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वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास ) complete

“हाईईईईईईई तुम ने भी तो बहुत अच्छी खबर दी है मुझे ,अब बताओ आगे का क्या प्लान है” शाज़िया ने नीलोफर से पूछा.

“यार अपने शोहर से तलाक़ का मोतलबा करने की वजह से मेरे अम्मी अब्बू मुझ से नाराज़ हो गये हैं. उन का कहना है कि अपने शोहर से तलाक़ माँग कर मेने खानदान में उन की नाक कटवा दी है. और इस मामले में मेरा साथ देने पर अब्बू ने मेरे साथ साथ जमशेद भाई को भी घर से निकल जाने का हुकम दे दिया है. इसीलिए अब हम दोनो बहन भाई सब तुम्हारे घर के ऊपर वाले हिस्से में शिफ्ट हो जाएँगे” नीलोफर ने तफ़सील से सारी बात शाज़िया को बता दी.

“नीलोफर ये तो अच्छा है अब तुम बिना ख़ौफ़ के दिन रात अपने भाई से मज़े कर सको गी” शाज़िया ने नीलोफर को छेड़ते हुए कहा.

“हां यार अब मज़ा आएगा जब में और तुम दोनो अपने अपने भाइयों की बीवियाँ बन कर अपने ही भैया का बिस्तर गरम करेंगी.” नीलोफर ने भी शाज़िया की बात सुन कर खुशी से जवाब दिया.

“अच्छा निलो तुम ज़ाहिद भाई को फोन कर के उन्हे मेरी अम्मी के फ़ैसले से आगाह कर दो” शाज़िया ने नीलोफर से कहा.

“ना बाबा, अब तुम्हारा टांका अपने भाई से फिट हो गया है,इसीलिए मुझे दरमियाँ में से निकाल कर तुम खूद ज़ाहिद को ये बात बताओ” नीलोफर ने शाज़िया की बात सुन कर उसे जवाब दिया.

“बहुत बे फ़ैज़ सहेली हो तुम” शाज़िया ने नीलोफर के इनकार पर उस से नकली गुस्सा करते हुए कहा.

“वाह जी वाह, एक तो तुम्हारी प्यासी गरम फुद्दि के लिए तुम्हारे ही भाई के इतने बड़े और मोटे ताज़े लंड का बंदोबस्त किया है में ने, और अब में ही बे फ़ैज़ हो गई हूँ” नीलोफर ने हँसते हुए शाज़िया की बात का जवाब दिया.

दोनो सहेलियाँ इस बात पर खुल कर हस पड़ी .

“अच्छा बताओ तुम कब वापिस आ रही हो शाज़िया” नीलोफर ने थोड़ी देर बाद अपनी हँसी रोकते हुए शाज़िया से पूछा.

“ये तो अब फ्लाइट मिलने पर है कि कब वापसी होती है,वैसे अम्मी तो कह रही थी कि में कल ही घर वापिस आ जाऊं ” शाज़िया ने जवाब दिया.

“एक काम करना जब भी तुम्हारी सीट बुक हो, तुम ज़ाहिद को इस के बारे में ना बताना, तुम सिर्फ़ मुझे इत्तला करना, फिर में और जमशेद तुम को एरपोर्ट से पिक कर के ज़ाहिद को सर्प्राइज़ देंगे” नीलोफर ने शाज़िया को समझाते हुए कहा.

“ठीक है में ऐसा ही करूँगी ” शाज़िया ने जवाब दिया.

फिर थोड़ी देर अपने अपने वाले कल के बारे में गप शप लगा कर शाज़िया ने फोन बंद किया. और उस के बाद अपने भाई ज़ाहिद को फोन मिला दिया.

उस वक्त ज़ाहिद अपने किसी सरकारी काम से लाहोर आया हुआ था. इसीलिए अपनी कार ड्राइवर करते वक्त ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी बहन का नंबर अपने मोबाइल पर देखा.तो उस ने अपने कान में लगे हुए फोन के ब्लूटूथ को फॉरन ऑन कर दिया.

एक दूसरे की ख़ैरियत पूछने के बाद शाज़िया ने ज़ाहिद को अम्मी के फ़ैसले से मुतला किया.तो खुशी का मारे ज़ाहिद अपनी सीट से उछल पड़ा.

वैसे तो ज़ाहिद को पहले से ही यकीन था. कि उस की अम्मी भी आख़िर अपने बेटे की ज़िद के आगे हर मान जाएँगी.

मगर ज़ाहिद को ये यकीन हरगिज़ नही था. कि दो दिनो में ही उस की लालची अम्मी अपने सारे हितीयार फैंक कर अपनी शिकस्त कबूल कर लेंगी.

बहरहाल अपनी अम्मी की “हां” के फ़ैसले को अपनी बहन के मुँह से सुन कर ज़ाहिद का लंड उस की पॅंट में फुल खड़ा हो गया. और उस ने एक हाथ से कार के स्टियरिंग को पकड़ा और अपने दूसरे फारिग हाथ से अपने लंड को मसल्ते हुए शाज़िया से कहा “ तो अब जल्दी ही वापिस आ जाओ ना जान.अब तुम्हारे इस आशिक़ से तुम्हारी चूत की दूरी मज़ीद बर्दाश्त नही होती”.

“में जल्द ही वापिस आऊँगी मगर इस के लिए मेरी दो शर्ते होंगी जनाब” शाज़िया ने इठलाते हुए अपने आशिक़ भाई की बात का जवाब दिया.

“शर्तें, केसी शर्तें मेरी जान” ज़ाहिद ने भी उसी अंदाज़ में अपनी बहन से पूछा.

“पहली शर्त ये कि मेरी घर वापसी के बावजूद आप मुझे शादी वाले दिन तक हाथ नही लगाएँगे. और दूसरी शर्त ये कि मुझे अपनी बीवी बनाने के बाद आप नीलोफर को दुबारा कभी नही चोदेन्गे” शाज़िया ने अपने भाई को अपनी दोनो शर्ते बता दीं.

“हाईयययययययी कुर्बान जाऊं में अपनी शहज़ादी के,तुम अभी बहन से बीवी बनी भी नही और बीवियों वाले हुकम पहले ही चलाने शुरू कर दिए हैं मेरी जान” अपनी बहन की दूसरी शर्त सुन कर ज़ाहिद की हँसी निकल गई और वो बोला.

“में मज़ाक नही कर रही भाई,अगर आप को मेरी ये शर्ते मंजूर हैं तो बताओ वरना में घर वापिस नही आ रही” अपने भाई की तंज़िया हँसी सुन कर शाज़िया को तुप चढ़ गई.

“अच्छा जैसे मेरे दिल की रानी कहेगी में वैसे ही करूँगा बाबा,वैसी भी जिस भाई को तुम जैसी भरी हुए मस्त बदन और जनम जनम की प्यासी चूत वाली बहन चोदने को मिल जाय, तो उस का लंड किसी और की चूत में कैसे जाएगा जानू”. ज़ाहिद ने अपनी बहन को मक्खन लगाते हुए जवाब दिया.

“ठीक है में एक दो दिन में वापिस झेलम आने का प्रोग्राम बनाती हूँ” शाज़िया ने अपने भाई ज़ाहिद को कहा और फोन बंद कर दिया.

ज़ाहिद अपनी बहन शाज़िया से बात कर के बहुत खुश था.वो उस वक्त लाहोर की लिबर्टी मार्केट के पास से गुज़र रहा था.

इसी दौरान कार ड्राइवर करते हुए ज़ाहिद की नज़र लॅडीस अंडर गारमेंट्स वाली एक दुकान पर पड़ी.

ज़ाहिद ने सोचा कि क्यों ना अपनी बहन के लिए अपनी पसंद का खास ब्रेज़ियर और पैंटी खदीद के ले जाए. जिस को शादी के दिन पहन कर उस की बहन शाज़िया उस के साथ अपनी सुहाग रात मनाएगी .ये ही सोच कर ज़ाहिद ने अपनी कार पार्क की और फिर उस दुकान में चला आया.

सेल्स मॅन ने ज़ाहिद को मुक्तिलफ स्टाइल और कलर्स में काफ़ी सारी इंपोर्टेड ब्रेज़ियर और पॅंटीस दिखाई. जिन को देखने के बाद आख़िर ज़ाहिद को रेड कलर में मेटल हुक्स और स्ट्रॅप्स वाला स्पेशल ब्रिडाल ब्रेज़ियर. और उस के साथ मॅचिंग थॉंग जिस के साइड में गोल्डन हुक्स थे, पसंद आ गया.

 
बातों बातों जब ज़ाहिद को पता चला कि ये ब्रा और पैंटी की दुकान कुणाल की वही दुकान है जिसकी कहानी राजशर्मास्टॉरीज( आरएसएस ) पर चल रही है तो ज़ाहिद को बड़ी खुशी हुई उसने बातों बातों में कुणाल से और भी उसके कारनामे सुने और फिर ज़ाहिद ने कुणाल से अपनी कहानी भी राजशर्मास्टॉरीज ( आरएसएस ) पर डालने के लिए कहा तो कुणाल ने राजशर्मा की मैल आइडी दी और कहा आप राज भाई से कॉन्टेक्ट कर लेना वो मुझसे बेहतर आपकी कहानी के साथ न्याय कर पाएँगे . और ज़ाहिद ने राजशर्मा की डीटेल अपने पास सेव की और कुणाल को थॅंक्स बोला .

ज़ाहिद ने अपनी बहन शाज़िया के मम्मो के साइज़ के मुताबिक 40ड्ड का ब्रेजियर और लार्ज साइज़ का थॉंग खरीदा और पेमेंट कर के वापिस झेलम की तरफ चल पड़ा.

उधर दूसरी तरफ शाज़िया से फोन पर बात ख़तम करने के बाद रज़िया बीबी दुबारा सोच में पड़ गई.

अपने लालची पन के हाथों मजबूर हो कर रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद की बात मान तो ली थी. मगर अंदर से उस का दिल उसे अपने इस फ़ैसले पर अभी भी मालमत कर रहा था.

इसीलिए रज़िया बीबी ने पक्का इरादा कर लिया. कि ज़ाहिद की बात मानने के बावजूद वो अपने बच्चो के किसी मामले में अमली तौर पर हिस्सा नही ले गी.

बल्कि वो अपनी खुली आँखों के सामने सब कुछ होता हुआ देख कर भी एक बे जान बुत्त की मानद घर के एक कोने में पड़ी रहे गी.

ज़ाहिद उस शाम घर वापिस आया. तो उस ने अपनी अम्मी को अपने कमरे में बिस्तर पर ही लेटे हुए पाया.

“अम्मी में आप का शूकर गुज़ार हूँ कि आप ने मेरी बात मान कर हमारे घर को टूटने से बचा लिया” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी से कहा.

रज़ाई बीबी ने अपने बेटे की बात का कोई जवाब ना दिया. और खामोशी से बिस्तर की चादर ओढ़े पड़ी रही.

ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के पास शाम का खाना रखा और सुबह वाले खाली बर्तन समेट कर किचन में रख दिए.

किचन से निकल कर ज़ाहिद शाज़िया के कमरे में गया. और शाज़िया के ड्रेसिंग टेबल के ड्रॉ से अपनी बहन की पड़ी हुई एक अंगूठी (रिंग) निकल कर अपनी पॉकेट में रख ली.

ज़ाहिद अभी शाज़िया के कमरे से निकला ही था. कि उसे जमशेद का फोन आया.

“किधर हो यार” जमशेद की आवाज़ ज़ाहिद के कान में पड़ी.

“में घर में आया था और अभी वापिस पोलीस स्टेशन जाने का सोच रहा हूँ,तुम बताओ ख़ैरियत से फोन किया है” ज़ाहिद ने जमशेद की बात सुन कर उस से पूछा.

इस पर जमशेद ने ज़ाहिद को नीलोफर की तलाक़ वाली सारी बात बताई. और साथ ही साथ ज़ाहिद को नीलोफर के साथ उस घर के ऊपर वाले हिस्से में शिफ्ट होने का बताया.

आज का दिन ज़ाहिद के लिए बहुत सी खुशियाँ एक साथ लाया था. इसीलिए जमशेद से ये खबर सुन कर ज़ाहिद पहले से भी ज़्यादा खुश हो गया.

थोड़ी देर में जमशेद और नीलोफर अपना समान ले कर ज़ाहिद के घर पहुँच गये. तो ज़ाहिद ने घर का ऊपर वाला हिस्सा खोल कर उन दोनो बहन भाई के हवाले कर दिया.

ज़ाहिद उन दोनो को अपने घर छोड़ कर खुद बाज़ार चला आया. और उस ने झेलम में बाज़ार में एक ज्यूयेल्री शॉप पर अपनी बहन शाज़िया की पुरानी अंगूठी देखा कर शाज़िया के लिए एक नई सोने की रिंग साथ में “एसजेड” (शाज़िया ज़ाहिद) के नाम वाला सोने का एक लोकिट और सोने की चूड़ी (बॅंगल्स) भी पसंद कर के खरीद ली.

अगले दिन शाज़िया ने अपनी क़्वेटा और कराची वाली दोनो बहनों को जमशेद के साथ अपनी. और नीलोफर के साथ ज़ाहिद भाई की शादी का बता कर अपनी दोनो बहनों को शादी में शामिल होने की दावत दी.

मगर दोनो बहनों ने अपने बच्चो के स्कूल में पढ़ाई की वजह से शादी में शिरकत से मज़रत कर ली.

अपनी बहनों को अपनी और ज़ाहिद भाई की शादी की दावत देना शाज़िया का फ़र्ज़ बनता था.

मगर शाज़िया दिल से अपनी दोनो बहनों की शादी में शिरकत नही चाहती थी. क्यों कि अपनी छोटी बहनों की मौजूदगी में शाज़िया का अपने भाई ज़ाहिद से शादी वाले दिन “मिलाप” ना मुमकिन हो जाता. इसीलिए शाज़िया को अपनी बहनों के इनकार पर दिल ही दिल में खुशी हुई.

फिर शाज़िया ने कॉसिश कर के अगले दिन दोपहर की फ्लाइट पर सीट बुक करवा ली.और अपनी पिंडी आमद की नीलोफर को इतला कर दी.

नीलोफर और जमशेद ने शाज़िया को एरपोर्ट से पिक किया. और फिर सब इकट्ठे पिंडी में अपनी अपनी शादी की शॉपिंग करने चले गये.

शाज़िया और नीलोफर ने अपनी अपनी पसंद के सुर्ख रंग के लहंगे खरीदे. और शाम को सब एक साथ झेलम वापिस चले आए.

शाज़िया के घर वापिस आने का रज़िया बीबी या ज़ाहिद को ईलम नही था.इसीलिए अपनी बेटी को यूँ अचानक अपने सामने देख कर रज़िया बीबी को हैरानी हुई.

रज़िया बीबी अपनी बेटी से रूखे अंदाज़ में मिल कर चुप चाप अपने कमरे में चली गई.

शाज़िया को अपनी अम्मी के इस रवैये पर हैरत हुई. मगर वो फॉरन ये बात समझ गई कि उस की अम्मी ने ज़ाहिद और शाज़िया के फ़ैसले को अभी दिल से कबूल नही किया.

इतनी देर में नीलोफर ने ज़ाहिद को फोन पर झेलम वापसी की खबर दे दी थी.

ज़ाहिद अपनी बहन के वापिस आने की खबर पा कर उड़ता हुआ घर आया.तो शाज़िया जमशेद और नीलोफर के साथ ड्राइंग रूम में बैठ कर गप शप में मसरूफ़ थी.

ज्यों ही ज़ाहिद ड्राइंग रूम में एंटर हुआ. तो दोनो बहन भाई के दिल एक दूसरे को देख कर बहुत तेज़ी से धड़कने लगे.

ये दोनो बहन भाई की आपस में प्यार के इज़हार के बाद आशिक़ और माशूक के रूप में पहली मुलाकात थी.

अपने भाई को यूँ अपने सामने देख कर शाज़िया की पीरियड वाली फुद्दि में से उस की चूत का पानी तेज़ी से टपक टपक कर उस की चूत पर लगे उस के पॅड में जज़्ब होने लगा.

जब के शाज़िया को देख कर ज़ाहिद का दिल चाहा के वो जेया कर अपनी बहन के गरम जिस्म को अपनी बाहों में भर ले और उसे चूम चूम कर बे हाल कर दे.

मगर अपनी बहन से किए हुए वादे का पास रखते हुए ज़ाहिद के शाज़िया की तरफ बढ़ते कदम रुक गये.

थोड़ी देर तक दोनो बहन भाई यूँ ही आँखों ही आँखो में एक दूसरे को चूमते और चाटते रहे.

शायद इसी मोके के लिए किसी शायर ने इंडियन मूवी का ये गीत लिखा था कि.

“तेरे नैना बड़े ज़ालिम मार ही डालोगे”

जब नीलोफर ने देखा कि दोनो बहन भाई की नज़रें एक दूसरे से हट नही रही. तो उस के सबर का पैमाना लबरेज हो गया और नीलोफर बोल पड़ी “यार अब तुम लोग लैला मजनू वाला ये ड्रामा ख़तम करो, ता कि खाना खाया जाए”.

नीलोफर की इस बात पर सब ने एक साथ कहका लगाया. और शाज़िया नीलोफर के साथ उठ कर किचन में चली गई.

खाने के दौरान भी दोनो बहन भाई एक दूसरे से नज़रें मिलाते और कभी नज़रें चुराते रहे.

खाने से फारिग हो कर ज़ाहिद नीलोफर को कमरे के एक तरफ ले गया. और कोने में जा कर नीलोफर से उस के कान में कुछ ख़ुसर पुसर करने लगा.

शाज़िया सोफे पर बैठी अपने भाई ज़ाहिद को नीलोफर से राज़-ओ-नियाज़ करता देख कर दिल ही दिल में सोच रही थी. कि नज़ाने ज़ाहिद भाई उस की सहेली से क्या ख़ुफ़िया बात चीत कर रहे हैं.

 
उधर ज़ाहिद की बात सुन कर नीलोफर के मुँह पर एक मुस्कराहट फैल गई. और वो ज़ाहिद के पास से हट कर शाज़िया के करीब आई. और ज़ू महनी अंदाज़ में शाज़िया की तरफ देख कर बोली “बानो आज खुशी के इस मोके पर मज़े दार सी चाय (टी) तो पिला दो ना”.

“खुशी का मोका,में समझी नही नीलोफर” शाज़िया ने अपनी सहेली की बात ना समझते हुए नीलोफर से पूछा.

“यार असल में तुम्हारा भाई तुम को अपनी बीवी बनाने से पहले तुम्हें मँगनी (इंग़ेज़मेंट) की रिंग पहनाना चाहता है, तो ये खुशी की बात ही हुई ना,चलो अब जल्दी से चाय बना कर लाओ, ता कि फिर हम सब मिल कर तुम्हारी अपने भाई के साथ तुम्हारी मँगनी की रसम अदा करें” नीलोफर ने खुश होते हुए शाज़िया से कहा.

अपनी सहेली की बात सुन कर शाज़िया ने हैरत से अपने भाई ज़ाहिद की तरफ देखा.तो ज़ाहिद ने मुस्कराते हुए अपनी पॉकेट से रिंग का एक डिब्बा निकाला. और उसे अपनी बहन शाज़िया की आँखों की सामने लहराने लगा.

“ये सब करने की क्या ज़रूरत है भाई” शाज़िया ने नीलोफर की बात और अपने भाई की हरकत पर हेरान होते हुए पहली बार अपने भाई को डाइरेक्ट मुखातिब कर के पूछा.

“ज़रूरत है तभी ही तो कह रहा हूँ, तुम्हें नही पता कि शादी से पहले माँगनी की जाती है बुद्धू” ज़ाहिद ने मुस्कराते हुए अपनी बहन को समझाया.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ भाई तो मेरे साथ जाली शादी करने से पहले असली शादी वाली सारी रस्में भी पूरी करने पर तुला हुआ है”अपने भाई की इस बात पर शाज़िया के दिल में एक हल चल मच गई.

“अच्छा चलो दोनो इकट्ठे मिल कर चाय बनाते हैं” नीलोफर ने शाज़िया को हाथ से पकड़ कर किचन की तरफ धकेलते हुए कहा.

“तो ये ख़ुसर फुसर हो रही थी तुम दोनो में” शाज़िया ने नीलोफर के साथ किचन में दाखिल होते हुए पूछा.

“हां ज़ाहिद ने मुझ से इसी बारे में मशवरा किया था यार” नीलोफर ने शाज़िया को जवाब दिया.

फिर चाय बनाने के बाद शाज़िया चाय की ट्रे ले कर आहिस्ता आहिस्ता चलती हुई टीवी लाउन्ज में वापिस आई.

उस वक्त शाज़िया का ड्राइंग रूम में चाय की ट्री ले कर आने का अंदाज़ बिल्कुल ऐसे ही था.

जैसे कोई लड़की अपना रिश्ता देखने के लिए आने वाले मेहमानो के सामने पहली बार चाय ले कर जाती है.

“ज़ाहिद साब ये है हमारी शाज़िया ख़ानम, जिसे देखने आज आप हमारे घर तशरीफ़ लाए हैं,तो बताइए केसी लगी आप को हमारी बानो” शाजिया ज्यों ही टीवी लाउन्ज में दाखिल हुई. तो उस के पीछे पीछे आती नीलोफर ने सोफे पर बैठे ज़ाहिद से पूछा.

शाज़िया अपनी सहेली के मुँह से ये इलफ़ाज़ सुन कर मस्त हो गई. और उस ने एक अदा के साथ चाय का कप अपने भाई के हाथ में ऐसे पकड़ाया, जैसे वाकई ही में उस का भाई ज़ाहिद अपनी ही बहन से शादी के लिए उस का रिश्ता देखने आया हो.

“हाईईईईईईई क्या बताऊ नीलोफर साहिबा, आप की बानो तो इस चाय से भी ज़्यादा गरम दिखती है मुझे ” ज़ाहिद ने एक हाथ से चाय का कप अपने होंठो से लगते हुए, अपनी बहन शाज़िया की तरफ देख कर आँख मारी. और दूसरे हाथ से शाज़िया के हाथ को पकड़ कर उसे अपने साथ सोफे पर बिठा लिया.

बे शक शाज़िया अपनी सहेली की मेहरबानी की वजह से अब अपने ही भाई से जिन्सी ताल्लुक़ात कायम करने के लिए ज़ेहनी तौर पर पूरी तरह आमादा हो चुकी थी.

मगर इस के बावजूद जमशेद और नीलोफर की मौजूदगी में अपने भाई के साथ इस तरह की बातें करना. और उस के साथ एक सोफे पर इतने करीब हो कर बैठने पर शाज़िया को एक उलझन सी होने लगी थी.

लेकन इस से पहले कि शाज़िया अपने भाई ज़ाहिद के पास से उठ कर दूसरे सोफे पर बैठ पाती. ज़ाहिद ने चाइ के कप को टेबल पर रख कर अपने हाथ में पकड़ी अपनी बहन के हाथ की उंगली में अपने “नाम” की अंगूठी डाल दी.और साथ ही अपनी बहन के हाथ को अपने होंठो पर ला कर उसे चूम लिया.

शाज़िया अपने भाई के प्यार का ये अंदाज़ देख कर खुशी से फूली ना समाई.और उस ने शर्मो हया को बुला कर बे इख्तियारि में अपनी बाहें अपने भाई के जिस्म के गिर्द लपेट ली.

ज्यों ही ज़ाहिद ने शाज़िया की उंगली में सोने की रिंग पहनाई. तो जमशेद और नीलोफर ने तालियाँ बजा कर शाज़िया और ज़ाहिद को उन की मँगनी की मुबारकबाद दी.

अपनी बहन को इस तरह वलिहाना अंदाज़ में खुद से चिपटा हुआ पा कर ज़ाहिद अपनी बहन से किया हुआ वादा भूल गया.

 
ज़ाहिद ने भी शाज़िया के भारी जिस्म के गिर्द अपने बाजुओं को लपेटा. और एक हाथ से अपनी बहन के भारी मम्मे को मसल्ते हुए अपनी बहन के गुदाज होंठो पे अपने होन्ट रख कर उन को चूसना शुरू कर दिया.

शाज़िया को अपनी सहेली नीलोफर और उस के भाई जमशेद की मौजूदगी में ज़ाहिद भाई की इस हरकत पर शरम तो आई. मगर वो चाहने के बावजूद अपने भाई को सब के सामने उसे प्यार करने से रो ना पाई.

इधर टीवी लवंज में बैठे ये सब लोग. तो अपनी खुशी के ये लम्हे एक दूसरे के साथ शेयर करने में मगन थे.

मगर वो सब इस बात से बे खबर थे.कि ज़ाहिद और शाज़िया की अम्मी रज़िया बीबी टीवी लाउन्ज के साथ वाले कमरे से पर्दे की ओट में खड़े हो कर. अपने बच्चो का ये घिनौना तमाशा बड़ी खामोशी से देख देख कर अपने दिल ही दिल में कुढ रही है.

थोड़ी देर एक दूसरे से छेड़ छाड़ करने के बाद सब लोग अपनी अपने कमरों में जा कर सोने के लिए लेट गये.

दूसरे दिन सुबह शाज़िया सो कर उठी. तो उस ने पेशाब करते वक्त अपनी चूत पर लगे पॅड को अच्छी तरह चेक किया.

जब शाज़िया को यकीन हो गया कि उस का पीरियड मुकम्मल तौर पर ख़तम हो चुका था.तो शाज़िया ने सोचा कि उसे अब अपनी अम्मी को इस बारे में बता देना चाहिए.

ये सोच कर शाज़िया रज़ाई बीबी के कमरे में गई. और बिस्तर में लेटी हुई अपनी अम्मी से कहा“अम्मी मेरे पीरियड्स अब ख़तम हो चुके हैं और में आज ही नहा भी लूँगी”.

“अच्छा ठीक है फिर में ज़ाहिद ने बात करती हूँ” अपनी बेटी की बात को समझते हुए रज़िया बीबी ने बहुत धीमी आवाज़ में जवाब दिया.

फिर उसी दिन नाश्ते के बाद रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद से कहा “ज़ाहिद बेटा तुम्हारी बहन आज नहा कर पाक हो जाएगी ,इसीलिए अब तुम लोग जब चाहो अपना निकाह पढ़वा लो”

“हाईईईईईईईईई अम्मी आप कितनी अच्छी हैं” अपनी अम्मी की बात सुन कर ज़ाहिद ने रज़िया बीबी को प्यार से कहा.

ज़ाहिद तो कब से इस लम्हे का मुंतीज़ार था. इसीलिए अपनी अम्मी की बात सुन कर उस का दिल खुशी से झूम उठा.

वो दौड़ता हुए शाज़िया के कमरे में पहुँचा.तो उस ने जमशेद और नीलोफर को भी शाज़िया के कमरे में ही माजूद पाया.

ज़ाहिद ने जमशेद और नीलोफर को अपनी अम्मी से हुई बात के बारे में आगाह किया.

ज़ाहिद की बात सुन कर जमशेद ने खुशी से अपनी बहन नीलोफर को अपने गले से लगा लिया.

असल में जब से नीलोफर और जमशेद ज़ाहिद के घर में मूव हुए थे.तो उस दिन से ले कर अब तक ज़ाहिद की तरह जमशेद का भी अपनी बहन नीलोफर से “परहेज” ही था.

इस की वजह ये थी कि नीलोफर की भी ये ख्वाहिश थी. कि अब वो अपने भाई को अपनी चूत उस की बीवी बन कर ही देगी .

इसीलिए काफ़ी दिन से अपनी बहन की फुद्दि का मुँह ना देख पाने की वजह से ज़ाहिद की तरह जमशेद के दिमाग़ पर उस के लंड का खुमार चढ़ा हुआ था.

फिर सब के मशवरे से उसी रात 8 बजे निकाह का टाइम फिक्स कर दिया गया.

उन लोगो के पास वक्त बहुत कम था. इसीलिए सब उठ कर इकट्ठे ही शादी की तैयारी में मसरूफ़ हो गये.

सब से पहले ज़ाहिद और जमशेद ने बाज़ार जा कर फूलों की दुकान से बहुत सारे गुलाब के फूल खरीदे.और फिर घर वापिस आ कर ज़ाहिद और जमशेद ने मिल कर ऊपर की मंज़िल पर जमशेद और नीलोफर की सुहाग रात के लिए उन का कमरा सेट किया.

नीलोफर और जमशेद के कमरे को तैयार कर के ज़ाहिद, जमशेद और नीलोफर नीचे आ कर ज़ाहिद के कमरे में चले आए. जब कि शाज़िया किसी काम से अपने कमरे में चली गई.

ज़ाहिर सी बात है कि शादी के बाद दुल्हन “ब्याह” कर हमेशा दूल्हा के घर ही आती है.

इसीलिए ज़ाहिद ने भी अपनी बहन शाज़िया को अपनी दुलहन बना कर अपने कमरे में लेने और अपनी सुहाग रात उसी कमरे में मनाने का सोच रखा था.

इसी लिए ज़ाहिद ने जमशेद के साथ मिल कर पहले अपने पलंग को गुलाब के फुलो की पत्तियों से सजाया. और फिर मोतिया और गुलाब की लाडियाँ अपने बेड के इर्द गिर्द टाँग कर अपनी सुहाग की मसहरी भी बना ली.

जब ज़ाहिद और जमशेद और नीलोफर गुलाब की पत्तियों के साथ शाज़िया और ज़ाहिद के लिए सुहाग की मसेहरी बना रहे थे. तो उसी लम्हे शाज़िया बाहर से ज़ाहिद भाई के कमरे में दाखिल हुई.

उस वक्त ज़ाहिद के कमरे के फर्श पर चारों तरफ गुलाब की पत्तियाँ बिखरी पड़ी थी.जिन की खुसबू ने पूरे कमरे को महका दिया था.

ज़ाहिद के कमरे में दाखिल हो कर शाज़िया ने जब कमरे में बिछे हुए बेड पर नज़र दौड़ाई. तो वो अपने भाई के खूबसूरत से सजे हुए बेड से अपनी नज़रें ही ना हटा सकी.

 


“उफफफफफफफफफफ्फ़ आज मेरे साथ अपनी सुहाग रात मनाने के लिए मेरे भाई ने किस प्यार और शौक से हमारे “सुहाग सेज” के बिस्तर को सजाया है, हाईईईईईईई बिस्तर की सजावट को देख कर दिल तो करता है, कि अभी अपनी शलवार उतार कर इस बिस्तर पर लेट जाऊ और भाई के लंड से अभी ही चुदवा लूँ” शाज़िया ने इतनी खूबसूरती से सजे अपने बिस्तर को देख कर दिल ही दिल में सोचा.

जब नीलोफर ने शाज़िया को कमरे में आ कर बहुत ही खोए हुए अंदाज में अपने भाई के बिस्तर की तरफ देखते पाया. तो नीलोफर ने मज़ाक में शाज़िया के सर के उपर से गुलाब की पत्तियाँ निच्छावर करते हुए उसे कहा “भाभी जान आप बड़ी बे शरम दुल्हन हैं,जो अपने निकाह से पहले ही अपनी सुहाग रात की महसेरी (बेड) देखने चली आई हैं,लगता है आप को बड़ी आग लगी हुई है”

“बकवास मत करो निलो की बच्ची,अभी तुम खुद अपने हाथ से अपना बिस्तर सेट कर के आई हो, और तंज़ तुम मुझ पर कर रही हो” शाज़िया ने भी मज़ाक में अपनी सहेली की बात का उसी अंदाज़ में जवाब दिया.

दोनो सहेलियों की ये नोक झोंक सुन कर ज़ाहिद और जमशेद भी अपनी बहनों का साथ देते हुए हस पड़े.

फिर दोनो कमरे सजाने के बाद ज़ाहिद और जमशेद बाहर के काम निपटाने चले गये. जब कि नीलोफर और शाज़िया अपने अपने कमरों में जा कर अपनी शादी की तैयारी में मसरूफ़ हो गईं .

इस दौरान रज़िया बीबी उन सब से अलग थलग अपने कमरे में ही मसूर (लॉक) हो कर बैठी रही.और उस ने अपने बच्चो के किसी काम में दखल अंदाज़ी नही की.

अपने कमरे में आ कर शाज़िया ने दरवाज़े को कुण्डी लगाई और अपनी कमीज़ उतार कर अपने कमरे के फर्श पर फैंक दी.

ज्यों ही शाज़िया ने अपनी कमीज़ को उतारा. तो उस की नज़र ड्रेसिंग टेबल के शीशे के ज़रिए अपने आधे नंगे जिस्म पर पड़ी.

अपनी कमीज़ उतार कर शाज़िया को ना जाने की सूझी. कि वो शीशे के सामने खड़े हो कर अपने बदन का जायज़ा लेने लगी.

शाजिया के मम्मे उस वक्त काले रंग के लो कट ब्रेजियर में कसे हुए थे.और अपने लो कट ब्रेज़ियर में मलबूस अपने आधे नंगे मम्मो को शीशे में से देख कर शाज़िया को खुद पर ही प्यार आने लगा.

थोड़ी देर अपने मम्मो को शीशे में निहारने के बाद शाज़िया ने अपने हाथ पीछे ले जा कर अपने ब्रेजियर की हुक को खोल दिया. और आयने के करीब हो कर अपने मोटे और भारी मम्मो को ब गौर देखने लगी.

बे शक शाज़िया के मम्मो पर बे पनाह गोश्त होने की वजह से उस के मम्मे अपने ही वज़न से थोड़े नीचे को धलक से गये थे.

मगर 32 साल की होने के बावजूद भी शाज़िया के मोटे मम्मे अभी तक 18 सॅल की जवान किसी लड़की के मम्मो जैसे सख़्त और मज़े दार थे.

शाज़िया ने अपने मम्मो के ब्राउन निपल्स को शीशे में देखते हुए अपने नाडे को खोल कर अपनी शलवार भी उतार दी.

शीशे के सामने अपने आप को मुकलम नंगा कर के शाज़िया ने अपनी गोश्त से भरी हुई रानों का जायज़ा लेना शुरू कर दिया.

इस दौरान अपनी गुदाज रानों को देखते हुए शाज़िया की नज़र जब अपनी फूली हुई फुद्दि पर पड़ी. तो उसे अंदाज़ा हुआ कि पिछले एक हफ्ते से शेव ना करने की वजह से उस की चूत पर हल्की हल्की झान्टे आई हुई हैं.

ज़हिरी बात है आज तो शाज़िया की सुहाग रात थी. और ये वो रात होती है जिस को मनाने का सपना जवानी की दहलीज़ पर अपना पहला कदम रखते ही हर लड़की देखने लगती है.

बे शक शाज़िया इस से पहले भी अपनी कंवारी चूत के साथ एक सुहाग रात मना चुकी थी.

मगर उस वक्त और आज की सुहाग रात में फरक ये था. कि उस वक्त शाज़िया ने एक अजनबी मर्द के साथ अपनी जवानी शेयर की थी.

लेकिन आज की रात जिस मर्द ने शाज़िया की जवानी का रस पीना था. वो कोई आम मर्द नही बल्कि उस का अपना सगा भाई था.

जिस ने शाज़िया के साथ सुहाग रात मनाते हुए उस के गरम बदन को देखना,छूना,चूमना,चाटना और फिर चोदना था.

इसीलिए शाज़िया अपने जवान और प्यासे जिस्म को पूरी तरह से सॉफ और शॅफॉफ कर के उसे इस अंदाज़ में अपने भाई को पेश करना चाहती थी. कि उस के नंगे, जवान और गुदाज जिस्म को देखते ही उस के भाई के होश ही उड़ जाए.

ये ही बात सोच कर गरम होते हुए शाज़िया ने अपनी फूली हुई चूत के लबों पर आहिस्ता से हाथ फेरा. तो उस के हाथ की उंगलियाँ उस की फुद्दि से टपकते पानी से भीग गईं.

“बसस्स्स्स्स्सस्स थोड़ा सा सबर और कर ले बानो, आज तेरी ये दो साला प्यास मेरे सगे भाई के मोटे लंड से बुझने ही वाली है मेरी जान” शाज़िया ने पानी छोड़ती अपनी चूत को बड़े प्यार से समझाते हुए कहा.

फिर शाज़िया ने बाथरूम में जा कर अपनी चूत और अंदर आर्म्स पर हेर रिमूविंग क्रीम लगाई .और अपनी चूत की अच्छी तरह से शेव कर के अपनी फुद्दि को अपने भाई के लिए तैयार कर दिया.

 
शवर के बाद शाज़िया ज्यों ही बाथरूम से बाहर आई. तो उसे अपने दरवाज़े पर एक दस्तक की आवाज़ सुनाई दी.

“कौन है” शाज़िया ने कमरे के अंदर से पूछा.

“शाज़िया में हूँ दरवाज़ा खोलो” शाज़िया को बाहर से नीलोफर की आवाज़ आई.

शाज़िया ने अपने जिस्म के गिर्द तोलिया बाँध कर दरवाज़ा खोला. तो नीलोफर अपने हाथ में मेहन्दी (हिना) की कोन और एक शॉपिंग बॅग उठाए हुए कमरे के अंदर चली आई.

“ये क्या है निलो” शाज़िया ने मेहन्दी की कोन और बॅग की तरफ इशारा करते नीलोफर से पूछा.

“यार ज़ाहिद ने ये ब्रेजियर और पैंटी तुम्हारे आज रात को पहनने के लिए दी है, और साथ में ये मेहन्दी दे कर मुझे कहा है कि मैं इसे तुम को लगा दूं” नीलोफर ने मुस्कुराते हुए शाज़िया को जवाब दिया.

“यार ये भाई भी ना” शाज़िया ने अपनी भाई की बढ़ती हुई फर्माहिशों पर थोड़ा नकली गुस्सा करते हुए नीलोफर से कहा.

“समझा करो यार,तुम्हारा भाई तुम्हे एक पूरी तरह सजी सँवरी हुई दुल्हन के रूप में देखना चाहता है बन्नो” नीलोफर ने शाज़िया को छेड़ते हुए कहा.

“अच्छा टाइम कम है इसीलिए जल्दी से लगा दो मेहन्दी” शाज़िया ने दीवार पर लगी घेरी पर नज़र दौड़ाते हुए कहा. जिस पर उस वक्त शाम के 7 बजने वाले थे.

नीलोफर ने एक एक कर के शाज़िया के दोनो हाथो और पैरों पर मेहन्दी लगाई और उस के बाद शाज़िया को बिस्तर पर लेट जाने का कहा.

“मेहदी तो तुम ने लगा दी है,अब बिस्तर पर क्यों लिटा रही हो” शाज़िया ने नीलोफर की बात पर हेरान होते हुए पूछा.

“बताती हूँ पहले लेटो तो सही” नीलोफर ने ज्वाब दिया.

जब शाज़िया कमर के बल बिस्तर पर लेट गई. तो नीलोफर ने शाज़िया के पेट पर उस की “धुनि” (नेवेल) के बिल्कुल नीचे मेहन्दी के साथ “भाई की चूत” के इलफ़ाज़ लिखना शुरू कर दिए.

“ये क्या कर रही हो तुम” शाज़िया ने जब नीलोफर को अपने पेट पर मेहन्दी के साथ कुछ लिखते देखा तो हेरानी से पूछा.

“चुप चाप लेटी रहो अभी” नीलोफर ने शाज़िया को डाँटते हुए कहा. और साथ ही शाज़िया की चूत की तरफ “इशारा” करने के लिए मेहन्दी के साथ “तीर” (आरो) का एक निशान भी बना दिया.

कोन वाली मेहन्दी तो पहले ही थोड़ी खुशक थी. फिर मेहन्दी लगने के फॉरन बाद नीलोफर ने शाज़िया की मेहन्दी को हेर ड्रायर के साथ पूरी तरह से खुश्क कर दिया.

अपने काम से फारिग होने के बाद शाज़िया को उसी हालत में बिस्तर पर लेटा छोड़ कर नीलोफर खुद भी तैयार होने चली गई.

नीलोफर के जाने के बाद शाज़िया ने जल्दी से उठ कर अपने हाथ पाँव नीचे लिए.और फिर गीली तोलिए से अपना पेट सॉफ करने के बाद ,शीशे के सामने खड़े हो कर शाज़िया ने जब अपने पेट पर अपनी सहेली की हुई “फन कारी” देखी.तो उस की पानी छोड़ती चूत और भी भड़क उठी.

रात के 8 बजने में अब टाइम काफ़ी कम रह गया था. इसीलिए शाज़िया ने जल्दी से अपने पूरे जिस्म और ख़ास तौर पर अपने गुदाज मम्मो और अपनी सॉफ्ट,चिकनी चूत पर एक खुसबूदार लोशन लगाया. तो लोशन की खुश्बू से शाज़िया की ना सिर्फ़ चूत और मम्मे बल्कि उस का पूरा जिस्म महक उठा.

फिर शाज़िया ने नीलोफर के हाथ अपने भाई का भेजा हुआ बॅग खोला. और उस में से सुर्ख रंग की ब्रेज़ियर और पैंटी को निकाल कर पहन लिया.

अपने भाई की खरीदी हुई 40ड्ड साइज़ की सुर्ख ब्रेज़ियर जिस की बॅक साइड में लेस और अड्जस्टबल स्टाप पर गोल्डन चैन लगी थी.ये ब्रेज़ियर शाज़िया के भारी मम्मो पर बिल्कुल फिट आई थी.

उस के बाद शाज़िया ने अपने भाई की उस की सुहाग रात के लिए स्पेशल खरीदी हुई पैंटी पहन ली.

इस पैंटी के फ्रंट में ब्रेज़ियर के साथ की मॅचिंग रेड कलर की लेस और साइड में पतली एलास्टिक के साथ गोल्डन हुक्स बनी हुई थी.

ज़ाहिद की भेजी हुई पैंटी का साइज़ इतना छोटा था. कि आगे से वो शाज़िया की फूली हुई गरम और प्यासी चूत के सिर्फ़ लिप्स को कवर कर रही थी. जब कि पीछे से पैंटी की तनी (स्ट्रॅप्स) शाज़िया की भारी गान्ड की पहाड़ियों में घुस गई थी.

असल में अपनी बहन के लिए खरीदी हुई ज़ाहिद की ये वेड्डिंग पैंटी कम और तोंग ज़्यादा थी.

शाज़िया ने आज जिंदगी में पहली बार इस किसम का ब्रेजियर और पैंटी ज़बे तन की थी.

जिस में से उस के भारी मम्मे,फूली हुई जवान चूत और गुदाज मोटी गान्ड की बड़ी बड़ी पहाड़ियाँ

“सॉफ छुपते भी नही,

सामने आते भी नही”

का दिलकश मंज़र पेश कर रही थी.

इस के बाद शाज़िया ने अपना खरीदा हुआ सुर्ख रंग का लहनगा पहना कर मेक अप किया.और आख़िर में अपनी शादी के जेवरात (ज्वेलरी) पहन कर पूरी तरह से एक दुलहन बन गई.

अच्छी तरह से तैयार होने के बाद शाज़िया ने शीशे के सामने खड़े हो कर अपने आप को देखा. तो शीशे में अपने रूप को देख कर शाज़िया को खुद पर ही प्यार आने लगा.

शाज़िया अभी मिरर के सामने ही खड़ी हो कर अपने जिस्म का जायज़ा लेने में मसरूफ़ थी. कि इतने में नीलोफर शाज़िया के कमरे में दुबारा चली आई.

 
नीलोफर ने जब अपनी सहेली को लहंगे में मलबूस हो कर फुल मेक अप और ज्वेलरी के साथ दुल्हन बने देखा. तो अपनी सहेली के जवान जिस्म का ये नज़ारा देख कर नीलोफर ने शाज़िया के पीछे आ कर अपनी बाहों के घेरे में भरते हुए कहा “ यार आज तो तुम्हारा ये रूप तुम्हारे भाई के लिए वियाग्रा का काम करे गा यारो”

“अच्छा अब ज़्यादा मसके मत लगाओ और तुम भी जल्दी से तैयार हो जाओ नीलोफर” शाज़िया ने नीलोफर की बात पर मुस्कराते हुए उसे कहा.

“यार में तैयार ना भी हुई तो क्या फरक पड़ता है, क्यों कि मेने तो आज भी वो ही लंड लेना है जो लंड एक साल पहले से में ले रही हूँ, असल शादी और सुहाग रात तो तुम्हारी है, जिसे आज एक नया लंड नसीब होना है,और वो भी अपने ही सगे भाई का मेरी जान” नीलोफर ने जाते जाते शाज़िया को फिर छेड़ा.और शाज़िया अपनी सहेली की बात सुन कर ज़ोर से हँसने लगी.

नीलोफर के जाने के बाद शाज़िया अपने बिस्तर पर बैठी अपनी शादी के जुते (सॅंडेल्ज़) पहन रही थी.

कि इतने में शाज़िया की अम्मी उस के कमरे में दाखिल हुई.

रज़िया बीबी की नज़र ज्यों ही शाज़िया पर पड़ी. तो नीलोफर की तरह रज़िया बीबी भी दुल्हन बन कर बैठी हुई अपनी बेटी शाज़िया के चढ़ते रूप को देख कर हेरान रह गई.

रज़िया बीबी के दिल में ख्याल आया. कि उस की दुल्हन बनी बेटी शाज़िया तो आज अपनी पहली और असल शादी वाले दिन से भी ज़्यादा खूबसूरत और प्यारी लग रही है.

रज़िया बीबी ने आज अपनी बेटी के चेहरे पर खुशी की वो लहर देखी थी. जिस को देखने के लिए रज़िया बीबी दो साल से तरस रही थी.

अपनी बेटी के खुशी से देहकते चेहरे को देख कर रज़िया बीबी समझ गई. कि उस की बेटी शाज़िया एक जाली निकाह के ज़रिए अपने ही भाई की बीवी बनेगी और अपने भाई को अपने शोहार के रूप में क़बूल करने पर पूरी तरह आमादा नज़र आ रही है.

अपनी बेटी को अपने ही भाई के लिए यूँ सज संवर कर तैयार हुआ देख कर रज़िया बीबी का दिल भी अपने बच्चो के प्यार में पिघल गया. और वो सोचने लगी कि उसे भी अब अपने बच्चो के लिए अपने दिल में छुपी नफ़रत को निकाल कर अपने बेटा और बेटी के इस गंदे अमल को कबूल कर लेना चाहिए.

ये ख्याल आते ही और थोड़ी देर यूँ ही अपनी बेटी को दरवाज़े पर खड़े हो कर देखने के बाद रज़िया बी आहिस्ता आहिस्ता चलती हुई अपनी बेटी के पास आई और धीमी आवाज़ में बोली “चलो बेटी निकाह के लिए मोलवी साब इंतिज़ार कर रहे हैं”

शाज़िया ने अपनी नज़रें उठा कर अपनी अम्मी की तरफ देखा .तो उसे उस की अम्मी उसी सूट में मलबूस नज़र आईं. जो शलवार कमीज़ सूट रज़िया बीबी ने शाज़िया की पहली शादी पर पहना था.

अपनी अम्मी को पहली बार अपने इस सारे मामले में शरीक होता देख कर शाज़िया को बहुत अच्छा लगा.

असल में रज़िया बीबी को पता था.कि आज ज़ाहिद के कुछ करीबी दोस्त भी निकाह की रसम में ज़रूर शामिल होंगे . इसी लिए ना चाहते हुए भी रज़िया बीबी शादी वाले कपड़े पहन कर तैयार हो गई थी. ता कि निकाह में शरीक लोग बातें ना बना सकें.

रज़िया बीबी अपनी बेटी शाज़िया को साथ ले कर टीवी लाउन्ज में चली आई. जिधर नीलोफर दुल्हन बनी ज़ाहिद के साथ बैठी शाज़िया का इंतिज़ार कर रही थी.

अपनी बहन शाज़िया को यूँ उस के लिए साज धज कर अपनी अम्मी रज़िया बीबी के साथ आते देख कर ज़ाहिद का लंड अपनी बहन की फुद्दि के लिए फुल खड़ा हो कर अपनी दुल्हन बनी बहन को अपने लंड की सलामी देने लगा.

रज़िया बीबी ने शाज़िया को ला कर जमशेद के पहलू में बिठा दिया. तो मोलवी साब ने एक एक कर के जमशेद का निकाह शाज़िया और ज़ाहिद का निकाह नीलोफर से पढ़वा दिया.

निकाह के दौरान जब मोलवी साब ने ज़ाहिद ने पूछा “ज़ाहिद क्या तुम को नीलोफर अपने निकाह में कबूल है”.

तो उस वक्त ज़ाहिद ने नीलोफर की जगह शाज़िया का नाम ज़हन में रखते हुए दिल ही दिल में अपनी बेहन शाज़िया को अपनी बीवी कबूल कर लिया.

इसी तरह शाज़िया ने भी जमशेद की जगह ज़ाहिद का ख्याल अपने दिल में रखते हुए मोलवी साब के आगे “हां” में अपना सर हिला दिया.

निकाह के बाद सब लोगो ने ज़ाहिद और जमशेद के साथ साथ रज़िया बीबी को भी उन के बच्चो की शादी की मुबादक दी. और फिर हर रवायती शादी की तरह दुल्हो और दुल्हनो के एक साथ और फिर अलग अलग मेहमानो के साथ फोटो सेशन शुरू हो गया.

मेहमानो के सामने जमशेद के साथ उस की दुल्हन के रूप में बैठी हुई अपनी बहन शाज़िया को देख देख कर ज़ाहिद का लंड उस की शलवार में मचल रहा था.उस का दिल चाह रहा था कि किसी तरह वो अपनी बहन के नज़दीक हो सके.

जब सब लोगो के सामने ज़ाहिद को अपनी बहन के करीब होने का कोई और बहाना ना सूझा.तो वो शाज़िया की कुर्सी के पीछे खड़े हो कर अपनी फोटो बनवाते हुए जमशेद के पास गया. और जमशेद को अपनी जगह से हटा कर खुद कुर्सी पर बैठी अपनी बहन के पीछे खड़ा हुआ. और उस ने फोटो ग्राफर से कह कर दुल्हन के लिबास मलबोस में अपनी बहन शाज़िया के साथ में अपनी भी तस्वीरे खिचवा लीं.

फोटो सेशन से फारिग होने के बाद रज़िया बीबी ने पहले नीलोफर को उस के कमरे में छोड़ा. और फिर अपनी बेटी शाज़िया को साथ ले कर अपने बेटे ज़ाहिद के कमरे में चली आई.

ज़ाहिद के कमरे में दाखिल होते ही सुहाग के बिस्तर की सजावट देख कर शाज़िया की तरह उस की अम्मी रज़िया बीबी भी हेरान रह गई.

“हाईईईईई मेरे बेटे ने अपनी दुल्हन बहन के लिए अपने कमरे को कितने प्यार से सजाया है” कमरे की सजावट देख कर बे इकतियार रज़िया बीबी के दिल में ये बात आई.

रज़िया बीबी के वहमो गुमान में भी ये बात नही आई थी.कि उस का सगा बेटा अपनी ही सग़ी बहन के साथ अपनी सुहाग रात मनाने के लिए अपने कमरे और बिस्तर को फूलो की पत्तियों से इस तरह भर देगा . कि उस की अपनी अम्मी भी ये तैयारी देख कर अपने बेटे की चोइस की दाद दिया बगैर नही रह सके गी.

 
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