• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

सियासत और साजिश complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
तभी उसे स्टोर रूम का डोर बंद होने की आवाज़ आई…..डॉली ने साहिल की तरफ देखा…साहिल सो रहा था……..वो धीरे से बेड से खड़ी हुई….और बाहर आ गयी… स्टोर रूम का डोर अंदर से लॉक था…. वो डोर के पास आई, और नीचे पंजों के बल बैठ कर के होल से अंदर झाँकने लगी…अंदर काफ़ी अंधैरा था….पर जब थोड़ी देर बार उसकी आँखे अंदर की लाइट के हिसाब से सेट हुई, तो उसे उसकी आँखों के सामने था…उसे देख कर डॉली के रोंगटे खड़े हो गये…अंदर रवि बेड पर लेटा हुआ, तेज़ी से अपने लंड पर डॉली की पैंटी को लपेटे हुए मूठ मार रहा था……

डॉली को अपनी आँखों पर यकीन नही हो रहा था….एक पल के लिए डॉली की आँखे भी रवि के 8 इंच लंबे और 3 इंच मोटे लंड पर जम गयी…रवि के लंड के गुलाबी सुपाडे को देख कर उसके दिल की धड़कन तेज हो गयी……पर अगले ही पल उसके गाल गुस्से के मारें लाल होकर दहकने लगी…वो उठ कर खड़ी हो गयी…और डोर को नॉक किया…..अंदर रवि ने जल्दी से खड़े हो कर अपने शॉर्ट्स को ऊपेर किया…और पैंटी को बेड के नीचे छुपा कर डोर खोला…….

रवि: (सामने डॉली को देख कर थोड़ा घबराते हुए) क्या हुआ दीदी……

डॉली का गुस्सा और बढ़ गया…..और उसने एक ज़ोर दार थप्पड़ उसकी गाल पर झाड़ दिया….रवि का गाल एक दम से सुन्न हो गया…..वो अपने गाल पर हाथ रख कर डॉली की ओर देखने लगा…….

रवि: (रुआंसी से आवाज़ मे) मैने क्या किया है दीदी…..

डॉली: (एक और थप्पड़ रवि के गाल पर मारते हुए) तुझे शरम नही आती….मुझे दीदी कहते हो……और मेरे बारे मे ग़लत सोचते हो…..

रवि: पर दीदी (इससे पहले कि रवि कुछ और बोलता डॉली ने दो थप्पड़ और उसकी गाल पर मार दिए…जिससे रवि का नीचे वाला होन्ट कट गया….और उससे खून निकलने लगा.)

डॉली: (अपने पैर से बेड के नीचे से पैंटी को निकालते हुए) ये क्या कर रहे थी.. कितनी गंदी सोच है तुम्हारी…..मुझे दीदी कहते हो…..और मेरे बारे मे ग़लत सोचते हो. तुम्हे ज़रा भी डर नही लगा ऐसा करते हुए…अगर भैया को बताया तो वो तुझे मार डालेंगे….शरम आनी चाहिए….

रवि घुटनो के बाल डॉली के पैरों को पकड़ कर बैठ गया…..और रोते हुए उससे माफी माँगने लगा…

रवि: दीदी मुझ माफ़ कर दो……आप बाबू जी को मत बताना……मैं बहक गया था..मुझ माफ़ कर दो…

डॉली बिना कुछ बोले हुए बाहर आ गयी….और अपने रूम मे चली गयी….

डॉली के जाने के बाद रवि वहीं बैठा रोता रहा…..डॉली का गुस्सा सातवे आसमान पर था…..वो अपने रूम मे आकर लेट गयी….उसका दिमाग़ उलझनो से भरा हुआ था…उसे पता नही चला उसे कब नींद आ गयी…..शाम के 5 बजे उसकी सास ने उसे ऊपेर आकर उठाया…..डॉली उठ कर बैठ गयी…

डॉली की सास: बेटा तेरे पापा का फोन आया था…….आज हमे रात को उनके फ्रेंड के बेटे की शादी मे जाना है….वो आते ही होंगे, चलो उठ कर तैयार हो जाओ…

डॉली: नही मम्मी जी आप जाए…….मेरा मन नही है….और तबीयत भी कुछ ठीक नही लग रही….

डॉली के साँस: ठीक है बेटा….मैं नौकर से कह देती हूँ, कि वो तुम्हारे और रवि के लिए खाना बना दे…..अच्छा मे नीचे जाकर तैयार होती हूँ…तू भी नीचे आजा चाइ तो पी ले…..

डॉली: ठीक है मम्मी जी….आप चलें मैं आती हूँ…..

डॉली की साँस नीचे चली गयी…डॉली उठ कर बाथरूम मे गयी…और हाथ मुँह धोने लगी….उसके दिमाग़ मे अभी भी दोपहर की घटना ही घूम रही थी..उसकी आँखों के सामने बार-2 रवि का फेस आ रहा था…..उसके होंठो से कितना खून निकल रहा था…मेने कुछ ज़्यादा ही सख्ती दिखा दी…मुझ उसे समझाना चाहिए था….आख़िर उसकी उम्र ही क्या है….और वो तो बेचारा बिना माँ बाप के पला है…अगर उसके माँ बाप जिंदा होते तो, वो ऐसा बिल्कुल भी नही करता…….आख़िर उसे इस उम्र मे सीधी राह दिखाने वाला भी तो कोई नही है…..

ये सब सोचते हुए डॉली साहिल को उठा कर नीचे आ गयी…नीचे उसका ससुर अजीत शर्मा आ चुका था…..और वो अपनी वाइफ का वेट कर रहा था……डॉली को देख कर वो बोला.

अजीत शर्मा: क्या हुआ बेटा आप तैयार नही हुए..

डॉली: नही पापा मे नही जा रही…..मेरी तबीयत ठीक नही है….आप मम्मा को साथ लेकर चले जाओ….

अजीत शर्मा: ठीक है बेटा…..पर अपना ख़याल रखना……

इतने मे डॉली की सास भी बाहर आ गयी…..और तैयार हो चुकी थी.

अजीत शर्मा: बेटा अब हम निकलते हैं….कल सुबह वापिस आएँगे….अपना ख़याल रखना….

डॉली: ठीक पापा जी…

डॉली के सास ससुर वापिस चले गये…..धीरे धीरे रात हो गयी…..नौकर खाना बना चुका था…उसने खाने को टेबल पर लगा दिया….और खुद अपने घर चला गया… डॉली के मन मे अशांति फैली हुई थी…रवि दोपहर से स्टोर रूम से बाहर नही निकला था…….खाना खाने के बाद डॉली ने एक प्लेट मे खाना डाला, और ऊपेर आ गयी…और स्टोर रूम का डोर नॉक किया…पर डोर खुला था…इसीलिए डोर खुल गया…

डॉली ने अंदर देखा….रवि ठीक उसी जगह बैठा हुआ था…..यहाँ पर डॉली ने दोपहर को उसको छोड़ा था….वो अपने घुटनो को मोड़ कर नीचे बैठा हुआ था. और उसने अपने सर को अपनी टाँगों मे छुपा कर रखा हुआ था… डॉली अंदर आ गयी….और बेड पर खाने की प्लेट रख कर नीचे पैरों के बल बैठ गयी…. और रवि के बालों मे अपने हाथ फेरते हुए बोली……

डॉली: रवि खाना खा लो……..

ये सुनते ही रवि ज़ोर ज़ोर से रोने लगा…..और डॉली से माफी माँगने लगा…डॉली उसे चुप करने के लिए बोल रही थी….पर रवि रोए जा रहा था….

रवि: दीदी मुझ माफ़ कर दो……मुझसे ग़लती हो गयी……आप बाबू जी को मत बताना…

डॉली: अच्छा नही बताउन्गी……पहले चुप करो, और खाना खा लो….फिर बाद मे बात करते हैं….

रवि: (अपने आँसू पोंछते हुए) दीदी आप ने मुझ माफ़ कर दिया ना….

डॉली: हां….चल अब उठ कर खाना खा ले…..

रवि उठ कर बेड पर बैठ गया, और खाना खाने लगा…डॉली उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए रूम से बाहर जाने लगी…

डॉली: रवि तुम मेरे रूम मे खाना खाने के बाद आना….मुझे तुम से कुछ बात करनी है….

रवि ने खाना खाते हुआ हां मे सर हिला दिया……..और डॉली अपने रूम मे चली गयी….रवि खाना खा कर नीचे चला गया…क्योंकि बाथरूम के लिए उसे नीचे बने बाथरूम मे ही जाना पड़ता था….जब वो नीचे आया तो, घर मे सन्नाटा पसरा हुआ था…..रवि वापिस ऊपर आ गया…और डॉली के रूम का डोर नॉक किया….

अंदर से डॉली ने उठ कर डोर खोला…..और बाहर आ गयी…..और रवि को इशारे से अंदर आने के लिए कहा….क्योंकि साहिल सो रहा था….दोनो अंदर आ गये…डॉली बेड पर बैठ गयी….और रवि उसके सामने किसी मुजरिम की तरह खड़ा था….

डॉली: (थोड़ी देर चुप रहने के बाद) देखो रवि तुम जो अपने साथ कर रहे हो, वो ठीक नही है….तुम्हे पता भी है, ऐसी ग़लत हरकतों से इंसान के ऊपेर कितना बुरा असर पड़ता है…

रवि: पर दीदी मे बहक गया था……कल जब आप…..

और रवि बोलते-2 रुक गया…

डॉली: हां बतो रवि क्या कहना चाहते हो…..

रवि: (घबराते हुए) दीदी आप गुस्सा करोगी……

डॉली: देखो रवि सुबह मुझे तुम्हारे साथ ऐसे पेश नही आना चाहिए था…उसके लिए मे तुम्हे सॉरी कहती हूँ…मुझ पता है कि तुम बिना माँ बाप के पले हो…और इसीलिए मे तुम्हे हर तरहा मदद करूँगी….

रवि: दीदी मे इसीलिए बहक गया था, कि कल मैने आप को नहाते हुए देख था…मैं अपने आप पर काबू नही रख सका….मुझ माफ़ कर दो दीदी…..

रवि की बात सुन कर डॉली के फेस का रंग उड़ गया….वो एक टक रवि को देखे जा रही थी..उसका मुँह रवि की बातों को सुन कर खुला का खुला रह गया…..

डॉली: (चोन्क्ते हुए) क्या कह रहे हो…..

रवि: (घबराते हुए) दीदी मैं सच बोल रहा हूँ……..पर मुझसे ग़लती हो गयी है..मुझ माफ़ कर दो..( ये कहते हुए रवि की आँखों मे फिर से आँसू आ गये.)

डॉली: अच्छा-2 चुप करो नही तो साहिल उठ जाएगा….आओ इधर आओ…

डॉली ने रवि का हाथ पकड़ कर उसे बेड पर अपने साथ बैठा लिया….और उसके आँसू पोंछते हुए उसे चुप कराने लगी….पर रवि चुप नही हो रहा था…..

डॉली: अब चुप करो रवि…..मैने तुम्हे माफ़ कर दिया है……पर मेरी एक बात को ध्यान से सुनो….ये चीज़ें अपने दिमाग़ से निकाल दो….(डॉली की बात सुन कर रवि ना मे सर हिलाने लगा. जिसे देख कर डॉली और कन्फ्यूज़ हो गयी)

डॉली: क्या कहना चाहते हो…….

रवि: दीदी मैं चाह कर भी…आपको अपने दिमाग़ से निकाल नही सकता…….मुझ माफ़ कर दो…..आप का फेस हर टाइम मेरी आँखों और दिमाग़ मे छाया रहता है….

डॉली: ये क्या कह रहे हो रवि तुम्हे ये सब नही सोचना चाहिए…तुम्हारी उम्र ही क्या है…..मेरे बारे मे ऐसा सोचना बंद कर दो…..जब तुम्हारी उम्र हो गी..तुम्हे मुझसे भी खूबसूरत पत्नी मिल जाएगी….

रवि: (रोते हुए) नही दीदी मैं आप को नही भूल सकता….मैं क्या करूँ…..मुझे खुद समझ मे नही आ रहा…..

डॉली रवि को चुप करा रही थी…..दोनो एक दूसरे के बिल्कुल पास बैठे हुए थे.. डॉली का दिल रवि के आँसू और उसके कटे हुए होन्ट को देख कर पिघलने लगा….उसे अहसास तक नही हुआ, कि कब रवि का एक हाथ उसकी कमर पर आ गया….रवि जानता था कि, घर मे और कोई नही है….रूम मे आने से पहले से उसने ये तय कर लिया था…कि आज वो हर हाल मे डॉली को पा कर रहे गा……चाहे उसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े…अगर बात बिगड़ गयी….तो वो घर से भाग कर कहीं दूर चला जाएगा…..पर वो अपनी किस्मत को आज़माने से नही चुके गा………

रवि अब अपने आँसुओ का सहारा लेते हुए, डॉली के पास और पास आता चला जा रहा था…डॉली को इस बात का बिल्कुल भी अंदेशा नही था, कि रवि के मन मे क्या चल रहा है. डॉली रवि के बालों मे अपनी उंगलियों से सहलाते हुए, रवि को चुप करा रही थी. रवि का एक हाथ डॉली की कमर पर धीरे-2 ऊपेर नीचे हो रहा था. आख़िर कार रवि ने रोते हुए, अपने फेस को डॉली के गले पर लगा दिया. डॉली को एक पल के लिए थोड़ा अजीब लगा, पर अगले ही पल डॉली ये सोच कर चुप रह गये, कि रवि की मानसिक हालत ठीक नही है.

रवि: (रोते हुए) मुझ माफ़ कर दो दीदी, मैं अपने दिमाग़ से आप की छवि को नही निकाल पा रहा हूँ..ऐसा क्यों है दीदी…

इस दौरान रवि के होंठ डॉली की नेक से कुछ इंच दूर पहुँच चुके थे. जिसे डॉली नज़र अंदाज़ कर रही थी.

डॉली: मैं जानती हूँ रवि ये इतना आसान नही होगा. पर तुम्हे सबर से काम लेना चाहिए. धीरे- 2 सब ठीक हो जाएगा.

रवि के हाथ का दबाव डॉली की कमर पर धीरे -2 बढ़ता जा रहा था. डॉली को जब महसूस हुआ, तो उसके दिल की धड़कन एक दम से तेज हो गयी. उसने जैसे ही रवि को पीछे हटाना चाहा, रवि ने अपने होंठो को डॉली की नेक पर लगा दिया. डॉली के बदन मे मानो करेंट की लहर दौड़ गयी. उसका पूरा बदन थरथराने लगा. एक पल के लिए वासना के नशे मे उसकी आँखे बंद हो गयी. पर अगले ही पल उसने अपने आप को बहकने से रोकने के लिए, रवि को पीछे की ओर धकेलना चालू कर दिया.

पर रवि अब पीछे नही हटाना चाहता था, इसीलिए उसने डॉली को अपनी दोनो बाहों मे भर लिया. और अपने होंठो से डॉली की नेक के हर हिस्से को किस करने लगा. डॉली एक दम से मचल उठी. उसकी साँसें तेज हो गयी.

डॉली: ( मदहोशी से भरी लड़खड़ाती हुई आवाज़ मे) ओह्ह्ह्ह ये क्या क्या कर रहे हो रवि, पीछे हटो..छोड़ो मुझे..

पर रवि तो जैसे डॉली की बात को सुन ही नही रहा था. वो पागलों की तरहा डॉली की नेक पर किस करता हुआ, अपने हाथों से डॉली की पीठ को धीरे-2 सहला रहा था. डॉली का बदन ढीला पढ़ने लगा. उसकी आँखे भी बंद होने लगी. वो बड़ी मुस्किल से अपनी आँखों को खोल कर रखे हुए थी. फिर अचानक से डॉली की आँखे बंद हो गयी. वो एक दम से शांत हो गयी. जिसे देख रवि का हॉंसला बढ़ गया, और उसने डॉली के होंठो की तरफ अपने होंठो को बढ़ाना चालू कर दिया. रवि अपनी आँखों से डॉली के थरथरा रहे होंठो को देख कर और उतेज़ित हो गया.

और उसने अपने होंठो को डॉली के काँप रहे होंठो पर रख दिया. डॉली ने अपने होंठो को आपस मे भींच लिया. और रवि के कंधों पर अपने दोनो हाथों को रख कर रवि को पूरी ताक़त से पीछे की ओर धकेला. रवि बेड से नीचे जा गिरा. डॉली ने अपनी आँखे खोली. और बेड से उठ कर खड़ी हो गयी. रवि एक दम से हैरान रह गया. उसे अपना प्लान मिट्टी मे मिलता हुआ नज़र आ रहा था. उसके फेस का रंग एक दम से उड़ गया.

 
मित्रो अपडेट दे दिया है पर आपका साथ ज़रूरी है
 


डॉली के आँखे गुस्से से भरी हुई थी. जैसे ही रवि खड़ा हुआ, डॉली ने एक जोरदार तमाचा उसके मुँह पर दे मारा.

डॉली: तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई, मेरे साथ ऐसे हरकत करने की.

इससे पहले कि रवि कुछ बोल पाता. उसके गाल पर एक के बाद एक दो थप्पड और झाड़ दिए. रवि का गाल लाल हो गया. वो एक टक डॉली को देखे जा रहा था.

डॉली: मुझे पता होता कि, तुम पर मेरे समझाने का भी कोई असर नही होगा, तो मे सुबह ही तुम्हे यहाँ से निकलवा देती. जाओ दफ़ा हो जाओ यहाँ से.

रवि: (अपने गाल पर आए हुए आँसुओं को सॉफ करते हुए) पर दीदी इसमे मेरा कोई कसूर नही है. मे आप से सच मे प्यार करता हूँ.

डॉली: बंद करो अपनी बकवास, और दफ़ा हो जाओ यहाँ से.

रवि: मे सच कह रहा हूँ दीदी.

डॉली: (गुस्से से) तुम्हे पता भी है प्यार का क्या मतलब होता है. तुम्हारे पास तो इतनी अकल भी नही है कि, मे तुम्हे समझा सकूँ. तुम्हे ये भी नही दिखाई देता. कि मे किसी की विधवा हूँ, एक बच्चे की माँ हूँ. शरम आनी चाहिए.

रवि: दीदी मे आप जैसी बड़ी-2 बातें करना नही जानता. पर मे सच मे आप से प्यार करता हूँ.

डॉली: मे तुम्हारी कोई बात नही सुनना चाहती..जाओ बाहर जाओ. मुझे तुम्हारी शकल नही देखनी है.

रवि रोता हुआ रूम से बाहर आ गया. डॉली ने अंदर से डोर लॉक किया, और अपने सर को पकड़ कर बेड पर बैठ गयी.

डॉली: (अपने आप से) ओह भगवान ये क्या हो रहा है.. मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा.

डॉली बेड पर लेट गयी. और सोने की कॉसिश करने लगी. पर नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी.

डॉली सोने की नाकाम कॉसिश कर रही थी. पर वो सो नही पा रही थी. रात के 11 बज रहे थे. पर नींद अभी भी उसकी आँखों से कोसो दूर थी. तभी उसके कानो मे हल्की-2 रोने के आवाज़ पड़ी. डॉली एक दम से उठ कर बैठ गयी.. रोने की आवाज़ रवि की थी, डॉली ने अपना ध्यान दूसरी तरफ लगाने की कॉसिश की, पर वो अपने आप को रोकनही पाई , और बेड से धीरे से उठ कर डोर की तरफ जाने लगी. उसका एक दिल कर रहा था, कि वो रवि को उसके हाल पर छोड़ दे, वो अपनी इस हालत के लिए खुद ज़िम्मेदार है. और दूसरा दिल कर रहा था, कि उसे बाहर जाना चाहिए…

पर आख़िर कार डॉली अपने दिल के आगे हार गयी, और उसने धीरे से डोर खोला. जैसे ही उसने डोर खोला तो, वो एक दम से घबरा गयी. क्योंकि रवि बाहर गॅली मे बैठा हुआ था. और धीरे-2 सूबक रहा था. डॉली धीरे-2 रवि की तरफ बढ़ी, रवि डॉली की ओर देखने लगा….

डॉली: (परेशानी से भरी आवाज़ मे) क्यों रवि मुझे क्यों परेशान कर रहे हो..

रवि: दीदी मे आपको परेशान नही करना चाहता…मे तो बस आप से प्यार करता हूँ.

डॉली: (रवि की ओर पास आते हुए) नही रवि जो तुम सोच रहे हो, वो ठीक नही है. अपनी ज़िद्द छोड़ दो….

जब डॉली रवि के पास पहुँची, तो वो रवि का फेस देख कर एक दम से हैरान रह गये. उसके होंठो से खून बह कर उसकी चिन पर जमा हुआ था. ये देखते ही, डॉली का कोमल दिल एक दम से पिघल गया. और वो उसके बाद उसके पास बैठ गयी….

डॉली: तुम अपनी दीदी को बहुत प्यार करते हो ना.

रवि: हां डिड मे आप से बहुत प्यार करता हूँ….मे आपके बिना एक पल भी नही रह सकता….मे सच कह रहा हूँ……..

डॉली: फिर मेरी एक बात मनोगे…

रवि: हां दीदी बोलो…..मे आप की हर बात मानूँगा…..

डॉली: (एक लंबी साँस लेते हुए) देखो रवि मे अपने पति से बहुत प्यार करती थी, और आज भी करती हूँ…..उनकी जगह मेरे दिल मे और कोई नही ले सकता…..उसके इसके किसी और के बारे मे सोच भी नही सकती….तुम समझ रहे हो ना मे क्या कह रही हूँ….

रवि: हां दीदी मे समझ रहा हूँ……पर मे……

डॉली: (रवि को बीच मे टोकते हुए) देखो रवि तुम्हारे दिल पर मेरा कोई ज़ोर नही है. इसीलिए मे तुम्हे और तुम्हारे दिल को मेरे बारे मे सोचने से रोक नही सकती…अब तुम मेरे बारे मे क्या सोचते हो, वो तुम जानते हो, पर रवि मे तुम्हारी साथ ऐसा रिश्ता नही रख सकती….

रवि उठ कर खड़ा हो गया, और अपनी आँखों से आँसू सॉफ करने लगा….डॉली भी खड़ी हो गयी. वो रवि के चहरे की भावनाओ को पढ़ने के कॉसिश कर रही थी… वो सोच रही थी, कि शायद उसकी बात रवि के समझ मे आ गयी है….डॉली ने रवि को कंधों से पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया, और उसके होंठो पर लगे हुए खून को अपने हाथ की उंगलियों से सॉफ करने लगी……

रवि: (डॉली की नरम उंगलियों को अपने होंठों पर महसूस करके) दीदी मैं आप से एक बात कहना चाहता हूँ, आप मना तो नही करोगी.

डॉली: (ये सोचते हुए कि, शायद रवि को उसकी बात समझ मे आ गयी है) हां बोलो.

रवि: (अपने गले का थूक मुस्किल से गटकते हुए) दीदी वो मे आप को एक बार किस करना चाहता हूँ….

डॉली रवि की बात सुन कर एक दम से हैरान हो गयी….वो पीछे की और हट गयी…इससे पहले कि डॉली बोलने के लिए अपना मुँह खोलती……..रवि फिर से बोल उठा….

रवि: दीदी प्लीज़ मना मत करना…..मे आपको बहुत प्यार करता हूँ….प्लीज़ एक बार इसके बाद मे आप से बहुत दूर चला जाउन्गा…….

डॉली चुप चाप बुत की तरह खड़ी थी. डॉली को कोई जवाब देता ना देख रवि उसकी तरफ बढ़ने लगा…जैसे जैसे रवि डॉली की तरफ बढ़ रहा था, डॉली की धड़कन तेज हो रही थी…..

वो नज़रें झुका कर खड़ी थी, और बीच -2 मे रवि की ओर देख रही थी….उसके हाथ पैर अंजाने डर के कारण कांप रहे थी….वो सोच समझ नही पा रही थी, कि वो जो करने जा रही है, ग़लत है या ठीक…..पर डॉली के पास इतना सोचने का टाइम नही था.. रवि उसके बिल्कुल पास आ चुका था…उसने डॉली की कमर के दोनो ओर अपने हाथ रख लिए…पतली सी नाइटी के ऊपेर से रवि के हाथों को अपनी कमर पर महसूस करके, डॉली के बदन मे कपकपि दौड़ गयी….और आने वाले पलों के बारे मे सोच कर उसके दिल ने धड़कना बंद कर दिया….

डॉली को ऐसे बिना कोई विरोध के खड़ा देख कर रवि की हिम्मत बढ़ने लगी. पर उसका हाल डॉली से भी बुरा था…उसने कभी कल्पना भी नही की थी, कि डॉली जैसे बहुत ही खूबसूरत और भरे हुए बदन की मालकिन उसके सामने ऐसे खड़ी हो गी…अपने सामने खड़ी उस कमनीय जैसी खूबसूरत औरत को देख कर उसके हाथ पावं भी कांप रहे त… उसके दिल की धड़कने भी तेज चल रही थी….

रवि डॉली को उसकी कमर से थामे हुए, धीरे -2 उसे अपनी तरफ सरकाने लगा. उन दोनो के बदन का फाँसला हर पल कम हो रहा था….जैसे -2 दोनो के जिस्म नज़दीक आ रहे थे.. डॉली की आँखे धीरे-2 बंद होती जा रही थी…आख़िर कार रवि ने हिम्मत करके डॉली को अपनी बाहों मे भर कर अपने से चिपका लिया….डॉली उसकी बाहों मे कसमसा गयी… रवि डॉली की ओर देखने लगा…..

डॉली ने अपनी आँखे बंद कर रखी थी…उसके होन्ट ठहरथरा रहे थे…जिसे देख कर रवि की आँखों मे चमक आ गयी…वो अपनी किस्मत पर बड़ा इतरा रहा था….आख़िर कार वो आज डॉली के गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठो का रस पान करने वाला था.. रवि ने डॉली की ओर देखते हुए, उसके थरथरा रहे गुलाबी रसीले होंठो की तरफ अपने होंठो को बढ़ाना चालू कर दिया….

डॉली अपने फेस और होंठो पर रवि की साँसों को महसूस करके मचल उठी….पर अगले ही पल उसके दिमाग़ मे ये आ गया कि, वो रवि को किस से आगे नही बढ़ने देगी. चाहे कुछ भी हो जाए….वो अपनी मान मर्यादा नही तोड़े गी….

रवि ने एक बार फिर से डॉली की ओर देखा…..और अपने होंठो को डॉली के नाज़ुक होंठो पर रख दिया….डॉली एक दम से कसमसा गयी…..रवि ने डॉली को अपनी बाहों मे और कस लिया….और धीरे -2 डॉली के होंठो को चूसने लगा…..डॉली अपने होंठो को बंद किए हुए थी…पर रवि जी भर के डॉली के होंठो को रस पीना चाहता था….इसीलिए उसने सिर्फ़ डॉली के नीचे वाले होंठ को अपने दोनो होंठो मे भींच लिया…जिसे डॉली के दोनो होंठो मे थोड़ा सा गॅप बन गया….और मोका देखते हुए, रवि ने डॉली के नीचे वाले होंठ को अपने दोनो होंठो मे ले लिया….और ज़ोर -2 चूसने लगा….ना चाहते हुए भी डॉली के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी…

 


रवि के हाथ डॉली की कमर पर अपना कमाल दिखा रहे थे…..वो कमर को सहलाता हुआ धीरे-2 अपने हाथों को डॉली के चुतड़ों की तरफ लेजा रहा था…डॉली उससे एक दम चिपकी हुई थी….डॉली की मस्त कर देने वाली चुचियाँ रवि की चैस्ट मे धँसी हुई थी….डॉली का बदन रवि की बाहों मे धीरे-2 ढीला पड़ने लगा….

जिसे रवि अच्छी तरह समझ रहा था…..ना चाहते हुए भी डॉली की चूत मे नमी आने लगी थी….डॉली अपनी पैंटी मे आए हुए गीले पन को सॉफ महसूस कर पा रही थी…रवि ने डॉली को गरम होते देख अपने हाथों को डॉली के चुतड़ों पर रख दिया. डॉली रवि के हाथों को अपनी नाइटी के ऊपेर से अपने चुतड़ों पर महसूस करके मचल उठी…..पर उसने रवि को कुछ नही कहा…बल्कि उसके होन्ट और खुल गये…रवि पागलों की तरहा डॉली के होंठो को चूसने लगा…वो धीरे -2 डॉली के दोनो चुतड़ों को मसल रहा था…..

डॉली के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी….डॉली के हाथ जो कुछ देर पहले रवि के कंधों पर थे…अब वो दोनो हाथ रवि के सर के पीछे आ चुके थे…और वो अपने हाथों से धीरे-2 रवि के बालों को सहला रही थी… डॉली एक दम मदहोश हो चुकी थी….वो अब अपने आप पर काबू नही रख पा रही थी…नीचे रवि का लंड भी अब अपनी औकात पर आ चुका था….और वो डॉली की चूत की फांको पर नाइटी और पैंटी के ऊपेर से सटा हुआ रगड़ खाने लगा…….

डॉली की चूत मे सरसराहट दौड़ गयी….जैसे ही उसी अपनी नाइटी और पैंटी के ऊपेर से रवि का लंड अपनी चूत की फांकों पर महसूस हुआ, उसने अपनी बाहों को रवि की पीठ पर कस लिया……जिसे देख कर रवि की हिम्मत और बढ़ गयी….और वो धीरे- 2 डॉली के चुतड़ों से नाइटी को पकड़ कर ऊपेर उठाने लगा……डॉली इतनी मस्त हो चुकी थी, कि उसे पता नही चला कि उसकी नाइटी उसके घुटनो से ऊपेर तक उठ चुकी है. रवि को अपना मकसद पूरा होता हुआ नज़र आ रहा था…..

डॉली अब एक दम गरम हो चुकी थी…उसके हाथ पैर उतेज्ना के मारें कांप रहे थे….और वो अब पूरी तरहा अपने होंठो को खोल कर चुस्वा रही थी….और रवि डॉली के होंठो को बहुत ही मस्ती के साथ चूसे जा रहा था……डॉली की चूत की फाके अब कुलबुलाने लगी थी….

अब डॉली की बर्दास्त से भी बाहर हो रहा था…..रवि ने धीरे-2 अपनी जीभ को डॉली के मुँह के अंदर करना शुरू कर दिया…बदले मे डॉली ने भी अपने होंठो को और खोल दिया, और कुछ ही पलों मे दोनो की जीभ आपस मे टकराने लगी….रवि ने डॉली की जीभ को अपनी होंठो मे कस लिया…..और उसकी जीभ को चूसने लगा…डॉली उससे और बुरी तरहा चिपक गये…उसकी चुचियाँ रवि की चैस्ट मे धँस गये… रवि का मन डॉली की चुचियों को अपनी चैस्ट पर महसूस करके और मचल उठा…..

धीरे – 2 डॉली की नाइटी भी उसकी जाँघो से ऊपेर तक चढ़ चुकी थी….पर अचानक अंदर साहिल के हल्के से रोने की आवाज़ आई…….साहिल की आवाज़ सुनते ही जैसे डॉली को होश आया….उसने अपने हाथों को रवि की चैस्ट पर रख कर उसे पीछे धक्का दे दिया…रवि इसके लिए बिकुल भी तैयार नही था….जिससे डॉली रवि की बाहों से बाहर आ गयी…. और बिना रवि की और देखते हुए, अपने रूम के डोर के पास आकर अंदर झाँकने लगी….

अंदर साहिल सो रहा था, शायद वो नींद मे से थोड़ी देर के लिए ही जगा था. इससे पहले कि डॉली रूम के अंदर जाती….रवि ने उसे पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया…

पर अगले ही पल डॉली ने ने उसके हाथों को पकड़ कर झटक दिया….

डॉली: (तेज़ी से साँस लेते हुए) अपनी हद मे रहो रवि……ये ठीक नही है…मेने अब तुम्हारी एक बात मान ली. जाओ अब यहाँ से चले जाओ..

रवि: पर दीदी….

डॉली: अब मुझे कुछ और नही सुनना…जाओ यहाँ से……..

रवि: नही दीदी अभी मेरा मन नही भरा है……मुझे कुछ देर और किस करने दो…

डॉली: देखो रवि इससे पहले कि मुझ गुस्सा आए यहाँ से चले जाओ….

पर रवि पर अब वासना का भूत इस कदर सवार हो चुका था, कि वो ये सोच भी नही पा रहा था, कि वो जाने अंजाने अपनी जान को ख़तरे मे डाल रहा है….. रवि ने आगे बढ़ कर डॉली को पीछे से फिर से अपनी बाहों मे भर लिया….और अपने होंठो को उसकी पीठ के ऊपेरी खुले हिस्से पर लगा दिया….डॉली अपनी पीठ पर रवि के गरम होंठो को महसूस करके मचल उठी….वो रवि की बाहों से आज़ाद होना चाहती थी…..पर इस बार रवि की पकड़ बहुत मजबूत थी…..

रवि के हाथ धीरे-2 डॉली के पेट से होते हुए, उसकी चुचियों की तरफ बढ़ रहे थे. और डॉली का बदन रवि के हाथों को महसूस करके झटके खा रहा था…आख़िर कार रवि के दोनो हाथ डॉली के दोनो उन्नत उरोजो पर पहुँच ही गये….रवि डॉली के मुलायम 36 साइज़ के बूब्स को अपने हाथों मे पकड़ कर धीरे-2 मसलने लगा…..

डॉली की आँखे फिर से मस्ती मे बंद होने लगी….रवि अपने होंठो को डॉली की खुली पीठ के हर हिस्से पर रगड़ कर चाट रहा था…और डॉली के मुँह से हलकी-2 आहह ओह्ह्ह जैसी आवाज़ें निकल रही थी…..उसकी आवाज़ मे मदहोशी और वासना घुली हुई थी..

रवि का लंड अब उसके शॉर्ट्स मे एक दम तन कर आकड़ा हुआ था, जो उसका शॉर्ट्स फाड़ कर बाहर आने को बेताब था…रवि ने डॉली की पीठ से अपने होंठो को हटा दिया…और डॉली की चुचियों को धीरे- 2 मसलते हुए, अपने लंड को डॉली के चुतड़ों की दरार मे नाइटी के ऊपेर से रगड़ने लगा…….

डॉली: (काँपती हुए आवाज़ मे) ओह्ह्ह्ह रवि रुक जाओ….प्लीज़ मेरे साथ ऐसा ओह्ह ना करो. रवि हट जाओ पीछे आह सीईईईईई…

पर रवि डॉली की बातों को अनसुना करते हुए अपनी कमर हिला कर, अपने लंड को डॉली के चुतड़ों की दरार मे आगे पीछे करते हुए रगड़ रहा था……फिर अचानक रवि ने डॉली की चुचियों को छोड़ दिया…..और दोनो हाथों से डॉली की नाइटी को पकड़ कर एक ही झटके मे ऊपेर उठा दिया…..

- डॉली का दिल जोरों से धड़कने लगा….डॉली के दोनो चूतड़ रवि की आँखों के सामने ब्लॅक कलर की पैंटी मे थे….डॉली की वीशेप पैंटी उसके चुतड़ों की दरार मे इकट्ठी होकर धँसी हुई थी. और उसके दोनो पहाड़ जैसे चूतड़ रवि की आँखों के बिकुल सामने थे

बस डॉली की गान्ड का छेद उस पैंटी से ढका हुआ था……

 


डॉली ये सोच कर शरम से मरी जा रही थी……कि उसकी गान्ड रवि के आँखों के सामने है….डॉली की साँसें ये सोचते ही और तेज हो गयी….

डॉली: (लड़खड़ाती हुई आवाज़ मे) प्लीज़ रवि मान जाओ छोड़ दो मुझे ओह्ह्ह्ह पीछे हट जाओ….मे तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ……चले जाओ यहाँ से……..

पर रवि के मन मे तो कुछ और ही था, आज उसने सोच लिया था, कि वो किसी भी कीमत पर पीछे नही हटेगा….उसने गॅलरी मे चारो तरफ देखा…वहाँ पर दीवार के साथ एक टेबल लगा हुआ था…जिस पर एक फ्लवर पॉट रखा हुआ था…वो टेबल उससे सिर्फ़ 4 फुट की दूरी पर था….

रवि ने डॉली को बाहों मे भर लिया….और डॉली की नेक को पीछे से किस करते हुए, उस टेबल के पास ले गया….उसने अपने एक हाथ से फ्लवर पॉट को नीचे रखा……और डॉली को अपनी तरफ घुमा लिया…..डॉली के गाल उतेजना के कारण एक दम लाल सुर्ख हो रखे थे….उसकी मदहोशी से भरी आँखे बहुत ही मुस्किल से खुल पा रही थी….रवि ने डॉली के होंठो की ओर देखते हुए, डॉली को अपनी बाहों मे भर लिया…उसकी नाइटी अभी भी उसकी कमर मे अटकी हुई थी……

रवि के हाथ डॉली के मुलायम चुतड़ों पर आ गये…..और उसने डॉली के चुतड़ों को धीरे-2 मसलते हुए, अपने होंठो को डॉली के होंठो की तरफ बढ़ाना चालू कर दिया. डॉली एक दम से मचल उठी…उसकी चूत से उसका काम रस निकल कर उसकी पैंटी को गीला कर रहा था…..जिसे वो अच्छी से महसूस कर पा रही थी…..

कुछ ही पलों मे रवि ने फिर से अपने होंठो को डॉली के गुलाबी रसीले होंठो पर रख दिया….इस बार डॉली ने बिना विरोध किए, अपने होंठो को खोल लिया, और रवि धीरे-2 डॉली के होंठो को चूसने लगा…..और साथ साथ मे वो डॉली के चुतड़ों की दरार मे अपनी एक उंगली को ऊपेर नीचे करके रगड़ने लगा….डॉली के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी……उसने रवि के कंधों को कस के पकड़ लिया…….यहाँ तक डॉली के हाथों के नाख़ून भी रवि के कंधों मे धँस गये……

रवि अपने कंधों मे डॉली के नाख़ून के चुबन को महसूस करके और गरम हो रहा था….ये डॉली की मस्ती मे आने के संकेत थे….तभी अचानक रवि ने डॉली के चुतड़ों को अपने पंजों मे दबोच कर उसे ऊपेर उठा कर टेबल पर बैठा दिया….टेबल 4 फीट लंबा और सिर्फ़ 2 फीट चौड़ा था…. डॉली का दिल अंजाने डर के कारण जोरों से धड़क रहा था….उसके दिमाग़ मे बस यही चल रहा था, कि अब रवि क्या करने वाला है…

फिर रवि ने डॉली की दोनो टाँगों को पकड़ कर डॉली के पैरो को टेबल के ऊपेर रख दिया….जिससे डॉली की पिंडलियाँ, उसकी जाँघो से चिपक गयी….और डॉली पीछे की तरफ लूड़क गयी…पर पीछे दीवार थी…जिसके कारण उसकी पीठ दीवार से सॅट गयी… अब डॉली अपनी आँखे बंद किए हुए, तेज़ी से साँसें लेती हुई, टेबल पर बैठी थी…

नीचे उसकी वीशेप ब्लॅक कलर की पैंटी देख कर रवि का लंड उसके शॉर्ट्स मे झटके खाने लगा…उसकी पैंटी पर गीले पन के निशान देख कर रवि के होंठो पर मुस्कान आ गयी…..डॉली शरम के मारे मरी जा रही थी, उसने अपनी टाँगों को आपस मे सटा लिया… पर अगले ही पल रवि के होंठो पर मुस्कान आ गयी, और उसने डॉली की जाँघो को पकड़ कर खोल दिया…..

डॉली ने अपनी आँखों को एक बार खोला , और रवि की ओर देखते हुए फिर से अपनी आँखों को बंद कर लिया…..

डॉली: ये क्या कर रहे हो रवि……..ऐसे मत देखो…….प्लीज़ मुझ जाने दो…..

रवि के होंठो पर सिर्फ़ मुस्कान ही आई, पर उसने डॉली की बात का कोई जवाब नही दिया. फिर रवि ने अपने घुटनो को थोड़ा से मोड़ लिया, और डॉली की चूत के सामने आ गया.. डॉली आने वाले पलों के बारे मे सोच कर घबरा रही थी…….वो ना चाहते हुए भी रवि को रोक नही पा रही थी…..

फिर रवि ने डॉली की वीशेप पैंटी के आगे हुए गीले पन को देखते हुए, उसकी तरफ अपने होंठो को बढ़ाना चालू कर दिया…..डॉली रवि की गरम साँसों को अपनी जाँघो की जडो और चूत के आस पास महसूस करके एक दम से मचल उठी, उसने अपनी गुलाब की फंख़्ुड़ियों जैसे होंठो को अपने दाँतों मे भींच लिया. उसकी चुचियाँ उसके तेज सांस लेने के कारण ऊपेर नीचे हो रही थी….

रवि ने तिरछी नज़रों से डॉली के फेस की ओर देखा….उस हसीना का चेहरा बिकुल लाल सुर्ख हो कर दहक रहा था….रवि के होंठो की मुस्कान हर पल बढ़ती जा रही थी. उसने डॉली की ओर देखते हुए, अपने होंठो को डॉली की चूत पर पैंटी के ऊपेर से रख दिया. जैसे ही रवि के होन्ट डॉली की पैंटी के ऊपेर से उसकी चूत पर लगे…डॉली एक दम सिसिया उठी, और उसने अपने दोनो हाथों से टेबल को कस के पकड़ लिया….

डॉली: ओह अहह उंगग्गग रवि क्या कर रहे हूऊओ. बस बससस्स करो ओह्ह्ह्ह क्यों तडपा रहे हो . छोड़ दो मुझे आह सीईईईईईई सीईईई उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.

पर रवि को तो उसकी मन माँगी मुराद मिल गयी थी….वो डॉली की चूत की फांकों को पैंटी के ऊपेर से अपने होंठो मे भर कर ज़ोर-2 से चूसने लगा…डॉली की चूत से निकले हुए काम रस, जो कि उसकी पैंटी पर लगा हुआ था. रवि के मुँह मे उसका स्वाद घुल गया…जिससे रवि की आँखों मे अजीब सा नशा छा गया…..जैसे उसने कोई नशीली चीज़ चख ली हो….डॉली का पूरा बदन उतेजना के मारें कांप रहा था…

डॉली के बदन मे मस्ती की लहर चढ़ने लगी….वो अब काफ़ी गरम हो चुकी थी. फिर रवि ने अचानक से डॉली की वीशेप पैंटी को आगे से अपने हाथ से हटा दिया… सामने डॉली की गोरी फूली हुई चूत के होन्ट उसके काम रस से लबलबा रहे त…उसकी चूत का छेद उतेज्ना के कारण सिकुड और फैल रहा था…रवि को अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था……कि डॉली की गोरी चूत और उसकी चूत का गुलाबी रस से भरा छेद उसकी आँखों के सामने है…

रवि की आँखों की चमक और बढ़ गयी थी….रवि अपने आप को रोक ना सका, और उसने अपने होंठो को डॉली की चूत की फांकों पर लगा दिया….डॉली ज़ोर ज़ोर से सिसियाने लगी.. वो अपने दोनो हाथों से अपने बालों को पकड़ कर नोचने लगी…उसकी सिसकारियाँ पूरे घर मे गूंजने लगी…………

डॉली: अहह रवि ये क्या ओह उंह सीयी सीईईईईईईईईईई अहह उन्घ्ह्ह्ह उंघह बस करो ओह्ह्ह अहह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईईईई रवीीईईईईईई

डॉली अब लगभग चीखते हुए सिसकारियाँ भर रही थी…..उसकी आवाज़ मे मदहोशी और वासना घुली हुई थी….उसका पूरा बदन झटके खा रहा था….धीरे धीरे उसके दोनो हाथ रवि के सर पर आ गये….और वो रवि के सर को पीछे की ओर धकेलने लगी….रवि ने डॉली की चूत को चाटते हुए, अपनी शॉर्ट्स को घुटनो तक सरका दिया…..और फिर एक दम से खड़ा हो गया…

रवि के लंड के नसें एक दम फूली हुई थी…..और उसका लंड अकड़ कर झटके खा रहा था…रवि ने अपने लंड के सुपाडे को एक दम से डॉली की चूत के छेद पर लगा दिया.. जैसे ही रवि के लंड का गरम सुपाडा डॉली की चूत के छेद पर लगा….डॉली के बदन मे करेंट सा दौड़ गया…..

अचानक उसे अपनी हालत का अहसास हुआ….वो एक दम से घबरा गयी….उसने अपनी वासना से भरी हुई आँखों को बड़ी मुस्किल से खोला, और रवि की ओर देखते हुए, काँपती आवाज़ मे बोली…..

डॉली: रवि प्लीज़ तुम्हे मेरी कसम है……बस करो…अब और नही…..

रवि ने डॉली की बात सुनते ही, अपने लंड के सुपाडे को डॉली की चूत के छेद से हटा लिया….और डॉली की ओर देखते हुए, मुस्कुराते हुए बोला.

रवि: चलो जैसे आप कहें. पर आप को भी मेरी एक बात माननी होगी…..

डॉली: (काँपती हुई आवाज़ मे. अब डॉली के पास रवि की बात को मानने के अलावा और कोई चारा भी नही था) हां बोलो….मे तुम्हारी हर बात मानूँगी….

रवि: (डॉली को अपनी बाहों मे भर कर टेबल से नीचे उतारते हुए) दीदी मे तुम्हे जी भर कर प्यार करना चाहता हूँ…..जब तक तुम नही कहोगी…मे तुम्हारी चूत मे अपना लंड नही घुसाउन्गा….बोलो मुझ प्यार करने से तो नही रोकोगी…

डॉली के पास अब कोई चारा नही था….वो रवि के मुँह से लंड और चूत जैसे शब्द सुन कर एक दम से शरमा गयी….उसने अपने सर को झुका लिया….और हां मे सर हिला दिया…..

ये देखते ही रवि के होंठो पर जीत की ख़ुसी की मुस्कान फैल गयी…उसने डॉली को अपनी बाहों मे भर लिया, और उसके होंठो पर अपने होन्ट रख दिए…डॉली को अपनी चूत के रस से भीगे हुए, रवि के होन्ट बड़े अजीब से लग रहे थे…..पर ना चाहते हुए भी उसे रवि का साथ देना पड़ रहा था….रवि जी भर कर डॉली के दोनो होंठो को बारी-2 चूस रहा था…और डॉली रवि की बाहों मे कस्मसाये जा रही थी….

रवि डॉली का हाथ पकड़ कर उसे स्टोर रूम मे ले गया…..और डॉली को बेड पर धक्का दे दिया…..डॉली बेड पर गिर पड़ी….उसकी टाँगें बेड के नीचे लटक रही थी. डॉली रवि को हैरत से भरी नज़रों से देख रही थी…जो लड़का कल तक उसकी गुलामी करता था. आज उसके साथ कैसे पेश आ रहा है…..

रवि ने डॉली की टाँगों को उठा कर घुटनो से मोड़ दिया….जिससे डॉली की नाइटी सरक कर उसकी कमर मे आ गयी….और फिर उसने डॉली की ब्लॅक कलर की वीशेप पैंटी को दोनो साइड से पकड़ कर एक झटके से खैंच दिया….कुछ ही पलों मे डॉली की पैंटी उसकी टाँगों से निकल कर फर्श पर पड़ी थी….डॉली ने अपनी आँखों को बंद कर लिया…रवि की आँखों के सामने डॉली की चूत का छेद फडफडा रहा था….जो उसके काम रस से भीग कर चमक रहा था….

रवि पैरो के बल नीचे बैठ गया….और अपने हाथों से डॉली की चूत की फांकों को फैला कर उसकी चूत की एक फाँक को अपने मुँह मे भर लिया…डॉली एक दम से मचल उठी….उसका पूरा बदन झटके खाने लगा….

डॉली: अहह उन्घ्ह्ह्ह उंघह सीईईईईईई ओह बसस्स बसस्सस्स करो ओह उईमा उफ़फ्फ़ उफफफफफ्फ़ अहह…..

डॉली की मस्ती और वासना से भरी सिसकारियाँ रवि के जोश को और बढ़ा रही थी… रवि ने अपने होंठो मे डॉली की चूत की एक फाँक को पूरा भरा हुआ था…रवि अपने होंठो का दबाव उसकी फाँक पे डालता हुआ, धीरे -2 फाँक को खैंचने लगा….डॉली की चूत के होन्ट रवि के होंठो से रगड़ खाते हुए, धीरे -2 बाहर आ रहे थे…जिसके कारण डॉली वासना के सागर मे डूबी जा रही थी…..उसकी सिसकाराया अब चीखो मे बदल गयी थी….और वो अहह ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईई नही रवीिइ ओह बस करूऊ अहह ऐसे मस्ती से भरी हुई सिसकारियाँ निकाल रही थी..

जैसे ही डॉली की चूत की फाँक खैंचते हुए, रवि के होंठो से बाहर आई…डॉली एक दम से सिहर गयी……उसने अपने खुले हुए बालों को कस के पकड़ लिया….और तेज़ी से अपना सर इधर उधर हिलाने लगी….

डॉली: बस बस करो रवि…….बस करो……

 


डॉली ठीक से साँस भी नही ले पा रही थी….रवि पर डॉली की किसी भी बात का कोई असर नही हो रहा था…..फिर रवि ने डॉली की चूत की दूसरी फाँक को अपने मुँह मे भर लिया…..और फिर से उसे अपने होंठो को बीच मे दबाते हुए, धीरे-2 खैंचने लगा…जैसे -2 डॉली की चूत की फाँकें रवि के होंठो से रगड़ खाती हुई उसके होंठो से बाहर आ रही थी…वैसे -2 डॉली के बदन मे मस्ती की लहर बढ़ती जा रही थी…

अब डॉली एक दम से मस्त हो चुकी थी…….रवि ने इस बार डॉली की चूत की दोनो फांकों को अपने मुँह मे भर लिया…और ज़ोर ज़ोर से चूस्ते हुए, होंठो मे दबा -2 कर खैंचने लगा….डॉली की सिसकारियों मे वासना का असर बढ़ता जा रहा था….जो रवि के लिए आग मे घी का काम कर रहा था….डॉली का पूरा का पूरा बदन कांप रहा था….रवि के हाथ डॉली के पेट मे हो रही थरथराहट को सॉफ महसूस कर पा रहे थे….

अचानक से डॉली का बदन अकड़ने लगा….डॉली की चूत मे से कामरस की नदी अपना बाँध तोड़ने को तैयार थी…उसकी कमर ऐसे झटके खाने लगी…जैसे वो खुद अपनी चूत को रवि के मुँह पर रगड़ रही हो……फिर अचानक से डॉली की चूत से काम रस का सैलाब उमड़ पड़ा….और गरम पानी की नदी उसकी चूत से निकल कर उसकी गान्ड के छेद की ओर बढ़ने लगी…. रवि ने झट से डॉली की चूत से अपना मुँह हटा लिया… और पास गिरी हुई पैंटी से डॉली की चूत को सॉफ करने लगा…..

डॉली ने अपनी वासना से भरी हुई आँखों को खोल कर रवि की ओर देखा….रवि अपनी चमकती आँखों से उसकी चूत को देख रहा था….डॉली एक दम से शरम्शार हो गयी. उसने फिर से अपनी आँखों को बंद कर लिया…..

डॉली: (काँपती हुई आवाज़ मे) अब तो बस करो रवीिइ….देखो मेने तुम्हारी बात मान ली है….अब मुझ जाने दो……….

रवि: (डॉली की बात सुन कर मुस्कुराते हुए) नही दीदी मैने कहा था, कि मे जी भर कर आपको प्यार करना चाहता हूँ, अभी मेरा मन नही भरा है…….

डॉली अभी ठीक से अपनी साँसों को दुरस्त भी नही कर पे थी, की रवि ने अपनी बात पूरी होते ही….फिर से डॉली की चूत की फांकों को फैला दिया….पर इस बार उसने अपनी जीभ निकाल कर सीधा डॉली की चूत के दहकते और लबलबा रहे छेद पर लगा दिया….डॉली की कमर ने ऐसे झटका खाया, जैसे उसको किसी ने करेंट लगा दिया हो…

डॉली: ( अपनी चूत के छेद पर रवि की गरम जीभ को महसूस करके एक दम से तड़प उठी) ओह अहह अहह उफफफफ्फ़ रवीिइ रुकूऊव ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह सीईईई आह अहह अहह ओह……..

डॉली ऐसे मचल रही थी….जैसे कोई मछली पानी के बिना तड़पति है…..जिसे देख रवि का जोश दोगुना हो गया….और वो और ज़ोर ज़ोर से डॉली की चूत के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगा……रवि 5 मिनट तक कभी अपनी जीभ से डॉली की चूत के छेद को चाटता, तो कभी उसकी चूत की फांकों को अपने होंठो मे भर कर चूस्ता………. डॉली फिर से झड़ने के बेहद करीब थी……..और उसका बदन फिर से अकड़ने लगा था…इसबार वो खुद इतनी मस्त हो गयी थी, कि वो अपने आप पर काबू ना रख सकी….और रवि के मुँह पर चूत को दबाने लगी…..और अगले ही पल उसकी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया….

डॉली के तन बदन मे आग लगी हुई थी….अब उसके सबर का बाँध भी टूटने वाला था….पर रवि रुकने के मूड मे बिल्कुल भी नही था….उसने फिर से डॉली के नीचे पड़ी पैंटी को उठा कर, उसकी चूत को सॉफ किया…..और फिर से अपने होंठो को डॉली की चूत के छेद पर लगा दिया…..

अभी अभी झड़ी डॉली जो दो बार झाड़ चुकी थी…उसकी बर्दास्त की हद हो चुकी थी… वो फिर से सिसकारियाँ भरने लगी…और अपने हाथों से रवि के सर को पकड़ कर पीछे की ओर धकेलने लगी….

डॉली: (सिसियाते हुए) ओह्ह्ह बस करो रवि बस करो……

रात के 1 बज रहे थे….घर मे सन्नाटा छाया हुआ था….बस स्टोर रूम से डॉली की मादक और मस्ती से भरी हुई सिसकारियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी…आख़िर कार डॉली के बहुत कहने पर रवि ने अपना मुँह उसकी चूत से हटा लिया….. और डॉली के ऊपेर लेट गया…और अपने होंठो को डॉली के होंठो की तरफ बढ़ाने लगा….

डॉली ने अपनी वासना से भरी हुई आँखों को खोल कर रवि की और देखा….जो उसकी काम रस से भीगे हुए, अपने होंठो को उसके होंठो की तरफ बढ़ा रहा था….डॉली ने अपना फेस दूसरी तरफ घुमा लिया….

रवि: (डॉली की ओर देख कर मुस्कुराते हुए) देखो अब आप मुझे रोक नही सकती…आप ने मुझसे वादा किया है….

ये कह कर रवि ने डॉली के फेस को अपने हाथों मे भर कर उसके होंठो पर अपने होन्ट रख दिए….अपने ही कामरस का स्वाद डॉली को बहुत अजीब सा लग रहा था….पर थोड़ी देर बाद डॉली ने हथियार डालते हुए, अपने होंठो को खोल दिया…और रवि फिर से डॉली के गुलाबी रसीले होंठो का रस पान करने लगा…..

डॉली के होंठो को धीरे-2 चूस्ते हुए, रवि डॉली की नाइटी जो कि उसकी कमर तक चढ़ि हुई थी…उसे और ऊपेर उठाने लगा….नीचे रवि का लंड डॉली की चूत के पास उसकी जाँघो की जडो मे रगड़ खा रहा था…और डॉली अपनी चूत के पास रवि के गरम सुपाडे की रगड़ महसूस करते हुए, फिर से मस्त होने लगी….

धीरे-2 रवि ने डॉली की नाइटी को उसकी चुचियों तक ऊपेर उठा दिया….जैसे डॉली की चुचियाँ नाइटी की क़ैद से बाहर आई….रवि का दिल जोरों से धड़कने लगा…वाह क्या मस्त चुचियाँ है. एक दम ठोस और तनी हुई….रवि तो जैसे डॉली की चुचियों को देख कर पागल ही हो गया….उसने दोनो चुचियों को अपने हाथों मे भर लिया… और धीरे -2 मसलने लगा….डॉली की बड़ी-2 गुदाज चुचियाँ उसके हाथों मे समा नही पा रही थी…फिर उसने दोनो चुचियों को मसलते हुए, लेफ्ट चुचि को अपने मुँह मे भर लिया.

डॉली एक दम से मदहोश हो गयी….उसके बदन मे सिहरन दौड़ गयी…और उसने अपनी बाहों को रवि की पीठ पर कस लिया….रवि अब पूरे जोश मे आ चुका था…उसने नीचे से अपने दोनो हाथों को डॉली की टाँगों मे डाल कर डॉली को बेड के ऊपेर सही से लेटा दिया….और खुद उसकी टाँगों के बीच अपनी टाँगों अडजेस्ट करके, डॉली के ऊपेर लेट गया…..

जिससे रवि के लंड का सुपाडा डॉली की चूत की फांकों पर रगड़ खा गया….डॉली एक दम से रवि के लंड को अपनी चूत की फांकों पर रगड़ ख़ाता हुआ महसूस करके घबरा गयी….और उसने रवि के कंधों पर हाथ रख कर उसे पीछे किया….डॉली का निपल पक की आवाज़ से रवि के मुँह से बाहर आ गया…..

रवि: (हैरान होकर डॉली की ओर देखते हुए) क्या हुआ….

डॉली: नही रवि ये ठीक नही है….

रवि: अब मे सिर्फ़ तुम्हे प्यार ही तो कर रहा हूँ…..

डॉली: पहले उसे वहाँ से हटाओ…..

 


डॉली का इशारा रवि के लंड की तरफ था….जो उसकी चूत की फांकों पर सटा हुआ था… ये सुनते ही रवि के होंठो पर मुस्कान आ गयी….रवि डॉली की बात को मानते हुए, थोड़ा नीचे खिसक गया…अब रवि का लंड डॉली की दोनो जाँघो के बीच मे तन कर झटके खा रहा था….रवि ने फिर से डॉली की चुचि को मुँह मे भर लिया…और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा…..डॉली जिसका अभी कुछ दिन पहले दूध आना बंद हुआ था, उसे आज अपनी चुचियों की नसों मे फिर से दूध भरता हुआ महसूस हो रहा था…..

डॉली ने फिर से अपनी बाहों को रवि की पीठ पर कस लिया….और वो रवि के सर को अपनी चुचियों पर दबाने लगी….रवि ज़ोर-2 से डॉली की दोनो चुचियों को बारी-2 चूस रहा था…..और डॉली मस्ती मे उंह सीईइ अहह ओह कर रही थी….उसकी चूत का छेद फिर से फडफडाने लगा था…..डॉली अब पूरी तरहा मस्त हो चुकी थी… डॉली की नाइटी जो उसकी चुचियों के ऊपेर तक चढ़ि हुई थी, रवि को अपने दोनो के बीच मे एक दीवार सी लग रही थी…..

रवि ने डॉली की चुचियों को चूस्ते हुए, डॉली की नाइटी को दोनो हाथों से पकड़ कर और ऊपेर करना शुरू कर दिया….रवि ये देख कर हैरान रह गया कि, डॉली ने नाइटी को उतरवाने के लिए अपने दोनो हाथों को ऊपेर कर लिया…और अपने सर को थोड़ा सा ऊपेर उठा लिया…जिससे रवि ने डॉली की नाइटी को आसानी से निकाल कर फैंक दिया….

अब दोनो बिल्कुल नंगे एक दूसरे से चिपके हुए थे…..और रवि डॉली की राइट चुचि को मुँह मे भर कर ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था….अचानक डॉली के निपल से दूध का बहाव शुरू हो गया….जिसे डॉली महसूस करके और उत्तेजित हो गयी…और उसने अपने हाथों से रवि के सर को अपनी चुचियों पर दबाना चालू कर दिया…..डॉली की सिसकारियाँ पूरे घर मे गूंजने लगी…

डॉली के हाथों की उंगलियाँ तेज़ी से रवि के बालों मे घूम रही थी….और रवि डॉली की लेफ्ट चुचि को अपनी हथेली मे भर कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा….और दूध की धार लेफ्ट वाले निपल्स से निकल कर रवि के फेस पर पड़ने लगी… और डॉली की चुचियों से निकला हुआ दूध डॉली की चुचियों के नीचे कमर पर जाने लगा…

डॉली: (मस्ती से भरी आवाज़ मे) अहह बस करो रवीिइ मे बहकक जाउन्गी…उम्ह्ह्ह सीईईईईईईई बस कार्ररर……

डॉली अपनी चुचियों के निपल्स से बाहर निकल रही दूध की धार देख कर और उतेज़ित हो गयी….और उसने रवि की पीठ पर अपने हाथों को तेज़ी से घुमाना चालू कर दिया,….ये देखते हुए, रवि भी डॉली की चूत मे अपना लंड पेलने के लिए सही पोज़ीशन मे आने लगा….और उसने बिना अपने हाथ की मदद से अपने लंड के सुपाडे को डॉली की कुलबुला रही चूत के छेद पर लगा दिया…जैसे ही रवि के लंड का गरम और मोटा सुपाडा डॉली की चूत के छेद पर लगा….डॉली के मुँह से आहह निकल गयी….

इस बार रवि ने अपने लंड को डॉली के छेद के अंदर नही घुसाया….बस ऐसे ही अपने लंड के सुपाडे को उसकी चूत के छेद पर टिका कर, डॉली की चुचियों को चूस्ता रहा…आख़िर कार डॉली का सबर भी जवाब दे गया….और उसकी कमर धीरे-2 खुद ही ऊपेर की ओर होने लगी…जिससे डॉली की चूत का दबाव रवि के लंड के सुपाडे पर बढ़ने लगा….

पर रवि ने फिर से अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपेर उठा लिया…..रवि के लंड के सुपाडे का थोड़ा सा जो हिस्सा डॉली के भीगे हुए चूत के छेद मे गया था, वो फिर से बाहर आ गया….डॉली ने अपनी वासना से भरी हुई आँखों को खोल कर रवि की ओर देखा…जैसे पूछ रही हो……अब क्यों मुझ चोद नही देते……डॉली ने अपनी मस्ती से भरी नशीली आँखों से रवि को सवाल किया…. और रवि ने मुस्करा कर अपने होंठो पर जीभ फेरना शुरू कर दिया….डॉली ने फिर से अपनी आँखे बंद कर ली….और अपनी कमर को ऊपेर की ओर करते हुए, फिर से अपनी चूत को रवि के लंड के सुपाडे पर दबाने लगी..

डॉली ने अपनी जाँघो को पूरी तरहा फैला रखा था…..जिससे उसकी चूत की फैंखे फैली हुई थी….और चूत का गुलाबी छेद खुल कर रवि के लंड को अपने अंदर समा लेने के लिए बेताब था….जैसे ही डॉली की चूत का छेद फिर से रवि के लंड के सुपाडे पर दबा तो….डॉली एक दम से मचल उठी….उसने रवि को अपनी बाहों मे ज़ोर से कस लिया…

रवि ने भी देर करना ठीक नही समझा….और डॉली की जाँघो के नीचे से अपनी बाहों को निकालते हुए, उसकी टाँगों को ऊपेर उठा दिया….और अपनी कमर को पूरी तेज़ी से नीचे के तरफ धकेला…..

डॉली: अहह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उन्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईईईई अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

और रवि के लंड का सुपाडा डॉली की चूत के छेद और दीवारों को फैलाता हुआ, आधा अंदर घुस्स गया…..डॉली अपनी चूत की दीवारों पर रवि के लंड के मोटे सुपाडे की रगड़ कर महसूस करके एक दम गरम हो गयी….उसकी चूत की दीवारें रवि के लंड को अपने अंदर भीच रही थी….जैसे वो रवि के लंड को कभी छोड़ना ही ना चाहती हो….

डॉली ने रवि की टी-शर्ट को गले से पकड़ लिया….और रवि को अपने होंठो पर झुकाने लगी….उसके होंठ गोल आकार ले चुके थे…जैसे वो रवि को बता रही हो….मेरे होंठो को चूसो…और रवि ने भी डॉली के होंठो को अपने होंठो मे भर कर चूसना चालू कर दिया,….इसबार डॉली ने रवि के होंठो को अपने होंठो मे लेकर खुद चूसना चालू कर दिया,….रवि डॉली को इस तरहा गरम होता देख हैरान था….

डॉली पागलों की तरहा रवि के होंठो को चूस रही थी….और रवि भी डॉली के होंठो को चूस्ते हुए, नीचे धीरे-2 अपने लंड को डॉली की चूत के अंदर बाहर कर रहा था.. अभी रवि का आधा लंड ही डॉली की चूत के अंदर बाहर हो रहा था…पर डॉली की मस्ती का आलम इस कदर बढ़ चुका था, कि रवि का लंड अभी से डॉली की चूत से निकल रहे पानी से भीग चुका था….

रवि पहली बार ऐसी गुदाज चूत को चोद कर एक दम मस्त हो गया था….उसके लंड की नसें फटने को थी….और उसने एक ज़ोर दार धक्का मार कर अपने बाकी लंड को डॉली की चूत की गहराइयों मे उतार दिया….

डॉली: (रवि के होंठो से अपने होंठ अलग करती हुई) अहह माआ धीरीईए धीरीए करो ओह्ह्ह्ह ओह रवीीईईई बसस्स्सस्स उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईई उन्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह उम्ह्ह

रवि अब अपने लंड को पूरी रफ़्तार डॉली की चूत के छेद के अंदर बाहर करने लगा…और डॉली की चूत की दीवारों पर रगड़ ख़ाता हुआ रवि के लंड का सुपाडा डॉली को मदहोशी के सागर मे डुबोये जा रहा था…डॉली की चूत उसके काम रस से भीग चुकी थी…दोनो पहले से ही काफ़ी गरम थे….इसीलिए डॉली का बदन फिर से अकड़ने लगा….और वो पूरी तरहा मस्त हो कर अपनी कमर को ऊपेर की तरफ उछाल कर अपनी चूत को रवि के लंड पर पटकने लगी,….’

डॉली: अहह रवीिइ बससस्स और जोर्र्र्रर सीईई आह हाां औसे हाइयीयियी..

रवि डॉली की वासना से भरी मस्त सिसकारियो को सुन कर और जोश मे आ गया…और अपनी कमर को पूरी तेज़ी से हिलाते हुए, अपने लंड को डॉली की चूत के अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा….कुछ ही पलों मे डॉली का बदन फिर से अकड़ गया….और उसकी चूत से गरम पानी की नदी बह निकली…….रवि भी ज़्यादा देर ना टिक पाया…और डॉली की चूत मे झड़ने लगा….दोनो कुछ देर बाद शांत हुए, और रवि अपने सर को डॉली की चुचियों के बीच मे रख कर लेट गया…..

थोड़ी देर बाद जब डॉली का झड़ना शांत हुआ, तो उसे साहिल की चिंता होने लगी… साहिल दूसरे रूम मे अकेला सो रहा था…डॉली ने रवि को अपने ऊपेर से हटाया…और खड़ी होकर अपनी नाइटी पहन कर बाहर चली गयी….रवि बस उसे जाते हुए देख रहा था…डॉली की पैंटी अभी भी स्टोर रूम के फर्श पर पड़ी थी….

रवि का मन अभी भरा नही था….रात के 2 बज रहे थे…वो उठ कर डॉली के पीछे ऐसे ही बाहर आ गया….डॉली अपने रूम के डोर के पास पहुँच कर खड़ी हो गयी… और अंदर साहिल को देखने लगी….साहिल अंदर सो रहा था….तभी रवि ने डॉली को पीछे से बाहों मे भर लिया…और डॉली के गालों को चूमने लगा…इस बार डॉली ने कुछ नही कहा…और रवि के हाथों को पकड़ कर हटा दिया…और रूम के अंदर आ गयी… उसने रूम का डोर बंद नही किया….रवि डॉली के पीछे-2 रूम मे आ गया.

डॉली बेड के दूसरी तरफ जाकर बेड पर बैठ गयी…रवि डोर के पास खड़ा डॉली की ओर देख रहा था….डॉली ने अपनी नज़रों को उठा कर रवि की ओर देखा….रवि का लंड जो अभी भी आधा तना हुआ था, उसकी दोनो टांगों के बीच मे झूल रहा था…डॉली की आँखे रवि के मोटे और लंबे लंड पर अटकी हुई थी…फिर डॉली एक दम से झेन्प गयी, और उसने अपने सर को झुका लिया….

रवि बेड के दूसरी तरफ डॉली की ओर चला गया….डॉली रवि की और देखे बिना बेड पर लेट गयी….साहिल दीवार की तरफ सो रहा था….रवि दोनो के बीच मे बेड पर आकर लेट गया…डॉली की पीठ रवि की तरफ थी…रवि ने पीछे से अपना एक हाथ डॉली की कमर मे डाल दिया….डॉली एक दम से कसमसा गयी….

डॉली: (कसमसाते हुए) अब बस करो रवि देखो कितना टाइम हो गया है….

रवि: (डॉली के कान मे फुसफुसाते हुए) कोई बात नही दीदी, मे तो आप को सारी रात चोद सकता हूँ…..मेरा दिल करता है, मैं सारी रात आपकी चूत मे अपना लंड डाल कर पेलता रहूं….और अपनी बाहों मे भर कर आपके होंठो को चूस्ता रहूं…

डॉली का फेस रवि को दिखाई नही दे रहा था, रवि की बातों को सुन कर डॉली के होंठो पर मुस्कान आ गयी…..उसने अपने चुतड़ों की दर्रार मे रवि का लंड चूबता हुआ महसूस हो रहा था….रवि ने अपने होंठो को पीछे डॉली की नेक पर रख कर किस करना चालू कर दिया…डॉली एक दम से सिसक उठी….

डॉली: अहह सीईइ रवीीईई साहिल जाग जाएगा….

रवि ने डॉली के बात पर कोई ध्यान नही दिया…उसका हाथ डॉली के पेट सो होता हुआ, उसकी चुचियों पर आ गया….और वो डॉली की राइट चुचि को अपनी हथेली मे भर कर ज़ोर-2 से दबाने लगा…डॉली एक दम से कसमसा उठी…..

डॉली: (फुसफुसाते हुए) अहह रवि धीरे दर्द कर रहा हाइ ओह धीरीई.

पर रवि डॉली की मादकता से भरी हुई आवाज़ और सिसकियाँ सुन कर और ज़ोर ज़ोर से डॉली की चुचि को दबाने लगा….नीचे रवि का लंड डॉली की नाइटी के ऊपेर से उसके चुतड़ों की दर्रार मे से होता हुआ, उसकी चूत के ऊपेर रगड़ खा रहा था..डॉली भी पूरी तरहा मस्त हो कर अपनी गान्ड को रवि के लंड के ऊपेर दबाने लगी….उसका फेस वासना के कारण एक दम लाल होकर दहकने लगा…..

फिर अचानक से रवि ने डॉली की नाइटी को उसकी कमर से पकड़ कर ऊपर उठा दिया… जैसे ही डॉली की नाइटी उसके चुतड़ों तक ऊपेर उठी….डॉली के गोरे-2 चुतड़ों को देख कर रवि का लंड लोहे की रोड की तरहा अकड़ गया…

उसने अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसके चुतड़ों के नीचे से ले जाकर उसकी चूत के छेद पर लगाने की कोसिस करने लगा….डॉली पहले से ही वासना की आग मे जल रही थी….उसने अपनी ऊपेर वाली टाँग को थोड़ा सा खोल कर उठा लिया, और पीछे से अपनी गान्ड को बाहर की तरफ करते हुए, अपनी कमर को अंदर की तरफ कर लिया…

 


रवि का लंड एक दम से डॉली की चूत के छेद पर जा लगा….डॉली के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी….उसकी चूत के छेद मे सरसराहट होने लगी…डॉली ने अपने होंठो को दाँतों मे भिचते हुए, एक मादक सिसकारी छोड़ कर रवि को ये जतला दिया, कि वो फिर से उसका लंड अपनी चूत मे लेने के लिए तड़प रही है….

रवि ने डॉली को अपनी बाहों मे भरते हुए, धीरे-2 अपने लंड को डॉली की चूत के छेद के अंदर घुसाना चालू कर दिया…जैसे ही रवि के लंड का सुपाडा डॉली की चूत के छेद के अंदर गया…डॉली मस्ती और वासना मे एक दम तड़प उठी, और उसने अपनी चूत को पीछे की ओर रवि के लंड पर दबाना चालू कर दिया….डॉली की गीली रस से भरी चूत मे रवि के लंड का सुपाडा उसकी चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ धीरे-2 अंदर घुसने लगा……

जैसे ही रवि का आधा लंड डॉली की चूत मे घुसा…..डॉली के होंठो पर वासना से भरी हुई मुस्कान फैल गयी…उसकी आँखे बंद हो गयी….और उसने अपनी चूत को पीछे की ओर दबाना बंद कर दिया…

डॉली: (मस्ती से भरी काँपती हुई आवाज़ मे) रवि धीरीईए करना साहिल उठ ना जाए….

रवि ने हां मे सर हिलाते हुए, डॉली की चूत मे अपने लंड को और अंदर करना चालू कर दिया…धीरे- 2 रवि के लंड का सुपाडा डॉली की बच्चेदानी के मुँह पर जा लगा. और डॉली रवि के मोटे लंड को अपनी चूत मे फँसा हुआ महसूस करके, एक दम गरम हो गयी….

रवि ने डॉली की चिन को पकड़ कर उसके फेस को अपनी तरफ घुमाया….डॉली ने अपनी आँखों को खोल कर देखा…डॉली की आँखों मे वासना और मदहोशी का नशा भरा हुआ था….उसकी आँखों मे मस्ती के लाल डोरे तैर रहे थे….

रवि ने डॉली की आँखों मे झाँकते हुए, अपने होंठो को उसके होंठो की तरफ बढ़ाना चालू कर दिया…जैसे-2 डॉली के होंठो के नज़दीक रवि के होन्ट पहुँच रहे थे… डॉली की आँखों की पलकें धीरे-2 बंद होने लगी….रवि ने डॉली के होंठो को अपने होंठो मे भर कर चूसना चालू कर दिया…डॉली ने भी अपने होंठो को खोल लिया, और रवि से अपने गुलाबी रसीले होंठो को मस्त होकर चुसवाने लगी…..

डॉली की वासना अब उसकी हरकतों मे सॉफ झलक रही थी….वो धीरे -2 पीछे के और अपनी कमर हिला कर, रवि के लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर करने लगी…रवि के लंड का सुपाडा डॉली की चूत के दीवारों से घिसता हुआ अंदर बाहर हो रहा था, और डॉली के दिल की धड़कन तेज और तेज होती जा रही थी….

रवि का लंड डॉली की चूत से निकल रहे काम रस से भीग कर एक दम चिकना हो गया था, जो अब आसानी से डॉली की चूत के अंदर बाहर हो रहा था….काफ़ी देर से शांत पड़ा रवि नये जोश से भर गया….और अपने एक हाथ से डॉली के कूल्हे को पकड़ कर, तेज़ी से अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा….

डॉली: (रवि के होंठो से अपने होंठो को हटा कर अपना फेस आगे करते हुए) आह आह ओह्ह्ह्ह रवीिइ धीरीई साहिल ओह्ह्ह्ह ओह धीरीईए करो उम्ह्ह्ह्ह्ह सीयी ओह्ह्ह्ह ब्बास उफ़फ्फ़ उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईई अहह

रवि का लंड डॉली की चूत के अंदर फॅक -2 की आवाज़ करता हुआ अंदर बाहर हो रहा था. और डॉली भी पीछे की तरफ अपनी गान्ड को धकेल-2 कर अपनी चूत को रवि के लंड पर पटक रही थी…..

रवि: (तेज़ी से डॉली की चूत मे लंड को अंदर बाहर करते हुए) दीदी आह में जिंदगी भर आप को रोज इसी तरहा चोदना चाहता हूँ…आह आपकी चूत बहुत टाइट है.. बोलो ना रोज चुदवाओगी मुझसे……

डॉली अब पूरी तरहा मस्त हो चुकी थी…..और उसकी चूत का ज्वालामुखी फिर से फूटन को तैयार था…..आज कई महीनो बाद डॉली झड़ी थी…वो अब तक तीन बार झड चुकी थी….पर वासना का असर उस पर इस्कदर हावी हो गया था, कि अगर रवि सारी रात उसे चोदता रहता, तो वो अपनी चूत को रवि के लंड पर पटक-2 कर सुजवा लेती…..

डॉली: अह्ह्ह्ह यूमह्ष सीईईईईईई रवि चोद्द्द्द लएनाअ रोज चोदना मुझे जितना मर्ज़ी अपनी दीदी को चोद लेना ओह रवीीईई…….

फिर अचानक से डॉली की चूत मे सैलाब उमड़ने लगा….दोनो के काम रस का संगम डॉली की चूत के अंदर होने लगा….डॉली रवि के गरम वीर्य को अपनी चूत की दीवारों पर बहता हुआ महसूस करके एक दम संतुष्टक हो गयी….दोनो निढाल होकर वैसे ही बेड पर लेटे रहे….थोड़ी देर बाद रवि का लंड ढीला पड़ कर डॉली की चूत से बाहर आ गया….रवि ने डॉली को अपनी तरफ घुमा लिया…..

डॉली अपनी आँखों को शरम के मारे खोल नही पा रही थी….रवि ने डॉली के होंठो को अपने होंठो मे भर लिया, और दोनो किस करने लगी….जब दोनो काफ़ी थक गये…तो दोनो अलग हो गये….

डॉली पीठ के बल सीधी लेट गयी, और अपनी नाइटी को अपने हाथों से जाँघो तक नीचे कर लिया….

अब डॉली की आँखों मे नींद नही थी….रवि भी पीठ के बल लेटा हुआ, छत की तरफ देख रहा था….थोड़ी देर बाद डॉली उठ कर बातरूम के तरफ जाने लगी…रवि पीछे से डॉली के मटकती हुई गान्ड को देख रहा था….उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा,,,,डॉली बाथरूम मे घुस गयी…रवि भी जल्दी से बेड से खड़ा हुआ, और बाथरूम के डोर के पास आकर खड़ा हो गया….

डॉली ने बाथरूम के डोर को बंद नही किया था…बाहर खड़ा रवि डॉली के मूतने की आवाज़ सुन कर एक दम मस्त हो गया….डॉली ने पेशाब करने के बाद अपने हाथों को धोया, और बाहर आने लगी…पर रवि ने उसे डोर पर ही रोक लिया….

डॉली: (अपनी आँखों को झुकाए हुए) अब क्या है….मुझ जाने दो….रात बहुत हो गयी है..

रवि: (डॉली को अपनी बाहों मे भरते हुए) तो क्या हुआ…..अभी मेरा दिल नही भरा है..

और ये कहते हुए रवि ने डॉली के होंठो को अपने होंठो मे भर लिया…और डॉली के चुतड़ों को उसकी नाइटी के ऊपेर से मसलते हुए, उसके होंठो का रस पान करने लगा…डॉली के बदन मे फिर से मस्ती की लहर दौड़ गयी…और कामुकता के कारण उसने भी अपनी बाहों को रवि की पीठ पर कस लिया….दोनो पागलों की तरहा एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे…फिर अचानक से रवि ने डॉली की नाइटी को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपेर उठ कर निकाल दिया…

डॉली एक दम से शरमा गयी….और वो दीवार की तरफ घूम गयी….रवि पीछे से डॉली के कटाव दार बदन को देख कर पागल हो गया…उसका लंड फिर से पूरे ताव मे आ चुका था…उसने डॉली को पीछे से अपनी बाहों मे भर कर अपने होंठो को डॉली की नंगी पीठ पर टिका दिया…डॉली के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी… रवि का तना हुआ लंड डॉली की गान्ड की दर्रार मे रगड़ खा रहा था……

और डॉली भी पीछे की ओर अपनी गान्ड को रवि के लंड पर दबा कर उसने अपने चुतड़ों की दर्रार मे महसूस करके मस्त हो रही थी….रवि ने अपने लंड को पकड़ कर अपने घुटनो को थोड़ा सा मोड़ लिया, और अपने लंड के सुपाडे को डॉली की चूत के छेद पर टिकाने की कॉसिश करने लगा….डॉली ने भी मस्ती मे आकर अपनी जाँघो को थोड़ा सा खोल दिया…और दीवार पर अपनी हथेलियों को जमा कर पीछे से अपनी गान्ड को थोड़ा सा बाहर निकाल लिया…डॉली लगभर सीधी खड़ी थी…इसीलिए रवि का लंड डॉली की चूत के छेद के अंदर नही जा पा रहा था….

फिर डॉली ने अपने चुतड़ों से थोड़ा ऊपेर की कमर के हिस्से को अंदर की तरफ कर लिया….जिस से उसकी चूत पीछे से बाहर की तरफ आ गयी….रवि ने अपने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर, डॉली की चूत के छेद पर लगा दिया…डॉली के मुँह से मस्ती से भरी हुई आह निकल गयी…उसने अपने होंठो को दाँतों मे भीच लिया…रवि ने डॉली की कोहानियों को दोनो तरफ से पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा…रवि का लंड डॉली की चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर जा घुसा….

डॉली: अहह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह रवि पूरा अंदर डालो…….ओह रवि…

रवि ने एक के बाद एक तीन चार धक्के लगा कर अपने लंड को जड तक डॉली की चूत मे घुसा दिया….और रवि ने फिर अपने हाथों को कोहानियों से हटा कर डॉली के हाथों के पास दीवार पर लगा दिया…और तेज़ी से डॉली की चूत मे लंड को अंदर बाहर करते हुए. उसे चोदने लगा…डॉली भी मस्ती होकर रवि का पूरा साथ दे रही थी, और अपनी चूत को पीछे रवि के लंड पर पटक-2 कर चुदवा रही थी…..

डॉली: अह्ह्ह्ह रवि और ज़ोर से चोद मुझ अहह अहह अहह और तेज जल्दी कर अह्ह्ह्ह ओह रवि उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

रवि भी डॉली की बातों को सुन कर और जोश मे आ गया…और तेज़ी से डॉली की चूत मे अपना लंड पेलने लगा….रवि की जांघे डॉली के मोटे चुतड़ों पर छु करके थप-2 की आवाज़ कर रही थी…और डॉली इन आवाज़ों को सुन कर और गरम हो रही थी… रवि 10 मिनट लगातार ऐसे ही डॉली की चूत मे अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा.

फिर अचानक से डॉली की चूत ने रवि के लंड को अपने अंदर कसना चालू कर दिया… डॉली झड़ने के बिल्कुल करीब थी…वो एक दम मस्त हो चुकी थी…उसने अपने होंठो को रवि के गालों पर रगड़ना चालू कर दिया…ये देख कर रवि और तेज़ी से डॉली को चोदने लगा….कुछ ही पलों मे डॉली का बदन अकडने लागा….और वो पीछे की तरफ तेज़ी से अपनी गान्ड को धकेलने लगी…..

थोड़ी देर बाद दोनो एक साथ झड गये…और रवि झड कर डॉली के कंधे पर अपना सर टिका कर खड़ा हो गया…जब दोनो की साँसें दुरुस्त हुई, रवि ने अपने लंड को डॉली की चूत से बाहर निकाल लिया. उसका आधा तना हुआ लंड, डॉली की चूत से निकले पानी से सना हुआ था….डॉली ने बाहर आकर अपनी नाइटी उठाई…और पहन कर बेड पर लेट गयी….रवि बाथरूम से आने के बाद सीधा स्टोर रूम मे चला गया…और बेड पर लेट गया… दोनो को कब नींद आई….दोनो मे से किसी को पता नही….

अगली सुबह 9 बजे का आलराम बजने पर डॉली उठ गयी….साहिल अभी भी सो रहा था…वो उठ कर बाथरूम मे गयी…और पेशाब करने के लिए बैठ गयी….उसे अपनी चूत मे हल्का -2 दर्द हो रहा था…उसकी चूत मे थोड़ी सूजन भी आ गयी थी….पर उसे ये दर्द बहुत अच्छा लग रहा था…..

फ्रेश होने के बाद वो नीचे आ गयी….जैसे ही वो नीचे आई, तो डोर बेल बजी…उसने जाकर डोर खोला, सामने घर का नौकर खड़ा था…वो अंदर आते ही अपने काम मे लगा गया….डॉली साहिल को लेकर हाल मे सोफे पर बैठी थी….और नौकर नाश्ते की तैयारी कर रहा था….

 


डॉली ने आज एक ब्लॅक कलर का सलवार कमीज़ पहना हुआ था…जिसमे उसका गोरा रंग और खिल रहा था…तभी फोन की रिंग बजी….डॉली साहिल को गोद मे उठा कर फोन की तरफ गयी…और फोन उठाया…..फोन डॉली के ससुर अजीत शर्मा का था…

अजीत शर्मा: हैल्लो कैसे हो बेटा….कोई परेशानी तो नही हुई ना पीछे से….

डॉली: नही बाबू जी मे ठीक हूँ…आप ने किस लिए फोन किया…

अजीत शर्मा: वो बेटा बात ये है कि, मैं तुम्हारी मम्मी शाम को ही घर पर आ पायंगे….

डॉली को नज़ाने अपने ससुर की बात सुन कर बहुत ख़ुसी हुई, शायद अब वो भी रवि के साथ अकेले मे अपनी प्यास को जी भर कर बुझाना चाहती थी…क्योंकि वो जानती थी, कि ऐसे मोके उसे बार-2 नही मिलेंगे…

उसने फोन रख दिया….और किचिन मे चली गयी…अब घर मे सिर्फ़ एक नौकर ही था, जिसे वो यहाँ से बाहर भेजना चाहती थी….

डॉली: नाश्ता तैयार हो गया….

नौकर: जी बीबी जी….बस थोड़ी देर और….

डॉली: माँ और पापा के लिए नाश्ता नही बनना….वो शाम को आएँगे…

नौकर: ठीक है बीबी जी जैसे आप कहे….

डॉली: और हां अगर नाश्ता बना कर घर जाना चाहते हो, तो चले जाना….

नौकर: जी बीबी जी, वैसे भी मुझ आज अपने बेटे को डॉक्टर के पास लेकर जाना है.

डॉली: ठीक है…चले जाना. और शाम को वापिस आ जाना…

ये कह कर डॉली किचिन से बाहर आ गयी….उसकी नज़रे बार-2 सीडीयों की ओर जा रही थी….पर रवि अभी तक सो रहा था….नौकर नाश्ता तैयार कर दिया था…और नाश्ता टेबल पर लगा कर वापस चला गया….

डॉली ने नाश्ता किया….और साहिल को लेकर ऊपेर आ गये….11 बज चुके थे…पर रवि अभी भी घोड़े बेच कर सो रहा था…साहिल के सोने का भी टाइम हो गया था…डॉली ने साहिल को सुला दिया…और खुद उठ कर नीचे आ गयी…और एक प्लेट मे नाश्ता डाल कर ऊपेर आने लगी…तभी उसे पीछे से कदमों की आहट सुनाई पड़ी…जब डॉली ने पीछे मूड कर देखा, तो पीछे रवि खड़ा था…

दोनो एक दूसरे की आँखों मे देख रहे थे…डॉली एक दम से शरमा गये…और अपने होंठो पर मुस्कान लाते हुए, रवि से बोली..

डॉली: तुम कब जागे…

रवि: बस कुछ देर पहले ही नीचे आया था, फ्रेश होने…

डॉली: अच्छा चलो अब ऊपेर चल कर नाश्ता कर लो….

रवि डॉली के पीछे ऊपेर आ गया…और अपने स्टोर रूम मे चला गया…डॉली भी उसके नाश्ते की प्लेट लेकर अंदर आ गयी..डॉली स्टोर रूम को देख कर बहुत हैरान थी… रवि ने शायद रात को उसे अच्छी से सॉफ कर दिया था…

रवि बेड पर बैठ गया, डॉली ने उसके आगे नाश्ते की प्लेट रखी, और मूड कर जाने लगी.

रवि ने डॉली का हाथ पकड़ लिया, डॉली ने पीछे मूड कर होंठो पर मुस्कान लाते हुए, रवि की ओर देखा…

डॉली: पहले नाश्ता कर लो…तब तक मे साहिल को देख लूँ….

रवि ने डॉली का हाथ छोड़ दिया, और डॉली अपने रूम मे चली गयी….रवि नाश्ता करने के बाद उठ कर डॉली के रूम के डोर के पास आ गया…जैसे ही डॉली ने रवि को देखा, उसने उसे चुप रहने का इशारा किया…और धीरे से बेड से उठ कर बाहर आ गयी…डॉली के होंठो पर शरम से भरी हुई मुस्कान बिखरी हुई थी…वो रवि से नज़रें नही मिला पा रही थी….

जैसे ही डॉली ने बाहर आकर रूम का डोर बंद किया….रवि ने डॉली को अपनी बाहों मे भर लिया…और अपने होंठो को डॉली के होंठो पर रखते हुए, पागलों की तरहा डॉली के होंठो को चूसने लगा…डॉली के बदन से उठ रही खुसबु उसे दीवाना बनाए जा रही थी… रवि पागलों की तरहा डॉली के होंठो को चूस्ते हुए, उसकी कमीज़ के ऊपेर से उसकी दोनो चुचियों को अपनी हथेलियों मे भर कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा…

 


डॉली के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी, और वो कुछ ही पलों मे गरम हो गयी….डॉली ने भी अपनी बाहों को रवि की पीठ पर कस लिया…और रवि के होंठो को चूस्ते हुए उसका साथ देने लगी……

रवि डॉली से थोड़ी देर बाद अलग हुआ, और दोनो स्टोर रूम मे आ गये…रूम के अंदर आते है…डॉली ने अपनी कमीज़ को आगे से थोड़ा ऊपेर उठाया, और अपने दोनो हाथों को सलवार के नाडे पर ले आए…डॉली का उतावला पन और उतेजना देख कर रवि का लंड उसके शॉर्ट्स मे झटके खाने लगा…

रवि आँखे फाडे डॉली को एक टक घूर रहा था…जब डॉली ने उसे अपनी तरफ यूँ देखते हुए देखा, तो वो एक दम से शरमा गयी, और अपने सर को झुका लिया….रवि के नज़रें डॉली के हाथों पर थी…जो नाडे को थामे हुए थी….

डॉली: (शरमाते हुए) ऐसे क्या देख रहे हो….

रवि: (रवि से अब और इंतजार नही हो रहा था) जल्दी खोलो ना….

डॉली के होंठो पर मुस्कान फैल गयी…उसने अपनी सलवार के नाडे को खोलना चालू कर दिया…जैसे ही सलवार का नाडा खोला, डॉली की सलवार ढीली हो गयी…और आगे से थोड़ा नीचे सरक गयी…नीचे डॉली ने रेड कलर की पैंटी पहनी हुई थी…जिसका कुछ हिस्सा रवि की आँखों की सामने आ गया…रवि अब और सबर ना कर सका, और उसने आगे बढ़ कर डॉली को अपनी बाहों मे भरते हुए, एक हाथ उसकी ढीली पड़ी सलवार के अंदर डाल दिया….

जैसे ही रवि ने डॉली की चूत पर पैंटी के ऊपेर से हाथ रखा, डॉली एक दम से सिहर गयी…उसका बदन काँपने लगा…रवि पैंटी के ऊपेर से ही डॉली की चूत को सहलाने लगा, और अपने होंठो को डॉली की नेक पर रख कर चूमने लगा…डॉली के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी….

डॉली: आह उंह रवि रूको ओह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो…मुझे उतारने ओह्ह्ह्ह….

रवि ने डॉली को बेड पर धक्का देकर लेटा दिया, और उसकी कमर के दोनो ओर से पैंटी और सलवार को एक साथ पकड़ते हुए, नीचे खीचने लगा…डॉली ने भी जल्दी से अपने चुतड़ों को ऊपेर उठा लिया…और रवि ने डॉली की सलवार और पैंटी को अलग कर दिया…

उसके बाद रवि अपनी टीशर्ट और शॉर्ट्स को उतारने लगा…डॉली भी ज़्यादा इंतजार नही कारण चाहता थी…वो बेड पर बैठ गयी, और अपनी कमीज़ उतारने के बाद अपनी ब्रा भी उतार दी…थोड़ी ही देर मे दोनो एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे खड़े थे…

डॉली ने रवि की ओर देखते हुए, अपने हाथ से रवि के हाथ को पकड़ कर, रवि को अपने ऊपेर खेंच लिया…जैसे ही रवि बेड पर चढ़ कर डॉली के ऊपेर आया, दोनो एक दूसरे के होंठो को चूमते हुए., एक दूसरे की बाहों मे गुत्थम गुत्था होने लगी…डॉली भी अब पूरी तरहा से मस्त होकर रवि का साथ दे रही थी, डॉली मे आए इस बदलाव को देख कर रवि बहुत खुश था…उसे उसकी मन माँगी मुराद जो मिल गये थी…

डॉली ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर रवि के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगा दिया, और रवि की आँखों मे झाँकते हुए बोली,

डॉली: (वासना से भरी हुई आँखों से रवि की आँखों मे देखते हुए) अब जल्दी से अपना घुसा दे…देख कैसी आग लगी हुई है…

डॉली की बात सुनते ही रवि के होंठो पर मुस्कान और फैल गयी…रवि अपने लंड को डॉली की चूत के छेद पर दबाने लगा,…जैसे ही रवि के लंड का सुपाडा डॉली की चूत के छेद को फैला कर अंदर घुसा, डॉली ने अपना हाथ रवि के लंड से हटा लिया, और अपनी टाँगों को घुटनो से मोड़ कर रवि की पीठ पर कस लिया…

डॉली की चूत और जांघे खुल चुकी थी…और रवि आसानी से डॉली की चूत मे अपने लंड को पेलने लगा…धीरे-2 हर धक्के के साथ रवि का लंड डॉली की चूत की गहराइयों मे उतरता जा रहा था…डॉली भी अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछाल कर रवि के लंड पर अपनी चूत को तेज़ी से पटक-2 कर चुदवा रही थी…

स्टोर रूम का महॉल बहुत ही गरम हो चुका था. रवि और डॉली दोनो की मस्ती से भरी सिसकारियाँ उस छोटे से स्टोर रूम मे गूँज रही थी.. दोनो के बदन पसीने से भर चुके थे….चुदाई अपनी रफ़्तार पर चल रही थी….

ये वासना का खेल जो कल रात शुरू हुआ, 5 सालों तक चलता रहा….रवि अब पूरी तरहा जवान हो चुका था…साहिल स्कूल जाने लगा था….इसबीच डॉली और रवि कई बार अपने गाँव भी गये…पर जब से डॉली और रवि के संबंध बने थे…डॉली ज़्यादातर अपने ससुराल मे ही रहने लगी….और उसने साहिल को भी वहीं अड्मिशन दिला दी थी..

दूसरी तरफ राज की ताक़त दिन बा दिन बढ़ती जा रही थी….अब उसे आस पास के इलाक़े के पुलिस ऑफिसर्स और पॉलिटिशियन्स का भी साथ था…सब उसके पैसे के आगे झुकने लगी थी. और राज ने अपनी खेती के आधे मे अफ़ीम जैसी नशीली चीज़ें भी उगाना चालू कर दिया था…उसकी दौलत और जायदाद मे कुछ ही सालों मे बहुत इज़ाफा हो गया था….और विशाल जैसा दोस्त भी उसके हर काम और धंधे का पार्ट्नर जो था.

राज ने निर्मला के साथ-2 और कई फूलों का रस चखा था….और 5 साल तक निर्मला के बदन को भोगने के बाद उसका मन निर्मला से भर गया था..राज ने निर्मला को ढेर सा पैसा देकर वापिस उसके पति के पास भेज दिया था…

एक दिन राज हवेली मे हाल मे सोफे पर बैठा हुआ था, तभी विशाल अपने बेटे को साथ लेकर उसकी हवेली पर आ गया….बीते सालों मे राज और विशाल का एक दूसरे के घर आना जाना बहुत बढ़ गया था…और इसीलिए वो विशाल के बेटे को भी पहचानता था….विशाल के बेटे अरयून ने राज के पावं छुए, और अपने पापा के साथ सोफे पर बैठ गया….

राज : (अरयून की ओर देखते हुए)तो सरकार आज किधर घूम रहे हो…

अरयून: जी अंकल बस आज मे पापा के साथ घूमने जा रहा हूँ..

विशाल: (हंसते हुए) हां यार ये कल से ज़िद्द कर रहा था, अब यार इस के लिए तो दिन रात काम करता हूँ…अगर इसे ही खुश ना रख सकूँ…तो इतना कमाने का क्या फ़ायदा है…

यार मेरी बात मान तू भी शादी कर ले…किसके लिए इतना कमा रहा है….

 
Back
Top