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वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास ) complete

“आआहह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊओफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उईईईईईईइमाआआआआआआ भाईईईईईईईईईईईई आप तो बहुत ही बे सबरे हैं, मुझे कपड़े तो उतार लेने देते आप” अपने भाई की ज़ोर दार चुदाई की वजह से शाज़िया के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी.

“उफफफफफफफफ्फ़ शाज़िया,तुम इन कपड़ों में आज इतनी प्यारी लग रही थी,कि अगर मेरा बस चलता तो में तुम को ट्यूलिप में ही पकड़ कर चोद देता मेरी जान,मेरी बीवी”ज़ाहिद मज़ीद ज़ोर ज़ोर से झटके मारते हुए बोला.

“उफफफफफफफ्फ़ भाई मुझे एक मिनट के लिए अपनी कमीज़ और ज्यूयेल्री को उतारने का मोका तो दो ना” शाज़िया ने अपने हाथ को पीछे ले जा कर अपनी गान्ड से चिपके हुए अपने भाई ज़ाहिद को धक्का दिया. तो ज़ाहिद खुद ही अपनी बहन के जिस्म से पीछे हट गया.

ज़ाहिद के पीछे से हटते ही शाज़िया निढाल हो कर ड्रेसिंग टेबल पर गिर पड़ी और लंबे लंबे सांस लेने लगी.

शाज़िया से परे होते ही ज़ाहिद का लंड भी उस की बहन की फुद्दि से स्लिप हो कर बाहर तो निकल आया था. मगर कमीज़ पहने होने की वजह से रज़िया बीबी अभी तक अपने बेटे का लंड देखने से महरूम थी.

शाज़िया के जिस्म से अलग होते ही ज़ाहिद अपने बिस्तर की तरह चल पड़ा और बिस्तर तक पहुँचते पहुँचते ज़ाहिद ने अपनी कमीज़ उतार कर कमरे के फर्श पर फैंक दी.

ज़ाहिद के कमीज़ उतारते ही कमरे की ट्यूब लाइट की रोशनी में उस का लंड बाहर से झाँकती हुई उस की अम्मी रज़िया बीबी के सामने नुमाया हो गया.

ज़ाहिद का लंड इस वक्त एक खंबे की तरह तन कर ऊपर की तरह खड़ा था.

शाज़िया की फुद्दि के सफेद पानी से ज़ाहिद का लंड इस वक्त इतना तर हो चुका था.कि ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी कमीज़ उतार कर बिस्तर की तरफ दो कदम बढ़ाए. तो उस के लंड पर लगा हुआ उस की बहन की चूत का पानी बारिश की बूँदों की तरह “टॅप टॅप” करता कमरे के फर्श पर गिरने लगा था.

अपनी जवानी में चुदाई के दौरान रज़िया बीबी की चूत भी गरम हो कर बहुत पानी छोड़ती थी.

इसीलिए अपने बेटे के लंड पर लगे हुए अपनी ही सग़ी बेटी के पानी की मिक्चर देख कर रज़िया बीबी को अंदाज़ा हुआ. कि उस की तरह उस की बेटी शाज़िया की चूत से निकलने वाला पानी भी बहुत ज़्यादा और गाढ़ा (थिक) है.

जो कि इस बात की निशानी थी. कि अपनी अम्मी की तरह शाज़िया की चूत में भी बहुत ज़्यादा आग मौजूद है.

“उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्याआअ मोटा ताज़ा लंड है मेरे बेटे का, वैसे मेरे बेटे का ये बड़ा ही लंड सही मायनो में मेरी बेटी की गरम और प्यासी चूत का हक दार हाईईईईईईईई” अपनी ही बेटी की चूत के पानी से भीगे हुए अपने सगे बेटे के लंड का साइज़ देख कर रज़िया बीबी के बदन में एक सुर्राहट हुई. और उस का अपना एक हाथ खुद ब खुद आगे बढ़ता हुआ शलवार के ऊपर से उस की फुद्दि तक जा पहुँचा.

“ओह” अपनी फुद्दि पर अपना हाथ रखते ही रज़िया बीबी ने सिसकारी ली और उस ने अपने होंठो को आपस में भींच लिया. ताकि उस के मुँह से निकलने वाली सिसकारी को अंदर कमरे में माजूद ज़ाहिद या शाजिया कहीं सुन ना ले.

पहले अपने बेटे को अपनी ही बहन की चुदाई करते देख कर और अब अपने बेटे का जवान और मोटा ताज़ा बड़ा लंड पूरा नंगा देख कर रज़िया बीबी की चूत में अपने ही बेटे के लंड की तलब जाग उठी. और वो ज़ाहिद के लंड को भूकि नज़रों से देखती आहिस्ता आहिस्ता अपनी चूत को शलवार के ऊपर से रगड़ने लगी.

इधर कमरे के बाहर खड़ी रज़िया बीबी ने ज्यों ही अपनी चूत रगड़ाई का खेल स्टार्ट किया.

तो दूसरी तरफ इतनी देर में ज़ाहिद ने अपने बिस्तर पर लेट कर अपने जिस्म पर एक चादर ओढ़ ली.और वो बिस्तर पर लेट कर ड्रेसिंग टेबल कर सामने खड़ी हुई शाज़िया को अपनी ज्वेलरी और मेक अप को उतारते देखने लगा.

“जल्दी कर शाज़िया, मुझ से अब और बर्दास्त नही हो रहा, मेने आज तुम्हें पूरी रात चोदना है मेरी जान” ज़ाहिद से जब मज़ीद इंतिज़ार ना हुआ. तो उस ने बिस्तर की चादर हटा कर अपनी बहन की चूत के पानी से तर लंड को फिर से अपनी बहन के सामने करते हुए कहा.

“अच्छा बाबा आ रही हूँ, वैसे आप ने तो अभी से मेरा बुरा हाल कर दिया है, रात भर में तो पता नही आप मेरा क्या हाल करोगे भाई” शाज़िया ने बिस्तर पर लेटे हुए अपने भाई की तरफ देखा और बोली.साथ ही साथ ये कहते हुए शाज़िया ने अपनी कमीज़ उतारी और आहिस्ता आहिस्ता चलती हुई बिस्तर पर लेटे हुए अपने भाई की तरफ चली गई.

“अऊूऊ और आ कर अपने इस असली शोहर को प्यार करो मेरी जान” ज्यों ही शाज़िया अपने भाई के बिस्तर के पास आई. तो ज़ाहिद ने अपने खड़े हुए लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा.

“उफफफफफफ्फ़ भाई मैं तो खुद अपनी चूत के इस असली मालिक को प्यार करने के लिए तरस रही हूँ” शाज़िया ने अपने भाई के मोटे लंड को जो उसके हाथ में था देखा और सिसक कर बोली.

फिर रज़िया बीबी के देखते ही देखते शाज़िया ने अपनी ही चूत के पानी से तर अपने भाई के बड़े लंड को अपने मुँह में लिया. और बहुत मज़े से अपने भाई के लंड पर लगी हुई अपनी ही मनी को अपनी ज़ुबान से चाट चाट कर सॉफ करने लगी.

 
शाज़िया अपने भाई के लंड को अपने मुँह में अंदर बाहर कर रही थी. मगर ज़ाहिद का लंड इतना बड़ा और मोटा था.कि कोशिस के बावजूद ज़ाहिद का लंड शाज़िया के मुँह में पूरा नही जा रहा था.

रज़िया बीबी ने जब कमरे के अंदर अपनी बेटी को यूँ अपने ही बेटे के लंड को अपने मुँह में भर कर उसे किसी लॉली पोप की तरह चूस्ते देखा. तो बाहर खड़ी हुई रज़िया बीबी की फुद्दि में लगी आग एक दम भड़क उठी.

रज़िया बीबी ने जोश में आते हुए अपनी शलवार का नाडा खोला. तो उस की शलवार जिस्म से अलग हो कर नीचे फर्श पर गिर गई.

“हाईईईईईईईईईई में कबब्ब्बबब अपने बेटे के इस मोटे लंड को अपने मुँह में भर कर इसे यूँ प्यार कर पाऊँ गीईईईईइ” अपनी शलवार को उतरते ही रज़िया बीबी ने एक दम से अपने हाथ की एक उंगली को अपनी चूत के अंदर डाला और ही उंगली से अपनी चूत को चोदने लगी.

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उधर शाज़िया अपने भाई के लंड को इतने प्यार और जोश से चूस रही थी. कि मज़े के मारे ज़ाहिद की सिसकियाँ पूरे कमरे में फैल रही थी.“आआहह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उऊहह ओह ऊओफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ फ आआआआआआहह”.

“अब मेरे लंड को सक करना बंद करो और आ कर मेरे लंड पर बैठ जाओ मेरी जान” थोड़ी देर अपनी बहन से अपने लंड की चुसाइ लगवाने के बाद ज़ाहिद ने शाज़िया को रुकने का कहा.

अपने भाई की बात सुन कर शाज़िया ने ज़ाहिद के लंड को अपने मुँह से निकाला. और फिर बिस्तर पर लेटे हुए अपने भाई के जिस्म पर चढ़ कर बैठ गई.

शाज़िया के इस तरह बैठने से ज़ाहिद का लंड नीचे से अपनी बहन की चुतड़ों से टकराया.

शाज़िया की चूत ज़ाहिद के लंड से चुद चुद कर अपने भाई के लंड से इतनी आशना हो चुकी थी. कि “खुल जा सिम सिम” वाले मंतर की तरह शाज़िया की चूत का मुँह अपने आप अपने भाई के लंड के लिए खुलता चला गया.

ज़ाहिद ने बिस्तर पर लेटे लेटे अपने जिस्म को नीचे से ऊपर की तरह एक हल्का सा दिखा दिया. तो उस का मोटा लंड बहुत आसानी के साथ अपनी बहन की प्यासी फुद्दि के मुँह को खोलता हुआ अंदर जा कर फँस गया.

ज़ाहिद ने अपनी बहन की चूत में नीचे से लंड डाल कर अपने लंड को हल्का सा बाहर खैंचा और फिर तेज धक्का दिया.

“हाइयाय भाईईईईईईईईईईईईई,मार डालोगे क्या,आज ही सब करना है ? उफफफफफफफफफ्फ़ “शाज़िया अपने भाई के जबर्जस्त धक्के से उछल पड़ी.

अपनी बहन की फुद्दि में अपना लंड डाल कर ज़ाहिद नीचे से अपनी बहन की चूत में झटके मारने लगा.

“ऊवू क्यों करू मेरी जान तुम्हारे इस खूबसूरत बदन और तुम्हारी प्यासी चूत ने तो मुझे पागल कर के रख दिया हाईईईईईईईईईई” ज़ाहिद ने हल्के से लंड को थोड़ा बाहर खींचा और फिर ज़ोर से अपनी बहन की चूत में अपना लंड घुसा दिया.

ज़ाहिद ज़ोर और जोश से अपनी बहन की चूत मारने लगा. उस के झटके इतने ज़ोरदार थे. कि इन झटकों की वजह से अपने भाई के लंड पर बैठी शाज़िया अब ज़ाहिद के लंड पर काफ़ी ऊँचा उछल रही थी. और साथ ही साथ अपने मुँह से ”अया,ऊहह, उूुुउऊफ़, आहिस्ताआआ” की आवाज़े निकाल रही थी.

इस तरह पानी भाई के लंड पर उछलने की वजह से शाज़िया के फुट बॉल जैसे बड़े बड़े मम्मे इस बुरी तरहा से हिल रहे थे.

जो कि बाहर से अपने बच्चो की चुदाई का नज़ारा देखने वाली उन्हे उन की अम्मी रज़िया बीबी को बहुत अच्छे लग रहे थे.

रज़िया बीबी अपनी ज़िंदगी में पहली बार कोई लाइव चुदाई देख रही थी. और इस चुदाई में मसरूफ़ इंसान कोई और नही बल्कि उस के अपने सगे बेटा और बेटी थे. जो ज़ोर दार तरीके से कमरे के बिस्तर पर अपनी चुदाई में मसगूल थे.

अपने बच्चो की इस मज़ेदार चुदाई को देख कर रज़िया बीबी भी जोश में आते हुए अपनी चूत को रगड़ रही थी. और अपने सगे बेटा और बेटी की चुदाई के लाइव शो से पूरी तरह मदहोश हो रही थी.

“ओह ज़ाहिद मुझे कब अपने इस जवान लंड की सवारी का मोका दोगे मेरे बच्चेययययययी”अपनी बेटी को अपने बेटे के लंड पर बैठ कर इस तरह मज़े से चुदवाते देखते हुए रज़िया बीबी दिल भी ये चाह रहा था. के काश वो भी इसी तरह अपने बेटे ज़ाहिद के लंड पर बैठ कर उस से अपनी गरम फुद्दि को चुदवाये.

रज़िया बीबी की नज़रें अपने बेटे के लंड पर जमी थी. और वो शाज़िया की चूत में जाते हुए अपने बेटे के मोटे और तगड़े लंड से ताल से ताल मिला कर अपनी फुद्दि को भी अब उसी तेज़ी से रगड़ रही थी. जिस तेज़ी से ज़ाहिद अपनी बहन की चूत में अपना लंड पेल रहा था.

शाज़िया की चुदाई करते हुए ज़ाहिद को अब काफ़ी देर हो चुकी थी. और इस दौरान शाज़िया अपने भाई के लंड पर दो दफ़ा बार फारिग हो चुकी थी. मगर ज़ाहिद ने अभी तक एक दफ़ा भी अपने लंड का पानी नही छोड़ा था.

फिर कुछ देर और तेज़ी से झटके मारते हुए ज़ाहिद एक दम चीखा“ओह में अपने बच्चे का बीज तुम्हारी फुद्दि में डालने जा रहा हूँ मेरी बहन”.

ये कहते ज़ाहिद ने अपने पूरे लंड को जड तक शाज़िया की चूत की गहराई में डाल कर उस की कमर को कस कर जकड लिया.

ज़ाहिद के लंड से उस के वीर्य का फव्वारा छूटा तो शाज़िया की चूत में एक सैलाब आ गया.

ज़ाहिद के लंड की पिचकारी की गरमी इतनी शदीद थी.कि इस गर्मी की वजह से शाज़िया की चूत में एक आग सी लग गई और वो एक बार फिर अपने भाई के लंड पर अपनी चूत का पानी खारिज करने लगी.

दोनो बहन भाई के लंड और चूत का पानी आपस में मिक्स हो कर शाज़िया की चूत से निकल कर ज़ाहिद की टाँगों के दरमियाँ से बहता हुआ बिस्तर की चादर पर टपकने लगा था.

अपने बेटा और बेटी की इस गरम चुदाई को देख कर रज़िया बीबी भी मज़े से बे हाल हो गई. और उस ने भी अपनी चूत को रगड़ते हुए अपने बच्चो के साथ साथ अपने हाथ से अपनी चूत का पानी निकाल दिया.

 
आज रज़िया बीबी की चूत ने इतना पानी छोड़ा कि उस की अपने हाथ की उंगलियाँ भी अपनी ही चूत के पानी से भीग गईं.

ज्यों ही कमरे में ज़ाहिद और शाज़िया की चुदाई का खेल अपनी मंज़िल पर पहुँचा. तो कमरे के बाहर खड़ी रज़िया बीबी को भी एक दम जैसे होश आ गया.

रज़िया बीबी को फॉरन अहसास हुआ कि अपनी चूत में उंगलियाँ डाले आधी नंगी अपने बच्चो के कमरे के बाहर खड़ी है.और अगर ज़ाहिद या शाज़िया एक दम से अपने कमरे से बाहर निकल आए. तो रज़िया बीबी की चोरी पकड़ी जाएगी.

ये बात ज़हन में आते ही रज़िया बीबी एक दम घबरा गई. रज़िया बीबी ने एक दम से फर्श पर पड़ी अपनी शलवार उठाई और तेज कदमों के साथ चलती अपने कमरे में चली आई.

अपने कमरे में आते ही उस ने अपने दरवाज़े की कुण्डी लगाई और फिर अपनी कमीज़ भी उतार कर अपने बिस्तर पर लेट गई.

रज़िया बीबी ने अपनी आँखे बंद कीं और कुछ देर पहली होने वाले वाकये को सोचने लगी.कि कैसे आज उस ने अपने ही बेटे को अपनी सग़ी बहन की गरम और जवान चूत को चोदते पहली बार देखा था.

रज़िया बीबी की चूत एक दफ़ा फारिग होने के बावजूद अभी भी पूरी तरह से गरम और बे चैन थी.

इसीलिए अपनी आँखे बंद कर के बिस्तर की बॅक से टेक लगा कर अपने बच्चो की चुदाई के मस्त शो के बारे में सोचते हुए रज़िया बीबी का हाथ फिर से खुद ब खुद ही अपनी नंगी चूत की तरफ बढ़ गया.और उस ने अपनी चूत पर हाथ लेजा कर अपनी फुद्दि को फिर से आहिस्ता आहिस्ता सहलाना शुरू कर दिया.

“उफ़्फुऊऊुुुउउ कितना मोटा लंड है ना मेरे बेटे का,हाईईईईई ज़ाहिद का लंड किस तरह से फँस फँस कर जा रहा था मेरी बेटी शाज़िया की प्यासी चूत के अंदर, आआआआआआआहह” अपनी चूत की दाने को सहलाती और आहिस्ता आहिस्ता अपनी फुद्दि में अपने हाथ की उंगलियाँ घुमाते हुए रज़िया बीबी की बंद आँखों में इस वक्त वो ही मंज़र दौड़ रहा था.

जब शाज़िया अपने भाई के तने हुए मोटे लंड पर बैठ कर मज़े से उपेर नीचे हो रही थी.

“वैसे ये सब ज़ाहिद की वजह से ही हुआ है, उसी ने मुझे हिम्मत और मोका दिया ,कि में अपनी खुली आँखों से देख सकूँ कि कैसे एक इंसान अपनी जिन्सी भूक के हाथों मजबूर हो कर अपने ही खून के सगे रिश्ते के साथ अपने ताल्लुक़ात कायम करने पर तूल जाता है,मुझे ही अपने बेटे का शुक्र गुज़ार होना चाहिए जिस ने मुझे ज़िंदगी के इस रुख़ का नज़ारा करवाया है”रज़िया बीबी इस सोच में डुबी हुई थी.जब कि उस की उंगली उस की अपनी चूत को आहिस्ता आहिस्ता सहला रही थी.

“हाईईईईईईईईईईईईई ज़ाहिद तुम को अपनी दो साल से तलाक़ याफ़्ता बहन की प्यासी चूत का तो इतना अहसास है, मगर मेरी फुद्दि का कुछ ख्याल नही जो शाज़िया से ज़्यादा गरम और प्यासी है, अपनी बहन की फुद्दि में तो हर रोज़ लंड डाल कर उसे अपने लंड के पानी से भरते हो,मेरी सदियों से खुश्क फुद्दि को, कब अपने लंड के पानी से सरोबार करो गे,मेरी फुद्दि तुम्हारे लंड की ज़्यादा हॅक दार है मेरे बच्चेययययययी” रज़िया अपनी लज़्ज़त की दुनिया में डूब कर अपनी फुद्दि से खेल रही थी. और अपनी फुद्दि से खेलते खेलते पहले की तरह रज़िया बीबी की फुद्दि ने अपने बेटे ज़ाहिद के नाम का पानी अपनी चूत से फिर रिलीज़ कर दिया.

दूसरे दिन रज़िया भी जब सो कर उठी. तो एक ही रात में दो दफ़ा अपनी चूत का पानी निकालने के बाद आज उस की तबीयत बहुत ही अच्छी थी.

इसीलिए रज़िया बीबी जल्दी से उठी और अपने कपड़े पहन कर आज फिर सुबह सुबह अपने बच्चो ज़ाहिद और शाज़िया के कमरे का दरवाज़ा खट खटाने लगी.

अंदर कमरे में दोनो बहन भाई पूरे नंगे एक दूसरे की बाहों अभी तक सो रहे थे.

दरवाज़े पर दुस्तक सुन कर ज़ाहिद ने और शाज़िया समझ गये कि आज भी उन की अम्मी उस को सुबह सुबह उठाने चली आई हैं. इसीलिए जल्दी से अपने कपड़े पहन कर शाज़िया ने दरवाज़ा खोल दिया.

ज़ाहिद और शाज़िया के अंदाज़े के ऐन मुताबिक उन की अम्मी उन के सामने खड़ी थी.

“शाज़िया आज से तुम आ कर अपना घर और किचन संभाल लो,क्यों कि अब इस घर की बहू होने के नाते तुम इस घर की मालकिन हो अब मेरी बच्ची” ज्यों ही शाज़िया ने दरवाज़ा खोला तो रज़िया बीबी ने अपनी बेटी से कहा.

अपनी अम्मी के मुँह से बहू और घर की मालकिन के अल्फ़ाज़ सुन कर शाज़िया शरमा गई.

“शाज़िया जब में तुम्हें अपने ही सगे भाई की बीवी बन कर उस के साथ सोने की इजाज़त दे चुकी हूँ तो अब तो तुम ये शरम वरम छोड़ दो मेरी बच्ची” रज़िया बीबी ने जब अपनी बेटी के चेहरे को शरम से लाल होते देखा. तो उस ने शफकत से अपनी बेटी के सर पर अपना हाथ फेरते हुए कहा.

“अच्छा अम्मी में अभी किचन में जा कर सब काम संभालती हूँ” शाज़िया अपनी अम्मी के प्यार भरे अंदाज़ को देख कर खुस हुई.और फिर वो अपनी अम्मी को कमरे में ही छोड़ कर खुद किचन की तरफ चली गई.

शाज़िया के जाने के बाद रज़िया बीबी ने अपने बेटे की तरफ देखा. जो कि इस वक्त अपना तोलिया उठाए बाथरूम में नहाने जा रहा था.

रज़िया बीबी ने गौर किया कि शाज़िया के विपरीत ज़ाहिद को रवईया अपनी अम्मी के सामने बिल्कुल ऐसे ही था.कि जैसे वाकई ही ज़ाहिद अपनी सग़ी बहन को नही, बल्कि किसी आम लड़की को अपनी बीवी और अपनी अम्मी की बहू बना कर इस घर में लाया हो.

अपने बेटे पर नज़रें जमाते ही रज़िया बीबी की आँखों के सामने ज़ाहिद का खड़ा हुआ लंड फिर से घूम गया. और उस की चूत नीचे से फिर गीली होने लगी.

 
दूसरी तरफ ज़ाहिद को आज अपने पोलीस स्टेशन जाने की जल्दी थी. इसीलिए अपनी अम्मी की नज़रों की परवाह किय बगैर वो अपनी बहन से कही हुई अपनी अम्मी की बात पर मुस्कुराता हुआ बाथरूम में चला गया.

ज़ाहिद के बाथरूम जाने के बाद रज़िया बीबी भी किचन में चली आई.

जिधर उस की बेटी शाज़िया अब उस की बहू के रूप में सब घर वालों के लिए चाय और नाश्ता बनाने में मसरूफ़ थी.

रज़िया बीबी भी किचन में आ कर अपनी बेटी का हाथ बंटाने लगी.

थोड़ी देर बाद ज़ाहिद भी किचेन में चला आया. तो सब ने मिल कर एक साथ नाश्ता किया.

नाश्ते से फारिग होते ही ज़ाहिद अपनी मोटर साइकल ले कर बाहर जाने लगा. तो रज़िया बीबी ने शाज़िया को आहिस्ता से कहा “बेटी जाओ और अपने मियाँ को अलविदा करो”.

अपनी अम्मी की बात सुन कर शाज़िया पहले तो हिचकचचाई. मगर फिर अपनी अम्मी की हिदायत पर अमल करते हुए अपने भाई ज़ाहिद के पीछे पीछे गेट तक चली गई.

ज़ाहिद को अपनी बहन शाज़िया का आज यूँ एक बीवी की तरह घर के गेट तक आ कर उसे अलविदा करना अच्छा लगा.

अपनी बहन को उस के पीछे इस तरह गेट तक आता देख कर ज़ाहिद के दिल तो चाहा कि वो जाते जाते अपनी बहन की एक ज़ोर दार चुम्मि ले ले.

मगर फिर उस ने सोचा कि चुम्मि लेते लेते अगर उस का दिल फिर से अपनी बहन की चूत मारने को करने लगा. तो उसे पोलीस स्टेशन जाने में काफ़ी देर हो जाय गी.

इसीलिए अपने दिल पर पत्थर रख कर ज़ाहिद ने मोटर साइकल को किक लगाई और फिर घर से बाहर निकल गया.

घर का गेट बंद कर के शाज़िया ज्यों ही टीवी लाउन्ज में वापिस आई. तो उस ने अपनी अम्मी को टीवी लाउन्ज के सोफे पर बैठे पाया.

अपनी अम्मी को टीवी लाउन्ज में बैठा देख कर शाज़िया ने सोचा कि वो जल्दी से किचन में जा कर नाश्ते वाली डिशस को सॉफ कर के अपना काम ख़तम कर ले.

ये ही सोच कर शाज़िया ज्यों ही किचन की तरफ जाने लगी. तो उसे अपने पीछे से अपनी अम्मी की आवाज़ सुनाई दी.“शाज़िया ज़रा इधर मेरे पास आ कर बैठो”.

शाज़िया का दिल तो नही चाह रहा था. मगर उसे चारो-ना-चार अपनी अम्मी के पास आ कर सोफे पर बैठना ही पड़ा.

अपनी अम्मी के पास बैठ कर कोई बात करने की बजाय शाज़िया ने कमरे का टीवी ऑन कर के टीवी पर लगे हुए मॉर्निंग शो को देखना शुरू कर दिया.

जब रज़िया बीबी ने देखा कि शाज़िया उस से कोई बात चीत करने की बजाय अपना ध्यान टीवी में लगा रही है. तो उस ने खुद अपनी बेटी से अपनी बात स्टार्ट करने का सोचा और वो बोली “ शाज़िया मुझे समझ नही आ रही कि तुम्हारे और ज़ाहिद के दरमियाँ इतना सब कुछ होने के बावजूद, ना जाने क्यों तुम अभी तक मुझ से एक जिझक सी महसूस कर रही हो?”.

अपनी अम्मी की बात सुन कर शाज़िया ने कोई जवाब ना दिया और खामोशी से टीवी की तरफ अपनी नज़रें जमाए रखी.

“मेरी बच्ची मेरी ख्वाहिश है कि आज के बाद तुम मुझे अपनी माँ नही बल्कि नीलोफर की तरह अपनी सहेली समझो बेटी” रज़िया बीबी ने जब शाज़िया के मुँह से कोई जवाब नही सुना तो वो फिर बोली.

“अम्मी कह तो ठीक रही हैं,अब जब कि में अपनी अम्मी की रज़ामंदी से अपने ही सगे भाई की बीवी बन कर उस के साथ अपनी सुहाग रात मना चुकी हूँ,और आज मेरी अपनी सग़ी अम्मी ने मुझे अपनी बेटी से बढ़ कर अपनी बहू का दर्जा भी दे दिया है, तो अब मुझे अपने दिल से अपनी रवायती शरम और झिझक निकाल देनी चाहिए” ये बात सोचते हुए शाज़िया ने अपनी नज़रें अपनी अम्मी की तरफ कीं और बोली “ठीक है अम्मी में कोशिश करूँगी कि आइंदा आप से कोई झिझक और शरम महसूस ना करूँ”.

ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपनी बेटी के मुँह से ये बात सुनी तो उस ने शाज़िया को खैंच कर अपने साथ चिमटा लिया और खुशी से अपनी बेटी के कान में शरगोशी की “ तो अब मेरी बहू मुझे मेरा पोता कब दे रही है”.

“अम्म्मिईीईई ऐसी बातें ना करो मुझे शरम आती है” अपनी अम्मी के मुँह से पोते की फरमाइश सुन कर शाज़िया अपना मुँह शरम से अपने हाथों में छुपाते हुए बोली.

“हाईईईईईई मेरी बच्ची शादी के बाद बच्चे पैदा होना तो एक क़ुदरती अमल है,इस में शरमाने वाली कौन सी बात है भला” रज़िया बीबी ने जब अपनी बेटी को फिर शरमाते देखा. तो उस ने अपनी बेटी शाज़िया को प्यार से समझाया.

इस से पहले कि शाज़िया कुछ जवाब देती कि इतनी देर में नीलोफर और जमशेद घर की ऊपर वाली मंज़िल से नीचे आ कर टीवी लाउन्ज में एंटर हुए.

“तुम लोग किधर जा रहे हो सुबह सुबह” शाज़िया ने ज्यों ही नीलोफर और जमशेद को अंदर आते देखा. तो वो उन की तरफ मुँह कर के पूछने लगी.

“शाज़िया में और जमशेद बाज़ार जा रहे हैं,तुम ने कुछ मंगवाना तो नही” टीवी लाउन्ज में आ कर नीलोफर ने शाज़िया से पूछा.

“नही मुझे कुछ नही चाहिए” शाज़िया ने जवाब दिया तो नीलोफर अपने भाई के साथ घर से बाहर निकल गई.

जमशेद और नीलोफर की इस तरह अचानक आमद का फ़ायदा उठाते हुए शाज़िया भी सोफे से उठ कर नीलोफर के पीछे पीछे किचन की तरफ चली गई.

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जमशेद ने चूँकि कंप्यूटर में डिग्री ली हुई थी . और उसे कंप्यूटर की फील्ड में काम करने का बहुत तजुर्बा भी था.

इस बिना पर जमशेद जानता था. कि आज कल कंप्यूटर की फील्ड में बाहर के मुल्क में काफ़ी जॉब्स अवेलबल हैं.इसीलिए वो अक्सर घर में बैठ कर ही दूसरे देशों में ऑनलाइन जॉब्स अप्लाइ करता रहता था.

अपनी बहन नीलोफर से जेहनी शादी के कुछ दिन बाद ही जमशेद को मलेशिया में एक कंप्यूटर की जॉब ऑफर हुई. जिस में अच्छी सेलरी के साथ साथ फॅमिली वीसा और रिहायश भी शामिल थी.

“ज़ाहिद तुम बताओ कि मुझे किया करना चाहिए” नोकरी की ऑफर मिलने पर जमशेद ने ज़ाहिद से इस बड़े में मशवरा किया.

“यार तुम को पता है कि मेरी अपनी पोलीस सर्विस भी अब चन्द साल की ही रह गई है, इसीलिए वैसे में भी ये चाहता हूँ कि तुम वहाँ जा कर नोकरी के साथ साथ मेरे पैसो से कोई बिजनेस स्टार्ट करो,तो फिर अपनी नोकरी ख़तम होते ही में भी अम्मी और शाज़िया के साथ तुम्हारे पास ही चला आऊँगा” ज़ाहिद ने जमशेद की बात के जवाब में उसे मशवरा दिया.

 
जमशेद को ज़ाहिद का दिया हुआ मशवरा अच्छा लगा. इसीलिए ज़ाहिद के मशवरे के मुताबिक जमशेद ने अपनी बहन नीलोफर को साथ ले कर मलेशिया शिफ्ट होने का प्रोग्राम बना लिया.

अपनी उस सहेली जिस ने शाज़िया को उस के अपने ही सगे भाई से मिलवा कर शाज़िया की बे रोनक ज़िंदगी में फिर से बहार लौटाई थी.

अपनी उसी प्यारी सहेली से यूँ अचानक जुदा होना शाज़िया के लिए बहुत तकलीफ़ देय था.

इसीलिए एरपोर्ट पर नीलोफर और जमशेद को अलविदा करते वक्त शाज़िया की आँखों में भी आँसू आ गए.

मगर वो कहते हैं ना कि "जाने वाले को कौन रोक सका है भला". इसीलिए नीलोफर भी अपने सगे भाई के साथ परदेश चली गई.

इसी दौरान झेलम में एक नया एसपी आया. जिस ने झेलम सिटी में काफ़ी अरसे से पोस्टेड सब पोलीस ऑफिसर्स की दूसरे सिटीस में ट्रॅन्स्फर्स कर दीं.तो ज़ाहिद की पोस्टिंग भी रावलपिंडी हो गई.

अपनी बहन से अपने जिस्मानी ताल्लुक़ात कायम करने के बाद अब ज़ाहिद अपनी बहन और बीवी शाज़िया से एक पल की दूरी नही बर्दाश्त कर सकता था.

इसीलिए ज़ाहिद अपना झेलम वाला घर रेंट पर दे कर खुद अपनी अम्मी और बहन को साथ ले कर रावलपिंडी बहरिया टाउन रावलपिंडी में एक किराए के मकान में शिफ्ट हो गया.

नीलोफर और जमशेद के जाने के और रावलपिंडी आने के बाद रज़िया बीबी के घर में ज़िदगी अपनी मामोल की डगर पर चलने लगी.

रज़िया बीबी अब अपनी बेटी शाज़िया को अपनी बहू समझ कर उस से एक अच्छी सास वाला रवईया अपनाने लगी थी. और शाज़िया को अपनी अम्मी का ये नया रूप अच्छा लगने लगा था.

ज़ाहिद और शाज़िया दोनो बहन भाई अब अपने ही घर में एक मीयन बीवी की हएएसआइयत से अपनी जिंदगी गुज़रने लगे.

अब शाज़िया अपने भाई की असली बीवी की तरह अपने शोहर भाई की सब ज़रूरतों का ख्याल रखने लगी थी.

दोनो बहन भाई को अब एक दूसरे के साथ मियाँ बीवी की हैसियत से रहते हुए अब ऑलमोस्ट एक महीना होने को था.

इस दौरान शाज़िया को अहसास हुआ कि तकरीबन एक महीना होने वाला है और उसे इस दफ़ा माहवारी (मेन्स्ट्रुयल पीरियड) नही आए. मगर उस ने अपने भाई ज़ाहिद या अपनी अम्मी से इस बात का ज़िक्र नही किया था.

इस एक महीन के दौरान ही शाज़िया अपने भाई के लंड से जितना चुदवा चुकी थी. इतना तो शाज़िया ने शायद अपनी असली शादी के पहले 6 महीने में भी नही चुदवाया था.

चूकि ज़ाहिद और शाज़िया ने अपनी अम्मी की इजाज़त के बाद ही आपस में अपना जिस्मानी रिश्ता कायम किया था.

इसीलिए अब बिना किसी शरम और हया के ज़ाहिद ने अपनी बहन शाज़िया को कई दफ़ा अपनी अम्मी की मौजूदगी और गैर मौजूदगी में अपने घर की अलग अलग जगह पर अलग अलग पोज़िशन में चोदा.

कई दफ़ा जब रज़िया बीबी अपने कमरे में रेस्ट कर रही होती. तो कई दफ़ा ज़ाहिद अपनी अम्मी की अपने कमरे में मौजूदगी का फ़ायदा उठे हुए किचन में आ घुसता.

और किचन में काम काज में मसरूफ़ अपनी बहन शाज़िया से अपने प्यार की पींगे बढ़ाने लगता.

इसी तरह कई दफ़ा ज़ाहिद सुबह सवरे उठते ही शाज़िया से बेड टी की फरमाइश कर देता. और फिर अपनी बहन शाज़िया को मजबूर करता. कि वो बिना कपड़ों के सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी चड्डी और ब्रेज़ियर में उस के लिए किचन से चाय बना कर लाए.

शाज़िया को इस तरह अपनी चड्डी और ब्रा में अपने घर के किचन में जाते हुए बहुत शरम आती. और शरम के साथ साथ शाज़िया को डर भी लगा रहता कि कहीं उस की अम्मी अचानक किचन में आ गईं तो क्या हो गा.

मगर इस के बावजूद उसे अपने शोहर भाई के प्यार के आगे हर मान कर आधी नंगी हालत में चाय बना कर लाना पड़ती.

कभी रात के अंधेरे में ज़ाहिद शाज़िया को टीवी लाउन्ज के सोफे पर बिता कर अपनी बहन की चूत को मज़े ले ले कर चाट्ता. और शाज़िया की चूत से निकलते रस को अपनी ज़ुबान से चाट रहता.

कभी आधी रात को अपने कमरे में शाज़िया अपने भाई के मोटे लंड को अपने हाथ में ले कर उस से खेलती.

कभी वो अपने हाथ से अपने भाई के मोटे लंड की मूठ लगाती.

और कभी अपने भाई के मोटे लंड को अपने मुँह में भर कर उस की चुसाइ लगती.

कभी कभी अपनी अम्मी की टीवी लाउन्ज की मौजूदगी के बावजूद ज़ाहिद दिन की रोशनी में ही अपने बाथरूम में अपनी बहन के साथ चूमा चाटी करता.

और शाज़िया को बाथरूम के सींक पर बिता कर अपनी बहन की चूत में अपना लंड डाल कर उसे चोद डालता.

 
इस चुदाइ के बाद दोनो बहन भाई अक्सर इकट्ठे शवर करते और अपने मुँह से एक दूसरे के लंड और चूत को चाट कर अपने प्यार का इज़हार करते.

अपने भाई के मोटे ताज़े और जवान लंड को अपनी फुद्दि में ले कर हर रोज़ उस से अपनी चूत की प्यास बुझवाना शाज़िया की अब एक आदत सी बन गई थी.

एक दूसरे को इतना ज़्यादा चोदने और चुदवाने के बावजूद दोनो बहन भाई के जिस्मो में चुदाई की आग कम नही हुई बल्कि ये आग अब पहले से भी ज़्यादा भड़क रही थी.

ज़ाहिद और शाज़िया को ये शक था. कि उन की अम्मी उन की सारी हरकतों या चुदाई से बे खबर थी. तो ये उन की भूल थी.

क्यों कि इस सारे अरसे के दौरान रज़िया बीबी ने कई दफ़ा अपने दोनो बच्चो की मस्तियों और चुदाई के लम्हात को ना सिर्फ़ छुप छुपा कर नज़ारा किया था.

बल्कि रज़िया बीबी ने अपने बेटा और बेटी की इन चुदाई की इन वारदातों को देखते हुए अक्सर अपनी चूत में उंगली कर के अपनी गरम फुद्दि को भी अपने ही हाथों से शांत किया था.

कहते हैं ना कि जिस तरह फूलों की बेल को हर रोज़ पानी देने से उस में फूल और खुश्बू ज़्यादा आती है .

इसी तरह भाई से दिन में कई कई दफ़ा चुदा कर शाज़िया के चेहरे पर अब बहुत ताज़गी आने लगी थी. साथ ही साथ अब शाज़िया का जिस्म में पहले से भी ज़्यादा निखार आने लगा था.

अपनी बेटी के जिस्म पर दुबारा से चढ़ती हुई इस जवानी के इस रूप को रज़िया बीबी ने भी नोट किया था.

फिर एक दिन ज़ाहिद के पोलीस स्टेशन जाने के बाद जब शाज़िया किचन में खाना बना रही थी.

तो उस की अम्मी रज़िया बीबी उस के पास किचन में चली आईं.और एक कुर्सी पर बैठ कर बहुत गौर से अपनी बेटी के जिस्म का जायज़ा लेने लगीं.

“शाज़िया में एक बात कहूँ,तुम अपने भाई की बीवी बनने के बाद तो तुम पहले से भी ज़्यादा खूबसूरत हो गई हो मेरी बच्ची" रज़िया बीबी ने अपनी बेटी की तरफ देखते हुए अपनी बेटी के खिलते हुए हुश्न की तारीफ की.

" अम्मी आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे में पहले बदसूरत थी”.शाज़िया अब अपनी अम्मी से पहले के मुक़ाबले में काफ़ी फ्री हो चुकी थी. इसीलिए आज अपनी अम्मी के मुँह से अपनी तारीफ सुन कर शाज़िया को ज़रा भी शरम महसूस नही हुई. बल्कि उसे अपनी अम्मी के मुँह से अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगा और उस ने मज़ाक में अपनी अम्मी से पूछा.

“नही मेरी बच्ची ऐसी बात नही,असल में अपने तलाक़ के बाद से तुम ने अपना ध्यान रखना छोड़ दिया था,और अब अपने ही भाई की बीवी बन कर तो तुम्हारी जवानी ना सिर्फ़ लौट आई है बल्कि पहले से और भी ज़्यादा निखर आई है” रज़िया बीबी ने अपनी बेटी के सवाल के जवाब में उसे समझाया.

"ऐसा क्या निखार आया है मेरी जवानी में अम्मी” शाज़िया ने अपनी अम्मी से मज़ीद फ्री होते हुए पूछा.

“में बताती हूँ कि तुम्हारी जवानी में क्या निखार आया,असल में तुम्हारा बदन पहले से भी ज़्यादा भर गया है, जिस की वजह से तुम्हारे कपड़े भी पहले से ज़्यादा टाइट होने लगे हैं मेरी बच्ची”. रज़िया बीबी ने शाज़िया से कहा.

इस से पहले कि शाज़िया अपनी अम्मी को कुछ जवाब दे पाती. शाज़िया को एक दम एक चक्कर सा आया और वो लड़ खड़ा कर किचन के फर्श पर गिरने लगी.

“क्या हुआ है तुम्हें, मेरी बच्ची” ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपनी बेटी को यूँ लड़खड़ाते देखा. तो उस ने एक दम कुर्सी से उठ कर अपनी बेटी को अपने हाथों में संभाल लिया. जिस से शाज़िया किचन के फ्लोर पर गिरने से बच गई.

अपनी अम्मी के हाथों का सहारा पाते ही शाज़िया गिरने से बच तो गई. मगर इस के साथ ही उस ने एक दम से उल्टी (वॉमिटिंग) कर दी.

“लगता है तुम्हारी तबीयत ठीक नही चलो में तुम्हें लेडी डॉक्टर के पास लिए चलती हूँ”. अपनी बेटी को यूँ एक दो मल्टी करते देख कर रज़िया बीबी ने शाज़िया से कहा.

रज़िया बीबी एक समझ दार औरत थी. इसीलिए अपनी बेटी की हालत और उस की उल्टी को देख कर वो फॉरन समझ गई. कि उस की बेटी का पावं भारी (प्रेग्नेंट) हो गया है.

कोई आम हालत होते तो अपनी तलाक़ याफ़्ता बेटी को यूँ उल्टियाँ करते देख कर रज़िया बीबी ना सिर्फ़ अपने हाथों से अपनी बेटी का गला दबा देती. बल्कि शरम से खुद भी खुद खुशी कर लेती.

मगर अपने बेटे ज़ाहिद की हराम की कमाई ने ना सिर्फ़ रज़िया बीबी बल्कि अपने बेटा और बेटी को एक गुनाह भरी राह पर चला दिया था.

बल्कि अपने बेटे की रिश्वत की कमाई ने रज़िया बीबी के अपने ज़मीर को इतना मुर्दा कर दिया था. कि आज ये जान कर उस का दिल खुशी से फूले नही समा रहा था. कि उस की अपनी सग़ी बेटी की कोख में उस के अपने सगे बेटे का बच्चा जनम लेने लगा है.

रज़िया बीबी ने खुद भी 5 बच्चो को जनम दिया था. इसीलिए शाज़िया की शकल से ही रज़िया बीबी को सूरते हाल का अंदाज़ा हो गया था. मगर इस के बावजूद रज़िया बीबी शाज़िया को डॉक्टर से चेक करवा कर इस बात का यकीन कर लेना चाहती थी. कि उस की बेटी वाकई ही अपने सगे भाई के बच्चे की माँ बनने वाली है.

फिर शाज़िया के रोकने के बावजूद रज़िया बीबी अपनी बेटी को घर के पास ही एक क्लिनिक पर ले गई.

शाज़िया का अच्छी तरह मुआयना करने के बाद जब लेडी डॉक्टर ने बाहर आ कर रज़िया बीबी को कहा कि “मुबारक हो आप दादी बनने वाली हैं”. तो ये खबर सुन कर रज़िया बीबी का ना सिर्फ़ दिल बाग बाग हो गया.

बल्कि उस की अपनी चूत भी इस ख्याल से पानी पानी होने लगी. कि उस के बेटे के मोटे ताज़े लंड से निकलने वाला उस का गाढ़ा पानी आख़िर अपनी बहन की बच्चे दानी में जा कर अपना काम दिखा चुका है.

चूँकि शाज़िया अपनी जिंदगी में पहली बार प्रेग्नेंट हुई थी.

इसीलिए लेडी डॉक्टर ने चेक अप के बाद शाज़िया को कुछ खास हदायत दीं.

अपने चेक अप के बाद ज्यों ही शाज़िया डॉक्टर के कमरे से बाहर आई.तो उसे अब शरम के मारे हिम्मत नही हो रही थी कि वो अपनी अम्मी से अपनी नज़रें मिला सके.

रज़िया बीबी ने खुद भी क्लिनिक में अपनी बेटी से कुछ कहना मुनासिब ना समझा.और वो चेहरे पर खुशी की मुस्कराहट लिए शाज़िया को साथ ले कर अपने घर वापिस चली आई.

अपने घर के अंदर आते ही रज़िया बीबी ने अपनी बेटी शाज़िया को अपने गले से लगा कर उस के माथे पर प्यार भरा बोसा दिया और बोली”शाज़िया तुम को मुबारक हो कि तुम अपने ही भाई के बच्चे की माँ बने वाली हो मेरी बेटी”.

रज़िया बीबी की तरह शाज़िया भी लेडी डॉक्टर के मुँह से माँ बनने की खूसखबरी सुन कर बहुत खुस थी.

 
रज़िया बीबी की तरह शाज़िया भी लेडी डॉक्टर के मुँह से माँ बनने की खूसखबरी सुन कर बहुत खुस थी.

इसीलिए घर वापिस आते ही जब उस की अम्मी ने भी उसे अपने साथ लिपटा कर उसे माँ बनने की मुबारक दी.

तो अपनी अम्मी रज़िया बीबी की तरह शाज़िया को भी ये बात सोच कर अपनी चूत में हल्का हल्का गीला पन महसूस होने लगा. कि उस के पेट में जनम लेने वाले इस बच्चे का बाप कोई और नही बल्कि उस का अपना सगा बड़ा भाई है.

दोनो माँ बेटी एक दूसरे से इसी तरह लिपटी काफ़ी देर घर के टीवी लाउन्ज में खड़ी रहीं. कि इतनी देर में ज़ाहिद अपने घर में दाखिल हुआ.

“खैर तो है, दोनो माँ बेटी के दरमियाँ बड़ा प्यार उमड़ रहा है आज” ज़ाहिद ने जब अपनी अम्मी और बहन को एक दूसरे से लिपटे देखा.तो वो हेरान होता हुआ उन से पूछने लगा.

शाज़िया ने ज्यों ही अपने शोहर भाई की आवाज़ सुनी. तो ना जाने उसे क्यों शरम महसूस हुई और वो अपनी अम्मी से अलहदा हो कर अपने कमरे की तरफ भाग गई.

“एक तो तुम ने खुद ही अपनी ही सग़ी बहन को अपने हाथों से खराब किया है,और ऊपर से मासूम बन कर पूछते हो कि ख़ैरियत तो है” रज़िया बीबी ने जब अपने बेटे की आवाज़ सुनी. तो उस ने मुस्कुराते हुए टीवी लाउन्ज में अपने पीछे खड़े हुए अपने बेटे को देखते हुए कहा.

“अम्मी बताएँ तो सही कि क्या बात है आख़िर” अपनी अम्मी और बहन को यूँ गले लगे देखने और फिर उस की आमद पर शाज़िया का इस तरह शर्मा का कमरे में भाग जाने की वजह से ज़ाहिद से अब सबर नही हो रहा था.

“बात ये है कि तुम्हारी मेहरबानी की बदोलत मैं एक ही वक्त में नानी और दादी दोनो बनने जा रही हूँ बेटा” रज़िया बीबी ने अपने बेटे के करीब होते हुए ज़ाहिद को खींच कर अपने गले से लगा कर ज़ोर से अपनी बाहों में कस लिया.

“किययययययययययययययया” अपनी अम्मी के मुँह से खुशी की ये खबर सुन कर ऊपर से ज़ाहिद का मुँह खुला का खुला रह गया.और नीचे से ज़ाहिद का लंड उस की पॅंट में सख़्त कर खड़ा होने लगा.

रज़िया बीबी की तरह ज़ाहिद ने भी खुशी के मारे अपनी अम्मी के जिस्म के गिर्द अपनी बाहें जकड कर अपनी अम्मी के मोटे जिस्म को अपनी साथ चिमटा लिया.

ज़ाहिद के अपनी अम्मी को यूँ अपने साथ चिपटाने से रज़िया बीबी के बड़े बड़े मम्मे उस के बेटे की सख़्त छाती से लग कर दब्ते चले गये.

जब कि नीचे से पॅंट में कसा हुआ ज़ाहिद का लंड भी उस की अम्मी की शलवार के ऊपर से रज़िया बीबी की चूत को छूने की नाकाम कोशिश करने लगा.

रज़िया बीबी ने आज एक लूज़ किस्म का ब्रेज़ियर पहना हुआ था. जिस की वजह से अपने बेटे की बाहों में यूँ जकड़े होने की वजह से रज़िया बीबी के मोटे मम्मो के निपल्स ज़ाहिद की सख़्त और जवान छाती से रगड़ खा कर उस के ब्रेज़ियर में सख़्त होने लगे थे.

जब कि नीचे से रज़िया बीबी की चूत अपने बेटे के मोटे और तगड़े लंड के इतने करीब हो कर ज़ाहिद के लंड की गरमाइश को अपनी चूत की दीवारों के ऊपर महसूस कर के पानी पानी होने लगी थी.

इस से पहले कि अपने बेटे की मज़बूत बाहों में जकड़ी हुई रज़िया बीबी अपनी बेटी शाज़िया की तरह अपने जिस्म की गर्मी के हाथों मजबूर हो कर अपने बेटे ज़ाहिद के साथ कुछ और करती.

इधर दूसरी तरफ आज अपनी अम्मी के भारी वजूद को अपनी जवान बाहों में कस कर जकड़ने पर ना जाने क्यों पहली बार ज़ाहिद को अपने दिल में एक अजीब सी हल चल महसूस हुई. मगर उसे अपने दिल के यूँ बेचैन होने की फॉरी समझ नही आई.

इसीलिए ज़ाहिद ने अपनी अम्मी को अपने आप से अलग किया और बोला “में ज़रा शाजिया से मिल कर आता हूँ अम्मी”.

इस के साथ ही ज़ाहिद तेज़ी के साथ चलता हुआ अपने कमरे की तरफ चल पड़ा.

“हाईईईईईईईईईईईईईईईई अपनी बहन की चूत में अपने लंड का बीज तो डाल ही दिया है,अब मेरी इस प्यासी चूत पर अपने मोटे लंड का पानी कब बरसाओगे मेरे बच्चेययययययययययी” ज़ाहिद को अपनी बहन के पास जाता देख कर रज़िया बीबी ने अपने ज़हन में सोचा. और अपने हाथ को नीचे ले जा कर अपनी पानी छोड़ती हुई फुद्दि को शलवार के ऊपर से ही अपने हाथ से आहिस्ता आहिस्ता रगड़ कर सिसकियाँ लेने लगी. और उस की चूत से पानी रिस रिस कर उस की गुदाज और बाहरी सुडोल रानों के उपर बहने लगा.

इस के साथ ही रज़िया बीबी को यूँ लगा जैसे उस की शलवार में छुपी हुई उस की चूत अपने बेटे के मोटे लंड के लिए इंडियन मूवी “हीना” का ये गाना गुनगुना रही हो”

“कब पाओ गे कब पाओ

चूत से पानी सूख जाएगा

तब पाओ गे

देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए”

उधर ज़ाहिद जब अपने कमरे में दाखिल हुआ. तो शाज़िया उस वक्त बिस्तर पर बैठ कर अपनी बिखरी सांसो को संभालने में मसरूफ़ थी.

ज्यों ही शाज़िया ने अपने पीछे पीछे अपने भाई ज़ाहिद को कमरे में दाखिल होते देखा. तो वो समझ गई कि उस की अम्मी ने उस के भाई को शाज़िया के प्रेगनेंट होने की खबर सुना दी है.

फिर जिस तरह हर आम लड़की को प्रेग्नेंट होने के बाद पहली बार अपने शोहर का सामना करने में शरम महसूस होती है.

बिल्कुल इसी तरह अब शाज़िया भी अपने कमरे में बैठी अपने भाई का सामना करने में एक शरम सी महसूस कर रही थी.

इसीलिए अपने भाई की कमरे में आमद पर उस का दिल तेज़ी से धड़कने लगा.और वो शरम के मारे करवट बदल कर बिस्तर पर लेट गई.

ज़ाहिद को अपनी बहन का उस से यूँ शरमाना अच्छा लगा. और उस की पॅंट में खड़े हुए उस के लंड को मज़ीद जोश आ गया.

ज़ाहिद आहिस्ता आहिस्ता चलता हुआ बिस्तर पर लेटी हुई अपनी बहन के पीछे बैठा. और उस ने अपनी बहन के “कान” को अपने दाँतों से काटते हुए सेरगोशी की “हाईईईईईईईईई में कितना खुस नसीब भाई हूँ जो अपनी ही सग़ी बहन के बच्चे का बाप बनने वाला हाईईईईईईईईई”

शाज़िया अपने भाई की बात सुन कर गरम हो गई. उस ने गरम होते हुए करवट बदली और अपने भाई के होंठो से अपने लब मिलाते हुए सिसकरीी“हाईईईईईई भाईईईईईई आप नही जानते कि में आप की कितनी अहसान मंद हूँ, कि आप ने मेरी सुखी कोख में अपना बच्चा डाल कर मुझे एक मुकम्मल औरत में बदल दिया है”

ज़ाहिद भी अपनी बहन का जवाब सुन कर मस्त हो गया. और अपनी बहन की कमीज़ और उस के ब्रेजियर को ऊपर उठा कर अपनी बहन के मोटे और भारी मम्मो को अपनी नज़रों के सामने नगा करते हुए बोला.

“उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ शाज़िया मेरे प्यासे होंठो को तो बस उस दिन का इंतिज़ार है, जब मेरी बहन के इन मोटे मम्मो में दूध भरे गा, और में अपनी बहन के इन लंबे निपल्स को सक कर के अपनी ही बहन का ताज़ा और ख़ालस दूध पीऊँगा”

साथ ही ज़ाहिद ने अपने मुँह आगे बढ़ाया और अपनी बहन के मोटे मम्मो कर लंबे निपल्स को अपने मुँह में भर कर मज़े और मस्ती से चूसने लगा.

शाज़िया भी अपने भाई के इस वलिहाना प्यार को देख कर गरम होती गई. और वो अपने भाई के सर पर अपना हाथ रख कर अपने भाई के बालों में अपने हाथ की उंगलियाँ फैरने लगी.

“शाज़िया जल्दी से अपनी शलवार उतारो, मैं अपने लंड का मज़ीद पानी तुम्हारी चूत में डालना चाहता हूँ,ताकि हमारा होने वाला बच्चा सेहत मंद हो मेरी जान” ज़ाहिद ने अपनी बहन के मोटे मम्मो को चुसते हुए शाज़िया की शलवार के नाडे को पकड़ कर खोलने की कॉसिश करते हुए कहा.

“आप कहते हैं तो में अपने कपड़े उतार देती हूँ,मगर साथ ही साथ आप की इतला के लिए अर्ज़ है कि आज ही नही बल्कि तकरीबन एक महीने तक आप मेरी चूत में अपना लंड नही डाल सकेंगे भाईईईईईईईई”शाज़िया ने अपने जिस्म से खेलते हुए भाई पर हैरत का प्रहार गिराते हुए उस से कहा.

“क्िऊऊओन्न्नाणणन् जी ये क्या बतत्तटटटटटतत्त हुई भलाआआआआआ” ज़ाहिद ने एक दम चोंक कर शाज़िया के मम्मे से अपना मुँह हटाया और हेरान होते हुए उस से पूछा.

“वो असल में डॉक्टर बता रही थी, कि 30 साल की उम्र से उपर की औरतों को हमाल ठहराने के बाद कुछ टाइम अहतियात करना पड़ती है,और आप जानते हैं कि मेरी उम्र अब तकरीबन 32 साल है,इसी लिए डॉक्टर ने कहा है कि में अपने शोहर से एक महीना परहेज करूँ” शाज़िया ने अपने भाई ज़ाहिद के दिल और लंड पर बिजली गिराते हुए बताया.

अपनी बहन शाज़िया के साथ मनाई जाने वाली अपनी सुहाग रात की चुदाई के बाद तो ज़ाहिद को अपनी बहन शाज़िया की चूत की इतनी आदत हो गई थी. कि वो रात दिन अपनी बहन की चूत में अपना लंड डाल कर ही पड़ा रहता था.

 
Rohit Kapoor wrote: ↑ 22 Jun 2017 17:32
शानदार अपडेट।

जारी रखे, आगे की प्रतीक्षा में
 
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