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सियासत और साजिश complete

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जैसे ही निर्मला ने पानी का ग्लास राज की तरफ बढ़ाया. वो थोड़ा झुक गयी. जिससे उसकी साड़ी का पल्लू खिसक गया. और निर्मला की बड़ी-2 चुचियाँ ब्लाउस मे कसी हुई राज की आँखों के सामने आ गयी. राज ने एक पल के लिए उसकी चुचियों की तरफ देखा. और फिर अपनी नज़रें फेर ली. निर्मला इस घटना के कारण एक दम से शरमा गयी. और थोड़ा सा घबरा भी गयी. राज ग्लास मे पानी लिए धीरे-2 पानी पीने लगा. निर्मला वहीं पैरों के बल नीचे बैठ गयी. उसने अपना पल्लू ठीक कर लिया था. पर फिर भी ना जाने क्यों राज का ध्यान फिर से एक बार उसकी चुचियों की तरफ चला गया.

निर्मला की आँखें बहुत पारखी थी. जब उसने देखा, कि राज बाबू जी उसकी चुचियों को बीच -2 मे देख रहे हैं. तो निर्मला के होंठो पर मुस्कान से फैल गयी. जिसे उसने अपने होंठो पर अपनी साड़ी का पल्लू रख कर छुपा लिया. जैसे ही राज ने दूसरी तरफ नज़र घुमाई. निर्मला ने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा जान बूझ कर अपनी चुचियों से हटा लिया. जिससे उसकी ब्लाउस मे कसी हुई चुचियों का कुछ हिस्सा नज़र आने लगा.

राज ने पानी पाया. और ग्लास निर्मला की तरफ बढ़ा दिया. निर्मला ने ट्रे को आगे कर दिया. और राज ने खाली ग्लास ट्रे पर रख दिया. और निर्मला वैसे ही बैठी रही. जब भी राज निर्मला की ओर देखता. उसे निर्मला की चुचियों का ऊपरी हिस्सा दिख जाता. पर राज इन सब से बचना चाहता था.

राज : तुम ऐसे बैठी -2 थक जाओगी. जाओं अंदर जाकर आराम से अपना काम करो.

निर्मला: बाबू जी काम ही तो कर रही हूँ.

राज : क्या मतलब.

निर्मला: बाबू जी आपकी सेवा का मोका पहली बार मिला है. इससे बड़ा और क्या काम हो सकता है.

राज ने भी दुनियाँ देखी थी. वो निर्मला को कुछ ही पलों मे ताड़ चुका था. पर राज ने ललिता के अलावा किसी और औरत को आँख उठा कर भी नही देखा था. फिर कमरे से रवि और मुरली राज की तरफ आने लगे.

निर्मला: (मुस्कुरा कर खड़ी होती हुई) बाबू जी फिर हमें सेवा का मोका देना. हम कोई कसर नही छोड़ेंगी.(और निर्मला अपनी गान्ड मटकाते हुए कमरे मे चली गयी)

उसके बाद राज मुरली और रवि के साथ खेतों को चक्कर लगाने चला गया. तीनो काफ़ी देर तक घूमते रहे. जब तीन घंटों बाद वापिस आए तो रवि ने देखा राज की कार पर धूल जमी हुई है. रवि दौड़ कर कार के पास गया. और देखने लगा.

राज :क्या हुआ क्या देख रहा है.

रवि: बाबू जी आपकी कार पर धूल जम गये है. मे सॉफ कर देता हूँ.

राज ने कार से उसे एक कपड़ा निकाल दिया. और रवि कार सॉफ करने लगा. राज वहीं खड़ा हो गया.

राज : मुरली अच्छा तो मे अब हम चलते हैं.

मुरली: बाबू जी सिर्फ़ पाँच मिनिट मेरे साथ चलें. पिछली फसल को बेच कर मुझ 5 लाख रुपये मिले हैं . आपकी अमानत है. साथ मे ले जाए. आइए बाबू जी.

और राज उसके पीछे-2 उसके कमरे के पास आ गया. मुरली की बीवी बाहर एक साइड मे कपड़े धो रही थी. उसने अपनी साड़ी के पल्लू को कमर मे लापेट रखा था. जैसे ही उसने राज को मुरली के साथ आते देखा. निर्मला ने अपने ब्लाउस के ऊपेर के दो हुक्स खोल दिए. जिससे उसकी चुचियाँ और बाहर की तरफ झलकने लगी. जैसे ही राज बाहर खाट पर बैठा . मुरली पैसे लाने अंदर चला गया.

थोड़ी देर बाद अचानक उसे चूड़ियों के खनकने की आवाज़ सुनाई दी. जैसे ही राज ने सर उठा कर देखा. तो सामने निर्मला बैठी कपड़े धो रही थी. उसकी फूली हुई बड़ी-2 चुचियाँ बाहर की तरफ झलक रही थी. राज का ध्यान ना चाहते हुए भी बार-2 उसकी चुचियों पर जा रहा था. जो आधी से ज़्यादा बाहर झलक रही थी. और निर्मला राज की तरफ देख कर बेशर्मी से मुस्कुरा रही थी. थोड़ी देर बाद मुरली बाहर आ गया. और राज को एक लिफाफे मे पैसे दे दिए. और राज उठ कर कार की तरफ चलने लगा.

रवि कार सॉफ कर चुका था. जब राज ने अपनी कार को चमकते हुए देखा. तो उसने एक बार रवि के पीठ थप थपा दी. जिससे रवि खुस हो गया. जैसे ही राज कार खोल कर बैठने लगा. कार के पास आकर एक जीप रुकी. जीप में एक बहुत ही हटा कटा 30 साल की उम्र का एक आदमी बैठा था. उसकी जीप मे पीछे की तरफ चार और पहलवान टाइप आदमी बैठे थे. सब के हाथों मे गन्स थी. राज उस शख्स की तरफ देखने लगा.

आदमी: अबे ऐसे क्या देख रहा है राज पहचाना नही क्या.

राज : नही कोन हो तुम.

आदमी: यार मे हूँ विशाल विशाल ठाकुर.

विशाल और राज दोनो 12थ तक एक ही क्लास मे पढ़े थे. पर बाद मे वो राज से कभी मिल नही पाया था. राज के होंठो पर मुस्कान फैल गयी. विशाल जीप से नीचे उतरा और राज के गले से लग गया. और फिर राज के कंधों को पकड़ते हुए बोला.

विशाल: वाह याआअर जैसा नाम वैसे ही बदन बिल्कुल राजा हो गया हैं. वाह क्या गठीला बदन पाया है मेरे दोस्त ने. एक बार कोई दुस्मन देख ले तो वहीं डर कर मर जाए. तुझे देख कर बहुत ख़ुसी हुई राज.

राज : मुझ भी विशाल.

विशाल: (थोड़ा गंभीर होते हुए) सॉरी यार मुझ भाभी और डॉली बेहन के पति के बारे मे पता चला. सुन कर बहुत दुख हुआ. तेरा पता ढूँढने की बहुत कोशिश की. मे तुम्हारे दुख मे सरीक ना हो सका. हो सके तो मुझ माफ़ कर देना.

राज : (होंठो पर झूठी से मुस्कान लाते हुए) नही-2 कोई बात नही. इसमे माफी माँगने की क्या बात है. जो होना था वो तो हो ही गया.

विशाल: अच्छा यार चल मेरे साथ बहुत दिनो बाद मिला है. चल घर चल.

राज : नही यार आज नही जा पाउन्गा. फिर कभी. डॉली घर पर अकेली होगी.

विशाल: अच्छा सुन कल मेरे बेटे की बर्तडे पार्टी है. हो सके तो आ जाना. कहते हुए अच्छा तो नही लग रहा. पर तू इतने दिनो बाद मिला है. इसलिए बुला रहा हूँ. मुझ पता है अभी तुम किसी पार्टी मे नही जाना चाहोगे. पर फिर भी अपने दोस्त की खातिर आ जाना यार

राज : ठीक है मैं कल ज़रूर आउन्गा.

और राज और रवि दोनो कार मे बैठ कर अपने गाँव की तरफ चल पड़े. अब निर्मला के बारे मे कुछ बता दूं. निर्मला एक 26 साल की बहुत मस्त और चुदेल औरत थी. उसकी शादी 6 साल पहले मुरली से हुई थी. तब मुरली किसी और ज़मींदार की हवेली मे काम करता था.

जब कमजोर मुरली निर्मला के भरे हुए बदन को ठीक से संतुष्ट नही कर पाया. तो निर्मला ने अपने ज़मींदार के साथ संबंध बना लिए थे. और करीब वो उस ज़मीनदार से 2 साल तक अपनी चूत की आग को ठंडा करती रही थी. ज़मींदार महीने मे चार पाँच बार उसकी चूत को जम कर चोदता था. पर महीने मे चार-5 चुदने पर भी उसकी चूत की आग ठंडी नही हो पाती थी. और एक दिन मुरली को किसी वजह से ज़मींदार ने निकल दिया. और मुरली को राज के खेतों मे काम मिल गया था. पर खेतों मे बाकी मजदूर भी अपने परिवारों के साथ रहते थे. पर निर्मला को उनमे से कोई भी मजदूर ऐसा नही लगा जो उसके भरे हुए बदन को अपने हाथों से अच्छे से मसल सकें और उसकी चूत की आग को ठंडा कर सके.

राज और रवि कुछ ही देर बाद अपने घर पर पहुँच गये. शाम ढल चुकी थी. राज और रवि दोनो ने सुबह से कुछ नही खाया था. हरिया ने उनके आते ही खन्ना लगना चालू कर दिया. और राज अपने रूम मे फ्रेश होने चला गया. जब राज और रवि दोनो ने खाना खा लिया, तो रवि हाल मे बैठा डॉली की ओर देखने लगा. डॉली अपने हाथों मे साहिल को लिए बैठी थी. रवि का दिल छोटे से साहिल को देख कर उसको उठाने का मन करने लगा.

 


रवि उठ कर डॉली की तरफ जाने लगा. राज अपने रूम मे जाकर आराम कर रहा था. जब रवि डॉली के पास पहुँचा. तो डॉली ने रवि के तरफ देखा. और मुस्कुरा कर पूछने लगी.

डॉली: साहिल के साथ खेलने आए हो.

रवि ने हां मे सर हिला दिया. और झुक कर डॉली की गोद मे से साहिल को उठान लगा. जैसे ही रवि ने साहिल को उठाने के लिए पकड़ा. रवि का एक हाथ डॉली की कमीज़ के ऊपेर से उसकी चुचि से रगड़ खा गया. रवि के बदन मे अजीब सी सिहरन दौड़ गयी. पर अगले ही पल राज का ख्याल उसके मन मे आ गया. डॉली भी अपनी कमीज़ के ऊपेर से अपनी चुचि पर रवि के हाथ को पाकर थोड़ा सा कस मसा गयी. पर उसने अपने फेस से जाहिर नही होने दिया. आख़िर रवि **** साल का था. और अंजाने मे उसका हाथ लग गया.ये सोच कर डॉली उठ कर अपने रूम मे चली गयी.

रवि थोड़ी देर साहिल के साथ खेलता रहा था. पर अब उसका ध्यान मे पिछले एक दो दिनो से चल रही घटनाएँ घूमने लगी. और वो साहिल को लेकर खड़ा हुआ. और डॉली के रूम की तरफ चल पड़ा. ऊपेर आकर उसने डोर नॉक किया. थोड़ी देर बाद डॉली ने डोर खोला.

रवि: दीदी वो मे खेतों मे जा रहा हूँ.

डॉली ने साहिल को रवि से ले लिया. और वो बाहर आकर खेतों की तरफ चल पड़ा. जब रवि खेतों मे पहुँचा . तो उसकी नज़र रज़िया पर पड़ी. रज़िया अपने कमरे के सामने झाड़ू लगा रही थी. उसका बेटा वहीं खेल रहा था. रज़िया रवि को देख कर मुस्कुराने लगी. वो मन ही मन सोचने लगी. ये लौन्डा तो मेरी चूत का गुलाम बन गया. अब इसके लंड का सारा रस अपनी चूत से निचोड़ लूँगी. रवि रज़िया के पास आ गया.

रज़िया: (इधर उधर देखते हुए.) तू बड़े टाइम पर आया है. तुझे एक अच्छी खबर सुनानी है. जिसे सुन कर तू खुस हो जाएगा.

रवि: (रज़िया की बात को सुन कर रवि का दिल जोरों से धड़कने लगा) क्या बताना है काकी.

रज़िया: (रज़िया ने फिर से इधर उधर देखा. फिर उसने अपने बेटे को जो कि रवि से काफ़ी छोटा था उसे डाँट कर अंदर बेज दिया) तेरा काका आज शहर से ही अपने माँ बाबा से मिलने चला गया है. जब शंकेर (मजदूर जो राज के खेतों मे ही काम करता था पर उसका कमरा काफ़ी आगे था) वापिस आया तो उसने बताया था. कि वो अब परसों वापिस आने के लिए कह गया है.

रवि: तो फिर चाची (उत्सुकता के साथ)

रज़िया: एक बार रात को तू कैसे भी कर यहाँ आ जा. फिर देख तुझे सारी रात कैसे चुदाई के नये-2 खेल सिखाती हूँ.

रवि: पर मे रात को कैसे आ सकता हूँ.

रज़िया: अर्रे तू अभी हवेली जाकर बोल आ के तू आज रात मेरे साथ रहेगा. वैसे भी तेरे काका ने मुझ आज सुबह ही बोला था. कि उनके जाने के बाद मे तुझे अपने पास सुला लूँ. जा अब जल्दी से जाकर बोल आ अंधेरा होने वाला है. मे तेरे लिए यहीं खाना भी बना लूँगी.

रवि मूड कर वापिस जाने लगा.

रज़िया: अर्रे एक मिनिट रुक तो सही. (रवि रुक गया और रज़िया की तरफ देखने लगा. रज़िया के होंठो पर वासना से भरी हुई मुस्कान फैली हुई थी) पहले ये तो बता जा. सारी रात अपना लंड मेरी चूत मे डाल कर मुझ चोदेगा ना.

रवि रज़िया की बात को सुन कर झेंप गया. और तेज़ी से वापिस हवेली का तरफ भागते हुए जाए लगा. रज़िया रवि को इतना उत्सुक देख मुस्कुराने लगी. रज़िया के चूत तो ये सोच -2 कर ही पानी छोड़ने लगी थी. कि आज रात उसकी जी भर कर चुदाई हो गी.

रवि हवेली मे पहुँच कर सीधा हरिया काका के पास चला गया. और हरिया काका को ये बता कर कि रज़िया काकी घर पर अकेली है. और उसका मर्द उसे वहाँ सोने के लिए बोल गया है. इसलिए मैं वहीं जा रहा हूँ. ये कह कर वो वापिस खेतों मे आ गया. अब आसमान मे अंधेरा छाने लगा था. जब रवि रज़िया के कमरे मे पहुँचा . तो रज़िया कमरे के बाहर चूल्हेन पर खाना बना रही थी.रवि को देख रज़िया के होंठो पर मुस्कान फैल गयी.

रज़िया: तू कमरे के पीछे जाकर बैठ मैने वहाँ बाहर खाट बिछा रखी है.अगर बाहर तुझे किसी ने गुज़रते हुए देख लिया. तो बेकार ही सवाल करने आ जाएगा. तू बेफिकर हो कर अंदर बैठ . मे खाना लेकर आती हूँ.

रवि कमरे के पीछे की तरफ चला गया. क्योंकि कमरे मे उसका बेटा बैठा हुआ था. जो काफ़ी छोटा था इन्सब बातों को समझने के लिए. पर रज़िया कोई रिस्क नही लेना चाहती थी. रज़िया ने खाना तैयार कर परोस लिया. और अपने बेटे को कमरे मे खाना देने चली गयी. खाना देने के बाद वो बाहर आने लगी.

रज़िया: मुनसून मे ज़रा खेतों मे जा रही हूँ. मेरा पेट ठीक नही है. मे थोड़ी देर मे आती हूँ.

और ये कह कर रज़िया बाहर आई. और खाना प्लेट मे डालकर कमरे के पीछे आ गये. वो अपने साथ लालटेन भी ले आई थी. उसने रवि को खाना दिया. और बोली.

रज़िया: सुन मेरे राजा . मुन्ना अभी खाना खा रहा है. वो थोड़ी देर सो जाएगा. फिर मे तुझे अंदर बुला लूँगी.

रवि: (रज़िया की बात सुन कर थोड़ा परेशान हो गया.) पर काकी अगर वो जाग गया तो ?

रज़िया: तू इसकी फिकर ना कर. तूने मेरा कमरा देखा नही है अंदर से.

रवि: देखा है पर.

रज़िया: पर क्या मेरे कमरे के बीच मे एक दीवार है ना. जिसमे दो कमरे बने हुए हैं. यहाँ हम जलावन (आग जलाने के सुखी लकड़िया) रखते हैं मैने उसकी सफाई कर दी है. और नीचे एक बिस्तर बिछा लिया है. हम दोनो वहाँ ही लेट कर आराम से करेंगे.

रवि: पर काकी उसका तो दरवाजा नही है. वो तो खुला है. अगर मुन्ना अंदर आ गया. और उसने हमें देख लिया तो.

रज़िया: वो उसमे नही जाता. उसे चूहों से बहुत डर लगता है. चाहे जो मर्ज़ी हो जाए. पर वो उसमें नही जाता. मेने आजमा कर देखा हुआ है. अगर वो जाग भी गया, तो वो पहले मुझ आवाज़ लगाएगा. तू फिकर ना कर. अच्छा मे चलती हूँ. तू आराम से खाना खा और फिर लालटेन बंद कर देना. नही तो कोई देख सकता है. मे तुम्हें थोड़ी देर बाद कमरे मे लेकर चलती हूँ.

और रज़िया अपने कमरे मे चली गयी. रवि वहीं बैठ खाना खाने लगा. रवि खाना खा चुका था. अब आसमान मे पूरा अंधेरा हो चुका था. रवि ने लालटेन बंद की. और बर्तन को उठा कर कमरे के आगे आ कर बाहर रख दिए. फिर पीछे आकर चारपाई को दीवार से सटा कर खड़ा कर दिया. और रज़िया का इंतजार करने लगा.

रवि इंतजार किए जा रहा था. पर रज़िया बाहर नही आई थी. रवि तक कर कमरे के आगे की तरफ आने लगा. तभी उधर से रज़िया भी बाहर आ गयी.

रवि: (गुस्से से) क्या काकी इतनी देर लगा दी. मच्छरों ने काट खाया है मुझे.

रज़िया: ओह्ह्ह मेरे राज आ क्या बताऊ वो सोने का नाम ही नही ले रहा था. अब चल जल्दी अंदर चल.

अंधेर बहुत ज़्यादा था. इसलिए रवि रज़िया को ठीक से देख भी नही पा रहा था. जैसे ही दोनो कमरे के दरवाजे पर पहुँचे . रज़िया ने अपने होंठो पर एक उंगली रखते हुए. रवि को चुप रहने का इशारा किया. और फिर धीरे-2 कमरे का डोर खोला. और दोनो दबे पावं अंदर आ गये. जैसे ही दोनो अंदर आए. रवि का लंड उसके पाजामे मे तन कर झटके खाने लगा. रवि की हालत एक दम से रज़िया को देख कर खराब हो गयी.

रज़िया ने अपनी चोली पहले से उतारी हुई थी. और उसने अपने लहँगे को अपनी चुचियों पर बाँध रखा था. जो मुस्किल से उसकी आधी जाँघो को ढक पा रहा था. कमरे मे लालटेन जल रही थी.

रज़िया ने इशारे से रवि को दूसरे तरफ जाने के लिए कहा. रवि दूसरे कमरे मे आ गया. जो काफ़ी छोटा था. पर रज़िया ने सब ठीक से रख कर बिस्तर के लिए जगह बना ली थी. रज़िया ने एक बार चारपाई पर लेटे अपने बेटे को देखा. जो बहुत ही गहरी नींद मे था. और फिर रज़िया ने लालटेन के लौ को धीमा कर दिया. अब कमरे मे बहुत हल्की रोशनी रह गयी थी. रज़िया ने लाल टेन को दोनो कमरों के बीच मे दरवाजे पर लटका दिया.ताकि दोनो तरफ हल्की रोशनी रह सके.

रज़िया फिर रज़िया रवि के पास आकर नीचे बिछे बिस्तर पर बैठ गयी. और रवि को अपनी बाहों मे भर कर उसके होंठो को चूमने लगी. रवि के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी.

रवि: (अपने होंठो को अलग करते हुए) काकी मुन्ना इधर तो नही आएगा ना.

राइज़ा: (धीमी आवाज़ मे फुसफुसाते हुए) नही आएगा. जब मेरा मर्द मुझ कभी कभार दो चार महीने मे चोदता है. तू मुझे पूरा नंगा कर देता है. साले भोसड़ी वाले से कुछ होता तो हैं नही. बस ऐसे ही नंगा करके पानी छोड़ कर सो जाता है. और मे सारी रात ऐसे ही नंगी लेटी हुई अपनी चूत को मसलते रहते हूँ. कई बार मुन्ना उठा भी है. पर वो डर के मारे अंदर नही आता. चल अब मूड खराब ना कर.

फिर रज़िया पीठ के बल लेट गयी. और रवि को अपने ऊपेर खींचते हुए. उसके होंठो को चूमने लगी. रवि जो पहले ही सुबह से चुदाई के बारे मे सोच-2 कर गरम हो रहा था. उसने भी रज़िया के होंठो को अपने होंठो मे ले लिया. और ज़ोर-2 से चूसने लगा.

जब रज़िया ने देख के रवि अब खुद उसके होंठो को चूस रहा है. तो रज़िया ने अपने होंठो को ढीला छोड़ दिया. और रवि से अपने होंठो को चुस्वा कर मज़ा लेने लगी.

रज़िया ने अपनी बाहों को रवि की पीठ पर कस लिया. और अपनी टाँगों को थोड़ा सा फैला लिया. रवि जो कि रज़िया के ऊपेर लेटा हुआ था. रवि की कमर का नीचे का हिस्सा. रज़िया की टाँगों के बीच मे आ गया. इन सब हरकतों के दौरान जो लहंगा रज़िया ने ऊपेर करके अपनी चुचियों पर बाँध रखा था. वो अब उसकी कमर से भी ऊपेर हो गया था. और रवि का पाजामे मे तना हुआ लंड सीधा उसकी चूत के ऊपेर आकर चूत पर पाजामे के अंदर से रवि का सख़्त लंड लगा. रज़िया कसमसा गयी.

रज़िया: (अपने होंठो को रवि के होंठो से हटाते हुए)ओह्ह्ह रवीीईईई मेरे राज आआ. आज्ज्जज तू चाहे जितनाअ मर्ज़ी चोद्द्द्द ले मेरीई चूत को अहह चाहे तू अपना मुनसल सा लौदाा सारी राअतात्त मेरी चूत मे ओह्ह्ह्ह डाल कार्ररर लेटायाया रहह ऐसे हीए.

रज़िया आह ओह करती हुई बहुत ही धीमी आवाज़ मे सिसकारियाँ भर रही थी. और रवि रज़िया के गालों और नेक को अपने होन्ट से किस कर रहा था. रज़िया के रोम -2 मे मस्ती छाने लगी थी.

रज़िया: (अपने ऊपेर से रवि को हटाते हुए. और रवि रज़िया की जाँघो के बीच मे बैठा था) अहह बससस्स अब चल अपना लौडा जल्दी से निकाल ले. और बर्दास्त नही होता अब.

और रवि रज़िया की जाँघो के बीच मे खड़ा हो गया. और अपने पाजामे के नाडे को खोल कर अपना पाजामा निकाल कर एक तरफ रखे संदूक पर रख दिया. तब तक रज़िया अपनी चुचियों पर बँधे लहँगे के नाडे को खोल चुकी थी. और उसने अपने लहँगे को नीचे सरका दिया था. अब रज़िया का लहंगा उसके पेट मे सिमट गया था.

 


रज़िया की 38 साइज़ की साँवले रंग की चुचियाँ अब लालटेन की हल्कती रोशनी मे रवि की आँखों के सामने आ गयी थी. रवि का लंड रज़िया की चूत और चुचियों को देख कर झटके खाने लगा. और रज़िया का दिल रवि के मोटे लंड को देख जोरों से धड़कने लगा.

रज़िया: रवि अब वहाँ खड़ा-2 अपनी काकी की चूत और चुचियों को ऐसे ही घूरता रहे गा. जान कुछ करेगा भी. चल आ देख तेरे लौडे को देख मेरी चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया है.

रवि रज़िया की बात सुनते ही फिर से रज़िया के ऊपेर आ गया. और रज़िया की लेफ्ट चुचि के निपल को मुँह मे भर कर चूसना चालू कर दिया. रज़िया के मुँह से आह निकल गयी. और उसने रवि को अपनी बाहों मे भर लिया. नीचे रवि का तना हुआ मोटा लंड रज़िया की चूत की फांकों पर रगड़ खा रहा था.

रज़िया: ओह्ह्ह्ह बेटा अहह चूस ले चूस और ज़ोर से चुस्स्स्स ओह्ह्ह्ह अपनी काकी की चुचियों को आह अह्ह्ह्ह तू बहुत्त्त्त अच्छी चुचि चूस्ता हाईईइ ओह्ह तेरा काका साला भोसदिईईईई का हारमम्म की औलाद सीई कुछ भीई नही होताा. ओह्ह्ह बेटा औरर्र ज़ोर से चुस्स्स्स अपनी काकी की चुचियों कूऊऊ आह

रज़िया रवि के मोटे लंड के सुपाडे को अपनी चूत केए फांकों पर महसूस करके एक दम मस्त हो चुकी थी. और अब वो जल्दी से जल्दी अपनी चूत मे उसके मोटे लंड को ले लेना चाहती थी. लंड को चूत मे लेने की तड़प मे रज़िया का एक हाथ नीचे रवि के लंड पर पहुँच गया. और उसने रवि के लंड को अपनी हथेली मे पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया.

रज़िया: (काँपते हुए ) रवीीईईई उंह बसस्स अब जल्दी से अपना लाउडाया मेरी चूत मे घुसा दे ओह. अब मेरीईए चूत्त्त मे खुजली बढ़ गयी है.

रज़िया की बात को सुनते ही रवि ने धीरे -2 अपने लंड को अंदर पेलना चालू कर दिया. रज़िया जानती थी कि रवि इस मामले मे अनाड़ी है. इसलिए उसने रवि के लंड को अपने हाथ मे थामें रखा. और जब रवि के तने हुए मोटे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के छेद मे चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुस्स गया. तो रज़िया ने अपने हाथ से रवि के लंड को छोड़ दिया.

और रवि की पीठ पर अपने दोनो हाथों को कस लिया. रवि रज़िया की दोनो चुचियों को बारी-2 चूस्ते हुए धीरे-2 अपने लंड को रज़िया की चूत मे घुसता चला गया. और रवि के लंड का सुपाडा रज़िया की गुदाज फूली चूत की दीवारों को फैलाता हुआ चूत की गहराइयों मे उतरता चला गया. रज़िया अपनी चूत की दीवारों पर रवि के लंड के मोटे सुपाडे की रगड़ को महसूस करते हुए. और गरम होने लगी. और तेज़ी से रवि के बालों को सहलाने लगी.

कुछ ही पलों मे रवि का पूरा लंड उसकी चूत की गहराइयों मे समा गया. और रवि के लंड का सुपाडा रज़िया की बच्चेदानी से जा टकराया. और रज़िया के मुँह से संतुष्टि भरी अहह निकल गयी. रज़िया ने अपनी मदहोशी से भरी आँखों से रवि की तरफ देखा. रवि एक दम मस्त होकर रज़िया की चुचियों को चूस रहा था. और दोनो हाथों से उसकी बड़ी-2 चुचियों को पकड़ कर मसला रहा था.

रज़िया अपनी चूत मे रवि के लोहे जैसे सख़्त लंड को फँसा हुआ महसूस करके एक दम मस्त हुई जा रही थी. उसे रवि पर बहुत प्यार आ रहा था. रज़िया ने अपने दोनो हाथों से रवि के फेस को पकड़ कर ऊपेर उठाया. रज़िया का निपल पक की आवाज़ से रवि के मुँह से बाहर आ गया. और रवि रज़िया की वासना से भरी आँखों मे देखने लगा.

दोनो बहुत तेज़ी से साँस ले रहे थे. आग दोनो तरफ भड़की हुई थी. रज़िया ने रवि के फेस को अपने हाथों मे लेकर पागलों की तरहा चूमना चालू कर दिया. और उसके पूरे चहरे पर चुंबन की बोछार कर दी. फिर रज़िया ने अपने कांप रहे होंठो को रवि के होंठो पर रख दिया. और रवि के मुँह मे अपनी जीभ डाल कर रवि की जीभ से रगड़ने लगी. नीचे रवि का लंड उसकी चूत की गहराइयों मे फँसा हुआ था. रवि से अब बर्दास्त करना मुस्किल हुआ जा रहा था.

उसने नीचे से अपनी कमर को धीरे-2 ऊपेर की ओर उठाना चालू कर दिया. रवि का लंड रज़िया की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ बाहर आने लगा. जिससे रज़िया के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और उसने रवि को अपनी बाहों मे कस लिया. जैसे ही रवि का लंड उसके सुपाडे तक बाहर आया. उसने अपनी कमर को पूरी रफ़्तार से नीचे की ओर धेकेल दिया. लंड पूरी रफतार से उसकी चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ फिर चूत की गहराइयों तक उतार कर रज़िया की बच्चेदानी जा टकराया.

रज़िया का पूरा बदन कांप गया. उसने अपने होंठो को रवि के होंठो से हटाया. और उसके मुँह से अह्ह्ह्ह निकल गयी. और रवि की ओर वासना भरी मुस्कान के साथ देखते हुए बोली.

रज़िया: (अपने होंठो पर मुस्कान लिए) आह छील कर रख दी मेरी चूत ओह्ह्ह धीरे नही चोद्द्द्द्द सकता. मेरी नाज़ुक सी चूत को छील कर रख दिया. आह ऐसे भी कोई किसी की चूत्त्त को चोदता है…

रवि: (रज़िया की बात सुन कर एक दम से घबरा गया) क्या हुआ काकी. बहुत दर्द हो रहा है. मुझे क्या पता था कि आप को इतना दर्द होगा. मुझ माफ़ कर दो. अब मे धीरे-2 करूँगा. सच मे जैसे आप कहो.

रज़िया: (दिल ही दिल मे खुस होते हुए) अरे नही-2 मे तो ऐसे ही मज़ाक कर रही थी. तू जैसी चाहे मुझे चोद सकता है. जितना जोर्र्र से अपना लौडा अपनी काकी की चूत्त्त्त्त मे पेलना चाहता हाीइ. पेल दे. मे कुछ नही कहूँगी. पर हां किसी कुँवारी लोंड़िया को इतनी जोर्र्र से मत चोदना. जब तेरे मोटे लंड्ड्ड से एक बच्चा पैदा की हुई मेरी जैसी चूत्त के दीवारों को हिला कर रख दिया. तो कुँवारी लड़की की चूत तू सच मे फदद्ड़ हीईए देगा.

रज़िया की बात को सुन कर रवि की जान मे जान आई. औरर्र रज़िया की बातों ने उसमे नया जोश भर दिया. और रवि ने बिना कुछ बोले अपने लंड को तेज़ी से रज़िया की चूत मे तेज़ी से अंदर बाहर करना चालू कर दिया. रवि का मोटा लंड अब रज़िया की चूत की दीवारों से बुरी तरहा रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा. और रज़िया के बदन मे मस्ती छाने लगी.

रज़िया: ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह धीरीईए धीरीए करूऊऊओ ओह हइई माररर डाला उफफफफफ्फ़ सुन्न्ं रवि ओह्ह्ह ओह मुनाअ उठ जाएगाअ ओह उंह हां सलीई चोद्द्द्द अपनी ककीइ को ओह्ह्ह्ह अपने मुनसल लंड सीई और्र जोर्र्र से चोद्द्द्द ओह्ह्ह .

रवि का लंड अब पूरी तरहा रज़िया की चूत के पानी से भीग चुका था. और फॅक-2 की आवाज़ से अंदर बाहर हो रहा था. रज़िया भी पूरी मस्त हो चुकी थी. और उसने अपनी टाँगों को उठा कर रवि के चुतड़ों पर कस लिया. और अपने होंठो को दाँतों मे भेंच कर अपनी गान्ड को ऊपेर की तरफ उछाल कर अपनी चूत को रवि के लंड पटकने लगी.

रवि ने जब रज़िया को ऐसे गान्ड उछाल कर अपना लंड अपनी चूत मे लेते देखा. तो रवि और पागल हो गया. और पूरे ज़ोर से अपने लंड को पूरा बाहर निकाल कर ज़ोर-2 से अंदर पेलने लगा. दोनो की जाँघो के आपस मे टकरा कर तप-2 की आवाज़ करने लगी.

रज़िया: ओह्ह्ह और चोद्द्द्द्द ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उंह मेरीए चूत पानी छोड़ने वाली है ओह्ह्ह्ह रवि बेटा ओह ओह ओह उईईई म्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईई ओह

और रज़िया का बदन ढीला पड़ गया. उसकी टाँगें जो रवि के चुतड़ों पर थी. नीचे हो गयी. और रवि की बाहों मे भरते हुए उसके होंठो को चूमने लगी. रवि भी झड़ने के करीब था. इसलिए वो और तेज़ी से रज़िया की चूत मे अपना लंड पेलने लगा. और कुछ ही पलों मे रवि का बदन अकड़ गया. और उसने रज़िया की चूत मे अपने गाढ़े पानी की बौछार कर दी. जैसे ही रवि का झड़ना बंद हुआ. रवि रज़िया के ऊपेर लूड़क गया.

रज़िया रवि का लंड अपनी चूत मे लिए हुए. वैसे ही लेटी रही. और रवि के बालों को सहलाने लगी. रवि के गाल रज़िया की चुचियों पर दबे हुए थे. और रवि का आधा तना हुआ लंड अभी भी रज़िया की चूत मे ही था.

. और रवि का लंड आधा तना हुआ लंड अभी भी रज़िया की चूत मे ही था.

रज़िया: रवि तूने तो कामाल कर दिया. मेरी चूत को खूब रगड़ -2 कर चोदा है तूने.

रवि रज़िया के ऊपेर से उतर कर उसकी बगल मे लेट गया. रज़िया ने उसकी तरफ करवट ली. और उसके साथ चिपक कर लेट गये. दोनो एक दूसरे के बाहों मे समाए हुए थे. तभी बाहर बिजली कड़कने की आवाज़ आई. दोनो एक पल के लिए सहम गये. पर जैसे ही बारिश की आवाज़ उनको सुनाई दी. दोनो को थोडा सकुन मिला.

रज़िया: (रवि के होंठो को चूमते हुए) रवि तू मुझे रोज चोदेगा ना.

रवि: हां काकी.

रज़िया: जिस तरहा तू मेरी चूत मे अपना लंड कस कस के मार रहा था. वैसे तो बड़े-2 आदमी नही कर पाते. सच मे छोरे तूने आज अपनी काकी का दिल जीत लिया है.

रज़िया अपना एक हाथ नीचे ले गयी. और रवि के लंड को पकड़ कर धीरे-2 सहलाने लगी. रज़िया ने एक टाँग उठा कर रवि की जाँघ पर रख दी. और फिर दूसरे हाथ से रवि का हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर ले गये.

रज़िया: रवि मेरी चूत को सहला ना.

जैसे ही रवि का हाथ रज़िया की चूत पर लगा. रवि का हाथ रज़िया की चूत के पानी से गीला हो गया.

रवि: काकी आपकी चूत तो अभी भी पानी छोड़ रही है.

रज़िया : (अपनी चूत पर रवि के हाथ को महसूस करके उसे एक दम लिपट गयी.) तेरे लंबे लंड ने मेरी ऊट को गहरा खोद-2 कर पानी निकाल दिया है. सच मे जालिम जो भी तेरे बीवी बनेगी. उसके तो भाग खुल जाएँगे. रोज तेरा लंड अपनी चूत मे लेने के लिए मचले गी.

रवि के सिकुडे हुए लंड मे धीरे-2 फिर से जान आने लगी. जैसे ही रवि का लंड मे थोड़ा सा तानव आया. रज़िया उठ कर रवि के पैरों को फैला कर उसकी जाँघो मे बैठ गयी. और रवि के लंड के सुपाडे को धीरे-2 अपने अंगूठे से सहलाने लगी. रवि के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी.

रवि: आह काकी क्या कर रही हो. गुदगुदी हो रही है.

रज़िया: आगे -2 देख. मे तुझे चुदाई के क्या क्या रंग दिखाती हूँ.

और ये कहते ही. रज़िया ने झुक कर रवि के लंड को मुँह मे ले लिया. और रवि के लंड के सुपाडे को होंठो मे दबाए हुए आगे पीछे करने लगी. रवि तो मस्ती के सागर मे गोते खा रहा था. उसने रज़िया के सर को दोनो हाथों से पकड़ लिया. और रज़िया अपने मुँह के अंदर लिए हुए रवि के सुपाडे को अपनी जीभ की चोंच से कुरदेन लगी. रवि की कमर मस्त हो कर झटके खाने लगी.

 


रवि का लंड कुछ ही देर मे तन कर फूल गया. रज़िया का दिल फिर से जोरों से धड़कने लगा.वो अपनी मुट्ठी मे रवि के लंड को भींचे हुए हाथ से हिलाते हुए चूस रही थी. रवि का लंड रज़िया के थूक से सन चुका था. जब रवि का लंड पूरी तरह ना खड़ा हो गया. तो रज़िया ने रवि के लंड को मुँह से निकाल दिया. और रवि की बगल मे अपने पैरों को चौड़ा कर लेट गयी.

रज़िया: आ रवि अब जल्दी से अपना लौडा मेरी चूत मे घुसा दे.

रवि उठ कर रज़िया की जाँघो मे आ गया. और रज़िया की टाँगों को मोड़ कर ऊपेर उठा दिया. रज़िया की चूत का छेद रज़िया के रस से भीगा हुआ था. और कभी सिकुड और फैल रहा था. रवि का लंड रज़िया की चूत के रसीले छेद को देख कर झटके खाने लगा. रवि एक टक रज़िया की चूत के छेद को घूरे जा रहा था.

रज़िया: क्या देख रहा है छोरे.

रवि: काकी वो आपकी चूत का छेद ऐसे क्यों खुल और बंद हो रहा है.

रज़िया: (रवि की बात सुन कर मुस्कुराने लगी. उसे रवि के भोले पन पर बहुत प्यार आ रहा था) अर्रे मेरे राजा . वो तो तेरे लंड के लिए तड़प-2 कर अपने आँसू बहा रही है.

रवि: काकी मे एक बार इसे प्यार करना चाहता हूँ.

रज़िया: तो कर ले ना किसने मना किया है. ये चूत तेरी ही तो है.

और रज़िया ने अपने दोनो हाथों को नीचे ले जाकर अपनी उंगलियों से फैला लिया. जिससे रज़िया की चूत का गुलाबी छेद पूरी तरह खुल कर रवि की आँखों के सामने आ गया. और रवि अपनी हसरत भरी नज़रों से रज़िया की चूत के लबलबा रहे छेद को देखने लगा. फिर कुछ देर देखने के बाद रवि रज़िया की चूत के ऊपेर झुक गया. और अपने मुँह को रज़िया की चूत के बहते हुए छेद पर लगा दिया.

रज़िया: ओह्ह्ह्ह रवि मेरे राजा एयाया बेटा ओह्ह्ह्ह हाआँ चुस्स्स ले अपनी काकी की चूत का रस ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईई

रवि धीरे-2 अपनी जीभ बाहर निकाल कर रज़िया की चूत के भीगे हुए छेद को चाटने लगा. पर कुछ ही पलों मे रज़िया की चूत का रस रवि के मुँह मे घुल गया. जिसका रवि आदि नही था. उसे उबकाई आने लगी.

रज़िया: (रवि की हालत देखते हुए) एक आहह एक मिनिट रुक बेटा ओह्ह्ह्ह. जा वहाँ से वो कपड़ा उठा ले आ.

रवि ने उस ओर देखा जिस ओर रज़िया इशारा कर रही थी. दीवार के साथ पड़े संदूक के ऊपेर एक पुराना सा कपड़ा रखा हुआ था. रवि उठ कर वहाँ गया. और कपड़ा उठा कर फिर से रज़िया की जाँघो के बीच मे बैठ गया. रज़िया ने रवि के हाथ से कपड़ा लिया, और अपनी चूत को सॉफ करने लगी. जब रज़िया की चूत एक दम सूख गयी. तो रज़िया ने कपड़े को एक तरफ फेंक दिया.

रज़िया: अब चाहे जितना दिल करने उतना प्यार कर ले अपनी काकी की चूत को, मे भी तो बरसों से तड़प रही हूँ, कि कोई मेरी चूत को इस तरहा प्यार करने.

रवि रज़िया की वासना से भरी आँखों मे फिर से देखते हुए. उसकी चूत पर झुकने लगा. रज़िया अपनी साँसे रोके अपनी चूत पर रवि के होंठो के स्पर्श का इंतजार करने लगी. और जैसे ही रवि के होंठो ने रज़िया की फूली हुई चूत को छुआ. रज़िया ने अपने होंठो को दाँतों मे भींचते हुए अपने आँखों को बंद कर लिया.

रज़िया: उम्ह्ह्ह्ह्ह ओह रवि. हाआअँ आईसीई ही अपनी काकी कीयेयी चूत को प्यार करो. ओह्ह्ह सच मे बहुत अच्छा लग रहा है. ओह मेरी राजा एयेए बेटा. तूने तो लगता हाई पीछे से ही सब कुछ सीख कर आया है. उम्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह रवि. और ज़ोर सीई चूस. ओह ओह .

रज़िया का बदन मस्ती मे कांप रहा था. और रज़िया अपने दोनो हाथों की उंगलियों को रवि के बालों मे घुमा रही थी. और धीरे-2 अपनी कमर को उचका कर रवि के मुँह पर अपनी चूत को रगड़ रही थी.

रज़िया एक दम गरम हो चुकी थी. उसकी चूत मे फिर से उसका रस आने लगा था. रज़िया ने अपने हाथों से रवि के कंधों को पकड़ कर ऊपेर खींच लिया. और अपने मस्ती से भरी हुई आँखों से रवि को देखने लगी.

रज़िया: (काँपती हुई आवाज़ मे) ओह्ह रवि आज तूने मस्त कर दिया. ओह्ह्ह बेटा अब जल्दी से अपना लंड मेरी चूत मे घुस्सा दे. ओह्ह्ह रवि.

रज़िया ने एक हाथ से रवि के लंड को जड से पकड़ लिया, और लंड के सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर टिका दिया. और मदहोशी से भरी आवाज़ मे बोली.

रज़िया: ले मेरी राजा आ, अपनी रज़िया की चूत मे डाल दे अपना लौडा.

ये बात सुनते ही, रवि ने बिना कोई पल गँवाए ज़ोर दार धक्का मारा. लंड चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ एक ही बार मे आधा अंदर घुस्स गया. और रज़िया के मुँह से मस्ती और दर्द से भरी हुई आह निकल गयी.

रज़िया: ओह जालिम क्यों कहर ढा रहा है, अपनी काकी की चूत पर. ओह्ह्ह धीरे कर्र. बहुत दर्द होता है.

रवि को इस रात की पहली चुदाई की घटना याद आ गयी. जिसमे रज़िया ने उसे कहा था. वो जैसे चाहे उसे चोद सकता है. ये सोचते ही रवि के दिल की धड़कने बढ़ गयी. और रवि ने रज़िया की टाँगों को घुटनो से मोड़ कर उसके सर के ऊपेर कर दिया. और एक और ज़बर्दास्त धक्का मारा. इस बार रवि का लंड और तेज़ी से रज़िया की चूत की दीवारों को फैलाता हुआ पूरा अंदर घुस गया, और रज़िया की बच्चेदानी से जा टकराया.

रज़िया: अहह मार्र डाला ओह रवीीई धीरीए-2 कर्र ओह्ह्ह.

रवि: (तेज़ी से साँस लेते हुए) काकी मे तुझे कस-2 के चोदना चाहता हूँ. मे तेरी चूत को फाड़ना चाहता हूँ.

रज़िया: (अपनी चूत को रवि के लंड पर कसी हुई महसूस करके गरम होते हुए) आह रवि जैसी मर्ज़ी चोद ले . जितने जोर्र्र से चोदना चाहता है चोद ले ओह्ह्ह बससस्स एक वादा कारर्र मुझे कि तू मुझे जब भी टाइम मिलेगा चोदने आ जाएगा.

रवि: हां काकी जब भी तुम कहो गी. मे तुम्हें ज़रूर चोदुन्गा.

रज़िया: ( रज़िया के होंठो पर रवि की ये बात सुन कर मुस्कान फैल गयी.) एक मिनिट यारा. अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल. फिर तुझे बताती हूँ. जब किसी की जोरदार चुदाई करनी हो तो कैसे करते हैं.

रवि ने अपने लंड को रज़िया की चूत से बाहर निकाल लिया. जो रज़िया की चूत के पानी से एक दम भीगा हुआ था. जैसे ही रवि ने अपना लंड रज़िया की चूत से निकाला. रज़िया उठ कर उल्टी हो गयी. और डॉगी स्टाइल मे आ गयी. फिर रज़िया अपनी गान्ड को उठा लिया. और अपनी कमर को अंदर की ओर मोडते हुए आगे से नीचे झुक गयी. जिससे उसकी फूली हुई गीली चूत पीछे से बाहर की तरफ आ गयी.

ये सब देख रवि का लंड और तेज़ी से झटके खाने लगा. उसके लंड के नसें और कस गयी.

रज़िया: आज्जा मेरे शेर, अब डाल दे अपना मुनसल मेरी चूत मे. फिर मेरे गान्ड को पकड़ कर ज़ोर-2 से अपना लंड मेरी चूत मे पेलना.

रवि रज़िया की बात सुन कर उसके पीछे आ गया. और घुटनो के बल बैठ कर थोड़ा सा उँचा हो गया. जिससे उसका तना हुआ मोटा लंड उसकी चूत के छेद के बराबर हो गया. रज़िया अपने एक हाथों को अपनी दोनो जाँघो मे से निकाल कर अपनी चूत की फांकों को फैलाए हुए थी.

ये देख रवि के लंड और तन गया, और रवि ने अपने लंड के सुपाडे को रज़िया की चूत के गुलाबी छेद पर टिका दिया. जैसे ही रवि के लंड का गरम सुपाडा रज़िया की चूत के छेद पर लगा. रज़िया के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और उसकी चूत की दीवारों मे सरसराहट होने लगी. रज़िया ने अपना हाथ वहाँ से हटा लिया. और दोनो कोहानियों को नीचे टिका दिया.

जैसे ही रज़िया ने अपनी चूत की फांकों को चौड़ाया. उसकी चूत की फाँकें रवि के मोटे लंड के गुलाबी सुपाडे के चारों ओर कस गयी. जैसे वो रवि के लंड को अपने अंदर खींच लेना चाहती हों.

 


रज़िया: अहह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह बेटा हान्णन्न् अब मेरीई गान्ड को पकद्दद्ड कर फैला कर्र दबोच लीईए ओह हां ऐसे हीई ( रज़िया की बात सुन कर रवि ने रज़िया के चुतड़ों को दोनो हाथों मे पकड़ कर दोनो ओर फैला दिया था) हाआन अब ऐसे हीईए पकड़े-2 अपना लंड को धीरीई धीरे अंदार्ररर कारर्र. तेज़ी ना करना. नही तो बाहर आ जाएगा.

रवि ने अपने लंड के सुपाडे को धीरे-2 रज़िया की चूत के छेद पर दबाना चालू किया. रवि के लंड का सुपाडा रज़िया की चूत के छेद को फैलाता हुआ अंदर घुस गया. और रज़िया की चूत की दीवारों ने रवि के लंड के सुपाडे को अपने अंदर कसना चालू कर दिया.

रज़िया: उंह हाआँ रविई अब जैसे चाहे चोद्द्द डाल अपनी काकी को. खूब कस कस के पेलना अपना लौडा मेरी भोसड़ी मे.

रवि के होंठो पर रज़िया की बात सुन कर मुस्कान फैल गयी. उसने रज़िया के चुतड़ों को और फैला कर पकड़ लिया. और अपनी साँस को रोकते हुए. अपनी पूरी ताक़त लगा कर अपनी कमर हिला दी. लंड का सुपाडा चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा.

रज़िया: ओह मारा डाला ओह जान निकाल दीई छोरे तूने. धीरे-2 ओह

रवि रज़िया की चीखे सुन कर और जोश मे आ गया. और रज़िया की गान्ड को हाथों मे दबाए हुए अपनी कमर को और तेज़ी से हिलाने लगा. रज़िया की चूत पानी से भीग चुकी थी. और लंड रज़िया की चूत मे फिसलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था. और रज़िया की चूत से फॅक-2 की आवाज़ आ रही थी.

रवि इस आवाज़ को सुन कर और कामुक हो गया. और ताबडतोड धक्के लगाने चालू कर दिए. अब रवि की जांघे रज़िया के चुतड़ों से टकरा कर साथ-2 मे थप-2 की आवाज़ भी करने लगी. उस छोटे से कमरे का मोहोल चुदाई से भरपूर हो गया.

रज़िया: हान्णन्न् बएटाा हान्ंणणन् आईसीए ही जोर्र- सीए मारररर अपना लौदाअ अपनी काकी की बुर्र मे ओह्ह्ह ओह्ह्ह बहुत्त्त मोटाआ है रे तेरा लंड ओह्ह्ह्ह और जोर्र्र्रर से उम्ह्ह्ह्ह्ह उन्घ्ह्ह्ह लगाअ साले अपनी गान्ड्द्द की पूरी ताक़त लगा दे.

रवि रज़िया की बातों को सुन कर और जोश मे आ गया. और रज़िया के चुतड़ों से हाथों को हटा कर,रज़िया के खुले हुए बालों को पकड़ लिया. और अपना लंड पूरा निकाल-2 कर रज़िया की फूली हुई चूत मे पेलने लगा. और रज़िया की चूत की दीवारों को रवि के मोटे लंड ने हिला कर रख दिया.

रज़िया: अहह ओह ओह ओह्ह्ह्ह धीरे ओह्ह उम्ह्ह्ह्ह चोद्द्द्द साले और्र जोर्र्र सीई चोद्द्द अहह फाड़ दे अपनी काकी की चूत को. बोल मुझे रोज्ज्ज चोदेगा ना.

रवि: हा हा हा हाआँ काकी रोज्ज्ज चोदुन्गा तुझे. ओह्ह हा हा.

रज़िया भी अपनी गान्ड को पीछे की तरफ पटकने लगी. और दोनो की जांघे आपस मे टकरा कर थप-2 की आवाज़ कर रही थी. रज़िया का बदन फिर से अकड़ने लगा. रज़िया फिर से झड़ने के करीब थी.

रज़िया: ओह राज एयेए सचह मे तेरे लंड्ड मे बहुत जान हीई रीई. ओह्ह्ह्ह मेरी चूत्त्त तो फिरररर से पानी छोड़ने वाली है. और्र्र्ररर जोर्र्र्रर लगा रवीीई ओह बस बस होनीईए वाला है.

रवि: अह्ह्ह्ह काकी मेरी भी होने वाला है.

रज़िया: निकाल दे मेरी मुन्ना मेरी चूत मे निकाल दे अपना सारा माल. ओह्ह्ह्ह ओह

और दोनो झड़ने लगे. जैसे ही रज़िया के बाद रवि के लंड ने पानी छोड़ा. रज़िया आगे की तरफ लूड़क गयी. लंड पच के आवाज़ से रज़िया की चूत से बाहर आ गया. और रज़िया और रवि का पानी नीचे बिछे बिस्तर पर गिरने लगा. रवि निढाल होकर रज़िया की बगल मे लेट गया. दोनो अपनी साँसों को दुरस्त करने लगे. रज़िया काफ़ी देर तक वैसे ही लेटी रही. फिर उसने रवि की तरफ करवट ली, और उसे अपने से चिपका लिया.

कुछ देर तक लेटे रहने के बाद रवि को नींद आने लगी. आख़िर वो पिछले कई दिनो से काफ़ी मेहनत जो कर रहा था. रज़िया भी जानती थी. की रवि के उम्र अभी कुछ नही है. इससे वो उस पर ज़्यादा ज़ोर नही देना चाहती थी. वो तो बस धीरे-2 रवि के लंड का मज़ा लेना चाहती थी. और वो ये समझ रही थी, कि अब रवि उसकी मुट्ठी मे है. दो बार झड़ने के बाद रज़िया भी संतुष्ट थी. इसीलिए उसने रवि को कपड़े पहनने के लिए कहा. रवि अपना पाजामा पहन कर लेट गया. दोनो को कब नींद आ गयी. उन्हे पता नही चला.

रज़िया रोज सुबह 5 बजे उठ जाती थी. आदत के अनुसार को अगले दिन भी 5 बजे उठ गये. और बाहर खेतों मे फ्रेश होकर वापिस आ कर मुँह हाथ धोने के बाद चाइ बना कर रवि को जगा कर उसे चाइ दे दी. दोनो ने कुछ देर बातें की. रज़िया ने खिड़की मे से झाँक कर देखा. अब बाहर उजाला होने लगा था. उसने रवि को हवेली वापिस जाने को बोल दिया.

रवि भी ख़ुसी -2 उठ कर कमरे से बाहर आ गया. उजाला फैल चुका था. इस लिए वो सीधा हवेली की तरफ चल पड़ा. हवेली मे पहुँच ते ही वो सीधा हवेली के पीछे बने अपने कमरे मे चला गया. और वहाँ जाकर सो गया. वो रात को अपनी नींद पूरी नही कर पाया था.करीब 11 बजे हरिया ने उसे आकर उठाया..

हरिया: उठ रवि बेटा. आज बाबू जी के साथ नही जाना क्या.

रवि: (उठते हुए) हां काका जाना है. मे अभी आता हूँ.

और रवि उठ कर हवेली के पीछे बने हुए बाथरूम मे चला गया. जो हवेली के नौकरों के लिए था. जैसे ही वो बाथरूम मे घुसा. और फ्रेश होकर आगे हवेली मे आ गया. अंदर हाल मे राज और डॉली दोनो नाश्ता कर रहे थे. रवि उनको देख कर हाल के एक कोने मे चला गया. और चेर पर बैठ कर इंतजार करने लगा.

थोड़ी देर बाद हरिया काका रवि के लिए भी खाना ले आया. और रवि वहीं नीचे बैठ कर खाना खाने लगा. जब सब बे खाना खा लिया. तब रोमा दीनू काका की लड़की झूठे प्लेट उठाने आई . राज उसे उस दिन के बाद अब पहली बार हवेली मे देख रहा था. राज ने उसे झट से पहचान लिया.

राज : तुम रोमा हो ना दीनू की बेटी.

रोमा: जी बाबू जी.

राज : घर का काम समझ मे आ गया.

रोमा: (सर झुकाए हुए)जी आ गया.

राज : अच्छा अब दिल लगा कर काम करो. हां सुनो ये मेरी बहन है डॉली. इनका पूरा ख्याल रखना.

कमला: ठीक है बाबू जी.

जैसे ही राज चेर से खड़ा हुआ. रवि राज के पास आ गया.

रवि: बाबू जी आज भी ज़मीन देखने चलेंगे.

राज : हां चलना है. पर आज मेरे पास टाइम कम है. हम जल्दी वापिस आजाएँगे. मुझ आज विशाल के घर भी जाना है. डॉली मुझ कल मेरा एक पुराना दोस्त मिल गया था. आज उसके बेटे की बर्तडे पार्टी है. उसने मुझ इन्वाइट क्या है. मुझे वहाँ शाम को जाना है. तुम साहिल का ख़याल रखना.

डॉली: जी भैया. आप बेफिकर हो कर जाए. यहाँ पर मेरा ध्यान रखने के लिए बहुत से नौकर हैं ही.

राज : चलो रवि फिर हमें आज जल्दी वापिस भी आना है.

और दोनो हवेली से निकल कर खेतों की तरफ चल पड़े. उस दिन रवि ने राज को दोपहर तक लगभग उसकी आधी ज़मीन दिखा दी थी. दोनो दोपहर को घर वापिस आ गये. रवि ने जैसे ही खाना खाया. उसके दिल मे रज़िया को मिलने की इच्छा जागने लगी. वो खाना खा कर खेतों की तरफ चला गया. जैसे-2 वो रज़िया के कमरे की तरफ बढ़ रहा था. उसका दिल जोरों से धड़क रहा था.

 


जब वो रज़िया के कमरे के सामने पहुँचा . तो उसे वहाँ रज़िया नही दिखाई दी. रज़िया का बेटा वहाँ खेल रहा था.

रवि: मुन्ना काकी कहाँ पर हैं.

मुन्ना: (खेतों की तरफ इशारा करते हुए) वो माँ उधर गयी है.

रवि: काका वापिस आ गये.

मुन्ना: नही शाम को आएँगे.

और रवि खेतों मे चला गया. दो खेतों के किनारों के बीच मे चलते हुए, वो काफ़ी अंदर तक आ गया. दोनो खेतों मे बाजरें की बड़ी-2 फसल उगी हुई थी. तभी उसे रज़िया के गुनगुनाने की आवाज़ सुनाई दी. रवि आवाज़ की दिशा मे बढ़ने लगा. और कुछ दूर और चलने पर वो रज़िया के पास पहुँच गया. जैसे ही रज़िया ने रवि को देखा. रज़िया के होंठो पर मुस्कान फैल गयी.

रज़िया: (मुस्कुराते हुए) क्यों रे कहाँ था तू.

रवि: वो मे बाबू जी के साथ गया था.

रज़िया: और सुना कल रात को मज़ा आया.

रवि: (शरमाते हुए) हां.

रज़िया अपने काम मे लग गयी. रज़िया पंजों के बल बैठ कर घस्स काट रही थी. उसकी पीठ रवि की तरफ थी. जैसे ही रज़िया घास काटने के लिए आगे की ओर झुकती. तो उसकी मोटी गान्ड पीछे से उठ जाती. जो रवि को लहँगे के ऊपेर से ही गरम कर रही थी.

रवि: काकी एक बार और करने दो ना.

रज़िया: (पीछे मूड कर देखते हुए) अच्छा क्या दूं बोल के बता ना.

रवि: (शरमाते हुए) च चूत काकी.

रज़िया: (उठ कर रवि की ओर आते हुए) चल लेट जा पहले देखूं तो सही. तेरा लौडा खड़ा भी हैं या कल रात ही उसकी सारी अकड़ निकल गयी.

रवि उसी तरपाल पर खड़ा हो गया. और अपने पाजामे का नाडा खोल कर पाजामे को नीचे कर दिया. रवि का तना हुआ 8 इंच का मोटा लंड उछल कर बाहर आ गया. रज़िया की आँखों मे रवि के लंड देख कर चमक आ गयी.

रज़िया: (गहरी साँस लेते हुए) रवि तेरा हथियार तो सच मे लोहे की सलाख जैसा तना हुआ हे. (और रज़िया ने रवि के लंड को अपनी मुट्ठी मे भर लिया.)

रवि ने रज़िया को अपनी बाहों मे कस लिया. और रज़िया के होंठो पर अपने होंठो को रख दिया. रज़िया ने भी एक हाथ से लंड को थामे हुए दूसरे हाथ को रवि की पीठ पर कस लिया. और अपने होंठो को ढीला छोड़ कर रवि के होंठो से अपने होंठो को चुसवाने लगी. और दूसरे हाथ से धीरे-2 रवि के लंड को हिलाने लगी. दोनो पागलों की तरहा एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे.

थोड़ी देर एक दूसरे के होंठो को चूसने के बाद दोनो ने अपने होंठो को अलग किया. और रज़िया रवि की आँखों मे देखते हुए घुटनो के बल नीचे बैठ गयी. और रवि के लंड के सुपाडा को मुँह मे लेकर चूसना चालू कर दिया. रवि का बदन एक दम से अकड़ गया. उसने रज़िया के सर को दोनो हाथों से कस के पकड़ लिया. और धीरे-2 अपनी कमर को हिलाने लगा.

रज़िया अपने दोनो हाथों से रवि के चुतड़ों को थामें रवि के लंड को अपने मुँह के अंदर बाहर कर रही थी. रवि का लंड रज़िया के थूक से सन कर चिकना हो गया था. लंड और कड़ा हो चुका था. नीचे रज़िया की चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया था.

रज़िया ने रवि के लंड को मुँह से बाहर निकला, और रवि के पाजामे को खींच कर निकाल दिया,और तरपाल पर रख दिया.

रज़िया: चल अब जल्दी से लेट जा. और अपने टाँगों को पूरा फैला ले.

रवि जल्दी से तरपाल पर लेट गया. और अपनी टाँगों को फैला लिया. उसका लंड उसकी टाँगों के बीच मे झटके खा रहा था. रज़िया ने अपनी लहँगे को अपनी कमर तक उठा लिया. उसकी हुई फूली हुई चूत देख रवि का लंड और झटके खाने लगा. रज़िया रवि की टाँगों के बीच मे आ गये, और रवि की तरफ पीठ करके उसकी जाँघो के बीच मे पंजों के बल उकड़ू बैठ गये. और फिर रज़िया ने अपना एक हाथ अपनी दोनो जाँघो के बीच मे से ले जाकर रवि के मोटे कड़े लंड को पकड़ लिया. और अपनी चूत के छेद पर लगा दिया.

जैसे ही रवि के लंड का गरम सुपाडा रज़िया की चूत के छेद पर लगा. रज़िया के मुँह से आहह निकल गयी. और वो रवि के लंड को थामे-2 अपनी चूत को रवि के लंड पर दबाने लगी. रवि के लंड का सुपाडा रज़िया की चूत की दीवारों को फैलाता हुआ, धीरे-2 अंदर जाने लगा. जैसे ही रवि का लंड रज़िया की चूत मे पूरा उतरा. रज़िया ने अपनी दोनो हथेलयों को ज़मीन पर टिका लिया. और पंजों के बल उकड़ू बैठे हुए, धीरे-2 अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे उछालने लगी. रवि के लंड का मोटा सुपाडा रज़िया की चूत के दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होने लगे.

रज़िया: अहह ओह बएटाा रवीिइ देखह नाआ आजज्ज कल मेरी छूट मे कुछ जयदा ही खुजली होनईए लगी है. ऑश ऑश

और रज़िया अब पूरी तरहन गरम हो कर तेज़ी से अपनी गान्ड उछाल-2 कर रवि के लंड पर अपनी चूत को पटकने लगी. रज़िया का लहंगा उसकी कमर तक चढ़ा हुआ था. जैसे ही वो अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछालती. रज़िया की गान्ड फैल जाती, और रज़िया की गान्ड का छेद रवि की आँखों के सामने आ जाता.

ये सब देख-2 कर रवि भी पूरी मस्ती मे आ चुका था. और अपनी कमर को नीचे से ऊपेर की ओर उछालने लगा. रवि की जाँघो के पुट्ठे रज़िया की गान्ड से टकरा कर थप-2 की आवाज़ कर रही थी. अब दोनो तरफ से पूरा ज़ोर लग रहा था. रज़िया रवि के मोटे लंड को अपनी चूत की गहराइयों मे महसूस करके एक दम कामविहल हो चुकी थी. करीब 10 मिनट लगतार चली चुदाई के बाद रज़िया का बदन अकड़ने लगा.

रज़िया: उम्ह्ह्ह्ह अहह अहह ओह रवीीईईई मेरीईए बेटी ओह मेरी चूत्त्त पानी छोड़ने वाली है. हान्न्न आईसीईए जोर्र्र्र सीई मार अपना लंड मेरी चूत मे अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह ओह मेन्णन्न् गइईई

और रज़िया की चूत ने पानी छोडना चालू कर दिया. रज़िया का बदन चूत के पानी छोड़ते हुए झटके खाने लगा. अब उसे अपनी गान्ड उछालना नमुनकीन सा लग रहा था. वो तो झड कर पस्त हो चुकी थी. लेकिन रवि अभी तक झडा नही था. ये रज़िया अच्छी तरहा जानती थी. इसीलिए रज़िया ने अपनी हथेलियों को ज़मीन पर टिकाए हुए, अपनी गान्ड को ऊपेर उठा लिया. ताकि रवि अपने लंड को आसानी से उसकी चूत मे अंदर बाहर कर सकें.

जैसे ही रज़िया ने अपनी गान्ड को ऊपेर उठाया. रवि ने अपनी कोहानियों के सहारे से थोड़ा सा उठ गया. और अपना पूरा ज़ोर लगा कर अपनी कमर को ऊपेर की ओर उछाल कर रज़िया की चूत मे धना-धन अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा. रज़िया की चूत उसके काम रस से पूरी तरहा भीग चुकी थी. इसीलिए लंड के अंदर बाहर होने से फॅक-2 की कामुक आवाज़ रज़िया की चूत से आ रही थी.

 


रवि के लंड की नसें भी फूलने लगी. वो भी झड़ने के बिल्कुल करीब थी. रवि और तेज़ी और ज़ोर-2 से अपने लंड को रज़िया की चूत मे पेलने लगा. तप-2 और फॅक-2 की आवाज़ चारों ओर गूंजने लगी. और जैसे ही रवि के लंड ने वीर्य ने पिचकारी छोड़ी, रवि ने अपनी पूरी ताक़त समेट कर एक जोरदार धक्का मारा. लंड फॅक-2 की आवाज़ से रज़िया की चूत की गहराइयों मे उतर कर वीर्य की पिचकारियाँ छोड़ने लगा. लंड का झटका इतना जबर्दास्त था, कि रज़िया का बेलेन्स बिगड़ गया. और वो आगे की तरफ लुड़कते-2 बची.

रज़िया: अहह क्या कर रहा है जालिम. अभी मे आगे गिरने वाली थी. ओह

और रज़िया आगे की तरफ लूड़क गयी. रवि का आधा खड़ा हुआ लंड पुच की आवाज़ से रज़िया की चूत से बाहर आ गया. और रज़िया अपनी साँसों को संभालते हुए सीधी खड़ी हो गयी. और अपने लहँगे को नीचे करके ठीक कर लिया.

रज़िया: (रवि को वैसे ही लेटा देख कर) अब यूँ ही पड़ा रहेगा. चल जल्दी से उठ कर पाजामा पहन ले, कहीं कोई इधर ना आ जाए.

रवि खड़ा हुआ, और अपना पाजामा उठा कर पहनने लगा. रज़िया वैसे ही लहंगा ठीक करके फिर से अपने काम मे लग गयी.

रवि: काकी अब मे हवेली जा रहा हूँ.

रज़िया: ठीक हैं. पर सुन आज शाम को तेरे काका आने वाले हैं. उनके सामने ज़रा सावधान रहना. कहीं उन्हे शक ना हो जाए.

रवि: ठीक है काकी.

रज़िया: जब भी कोई अच्छा मोका मिलेगा. मे तुझे बता दूँगी.

रवि रज़िया की बात सुन कर खेतों से बाहर की ओर जाने लगा. खेतों से बाहर आकर देखा तो रज़िया का बेटा अभी भी वहीं किसी और मजदूर के लड़के के साथ खेल रहा था. वो रवि को देख कर मुस्कुराते हुए बोला.

मुन्ना: रवि भैया हमारे साथ खेलो ना.

रवि: नही मुन्ना मे थक गया हूँ. कल खेलेंगे.

और फिर रवि हवेली की तरफ चल पड़ा. हवेली पहुँच कर रवि को हरिया काका हवेली के हाल के डोर के बाहर खड़े झाड़ू लगते दिखाई दिए.

हरिया: अर्रे बेटा आ गया तू. जा अंदर जाकर रोमा से खाना माँग ले.

रवि: जी काका. बाबू जी चले गये क्या.

हरिया: हां चले गये.

रवि: मेरे बारे मे तो कुछ पूछ नही रहे थे.

हरिया: हाँ एक बार पूछा था. फिर चले गये. कोई बात नही तू जाकर खाना खा.

और रवि अंदर आकर सीधा किचन मे चला गया. और रोमा को खाना देने के लिए बोला.

दूसरी तरफ शाम के 5:30 राज एप्रा गाँव विशाल के घर पहुँच गया. विस बिशाल काफ़ी अमीर आदमी था. पर राज के मुक़ाबले काफ़ी कम था. विशाल की हवेली भी राज की हवेली की तरहा आलीशान थी. विशाल राज को देख कर बहुत खुस हुआ.

विशाल: अर्रे आओ राज . मुझ तो उम्मीद ही नही थी कि तुम आओगे, मुझे तुम्हें देख कर बहुत ख़ुसी हुई. आओ अंदर चलें.

अंदर आकर विशाल ने राज को अपने माता पिता पत्नी और बेटे से मिलवाया. राज अपने साथ लिया हुआ तोहफा विशाल के लड़के को दिया. कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद विशाल ने राज को अपने साथ चलने के लिए कहा.राज और विशाल दोनो हवेली से बाहर की तरफ आ गये.

राज : अर्रे यार पार्टी अंदर चल रही है. और तू मुझ यहाँ बाहर क्यों ले आया हे.

विशाल: यार बच्चों जैसी बात मत कर. ये तो बच्चों की पार्टी चल रही हैं अंदर. चल मे तुझे अपनी असली पार्टी दिखाता हूँ.

राज : पर चलना कहाँ हैं.

विशाल: ज़्यादा दूर नही यहीं गाँव मे खेतों के बीच मैने एक छोटी सी हवेली और बनाई हुई है. वहीं पर मेरे दो दोस्त और आने वाले हैं. चल आज के शाम को रंगीन बनाते हैं.

विशाल ने अपने एक आदमी को जीप बाहर निकालने के लिए कहा. कुछ देर बाद जीप बाहर आ गयी. राज और विशाल दोनो जीप मे आगे बैठ गये. और चार हट्टेकट्टे पहलवान जीप के पीछे गन्स को थामे बैठ गये. विशाल जीप को लेकर खेतों के तरफ निकल पड़ा.

राज : यार एक बात तुझे किसी से ख़तरा है क्या. जो ऐसे हथियार लिए आदमियों को अपने साथ रखता है.

विशाल: वैसे कुछ ख़ास नही यार तू तो जानता ही है. इतनी बड़ी ज़मीन जयदाद को संभालने के लिए इनको रखना ज़रूरी है. चल छोड़ ना यार कुछ और बात करते हैं.

दोनो बातें करते हुए विशाल के खेतों मे बनी हुई हवेली मे पहुँच गये. जो ज़्यादा बड़ी तो नही थी. पर ठीक ठाक थी. विशाल के दो दोस्त वहीं खड़े उनका इंतजार कर रहे थे. विशाल ने अपने दोस्तों अजय और राजीव से राज को मिलवाया. और फिर चारों अंदर आ गये. विशाल के आदमी बाहर पहरे दारों के तरहा खड़े थे.

विशाल (अजय और राजीव से) यार तुम दोनो बाहर क्यों खड़े थे. अंदर आकर आराम से बैठ जाते. किसी ने रोका तुम दोनो को.

अजय: नही-2 यार वो हम वैसे ही बाहर खड़े तुम्हारे आने का इंतजार कर रहे थे.

विशाल: देखो यारों तुम्हारे दोस्त का दिल और ये छोटी से हवेली तुम तीनो के लिए हमेशा खुली है. जब चाहो यहाँ आ सकतें हो. यहाँ पर तुम्हें किसी तरहा की रोक टोक नही होगी, और अगर किसी तरहा की ज़रूरत हो तो मुझ बता देना. मे उस वक़्त जहाँ भी रहूं. मेरे यारों के मुँह से निकली हर बात पूरी होगी.

अजय: वो तो हमें पता है यार. चल अब प्रोग्राम शुरू करते हैं

विशाल: जैसे तुम कहो. अर्रे ओ छोटू ज़रा हमारा समान तो लगा.

छोटू: जी बाबू जी.

छोटू ने आँगन के बीचों बीच एक बड़ा सा टेबल लगवा दिया. और टेबल के दोनो तरफ दो-2 कुर्सी लगा दी. चारो वहाँ बैठ गये. छोटू थोड़ी देर मे दो बॉटल वाइन की ले आया. और फिर आइस और बाकी का समान भी ले आया.

विशाल ने चार ग्लास मे वाइन डाली. और तीनो को एक -2 ग्लास पकड़ा दिया.

राजीव: (अपने ग्लास को आगे बढ़ाते हुए) ये हमारे भाई के बेटे के जनमदिन के लिए चेअर्स ( और सब ने अपने अपने ग्लास आपस मे टकराते हुए चेअर्स बोला) चारो ने एक-2 सीप लिया.

विशाल: (सीप लेने के बाद ग्लास को नीचे रखते हुए) और बता राज . फिर इतने दिन तक कहाँ रहा और क्या क्या.

राज : कुछ ख़ास नही यार बस डॉली की शादी के बाद जब मेरी शादी हुई. तो मे अपनी पत्नी को लेकर अलीगढ़ सिटी चला गया. डॉली के ससुराल वाले भी वहीं रहते थे. डॉली का पति अपने माँ बाप का एकलौता बेटा था. उसका अपना खुद का बिजनेस था. मैने भी उसके साथ मिलकर उसके बिजनेस मे इनवेस्टमेंट कर ली. पर तुम्हें तो मालूम ही है आगे जो हुआ. अब जब डॉली का बेटा साहिल बड़ा हो जाएगा. तो वहीं उनका बिज्निस भी देखा गा. डॉली के सास ससुर ने अपनी जयदाद साहिल के नाम कर दी है.

इस दौरान चारो एक-2 पेग ख़तम कर चुके थे. विशाल ने सब के ग्लास को टेबल पर रखा और दूसरा पेग बनाना चालू कर दिया.

विशाल: (पेग बनाते हुए) अर्रे ओह्ह्ह छोटू चिकेन कहाँ रह गया.

छोटू: बाबू जी अभी भेजता हूँ.

विशाल पेग बनाने लगा. थोड़ी देर बाद राज को अंदर से पायल की खनक की आवाज़ सुनाई दी. जैसे ही राज ने सर उठा कर देखा. तो सामने से 40-45 साल की एक अधेड़ उमर की औरत आ रही थी. उसके हाथ मे चिकेन की ट्रे थी.उसने ट्रे को टेबल पर रखा

विशाल: और सूनाओ कांता रानी कैसी हो.

काँटा: मे ठीक हूँ बाबू जी. पर लगता हैं आप हमे भूल ही गये. बड़े दिनो बाद याद किया.

विशाल: नही मे तुम्हें भूल सकता हूँ क्या. और सुनो सबाब का इंतज़ाम क्या है. देख मेरे कितने खास दोस्त आए हैं आज.

कांता: जी हजूर जैसे आप ने कहा था. बिल्कुल वैसी ही चुन-2 कर कलियाँ लाई हूँ.

विशाल: कहाँ हैं.

काँटा: अंदर हैं. बुलाऊ बाहर.

विशाल: अभी रहने दो. पहले जाम का दौर ख़तम हो जाने दो. फिर ही तो मज़ा आएगा,

और कांता वापिस चली गयी. राज ये बातें सुन कर बहुत हैरान था. राज के पास इतना पैसा होते हुए भी उसने आज तक ऐसे काम नही किए थे. पर राज कुछ नही बोला. चारों ने अपना दूसरा पेग भी ख़तम कर लिया था. बातों का सिलसिला भी चल रहा था. पर राज खामोशी से बैठा था.

 
जैसे ही विशाल ने तीसरा पेग बनाने के लिए राज का ग्लास उठाया. तो राज ने विशाल का हाथ पकड़ लिया. और विशाल को मना करने लगा.

विशाल: ये क्या यार तू इतने दिनो बाद आया है. बस एक और आज मेरे बेटे का जनम दिन है.

राज : नही यार मे ज़्यादा पीता नही हूँ. और वापिस भी तो जाना है.

विशाल: क्या यार घर पर फोन कर दे. कि तू कल सुबह आएगा.

राज : नही नही यार मेरा वापिस जाना ज़रूरी है. तू समझा कर डॉली फिकर करेगी.

विशाल: अच्छा चले जाना यार. पर ये आख़िरी जाम मेरी खातिर.

ये कहते हुए विशाल ने ग्लास को राज की तरफ बढ़ा दिया. और राज ने ना चाहते हुए भी पेग का ग्लास ले लिया. और फिर से बातों का दौर चल निकला. राज जो कि ज़्यादा दारू पीने का आदि नही था. उसको पहले दो पेग मे ही नशा होने लगा था. चारों ने तीसरा पेग भी ख़तम कर लिया. अब राज को वाइन का नशा कुछ ज़्यादा ही हो गया था. बातों-2 मे ही विशाल ने राज को छोटा पेग भी पिला दिया.

राज : (छोटा पेग पीने के बाद चेर से लड़खड़ा कर खड़ा होते हुए) अच्छा विशाल भाईईईई मुझे अब चलना चाहिए.

विशाल: अर्रे यार अब इस हालत मे कैसे जाएगा. तू एक काम कर यहीं रुक जा. और घर पर फोन कर ले.

राज : नही यार मुझे जाना है.

और जैसे ही राज चलने को हुआ. राज लड़खड़ा गया. विशाल ने उसे सहारा देकर गिरने से बचाया. राज को चेर पर वापिस बैठा दिया.

विशाल: अजय यार जा अंदर से फोन ले आ. भाई के घर पर बात करवा देते हैं. कि वो आज घर नही आ सकेंगे.

राज : पर यार वो.

विशाल: यार मे तुझे इस हालत मे नही जाने दूँगा. क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नही है. जो तुम यहाँ नही रुकना चाहते.

राज : (लड़खड़ाती हुई ज़ुबान से) नही यार वो वो अच्छा ठीक है.

विशाल ने राज के फोन पर घर बात करवा दे. राज ने फोन पर डॉली को घर ना आने के लिए कह दिया. रात काफ़ी ढल चुकी थी. हवेली के आँगन मे चारो तरफ बल्ब्स और ट्यूब लाइट्स के रोशनी फैली हुई थी.

विशाल: कांता ज़रा अपने साथ लाई हुई कलियों के दीदार तो करवा दे.

कांता: (रूम के अंदर से) जी आई बाबू जी.

राज भले ही नशे मे था. पर वो विशाल की हर बात को सॉफ-2 सुन और समझ पा रहा था. थोड़ी देर बाद कांता चार औरतों के साथ बाहर आँगन मे आए. चारो औरतें गाँव के लिबास मे ही थी. चारो के उम्र 30-35 साल के बीच मे थी.

राज को छोड़ कर तीन उन औरतों के तरफ देखने लगे. जबकि राज सर झुकाए बैठा था. ये देख कर विशाल बोलने लगा.

विशाल: देखो दोस्तो. आज मेरा दोस्त राज पहली बार मेरे पास आया हैं. इसीलिए फैले राज ही अपनी लिए इन चारो मे से किसी को चुनेगा. किसी को कोई एतराज तो नही.

अजय : नही भाई. इसमे इतराज की क्या बात है. आख़िर आज से राज हमारा भी दोस्त हैं.

विशाल: देख राज तुम्हें इनमे से कॉन सी पसंद हैं.

राज : नही -2 यार मुझ इसकी ज़रूरत नही. तुम लोग एंजाय करो.

विशाल: ऐसे कैसे हम एंजाय कर सकतें हैं. यार एक बार देख तो सही.

राज ने विशाल को काफ़ी बार मना किया. पर विशाल ज़िद्द पर अड़ा रहा. और फिर राज ने मन मे सोचा. इससे पीछा छुड़ाने के लिए. वो किसी के साथ रूम मे जाकर सो जाएगा. पर करेगा कुछ नही. ये सोच कर राज ने चारों औरतों की तरफ देखा. जब राज थोड़ी देर तक चारो को देखता रहा. और कुछ बोला नही.

कांता: बाबू जी मे आप की मदद कर देती हूँ. (एक औरत के कंधें पर हाथ रखते हुए) बाबू जी वीना है. ये पहली बार यहाँ आई है. इससे पहले इसका अपने पति के अलावा किसी और मर्द से किसी तरहा का संबंध नही रहा. क्यों बाबू जी कैसी है.

राज वीना की तरफ देखने लगा.वीना 32 साल की भरी फूरी जिस्म वाली औरत थी. रंग बहुत सॉफ तो नही . पर बहुत ज़्यादा सांवला भी नही था.उसकी ब्लाउस मे उसकी चुचियाँ तेज़ी से साँस लेने के कारण ऊपेर नीचे हो रही थी. उसने अपनी चुचियों को अपने सारी के पल्लू से ढक रखा था.

कांता: (वीना की सारी का पल्लू आगे से हटाते हुए) क्यों री. एक बार बाबू जी को अपने हुष्ण का जलवा तो दिखा दे. क्यों छुपा कर बैठी है . अपनी जवानी को. बोलो ना बाबू जी आप को पसंद हे.

वीना एक दम शर्मा गयी. उसने अपनी सारी के पल्लू को ठीक कर लिया. राज ने वीना को देख कर अंदाज़ा लगा लिया. कि कांता सही कह रही है. वीना उसे घेरलू किस्म की औरत लगी. राज मन मे सोचने लगा. इस के लिए हां बोल देता हूँ. फिर रूम मे जाकर इसको नीचे सोने के लिए बोल दूँगा. और खुद सो जाउन्गा. राज ने हां मे सर हिला दिया. ये देख विशाल के होंठो पर मुस्कान आ गयी.

विशाल: ये हुई ना बात. अच्छा कांता जा इसे ऊपेर वाले रूम मे लेजा. मे राज को थोड़ी देर मे भेजता हूँ. और हां इसे सब समझा देना. मेरा दोस्त थोड़ा शर्मिला है.

कांता मुस्कुराते हुए वीना को ऊपेर के रूम मे ले गयी. उसके बाद अजय और राजीव दोनो एक -2 औरत को लेकर कमरों मे चले गये.

विशाल: क्यों कांता भाई उससे सब समझा दिया ना.

कांता: जी बाबू जी.

विशाल: जाओ बाबू जी को ऊपेर रूम तक ले जाओ.

कांता: (राज की तरफ देखते हुए) चले बाबू जी.

और फिर राज कांता के पीछे-2 ऊपेर आ गया. कांता एक रूम के बाहर जाकर खड़ी हो गयी. और डोर को थोड़ा सा खोल कर बोली.

कांता: बाबू जी अंदर जाए.

और राज अंदर आ गया. रूम मे बेड लॅंप जल रहा था. जिसकी हल्की रोशनी चारो तरफ फैली हुई थी. राज ने अंदर आकर डोर लॉक कर लिया. वीनू बेड के किनारे बैठी हुई थी. राज ने लाइट ऑन की. जैसे ही कमरे मे उजाला फैला. राज का दिल जोरों से धड़कने लगा.

क्योंकि वीना ने अपना ब्लाउस उतारा हुआ था. और वो अपनी साड़ी को अपनी चुचियों पर लपेटे हुए बैठी थी. वीना की पीठ राज की तरफ थी. जो पीछे से बिल्कुल नंगी राज को दिखाई दे रही थी. शराब के नशे मे राज पहले ही अपना होश खो बैठा था. और सामने का नज़ारा देख एक पल के लिए वो सब कुछ भूल गया.

राज धीरे-2 बेड की तरफ गया. और वीनू की बगल मे बैठ गया. वीनू का मुँह दूसरी तरफ था. इसलिए राज वीनू का पीठ का खुला हिस्सा देख कर गरम होने लगा. पर फिर भी उसने अपने आप को संभालते हुए बात शुरू की.

राज : देखो तुम क्या नाम था तुम्हारा.

वीनू: (बिना पीछे देखे हुए) जी वीनू

राज : हां वीनू देखो मे बिल्कुल भी वैसा इंसान नही हूँ. वो तो विशाल ज़िद्द करने लगा. इसीलिए मे यहाँ रुक गया. तुम्हें मुझसे घबराने की ज़रूरत नही हे.

वीनू: जानती हूँ बाबू जी. पर मे भी वैसी औरत नही हूँ. बस घर की मजबूरियों के चलते हुए यहाँ पहुँच गयी.

राज का गला सुख रहा था. शायद चिकेन और वाइन ज़्यादा पीने के कारण उसे प्यास लग रही थी. राज बेड से खड़ा हुआ. और पानी के लिए इधर उधर देखने लगा. पर जब रूम मे उसे कहीं भी पानी नज़र नही आया. तो उसने अंजाने मे वीना के कंधे पर हाथ रख दिया. वीना का बदन राज के हाथ पड़ते ही कांप उठा. उसने पीछे मूड कर राज की तरफ देखा.

राज का हाथ अभी भी उसके कंधें पर ही था. वीना अपनी सारी के पल्लू को अपनी चुचियों के ऊपेर से थामें हुए खड़ी हो गयी. और राज की तरफ देखने लगे. वीना का दिल जोरो से धड़क रहा था.

राज : (जब उसे अहसास हुआ कि उसका हाथ वीना के कंधे पर हैं. उसने अपना हाथ हटा लिया) वो मुझ प्यास लगी है.

 
वीना भले ही गदराए हुए बदन की औरत थी. पर उसका वजूद राज के सामने कुछ भी नज़र नही आ रहा था. राज 6 फुट 2 इंच का हॅटा कटा आदमी था. और वीना की हाइट 5 फुट के आस पास थी. जैसे ही वीना खड़ी हुई. उसकी पीठ दीवार की तरफ हो गयी. और वो तेज़ी से साँसें ले रही थी. जिसके कारण उसकी सारी का पल्लू उसकी चुचियों के साथ ऊपेर नीचे हो रहा था.

राज : वो मुझ बहुत प्यास लग रही है.

वीनू: (काँपती हुई आवाज़ मे) मे देती हूँ.

और वीनू बेड पर चढ़ कर दूसरी तरफ पड़े टेबल की तरफ गयी. और वहाँ से पानी का जग और एक खाली ग्लास उठा कर बेड पर चलते हुए वापिस राज के तरफ आ गयी.राज तब बेड पर बैठ चुका था और फिर पानी को ग्लास मे डालकर राज की तरफ बढ़ाते हुए बेड से नीचे उतरने लगी. जैसे ही वीना बेड से नीचे उतरने लगी. उसका बॅलेन्स बिगड़ गया.

और राज ने उसे सहारा देने के लिए उसकी कमर मे हाथ डाल दिया. अब राज बेड पर बैठा हुआ था. और वीना उसके सामने आ खड़ी हुई. इसदौरान वीना की सारी का पल्लू उसकी कंधे से खिसक कर नीचे आ गया. और उसकी 36 साइज़ की मोटी-2 चुचियाँ राज की आँखों के सामने आ गयी.

जिसे देख राज की पेंट मे उसका लंड झटके खाने लगा. राज का हाथ अभी भी वीना की कमर पर उसकी नाभि के पास था. वीना के एक हाथ मे पानी का जग और दूसरे हाथ मे पानी से भरा हुआ ग्लास था. वीना अपनी सारी का पल्लू उठा नही सकती थी. अपने को इस हालत मे देख वीना एक दम से शरमा गई. और राज के हाथ को अपनी नाभि के पास महसूस करके, उसकी आँखें बंद हो गयी.

राज ने धड़कते दिल के साथ वीना के फेस की तरफ देखा. वीना ने अपनी आँखें बंद की हुई थी. उसके होन्ट ठहरथरा रहे थे. और उसका फेस और गाल कामुकता के कारण दहक कर लाल हो रहे थे. राज अपना आपा खो बैठा , और उसका हाथ धीरे-2 वीना के पेट से होता हुआ, वीना की चुचियों की ओर जाने लगा.

जैसे -2 राज का हाथ वीना के पेट को सहलाता हुआ, ऊपेर उसकी चुचियों की तरफ बढ़ रहा था. वीना का बदन राज के हाथ का सपर्श महसूस करके कांप रहा था. कुछ ही पलों मे राज का हाथ वीना की चुचियों पर पहुँच गया. और राज ने अपनी पूरी हथेली वीना की राइट चुचि पर रख दी. और अपनी हथेली मे वीना की 36 साइज़ की चुचि को भर कर दबा दिया.

वीना के रोम-2 मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. उसके पूरे बदन ने एक झटका खाया. और वो राज के और करीब आ गयी. राज जैसे आदमी के हाथ मे भी वीना की मोटी-2 चुचियाँ नही आ रही थी. जब राज ने देखा, वीना ने अपने आप को उसके हवाले कर दिया है. राज ने अपने दूसरे हाथ को वीना की लेफ्ट चुचि पर रख दिया. और दोनो हाथों से वीना की चुचियों को धीरे -2 मसलने लगा.

वीना के मुँह से आहह निकल गयी. वीना से अब खड़ा नही रहा जा रहा था. वीना की कमर से ऊपेर का हिस्सा बिल्कुल राज की आँखों के सामने खुला था. राज ने अपने एक हाथ से वीना के हाथ से पानी का जग लिया, और उसे नीचे रख दिया. फिर ग्लास को भी वीना के हाथ से लेकर नीचे रख दिया.

राज : (खड़े होते हुए) वीना मुझ बहुत प्यास लगी है.

वीना: (आँखों को बंद किए ठहरथरा रहे होंठो से अपनी चुचियों को और बाहर की तरफ निकालते हुए) बाबू जी अपनी प्यास बुझा लो.

ये सुनते ही राज ने अपने हाथों को, वीना की चुचियों से हटा कर, उसे अपनी बाहों मे भर लिया. और वीना के सारी के ऊपेर से, उसके चुतड़ों को पकड़ कर, वीना को ऊपेर उठा लिया. वीना ने अपने आप को गिरने से बचाने के लिए, राज के गले मे अपनी बाहें डाल दी.

राज ने वीना को अपनी गोद मे उठाए हुए, उसकी पीठ को दीवार से सटा दिया. और उसकी एक चुचि, जो अब बिल्कुल राज के मुँह के सामने थी. उसे मुँह मे ले लिया. और ज़ोर-2 से चूसने लगा.

वीना: उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह बाबू जीए ओह धीरे चुसूओ.

पर राज पर वाइन का नशा इस्कदर चढ़ चुका था, कि वो वीना की बात नही सुन रहा था. उसने वीना की चुचि को ज़ोर-2 से मुँह मे भर कर चूसना चालू कर दिया. वीना के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और उसने अपनी बाहों को राज के गले मे कस लिया. वो राज से एक दम चिपक गयी. और तेज़ी से अपने हाथों की उंगलियों को राज के बालों मे घुमाने लगी.

राज ने वीना की चुचि को मुँह से निकाल दिया. वीना की चुचि का निपल राज के होंठो से रगड़ ख़ाता हुआ, पक की आवाज़ से बाहर आ गया. वीना की चुचि का निपल एक दम कड़ा हो कर तन चुका था. राज ने वीना के फेस की तरफ देखा. वीना अभी भी अपनी आँखें बंद किए तेज़ी से साँसें ले रही थी. उसके होन्ट कांप रहे थे. राज ने फिर अपने मुँह मे वीना की दूसरी चुचि को भर लिया.

वीना: (अपनी दूसरी चुचि के निपल पर राज की जीभ को महसूस करते ही, उसका बदन अकड़ गया) अहह बाबू जीई उंह धीरीई करो नाआ.

जब राज का मन वीना की चुचियों से भर गया. तो राज ने उसे नीचे उतार दिया. और अपनी कपड़े उतारने लगा. वीना वहीं खड़ी- 2 सब देख रही थी. जब राज ने वीना को ऐसे खड़े देखा.

राज : चल अब जल्दी से अपने सारी उतार कर मेरी प्यास बुझा दे.

वीना शरमाते हुए अपनी सारी उतारने लगी. उसने सारी को उतारने के बाद राज के कपड़ों को उठा कर अपनी सारी के साथ रूम मे लगे सोफे पर रख दिया. अब वीना सिर्फ़ पेटिकॉट पहने राज के सामने खड़ी थी. वीना की पीठ राज की तरफ थी. वीना ने कपड़े सोफे पर रख कर अपना फेस घुमा कर, पीछे की तरफ देखा. पीछे राज अपना अंडरवेर उतार कर बेड पर लेटा हुआ था. उसका 8 इंच का मोटा लंड हवा मे झटके खा रहा था.

वीना ने अपने फेस को आगे की तरफ कर लिया. और अपने हाथों को पेटिकॉट के नाडे की तरफ ले गयी. उसका दिल जोरों से धड़क रहा था. ग़रीबी के चलते हुए, वो पहली बार किसी पराए मर्द से चुदवाने जा रही थी. उसने अपने काँपते हुए हाथों से अपनी पेटिकॉट का नाडा खोल दिया. और पेटिकॉट को निकाल कर सोफे पर रख दिया.

फिर वीना सर झुकाए हुए मूड कर बेड की तरफ आने लगी. बेड के पास पहुँच कर उसने बेड की रेस्ट सीट के ऊपेर रखे हुए, कॉनडम्स के पॅकेट से एक कॉंडम निकाल कर पॅकेट वापिस रख दिया. और राज की जाँघो के पास बैठ कर, अपने काँपते हुए हाथों से राज के 8 इंच के लंड को पकड़ लिया.

राज : (काफ़ी महीनो बाद किसी औरत के हाथ का सपर्श अपने लंड पर महसूस करके राज के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी) आह वीना तुम्हारे हाथ बहुत मुलायम हैं.

 


वीना राज की बात को सुन कर एक दम से शरमा गये. और उसने राज के लंड को पकड़ कर उसकी चमड़ी को पीछे कर दिया. राज के लंड का गुलाबी मोटा और चौड़ा सुपाडा देख कर, वीना की चूत मे सरसराहट होने लगी. उसने काँपते हुए हाथों से, राज के लंड पर कॉंडम चढ़ाना शुरू कर दिया. पर वीना इन सब की आदि नही थी. ये बात राज अच्छी तरहा जानता था.

राज ने कॉंडम लगाने मे वीना की मदद की. जैसे ही राज ने कॉंडम पहन लिया. वीना राज के लंड के ऊपेर झुक गयी. और राज के लंड के सुपाडे को मुँह मे ले लिया.राज के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. उसने एक हाथ से वीना के बालों को पकड़ लिया. वीना तेज़ी से राज के लंड को मुँह मे भर कर चूस रही थी. राज की मस्ती का कोई ठिकाना नही था.

राज ने कुछ देर बाद वीना को कंधों से पकड़ कर अपने ऊपेर खींच लिया, और वीना की आँखों मे देखते हुए. अपने लंड के सुपाडे को वीना की चूत के छेद पर लगा दिया. वीना के मुँह से आह निकल गयी.

वीना: (काँपती हुई आवाज़ मे) अहह बाबू जीए. धीरे-2 करना मैने इतना बड़ा कभी नही लिया है.

राज : क्या मतलब.

वीना: (एक दम से शरमा गये) वो मेरे पति का आप से बहुत छोटा है. धीरे-2 करना.

ये बात सुन कर राज के होंठो पर मुस्कान आ गयी.

राज : तो फिर तू ही अपने आप अंदर कर ले.

ये बात सुन कर वीना और शरमा गये. और धीरे-2 राज के लंड के सुपाडे पर अपनी चूत के छेद को दबाने लगी. राज के लंड का मोटा सुपाडा, वीना की चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर जाने लगा. वीना की चूत पहले ही से पानी छोड़ कर चिकनी हो चुकी थी. जैसे ही राज के लंड का मोटा सुपाडा वीना की चूत के छेद मे गया, राज ने वीना के चुतड़ों को कस के पकड़ लिया. और ऊपेर की तरफ अपनी कमर को पूरी ताक़त लगा कर उछाला. लंड का सुपाडा चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ, और अंदर घुसता चला गया. और वीना दर्द और मस्ती के मिलजुले असर के कारण चीख पड़ी.

वीना: अहह बाबू जीईए ओह धीरीई अहह उंह सीईईईईईईईई.

इससे पहले कि वीना थोड़ा राहत की साँस लेती, राज ने फिर से वीना के चुतड़ों को अपने हाथों मे दबोचे हुए, एक बार फिर से अपनी कमर को ऊपेर की ओर उछाला. इस बार राज के लंड का सुपाडा, वीना की चूत की गहराइयों मे उतर गया, और वीना की बच्चेदानी से जा टकराया.

वीना: अह्ह्ह्ह ओह मरररर गइई बाबू जीई धीरीईए करूऊ नाआ ओह्ह्ह्ह बहुत्त्त्त दर्द हूऊओ रहा है..

वीना अपनी साँसों को संभालने के लिए राज के ऊपेर लूड़क गयी. उसकी मोटी-2 चुचियाँ राज की चौड़ी छाती मे धँस गयी. वीना अभी भी दर्द से कराह रही थी. राज ने धीरे-2 वीना के चुतड़ों और पीठ को सहलाना चालू कर दिया. कुछ ही पलों मे वीना का दर्द ख़तम हो गया.

वीना अपनी चूत के दीवारों को राज के लंड पर कसा हुआ महसूस करके मचल उठी. उसकी चूत मे राज के लंड की रगड़ के लिए टीस उठने लगी. और वो राज की छाती से चिपकी हुई. धीरे-2 अपनी गान्ड को उछाल कर अपनी चूत मे राज के लंड को अंदर बाहर करके चुदने लगी.

राज तो बस वीना के चुतड़ों को मसलते हुए, अपने लंड पर वीना की चूत के दीवारों की रगड़ महसूस करके मस्ती से सराबोर हुआ जा रहा था. धीरे-2 वीना भी अपनी चूत को राज के लंड पर कसी हुई महसूस करके गरम हुई जा रही थी. और वो धीरे-2 अपनी गान्ड के उछालने की रफ़्तार को बढ़ा रही थी. राज का लंड अब तेज़ी से वीना की चूत के अंदर बाहर हो रहा था. और वीना पूरी मस्ती मे आकर अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछाल के पूरी ताक़त से अपनी चूत को राज के लंड पर पटक रही थी.

वीना: अहह ओह बाबू जीए औरर्र जोर्र्र्र से मस्लो मेरी चुतड़ों को अहह ओह मेरा पानी निकलने वाला है.

राज ने वीना की बात को सुनते ही, वीना के चुतड़ों को अपने हाथों मे दबोच कर फैला दिया. और अपनी कमर को तेज़ी से ऊपेर की ओर उछालते हुए, अपने लंड को वीना की चूत के अंदर बाहर करने लगा. राज का लंड पूरा जड तक अंदर बाहर हो कर फॅक – 2 की आवाज़ कर रहा था. कुछ ही पलों मे वीना का बदन अकड़ने लगा.

वीना: अहह अहह ओह ओह बहुत्त्त्त्त्त अच्छाअ चोदते हैं बाबू जी आपप ओह्ह ओह मेरीई पानी निकल गाईए हीए ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्ह्ह्ह्ह.

और वीना राज के ऊपेर निढाल होकर गिर पड़ी. उसकी नाज़ुक सी चूत राज के 8 इंच के मोटे लंड को ज़्यादा देर नही झेल पाई थी. इसीलिए वो झाड़ कर राज के ऊपेर पसर गयी. और तेज़ी से साँसे ले रही थी.

राज अभी भी अपनी कमर को हिला कर, वीना की चूत मे अपने लंड को पेले जा रहा था. पर वीना एक दम उस से चिपकी हुई थी, जिसके कारण राज को वीना की चूत मे लंड पेलने मे दिक्कत हो रही थी.

राज ने वीना को बाहों मे भरे हुए, उसे नीचे की ओर लुड़का दिया. और खुद उसके ऊपेर आ गया. राज का लंड इस दौरान वीना की चूत से बाहर आ गया था. जैसे ही राज वीना के ऊपेर आया. राज ने वीना की टाँगों को पकड़ कर घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठा दिया. और फिर वीना की जाँघो को दोनो ओर फैला दिया.

जिससे वीना की चूत का छेद जो के उसके काम रस से सना हुआ लबलबा रहा था. राज की आँखों के सामने आ गया. राज की आँखें वीना की चूत के गुलाबी छेद पर जम गयी. वीना ने जब राज को अपनी चूत को यूँ घूरते देखा. वीना एक दम से शरमा गये. और उसने अपने फेस को दूसरी तरफ घुमा लिया.

राज : क्या हुआ वीना. अच्छा नही लगा क्या.

वीना: (शरमाते हुए काँपती आवाज़ मे) नही बाबू जी ऐसी बात नही हैं.

राज : फिर मुँह क्यों मोड़ लिया.

वीना: मुझ शरम आ रही है.

राज : क्यों शरमा क्यों रही हो.

वीना: आप मेरी वो ऐसे देख रहे थे. इसीलिए

राज : वो क्या.

वीना: धत्त मुझ शरम आती है.

राज : अर्रे बता ना.

वीना: चूत

ये सुन कर राज के होंठो पर मुस्कान आ गयी. उसने अपने लंड को अपने हाथ मे पकड़ कर, वीना की चूत के रसीले छेद पर लगा दिया. और धीरे-2 अपने लंड को वीना की चूत के छेद मे धकेलने लगा. राज के लंड का मोटा सुपाडा एक बार फिर से वीना की चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा. वीना ने अपने दोनो हाथों से बेड शीट को भींच लिया. और उसके मुँह से मस्ती से भरी हुई आह निकल गयी.

वीना को यूँ मस्ती मे देख, राज और जोश मे आ गया. और उसने अपनी कमर को पूरी रफ़्तार के साथ आगे की तरफ धेकेला. लंड का सुपाडा चूत की दीवारों को फैलाता हुआ, वीना की चूत की गहराइयों मे उतरने लगा.

वीना: ओह मररर गेयीयीयियी बाबू जीए ओह.

राज को वीना का यूँ तिलमिलाना पता नही क्यों सकून सा दे रहा था. राज ने बिना रुके ताबडतोड़ तीन चार बार अपनी कमर हिला कर, वीना की चूत मे अपने मोटे लंड को पूरा घुसा दिया. जैसे ही राज का पूरा लंड वीना की चूत की गहराइयों मे उतर गया. राज वीना के ऊपेर झुक गया. और उसकी दोनो बड़ी-2 चुचियों को अपने हाथों की हथेलियों मे भर कर मसलने लगा.

 
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