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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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चाचा की पूरी बात राबिया को सुनाई तो दी मगर वो वासना में जल रही थी इसलिए उसे कुछ समझ नहीं आया। वो तो बस इंतजार में थी कि जल्दी से चाचा अपना मूसल अन्दर पेल दें और उसकी फुददी को सुकून मिले।

चाचा ने लंड फुददी पर रखा और एक ही झटके में पूरा अन्दर घुसा दिया।

राबिया- आह आह… मज़ा आ गया उफ़फ्फ़… इसे कहते है असली लंड ओफ चोदो चाचा आह.. अपनी बहू को जोर से चोदो आह.. बुझा दो इस प्यासी फुददी की प्यास आह.. आ आह..

जावेद वहीं खड़ा चुदाई का मज़ा ले रहा था तो चाचा ने उसे इशारे से जाने के लिए कहा, तब जावेद ने अपने कपड़े पहने और वहां से चला गया।

इधर चाचा स्पीड से राबिया की फुददी को पेल रहे थे। कोई 10 मिनट बाद राबिया झड़ने को हो गई।

राबिया- आह.. स्शह फास्ट आह.. चाचा जोर से करो उनम्म उम्म्म आह..

राबिया की फुददी ठंडी होने के बाद चाचा ने लंड फुददी से निकाल लिया और दीवार से टेक लगा कर बैठ गए।

राबिया- क्या हुआ चाचा आप नहीं निकालोगे अपना पानी या फिर आपके दिमाग़ में बस मेरी गांड ही घूम रही है?

चाचा- गांड तो तेरी मैं मारूँगा ही मेरी रानी.. मगर पहले तू मेरे लंड को चूस.. वो साली आ जाए फिर उसके सामने तेरी ठुकाई करूँगा तो उसकी फुददी भी गीली हो जाएगी। फिर साली खुद ब खुद मेरे पास अपनी फुददी मरवाने आ जाएगी।

चाचा की बात सुनकर राबिया की आँखें फटी रह गईं.. वो बस कुछ पूछने ही वाली थी कि चाचा ने खुद उसके सवाल का जवाब दे दिया।

चाचा- ज़्यादा सोच मत बहू रानी.. वो सुबह जब जावेद ने हमें देख लिया था तब मैं उससे मिलने गया था।

राबिया- हाँ ये पता है, उसने मेरी चुदाई का आपसे कहा, उसके बदले वो किसी को नहीं कहेगा यही ना.. मगर ये नई फुददी का क्या चक्कर है चाचा?

चाचा ने राबिया को सारी बातें विस्तार से बताईं.. तब कहीं जाकर राबिया को समझ आया कि माजरा क्या है। वो चाचा के लंड को सहलाने लगी।

राबिया- इसी लिए आज ये इतना अकड़ा हुआ है.. चाचा बेचारी पर रहम करना.. कहीं उसकी फुददी मत फाड़ मत आप और चाचा वो किसी को हमारे बारे में बता तो नहीं देगी ना?

चाचा- अरे पागल है क्या, वो खुद लंड की प्यासी है। उसको ऐसा तगड़ा लंड मिल जाएगा तो वो क्यों किसी को बताएगी। चल अब बातें मत कर वो किसी भी पल आ सकती है। तू बस लंड को अच्छे से चूस कर तैयार कर। पहले तेरी गांड को ठोकूँगा, उसके बाद मैं उसकी फुददी फाड़ूगा।

राबिया- चाचा मेरी गांड मारोगे तो मुझे बहुत दर्द होगा.. कहीं वो डर के भाग ना जाए। उसके सामने तो आप फुददी ही चोद लो ताकि उसको लगे चुदाई में कितना मज़ा आता है.. तभी वो आपके पास आएगी।

चाचा- अरे वाह राबिया रानी.. तू तो बड़ी होशियार है रे, वैसे बात तेरी सही है उसको डराना नहीं है, मज़ा देना है। एक काम कर तू.. चुदवाते समय जोर-जोर से उसको सुनाना कि तुझे कितना मज़ा आ रहा है, तभी मेरा काम बनेगा, नहीं तो साली भाग जाएगी।

फ्रेंड्स, आपकी दुविधा में दूर कर देता हूँ तभी आपको आगे मज़ा आएगा। जावेद का एक भाई था नावेद, जिसकी शादी बचपन में ही ग़ज़ल से हो गई थी। नावेद एक फौजी था और एक साल पहले जब वो ड्यूटी पर था, तो नक्सली हमले में मारा गया। बेचारी ग़ज़ल विधवा हो गई थी। अब रिवाज के हिसाब से ग़ज़ल को यहाँ उसके ससुराल में ले आए। गाँव की रीति रिवाज तो आप जानते ही हो। तब से ग़ज़ल यहीं अपनी जवानी बर्बाद कर रही है।

अब ग़ज़ल के बारे में भी जान लो। ये एक 20 साल की मदमस्त हुस्न की मालकिन थी। वैसे तो गाँव के कई लोग इसे भोगना चाहते थे मगर एक तो ये विधवा और ऊपर से फौजी की विधवा.. ये सोचकर कोई इसे छेड़ता नहीं था। चाचा भी इसे देखकर मन ही मन इसे चोदने के सपने देखता था मगर कभी ऐसा मौका ही नहीं मिला कि ग़ज़ल को चोद सके। आज जब चाचा और जावेद बात कर रहे थे, तब जावेद ने यही राज बताया था.. जिसे सुनकर चाचा खुश हुआ था।

चलो वहीं से कहानी शुरू करती हूँ। आप भी समझ जाओगे।

जावेद- चाचा बस एक बार.. फिर कभी नहीं कहूँगा और उसके बदले मैं आपको एक ऐसा राज बताऊंगा कि आप खुश हो जाओगे।

चाचा- कैसा राज कमीने.. चल पहले बता मेरे काम का हुआ तो आज राबिया से तेरी चुदाई करवा दूँगा।

जावेद- ठीक है सुनो.. आप तो जानते हो भाई के मरने के बाद ग़ज़ल को हम घर ले आए थे। वो अक्सर रात को रोती रहती है। अब मैं तो ठहरा फालतू लड़का.. तो रातों को जाग कर गाँव की किसी ना किसी लड़की के बारे में सोचकर मुठ मारता रहता हूँ। मगर एक बार जब मैं अपने कमरे में मुठ मार रहा था तो मुझे बड़ी सेक्सी आहें सुनाई दीं। मैं बाहर आया तो वो आवाज़ ग़ज़ल के कमरे से आ रही थी। मैंने छिपकर खिड़की से देखा तो वो नंगी अपने बिस्तर पर बैठी अपनी फुददी को उंगली से सहला रही थी और जोर-जोर से आहें भर रही थी। मैं तो पहले ही गर्म था, वो नजारा देख कर मेरा पानी निकल गया और मैं वापस अपने कमरे में आ गया। उसके बाद मैं ग़ज़ल को अलग नज़र से देखने लगा, उसको चोदने के सपने देखने लगा। अक्सर रात को ग़ज़ल अपनी फुददी रगड़ कर शांत होती और मैं उसे देख कर मुठ मारता मगर उससे बात करने की मेरी हिम्मत नहीं होती।

जावेद बोले जा रहा था और चाचा सांस रोके चुपचाप सब सुन रहे थे।

एक रात ग़ज़ल फुददी सहला रही थी और मैं बाहर खड़ा उसे देख कर मुठ मार रहा था, तभी मेरे पैर पर किसी जानवर ने काटा और मैं जोर से चिल्ला दिया। बस ग़ज़ल की नज़र सीधे खिड़की पर गई और उसने मुझे देख लिया तो मैं जल्दी से वहां से भाग गया।

थोड़ी देर बाद ग़ज़ल मेरे कमरे में आई और मेरे पास आकर बैठ गई।

मैं कुछ कहता, इतने में वो रोने लगी।

जावेद- अरे आप रो मत.. मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा भाभी.. आप चुप हो जाओ।

ग़ज़ल- उउउ उउउ.. तुम्हारा भाई तो मर गया.. साथ में मुझे भी मार दिया। आप ही बताओ देवर जी, ये जवानी अब मैं कैसे संभालूँ?

ये कह कर ग़ज़ल मेरे गले से लग कर रोने लगी, उसके जिस्म का स्पर्श पाकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मुझसे रहा ना गया तो मैंने भी उसे अपनी बांहों में भर लिया। वो भी यही चाहती थी।

बस फिर क्या.. वो मुझे चूमने लगी.. और जल्दी से मेरी पेंट से लंड बाहर निकाल कर उसको चूसने लगी, तभी मैं झड़ गया। उसके बाद मैंने उसको नंगा किया और हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे। वो बहुत गर्म हो गई थी.. उसने मेरे सोए हुए लंड को चूस-चूस कर खड़ा कर दिया।

फिर मैंने ग़ज़ल की टाँगें मोड़ दीं और लंड को उसकी गरम फुददी पर सेट किया। मगर मैंने कभी फुददी नहीं मारी थी तो लंड फिसल कर कभी ऊपर तो कभी नीचे चला जाता। ऐसे ही 2-3 बार कोशिश में मेरा पानी फिर निकल गया, जिससे ग़ज़ल को बड़ी मायूसी हुई। उसके बाद मैंने ग़ज़ल की फुददी चाट कर उसको ठंडा किया।

उस दिन के बाद ग़ज़ल समझ गई कि मैं फुददी चोदने के काबिल नहीं हूँ। मैंने उससे बहुत कहा मगर वो कहती है कि अपनी फुददी की सील किसी मर्द के लंड से तुड़वाएगी.. तू तो बस फुददी चाट कर ही मज़ा दे दिया कर, बदले में वो मेरा चूस कर पानी निकाल देती है। अगर आप मुझे राबिया की फुददी दोगे तो मैं बदले में आपको आज रात को ही ग़ज़ल की फुददी लाकर दे दूँगा।

चाचा- वाह मेरे बेटे.. ये हुई ना बात.. मेरी बहू तो कुछ दिन बाद चली जाएगी मगर तूने तो मुझे मस्त खजाना बता दिया है। अब तो हर रात मेरे मज़े हो गए।

जावेद- तो आज मेरी चुदाई पक्की ना चाचा?

चाचा ने उसको समझा दिया कि कब और कैसे उसको क्या करना है। इतना कह कर चाचा वापस घर चला गया।

तो फ्रेंड्स ये थी वो राज की बात.. अब आगे देखो क्या होता है।

 
जावेद ने शाम को ग़ज़ल को थोड़ा सा इशारा दे दिया था कि आज तुझे ज़बरदस्त चीज दिखाऊंगा, तू रात को सोना मत!

जावेद नीचे गया और ग़ज़ल को अपने साथ ऊपर ले आया, जहाँ का नजारा देख कर ग़ज़ल की साँसें थम गई थीं।

ग़ज़ल- हाईअल्लाह.. ये चाचा, अपनी बहू के साथ क्या कर रहे हैं?

जावेद- ग़ज़ल बोल मत.. वो सुन लेंगे बस चुप करके देख और मज़ा ले।

राबिया बड़े प्यार से चाचा का लंड चूस रही थी और चाचा उसके मम्मे सहलाते हुए उससे गंदी बातें बोल रहे थे क्योंकि चाचा को पता लग गया था कि ग़ज़ल ऊपर आ गई है।

चाचा- हय राबिया रानी.. जोर से चूस ओफ.. मज़ा आ रहा है तू इतने दिन प्यासी रही.. पहले ही मुझे बोल देती रानी, तेरी फुददी की प्यास मैं कब का मिटा देता आह.. देख मेरा लंड कितना बड़ा और मोटा है आह.. ये तेरी फुददी की सारी गर्मी निकाल देगा आह.. सस्स ऐसे ही चूस।

राबिया भी समझ गई कि चाचा ये सब ग़ज़ल को सुनाने के लिए कह रहे हैं।

थोड़ी देर बाद चाचा खड़ा हो गया और जानबूझ कर ऐसे खड़ा हुआ कि उसका खड़ा लंड ग़ज़ल को पूरा दिखाई दे। उसके बाद वो राबिया की चुदाई करने लगा।

राबिया- आह.. चाचा आह.. आराम से चोदो.. ओफ कितना मज़ा आ रहा है आह.. आप तो बहुत बड़े मर्द हो आह.. मुझे ऐसे ही मर्द की तलाश थी ओफ आह.. चोदो जोर से करो.. आह.. ओफ और तेज चोदो आह.. मज़ा आ गया आह..

ग़ज़ल को जब चाचा का अजगर दिखा उसकी भी आह.. निकल गई। उसके बाद ऐसी चुदाई देख कर उसकी टाँगें काँपने लगीं.. उसकी फुददी चलनी की तरह पानी झाड़ने लगी।

ग़ज़ल- आह ससस्स चाचा का लंड कितना बड़ा है.. ओफ कितने अच्छे झटके मार रहे हैं आह.. जावेद काश तुम्हारा लंड भी इतना बड़ा होता! ओफ जावेद, मेरे पास आओ ना।

ग़ज़ल अब बेकाबू हो रही थी, उसको तो बस लंड चाहिए था। वो जावेद से चिपक गई और उसके लंड को सहलाने लगी ऐसी चुदाई देख कर जावेद भी बहुत उत्तेजित हो गया था। उसका लंड भी तन गया था।

ग़ज़ल से अब बर्दाश्त नहीं हुआ, उसने जावेद के लंड पर अपनी फुददी घिसनी शुरू कर दी। जावेद भी पीछे से उसके फुददीड़ सहला रहा था और लंड घिस रहा था।

इधर चाचा की चुदाई उफान पर थी। वो राबिया को अलग-अलग पोज़ में चोद रहे थे और उत्तेजना भरी बातें कर रहे थे, जिससे ग़ज़ल के शरीर का तापमान भी बहुत बढ़ गया था। वो अब जोर-जोर से गांड को पीछे धकेल कर जावेद के लंड पर फुददी रगड़ रही थी। बेचारा जावेद कहाँ उस सेक्स की देवी के आगे टिक पाता उसका तो वीर्य निकल गया.. साथ में कपड़े भी खराब हो गए।

जब ग़ज़ल को अहसास हुआ कि जावेद का पानी निकल गया है वो चिड़चिड़ी हो गई।

ग़ज़ल- तू कभी मेरा साथ नहीं देता.. ऐसा भी क्या नामर्द है.. तू उधर देख चाचा की कितनी उमर है, मगर कितनी देर से चोदने में लगे हुए है। हय मेरी फुददी की आग कब शांत होगी.. मुझे कब ऐसी चुदाई मिलेगी।

जावेद- मैं जैसा हूँ.. वैसा ही रहूँगा अगर तू चाहे तो अभी तुझे ये चाचा वाला तगड़ा लंड मिल सकता है.. बोल क्या कहती है?

जावेद की बात सुनकर ग़ज़ल तो ख़ुशी के मारे बावली हो गई।

ग़ज़ल- हाँ सच में लेना है.. पर वो कैसे मिलेगा.. बता ना जावेद?

जावेद- कैसे क्या.. चल उस छत पर और चाचा को अपनी फुददी के दीदार करवा दे.. वो तेरा भी कल्याण कर देंगे।

ग़ज़ल- तू पागल हो गया क्या.. ऐसे कैसे चली जाऊं.. किसी को पता लग गया तो सब मेरी जान निकाल देंगे।

जावेद- अरे मेरी प्यारी भाभी.. किसी को कुछ पता नहीं लगेगा और चाचा तो वैसे भी तुझे चोदना चाहते हैं।

ग़ज़ल- ये तू क्या कह रहा है? वो तो हमेशा मुझे अपनी बेटी समझते हैं। याद है.. उन्होंने एक बार कहा था कि तुम हमारी बहू नहीं बेटी हो।

जावेद- अरे तू चाचा के कारनामे नहीं जानती। वो ना जाने गाँव की कितनी बहू बेटियों को चोद चुके हैं। तुझे छूने के लिए उस दिन उन्होंने ऐसा कहा था और ये सामने देख ना.. कैसी मस्त चुदाई करते हैं वो। अरे जब उन्होंने अपनी सग़ी बहू को नहीं बख्शा.. तो उनके सामने तू क्या चीज है?

ग़ज़ल- वो तो ठीक है.. मगर हम ऐसे अचानक कैसे उनके सामने जाएं?

जावेद- अचानक कुछ नहीं.. वो सब जानते हैं कि तू यहाँ फुददी चुदवाने के लिए खड़ी है.. तुझे दिखाने के लिए ही तो ये सब यहाँ चल रहा है और वो सेक्सी बातें तेरे लिए ही हो रही हैं।

ये सुनकर ग़ज़ल एकदम चौंक गई मगर जावेद ने उसे सारी बात बताई तो उसको भी समझ में आ गया कि ये सब इनकी मिली-भगत है।

ग़ज़ल- तुझे जरा भी लाज-शर्म नहीं आई.. चाचा को हमारे बारे में सब बता दिया!

जावेद- अरे भाभी अब मेरे लंड से आपकी संतुष्टि तो होने से रही और गाँव के किसी और मर्द पर हम भरोसा कर नहीं सकते.. बस ये चाचा ही तुझे संतुष्ट कर सकते हैं। अब देर मत कर, चल आज अपनी सारी इच्छा पूरी कर ले.. बन जा तू भी चाचा के लंड की दीवानी।

ये दोनों छज्जे से उतर कर चाचा की छत पर आ गए थे। उस टाइम चाचा अपने चरम पे थे और राबिया की टाँगें उठा कर उसकी ज़बरदस्त चुदाई कर रहे थे। वैसे उनको आवाज़ सुनाई दे गई थी कि जावेद और ग़ज़ल ठीक उनके पीछे आ गए हैं।

राबिया- आह.. आ चाचा जोर से करो आह.. मैं गई उफ़फ्फ़ हय आह.. आपका लंड है या मूसल.. आह.. उई फुददी को मजा आ गया.. आह..।

चाचा- ले मेरी राबिया रानी.. उहह उहह मेरा लंड भी आह.. पानी फेंकने आह.. आ वाला ही है आह.. आज तो मेरे लंड को पूरी रात फुददी चोदने को मिलेगी उहह उहह अभी तो एक नई फुददी भी चोदनी है आह.. आह..

राबिया की फुददी से पानी छूट गया, जिसकी गर्म धार चाचा के लंड पे टकराई और साथ में चाचा भी अपना पानी राबिया की फुददी में झड़ाने लगे। थोड़ी देर दोनों ऐसे पड़े रहे, फिर जब पलटे तो पीछे जावेद और ग़ज़ल खड़े हुए थे।

ये नजारा देख कर ग़ज़ल के तन-बदन में आग लग रही थी.. वो खड़ी-खड़ी अपनी फुददी को सहला रही थी।

 
चाचा- आ गई ग़ज़ल रानी.. अरे अपनी मुनिया को ऐसे ना रगड़.. यहाँ आ मैं किसलिए हूँ। आज मैं तेरी फुददी की सारी खुजली मिटा दूँगा, आ मेरी प्यारी ग़ज़ल इधर आ।

फ्रेंड्स जावेद ने सब बात ग़ज़ल को बता दी थी.. इसलिए उसे भी अब कोई शर्म की गुंजाइश भी नहीं थी।

ग़ज़ल बेशर्मों की तरह चाचा के पास बैठ गई और उनका लंड जो अभी भी आधा तना हुआ था.. उस पे राबिया की फुददी और चाचा के लंड का मिला-जुला रस लगा हुआ था.. उसे गौर से देखने लगी।

चाचा- अरे शर्मा मत ग़ज़ल रानी.. ले इसका स्वाद चख ले। देख तेरे चाचा बापू का पानी कैसा है.. आजा मेरी रानी आ जा!

ग़ज़ल शुरू से ही चाचा को चाचा बापू कहती थी, मगर आज उसे चाचा में एक मर्द नज़र आ रहा था। उसने मन में कहा कि आज से आप चाचा बापू नहीं.. मेरे शौहर हो, आज से ये ग़ज़ल आपकी हो गई।

ग़ज़ल ने अपनी जीभ चाचा के लंड पर टच की और सारा रस चाटकर साफ कर दिया.. कुछ ही पलों के बाद वो पूरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।

चाचा- आह.. ग़ज़ल तेरे होंठ तो आग की तरह जल रहे हैं। तेरे अन्दर तो बहुत आग है.. आज की रात तुझे ठंडी कर दूँगा। रुक जा मेरी रानी अभी तो मेरा लंड राबिया की फुददी में जाकर आया है। बस 5 मिनट इसे सुस्ता लेने दे.. तब तक तेरी कच्ची जवानी को देख लूँ.. तेरी फुददी में जो आग लगी है उसको शांत कर दूँ।

इतना कहकर चाचा ने राबिया को अपने साइड में खड़ा कर लिया। उसकी साड़ी को निकाल फेंका। अब वो सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। मगर चाचा के आगे वो भी कहाँ टिकने वाले थे। चाचा ने एक ही झटके में उसके सब कपड़ों को निकाल फेंका। गजब की बात ये थी कि अन्दर ग़ज़ल ने भी कुछ नहीं पहना हुआ था। उसका फिगर देख कर चाचा की आँखों में चमक आ गई।

ग़ज़ल 20 साल की देसी जवान लड़की थी और गाँव की लड़की का बदन वैसे ही कसा हुआ होता है। उसका गेहुँआ रंग.. भूरे बाल और 34 इंच की नुकीली तनी हुई चूचियां एकदम बाहर को निकली हुई थीं। उसकी चूचियों पर भूरे निप्पल जो वासना की वजह से एकदम तने हुए थे। एकदम दूध सा धवल सफेद पेट और नाभि के पास एक अलग ही कटाव था जो उसकी सुन्दरता को और बढ़ा रहा था। ग़ज़ल की फूली हुई फुददी, जिस पर हल्के सुनहरे बाल थे और पतली कमर के नीचे 32 इंच की मदमस्त गोल उठी हुई गांड जिसे देख कर अच्छे-अच्छे उसको चोदने के सपने देखते होंगे।

चाचा- वाह ग़ज़ल वाह.. क्या हुस्न पाया है.. तूने ऐसे खजाने को कहाँ छुपा के रखा था। अरे तू क्यों इस सफेद साड़ी में अपनी जवानी बर्बाद कर रही है। ऐसे हुस्न को तो खुद अल्लाह ने तराशा है. आओ आज तुम्हें इस हुस्न की असली कीमत देता हूँ।

ग़ज़ल सच में बहुत सुन्दर थी, राबिया भी उसके जिस्म को बस देखती रह गई।

चाचा ने ग़ज़ल को लेटा दिया और उसकी फुददी को चाटने लगा.. ग़ज़ल सिसकारने लगी- आह ससस्स चाचा उ आह.. चूसो एयेए अम्मी मर गई उफ़फ्फ़ ससस्स..

चाचा फुददी चाटने में माहिर खिलाड़ी थे। एक मिनट भी नहीं लगा और ग़ज़ल का बाँध टूट गया, उसकी फुददी का सारा रस चाचा चाट गए। अंत में थोड़ा सा रस जीभ पर लेकर वो राबिया को देखने लगे। राबिया भी तुरंत समझ गई और फ़ौरन वो चाचा के पास आई और उनकी जीभ को चूस कर सारा रस गटक गई।

चाचा- क्यों राबिया रानी.. कुँवारी देसी फुददी का रस कैसा लगा.. मज़ा आया या नहीं?

राबिया- सच में चाचा.. ये बहुत टेस्टी था अब आप इसको कुँवारी से सुहागन बना दो.. कर दो इसकी फुददी का मुहूरत!

ग़ज़ल- हाँ सरताज, अब आप ही मेरी डूबती नैया को किनारे लगा दो।

राबिया हंसती हुई बोली- क्या बात है ग़ज़ल डार्लिंग.. चाचा से सीधे सरताज!

ग़ज़ल- जिससे शादी हुई.. उसकी तो सूरत भी नहीं देखी, अब यही अपने लंड से मुझे सुहागन बनाएंगे, तो आज से यही मेरे सरताज हुए ना जी।

चाचा- अरे हाँ मेरी ग़ज़ल रानी, आज तुझे वो मज़ा दूँगा, जो तू इस नामर्द में तलाश कर रही थी। आ जा मेरी जान तुझे अब जन्नत की सैर कराने का टाइम आ गया है।

चाचा अब ग़ज़ल की जवानी को कुचलने और मसलने लगा था। वो उसकी खड़ी छातियों को चूस रहा था और साथ-साथ उसके मखमली होंठों का रस भी पी रहा था।

चाचा का लंड ग़ज़ल की फुददी पर रगड़ खा रहा था, जिससे उसको दोगुना मज़ा आ रहा था और राबिया और जावेद दोनों चुपचाप बस ये नजारा देख रहे थे।

ग़ज़ल- आह.. सरताज उह काटो मत आह.. नहीं.. उफ़फ्फ़ ऐसा मज़ा आह.. नहीं ओफ जोर से रगड़ो चाचा आह हाँ ऐसे ही आह..

चाचा तो मम्मे चूसने में मगन थे, वो कहाँ कुछ बोलने वाले थे और राबिया भी ये नजारा देख कर गर्म होने लगी थी। मगर जावेद चूंकि 2 बार हल्का हो चुका था सो ये नजारा उसको उत्तेजित तो कर रहा था, मगर उसका लंड सोया हुआ था। वो वाकयी में नामर्द ही था, जो ऐसे नजारे को देख कर भी लंड खड़ा नहीं कर पा रहा था।

चाचा अब ग़ज़ल को चूसते हुए नीचे उसकी फुददी पर पहुँच गए और अपनी जीभ की नोक से उसको कुरेदने लगे।

ग़ज़ल- आह.. सस्स सरताज आह.. ऐसे ही ससस्स इतना मज़ा आ रहा है आह.. मुझे चोदोगे तो आह.. पता नहीं आह उ सस्स कितना मज़ा आएगा उफ़फ्फ़ नहीं चाचा आह.. बस अब और मत आह.. तड़पाओ आह.. घुसा दो अपना मूसल ओफ मेरी फुददी में आह..

ग़ज़ल की फुददी अब पानी छोड़ने लगी थी। चाचा को पता था कि यही वो समय है जब इसकी सील तोड़ी जानी चाहिए। ये कामवासना में जल रही है।

बस फिर क्या था चाचा उठे और ग़ज़ल के सीने पर बैठ गए- ले ग़ज़ल रानी, लंड को चूस कर गीला कर दे ताकि तेरी फुददी में आसानी से घुस जाए और तुझे कम तकलीफ़ हो।

ग़ज़ल तो जैसे पागल हो गई.. उसने झट से लंड को चूसना शुरू कर दिया। वो उसे ऐसे चूस रही थी, जैसे ना जाने आज के बाद कभी लंड मिलेगा ही नहीं। उसने अपनी लार से लंड को तार कर दिया था।

चाचा- बस ग़ज़ल बस.. अब समय आ गया है तेरी फुददी को खोलने का.. तुझे थोड़ी पीड़ा होगी, सह लेना उसके बाद तो मज़े ही मज़े हैं।

ग़ज़ल- आह.. चाचा आज तो जान भी चली जाए तो कोई बात नहीं.. बस ये आग बुझा दो.. कर दो मेरी फुददी को अपने पानी से ठंडा आह.. अब बर्दाश्त नहीं होता आह.. जल्दी से पूरा घुसा दो चाचा!

चाचा ने ग़ज़ल के पैरों को मोड़ा और उसकी कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया, जिससे उसकी फुददी ऊपर को हो गई। अब बस चाचा को लंड डालने की देर थी।

चाचा- राबिया रानी, मैं तैयार हूँ.. तू भी ग़ज़ल को ज़रा अपनी फुददी का रस चखा दे।

राबिया समझ गई कि जब चाचा का ये बम्बू इसकी फुददी में जाएगा तो इसकी चीख निकाल देगा और आस-पास के घरों में पता लग जाएगा, इसलिए चाचा ने उसको इसका मुँह बंद करने का इशारा दिया है।

राबिया अब ग़ज़ल के मुँह पर फुददी टिका कर बैठ गई.. जिससे उसके होंठ दब गए। अब उसकी आवाज़ बाहर आना मुश्किल था।

ग़ज़ल जीभ से राबिया की फुददी चाटने की कोशिश कर रही थी, मगर राबिया ने दबाव ज़्यादा दिया हुआ था, जिससे ग़ज़ल को परेशानी हो रही थी। मगर उसको नहीं पता था कि आने वाला पल उसके लिए कैसा होगा।

चाचा ने एक हाथ से लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से फुददी की पुत्तियों को को खोल कर अपना सुपारा उसमें फँसा दिया। अब चाचा अपने हाथ से लंड को दबा कर अन्दर घुसेड़ने लगे।

ग़ज़ल को बहुत दर्द हुआ.. मगर उसने दाँत भींच लिए। अब चाचा ने सुपारा फँसा कर दोनों हाथों से ग़ज़ल की कमर को कस के पकड़ लिया और एक तेज धक्का दे मारा। ग़ज़ल की फुददी इतनी टाइट थी कि आधा लंड बड़ी मुश्किल से अन्दर गया। चाचा को लगा कि शायद लंड की चमड़ी छिल गई है मगर चाचा ने फ़ौरन लंड पीछे किया और एक जोरदार झटका मारा। उनका पूरा लंड एक ही बार में फुददी को चीरता हुआ अन्दर चला गया।

ग़ज़ल इतनी जोर से चीखी.. वो तो राबिया ने उसके होंठों को दबा रखा था। फिर भी उसकी चीख बाहर सुनाई दे गई। उसकी आँखों से तार-तार आँसू बहने लगे।

 
चाचा को पता था ऐसे टाइम क्या करना है। वो बस लंड को बिना हिलाए.. अन्दर फिट करके ग़ज़ल के मम्मे सहलाने लगे।

राबिया को लगा कहीं इसका दम ना निकल जाए.. इसलिए वो खड़ी हो गई और ग़ज़ल के पास बैठ कर उसके आँसू पोंछने लगी।

ग़ज़ल- आह क्क्क चाचा आपका आह.. लंड तो घोड़े जैसा है ओह हय मेरी तो सांस ही अटक गई आह..

चाचा- पहली बार में दर्द होता है ग़ज़ल रानी, उसके बाद मज़े आएँगे.. अब तेरा दर्द कुछ कम हुआ हो तो बता, मैं लंड आगे-पीछे करूँ?

जावेद- अरे पूछते क्या हो चाचा.. करो ना, तभी तो इसकी तकलीफ़ कम होगी।

चाचा ने धीमे से लंड को बाहर निकाला और फिर धीमे से ही अन्दर पेल दिया।

ग़ज़ल की फुददी सच में इतनी कसी हुई थी कि चाचा को भी दर्द हुआ। जब लंड ने हरकत की ग़ज़ल की तो जान हलक में अटक गई थी।

ग़ज़ल- आइईइ चाचा आह.. ना रूको ओफफ्फ़ मेरी जान न निकल जाए आह..

चाचा- अरे ग़ज़ल रानी ऐसे तो ये दर्द कभी कम ना होगा, एक बार फुददी को थोड़ा ढीला होने दे, बस थोड़ा सा सबर कर ले।

ग़ज़ल- आह.. ठीक है आह.. आप करो आह.. मैं सह लूँगी आह.. आपका बहुत मोटा है आह..

चाचा ने अपने होंठ ग़ज़ल के होंठ से मिला दिए और उसको मस्ती से चूसने लगा। इधर कमर को भी स्पीड से आगे-पीछे करने लगा। अब ग़ज़ल को दर्द और अधिक होने लगा था मगर वो चीख नहीं पाई। बस उसकी आँखों से आँसू आने लगे।

करीब 5 मिनट तक चाचा ट्रेन की तरह दे खपाखप.. दे खपाखप.. चुदाई करते रहे और ग़ज़ल के होंठों को चूसते रहे। अब ग़ज़ल का दर्द कम हो गया था और उसकी फुददी में कंपन शुरू हो गया। उसे अब भी हल्का सा दर्द था मगर मज़ा भी बहुत आ रहा था। वो भी अब चाचा की पीठ पे हाथ घुमा कर इशारा देने लगी थी कि उसको मज़ा आने लगा है।

चाचा ने उसके होंठ से मुँह हटाया और चूची चूसने लगे।

ग़ज़ल- आह.. आइ चाचा आह.. मेरे सरताज आह.. चोदो आह.. अब मज़ा आह.. आ रहा है.. ओफ जोर से करो आह.. मैं गई उफ़फ्फ़ सस्स चाचा आह मेरा पानी आआ एयेए निकल रहा है.. उफ़फ्फ़ जोर से जोर से आह.. करो ईईई.

ग़ज़ल का बाँध टूट गया था मगर चाचा का स्टेमिना तो घोड़े जैसा था, वो कहाँ अभी हारने वाले थे। वो तो बस दे दनादन उसको चोदे जा रहे थे। ग़ज़ल की फुददी का पानी निकल जाने के बाद वो निढाल हो गई और उसने शरीर को ढीला छोड़ दिया। ये देख कर चाचा उसके मम्मे चूसने लगे.. उसके निप्पल को हल्का सा दांतों में दबा कर काटने लगे।

फ्रेंड्स, यह नज़ारा देख कर राबिया बहुत उत्तेजित हो गई थी, उसकी फुददी भी जलने लगी।

राबिया- अबे जावेद कुत्ते.. ऐसे क्या खड़ा है भोसड़ी के आह.. मेरी फुददी को चाट.. देख कैसे रस से भरी हुई है.. आजा मेरे ढीले बलमा चूस ले।

जावेद तो जैसे इसी मौके का इन्तजार कर रहा था। वो झट से राबिया के पैरों के पास लेट गया और कुत्ते की तरह फुददी को चाटने लगा।

चाचा की ज़बरदस्त चुसाई और ठुकाई से ग़ज़ल फिर उत्तेजित हो गई और कमर को हिला कर चाचा का साथ देने लगी।

ग़ज़ल- आह.. आ चाचा चोदो आह.. फाड़ दो मेरी फुददी को ओफ बहुत दिनों तक तड़फी हूँ आह.. आज पूरी कसर एयेए आह.. निकाल दो।

चाचा- ले साली आह.. तुझे देख कर उहह उहह कई बार लंड खड़ा होता था उहह उहह मगर साली मौका नहीं मिला आह.. ले आज तेरी फुददी को चकनाचूर कर दूँगा ले..

दस मिनट तक ये घमासान चुदाई चलती रही। अब ग़ज़ल की कुँवारी फुददी की गर्मी चाचा के लंड को पिघलाने लगी थी। वो चरम पे पहुँच गए और साथ में ग़ज़ल का फव्वारा भी फूट गया। दोनों के पानी का मिलन हो गया.. चाचा निढाल होकर ग़ज़ल पर ही लेट गए, उनका लंड अभी भी फुददी में था।

इधर जावेद ने अपना कमाल दिखाया और राबिया की फुददी को चाट-चाट कर झड़ने पर मजबूर कर दिया।

अब तूफान थम गया था चारों तरफ़ शान्ति हो गई थी।

 
फ्रेंड्स मज़ा आ रहा है ना कहानी में .
 
चाचा का भारी भरकम शरीर अब ग़ज़ल को बोझ लगने लगा था। उसने चाचा को हटने के लिए कहा और चाचा जब उठा फच्च की आवाज़ के साथ लंड फुददी से बाहर निकल आया और साथ में खून और दोनों का मिला-जुला रस भी बाहर आ गया। नीचे बिछी चादर पे खून का धब्बा बन गया.. यह निशानी थी कि ग़ज़ल का कौमार्य आज टूट चुका था।

ग़ज़ल- आह.. सरताज आराम से निकालो.. दर्द होता है।

चाचा- मेरी रानी जितना दर्द होना था हो गया.. अब आज के बाद बस तू मज़े ही लेना।

ग़ज़ल कुछ ना बोली, बस मुस्कुरा कर चाचा को देखने लगी। इधर राबिया भी संतुष्ट हो गई थी, वो जावेद के सर पे बड़े प्यार से हाथ घुमा रही थी।

राबिया- आह.. जावेद आह.. भले ही तेरे लंड में जान नहीं है, उफ़फ्फ़ मगर तू चूसना अच्छे से जानता है। काश तू भी चाचा की तरह मर्द होता तो बेचारी ग़ज़ल को तड़पना ना पड़ता।

चाचा- अरे ये अगर मर्द होता, तो कहाँ मेरे से चुदती.. और ये कुँवारी फुददी मेरे को कहाँ मिलती? अच्छा है ये कुत्ता ऐसा निकला।

जावेद- चाचा आप भी ना मेरा मज़ाक बना रहे हो। मैं पहले ऐसा नहीं था। अभी 2 साल से ही ऐसा हुआ हूँ, पता है मैं दिन में 5 बार मुठ मारता था। बस इस गंदी आदत ने मुझे ऐसा बना दिया।

ग़ज़ल- देवर जी, मेरे नसीब में तो शौहर का सुख नहीं था मगर आपकी शादी होगी तो उस बेचारी का क्या होगा उसको तो शौहर मिलकर भी तड़प होगी।

चाचा- अरे ऐसे कैसे तड़पने देंगे उसको.. मैं कब काम आऊंगा..? क्यों जावेद चुदवाएगा ना अपनी बीवी को मुझसे?

जावेद- हाँ चाचा ज़रूर आप ही तो मुझे अब्बू बनाओगे वरना लोगों को तो मेरे बारे में पता लग जाएगा।

ग़ज़ल- चाचा अपने मेरी फुददी को अपने पानी से तृप्ति दी है.. मगर मैं एक विधवा हूँ.. कहीं बच्चा हो गया तो क्या होगा?

चाचा- अरे पगली जिसे बच्चा देना होता है.. मैं सिर्फ उसी को देता हूँ। तू चिंता ना कर दवा खा लेने से कुछ नहीं होगा, मैं तेरे लिए दवा ले आऊंगा फिर तू कहाँ से अम्मी बनेगी। फिर तो बस तू अपनी जवानी के मज़े ले।

ग़ज़ल जब बैठने लगी तो उसको फुददी में थोड़ा दर्द हुआ और खून सूख कर उसकी फुददी पर जम गया।

ग़ज़ल- आह.. चाचा ये अपने क्या कर दिया, मेरी फुददी को फाड़ दिया। हाई अल्लाह कितना खून निकला है आह.. दर्द भी हो रहा है।

चाचा- अरे कुछ नहीं हुआ पगली.. ये तो शगुन का लाल रंग है। एक काम कर नीचे जाकर गर्म पानी से फुददी को अच्छे से साफ कर ले, आराम मिल जाएगा। उसके बाद दोबारा भी तेरी फुददी की ठुकाई करनी है.. फिर उसके बाद मेरी पसंदीदा तेरी गांड भी मारनी है।

राबिया- आप आदमी हो या जल्लाद.. कितना चोदोगे उसे? बेचारी का हाल से बेहाल कर दिया, अब इसकी गांड भी मारोगे तो ये चल भी नहीं पाएगी।

चाचा- मेरी रानी इसकी गांड तो मैं कभी भी मार लूँगा। मैं तेरी गांड की बात कर रहा हूँ। आज उसका मुहूरत करना है।

राबिया- हय मैं समझी आज मैं बच गई.. मगर आप तो मेरी गांड मारकर ही दम लोगे।

चाचा- ऐसे कैसे जाने दूँगा मेरी रानी.. अब चलो मैं ग़ज़ल को नीचे ले जाता हूँ तुम दोनों ये खराब चादर वो सामने जो अनाज का कमरा है.. वहां छिपा दो और दूसरी चादर ले आओ। तब तक मैं ग़ज़ल रानी की फुददी को गर्म पानी से आराम देकर आता हूँ।

ग़ज़ल- चाचा, नीचे तो अम्मी जी होंगी.. हम ऐसे कैसे जाएँगे?

चाचा ने उसको बता दिया कि आज कोई उठने वाला नहीं, फिर वो ग़ज़ल को पकड़कर आराम से ले गया। इधर राबिया और जावेद अपने काम में लग गए थे।

फ्रेंड्स मज़ा आ रहा है ना.. बस सेक्स ही सेक्स, आपको चाहिए भी यही था। चलो यहाँ थोड़ा ब्रेक लग गया है, मगर आपकी दोस्त आपके मज़े को बनाए रखेगी तो चलो मेरे साथ दूसरा सीन दिखाता हूँ।

रज़िया और याक़ूब अपने अपने बिस्तर पर सो रहे थे मगर याक़ूब को नींद नहीं आ रही थी। वो इधर-उधर करवट बदल रहा था।

रज़िया- क्या हुआ मेरा सोना.. तुझे नींद नहीं आ रही क्या?

याक़ूब- हाँ आपा.. कितनी कोशिश कर ली, नींद आ ही नहीं रही है, बदन में जगह-जगह खुजली सी हो रही है, पता नहीं क्यों?

रज़िया- ऐसा क्या हो गया तुझे.. इधर आ मेरे पास.. मैं खुजा देती हूँ।

याक़ूब उठकर रज़िया के बिस्तर पर चला गया और रज़िया ने उसकी टी-शर्ट निकाल दी। अब वो सिर्फ़ एक शॉर्ट कैप्री में था और हाँ मैं आपको बताना भूल गई कि रज़िया ने भी उठ कर अपने कपड़े बदल लिए थे। वो रात को एक टी-शर्ट और कैप्री पहन कर सोती थी.. अंडरगार्मेंट्स उसको चुभते थे मगर पीरियड्स के चलते उसने सिर्फ़ पेंटी पहनी हुई थी.. ब्रा निकाल दी थी।

रज़िया बड़े प्यार से याक़ूब की कमर को सहला रही थी मगर याक़ूब को कभी सर में खुजली होती कभी पीठ पे.. तो कभी जाँघ पर, वो परेशान हो गया था।

रज़िया- क्या हो गया तुझे.. आज ऐसे तो तू खुजा-खुजा कर जिस्म से खून निकाल लेगा.. रुक मैं तेरा पक्का इलाज करती हूँ।

इतना कहकर रज़िया उठी और अपनी मॉम के कमरे में चली गई। वहां एक सरसों के तेल की शीशी रखी थी, वो उसको उठा लाई।

रज़िया जब आई.. याक़ूब वैसे ही खुजा रहा था। उसको जाँघों के बीच में जहाँ अक्सर लड़कों को अंडरवियर की रगड़ लग जाती है और खुजली होती है.. वही याक़ूब को भी हो रही थी। वो जोर-जोर से वहां खुजा रहा था।

रज़िया- अरे रुक पागल.. ऐसे कोई करता है क्या.. इससे चमड़ी फट जाएगी देख में सरसों का तेल लाई हूँ। अभी तेरे बदन पर लगा दूँगी तो सब सही हो जाएगा।

याक़ूब- ओफ आपा.. बहुत जलन हो रही है, पता नहीं आज इतनी खुजली कैसे हो गई।

रज़िया- अरे कुछ नहीं मेरे सोना.. अभी सब ठीक कर दूँगी। तू एक काम कर.. अपनी ये कैप्री निकाल दे और कोई पतला कपड़ा लपेट ले।

याक़ूब- कपड़ा क्यों आपा.. मैंने अंडरवियर पहना हुआ है।

रज़िया- ले भाई तभी ये खुजली हो रही है। अरे मेरे सोना रात को सोते समय अंडरवियर मत पहना कर, पसीने से ये खुजली होती है और इससे तेरी नुन्नी भी घुटी हुई रहती है, उसको भी थोड़ा आराम दिया कर, उसे ऐसे दबा के क्यों रखता है?

याक़ूब- आपा आप बहुत गंदी हो, कुछ भी बोल देती हो, जाओ मैं आपसे बात नहीं करता।

रज़िया- अब ऐसा क्या बोल दिया मैंने? चल अब नखरे मत कर, निकाल कैप्री.. नहीं तो सारी रात परेशान होता रहेगा।

याक़ूब ने कैप्री निकाल दी और रज़िया उसकी कमर पर तेल लगाने लगी। फिर उसके पैरों की अच्छे से मसाज की। जब रज़िया की नज़र उसकी जाँघ के काट पे गई, जहाँ वो खुजा रहा था, वहां दाने-दाने से हो रहे थे और वो जगह एकदम लाल हो गई थी।

रज़िया- ओह जिसका डर था, वही हुआ। देख कैसे दाने निकल आए हैं। पागल ऐसे तो यहाँ दाद हो जाएगी, यहीं ऐसा है तो और अन्दर पता नहीं क्या हाल होगा? चल ये भी निकाल.. मुझे देखने दे कि अन्दर खुजा-खुजा कर तूने क्या हाल किया हुआ है।

याक़ूब- नहीं आपा, ऐसे ही तेल लगा दो, मुझे शर्म आती है। मैं आपके सामने पूरा नंगा नहीं हो सकता।

रज़िया- ओये होये.. बड़ा आया नंगा होने में शर्म वाला, कल तक तो तुझे मैं ही नहलाती थी। चल निकालता है या मैं खींच कर निकाल दूँ?

याक़ूब डर गया क्योंकि रज़िया अगर गुस्सा हो गईं तो फिर वो सब अच्छा-बुरा भूल जाती हैं इसलिए उसने चुपचाप चड्डी निकाल दी।

याक़ूब की लुल्ली सोई हुई कोई 3″ की होगी, जिसे देख कर रज़िया की हँसी निकल गई।

रज़िया- हा हा हा… क्या इस मूँगफली को मुझसे छुपा रहा था हा हा हा..

याक़ूब- जाओ मैं आपसे बात नहीं करता। मुझे पता था आप मेरा मज़ाक बनाओगी और एक बात सुनो.. मेरे सब फ्रेंड्स में मेरी लुल्ली सबसे बड़ी है ओके!

रज़िया- अच्छा तुझे कैसे पता? क्या तूने सबकी खोलकर देखी है?

याक़ूब- हाँ अक्सर स्कूल से आते टाइम हम वो बड़ा नाला है ना.. वहीं पेशाब करते हैं, तब से पता है। मेरे सब फ्रेंड भी यही कहते हैं कि तेरी सबसे बड़ी है और मोटी भी है।

रज़िया- अच्छा ये बात है.. मगर मुझे तो ऐसी कोई बात नहीं नज़र आ रही।

याक़ूब- नहीं आपा ये कभी-कभी बड़ी होती है.. अभी तो छोटी है।

रज़िया समझ तो गई थी मगर वो याक़ूब के मज़े ले रही थी।

रज़िया- अच्छा कैसे बड़ी होती है.. ज़रा मुझे भी बताओ मेरे भाई?

फ्रेंड्स याक़ूब सीधा सा लड़का था, उसके दोस्त भी ठीक से थे, इसलिए ये सेक्स की बातों से दूर था, इसका तो बस पढ़ाई में ध्यान रहता था। अब बेचारा इसको क्या पता था कि इसकी बहन एक पक्की रांड़ है जो तरह-तरह के लंड देख और खा चुकी है।

याक़ूब- पता नहीं अपने आप ही होती है। एक तो सुबह जब सोकर उठता हूँ, तब और कभी जब जोर से सूसू आती है जब।

रज़िया- अच्छा ये बात है.. चल इसको अभी बड़ी करती हूँ, देख तू मेरा जादू।

रज़िया ने ढेर सारा तेल लिया और उसकी जांघ पर मालिश करने लगी, साथ ही साथ उसकी लुल्ली पर भी हाथ घुमाने लगी।

अब फ्रेंड्स किशोर हो या जवान.. लंड सबका खड़ा होता है, ख़ासकर जब कोई उसे इतने प्यार से सहलाए।

याक़ूब की लुल्ली भी अकड़ने लगी और जल्दी ही वो एक लंड बन गई.. पूरे 5.5″ लंबी और मोटी भी इतनी कि एक नॉर्मल आदमी के लंड जितनी, रज़िया तो उसको देखती रह गई।

रज़िया- ओह माय गॉड.. याक़ूब ये तो सच में बहुत बड़ी है यार.. फैजान के लंड को भी ये मात दे दे ऐसी है!

याक़ूब- मैंने कहा था ना ये बड़ी होगी और ये फैजान कौन है आपा?

रज़िया एकदम से सकपका गई और बोली- कोई नहीं.. तू अब सीधा लेट जा, मैं तुझे तेल लगा देती हूँ फिर तुझे अच्छी नींद आएगी।

रज़िया अब बड़े प्यार से याक़ूब की मालिश करने लगी थी। वो उसके लंड को भी अच्छी तरह तेल लगा रही थी, लंड को आगे-पीछे कर रही थी। उसने सुपारे की चमड़ी हटा कर उसको बाहर निकाला जो एकदम गुलाबी था। उसे देख कर रज़िया के मन में विचार आया कि ये अभी इतना बड़ा है.. जब पूरा जवान होगा तब तो इसका लंड घोड़े जैसा हो जाएगा। पता नहीं किस लड़की के नसीब में ऐसा तगड़ा लंड लिखा होगा।

याक़ूब को अब मज़ा आने लगा था, ये उसका पहला एक्सपीरियेन्स था जब कोई उसके लंड को ऐसे सहला रहा था।

रज़िया को लगा कि अब ज़्यादा देर वो लंड को ऐसे सहलाती रही तो याक़ूब का पानी निकल जाएगा, बस यही सोचकर उसने अपना हाथ लंड से हटाया और उसकी पूरी टांगों पर तेल लगाने लगी।

याक़ूब- आपा क्या हुआ.. और करो ना.. मज़ा आ रहा था.. जब आप मेरी लुल्ली की मालिश कर रही थीं।

रज़िया- अच्छा.. मेरे सोना को लुल्ली की मालिश करवाने में मज़ा आ रहा था?

याक़ूब- हाँ आपा.. बहुत मज़ा आ रहा था।

रज़िया मुस्कुराने लगी और अपने मन में बोली कि मेरा भाई अपनी पहली मुठ मुझसे मरवाना चाहता है।

याक़ूब- आप हंस क्यों रही हो.. करो ना..!

रज़िया- बस बहुत हो गया अब सो जा.. सुबह स्कूल नहीं जाना क्या तुझे.. और वैसे भी अब मेरे हाथ दुखने लगे हैं।

रज़िया ने थोड़े गुस्से में ये कहा तो याक़ूब डर गया और चुपचाप कैप्री पहन कर सो गया क्योंकि अंडरवियर को पहनने के लिए रज़िया ने उसको मना किया था।

रज़िया को पता था उसने याक़ूब के अन्दर के मर्द को जगा दिया है, अब उसको सुकून नहीं मिलेगा मगर वो अपने भाई के साथ ये सब नहीं करना चाहती थी.. इसलिए उसको सुला देना ठीक समझा।

रज़िया अब याक़ूब के बिस्तर पर बैठ गई और उसके सर पे हाथ घुमाने लगी। ये याक़ूब की बचपन की आदत है.. ऐसा करने से उसको बहुत जल्दी नींद आ जाती है और एक बार वो सो जाए तो ढोल नगाड़े भी बजा दो.. वो उठने वाला नहीं है। फिर तो उसको तो हिला-हिला कर उठाना पड़ता है।

अरे क्या यार.. हर जगह बस सेक्स ही सेक्स नज़र आता है क्या.. अरे रज़िया बिगड़ी हुई है, मगर इतनी भी सेक्स की भूखी नहीं, जो भाई के साथ भी चुदाई करे। ये उसको बस खुजली से बचाने के लिए उसने तेल लगाया था। आप भी क्या-क्या सोच लेते हो.. चलो अब यहाँ से चलते हैं। रज़िया उसको सुला देगी और टेंशन मत लो.. वो खुद भी सो जाएगी। हम वापस गाँव का हाल देखते हैं।

 
चाचा ने गर्म पानी से ग़ज़ल की फुददी को अच्छे से साफ कर दिया था और साथ में अपने लंड को भी धो लिया।

चाचा- क्यों ग़ज़ल.. तुझे मज़ा आया या नहीं?

ग़ज़ल- ऐसा मज़ा तो जिंदगी में कभी नहीं मिला चाचा.. अब बस ऐसे ही मुझे चोदते रहना और मज़े देते रहना।

चाचा- अरे तू चिंता काहे करती है, ये लंड हमेशा तेरे लिए खड़ा रहेगा। अब चल तुझे मेरी बहू की गांड मारकर दिखाता हूँ, उसके बाद तेरी फुददी को फिर से चोदूंगा।

ग़ज़ल- ठीक है मेरे चाचा सरताज.. आप तो महान हो.. बस ऐसे ही चोदते रहना और मुझ जैसी दुखियारियों की फुददी के दु:ख को सुख में बदलते रहना, ये बड़ा पुण्य का काम है।

चाचा ने रसोई से एक कटोरी में देसी घी ले लिया था और वो दोनों वापस ऊपर चले गए। तब तक राबिया और जावेद ने सब ठीक कर दिया था.. वो दोनों इनके आने से पहले क्या बातें कर रहे थे.. वो आप सब भी जान लो।

जावेद- भाभी कल क्या हुआ था.. आप चाचा से रात को कैसे चुदीं?

राबिया ने रात की सारी घटना जावेद को बताई फिर जावेद से भी पूछा कि वो ऐसा क्यों हो गया.. उसकी लाइफ बर्बाद हो रही है। किसी अच्छे हकीम को उसे दिखाना चाहिए।

जावेद- भाभी मैं पहले अच्छा ख़ासा मर्द था मगर ये गंदी आदत की वजह से मैं ऐसा हो गया। अब कोई हकीम इसे ठीक नहीं कर सकता है।

राबिया- पागल है तू.. आज साइन्स ने बहुत तरक्की कर ली है, सब ठीक हो जाएगा, बस तू एक बार शहर जाकर दिखा आ।

जावेद- सच्ची.. मैं अच्छा हो जाऊंगा! तब तो मैं जरूर शहर जाऊंगा। बस एक बार ठीक हो जाऊं.. फिर सबसे पहले आपको चोदूंगा।

राबिया- हा हा हा कमीना.. मैं ही क्यों.. गाँव में और भी लड़कियां होंगी और ग़ज़ल भी तो है.. तू इसे ही चोद लेना।

जावेद- नहीं भाभी आपकी सुन्दरता ने मुझे अपना दीवाना बना लिया है, बस आपको एक बार चाचा की तरह जमकर चोदना चाहता हूँ। उसके बाद आप चाहे मेरी जान भी मांग लोगी तो मैं हंसते-हंसते दे दूँगा।

राबिया- ये बात है.. तो चल तू जल्दी शहर आ जा, मैं किसी अच्छे हकीम से तेरा इलाज करवाऊंगी.. उसके बाद तू मुझे जमकर चोद लेना, मगर तुझे भी मेरा एक काम करना होगा.. बोल करेगा ना, इन्कार तो नहीं करेगा?

जावेद- आप बोलकर तो देखो.. अभी कर दूँगा, मैं ठीक बाद में होता रहूँगा।

राबिया- नहीं अभी नहीं.. उसमें अभी टाइम है, तू जल्दी ठीक हो जा बस।

चाचा- अरे क्या बातें हो रही हैं.. ये साला कमीना कहीं फिर से तो तेरी चुदाई का नहीं बोल रहा ना?

जावेद- तो क्या हुआ.. बस अब मेरा टाइम हो गया, ये कभी भी खड़ा हो जाएगा फिर ज़रूर चोदूंगा भाभी को।

चाचा- जो करना है बेटा.. बाद में करना। अब तो मैं राबिया रानी की गांड मारूँगा। देख ये देसी घी लाया हूँ इसे गांड में लगाकर इसकी ठुकाई करूँगा। तब तक तू मेरी ग़ज़ल रानी की फुददी चाट.. इसे थोड़ा मजा दे.. फिर इसको भी मेरे से चुदना है।

चाचा की बात सुनकर राबिया हंसने लगी और जावेद के लंड को पकड़ लिया।

राबिया- हा हा हा चाचा.. आप क्यों इस बेचारे को फुददी चाटने की ड्यूटी पे लगा रहे हो। एक काम करो, मुझे जाने दो इसकी ही गांड मार लो, क्या पता आपके लंड का पॉवर इसमें भी आ जाए हा हा हा.. फिर ये कुछ कर सके।

इस बात पे ग़ज़ल भी हंसने लगी मगर जावेद चिड़चिड़ा हो गया।

जावेद- चुप करो.. आप कुछ भी बोल देती हो.. चाचा आप जोर से लंड घुसेड़ना.. ताकि ये हंसना बंद हो जाए और भाभी के आँसू निकल आएं.. फिर मैं हँसूगा।

चाचा- अरे नहीं जावेद बेटा.. राबिया मेरी बहू है, इसको रूलाऊंगा तो अल्लाह नाराज़ होंगे। इसको तो बड़े प्यार से चोदूंगा जैसे ग़ज़ल की सील तोड़ी है.. वैसे ही इसकी गांड बजाऊंगा।

जावेद- मगर ग़ज़ल को तो बहुत दर्द हुआ.. वो रोई भी बहुत थी?

चाचा- तू चुप कर.. अब इतना तो दर्द सहना ही पड़ता है। फिर पूरी जिंदगी मज़ा भी तो आता है।

ग़ज़ल- हाँ चाचा.. बाद में मज़ा भी बहुत आता है, इस बात को ये क्या जाने?

राबिया- अब बातें ही करोगे चाचा या गांड भी मारोगे.. मेरी तो सोच-सोच कर ही फट रही है.. इससे अच्छा आप ही फाड़ दो।

चाचा ने जावेद को कहा- अब कोई कुछ ना कहना.. बस तू ग़ज़ल को आराम दे.. मैं राबिया की गांड की ठुकाई करता हूँ।

राबिया घोड़ी बन गई और चाचा उसके पीछे बैठ गए। उन्होंने घी में उंगली डुबोई और राबिया की गांड में घुसाने लगे।

राबिया- आह.. चाचा आराम से करो..

चाचा कुछ नहीं बोले और बस गांड को उंगली से चोदने लगे वो बार-बार उंगली पे घी लगाते, फिर गांड में घुसा देते। ऐसे उन्होंने राबिया की गांड को घी से तर कर दिया। फिर अपने लंड पे अच्छे से घी मसला और सुपारे को गांड पर सैट करके हल्के से दबाया मगर सुपारा फिसल कर ऊपर निकल गया। फिर उन्होंने उंगली से गांड को खोला और सुपारे को अन्दर फँसा दिया।

चाचा- हाथ मजबूत कर ले मेरी रानी.. बस अब तेरी गांड मारना शुरू कर रहा हूँ।

राबिया- चाचा आराम से करना.. मुझे बहुत डर लग रहा है।

चाचा- अरे डर मत.. तेरी गांड तो खुली हुई है.. बस तुझे शुरुआत में थोड़ा सा दर्द होगा।

चाचा ने हाथ के दबाव से लंड को अन्दर किया, फिर धीमे-धीमे करके आधा लंड गांड में घुसा दिया।

राबिया- आह आह आह चाचा बहुत दर्द हो रहा है, उफ़फ्फ़… जलन होने लगी है एयेए और मत डालना आह.. पहले इतने से ही करो।

 
चाचा समझ गया कि राबिया की गांड बहुत टाइट है और कुछ डर की वजह से राबिया ने कर रखी है। वो अब आधे लंड को ही अन्दर-बाहर करने लगे।

राबिया कराह रही थी मगर घी के कारण उसको दर्द कम हो रहा था। फिर चाचा बड़े आराम से लंड को हिला रहा था।

करीब 5 मिनट तक चाचा धीमे-धीमे गांड को चोदता रहा। अब राबिया का दर्द भी कम हो गया था तो चाचा ने थोड़ी स्पीड बढ़ा दी। अब हर धक्के के साथ चाचा लंड को थोड़ा आगे कर देता और इसी तरह 10 मिनट की चुदाई में पूरा लंड गांड में समा गया और राबिया को बस मामूली दर्द हुआ। उसको तो जब पता चला जब चाचा की गोटियाँ उसकी जाँघ से टकराईं कि चाचा ने पूरा लंड गांड में घुसा दिया।

राबिया- आह.. चाचा पूरा चला गया आह.. पता भी नहीं चला आह.. आप बहुत अच्छे हो चाचा आह.. चोदो अब आह.. जोर से करो आह.. अब मज़ा आने लगा है।

अब चाचा ने राबिया की कमर को कस कर पकड़ लिया और फुददी में उंगली करते हुए उसकी गांड में तेज़ी से लंड पेलने लगे।

राबिया अब उत्तेजित हो गई थी, उसकी फुददी भी गर्म हो गई थी। उसने चाचा से कहा- थोड़ी देर मेरी फुददी में लंड डाल दो.. बड़ी आग लगी हुई है।

इधर जावेद की जीभ भी अपना कमाल कर गई थी, ग़ज़ल भी उत्तेजित होकर चुदने को बेताब हो चली थी।

ग़ज़ल- आह.. सस्स चाचा आह.. उफ़फ्फ़ मेरी भी फुददी जल रही है आह.. मुझे भी आह.. ससस्स लंड चाहिए आह..

चाचा- जावेद तेरा खड़ा हुआ कि नहीं साले.. कितना टाइम हो गया अब तो कुछ कर.. ग़ज़ल की फुददी का स्वाद तू भी ले ले भोसड़ी के।

जावेद- हाँ चाचा, अब तनाव आने लगा है मगर राबिया को चोदूंगा.. ग़ज़ल को आप ही ठंडा करो।

राबिया- हय मेरा प्यारा जावेद, ओफ तुझसे मेरी आग कहाँ ठंडी होगी आह.. ग़ज़ल कुँवारी है आह.. आज हे उसकी सील टूटी है, उसको चोद ले.. आह.. तुझे ज़्यादा मज़ा आएगा।

ग़ज़ल- हाँ देवर जी, आज चोद ही दो मुझे… पहले तो आप नहीं चोद पाए..

चाचा ने लंड राबिया की फुददी में पेल दिया और इधर ग़ज़ल भी ठीक राबिया की बगल में आकर घोड़ी बन गई। पीछे से जावेद ने उसकी गर्म फुददी में लंड घुसा दिया।

अब तूफान शुरू हो गया था। फच्च फच्च आह.. आइ आह.. की आवाजें गूंजने लगी थीं। मगर जावेद इस तूफान को झेल नहीं पाया, ग़ज़ल की कुँवारी फुददी की गर्मी उसको पागल बना रही थी। वो जोर-जोर से मोन करने लगा।

जावेद- आह आह ग़ज़ल तेरी फुददी बहुत मस्त है आह.. मेरा माल निकलने वाला है ओफ ले आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उहह ले मेरी भाभी आह.. ले अपने देवर का आह.. पानी भी आह.. फुददी को आह मैं गया..

जावेद आगे कुछ बोलता तभी राबिया जोर से बोली- नहीं जावेद आह… मत निकालो आह… मुझे तेरा लंड आह… चूसना है आह… मेरे मुँह में आह… अपना पानी निकाल देना।

जावेद ने राबिया की सेक्सी फ़रियाद सुनते ही झट से लंड बाहर निकाल लिया और बिजली की तेज़ी से सामने जाकर राबिया के मुँह में लंड घुसा दिया।

इधर राबिया भी भूखी कुतिया थी… उसने फट से लंड को पूरा मुँह में भर लिया और चूसने लगी।

उसी पल जावेद के लंड में से वीर्य बाहर आ गया… जिसे वो पूरा गटक गई।

जावेद- आह आह… भाभी, ओफ आह… मज़ा आ गया… चलो अब पूरा लंड चाट लो।

इधर बेचारी ग़ज़ल अधूरी रह गई थी… वो सिसकती हुई चाचा से बोली कि मेरी फुददी का अब क्या होगा… इसकी आग कैसे मिटेगी।

चाचा तो जैसे चूतों के गुलाम थे, फट से उन्होंने राबिया की फुददी से लंड निकाला और ग़ज़ल की कसी हुई फुददी में घुसा दिया।

ग़ज़ल- आआ मर गई रे आह… कितना बड़ा है आह… दूसरी बार गया आह… फिर भी सस्स मेरी आह… आ जान निकाल दी ओफ…

चाचा स्पीड से लंड को अन्दर-बाहर करने लगे। इधर ग़ज़ल भी गांड हिला-हिला कर उनका साथ देने लगी।

चाचा कभी राबिया की फुददी में लंड घुसेड़ते… कभी ग़ज़ल की फुददी में, इस तरह एक अलग ही सीन देखने को मिल रहा था और इस घमसान चुदाई का अंत अब करीब था।

राबिया- आह जोर करो… उफ़फ्फ़ आह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं गई आह… चाचा फास्ट ऊउउ आआ ससस्स और तेज आह…

चाचा ने राबिया को रेल बना दिया और वो झड़ गई। इतने में चाचा ने ग़ज़ल की फुददी में लंड घुसा दिया… वो भी झड़ने के करीब थी। उसके मुँह से अजीब सी आवाजें निकल रही थीं।

ग़ज़ल- उननम उम्म्म आह सस्स आह… चाचा आह मर गई आह… उईईइ उईईइ जोर से क्क्क…करो आह कककक चाचा और आह जोर से।

ग़ज़ल भी निढाल हो गई, उसकी फुददी का झरना भी बह गया मगर चाचा का लावा अभी फूटना बाकी थी। जैसे ही ग़ज़ल ठंडी हुई, चाचा ने राबिया की गांड में जोर से झटका मारा, जिससे वो पेट के बल गिर गई और लंड गांड की जड़ तक फिट हो गया।

राबिया- हाययई चाचा मार दिया आहह उफ़फ्फ़ आह… करो आह… अब गांड की भी आह ठुकाई करो आह ससस्स आह… चाचा आज इसको भी आह… आ अपने पानी से आह… ठंडा कर दो।

चाचा ने पूरी ताक़त लगा दी और कमर को तेज़ी से हिलाने लगे। उनके लंड से वीर्य की बौछार शुरू हो गई और राबिया की जलती गांड को चाचा के रस ने थोड़ा सुकून दे दिया।

अब तूफान थम गया था… सब अपनी अपनी साँसों को काबू में लाने की कोशिश कर रहे थे।

जावेद- चाचा आप तो पूरी रात ऐसे ही इन दोनों को चोदने में मगन रहोगे मगर मेरी अब हिम्मत नहीं है, मैं जाकर सो जाता हूँ।

ग़ज़ल- नहीं देवर जी… आप चले जाओगे तो मैं वापस कैसे आऊंगी और अम्मी जी उठ गईं तो?

चाचा- अरे ग़ज़ल, तेरी सास तो वैसे भी बीमार है। वो अपने बेटे के गम में बेसुध पड़ी रहती है, उसको कहाँ होश कि कौन कहाँ है और तेरा ससुर शराबी… वो भाई के साथ खेतों में ही रात भर काम करता है, दिन में शराब पीकर पड़ा रहता है। तू चिंता मत… बस अपनी फुददी की आग अच्छे से बुझा ले। मैं तुझे छज्जे से उतार दूँगा।

चाचा की बात ग़ज़ल को समझ आ गई थी, वो मान गई और जावेद वहाँ से चला गया।

राबिया- चाचा कल या परसों मुझे भी जाना होगा। वहाँ फवाद को खाने की दिक्कत हो रही है, शाम को अम्मी जी बता रही थीं कि बाहर खा-खा कर वो बीमार हो गया है।

चाचा- अरे तो तू चिंता मत कर… चली जाना… दो दिन में तो मैं तेरी अच्छी तरह चुदाई करके तेरी सारी कमियों को दूर कर दूँगा।

राबिया- बात वो नहीं है चाचा… आपके लंड का स्वाद अब भुलाए नहीं भूल सकती, वहाँ जाकर फवाद तो वैसे ही नाटक करेगा, फिर मेरी प्यास कौन मिटाएगा?

चाचा- अरे मैं हूँ ना… अच्छा सुन कुछ दिनों बाद में किसी बहाने शहर आ जाऊंगा और तेरे पास रहकर तेरी प्यास मिटा दूँगा।

राबिया- ओह… चाचा आप कितने अच्छे हो आई लव यू चाचा उम्म्म्म…

राबिया ने एक लंबा किस चाचा को किया… जिसे देख कर ग़ज़ल सिहर गई, उसके बदन में करंट दौड़ने लगा।

ग़ज़ल- सस्स चाचा सच में आप असली मर्द हो… इस उमर में भी आप दो को संतुष्ट कर रहे हो… ये बहुत बड़ी बात है।

चाचा- अरे बचपन से ही मुझे कसरत करना और खाना-पीना पसंद था मगर ऐसा वैसा खाना नहीं… ताक़त वाली चीजें और सबसे ज़्यादा मैं चना ख़ाता था उसी से ये ताक़त मुझे मिली है।

राबिया- इसी लिए आप का लंड घोड़े जैसा हो गया और ताक़त भी वैसी ही आ गई है।

चाचा- हाँ राबिया रानी ये सब उसी का कमाल है… अच्छा ग़ज़ल एक बात तो बता, जावेद ने तुझे उंगली करते देखा था, तूने तो कभी चुदाई की भी नहीं फिर तेरे अन्दर ये आग कैसे लगी? तू इतनी गर्म कैसे हुई… कहीं पहले क्या तेरे गाँव में किसी ने तुझे कुछ किया था?

चाचा की बात सुनकर ग़ज़ल मुस्कुराने लगी। फिर चाचा ने जोर देकर कहा कि शर्मा मत… जो बात है बता दे।

ग़ज़ल- बचपन में तो ब्याह हो गया था तब कुछ पता नहीं था। जब बड़ी हुई तो सखियों ने अपने चुदाई के किस्से सुनाने शुरू किए, तब शुरू में तो सब गंदा लगता था… मगर धीमे-धीमे अच्छा लगने लगा। मेरी भी फुददी गीली होती मगर मैंने सोचा जल्दी ससुराल जाऊंगी तो सारा मज़ा वहीं ले लूँगी। बस ये सोचकर गाँव में कुछ नहीं किया।

राबिया- यार तेरी कहानी भी मेरी जैसी ही है, शादी के पहले मैंने भी कोई गलत काम नहीं किया था और शादी के बाद शुरू-शुरू में तो बहुत मज़ा आया मगर धीमे-धीमे सब खत्म हो गया। चाचा अगर आप ना मिलते तो पता नहीं मेरा क्या होता।

चाचा- अरे होना क्या था… ये फुददी की खुजली होती ही ऐसी है। अपने आप लंड को ढूंढ लेती है… समझी मेरी प्यारी बहू रानी… चल आजा तुम दोनों को साथ प्यार करता हूँ।

चाचा ने दोनों को बांहों में ले लिया और चूमा-चाटी शुरू हो गई।

फ्रेंड्स बार-बार मैं आपको इनकी चुदाई की कहानी क्या बताऊँ, रात भर चाचा ने दोनों की मस्त चुदाई की। वो तो ग़ज़ल की गांड भी मारना चाहते थे मगर ग़ज़ल ने मना कर दिया कि फिर कभी मार लेना… आज बस फुददी की आग शांत करो।

 
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