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सुषमा चुदी जय से
यह घटना ढाई साल पहले की है, पंचकूला से मेरे पास एक ईमेल आई एक 22 साल की लड़की की, नाम था रूपिंदर कौर, परंतु उसने अपना कहानी के लिए नाम रखा था सुषमा… लिखा था कि जय जी आपकी कहानियाँ पढ़ कर मेरी बुर कुलबुलाने लगती है, रस बहाने लगती है। जिस तरह से आपने रीना की बुर की सील तोड़ी, मैं भी आपसे अपनी सील तुड़वाना चाहती हूँ। यह भी चाहती हूँ कि आप मुझे चोद कर हमारी चुदाई की कथा लिखें … मेरी बड़ी तमन्ना है कि यह कहानी मैं पढ़ूँ। मुझे विश्वास है कि अपनी खुद की चुदाई का विवरण पढ़ के बेहद आनन्द आएगा।
सुषमा रानी के संग आठ दस दिन तक मेल बाज़ी हुई और अंत में आपसी सहमति से मैंने दो दिन का पंचकूला जाने का प्रोग्राम बना लिया। अब तक मैंने उसे सुषमा रानी और उसने मुझे मिस्टर चोदनाथ कहना शुरू कर दिया था। खूब जम के आपस में गालियाँ बकना और तू तड़ाक से बातें करना चालू हो चुका था। हालाँकि रानी पहले पहले गालियाँ देने में हिचकती थी मगर बहुत जल्दी वो सब गन्दी गालियाँ न सिर्फ सीख गई बल्कि गाली देने में उसकी हिचकिचाहट भी ख़त्म हो गई।
तभी रानी ने एक नई बात कही, वो बोली कि उसका प्रेमी राज भी उसकी सील टूटने का दृश्य देखना चाहता है और मेरा शिष्य बन कर चुदाई के खेल में पारंगत होना चाहता है। वो भी चाहता है कि मेरी तरह ज़बरदस्त चोदू बने!
यहाँ राज के विषय में मैं यह बता दूँ कि अपनी दूसरी या तीसरी मेल में सुषमा रानी ने मुझसे पूछा था कि उसके पीछे चार लड़के पड़े हुये हैं, और चारों ही उसको पसंद हैं, वो समझ नहीं पा रही कि किसको चुने। मैंने उसको चार में से एक को चुनने का एक तरीका बताया था जिसके परिणाम स्वरूप राज उसका प्रेमी बन गया था और दोनों ने शादी का फैसला भी कर लिया था।
मैंने उत्तर दिया- ठीक है सुषमा रानी, मैं तेरी सील तोडूंगा। राज अगर अपनी माशूका को चुदवाते हुए देखना चाहता है मुझे क्या… देखे जी भर के!
वैसे तो यह शर्त भी सुषमा रानी ने रखी थी कि वो राज को आशिक़ तभी बनाएगी जब वो उसकी सील मेरे से तुड़वाने को राज़ी होगा और शादी के बाद में भी मेरे से सुषमा रानी चुदा करेगी जिसमें वो कोई ऐतराज़ नहीं करेगा। इसलिए मैंने सुषमा रानी को हामी भर दी कि ठीक है राज उसकी नथ खुलने का नज़ारा देख सकता है।
अब आते हैं कहानी पर:
तय किये हुए दिन मैं पंचकूला जा पहुंचा और होटल बेला विस्टा में ठहर गया। दोपहर दो बजे के करीब सुषमा रानी राज के साथ मेरे रूम में आ गई।
हरामज़ादी को देख के दिल खुश हो गया, मस्त जवान लौंडिया थी माँ की लौड़ी! हृष्ट पुष्ट सरदारनी, बेहद खूबसूरत, 5 फुट 7 इंच का क़द, छरहरा निखरता हुआ मस्त बदन, तने हुए नुकीले चूचुक और खूब गोरा रंग!
मैंने उसको सर से पांव तक निहारा… साली गज़ब की बुर थी कमीनी, खूबसूरत चेहरा, बेहद हसीन हाथ और सुन्दर सुडौल उंगलियाँ। अच्छे बड़े आयताकार सुन्दर नाख़ून जिन पर बैंगनी नेल पोलिश लगाई हुई थी और वे थोड़े थोड़े बिल्कुल सही सही बढ़े हुए थे मस्त! जैसे फिल्मों में अभिनेत्रियाँ नाख़ून रखती है एकदम वैसे!
लहराते हुए रेशमी बाल, लंबी नाक, बड़ी बड़ी आँखें और हल्की सी मुस्कान लिए छोटे छोटे फ़ौरन ही चूसने लायक होंठ… जब ये होंठ लौड़े को दबाएंगे तो कितना मज़ा आएगा। यह बात मन में आते ही लंड मचल उठा।
उसने पटियाला स्टाइल भड़कीले प्रिंट वाली सलवार और गहरे नीले रंग की शमीज़ पहनी हुई थी। पैरों में जूतियाँ जिनमें उसके गोरे पैरों का ऊपरी भाग दिख रहा था। पांव नहीं दिख रहे थे मगर आशा थी कि ऐसे सुन्दर हाथों वाली लड़की के पैर भी सुन्दर होंगे।
राज एक लंबा तगड़ा नवयुवक था, अच्छा स्मार्ट और हैंडसम!
सुषमा रानी भी मुझे भली भांति देखते हुए बोली- हाय मिस्टर चोदनाथ… कैसे हैं आप… आप तो एक प्रोफेसर लगते हैं।
बहनचोद रानी की सेक्सी मीठी आवाज़ सुन कर लगा जैसे कहीं घंटियाँ बज रही हों। लंड तो अकड़ा हुआ था ही, अब फ़ुनफ़ुनाने भी लगा।
तभी राज ने कहा- नमस्ते सर जी!
मैंने भी कहा- नमस्ते राज!
और दोनों को आराम कुर्सियों पर बैठ जाने का इशारा किया।
दोनों बैठ गए तो मैंने राज से कहा- सुन राज…अब जो तेरी माशूका की नथ खोली जाएगी, उस नज़ारे को तू यहीं चुपचाप बैठे देखते रहना… न कुछ बोलना है और न कुछ करना है… मेरी रानी को तो छूना भी मत… आ गई बात समझ में?
राज ने उत्तर दिया- हाँ हाँ सर जी… ऐसा ही होगा… वैसे भी आपकी रानी मुझे छूने कहाँ देती है… अभी तक तो मैंने इसको किस भी नहीं किया… बोलती है जब मैं एक बार चोदनाथ जी से चुद जाऊँ उसके बाद मैं तेरी… अब तक मैंने इसके सिर्फ पैर चाटे हैं और इसकी सु सु पीने के लिए बुर के नज़दीक मुंह लगाया है… बुर से भी नहीं सिर्फ बुर के पास… बस!
मैंने राज को डांटा- सुन बहन के लंड राज… सु सु सिर्फ लड़के करते हैं मादरचोद… लड़कियाँ सु सु नहीं करतीं बल्कि अमृत धारा निकालती हैं… इस धारा को स्वर्ण अमृत या स्वर्ण रस कहा जाता है कमीने… संक्षिप्त में सिर्फ अमृत भी कह सकते हैं… तू किस्मत वाला है बुरिये कि सुषमा रानी तुझको अमृत पीने देती है।
राज ने फ़ौरन कान पकड़ के कहा- सर जी, भूल हो गई, माफ़ कर दीजिये।
सुषमा रानी बोली- और जो तेरी पचासों बार मुट्ठ मारी है उसका भी तो बोल हरामी?
राज ने सर हिला हिला कर यह बात मान ली।
मैंने सुषमा रानी की ओर बड़े प्यार से देखते हुए कहा- रानी बहुत अकलमंद है कमीने.. चिंता न कर… सबर का फल मीठा होता है… अब तू आराम से बैठ और देख तमाशा…. ज़्यादा ठरक चढ़ जाए तो मुट्ठ मार लियो हरामी के पिल्ले!
इतना कह के मैंने लपक कर सुषमा रानी को गोद में उठा लिया और उसको बाँहों में कस के लिपटा लिया। आलिंगन में लिए मैं बिस्तर पर आ गया और रानी को लिटा दिया।
जैसे ही मैं बिस्तर पर चढ़ने को हुआ तो रानी ने खनखनाती हुई शहद सी आवाज़ में कहा- मिस्टर चोदनाथ… एक बात मानोगे मेरी?
मैं- अरे मेरी जान, एक क्यों एक हज़ार बातें मानूँगा… बोल न क्या कहना चाहती है मादरचोद कुतिया?
रानी- कुछ खास नहीं मैं यह चाहती थी कि आज का खेल मेरे इशारों पर चले… जैसे जैसे मैं डायरेक्शन दूँ, आप वैसा वैसा ही करिये… मंज़ूर मिस्टर चोदनाथ!
मैंने गर्दन हिला कर हामी भरी और पूछा- और कुछ बदज़ात रण्डी?
सुषमा रानी ने इठलाते हुए कहा- दूसरा यह कि आपको चैट पर फोन पर तो खूब गालियाँ दे देती थी मगर फेस टू फेस गाली देने में शर्म आ रही है… थोड़ी गर्म हो जाऊँगी तो शायद शर्म भी खुल जाए मिस्टर चोदनाथ!
मैंने कहा- ठीक है, मैं ये बात समझता हूँ लेकिन मेरी एक शर्त यह है कि तू मुझे मिस्टर चोदनाथ बोलना बन्द कर और या तो राजे बोल या बुर निवास या सिर्फ चोदनाथ!
इस पर रानी ने कहा- मैं तो चोदनाथ ही कहूँगी बहनचोद!
‘हा हा हा हा हा! बड़ी जल्दी कुतिया की शर्म निकल गई। देने लगी न हरामज़ादी गाली!’
मैंने कहा- आगे क्या हुक्म है मेरी रानी का… कैसे आगे बढ़ना है बताइये रानी जी?
सुषमा रानी ने इतराते हुए, बड़े कामुक अंदाज़ में बल खाते हुए धीमे स्वर में कहा- पहले तो राजा मुझे कस के बाँहों में जकड़ ले, जैसे अभी बिस्तर पर लिटाने से पहले जकड़ा था। बहुत आनन्द आया जब तुम्हारी जफ्फी में हड्डियाँ कड़कड़ा गईं… साँसें उखाड़ दो मिस्टर चोदनाथ… मुझे बाँहों में लिए लिए मेरे होंठों का रस चूसते रहो राजा…
मैंने रानी को बिस्तर से उठाकर फिर से बाहुपाश में बांध लिया और जैसा रानी चाह रही थी, अपने होंठ उसके गुलाब की पंखड़ियों समान लबों से सटा दिए, और लगा उनको हुमक हुमक के चूसने!रानी के मुंह का जूस मेरे मुंह में आ रहा था और मेरा उसके मुंह में, रानी के मुंह का स्वाद और गंध बेहद नशीले थे।
यारो, मस्त हो गया मैं!
लड़कियों के मुखरस और मुखसुगंध कुछ अलग ही होती है, आदमी का लंड तन्ना उठता है… हम्म्म्म… हम्म्म्म… बहनचोद हम्म्म्म.
यह घटना ढाई साल पहले की है, पंचकूला से मेरे पास एक ईमेल आई एक 22 साल की लड़की की, नाम था रूपिंदर कौर, परंतु उसने अपना कहानी के लिए नाम रखा था सुषमा… लिखा था कि जय जी आपकी कहानियाँ पढ़ कर मेरी बुर कुलबुलाने लगती है, रस बहाने लगती है। जिस तरह से आपने रीना की बुर की सील तोड़ी, मैं भी आपसे अपनी सील तुड़वाना चाहती हूँ। यह भी चाहती हूँ कि आप मुझे चोद कर हमारी चुदाई की कथा लिखें … मेरी बड़ी तमन्ना है कि यह कहानी मैं पढ़ूँ। मुझे विश्वास है कि अपनी खुद की चुदाई का विवरण पढ़ के बेहद आनन्द आएगा।
सुषमा रानी के संग आठ दस दिन तक मेल बाज़ी हुई और अंत में आपसी सहमति से मैंने दो दिन का पंचकूला जाने का प्रोग्राम बना लिया। अब तक मैंने उसे सुषमा रानी और उसने मुझे मिस्टर चोदनाथ कहना शुरू कर दिया था। खूब जम के आपस में गालियाँ बकना और तू तड़ाक से बातें करना चालू हो चुका था। हालाँकि रानी पहले पहले गालियाँ देने में हिचकती थी मगर बहुत जल्दी वो सब गन्दी गालियाँ न सिर्फ सीख गई बल्कि गाली देने में उसकी हिचकिचाहट भी ख़त्म हो गई।
तभी रानी ने एक नई बात कही, वो बोली कि उसका प्रेमी राज भी उसकी सील टूटने का दृश्य देखना चाहता है और मेरा शिष्य बन कर चुदाई के खेल में पारंगत होना चाहता है। वो भी चाहता है कि मेरी तरह ज़बरदस्त चोदू बने!
यहाँ राज के विषय में मैं यह बता दूँ कि अपनी दूसरी या तीसरी मेल में सुषमा रानी ने मुझसे पूछा था कि उसके पीछे चार लड़के पड़े हुये हैं, और चारों ही उसको पसंद हैं, वो समझ नहीं पा रही कि किसको चुने। मैंने उसको चार में से एक को चुनने का एक तरीका बताया था जिसके परिणाम स्वरूप राज उसका प्रेमी बन गया था और दोनों ने शादी का फैसला भी कर लिया था।
मैंने उत्तर दिया- ठीक है सुषमा रानी, मैं तेरी सील तोडूंगा। राज अगर अपनी माशूका को चुदवाते हुए देखना चाहता है मुझे क्या… देखे जी भर के!
वैसे तो यह शर्त भी सुषमा रानी ने रखी थी कि वो राज को आशिक़ तभी बनाएगी जब वो उसकी सील मेरे से तुड़वाने को राज़ी होगा और शादी के बाद में भी मेरे से सुषमा रानी चुदा करेगी जिसमें वो कोई ऐतराज़ नहीं करेगा। इसलिए मैंने सुषमा रानी को हामी भर दी कि ठीक है राज उसकी नथ खुलने का नज़ारा देख सकता है।
अब आते हैं कहानी पर:
तय किये हुए दिन मैं पंचकूला जा पहुंचा और होटल बेला विस्टा में ठहर गया। दोपहर दो बजे के करीब सुषमा रानी राज के साथ मेरे रूम में आ गई।
हरामज़ादी को देख के दिल खुश हो गया, मस्त जवान लौंडिया थी माँ की लौड़ी! हृष्ट पुष्ट सरदारनी, बेहद खूबसूरत, 5 फुट 7 इंच का क़द, छरहरा निखरता हुआ मस्त बदन, तने हुए नुकीले चूचुक और खूब गोरा रंग!
मैंने उसको सर से पांव तक निहारा… साली गज़ब की बुर थी कमीनी, खूबसूरत चेहरा, बेहद हसीन हाथ और सुन्दर सुडौल उंगलियाँ। अच्छे बड़े आयताकार सुन्दर नाख़ून जिन पर बैंगनी नेल पोलिश लगाई हुई थी और वे थोड़े थोड़े बिल्कुल सही सही बढ़े हुए थे मस्त! जैसे फिल्मों में अभिनेत्रियाँ नाख़ून रखती है एकदम वैसे!
लहराते हुए रेशमी बाल, लंबी नाक, बड़ी बड़ी आँखें और हल्की सी मुस्कान लिए छोटे छोटे फ़ौरन ही चूसने लायक होंठ… जब ये होंठ लौड़े को दबाएंगे तो कितना मज़ा आएगा। यह बात मन में आते ही लंड मचल उठा।
उसने पटियाला स्टाइल भड़कीले प्रिंट वाली सलवार और गहरे नीले रंग की शमीज़ पहनी हुई थी। पैरों में जूतियाँ जिनमें उसके गोरे पैरों का ऊपरी भाग दिख रहा था। पांव नहीं दिख रहे थे मगर आशा थी कि ऐसे सुन्दर हाथों वाली लड़की के पैर भी सुन्दर होंगे।
राज एक लंबा तगड़ा नवयुवक था, अच्छा स्मार्ट और हैंडसम!
सुषमा रानी भी मुझे भली भांति देखते हुए बोली- हाय मिस्टर चोदनाथ… कैसे हैं आप… आप तो एक प्रोफेसर लगते हैं।
बहनचोद रानी की सेक्सी मीठी आवाज़ सुन कर लगा जैसे कहीं घंटियाँ बज रही हों। लंड तो अकड़ा हुआ था ही, अब फ़ुनफ़ुनाने भी लगा।
तभी राज ने कहा- नमस्ते सर जी!
मैंने भी कहा- नमस्ते राज!
और दोनों को आराम कुर्सियों पर बैठ जाने का इशारा किया।
दोनों बैठ गए तो मैंने राज से कहा- सुन राज…अब जो तेरी माशूका की नथ खोली जाएगी, उस नज़ारे को तू यहीं चुपचाप बैठे देखते रहना… न कुछ बोलना है और न कुछ करना है… मेरी रानी को तो छूना भी मत… आ गई बात समझ में?
राज ने उत्तर दिया- हाँ हाँ सर जी… ऐसा ही होगा… वैसे भी आपकी रानी मुझे छूने कहाँ देती है… अभी तक तो मैंने इसको किस भी नहीं किया… बोलती है जब मैं एक बार चोदनाथ जी से चुद जाऊँ उसके बाद मैं तेरी… अब तक मैंने इसके सिर्फ पैर चाटे हैं और इसकी सु सु पीने के लिए बुर के नज़दीक मुंह लगाया है… बुर से भी नहीं सिर्फ बुर के पास… बस!
मैंने राज को डांटा- सुन बहन के लंड राज… सु सु सिर्फ लड़के करते हैं मादरचोद… लड़कियाँ सु सु नहीं करतीं बल्कि अमृत धारा निकालती हैं… इस धारा को स्वर्ण अमृत या स्वर्ण रस कहा जाता है कमीने… संक्षिप्त में सिर्फ अमृत भी कह सकते हैं… तू किस्मत वाला है बुरिये कि सुषमा रानी तुझको अमृत पीने देती है।
राज ने फ़ौरन कान पकड़ के कहा- सर जी, भूल हो गई, माफ़ कर दीजिये।
सुषमा रानी बोली- और जो तेरी पचासों बार मुट्ठ मारी है उसका भी तो बोल हरामी?
राज ने सर हिला हिला कर यह बात मान ली।
मैंने सुषमा रानी की ओर बड़े प्यार से देखते हुए कहा- रानी बहुत अकलमंद है कमीने.. चिंता न कर… सबर का फल मीठा होता है… अब तू आराम से बैठ और देख तमाशा…. ज़्यादा ठरक चढ़ जाए तो मुट्ठ मार लियो हरामी के पिल्ले!
इतना कह के मैंने लपक कर सुषमा रानी को गोद में उठा लिया और उसको बाँहों में कस के लिपटा लिया। आलिंगन में लिए मैं बिस्तर पर आ गया और रानी को लिटा दिया।
जैसे ही मैं बिस्तर पर चढ़ने को हुआ तो रानी ने खनखनाती हुई शहद सी आवाज़ में कहा- मिस्टर चोदनाथ… एक बात मानोगे मेरी?
मैं- अरे मेरी जान, एक क्यों एक हज़ार बातें मानूँगा… बोल न क्या कहना चाहती है मादरचोद कुतिया?
रानी- कुछ खास नहीं मैं यह चाहती थी कि आज का खेल मेरे इशारों पर चले… जैसे जैसे मैं डायरेक्शन दूँ, आप वैसा वैसा ही करिये… मंज़ूर मिस्टर चोदनाथ!
मैंने गर्दन हिला कर हामी भरी और पूछा- और कुछ बदज़ात रण्डी?
सुषमा रानी ने इठलाते हुए कहा- दूसरा यह कि आपको चैट पर फोन पर तो खूब गालियाँ दे देती थी मगर फेस टू फेस गाली देने में शर्म आ रही है… थोड़ी गर्म हो जाऊँगी तो शायद शर्म भी खुल जाए मिस्टर चोदनाथ!
मैंने कहा- ठीक है, मैं ये बात समझता हूँ लेकिन मेरी एक शर्त यह है कि तू मुझे मिस्टर चोदनाथ बोलना बन्द कर और या तो राजे बोल या बुर निवास या सिर्फ चोदनाथ!
इस पर रानी ने कहा- मैं तो चोदनाथ ही कहूँगी बहनचोद!
‘हा हा हा हा हा! बड़ी जल्दी कुतिया की शर्म निकल गई। देने लगी न हरामज़ादी गाली!’
मैंने कहा- आगे क्या हुक्म है मेरी रानी का… कैसे आगे बढ़ना है बताइये रानी जी?
सुषमा रानी ने इतराते हुए, बड़े कामुक अंदाज़ में बल खाते हुए धीमे स्वर में कहा- पहले तो राजा मुझे कस के बाँहों में जकड़ ले, जैसे अभी बिस्तर पर लिटाने से पहले जकड़ा था। बहुत आनन्द आया जब तुम्हारी जफ्फी में हड्डियाँ कड़कड़ा गईं… साँसें उखाड़ दो मिस्टर चोदनाथ… मुझे बाँहों में लिए लिए मेरे होंठों का रस चूसते रहो राजा…
मैंने रानी को बिस्तर से उठाकर फिर से बाहुपाश में बांध लिया और जैसा रानी चाह रही थी, अपने होंठ उसके गुलाब की पंखड़ियों समान लबों से सटा दिए, और लगा उनको हुमक हुमक के चूसने!रानी के मुंह का जूस मेरे मुंह में आ रहा था और मेरा उसके मुंह में, रानी के मुंह का स्वाद और गंध बेहद नशीले थे।
यारो, मस्त हो गया मैं!
लड़कियों के मुखरस और मुखसुगंध कुछ अलग ही होती है, आदमी का लंड तन्ना उठता है… हम्म्म्म… हम्म्म्म… बहनचोद हम्म्म्म.