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वतन तेरे हम लाडले complete

कर्नल इरफ़ान को जैसे ही पता चला कि मेजर राज उसकी सुरक्षा को नाकाम कर वहां से फरार हो गया है तो उसने हर छोटे बड़े लॉरी अड्डे, रेलवे स्टेशन, पुलिस चौकी और जामनगर से मिलने वाले सभी शहरी मार्गों परसीक्योरटी हाई अलर्ट कर दिया था ।

पुलिस तक यह खबर पहुंचाई गई थी कि एक बड़ा आतंकवादी जो इस्लामाबाद में बम विस्फोट करने की साजिश कर रहा है जामनगर में मौजूद है और उसको ढूंढने वाले को 10 लाख रुपये इनाम दिया जाएगा। भुट्टो सोसायटी के 3 किलोमीटर के दायरे में हर तरफ पुलिस मौजूद थी और उनके पास मेजर राज की तस्वीरे भी मौजूद थीं। मेजर राज के लिए किसी भी मामले यहाँ से निकलना संभव नहीं था।

मेजर राज भी इस बात से अच्छी तरह बाख़बर था कि अब तक हर तरफ पुलिस और आईएसआई के एजेंटस मेजर राज को ढूंढ रहे होंगे। वह इसी बारे में सोच रहा था और यही बात सोचते हुए उसने अमजद को संबोधित करके पूछा कि हम कहाँ जा रहे हैं ?? तो अमजद ने बताया जामनगर शहर में प्रवेश करेंगे और वहाँ एक छोटी स्लम में हमारा सहारा है वहां जाएंगे। मेजर राज ने अमजद से कहा कि हमारा शहर में जाना ठीक नहीं मुझे हर तरफ पुलिस ढूंढ रही होगी और शहर में प्रवेश के सभी रास्तों पर पुलिस मौजूद होगी। मेजर की यह बात सुनकर अमजद मुस्कुराया और बोला कि हम भी कच्ची गोलियां नहीं खेलते हैं, आप चिंता न करें। मगर मेजर राज कैसे चिंता न करता, उसको अच्छी तरह मालूम था कि कर्नल इरफ़ान हर संभव प्रयास करेगा उसको फिर से पकड़ने की। और अगर इस बार मेजर राज पकड़ा गया तो उसका बचना संभव नहीं होगा।

मेजर राज अब इसी सोच में गुम था कि अचानक ही अमजद ने गाड़ी सड़क से कच्चे रास्ते पर उतार ली। मेजर राज ने अमजद से पूछा कि कच्चे रास्ते पर क्यों कार उतारी है तो अमजद के बजाय समीरा ने कहा कि अब शहर यहां से पास ही है और 3 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस का नाका होगा। इसलिए कुछ ज़रूरी काम करना है शहर में प्रवेश करने से पहले। कुछ दूर जाकर अमजद ने वीराने में कच्चे मिट्टी के घर के पास गाड़ी रोक ली तो सब लोग गाड़ी से उतर गए। मेजर राज भी कार से नीचे उतर आया और इस जगह की समीक्षा लेने लगा इतने में समीरा उसके पास आई और उसको एक सफेद रंग की सलवार कमीज पहनने को दी, मेजर के कपड़े बहुत गंदे थे वह काफी दिनों से जेल में था। राणा काशफ और मेजर राज का स्वास्थ्य थोड़ा एक जैसी ही था इसलिए समीरा ने कार की डिग्गी से राणा काशफ का एक सूट निकालकर मेजर राज को दिया। उसकी सिलाई इंडियन सलवार कमीज की तर्ज पर थी। मेजर राज ने एक दीवार की ओट में जाकर कपड़े चेंज कर लिए और जब वापस आया तो उसने देखा कि सब लोग ही सलवार कमीज पहन चुके हैं सिवाय समीरा के जो अब तक लाल रंग का वही पहने हुए थी। उसके बाद सरमद आगे बढ़ा और मेजर राज के चेहरे पर हल्का मेकअप करने लगा, नकली मूंछें लगाई गईं जो किसी पहलवान की मूंछें मालूम हो रही थीं, उसके अलावा उसके चेहरे पर हल्के हल्के दाने बना दिए गए जिससे वह अब बिल्कुल भी पहचान में नहीं आ रहा था।

फिर समीरा ने आगे बढ़कर मेजर एक कार्ड पकड़ाया, यह एक पुलिस वाले का कार्ड था। कार्ड पर इंस्पेक्टर संराज ठाकुर का नाम दर्ज था समीरा ने बताया कि अब वह एक पुलिस वाला है मगर सिविल कपड़ों में , जबकि समीरा ने सीआईडी इंस्पेक्टर सोनिया कपूर का कार्ड पर्स में रखा और इसी तरह राणा काशफ, अमजद और सरमद के पास भी पुलिस वालों के कार्ड मौजूद थे। इस सारी तैयारी के बाद सब लोग फिर से कार में बैठे और कच्चे रास्ते पर आगे चलते हुए एक राज मार्ग पर चढ़ गए। 5 मिनट की यात्रा के बाद मेजर राज को कुछ दूर वाहन दिखाई दिए , करीब जाने पर पता चला कि यह पुलिस का नाका है। अमजद ने नाके पर पहुंचकर गाड़ी रोक दी, अमजद ने दाढ़ी तो असली ही रखी हुई थी मगर अब उसके सिर पर फिर से पठान वाली पगड़ी मौजूद थी।

नाके पर गाड़ी रोककर अमजद खुद उतर गया जबकि दूसरी ओर सोनिया कपूर यानी कि समीरा भी नीचे उतर गई नाके पर खड़ा एक पुलिस वाला भागता हुआ उनकी कार के पास आया और चिल्लाता हुआ बोला तुम दोनों वापस कार में बैठो, जब तक निकलने को न कहा जाए बाहर नहीं निकलना, सभी वाहनों की तलाशी होगी। हम एक आतंकवादी की खोज कर रहे हैं। इस दौरान वह पुलिस वाला अमजद के बिल्कुल करीब पहुंच गया जबकि उसकी नजरें समीरा के सूट में नजर आने वाले शरीर पर थीं। अमजद ने जेब से एक कार्ड निकाला और अपना परिचय करवाया, समीरा ने भी अपने पर्स से कार्ड निकाल कर अपना परिचय करवाया तो पुलिस वाले ने अमजद को सलयूट मारा और बोला आप जा सकते हैं सर मगर अमजद ने जाने की बजाय उससे पूछा कि अब तक कोई संदिग्ध नजर आया ??? इस पर पुलिस वाला बोला सर हम हर कार की तलाशी कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ऐसा व्यक्ति नजर नहीं आया। अमजद ने पुलिस को समझाते हुए कहा देखो अपना काम बहुत ध्यान से करो, किसी भी वाहन को छोड़ना नहीं चाहे कितना ही बड़ा आदमी क्यों न हो। और ध्यान रखना, हो सकता है वह आतंकवादी हमारी पुलिस की ही वर्दी में यहां से भागने की कोशिश करे। इसलिए कोई पुलिस वाला वाहन भी आए तो उसको भी अच्छी तरह जाँच करना। उनके कार्ड की ज़रूर जाँच करना। आईएसआई हर तरफ सादे कपड़ों में जा रही है इसी तरह पुलिस की खुफिया टीमें भी सादे कपड़ों में निगरानी कर रही है अगर कोई वर्दी में अकेला व्यक्ति दिखे तो उसे छोड़ना मत। उसकी अच्छी तरह से तलाशी लेना। वह आतंकवादी बहुत चालाक है वह निश्चित रूप से पुलिस वाला बनकर निकलने की कोशिश करेगा

अमजद की बात पूरी हुई तो पुलिस वाले ने मुस्तैदी दिखाते हुए अमजद को सलयूट और राइट कहता कहता वापस अन्य वाहनों के पास जाकर तलाशी लेने लगा जबकि समीरा और अमजद वापस अपनी अपनी सीट पर बैठ गए और अमजद ने पुलिस नाके से कार गुजार ली। नाके से गुजरने के बाद मेजर राज ने मुस्कुराते हुए अमजद पूछा यह क्या नाटक था ??? तो अमजद मुस्कुराया और कहा यहां की पुलिस और भारत की पुलिस समझो एक ही समान है। किसी काम की नहीं। खुद पुलिस वाला बन कर उसको कह रहा हूँ कि आतंकवादी पुलिस वाला बनकर निकलने की कोशिश करेगा तो किसी पुलिस वाले की कार भी बिना तलाशी जाने न दे और इस पागल ने हमारी ही कार बिना तलाशी जाने दिया। अब पीछे आने वाली पुलिस वाहनों की ज़रूर जाँच करेगा हालांकि वह वास्तव में पुलिस की गाड़ियाँ होंगी। यह कह कर कार में मौजूद सभी लोग हंसने लगे।

कर्नल इरफ़ान खुद अपने जेल में मौजूद था। उसके साथ आईटी विशेषज्ञ, चिकित्सक और उंगलियों के निशान की टीम भी मौजूद थी। गलियारे का दरवाजा खोलकर कर्नल इरफ़ान जैसे ही अंदर दाखिल हुआ तो उसे सामने ही एजेंट की लाश मिली जिसका शरीर 2 भागों में विभाजित हो चुका था। शव से खून बह कर दरवाजे तक पहुंचा हुआ था जबकि उसका चेहरा पहचानने योग्य था। उसके साथ उसके शरीर पर यातना के निशानों को भी स्पष्ट देखा जा सकता है। कर्नल इरफ़ान के साथ उसकी टीम ने भी गलियारे में प्रवेश किया। सुरक्षा प्रणाली को डी सक्रिय कर दिया गया था तो कोई कैमरा अबकी बार ऑनलाइन नहीं हुआ। साथ मौजूद डॉक्टर एजेंट के शव का निरीक्षण करने लगे जबकि कर्नल इरफ़ान गलियारे में मौजूद कंट्रोल रूम में गया जहां कैप्टन सोनिया का शव मौजूद था उसकी लाश को कपड़े से ढक दिया गया था। मेजर राज ने कपड़ा उठा कर देखा तो कैप्टन सोनिया का शरीर पूरा नंगा था, उसके नग्न शरीर को देखकर कर्नल इरफ़ान मुंह ही मुंह में बड़बड़ाया "जिसने अपने शरीर का उपयोग करके अपने कई दुश्मनों को नीचा कर दिया था आज वही शरीर तुम्हारी जान ले गया। " यह कह कर वह फिर से चादर कैप्टन सोनिया के शरीर पर डाल दी और दूसरे एजेंट के शव को देखने लगा। उसके शरीर पर यातना के निशान नहीं थे लेकिन उसकी गर्दन मोड़ कर मारा गया था।

डॉक्टरों ने सभी शवों का पोस्टमार्टम शुरू कर दिया था मगर कर्नल इरफ़ान को इससे कोई सरोकार नहीं था, वह देखते ही समझ गया था कि किस की मौत कैसे हुई। फिर आईटी टीम की मदद से कर्नल इरफ़ान ने कैमरा रिकॉर्डिंग निकलवाई, कर्नल देखना चाहता था कि मेजर राज जोकि लोहे की राड के साथ जकड़ा हुआ था तो उसने अपने आप को मुक्त कैसे करवाया। और जब कर्नल ने देखा कि कैप्टन सोनिया कैसे मेजर राज के लंड के लिए बेताब हो रही थी और ज़्यादा जोरदार धक्के लगवाने के लिए कैप्टन सोनिया ने खुद ही मेजर राज के पैरों को खोला था और बाद में मेजर राज ने कूद लगाकर कैप्टन सोनिया को जीवन की कैद से मुक्त करवा दिया था। उसके बाद गलियारे से निकलते हुए जैसे मेजर राज ने अपना चेहरा छुपाया और कैप्टन सोनिया का चेहरा कैमरे के सामने किया तो एजेंट वन और टू की मौत और मेजर राज का भाग कर सुरक्षा गेट तक जाना और वहां सुरक्षा अधिकारी की गर्दन पर चाकू रख कर गेट खुलवाना, सब कुछ कर्नल इरफ़ान ने बिल्डिंग में लगे कैमरों की मदद से देख लिया था।

कर्नल इरफ़ान जो कैप्टन सोनिया की क्षमताओं की हमेशा प्रशंसा करता रहा था आज कर्नल को सोनिया पर बेहद गुस्सा आ रहा था वह गुस्से में फिर बड़बड़ाने लगा कि पहले अपनी चूत से दूसरों की मौत मौत का समान तैयार करती थी मगर आज अपनी चूत की खुजली मिटाने के चक्कर में खुद मौत को दावत दे बैठी फिर कर्नल ने सुरक्षा कर्मी को बुलाया जिसने मेजर राज के लिए गेट खोला था। जैसे ही वे सुरक्षा अधिकारी कर्नल इरफ़ान के सामने आया कर्नल ने बिना कोई बात कहे जेब से बंदूक निकाली और उसके सिर में 3 गोलियां उतार दी और वह अधिकारी लहराता हुआ जमीन पर आ गिरा इन सभी वीडियो को देखकर कर्नल इरफ़ान समझ गया था कि मेजर राज कोई साधारण एजेंट नहीं बल्कि वह रॉ का विशेष एजेंट है और उसे पकड़ने के लिए कर्नल इरफ़ान को ही इस मिशन का नेतृत्व करना चाहिए।

अंत में कर्नल इरफ़ान ने मेन गेट के बाहर लगे कैमरे की वीडियो देखना शुरू किया, 15 मिनट के वीडियो में मेजर राज के निकलने के बाद वीरानी के अलावा कर्नल को कुछ नजर नहीं आया जैसे ही कर्नल इरफ़ान इस वीडियो को बंद करने लगा अचानक मेजर को वीडियो में एक साया नजर आया जिसने कर्नल को वीडियो बंद करने से रोक दिया। छाया एक स्थान पर रुका हुआ था उसका मतलब था कि जिस भी व्यक्ति की साया है वह मेन गेट के पास ही खड़ा है और कैमरा रेंज से अपने आप को बचा कर खड़ा है मगर उसकी परछाई को कैमरे ने पकड़ लिया था। कर्नल इरफ़ान वीडियो ध्यानपूर्वक देख रहा था, कुछ देर के बाद साया अपनी जगह से हिला तो कर्नल इरफ़ान ने साये से अनुमान लगा लिया कि यह किसी लड़की का साया है क्योंकि इसमें साया लंबे बाल मे दिख रहा था। अब कर्नल इरफ़ान और भी जिज्ञासा के साथ वीडियो देखने लगा। कुछ देर के बाद वह छाया अपनी जगह से पीछे की ओर जाने लगी और फिर गायब हो गई .

कर्नल इरफ़ान अभी भी वीडियो को ध्यानपूर्वक देख रहा था अचानक कर्नल इरफ़ान ने देखा कि कैमरे में एक कार बहुत गति के साथ गुज़री है। कर्नल इरफ़ान ने वीडियो रीवायंड किया और फिर से देखा मगर पहचान नहीं पाया। फिर कर्नल ने आईटी टीम की मदद ली और उन्हें कहा कि वह इस वीडियो का सबसे अच्छा फ्रेम निकालें जिसमें कार में मौजूद लोगों का अनुमान लगाया जा सके और अगर उनकी आकृति भी नजर आ जाए तो सबसे बेहतर होगा।

आईटी टीम ने कुछ ही मिनट में वीडियो के इस हिस्से के अनगिनत फ्रेम्स बना लिए और फिर उसमें से 20 ऐसे फ्रेम निकाले जिसमें कार बहुत स्पष्ट दिख रही थी, मगर कार ड्राइविंग सीट का शीशा बंद था और वहां से धूप रीफलैक्ट रही थी जिसकी वजह से सुरक्षा कैमरा चालक को तो सही तरह सुरक्षित नहीं कर पाया मगर इन फ्रेम्स से कर्नल इरफ़ान को इतना पता चल गया था कि गाड़ी ड्राइव करने वाली लड़की है जिसने लाल रंग का लिबास पहन रखा है।

कर्नल इरफ़ान ने बाकी फ्रेम्स भी देखे मगर किसी भी फ्रेम में लड़की की शक्ल स्पष्ट नहीं थी लेकिन कुछ फ्रेम्स ऐसे थे जिसमें कार का नंबर देखा जा सकता था। और साथ ही साथ कार का मॉडल भी पहचान लिया था। कर्नल इरफ़ान ने तुरंत ही सभी पुलिस टीम को कार का नंबर मॉडल और कलर बता दिया और शहर में प्रवेश करने वाले सभी रास्तों पर लगे सुरक्षा कैमरों की जाँच का भी आदेश दिया ताकि वे देख सकें किस कार ने शहर में कब और किस समय प्रवेश किया और कार में कौन मौजूद था। कर्नल इरफ़ान ने आईएसआई को भी टास्क दिया कि शहर में मौजूद बैंक और अन्य शॉपिंग प्लाजा या दूसरी बिल्डिंग में लगे कैमरों के डेटाबेस को भी चेक किया जाय किसी न किसी कैमरे से तो इस कार के बारे में पता चल ही जाएगा ।

उसके साथ साथ कर्नल इरफ़ान ने अपने साथ आईटी टीम को यह कार्य भी दे दिया कि वे पता लगाएं कि इस बिल्डिंग में जितने भी सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे उनके पास मोबाइल थे या नहीं और जिनके मोबाइलज़ पर कॉल आईं उनके नंबर को ट्रेस किया और जिन नंबर से कॉल आई उनको भी ट्रेस किया जाए ताकि पता लगाया जा सके कि सुरक्षा व्यवस्था में तो कोई शामिल नहीं था जिसने मेजर राज को यहां से निकलने में मदद की हो या बाहर आने वाली लड़की जिसका मात्र छाया नजर आ सकी थी उसका एक सुरक्षा अधिकारी से संपर्क रहा हो।

अमजद ने अब गाड़ी एक कच्ची सड़क पर उतार दी थी तो ऐसा मालूम हो रहा था कि अब उनका रुख किसी गांव की ओर है। इस दौरान पीछे बैठे मेजर राज की आंख भी लग गई थी क्योंकि जब वह कैद हुआ था या तो बेहोश रहता था या फिर होश में आकर अपनी रिहाई के तरीके सोचता रहता था। मानसिक रूप से वह काफी थक चुका था इसलिये इसे जल्दी ही नींद आ गई। कच्ची सड़क पर जब वाहन को कुछ झटके लगे तो मेजर राज की आंख खुली थी। उसने अमजद से पूछा कि हम कहाँ पहुँच गए हैं तो उसने बताया कि बस कुछ ही देर में हमारा ठिकाना आ जाएगा जो आबादी से कुछ दूर है। यह सुनकर राज चुपचाप बैठ गया। रात का समय था कार से बाहर कुछ खास नजर नहीं आ रहा था सिर्फ अंधेरे का राज था। लेकिन इतना जरूर पता लग रहा था कि उनके आस पास या तो कुछ फसलें हैं या फिर खेत आदि हैं, जिनमें कोई फसल नहीं होगी।

कुछ ही देर के बाद मेजर को दूर एक घर दिखने लगा जिसमें हल्की हल्की रोशनी थी। गाड़ी धीरे धीरे उसी घर की ओर जाने लगी और कुछ ही देर के बाद घर के सामने जाकर रुक गई। पहले समीरा गाड़ी से उतरी और उसने जल्दी से दरवाजा खोला और अंदर चली गई उसके बाद बाकी लोग भी उतरे और मेजर राज भी राणा काशफ और सरमद के साथ अंदर चला गया जबकि अमजद कार पार्क करने के लिए साथ ही एक खाली प्लाट से ले गया। यह एक छोटा सा घर था जिसके अंदर कमरे एक रसोई और शौचालय था। इस घर से कुछ आगे कुछ अधिक घर थे और देखने में यह कोई छोटा सा गांव या कस्बे जैसा लगता था जहां थोड़े थोड़े दूरी पर एक साथ 5, 6 घर मौजूद थे।

अंदर जाकर मेजर राज सरमद और राणा काशफ के पीछे चलता हुआ एक कमरे में जाकर बैठ गया। कमरे में दीवारों पर कुछ आधुनिक प्रकार के हथियार मौजूद था और कुछ नक्शे आदि लगे हुए थे। मेजर राज एक नक्शे को ध्यानपूर्वक देखने लगा तो यह इस्लामाबाद का नक्शा था। अब मेजर राज नक्शे को देख ही रहा था कि एक लड़की अंदर दाखिल हुई। सलवार कमीज पहने सिर पर दुपट्टा लपेटे और गले को अपने लंबे दुपट्टे से अच्छी तरह कवर कर लड़की बेझिझक अंदर प्रवेश कर गई। उसके हाथ में एक ट्रे थी जिसमे बड़े बड़े गिलास मौजूद थे। लड़की वह गिलास पहले सरमद और फिर राणा काशफ आगे लेकर गई और फिर अंत में मेजर राज के सामने आई। जब यह लड़की मेजर राज के पास आई और बोली कि आप भी एक गिलास उठा तो मेजर राज की हंसी निकल गई।

 
इस दुपट्टे में लिपटी लड़की कोई और नहीं बल्कि समीरा ही थी जिसने कुछ समय पहले हाफ बाजू वाला लाल सूट पहन रखा था जिसमें उसका शरीर बहुत स्पष्ट दिख रहा था और उसकी बाहें बहुत ही सेक्सी लग रही थी . समीरा ने गुस्से से मेजर को देखा और बोली इसमें हंसने वाली कौनसी बात है ??? मेजर राज ने हंसते हुए कहा अब कुछ देर पहले तुम क्या थी और अब क्या हो गई हो ??? यह कह कर वह फिर हंसने लगा और एक गिलास उठा लिया। राज को हंसता देख अब सरमद और राणा काशफ भी हंस रहे थे। मेजर राज ने ग्लास की तरफ देखा तो उसमें गरम दूध था जो समीरा ने घर आते ही चूल्हे पर गर्म किया था। राज ने एक घूंट दूध पिया तो उसको आराम मिला। काफी दिनों के बाद उसे कोई शक्ति प्रदान करने वाली खुराक मिली थी। मेजर ने 2 घूंट और भरे और पूरा गिलास खाली कर दिया। गर्म गर्म शुद्ध दूध ने कुछ ही मिनट में राज के शरीर को आराम पहुंचा दिया था। अब वह एक बार फिर समीरा की ओर देखकर मुस्कुराने लगा कि नीचे बिछी हुई चटाई पर आलती पालती मारे आराम से दूध पीने में व्यस्त थी।

उसको देखकर सरमद मुख़ातिब हुआ और बोला वास्तव में समीरा हमेशा ऐसे ही कपड़ों में रहती है यही हमारा पारंपरिक पोशाक है, लेकिन जब कभी किसी मिशन पर निकलना होता है तो मजबूरी के कारण ऐसे कपड़े भी पहनना पड़ जाते है जो यहाँ की संस्कृति के अनुसार होता है तो किसी को जल्दी शक न हो। अगर यह इसी ड्रेस में मिशन पर जाएगी तो बड़ी आसानी से पकड़ी जाएगी मगर अपने सेक्सी पोशाक की वजह से लोग उसको कोई मॉडर्न लड़की समझते हैं जिसका संबंध किसी बड़े घराने से होगा और इस पर किसी को आसानी से संदेह नहीं होता। मेजर राज अब समझ गया था कि ये तो वाकई मुजाहिदीन हैं और उन्हें मेजर जनरल सुभाष ने लक्ष्य दिया था कि मेजर राज को कर्नल इरफ़ान की कैद से निकलवाए समीरा ने जासूसी करने के लिए आगे जाना था इसीलिए उसने मॉर्डन सूट पहना ताकि वह अपने हुलिए आम सी लड़की लगे जो शायद रास्ता भूल कर इस घर में पहुंच गई है। मेजर राज ने इसी सोच में गुम समीरा को देखा तो वह खा जाने वाली नजरों से मेजर राज को घूर रही थी जो कुछ देर पहले समीरा पर हँस रहा था।

इतने में अमजद भी अंदर आ गया था और वह भी नीचे बिछी हुई चटाई पर बैठ गया और ट्रे में पड़ा हुआ अंतिम गिलास उठाकर एक ही सांस में सारा गिलास खाली कर गया। इससे पहले कि मेजर राज अमजद से आगे का प्लान पूछता उसे मोबाइल फोन की बेल सुनाई दी। मोबाइल फोन की घंटी बजी तो समीरा ने तुरन्त अपने पास पड़े महिलाओं के बैग से मोबाइल फोन निकाला और उस पर किसी से बात करने लगी। मोबाइल फोन देखकर मेजरराज की छठी इंद्री ने खतरे की घंटी बजा दी थी।

मेजर राज ने अमजद से पूछा कि यह मोबाइल किसका है? तो अमजद ने बताया समीरा का ही होता है लेकिन हम ने कभी उसको अपने कार्यों के लिए उपयोग नहीं किया, उसकी कुछ लड़कियां दोस्त बनी हुई हैं वही इस फोन पर बात करती हैं। मेजर ने समीरा को देखा तो वह बहुत हंसमुख मूड में अपने एक दोस्त से खुश गपियां लगाने में व्यस्त थी। मेजर ने नीचे पड़े बैग में देखा तो यह वही बैग था जो समीरा के हाथ में उस समय भी था जब उसने पहली बार समीरा को देखा था। अब की बार मेजर ने दोबारा अमजद से पूछा जब समीरा जेल के पास गई थी तो क्या तब भी उसके पास फोन मौजूद था तो अमजद बोला कि हां उसके पास हर समय फोन रहता है मगर खतरे की कोई बात नहीं हम कभी भी इस फोन को आईएसआइ या आज़ादकश्मीरी मुजाहिदीन के साथ संपर्क नही किया । । । । ।

अभी अमजद की बात पूरी नहीं हुई थी कि मेजर राज तुरंत समीरा की तरफ बढ़ा और उससे मोबाइल पकड़ कर दूसरी साइड पर मौजूद लड़की से मुखातिब होकर बोला अगर जान प्यारी है तो तुरंत इस सिम और मोबाइल को तोड़ कर फैंक दो और कुछ समय के लिए चिप जाओ, यह कह कर मेजर राज ने फोन बंद कर दिया और समीरा का हाथ पकड़कर उसे खींचता हुआ बाहर ले गया और बाकी लोगों को भी बाहर आने को कहा। मेजर राज समीरा को घसीटते हुए ले जा रहा था और समीरा गुस्से से मेजर को देख रही थी वह अपने आप को छुड़ाना चाहती थी मगर मेजर की पकड़ उसके हाथ पर बहुत मजबूत थी। अमजद और उसके साथी भी मेजर के पीछे आए जब वह कमरे से निकले तब तक मेजर समीरा को घसीटते हुए घर के मुख्य दरवाजे से बाहर ले गया था।

मोबाइल अब भी मेजर के हाथ में था। अमजद भागता हुआ आया और राज की तरफ गुस्से से देखते हुए बोला यह क्या हरकत है ?? मेजर ने उसकी बात का जवाब दिए बिना उसे बोला कि मुझे तुम लोगों से ऐसी मूर्खता की उम्मीद नहीं थी अपनी मौत का सामान साथ लिए घूम रहे हो तुम लोग। अब चलो तुरंत गाड़ी में बैठो और इधर से निकलो वर्ना कर्नल इरफ़ान के आदमी किसी भी समय यहां पहुंच कर हम सब का कीमा बना देंगे। अमजद उसकी बात सुनकर गाड़ी की ओर जाने लगा तो मेजर राज भी उसके पीछे हो लिया उसने अब तक समीरा का हाथ नहीं छोड़ा था और समीरा चिल्ला रही थी कि मैं आ रही हूँ छोड़ो मेरा हाथ मगर मेजर मानो उसकी बात ही नहीं सुन रहा था।

अमजद ने कार का दरवाजा खोला और ड्राइविंग सीट पर बैठ गया, मेजर राज ने पिछला दरवाजा खोला और समीरा को अंदर धक्का दिया और खुद भी समीरा के साथ बैठ गया, समीरा ने गुस्से से भरे हुए स्वर में कहा तुम्हें समस्या क्या है मैं अपने दोस्त से बात कर रही थी किसी जासूस से नहीं। मेजर राज ने समीरा को गुस्से से देखा और बोला अपनी बकवास बंद करो और चुपचाप बैठी रहो। इतनी देर में राणा काशफ कार की फ्रंट सीट पर बैठ चुका था जबकि सरमद दूसरी ओर से आकर पिछली सीट पर समीरा के साथ बैठ गया था। अमजद ने गाड़ी स्टार्ट की और बोला कहाँ चलना है, मेजर ने कहा जिधर ये रोड जा रहा है इसी तरफ चलो तो अमजद ने गियर लगाया और कार रात के सन्नाटे में शोर करती हुई चल पड़ी। अब कोई एक किलोमीटर ही गाड़ी आगे गई होगी कि मेजर राज ने पिछले दरवाजे का शीशा खोला और मोबाइल सड़क से दूर फेंक दिया। इसके बाद मेजर राज ने अमजद को कहा अब कार वापस मोड़ लो और जिधर से हम आए हैं उसी ओर ले चलो।

अमजद ने बिना कोई सवाल किए कार वापस मोड़ ली, वह जानता था कि मेजर राज रॉ में है निश्चित रूप से उनसे कोई गलती हुई है जिसका मेजर को पता लग गया है तो उस समय उसकी बात मानने में ही बुद्धिमानी है। अब गाड़ी फुल स्पीड में उसी रास्ते से वापस जा रही थी जिसमें कच्चे रास्ते से ये लोग अपने ठिकाने पर पहुंचे थे। मेजर राज ने अब अमजद को कहा कार की हेड लाइट पूर्ण रूप से बंद कर दो। कोई भी लाइट जलनी नहीं चाहिए। अमजद ने कहा इस तरह ड्राइविंग करना बहुत मुश्किल होगा कच्ची सड़क है कार सड़क से नीचे उतर गई तो खेतों में चली जाएगी। मगर मेजर राज ने कहा जैसा कि रहा हूँ वैसा ही करो। अमजद ने अब बिना कोई सवाल किए कार की रोशनी बंद कर दीं और गति भी स्लो करके बहुत सावधानी के साथ ड्राइव करने लगा।

कुछ देर होने के बाद मेजर राज ने अमजद को गाड़ी रोकने को कहा और जैसे ही अमजद ने गाड़ी रोकी मेजर राज गाड़ी से उतरा और अमजद को भी उतरने को बोला, अमजद कार से बाहर आया तो मेजर कार की ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और अमजद को पिछली सीट पर समीरा के साथ बैठने को कहा। कार में बैठते ही मेजर ने गियर लगाया और कार फिर से उसी कच्ची सड़क पर चलने लगी। लेकिन अब की बार कार की गति पहले की तुलना में बहुत तेज थी। जबकि कि मेजर राज इन मार्गों से परिचित नहीं था मगर उसको अंधेरे में ड्राइविंग की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी, उसकी नजरें रोड पर थीं और वह काफी आगे होकर बैठा पूरे ध्यान के साथ रोड को देख रहा था और कार लगातार कच्चे रास्ते से तेजी के साथ मुख्य सड़क की ओर बढ़ रही थी।

अमजद मेजर राज को अनजान रोड पर इस कौशल के साथ अंधेरे में गाड़ी चलाते देख कर हैरान हो रहा था, अमजद जो पिछले 1 साल से इस क्षेत्र में रह रहा था और कच्चे रोड से परिचित था वह भी अंधेरे में इतनी स्पीड के साथ ड्राइव की हिम्मत नहीं कर सकता था जिस गति से मेजर राज कार चला रहा था। अचानक ही मेजर राज ने स्टेअरिंग मोड़ा और कार कच्चे रोड से उतरकर रोड साइड पर लगे पेड़ों में से होती हुई एक मैदान में उतर गई जहां कुछ झाड़ियां मौजूद थीं। यहां पहुंचकर मेजर राज ने कार का इंजन बंद कर दिया। अमजद ने पूछा क्या हुआ कार सड़क से नीचे क्यों उतारी तो मेजर राज ने दूसरी तरफ इशारा किया जहां धीरे धीरे प्रकाश बढ़ रहा था आगे सड़क मुड़ रही थी और उसी मोड़ से प्रकाश आगे बढ़ रहा था

कुछ ही देर बाद वहां से वाहनों की एक लंबी कतार गुजरने लगी, उसमें कुछ पुलिस वाहन जबकि सबसे आगे सेना की जीप थी जिसमें पाकिस्तानी सेना के जवान अपनी बंदूकें संभाले चौकन्ने बैठे थे और पुलिस वाले भी हथियारों से लैस थे ।

यह करीब 10 गाड़ियां थीं जो तूफानी गति से उसी तरफ जा रही थीं जहां कुछ देर पहले मेजर राज और बाकी लोग दूध पी रहे थे। जब यह वाहन गुजर गये तो फिर मेजर राज ने कार स्टार्ट की और फिर सड़क पर चढ़ाकर मेन रोड की तरफ जाने लगा, लेकिन इस बार उसकी कार की रोशनी ऑनलाइन थीं और गति पहले से डबल थी।

पुलिस और सेना के वाहन देखकर अमजद और उसके साथी इतना तो समझ ही गए थे कि यह बल उन्हीं का पीछा करते करते यहां तक पहुँचा है मगर वह समझ नहीं पाया था कि आखिर वह यहां तक कैसे पहुंचे ... अब की बार अमजद ने मेजर राज से पूछा क्या वह इस मोबाइल फोन के माध्यम से हम तक पहुँचे है ??? मेजर राज ने कहा हां बस मोबाइल फोन से हमारे ठिकाने का पता लगा उन्हें। और अगर समीरा की दोस्त का फोन न आता और मुझे पता ही नहीं लगता कि यहां हमारे पास एक फोन भी मौजूद है तो अब तक हम उनकी गोलियों से भुन चुके होते। अमजद ने फिर पूछा कि लेकिन यह कैसे संभव है जबकि हमने इस फोन से कभी किसी सुरक्षा एजेंसी से संपर्क नही किया और न ही भारत में किसी से संपर्क किया यह तो महज समीरा अपनी दोस्तों से बात करने के लिए इस्तेमाल करती है तो फोन पर कैसे किसी को शक हो सकता है। ??

मेजर राज ने मिरर से एक बार अमजद और फिर समीरा को देखा और बोला कि जब समीरा जेल के पास गई तो उस समय निश्चित रूप से उसका मोबाइल ऑनलाइन था। और कर्नल इरफ़ान आसानी से टेलीकॉम कंपनियों से यह डेटा ले सकता है कि जब मैं वहाँ से भागा इस समय इस क्षेत्र में कौन कौन से मोबाइल नंबर ऑनलाइन थे। और कोई भी खुफिया एजेंसी का आदमी पहले यही बात सोचेगा कि अंदर मौजूद कोई न कोई सुरक्षा अधिकारी बाहर वालों से संपर्क में था तो वह तुरंत फोन रिकॉर्ड भी जाँच करेगा और वहां मौजूद सभी फोन नंबर की जानकारी भी निकलवाई है।

जैसे ही कर्नल इरफ़ान ने यह जानकारी ली होगी तो उसमें समीरा का नंबर भी आया होगा और यह फोन ठीक उसी समय इस क्षेत्र में मौजूद था जब मुझे उस जेल से निकले कुछ ही मिनट ही हुए थे। इसलिए कर्नल इरफ़ान तुरंत समझ गया होगा कि यह मेजर राज के एक साथी का फोन है। और फिर कर्नल इरफ़ान बड़ी आसानी से इस फोन की वर्तमान लोकेशन पता करवा सकता है इसके अलावा यह फोन पहले किस लोकेशन पर इस्तेमाल हुआ वह सारी जानकारी भी कर्नल इरफ़ान निकाल चुका होगा। इसलिए अब किसी भी ऐसे ठिकाने पर जाने की कोशिश न करना जहां तुम लोग पहले रह चुके हैं। इन सभी लोकेशनज़ के बारे में कर्नल इरफ़ान को पता हो चुका होगा और वहां वह अपनी सेना भेज चुका होगा। लेकिन हमारी वर्तमान लोकेशन यही घर था इसीलिए उसने पहले ही लोकेशन पर अपनी सेना भेजी है हमारा सफाया करवाने के लिए।

मेजर की बात पूरी होने पर अमजद ने एक लंबी हूँ हूँ हूँ हूँ ........ और फिर चुपचाप बैठ गया। अब मेन रोड आ चुका था और कार पूर्व की ओर मेन रोड पर 120 गति से जा रही थी। कुछ ही देर में एक पेट्रोल पंप पर मेजर राज ने गाड़ी रोकी और अमजद से पूछा कि उसके पास पाकिस्तानी मुद्रा मौजूद है ??? तो अमजद ने कहा हां पैसों की कोई समस्या नहीं यहाँ हमारे पास पाकिस्तानी मुद्रा ही होती है। अमजद की बात सुनकर मेजर ने एक पंप के साथ कार लगाई और पंप वाले को टैंक फुल करने को कहा। इसके साथ ही उसने अमजद को नीचे उतरने के लिए कहा और पंप पर मौजूद एक दुकान में चला गया जहां से वो खाने-पीने का सामान आदि लेने लगा।

अमजद इस समय पठान के हुलिए में था और दुकान पर बैठा आदमी भी पठान था। दोनों ने एक दूसरे को सलाम कहा। और आपस में बातें करने लगे, जबकि मेजर राज जरूरी सामान लेने में व्यस्त था।इतने में वहां मौजूद टीवी पर एक ब्रेकिंग न्यूज चली जिसमें बताया जा रहा था कि पाकिस्तानी सेना ने जामनगर में बेदी रोड पर मौजूद आतंकवादियों के ठिकाने पर हमला किया है। वहां से आतंकवादी भाग निकले लेकिन उनके ठिकाने से हथियार, लाहोर, इस्लामाबाद और पाकिस्तान के अन्य बड़े शहरों के नक्शे बरामद हुए हैं। यह खबर चली तो अमजद ने टेढ़ी नजरों से मेजर राज को देखा तो उसने आँखों ही आँखों में इशारा किया शुक्र करो हम बच गए हैं। ।

मगर इससे अगली खबर और भी खतरनाक थी टीवी पर अब एक नीले रंग की कार की हल्की सी झलक दिखा रहे थे कार में मौजूद लोग तो नज़र नहीं आ रहे थे मगर समाचार कास्टर बता रही थी कि एक नीले रंग की कार जिसकी नंबर प्लेट जाली है आतंकवादियों के उपयोग में है और कुछ समय पहले इस कार पर टी एन 59, ए क्यू 1515 की नंबर प्लेट लगी हुई थी और कार में कम से कम 3 आतंकवादी मौजूद हैं जिनमें एक लड़की भी शामिल है। यह खबर चली तो मेजर राज तुरंत अमजद के पास आया और जितना माल वह उठा चुका था उसकी पेमेंट करने को कहा। अमजद ने तुरंत जेब से कुछ नोट निकाले और दुकानदार को दिए वो अभी बिल बना रहा था और साथ ही कह रहा था आतंकवाद से सभी परेशान हैं उसकी बात सुनकर अमजद ने कहा बस पैसे दी खेड है पूरे। पैसे दे पिछे गलत कम करदे ने कद्दू ते दुश्मन ते कहे ते चलदे ने।

अमजद आवाज मे स्पष्ट घबराहट मौजूद थी क्योंकि वो अब तक इसी कार में सवार थे जिसका नंबर अभी टीवी पर बताया गया था और कार में समीरा भी मौजूद थी। मगर अच्छी बात यह थी कि इस दुकान और कार के बीच में पंप मौजूद था इसलिये कार स्पष्ट नजर नही आ रही थी और उसका नंबर भी स्पष्ट नहीं था। इस बात को मेजर राज ने पहले ही देख लिया था इसलिए उसके चेहरे पर आतंक के आसार नहीं थे मगर उसको यहां से निकलने की जल्दी जरूर थी। खबरों में कहा जा रहा था कि आतंकवादी अपना ठिकाना छोड़कर सेखु रोड से सेखु बंदरगाह की तरफ गए हैं और रास्ते में उनका मोबाइल भी मिला है।

 


यह खबर सुनते ही मेजर राज को थोड़ा संतोष हुआ क्योंकि यहां भी उसके शातिर दिमाग ने कर्नल इरफ़ान को गलत रास्ते से भेज दिया था। अपने ठिकाने से आगे जिन्ना रोड से कार ले जाकर रास्ते में मोबाइल फेंका और फिर वापसी का उद्देश्य मेजर राज का यही था कि जब कर्नल इरफ़ान के लोग यहां पहुंचेंगे तो यही अनुमान लगाएंगे कि मेजर राज अपने साथियों के साथ ही मार्ग पर आगे है और चलती गाड़ी से अपना मोबाइल यहाँ फेंक दिया। जबकि मेजर राज ने मोबाइल फेंकने के बाद वापसी की यात्रा की थी और अब वह जिन्ना रोड और जिन्ना बंदरगाह से दूर राज मार्ग नंबर 6 पर गैस स्टेशन पर खड़ा था। मेजर राज दिमाग़ से काम कर रहा था और उसे थोड़ा समय मिल गया था आगे का प्लान करने के लिए। मगर वह जानता था कि कर्नल इरफ़ान जल्द ही दोबारा उसका पता लगा लेगा तो सबसे पहले इस कार से पीछा छुड़ाना था।

पैसे देने के बाद मेजर राज और अमजद जल्दी से वापस कार में आए पंप वाले को भी पेट्रोल के पैसे दिए और अबकी बार मेजर राज पीछली सीट पर बैठ गया और अमजद ड्राइव करने लगा। कार में बैठ कर मेजर राज ने पहले सरमद काशफ और समीरा को ताजा खबर सुनाई कि उनके पहले ठिकाने पर सेना ने हमला कर दिया और हथियार आदि कब्जे में ले लिए हैं, उसके साथ साथ उनको हमारी कार और उस पर लगी नंबर प्लेट का भी पता चल चुका है और वे यह भी जानते हैं कि हमारे साथ एक लड़की भी है।

यह खबर सुनाने के बाद मेजर राज ने अमजद को देखा जो कार ड्राइव कर रहा था और उससे पूछा कि अब हम कहां जा रहे हैं? तो अमजद ने बताया कि अब हमारा रुख मुल्तान की ओर है। यह भी पंजाब का ही एक शहर है और जामनगर से कोई 3 घंटे की दूरी पर है। मेजर राज ने कहा कि मुल्तान तक कई छोटे शहर आएंगे रास्ते में, और हमें किसी भी जगह पर पुलिस रोक सकती है तो सबसे पहले इस कार से छुटकारा पाओ और दूसरी बात हम सब एक साथ नहीं जाएंगे बल्कि अलग जाएंगे ताकि किसी को शक न हो हम पर।

अमजद ने कुछ दूर जाकर गाड़ी रोक ली और नीचे उतर कर दिग्गी को खोला यह एक नई नंबर प्लेट निकाल कर कार पर लगाने लगा, जबकि उसने समीरा को कहा कि वह भी गाड़ी से अपने कपड़े निकाले और अपना हुलिया बदल ले। समीरा ने पीछे पड़े बैग से कपड़े निकाले और अंधेरे में जाकर अपने कपड़े बदल लिए। वापस आई तो उसने एक टाइट जींस पहन रखी थी और साथ में एक शर्ट थी जिसमें से उसके शरीर के उभार काफी स्पष्ट हो रहे थे। मेजर राज ने एक नज़र उस पर डाली और दिल ही दिल में उसकी सुंदरता की प्रशंसा करने लगा।

अमजद नंबर प्लेट बदल चुका था। नंबर प्लेट बदलने के बाद वह बोला कि इस कार को तुम लोग मुझ पर छोड़ दो। मैं यही गाड़ी लेकर मुल्तान तक जाउन्गा जबकि सरमद और राणा काशफ बस से मुल्तान पहुंचेंगे।और समीरा तुम मेजर राज के साथ जाओ, आप भी बस में जाओ मगर राणा काशफ और सरमद अलग बस में होंगे और मेजर राज और तुम अलग बस में। और मुल्तान पहुंचकर तुम मेजर राज को गाइड करोगी कि हमारे ठिकाने तक कैसे पहुंचना है जबकि काशफ और सरमद दोनों खुद ही पहुंच जाएंगे।

अब सब लोग फिर से कार में बैठे और कुछ ही दूर एक बस स्टॉप पर गाड़ी रोक ली। वहाँ अमजद ने राणा काशफ और सरमद को कार से उतारा और उनको साथ में कुछ सामान दिया और कहा कि मेजर राज ने पेट्रोल पंप से खरीदा था। उन्होंने वह सामान उठाया और सामने खड़ी बस में बैठ गए जो चलने के लिए तैयार थी। जब बस चल पड़ी तो बस के पीछे अमजद ने गाड़ी चलाना शुरू कर दी और अगले बस स्टॉप पर पहुंचकर बस स्टॉप से कुछ पहले गाड़ी रोक ली।

यहां मेजर राज ने अपनी जेब में हाथ डाला और जेब से एक मोबाइल फोन निकाला। अमजद ने मेजर के हाथ में फोन देखा तो तुरंत बोला यह कहाँ से मिला ??? तो मेजर राज ने बताया तुम्हारे पठान भाई का उठाया है पेट्रोल पंप से और यह कह कर मेजर राज ने मोबाइल में एक नंबर सेव किया और ओटिस एप्लिकेशन के साथ एक कॉल मिलाई। यह नंबर भारत का था। कुछ देर के बाद आगे से एक महिला की आवाज आई तो मेजर राज ने पूछा कैसी हो मिनी ??? आगे मिनी की आवाज़ आई तुम कौन बोल रहे हो ??? तो मेजर राज ने कहा अरे वाह, इतनी जल्दी भूल गई अपने प्रेमी को ??? साथ जीने मरने की कसमें खाकर अब पूछ रही हो तुम कौन ??? मिनी ने फिर कहा सीधी तरह अपना नाम बताओ नहीं तो फोन बंद कर रही हूँ ...मेजर राज अबकी बार बोला सुनो तो जानेमन, अपनी एक तस्वीर ही ओटिस एप्लिकेशन पर दो बहुत समय हो गया तुम्हें देखे हुए।

मेजर राज की बात खत्म ही हुई थी कि आगे से फोन बंद कर दिया गया। अमजद ने मुस्कुराते हुए मेजर राज की ओर देखा और पूछा यह क्या सीन है मेजर ?? मेजर राज ने आँख मारते हुए कहा मेरी पुरानी प्रेमिका है सोचा उसको थोड़ा तंग ही कर लूं। मेजर की बात सुनकर अमजद ने ठहाका लगाया और बोला नहीं मेजर साहब प्रेमिका तंग करने के लिए तो फोन नहीं किया होगा ऐसी स्थिति में। तो मेजर राज ने उसे बताया कि यह मेजर मिनी का फोन था। मेजर मिनी मेजर राज के साथ ही कैडेट कॉलेज में पढ़ती थी और दोनों ने एक साथ ही आर्मी ज्वाइन की थी। और अब मेजर राज की पोस्टिंग मुम्बई में थी जबकि मेजर मिनी की पोस्टिंग पंजाब में थी। फोन करने का उद्देश्य अपने सही सलामत होने की सूचना भारत भिजवाया था। ओटिस एप्लिकेशन कॉल को अब पाकिस्तानी सेना या भारत आर्मी ट्रेस आउट नहीं कर सकती इसलिए ओटिस एप्लिकेशन से कॉल की है। लेकिन स्पष्ट रूप से इसलिए नहीं बताया कि सावधानी आवश्यक है। क्या मालूम पाकिस्तानी आर्मी के पास ओटिस एप्लिकेशन के डेटाबेस का उपयोग किया लेकिन भारतीयसेना को इसका पता न हो इसलिये स्पष्ट संदेश नहीं दिया। अमजद ने कहा मगरआगे मौजूद महिला ने तो फोन बंद कर दिया गुस्से में ?? तो मेजर राज ने कहा कि वह भी भारतीय सेना की ट्रेंड मेजर है उसे भी पता है कि फोन पर बात करनी है और क्या नहीं। उसने मेरी आवाज़ पहचान ली है इतना काफी है। अब वह उच्च अधिकारियों तक खुद ही यह बात पहुंचा देगी।

मेजर राज की बात समाप्त हुई तो उन्हें पीछे से एक और बस आती दिखाई दी। अमजद ने समीरा को कहा चलो तुम अपना बैग उठाओ और मेजर साहब के साथ इस बस में मुल्तान पहुँचो मैं इसी कार से मुल्तान तक जाउन्गा समीरा जो अब फ्रंट सीट पर बैठी थी उसने पीछे मुड़ कर अपना बैग उठाया और कार से उतर गई मेजर राज भी कार से उतरा और अमजद को अपना ख्याल रखने को कह कर बस में सवार हो गया। बस करीब खाली ही थी। रात का समय था इसलिये बस में अधिक सवारियां मौजूद नहीं थीं।

मेजर राज पीछे वाली सेट पर गया और समीरा को भी वहीं बुला लिया, समीरा आई और शीशे वाली साइड पर बैठ गई जबकि मेजर राज उसके साथ वाली सीट पर बैठ गया। मेजर के हाथ में भी कुछ रस के डिब्बे और खाने का सामान था, जबकि मोबाइल फोन मेजर ने बस में चढ़ने से पहले उसके टायर के नीचे रख दिया था।जैसे ही बस चली मोबाइल के टुकड़े हो गए और मेजर की यहाँ उपस्थिति का सबूत मिट गया।

कॉल डिस्कनेक्ट करते ही मेजर मिनी ने खुशी से याहू का नारा लगाया और अपने कमरे में खुशी के मारे डांस करने लगी। उसने मेजर राज की आवाज पहचान ली थी और वह जान गई थी कि मेजर राज अब दुश्मन के चंगुल से मुक्त हो चुका है। कुछ देर खुशी से पागलों की तरह नृत्य करने के बाद उसे ख्याल आया कि उसे यह सूचना तुरंत मुख्यालय को देनी चाहिए। उसने तुरंत ही अपने कमरे में मौजूद टेलीफोन उठाया और हेड क्वार्टर कॉल मिलाई। आगे मेजर अमर ने फोन अटेंड किया तो मेजर मिनी ने तुरंत मेजर जनरल सुभाष से बात करवाई, मेजर अमर ने होल्ड करने को कहा और मेजर जनरल सुभाष की एक्सटेंशन मिला दी। रात के 11 बजे मेजर जनरल ने अपने टेलीफोन पर कॉल रिसीव की तो मेजर मिनी ने एक ही सांस में उन्हें अपने और मेजर राज के बीच होने वाली बातचीत का बताया और यह भी बताया कि उसने स्पष्ट बात नहीं बस अपनी आवाज सुनाने के लिए इस तरह के ढंग से कॉल की है ताकि अगर किसी तरह कॉल ट्रेस भी हो जाए तो ऐसा लगे जैसे पाकिस्तान से कोई थर्ड क्लास प्रेमी भारत में किसी लड़की को फोन करके तंग कर रहा है। मेजर जनरल ने यह खुशखबरी सुनी तो उन्होंने मिनी को भी बधाई दी और बोले शुक्र है अमजद ने अपना काम कर दिखाया अन्यथा मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नही थी कि वह इस काम में सफल होंगे क्योंकि आज तक जो भी कर्नल इरफ़ान की कैद में गया वह जीवित सलामत वापस नहीं आया।

मेजर जनरल को यह सूचना देने के बाद मिनी ने तुरंत जय के मोबाइल पर कॉल की। जय हनीमून से वापस आ चुका था और अब अपने कमरे में पत्नी के साथ व्यस्त था। जय जो तब डॉली को चौदनेमें व्यस्त था उसे डॉली की तेज सिसकियों में अपना मोबाइल अटेंड करने का होश ही नहीं था। डॉली जय के लंड पर बैठी पूरी ताकत के साथ उछल कूद में व्यस्त थी। एक बार कॉल अटेंड नहीं हुई तो मेजर मिनी ने फिर से कॉल, अब की बार जय ने फोन उठा कर देखा कि इस समय कौन तंग कर रहा है। डॉली ने जय के लंड पर छलाँगें मारते मारते जय को फोन अटेंड करने से रोका मगर इतनी देर में उसकी नजर अपने मोबाइल स्क्रीन पर पड़ गई थी वह मेजर मिनी नाम देख चुका था। मेजर मिनी का नाम देखते ही उसने डॉली को अपने लंड से उतरने को कहा और खुद ही उठ कर बैठ गया, डॉली को इस तरह जय का फोन फ़ोन उठाना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था क्योंकि वह इस समय जय के लंड से पूरी तरह आनंद ले रही थी।

जय ने कॉल अटेंड करते ही कहा जी मिनी कुछ पता लगा भाई का ??? तो मिनी ने चहकते हुए कहा हां वह जय साहब आजकल पाकिस्तान भ्रमण पर निकले हुए हैं और कुछ ही देर पहले मेरे साथ फोन पर फ्लर्ट करके हटे हैं।यह सुनते ही जय का चेहरा खुशी से खिल उठा। मिनी ने जय से कहा तुम यह खबर जल्दी से आंटी को भी दो और रश्मि को भी बताओ कि उन्हें भी सकून मिल जाए यह कह कर मिनी ने कॉल कट कर दी और जय ने तत्काल अपनी पैंट और शर्ट पहनी और शर्ट के बटन बंद किए बिना ही भागा भागा माँ के कमरे में गया और उन्हें राज के सही सलामत होने की सूचना दी। माँ यह खबर सुनते ही पूजा घर में गिर गईं और प्रभु का धन्यवाद करने लगी, पूजा से उठने के बाद उन्होंने जय को अपने गले से लगा लिया और बोलीं कि चल जल्दी से भाभी को भी बता।

जय उसी हालत में रश्मि का दरवाजा खटख्टाने लगा। रश्मि अपनी नाइटी पहने सो रही थी जब कि रश्मि के पास कोई नहीं था जिसके लिए वह नाइटी पहनती मगर उसको आदत थी कम कपड़ों में सोने की और हल्की फुल्की नाइटी पहनने से उसे आराम की नींद आती थी। दरवाजे पर दस्तक की आवाज़ सुन वह बिस्तर से उतरी और पूछने लगी कौन है ???

बाहर से आवाज आई भाभी में जय ... आपके लिए खुशखबरी है, बड़े भाई से संपर्क हो गया है ..... यह सुनते ही रश्मि की नींद उड़ गई और वह दौड़ती हुई दरवाजे तक आई और दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खोलते ही वह फिर से जय से मुखातिब हुई और बोली फिर कहो क्या कह रहे थे तुम ??? उसकी आँखों में खुशी के साथ अनिश्चितता के भाव थे। जय ने एक बार फिर कहा कि राज भाई से संपर्क हो गया उनकी कोलीग मेजर मिनी का फोन आया है भाई ने उनसे बात की है और अपने राजी-खुशी से होने की खबर दी है।

 
यह सुनते ही रश्मि जय से लिपट गई और रोने लगी, जय भी इस बात से अनजान कि उसकी अपनी शर्ट के बटन खुले हैं और उसकी भाभी इस समय एक सेक्सी नाइटी पहने हुए है रश्मि की कमर के चारों ओर अपने हाथ लपेट दिए। जब कि तब जय या रश्मि दोनों के मन किसी भी बुरी सोच या बुरे विचार से मुक्त थे मगर एक भाभी नाइटी पहने अपने जवान देवर के सीने से लगी खड़ी थी। कुछ देर बाद जय को अपने सीने पर भाभी के नरम नरम मम्मों का स्पर्श महसूस हुआ तो उसने एकदम रश्मि को ध्यान से देखा जो अब तक अपना सिर जय की छाती पर रखे रो रही थी। यह खुशी के आंसू थे, इसलिये जय ने रश्मि को रोने से नहीं रोका मगर अब उसकी नजरें अपनी भाभी के शरीर पर थीं। रश्मि के कंधे बिल्कुल नंगे थे और पीछे से कमर भी पूरी नंगी थी, बस रश्मि के चूतड़ों के ऊपर एक स्कर्ट नुमा छोटी छोटी पट्टी मौजूद थी और नीचे उसकी गोरी गोरी टाँगें देखकर जय को अपने शरीर में सुई जैसी चुभन होती हुई महसूस होंगे लगीं। फिर जय ने रश्मि को अपने सीने से थोड़ा पीछे हटाया तो रश्मि हट गई मगर उसके हाथ अपनी आँखों पर थे और वह अब भी लगातार रोये जा रही थी।

जबकि जय की नजरें अपनी भाभी के गोरे शरीर का नज़ारा करने में व्यस्त थीं। काले रंग की नेट वाली निघट्य में रश्मि का गोरा शरीर ऐसे झलक रहा था जैसे कोई पत्थर का मोती हो। नाइटी का गला खुला होने की वजह से रश्मि के बूब्स का उभार भी बहुत स्पष्ट था। रश्मि के मम्मे जोकि डॉली के मम्मों से छोटे थे मगर इंसान की प्रकृति है कि उसे अपनी पत्नी के अलावा हर औरत का शरीर ही सुंदर लगता है और इस समय जय का भी यही हाल था। उसका मन कर रहा था कि वह उसके हाथ उठाए और अपनी भाभी के बूब्स को जोर से दबा दे, मगर उसने अपने ऊपर नियंत्रण रखा और ऐसी किसी भी हरकत से अपने आप को रोक लिया

अब जय की नजरें अपनी भाभी की गोरी चिट्टी थाईज़ का निरीक्षण कर रही थीं जो मांस से भरी हुई थीं और उनको दबाने का निश्चित रूप से बहुत मज़ा आने वाला था लेकिन अब की बार भी जय ने अपने आप को बहुत मुश्किल से किसी भी ऐसी हरकत से रोक लिया अब वह रश्मि के शरीर से अपनी आँखें सेकने में व्यस्त था कि रश्मि की आवाज उसके कानों में पड़ी, रश्मि कह रही थी कि माँ को भी बता दो कि राज ख़ैरियत से है। रश्मि की आवाज सुनकर जय होश में वापस आया तो उसने रश्मि को कहा कि वह बता चुका हूँ। बस अब आप दुआ करें कि भाई खैरियत से स्वदेश वापस आ जाएं। यह सुनकर रश्मि बोली- मैं माँ से मिल लेती हूँ, यह कह कर रश्मि कमरे से निकली और राज की मां के कमरे की ओर जाने लगी तो अब की बार जय ने हाथ आगे बढ़ाकर रश्मि के कंधे पर रख दिया और बोला रूको भाभी ... रश्मि ने रुककर जय को देखा और कहा, हां बोलो ?? जय ने नजरें नीचे झुका लीं और बोला भाभी अपने कपड़े पहन लें। यह कह कर वह ऐसे ही नजरें झुकाए वापस अपने कमरे में चला गया और रश्मि ने जब अपने ऊपर नज़र डाली तो उसे एक झटका लगा कि वह नाइटी पहने कितनी देर जय के सीने पर सिर रख कर खड़ी रही और अब भी माँ से मिलने जा रही थी। रश्मि के चेहरे पर लाज की शिकन सी आई और अपने ऊपर गुस्सा भी आया कि वह ऐसी हालत में कमरे से बाहर क्यों आ गई। मगर फिर यह सोचकर मुस्कुराने लगी कि राज की सूचना मिलने पर उसे अपना होश ही कहाँ था ... यह सोच कर वह मुस्कुराती हुई वापस कमरे में चला गई और कपड़े पहनने लगी।

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मेजर मिनी को जब राज की आवाज सुनाई दी थी वह बहुत खुश थी। वह मेजर राज से बेपनाह प्यार करती थी, मेजर राज भी उसे पसंद करता था मगर कुछ कारणों की वजह से वैवाहिक रिश्ते में नही बँध सके थे। मिनी को इस बात का दुख था मगर वह एक मीचोर लड़की थी, पारंपरिक लड़कियों की तरह उसने रश्मि से कोई लड़ाई मोल नहीं ली बल्कि उसने खुशदीली के साथ रश्मि को मेजर राज की पत्नी स्वीकार कर लिया था। यही वजह थी कि राज से बात होते ही मुख्यालय सूचना देने के बाद उसे तुरंत रश्मि का ही ख्याल आया, मगर रश्मि का नंबर पास न होने की वजह से उसने जय को कॉल की क्योंकि वह जानती थी कि जब से मेजर राज लापता हुआ है रश्मि की उदासी किसी क्षण भी खत्म नहीं हो सकी इसलिये उसे यह सूचना तुरंत देना बहुत जरूरी था।

जय से फोन पर बात करने के बाद अब वो फिर से मेजर राज के विचारों में गुम थी। जब मेजर की शादी तय हुई थी राज और मिनी की मुलाकात नहीं हो सकी थी न ही मिनी मेजर राज की शादी पर जा सकी थी क्योंकि शादी वाले दिन मेजर मिनी अपनी ड्यूटी में व्यस्त थी और उसे छुट्टी नहीं मिल सकी थी। मिनी को अब मेजर राज की शरारतें याद आ रही थीं कि वह मिनी के साथ करता था। यूँ तो दोनों कॉलेज के समय से अच्छे दोस्त थे मगर दोनों में पहली बार शारीरिक संबंध तब स्थापित हुआ जब मेजर राज और मिनी दोनों कैप्टन के पद पर थे। जबकि दोनों की पोस्टिंग अलग शहरों में थी मगर एक मिशन के दौरान राज और मिनी मेजर पवन सिंघ के साथ ट्रेन में पंजाब से दिल्ली जा रहे थे। गर्मियों के दिन थे और रेलवे की हालत का स्तर खराब होने के कारण रेलवे में यात्रियों की संख्या बहुत कम थी। मेजर पवन सिंघ सर्वोपरि स्वभाव के अधिकारी थे और वह हमेशा मिनी और राज को एक दूसरे से दूर रखने की कोशिश करते थे मगर उनकी अपनी नज़रें मिनी के शरीर को 24 घंटे घूरती रहती थीं।

 
मिनी इस बात से अच्छी तरह अवगत थी कि मेजर पवन सिंघ उसके शरीर का दीवाना है मगर उसने कभी इस बात का बुरा नहीं माना था क्योंकि वह जानती थी कि उसके शरीर की बनावट है ही इतनी सेक्सी कि कोई भी पुरूष उसको पाने की इच्छा कर सकता हैं इसलिए उसने कभी किसी को नहीं रोका कि वह उसे घूर घूर कर क्यों देखता है। इस यात्रा के दौरान मेजर पवन सिंघ हर समय कैप्टन मिनी को अपने दाएं और कैप्टन राज को अपने बाईं ओर रखते और खुद दोनों के बीच में ही रहते जहाँ उन्हें मौका मिलता वह बहाने बहाने से कभी कैप्टन मिनी के कंधे पर हाथ रख देते तो कभी उसकी कमर पर थपकी दे कर अपनी ठरकी पूरी करते।

रात के 2 बजे से शताब्दी एक्सप्रेस दिल्ली के लिए चली तो मेजर पवन सिंघ ने ट्रेन के प्रथम श्रेणी के हिस्से में अपनी सीट बुक करवाई। मेजर ने पहले मिनी को ट्रेन पर चढ़ने के लिए आमंत्रित किया, मिनी ने जैसे ही सीढ़ी पर पैर रखा तो राज ने भी कोशिश की कि वह मिनी के पीछे ही चढ़ जाए मगर बीच में मेजर पवन सिंघ आ गए और उन्होंने हाथ राज का लाभ लिया था। राज भी जानता था कि मेजर की नीयत खराब है मिनी पर मगर वह भी उसे कुछ नहीं कि सकता था। एक तो वह वरिष्ठ था और दूसरे जब मिनी ने कभी इस बात का बुरा नहीं माना तो राज कैसे बुरा मानता मिनी अब ट्रेन की दूसरी सीढ़ी पर ही थी कि पवन सिंघ ने भी दूसरी सीढ़ी पर अपना पैर रख दिया। मेजर पवन सिंघ का शरीर मिनी के शरीर से टकराया तो मिनी ने पीछे मुड़ कर देखा और मेजर पवन सिंघ को क्रोध नज़रों से घूरा, मेजर का मानना था कि शायद मिनी माइंड नहीं करेगी मगर उसकी नज़रों में मौजूद गुस्सा देख कर मेजर ने दूसरा विकल्प चुना और सॉरी बोल पड़ा।

इसके बाद तीनों ट्रेन में मौजूद अपनी अपनी जगह पर बैठ गए। चूंकि यह एसी डब्बा था उसमें अलग केबिन बने हुए थे, हर केबिन में 6 बर्थ थे और केबिन का दरवाजा बंद करके बंद किया जा सकता था। मिनी पहले अंदर दाखिल हुई और उसने ऊपर वाली बर्थ पर कब्जा कर लिया जबकि मेजर पवन सिंघ और कैप्टन जय नीचे वाली बर्थ पर बैठ गए। ट्रेन स्टेशन से चली तो मेजर पवन सिंघ ने मिनी को बर्थ से नीचे आने के लिए कहा, मिनी नीचे आई और कैप्टन राज की बर्थ पर उसके साथ बैठ गई। अब मेजर पवन सिंघ ने दोनों को ऑपरेशन के बारे में बताना शुरू किया। और दोनों को समझाने लगा कि कैसे दुश्मन पर काबू पाना है और कैसे दुश्मन की नजरों में आए बिना तीनों ने संपर्क में रहना है। सुबह बजे तक मेजर का व्याख्यान जारी रहा जिसे सुनकर अब मिनी को नींद आने लगी थी। मगर सौभाग्य से मेजर का व्याख्यान यहीं खत्म हो गया था तो उसने मिनी को बैग से चिप्स निकालने के लिए कहा जो उसने स्टेशन से खरीदे थे।

मिनी ने एक पैकेट पवन सिंघ को निकाल कर दिया और दूसरा पैकेट राज के साथ शेयर कर लिया। मेजर पवन सिंघ का तो जैसे दिल ही टूट गया, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकता था। फिर मिनी ने जूस के पैकेट निकाले तो तीनों ने जूस पिये उसके बाद मिनी ने राज को शेरो शायरी का मुकाबला करने को कहा और दोनों ने एक से बढ़कर एक शेर सुनाना शुरू कर दिया। मेजर पवन सिंघ जो उम्र में दोनों से काफी बड़े थे और शेरो-ओ-शायरी का शौक नहीं था उन्हें नींद आने लगी तो उन्होंने ऊपर वाली बर्थ पर कब्जा किया और चादर लेकर सो गए। कुछ ही देर में मेजर के खर्राटे शुरू थे।

ट्रेन एक स्टेशन पर पहुंची तो सेरो शायरी खेल कर अब दोनों थक चुके थे। 25 वर्षीय मिनी कॉलेज के दिनों से ही राज को पसंद करती थी जिसकी उम्र अब 26 साल थी। जब ज़्यादा करने को कुछ नहीं रहा तो दोनों एक ही बर्थ पर एक दूसरे के पास होकर बैठ गए और अपने भविष्य के बारे में बात करना शुरू कर दिया। जो कुछ देर के बाद इश्क और आशिकी की बातों में बदल गई मिनी अब अपना सिर राज के कंधे पर रख के बैठी थी और उसे अपने परिवार के बारे में बताने लगी। जबकि राज ने भी कहा कि वह अपने परिवार को उसके घर भेजेगा ताकि वह मेरे लिए तुम्हारा हाथ मांग सकें।

 
मिनी ने राज के कंधों से अपना सिर उठाया और खुशी से बोली सच ??? कैप्टन राज ने उसके माथे पर एक चुंबन दिया और कहा मेरी जान वाकई सच। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। यह कह कर राज ने मिनी के सुंदर होठों पर अपने होंठ रख दिए और एक लंबा चुंबन दिया, इस दौरान मिनी की आँखें बंद थीं जैसे अगर उसने आँखें खोलीं तो यह सपना टूट जाएगा। राज भी दुनिया से बेखबर अपने होंठ मिनी के होंठों पर रखकर सब कुछ भूल गया था कि अचानक उन्हें मेजर पवन सिंघ की आवाज सुनाई दी। दोनों हड़बड़ा कर पीछे हटे और मेजर को देखने लगे जो बेहोशों की तरह सो रहा था, वास्तव में यह आवाज मेजर पवन सिंघ के ख़र्राटों की थी, मिनी और राज ने एक दूसरे देखा और धीरे से हंसने लगे, फिर राज आगे बढ़ा और उसने एक बार फिर अपने होंठ मिनी के होंठों पर रखते हुए उन्हें चूसने लगा।

मिनी भी कैप्टन राज का साथ देने लगी और अपने होंठों को गोल गोल घुमा कर कैप्टन राज के होंठों को चूसने लगी। मिनी के हाथ कैप्टन राज की गर्दन पर थे जबकि राज ने अपने हाथ मिनी की कमर पर रखे और धीरे धीरे मिनी को अपने करीब खींचते हुए अपने सीने से लगा लिया था।

यूँ तो दोनों में यह चूमा चाटी कॉलेज के समय से ही चल रही थी मगर आज उसकी तीव्रता काफी अधिक थी। मिनी पूरी जवान और भावनाओं से भरपूर एक कुंवारी लड़की थी और आज बहुत दिनों के बाद वह अपने प्रिय दोस्त के होठों का रस चूस रही थी। मिनी ने अपना मुंह खोल कर राज को ज़ुबान अंदर करने की अनुमति दी और फिर राज की ज़ुबान से अपनी जीभ टकराने लगी। राज और मिनी दोनों की कोशिश थी कि वे अपनी ज़ुबान को दूसरे के मुंह में डाले और अंदर तक मज़ा लें। राज का एक हाथ सरकता हुआ मिनी की कमरे से उसके कूल्हों तक आ चुका था और वहां से नीचे फिर चूतड़ राज के हाथ में थे। ऐसा पहली बार हुआ था कि राज ने अपना हाथ मिनी के चूतड़ों पर रखा था इससे पहले उनके बीच किस और डॉकिंग ज़रूर हुआ था मगर कभी मिनी के मम्मे या उसके चूतड़ों पर राज ने हाथ नहीं लगाया था। और आज अगर मिनी के चूतड़ पकड़े भी तो अपने सीनियर के सामने जो ऊपर वाली बर्थ पर जोरदार खर्राटे मार रहा था।

अपने चूतड़ों पर मर्दाना हाथ पकड़ महसूस कर मिनी की भावनाएँ और भी मचलने लगी और अब उसने अपनी एक टांग उठाकर राज की कमर के आसपास की तो राज ने उसके चूतड़ पकड़ कर उसे गोद में उठा लिया और मिनी ने अपनी दोनों पैर राज की कमर के गिर्द लपेट दिए . मिनी के 36 आकार के चूतड़ राज के हाथ में थे और वह उन्हें दबाने के साथ मिनी के होंठों को भी भरपूर मजे से चूस रहा था। होठों से होते हुए राज के होंठ अब मिनी की गर्दन को चूसने में व्यस्त थे और मिनी अपना सिर पीछे की तरह गिराए राज को पूरा मौका दे रही थी कि वह उसकी गर्दन के अधिकांश भाग को अपने होठों से चूम सके। राज कभी मिनी की सुराही दार गर्दन पर अपनी जीभ फेरता तो कभी उसको दांतों से काटने लगता और मिनी की उफ़ उफ़, आह आह की सिसकियाँ राज के कानों में रस घोल रही थीं।

राज अभी चलता हुआ ट्रेन की खिड़की के साथ हुआ और मिनी की कमर को ट्रेन के साथ लगाकर सहारा दिया मिनी ने अभी भी अपनी टाँगें राज की कमर के गिर्द लपेट रखी थीं। अब एक बार फिर दोनों ने एक दूसरे होंठ चूसना शुरू कर दिए थे जबकि राज का हाथ अब मिनी के चूतड़ों को छोड़ कर उसकी गर्दन की मालिश कर रहा था। यह हाथ गर्दन की मालिश करते हुए मिनी के सीने तक आया और फिर मिनी के दाएँ मम्मे को अपने हाथ में पकड़ लिया। 36 आकार का मम्मा राज के हाथ में आया तो उसे लगा जैसे कोई खजाना मिल गया हो, उसने मिनी के मम्मों को ज़ोर से दबाया तो मिनी मुंह से एक लंबी सिसकी निकली ऊच च च च च च च च च .... ... दोनों के बीच यह सब पहली बार हो रहा था मगर आश्चर्य की बात थी कि मिनी ने ना तो राज को नितंबों को पकड़ने से रोका था और न ही मम्मे दबाने पर कुछ कहा। शायद वह आज अपनी जवानी राज पर न्यौछावर करने के लिए तैयार थी और अपनी प्यास बुझाने के लिए भी बेताब थी।

तभी राज के हाथ मिनी की शर्ट के बटन खोलने लगे। 3 बटन खोलने के बाद राज ने मिनी की शर्ट को साइड पर हटाया तो लाल ब्रा में छिपे मम्मों के ऊपर वाला हिस्सा राज को दिखने लगा। राज ने अपना हाथ फिर मिनी के दाएँ मम्मे पर रखा अबकी बार उसके हाथ ने मिनी की ब्रा को छुआ था। जैसे ही राज ने मिनी के मम्मे को हाथ से दबाया तो एकदम से ठक ठक की जोरदार आवाज आई। कम्पार्टमेंट के बाहर टीटी आया था ..... दरवाजे पर नॉक सुनते ही मिनी ने राज की कमर के आसपास लिपटे पैर साइड पर फैलाए और उसकी गोद से उतर कर अपनी शर्ट के बटन बंद करने लगी जबकि राज ने कुछ देर गहरी गहरी सांस ली और फिर दरवाजा खोल दिया।

मिनी को अभी तक सांस नियंत्रण करना मुश्किल हो रहा था उसकी सांस तेज तेज चल रही थी टीटी ने दोनों को ध्यानपूर्वक देखा और बोला टिकट चेक काराव तो राज ने अपनी जेब से और मिनी ने अपनी जेब से टिकट निकालकर चेक करवा दिए . टीटी ध्यानपूर्वक मिनी के खुले बालों की समीक्षा रहा था जो इस प्रक्रिया के दौरान बिखर गए थे और उसकी आंखों में सेक्स का नशा अब तक मौजूद था, फिर टीटी ने कहा यह तीसरे साहब जो हैं उनका टिकट? तो राज ने उनके बैग से टिकट निकालकर चेक करवा दिया, टीटी अब वहां से चला गया, लेकिन जाते जाते उसके चेहरे पर द्वि अर्थ हंसी थी, वह समझ गया था कि दोनों गर्म शरीर एक दूसरे से लड़ने में व्यस्त थे और उसने आकर डिस्टर्ब कर दिया। टीटी के जाते ही राज ने दरवाजा बंद किया तो मिनी फिर छलांग मार कर राज की गोद में चढ़ गई और जंगली बिल्ली की तरह उसकी शर्ट के बटन खोल कर उसके सीने पर प्यार करने लगी।

थोड़ी देर के बाद मिनी पहली बर्थ पर लेटी हुई थी और राज ने उसकी शर्ट उतार दी थी। मिनी की लो वेस्ट जींस (लो वेस्ट जीन्स) और उसके बदन पर लाल रंग का ब्रा राज के लंड को खड़ा करने के लिए पर्याप्त था। राज मिनी के ऊपर झुका और उसके फोम वाले अंडर वायर्ड ब्रा से बनने वाली मिनी की क्लीवेज़ के बीच अपनी ज़ुबान फेरने लगा। मिनी की ब्रा ने मिनी के मम्मों को आपस में मिला कर रखा था और उन्हें ऊपर भी उठा दिया था जिसकी वजह से उसकी क्लीवेज़ बहुत सेक्सी हो रही थी और ऐसे लग रहा था जैसे मिनी के मम्मे 36 की बजाय 38 के होंगे। कुछ देर के बाद जब राज ने खूब जी भरकर मिनी की क्लीवेज़ मे ज़ुबान फेर ली तो उसने मिनी का ब्रा भी उतार दिया। ब्रा की कैद से मुक्त होते ही मिनी के मम्मे ऐसे थिरकने लगे जैसे जेली अपने बर्तन से निकलकर हिलती है।

गोरे मलाई जैसे बूब्स पर हल्के ब्राउन रंग का छोटा सा बिंदु था और उस पर ब्राउन निपल्स जैसे फ्रेश क्रीम केक के ऊपर चेरी का दाना पड़ा हो। राज ने अपनी ज़ुबान मुंह से बाहर निकाली और जीभ की नोक से चेरी को यानी कि मिनी के निपल्स को छेड़ने लगा। जैसे ही राज की जीभ की नोक ने मिनी के निप्पल को छुआ उसके शरीर में करंट दौड़ गया, उसका शरीर बीच से दोहरा हुआ कमर हवा में ऊपर उठ गई और मम्मे भी उसी हिसाब से ऊपर आ गए और सिर पीछे की ओर झुक गया। मिनी के ऊपर उठी कमर के नीचे राज ने हाथ दिया और उसके ऊपर लेट कर मिनी के निपल्स पर ज़ुबान से छेड़ने लगा। जैसे ही निपल्स से जीभ लगती मिनी की एक सिसकी निकलती और वो अपनी हर सिसकी पर मेजर पवन सिंघ की ओर देखती ऐसा न हो कि वे उठ जाए। लेकिन हर बार उसे मेजर पवन सिंघ जोरदार खर्राटे मारता हुआ नज़र आता।

मेजर पवन सिंघ की नींद पूरी रेजिमेंट में मशहूर थी सब जानते थे कि मेजर पवन सिंघ एक बार सो जाये तो अपनी नींद पूरी किए बिना उसकी आंख नहीं खुलती और यह बात कैप्टन राज और मिनी अच्छी तरह से जानते थे इसीलिए वे बेखौफ होकर एक दूसरे के शरीर से अपनी गर्मी मिटाने में लगे हुए थे। 5 मिनट तक मिनी के मम्मों को चूसने के बाद कैप्टन राज मिनी के बल खाते पेट पर अपनी जीभ फेरता हुआ उसकी नाभि तक ले आया और फिर अपनी जीभ की नोक मिनी की नाभि में घुमाने लगा जिससे मिनी को अजीब सा मज़ा मिलने लगा। मिनी इस मज़े से बिल्कुल अनभिज्ञ थी। उसकी सिसकियों में अधिक वृद्धि हो गई थी मगर उसकी आह आह आह, ऊच ऊच च च, बंद, उफ़ उम उम आवाज ट्रेन की छक छक में कहीं गुम हो रही थीं। नाभि से होता हुआ अब राज मिनी की नाभि से नीचे मिनी के शरीर को चूस रहा था जिससे मिनी की बेताबी और बढ़ने लगी थी

तो राज ने मिनी की जींस के बटन खोल कर उसकी ज़िप खोली तो मिनी ने तुरंत ही अपने चूतड़ हवा में उठाकर राज को जीन्स उतारने की दावत दे डाली। राज ने भी बिना समय बर्बाद किए मिनी की जीन्स पूरी उतार दी। मिनी की लाल रंग की पैन्टी चूत के ऊपर से गहरे लाल रंग की हो रही थी जिसका मतलब था कि मिनी की चूत से निकलने वाला पानी मिनी की पैन्टी को काफी देर से गीला कर रहा था। राज ने मिनी की गीली पेंट देखते ही अपनी ज़ुबान को उसकी पैन्टी पर रख दिया और उस जगह पर अपनी जीभ फेरना शुरू की, लाल रंग की पैन्टी उसके गोरे बदन पर क़यामत ढा रही थी उसके पतले पतले पैर बालों से मुक्त थाईज़ और थाईज़ की मस्त चिकनाई राज की प्यास को और बढ़ा रहे थे। राज ने जैसे ही अपनी ज़ुबान मिनी की पैन्टी पर रखी उसने एक बार अपनी टांगों को खोला और फिर राज के सिर को बीच में लेकर दबा लिया कुछ देर राज मिनी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चूसता रहा और फिर उसने पीछे हटकर मिनी की पैन्टी भी उतार दी।

पैन्टी उतरते ही मिनी ने अपनी चूत को दोनों हाथों से छुपा लिया, उसकी आँखों में शरारत थी, राज ने उसकी ओर देखा और बोला अपनी इस प्यारी सी चूत को चूमने नहीं दोगी क्या ??? तो मिनी ने कहा ये चूत इतनी आम नहीं कि हर किसी को दिखाई जाए

 
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