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हवस की गुलाम --2
दोस्तो इस कहानी का फूल मज़ा लेने के सारे पार्ट ज़रूर पढ़ें
हवस की गुलाम --1
हवस की गुलाम --2
हवस की गुलाम --3
गतान्क से आगे.....................
मैं बड़ी के बाद हाथ मे आने वाली छोटी चूचियों को पा
एकदम से कसमसा गया. मैं फ्रॉक पर से मीना की चूचियों को प्यार
से मसल्ने लगा. कभी सपने मे भी इस तरह का मज़ा नही लिया
था. तभी वह औरत मस्त अंदाज़ से बोली, “ज़रा कस-कस कर दबाइए
ना तभी तो मेरी प्यारी ननद को मज़ा आएगा.”
उसकी बात सुन उसकी ननद मीना बोली, “हाए भाभी मज़ा आ रहा है.”
“जल्दी से ले लो मज़ा, भाई साहब को थोड़ा बीना की भी चखना है.”
बीना सबसे छोटी और 18 साल की थी. मैं मीना की दबा रहा था.
निपल फ्रॉक मे उभरे हुए थे और इसकी चूचियों को दबाने से तो और
भी मज़ा आ रहा था. तभी वह मुझसे बोली, “भाई साहब.”
“हां.” “हमारे यहाँ किरायेदार बनकर रहिए तो चोदन और भोजन
दोनो का इंतज़ाम हो जाएगा.
उसकी बात सुन मैं कसमसा गया. वह इस तरह की गंदी बाते करती
मुझे देख रही थी. मीना भी अपनी भाभी की तरह चूचियों को
उभार कर मसलवा रही थी. मीना के होंठ कसे थे और आँख बंद
थी. उसको देख उसकी भाभी बोली, “निपल मस्लो हाए अब यह जाने
वाली है.”
मैं उसके इशारे को समझ निपल को फ्रॉक के कपड़े से पकड़ मसल्ने
लगा तो छ्छोकरी अपनी रानो को कस्ति सिसकारी ले मुझे पागल बनाने
लगी. 10-12 बार मैं ही उसकी चूत भी भाभी की चूत की तरह
नमकीन पानी को चढ्ढि मे टपकाने लगी.
चूत के पानी से अपनी चढ्ढि गीली कर वह लंबी लंबी साँसे लेती
कॅटिली नज़रो से मुझे देखते पिछे जाने लगी तो उसकी मस्त भाभी
मेरे लंड को पकड़ती बोली, “हाए तुम्हारा तो अभी भी नही निकला.”
इस पर मैने उसकी चूचियों को पकड़ दीवानगी के साथ कहा, “इसे
इसकी खुराक दो तब निकलेगा.”
वह चालाक औरत मेरी मर्दानगी को नाप रही थी. जवान ननद की
चूचियों को मसल मैं उस औरत का गुलाम बन गया था. यकीन था
कि वह अपने साथ ही अपनी जवान ननदों का मज़ा भी दिलवाएगी. उसने
लंड पकड़ा और मैने ब्लाउस के ऊपर से चूचियों को पकड़ा तो लगा
की अपने आप को भूल गया हूँ.
तभी उसके आगे उसकी सबसे छोटी ननद बीना अपनी 18 साल की गदराई
जवानी लेकर बैठी तो वह मुस्कान के साथ लंड को दबाती बोली, “लो
भाई साहब थोड़ा इसको भी.”
मैं गदगद हो गया. उमर के हिसाब से 18 साल की लौंडिया की भी
काफ़ी बड़ी थी. बड़ी बहन की तरह यह भी चढ्ढि और फ्रॉक मे
थी. चूचियाँ उभर रही थी और टमाटर सी थी. इसकी तो आराम से
एक हाथ मे आने वाली थी. बड़ी वाली ननद की तरह इसे भी अपनी
गोद मे बिठाती उसके टमाटरो पर हाथ फेरती बोली, “लो मसलो भाई
साहब अभी तुम्हारा डाउन हो जाएगा.”
तभी मुझे छोटी वाली की गोरी-गोरी रानो के बीच की चढ्ढि दिख
गयी. मैं एक हाथ को बेताबी के साथ उसकी जवान हो रही
चूचियों पर लगा मस्त हो खूबसूरत जवान औरत को देखते दूसरे
हाथ को लड़की की चूत की ओर सरकाते बोला, “हाए थोड़ा नीचे का
भी तभी तो डाउन होगा.”
“घर चलकर आराम से लेना पूरा मज़ा. अभी बस ज़रा दबा दो.”
जब मैने छोटी वाली बीना की चूचियों को दबाया तो उसने भी अपनी
बड़ी बहन की तरह दोनो चूचियों को आगे उभार दिया. मैं छोटी
वाली के कच्चे अनार सी दोनो चूचियों को मसलता मस्ती की सीमा
को पार करने लगा.
तभी उसकी भाभी ने हाथ आगे कर मेरे लंड को पॅंट के ऊपर से
पकड़ा और मस्त सुपरे को दबाती बोली, “हमारे पास तुमको जन्नत का
मज़ा मिलेगा. मज़ा लो अब निकलेगा.”
उसकी इस हरकत से खुश हो लंड को झटके देता छोटी चूचियों को
मसल्ने लगा. वह भी अपनी बड़ी बहन की तरह खुश लग रही थी.
तभी मेरा लंड पॅंट मे झड़ने लगा तो मैने कच-कचा कर बीना
की चूचियों को कसकर पकड़ लिया और तब तक पकड़े रहा जब तक
मेरा लंड झारकर ठंडा नही हो गया. लंड बुरी तरह झाड़ा था.
पूरी पॅंटी भीग गयी थी. उसने मेरे हाथ को बीना की चूचियों से
हटा उसे पिछे किया और खुद आगे आ मुझसे चिपक कर बैठी.
झड़ने के बाद मैं शरमा रहा था पर हर साइज़ की तितलिया एक साथ
पाकर मज़ा आया था. वह मुझसे चिपकी थी और उसकी दोनो ननद चुप
बैठी हमे देख रही थी.
10 मिनट बाद मेरी कमर मे हाथ डाल मुस्कान के साथ
बोली, “मज़ा आया?”
जवाब देने मे मैं शरमाया तो वह और चिपकती बोली, “क्यों शर्मा रहे
हो? मैं अच्छी नही लग रही क्या?”
“ज..जी आप तो बहुत खूबसूरत हैं, बहुत मज़ा दिया आपने.”
“अभी तो कुछ नही, जब किरायेदार बनकर हमारे साथ रहोगे तब
देखना. कसम से तुम्हारी जवानी ने लूट लिया. तुम तो हम तीनो को एक
बार मे ही ठंडा कर दोगे. मेरी ननदे पसंद आई?”
“ज..जी बहुत.”
“छोटी वाली बीना की भी चखवा दूँगी. अब क्या शरम आराम से मेरी
कमर मे हाथ डाल कर बैठो. कोई नही देख रहा है, सब सो रहे
हैं.”
उस औरत ने ठंडा करके दुबारा मेरी जवानी को छेड़ना शुरू कर
दिया. मैने धीरे से उसकी कमर मे हाथ डाला तो वह गाल से गाल
सटा कर बोली, “हमारे घर मे रहोगे तो हर चीज़ की आराम रहेगी.
घर मे केवल सास है. हमको बहुत मानती है. अभी सिर्फ़ 45 की
है पर लगती 35 की है. उसको भी तुम्हारी खुराक दिलवाकर जवान
करवा दूँगी तो वह भी हम लोगो के साथ मौज मस्ती करेगी. मैं
अपने पति से खुश नही हूँ. वह बॉम्बे मे है और उसका एकदम
मरियल सा है. अभी मुझे कोई बच्चा भी नही हुआ है.”
“ज..जी आपकी शादी को तो बहुत दिन हो गये होंगे?”
“कहाँ अभी तो साल भर भी नही हुआ है. दोनो लौंडिया मेरे हाथ
मे हैं, जिसकी कहोगे उसकी दिलवा दूँगी.”
जब उसने ननद के साथ-साथ सास को भी चुदवाने की बात की तो
मैं मज़े से भर ठंडे हो गये लंड को फिर से खड़ा करने लगा और
उसकी कमर को कस दोनो चूचियों पर हाथ रख दिया. वह
बोली, “घर पर कोई नही है. राजा मेरी कसम सच-सच बताओ कितनी
बार चोदा है अब तक?” अब तुम कहने को भाय्या और मेरे लिए सैंया
हो.”
उसके इस खुले क्वेस्चन पर बदन की ठंडक गायब हो गयी. मेरे
लूज लंड मे टेन्षन आया. मुझे अनोखा लग लग रहा था कि वह
मेरे जैसे अंजान के साथ इस तरह कर रही है जैसे कोई मस्तानी
रंडी अपने पुराने और मनपसंद कस्टमर के साथ कर रही हो और
वह भी घर पर नही बल्कि चलती ट्रेन मे. रात आधी निकल
चुकी थी. भीड़ के कारण सभी एक दूसरे पर लदे सो रहे थे.
ऊपर जो हो रहा था उसे केवल उसकी दोनो नन्दे ही देख सकती थी जो
अपनी-अपनी चूचियाँ मसलवा कर अपनी-अपनी चढ्ढि गीली करने के बाद
चुप थी. उसके खुले सवाल पर मेरी जवानी बौखला गयी और मैने
उसके दमकते चेहरे पर नज़र जमा थोड़ा झेन्प्ते हुए उसे देखा तो
वह चूची को उभार कर कमर को हाथ से दबाती
बोली, “अब क्या झिझक, मेरे साथ जन्नत की सैर करते चलो. बताओ
कितनी को चोदा है?”
इस पर मैं उसकी पपीते सी चूचियों को दबाते बोला, “हाए कितनी
अच्छी हो. अब मैं शादी नही करूँगा. आप मुझे किरायेदार बनाकर
रखिए.”
इस पर वह मस्ती से भर बोली, “पहले जवाब दो कितनी को चोदा है?”
वह गाल को मेरे मुँह के पास ला बात कर रही थी जिससे बदन
सनसना रहा था.
ट्रेन के हसीन मज़े को लूटते बोला, “बस एक-दो को.”
“मेरी तरह जवान थी?”
“हां पर सब बेकार, हाए भाभी आप कितनी प्यारी हैं.” और ब्लाउस
के ऊपर से उसकी चुचियो को मसला.
मुझे उस औरत के पास जो मज़ा मिल रहा था उसके आगे सब मज़े
फीके थे. वह दोनो ननदों की ओर देख कमर के हाथ को झटके से
अलग कर मेरे गाल मसल बोली, “अब हम लोगो से शरमाओ नही. हम लोगो
को पाकर सब भूल जाओगे. खूब मज़ा लो.”
इस पर मैं उसके ब्लाउस मे उभरे निपल को पकड़ तड़प कर
बोला, “हाए कितनी खूबसूरत हैं आपकी.”
“अब हमारे साथ मज़ा लेते चलो. ट्रेन तो सुबह पहुँचेगी. तुम
बहुत भोले हो, मेरा दिल आ गया तुम्हारे भोलेपन पर. दो के साथ
मज़ा ले चुके हो.”
“जी दोनो बेकार थी. हाए कितनी प्यारी घुंडी हैं आपकी.”
“मेरा कहा मनोगे तो जन्नत मिलेगी. छोटी वाली ननद की तो तेल
लगाने वाली है. उसकी भी चखाउन्गि पर जब मुझे अपनी जवानी का
मज़ा दोगे.”
“हाए भाभी मेरा सब कुछ आपका है, जो कहेंगी करूँगा बस मुझे
अपना किरायेदार बना लो.” और दोनो निपल को मसल्ने लगा.
वह मुझसे बोली, “हाए छोड़ो मैं जैसे कहती हूँ वैसे करो. उन
औरतो को चोदा ही था या ऐश भी किया था?”
“हाए उनका नाम मत लीजिए.”
“देखो राज शर्मा मेरी जवानी को वही समहाल सकता है जो मेरे साथ
अययशी करे. तुम केवल टाँग उठाकर चोदने वाले हो. हम लोग
खुलकर मज़ा लेने वाले को ही किरायेदार रखते हैं.”
“जी मुझे मंज़ूर है.”
“ठीक है घबराओ नही रास्ते भर ऐश करते घर ले चलेंगे.
बोलो मेरी सास को चोदोगे?”
“जी.”
“और मुझे?”
“आपको भी.”
“और मेरी दोनो मस्तानी ननदों को?”
“उनको भी.”
वह जादूगरनी थी. उसने मुझे अपने पास आने का इशारा किया. पास
गया और उसके इशारे पर उसकी चूचियों पर हाथ फेरा तो वह मेरा
हाथ पकड़ अपनी चूचियों पर दबाती बोली, “आज कोई मिला है. दोनो
हाथ से मेरी कमर दबाओ.” मैं कमर को दबाने लगा तो वह
बोली, “कमर दबाते हुए सारी खोलो. तुम्हारी जवानी की प्यास इसी
ट्रेन मे बुझा दूँगी. अभी चुदवाउंगी तुमसे.”
क्रमशः.......................
दोस्तो इस कहानी का फूल मज़ा लेने के सारे पार्ट ज़रूर पढ़ें
हवस की गुलाम --1
हवस की गुलाम --2
हवस की गुलाम --3
गतान्क से आगे.....................
मैं बड़ी के बाद हाथ मे आने वाली छोटी चूचियों को पा
एकदम से कसमसा गया. मैं फ्रॉक पर से मीना की चूचियों को प्यार
से मसल्ने लगा. कभी सपने मे भी इस तरह का मज़ा नही लिया
था. तभी वह औरत मस्त अंदाज़ से बोली, “ज़रा कस-कस कर दबाइए
ना तभी तो मेरी प्यारी ननद को मज़ा आएगा.”
उसकी बात सुन उसकी ननद मीना बोली, “हाए भाभी मज़ा आ रहा है.”
“जल्दी से ले लो मज़ा, भाई साहब को थोड़ा बीना की भी चखना है.”
बीना सबसे छोटी और 18 साल की थी. मैं मीना की दबा रहा था.
निपल फ्रॉक मे उभरे हुए थे और इसकी चूचियों को दबाने से तो और
भी मज़ा आ रहा था. तभी वह मुझसे बोली, “भाई साहब.”
“हां.” “हमारे यहाँ किरायेदार बनकर रहिए तो चोदन और भोजन
दोनो का इंतज़ाम हो जाएगा.
उसकी बात सुन मैं कसमसा गया. वह इस तरह की गंदी बाते करती
मुझे देख रही थी. मीना भी अपनी भाभी की तरह चूचियों को
उभार कर मसलवा रही थी. मीना के होंठ कसे थे और आँख बंद
थी. उसको देख उसकी भाभी बोली, “निपल मस्लो हाए अब यह जाने
वाली है.”
मैं उसके इशारे को समझ निपल को फ्रॉक के कपड़े से पकड़ मसल्ने
लगा तो छ्छोकरी अपनी रानो को कस्ति सिसकारी ले मुझे पागल बनाने
लगी. 10-12 बार मैं ही उसकी चूत भी भाभी की चूत की तरह
नमकीन पानी को चढ्ढि मे टपकाने लगी.
चूत के पानी से अपनी चढ्ढि गीली कर वह लंबी लंबी साँसे लेती
कॅटिली नज़रो से मुझे देखते पिछे जाने लगी तो उसकी मस्त भाभी
मेरे लंड को पकड़ती बोली, “हाए तुम्हारा तो अभी भी नही निकला.”
इस पर मैने उसकी चूचियों को पकड़ दीवानगी के साथ कहा, “इसे
इसकी खुराक दो तब निकलेगा.”
वह चालाक औरत मेरी मर्दानगी को नाप रही थी. जवान ननद की
चूचियों को मसल मैं उस औरत का गुलाम बन गया था. यकीन था
कि वह अपने साथ ही अपनी जवान ननदों का मज़ा भी दिलवाएगी. उसने
लंड पकड़ा और मैने ब्लाउस के ऊपर से चूचियों को पकड़ा तो लगा
की अपने आप को भूल गया हूँ.
तभी उसके आगे उसकी सबसे छोटी ननद बीना अपनी 18 साल की गदराई
जवानी लेकर बैठी तो वह मुस्कान के साथ लंड को दबाती बोली, “लो
भाई साहब थोड़ा इसको भी.”
मैं गदगद हो गया. उमर के हिसाब से 18 साल की लौंडिया की भी
काफ़ी बड़ी थी. बड़ी बहन की तरह यह भी चढ्ढि और फ्रॉक मे
थी. चूचियाँ उभर रही थी और टमाटर सी थी. इसकी तो आराम से
एक हाथ मे आने वाली थी. बड़ी वाली ननद की तरह इसे भी अपनी
गोद मे बिठाती उसके टमाटरो पर हाथ फेरती बोली, “लो मसलो भाई
साहब अभी तुम्हारा डाउन हो जाएगा.”
तभी मुझे छोटी वाली की गोरी-गोरी रानो के बीच की चढ्ढि दिख
गयी. मैं एक हाथ को बेताबी के साथ उसकी जवान हो रही
चूचियों पर लगा मस्त हो खूबसूरत जवान औरत को देखते दूसरे
हाथ को लड़की की चूत की ओर सरकाते बोला, “हाए थोड़ा नीचे का
भी तभी तो डाउन होगा.”
“घर चलकर आराम से लेना पूरा मज़ा. अभी बस ज़रा दबा दो.”
जब मैने छोटी वाली बीना की चूचियों को दबाया तो उसने भी अपनी
बड़ी बहन की तरह दोनो चूचियों को आगे उभार दिया. मैं छोटी
वाली के कच्चे अनार सी दोनो चूचियों को मसलता मस्ती की सीमा
को पार करने लगा.
तभी उसकी भाभी ने हाथ आगे कर मेरे लंड को पॅंट के ऊपर से
पकड़ा और मस्त सुपरे को दबाती बोली, “हमारे पास तुमको जन्नत का
मज़ा मिलेगा. मज़ा लो अब निकलेगा.”
उसकी इस हरकत से खुश हो लंड को झटके देता छोटी चूचियों को
मसल्ने लगा. वह भी अपनी बड़ी बहन की तरह खुश लग रही थी.
तभी मेरा लंड पॅंट मे झड़ने लगा तो मैने कच-कचा कर बीना
की चूचियों को कसकर पकड़ लिया और तब तक पकड़े रहा जब तक
मेरा लंड झारकर ठंडा नही हो गया. लंड बुरी तरह झाड़ा था.
पूरी पॅंटी भीग गयी थी. उसने मेरे हाथ को बीना की चूचियों से
हटा उसे पिछे किया और खुद आगे आ मुझसे चिपक कर बैठी.
झड़ने के बाद मैं शरमा रहा था पर हर साइज़ की तितलिया एक साथ
पाकर मज़ा आया था. वह मुझसे चिपकी थी और उसकी दोनो ननद चुप
बैठी हमे देख रही थी.
10 मिनट बाद मेरी कमर मे हाथ डाल मुस्कान के साथ
बोली, “मज़ा आया?”
जवाब देने मे मैं शरमाया तो वह और चिपकती बोली, “क्यों शर्मा रहे
हो? मैं अच्छी नही लग रही क्या?”
“ज..जी आप तो बहुत खूबसूरत हैं, बहुत मज़ा दिया आपने.”
“अभी तो कुछ नही, जब किरायेदार बनकर हमारे साथ रहोगे तब
देखना. कसम से तुम्हारी जवानी ने लूट लिया. तुम तो हम तीनो को एक
बार मे ही ठंडा कर दोगे. मेरी ननदे पसंद आई?”
“ज..जी बहुत.”
“छोटी वाली बीना की भी चखवा दूँगी. अब क्या शरम आराम से मेरी
कमर मे हाथ डाल कर बैठो. कोई नही देख रहा है, सब सो रहे
हैं.”
उस औरत ने ठंडा करके दुबारा मेरी जवानी को छेड़ना शुरू कर
दिया. मैने धीरे से उसकी कमर मे हाथ डाला तो वह गाल से गाल
सटा कर बोली, “हमारे घर मे रहोगे तो हर चीज़ की आराम रहेगी.
घर मे केवल सास है. हमको बहुत मानती है. अभी सिर्फ़ 45 की
है पर लगती 35 की है. उसको भी तुम्हारी खुराक दिलवाकर जवान
करवा दूँगी तो वह भी हम लोगो के साथ मौज मस्ती करेगी. मैं
अपने पति से खुश नही हूँ. वह बॉम्बे मे है और उसका एकदम
मरियल सा है. अभी मुझे कोई बच्चा भी नही हुआ है.”
“ज..जी आपकी शादी को तो बहुत दिन हो गये होंगे?”
“कहाँ अभी तो साल भर भी नही हुआ है. दोनो लौंडिया मेरे हाथ
मे हैं, जिसकी कहोगे उसकी दिलवा दूँगी.”
जब उसने ननद के साथ-साथ सास को भी चुदवाने की बात की तो
मैं मज़े से भर ठंडे हो गये लंड को फिर से खड़ा करने लगा और
उसकी कमर को कस दोनो चूचियों पर हाथ रख दिया. वह
बोली, “घर पर कोई नही है. राजा मेरी कसम सच-सच बताओ कितनी
बार चोदा है अब तक?” अब तुम कहने को भाय्या और मेरे लिए सैंया
हो.”
उसके इस खुले क्वेस्चन पर बदन की ठंडक गायब हो गयी. मेरे
लूज लंड मे टेन्षन आया. मुझे अनोखा लग लग रहा था कि वह
मेरे जैसे अंजान के साथ इस तरह कर रही है जैसे कोई मस्तानी
रंडी अपने पुराने और मनपसंद कस्टमर के साथ कर रही हो और
वह भी घर पर नही बल्कि चलती ट्रेन मे. रात आधी निकल
चुकी थी. भीड़ के कारण सभी एक दूसरे पर लदे सो रहे थे.
ऊपर जो हो रहा था उसे केवल उसकी दोनो नन्दे ही देख सकती थी जो
अपनी-अपनी चूचियाँ मसलवा कर अपनी-अपनी चढ्ढि गीली करने के बाद
चुप थी. उसके खुले सवाल पर मेरी जवानी बौखला गयी और मैने
उसके दमकते चेहरे पर नज़र जमा थोड़ा झेन्प्ते हुए उसे देखा तो
वह चूची को उभार कर कमर को हाथ से दबाती
बोली, “अब क्या झिझक, मेरे साथ जन्नत की सैर करते चलो. बताओ
कितनी को चोदा है?”
इस पर मैं उसकी पपीते सी चूचियों को दबाते बोला, “हाए कितनी
अच्छी हो. अब मैं शादी नही करूँगा. आप मुझे किरायेदार बनाकर
रखिए.”
इस पर वह मस्ती से भर बोली, “पहले जवाब दो कितनी को चोदा है?”
वह गाल को मेरे मुँह के पास ला बात कर रही थी जिससे बदन
सनसना रहा था.
ट्रेन के हसीन मज़े को लूटते बोला, “बस एक-दो को.”
“मेरी तरह जवान थी?”
“हां पर सब बेकार, हाए भाभी आप कितनी प्यारी हैं.” और ब्लाउस
के ऊपर से उसकी चुचियो को मसला.
मुझे उस औरत के पास जो मज़ा मिल रहा था उसके आगे सब मज़े
फीके थे. वह दोनो ननदों की ओर देख कमर के हाथ को झटके से
अलग कर मेरे गाल मसल बोली, “अब हम लोगो से शरमाओ नही. हम लोगो
को पाकर सब भूल जाओगे. खूब मज़ा लो.”
इस पर मैं उसके ब्लाउस मे उभरे निपल को पकड़ तड़प कर
बोला, “हाए कितनी खूबसूरत हैं आपकी.”
“अब हमारे साथ मज़ा लेते चलो. ट्रेन तो सुबह पहुँचेगी. तुम
बहुत भोले हो, मेरा दिल आ गया तुम्हारे भोलेपन पर. दो के साथ
मज़ा ले चुके हो.”
“जी दोनो बेकार थी. हाए कितनी प्यारी घुंडी हैं आपकी.”
“मेरा कहा मनोगे तो जन्नत मिलेगी. छोटी वाली ननद की तो तेल
लगाने वाली है. उसकी भी चखाउन्गि पर जब मुझे अपनी जवानी का
मज़ा दोगे.”
“हाए भाभी मेरा सब कुछ आपका है, जो कहेंगी करूँगा बस मुझे
अपना किरायेदार बना लो.” और दोनो निपल को मसल्ने लगा.
वह मुझसे बोली, “हाए छोड़ो मैं जैसे कहती हूँ वैसे करो. उन
औरतो को चोदा ही था या ऐश भी किया था?”
“हाए उनका नाम मत लीजिए.”
“देखो राज शर्मा मेरी जवानी को वही समहाल सकता है जो मेरे साथ
अययशी करे. तुम केवल टाँग उठाकर चोदने वाले हो. हम लोग
खुलकर मज़ा लेने वाले को ही किरायेदार रखते हैं.”
“जी मुझे मंज़ूर है.”
“ठीक है घबराओ नही रास्ते भर ऐश करते घर ले चलेंगे.
बोलो मेरी सास को चोदोगे?”
“जी.”
“और मुझे?”
“आपको भी.”
“और मेरी दोनो मस्तानी ननदों को?”
“उनको भी.”
वह जादूगरनी थी. उसने मुझे अपने पास आने का इशारा किया. पास
गया और उसके इशारे पर उसकी चूचियों पर हाथ फेरा तो वह मेरा
हाथ पकड़ अपनी चूचियों पर दबाती बोली, “आज कोई मिला है. दोनो
हाथ से मेरी कमर दबाओ.” मैं कमर को दबाने लगा तो वह
बोली, “कमर दबाते हुए सारी खोलो. तुम्हारी जवानी की प्यास इसी
ट्रेन मे बुझा दूँगी. अभी चुदवाउंगी तुमसे.”
क्रमशः.......................