी और खाला गुलशन को ड्राइंग रूम में बैठ कर बातें करते देखा.

खाला गुलशन को अपनी अम्मी के साथ बैठा देख कर ज़ाहिद का माथा ठनका.

ज़ाहिद अपने कमरे में जा कर सोचने लगा. कि उस ने तो अपनी अम्मी को अपनी शादी से अभी तक इनकार किया हुआ है.तो फिर ये खाला गुलशन आज किस सिलसिले में अम्मी के पास बैठी हुई है.

थोड़ी देर बाद जब ज़ाहिद ने खाला गुलशन को अपनी अम्मी से खुदा हाफ़िज़ कहते सुना.तो ज़ाहिद अपने कमरे से निकल कर अपनी अम्मी के पास सोफे पर आन बैठा.

 
शाज़िया उस वक्त अपने कमरे में माजूद अपनी किसी सहेली से फोन पर बात चीत में मसरूफ़ थी. इसीलिए उसे पता नही चला कि इस वक्त उस का भाई अम्मी के पास बैठ कर उन से क्या बात कर रहा है.

“अम्मी ये खाला गुलशन किधर आई थी आज” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के पास सोफे पर बैठते हुए पूछा.

“बेटा वो तुम्हारी बहन शाज़िया के लिए एक रिश्ता ले कर आई है” रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद को एक फोटो पकड़ाते हुए बताया.

“खाला गुलशन का दिमाग़ तो नही खराब हो गया,ये रिश्ता लाई है वो शाज़िया के लिए” ज़ाहिद ने अम्मी की दी हुई फोटो को देख कर गुस्से में कहा.

“हां बेटा ये ही रिश्ता लाई है गुलशन और तुम्हारी बहन ने फोटो देखे बिना ही शादी की रज़ा मंदी भी दे दी है” रज़िया बीबी ने अपने बेटे को जवाब दिया.

अम्मी की बात सुन कर ज़ाहिद के जज़्बात पर तो जैसे बिजली सी टूट पड़ी.

“क्याआआआ, इस आदमी को इस उम्र में रिश्ते की नही,बल्कि मौत के फरिश्ते की ज़रूरत है अम्मी” ज़ाहिद ने अम्मी की दिखाई हुई फोटो को गुस्से में आ कर फाड़ते हुए कहा.

जिस आदमी का रिश्ता गुलशन खाला शाज़िया के लिए लाई थी. वो आदमी असल में शाज़िया के मरहूम अब्बू की उम्र का था.

“अम्मी ये शाज़िया के साथ ज़ुल्म है,आप उस को समझाएँ प्लीज़” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी से कहा.

“बेटा मुझे तो खुद समझ नही आ रही,इस से पहले तो शाज़िया हर आने वाले रिश्ते में कोई ना कोई नुक्स निकाल रही थी. और आज इस आदमी की तस्वीर को देखे बिना ही शादी की हामी भी भर चुकी है,मेरी तो ये लड़की सुनती नही तुम ही इस को समझाओ ज़ाहिद” रज़िया बीबी ने अपने बेटे से कहा.

अम्मी की बात सुन कर ज़ाहिद फॉरन समझ गया. कि उस की कल वाली हरकत की वजह से ही शाज़िया अब शादी कर के जल्द अज जल्द इस घर और उस से दूर हो जाना चाहती है.

“अच्छा अम्मी में खुद बात करूँगा शाज़िया से” ज़ाहिद ने अम्मी को जवाब दिया.

“लो तुम बैठो में ज़रा नहा लूँ” रज़िया बीबी अपने बेटे को सोफे पर ही बैठा छोड़ कर अपने कमरे में चली गई.

ज़ाहिद अम्मी के जाने के बाद बैठा कुछ देर टीवी देखता रहा. थोड़ी देर बाद उसे प्यास महसूस हुई तो वो उठ कर किचन की तरफ चला आया.

ज़ाहिद ज्यों ही किचन में दाखिल हुआ उसे सामने अपनी बहन शाज़िया किचन में काम करती नज़र आई.

अपनी बहन को किचन में अकेला देख कर ज़ाहिद की बाछे ही खिल गईं. उस ने फॉरन मूड कर अपनी अम्मी के कमरे के दरवाज़े का जायज़ा लिया. तो उस को अम्मी के कमरे का दरवाज़ा बंद नज़र आया.

ज़ाहिद समझ गया कि उस की अम्मी अपने कमरे के अटेच बाथरूम में नहाने के लिए जा चुकी हैं.

इसीलिए हस्बे आदत उन्होने अपने कमरे के बाहर वाला दरवाज़ा भी बंद कर दिया है.

ज़ाहिद अब निश्चित हो गया. कि कल की तरह आज भी अब उस के पास अपनी बहन से मस्ती करने का कुछ टाइम है.

ज़ाहिद का लंड अपनी बहन को किचन में अकेले देख कर फुल अपने जोबन पर आ गया.

ज़ाहिद ने आज भी शलवार कमीज़ पहनी हुई थी.मगर आज अपनी शलवार के नीचे उस ने अंडरवेार भी पहना हुआ था.

इस की वजह ये थी कि कल के वाकये के बाद ज़ाहिद को पता था .कि अब मोका मिलते ही उस के हाथ उस की बहन के जिस्म से दुबारा ज़रूर छेड़ छाड़ करेगा.और इस सुरते हाल में उस का लंड खड़ा होना एक क़ुदरती अमल होता.

जिस बिना पर ज़ाहिद को डर था. कि कहीं आते जाते हुए उस की अम्मी की निगाह उस की शलवार में खड़े हुए लंड पर पड़ गई तो क़यामत हो जाए गी.

किचन में दाखिल होने से पहले ज़ाहिद ने अपने अंडरवेार में हाथ डाला और अंडरवेार में से अपने लंड को निकाल कर उसे अपनी शलवार में ही आज़ाद कर दिया. ता कि वो जी भर कर अपनी बहन के बदन से खेल कर उसे अपनी मौजूदगी और प्यास का अहसास दिला सके.

फिर वो आहिस्ता आहिस्ता दबे पाँव चलता हुआ किचन में दाखिल हो गया.

 
शाज़िया अपने हाथ में छुरी पकड़े सब्ज़ी काटने में इतनी मसरूफ़ थी.कि उसे अपने भाई ज़ाहिद के किचन में आ कर अपने पीछे खड़े होने का पता ही ना चला.

ज़ाहिद शाज़िया के बिल्कुल पीछे खड़ा हो कर कमीज़ शलवार में मलबूस अपनी बहन के बहुत ही मोटे मोटे भारी चुतड़ों को आँखे फाड़ फाड़ कर देखने लगा.

अपने भाई की मौजूदगी से बे खबर शाज़िया जब किचन में अपने काम में मसरूफ़ थी.तो उस के हिलने से पीछे उस की भारी गान्ड की मोटी गुदाज पहाड़ियाँ भी हल्के हल्के हिल कर ज़ाहिद के लंड की गर्मी में और इज़ाफ़ा कर रही थी.

अपनी बहन की चौड़ी और उभरी हुई गान्ड के इतने करीब हो कर अब ज़ाहिद के लिए अपने आप को कंट्रोल करना मुस्किल हो रहा था.

उस की शलवार में से उस का लंड उठ उठ कर झटके मारता हुआ ज़ाहिद को आगे बढ़ कर अपनी बहन की गान्ड में घुस्स जाने पर उकसा रहा था.

अपनी बहन के जिस्म की उँचाईयो और गहराइयों नापते नापते हुए आख़िर ज़ाहिद के सबर का पैमाना लबरेज हो गया.

और उस ने आहिस्ता से एक कदम बढ़ाते हुए अपना एक हाथ अपनी बहन शाज़िया की मोटी गान्ड पर रखा और दूसरे हाथ को उस ने आगे बढ़ा कर अपनी बहन की भारी तनी हुई छाती को अपने हाथ में काबू कर के मसलना शुरू कर दिया.

“हाईईईई में मर गई” ज्यों ही ज़ाहिद के हाथ शाज़िया की गान्ड और मम्मो से टकराए तो शाज़िया की डर के मारे चीख निकल गई. और उस के हाथ में पकड़ी हुई छुरी,उस के हाथ से छूट कर किचन के फर्श पर जा गिरी.

ज़ाहिद जानता था कि बाथरूम में शवर लेती हुई उस की अम्मी को बाथरूम और कमरे का दरवाज़ा बंद होने की वजह से शाज़िया की चीख नही सुनाई देगी .

इसीलिए ज़ाहिद ने शाज़िया की चीख की परवाह ना करते हुए उस के जिस्म के गिर्द अपने बाजुओं का घेरा मज़ीद तंग किया. जिस से ज़ाहिद पीछे से अपनी बहन के बदन से चिपकता चला गया.

ज़ाहिद के इस तरह चिपकने से ज़ाहिद का मोटा सख़्त लंड शाज़िया की गुदाज गान्ड की मोटी पहाड़ियों में से होता हुए उस की चूत से टच करने लगा.

आज भाई के लंड ने उस की शलवार में से दुबारा अपनी बहन की चूत को अपनी सलामी दी थी.



इंडियन मूवी वीर के गाने के असल बोल तो कुछ यूँ हैं,

दबी दबी साँसों में सुना था मेने, बोले बिना मेरा नाम आया.

पलकें झुकी और उठने लगी तो, हौले से उसका सलाम आया.


मगर ज़ाहिद के लंड ने जब अपनी बहन की मोटी गान्ड को छूते हुए उस की फूली हुई चूत को एक बार फिर से छुआ.तो ज़ाहिद के दिमाग़ में ये गाना कुछ इस तरह गूंजने लगा कि,

उठी उठी गान्ड में, से फिसलते हुए,

भाई के लंड का, बहन की चूत को सलाम आया.


ज्यों ही ज़ाहिद का लंड शाज़िया की मोटी रानों में से होता हुआ उस की फूली हुई चूत के होंठो से रगड़ा,शाज़िया के मुँह से एक “अहह” निकली और उस ने अपने आप को अपने भाई की क़ैद से छुड़ाने की कोशिस करते हुए कहा “ क्या मुसीबत है भाई,आप क्यों मेरे पीछे पड़े हुए हैं”.

“मेरी जान तुम्हारा जिस्म मुझे एक पल चैन नही लेना दे रहा,तुम ही बताओ में क्या करूँ” ज़ाहिद ने अपने आप को हलके से शाज़िया के जिस्म से हटाया और फिर दुबारा तेज़ी के साथ आगे बढ़ा.

ज़ाहिद के इस तरह करने से उस का लंड शाज़िया की टाँगों के साथ रगड़ ख़ाता हुआ शाज़िया की गान्ड और फुद्दि दोनो से टच हुआ.

साथ ही साथ ज़ाहिद ने अपनी बहन की जवान,गुदाज और भारी छाती पर अपना हाथ दुबारा बढ़ा कर उसे एक बार फिर ज़ोर से मसला.

अपने भाई की इस हरकत से शाज़िया के बदन में एक सनसनी सी दौड़ गई.

शाज़िया ने मज़े से बे हाल होते हुए अपने होंठो को सख्ती से एक दूसरे के साथ भींचा ता कि कहीं उस के मुँह से उस की सिसकारी ना फूट पड़े.

“आप अम्मी से कह कर अपने लिए एक बीवी का बन्दो बस्त करो, मुझे क्यों सता रहे हैं आप भाई” शाज़िया ने अपने भाई की बात का जवाब देते हुए कहा.

“हां में तो बात करूँ गा अम्मी से,मगर तुम ये बात याद रखो कि में तुम को एक बूढ़े आदमी से शादी की हरगिज़ इजाज़त नही दे सकता” ज़ाहिद ने अपनी बहन की गर्दन के पिछले हिस्से और उस के कान पर चुम्मियाँ देते हुए कहा.

“मुझे शादी के लिए आप की इजाज़त की ज़रूरत नही” शाज़िया ने अपनी गर्दन को अपने भाई के सामने से हटाने की कोशिस करते हुए भाई को जवाब दिया.

अपने भाई की बात सुन कर शाज़िया समझ गई. कि ज़ाहिद को अम्मी ने उस की दुबारा शादी वाली बात बता दी है.

“मुझे अपने नंगे जिस्म का दीदार करवा कर अपना आशिक़ बनाने के बाद,अब दूसरी शादी के लिए तुम को ना सिर्फ़ मेरी बल्कि मेरे लंड की भी इजाज़त चाहिए मेरी जान” ज़ाहिद ने अपनी बहन को एक सख़्त लहजे में अपना फ़ैसला सुनाते हुआ कहा.

भाई के लहजे में सख्ती को महसूस कर के शाज़िया ने भाई की बात का जवाब देना मुनासिब ना समझा और खामोश हो गई
.
 
उधर ज़ाहिद को अपनी बहन की गान्ड की गर्मी उस की शलवार के अंदर से अपने लंड पर महसूस हो रही थी.

वो अपनी बहन के बदन की गर्मी को महसूस करता हुआ मज़ीद जोश में आया और पीछे से अपनी बहन शाज़िया की कमर से लिपटता ही चला गया.

ज़ाहिद का बस चलता तो वो उस वक्त पीछे से अपनी बहन की गान्ड में घुस कर उस की मोटी फूली हुई चूत के ज़रिए सामने से बाहर निकल जाता.

अपने भाई को यूँ पीछे से अपने बदन से चिपकते हुए पा कर शाज़िया को बहुत ज़्यादा शरम महसूस हो रही थी.इसीलिए वो अपने आप को भाई से परे कार्नर के लिए आगे की तरफ खिसक रही थी.

शाज़िया खुद को अपने भाई से अलग रखना चाह रही थी. लेकिन चाहने के बावजूद वो अपने इस मकसद में कामयाब नही हो पा रही थी.

शाज़िया को जिस बात कर डर था.अज्ज उस के साथ वो ही बात दुबारा हो रही थी.कि उस का भाई मोका पा कर उस के जिस्म के साथ खिलवाड़ कर रहा था. और शाज़िया ना चाहते हुए भी अपने सगे भाई के हाथों और ज़ुबान को उस के साथ ये सलूक करने से नही रोक पा रही थी.

अभी शाज़िया अपने दिल ही दिल में ये दुआ माँग रही थी. कि कब उस की अम्मी नहा कर बाथरूम से निकले तो उस का भाई उस की जान बक्शी करे.

कि इतने में ज़ाहिद अपनी बहन की गुदाज गान्ड को अपने हाथो में थाम हुए अपने घुटनो के बल फर्श पर बैठा. और इस से पहले शाज़िया कुछ समझ पाती. ज़ाहिद ने अपनी बहन की मोटी गान्ड की एक पहाड़ी के ऊपर अपना मुँह रखा.

फिर शाज़िया की भारी और थिरकती हुई गान्ड के मोटे गोश्त को उस की शलवार में ही से अपने मुँह में भर कर एक ज़ोरदार किस्म का बॅट्का भरा.तो मारे दर्द और लज़्ज़त के शाज़िया चिल्ला उठी.

ज़ाहिद को अपनी बहन की मोटी गान्ड के गोश्त पर इस तरह अपने दाँत गढ़ाने से बहुत ही ज़्यादा मज़ा आया. और उस ने जोश में आते हुए अपनी बहन की गान्ड की दोनो पहाड़ियों पर अपने बोसो (किस्सस) की बरसात कर दी.

शाज़िया के लिए ये सब कुछ एक नई बात थी. उस की शादी के बाद उस के शोहर ने कभी उस की गान्ड पर इस तरह प्यार नही किया था.

मगर मज़े के साथ साथ शाज़िया की शरम भी उस का साथ छोड़ने पर तैयार नही थी. इसीलिए उसे समझ नही आ रही थी कि वो अपने भाई की इस हरकत पर किस तरह का रिएक्ट करे.

फिर अचानक अपने जज़्बात को संबालते हुए शाज़िया एक दम अपने भाई की क़ैद से निकल कर बाहर की तरफ भागी.

ज़ाहिद ने ज्यों ही शाज़िया को उस के हाथों से निकल कर बाहर की तरफ भागते देखा .तो वो भी उठ कर अपनी बहन के पीछे लपका.

इस से पहले कि शाज़िया किचन से बाहर निकल पाती. ज़ाहिद ने उस को पकड़ कर किचन की दीवार के साथ लगा दिया.

और अपने होंठो को अपनी बहन के नरम,गुदाज और फूले हुए होंठो पर चिस्पान कर दिया.

“उफफफफफफफ्फ़ क्या मज़ेदार होन्ट हैं तुम्हारे मेरी बहन” ज़ाहिद ने अपनी बहन के लज़ीज़ होंठो का मज़े दार ज़ायक़ा पहली बार चखा. तो उसे स्वाद आ गया और वो जोश में आते हुए अपनी बहन से बोला.

आज वाकई ही अपनी बहन के जवान प्यासे होंठो का रस पहली बार चख कर ज़ाहिद पूरी मस्ती और जोश में आ चुका था.

मगर दूसरी तरफ शाज़िया को अपने होंठो पर चिपके अपने भाई के होंठ ऐसे लग रहे थे. जैसे किसी ने गरम अँगारे उस के होंठो पर रख दिए हों.

उस ने तो कभी ख्वाब में भी नही सोचा था कि उस का अपना भाई उस के होंठो को कभी इस तरह चूमे गा.

शाज़िया ने गुस्से में आ कर अपने भाई को एक ज़ोर का धक्का दिया.

 
 
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