S
StoryPublisher
Guest
हवस की गुलाम --1
दोस्तो इस कहानी का फूल मज़ा लेने के सारे पार्ट ज़रूर पढ़ें
हवस की गुलाम --1
हवस की गुलाम --2
हवस की गुलाम --3
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर
हाजिर हूँ . दोस्तो जब भगवान चूत देता है तो छप्पर फाड़ कर
देता है कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ
ट्रेन आई तो मैं जगह बनाता अंदर गया. बहुत रश था. लोग
ऊपर बर्त पर भी बैठे थे. किसी तरह अंदर घुसकर अपना बॅग
ऊपर रखना चाहा जिस पर एक जवान औरत दो सयानी लड़कियो के
साथ बैठी थी. मेरे बॅग रखने पर लड़की ने मना किया तो उस औरत
ने कहा, “रख लेने दो. रखिए भाई साब.”
मैने उस औरत के व्यवहार से खुश हो बॅग रखा और खड़ा खड़ा
सफ़र करने लगा. वा तीनो मेरे सामने की ऊपर वाली बर्त पर थी.
ट्रेन चली तो कुछ राहत हुई. तभी वह औरत जो करीब 25-26 की
होगी मुझे देखने लगी तो मैं भी उसे देखने लगा. वह लोग अच्छे
घराने के लग रहे थे. जिस बर्त को पकड़े था उसी पर वह बैठी
थी. तभी मुझे अपने हाथ पर उसका हाथ महसूस हुआ तो मैने
हाथ अलग किया तो वहाँ भी उसका हाथ मेरे हाथ पर लगा. मैने
हाथ हटा लिया तो वा मुझे देखती आगे सरक्ति बोली, “भाई साब
आपको कहाँ जाना है?”
“जी भोपाल.”
“अरे भोपाल तो हम भी जा रहे हैं. किसके वहाँ जाना है आपको?”
उसने झुक कर कहा तो उसका ऊपर का पूरा हिस्सा नज़र आया.
मैं उसको देखते अपनी नयी जॉब के बारे मे बताने लगा. मेरी बात
सुनते उसने अपने होंठो को दातो से दबाते अपने ब्लाउस को उभारा तो
मैं सनसना गया. वह मुझे देखते हुए बोली, “भाई साब नाम क्या
है आपका?”
“जी राज शर्मा.”
“अच्छा मेरा नाम माया है.”
अब वह सीधी बैठ मुझे देखती और अपने साथ की लड़कियों से ख़ुसर
पुसर करती अपनी सारी को अपने उभारो पर बार बार सही कर रही
थी. उसकी माँग मे सिंदूर था पर लड़किया कुँवारी थी और 18-19 की
थी. तभी उसने मेरे हाथ को दबा मुझसे कहा, “आइए भाई साब
ऊपर बैठ जाइए.”
“ज्ज जी ठीक है आप बैठिए.” मैं समझ गया वह मुझे लिफ्ट दे
रही है.
“कोई बात नही आप तो अपने ही शहर चल रहे हैं. फिर रात भर
का सफ़र है, खड़े खड़े नही होगा. ये दोनो मेरी ननद हैं. मेरे
पति बॉम्बे मैं हैं.” यह कहती वह आगे झुकी तो मेरी नज़रे उसके
ब्लाउस से चिपक गयी.
दोनो जवानिया अधनंगी दिखी. उसकी नंगी चूचियों को देख मैं
बहकने लगा. अभी मैं कुँवारा था इसलिए कुछ सकुचाहत हो रही
थी उससे सटने मैं. तभी वह सामान उठा अपनी ननद को देती
बोली, “लो एक तरफ रखो.”
इस पर उस लड़की ने मुझे ध्यान से देखा और बॅग एक ओर रख जगह
बनाई तो उस औरत ने अपनी बगल मे जगह बनाते कहा, “आइए भाई
साब.”
“ज्ज्ज.ज्जई आप बैठिए.”
“आइए भी.” और हाथ को दबा करेंट दौड़ाया.
उसके बिहेव से बदन मे सनसनी हुई. मैं समझ गया कि यह
सफ़र का मज़ा देगी. उसके ब्लाउस के उभारों को देखता शूस उतारने
लगा. उस जवान औरत ने मुझे बिठाने के लिए अपनी कमसिन ननद को
एक ओर खिसकाया तो वा दोनो मुझे गौर से देखने लगी. दोनो फ्रॉक
मे थी पर उनकी भाभी सारी मे थी. बड़ी ननद 19 की लग रही
थी. ऊपर चढ़ा तो कम जगह की वजह से मैं उस औरत से सॅट गया.
मैं अभी सिकुड कर बैठा था. ट्रेन तेज़ी से चल रही थी और हम
सब चुप थे.
कुछ देर बाद उसने पुच्छा, “आप नौकरी पर अकेले जा रहे हैं?”
“ज्जई नयी नयी जॉब है.”
“बाल बच्चे बाद मे लाएँगे?”
“अभी मेरी शादी नही हुई है.” उसके उभारो को देखते गुदगुदाते
मन से कहा.
“तो अब जल्दी शादी करेंगे.” उसने मुझे देखते कहा.
“नही अभी एक दो साल नही करेंगे. अभी तो नौकरी मिली है.” मेरा
लंड अपने आप कसता जा रहा था.
“यह ठीक रहेगा. पहले कमाई फिर लुगाई.”
“ज्जजई.”
“आराम से बैठिए वहाँ तो आपको सरकारी क्वॉर्टर मिलेगा.”
“जी नही किराए का लेना पड़ेगा.”
इसपर वह अपनी बगल मे बैठी बड़ी वाली से बोली, “मीना तुमको
बैठने मे दिक्कत हो रही है?”
“नही भाभी, अपने पास भी तो किराए का कमरा है. इनको अपने साथ
रख लो.” और झुक कर जो मेरी ओर देखा तो फ्रॉक मे उभरे उसके
अनार देखकर तड़प गया.
मैं जल्दी से मौके का फयडा उठाते बोला, “आपके पास मकान है?”
“मकान तो है पर और मेरी आँखों मैं अपनी नशीली आँखें डाल
होंटो को दबाया तो मैं समझा कि उसे कैसे किरायेदार की ज़रूरत है.
“जी मुझे कमरा चाहिए, किराया जो कहेंगी दूँगा.”
इसपर वा अपनी बाई रान मॉड्कर बोली, “कही इंतज़ाम ना हो तो
आईएगा.”
“मुझे वहाँ कौन जानता है.” मैने बेचैनी से कहा.
“असल मे भाई साब किराए की बात नही है. हमारे पास दो सयानी
सयानी ननद हैं. अंदर का कमरा है. रखना तो है पर सोच
समझकर रखना होगा. ऐसा आदमी जो परिवार के साथ घुल मिलकर
रहे.”
“मुझसे आपको कोई शिकायत नही होगी.”
इसपर उसने मुझे अजीब सी नज़रो से देखा और अपनी बड़ी ननद से
बोली, “ज़रा तिर्छि होकर बैठो, बीना को उधर खिस्काओ मैं तो फँस
गयी हूँ.”
मुझे हम उमर जवान औरत मज़ेदार लग रही थी. पॅंट टाइट हो गयी
थी. उसके कहने पर छोटी वाली खिसकी तो वह अपनी पीठ बड़ी ननद
की चूचियों से सटकर बैठती मेरी ओर घूमकर बैठी और
बोली, “भाई साब आप ज़रा ठीक से उधर होकर बैठिए.”
मैं उसके बताए तरीके से बैठा तो हम दोनो का चेहरा आपने सामने
हुआ. मैं पैर फैलाकर बैठा था और वह अपनी बड़ी ननद की गोद
मे लेटी सी मेरी ओर मुँह किए बैठी थी. इस तरह से बड़ी वाली का
चेहरा मेरी ओर और चूचियाँ भाभी की पीठ मे धँसी थी. दोनो
लड़किया बार बार मेरी ओर देख रही थी. मैं भी दोनो को देख मस्त
हो रहा था. मुझे वह औरत चुलबुली और दोनो ननद चालू लगी.
मेरे मन मैं भी लालच पैदा हो गया. वह इस तरह से बैठी चुप
रही तो मैने कहा, “आप लोगो को परेशानी हो रही है.”
“नही नही आराम से बैठी हूँ. सोच रही हूँ कि आपको कमरा दे ही
दूं. मेरी ननद का भी मन है.”
“जी बहुत अच्छा रहेगा, जो किराया कहेंगी दूँगा.”
इस पर उसने मुझे घायल करने वाले अंदाज़ से देखा फिर सारी के पल्लू
को ब्लाउस के दोनो उभारो पर ठीक किया और पल्लू के अंदर हाथ ले
जाकर मेरी ओर देखती अपने ब्लाउस के बटन को खोलने लगी. दिख
नही रहा था पर अहसास हो रहा था कि वह ब्लाउस के बटन खोल
रही है. मेरी जवानी मे आग लग गयी और लंड पॅंट मे मचलने
लगा. मैं उसकी बटन खोल रही उंगलियों को देख रहा था. वह ब्रा
नही पहने थी. बटन खोलने के बाद उसने सारी का आँचल ज़रा
नीचे सरकया तो ऊपर की तरफ से उसकी बड़ी-बड़ी बेल सी चूचियाँ
दिखी तो लंड मे पानी आ गया. उसने ब्लाउस के बटन खोल धीरे-
धीरे दोनो चूचियों को नंगा कर दिया फिर दोनो हाथो को मेरे
हाथो पर रखा तो मैने खुश हो उसकी उंगली दबाई. उसने बुरा ना
माना और मेरे हाथ को पकड़ अपने आँचल के नीचे लाई और अपनी
चूचियों पर रख दिया. मुझे लगा कि उसकी चूचियों मे दुनिया
भर का मज़ा भरा है. हाथ रखते ही मैने उसकी चूचियों को
हल्के से दबाया तो वा धीमी आवाज़ मे बोली, “कोई बात नही मज़ा
लीजिए.”
मैने कभी सोचा भी नही था कि मुझे इस तरह का मज़ा भी मिलेगा.
मैं उसके उभारो को दबा-दबा कर मज़ा लेने लगा और अपने आप को
जन्नत मे पहुँचा कर चलती ट्रेन के इस गोलडेन चान्स का फायेदा
उठाने लगा. जवान चूचियाँ थी. वह आराम से बैठी अपनी जवान
बड़ी चूचियों को मुझसे दब्वा रही थी. उसकी ननद एकटक मेरी
हरकत को खामोशी से देख रही थी. मैं उसकी पपीते सी गदराई
चूचियों को हाथ मे लेने के साथ ही जवानी के जोश से भर
गया था. मेरा लंड लोहे का रोड हो गया था. जब मैं दबाने लगा तो
वह ठीक से बैठकर मज़ा लेने लगी. मैने देखा कि उसकी बड़ी वाली
ननद आँचल के ऊपर नज़र जमाए ध्यान से भाभी की चूचियों
को देख रही थी. उसकी उमर तो कुछ ख़ास नही थी पर चूचियाँ
काफ़ी बड़ी-बड़ी थी और एक हाथ मे समा नही रही थी. चलती
ट्रेन मे जन्नत थी.
तभी वह मस्त आँखो से मुझे देखती मुस्कराती बोली, “ज़रा घुंडी
को भी भाई साहब.”
इस पर मैं लंड को झटका दे जवानी के इस गोलडेन चान्स को पा उसके
दोनो लंबे निपल को मसल्ने लगा. निपल खड़े और लंबे थे मैं
उसकी मस्तानी आँखो मे डूब सा गया था. मैं चुप चाप मज़ा ले
रहा था कि उसकी बड़ी वाली ननद अपनी चूचियों को उसकी पीठ मे
दबाती अपने होंठो को कस्ति बोली, “ओह्ह भाभी .”
“ज़रा रूको बस 2 मिनट.”
तभी मैं उसके निपल को उंगली के बीच दबा भैंस के थन की
तरह दूहने लगा तो वह चूतड़ उठाती सी-सी करती बोली, “हाए भाई
साहब बहुत अच्छा ऐसे ही करो. हाए तुम तो कुंवारे नही लगते,
चूचियों को दबाना आता है.”
मुझे वासना का मज़ा लाल कर गया और मैं घुंडीयों को दबा-दबा
खींचने लगा. उसकी ननद प्यार से भाभी को मज़ा लेते देखती अपने
गोरे-गोरे गाल लाल कर रही थी. उसके जैसे लंबे निपल पहली बार
पकड़ा था. तभी वह अपनी दोनो टॅंगो को सिकोर मेरे हाथ को अपनी
चूचियों से हटाती बोली, “हाए अब बस भाई साहब.”
मैं उसकी बात सुन घबरा सा गया और बोला, “हाए थोड़ा और.”
इस पर उसका चेहरा खिल गया और मेरे उभरे लंड को पॅंट पर से
दबाती बोली, “ठीक है आपके इस यार को भी मज़ा दूँगी. आओ मीना
थोड़ा तुम भी दब्वा लो भाई साहब से. अभी भाई साहब का घोड़ा हिन-
हिना रहा है.” और इतना कह वह अपनी 19 साल की जवान हो गयी
कश्मीरी सेब सी चूचियों वाली ननद मीना को आगे अपनी जगह पर
कर खुद उसके पिछे जाने लगी. मीना अभी लड़की थी पर उसकी
चूचियाँ भी उमर से ज़्यादा बड़ी थी. वह खुद भाभी के आगे आई
और अपने बड़े-बड़े संतरे सी चूचियों को फ्रॉक मे उभार मुझे
तड़पाती सामने बैठी और बेचैनी के साथ बिना शरम और हिचक
के बोली, “हाए भाभी मेरी चुस्वा दो.”
अब मुझे यकीन हो गया था कि ननद और भाभी सभी चालू हैं और
मेरी जवानी को देख कर ललचा गयी हैं. मैं काफ़ी लंबा चौड़ा और
उमर 26 साल थी. मैं जवान औरत के साथ सयानी हो रही लड़कियो
को पा अपने लक पर खुश था. मेरा लंड तेज़ी से झटके ले रहा
था. उसने अपनी जवान ननद को क़ायदे से बिठाया फिर उसकी चूचियों
पर हाथ रख बोली, “घर चलकर आराम से पिलाना. क्यों भाई साहब
मकान चाहिए?”
“ज..जी जो किराया कहेंगी दूँगा.”
“किराया नही देना होगा बस मुझे और मेरी दोनो प्यारी-प्यारी नंदो
को जवान कीजिए. हम लोग केवल मर्द किरायेदार रखते हैं. लीजिए
थोड़ा मीना की भी दबा लीजिए.” और अपने हाथ से मेरे हाथ को
पकड़ अपनी ननद की चूचियों पर रखा.
क्रमशः.......................
दोस्तो इस कहानी का फूल मज़ा लेने के सारे पार्ट ज़रूर पढ़ें
हवस की गुलाम --1
हवस की गुलाम --2
हवस की गुलाम --3
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर
हाजिर हूँ . दोस्तो जब भगवान चूत देता है तो छप्पर फाड़ कर
देता है कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ
ट्रेन आई तो मैं जगह बनाता अंदर गया. बहुत रश था. लोग
ऊपर बर्त पर भी बैठे थे. किसी तरह अंदर घुसकर अपना बॅग
ऊपर रखना चाहा जिस पर एक जवान औरत दो सयानी लड़कियो के
साथ बैठी थी. मेरे बॅग रखने पर लड़की ने मना किया तो उस औरत
ने कहा, “रख लेने दो. रखिए भाई साब.”
मैने उस औरत के व्यवहार से खुश हो बॅग रखा और खड़ा खड़ा
सफ़र करने लगा. वा तीनो मेरे सामने की ऊपर वाली बर्त पर थी.
ट्रेन चली तो कुछ राहत हुई. तभी वह औरत जो करीब 25-26 की
होगी मुझे देखने लगी तो मैं भी उसे देखने लगा. वह लोग अच्छे
घराने के लग रहे थे. जिस बर्त को पकड़े था उसी पर वह बैठी
थी. तभी मुझे अपने हाथ पर उसका हाथ महसूस हुआ तो मैने
हाथ अलग किया तो वहाँ भी उसका हाथ मेरे हाथ पर लगा. मैने
हाथ हटा लिया तो वा मुझे देखती आगे सरक्ति बोली, “भाई साब
आपको कहाँ जाना है?”
“जी भोपाल.”
“अरे भोपाल तो हम भी जा रहे हैं. किसके वहाँ जाना है आपको?”
उसने झुक कर कहा तो उसका ऊपर का पूरा हिस्सा नज़र आया.
मैं उसको देखते अपनी नयी जॉब के बारे मे बताने लगा. मेरी बात
सुनते उसने अपने होंठो को दातो से दबाते अपने ब्लाउस को उभारा तो
मैं सनसना गया. वह मुझे देखते हुए बोली, “भाई साब नाम क्या
है आपका?”
“जी राज शर्मा.”
“अच्छा मेरा नाम माया है.”
अब वह सीधी बैठ मुझे देखती और अपने साथ की लड़कियों से ख़ुसर
पुसर करती अपनी सारी को अपने उभारो पर बार बार सही कर रही
थी. उसकी माँग मे सिंदूर था पर लड़किया कुँवारी थी और 18-19 की
थी. तभी उसने मेरे हाथ को दबा मुझसे कहा, “आइए भाई साब
ऊपर बैठ जाइए.”
“ज्ज जी ठीक है आप बैठिए.” मैं समझ गया वह मुझे लिफ्ट दे
रही है.
“कोई बात नही आप तो अपने ही शहर चल रहे हैं. फिर रात भर
का सफ़र है, खड़े खड़े नही होगा. ये दोनो मेरी ननद हैं. मेरे
पति बॉम्बे मैं हैं.” यह कहती वह आगे झुकी तो मेरी नज़रे उसके
ब्लाउस से चिपक गयी.
दोनो जवानिया अधनंगी दिखी. उसकी नंगी चूचियों को देख मैं
बहकने लगा. अभी मैं कुँवारा था इसलिए कुछ सकुचाहत हो रही
थी उससे सटने मैं. तभी वह सामान उठा अपनी ननद को देती
बोली, “लो एक तरफ रखो.”
इस पर उस लड़की ने मुझे ध्यान से देखा और बॅग एक ओर रख जगह
बनाई तो उस औरत ने अपनी बगल मे जगह बनाते कहा, “आइए भाई
साब.”
“ज्ज्ज.ज्जई आप बैठिए.”
“आइए भी.” और हाथ को दबा करेंट दौड़ाया.
उसके बिहेव से बदन मे सनसनी हुई. मैं समझ गया कि यह
सफ़र का मज़ा देगी. उसके ब्लाउस के उभारों को देखता शूस उतारने
लगा. उस जवान औरत ने मुझे बिठाने के लिए अपनी कमसिन ननद को
एक ओर खिसकाया तो वा दोनो मुझे गौर से देखने लगी. दोनो फ्रॉक
मे थी पर उनकी भाभी सारी मे थी. बड़ी ननद 19 की लग रही
थी. ऊपर चढ़ा तो कम जगह की वजह से मैं उस औरत से सॅट गया.
मैं अभी सिकुड कर बैठा था. ट्रेन तेज़ी से चल रही थी और हम
सब चुप थे.
कुछ देर बाद उसने पुच्छा, “आप नौकरी पर अकेले जा रहे हैं?”
“ज्जई नयी नयी जॉब है.”
“बाल बच्चे बाद मे लाएँगे?”
“अभी मेरी शादी नही हुई है.” उसके उभारो को देखते गुदगुदाते
मन से कहा.
“तो अब जल्दी शादी करेंगे.” उसने मुझे देखते कहा.
“नही अभी एक दो साल नही करेंगे. अभी तो नौकरी मिली है.” मेरा
लंड अपने आप कसता जा रहा था.
“यह ठीक रहेगा. पहले कमाई फिर लुगाई.”
“ज्जजई.”
“आराम से बैठिए वहाँ तो आपको सरकारी क्वॉर्टर मिलेगा.”
“जी नही किराए का लेना पड़ेगा.”
इसपर वह अपनी बगल मे बैठी बड़ी वाली से बोली, “मीना तुमको
बैठने मे दिक्कत हो रही है?”
“नही भाभी, अपने पास भी तो किराए का कमरा है. इनको अपने साथ
रख लो.” और झुक कर जो मेरी ओर देखा तो फ्रॉक मे उभरे उसके
अनार देखकर तड़प गया.
मैं जल्दी से मौके का फयडा उठाते बोला, “आपके पास मकान है?”
“मकान तो है पर और मेरी आँखों मैं अपनी नशीली आँखें डाल
होंटो को दबाया तो मैं समझा कि उसे कैसे किरायेदार की ज़रूरत है.
“जी मुझे कमरा चाहिए, किराया जो कहेंगी दूँगा.”
इसपर वा अपनी बाई रान मॉड्कर बोली, “कही इंतज़ाम ना हो तो
आईएगा.”
“मुझे वहाँ कौन जानता है.” मैने बेचैनी से कहा.
“असल मे भाई साब किराए की बात नही है. हमारे पास दो सयानी
सयानी ननद हैं. अंदर का कमरा है. रखना तो है पर सोच
समझकर रखना होगा. ऐसा आदमी जो परिवार के साथ घुल मिलकर
रहे.”
“मुझसे आपको कोई शिकायत नही होगी.”
इसपर उसने मुझे अजीब सी नज़रो से देखा और अपनी बड़ी ननद से
बोली, “ज़रा तिर्छि होकर बैठो, बीना को उधर खिस्काओ मैं तो फँस
गयी हूँ.”
मुझे हम उमर जवान औरत मज़ेदार लग रही थी. पॅंट टाइट हो गयी
थी. उसके कहने पर छोटी वाली खिसकी तो वह अपनी पीठ बड़ी ननद
की चूचियों से सटकर बैठती मेरी ओर घूमकर बैठी और
बोली, “भाई साब आप ज़रा ठीक से उधर होकर बैठिए.”
मैं उसके बताए तरीके से बैठा तो हम दोनो का चेहरा आपने सामने
हुआ. मैं पैर फैलाकर बैठा था और वह अपनी बड़ी ननद की गोद
मे लेटी सी मेरी ओर मुँह किए बैठी थी. इस तरह से बड़ी वाली का
चेहरा मेरी ओर और चूचियाँ भाभी की पीठ मे धँसी थी. दोनो
लड़किया बार बार मेरी ओर देख रही थी. मैं भी दोनो को देख मस्त
हो रहा था. मुझे वह औरत चुलबुली और दोनो ननद चालू लगी.
मेरे मन मैं भी लालच पैदा हो गया. वह इस तरह से बैठी चुप
रही तो मैने कहा, “आप लोगो को परेशानी हो रही है.”
“नही नही आराम से बैठी हूँ. सोच रही हूँ कि आपको कमरा दे ही
दूं. मेरी ननद का भी मन है.”
“जी बहुत अच्छा रहेगा, जो किराया कहेंगी दूँगा.”
इस पर उसने मुझे घायल करने वाले अंदाज़ से देखा फिर सारी के पल्लू
को ब्लाउस के दोनो उभारो पर ठीक किया और पल्लू के अंदर हाथ ले
जाकर मेरी ओर देखती अपने ब्लाउस के बटन को खोलने लगी. दिख
नही रहा था पर अहसास हो रहा था कि वह ब्लाउस के बटन खोल
रही है. मेरी जवानी मे आग लग गयी और लंड पॅंट मे मचलने
लगा. मैं उसकी बटन खोल रही उंगलियों को देख रहा था. वह ब्रा
नही पहने थी. बटन खोलने के बाद उसने सारी का आँचल ज़रा
नीचे सरकया तो ऊपर की तरफ से उसकी बड़ी-बड़ी बेल सी चूचियाँ
दिखी तो लंड मे पानी आ गया. उसने ब्लाउस के बटन खोल धीरे-
धीरे दोनो चूचियों को नंगा कर दिया फिर दोनो हाथो को मेरे
हाथो पर रखा तो मैने खुश हो उसकी उंगली दबाई. उसने बुरा ना
माना और मेरे हाथ को पकड़ अपने आँचल के नीचे लाई और अपनी
चूचियों पर रख दिया. मुझे लगा कि उसकी चूचियों मे दुनिया
भर का मज़ा भरा है. हाथ रखते ही मैने उसकी चूचियों को
हल्के से दबाया तो वा धीमी आवाज़ मे बोली, “कोई बात नही मज़ा
लीजिए.”
मैने कभी सोचा भी नही था कि मुझे इस तरह का मज़ा भी मिलेगा.
मैं उसके उभारो को दबा-दबा कर मज़ा लेने लगा और अपने आप को
जन्नत मे पहुँचा कर चलती ट्रेन के इस गोलडेन चान्स का फायेदा
उठाने लगा. जवान चूचियाँ थी. वह आराम से बैठी अपनी जवान
बड़ी चूचियों को मुझसे दब्वा रही थी. उसकी ननद एकटक मेरी
हरकत को खामोशी से देख रही थी. मैं उसकी पपीते सी गदराई
चूचियों को हाथ मे लेने के साथ ही जवानी के जोश से भर
गया था. मेरा लंड लोहे का रोड हो गया था. जब मैं दबाने लगा तो
वह ठीक से बैठकर मज़ा लेने लगी. मैने देखा कि उसकी बड़ी वाली
ननद आँचल के ऊपर नज़र जमाए ध्यान से भाभी की चूचियों
को देख रही थी. उसकी उमर तो कुछ ख़ास नही थी पर चूचियाँ
काफ़ी बड़ी-बड़ी थी और एक हाथ मे समा नही रही थी. चलती
ट्रेन मे जन्नत थी.
तभी वह मस्त आँखो से मुझे देखती मुस्कराती बोली, “ज़रा घुंडी
को भी भाई साहब.”
इस पर मैं लंड को झटका दे जवानी के इस गोलडेन चान्स को पा उसके
दोनो लंबे निपल को मसल्ने लगा. निपल खड़े और लंबे थे मैं
उसकी मस्तानी आँखो मे डूब सा गया था. मैं चुप चाप मज़ा ले
रहा था कि उसकी बड़ी वाली ननद अपनी चूचियों को उसकी पीठ मे
दबाती अपने होंठो को कस्ति बोली, “ओह्ह भाभी .”
“ज़रा रूको बस 2 मिनट.”
तभी मैं उसके निपल को उंगली के बीच दबा भैंस के थन की
तरह दूहने लगा तो वह चूतड़ उठाती सी-सी करती बोली, “हाए भाई
साहब बहुत अच्छा ऐसे ही करो. हाए तुम तो कुंवारे नही लगते,
चूचियों को दबाना आता है.”
मुझे वासना का मज़ा लाल कर गया और मैं घुंडीयों को दबा-दबा
खींचने लगा. उसकी ननद प्यार से भाभी को मज़ा लेते देखती अपने
गोरे-गोरे गाल लाल कर रही थी. उसके जैसे लंबे निपल पहली बार
पकड़ा था. तभी वह अपनी दोनो टॅंगो को सिकोर मेरे हाथ को अपनी
चूचियों से हटाती बोली, “हाए अब बस भाई साहब.”
मैं उसकी बात सुन घबरा सा गया और बोला, “हाए थोड़ा और.”
इस पर उसका चेहरा खिल गया और मेरे उभरे लंड को पॅंट पर से
दबाती बोली, “ठीक है आपके इस यार को भी मज़ा दूँगी. आओ मीना
थोड़ा तुम भी दब्वा लो भाई साहब से. अभी भाई साहब का घोड़ा हिन-
हिना रहा है.” और इतना कह वह अपनी 19 साल की जवान हो गयी
कश्मीरी सेब सी चूचियों वाली ननद मीना को आगे अपनी जगह पर
कर खुद उसके पिछे जाने लगी. मीना अभी लड़की थी पर उसकी
चूचियाँ भी उमर से ज़्यादा बड़ी थी. वह खुद भाभी के आगे आई
और अपने बड़े-बड़े संतरे सी चूचियों को फ्रॉक मे उभार मुझे
तड़पाती सामने बैठी और बेचैनी के साथ बिना शरम और हिचक
के बोली, “हाए भाभी मेरी चुस्वा दो.”
अब मुझे यकीन हो गया था कि ननद और भाभी सभी चालू हैं और
मेरी जवानी को देख कर ललचा गयी हैं. मैं काफ़ी लंबा चौड़ा और
उमर 26 साल थी. मैं जवान औरत के साथ सयानी हो रही लड़कियो
को पा अपने लक पर खुश था. मेरा लंड तेज़ी से झटके ले रहा
था. उसने अपनी जवान ननद को क़ायदे से बिठाया फिर उसकी चूचियों
पर हाथ रख बोली, “घर चलकर आराम से पिलाना. क्यों भाई साहब
मकान चाहिए?”
“ज..जी जो किराया कहेंगी दूँगा.”
“किराया नही देना होगा बस मुझे और मेरी दोनो प्यारी-प्यारी नंदो
को जवान कीजिए. हम लोग केवल मर्द किरायेदार रखते हैं. लीजिए
थोड़ा मीना की भी दबा लीजिए.” और अपने हाथ से मेरे हाथ को
पकड़ अपनी ननद की चूचियों पर रखा.
क्रमशः.......................