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वह साँवली लड़की

वापिस आए विनीत के हाथ में एक नाजुक-सी रजनीगंधा की टहनी थी! अंजू के कपोल पर उसे हल्के से छुआ, विनीत ने कान पकड़े थे-

”हजार बार अपनी गलती के लिए माफी माँगता हूँ, देखो हमारी मित्रता और संधि के प्रतीक हैं ये रजनीगंधा के फूल। जिन्दगी में जब भी गलती करूँगा- माफीनामे और संधि के रूप में हमेशा तुम्हें ये मुस्कराते रजनीगंधा के फूल मिलेंगे। बोलो है मंजूर ?“

”यानी जिन्दगी-भर गलतियाँ करने का इरादा रखते हैं, जनाब?“ अंजू हॅंस पड़ी थी।

मित्रता और संधि के प्रतीक रजनीगंधा के फूल, फ्लॉवर- वाज में सजाती अंजू के अधरों पर प्यारी-सी मुस्कान तिर आई। फूलों के बीच सुजय का मुस्कराता चेहरा खिल आया।


समाप्त।
 
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