शाजिया- आपा, आप खुद देख लो आपकी रेगिंग ने आख़िर मुझे रांड़ बना ही दिया.. और तो और मैंने इस घटिया खेल में रूबी को भी शामिल कर लिया छी.. छी.. मुझे अपने आप से घिन आने लगी है.
फ्रेंड्स, रज़िया जब यहाँ आई थी जस्ट उसी समय रूबी भी उसके पीछे पीछे यहाँ आ गई थी.. मगर वो रज़िया की बातें सुनकर बाहर ही रुक गई थी.
रज़िया- उस कमीने शाहिद को तो सबक सिखाना ही पड़ेगा.
रूबी- उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी रज़िया, उसको ऑलरेडी सबक मिल गया है.
रज़िया- टीटी तुम कब आई रूबी.. और कैसा सबक मिल गया उसको?
रूबी- मुझे कुछ देर पहले पता चला शाहिद के बारे में.. तो मैं जल्दी से तुमसे मिलने तुम्हारे घर गई मगर वहां पता लगा कि तुम यहाँ आई हो तो मैं यहाँ आ गई और तुम दोनों की बातें सुनकर बाहर ही रुक गई.
मगर जब शाजिया ने मेरा नाम लिया, तो मुझसे रहा नहीं गया और मैं अन्दर आ गई.
रज़िया- वो सब ठीक है.. तुम शाहिद के बारे में क्या बात कर रही थीं?
रूबी ने शाहिद की करतूत के बारे में उनको बताया तो दोनों हैरान हो गईं.
रज़िया- तुझे ये सब कैसे पता लगा?
रूबी- अरे, वो इंस्पेक्टर चाचा मेरे अब्बू के बहुत करीबी दोस्त हैं, वो हमारे घर आए थे, तो अब्बू को उन्होंने बताया और मैंने सुन लिया. वैसे पहले मुझे शक था कि शायद किसी और की बात होगी मगर जब हमारे कॉलेज का नाम सामने आया और हाँ इस केस के अलावा उस पर पहले से ही 2 केस हैं… किसी कॉलेज गर्ल को शराब पिला कर उसके साथ रेप करने का मामला भी है.
रज़िया- ओह माय गॉड व्व..वो शिल्पा और मेघा का मामला होगा शायद उसमें तो मैंने भी शाहिद की हेल्प की थी मगर वो पुरानी बात है.
रूबी- हाँ पुरानी बात है मगर केस आज सुबह ही उसके खिलाफ दर्ज हुआ उन लड़कियों ने बताया कि कोई बहुत बड़े आदमी को रेप केस में पुलिस ने पकड़ा तो उनकी हिम्मत जागी कि उनको भी इंसाफ़ मिल जाएगा. बस उन्होंने पुलिस को आकर सब बता दिया. उसके सभी दोस्तों को भी अरेस्ट कर लिया है.
रज़िया- यार पुलिस मुझे भी ढूंढ रही होगी.. मैं भी इस पाप में शामिल थी.
रूबी- नहीं, ऐसा कुछ नहीं है तुम्हारे बारे में कोई जिक्र नहीं हुआ.. तुम डरो मत.
रज़िया- थैंक्स यार उन दोनों ने मेरा जिक्र नहीं किया वरना मैं भी फंस जाती.
शाजिया- आपा, आपने कैसे उनकी लाइफ बर्बाद कर दी और आज मेरी बारी आई तो आपकी अंतरात्मा जाग गई ऐसे कैसे?
रज़िया- नहीं शाजिया, उस टाइम मैंने बस उन लड़कियों को शाहिद के करीब किया था.. बाकी ये रेप वाली बात मुझे आज तक पता नहीं थी. मेरे हिसाब से उनकी मर्ज़ी से हुआ था.
रूबी- ये सब जाने दो अब आगे क्या करना है? हमारे घर वालों तक ये बात नहीं जानी चाहिए कि शाहिद हमारा दोस्त था.. नहीं तो बड़ी गड़बड़ होगी.
रज़िया- घर वालों की बात जाने दो, पुलिस तक गई तो वो पूछेगी और बार बार बुलाएगी.
इनकी बातें चल रही थीं, तभी वहां अब्दुल जी आ गए और तीनों को देखकर खुश हो गए.
अब्दुल- क्या बात है आज सारी सहेलियां एक साथ बैठी हैं.. क्या बातें हो रही हैं?
शाजिया- आपकी ही बातें हो रही थीं. आप भी आ जाओ और मुझे बताओ ये फरज़ाना कौन है?
फरज़ाना का नाम सुनकर अब्दुल जी की हवा टाइट हो गई, वो इधर उधर देखने लगे.
शाजिया- ऐसे चुप होने से आपके गुनाह छुप नहीं जाएँगे.. अब्बू बोलो, नहीं तो मैं आज कुछ कर बैठूंगी.
अब्दुल- सीसी कौन फरज़ाना.. मैं किसी फरज़ाना को नहीं जानता आ..और तुम्हें ये सब बातें किसने बताई हैं?
शाजिया- अब्बू छुपाने से कोई फायदा नहीं.. मुझे सब पता है. अब आप बताते हो या..
शाजिया आगे कुछ बोल पाती, उसके पहले रज़िया ने उसको चुप करा दिया.
रज़िया- रूको शाजिया, ऐसे इनकी समझ में बात नहीं आएगी. मैं ही पूरी बात इनको बताती हूँ.
रज़िया ने शुरू से सारी बातें बताईं, जिसे सुनकर अब्दुल जी का पारा चढ़ गया- उस कमीने की ये मजाल वो मेरी बेटी को रांड़ बनाएगा.. उसको तो ऐसी मौत मारूँगा कि उसकी रूह भी कांप जाएगी.
शाजिया- उसकी कोई जरूरत नहीं है.. क़ानून उसको सज़ा दे देगा. आप फरज़ाना के बारे में बताओ.. वो कौन है, कहाँ से आई.. मुझे सब कुछ जानना है.
अब्दुल- इस बारे में हम बाद में बात करेंगे. ऐसे बाहर वालों के सामने तुम अपने अब्बू को क्यों जलील कर रही हो?
शाजिया- कौन बाहर वाला? इनको सब पता है.. ये रूबी जिसके साथ आप कितनी बार सो चुके हो और ये रज़िया इसी की वजह से अपने मुझे भी नहीं बख्शा है.
अब्दुल- ये ग़लत है मैंने कुछ नहीं किया. मैं हमेशा से तुम्हें अच्छी नज़रों से देखता था. मेरे अन्दर के मर्द को तुमने जगाया था. तुमने ही मुझे ये पाप करने पे मजबूर किया था.
अपनी ग़लती का अहसास होते ही शाजिया शांत हो गई मगर फरज़ाना वाली बात उसने नहीं छोड़ी. आख़िर अब्दुल जी को उन सबको सारी कहानी बतानी पड़ी.
शाजिया- छी.. अब्बू आप इतने कैसे गिर सकते हो.. कितनी शादी करोगे आप.. उस फरज़ाना को बेटी बनाकर घर लाते तो मुझे ख़ुशी होती, आपने तो उसको रखैल बना दिया और उसके होते हुए भी आप क्यों तड़पने का नाटक कर रहे थे.. क्यों मेरी जिंदगी बर्बाद की आपने?
अब्दुल- वो नाटक तेरी अम्मी को दिखाने के लिए था ताकि उसको शक ना हो मगर मैं करता भी क्या? तुम्हारी अम्मी शुरू से ऐसी ही थी. मजबूर होकर मैंने फरज़ाना की अम्मी से शादी की, जब वो बीमार पड़ गई तो फरज़ाना को मैंने अपनी बना लिया.
शाजिया- अब्बू आपने पाप किया है अब आप इसको छुपाने की कोशिश मत करो.
अब्दुल- ऐसा कुछ नहीं है, तुम फरज़ाना से मिल चुकी हो.. वो अपनी मर्ज़ी से मेरे साथ है. मैंने उसको पहले ऑफर दिया था मगर वो मेरे साथ ही खुश थी.. चाहो तो तुम उससे मिल कर पूछ लो.
शाजिया को वो शॉपिंग वाली बात याद आ गई जब वो फरज़ाना से मिली थी. उसके बाद रज़िया और रूबी चली गईं और शाजिया के ज़िद करने पर अब्दुल जी उसको फरज़ाना के पास ले जाने को तैयार हो गए और दोनों घर से फरज़ाना के घर की ओर निकल गए.
मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, फरज़ाना जब मार्केट सामान लेने गई तो रोज़ी से उसकी मुलाकात हो गई. रोज़ी याद है ना आपको, अरे रूबी की मॉम.. हाँ वही शाजिया की बुआ रोज़ी, तो उनकी मुलाकात हो गई. अब बातों बातों में अचानक रोज़ी की तबीयत खराब हो गई तो फरज़ाना उसको अपने साथ अपने घर ले गई ताकि थोड़ा आराम करेगी तो ठीक हो जाएगी.
वहां पहुँच कर रोज़ी ने अपने शौहर फर्नाडिस को कॉल कर दिया कि उसकी तबीयत खराब है तो वो किसी के यहाँ रुकी है. उसने फरज़ाना के घर का पता भी दे दिया.
अब फ्रेंड्स आप समझ रहे होंगे कि यहाँ क्या होने वाला है? हाँ सही समझे भाई और बहन का मिलाप होने वाला है. तो चलो देर किस बात की, करवा देते है मिलाप.
अब्दुल और शाजिया जैसे ही फरज़ाना के घर के बाहर पहुँचे, तभी वहां फर्नाडिस और रूबी भी आ गए.
शाजिया- तुम यहाँ कैसे रूबी और ये साथ में कौन हैं?
रूबी- ये मेरे अब्बू हैं यार मेरी मॉम यहाँ हैं.. उनकी तबीयत ठीक नहीं तो यहाँ रुक गई थीं और उन्होंने अब्बू को कॉल पर बता दिया था. उस टाइम मैं अब्बू के साथ थी तो हम दोनों ही यहाँ आ गए.
उनकी बातें अब्दुल जी ने भी सुनी. अब उनकी हालत तो देखने लायक थी.
उन्होंने शाजिया से बहाना किया कि तुम अन्दर जाओ मैं थोड़ी देर में आता हूँ मगर शाजिया नहीं मानी और उनको अन्दर साथ ही लेकर गई, जहाँ सबसे पहले उनकी मुलाकात रोज़ी से ही हुई और रोज़ी को एक सेकेंड भी नहीं लगा अपने भाई को पहचानने के लिए.
अब यहाँ तो भाई और बहन का मिलाप हो रहा था. वहीं शाजिया और रूबी की नज़रें एक दूसरे से मिलीं कि ये क्या अनहोनी हो गई. रूबी ने अपने सगे मामू से चुदाई की थी.
रोज़ी ने एक के बाद एक सवाल पूछने शुरू कर दिए- भाभी, कहाँ हैं बच्चे कितने हैं वगैरह वगैरह..
अब्दुल जी ने जैसे तैसे रोज़ी के सवालों का जवाब दिया और उसको कहा कि घर जाकर सब बातें करेंगे, अभी नहीं. वैसे फरज़ाना के बारे में वो सब कुछ साफ छुपा गए.
फर्नाडिस और रोज़ी से शाजिया को मिलवाया और जैसे तैसे करके उन्हें घर भेज दिया बस रूबी वहीं रुक गई.
फरज़ाना को जब सारी कहानी पता लगी. उसने भी अब्दुल जी को बहुत सुनाई और रूबी ने भी शाजिया को बता दिया कि उस दिन ये मेरी मॉम के बारे में बहुत पूछ रहे थे. शायद इन्हें पहले ही पता था कि मैं इनकी भांजी हूँ. तो शाजिया ने अपने अब्बू को बहुत कोसा, भला बुरा कहा और अब्दुल जी मायूस होकर वहां से निकल गए.
आप सोच रहे होंगे मैं ये किस तरह कहानी बता रहा हूँ तो फ्रेंड्स इसका जवाब मैं लास्ट में आपको दूँगा. पहले ये देखो कि यहाँ क्या गजब हो गया.
अब्दुल जी ने समाज और इंसानियत के सारे नियम तोड़ दिए थे. अब वो अपनी सग़ी बेटी, सौतेली बेटी और भांजी की नज़रों में गिर गए थे. अब बस उनको टेंशन थी तो रोज़ी की कि वो कैसे उनका सामना करेंगे. उन्होंने तो उनकी बेटी को भी गंदा कर दिया था. बस यही सब सोच कर वो घर गए, एक पेपर पे कुछ लिखा और खुद को खत्म कर लिया.
जब शाजिया और रूबी फरज़ाना के साथ घर आए तो उनकी हालत देख कर दंग रह गए. अब अब्दुल जी इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे और कागज पर उन्होंने सबसे माफी माँगी थी. खास तौर पर वो सबको कह गए कि बस ये राज को यहीं खत्म कर दो. रोज़ी को कभी मत बताना कि मैं ऐसा था.
लो फ्रेंड्स, यही होता है बुरे काम का बुरा नतीजा. अब्दुल जी ने जो किया, वो शुरू में बड़ा मजेदार था. आपको भी पढ़कर आनंद आ रहा था. पहले फरज़ाना फिर शाजिया और रूबी.. मगर आख़िर में पाप का घड़ा भर गया तो जान देनी पड़ी.
बस फ्रेंड्स यही मेरा मकसद था आपको बताना कि कभी रिश्तों को गंदा मत करना. ये कहानी शुरू में अच्छी लगती है मगर इसका एंड कोई नहीं समझता.
अब खुद देखो शाहिद ने क्या नहीं किया. उसने भी खूब एंजाय किया, आपमें से कई नौजवान शाहिद जैसा बनने की चाहत करने लगे मगर ग़लत काम का कभी अच्छा फल नहीं मिलता और देखो आज शाहिद जेल की सलाखों के पीछे है, ऊपर से किसी को मुँह दिखाने लायक भी नहीं बचा. साथ में उसके दोस्त भी अपनी करनी का फल भुगत रहे हैं.
इनकी एक साथी रज़िया को भूल गए, आप सोच रहे होंगे इसने भी मज़े किए थे, ये कैसे बच गई. तो इसकी भी सुनो इसने अपने भाई को फास्ट करने के लिए जो पाप किया था, उसकी सज़ा इसको ये मिली कि धीमे धीमे याक़ूब इतना बिगड़ गया कि बाहर फ्रेंड्स के साथ हर किस्म के फालतू काम करने लगा, रंडियों के पास जाने लगा. एक बार तो सोते टाइम रज़िया के साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश भी की, रज़िया ने उसको मारा पीटा, मगर वो नहीं सुधरा.
तो यही थी रज़िया की सज़ा, उसकी करनी की सज़ा उसके भाई और अम्मी को भुगतनी पड़ी.
बहुत फ्रेंड्स को शुरू से लगता था कि फवाद और राबिया का शाजिया से कोई रिश्ता होगा.. मगर फ्रेंड्स ऐसा कुछ नहीं है. ये दो अलग अलग कहानी थीं, जो मैंने आपको साथ साथ सुना दी थीं. वैसे फवाद के बारे में बता देता हूँ कि वो उस लड़की के खूब मज़े लेने लगा और मौके का फायदा उठा कर राबिया भी समीर से चुदती रही. हाँ वो अलग बात है फवाद की नज़रों में वो शरीफ़ ही बनी रही. फिर एक बार चाचा भी गाँव से आए थे तो फवाद की गैर मौजूदगी में उन्होंने जमकर राबिया की चुदाई की. मतलब चाचा ससुर के मोटे लंड से बहु की चुदाई होती रही.
अब आप सोच रहे होंगे कि चाचा और राबिया ने भी पाप किया है तो इनको सज़ा मिली या नहीं, तो फ्रेंड्स जरूरी नहीं सब को यही सज़ा मिले, कुछ फैसले अल्लाह के हाथ होते हैं, वो कब और कैसे किसको सज़ा दे दे, ये सिर्फ़ वही जानता है. इनकी लाइफ में आगे क्या हुआ ये किसी को नहीं पता.
तो फ्रेंड्स ये थी कहानी- हवस ( रिश्तों में गंदगी ).. मैं जानता हूँ कि इतनी जल्दी कहानी खत्म होने से मेरे फ्रेंड दुखी होंगे मगर फ्रेंड्स कहानी तो एक ना एक दिन एंड होनी ही थी.
फ्रेंड्स अब आपसे विदा लेता हूँ और जाते जाते फिर कहता हूँ कि हिन्दुस्तान हमारा है, इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत ही रिश्ते नाते हैं. तो प्लीज़ इसकी कदर करें और प्यार से रहें. सभी रिश्ते बड़े होते हैं, इनको गंदा मत करना, बाकी ऊपर वाला आपको समझ देता ही है.
समाप्त