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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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अन्दर शाजिया कुछ और सोच रही थी और बाहर अब्दुल जी कुछ और. अब थोड़ी देर में पता लग ही जाएगा कि किसकी सोच पूरी होती है. तब तक हम लोग थोड़ा सा.. ना ना ज़्यादा नहीं, बस थोड़ा सा घूम कर आते हैं.

रात को फवाद चला गया तो राबिया अब जाहिरा को फवाद से चुदने के लिए मना रही थी. मगर वो डर रही थी. तब राबिया ने उसको फवाद की जान ख़तरे में हैं, वो बात बताई और साथ में ढेर सारे पैसे देने का वादा किया तो वो मान गई.

अब बस राबिया को फकीर के आने का इन्तजार था.

बस हो गया ब्रेक ख़त्म तो देखो अब अब्बू-बेटी के बीच में क्या होता है.

शाजिया का खाना रेडी हो गया था. जब वो बाहर आई, तो उसके अब्बू जी मज़े से बियर पी रहे थे.

शाजिया- ओह.. अब्बू.. ये क्या है आप अभी क्यों पीने लगे.. पहले खाना तो खा लेते. उसके बाद आराम से पी लेते और मैंने भी तो कहा था मैं भी पीऊंगी.

अब्बू- शाजिया, ये कॉफी नहीं जो खाने के बाद पी जाए. ये बियर है बेटा इसको खाने के पहले ही पीते हैं.

शाजिया- तो ठीक है लाओ मुझे भी दो.. मैं भी तो देखूं ये क्या है.

अब्बू- ये तेरे काम की नहीं है बेटा.. तुझे इससे नशा हो जाएगा.

शाजिया- आपने तो कहा था ये शराब नहीं है.. फिर नशा कैसे होगा?

अब्दुल जी ने शाजिया को बहुत समझाया कि पहली बार पीने से नशा होता है मगर वो नहीं मानी और गिलास में बियर डालकर पीने लगी. पहली बार तो उसको ये बहुत अजीब लगी मगर धीमे-धीमे इसका टेस्ट शाजिया को भा गया. उसने आधी बोतल गटक ली.

अब्बू- बस कर.. नहीं तो यहीं लुढ़क जाएगी. चल अब खाना लगा बहुत भूख लगी है. उसके बाद आज तुझे मेरे साथ ही सोना है.. तेरी अम्मी तो है नहीं ना..!

शाजिया- हिच हिच.. नहीं मैं आपके साथ नहीं सोऊंगी.. आप मुझे.. हिच हिच.. परेशान करोगे.

शाजिया की आँखें नशे से लाल हो गई थीं.. उसकी ज़ुबान भी लड़खड़ा रही थी.

अब्बू- मैंने कहा था ना मत पी, अब चढ़ गई ना.. देख सोना तो तुझे मेरे साथ ही पड़ेगा.. आज मुझे आनंद देने का तेरा अपना पक्का वादा याद है ना?

शाजिया- हाँ याद है.. हिच एमेम मगर वो करने के बाद मैं अपने कमरे में सो जाऊँगी.. हिच.. नहीं तो आप पूरी रात सताओगे.

अब्बू- तुझे बहुत चढ़ गई है. तू यहाँ बैठ मैं खाना लगाता हूँ और तेरा इलाज भी करता हूँ. नहीं तो तू ऐसे ही हिचकियां लेती रहेगी और मेरा भी मूड खराब करेगी.

अब्दुल जी ने खाना लगाया और शाजिया को नींबू काट कर चूसने को दिया, जिससे उसका नशा थोड़ा कम हो और एक गिलास में नींबू पानी भी बना के उसको पिला दिया, जिससे उसकी हिचकी बंद हो गई.

दोनों ने जमकर खाना खाया. फिर अब्दुल जी शाजिया को अपने कमरे में ले गए. बियर का नशा अभी भी शाजिया पर था मगर बहुत कम हो गया था. अब वो अपने अब्बू से ठीक से बात कर रही थी- अब्बू लाइट बंद कर दो ना ऐसे हम दोनों को नींद कैसे आएगी?

अब्बू- अरे अभी से सोने की बात कर रही है.. मुझे आराम तो दे दे पहले.. या पहले मैं तुझे आनंद दूँ?

शाजिया- ये सब बाद में.. पहले लाइट बंद कर दो आप.. ओके..!

अब्बू- अरे अंधेरे में तो रोज ही करती हो.. आज ऐसे ही करो ना शाजिया.

शाजिया- नहीं अब्बू मुझे शर्म आती है.

अब्दुल जी ने साफ़ साफ़ कह दिया- ये क्या बात हुई शाजिया, तुम मेरा लौड़ा कई बार चूस चुकी हो और मुझसे अपनी फुददी चटवा चुकी हो.. अब कैसी शर्म?

शाजिया- छी: अब्बू ये आज आप कैसी बातें कर रहे हो.. मैं नहीं सोती यहाँ.. मैं जा रही हूँ.

शाजिया उठ कर जाने लगी तो अब्दुल जी ने उसे पकड़ लिया और बिस्तर पे गिरा कर खुद उसके ऊपर आ गए और अब दोनों की गर्म साँसें एक-दूसरे के होंठों पे पड़ रही थी. बस किसी के पहल करने की देर थी.

शाजिया- नहीं अब्बू.. ये ग़लत है आप ऐसा नहीं कर सकते.. मैं आपकी बेटी हूँ.

अब्बू- शाजिया कुछ ग़लत नहीं है. इन दिनों हम दोनों ने जो किया, वो यही तो था. बस हम दोनों अनजान बने हुए थे और आज खुलकर आनंद करेंगे.

शाजिया- आप एक मिनट हटो तो.. मुझे आपको कुछ समझाना है.. प्लीज़ एक बार हटो तो सही!

अब्दुल जी हट गए तो शाजिया उनके पास बैठ गई और शुरू से सारी बात उन्हें बताईं कि कैसे उसने उस रात उनकी और अम्मी की बात सुनी थी. फिर अपनी सहेली के साथ मिलकर उसने ये प्लान बनाया और आज ये जो हो रहा है ये सब बस वो अब्दुल जी को तड़पाने के लिए उसने किया था ताकि वो किसी और के साथ अपनी भूख शांत कर लें और उनका गुस्सा ठंडा हो जाए.

अब्बू- मेरी बेटी, तुम कितनी अच्छी हो. तुमने मेरे बारे में इतना सोचा आई लव यू डार्लिंग मगर तुम शायद ये भूल गई कि अगर तुम मुझे ऐसे तड़पाओगी तो तुम भी तो साथ में तड़पोगी ना.. अब तुम्हें भी तो लंड की जरूरत पड़ेगी तो कोई और क्यों? तुम ही मेरे साथ कर लो ना.. ताकि घर की बात घर में ही रहे.

शाजिया- नहीं अब्बू मुझे डर लगता है.. इससे बहुत दर्द होता है.. नहीं नहीं.. मैं नहीं करूँगी.

अब्बू- अरे तूने कभी किया ही नहीं तो तुझे क्या पता दर्द होगा.

शाजिया- अब्बू मैं कोई बच्ची नहीं हूँ. इतना तो पता ही है, इसके लिए करना जरूरी नहीं है.

अब्बू- अच्छा तू किसी और पे भरोसा मत कर.. मैं तेरा अब्बू हूँ मुझपे तो तुझे भरोसा है ना, मैं बहुत आराम से करूंगा… एकदम धीमे-धीमे..!

शाजिया- अब्बू, मैं आपका लंड चूस कर पानी निकाल देती हूँ ना.. प्लीज़ मुझे बहुत डर लग रहा है. मेरा सेक्स करने का कोई मंसूबा नहीं था, आप समझो ना प्लीज़.

शाजिया के चेहरे पर डर साफ नज़र आ रहा था.

अब्बू- देख शाजिया, तू मेरी बात सुन आज नहीं तो कल तुझे चुदाई करनी ही होगी. मुझसे नहीं तो किसी और से.. या शादी के बाद अपने शौहर से तो चुदेगी ही, तब क्या होगा.. सोच?

शाजिया- अब्बू, पता नहीं मुझे इससे इतना डर क्यों लगता है.

अब्बू- अच्छा तुझे कैसे पता दर्द का.. कुछ तो हुआ होगा? तू खुलकर मुझे बता ना!

शाजिया ने बताया वो एक बार नहा रही थी तब नीचे साबुन लगाते टाइम ग़लती से उसकी उंगली अन्दर चली गई तो बहुत दर्द हुआ था.. तब से उसको डर लगता है. शाजिया ने एक झूठी कहानी सुनाई मगर उसमें जो दर्द हुआ वो सच था आपको भी याद होगा कहानी पढ़ते टाइम शाजिया ने फुददी में उंगली की थी.

अब्दुल जी समझ गए कि शाजिया को सेक्स फोबिया है यानि इंसान किसी भी चीज का वहाँ अपने मन में तय कर लेता है, फिर वही उसका डर बन जाता है. हालांकि शाजिया ने कभी चुदाई नहीं की थी मगर एक बार फुददी रगड़ते टाइम उसकी उंगली जरा सी अन्दर घुस गई थी बस उसी पल से उसको अहसास हुआ कि ये छोटी सी उंगली से इतना दर्द हुआ तो लंड से कितना होगा और यही डर धीमे-धीमे उसको चुदाई के खिलाफ कर चुका था.

अब्बू- अच्छा ये बात है.. चल जाने दे मैं तेरी चुदाई नहीं करूंगा मगर तुझे मैं खुलकर प्यार तो कर सकता हूँ ना.. उसमें तो तू मेरा साथ देगी ना.

शाजिया- हाँ अब्बू, सेक्स के अलावा आप कुछ भी कहो… मैं करने को रेडी हूँ.

अब्बू- तो ठीक है ये नाइटी निकाल दे, मैं रोशनी में तेरे जिस्म को देखना चाहता हूँ.. इसे चूसना चाहता हूँ तेरे निपल्स को निचोड़ कर इनका रस पीना चाहता हूँ.

शाजिया- चुप करो अब्बू, मुझे आप से शर्म आ रही है.

अब्दुल जी ने अपनी लुंगी उतार दी और लंड को हाथ से सहलाते हुए बोले- अरे लंड चूसने में शर्म नहीं आई तो देखने में कैसी शर्म? ये देख कैसे मेरा लंड तुझे बुला रहा है.. चल अब निकाल दे.

शाजिया- अब्बू आप ही निकाल लो ना प्लीज़.

शाजिया ने इशारा दे दिया तो अब्दुल जी आगे बढ़े और बेटी को नंगी कर दिया अब वो ऊपर से नीचे तक शाजिया को निहार रहे थे और मन ही मन अपनी कामयाबी पे खुश हो रहे थे, उन्होंने शाजिया को बिस्तर पर लेटाया; उसके नर्म होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया और फिर एक लंबी किस के बाद वो शाजिया की जीभ को चूसने लगे.

अब शाजिया भी खुलकर उनका साथ दे रही थी.
 


अब अब्दुल जी उसके चुचों पर टूट पड़े और निप्पलों को ऐसे चूसने लगे जैसे कोई बच्चा दूध पी रहा हो.

शाजिया- आह.. अब्बू नहीं.. आह.. आनंद आ रहा है.. आप बहुत अच्छे हो.. आह.. चूसो उफ्फ ऐसे ही दबाओ इन्हें आह..

अब्दुल जी मंजे हुए खिलाड़ी थे और शाजिया नादान कली थी, उसको तो आनंद आना ही था. अब अब्दुल उसके गले पर सीने के ऊपर पेट पर हर जगह चूम रहे थे, चाट रहे थे और शाजिया तड़प रही थी.

धीमे-धीमे अब्दुल जी अब नीचे फुददी पर आ गए और शाजिया की जांघें चूसने लगे. अब शाजिया की उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी फुददी के बाँध को रोके रखना अब उसके बस का नहीं था.

शाजिया- ससस्स अब्बू आह नहीं.. आह.. उफ़फ्फ़.. मेरा पानी निकालने वाला है.

अब्दुल जी समझ गए कि अब रस की धारा आने वाली है, वो जल्दी से बेटी की फुददी से चिपक गए और फुददी को होंठों में दबा कर चूसने लगे. उसी पल शाजिया की फुददी का लावा बह गया वो कमर को हिला हिला कर झड़ने लगी और अब्दुल जी सारा रस चाट गए.

शाजिया- आह.. अब्बू उफ़फ्फ़.. बस भी करो जान निकाल कर मानोगे क्या.. आह.. आज तो आपने मेरी चाटे बिना ही पानी निकाल दिया.

अब्बू- क्या चाटे बिना.. फुददी बोल शाजिया.. मुझे तेरे मुँह से सुनकर अच्छा लगेगा.

शाजिया- नहीं मुझे शर्म आती है.

अब्बू- अरे नंगी फुददी को चटवा सकती है तो अब्बू की ख़ुशी के लिए बोल नहीं सकती.

शाजिया- अच्छा ठीक है फुददी को आपने चाटा.. मुझे अच्छा लगा. बस अब आप खुश..!

अब्बू- हाँ मेरी जान खुश. अब तू क्या करेगी.. वो भी बोल कर बता.

शाजिया- मैं आपके इस लंबे लंड को चूस कर ठंडा करूंगी और आपका रस पीऊंगी.

अब्बू- आह.. आनंद आ गया तेरे मुँह से ये फुददी और लंड सुनना कितना अच्छा लगता है.

शाजिया- चलो अब आप लेट जाओ और मैं भी आपको उसी तरह आनंद दूँगी जैसे अपने मुझे अभी दिया है.

अब्बू- ठीक है शाजिया जैसा तेरा मन करे, तू कर ले.. निकाल ले अपने मन की.

अब्दुल जी लेट गए तो शाजिया उन्हें किस करने लगी. उनके सीने पर भी किस किया.. फिर उसकी लंड चूसने की ललक उसको नीचे ले गई और वो मज़े से लंड को चूसने लगी. साथ ही साथ वो गोटियां भी चूस रही थी.

अब्बू- आह.. शाजिया आज तूने मेरी बरसों की तमन्ना पूरी कर दी.. आह.. उफ्फ.. चूस मेरी जान आ चूस.

अब्बू की बातें शाजिया को और जोश दिला रही थी. अब वो और तेज़ी से लंड को चूस रही थी.

अब्बू- आह.. शाजिया चूस.. तेरे होंठों में इतनी गर्मी है..तो तेरी फुददी कैसी होगी उफ्फ चूस आह…

काफ़ी देर तक ये चुसाई चलती रही उसके बाद अब्दुल जी झड़ गए. शाजिया ने उनका पूरा वीर्य गटक लिया और लास्ट बूँद भी जीभ से छत कर साफ कर दी.

अब्बू- शाजिया तुम बहुत अच्छी तरह लंड चूसती हो.. ये कहाँ से सीखा तुमने?

शाजिया- मैं कहाँ से सीखूँगी.. आपने ही पहले चुसाया था.. तब से सीखी हूँ बस.

अब्बू- अरे मैं कोई इल्ज़ाम नहीं लगा रहा बेटी.. बस मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था.

शाजिया- अब्बू मैंने आपको सब बताया ना कि मैंने ये सब क्यों किया था. अब आप प्लीज़ मान जाओ ना.

अब्बू- यार कैसे मान जाऊं और कौन है तेरी फ्रेंड जो मुझसे ऐसे ही चुदवा लेगी?

शाजिया- वो सब मेरी टेंशन है.. बस आप एक बार हाँ कहो.

अब्बू- नहीं शाजिया किसी बाहर वाली से अच्छा है कि मैं तुझे ही चोदूँ.. ताकि घर की बात बाहर ना जाए.

शाजिया- नहीं अब्बू मैंने बताया तो है आपको.. मुझे डर लगता है.

अब्बू- अरे शादी के बाद शौहर रहम नहीं करेगा.. वो तो ज़बरदस्ती तेरी फुददी में लंड घुसा देगा और तब ज़्यादा दर्द होगा. इससे अच्छा तू मुझसे चुदवा ले. मैं तेरा अब्बू हूँ तुझे बहुत प्यार से चोदूँगा समझी.

शाजिया ने थोड़ी देर सोचा कि अब्बू सही कह रहे हैं और अब्बू से चुदवाने में एक फायदा और भी है. क्योंकि अब वो अच्छी तरह समझ गई थी कि शाहिद और उसके दोस्त भी उसको चोदना चाहते हैं. अगर वो अब्बू से चुदवा कर एक्सपर्ट हो जाए, फिर मौका आने पर वो उन सब को भी संभाल सकती है.

अब्बू- क्या सोच रही हो शाजिया. ये दुनिया बहुत खराब है, इसमें जीना है तो इसके तौर-तरीके सीखने जरूरी है. नहीं तो बाद में तुम्हें मौका नहीं मिलेगा.

शाजिया- ठीक है अब्बू, मैं आपकी बात मान लेती हूँ.. मगर आपका लंड बहुत बड़ा है और मुझे पता है एक बार तो ये मेरी जान निकाल ही देगा और कल कॉलेज में मेरा जाना बहुत जरूरी है तो आज आप बस ऐसे ही आनंद ले लो, कल आप मेरी फुददी मार लेना.

अब्बू- थैंक्स बेटा मुझे ये मौका देने के लिए.. अब इतना वेट किया है तो एक दिन और सही.. बस कल देखना मैं तुझे कैसे कली से खिलता हुआ गुलाब बना देता हूँ.

शाजिया- ठीक है अब्बू आपकी बातों से फुददी में फिर हलचल शुरू हो गई है. एक बार और इसको चूस कर ठंडा कर दो ना.

अब्बू- क्यों नहीं मेरी जान तेरी फुददी को तो पूरी रात चूस सकता हूँ.. मगर बदले में तुझे भी कुछ करना होगा.

शाजिया- नहीं अब्बू आपका पानी बहुत देर से निकलता है और दूसरी बार तो पता नहीं कितनी देर लगेगी. फिर मुझे सुबह जल्दी उठने में तकलीफ़ हो जाएगी.

अब्बू- अरे मैं लंड चूसने को नहीं बोल रहा.. पहले मेरी बात सुन तो लेती.

शाजिया- अच्छा तो फिर क्या बात है.

अब्बू- आज रात तू ऐसे ही नंगी मेरे साथ चिपक कर सोएगी, यहीं इसी कमरे में.

शाजिया- नहीं अब्बू पूरी रात ऐसे नंगी.. नहीं नहीं.. रात को आपका दिमाग़ घूम गया और अपने मेरी फुददी में लंड घुसा दिया तो?

अब्बू- अरे मैं तेरा अब्बू हूँ कोई जल्लाद नहीं और तुम्हें मुझपे इतना भी भरोसा नहीं है क्या? ऐसी हरकत मैं क्यों करूँगा?

शाजिया- सॉरी अब्बू ग़लती हो गई अच्छा ठीक है हम ऐसे ही सोएंगे.. चलो अब जल्दी से मेरी फुददी को ठंडा करो.

अब्बू- पहले मैं अपना लंड फुददी पे रगड़ता हूँ.. फिर चाट लूँगा.. ठीक है.

शाजिया- नहीं आप फिर गर्म हो जाओगे तो मुझे भी आपका पानी निकालना पड़ेगा. आप ऐसे ही कर दो फिर चुपचाप सो जाएँगे.

अब्बू मान गए और अबकी बार उन्होंने जीभ से फुददी को कुरेद कर शाजिया को आनंद दिया. फिर अच्छे से फुददी की चुसाई की और उसको ठंडा किया.

शाजिया- थैंक्स अब्बू.. अब हम सो जाएं मगर आपका लंड तो बहुत कड़क हो गया.

अब्बू- कोई बात नहीं बेटा, इसको ऐसे सूखा रहने की आदत है.. मगर बस आज की बात है. कल से तो इसकी हर रात रंगीन हो जाएगी.

शाजिया- हाँ अब्बू, मैं कोशिश करूंगी कि आपको कभी सूखा ना रहना पड़े लेकिन अम्मी के आने के बाद हम कैसे करेंगे?

अब्बू- जैसे अभी कर रहे हैं.. वैसे ही करेंगे.

शाजिया- ओके अब्बू जी.

अब्बू- बस मेरी जान अब कल का इन्तजार है. उसके बाद सब कमी दूर हो जाएगी.

अब्दुल जी ने शाजिया को अपने से चिपका कर सुला लिया. शाजिया तो दो बार झड़ने के कारण थक गई थी, तो उसको जल्दी नींद आ गई. मगर अब्दुल जी सोने की कोशिश करते रहे. वैसे तो ऐसी कली पास में हो और वो भी नंगी, तो किस वेबकूफ़ को नींद आएगी मगर अब्दुल जी ने अपने ज़ज्बात पर काबू रखा और देर से ही सही, उनको भी नींद आ ही गई.

शाजिया और अब्दुल जी कल होने वाली चुदाई की आशा लिए सो गए.. मगर दोपहर को एक और घटना हुई थी तो चलो पहले वो देख लेते हैं.

 
कॉलेज के बाद जब रूबी घर गई तो आज फिर उसकी मॉम बाहर गई हुई थी और फर्नाडिस घर पर ही था. दोनों अब्बू-बेटी ने साथ में खाना खाया. फिर रूबी अपने कमरे में चली गई और फर्नाडिस अपने कमरे में चला गया.

रूबी की आदत तो आपको पता ही है, उसकी मॉम घर पे नहीं होती तो वो अधनंगी रहती है. रूबी ने ब्रा और पेंटी निकाल दी और एक शॉर्ट नाइटी पहन कर बिस्तर पे लेट गई. उसको थोड़ी ही देर हुई थी कि वहां कहीं से कोई कीड़ा या ततैया आया और उसकी जाँघ पर काट लिया, जिससे उसको बहुत तेज जलन हुई और वो ज़ोर से चिल्लाई.. जिसे सुनकर फर्नाडिस भागता हुआ उसके कमरे में आ गया.

फर्नाडिस- क्या हुआ रूबी.. ठीक तो हो.. तुम इतनी ज़ोर से क्यों चिल्लाई थीं?

रूबी- आह.. सस्स अब्बू पता नहीं.. मैं लेटी हुई थी तो अचानक जाँघ पे किसी कीड़े ने काटा.. आह बहुत जलन हो रही है अब्बू.

फर्नाडिस- रूको, मुझे देखने दो क्या हुआ है.

जब फर्नाडिस ने देखा तो सच में जाँघ पे लाल निशान था, शायद कोई ज़हरीला कीड़ा होगा लेकिन साथ ही साथ फर्नाडिस की नज़र रूबी बेटी की फूली हुई फुददी पर भी गई जो एकदम चिकनी चमक रही थी.

फर्नाडिस- किसी कीड़े ने काटा है, रुक, मैं दर्द का स्प्रे मार देता हूँ अभी ठीक हो जाएगा और तू पेंटी क्यों नहीं पहनती? ऐसे क्या बार बार बोलना अच्छा लगता है?

रूबी- अब्बू प्लीज़ ये भाषण बाद में दे देना, पहले इस दर्द का कुछ करो.. नहीं तो मैं मर जाऊँगी आह.. बहुत जलन हो रही है.

फर्नाडिस ने जल्दी से दर्द का स्प्रे मार दिया और वहां कुछ क्रीम भी लगा दी ताकि रूबी को आराम मिल जाए.

कुछ पल बाद..

फर्नाडिस- क्यों बेटा अब ठीक है ना.

रूबी- हाँ अब्बू ये दर्द तो ठीक हो गया मगर आपके छूने से दूसरा दर्द शुरू हो गया. उसका भी इलाज कर दो ना आप.

फर्नाडिस- रूबी बस करो, क्यों बार-बार इसी बात पे आ जाती हो. मैंने तुमसे कितनी बार कहा कि कॉलेज में दोस्त होंगे, उनसे ये बातें करो.. चाहे तो एंजाय करो मगर मुझे तुम इस पाप का हिस्सा मत बनाओ.

रूबी- आप लाख मना करो मगर सच यही है कि आपने मुझे ऐसा बनाया है और जब तक आप मेरी इच्छा पूरी नहीं करते.. मैं ऐसे ही करती रहूंगी. देखती हूँ आप कब तक साफ मंशा का ढोंग करते हो.

फर्नाडिस- झूठ है ये.. मैंने सिर्फ़ बीमारी के कारण वो सब किया था और तुम तो पहले ही जोज़फ़ के साथ सब कुछ कर चुकी थी. तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आई वो तेरा भाई था और अब भी तू कहाँ सुधरी है. कितनी बार तू बाहर करके आई है.. मैं क्या इस सबसे अनजान हूँ?

रूबी- ऐसे घुमा के क्यों बोल रहे हो.. साफ-साफ बोलो ना चुदाई करवा के आई हूँ. हाँ करती हूँ बाहर चुदाई.. मगर मेरी इच्छा है आपके साथ एक बार सोऊं क्योंकि आपके जैसा मर्द शायद ही कहीं होगा.

फर्नाडिस ने रूबी को एक कस के थप्पड़ मार दिया और गुस्से में बोला- दुनिया का कोई अब्बू अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं कर सकता और जो करता है वो अब्बू नहीं हवस का पुतला होता है. तू समझती क्यों नहीं, तू मेरे अंश से बनी है. अब तू चाहती है मैं वही अंश तेरे अन्दर डालूँ? नहीं कभी नहीं.. तू चाहे जो कर ले, मैं ये घिनौना काम कभी भी नहीं करूंगा.

रूबी- अच्छा इतने ही आदर्शवादी हो तो पहले क्यों मेरी फुददी को सहलाते थे.. क्यों मेरा पानी निकालते थे.. बोलो?

फर्नाडिस- उस टाइम हालात खराब थे और तेरी तड़प मुझसे देखी नहीं गई इसलिए वो पाप मैंने किया मगर अब नहीं करूंगा.

रूबी ने बहुत बहस की, मगर फर्नाडिस नहीं माना और वहां से अपने कमरे में जाकर कमरा बंद कर लिया.

फ्रेंड्स फिर वही सवाल खड़ा हो गया कि आख़िर पहले क्या हुआ था. ना ना.. गुस्सा मत होना, अब आपने बहुत बर्दाश्त कर लिया तो मैं आज ये राज भी ख़त्म कर देती हूँ.

रूबी की आधी कहानी तो आपको पता ही है.. तो चलो जोज़फ़ के जाने के बाद क्या हुआ वो भी आप देख लो.

जैसा कि मैंने पहले बताया है कि जब जोज़फ़ गया तो रूबी बहुत रोई थी और कुछ दिन उदास भी रही. उसके बाद उसने कॉलेज के एक लड़के से दोस्ती की और धीमे-धीमे वो दोनों घुलमिल गए. अब चुदाई भी होने लगी मगर वो लड़का ढीला था, रूबी जैसी सेक्सी लड़की को संतुष्ट नहीं कर सकता था, इसलिए उनका ब्रेकअप हो गया. रूबी फिर से अकेली हो गई और रातों को तड़पती रहती थी.

फर्नाडिस ने जब गौर किया कि रूबी उदास रहने लगी है तो उसने सोचा कि शायद कॉलेज में कोई प्राब्लम होगी. उसने रूबी से पूछा भी, मगर रूबी कुछ ना कुछ बहाना बनाकर फर्नाडिस को टाल देती. फिर फर्नाडिस ने एक दिन घूमने का प्रोग्राम बनाया और ये सब बाहर घूमने के लिए निकल गए.

जब शाम को घूम कर ये लोग वापिस आ रहे थे, तब रोड क्रॉस करते टाइम रोज़ी को एक गाड़ी ने टक्कर मार दी थी. एक पल में सब ख़ुशी गायब हो गई. वैसे तो रोज़ी को ज़्यादा चोटें नहीं आई थीं मगर उसके सर में कोई अंदरूनी चोट लग गई, जिससे वो कोमा में चली गई. रूबी तो पहले ही उदास थी, अब तो वो एकदम गुमसुम हो गई और एक हंसता-खेलता फैमिली बिखरने लगा. मगर फर्नाडिस बहुत ही सुलझा हुआ आदमी था, उसने रूबी को अच्छे से संभाल लिया और घर की सारी ज़िमेदारी फर्नाडिस अच्छी तरह निभा रहा था. मगर कहते हैं ना कि मुसीबत जब आती है तो हर तरफ़ से आती है.

उसी दौरान रूबी को एक अजीब बीमारी हो गई. उसके जिस्म पे अचानक लाल निशान पड़ गए जैसे कोई दाद हो. जब हकीम को दिखाया तो पता लगा ये कुछ गम्भीर किस्म के चकत्ते से हो गए हैं जो कि एक किस्म की एलर्जी होती है, इसमें जिस्म पे कुछ भी नहीं पहना जाता क्योंकि इन चकत्तों पर कुछ भी टच होता है तो ये और फैलते हैं. इन पर तो बस क्रीम लगाओ और हवा लगने दो, तभी जल्दी ठीक होते है.

अब फर्नाडिस के सामने ये बहुत बड़ी समस्या आ गई थी. रोज़ी कोमा में थी और ऐसा कोई रिश्तेदार भी नहीं था, जिसे वो घर बुला सके. जो करना था उसे ही करना था.. तो चलो डेढ़ साल साल पीछे जाकर खुद देख लो रूबी के साथ फर्नाडिस ने क्या किया था, जो आज ये नौबत आ गई कि रूबी बिंदास हो गई.

फर्नाडिस जब रूबी को लेकर घर आया, तो रूबी को खुजली होने लगी मगर फर्नाडिस ने उसे मना कर दिया कि रूको ऐसे मत करो.

रूबी- अब्बू बहुत जलन हो रही है उफ्फ पूरा जिस्म जल रहा है.. मैं क्या करूँ.

फर्नाडिस- रूको में अभी ठीक कर दूँगा. चलो मेरे साथ कमरे में आओ.

रूबी अपने अब्बू के साथ कमरे में चली गई तो फर्नाडिस ने दवाई टेबल पे रखी और रूबी को अपने पास बेड पे बैठा लिया.

फर्नाडिस- मेरी बच्ची अब जो मैं कहूँ, उसे गौर से सुनना. तेरी अम्मी होती तो शायद ये प्राब्लम नहीं होती मगर अब जो करना है… मुझे ही करना है. तेरी इस बीमारी को जल्दी ठीक करना होगा.

फर्नाडिस की बात रूबी के बिल्कुल समझ नहीं आ रही थी- अब्बू प्लीज़ आप बातों में लगे हो. मेरी जान निकल रही है, जल्दी कुछ करो ना.. हकीम ने जो दवा दी थी वो दे दो.

फर्नाडिस- रूबी तू अपने कपड़े निकाल.. हकीम ने क्रीम दी है, जिसे हर निशान पर अच्छे से लगाना होगा.

रूबी- ये आप क्या बोल रहे हो अब्बू? आप बाहर जाओ.. मैं खुद से लगा लूँगी.

फर्नाडिस- नहीं रूबी, तेरे जिस्म पर बहुत निशान हो गए हैं.. सभी तुझे नहीं दिखेंगे, ये मुझे ही करना होगा और वैसे भी आज से तू कपड़े नहीं पहनेगी. जब तक तू ठीक ना हो जाए समझी.

रूबी- सीसी क्या.. नहीं अब्बू ये नहीं हो सकता, मुझे शर्म आ रही है आप कैसी बात कर रहे हो.. नहीं नहीं.

फर्नाडिस- मेरी बेटी ये बीमारी को ठीक करने का यही एक तरीका है, वरना कुछ भी हो सकता है.. तू ज़िद मत कर.

रूबी- अब्बू आपके सामने में कैसे..? नहीं आप मेरे अब्बू हो.. नहीं प्लीज़ ये ग़लत होगा.

फर्नाडिस- रूबी हकीम ने यही तरीका बताया है. तू जब तक ठीक नहीं होती तुझे बिना कपड़ों के ही रहना होगा मेरी बच्ची.

रूबी- ऐसा कैसे हो सकता है.. नहीं नहीं.. मैं नहीं मानती अगर ऐसी कोई बात है, तो मैं अपनी किसी फ्रेंड को बुला लूँगी मगर मैं आप से नहीं लगवाऊंगी.

फर्नाडिस को पता था उसके सामने ये प्राब्लम आएगी. उसने फौरन हकीम को फ़ोन लगाया और बात करने के लिए रूबी को दे दिया.

 
रूबी ने जब हकीम से बात की तब उसको पता लगा की ये ऐसी बीमारी है इसमें कोई दूसरा पास नहीं आ सकता, नहीं तो ये उसको भी लग सकती है सिर्फ़ सेम डीएनए का.. या खून का रिश्ता जैसे अब्बू भाई या अम्मी बहन ही उसके पास जा सकते हैं. उन्हें कोई खतरा नहीं होता.

जैसे मॅगनेट्स यानि चुंबक में प्लस और मायनस दो साइड होती हैं. अगर प्लस को प्लस के पास लेकर जाएं तो वो दूर भागता है और प्लस को मायनस के पास लेकर जाएं वो चिपक जाता है. उसी तरह इस बीमारी का वाइरस सेम डीएनए से दूर रहता है और अलग डीएनए के चिपक जाता है.

रूबी को अब बात समझ आ गई थी मगर उसके लिए अब्बू के सामने नंगी होना इतना आसान नहीं था, वो रोने लगी और फर्नाडिस उसको चुप कराने लगा. उसको समझाने लगा कि होनी को यही मंजूर है, तू छोटी थी तब भी तो मेरे सामने नंगी घूमती थी तो आज नंगी होने में क्या दिक्कत है.

इस वक्त 18 साल से ज़्यादा उम्र थी रूबी की और इस उम्र में नंगी होना, वो भी अपने अब्बू के सामने.. इतना आसान नहीं था. मगर फर्नाडिस ने उसको बहुत समझाया तब कहीं जाकर वो मानी और धीमे-धीमे उसने सारे कपड़े निकाल दिए. अब वो जन्मजात नंगी अपने अब्बू के सामने खड़ी थी. उसका हुस्न देख कर एक बार तो फर्नाडिस भी हिल गया. उसके लिए भी ये चुनौती इतनी आसान नहीं थी.

रूबी का फिगर उस टाइम 34-28-34 का था. अब ये क्यों था, ये आप जानते ही हो. रूबी के चचेरे भाई जोज़फ़ ने उसकी अच्छी ख़ासी चुदाई की थी. उसके चुचों को दबा कर चूस कर ऐसा बना दिया था. उसके बाद वो ब्वॉयफ्रेंड ने भी चोदा, तो जाहिर है रूबी तो कयामत ही बनेगी ना.

रूबी की नज़रें झुकी हुई थीं और वो अपने हाथों से अपने चुचों को छुपा रही थी. उसने पैरों को भी एकदम भींच लिया ताकि उसकी फुददी ना दिखे मगर ये आसान नहीं था. वो बस नाकाम कोशिश कर रही थी.

फर्नाडिस- रूबी तुम यहाँ आराम से बैठ जाओ, मैं दवा लगा देता हूँ और घबराओ मत.. मैं तुम्हारा अब्बू हूँ. ये मुश्किल घड़ी में मैं तुम्हारा पूरा साथ दूँगा.

रूबी के पूरे जिस्म पे कोई 50 से ज़्यादा स्पॉट होंगे और ऐसी ऐसी जगह पर भी थे, जहाँ फर्नाडिस को हाथ लगाना था और रूबी की हालत खराब होनी थी. जैसे चुचों पे, उसकी फुददी के एकदम ऊपर जाँघों पर, गांड पर.

अब धीमे-धीमे फर्नाडिस दवा लगाने लगा और उसके हाथों का स्पर्श रूबी को उत्तेज़ित करने लगा.

रूबी- सस्स आराम से अब्बू आह.. दुख़ता है.

फर्नाडिस- अरे हकीम ने कहा है दवा अन्दर तक जानी चाहिए.. तू बस चुप करके बैठ.

जैसे-जैसे फर्नाडिस के हाथ रूबी के चुचों पर घूम रहे थे, उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. जब फर्नाडिस ने फुददी को छुआ वो वेबकूफ़ हो गई. एक तो इतने दिनों से वो चुदी नहीं थी और फिर आज अपने अब्बू का हाथ सीधे फुददी पर लगा तो बस उसकी फुददी को बहने का मौका मिल गया. वो अपने सैलाब को रोक नहीं पाई.

रूबी- सस्स अब्बू नहीं.. रूको वहां मत करो आह.. नहीं..

रूबी की फुददी ने पानी छोड़ दिया, जिससे फर्नाडिस का हाथ उसके रस से भर गया और फर्नाडिस की हालत भी ठीक नहीं थी. इतनी कमसिन कली को छूना इतना आसान नहीं था मगर फर्नाडिस के दिमाग़ में कोई ग़लत विचार नहीं आए, बस लौड़ा बेकाबू हो गया था.

पानी निकलने के बाद रूबी को अपने अब्बू से बहुत शर्म आई, उसने सर झुका लिया और धीमे से ‘सॉरी’ कहा.

फर्नाडिस- कोई बात नहीं बेटा.. होता है इस उम्र में.. चलो अब तुम थोड़ी देर ऐसे ही बैठी रहो. जब दवा सूख जाए तब लेट जाना.

रूबी- अब्बू ऐसे नंगी ही लेटना होगा क्या?

फर्नाडिस- हाँ बेटा तुम्हें ऐसे ही लेटना पड़ेगा.

रूबी- अब्बू बहुत अजीब लग रहा है ऐसे कुछ तो पहनने दो मुझे.. ऐसे नंगी मैं नहीं रह सकती हूँ.

फर्नाडिस- प्लीज़ बेटा बात को समझो, अगर जल्दी ठीक होना है तो कुछ दिन ऐसे ही रहो.

रूबी को आख़िर फर्नाडिस की बात माननी पड़ी. अब वो नंगी ही वहां लेट गई और फर्नाडिस बाहर चला गया. उसके बाद रात को फिर फर्नाडिस ने दवा लगाई और इस बार रूबी थोड़ी खुल गई थी. अब उसके दिमाग़ में शैतानी शुरू हो गई थी.

फर्नाडिस तो दवा लगा कर वहां से चला गया मगर रूबी की फुददी अब फड़कने लगी थी. उसको अब लंड की जरूरत हो गई थी. अब वो चाहे उसके अब्बू का ही क्यों ना हो, उसको इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था. वो अब प्लान बनाने लगी.

दूसरे दिन सुबह वो उठी तो फर्नाडिस गहरी नींद में सोया हुआ था. वो चुपके से उनके पास गई उस टाइम फर्नाडिस का लंड एकदम तना हुआ था. जैसे सुबह ज़्यादातर लड़कों का खड़ा होता है.

रूबी के दिमाग़ में तो सेक्स चढ़ गया था. वो धीमे से फर्नाडिस के पास गई और लोवर के ऊपर से लंड को पकड़ कर उसका जायजा लिया. वो एक भारी भरकम लौड़ा था, फिर उसने जब अन्दर हाथ डाल कर उसको पकड़ना चाहा तो फर्नाडिस की नींद खुल गई और वो जल्दी से पीछे सरक गई.

फर्नाडिस- अरे तुम यहाँ? सब ठीक तो है ना बेटा.. कुछ चाहिए तुम्हें?

रूबी- अब्बू ऐसे नंगी लेटने से नींद ही नहीं आई, आप प्लीज़ हकीम से बात करो ना कि सोने के टाइम चादर तो डाल लूँ ताकि ठंड ना लगे. पूरी रात मुझे ठंडी लगी.

फर्नाडिस- अच्छा मैं अभी उनसे मिलकर सब पूछ लूँगा, तब तक तू नहा ले. मैं नाश्ता बना देता हूँ.. ठीक है.

फर्नाडिस ने कुछ तेल जैसा रूबी को दिया कि नहाने के टाइम पानी में मिला देना, इससे खुजली में आराम मिलेगा.

रूबी नहा कर बाहर आई तो उसके जिस्म से पानी टपक रहा था, जिसे देख कर फर्नाडिस बस देखता ही रह गया.

रूबी- अब्बू अब देखो ऐसे-कैसे काम चलेगा. कम से कम मैं बदन तो पोंछ ही सकती हूँ ना.

फर्नाडिस- अरे क्यों नहीं.. लेकिन रुक.. किसी कपड़े से मत पोंछना, हकीम ने टिशू पेपर्स बताए हैं उन्हीं का यूज करना है.

रूबी- ठीक है फिर आप ही साफ़ कर दो.. मुझसे तो नहीं होने वाला.

फर्नाडिस ने धीमे-धीमे उसके पूरे जिस्म को साफ किया, फिर दोनों ने साथ में नाश्ता किया और फर्नाडिस वहां से हकीम के पास चला गया. इधर रूबी की फुददी की आग बढ़ती जा रही थी. उसने उंगली से अपने आप को शांत किया, फिर लेट गई.

रूबी की फुददी तो शांत हो गई थी मगर उसके दिमाग़ में यही चल रहा था कि कैसे वो फर्नाडिस को चोदने के लिए राज़ी करे.

फर्नाडिस जब वापस आया तो एक रेशमी चादर साथ ले आया क्योंकि हकीम ने कपड़ा ओढ़ना सख़्त मना किया था.. हाँ रेशमी चादर को भी जब बहुत ज़्यादा जरूरी हो, तभी इस्तेमाल करना था.

 
रात को भी फर्नाडिस ने दवा लगाई और रूबी ने बहुत कोशिश की अपने अब्बू को रिझाने की, मगर वो कामयाब ना हो सकी क्योंकि फर्नाडिस एक बहुत ही सीधा और नेक इंसान था और अपनी बेटी के बारे में उसके दिमाग़ में कोई गंदी बात नहीं थी.

ऐसे ही कुछ दिनों तक ये चलता रहा और रूबी को अब आराम भी मिल रहा था मगर उसकी वासना दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी.

एक दिन रूबी ने रात को अपने हाथ पे मेहँदी लगाई, आज उसका मंसूबा कुछ और ही था.

फर्नाडिस जब रात को उसकी फुददी के पास दवा लगा रहा था तो रूबी बोली- आह.. अब्बू अब बर्दाश्त नहीं होता आह.. प्लीज़ उंगली से मेरे नीचे करो ना.

फर्नाडिस- ये तुम क्या बोल रही हो. मैं सिर्फ़ दवा लगा रहा हूँ. मेरे जाने के बाद तुम्हें जो करना है खुद कर लेना.

रूबी- सस्स नहीं अब्बू.. मैं कैसे करूँ आह.. देखो.. मेरे हाथों में मेहँदी लगी है.. आह.. प्लीज़ अब्बू कर दो ना.

फर्नाडिस- नहीं रूबी, ये ग़लत है मेहँदी सूख जाने के बाद कर लेना. मैं सिर्फ़ दवा लगा रहा हूँ समझी.

रूबी- बस ये नाटक बंद करो आप जहाँ मेरे हाथ नहीं पहुँच सकते.. वहां आप लगा देते हो, बाकी यहाँ तो दवा मैं भी लगा सकती थी मगर आपको मेरी फुददी को टच करने का बहाना चाहिए था, इसी लिए आप ये सब कर रहे हो ना.

फर्नाडिस- बकवास बंद करो रूबी ऐसा कुछ नहीं है.. ये दवा लगाने के बाद पानी नहीं डाल सकते हाथ पर समझी.. और तेरे दोनों हाथ पे भी दवा लगी होती है अगर तू खुद लगाती तो तुझे हाथ धोने पड़ते, जिसके लिए हकीम ने मना किया है समझी.

रूबी- आप कर रहे हो या नहीं.. अगर आपने आज नहीं किया तो कल से मैं दवा नहीं लगवाऊँगी, इससे मुझे तकलीफ़ होती है और आप मेरी मदद भी नहीं करते हो.

फर्नाडिस ने रूबी को बहुत समझाया मगर वो बिल्कुल नहीं मानी और मजबूरन फर्नाडिस को उसकी बेटी की फुददी में उंगली करके फुददी रगड़नी पड़ी और उसका पानी निकाला.

एक महीने तक ये सब चलता रहा. अब यहाँ कोई चुदाई तो हुई नहीं तो ऐसे ही मैं आपको बता देती हूँ.

इस एक महीने में रूबी ने बहुत बार कोशिश की अपने अब्बू को रिझाने की, उनसे चुदने की, मगर फर्नाडिस नहीं माना. दवा की धमकी देकर रूबी ने फर्नाडिस से फुददी में उंगली भी करवाई और उसी टाइम फर्नाडिस को पता चला कि रूबी अपने भाई से चुदवा चुकी है. इस बात पर फर्नाडिस ने उसको बहुत सुनाया भी, मगर रूबी पे इस बात का कोई असर नहीं हुआ.

रूबी तो अपनी हरकतें वैसे ही करती रही और फर्नाडिस ने अपना कंट्रोल बनाए रखा. इसी तरह वो ठीक हो गई और फर्नाडिस की जान छूट गई उससे, मगर अब रूबी बहुत बिंदास हो गई थी. वो अपने अब्बू के सामने ऐसे ही कभी अधनंगी तो कभी पूरी नंगी आ जाती.

एक दिन फर्नाडिस ने उसको बड़े प्यार से समझाया कि जो वो चाहती है, वैसा कभी नहीं हो सकता. जरा अपनी मॉम का भी ख्याल कर, वो जिंदगी और मौत से जूझ रही है और तुझे इस सबकी पड़ी है. उसके बाद रूबी ने अपनी ज़िद छोड़ दी और कुछ महीनों बाद उसकी मॉम भी ठीक हो गई मगर उनका इलाज चलता रहा. इसी वजह से ये सब बंबई आ गए थे. वैसे रूबी की बीमारी के कारण भी उसका कॉलेज जाना बंद हो गया था तो अब यहीं उसको न्यू अड्मिशन दिला दिया और ये सब यहीं रहने लगे.

फ्रेंड्स, अब तो आपको ये बात समझ आ ही गई होगी कि रूबी अपने अब्बू से क्यों ऐसे बर्ताव करती है.

वैसे तो फर्नाडिस के समझाने के बाद रूबी ने अपनी ज़िद छोड़ दी थी मगर कभी कभी उसके दिमाग़ में ये शैतानी ख्याल आ जाता है, इसका सबसे बड़ा कारण है फर्नाडिस के लंड का साइज़.. क्योंकि रूबी ने एक बार फर्नाडिस का लंड देख लिया था जो करीब 9″ का होगा, बस इसी लिए उसकी वासना भड़क गई. उसकी बहुत तमन्ना थी किसी बड़े लंड से चुदने की.. इसलिए वो बार-बार ऐसी हरकतें करती है.

तो चलो ये राज भी खुल गया, अब आगे देखते हैं कि रूबी अपने इरादे में कामयाब होती है या नहीं.

फर्नाडिस तो कमरे में चला गया था. फिर रूबी वहां बैठ कर क्या करती, वो भी गुस्से में थी, उसने चादर ली और सो गई. उसकी आँखों में आँसू आ रहे थे और बहुत देर तक वो रोती रही. फिर उसकी आँख लग गई.

फ्रेंड्स यहाँ का तो हो गया, अब एक और घटना भी घटी थी.. उसको भी आप देख लो.

शबनम तो याद है ना आपको या भूल गए. वैसे तो वो रोज दोपहर को शाहिद के पास पढ़ने आती है और कभी-कभी मूड के हिसाब से चुदाई भी हो जाती है. मगर इन दिनों किसी ना किसी वजह से वो चुद नहीं पा रही थी.

कुछ दिनों से शबनम वासना की आग में जल रही थी और आज इत्तफ़ाक़ से उसके घर वाले और शाहिद के घर वाले किसी फंक्शन में साथ गए. वैसे वो शबनम को लेकर जा रहे थे मगर शबनम ने पैर में दर्द होने का नाटक करके मना कर दिया था और शाहिद तो वैसे भी उनके साथ बहुत कम कहीं जाता था.

शबनम ने चहक कर कहा- मामू आप आ गए… मैं कब से आपका इन्तजार कर रही थी. चलो जल्दी से खाना खाओ, उसके बाद पढ़ाई भी करनी है.

शाहिद- क्या बात है आज पहली बार तेरे मुँह से चुदाई के बजाए पढ़ाई शब्द सुन रहा हूँ.

शबनम- वो तो आपसे होती ही कहाँ है. कितने दिन हो गए, आप रोज कोई ना कोई बहाना बना देते हो.

शाहिद- बहाना नहीं बनाता हूँ… आजकल अम्मी दोपहर में सो नहीं रही ना, अब उनके आने का ख़तरा रहता है और वैसे भी इतने भी दिन नहीं हुए, जितने तू बता रही है.

शबनम- अच्छा अच्छा बातें बंद… जल्दी से खाना खाओ आज आपके लिए एक सरप्राइज भी है.

शाहिद- क्या बात है मेरी जान… ऐसा क्या है?

शबनम- आप बात बहुत करते हो… जल्दी से खाना खाओ उसके बाद खुद देख लेना ना.

जब शाहिद फ्री होकर ऊपर गया तो शबनम ने अपने ऊपर एक चादर डाल रखी थी. जब शाहिद ने चादर हटाई तो शबनम एकदम नंगी लेटी हुई थी और उसकी उंगली फुददी पे टिकी थी, जो एकदम क्लीन थी.

शाहिद- वाउ शबनम आज तो तेरी फुददी बहुत चमक रही है… तूने साफ की है क्या?

शबनम- हाँ मेरे प्यारे मामू अब मुझे भी फुददी को चमकाना आ गया है.

शाहिद- अच्छा तो ये है तेरा सरप्राइज.

शबनम- जी नहीं मेरे मामू, ये तो सरप्राइज के साथ फ्री है… वो तो अलग है.

शाहिद- अब ये नहीं तो क्या है, बता ना?

शबनम- ऐसे नहीं, पहले आप जल्दी से अपने कपड़े निकालो. मेरे प्यारे लंड को मुझे दिखाओ… उसके बाद मैं सब बताऊंगी.

शाहिद को पता था शबनम जिद्दी है, ऐसे मानेगी नहीं… उसने जल्दी से अपने कपड़े निकाल दिए. उसका लंड तो शबनम की फुददी देख कर ही उफान पे आ गया था.

शबनम उठी और घुटनों के बल बैठ कर लंड को किस किया, फिर उसको चूसने लगी.

शाहिद- सस्स आह… शबनम… अब लंड ही चूसेगी या बताएगी भी क्या है?

शबनम- आपको क्यों बताऊं… वो गिफ्ट तो मेरे प्यारे लंड के लिए है. मैं तो इसको ही बताऊंगी.

शाहिद- अच्छा ये बात है तो इसको बता दे.

शबनम ने लंड को हाथ में पकड़ा और उसको सहलाते हुए उससे बात करने लगी- तू कितना अच्छा है और ये मामू गंदे हैं. इनको मत बताना हाँ… आज मैं तेरे लिए एक मस्त चीज लाई हूँ. तुझको वो बहुत पसंद आएगी, एकदम टाइट है तू उसमें घुस जाना. हाँ और मज़े से उसमें पानी फेंक कर आना, तुझे बहुत मजा आएगा.

शाहिद- अरे ऐसा क्या लेकर आ गई मेरी जान… जो टाइट है अब दिखा भी दे.

शबनम- आपको उससे मतलब में अपने प्यारे लंड को दिखाऊंगी… आप चुप रहो बस.

इतना कहकर शबनम खड़ी हुई और लंड को पकड़ कर पलट गई, फिर लंड को अपनी गांड पे एड्जस्ट करके बोली- देख मेरे बलमा, आज तुझे इसमें जाना है, ये बहुत टाइट है तुझे बहुत मजा आएगा. मगर दर्द मत करना हाँ… मेरी गांड की चुदाई प्यार से करना तुम. ये सिर्फ़ तेरे लिए ही है. मैंने इसके लिए बहुत अच्छा प्लान बनाया है, किसी को पता भी नहीं लगेगा और तू इसको अच्छी तरह चोद भी देगा. तुम समझे मेरे प्यारे लंड बलमा जी.

शबनम की बात सुनकर शाहिद के लंड में और तनाव आ गया, उसने जल्दी से शबनम को घुमाया और उसकी आँखों में देख कर पूछा- सच में शबनम आज तू मुझे अपनी गांड की चुदाई करने देगी, मगर कैसे? हम दोनों ने तो प्रोग्राम बनाया था कि वहीं करेंगे. फिर आज हम यहाँ कैसे करेंगे और तुमने ऐसा क्या प्लान बनाया है मुझे भी तो बताओ?

शबनम- मामू मुझे तो कल ही पता चल गया था कि आज सब जाने वाले हैं. इसलिए मैंने सुबह मोच आने का बहाना बना दिया और लंगड़ा कर चल रही हूँ ताकि आपके मोटे लंड को गांड में ले सकूं और अगर उसकी वजह से मुझे दर्द भी हुआ तो किसी को शक भी नहीं जाएगा कि मैं ऐसे क्यों चल रही हूँ. समझे मेरे प्यारे मामू…!

शबनम की बात सुनकर शाहिद खुश हो गया. उसने शबनम के होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिए और एक लंबा किस शुरू हो गया. इस दौरान शाहिद शबनम की गांड को हाथों से दबा कर मजा लेने लगा और शबनम भी उसके लंड को पकड़ कर दबाने लगी.

थोड़ी देर बाद शाहिद ने शबनम को बांहों में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया- मेरी जान, बहुत दिनों से सोच रहा था कि तेरी गांड का छेद बहुत गुलाबी है, इसमें जब लंड जाएगा तो मुझे कितना आनन्द आएगा. आज तो मैं इसको फाड़ ही दूँगा.

शबनम- नहीं मामू, प्लीज़ आराम से करना.

 
शबनम की बात सुनकर शाहिद को हँसी आ गई क्योंकि उसने कही ही ऐसे थी- हा हा हा अरे मज़ाक कर रहा हूँ मेरी जान… तुझे दर्द देकर मुझे मजा थोड़ी आएगा. तू तो मेरी जान है चल जल्दी से 69 की पोज़ में आ जा. मैं तेरी गांड को चाट कर रेडी करता हूँ और तू मेरे लंड को जल्दी से चूस कर तैयार कर दे.

शबनम- नहीं मामू, मुझे पता है आप गांड मारोगे तो मेरी जान निकाल दोगे. मजा तो दूर की बात है, मेरी फुददी में जो खुजली मची हुई है, वो भी गायब हो जाएगी इसलिए पहले आप मेरी फुददी चोद कर शांत करो… उसके बाद गांड मार लेना.

शाहिद- ठीक है शबनम डार्लिंग वैसे आज तेरी फुददी भी चमक रही है, इसको ठोकने में भी बहुत मजा आएगा.

शबनम- तो हो जाओ शुरू और चाटो मेरी फुददी को.

दोनों 69 के पोज़ में लेट गए और एक-दूसरे को चुसाई का मजा देने लगे.

थोड़ी देर बाद शाहिद ने शबनम के पैरों को उल्टी दिशा में मोड़ दिया और उसकी फुददी पर लौड़ा टिका कर एक झटके में लौड़ा घुसा दिया.

शबनम- आह… आह सस्स… मामू क्या करते हो उफ्फ… आपको पता है ना आपका आ लंड कितना बड़ा है इसस्स… मेरी तो जान निकाल देते हो आह…

शाहिद- मेरी शबनम रांड़, कितनी बार तो चुद चुकी है, अब कैसा दर्द… ले संभाल मेरे झटके… तू अब लंड ले साली उहह उहह ले लंड अपनी चिकनी फुददी में खा… अह…

शबनम- आह… चोदो आह… फाड़ दो मामू उफ्फ… ये फुददी आपकी ही है… अह… ज़ोर से चोदो आह…

करीब 15 मिनट तक शाहिद दे दनादन शबनम की फुददी का भुर्ता बनाता रहा… तब कहीं जाकर वो झड़ी और उसकी फुददी अब शांत हो गई थी. मगर शाहिद वैसे ही धकापेल लगा हुआ था.

शबनम- आह… बस भी करो मामू… आह… अब थोड़ा पैरों को आराम दे दो आह…

शाहिद ने फुददी से लौड़ा निकाल कर शबनम को पकड़ कर बैठा दिया और लौड़ा उसके मुँह में घुसा दिया.

शाहिद- ले शबनम डार्लिंग मेरे लंड से चख ले अपनी फुददी का स्वाद. अब तेरी फुददी तो गई काम से और अभी मेरे लंड में बहुत जान बाकी है… क्यों ना तेरी गांड को भी आज खोल ही देता हूँ. फिर तू पक्की चुदक्कड़ बन जाएगी, जहाँ चाहे लंड घुसवा लेना.

शबनम ने लंड को अच्छे से चूस कर चिकना किया, उसके बाद वो गांड फैला कर घोड़ी बन गई- लो मामू आपकी शबनम की गांड हाजिर है… घुसा दो अपना लंड और कर दो इसका भी मुहूर्त अपने लंबे लंड से.

शाहिद- तू बस हाथों को टाइट रखना, कहीं नीचे मत लेट जाना, नहीं तो मजा नहीं आएगा.

शबनम- आप डालो तो बाकी जो होगा देखा जाएगा. अब तो बस गांड मरवाना ही है.

शाहिद ने शबनम की गांड के छेद पर अच्छे से थूक लगाया, फिर अपनी एक उंगली उसमें घुसेड़ने लग गया, वो वाकयी बहुत टाइट गांड थी… मगर धीमे-धीमे उसने उंगली अन्दर घुसा ही दी.

शबनम- आह ससस्स मामू आह… उंगली से ही दर्द हो रहा है आह… आज तो आपका लंड मेरी जान लेकर रहेगा.

शाहिद- कुछ नहीं होगा जान ये तो शुरूआत है. तूने जब फुददी में ले लिया तो यहाँ भी ले लेगी. तू बहुत हिम्मत वाली लड़की है.

थोड़ी देर तक शाहिद उंगली से ही शबनम की गांड मारता रहा, जब उसको लगा अब गांड चिकनी हो गई तो उसने दोबारा लंड पर थूक लगाया और लंड को हाथ से पकड़ कर गांड के छेद पर दबाने लगा. थोड़ी देर कोशिश करने के बाद सुपारा गांड में घुस गया और शबनम दर्द से बिलबिलाने लगी, मगर उसने दाँत कस कर भींच लिए और वैसे ही डटी रही.

शाहिद को लंड को आगे सरकाने के लिए बहुत ताक़त लगानी पड़ रही थी. जब उसका 3″ लौड़ा गांड में समा गया, तो इसके बाद वो रुक गया. अब शाहिद ने शबनम की कमर को कस के पकड़ा और ज़ोर से एक दे झटका मारा.

शबनम- एयाया एयाया मर गई आह… मामू उफ्फ अब्ब… बहुत दर्द हो रहा है आह…

शाहिद- यार शबनम, बस एक झटका और झेल ले… तेरी गांड बहुत टाइट है वैसे तो लंड अन्दर जाएगा भी नहीं… बस थोड़ा सा और बर्दाश्त कर ले तू, फिर दर्द नहीं होगा.

शबनम ने कराहते हुए कहा- उफ्फ… ठीक है आह… मामू अब आपको जो करना है आह… जल्दी करो… आह… मेरी गांड में बहुत जलन हो रही है आह… सस्स आह…

शाहिद ने आधे लंड को बाहर निकाला, जो गांड में था, फिर पूरी ताक़त से वापिस अन्दर डाला. अबकी बार गांड फाड़ता हुआ पूरा अन्दर घुस गया और शबनम की जोरदार चीख निकल गई. मगर घर में कोई था नहीं, तो डर किस बात का. उसकी आँखों से आँसू बहने लगे, सर चकराने लगा मगर उसने हिम्मत नहीं हारी. वो वैसे ही घोड़ी बनी रही और शाहिद उसकी गांड को स्पीड से चोदने लगा.

कुछ मिनट तक शाहिद ज़ोर-ज़ोर से शबनम की गांड में लंड अन्दर-बाहर करता रहा. अब शबनम को थोड़ा सा दर्द कम लगा तो उसने शाहिद को उत्तेज़ित करने के लिए मादक सिसकियाँ भरना शुरू कर दीं, साथ में उसको उकसाने लगी ताकि उसका पानी जल्द निकल जाए और उसकी जान छूटे.

शाहिद अभी भी स्पीड से गांड मारने में लगा हुआ था और शबनम बोले जा रही थी- आह… मामू सस्स आपका लंड बहुत अच्छा है… आह… चोदो… फाड़ दो मेरी गांड को… नहीं आह… ज़ोर से करो.

ऐसे ही दस मिनट और निकल गए और अब गांड की गर्मी लंड को पिघलने लगी थी. अब शाहिद का खुद पे काबू नहीं था उसकी नसें फूलने लगी थीं और एक के बाद एक पिचकारी उसके लंड से छूटने लगीं, जो शबनम की गांड में मलहम का काम कर रही थीं.

जब लंड से सारा रस बह गया, तो शाहिद ने लौड़ा बाहर निकाल लिया. लंड फूच्च की आवाज़ से निकला और शबनम उस मीठे दर्द से सिहर गई.

शाहिद ने फौरन अपनी जीभ गांड पे लगा दी और उसको चाटने लगा ताकि शबनम को आराम मिल जाए. थोड़ी देर चाटने के बाद शाहिद शबनम को अपने सीने से चिपका कर लेट गया.

 
थोड़ी देर दोनों मामू भांजी वैसे ही नंगे लेटे रहे. फिर शबनम ने अपने मामू शाहिद के होंठों को चूम लिया और उसकी तरफ़ देखने लगी. जब शाहिद ने देखा की शबनम की आँखें अभी भी भीगी हुई हैं तो उसने शबनम के आँसू साफ किए और उसको बेतहाशा चूमने लगा.

शाहिद- आई लव यू शबनम, तुम बहुत अच्छी हो, मेरे लिए तुमने कितना दर्द सहन किया.

शबनम- आई लव यू टू मेरे मामू.. ये शबनम आपकी ही तो है. अब प्लीज़ मुझे कभी ना मत कहना. आपके लंड के बिना मुझे कुछ अच्छा नहीं लगता. अब आप मुझे रोज चोदेंगे ना?

शाहिद- हाँ मेरी जान, मैं अब तुझे कभी नाराज़ नहीं करूँगा. चल अब लंड को चूस.. एक बार और तेरी फुददी और गांड को चोद देता हूँ ताकि शाम तक तुझे लंड की याद ही ना आए.

शाहिद की बात सुनकर शबनम खुश हो गई और लंड को चूसने लगी और शाहिद उसके चुचों से खेलने लगा.

जब ये चूसना बंद हुआ तो शाहिद ने फिर उसकी गांड की ठुकाई की. अबकी बार शबनम को दर्द कम हुआ तो उसने भी पूरा साथ दिया. फिर उसकी फुददी को भी शाहिद ने जमकर चोदा और उसको चोद-चोद कर थका दिया.

जब दोनों की चुदाई का कोटा पूरा हो गया तो वो सो गए और रात को घर वालों के आने के बाद किसी को शक भी नहीं हुआ क्योंकि सोकर उठने के बाद शाहिद ने शबनम को सीढ़ियों के कई चक्कर लगवाए ताकि उसकी चाल ठीक रहे. वैसे तो उसने मोच का नाटक किया हुआ था मगर शाहिद कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था, इसलिए उसने ये सब किया.

बस भी करो यार.. अब यहाँ का होम सेक्स तो हो गया. अब डिनर करके जाओगे क्या?

चलो थोड़ा शाजिया के होम सेक्स को भी देख लो, आज उसकी सील टूटने वाली है तो उसने क्या किया है.

रात को अपने अब्बू से वादा करके शाजिया सो गई थी. सुबह वो उठी तो अब्बू जी का लंड अकड़ा हुआ था, जिसे देख कर शाजिया के मुँह में पानी आ गया.

शाजिया- उह… अब्बू आपका लंड है या गन्ना, हमेशा खड़ा ही रहता है, अब सुबह-सुबह ही देखो कैसे तना हुआ है. अब इसको ठंडा करने के बाद ही मैं फ्रेश होने जाऊंगी. नहीं तो ये आपको परेशान करेगा.

शाजिया ने अपने अब्बू के लंड के सुपारे को मुँह में ले लिया और उसको मजे से चूसने लगी. तभी अब्दुल की आँख खुल गई और वो ये नजारा देख कर बहुत खुश हो गए.

अब्बू- आह.. मजा आ गया बेटी.. अगर ऐसे ही सुबह सुबह लंड को मसाज मिल जाए तो क्या कहने. वाह… तेरी जैसी बेटी पाकर मैं धन्य हो गया शाजिया.. आह.. चूस मेरी जान.. ओफ्फ.. मजा आ रहा है आह!

शाजिया- ये कैसा लंड है अब्बू.. मैं उठी तो अकड़ा हुआ था तो मैंने सोचा इसको ठंडा कर देती हूँ.. नहीं तो ये पूरा दिन आपको परेशान करेगा.

अब्बू- बहुत अच्छा सोचा तूने.. आह.. चूस दे इसे, अगर तेरी फुददी भी मचल रही है तो बता दे.. मैं उसको भी ठंडी कर देता हूँ.

शाजिया- नहीं अब्बू इसको तड़पने दो आज तो आप इसको लंड से ही ठंडा करना.

अब्बू- ठीक है शाजिया, तू कॉलेज से आकर अच्छी तरह नहा लेना. आज रात मैं तेरे लिए यादगार बनाना चाहता हूँ.

शाजिया- सीधे से कहो ना.. सारे बाल साफ करने हैं और आप भी कर लेना. ये छोटे-छोटे बाल मेरे मुँह को चुभते हैं.

अब्बू- हा हा हा तू बड़ी स्यानी हो गई है.. अच्छा कर लूँगा अब जल्दी कर, इसका पानी निकालने के बाद तुझे नाश्ता भी रेडी करना है और खुद को भी रेडी करना है.

शाजिया ने फिर लंड को मुँह में ले लिया और स्पीड से लंड चूसने लगी. साथ ही वो लंड की गोटियां भी चूस रही थी और गुलसन जी मजे की अलग ही दुनिया में खो गए थे.

बीस मिनट की ज़बरदस्त चुसाई के बाद अब्दुल जी के लंड ने पानी चोदा, जिसे उनकी बेटी शाजिया रसमलाई समझ कर गटक गई.

अब्बू- आह.. मजा आ गया शाजिया बेटी ओफ्फ.. काश तू रोज ऐसे ही सुबह सुबह मेरे लंड को शांत कर दिया करे तो कितना मजा आए.

शाजिया- अच्छा ऐसी बात है तो रोज कर दूँगी, इसमें क्या है.. अब्बू, ये तो अब मेरा ही लंड है ना.

शाजिया ने अपने अब्बू के लंड पे एक किस किया, फिर मुस्कुराते हुए वहाँ से उठ कर चली गई.

बस अब्दुल जी बहुत देर तक आँखें बंद किए वहीं लेटे रहे.

शाजिया रेडी हो गई, उसने नाश्ता बना दिया और अब्बू के साथ नाश्ता करके वो रज़िया के घर की तरफ़ निकल गई.

जब शाजिया वहाँ पहुँची तो रज़िया पहले से रेडी थी और वो बाहर ही निकल रही थी.

शाजिया- क्या बात है आपा, आज आप इतनी जल्दी बाहर निकल आईं, सब ठीक तो है ना?

रज़िया- अरे हाँ यार, सब ठीक है, शाम को शाहिद का फ़ोन आया था, उसने जल्दी आने को कहा था. उसको कोई जरूरी काम है.

शाजिया- अच्छा ऐसा क्या काम है जो सुबह सुबह बुलाया है. कहीं उनके इरादे वो वाले तो नहीं है ना?

रज़िया- वाह भाई बड़ी फास्ट हो गई.. तू तो सेक्सी बातें भी करने लगी.

शाजिया- सॉरी आपा मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रही थी.. वैसे शाहिद जी को क्या काम है?

रज़िया ने शाजिया को बताया कि इन दिनों अम्मी की तबीयत की वजह से उसने पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया और आज प्रॉजेक्ट्स सब्मिट करना है. बस शाहिद उसकी हेल्प कर रहा है और इसी वजह से वो जल्दी जा रही है.

फ्रेंड्स अब हमें थोड़ी चुदाई भी देखनी है.. आज ये सब तो बिज़ी रहने वाले हैं तो इनको जाने दो, राबिया के पास ही जाने में फायदा है.

 
रोज की तरह फवाद घर आ गया था और राबिया से मिन्नतें कर रहा था कि जल्दी फकीर को बुलाओ. अब जाहिरा का हुस्न देख कर वो सब्र नहीं कर सकता है.

राबिया ने फवाद को बताया- कल वो घड़ी आ रही है क्योंकि बाबा ने कल सन्डे को आने का कहा था, अब बस कल तक अपने आपको संभालो.

राबिया की बात सुनकर फवाद बहुत खुश हो गया था और उसने राबिया को बांहों में भर लिया, उसको चूमने लगा.

राबिया- अरे बस बस इतना भी खुश मत हो, ये बस एक बार होगा ओके.. उसके बाद जाहिरा को भूल जाना. तुम्हें सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी फुददी की आग मिटानी होगी.

फवाद- ऐसा मत कहो यार.. एक बार में तो मजा भी नहीं आएगा.

राबिया- अच्छा मैं यहाँ तुम्हारी जान बचाने के चक्कर में लगी हूँ और तुम्हें मजे की पड़ी हुई है?

फवाद- अरे प्लीज़ यार ग़लत मत समझो. अच्छा तुम्हें मैं फुल आज़ादी देता हूँ, जिसके साथ तुम्हारा मन करे, तुम कभी भी कर सकती हो ओके.

राबिया- मुझे रांड़ बोल तो चुके हो.. अब बनाने का भी मंसूबा है क्या?

फवाद- अरे नहीं जान मेरा ये मतलब नहीं था. मैं तो बस ये चाहता हूँ कि तुम भी खुलकर मजा ले सकती हो.

राबिया- अच्छा अच्छा ज़्यादा मस्का मत लगाओ. जाहिरा को बाद में भी चोद लेना और रही बात मेरी, तो उसका बाद में देखेंगे.

राबिया की बात सुनकर फवाद खुश हो गया और राबिया को किस करने लगा मगर राबिया का मूड नहीं था तो उसने फवाद को हटा दिया और काम में लग गई.

यहाँ भी कुछ हाथ नहीं लगा. कोई बात नहीं फ्रेंड्स चलो आज कुछ नया बताता हूँ.

कॉलेज के बाद सब अपने अपने घर की तरफ़ निकल लिए मगर आज शाजिया और रज़िया के साथ रूबी भी आ गई और ये तीनों रज़िया के घर में आ गईं. उस टाइम याक़ूब घर पर नहीं था और रज़िया की अम्मी तो हैं, नहीं हैं, एक बराबर है.. तो चलो इनकी बातें सुनते हैं.

रज़िया- यार आज तो शाहिद ने बचा लिया. नहीं तो प्रॉजेक्ट के चक्कर में आज मेरी गांड फट जाती.

रूबी- जिसने बचाया है उसी ने फाड़ी भी होगी तेरी गांड.. हा हा हा हा.

रज़िया- कमीनी तुझे बड़ा पता है ना.. तू भी तो उस दिन उससे चुदने को मरी जा रही थी और कैसे उन पाँचों के लंड तूने सारे छेदों में लिए हुए थे.

शाजिया- उह.. अम्मी.. सबके एक साथ लिए थे, रूबी आपा आपको दर्द नहीं हुआ क्या?

रूबी- अरे दर्द तो बहुत साल पहले हो चुका, अब तो बस मजे ही मजे हैं यार.

रज़िया- किसे बता रही है यार.. इसमें इतनी हिम्मत है ही नहीं, ये कभी इस मजे को नहीं समझ सकेगी.

शाजिया- आप ऐसे क्यों बोल रही हो आपा? मैंने मना कब किया, मौका आएगा तब मैं भी कर लूँगी ना.

रूबी- अरे मौके की तलाश लड़कों को होती है. लड़की तो बस इशारा कर दे, एक से एक लंड उसको चोदने को आ जाएंगे.

रज़िया- यार, ये ऊपर के मजे तो सारे लेती है.. मगर फुददी में लंड लेने के नाम से बिना चुदे ही इसकी फुददी फट जाती है.

रूबी- यार ये क्या बात हुई, आख़िर तुझे किस बात का डर है?

शाजिया- व्व..वो मेरी उम्र कम है ना और मेरी फुददी भी छोटी है.. इसलिए डरती हूँ.

रज़िया- क्या यार शाजिया बड़ी पकाऊ है तू.. तेरी उम्र में लड़कियां शादी कर लेती हैं और फुददी कितनी भी छोटी हो लंड आराम से ले लेती है.. समझी!

रूबी- यार तू उम्र की बात कर रही है. मैं और रज़िया तो टीन उम्रर थीं, तब हमने अपनी फुददी में लंड ले लिया था.

शाजिया- आपा आज मौका अच्छा है. आप दोनों अपनी कहानी बताओ ना प्लीज़.. शायद उससे मेरा डर निकल जाए.

रज़िया- चल रूबी आज इसको सुना ही देते हैं. ये भी क्या याद करेगी हमको.

शाजिया की बात दोनों ने मान ली और तय ये हुआ कि सबसे पहले रज़िया अपनी फुददी की चुदाई की कहानी बताएगी, उसके बाद रूबी.

रूबी- चलो रज़िया, शुरू हो जाओ और बताओ इसको कि कैसे तुमने लंड लिया था.

रज़िया- बात पहले की है जब मैं बहुत छोटी थी, तब अब्बू का बिजनेस अच्छा चलता था और मेरे एक चाचा थे जो उनके पार्ट्नर थे. मगर वो चाचा अजीब ही थे, मेरे अब्बू से उम्र में बड़े थे मगर उन्होंने शादी नहीं की थी, बस अपनी ही मस्ती में रहते थे.

रूबी- यार तू फिल्मी अंदाज में मत बता, ऐसे तो शाम हो जाएगी. सीधे चुदाई की कहानी बता, बस वो कैसे हुई और किसके साथ हुई.

रज़िया- चुपचाप सुन लो, ऐसे डायरेक्ट ही बताऊंगी तो क्या समझ आएगा.

शाजिया- नहीं आपा आप शुरू से ही बताओ.

रज़िया- सब अच्छा चल रहा था, फिर एक दिन अब्बू को मौत हो गई और सारा काम बिगड़ गया. मगर चाचा ने हमें संभाल लिया और मेरी अम्मी को उन्होंने व्यापार का काम समझा दिया ताकि अब्बू की जगह वो बिजनेस चला सकें.

रूबी- उह.. ये बात है.. फिर क्या हुआ?

रज़िया- होना क्या था मॉम काम में इतनी उलझ गईं कि बहुत कम उम्र में ही मुझे खुद को और अपने भाई को संभालना पड़ा और धीमे धीमे दिन गुजरने लगे.

रूबी- यार लंबी मत कर.. चुदाई का बता ना, देख मेरे निपल्स हार्ड हो गए हैं.

रज़िया- कमीनी अभी कोई गंदी बात सुनी भी नहीं और तुझ पे सेक्स चढ़ गया क्या?

शाजिया- आपा आगे क्या हुआ बताओ ना!

रज़िया- अच्छा अच्छा अब पॉइंट पे आती हूँ. सुनो, मैं जब स्कूल में थी, तब मुझे चाचा का व्यवहार अलग सा लगने लगा. वो घर आते तो किसी ना किसी बहाने से मुझे टच करते, मुझे गोद में बिठाकर हिलते, मगर उस टाइम मुझे नहीं पता था कि उनके इरादे क्या हैं.

रूबी- चाचा लंड को आराम देते थे तेरी कच्ची फुददी की गर्मी से.. हा हा हा हा.

रज़िया- हाँ पता है, ज़्यादा ज्ञान मत दे कुतिया.. मगर उस टाइम पता नहीं था और एक बात बताऊं, चाचा ने शादी नहीं की थी मगर चुदाई बिना वो रहते भी नहीं थे. हर बार नई लड़की की चुदाई करते थे. उनको रोज नई बीवी चाहिए थी इसी लिए शादी नहीं की.

शाजिया- आपा आपको ये सब कैसे पता और अगर वो इतने गंदे थे तो आपकी अम्मी ने उन्हें आपके करीब कैसे आने दिया?

रज़िया- यार यही तो बात है, वो अम्मी के सामने बहुत शरीफ बनते थे और वैसे भी शादीशुदा औरतों को वो देखना पसंद नहीं करते थे, इसी कारण किसी को उन पर शक नहीं होता था. वो तो कॉलेज गर्ल्स या कोई मजबूर लड़की ढूँढते थे, जिससे उनको पैसे और चाचा को नई लड़की की फुददी मिल जाती थी.

रूबी- अच्छा अब आगे बता तू?

रज़िया- चाचा के ऊपर अम्मी का दिन पे दिन भरोसा बढ़ता जा रहा था और चाचा की हरकतें भी बढ़ती जा रही थीं. एक दिन घर में कोई नहीं था, याक़ूब पड़ोसी के यहाँ खेलने गया हुआ था और अम्मी काम के सिलसिले में बाहर गई हुई थीं. तब चाचा घर पे आए और मुझे देख के मुस्कुराने लगे.

रूबी- अब आई ना असली कहानी पर.. चल आगे बता क्या हुआ था?

रज़िया- वैसे तो उस टाइम मुझे सेक्स के बारे में इतना नहीं पता था, मगर हाँ अच्छे-बुरे की पहचान थी और मर्द और औरत के बीच का फ़र्क भी अच्छी तरह जानती थी कि क्या सही है क्या ग़लत इतनी समझ मुझमें थी.

रूबी- यार तू बहुत पका रही है.

रज़िया- अच्छा अच्छा ऐसे तुमको आनंद नहीं आएगा उस दिन क्या हुआ वो विस्तार से बताती हूँ. हाँ घूर मत सिर्फ़ सेक्स के बारे में ही बता रही हूँ ओके.

जब चाचा घर पे आए तो रज़िया ने उनको पानी लाकर दिया.

रज़िया- चाचा आप कॉफी लोगे क्या?

चाचा- नहीं रज़िया, आज कॉफी का मूड नहीं है, मुझे तो आज दूध पीना है.

रज़िया- अच्छा मैं अभी लेकर आती हूँ.

चाचा- अरे रुक तो.. कहाँ जा रही है? मुझे बकरी का या भैंस का नहीं, तुम्हारा दूध पीना है.. तेरे इन रसीले चुचों का रस पीना है.

चाचा ने रज़िया को बांहों में भर लिया और उसके चुचों को हल्के से दबा दिया.

रज़िया- चाचा, ये आप क्या कर रहे हो?

चाचा- बताया तो है मैंने कि आज मेरा इन तेरे कच्चे चुचों का दूध पीने का मन है.

रज़िया- आप दूर रहो मुझसे, नहीं तो मैं मम्मी को आपका नाम बता दूँगी.

चाचा- अरे तू इतनी नाराज़ क्यों है, ले मैं खुद तेरी अम्मी को बता देता हूँ.

चाचा ने रज़िया की मॉम को फ़ोन लगाया और फ़ोन को स्पीकर पर डाल दिया.

सुरैया- सलाम जेठ जी.. कैसे फ़ोन किया.. मैं अभी मीटिंग में हूँ?

चाचा- अरे जानता हूँ.. आप बिज़ी हो मगर 2 मिनट मेरी बात सुन लो. मैं घर आया हूँ, अब मेरा कॉफी पीने का मूड नहीं तो रज़िया को दूध के लिए कहा, मगर ये मना कर रही है. अब आप ही समझाओ अपनी लाड़ली बेटी को. फोन स्पीकर पर है लो बोलो उसे.

चाचा ने ऐसा गेम खेला कि रज़िया बस उसमें फंसती चली गई.

सुरैया- ये क्या है रज़िया, तुम इतनी समझदार हो फिर ऐसी हरकत?

रज़िया- नहीं मॉम, आप मेरी बात सुनो चाचा मेरे से दूध माँग रहे हैं.

सुरैया- अरे मैं नहीं हूँ ना, तो तेरे से ही माँगेंगे ना!

रज़िया- मगर मॉम वो मुझे…

 
सुरैया- बस रज़िया, अब ये अगर मगर रहने दो और चाचा जो माँगें उन्हें दे दो और बेटा उनको नाराज़ मत करना, तेरे अब्बू के बाद उन्होंने हमें संभाला है. तू मेरी समझदार बेटी है ना, चल अब रखती हूँ.

सुरैया ने फ़ोन काट दिया और रज़िया को अजीब उलझन में डाल गईं. इधर चाचा के चेहरे पर ख़ुशी साफ नज़र आ रही थी.

चाचा- क्यों रज़िया मेरी बात अब समझ आ गई. अरे तेरी अम्मी भी यही चाहती है उन्होंने ही मुझे यहाँ भेजा है. चल अब देर मत कर.. आ जा मेरे पास और तेरे रसीले संतरे मुझे दिखा, मैं भी तो देखूं इनमें कितना रस भरा पड़ा है.

रज़िया- नहीं अम्मी मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हैं. नहीं ये ग़लत है प्लीज़ चाचा मत करो ना.. मुझे ये अच्छा नहीं लग रहा.

रज़िया मना करती रही और चाचा पे तो वासना सवार थी. वो उसके चुचों को कपड़ों के ऊपर से मसलने लगे और एक हाथ से उसकी फुददी को रगड़ने लगे.

रज़िया- आह.. इसस्स नहीं प्लीज़ चाचा आह.. दुख़ता है.. नहीं करो प्लीज़ सस्स नहीं..

चाचा कहाँ मानने वाले थे, वो तो बस रज़िया को मसले जा रहे थे. फिर उन्होंने रज़िया को गोद में उठा लिया और कमरे में ले गए.

रज़िया- बस करो ना चाचा, मुझे ये अच्छा नहीं लग रहा है.

चाचा- देखो सुरैया ने क्या कहा याद है ना.. और अभी तो मैंने दूध पिया ही नहीं. चल ये कपड़े उतार, जल्दी से मुझे तेरे रसीले दूध दिखा.

रज़िया ने थोड़ी देर ना नुकुर की, मगर चाचा ने उसको सुरैया के बारे में झूठ बोलकर नंगी होने के लिए मना लिया और रज़िया ने डरते डरते सारे कपड़े निकल दिए. अब वो चाचा के सामने एकदम नंगी थी.

नागपुरी संतरे जैसे रसीले उसके मम्मे और बड़ापाव जैसी फूली हुई फुददी एकदम क्लीन.. फुददी पर झांटें तो क्या रोंए भी नहीं थे, जिसे देख कर चाचा के मुँह में पानी आ गया.

चाचा- वाउ रज़िया, जैसा मैंने सोचा था तू उससे ज़्यादा कमसिन कली है. आज तो तेरी जवानी का मजा लूटने में मजा आ जाएगा.

रज़िया को बहुत शर्म आ रही थी. वो नजरें झुकाए खड़ी थी. फिर चाचा ने उसको बिस्तर पे लेटाया और उसके नर्म होंठों को चूसने लगे. उसके छोटे छोटे चुचों को दबाने लगे. कभी उसके बटन जैसे निप्पलों को चूसते, तो कभी उसकी गर्दन को चूसने लगते.

ये ज़बरदस्त हमला रज़िया बर्दाश्त नहीं कर पाई. अब उसकी सुध-बुध खो चुकी थी. उसकी कमसिन जवानी अब मजा लेना चाहती थी. उसकी साँसें भी तेज हो गई थीं और वो भी चाचा के जिस्म पे हाथ घुमाने लगी.

रज़िया- आह.. सस्स नहीं चाचा.. प्लीज़ रहने दो आह.. नहीं.. सस्स.

चाचा भी समझ गए कि अब चिड़िया जाल में पूरी तरह फँस चुकी है. अब उन्होंने रज़िया की फुददी पे होंठ टिका दिए और जीभ से फुददी के दाने को कुरेदने लगे. रज़िया के पूरे भागनासे को मुँह में लेकर चूसने लगे.

रज़िया- आह.. चाचा नहीं.. मत एयेए करो आह.. ज़ोर से करो आह.. मुझे कुछ हो रहा है आह.. ससस्स छोड़ दो.. आह.. मेरी सूसू आ रही है आह.. नहीं..

रज़िया की फुददी अब लावा उगलने को तैयार थी और ऐसी चुसाई एक कमसिन कली कहाँ तक बर्दाश्त कर सकती थी. वो कमर को हिला-हिला कर झड़ने लगी और उसका कामरस, वो कामांध चाचा कुत्ते की तरह चाटने लगा.

जब रज़िया शांत हुई तो उसको अहसास हुआ. वो नंगी अपने चाचा से फुददी चटवा रही थी. उसको बहुत शर्म आई तो उसने अपना मुँह हाथों से छुपा लिया.

चाचा- क्या बात है रज़िया.. अभी तो बड़े मजे ले रही थीं. अब शर्मा रही हो. देखो तो इधर मुझे बताओ मजा आया ना.

रज़िया- नहीं प्लीज़ कुछ मत कहो मुझे शर्म आ रही है आपसे.

चाचा- अरे अभी कहाँ मेरी जान अभी तो शुरुआत है, आगे आगे देख मैं तुझे कली से कमल बना दूँगा, फिर तेरी सारी शर्म निकल जाएगी समझी..!

ये सब बोलते हुए चाचा ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उनका 7″ का लंड एकदम तना हुआ रज़िया की फुददी को ऐसे देख रहा था जैसे उसकी बरसों की उससे पहचान हो और आज वो उसमें बस समा जाएगा.

चाचा फिर बिस्तर पे आए और रज़िया के हाथ हटा कर उसकी आँखों में देखने लगे, जो वासना की वजह से एकदम लाल हो चुकी थीं.

चाचा- रज़िया शर्मा मत, ये देख इसको लंड कहते हैं, चल अब इसको चूस कर मुझे मजा दे. फिर मैं तेरी सील तोड़कर तुझे आज चुदाई का मजा दूँगा.

जब रज़िया की नज़र चाचा के लंड पे गईं तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं. वो गौर से लंड को देखने लगी और इतना बड़ा लंड देख कर बिना चुदे ही उसकी गांड फट गई.

चाचा के विशाल लंड को देख कर रज़िया के चेहरे पे भय के भाव आ गए हालाँकि उसको चुदाई का कुछ पता नहीं था मगर इतने बड़े लंड को देखकर डरना स्वाभाविक था.

चाचा ने अपने लंड को मुठियाते हुए कहा- क्या हुआ मेरी रानी.. ऐसे देखती रहेगी या तू इसको चूसेगी भी?

रज़िया- नहीं चाचा मुझसे ये नहीं होगा प्लीज़ अब मुझे जाने दो मुझे डर लग रहा है.

चाचा- रज़िया अगर तू ना कहेगी तो तेरी अम्मी गुस्सा करेगी क्योंकि मैं अगर नाराज़ हुआ तो सारा काम बंद कर दूँगा, फिर तुम लोग गरीब हो जाओगे. फटे-पुराने कपड़े पहनोगे, खाना भी नहीं मिलेगा. इसलिए समझो बात को और जैसा मैं कहता हूँ, करो.. इसमें तुम्हें मजा भी आएगा जैसे अभी आया था.

चाचा की बात सुनकर रज़िया को वो पल याद आ गया जब वो झड़ी थी और ऐसा मजा उसको लाइफ में पहली बार मिला था मगर अगले ही पल उसने ध्यान हटाया और ना नुकुर करने लगी. चाचा भी पक्का मंसूबा बना चुके थे. उन्होंने साम दाम दंड भेद की नीति अपनाई और रज़िया पर ज़ोर दिया. उसको डराया, थोड़ा लालच भी दिया. बेचारी कमसिन कली कहाँ तक भेड़िया से बचती. उसने सब करने के लिए हाँ कह दी.

चाचा- ये हुई ना बात.. चल आ जा चूस लंड को, देख कितना मजा आता है.

रज़िया ने लंड को चूसना शुरू किया. शुरू में तो उसको अजीब लगा, थोड़ा गंदा भी लगा.. मगर चाचा उसके चुचों को सहला रहे थे और वो उत्तेजित हो रही थी. अब उसको भी मजा आने लगा था और वो मन से लंड को चूसने में लग गई.

चाचा- आह.. चूस.. मजा आ रहा है ओफ्फ.. तेरे होंठ भी किसी फुददी से कम नहीं.. आह.. चूसो मेरी जान आह…

थोड़ी देर ये खेल चलता रहा. फिर चाचा ने उसको अपने ऊपर उल्टा लेटा दिया. इससे दोनों 69 के पोज़ में आ गए थे और चुसाई का खेल फिर शुरू हो चुका था.

चाचा ने फुददी को चाट चाट कर एकदम गीला कर दिया था और रज़िया ने उनके लंड को चूस कर चिकना बना दिया था. अब रज़िया एकदम उत्तेजित हो चुकी थी और चुदने के लिए एकदम तैयार थी. चाचा ने उसको सीधा लेटाया और उसके पैरों को मोड़ कर लंड को फुददी पर सैट करके रगड़ने लगे.

रज़िया- आह.. सस्स चाचा मुझे कुछ हो रहा है आह.. ज़ोर से करो ना.. सस्स आह.. अच्छा लग रहा है आह.. करो ना.

चाचा- हाँ रज़िया मेरी जान.. अब तेरी फुददी लंड माँग रही है, अभी तुझे शांत करता हूँ.. बस तू ज़रा हिम्मत रखना.

चाचा ने ना जाने कितनी सील तोड़ी हुई थीं. वे कच्ची कलियों की सील तोड़ने में एकदम पीएचडी थे. उन्होंने उंगली से फुददी को फैलाया और लंड का सुपारा फुददी की फांकों के बीच फंसा कर धीमे से दबाव बनाया, जिससे सुपारा फुददी में घुस गया.

रज़िया- एयेए एयेए नहीं चाचा.. उफ़फ्फ़ बहुत दर्द हो रहा है.. आह.. निकालो बाहर.

चाचा- सब्र मेरी जान.. तेरे चाचा को सील तोड़ने में महारत हासिल है. मैं बहुत कम तकलीफ़ दूँगा तुझे.. और उसके बाद तेरे मजे ही मजे हैं.. समझी तू!

चाचा ने धीमे-धीमे थोड़ा लंड आगे बढ़ाया. अब रज़िया की सील बीच में आ गई थी और वो दर्द से छटपटा रही थी. चाचा ने कमर को पीछे लिया और एक जोरदार धक्का मारा, जिससे रज़िया की सील टूट गई और लंड फुददी में आधा घुस गया. वो अभी चीख पाती, उससे पहले उसके होंठ चाचा ने दबा लिए और उनको चूसने लगे.

 
बहुत देर तक बिना हिले चाचा रज़िया पर वैसे ही पड़े रहे और रज़िया के होंठ चूसते रहे. रज़िया की आँखों से जो आँसू निकले, वो भी उन्होंने चाट लिए थे.

जब रज़िया को दर्द कम हुआ तो वो चाचा की पीठ पर हाथ घुमाने लगी.

चाचा- क्यों रज़िया रानी.. अब दर्द कम हुआ ना.. अब बस धीमे धीमे करूँगा ताकि तुझे दर्द ना हो, ठीक है जान..!

रज़िया- आह.. चाचा ये बहुत मोटा है.. आह.. अन्दर बहुत जलन हो रही है प्लीज़ निकाल लो ना बाहर.. आह सस्स बहुत दुख रहा है.

चाचा- अरे सील तो टूट गई अब कुछ नहीं होगा. तू देख तो सही, मैं कैसे प्यार से तेरी चुदाई करता हूँ.

चाचा का अब तक जितना लंड अन्दर गया था, उसी को हिलाने लगे. बहुत धीमे धीमे वो रज़िया को चोद रहे थे और अब रज़िया का दर्द कम हो गया और उत्तेजना बढ़ गई थी.

रज़िया- आह.. ऐसे ही करो.. आह.. मजा आ रहा है उफ़फ्फ़ दर्द भी हो रहा है.. मगर अजीब सा करंट सा लग रहा है नीचे.. आह.. करो चाचा ओफ्फ.. एयेए आह…

चाचा बहुत बड़े चोदू थे. वो लंड को पीछे खींचते और धीमे से आगे झटका मार देते, जिससे लंड और अन्दर घुस जाता. मगर ये सब वो बहुत प्यार से कर रहे थे. दस मिनट की मेहनत के बाद उन्होंने पूरा लंड फुददी की गहराई में घुसा दिया और रज़िया को पता भी नहीं लगा कि उसकी फुददी 7″ का लंड निगल चुकी है.

अब रज़िया की उत्तेजना बहुत ज़्यादा बढ़ गई थी. उसकी फुददी रिसने लगी थी. वो दर्द को भूल कर बस मजा लेने लगी थी और ना जाने क्या क्या बोले जा रही थी. चाचा समझ गए कि अब लंड महाराज फुददी में सैट हो चुके हैं और रज़िया का पानी कभी भी निकल सकता है. उन्होंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से झटके मारने लगे.

रज़िया- आह.. सस्स चाचा नहीं… आहह.. दर्द हो रहा है… ऊउन्न्ह.. ज़ोर से करो आह.. नीचे आह.. कुछ कुछ हो रहा है.

चाचा- हाँ मेरी जान.. ले तेरी फुददी में लंड का दम घुटा हुआ है.. अह.. ले चुद आज आह..

चाचा की स्पीड और बढ़ गई थी. अब वो रज़िया को दे दनादन चोदे जा रहे थे. अब रज़िया की कमसिन फुददी ये झटके झेल नहीं पाई और उसका फुव्वारा फूट गया. साथ ही चाचा के लंड ने भी रज़िया की फुददी में वीर्य की बरसात शुरू कर दी थी.

चुदाई का ये खेल खत्म हो गया था मगर इधर तीनों की फुददी पानी पानी हो गई थी.

अरे आप भूल गए क्या.. ये रज़िया अपनी कहानी सुना रही है.

रूबी- उह… गॉड ऐसी चुदाई… यार मेरी फुददी तो गीली हो रही है… मजा आ गया तेरी चुदाई की कहानी सुन कर!

शाजिया- हालत तो मेरी भी खराब है… आपा मगर मुझे पूरी कहानी सुनाओ ना… उसके बाद क्या हुआ?

रज़िया- अरे होना क्या था… फिर चाचा ने 3 बार मेरी फुददी का भुर्ता बनाया. उसके बाद उन्होंने मुझे साफ साफ बता दिया कि मेरी अम्मी को कुछ पता नहीं है. चाचा ने मुझे उल्लू बना का चोद दिया था. बस फिर इस ज़बरदस्त चुदाई के बाद में उनकी दीवानी हो गई थी.

रूबी- वाउ यार सो नाइस, फिर क्या हुआ… चुदाई रुक गई या उसके बाद भी तुम्हें अपनी फुददी में चाचा का लंड लेने का मौका मिला?

रज़िया- अरे मिलता कैसे नहीं… चाचा ने अम्मी को काम में इतना उलझा दिया कि वो ज़्यादा बाहर ही रहने लगीं और चाचा मेरे साथ रासलीला करते रहते थे. आगे और पीछे मेरी ऐसी ठुकाई करते… क्या बताऊं यार.

रूबी- वाह यार, वैसे अब वो कहाँ हैं?

रज़िया- क्यों तुझे भी चुदवाना है क्या उनसे हा हा हा.

रूबी- अरे नहीं ऐसे ही पूछ रही हूँ.

रज़िया- एक साल तक मेरी फुददी को मजा देकर उनका दिल भर गया तो वो कहीं और मुँह मारने लगे और ऐसे ही एक दिन ज़्यादा फुददी लेने से उनका हार्ट फेल हो गया और वो अल्लाह को प्यारे हो गए.

शाजिया- ओह अल्लाह ये बहुत बुरा हुआ.

रज़िया- बुरा तो हमारे साथ हुआ. वो थे तब तक काम संभाल लेते थे. उनके बाद सब चौपट हो गया और अम्मी भी बीमार रहने लगीं. खैर… इसके बाद का बाकी तो तुम दोनों जानती ही हो.

शाजिया- रूबी दी, अब आपकी बारी, आपके साथ कब और कैसे हुआ वो भी मुझे बताओ ना.

रूबी ने अपने भाई के साथ जो हुआ सारी कहानी सुना दी, बाकी अपने अब्बू के साथ की घटना नहीं बताई. अब रूबी की कहानी तो आपको पता ही है तो आगे का हाल देखते हैं.

रज़िया- वाउ यार, रूबी लॉलीपॉप के चक्कर में चुद गई. मजा आ गया कसम से… देख तेरी कहानी सुनकर पूरी पेंटी गीली हो गई.

रूबी- हाल तो मेरा भी ऐसा ही है. लगता है हमें खेल शुरू करना पड़ेगा. मगर शाजिया तुमने अपनी कहानी नहीं बताई.

शाजिया- मेरी ऐसी कोई कहानी नहीं है आपा, बस कुछ दिनों से अब्बू के लिए परेशान हूँ.

रूबी- अरे वो क्या चक्कर है, मुझे भी तो बता कि तू क्यों मुझे अपने अब्बू से चुदवाने के पीछे पड़ी है?

रज़िया ने शाजिया की कहानी बताई कि कैसे उसके अब्बू कंट्रोल किए हुए हैं. उसके बाद शाजिया ने इन दिनों की कुछ बातें बताईं, जो उसने अब्बू के साथ की थीं… जिसे सुनकर रूबी की आँखों में चमक आ गई.

रूबी- उह… वाउ शाजिया सच में तुम्हारे अब्बू का लंड इतना मोटा और बड़ा है जैसे किसी घोड़े का होता है.

शाजिया- हाँ आपा बहुत बड़ा है, मैंने छुपकर देखा भी है.

रूबी- यार मेरी बड़ी तमन्ना है किसी बड़ी उम्र के आदमी के साथ सेक्स करने की, जिसका ऐसा तगड़ा लंड हो.

रज़िया- गुड… इसका मतलब तू शाजिया के अब्बू से चुदवाने को राज़ी है!

रूबी- अरे 100% राज़ी हूँ यार… क्या तुम दोनों को कोई शक है क्या?

शाजिया- ये तो अच्छी बात है. मगर अब्बू नहीं माने तो?

रूबी- वेबकूफ़ जब हमने राज को अपने जाल में फँसा लिया तो तेरे अब्बू तो प्यासे हैं. उनको मनाना कौन सा बड़ा काम है. अपने खरबूजों की ज़रा सी झलक दिखा दूँगी ना… देखना कैसे उनका लंड लुंगी फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो जाएगा हा हा हा.

रज़िया- बात तो सही है यार, इससे तेरी प्राब्लम भी खत्म हो जाएगी और रूबी की तमन्ना भी पूरी हो जाएगी.

रूबी- यार वो जब होगा तब की तब देखेंगे, अभी जो फुददी में आग लगी है उसका हम क्या करें?

रज़िया- करना क्या है कपड़े निकालो और शुरू हो जाओ एक-दूसरे की फुददी को चाटो.

शाजिया- नहीं आपा, मुझे अब घर जाना होगा. अब्बू के लिए खाना भी बनाना है क्योंकि अम्मी भी नहीं हैं, वो मामू जी के यहाँ गई हुई हैं.

रज़िया- अरे ये अचानक कैसे जाना हुआ और तूने तो बताया था कि वो मामू से नाराज़ हैं?

शाजिया ने पूरी बात बताई तब रज़िया को बात समझ आई. शाजिया ने अपनी मजबूरी बता दी और वहाँ से निकल गई, उसके जाने के बाद रज़िया और रूबी ने एक-दूसरे को शांत किया. फिर रूबी भी अपने घर चली गई.

 
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