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शाजिया घर आई और अब्बू को वहाँ देख कर चौंक गई.
शाजिया- अब्बू, आप यहीं हो… आज आप शॉप नहीं गए?
अब्बू- गया था मेरी जान… मगर मन नहीं लगा तो वापिस आ गया और सोचा कॉलेज से आकर तू क्या बनाएगी क्या खाएगी, इसलिए आते टाइम बाहर से खाना भी लेकर आ गया. मगर तू घर आने में इतनी लेट क्यों हो गई?
शाजिया- वो अब्बू, मैं अपनी फ्रेंड्स के साथ उसके घर चली गई थी. मुझे पता होता आप यहीं हो तो मैं सीधे यहीं आती ना.
अब्बू- चल जाने दे, अब तो आ गई ना तू अब जल्दी से कपड़े चेंज कर ले. फिर साथ में खाना खाते हैं. उसके बाद हमें बहुत काम भी करने हैं.
शाजिया- कौन से काम अब्बू… ज़रा आप मुझे भी तो बताओ?
अब्बू- सब बताऊंगा… पहले खाना तो खालो.
शाजिया समझ गई कि जो भी काम है, वो मजेदार ही होगा और वैसे भी रज़िया और रूबी की कहानी सुनकर उसकी फुददी गीली हो गई थी. अब उसको भी ठंडा करने की जरूरत थी. यही सोच कर शाजिया अपने कमरे में गई और सिर्फ़ नाइटी पहन कर बाहर आ गई.
दोनों ने साथ में खाना खाया उसके बाद अब्दुल जी ने एक छोटा पैकेट शाजिया को दिखाते हुए कहा- ये है वो काम.
शाजिया- ये क्या है अब्बू दिखाओ तो?
‘खुद ही देख लो.’
जब शाजिया ने पैकेट खोला, तो उसमें रेजर थे. कुछ लेडीज के और कुछ नॉर्मल, जो मर्दों के काम आते हैं.
शाजिया- ये क्या अब्बू आप ये रेजर क्यों लेके आए हो… इनसे क्या करोगे?
अब्बू- मेरी जान, इस वाले से मेरी झांटें साफ होंगी और ये सॉफ्ट वाले से तेरी झांटें साफ होंगी… समझी तू!
शाजिया- लेकिन इसकी क्या जरूरत थी मेरे पास तो बाल साफ़ करने वाली क्रीम है ना… मैं तो उसी से कर लेती.
अब्बू- नहीं मेरी बेटी क्रीम से वो चिकनाई नहीं आती, जो इससे आएगी समझी और वैसे भी तुझे डरने की जरूरत नहीं है. मैं खुद अपने हाथों से तेरी फुददी को साफ करूँगा. आज उसके बाद तू मेरे लंड को साफ करना बहुत मजा आएगा.
शाजिया- ये तो अपने बहुत मस्त आइडिया लगाया है मगर आपसे एक बात कहूँ, आप बुरा तो नहीं मानोगे ना!
अब्बू- अरे तेरी किसी बात का मुझे बुरा नहीं लगता, बोल क्या बात है?
शाजिया- अब्बू वो मेरी फ्रेंड्स है ना… वो आपसे करने को रेडी हो गई है. अब जब वो मान गई है तो मेरे साथ करना जरूरी नहीं है ना… और वैसे भी मैंने आपके साथ जो भी किया उसकी असली वजह यही थी कि आप संतुष्ट हो जाओ बस.
अब्बू- शाजिया तुम बात को समझ क्यों नहीं रही. मैंने तुम्हें समझाया तो था कि हम दोनों करेंगे तो घर की बात घर में रहेगी. वैसे भी तुम इस लंड और फुददी के खेल में इतना आगे आ गई हो, अब तुम्हें भी लंड की जरूरत है. नहीं तो तुम भी मेरी तरह असंतुष्ट घूमती रहोगी समझी.
शाजिया- आपकी बात सही है अब्बू मगर मेरी फ्रेंड्स को तो सब पता है. अब घर की बात बाहर चली गई है. प्लीज़ मान जाओ ना… उसका भी बहुत दिल है बड़े लंड से चुदाई करने का… इसी लिए मैं बोल रही हूँ.
अब्बू- इसका मतलब हमारे बारे में तुमने उनको सब कुछ बता दिया?
शाजिया- नहीं अब्बू मैंने उतना ही बताया, जितना जरूरी था… बाकी कुछ नहीं.
अब्बू- तुम मुझे ठीक से बताओ क्या क्या बताया… फिर मैं कुछ सोचता हूँ.
शाजिया ने रज़िया और रूबी को जो आधी बात बताई वो अब्बू को बता दी मगर लेस्बीयन वाली बात उसने अब्बू से छुपा ली.
अब्बू- अच्छा तो ये बात है. अब अगर मैं तेरी फ्रेंड्स को नहीं चोदूँगा तो उनको शक होगा, यही कहना चाहती है ना तू?
शाजिया- हाँ अब्बू मैं यही आपको समझाने की कोशिश कर रही हूँ.
अब्बू- मेरी नादान शाजिया तू डरती क्यों है. आज तेरी मस्त चुदाई कर दूँ, उसके बाद तेरी फ्रेंड्स की भी फुददी चोद दूँगा. उनको शक भी नहीं होगा और तुझे भी मजा मिल जाएगा.
शाजिया- ये तो मैंने सोचा ही नहीं था, अब्बू और उनको हमारे बारे में कुछ पता भी नहीं लगेगा है ना.
अब्बू- हाँ मेरी जान, और तेरा डर भी दूर हो जाएगा. फिर तेरी फ्रेंड्स तो एक बार चुदेगी और हम तो रोज मजा कर सकते हैं. जब तक तेरी अम्मी नहीं आ जातीं तब तक खुलकर फुददी लंड का खेल करेंगे और उसके आने के बाद छुपकर चुदाई हो जाएगी. क्यों कैसा लगा तुझे मेरा आइडिया?
शाजिया- आइडिया तो मस्त है अब्बू, मगर सच कहूँ आपका बहुत बड़ा है, इसे देख कर ही मुझे डर लग रहा है.
अब्बू- वेबकूफ़, मैं तेरा अब्बू हूँ तुझे तकलीफ़ थोड़े दे सकता हूँ. तू देखना कितने आराम से करूँगा, तुझे कम से कम तकलीफ़ होगी. चल अब देर मत कर साथ में बाथरूम जाएंगे और वहाँ अपनी झांटों की सफ़ाई करेंगे समझी.
शाजिया- ठीक है मेरे प्यारे अब्बू चलो, आप नहीं मानने वाले.
दोनों अब्बू और बेटी बाथरूम में चले गए और वहाँ नंगे हो गए.
शाजिया- अब क्या करना है अब्बू, क्या आप पहले मेरे बाल साफ करोगे?
अब्बू- हाँ मेरी जान… पहले तेरे जिस्म के सारे बाल साफ करूँगा, उसके बाद तू मेरे करना… मजा आएगा.
शाजिया- लेकिन आप ऐसे कैसे करोगे… यहाँ तो बैठने की कोई जगह भी नहीं है.
अब्दुल जी ने शाजिया को कमोड पे बिठा दिया और उसकी टांगें फैला दीं- अब समझ आया कैसे होगी ये झांटें साफ… अब बस चुपचाप बैठी रहना… मैं आराम से साफ कर दूँगा.
शाजिया- अब्बू आराम से करना… कहीं कट ना जाए, नहीं तो खून निकल आएगा.
अब्बू- अरे ऐसे कैसे कट जाएगा और खून निकलने में अभी टाइम है मेरी जान… जब तेरी सील टूटेगी ना तब ज़रूर निकलेगा.
शाजिया- अब्बू आप डराओ मत प्लीज़… नहीं तो मैं यहाँ से भाग जाऊंगी.
अब्बू- अरे मज़ाक कर रहा हूँ मेरी जान… चल अब चुप बैठ पहले अच्छे से साबुन लगाने दे, उसके बाद मैं तेरी फुददी को चिकना बना दूँगा.
अब्दुल जी ने फुददी पे साबुन लगाया, उसके बाद धीमे-धीमे वो रेजर से फुददी को चमकाने में लग गए.
शाजिया- आह… सस्स… अब्बू, आपका हाथ लगते ही फुददी में आग लग गई ओफ्फ… लगता है, जैसे अन्दर कोई लावा उफान रहा हो… आह… प्लीज़ जल्दी से साफ करके इसको शांत कर दो, नहीं तो ये ऐसे ही सुलगती रहेगी.
अब्बू- कर दूँगा मेरी रानी… बस आज की बात है. कल से इसमें कोई लावा नहीं फूटेगा क्योंकि मैं अपना लंड इसमें हर टाइम डाले रहूँगा ताकि इसको सुकून मिलता रहे.
शाजिया- सच्ची पूरा दिन डाले रहोगे… ऐसे तो मुझे पूरा दिन ऐसे नंगी रहना पड़ेगा.
अब्बू- अच्छा है ना, हम दोनों के अलावा कोई है भी नहीं… तो कपड़े किस लिए पहनने हैं.
दोनों अब्बू-बेटी बहुत देर तक बातें करते रहे और साथ साथ अब्दुल जी ने शाजिया के सारे बाल साफ कर दिए. फिर जब फुददी को पानी से साफ किया तो उसका निखार देखने लायक था. अब्दुल जी ने उसपर एक जोरदार किस भी कर दिया, जिससे शाजिया सिहर गई.
शाजिया- इसस्स अब्बू प्लीज़ चूस दो ना… आज इसमें बहुत आग लगी हुई है.
अब्बू- नहीं मेरी जान ऐसे नहीं पहले तू मेरी झांटें साफ कर, फिर कमरे में जाकर आराम से तेरी फुददी को चाटूँगा.
शाजिया- नहीं अब्बू आप खुद कर लो… मुझे ये रेजर चलाना नहीं आता. कहीं आपको लग गई तो मुसीबत आ जाएगी.
अब्बू- कुछ नहीं होगा ये तेरे अब्बू का लंड फौलाद से बना है. इतनी आसानी से नहीं कटेगा, चल मैं तुझे बताता हूँ वैसे करना है.
अब्दुल जी के बताने पर शाजिया ने लंड पे अच्छे से साबुन लगाया, फिर धीमे-धीमे उसको साफ करने लग गई.
शाजिया- अब्बू, आप यहीं हो… आज आप शॉप नहीं गए?
अब्बू- गया था मेरी जान… मगर मन नहीं लगा तो वापिस आ गया और सोचा कॉलेज से आकर तू क्या बनाएगी क्या खाएगी, इसलिए आते टाइम बाहर से खाना भी लेकर आ गया. मगर तू घर आने में इतनी लेट क्यों हो गई?
शाजिया- वो अब्बू, मैं अपनी फ्रेंड्स के साथ उसके घर चली गई थी. मुझे पता होता आप यहीं हो तो मैं सीधे यहीं आती ना.
अब्बू- चल जाने दे, अब तो आ गई ना तू अब जल्दी से कपड़े चेंज कर ले. फिर साथ में खाना खाते हैं. उसके बाद हमें बहुत काम भी करने हैं.
शाजिया- कौन से काम अब्बू… ज़रा आप मुझे भी तो बताओ?
अब्बू- सब बताऊंगा… पहले खाना तो खालो.
शाजिया समझ गई कि जो भी काम है, वो मजेदार ही होगा और वैसे भी रज़िया और रूबी की कहानी सुनकर उसकी फुददी गीली हो गई थी. अब उसको भी ठंडा करने की जरूरत थी. यही सोच कर शाजिया अपने कमरे में गई और सिर्फ़ नाइटी पहन कर बाहर आ गई.
दोनों ने साथ में खाना खाया उसके बाद अब्दुल जी ने एक छोटा पैकेट शाजिया को दिखाते हुए कहा- ये है वो काम.
शाजिया- ये क्या है अब्बू दिखाओ तो?
‘खुद ही देख लो.’
जब शाजिया ने पैकेट खोला, तो उसमें रेजर थे. कुछ लेडीज के और कुछ नॉर्मल, जो मर्दों के काम आते हैं.
शाजिया- ये क्या अब्बू आप ये रेजर क्यों लेके आए हो… इनसे क्या करोगे?
अब्बू- मेरी जान, इस वाले से मेरी झांटें साफ होंगी और ये सॉफ्ट वाले से तेरी झांटें साफ होंगी… समझी तू!
शाजिया- लेकिन इसकी क्या जरूरत थी मेरे पास तो बाल साफ़ करने वाली क्रीम है ना… मैं तो उसी से कर लेती.
अब्बू- नहीं मेरी बेटी क्रीम से वो चिकनाई नहीं आती, जो इससे आएगी समझी और वैसे भी तुझे डरने की जरूरत नहीं है. मैं खुद अपने हाथों से तेरी फुददी को साफ करूँगा. आज उसके बाद तू मेरे लंड को साफ करना बहुत मजा आएगा.
शाजिया- ये तो अपने बहुत मस्त आइडिया लगाया है मगर आपसे एक बात कहूँ, आप बुरा तो नहीं मानोगे ना!
अब्बू- अरे तेरी किसी बात का मुझे बुरा नहीं लगता, बोल क्या बात है?
शाजिया- अब्बू वो मेरी फ्रेंड्स है ना… वो आपसे करने को रेडी हो गई है. अब जब वो मान गई है तो मेरे साथ करना जरूरी नहीं है ना… और वैसे भी मैंने आपके साथ जो भी किया उसकी असली वजह यही थी कि आप संतुष्ट हो जाओ बस.
अब्बू- शाजिया तुम बात को समझ क्यों नहीं रही. मैंने तुम्हें समझाया तो था कि हम दोनों करेंगे तो घर की बात घर में रहेगी. वैसे भी तुम इस लंड और फुददी के खेल में इतना आगे आ गई हो, अब तुम्हें भी लंड की जरूरत है. नहीं तो तुम भी मेरी तरह असंतुष्ट घूमती रहोगी समझी.
शाजिया- आपकी बात सही है अब्बू मगर मेरी फ्रेंड्स को तो सब पता है. अब घर की बात बाहर चली गई है. प्लीज़ मान जाओ ना… उसका भी बहुत दिल है बड़े लंड से चुदाई करने का… इसी लिए मैं बोल रही हूँ.
अब्बू- इसका मतलब हमारे बारे में तुमने उनको सब कुछ बता दिया?
शाजिया- नहीं अब्बू मैंने उतना ही बताया, जितना जरूरी था… बाकी कुछ नहीं.
अब्बू- तुम मुझे ठीक से बताओ क्या क्या बताया… फिर मैं कुछ सोचता हूँ.
शाजिया ने रज़िया और रूबी को जो आधी बात बताई वो अब्बू को बता दी मगर लेस्बीयन वाली बात उसने अब्बू से छुपा ली.
अब्बू- अच्छा तो ये बात है. अब अगर मैं तेरी फ्रेंड्स को नहीं चोदूँगा तो उनको शक होगा, यही कहना चाहती है ना तू?
शाजिया- हाँ अब्बू मैं यही आपको समझाने की कोशिश कर रही हूँ.
अब्बू- मेरी नादान शाजिया तू डरती क्यों है. आज तेरी मस्त चुदाई कर दूँ, उसके बाद तेरी फ्रेंड्स की भी फुददी चोद दूँगा. उनको शक भी नहीं होगा और तुझे भी मजा मिल जाएगा.
शाजिया- ये तो मैंने सोचा ही नहीं था, अब्बू और उनको हमारे बारे में कुछ पता भी नहीं लगेगा है ना.
अब्बू- हाँ मेरी जान, और तेरा डर भी दूर हो जाएगा. फिर तेरी फ्रेंड्स तो एक बार चुदेगी और हम तो रोज मजा कर सकते हैं. जब तक तेरी अम्मी नहीं आ जातीं तब तक खुलकर फुददी लंड का खेल करेंगे और उसके आने के बाद छुपकर चुदाई हो जाएगी. क्यों कैसा लगा तुझे मेरा आइडिया?
शाजिया- आइडिया तो मस्त है अब्बू, मगर सच कहूँ आपका बहुत बड़ा है, इसे देख कर ही मुझे डर लग रहा है.
अब्बू- वेबकूफ़, मैं तेरा अब्बू हूँ तुझे तकलीफ़ थोड़े दे सकता हूँ. तू देखना कितने आराम से करूँगा, तुझे कम से कम तकलीफ़ होगी. चल अब देर मत कर साथ में बाथरूम जाएंगे और वहाँ अपनी झांटों की सफ़ाई करेंगे समझी.
शाजिया- ठीक है मेरे प्यारे अब्बू चलो, आप नहीं मानने वाले.
दोनों अब्बू और बेटी बाथरूम में चले गए और वहाँ नंगे हो गए.
शाजिया- अब क्या करना है अब्बू, क्या आप पहले मेरे बाल साफ करोगे?
अब्बू- हाँ मेरी जान… पहले तेरे जिस्म के सारे बाल साफ करूँगा, उसके बाद तू मेरे करना… मजा आएगा.
शाजिया- लेकिन आप ऐसे कैसे करोगे… यहाँ तो बैठने की कोई जगह भी नहीं है.
अब्दुल जी ने शाजिया को कमोड पे बिठा दिया और उसकी टांगें फैला दीं- अब समझ आया कैसे होगी ये झांटें साफ… अब बस चुपचाप बैठी रहना… मैं आराम से साफ कर दूँगा.
शाजिया- अब्बू आराम से करना… कहीं कट ना जाए, नहीं तो खून निकल आएगा.
अब्बू- अरे ऐसे कैसे कट जाएगा और खून निकलने में अभी टाइम है मेरी जान… जब तेरी सील टूटेगी ना तब ज़रूर निकलेगा.
शाजिया- अब्बू आप डराओ मत प्लीज़… नहीं तो मैं यहाँ से भाग जाऊंगी.
अब्बू- अरे मज़ाक कर रहा हूँ मेरी जान… चल अब चुप बैठ पहले अच्छे से साबुन लगाने दे, उसके बाद मैं तेरी फुददी को चिकना बना दूँगा.
अब्दुल जी ने फुददी पे साबुन लगाया, उसके बाद धीमे-धीमे वो रेजर से फुददी को चमकाने में लग गए.
शाजिया- आह… सस्स… अब्बू, आपका हाथ लगते ही फुददी में आग लग गई ओफ्फ… लगता है, जैसे अन्दर कोई लावा उफान रहा हो… आह… प्लीज़ जल्दी से साफ करके इसको शांत कर दो, नहीं तो ये ऐसे ही सुलगती रहेगी.
अब्बू- कर दूँगा मेरी रानी… बस आज की बात है. कल से इसमें कोई लावा नहीं फूटेगा क्योंकि मैं अपना लंड इसमें हर टाइम डाले रहूँगा ताकि इसको सुकून मिलता रहे.
शाजिया- सच्ची पूरा दिन डाले रहोगे… ऐसे तो मुझे पूरा दिन ऐसे नंगी रहना पड़ेगा.
अब्बू- अच्छा है ना, हम दोनों के अलावा कोई है भी नहीं… तो कपड़े किस लिए पहनने हैं.
दोनों अब्बू-बेटी बहुत देर तक बातें करते रहे और साथ साथ अब्दुल जी ने शाजिया के सारे बाल साफ कर दिए. फिर जब फुददी को पानी से साफ किया तो उसका निखार देखने लायक था. अब्दुल जी ने उसपर एक जोरदार किस भी कर दिया, जिससे शाजिया सिहर गई.
शाजिया- इसस्स अब्बू प्लीज़ चूस दो ना… आज इसमें बहुत आग लगी हुई है.
अब्बू- नहीं मेरी जान ऐसे नहीं पहले तू मेरी झांटें साफ कर, फिर कमरे में जाकर आराम से तेरी फुददी को चाटूँगा.
शाजिया- नहीं अब्बू आप खुद कर लो… मुझे ये रेजर चलाना नहीं आता. कहीं आपको लग गई तो मुसीबत आ जाएगी.
अब्बू- कुछ नहीं होगा ये तेरे अब्बू का लंड फौलाद से बना है. इतनी आसानी से नहीं कटेगा, चल मैं तुझे बताता हूँ वैसे करना है.
अब्दुल जी के बताने पर शाजिया ने लंड पे अच्छे से साबुन लगाया, फिर धीमे-धीमे उसको साफ करने लग गई.