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“हाईईईईईईई तुम ने भी तो बहुत अच्छी खबर दी है मुझे ,अब बताओ आगे का क्या प्लान है” शाज़िया ने नीलोफर से पूछा.
“यार अपने शोहर से तलाक़ का मोतलबा करने की वजह से मेरे अम्मी अब्बू मुझ से नाराज़ हो गये हैं. उन का कहना है कि अपने शोहर से तलाक़ माँग कर मेने खानदान में उन की नाक कटवा दी है. और इस मामले में मेरा साथ देने पर अब्बू ने मेरे साथ साथ जमशेद भाई को भी घर से निकल जाने का हुकम दे दिया है. इसीलिए अब हम दोनो बहन भाई सब तुम्हारे घर के ऊपर वाले हिस्से में शिफ्ट हो जाएँगे” नीलोफर ने तफ़सील से सारी बात शाज़िया को बता दी.
“नीलोफर ये तो अच्छा है अब तुम बिना ख़ौफ़ के दिन रात अपने भाई से मज़े कर सको गी” शाज़िया ने नीलोफर को छेड़ते हुए कहा.
“हां यार अब मज़ा आएगा जब में और तुम दोनो अपने अपने भाइयों की बीवियाँ बन कर अपने ही भैया का बिस्तर गरम करेंगी.” नीलोफर ने भी शाज़िया की बात सुन कर खुशी से जवाब दिया.
“अच्छा निलो तुम ज़ाहिद भाई को फोन कर के उन्हे मेरी अम्मी के फ़ैसले से आगाह कर दो” शाज़िया ने नीलोफर से कहा.
“ना बाबा, अब तुम्हारा टांका अपने भाई से फिट हो गया है,इसीलिए मुझे दरमियाँ में से निकाल कर तुम खूद ज़ाहिद को ये बात बताओ” नीलोफर ने शाज़िया की बात सुन कर उसे जवाब दिया.
“बहुत बे फ़ैज़ सहेली हो तुम” शाज़िया ने नीलोफर के इनकार पर उस से नकली गुस्सा करते हुए कहा.
“वाह जी वाह, एक तो तुम्हारी प्यासी गरम फुद्दि के लिए तुम्हारे ही भाई के इतने बड़े और मोटे ताज़े लंड का बंदोबस्त किया है में ने, और अब में ही बे फ़ैज़ हो गई हूँ” नीलोफर ने हँसते हुए शाज़िया की बात का जवाब दिया.
दोनो सहेलियाँ इस बात पर खुल कर हस पड़ी .
“अच्छा बताओ तुम कब वापिस आ रही हो शाज़िया” नीलोफर ने थोड़ी देर बाद अपनी हँसी रोकते हुए शाज़िया से पूछा.
“ये तो अब फ्लाइट मिलने पर है कि कब वापसी होती है,वैसे अम्मी तो कह रही थी कि में कल ही घर वापिस आ जाऊं ” शाज़िया ने जवाब दिया.
“एक काम करना जब भी तुम्हारी सीट बुक हो, तुम ज़ाहिद को इस के बारे में ना बताना, तुम सिर्फ़ मुझे इत्तला करना, फिर में और जमशेद तुम को एरपोर्ट से पिक कर के ज़ाहिद को सर्प्राइज़ देंगे” नीलोफर ने शाज़िया को समझाते हुए कहा.
“ठीक है में ऐसा ही करूँगी ” शाज़िया ने जवाब दिया.
फिर थोड़ी देर अपने अपने वाले कल के बारे में गप शप लगा कर शाज़िया ने फोन बंद किया. और उस के बाद अपने भाई ज़ाहिद को फोन मिला दिया.
उस वक्त ज़ाहिद अपने किसी सरकारी काम से लाहोर आया हुआ था. इसीलिए अपनी कार ड्राइवर करते वक्त ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी बहन का नंबर अपने मोबाइल पर देखा.तो उस ने अपने कान में लगे हुए फोन के ब्लूटूथ को फॉरन ऑन कर दिया.
एक दूसरे की ख़ैरियत पूछने के बाद शाज़िया ने ज़ाहिद को अम्मी के फ़ैसले से मुतला किया.तो खुशी का मारे ज़ाहिद अपनी सीट से उछल पड़ा.
वैसे तो ज़ाहिद को पहले से ही यकीन था. कि उस की अम्मी भी आख़िर अपने बेटे की ज़िद के आगे हर मान जाएँगी.
मगर ज़ाहिद को ये यकीन हरगिज़ नही था. कि दो दिनो में ही उस की लालची अम्मी अपने सारे हितीयार फैंक कर अपनी शिकस्त कबूल कर लेंगी.
बहरहाल अपनी अम्मी की “हां” के फ़ैसले को अपनी बहन के मुँह से सुन कर ज़ाहिद का लंड उस की पॅंट में फुल खड़ा हो गया. और उस ने एक हाथ से कार के स्टियरिंग को पकड़ा और अपने दूसरे फारिग हाथ से अपने लंड को मसल्ते हुए शाज़िया से कहा “ तो अब जल्दी ही वापिस आ जाओ ना जान.अब तुम्हारे इस आशिक़ से तुम्हारी चूत की दूरी मज़ीद बर्दाश्त नही होती”.
“में जल्द ही वापिस आऊँगी मगर इस के लिए मेरी दो शर्ते होंगी जनाब” शाज़िया ने इठलाते हुए अपने आशिक़ भाई की बात का जवाब दिया.
“शर्तें, केसी शर्तें मेरी जान” ज़ाहिद ने भी उसी अंदाज़ में अपनी बहन से पूछा.
“पहली शर्त ये कि मेरी घर वापसी के बावजूद आप मुझे शादी वाले दिन तक हाथ नही लगाएँगे. और दूसरी शर्त ये कि मुझे अपनी बीवी बनाने के बाद आप नीलोफर को दुबारा कभी नही चोदेन्गे” शाज़िया ने अपने भाई को अपनी दोनो शर्ते बता दीं.
“हाईयययययययी कुर्बान जाऊं में अपनी शहज़ादी के,तुम अभी बहन से बीवी बनी भी नही और बीवियों वाले हुकम पहले ही चलाने शुरू कर दिए हैं मेरी जान” अपनी बहन की दूसरी शर्त सुन कर ज़ाहिद की हँसी निकल गई और वो बोला.
“में मज़ाक नही कर रही भाई,अगर आप को मेरी ये शर्ते मंजूर हैं तो बताओ वरना में घर वापिस नही आ रही” अपने भाई की तंज़िया हँसी सुन कर शाज़िया को तुप चढ़ गई.
“अच्छा जैसे मेरे दिल की रानी कहेगी में वैसे ही करूँगा बाबा,वैसी भी जिस भाई को तुम जैसी भरी हुए मस्त बदन और जनम जनम की प्यासी चूत वाली बहन चोदने को मिल जाय, तो उस का लंड किसी और की चूत में कैसे जाएगा जानू”. ज़ाहिद ने अपनी बहन को मक्खन लगाते हुए जवाब दिया.
“ठीक है में एक दो दिन में वापिस झेलम आने का प्रोग्राम बनाती हूँ” शाज़िया ने अपने भाई ज़ाहिद को कहा और फोन बंद कर दिया.
ज़ाहिद अपनी बहन शाज़िया से बात कर के बहुत खुश था.वो उस वक्त लाहोर की लिबर्टी मार्केट के पास से गुज़र रहा था.
इसी दौरान कार ड्राइवर करते हुए ज़ाहिद की नज़र लॅडीस अंडर गारमेंट्स वाली एक दुकान पर पड़ी.
ज़ाहिद ने सोचा कि क्यों ना अपनी बहन के लिए अपनी पसंद का खास ब्रेज़ियर और पैंटी खदीद के ले जाए. जिस को शादी के दिन पहन कर उस की बहन शाज़िया उस के साथ अपनी सुहाग रात मनाएगी .ये ही सोच कर ज़ाहिद ने अपनी कार पार्क की और फिर उस दुकान में चला आया.
सेल्स मॅन ने ज़ाहिद को मुक्तिलफ स्टाइल और कलर्स में काफ़ी सारी इंपोर्टेड ब्रेज़ियर और पॅंटीस दिखाई. जिन को देखने के बाद आख़िर ज़ाहिद को रेड कलर में मेटल हुक्स और स्ट्रॅप्स वाला स्पेशल ब्रिडाल ब्रेज़ियर. और उस के साथ मॅचिंग थॉंग जिस के साइड में गोल्डन हुक्स थे, पसंद आ गया.
“यार अपने शोहर से तलाक़ का मोतलबा करने की वजह से मेरे अम्मी अब्बू मुझ से नाराज़ हो गये हैं. उन का कहना है कि अपने शोहर से तलाक़ माँग कर मेने खानदान में उन की नाक कटवा दी है. और इस मामले में मेरा साथ देने पर अब्बू ने मेरे साथ साथ जमशेद भाई को भी घर से निकल जाने का हुकम दे दिया है. इसीलिए अब हम दोनो बहन भाई सब तुम्हारे घर के ऊपर वाले हिस्से में शिफ्ट हो जाएँगे” नीलोफर ने तफ़सील से सारी बात शाज़िया को बता दी.
“नीलोफर ये तो अच्छा है अब तुम बिना ख़ौफ़ के दिन रात अपने भाई से मज़े कर सको गी” शाज़िया ने नीलोफर को छेड़ते हुए कहा.
“हां यार अब मज़ा आएगा जब में और तुम दोनो अपने अपने भाइयों की बीवियाँ बन कर अपने ही भैया का बिस्तर गरम करेंगी.” नीलोफर ने भी शाज़िया की बात सुन कर खुशी से जवाब दिया.
“अच्छा निलो तुम ज़ाहिद भाई को फोन कर के उन्हे मेरी अम्मी के फ़ैसले से आगाह कर दो” शाज़िया ने नीलोफर से कहा.
“ना बाबा, अब तुम्हारा टांका अपने भाई से फिट हो गया है,इसीलिए मुझे दरमियाँ में से निकाल कर तुम खूद ज़ाहिद को ये बात बताओ” नीलोफर ने शाज़िया की बात सुन कर उसे जवाब दिया.
“बहुत बे फ़ैज़ सहेली हो तुम” शाज़िया ने नीलोफर के इनकार पर उस से नकली गुस्सा करते हुए कहा.
“वाह जी वाह, एक तो तुम्हारी प्यासी गरम फुद्दि के लिए तुम्हारे ही भाई के इतने बड़े और मोटे ताज़े लंड का बंदोबस्त किया है में ने, और अब में ही बे फ़ैज़ हो गई हूँ” नीलोफर ने हँसते हुए शाज़िया की बात का जवाब दिया.
दोनो सहेलियाँ इस बात पर खुल कर हस पड़ी .
“अच्छा बताओ तुम कब वापिस आ रही हो शाज़िया” नीलोफर ने थोड़ी देर बाद अपनी हँसी रोकते हुए शाज़िया से पूछा.
“ये तो अब फ्लाइट मिलने पर है कि कब वापसी होती है,वैसे अम्मी तो कह रही थी कि में कल ही घर वापिस आ जाऊं ” शाज़िया ने जवाब दिया.
“एक काम करना जब भी तुम्हारी सीट बुक हो, तुम ज़ाहिद को इस के बारे में ना बताना, तुम सिर्फ़ मुझे इत्तला करना, फिर में और जमशेद तुम को एरपोर्ट से पिक कर के ज़ाहिद को सर्प्राइज़ देंगे” नीलोफर ने शाज़िया को समझाते हुए कहा.
“ठीक है में ऐसा ही करूँगी ” शाज़िया ने जवाब दिया.
फिर थोड़ी देर अपने अपने वाले कल के बारे में गप शप लगा कर शाज़िया ने फोन बंद किया. और उस के बाद अपने भाई ज़ाहिद को फोन मिला दिया.
उस वक्त ज़ाहिद अपने किसी सरकारी काम से लाहोर आया हुआ था. इसीलिए अपनी कार ड्राइवर करते वक्त ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी बहन का नंबर अपने मोबाइल पर देखा.तो उस ने अपने कान में लगे हुए फोन के ब्लूटूथ को फॉरन ऑन कर दिया.
एक दूसरे की ख़ैरियत पूछने के बाद शाज़िया ने ज़ाहिद को अम्मी के फ़ैसले से मुतला किया.तो खुशी का मारे ज़ाहिद अपनी सीट से उछल पड़ा.
वैसे तो ज़ाहिद को पहले से ही यकीन था. कि उस की अम्मी भी आख़िर अपने बेटे की ज़िद के आगे हर मान जाएँगी.
मगर ज़ाहिद को ये यकीन हरगिज़ नही था. कि दो दिनो में ही उस की लालची अम्मी अपने सारे हितीयार फैंक कर अपनी शिकस्त कबूल कर लेंगी.
बहरहाल अपनी अम्मी की “हां” के फ़ैसले को अपनी बहन के मुँह से सुन कर ज़ाहिद का लंड उस की पॅंट में फुल खड़ा हो गया. और उस ने एक हाथ से कार के स्टियरिंग को पकड़ा और अपने दूसरे फारिग हाथ से अपने लंड को मसल्ते हुए शाज़िया से कहा “ तो अब जल्दी ही वापिस आ जाओ ना जान.अब तुम्हारे इस आशिक़ से तुम्हारी चूत की दूरी मज़ीद बर्दाश्त नही होती”.
“में जल्द ही वापिस आऊँगी मगर इस के लिए मेरी दो शर्ते होंगी जनाब” शाज़िया ने इठलाते हुए अपने आशिक़ भाई की बात का जवाब दिया.
“शर्तें, केसी शर्तें मेरी जान” ज़ाहिद ने भी उसी अंदाज़ में अपनी बहन से पूछा.
“पहली शर्त ये कि मेरी घर वापसी के बावजूद आप मुझे शादी वाले दिन तक हाथ नही लगाएँगे. और दूसरी शर्त ये कि मुझे अपनी बीवी बनाने के बाद आप नीलोफर को दुबारा कभी नही चोदेन्गे” शाज़िया ने अपने भाई को अपनी दोनो शर्ते बता दीं.
“हाईयययययययी कुर्बान जाऊं में अपनी शहज़ादी के,तुम अभी बहन से बीवी बनी भी नही और बीवियों वाले हुकम पहले ही चलाने शुरू कर दिए हैं मेरी जान” अपनी बहन की दूसरी शर्त सुन कर ज़ाहिद की हँसी निकल गई और वो बोला.
“में मज़ाक नही कर रही भाई,अगर आप को मेरी ये शर्ते मंजूर हैं तो बताओ वरना में घर वापिस नही आ रही” अपने भाई की तंज़िया हँसी सुन कर शाज़िया को तुप चढ़ गई.
“अच्छा जैसे मेरे दिल की रानी कहेगी में वैसे ही करूँगा बाबा,वैसी भी जिस भाई को तुम जैसी भरी हुए मस्त बदन और जनम जनम की प्यासी चूत वाली बहन चोदने को मिल जाय, तो उस का लंड किसी और की चूत में कैसे जाएगा जानू”. ज़ाहिद ने अपनी बहन को मक्खन लगाते हुए जवाब दिया.
“ठीक है में एक दो दिन में वापिस झेलम आने का प्रोग्राम बनाती हूँ” शाज़िया ने अपने भाई ज़ाहिद को कहा और फोन बंद कर दिया.
ज़ाहिद अपनी बहन शाज़िया से बात कर के बहुत खुश था.वो उस वक्त लाहोर की लिबर्टी मार्केट के पास से गुज़र रहा था.
इसी दौरान कार ड्राइवर करते हुए ज़ाहिद की नज़र लॅडीस अंडर गारमेंट्स वाली एक दुकान पर पड़ी.
ज़ाहिद ने सोचा कि क्यों ना अपनी बहन के लिए अपनी पसंद का खास ब्रेज़ियर और पैंटी खदीद के ले जाए. जिस को शादी के दिन पहन कर उस की बहन शाज़िया उस के साथ अपनी सुहाग रात मनाएगी .ये ही सोच कर ज़ाहिद ने अपनी कार पार्क की और फिर उस दुकान में चला आया.
सेल्स मॅन ने ज़ाहिद को मुक्तिलफ स्टाइल और कलर्स में काफ़ी सारी इंपोर्टेड ब्रेज़ियर और पॅंटीस दिखाई. जिन को देखने के बाद आख़िर ज़ाहिद को रेड कलर में मेटल हुक्स और स्ट्रॅप्स वाला स्पेशल ब्रिडाल ब्रेज़ियर. और उस के साथ मॅचिंग थॉंग जिस के साइड में गोल्डन हुक्स थे, पसंद आ गया.